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हरामी मौलवी complete

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मौलवी साहब जब अपनी मंज़िल पे पहुँचते हैं तो वो एक छोटा सा मकान टाइप का घर था। उसी वक़्त इशरत ने पूछा-“अब्बू, यहाँ क्या है जो हम आए हैं?”

तो मौलवी ने कहा-“चुप करके मेरे पीछे-पीछे आओ…”

मौलवी साहब जब मकान के पास आए तो उन्होंने मकान का मेनडोर खोला जिसकि उनके पास चाभी थी। वो मकान को खोलकर अंदर आ गये। उनके साथ-साथ में इशरत भी अंदर आ गई। मौलवी ने अंदर आकर बेड से कपड़े साइड में किया। ये मकान मौलवी के एक दोस्त का था जो के कुछ अरसे के लिए कराची अपने परिवार के पास रहने के लिए गया हुआ था। मौलवी ने अच्छी तरह बेड को साफ किया फिर इशरत को कहा कि बैठ जाओ। इशरत काफ़ी कन्फ्यूज थी कि पता नहीं अब्बू मुझे इस मकान में क्यों लेकर आए हैं कुछ समझ में नहीं आता।

मौलवी ने इशरत को सोचते हुये देखा तो कहा-क्या बात है इशरत बड़ी परेशान लग रही हो?

इशरत-नहीं अब्बू, बस ये देख रही हूँ कि आप मुझे यहाँ क्यों लाए हैं?

मौलवी-“बेटी, बातें बता देता हूँ इतनी भी क्या जल्दी है…” और फिर मौलवी साहब ने अपनी कमीज उतारी और लिका दी। अब मौलवी बनियान और शलवार पहने बेड के साथ जो चेयर थी उस पे बैठ गया। और कहा-“अच्छा तो इशरत, जो भी पूछूँ मुझे सच बातें बताना, झूठ मत बोलना। अगर झूठ बोला तो नाराज भी हो जाऊं गा और ये ना हो कि आज तुम पे मेरा हाथ भी उठ जाए…”

इशरत एकदम सुनकर घबरा गई कि पता नहीं क्या बात है। जिसकी वजह से ये सब हो रहा है?

मौलवी-अच्छा ये बताओ कि कल स्कूल के बाद कहाँ गई थी?

इशरत-“कहीं नहीं, बस स्कूल से सीधा घर आ गई। बस एक पीरियड था वो मैंने बच्चो की कापीस के नोट्स देखे फिर घर आई…”

मौलवी-“झूठ मत बोलो, कल तुम एक होटल पे गई थी और तुम्हारे साथ वो आदमी कौन था?”

इशरत परेशान होते हुये और अंजान बन गई, कहा-अब्बूजी, कौन सा आदमी?

मौल्वी-इशरत, मेरे सबर के इम्तिहान मत लो, ये ना हो कि मैं तुम पे हाथ उठाऊं।

इशरत-“अब्बू, अगर मैं सच बोलूं तो आप मुझे कुछ नहीं कहिएगा। अब्बू वो आदमी मुझे चाहता है और शादी करना चाहता है…”

मौलवी ये सुनकर हँस पड़ता है और कहता हैं-“बेटी, वो तो कोई 45 साल का आदमी लग रहा था…”

इशरत-“जी अब्बू, वो एक ज़मींदार है और कारोबार करता है। उसकी बीवी फॉट हो चुकी है उसकी दो बेटियाँ हैं वो पढ़ रही हैं। इसने मुझे स्कूल में देखा तो कहा कि मैं आपसे शादी करना चाहता हूँ…”

मौलवी-“अच्छा तो ये बात है। पर उसके साथ फिर घूमती क्यों हो? कल तुम गाड़ी में उसके साथ होटल में क्यों गई? अगर वो चाहता था तो सीधा मेरे घर आता?”

इशरत-जी, कल मैं दूसरी बार उसका साथ गई थी, लेकिन कुछ बातें की और फिर घर वापिस आ गई।

मौलवी-पहली बार कहाँ मिली?

इशरत-अब्बूजी, इसी होटल पे मिली थी, जूस पिया और घर वापिस आ गई।

मौलवी-तो क्या तुम भी उसे चाहती कि हो जाए शादी।

इशरत नजर नीचे करते हुये-जी अब्बू।

मौलवी-“क्या देख लिया उसमें जो एक उम्रदराज आदमी से शादी करनी है? लेकिन मैंने होटल पे बैठे तुम्हारी बातें सुनी है, उससे ये जाहिर होता है कि तुमने कुछ उसके साथ गलत भी किया है…”

इशरत-नहीं अब्बू, आपकी बेटी ने आज तक कुछ गलत काम नहीं किया मैं बिल्कुल कुँवारी हूँ।

मौलवी-मैं तुम्हारी इसके साथ शादी नहीं कर सकता, चाहे जो मर्ज़ी हो जाए।

इशरत-क्यों अब्बूजी, वो भी मुझे प्यार करता है, मैं भी करती हूँ।

मौलवी-होटल पे बैठकर वो तुम्हें कह रहा था कि मेरा केला कैसा लगा?

इशरत-अब्बू, वो बस मुझे कहता है कि थोड़ा-थोड़ा प्यार में किस होती है, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।

मौलवी-मुझे कैसे पता चलेगा कि तुम कुँवारी हो?

इशरत-मेरी जुबान ही सबसे ज्यादा प्रूफ है।

मौलवी-जुबान से आजकल कोई किसी पे भरोसा नहीं करता।

इशरत-बताइए मैं क्या प्रूफ दूं?

