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हाए मम्मी मेरी लुल्ली..........complete

राहुल को अपने कानो पर विश्वास नही हुआ | वो कभी अपनी मम्मी को तो कभी अपने लोहे के जैसे सख्त लौड़े को देख रहा था |

"मम्मी मगर मेरा........मेरा......मम्मी आप ने कहा था........सुबह ...अगर मैं पढ़ुंगा तो.........आपने प्रॉमिस किया था...." राहुल रुआंसी आवाज़ में बोलता है |

"हाँ वायदा किया था तो........मैं मुकरी हूँ अपने वायदे से...........अभी तुमने मज़ा किया ना........." सलोनी अपनी शर्ट पहनते बोलती है |

"अब कहाँ........अभी तो सिर्फ़ आप.......मैने तो अंदर डाल कर.......मम्मी प्लीज़ करने दो ना..." राहुल हकलाती सी आवाज़ में बोला |

"अभी बिल्कुल भी टाइम नही है बेटा........जल्दी कपड़े पहनो......... बाद में अंदर डाल कर मज़ा ले लेना......मैं मना थोड़े कर रही हूँ........"

"मम्मी प्लीज़........प्लीज़......बस थोड़ा सा....." राहुल मिन्नत कर रहा था |

"कहा ना अभी नही........बाद में.....तू तो ऐसे कर रहा है जैसे मैं बाद में तुझे दूँगी नही.......भूल गया कल रात को.....आज सुबह को.......... तीन बार ले चुका है मेरी ...... बस अब चल खाना खाना है और फिर बाज़ार जाना है........"

राहुल बुझे मन से कपड़े पहनता है जबकि सलोनी किचन में खाना गरम करने लगती है | रहल चुपचाप, निराश, किचन में आकर बैठ जाता है | सलोनी टेबल पर खाना लगाती है और राहुल के सामने वाली कुर्सी पर टेबल के दूसरी तरफ बैठ कर खाना खाने लगती है | राहुल की रही सही उम्मीद भी टूट जाती है | उसे लगा था शायद वो सुबह की तरह किचन में उसके लौड़े पर स्वारी करेगी मगर नही, सलोनी ने ऐसा कुछ भी नही किया | दोनो ने चुपचाप खाना खाया | राहुल की तो जैसे भूख ही मर गयी थी मगर वो अपनी मम्मी को जानता था कि अगर वो नही खाएगा तो उसे शायद बाद में कुछ नही मिलने वाला था | अभी कम से कम उसे इतनी उम्मीद तो थी कि बाद में उसे मौका मिल जाएगा |

"जाओ जाकर नहा धोकर तैयार हो जाओ...शौपिंग के बाद कहीं घूमने चलेंगे" सलोनी खाना खत्म होते ही टेबल से प्लेट्स उठाती राहुल को बोलती है | राहुल जिसका सर खाने के पुरे समय झुका रहा था, वैसे ही सर झुकाए जी मम्मी बोलकर सीढ़ियाँ चढ़ता अपने कमरे की और लौट जाता है | सलोनी प्लेट धोती कुछ गुनगुनाने लगती है | बेटे के चेहरे पर इतनी निराशा देखकर जहाँ एक तरफ़ उसे उस पर, उसकी मासूमियत पर दया आती थी, प्यार आता था, वहीं उसे राहुल को परेशान करने में अत्यधिक मज़ा भी आता था |

राहुल तैयार होकर नीचे अपनी मम्मी डैडी के बेडरूम में आता है | सलोनी अभी बाथरूम में नहा रही थी | राहुल टीवी का स्विच ओंन कर कुछ देर ऐसे ही चैनल चेंज करने लगता है | तभी बाथरूम का दरवाजा खुलता है और सलोनी अपने बदन पर तौलिया लपेटे बाहर आती है |

"हाययययययय................ सेक्सी.....सेक्सी..........क्या बात है.....आज तो बहुत सेक्सी सेक्सी दिख रहा है...... क्या इरादा है जानेमन........." सलोनी राहुल से मज़ाक करती है मगर राहुल का चेहरा लाल हो गया | वो शरमाता सा मुँह दूसरी तरफ फेर लेता है | सलोनी उसके पास आती है और उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम उपर उठाती है |

"हायय.... ईई......मर जायूं तेरी इस कातिल अदा पर..... क्या बात है......... आज तो लगता है मेरी जान ही निकाल लोगे......." सलोनी राहुल को आँख मारती बोलती है |

"मम्मय्ययययययी.........." राहुल का चेहरा और भी सुरख हो गया था | "अगर आप इस तरह से पेश आएँगी तो मैं कहीं नही जा रहा आपके साथ .... कह देता हूँ आपको अभी से...." राहुल अपनी मम्मी के मज़ाक से तंग होकर बोलता है | मगर असल में वो मदहोश सा हो रहा था | सलोनी अभी अभी नहाकर बाथरूम से निकली थी | वो उसके इतने पास खड़ी थी कि राहुल को उसके मादक बदन की सुगंध दीवाना बना रही थी | उसका लंड पेंट में सर उठाने लगा था |

सलोनी बेटे की बात पर हँसती है मगर फिर वो वहाँ से ड्रेसिंग टेबल की और रुख़ करती है | आईने के सामने हेयर ड्रायर से बाल सुखाती सलोनी कुछ देर चुप रहने के पश्चात राहुल की और देखती है और उसे कहती है |

"बेटा ज़रा दराज में से मेरी ब्रा और कच्छी तो निकाल दे, इतनी तो हेल्प करदे अपनी मम्मी की" |

राहुल अपनी मम्मी को घूरता है | उसे लगता है जैसे उसने कुछ ग़लत सुना है |

"मैने कहा दराज़ में से मेरी ब्रा और कच्छी तो निकाल दे" सलोनी हेर ड्रायर बंद करके बोलती है | राहुल ने ठीक सुना था | वो धड़कते दिल के साथ बेड की विपरीत दिशा में पूरी दीवार पर बनी अलमारी की और बढ़ता है |

"राईट साइड से दूसरा डोर खोलो और नीचे से तीसरा दराज़ है" सलोनी राहुल को आईने से देखते बोलती है जो सोच रहा था कौनसा डोर खोले | वो मेकअप कर रही थी | राहुल दराज़ खोलता है | काफ़ी बड़ा दराज़ था और पूरा सलोनी की ब्रा और कच्छीयों से भरा पड़ा था | उनमे से कुछ सस्ती तो कुछ बेहद्द महँगी थी जो उसके पति ने ख़ास ख़ास मौकों पर उसे उपहार के रूप में ख़रीदकर दी थी | अलग अलग डिज़ाइन्स, अलग अलग कलर्स |

"कौनसी मम्मी......." राहुल खुश्क गले से पूछता है | पेंट में उसका लौड़ा तंबू बनने की शुरुआत कर चुका था |

"जो तुझे पसंद है वो निकाल ले" सलोनी की बात सुन राहुल कुछ देर दराज़ में ऐसे ही देखता रहता है फिर धीरे धीरे उसमें से ब्रा और कछियाँ चेक करने लग जाता है | उनका कलर और डिज़ाइन ही अलग अलग नही था, शेप भी अलग थी | कईओं का कपड़ा मोटा था और लगता था वो मुम्मो को कस कर रखती होंगी जबकि कईओं का कपड़ा ऐसा महीन था जिसमें से काफ़ी कुछ दिखाई पड़ता था | एक वाइट कलर की ब्रा पेंटी तो इतनी पतली थी कि उसमें से आर पार सब कुछ देखा जा सकता था और एक ब्रा कच्छी को उसने देखा तो वो दंग रह गया | कच्छी में चूत के स्थान पर एक बड़ा सा कट था | ब्रा में भी निपल्स के स्थान पर छोटे छोटे कट थे | वो एक पल के लिए उसे सेलेक्ट करता है मगर फिर वो शरमिंदा महसूस करता है | वो कैसे अपनी माँ को वैसी ब्रा पहनने को दे सकता है वो क्या कहेगी | उधर आईने से बेटे की उधेड़बुन को देखती और मेकअप करती सलोनी मुस्करा रही थी | आख़िरकार राहुल एक काले रंग की ब्रा और कच्छी निकाल लेता है और दरवाजा बंद करके सलोनी की और बड़ता है | सलोनी हल्का सा मेकअप कर चुकी थी | राहुल अपनी माँ के पास जाकर वो ब्रा पेंटी उसकी और बढ़ा देता है | सलोनी आईने के सामने से उठती है और राहुल के सामने खड़ी हो जाती है | राहूल का चेहरा उत्तेजना से तमतमाया हुआ था |

 
"थैंक यू बेटा" सलोनी आगे बढ़कर राहुल को होंठो पर चूमा लेती है | मगर अगले ही पल उसे झटका सा लगता है | "हाए राम यह क्या!" वो झटके से पीछे हटती है | वो नज़र नीची करके राहुल की पेंट में बने टेंट की और देखती है और ऐसे मुँह बनाती है जैसे उसने दुनिया का आठवां अजूबा देख लिया हो |

"बेशरम कहीं का, यह क्या है, मम्मी की ब्रा कच्छी देखकर इसे फिर से खड़ा कर लिया" सलोनी झूठ मूठ का नाटक सा करती है | राहुल कुछ नही बोलता | अभी भी उसका एक हाथ सलोनी की काली ब्रा कच्छी थामे सामने को फैला हुआ था | सलोनी उसके हाथ से कच्छी और ब्रा लेकर बेड पर फेंक देती है |

"राहुल तू सच में बहुत बेशरम हो गया है", स्लोनी इतना बोलकर अपने जिस्म से तौलिए की गाँठ खोल देती है | गिरते हुए तौलिए को वो पकड़ने की कोई कोशिश नही करती | तौलिया उसके पाँव में गिर जाता है |

"सच कहती हूँ राहुल, तुझे तो रत्ती भर भी शर्म नही है" सलोनी बेटे के सामने पूरी नंगी होकर कमर पर हाथ रखे बोलती है | राहुल कुछ नही बोलता | उसकी ज़ुबान तो बंद हो चुकी थी | उसकी नज़र सामने अपनी मम्मी के मोटे तने हुए मुम्मो पर ज़मी हुई थी, उसके गुलाबी निपल अकड़े हुए थे जैसे चुसवाने के लिए तड़फ रहे हों | उसकी पतली सी कमर और नीचे उसकी चूत और चूत के उपर छोटे छोटे बाल जो तिकोने आकार में कटे हुए थे | राहुल की नज़र अपनी मम्मी के मुम्मो से उसकी चूत पर उपर नीचे होने लगती है | कभी मुम्मो और और कभी चूत को देखता जब वो काफ़ी समय बाद अपनी नज़र उपर करता है तो सलोनी को अपनी और घूरते हुए देखता है | सलोनी कमर पर हाथ रखे अपने बेटे की आँखो में देखती सर हिलाती है |

"हे भगवान..... क्या होगा इसका......... क्या करू मैं ....... जब देखो अपना लौड़ा खड़ा कर लेता है........ ना कोई जगह देखता है ना कोई मौका", सलोनी राहुल की पेंट में उभार को देखते बोलती है | जिसके अंदर राहुल के लंड ने तूफान खड़ा किया हुआ था | राहुल का चेहरा शर्म और उत्तेजना से तपा हुआ था | सलोनी बेड से ब्रा उठाती है और राहुल की और देखते उसे बाहों में डालती है और फिर कप्स को अपने मुम्मो पर रखकर राहुल की और पीठ करके खड़ी हो जाती है |

राहुल इशारा समझ अपने काँपते हाथों से उसकी पीठ पर उसकी ब्रा के हुक लगाता है | उसे दोनो हुक लगाने में कई कई बार कोशिश करनी पडती है | उसके काँपते हाथ उसके लिए मुश्किल का सबब बने हुए थे | ब्रा की हुक लगने के बाद स्लोनी फिर से राहुल की और मुँह कर लेती है और उसके सामने अपने मुम्मो के उपर ब्रा के कप्स को खींच खींच कर सेट करने लग जाती है | सलोनी को कम से कम पाँच मिनिट लगते है अपने मुम्मो पर अपनी ब्रा को सेट करने में और इस कोशिश में वो कई बार अपने मुम्मो को कप से बाहर निकाल लेती थी, कभी उन्हे दबाती थी, कभी ब्रा के उपर से अपने निप्पल को खींचती थी | आख़िरकार उसकी ब्रा उसके मुम्मो को उसकी पसंद के अनुसार ढँकने में कामयाब हो गयी थी |

"हूँ अब ठीक है.......अब ठीक है ना राहुल बेटा......" सलोनी अपने मुम्मो पर ब्रा के उपर से हाथ फेरते हुए बोली |

"आ..... ह.....हन...हन मम्मी अब ठीक है" सलोनी के पुकारने पर राहुल जैसे नींद से जगा | उसका पूरा ध्यान अपनी मम्मी पर था | उसकी नज़र सलोनी को ब्रा में मुम्मे ठीक करने की एक एक हरकत को गौर से देख रही थी | जिस तरह वो बार बार कप से मुम्मे बाहर निकाल लेती थी और उन्हे दबाती थी जा फिर अपने निप्पल को खींची थी | राहुल बार बार अपने होंठों पर जीभ फेर रहा था | उसके होंठ उसकी जिभ उन अमृत के प्यालों को पीने के लिए तरस रहे थे | सलोनी बेड से कच्छी उठाती है और उसे राहुल को देती है | राहुल उसे कंपकँपाते हाथों से पकड़ अपनी मम्मी की और देखता है |

"चलो अब पहना भी दो कि ऐसे ही देखते रहोगे ... तुम्हारे इस देखने के चक्कर में पहले ही बहुत लेट हो चुके हैं" | राहुल अपनी मम्मी के सामने घुटनो के बल बैठ जाता है | सलोनी थोड़ा सा झुक कर राहुल के कंधे पर हाथ रखकर एक टांग उपर उठाती है | राहुल कच्छी के एक हिस्से में उसका पाँव डालता है | पाँव उठाने के कारण सामने उसे अपनी आँखो के बिल्कुल पास अपनी मम्मी की सुगंधित चूत पूरी तरह दिखाई दे रही थी | सलोनी दूसरा पाँव उठाती है | राहुल वो पाँव भी पकड़ कर कच्छी में डालता है मगर उसकी नज़र अपनी मम्मी की चूत पर ज़मी हुई थी | सलोनी वापस सीधी हो जाती है मगर इस बार वो अपनी टाँगे थोड़ी सी चौड़ी कर लेती है | टाँगे खुलने से चूत हल्की सी खुल गयी थी और अंदर से हल्का सा गुलाबीपन झाँक रहा था | राहुल कच्छी को उपर चढ़ाता है | कच्छी उसकी जाँघों पर टाइट होने लगती है | गहरी साँस लेता राहुल कच्छी को उपर करता जाता है | धीरे धीरे कच्छी उसकी चूत को ढक देती है | राहुल एलास्टिक को थोड़ा सा उपर को ज़्यादा चढ़ा देता है इससे सलोनी जब वापस टाँगे बंद करती है तो सामने से उसकी चूत के होंटो की दरार में कच्छी का हल्का सा सिरा घुसा हुआ था |

"इसे सही तो करो, देखो ना मेरी चूत में घुसी पड़ी है" सलोनी बड़े ही नखरीले स्वर में बोलती है | राहुल का काँपता हुआ हाथ नीचे आता है और वो उसकी चूत पर हाथ रखकर कपड़े को पकड़ने की कोशिश करता है मगर इस कोशिश में कपड़े के साथ साथ उसकी चूत का मोटा होंठ भी उसके अंगूठे और उंगली में समा जाता है | सलोनी अपने होंठ भींचकर अपनी सिसकी रोकती है | राहुल होंठ को मसलता हुआ धीरे से कपड़ा पकड़ लेता है और उसे खींच कर दरार से निकाल देता है | मगर इसके बाद भी उसकी चूत को कच्छी के उपर से दो तीन बार सहला देता है जो टाइट काली कच्छी से झाँक रही थी | वो उपर को अपनी मम्मी की और देखता है जो होंठ भींचे खुद को सिसकने से रोक रही थी | सलोनी राहुल को देखती है जो उसकी और देखता हुआ जैसे पूछ रहा था "अब क्या" |

 
सलोनी बिना कोई ज्वाब दिए घूम जाती है | "इधर भी देखो ना.... अच्छी तरह से ठीक कर दो नही तो मुझे बैठने उठने में बहुत असूबिधा होगी" स्लोनी फिर से नखरा करते हुए बोलती है |

राहुल की नज़र जब सलोनी के नितंबो पर जाती है ओह 'उफफफफफफफ्फ़' उसका लौड़ा और भी ज़ोर से झटके मारने लग जाता है | सलोनी की कच्छी बहुत टाइट थी | इतनी टाइट कि उसके दोनो नितंबो पर चमड़ी की तरह चिपकी हुई थी | उसके दोनो नितंब उनकी गोलाई, मोटाई सब कुछ सामने से नज़र आ रहा था | कच्छी पर कोई बल कोई सिलवट नही थी मगर राहुल इस मौके को हाथ से कैसे जाने देता | वो सलोनी के दोनो नितंबो पर अपने हाथ रख उन्हे बड़े प्यार से सहलाता है | वो कच्छी को ठीक करने के बहाने सलोनी के नितंबो को मसलता है उसकी गांड की गहराई में अपना हाथ घुसाता है |

"देखना एकदम सही हो जाए.... अच्छे से करना बेटा......" सलोनी मादक स्वर में धीमे से बोलती है |

राहुल को भी कोई जल्दबाजी नही थी | वो भी कच्छी की सिलवटे निकालने के बहाने उसके नितंबो को अपने अंगूठे और उंलगी में भर मसलता | कई बार सलोनी 'सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईई' की आवाज़ के साथ तीखी सिसकी लेती | आख़िरकार राहुल अपनी मम्मी की गांड को सहलाते उसकी मादक खुशबू लेते रुक गया | उसे डर था कहीं इतना ज़्यादा समय लगाने पर सलोनी उसे फिर से छेड़ने ना लगे |

"हुं अब ठीक है" सलोनी अपने बेटे के सामने घूमती है | वो फिर से आईने के सामने जाकर अपना शिंगार पूरा करने लग जाती है | आईने में से राहुल को देखती जो अपना लौड़ा मसल रहा था वो मुस्करा रही थी |

"अब मैं कपड़े कोन से पहनू? साड़ी जा फिर चूड़ीदार?" सलोनी मेकअप के बाद सीट से उठती राहुल से पूछती है |

"जो आपको अच्छा लगे पहन लीजिए" राहुल को समझ नही आया वो क्या कहे |

"तो तुम्हारी कोई पसंद नही है? अपनी मम्मी की इतनी सी भी हेल्प नही कर सकते?" सलोनी झूठ मूठ की नाराज़गी जाहिर करती है |

"अब म्‍म्मी मैं क्या कहूँ......आप साड़ी पहन लीजिए"

"हुं साड़ी ठीक है... मगर बेटा सब्ज़ी मंडी जाना है बहुत भीड़ और गर्मी होगी, साड़ी में कैसे जाऊँगी?" सलोनी राहुल की पेंट में बने टेंट को देखते पूछती है |

"तो फिर चूड़ीदार पहन लीजिए.......अगर आपको गर्मी का डर है तो.......आप कुर्ता डाल लीजिए"

"हाँ ....... बिल्कुल ठीक कहा तुमने कुर्ता डाल लेती हूँ.... गर्मी में आराम रहेगा और अंदर हवा भी लगती रहेगी ..... अब तुमने इतनी टाइट ब्रा और कच्छी पहना दी है और कुछ डालूंगी तो गर्मी से मर ही जायूंगी" सलोनी कुर्ता और उसके साथ एक जीन्स निकालती है | उन्हे बेड पर फेंक वो अपनी बाहें सामने को फैला देती है | राहुल कुछ समझ नही पाता |

"अरे बुद्धू अब क्या हर बार बोलकर समझना पड़ेगा ........ पहनायो" सलोनी तीखे स्वर में बोलती है तो राहुल फटाफट उसका कुर्ता उठाकर उसे पहनाने लगता है |

आख़िरकार राहुल की इतनी मेहनत के बाद सलोनी अब कपड़े पहन ही चुकी थी | वो एक बार फिर से खुद को आईने में देखती है अपने बाल संवारती है और मेकअप ठीक करती है | फिर वो अपना पर्स उठाती है और टेबल से कार की कीज़ लेती है |

"हुं...... कैसी लग रही हूँ" सलोनी राहुल के सामने जाकर खड़ी हो जाती है |

"बहुत खूबसूरत ...... मम्मी आप सच में बहुत सुंदर हो" | राहुल मन्त्रमुग्ध सा बोलता है |

"खूबसूरत..... सुंदर ......... यह क्या तारीफ हुई भला.......... जैसे कोई बाप अपनी बेटी को बोलता है.... अरे थोड़ा सा खुलकर बता ना ....... कैसे लग रही हूँ?" सलोनी का स्वर इतना उत्तेजित और मादक था कि राहुल का लौड़ा पेंट फाड़ने पर तूल गया |

"जबरदस्त........आप बहुत......बहुत...........बहुत......अच्छी दिख रही हो....मुझे नही मालूम मम्मी" राहुल वहाँ से हटने की कोशिश करता है | मगर सलोनी उसके कंधो पर हाथ रखके उसे वहीं रोक लेती है |

"अरे बेवकूफ़ अगर तुझसे तेरी गर्लफ्रेंड पूछेगी तो ऐसा बोलेगा क्या ..... क्या बोलेगा तू! बहुत सुंदर हो! बहुत खूबसूरत हो! बहुत अच्छी दिखती हो! ....... वो यकीन ही नही करेगी और शायद उसे इन शब्दो की समझ ही नही लगेगी"

"मुझे नही मालूम क्या बोलना है .... मेरी कौनसी कोई गर्लफ्रेंड है?" राहुल खीझता हुआ बोलता है |

"इसीलिए तो तुझे बता रही हूँ......... अगर तुझसे तेरी गर्लफ्रेंड पूछेगी तो नही बोलेगा कि वो बहुत सेक्सी दिखती है ........ ऐसा कुछ नही बोलेगा?" राहुल हूँ में सर हिलाता है | "हुं ........ आजकल लड़कियों से औरतें सब तारीफ में यही सुनना चाहती हैं .... अब बोल क्या बोलेगा" सलोनी उसके कंधो को अपने हाथो में दबाकर बोलती है |