मौलवी-जाहिर है कि चेक करना पड़ेगा कि तुम कुँवारी हो या नहीं?

इशरत-अब्बूजी, आप ये क्या कह रहे हैं? मैं आपकी बेटी हूँ और ये गुनाह है?

मौलवी-बेटी हो तो जाओ भाड़ में, जो मैंने कहा सो कहा। अगर उससे शादी करनी है तो तुम्हें इसी बिस्तर में अपना सब कुछ आज मेरे हवाले करना पड़ेगा।

इशरत रोना शुरू हो गई-“अब्बू, ऐसा मत कहें मैं आपकी बेटी हूँ…”

मौलवी-“अच्छा ठीक है, तुम बेटी हो तो साथ चलो। अब मैं तुम्हारी शादी जिससे मैं चाहूँ उससे करवाउँगा और जाकर बताता हूँ कि कल तुम किसके साथ थी…”

उसके बाद इशरत ने अपने बाप के पाँव पकड़ लिए-“अब्बू ऐसा न करें, अच्छा ठीक है आप जो चाहेंगे वैसा होगा पर ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए शफ़ीक़ की और आपकी…”

मौलवी-शाबाश… ये हुई ने बात। अब अपने कपड़े खुद उतारोगी या मैं उतारू ?

इशरत-अब्बू, मैं उतार लेती हूँ लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा है।

मौलवी-“जल्दी उतारो, ये देखो मेरा लण्ड कैसा खड़ा हो गया है, ये सुनकर कि आज अपनी बेटी की फुद्दी में जाना है इसने…”

इशरत खड़ी होकर अपने जिस्म से कमीज उतारने लग जाती है। कमीज अपनी गर्दन से निकालने के बाद रेड कलर की ब्रा पहनी थी, वो भी उतार दी, इशरत के चुचियों की साइज 36” थी।

ये सब देखकर मौलवी ने कहा-“शलवार भी उतार दो…”

इशरत ने इलास्टिक वाली शलवार पहनी हुई थी, वो उतार दी। जब मौलवी की नजर अपनी सगी बेटी की फुद्दी पे पड़ी तो वो साइज में छोटी सी थी। उसने अपनी शलवार खोली और बिल्कुल नंगा हो गया। जब इशरत ने अपने बाप का खड़ा लण्ड देखा तो इतना मोटा था। उसने दिल में सोचा कि शफ़ीक़ के लण्ड से ये मोटा भी है और लंबा बी। इशरत ने शफ़ीक़ का लण्ड पकड़ा भी है और देखा भी है, लेकिन कभी अपनी फुद्दी में नहीं लिया।

मौलवी इशरत के साथ लेटकर उसके गले मिलता है साथ में गाण्ड के सुराख पे उंगली फेरता है। उफफफफफ्फ़… बेटी, बहुत टाइट है तेरी गाण्ड। कभी इस गाण्ड के सुराख में कोई लण्ड डलवाया की नहीं?

इशरत ने जवाब दिया-“अब्बू कभी नहीं…”

मौलवी ने इशरत की चुचियों को पकड़कर दबाया, कभी एक मम्मे को कभी दूसरे मम्मे को। मौलवी ने निप्पल्स को चूस-चूसकर इतना लाल कर दिया।

फिर इशरत बोल पड़ी-“अब्बू, बहुत अजीब महसूस हो रहा है…”

मौलवी निप्पल को मुँह में लाकर चूसता और नीचे से इशरत की फुद्दी पे अपनी उंगली फेरता है और साथ-साथ अपनी उंगली इशरत की फुद्दी में करता है। लेकिन उंगली थोड़ी सी अंदर गई होगी, मौलवी को उसका रास्ता तंग मिला। अब मौलवी को यकीन हो चुका था कि उसकी बेटी कुँवारी है। निप्पल चूसते हुये मौलवी ने कहा-“बेटी अगर कहती हो तो तुम्हें नहीं करता…”

तो इशरत ने कहा-“अब्बू, आपके नीचे नंगी लेट चुकी हूँ, अब तो आग लगी है मेरी फुद्दी में। आज अपनी बेटी की सील तोड़ दें पर धीरे-धीरे क्योंकी आपका वो लण्ड जो है बहुत मोटा लग रहा है आगे से…”

“बेटी, इसको हाथ में पकड़ कर प्यार करो। देखो तो सही कितना गरम है?”

इशरत ने अपने बाप का लण्ड हाथ में पकड़कर दबाया। अब मौलवी ने अपनी बेटी की टांगे खोली और लण्ड को इशरत की फुद्दी के सुराख पे रखा। थोड़ा से पुश किया तो लण्ड का टोपा उसके अंदर गया तो इशरत ने कहा-“अब्बूजी, धीरे-धीरे ऐसा महसूस हुआ जैसा किसी ने सुई चुभो दी हो…”

वहीं लेटे हुये मौलवी ने इशरत के होंठों को मुँह में ले लिया और अपने लण्ड का टोपा जहाँ था वहाँ एक जोरदार झटका दिया जिससे इशरत की चीख मौलवी के मुँह में रुक गई और फिर मौलवी ने एक और जोरदार झटका दिया तो मौलवी का पूरा का पूरा लण्ड इशरत की फुद्दी में पहुँच चुका था।