"मम्मी आप बहुत सेक्सी दिखती हो" राहुल धीमे से कहकर सर झुका लेता है | सलोनी ज़ोरों से हँसने लग जाती है | वो उसके कंधो से हाथ हटाकर अपना मुँह ढक लेती है | उसका पूरा बदन कांप रहा था | वो बेड पर बैठ जाती है | वो कई बार हँसी रोकती है मगर फिर से हँसने लगती है | राहुल को समझ नही आ रहा था वो क्या करे, आख़िर उसकी मम्मी उससे चाहती क्या थी | वो कुछ शर्मिंदा सा खड़ा था |

आख़िरकार सलोनी की हँसी बंद होती है और वो फिर से राहुल के सामने खड़ी हो जाती है | उसके झुके सर को अपने हाथ से उपर उठाती है | राहुल अपनी मम्मी की और देख रहा था | अभी भी सलोनी के चेहरे पर हँसी थी | उसका चेहरा हँसी से कुछ लाल हो गया था और आँखो में कुछ पानी आ गया था | एक तरफ़ तो राहुल कुछ खीझा हुआ था वहीं अपनी मम्मी के हंसते चेहरे को देख वो अंदर से मुस्करा उठा | कितनी सुंदर है वो, किसी परी की तरह वो सोच रहा था और हँसते हुए तो एकदम किसी मलिका के जैसे लगती थी |

 
“अरे भोले बुद्धू ..... वो तो मैने तुझे बताया था.....तुझे अपने पास से कुछ बोलना है......कैसे हो तुम राहुल मेरी थोड़ी सी तारीफ भी नही कर सकते ......... कल को लड़कियाँ कैसे पटाओगे ........... चलो अब बोलो जल्दी से, देखो कितनी देर हो गयी है ........... जल्दी करो" सलोनी राहुल को उकसाती है | राहुल सोच में पड़ जाता है | वो सोचने लगता है मगर उस समय उसके दिमाग़ में कुछ भी नही आ रहा था | वो याद करने की कोशिश करता है कि उसके फ्रेंड्स लड़कियों के बारे में कैसे बोलते हैं मगर फिर भी वो कोई ऐसा लफ्ज़ सोच नही पा रहा था |

"ओफफफफफफफह ..... राहुल इतना टाइम........जल्दी करो ना........” सलोनी उसकी मुश्किलों को और बढ़ा रही थी | राहुल की नज़र अचानक अपनी मम्मी के मुम्मो पर जाती है और नाज़ाने क्यों अचानक उसे अपनी मौसी पायल का ध्यान आ जाता है | उसके मुम्मे भी सलोनी की ही तरह मोटे मोटे थे | 'साली वो भी पूरी पटाखा है' राहुल अपनी मौसी को याद करता है | 'पटाखा ... पटाखा' अचानक राहुल का चेहरा खिल उठता है |

"मम्मी आप तो पूरी पटाखा लग रही हो" राहुल जोश में बोल जाता है | उसे लगा शायद उसने अपनी मम्मी की शर्त पूरी कर दी है | सलोनी एक पल के लिए आँखे गोल करती है फिर उसके होंठ काँपते हैं | राहुल घबरा जाता है | लगता था वो फिर से हँसने वाली है | मगर इस बार सलोनी हँसती नही |

"हुं ..... यह हुई ना बात......पटाखा ....... बात पूरी बनी नही ........... मगर चलेगा ......... तूने कुछ बोला तो सही वरना मुझे तो लगने लगा था कि आज रात तक तेरे कुछ बोलने का इंतज़ार करना पड़ेगा ............ वैसे भी तेरी पेंट का तंबू देखकर लगता तो ऐसा ही है कि मैं सचमुच में पटाखा लग रही हूँ" सलोनी राहुल की पेंट का उभार गौर से देखते हुए बोलती है | फिर वो अपनी आँखे राहुल की आँखो में डाल देती है |

"चलें मम्मी ........... देर ..... देर हो रही है" राहुल थूक गटकता है |

सलोनी आगे बढ़ती है | अब उसके और राहुल के बीच एक फीट से भी कम का फासला था | वो अपनी बाहें राहुल के गले में डाल देती है मगर उन्हे मोड़ती नही है बल्कि उसके गले में बाहें डाल वो उन्हे पीछे को फैला अपने हाथ बाँध लेती है |

"मर्ज़ी है तुम्हारी ............. "सलोनी इठलाते हुए नखरा दिखाते हुए मादक स्वर में बोलती है |

"क्या मतलब ..... मम्मी ...." राहुल फिर से थूक गटकता है |

"मैने सोचा शायद तुम्हारा दिल ..... कुछ और करने का है तो ....... " सलोनी आवाज़ में मादकता भरते हुए चूदने को तत्पर किसी उत्तेजित नारी की तरह सिसकते स्वर में बोलती है | राहुल की धड़कने बढ़ जाती हैं | उसे अचानक से आस की किरण दिखाई देती है | उसे लगता है जैसे उसका काम बन जाएगा | उसका लौड़ा खुशी में ज़ोरदार झटका ख़ाता है |

"नही ......... सच में देर हो रही है ................... उफ़फ्फ़ देख तो कितना टाइम हो गया है......चल जल्दी से" सलोनी चाभी और पारस लेकर दरवाजे की और बढ़ती है. राहुल के सारे सपने फिर से चकनाचूर हो गये थे | दोपहर से दो बार ऐसा हो चुका था कि उसे आस बँधी हो और वो टूट गयी हो |

"साली........." राहुल अपने मन में अपनी भड़ास निकालता दरवाजे की और बढ़ता है |

 
राहुल कार में साइड सीट पर बैठा बाहर की और घूर रहा था जबकि सलोनी कार चला रही थी | सलोनी के होंठो पर हल्की सी मुस्कान बनी हुई थी और वो ड्राइव करती बार बार राहुल की और देख रही थी |

"नाराज़ हो?" सलोनी के पूछने पर राहुल कोई ज्वाब नही देता |

"इतनी नाराज़गी कि बात भी नही करोगे अपनी मम्मी से?" जब राहुल कोई ज्वाब नही देता तो सलोनी उसे फिर से बुलाती है मगर राहुल पहले की तरह बाहर देखता रहता है और अपनी मम्मी को कोई ज्वाब नही देता | सलोनी के होंठो की मुस्कराहट और भी बढ़ जाती है |

"अच्छा बताओ तुम्हे क्या चाहिए? किस चीज़ से तुम्हारी नाराज़गी दूर होगी?" सलोनी बेटे को मनाने का प्रयास करती बोलती है |

"मुझे कुछ नही चाहिए और ना ही मैं नाराज़ हूँ ... आपको जो चाहिए था वो आपको मिल गया, आप खुश हैं ना बस........... आप मेरी चिंता मत कीजिए" राहुल गुस्से से तीखे स्वर में ज्वाब देता है |

"ओह तो यह बात है........तो तुम सोचते हो कि मुझे जो चाहिए था वो मुझे मिल गया इसीलिए मैं खुश हूँ और जो तुम्हे चाहिए था वो तुम्हे नही मिला और शायद इसीलिए तुम नाराज़ हो? है ना?" सलोनी एक हाथ से आराम से ड्राइव करती राहुल की जाँघ को सहला रही थी |

"नही आप ग़लत सोचती हैं, मैने आपसे कहा ना मुझे आपसे कुछ नही चाहिए और ना ही मैं आपसे नाराज़ हूँ" इस बार राहुल का स्वर और भी तीखा था |

"मैं अच्छी तरह से जानती हूँ तुम क्यों नाराज़ हो, मगर तुमने कौनसा कहा था कि तुम मेरी लेना चाहते हो? तुमने कहा एक बार भी? नही कहा.... मैने सोचा जितना मज़ा मुझे आया होगा तुम्हारे चाटने से उतना ही तुम्हे भी आया होगा इसीलिए मैने सोचा कि बाकी का मज़ा अब रात को कर लेंगे.... अगर मुझे मालूम होता कि तुम इस तरह नाराज़ हो जाओगे तो मैं तुम्हे देती ना!......पहले भी तो दी है ना.........तुमने मारी है ना मेरी......." सलोनी का हाथ राहुल की जाँघ पर उसके लौड़े की तरफ धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था |

"अच्छा अब मान भी जाओ ......." सलोनी के स्वर में मादकता भरती जा रही थी | "घर चल कर खूब मज़े से दूँगी........टाँगे उठाकर........उउउंम्म चाहो तो अपनी टाँगे तुम्हारे कंधे पर रखकर दूँगी........." सलोनी बात नही कर रही थी बल्कि बड़े ही मादक और कामुक स्वर में फुसफुसा रही थी और उसके हाथ की उंगलियाँ बार बार लंड से टकरा रही थी | राहुल चाहे अपनी मम्मी से बहुत नाराज़ था मगर उसकी अशलील भड़कायु बातों और हरकतों के कारण अपने तेज़ी से सखत हो रहे लौड़े को नही रोक सकता था | उसकी पेंट में टेंट बनाना शुरू हो चुका था |

"और अगर चाहो तो........तो मुझे घोड़ी बना लेना....... आज रात अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर फिर मेरी ...... मेरी.......... हाइईए ..... पीछे से ......... पीछे से......." सलोनी राहुल के लंड को पेंट के उपर से मुठ्ठी में भर कर उसे मसलते हुए बोलती है | अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए जितनी कामुक आवाज़ में वो बोल रही थी उससे कहीं ज़्यादा कामुक उसके चेहरे के भाव थे | राहुल के दिल की धड़कने बढ़ चुकी थी | उसकी साँसे उखड़ी हुई थी | पेंट में उसका लौड़ा पूरा तन कर झटके खा रहा था |

"पीछे से......पीछे से क्या मम्मी?" राहुल बिल्कुल धीमे से स्वर में बोलता है | वो भूल भी चुका था कि वो अपनी मम्मी से नाराज़ भी था |

"पीछे से....पीछे से......वो तू अपना मेरी मेरी उसमे......डाल कर.....और फिर......हाए अंदर-बाहर.....अंदर-बाहर.....ज़ोर से.......कस्स कस्स कर.....हाए मैं नही बोल सकती मुझे शरम आती है" सलोनी सचमुच ऐसे शरमाती है जैसे उसे बहुत शरम आ रही हो | उसका हाथ अभी भी राहुल के लंड को मसल रहा था |

"बताओ ना मम्मी......प्लीज़ मम्मी बताओ ना......" राहुल फुसफुसा कर बोलता है | उसके कान अपनी माँ के मुँह से वो अल्फ़ाज़ सुनने को तरस रहे थे |

"वो......वो....तू अपना अपना वो.....मेरी....मेरी इसमें डाल कर......हुमच हुमच कर.....हाए जब कस कस कर............अंदर बाहर.....अंदर बाहर........" अचानक सलोनी राहुल के लंड से हाथ हटा लेती है
| वो सब्ज़ी मंड़ी के पास पहुँच गये थे |
 
सड़क पर रश बढ़ता जा रहा था | "तुम अच्छे से सीधे होकर बैठो.... हम लोग अब मंडी में हैं" सलोनी राहुल को सीधे होकर बैठने के लिए कहती है और खुद भी सीधी होकर सामने देखती ध्यान से गाड़ी चलाने लगती है |

"माद्रचोद ......अपनी साली किस्मत ही खराब है" राहुल अपनी किस्मत को कोसता है | कार मंडी के सामने पहुँच चुकी थी और सलोनी उसे बिल्कुल कम स्पीड पर चलाती किसी सेफ पार्किंग को तलाश रही थी | कार पार्क करने के पशचात सलोनी अपना पर्स बाहर निकालती है और अपना दुपट्टा कार में ही छोड़ देती है | राहुल भी अपनी मम्मी के पीछे निकल पड़ता है | वो जैसे ही सलोनी के पीछे जाने लगता है, सलोनी उसे रोक देती है और उसे कार की कीस देती कहती है,

"इस तरह जाओगे मंडी में, हालत देखी है अपनी" राहुल अपनी मम्मी की बात समझ नही पाता और उसे स्वालिया नज़रों से देखता है | "अपनी पेंट में बने तंबू को तो देखो ....... लोग हँसेंगे तुम पर" राहुल मायूस सा होकर अपनी मम्मी के हाथ से चाभी ले लेता है और कार की तरफ मुड़ जाता है | वो खुद जानता था इस हालत में वो मंडी नही जा सकता |

"अब यह चेहरा मत लटकाओ .... जब यह शैतान बैठ जायेगा तो आ जाना" सलोनी की बात से राहुल को थोड़ी हिम्मत बंधती है | असल में सलोनी के दुपट्टा ना पहनने से वो थोड़ा सा परेशान हो उठा था | हालांकि सलोनी ने दुपट्टा नही पहना था और उसका कुर्ता भी थोड़ा ढीला सा था मगर सलोनी के मुम्मे इतने मोटे और तने हुए थे कि कुर्ते में से उनका रूप छलक रहा था | उसकी गोरी रंगत शाम की हल्की धूप में चमक रही थी और उपर से उसने बाल भी खुले रख छोड़े थे |

राहुल का परेशान होना बिल्कुल वाजिब था | जिसकी भी नज़र सलोनी पर पडती वो पहले उसके चेहरे और फिर उसके सिने को घूर कर देखता | सलोनी अपनी और घूरती निगाहों से बाखूवी वाकिफ़ थी, उसे इन निगाहों की कॉलेज के दिनों से आदत थी | वो एक एक दुकान पर जाकर सब्जियाँ खरीदने लगी | दुकान वाले सलोनी के रूप पर मोहित उसकी कामुक काया को अपनी आँखो से नंगी करके चोद रहे थे | जब भी वो झुकती उसकी गांड पर उसका कुर्ता उँचा हो जाता और टाइट जीन्स से छलक कर बाहर आने को बेताब उसके गोल मटोल नितंब देख लोगो की साँस रुक जाती | ऊपर से उसके दमकते चेहरे पर उसकी नाक की बाली उसकी देह की कामुकता को कई गुना बढ़ा रही थी | सलोनी के पास आठ दस बैग भर चुके थे, तभी उसे राहुल अपनी और आता दिखाई दिया | वो अपनी मम्मी पर पड़नी वाली नज़रों को देख रहा था | सलोनी अपने पर्स से पैसे निकाल रही थी और दुकान वाला उसे घूर रहा था | जब राहुल सलोनी के पास आ गया तो पहले तो दुकान वाले ने उसकी और कोई ध्यान नही दिया मगर जब सलोनी ने राहुल को "आ गये बेटा" कहकर बोला तो दुकान वाले ने उसकी और देखा | राहुल के गुस्से से जलती लाल आँखे देख कर दुकान वाले ने तुरन्त अपनी नज़रें फेर ली और फिर दोबारा सलोनी को घूर कर नही देखा | वो राहुल की आँखो से बरसते अंगारों से बाखूबी अंदाज़ा लगा सकता था कि वो छोकरा उसे क्यों घूर रहा था |

"राहुल तू जा, यह बैग गाड़ी में रख और मैं आती हूँ.... बस एक बैंगन रह गये हैं ... इधर नही मिले... किसी दूसरी दुकान पर देखती हूँ" सलोनी राहुल के हाथों में बैग थमाती बोलती है |

"नही मम्मी, आप बैंगन खरीद लीजिए, हम इकट्ठे चलते हैं" राहुल अपनी मम्मी को उन भूखे भेड़ियों के बीच छोड़ कर नही जाना चाहता था |

"अरे तो क्या इतना भार उठाए मेरे साथ घूमता रहेगा ... तू जा इसे गाड़ी में रख .... मैं अभी आती हूँ"

"रहने दीजिए मम्मी, छोड़िए बैंगन लेने को.... मुझे वैसे भी बैंगन की सब्ज़ी पसंद नही है" राहुल अपनी मम्मी को वहाँ हरगिज़ भी अकेला नही छोड़ना चाहता था |

"मगर मुझे बहुत पसंद है ...... और अब कोई स्वाल ज्वाब नही ........ अभी समान गाड़ी की डिक्की में रखो मैं आती हूँ" सलोनी राहुल को हुक्म देती है | राहुल के पास अब अपनी मम्मी की बात मानने के सिवा कोई और चारा नही था | वो तेज़ तेज़ कदमो से गाड़ी की और बढ़ता है जो कुछ दूरी पर खड़ी थी | राहुल गाड़ी की और जाता पीछे मुड़ मुड़ कर सलोनी की और देख रहा था | सलोनी कुछ देर एक जगह खड़ी दुकानों का जायजा लेती है और फिर उसे एक कोने में एक दुकान दिखाई देती है जो और दुकानों से थोड़ा सा हटकर थी | सलोनी उस दुकान की और बढ़ जाती है |

राहुल जब पीछे मुड़कर अपनी मम्मी को एक तरफ़ बढ़ते हुए देखता है तो वो चलना छोड़ भागना शुरू कर देता है | सब्जियों के बैग बहुत पतली प्लास्टिक के बने हुए थे जो उसके भागने और ज़्यादा वजन के कारण कभी भी फट सकते थे और सब्जियाँ बिखर सकती थी मगर इस बार राहुल की किस्मत ने उसे धोखा नही दिया और वो गाड़ी तक बिना कुछ गिराए पहुँच गया | राहुल कार की डिक्की खोल कर उसमें तेज़ी से सब्जियाँ डालने लगता है |

उधर सलोनी उस दुकान पर जाती है जो थोड़ा सा हट कर थी और उस पर कोई और ग्राहक भी नही था | दुकानदार कोई 40-45 साल का हट्टा कट्टा मर्द था | सलोनी को अपनी दुकान की और बढ़ता देख वो उठ कर खड़ा हो जाता है और सलोनी को आवाज़ देने लगता है |

"आइए बहनजी .... आइए.... बिल्कुल ताज़ी सब्जियाँ हैं.... देखिए पूरी मंडी में से आपको ऐसी सब्जियाँ नही मिलेंगी" | सलोनी जैसे जैसे सब्ज़ी वाले के पास पहुँच रही थी उसकी आँखो की चमक उतनी ही बढ़ती जा रही थी | जैसे जैसे सलोनी की मादक काया और उसके कामुक उभार और कटाव सब्ज़ीवाले की आँखो के पास आ रहे थे उसके चेहर की मुस्कान, आँखो की लाली बढ़ती जा रही थी |

"आइए बहनजी आइए.... क्या लेंगी केला, मूली, बैंगन.......या फिर लौकी" सलोनी के दुकान पर पहुँचते ही सब्ज़ी वाला उससे पूछता है | सलोनी सब्ज़ीवाले की आवाज़ में चिपकी कामुकता, उसकी नज़रों और उसके दोबारा इस्तेमाल की कुछ खास सब्ज़ियों के नाम से जान गयी थी कि यह कोई बहुत बिगड़ा हुआ बदतमीज़ था | कोई भी सब्ज़ीवाला ऐसे सीधे सीधे छेड़खानी करने की हिमाकत नही कर सकता था, लगता था वो कुछ ज़्यादा ही होशियार था या खुद को होशयार समझता था |

"भैया मुझे बैंगन लेने हैं ......... क्या भाव है" सलोनी उसे नज़र अंदाज़ करते हुए बोलती है | उसे दूर से राहुल अपनी और भागा भागा आता दिखाई देता है और उसके होंठो पर मुस्कान आ जाती है | सब्ज़ीवाला उसकी मुस्कान का ग़लत मतलब लगता है | उसे लगता है कि बड़े घर की वो इतनी सुंदर, सेक्सी औरत उसको लाइन दे रही है | वो बहुत खुश हो जाता है | उसकी लुंगी में उसके लिंग में तनाव आने लगता है |

"अरे बहन जी अब आपसे क्या पैसा लेना है ...... आपकी दुकान है ..... जो चाहिए ले जाइए ........ हर चीज़ का मोल भाव कोई पैसे से थोड़े ही किया जाता है"

"क्या मतलब?" सलोनी थोड़े तीखे अंदाज़ में पूछती है |

"अरे मेरा मतलब था कि अभी मैने आपको बहनजी बोला है और अपने मुझे भाई कहकर बुलाया था ना तो कोई भाई बहन से पैसा लेता अच्छा नही लगता है ना......." वो बहुत बड़ा चलाक था और जल्दी घबराने वाला भी नही था | सलोनी समझ गयी कि यह आदमी कुछ ज़्यादा ही कमीना है | तब तक राहुल भी वहाँ पहुँच चुका था | उसकी साँस फूली हुई थी | माथे पे पसीने की बूंदे चमक रही थी | सलोनी का ध्यान दुकान वाले की तरफ़ था | राहुल दुकान वाले को घूरता है जो उसकी और देखता भी नही | वो सीधा सीधा सलोनी के सीने की और देखकर अपने होंठो पर जीभ फेर रहा था और हंस रहा था | राहुल की नसें फड़कने लगती है |

"ठीक है, ठीक है.... ज़्यादा बातें मत बनायो.... एक किलो बैंगन तोल दो" सलोनी रूखेपन से दुकानवाले को बोलती है |

"अभी लीजिए बहनजी, जितना आपने कहा उतना ही ही डाल देता हूँ.... "

सलोनी दुकान वाले की तरफ़ कोई ध्यान नही देती और राहुल की और मुडती है |

"क्या ज़रूरत थी इतना भागने की, बोला था ना वहीं रुकने के लिए.... कितना पसीना पसीना हो गया है" सलोनी बेटे को डांटती है | दुकान वाला प्लास्टिक बैग में बैंगन डालता राहुल की और देखता है | राहुल का गुस्सा और भी भड़क उठता है | दुकानवाले की नज़र उपहास से भरी हुई थी, राहुल को लगता है जैसे वो दुकानवाला उसके उपर हंस रहा हो |

"यह लीजिए बहनजी आपके बैंगन.. जितना आपने कहा था बिल्कुल उतना ही डाला है मैने, अगर आपको और चाहिए तो बोलिए मैं और डाल देता हूँ.... अभी मेरे पास बहुत बाकी पड़ा है", दुकानवाला बिना सलोनी के चेहरे की और नज़र उठाए उसके मुम्मो को घूरता हुआ बोलता है | वो बिना किसी डर के उसके मुम्मो को घूर रहा था | उसकी इतनी हिम्मत देख सलोनी दंग रह गयी थी |