बेटी दर्द हो रहा है अभी ठीक हो जाएगा। 5 मिनट रुकने के बाद मौलवी नीचे से अंदर बाहर लण्ड करता रहा और ऊपर से इशरत की निप्पल्स चूसता रहा। थोड़ी देर में इशरत हर झटके का जवाब देती। अब इशरत मजे से अपने बाप के आगे लेटे अपनी फुद्दी चुदवा रही थी, कहा-“अब्बू, बहुत मजा आ रहा है तेज करें…”

जिससे मौलवी और तेज करता है। अब इशरत की टांगे मौलवी के कंधे पे थी और इशरत सिमट कर रह गई थी। मौलवी इतने मजे में था। उसे आज अहसास हो गया था कि बेटियों की फुद्दी में अपना ही मजा है। थोड़ी देर के बाद मौलवी अपनी बेटी इशरत की फुद्दी में फारिग हो गया।

 
फारिग होने के बाद जाकर अपना लण्ड धोया। जब लण्ड धोकर वापिस आया तो इशरत बेडशीट पे देख रही थी जिस पे दो बूँद खून लगा हुआ था।

मौलवी-“बेटी, ये निशानी है तुम्हारी कुाँवारेपन की मुझे तुमने अपने आप दिया उसके लिए शुकिया…”

इशरत-“अब्बू, जब आपका हुकुम होगा ये फुद्दी आपके सामने थाली में पेश कर दूंगी…”

मौलवी-शाबाश… मुझे यही उम्मीद थी।

इशरत-वैसे अम्मी की फुद्दी भी लेते हैं या नहीं?

मौलवी-तुम्हारी अम्मी की फुद्दी का अपना मजा है रोजाना लेता हूँ।

इशरत-वैसे अब्बू, आपका लण्ड है भी बहुत अच्छा।

मौलवी-चलो अभी घर चलते हैं। मैं रास्ते में एक टेबलेट ले देता हूँ वो खा लेना, ताकी कल को कोई मसला न हो…”

उसके बाद दोनों बाप-बेटी उस जगह से निकल जाते हैं और मौलवी ने मेडिकल स्टोर से निकलकर इशरत को टेबलेट लाकर दी और इशरत को घर से थोड़ा पीछे उतार दिया। मौलवी नहीं चाहता था कि दोनों बाप-बेटी घर एक साथ जायें। मौलवी घर आ गया। उसका थोड़ी देर के बाद इशरत भी घर आ गई। उसने चाय पी और चुदाई की वजह से थक चुकी थी तो मजे से नींद की आगोश में चली गई।

***** *****

रात के खाने पे इशरत को उसकी बड़ी बहन ने आकर जगाया कि उठ जाओ खाना खा लो। इशरत उठती है लेकिन उसको महसूस हो जाता है कि आज वाकई ही उसकी सील टूट गई है। उसकी फुद्दी में दर्द थोड़ा थोड़ा हो रहा था लेकिन स्वेलिंग हो चुकी थी। जब इशरत खाने के लिए आई तो एक बार उसने अपने बाप को देखा और मौलवी के साथ उसकी नजर मिली। उसके बाद सबने खाना खाया। खाना खाते हुये मौलवी साहब ने कहा कि रुखसाना बेगम, कुछ याद है कल क्या तारीख है? और कल के दिन किया हुआ था?

रुखसाना सोच में पड़ जाती है। पता नहीं मौलवी साहब क्या कह रहे हैं? आखिर कल क्या हुआ? वो एकदम निदा की तरफ देखती है तो रुखसाना को याद आ जाता है कि कल के दिन उसका बड़ा बेटा पैदा हुआ था और साथ ही रोना शुरू हो गई। निदा उठकर अपनी माँ के पास जाकर रुखसाना को चुप करवाती रही-अम्मी चुप हो जायें, ये हमारी किस्मत ऐसी थी। ये सब किस्मत में लिखा था। काश कि नाना जी भाई को अपने साथ मेले में ना लेकर जाते।

रुखसाना के दो बेटे थे एक बेटा फ़रदीन जो के 6 बहनों के बाद पैदा हुआ और बड़ा बेटा निदा से भी बड़ा था जिसका नाम काशिफ रखा था। जब वो 3-4 साल का था कि काशिफ के नाना और रुखसाना के अब्बू उसको मेले में ले गये मेला दिखाने। वो बच्चा नासमझ था, मेले में वो कहीं आगे पीछे हो गया। काशिफ को बहुत ढूँढा पर आज तक वो न मिल सका।

काशिफ के गुम हो जाने के बाद मौलवी टूट सा गया था फिर रुखसाना ने कहा-“आज काशिफ मेरे पास होता तो वो 34 साल का होता। पता नहीं मेरा बेटा कहाँ हो गया, जिंदा भी है या की?”

सबने खाना खाया। उसके बाद मौलवी के लिए उसके रूम में निदा चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद मौलवी ने रुखसाना को बाहों में प्यार करते हुये कहा-“अब दुखी मत हो, जो हो चुका है सो हो चुका। भूल जाओ काशिफ को, अगर हमारी किस्मत में होगा तो जरूर मिलेगा। मेरा दिल कहता है कि वो हमें जरूर मिलेगा…” उसके बाद मौलवी ने इशरत का बताना शुरू कर दिया।

और धीरे-धीरे रुखसाना की आाँखें खुलती गई और आखिर में रुखसाना बोल ही पड़ी-“मौलवी साहब, अपनी ही बेटी के साथ आपने ऐसा क्यों किया?