"ज़्यादा बकवास ना करो... पैसे काटो जल्दी से" सलोनी खीझ कर बोल उठती है | उसे राहुल को यह सब सुनाने पर दुख महसूस हो रहा था जिसकी मुट्ठियाँ भींच गयी थी और लगता था अगर वो कुछ देर वहीं खड़ा रहा तो दुकान वाले की खैर नही थी |

"अरे बहनजी पैसे तो मैने आपसे कहा था कि रहने देती.... अब आप जैसी बहन हो तो आदमी पैसा लेता अच्छा नही लगता.... खैर अब आप इतनी खुशी से दे रही हैं तो ले लेता हूँ" | दुकानवाला बहुत आराम आराम से पैसे पकड़ता है | फिर वो अपनी पॉकेट में इधर उधर कुछ ढूंढने लगता है |

"अब क्या बात है?" सलोनी गुस्से से तमतमा रही थी |

"अरे बहनजी मेरे पास छुट्टा नही है? अब पाँच रुपया काटना है और आपने इतना बड़ा नोट दे दिया है" वो पुन्य सलोनी के मुम्मो पर अपनी नज़र गढ़ा देता है |

"मेरे पास छुट्टा है तुम यह पाँच रुपये लो और वो नोट वापस करो" दुकान वाला बेशर्मी से हंसता हुआ सलोनी को पहले वाला नोट देता है और उससे छुट्टा ले लेता है | सलोनी छुट्टा लेकर राहुल को चलने के लिए कहती है जो उस दुकान वाले को जान से मार देना चाहता था |

"बहनजी आती जाती रहिएगा......आप ही की दुकान है....और हाँ देखना मेरे बैंगन का स्वाद आपको बहुत पसंद आएगा... मेरे बैंगन जितना लंबा मोटा बैंगन आपको इस बाज़ार से तो क्या और कहीं से नही मिलेगा" दुकानवाला पीछे से सलोनी की गांड को घूरता हुआ उसे बोलता है | सलोनी अभी मुश्किल से दो कदम चली थी जब उस दूकानवाले ने उसे पीछे से वो बात कही थी | सलोनी ठिठक पड़ती है | उसके कदम जहाँ के तहाँ रुक जाते हैं | राहुल भी रुक जाता है वो पीछे मूड कर दुकानवाले की और कदम बढ़ता है जो हंस रहा था | सलोनी राहुल का हाथ कस कर पकड़ लेती है और उसे रोक देती है | वो बैंगन का बैग राहुल को पकड़ा देती है और मुस्कराती हुई दुकानवाले की तरफ़ बढ़ती है | राहुल भी अपनी मम्मी के साथ आगे बढ़ता है |

 
"ओह तो तुम्हें लगता है तुम्हारा बैंगन सबसे ज़्यादा लंबा मोटा है" सलोनी दुकानवाले के पास आकर मुस्कराते हुए बिल्कुल नरम स्वर में पूछती है |

"लगता क्या है बहनजी सच में है.... हम साबित कर सकते हैं..... आपको सबूत चाहिए तो बोलिए हम आपको सबूत दिखा देंगे अच्छे से" दुकानवाला सलोनी की और देखकर अपनी धोती में झटके मार रहे अपने लौड़े को मसलता है |

"तुम्हारे इस बैंगन से बड़ा तो मेरे बेटे का केला है, और इसका सबूत मैं खुद हूँ" सलोनी दुकानवाले की आँखो में देखती बोलती है | दुकानवाले को झटका सा लगता है, और राहुल को भी | जहाँ एक तरफ़ वो दुकानवाले को पीटने वाला था अब उसके दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थी | उसके दिल में, उसकी आत्मा में दर्द की तेज़ लहरें उठ रही थी | दुकानवाले की अश्लील बातें और उसकी मम्मी उपर से उससे मुस्करा कर बात का रही थी | राहुल का मन बहुत बैचेन होता जा रहा था |

सलोनी की बात सुनकर दुकानवाला कुछ पलों के लिए राहुल को घूरता है जैसे उसे यकीन नही हो रहा था | "क्या आपने सच में ...... आपने बेटे का केला देखा है" दुकानवाला आश्चर्य से पूछता है |

"देखा क्या है, मैने खाया है" सलोनी उसी तरह मुस्कराती हुई बोलती है |

"मगर ई तो बच्चा है अभी बहनजी ...... आप हमारे जैसे मर्द का केला खाएँगी तो आपको मालूम चलेगा बड़ा केला किसे कहते हैं" दुकानवाला मूँछ मरोड़ता बोलता है | इस बार राहुल का सर थोड़ा झुक जाता है | अगर उसकी मम्मी उस दुकानवाले से इस तरह मुस्करा कर बात नही करती तो वो कब का पीट चुका होता | मगर जब खुद उसकी मम्मी ..... वह वहाँ से चले जाना चाहता था ..... उस दुकानवाले की बातें उसके कानो में पिघले शीशे की तरह पड़ रही थी | मगर वो चाह कर भी वहाँ से जा नही सका | वो अपनी मम्मी को अकेले कैसे छोड़ सकता था .......

"तुझे किसने बोला है तेरा केला बड़ा है .... तेरे मन का वहम है" सलोनी उस दुकानवाले से ऐसे बात कर रही थी जैसे वो दोनो बहुत साधारण विषय पर बात कर रहे थे | मगर दुकानवाले की हालत बिगड़ चुकी थी | सलोनी की मुस्कराहट और उसका इस तरह खुल कर आराम से उससे बातचीत करना उसे लगा कि वो औरत अब लाइन पर है |

"अरे हमर बीवी बोलती है ..... हमारा केला खाए बिना उसे नींद नही आती" दुकानवाला सलोनी को आँख मार कर कहता है | राहुल का दिल रो रहा था |

"तुम्हारी बीवी कहती है ......" सलोनी हंस पड़ती है | "उसे कैसे मालूम तुम्हारा केला सबसे बड़ा है... लगता है उसने कोई और केला खाया ही नही है"

"अब आपको कैसे यकीन दिलाए हम बहनजी ....... अब जब आपसे सब बातें खुल ही चुकी हैं तो आपको सच्चाई बता ही देते हैं..... देखिए किसी से कहिएगा नही" सलोनी हाँ में सर हिलाती है | दुकानवाला आस पास देखकर बहुत धीमे से बोलता है "हमर बिटिया भी यही कहती है"

"अच्छा ... तो तुमने अपना केला अपनी बेटी को भी खिलाया है ..." सलोनी थोड़े आश्चर्य से बोलती है |

"हाँ बहनजी ..... एक नही दो दो बिटिया को केला खिलाया है ...... एक अभी स्कूल में पड़ती है, वो तो सुबह शाम हमारा केला खाती है और दूसरी का व्याह हो चुका है ..... अरे बहनजी हमारी बड़ी बिटिया तो जब भी मौका मिलता है घर पर आकर हमारा केला खाती है ..... बोलती है उसके मर्द का केला कुछ भी नही है ....... हमारे केले की तुलना में ...... देख लीजिए बाप का केला खाए बिना उसको मज़ा नही आता ...... अब आप ही अंदाज़ा लगा लीजिए हमारा केला कितना बड़ा है ...... अरे मैं तो कहता हूँ आप अंदाज़ा लगाना छोड़िए एक बार आप भी हमारा केला खाकर देखिए ........ आप गुलाम हो जाएँगी हमारे केले की" दुकानवाला अभिमान से बोलता है | उसकी आँखे उत्तेजना के मारे चमक रही थी |

राहुल दुकानवाले की बात सुनकर घबरा जाता है | वो उसकी मम्मी को कुछ ऑफर कर रहा था और अगर कहीं उसकी मम्मी ने ... नही नही ..... उसकी मम्मी ऐसा नही कर सकती ....... राहुल के दिल की धड़कने दुगनी रफ़्तार पकड़ लेती है और वो अपनी माँ की तरफ़ देखता है जिसके चेहरे के भवों में कुछ ज़्यादा अंतर नही आया था |

"ओह तो तुम्हारी बीवी और तुम्हारी बिटिया बोलती है कि तुम्हारा केला बहुत बड़ा है" सलोनी दुकानवाले से आराम से पूछती है |

"जी बहनजी ..... मइया की सौगंध .... हम झूठ नही बोलते ..... हमर बीवी और दोनो बिटिया सच में कहती है कि हमर केला बहुत बड़ा है ... " दुकानवाला सलोनी को यकीन दिलाने का भरसक प्रयत्न करता बोलता है |

"झूठ बोलती हैं तीनो......." सलोनी अचानक तीखे स्वर में बोल उठती है | उसके चेहरे से, उसके होंठो से मुस्कराहट गायब हो जाती है और उसकी जगह गुस्सा ले लेता है |

"जी बहनजी ..... हम झूठ नही बोलते" दुकानवाला सलोनी के एकदम तेवर बदल लेने से चोंक तो उठा था मगर घबराया नही था |

"तुम्हाई बीवी और तुम्हारी बेटियाँ बिल्कुल झूठ बोलती हैं जा फिर उनके मन में बहुत बड़ी ग़लतफहमी है... . उन्हे मेरे बेटे के पास भेजना आज रात को फिर देखना जब वो मेरे बेटे का केला खाएँगी तो उन्हे मालूम चलेगा कि असली केला क्या होता है क्यों राहुल?" सलोनी अचानक अपने बेटे की तरफ़ घूम कर उससे बोलती है | राहुल को ऐसे लगता है जैसे उसके निर्जीव शरीर में प्राण लौट आए हों | एकाएक उसकी आत्मा में प्रसन्नता लौट आती है |

"बिल्कुल मम्मी ........ इसके दिमाग़ में बहुत बड़ी ग़लतफहमी है.... अगर आप कहे तो मैं अपने दोस्तों को भी बुला लेता हूँ फिर इसकी बीवी और दोनो बेटियों को खूब केला खिलाएंगे , उन्हे मालूम चलेगा कि केला होता कैसा है" दुकानवाला कभी सलोनी को देख रहा था तो कभी राहुल को | उसको यकीन नही हो रहा था वो औरत एकदम से इस तरह पैंतरा बदल सकती है | वो अब भी नही घबराता मगर जब उसके बेटे ने अपने दोस्तों को बुलाने की बात की तो उसे पसीना आने लगा |

"तुम्हारे दोस्तों को रहने दो, मैं तो कहती हूँ तुम्हारे डैडी को पोलीस स्टेशन में फोन लगाओ .... वो एकदिन बोल रहे थे कि उनके सिपाहियों को काफ़ी दिनों से कोई खुराक नही मिली... कितने सिपाही हैं तुम्हारे डैडी के थाने में" सलोनी याद करते बोलती है |

"नौ मम्मी नौ हैं....." राहुल अपनी मम्मी का इशारा समझ झट से उसे ज्वाब देता है | उधर दुकानवाले का लंड बैठ चुका था | उसका पूरा जिस्म पसीने से तर हो चुका था | थाना, पोलीस की बात सुनकर उसकी पूरी हेकड़ी निकल चुकी थी | जिस तरह सलोनी इतने समय से उससे आराम से बिना किसी शर्म और भय के बात कर रही थी, दुकानवाले को उससे पक्का यकीन हो गया था कि वो वाकई किसी पोलिसवाले की बीवी है | उसकी धोती गीली होने वाली थी | वो अभी से खुद को थाने में नंगा देख रहा था और उस पर चार पाँच पुलिसिये डंडे बरसा रहे थे |