मौलवी-बस इसका हल यही था। अब मैं जो करूँगा उसे सबको मानना पड़ेगा, क्योंकी मुझे मेरे एक जान पहचान वाले आदमी ने कहा है कि ऐसे रिश्ते आसानी से हो जायेंगे…” लेकिन मौलवी ने शफ़ीक़ का नहीं बताया कि उसे इशरत के साथ देखा था। काफ़ी देर तक मौलवी उससे बात करता रहा।

रुखसाना-अच्छा, अब मिशा की शादी में 4 दिन रह गये हैं। मैं सोच रही हूँ कल गाँव जाकर शादी के पैगाम दे आउ।

मौलवी-रहने दो, फ़ोन पे कह देते हैं जिसने आना होगा आ जाएगा।

रुखसाना-नहीं पहली शादी है घर में इसलिए खुद जाना बेहतर है।

मौलवी-ठीक है, कल शाम को जो 5 बजे गाँव को बस जाती है उस में बिठा दूँगा रात गुजार कर दूसरे दिन आ जाना।

रुखसाना-अच्छा ठीक है, बेहतर है।

उसके बाद मौलवी सो जाता है। लेकिन रुखसाना सोचती है कि मौलवी साहब कितने शरीफ होते थे। ये बाबाजी ने इन्हें क्या बना दिया है। फिर रुखसाना सोचती है-जब मौलवी साहब ऐसा कुछ कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकती। यही सोचते हुये रुखसाना भी सो जाती है।

दूसरे दिन मौलवी इशरत को कहता है-“बेटी, तुम शफ़ीक़ से कहो कि मैं उससे मिलना चाहता हूँ और उसी होटल का टाइम रख दो…”

इशरत ने शफ़ीक़ को फ़ोन करके बता दिया कि मेरे अब्बू आपसे मिलना चाहते हैं।

तो शफ़ीक़ ने कहा-“वो उस होटल में आ जाएगा…”

फिर मौलवी तैयार होकर उस होटल की तरफ निकल गया जहाँ शफ़ीक़ पहले से बैठा था। मौलवी के साथ इशरत भी आई थी। मौलवी ने बात शुरू की।

 
तो शफ़ीक़ ने कहा-“मैं आपकी बेटी से प्यार करता हूँ और शादी करना चाहता हूँ। लेकिन मैंने एक झूठ बोला था कि मेरी बीवी मर चुकी है पर मेरी बीवी जिंदा है। मेरी दो बेटियाँ हैं। मैं चाहता हूँ कि शादी करूँ ताकी दूसरी बीवी से मेरा बेटा हो सके…”

मौलवी-“दूसरी शादी करना हर इंसान का हक है, आपका भी हक है क्या पहली बीवी राजी है?”

शफ़ीक़-“जी हाँ… राजी है आप मेरी बीवी से मिल भी लें…”

मौलवी-ठीक है मिल लूँगा। मेरी बेटी के नाम कोई घर कर दें, मैं ये रिश्ता मंजूर कर देता हूँ।

शफ़ीक़-ठीक है, जी मुझे मंजूर है। मैं एक घर इशरत के नाम पे कर देता हूँ।

इशरत-लेकिन शफ़ीक़, आपने मुझसे झूठ क्यों कहा कि आपकी बीवी मर चुकी है?

शफ़ीक़-अगर सच कह देता तो तुमने मुझे छोड़ देना था।

मौलवी-मुझे आपकी पहली शादी से कोई ऐतराज नहीं है। दूसरी शादी की वजह कानूनी है कि बेटे के लिए दूसरी शादी करनी है।

शफ़ीक़-ठीक है आप मेरी बीवी से मिल लें, कहें तो अभी चलते हैं…”

उसके बाद मौलवी और इशरत चले गये शफ़ीक़ की बीवी से मिलने। मौलवी संतुष्ट हो गया कि शफ़ीक़ और उसकी बीवी ठीक हैं। मौलवी ने रिश्ता ओके कर दिया। घर आने के बाद मौलवी ने एलान कर दिया कि इशरत का रिश्ता तय हो गया है।

सब ने पूछा कैसा? किस से?

तो मौलवी ने सारी डीटेल बताई जिस पर सब खुश हो गये।

शाम के 5:00 बजे मौलवी अपनी बीवी रुखसाना को बस में बिठाकर घर वापिस आने लगा। शाम हो चुकी थी कि रुखसाना की बस खराब हो गई। ड्राइवर ने चेक किया तो उसने कहा अभी बस ठीक नहीं हो सकती, क्योंकी बस के इंजन ने काम करना छोड़ दिया है, इसलिए आप लोग उतर जायें और अपना-अपना इंतज़ाम कर लें। रुखसाना परेशान हो जाती है। इस टाइम अंधेरे में कहाँ कोई बस मिलेगी। ये बस उसके गाँव जाने के लिए आखिरी टाइम था बस का। इसलिए वो पस़ से अपना मोबाइल निकालने लगी। जब पस़ में देखा के वो अपना मोबाइल जल्दी में घर छोड़ आई है, तब तो रुखसाना परेशान हो गई कि किसको बताए। रुखसना अभी स्टॉप पे खड़ी हो गई।

लोग आ रहे थे और रुखसाना को गंदी नजरों से देख रहे थे, जिसको रुखसाना भाँप गई। फिर रुखसाना ने सोचा कि पैदल चला जाए शायद आगे जाकर कोई तांगा मिल जाए। अभी कुछ आगे चली ही थी कि एक बड़ी गाड़ी आती नजर आई। वो गाड़ी रुखसाना के पास से गुजर गई, कुछ आगे जाकर उस गाड़ी ने ब्रेक लगाई और उस आदमी ने गाड़ी को रिवर्स किया। जब गाड़ी रुखसाना के पास आई और गाड़ी का शीशा जब नीचे हुआ तो एक खूबसूरत जवान लड़के ने कहा-“आंटी, आपने कहाँ जाना है?

तो रुखसाना ने कोई जवाब नहीं दिया। उस टाइम उसका ब्लड-प्रेशर इतना कम था कि बोल नहीं सकी। उस लड़के ने दोबारा पूछा-“आपने कहाँ जाना है?

तो रुखसाना बोल पड़ी-“मुझे आगे गाँव में जाना है…”

तो वो लड़का बोला-“बैठ जायें, मैं आपको वहीं उतार देता हूँ…”

लेकिन रुखसाना डर रही थी। बहुत इसरार के बाद रुखसाना बैठ गई। कुछ आगे जाकर रुखसाना ने कहा-“बेटा, तुम कहाँ के रहने वाले हो?”

उसने बताया कि मैं एक स्पेशलिस्ट सर्जन हूँ और मैं एक अमीर आदमी हूँ, लेकिन डॉक्टर होना मेरा पेशा है।

रुखसाना ने भी अपना बताया फिर रुखसाना ने उसका नाम पूछा तो उस लड़के ने बताया के मेरा नाम काशिफ है डॉक्टर काशिफ।

काशिफ केा नाम सुनकर रुखहाना गुमसुम हो गई और दिल में सोचा कि मेरे बेटे का नाम भी काशिफ है। काशिफ ने बताया कि वो उसी गाँव में जा रहा है, एक काम से। वहाँ उसने दो घंटे रुकना है फिर दोबारा सरगोधा वापिस जाना है।

रुखसाना ने दिल में सोचा ये लड़का शरीफ है, क्यों न इससे कहूँ कि मैंने शादी के कार्ड्स देने हैं और कार्ड्स देकर मुझे भी वापिस लेते जाओ। रुखसाना ने उसे बता दिया कि मैंने वापिस भी जाना है। तो काशिफ ने कहा आंटी आप 11:00 बजे गाँव के स्टॉप पर आ जाना, मैं आपको सरगोधा वापिस शहर में छोड़ दूँगा। उसके बाद रुखसाना गाँव में चली गई और काशिफ जिस काम से आया था, उस काम में लग गया। वो काम शराब पीना था, वो शराब पीता रहा और शराब पीने के बाद 11:00 बजे उसी स्टॉप पर आ गया। पर वहाँ रुखसाना नहीं आई थी तो काशिफ ने सोचा कि वो इंतजार कर लेता है कुछ देर। 20 मिनट के बाद रुखसाना आ गई और गाड़ी में बैठ गई।

 
रुखसाना जब गाड़ी में बैठी तो उसने कहा-“बेटा, जब पहले आई थी उस टाइम कोई गंध नहीं आ रही थी अब गंध आ रही है गाड़ी में। पर काशिफ कुछ न बोला और गाड़ी चलाता रहा। काशिफ फ्रंट मिरर से देखता रहा रुखसाना को और सोचता रहा कि औरत तो प्यारी है। उसने एक जगह देखी और वहाँ जाकर गाड़ी को ब्रेक मारी और गाड़ी से निकलकर चेक किया और फिर उसके बाद रुखसाना को कहा-“इंजन गरम हो गया है, इसलिए कुछ देर इंतजार करना पड़ेगा…”

रुखसाना-ओह्ह… ये तो बहुत बुरा है। यहाँ सुनसान जगह पर कोई जानवर भी आ सकता है।

काशिफ-नहीं आता आप क्यों घबरा रही हैं? मैं हूँ आपके साथ।

रुखसाना-तुम अच्छे लग रहे हो, प्यारे हो, कितनी लकी है तुम्हारी बीवी।

काशिफ-मैं अभी तक कुँवारा हूँ, मैंने अभी शादी नहीं की।

रुखसाना-क्यों?

काशिफ-कोई अच्छी लगी नहीं, आप जैसी कोई मिल जाएगी तो आज ही कर लूँ शादी।

रुखसाना-बेटा, मैं तो शादीशुदा हूँ मुझसे शादी करके क्या मिलेगा?

काशिफ-क्या मैं आपके साथ गाड़ी में बैठ सकता हूँ?

रुखसाना-बेटा तुम्हारी गाड़ी है, तुम बैठ जाओ।

काशिफ बैठ गया और रोमाँटिक बातें करता रहा।

धीरे-धीरे रुखसाना पागल होती गई अपनी खूबसूरती पे। उसके बाद रुखसाना ने कहा-“बेटा, मेरी बेटी की शादी है 3 दिन के बाद आना…”

काशिफ ने कह दिया-“जी जरूर आउन्गा…” उसका बाद काशिफ उठ गया। गाड़ी को चलाया और दो घंटे के बाद रुखसाना को उसका घर छोड़ दिया और शादी में आने के वादा कर लिया।

***** *****

रात को रुखसाना ने अपने शौहर को सारी बातें बता दी कि एक लड़का मिला, बहुत अच्छा था। उसने ऐसे उसकी हेल्प की और उसको छोड़ के गया।

मौलवी खुश हुआ कि चलो इस दुनियाँ में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो कि हेल्प कर सकते हैं। इसी तरह टाइम गुजरता गया और शादी का दिन आ गया। जिस दिन आयशा और नदीम की शादी थी, जब काशिफ इनके घर आया तो कोई भी उसे नहीं जनता था। फ़रदीन ने जब काशिफ को देखा कि ये तो बहुत बड़े हॉस्पिटल का मालिक हैं और हार्ट -सर्जन भी है। ये यहाँ कहाँ आ गये हमारी शादी में।

जब काशिफ अपनी गाड़ी से उतरा उसने कहा के जी मुझे रुखसाना से मिलना है।

फ़रदीन ने कहा-वो मेरी अम्मी हैं…” उसका बाद फ़रदीन रुखसाना को बुलाकर लाया।

रुखसाना के साथ मौलवी भी था। वो काशिफ से मिलकर खुश हुआ। काशिफ ने शादी के लिए एक गोल्ड का छोटा सा सेट रुखसाना को दिया कि ये मेरी तरफ से है। जब रुखसाना ने सेट देखा तो कहा-“बेटा, इसकी क्या जरूरत थी?