"नौ जाने ....... ओह तब तो ठीक हैं, इसकी एक बीवी और दोनो बेटियाँ मिलकर तीन हुई यानी तीन पोलीस वालों के हिस्से में एक आएगी .... अच्छा है पहले तेरे डॅडी मज़ा करेंगे बाद में रात भर पुलिसिये इसकी बीवी और बेटियों को अपना केला खिलाएँगे .... उन्हे भी केला खाने का बहुत शोक है... तू अपने डॅडी को फोन करके यहाँ बुला" | राहुल "जी मम्मी" बोलकर अपनी पॉकेट में हाथ डाल कर अपना मोबाइल निकालता है और जैसे ही नंबर पंच करने लगता है, दुकानवाले की हिम्मत टूट जाती है |

"नही नही बहनजी .... ऐसा मत कीजिएगा ..... हम ग़रीब आदमी मर जाएँगेम .... ऐसा जुल्म मत कीजीये" दुकानवाला सलोनी के आगे हाथ जोड़ता है |

 
"क्यों क्या हुआ... अभी मुझे अपना केला नही खिलाओगे ..... अभी तो इतनी डींगे हांक रहे थे, अब क्या हुआ ..... तू नंबर लगा वैसे भी तेरे डॅडी को स्कूल में पड़ने वाली लड़कियाँ बहुत पसंद हैं .... तू नंबर लगा राहुल" सलोनी दुकानवाले को गुस्से से घूरती बोलती है |

"मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी...... हमर बिटिया बहुत छोटी है ...... मासूम है दया कीजये बहनजी ...... माफ़ कर दिए" दुकानवाले की आँखो में आँसू आ गये थे |

"क्यों मुझे तो केला खिलाने के लिए बहुत तड़फ रहा था अब जब अपनी बेटियों की बात आई तो दम निकल गया ....... दूसरो की बहन बेटिओं को तुम रंडियां समझते हो" सलोनी इतने गुस्से से बोली थी कि दुकानवाला कांप उठा |

"गंगा मैया की सौगंध, हम दोबार कभी ऐसी ग़लती नही करेंगे ..... इस बार माफ़ कर दीजिए" दुकानवाले का जिस्म कांप रहा था और उपर से उसने हाथ भी जोड़े हुए थे | कुछ लोग दूर से इधर ही देख रहे थे |

"इस बार माफ़ कर देती हूँ मगर याद रखना अगर ऐसी ग़लती दोबारा की तो ....... जानते हो ना पोलीस की मार को ........ सारी उमर चल भी नही पाओगे" सलोनी आख़िरी बार उस दुकानवाले को डांटती है |

"कभी नही, कभी नही ...... भूल कर भी ऐसी हिमाकत नही करूँगा" सलोनी राहुल की बाँह पकड़ते उसे वहाँ से ले जाने लगती है | दोनो चल पड़ते हैं | जब वो पास की दुकान से गुज़र रही थी तो कुछ लोग उसे देख रहे थे | सलोनी गंभीर चेहरा लिए सामने की और देखती बढ़ती जा रही थी जबकि राहुल को अपनी हँसी छिपाने के लिए बहुत मुश्किल हो रही थी | उसे याद नही था आख़िरी बार वो इतना खुश कब हुआ था |

"लगता है मेडम ने खूब खिंचाई की है ...... अच्छा हुआ ऐसा ही होना चाहिए था इस हरामी के साथ" सलोनी को पीछे किसी की आवाज़ सुनाई देती है | सलोनी और राहुल आख़िरकार अपनी गाड़ी तक पहुँच जाते हैं | राहुल बैंगन का बैग डिक्की में रखता है और अपनी तरफ के डोर के पास खड़ा होकर सलोनी को गाड़ी के उपर से चाभी देता है जो दूसरी तरफ ड्राइवर सीट के दरवाजे के पास खड़ी थी | सलोनी उससे चाभी पकड़ लेती है | दोनो माँ बेटा एक दूसरे की आँखो में देखते हैं | राहुल अपनी हँसी रोक नही पाता और खुलकर हँसने लग जाता है | सलोनी उसे घूरकर देखती है और फिर खुद भी ज़ोर से हंस पड़ती है | दोनो कार में सवार होते हैं | सलोनी गाड़ी स्टार्ट करती है और राहुल को आँख मार कर हँसते हुए कहती है

"देखा कैसा मज़ा चखाया उस हरामी को ..... सारी उमर याद रखेग" माँ-बेटे की हँसी रुक नही रही थी |

सलोनी मुस्कराती हुई कार चला रही थी जबकि राहुल अभी भी हंस रहा था | वो खूब हँसने के बाद थोड़ी देर के लिए शान्त पड़ जाता मगर कुछ ही पलों के बाद वो फिर से हाथ पर हाथ मार कर ज़ोर से हंस पड़ता | सलोनी भी उसकी और देख कर मुस्करा देती |

"और ..... और जब अपने कहा लगाओ अपने पापा को कोतवाली में फोन ........ हहहहहहाहा .... उसका चेहरा कैसे फक्क पड़ गया ........ कैसे बच्चों की तरह रोने लग गया"

"और तूने कौनसा कम एक्टिंग की ....... मम्मी अपने दोस्तों को बुला लूँ ....... और फिर क्या कहा था ...... हाँ मम्मी पापा की कोतवाली में नौ पॉलिसीए हैं ...... सभी मिलकर इसकी बीवी और बेटी को चोदेंगे .......... ओह माय गॉड!!!!!!!!!! बेचारा कितना डर गया था" सलोनी भी बेटे की होशियारी की दाद दे रही थी |

"मगर मम्मी मान गये आपको ........ क्या एक्टिंग की अपने ... ऐसा लगा जैसे सच में किसी थानेदार की बीवी है ........ बेचारे की तो लूँगी गीली कर दी आपने ........ हाहहहहहहहहा" राहुल दिल खोल कर हँसे जा रहा था |

"और जो तेरी पेंट गीली होने वाली थी, वो भूल गया ......" सलोनी की बात सुन कर राहुल की हँसी रुक जाती है |

"क्या मतलब ......" राहुल का दिल धड़क उठा | वो उन लम्हो को याद भी नही करना चाहता था | "मेरी भला पेंट क्यों गीली होने लगी" उसे लगा था शायद उसकी हालत के बारे में उसकी मम्मी को पता नही चला था |

"क्या मतलब ............... हुं ........ मुझे यह बताओ जब मैं उस सब्ज़ीवाले से हंस कर बातें कर रही थी तो तुम्हारा चेहरा क्यों सफेद पड़ गया था ..... तुम क्या समझते हो मुझे तुम्हारी हालत के बारे में मालूम नही था .... तुम्हे तो तगड़े होना चाहिए था जबकि तुम्हारी शकल ऐसी हो गयी थी कि जैसे अभी रो दोगे ..." सलोनी गाड़ी को एक मिनी माल के सामने रोक देती है |

राहुल चुप कर जाता है | उसके चेहरे पर फिर से उदासी छा जाती है | उसे सच में उस समय बहुत तकलीफ़ महसूस हुई थी | जिस तरह सलोनी और वो दुकानवाला हंस हंस कर आपस में अश्लील बातें कर रहे थे बेचारे का दिल टूट गया था | सलोनी गाड़ी को पार्क कर चुकी थी और अपनी सीट बेल्ट खोलकर वो राहुल की और मुड़ती है और उसे देखने लगती है | राहुल अपना चेहरा झुकाए बहुत उदास दिख रहा था | सलोनी का दिल बीँद जाता है और वो उसे अपनी बाहों में भरती उसे अपनी तरफ खींचती है | सलोनी राहुल के सर को अपने सिने पर दबाती है और उसके बालों में हाथ फेरती है | कुछ देर बाद जब वो राहुल का सर उपर उठती है तो उसकी आँखो से आँसू छलक रहे थे | सलोनी अपना चेहरा बेटे के चेहरे पर झुकाकर उसकी आँखो उसके गालों से आँसू पीने लग जाती है | वो उसके चेहरे पर चुंबन की बरसात कर देती है | कुछ देर बाद आख़िर राहुल की आँखो से आँसू निकलने बंद हो जाते हैं | सलोनी उसके होंठो पर एक गहरा चुंबन अंकित करती है |

"इस तरह घबराते नही है बेटा ......... कभी भी घबराते नही .... अपनी ज़िद्द के लिए अपने प्यार के लिए लड़ा जाता है उसे खामोशी से हाथ से निकल नही जाने दिया जाता ........ किस्मत के भरोसे कभी नही रहते ........ जानता है जब वो आदमी मुझसे बदतमीज़ी से बात कर रहा था तो तुझे उसी समय उसके मुँह पर एक चांटा मार देना चाहिए था ...... अगर तू ऐसा कर देता तो मैं क्या कोई भी औरत तेरी मर्दानगी की दीवानी हो जाती मगर तू वहाँ खड़ा मेरे इशारे का इंतज़ार करता रहा ........ ऐसे समय में तुझे खुद फ़ैसला करना चाहिए था ..... और तू क्या समझता है मैं उस घटिया नीच आदमी को अपने जिस्म को हाथ लगाने देती ....... मैं कोई रंडी नही हूँ ............ कोई मंदिर का प्रसाद नही हूँ जो हर किसी में बाँट दी जायूं ... अगर सच सुनना चाहता है तो सुन ...... आज तक मेरे जिस्म को तेरे बाप के सिवा किसी ने हाथ नही लगाया ना ही कोई लगा सकता है ............ तेरा भी कोई चान्स नही था .... वो तो तेरे बाप ने मुझे इतने समय से प्यासी रखा है और उपर से तू है ऐसा कि चाह कर भी खुद को रोक नही सकी ........ तू मेरा बेटा है शायद इसीलिए आज तू मेरे इतने करीब है जितना तेरा बाप भी कभी नही हुआ और शायद कभी होगा भी नही ............ इसलिए इस बात की तो तू चिंता छोड़ दे कि मैं किसी और के नीचे लेटूँगी ..... तेरे पिता के बाद तू वो आख़िरी इंसान है जो इस जिसम को भोग सकता है .... मगर मेरी बात याद रखना अगर कोई चीज़ प्यारी हो, कुछ चीज़ अपनी हो तो उसे हाथ से निकलने नही देना चाहिए, अपने प्यार अपने हक़ के लिए लड़ना चाहिए ........... इस तरह बैठ कर रोयोगे तो सारी उमर हाथ मलते रोते ही रह जयोगे ......... एक कुत्ता भी अपने मोहल्ले में किसी अजनबी कुत्ते को बर्दाशत नही कर सकता और तू तो जवान मर्द है......"

राहुल का सर झुका हुआ था | उसकी मम्मी की एक एक बात उसके दिल पर गहरा असर कर रही थी | उसे चाहे इस बात से बहुत राहत मिली थी कि उसकी मम्मी उसके बाप के बाद केवल उससे चुदी थी और किसी दूसरे से चूदना भी नही चाहती थी | मगर वो सच कहती थी उसको भी मर्द बनना चाहिए | उसे अपनी मम्मी पर अपने हक़ को बरकरार रखना है तो आगे से मर्द बनना होगा | उसे अपनी मम्मी का हक़दार बनकर दिखाना पड़ेगा |

"जो मैने कहा आगे से उसे याद रखना ........ चल अब अपना चेहरा ठीक कर ....... अंदर चलते हैं ........... ऐसे नही थोड़ा सा मुस्करा कर ... थोड़ा सा और ....... हाँ अब थोड़ा सही है ........." सलोनी बेटे को थोड़ा सा मुस्कराने पर मजबूर कर देती है | आख़िर दोनो कार से बाहर निकलते हैं और माल के अंदर शॉपिंग करने के लिए जाते हैं |

सलोनी अभी भी किचन के लिए कुछ सामान खरीद रही थी और उसके बाद वो मेकअप का कुछ सामान लेने लगी | राहूल उसके पीछे ट्रॉली घिसटता चला जा रहा था | उसका मूड अब कुछ कुछ सुधरने लगा था | सलोनी शॉपिंग करती उससे इधर उधर की बातें कर रही थी |

"बेटा यहाँ कोकनट आयल कहाँ है ढूँढ तो ज़रा.... मुझे मिल नही रहा"

राहुल कुछ देर माल के अलग अलग सेक्षन में इधर उधर चेक करता है फिर उसे कोकनट आयल मिल जाता है |

"यह लो मम्मी मगर आप इस का करेंगी क्या .... आप तो कोकनट आयल का इस्तेमाल नही करती?" राहुल अपनी मम्मी के पीछे बिलिंग स्टेशन की और जाता पूछता है |

"मैने सुना है इसमें सबसे ज़्यादा चिकनाहट होती है, इसलिए ले लिया" सलोनी एक तरफ काउंटर के पास खड़ी हो जाती है और राहुल समान निकाल कर बेल्ट पर रखने लगता है |

"मगर आप इसका इस्तेमाल कहाँ करेंगी ......... इसमे खाना तो नही पकाएँगी ना?" राहुल को कोकनट आयल में बना खाना पसंद नही था |

"खाने में नही बाबा ........" सलोनी काउंटर पर खड़ी लड़की को पैसे देती है और झुक कर राहुल के कान में फुसफुसाती है "पीछे लगाने के लिए ...... वहाँ कमर के नीचे ........ उउम्म्म्ममम ............. मेरे नितंबो के बीच ............" सलोनी बेटे को आँख मार कर शर्मीली सी हँसी हँसती है |

"वहाँ .... वहाँ किस लिए......" राहुल बैग उठाकर अपनी मम्मी के साथ साथ चलता उससे धीरे से पूछता है | वो अब माल से बाहर निकल रहे थे |

"किस लिए....... तुझे नही मालूम......." सलोनी सामने देखती मुस्कराती है |

"बताओ ना मम्मी .......... क्यों पहेलियाँ बुझा रही हो......" राहुल का लंड जो सोया हुआ था फिर से खड़ा होने लग गया था |

"उऊउम्म्म्मम ..... अब मैं कैसे कहूँ ........ मैं नही बोल सकती ........ मुझे शर्म आती है ....." सलोनी शरमाती है |

"उफफफ्फ़ मम्मी हम दोनो ही तो हैं .... बताओ ना किस लिए वहाँ तेल लगाओगी" राहुल का लंड अब आधा सख्त हो चूका था |

"अब तेल नही लगाउंगी तो तेरा वहाँ लूँगी कैसे .......... आगे तो खुद बा खुद गीली हो जाती है ....... मगर पीछे तो तेल ही लगाना पड़ेगा ना ........... एक तो मेरी पीछे वाली इतनी टाइट है और उपर से तेरा इतना मोटा है ......... बिना तेल के कैसे अंदर घुसेगा ....... हायईईए बिना तेल के तो मेरी फट ही जाएगी......"

राहुल के पैर वहीं जम जाते हैं | राहुल को अपने कानो पर यकीन नही होता | उसकी मम्मी ने कोकनट आयल इस लिए लिया था कि वो उससे अपनी गांड मरवाने वाली थी ............... उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ....... एक ही झटके में राहुल का लौड़ा पूरा तन जाता है | वो अब सलोनी के साथ साथ नही बल्कि उसके पीछे पीछे चल रहा था | उसकी नज़र अपनी मम्मी के गोल मटोल उभरे नितंबो पर ज़मी हुई थी | वो कल्पना कर रहा था उन नर्म, कोमल नितंबो के बीच उसकी टाइट गांड मारने में कितना मज़ा आएगा | राहुल शायद सलोनी की गांड को ऐसे ही घूरता रहता मगर वो पार्किंग में पहुँच चुके थे और सलोनी गाड़ी में बैठ चुकी थी | उस शैतान माँ के होंठो पर बहुत ही शरारती सी हँसी चिपकी हुई थी |

"उफफफफफफ्फ़ ..... देखो तो तुमने इसे फिर से खड़ा कर लिया .... कोई देखेगा तो यही कहेगा कि मैं तुम्हारी वो हूँ ........... कि तुम बस मुझ पर चड़ने वाले हो .......... इसे कभी तो बैठा कर रखा करो" सलोनी राहुल के गाड़ी में बैठने के बाद उसको झूठ मूठ का डाँटती है |

"अब तुम मम्मी ऐसी बातें करोगी तो यह बेचारा क्या करेगा" राहुल अपना बचाव करता है |

"ओहो ..... तो मैं इसे जानबुझकर खड़ा करती हूँ .... तुम ही इतने टाइम से ज़िद्द कर रहे थे बताओ मम्मी कहाँ तेल लगाओगी ....... क्यों लगाओगी ......... अब जब बता दिया तो आपके इस महाशय ने अपना सर उठा लिया ........ इसका मतलब तो यह हुआ कि अगर मैं कुछ नही बताती हूँ तो भी तुम मेरा पीछा नही छोड़ते और अगर बताती हूँ तो तुम इसके खड़ा होने का दोष मेरे माथे पर मढ़ देते हो ...... यानी हर तरफ से मैं ही बुरी हुई ..... और यह बेचारा कब से हो गया ........ तुम्हारे इस बेचारे ने मेरी मार मार का सूजा दी है ........ पूरी सूजी हुई है ...... हाय दर्द भी कर रही है ........ लेकिन कोई बात नही घर चलो आज की रात इसकी अच्छे से खबर लूँगी ...... आज की रात इसकी खैर नही" सलोनी झुक कर राहुल के लंड को अपने हाथों में भर कर एक बार कस्स कर मसलती है | "आआहह" राहुल सिसक पड़ता है | लगता था उसके छूने से लौड़ा और भी सख्त हो गया था | फिर सलोनी गाड़ी को स्टार्ट करती है और पार्किंग से निकलती है |

 
"क्यों ना आज फिल्म देखने चलते हैं …. शाम का शो देखते हैं …. कितना टाइम हो गया है फिल्म देखे हुए …. और फिर खाना भी आज बाहर खाते हैं …. क्या कहते हो?" सलोनी गाड़ी को पार्किंग से निकालती बोलती है |

"मेरा बिल्कुल भी मूड नही है आज फिल्म देखने का .... फिर कभी जाएँगे फिल्म देखने मम्मी ... अभी तो घर चलते हैं" राहुल फट से बोल उठा |

"उउउम्म्म्ममम ..... सब समझती हूँ मैं ........ तुझे घर जाने की जल्दी क्यों है और तेरा मूड फिल्म देखने का क्यों नही है!"

"नही मम्मी, मैं तो ऐसे ही बोल रहा था .... आज सच मैं फिल्म देखने का दिल नही कर रहा"

"मुझे मालूम है तेरा दिल किस लिए मचल रहा है.......फिल्म देखने का दिल नही कर रहा......... वैसे तू हमेशा अपने डैडी का दिमाग़ ख़ाता है कि सिनेमा जाना है, सिनेमा जाना है और अब जब मैं तुझे लेकर जा रही हूँ तो तुझे नखरे आ रहे हैं...........तू तो बस चाहता है के जल्दी से जल्दी घर जाएँ और तू मेरा काम कर सके"

"ऊऊफफफफू मम्मी आप तो बात का बतंगड बना लेती हो. मैं ऐसा वैसा कुछ नही चाहता......... मैने सुबह से आराम नही किया , थक गया हूँ, मुझे नींद भी आ रही है"

"अभी थक गये हो ..... नींद भी आ रही है ...... और घर पहुँचते ही तुम्हारी नींद और थकान सब गायब हो जाएगी और तू सीधा मेरे कपड़े उतार कर मेरे उपर चढ़ जाएगा"

"मम्मी आप बहुत बुरी हो......"

"अच्छा सच में! अच्छा यह बता मैं झूठ बोल रही हूँ कि तू घर जाते ही मुझ पर टूट नही पड़ेगा और मुझे नंगी करके मेरे उपर नही चढ़ेगा"

"हाँ आप बिल्कुल झूठ बोल रही हैं ........ मैं .... मैं ...... आपके .... उपर नही .... नही चढ़ुंगा"

"यकीन नही होता .... मुझे लगता है तुम झूठ बोल रहे हों .... तुम बहुत चलाक हो राहुल ... अगर तुम मुझ पर नही चढ़ोगे तो ज़रूर तुम मुझे अपने ऊपर चढ़ा लोगे .... घर जाते ही अपने खड़े खंबे पर मुझे बैठाकर मुझसे उठक बैठक लगवाओगे ........ क्यों सच कह रही हूँ ना"

"आप सिनेमा ही चलिए ........ वैसे भी आपने फ़ैसला कर ही लिया है तो बदलेंगी थोड़े ना"

"नाराज़ क्यों होता है ....... अभी घर जाकर क्या करना है ...... और आज मेरा मूड भी नही है खाना बनाने का ...... पूरी रात पड़ी है जितना चाहे मज़ा लूट लेना मेरे बलमा ....... "

सलोनी राहुल को बलमा कह कर पुकरती है तो वो उसकी और देखता है | सलोनी भी उसकी और देख कर उसे आँख मारती है | राहुल के लाख रोकने पर भी उसके होंठो पर मुस्कराहट लौट आती है | वो अपना चेहरा घुमा कर कार की विंडो से बाहर देखने लग जाता है | सलोनी हंस पड़ती है |

"हायईई ........... क्या अदाएँ हैं जालिम की" सलोनी हँसती हुई कहती है |

जब सलोनी और राहुल सिनेमा पहुँचते हैं तो फिल्म स्टार्ट होने ही वाली थी | दोनो टिकेट्स लेकर बाल्कनी में जाते हैं | एक आक्षन फिल्म थी और उसका भी लास्ट वीक चल रहा था इसलिए सिनेमा में कुछ खास रश नही था | राहुल अपनी मम्मी के पीछे पीछे पोप कॉर्न पकड़े चल रहा था | रह रह कर उसका ध्यान अपनी मम्मी की गांड पर चला जाता जिसके उभरे होने के कारण सलोनी का कुर्ता पीछे से उपर को उठा हुआ था | सिनेमा में ज़्यादातर लोग बैठ चुके थे | ज़्यादातर जोड़े थे और सब एक दुसरे से दूर दूर ही बैठे थे | टिकेट चेकर ने उनसे कहा कि क्योंकि सिनेमा में रश नही है वो कहीं भी बैठ सकते हैं | सलोनी सर घूमा कर चारों और चेक करती है तो उसे एक तरफ़ कुछ सीट्स खाली दिखाई देती हैं | उन दोनो के बीच में बैठने के बाद भी दोनो तरफ की काफ़ी सीट्स खाली पड़ी थी | उनसे उपर की कतार में एक जोड़ा उनसे काफ़ी दूर दाएं और बैठा था जबकि उनसे दो कतार नीचे एक जोड़ा बाईं और को बैठा था और लगभग उनके सामने था |