काशिफ ने कहा-“ये मेरा अधिकार था लाना…”

उसके बाद मौलवी ने अपनी बेटी का निकाह अपने भतीजे से कर दिया और बारात कुछ देर बाद रुखसत हो गई। बारात और वालिमा कम्बाइन रखा गया था। उसके बाद काशिफ भी चला गया। काशिफ को सहरीश देख चुकी थी, सहरीश जिसकी शादी फ़रदीन से होनी थी। वो काशिफ के हॉस्पिटल में मेडिकल ओफीसर थी काशिफ ने सहरीश को 3 बार चोदा हुआ था। काशिफ को उसने बहुत नखरे दिखाए थे लेकिन फिर भी काशिफ ने सहरीश को नहीं छोड़ा।

रात को मौलवी ने अपनी बीवी से कहा-“लगता है काशिफ काफ़ी अमीर आदमी है। जिस गाड़ी में आया था वो गाड़ी कम से कम 50 लाख की थी और जो सेट लाया है वो भी एक लाख से कम का नहीं…” मौलवी ने फिर अपनी बीवी से कहा-“काशिफ से कहो कि हमें शहर में कोई अच्छा से घर दे दे…”

जिस पर रुखसाना ने कहा-“कोई ऐसे थोड़े ही दे देता है…”

मौलवी-“जब एक लाख वाला सेट दे सकता है तो घर भी दे देगा।

रुखसाना-मुझे नहीं लगता।

मौलवी-एक काम करो, काशिफ को तुम फँसा लो।

रुखसाना-“ये आप क्या कह रहे हैं? अपनी ही बीवी को बोल रहे हैं…”

मौलवी-तो क्या हुआ? किसी को मत बताना सारी जिंदगी शराफ़त से गुजारी है, कुछ कर नहीं सके। वैसे भी आज तक तुमने मेरे अलावा किसी से कुछ प्यार नहीं किया, लेकिन मैंने अपनी ही दो बेटियों को चोद लिया।

रुखसाना-वो तो ठीक है, मगर वो मुझे ऐसा नहीं लगता। मेरा भी दिल करता है कि आपके अलावा एक बार तजुर्बा करूँ किसी से।

मौलवी-तो ठीक है, कर लो। मैं नहीं रोकता, उससे बात करो। क्या उसका कोई फ़ोन नंबर है तुम्हारे पास?

रुखसाना-जी है।

मौलवी-ठीक है, एक दो दिन में करना फ़ोन।

उधर दूसरी तरफ आयशा बेड पे लेटी हुई थी कि नदीम कब आएगा अंदर? पर नहीं आया। जब बहुत इंतजार के बाद आया तो वो नशे में था और आयशा से कुछ बातें करने के बाद सो गया। आज नदीम और आयशा की सुहागरात थी, पर नदीम ने शराब पी ली थी। आयशा अपनी किस्मत पे रोती हुई वहीं सो गई।

***** *****

 


आयशा सुबह उठी, उसके कुछ देर बाद नदीम भी उठ गया। उसको बहुत शर्मिंदगी हुई जो भी उसने लास्ट नाइट किया। नदीम को बहुत गुस्सा आया कि रात को उसका दोस्तों ने कुछ ज्यादा पिला दी थी। नदीम अपने बाप से छुपकर शराब पीता था। सारा दिन इसी तरह गुजर गया। रात को नदीम ने अपना काम आयशा से शुरू किया। किसिंग करने के बाद जब आयशा नंगी हुई तो नदीम ने अपना लण्ड जब आयशा की फुद्दी पर रखा तो झटका दिया ही था की नदीम फारिग हो गया। आयशा को हैरानगी के साथ दुख भी हुआ कि उसकी किस्मत में क्या लिखा है कि नदीम में शायद वो पावर नहीं जो एक मर्द में होनी चाहिए।

दूसरे दिन आयशा घर आई लेकिन उसने अपनी माँ को ऐसा कुछ नहीं बताया। इसी तरह आयशा वापिस अपने सुसराल चली गई। अब आयशा को साबित हो गया था कि हस्तमैथुन की वजह से नदीम के लण्ड में जान नहीं है। इसी वजह से उसका लण्ड ढीला से खड़ा होता है फिर बैठ जाता है। बेचारी अपनी किस्मत को कोषती रही।

रुखसाना ने काशिफ को फ़ोन किया काशिफ के अटेंड करने के बाद रुखसाना ने कहा-“बेटा, मुझे तुमसे एक काम था क्या तुम मुझसे मिल सकते हो? जिस टाइम रुखसाना बात कर रही थी उस टाइम मौलवी पास बैठा था।

काशिफ-हाँ जी जरूर… क्यों नहीं मिल सकता? आप बता दें कब मिलना है?