हॉल में अंधेरा छा जाता है और फिल्म शुरू हो जाती है | कुछ ही पलों बाद जब सब कुछ सेट हो जाता है तो राहुल पोप कॉर्न का पैकेट खोल लेता है और उसे अपनी मम्मी की और बढ़ा देता है | दोनो माँ-बेटा पॉपकॉर्न खाते फिल्म देखने लगते हैं | फिल्म शुरू हुए अभी पाँच मिनिट ही बीते थे कि हॉल से कपड़ों की सरसराहट आने लगती है | चारों तरफ से, बिल्कुल धीमी धीमी आवाज़ें आनी लगती हैं | कुछ आवाज़ों को सुनकर राहुल को लगा जैसे कोई अपनी ज़िपर खोल रहा था | राहुल के दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी | वो अच्छी तरह से जानता था कि हॉल सुरू कपड़ों के सरसराने, ज़िपर खुलने की आवाज़ों और फुसफुसाती आवाज़ों का क्या मतलब था | उसके जिस्म सुरू सिहरन सी दौड़ रही थी |

तभी अचानक स्क्रीन पर एक तेज़ रोशनी का सीन आता है और तेज़ रोशनी में अचानक राहुल का ध्यान अपने से नीचे बैठे जोड़े पर चला जाता है | लड़का अपना हाथ लड़की की गर्दन में लपेटे हुए था और उसका वो हाथ हल्का हल्का हिल रहा था | शायद वो उसके मुम्मे को मसल रहा होगा, राहुल सोचता है | उसकी पेंट में उसका लंड नाज़ाने कब का सख्त हो चुका था और उसकी गोद में बड़ा सा टेंट बना हुआ था |

राहुल ध्यान लगाकर अपने सामने बैठे लड़के लड़की को देखने लगता है | कुछ पलों तक तो उसे खास नज़र नही आता मगर जब उसकी आँखे अंधेरे में सेट हो जाती हैं तो वो उन्हे और उनकी हरकतों को बड़े अच्छे से देख और समझ सकता था | मगर इसके लिए अब उसे स्क्रीन से ध्यान हटाना था क्योंकि स्क्रीन पर नज़र मारने के बाद फिर से काफ़ी समय बाद जाकर उसकी आँखे अंधेरे में देखने काबिल होती थी |

राहुल का सारा ध्यान अपने सामने वाले जोड़े पर ही था | लड़का लड़की के मुँह को अपनी और खींच कर उसके होंठो को चूमने लगता है | कुछ देर बाद लड़की भी अपने आशिक़ के गले में बाहें डाल उसके चुंबन का ज्वाब ज़ोर शोर से देने लगती है | क्योंकि अब दोनो का रुख़ आमने सामने की और था इसलिए राहुल उनके बीच में देख सकता था | जब दोनो के मुँह अलग होते हैं तो राहुल साफ तौर पर लड़के को लड़की के दोनो मुम्मों को मसलते देख सकता था | जिस तरह वो दोनो किसी द्वारा देखे जाने की परवाह किए बगैर एक दूसरे को चूम चाट रहे थे लगता था वो काफ़ी समय से वहाँ आ रहे थे | बल्कि वहाँ लगभग सभी जोड़े ऐसे ही आपस में गुथमगुथा थे | शायद फिल्म देखना उनके लिए बहाना भर था | राहुल खुद भी उस जोड़े को बड़े गौर से देख रहा था, अंधेरे में उनकी एक एक हरकत को पड़ने की कोशिश कर रहा था |

लड़का लड़की काफ़ी देर ऐसे ही चूमा चाटी करते रहे | जब भी उनके चेहरे अलग होते तो लड़का लड़की के मुम्मों को मसलने लगता | इस बार जब उनका चुंबन टूटा तो लड़के ने लड़की का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रख दिया | लड़की तुरन्त उसे पेंट के ऊपर से सहलाने लगी | दोनो के बीच इसी तरह चूमा चाटी और एक दूसरे के अंगो को सहलाने का दौर चालू था | तभी राहुल देखता है लड़का लड़की के सीने पर सर झुकाता है और उसके मुम्मों को कपड़े के ऊपर से चूसने लगता है | राहुल अपनी आँखो का पूरा ध्यान लगा देता है और वो लड़की की शर्ट में लड़के का हाथ घुसता देख लेता है | शायद वो उसके मुम्मे को बाहर निकालने वाला था, नही नही वो ऐसा नही कर सकता था जा फिर उसे उसकी ब्रा के अंदर मसलने वाला था जा फिर हो सकता है उसकी ब्रा हटाकर उसके मुम्मे को चूसने वाला था | इससे उसके होंठो और लड़की के मुम्मों के बीच सिर्फ उसकी शर्ट का ही परदा रह जाता | खैर इससे पहले कि राहुल देख पता कि आगे क्या होने वाला है और वो जोड़ा क्या गुल खिलाने वाला है, सस्पेंस फिल्म की तरह सिनेमा की लाइट्स जल उठती हैं, इंटर्वल हो गया था | लड़का लड़की झटके से अलग होकर सामने को मुँह करके बैठ जाते हैं | सिनेमा में शोर मचने लग जाता है | राहुल बहुत निराश हो जाता है | वो देखना चाहता था कि लड़का लड़की आगे क्या करते हैं |

उसे सब्र नही हो रहा था मगर अब उसे इंतेज़ार करना ही था, जब तक इंटरवल खत्म ना हो जाता और सिनेमा की बत्तियां फिर से बुझ ना जाती | राहुल ठंडी आह भरता अपना सर घूमाता है |

उसकी नज़र सीधी सलोनी के चेहरे पर पड़ती है | वो कुर्सी की पीठ पर अपनी कुहनी रखकर उसकी तरफ़ मूडी हुई थी और बड़े गौर से बिना पल्क झपकाए उसे ही देख रही थी | राहुल को झटका सा लगता है | वो उस जोड़े की हरकतों में इस कदर खो गया था कि उसे अपनी मम्मी की मौजूदगी का एहसास ही नही रहा था | उसे यकीन नही हो रहा था कि वो भूल गया कि वो अपनी माँ के साथ आया था | सलोनी राहुल को देखती अपनी भवें नचाती है जैसे पूछ रही थी कि क्या हो रहा है | राहुल को कोई ज्वाब नही सूझता | तभी सलोनी की नज़र उसके चेहरे से होते हुए नीचे उसकी गोद में जाती है और वो अपना सर हिलाती है | राहुल तुरन्त अपनी गोद में देखता है | उसकी आँखे फैल जाती हैं | उसने अपने हाथ में अपना लंड पकड़ा हुआ था और उसे पेंट के उपर से मसल रहा था | राहुल का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है | वो तुरन्त अपने लंड से अपना हाथ हटा लेता है |

 
"वो लड़का क्या शर्ट के ऊपर से उसके मुम्मे चूस रहा है ?" अचानक उसके कान के पास सलोनी धीरे से सरगोशी करती है | राहुल को झटका सा लगता है | उसकी साँस कुछ पलों के लिए जैसे थम सी जाती है | वो कुछ बोल नही पाता |

"मुझे लगता है जैसे वो उसके मुम्मे को नंगा करके चूस रहा है .... मगर लड़की की शर्ट तो उसके बदन पर पूरी मोजूद है" सलोनी राहुल के कान में फुसफुसा कर बोलती है | उसके होंठ राहुल के कान की लौ को चूम रहे थे |

"वो ... उसने शर्ट को उपर नही उठाया है बल्कि उसके सामने का बटन खोलकर उसकी शर्ट को उसके ...... उसके दूध की तरफ़ खींचा है और जहाँ से बटन खोला है वहाँ से मुँह लगाकर चूस रहा है" इस बार राहुल बोल उठता है | वो बहुत गरम हो चुका था | एक तो सामने उस लड़के और लड़की की प्रेमलीला का असर था और उपर से उसके कान, उसके गालों से टकराती उसकी मम्मी की गरम महकती साँसे उसका बुरा हाल कर रही थी | उसके लंड ने पेंट में तूफान खड़ा कर दिया था |

"लड़की ने ब्रा नही पहनी या उसने निकाल दी है जा फिर ब्रा के उपर से चूस रहा है .... यहाँ से साफ साफ नज़र नही आ रहा" सलोनी फिर से फुसफुसाती है |

"नही वो उसने निकाली नही है, उपर चढ़ा दी है और उसके दूध को नंगा करके चूस रहा है" राहुल धीरे से बोलता है | उसकी साँस बहुत गहरी हो चुकी थी | सलोनी एक तरफ़ से उसकी और मुड़कर उसके उपर झुकी हुई थी और उसका एक भारी मुम्मा राहुल के कंधे में चुभ रहा था | राहुल अपने हाथों को आपस में बाँध कर रखे हुए था क्योंकि उसे खुद पर भरोसा नही था कब उसका हाथ उठ कर अपनी मम्मी के मुम्मे को दबोच ले और वो नही जानता था सिनेमा में उसकी किसी ऐसी वैसी हरकत को वो कैसे लेगी | काफ़ी देर दोनो चुप रहते हैं | सामने लड़का बदस्तूर लड़की के मुम्मों को चूसे जा रहा था |

"मुझे वहम हो रहा है जा उस लड़की का हाथ सच में हिल रहा है" सलोनी फिर से फुसफुसाती है |

"नही सच में हिल रहा है ..... उपर नीचे हो रहा है" राहुल धीमे से बोल उठता है | उसका लंड इतना अकड़ चुका था कि उसे पेंट में बुरी तरह फसे होने के कारण वो दर्द कर रहा था |

"उपर नीचे .... ज़रूर उसका लंड सहला रही है ...... है ना ....." सलोनी राहुल के कान में सरगोशी करती बोलती है |

"हूँ मम्मी" वो बस इतना ही बोल पाता है |

"पेंट के उपर से मसल रही है जा बाहर निकाला हुआ है" सलोनी राहुल की जान निकालने पर तुली हुई थी |

"बाहर निकाला हुआ है ...... पूरा बाहर है" राहुल के गले से भरभराती सी आवाज़ निकलती है |

"देख तो कैसे वो उसका मुम्मा चूस रहा है और दूसरे हाथ से मसल भी रहा है ....... और वो कैसे उसके लंड को मसल रही है .... हाययययईई ........ कितना मज़ा कर रहे हैं दोनो" सलोनी एक लंबी सिसकी राहुल के कानो में लेती है और फिर अपना हाथ पेंट में उसके उभार पर रख देती है |

"उफफफफ्फ़ तेरा तो बहुत अकड़ा हुआ है ........ लगता है तुझे उन दोनो को देख कर बहुत मज़ा आ रहा है" सलोनी एक हाथ से राहुल के लंड को सहलाती उसके कान की लौ चुभलाती है और दूसरे हाथ में उसका हाथ पकड़ अपने मोटे तने मुम्मे पर रख देती है और उसे दबाती है | राहुल अपने हाथ में सलोनी के कड़े निप्पल की चुभन को महसूस कर सकता था |

"सारा मज़ा अकेले अकेले ही ले रहे हो ...... मेरा ख़याल कौन करेगा"

 
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