रुखसाना-बेटा, कहो तो अभी आ जाती हूँ।

काशिफ-ठीक है, मैं ड्राइवर को भेज देता हूँ आप उसका साथ आ जायें।

रुखसाना-ठीक है, और फ़ोन बंद कर दिया। रुखसाना तैयार हो जाती है। एक घंटे के बाद ड्राइवर आ जाता है और रुखसाना को साथ ले जाता है। कुछ देर के बाद रुखसाना काशिफ के बगलो में पहुँच जाती है। जब काशिफ का घर देखती है तो हैरान हो जाती है। इतना बड़ा घर जैसा महल है। काशिफ वहीं आ जाता है और कुछ देर के बाद रुखसाना को कोल्ड-ड्रींक दी जाती है।

काशिफ-जी आंटी कहें, आपको क्या काम है जो मुझे आज आपने मिलने को कहा?

रुखसाना-बेटा, जैसा कि तुम जानते हो कि हम शहर से हट के रहते हैं और बच्चों के अच्छे रिश्ते नहीं आते। मैं चाहती हूँ कि शहर में कोई अच्छा घर हो।

काशिफ-जी बिल्कुल होना चाहिए घर आपका।

रुखसाना-“क्या काशिफ बेटा, इसके अलावा आपका कोई घर है जहाँ हम रह सकें?”

काशिफ रुखसाना को देखता रहा फिर कहता है-“जी बिल्कुल है घर…”

रुखसाना-क्या हमें मिल सकता है कुछ अरसे के लिए जब तक बच्चों के रिश्ते न हो जायें। जब रिश्ते हो जायेंगे तो आपका घर वापिस कर देंगे।

काशिफ-“ठीक है, मैं अपना एक घर आपको दे देता हूँ बेशक आप अपने नाम करवा लें लेकिन…”

रुखसाना-लेकिन क्या बेटा?

काशिफ-लेकिन… ये कि आपको भी कुछ देना पड़ेगा। आप हमें कुछ दें तो मैं आपको घर दे देता हू।

रुखसाना-बेटा मुझ से क्या चाहिए?

काशिफ-आंटी, आपसे क्या चाहना है? बस आपका रास्ता सीधा मेरे बेड पे आ जाए तो आपका हर काम होता जाएगा।

रुखसाना-“ठीक है, मंजूर है। पर ये बात मेरे और तुम्हारे बीच में रहे किसी को न पता चले…”

काशिफ-ठीक है, नहीं पता चलता।

रुखसाना-शुकिया… तो फिर कब मेरे नाम करवा रहे हो?

काशिफ-कल ही करवा दूँगा और मेरा काम कब होगा?

रुखसाना-“जब मेरा काम हो जाएगा उसी दिन तुम्हारा काम भी हो जाएगा…” उसके बाद रुखसाना कल का टाइम फ़िक्स करके अपने घर वापिस आ जाती है और मौलवी को सब बातें बता देती है। इसको सुनकर मौलवी बहुत खुश हो जाता है। फिर वो सपने देखने लग जाता है कि कैसे उसकी बीवी की फुद्दी में लण्ड जाएगा और उसकी बीवी इतनी कीमती निकली की घर मिल रहा है।

*****

आयशा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे? लेकिन मजबूर थी। आयशा ने ये बात अपनी सास को बताई, जो कि उसकी चाची और खाला भी लगती थी।

उसने कहा कि मैं नदीम के अब्बू से बात करूँगी कि वो नदीम का इलाज करायें, आखिर ऐसा क्यों हो रहा है उसका साथ? फिर शुगुफ़्ता आयशा को दिलासा देकर चली जाती है।

मौलवी और रुखसाना तैयार होकर कचहरी चले गये, जहाँ काशिफ ने घर रुखसाना के नाम कर दिया। जब घर रुखसाना के नाम हुआ तो मौलवी वहीं पे इतना खुश हुआ कि उसने काशिफ को थैंक्यू कहा।

उसके बाद काशिफ ने कहा-“थैंक यू को जो कहना है कहीं बैठकर कहते हैं…” काशिफ मौलवी और रुखसाना को अपने साथ अपने बड़े बगलो में ले आया, जहाँ बैठकर बात की जा सके।

काशिफ ने अपने घर पहुँचकर कहा-“मौलवी साहब मुझे आपसे दो काम हैं। पहला काम ये है कि सब आपको पता ही है। आपकी बीवी ने मेरे साथ हर किश्म का रिश्ता रखने के कहा तो मैंने घर उसके नाम कर दिया। लेकिन मेरे आपसे दो काम हैं। पहला काम मैं अभी करूँगा और दूसरा काम उस वक़्त करूँगा जब मैं पहले काम से फारिग हो जाऊं गा…”

काशिफ रुखसाना को लेकर अपने बेडरूम में आकर रूम को अंदर से लाक कर देता है। काशिफ के अंदर आने के बाद काशिफ ने अपनी शर्ट उतार दी और फिर पेंट उतारकर बेड पे आ गया। इस वक़्त काशिफ अडरवेर में बैठा हुआ था। रुखसाना काशिफ के पास गई। काशिफ ने रुखसाना की चादर उतारकर रुखसाना के होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। पहले तो रुखसाना को अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकी रुखसाना पहली बार किसी गैर मर्द के साथ लेटकर ऐसा कर रही थी। लेकिन बाद में रुखसाना को मजा आना शुरू हो गया।

कभी मौलवी ने रुखसाना के साथ ऐसा प्यार नहीं किया था। काशिफ होंठ चूसने के साथ-साथ कमीज के ऊपर से रुखसाना केी चुचियों को दबाता रहा। रुखसाना अब गरम हो चुकी थी, उठकर अपनी कमीज उतार दी। कमीज उतारने के बाद काशिफ की नजर पड़ी तो वो एक ब्लैक ब्रा में बैठी हुई थी। काशिफ ने आगे जाकर ब्रा उतार दी

और रुखसाना की चुचियों को बारी-बारी मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। कभी लेफ्ट मम्मे के निप्पल मुँह में लेता, कभी दायें मम्मे के निप्पल को। काशिफ जोर-जोर से निप्पल को दाँतों से दबाता, जिससे रुखसाना मचल जाती।

काशिफ अब रुखसाना के पेट पे जुबान फेरते हुये धीरे-धीरे नीचे आता गया। जब शलवार के करीब आया तो काशिफ ने रुखसाना का नाड़ा खोल दिया। नाड़ा खोलने के बाद रुखसाना की शलवार उतर गई। काशिफ के सामने रुखसाना की बिल्कुल साफ फुद्दी आ गई और काशिफ ने रुखसाना की फुद्दी को अपनी जुबान से चोदना शुरू कर दिया।

5 मिनट के बाद रुखसाना बोल पड़ी-“ओह्ह… काशिफ बेटा, जोर से करो। आज पहली बार मेरी फुद्दी पे किसी ने ऐसा मजा दिया है…”

काशिफ नीचे से रुखसाना की गाण्ड के सुराख को रगड़ता है और साथ-साथ रुखसाना की फुद्दी को चूमता रहता है।10 मिनट के अंदर रुखसाना की फुद्दी ने पानी छोड़ दिया। फिर काशिफ उठा, उसने अपना अडरवेर जब उतरा तो रुखसाना की नजर काशिफ के लण्ड पर पड़ी-“उफफफफफ्फ़… इतना बड़ा लण्ड भी होता इैईईईई… ये तो मेरी फुद्दी का फुद्दा बना देगा… काशिफ आराम से डालना…”

काशिफ ने टांगे खोलकर रुखसाना की फुद्दी पे लण्ड रखकर एक झटका मारा जिससे काशिफ का आधा लण्ड अंदर चला गया और रुखसाना को दर्द शुरू हो गया। फिर एक और झटका मारा जिससे काशिफ का पूरे का पूरा लण्ड अंदर चला गया। फिर काशिफ कभी अंदर करता लण्ड, कभी बाहर। कुछ देर के बाद काशिफ ने लण्ड को अंदर बाहर शुरू कर दिया। अब काशिफ की स्पीड बढ़ चुकी थी। वो दनादन रुखसाना की फुद्दी को चोदे जा रहा था। साथ-साथ चुचियों को भी चूम रहा था।

रुखसाना अब भरपूर साथ दे रही थी।

“हाय मेरी जान मजा आ रहा है क्यों मौलवी का लण्ड अच्छा है या मेरा?

जिस पर रुखसाना ने कहा-“नहीं मेरी जान, तुम्हारे लण्ड में बहुत ताकत है लेकिन अभी तो चोदो और चोदो… बहुत मजा दे रहे हो। तुमने घर दिया है और अब ये फुद्दी तुम जब चाहो ले सकते हो, लेकिन प्यार से…”

10-15 मिनट तक काशिफ रुखसाना को चोदता रहा उसके बाद काशिफ रुखसाना की फुद्दी में फारिग हो गया। फारिग होने के बाद काशिफ नहाकर बाहर आया फिर रुखसाना ने अपनी फुद्दी को अच्छी तरह साफ किया। उसका बाद काशिफ और रुखसाना बाहर मौलवी के पास आए।

तो काशिफ ने कहा-“मौलवी साहब, एक काम तो कर लिया है। वैसे आपने अच्छा माल घर में रखा हुआ है…”

फिर मौलवी ने कहा-“दूसरा काम बताएँ, क्या करना है?”

काशिफ-जी बात ये है कि मुझे आपकी बेटी का रिश्ता चाहिए अपने लिए।

मौलवी रुखसाना की तरफ देखते हुये-“जी कौन सी बेटी का?”

काशिफ-निदा और मिशा दोनों प्यारी हैं।

मौलवी-निदा तो कहती है कि मैंने कभी शादी नहीं करनी, मिशा से करवा देता हूँ।

काशिफ-जैसा आपकी मर्ज़ी लेकिन ये काम जल्दी होना चाहिए।

मौलवी-ठीक है। मैं रात तक फ़ोन करके बातें बता दूँगा।

उसके बाद मौलवी और रुखसाना अपने घर चले जाते हैं। शाम को वो मिशा से बात करते हैं। वो तो खुश हो जाती है कि एक अमीर इंसान से उसकी शादी हो रही है और ऊपर से काशिफ है भी बहुत हैंडसम। फिर मौलवी ने सबसे बात करके काशिफ को फ़ोन करके बता दिया कि मिशा राजी है और मेरे ख्याल में परसों निकाह करके ले जाओ अपनी अमानत।

काशिफ ने कहा-“ठीक है। परसों असर के बाद का टाइम बेहतर है…”

इसी तरह दो दिन के गुजरने का पता नहीं चला। आयशा भी घर में आई होती है।

काशिफ के साथ कुछ लोग आए और मिशा का निकाह करके अपने बड़े बंगलों में ले गये।

इस तरह दोस्तो मौलवी को शहर में घर भी मिल गया बेटियों की भी शादी हो गई बेटियाँ भी चोदने के लिए मिल गईं

दोस्तो कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएँ

समाप्त

 
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