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हाय रे ज़ालिम.......complete

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विक्रान्त;अपुन को एक बार जो चीज़ पसंद आ जाती है वो मुझे चाहिए मतलब चाहिए और अगर वो मुझे नही

मिली ना(वो अपनी बन्दूक निकाल के हिम्मत को दिखाता है)समझो वो गया क्या गया समझो वो।

हिम्मत;अरे साले इसे नीचे रख कहीं चल गई तो।

विक्रान्त;एक ज़हरीली हँसी हँसते हुए।

अभी नहीं चलेगी सेठ अभी वक़्त है।

हिम्मत;क्या मतलब।

विक्रान्त;मतलब ये की तुमने तो कहा था की रात में बिंदिया के साथ मुलाकात करवाएगा और अब खुद पी कर सोने की तैयारी कर रहे हो।

हिम्मत;अरे हाँ देख साला मै भी न नशे में कुछ याद ही नहीं रहता चल तू मेरे साथ।

वो विक्रांत के सहारे से लडख़ड़ाता हुआ बिंदिया के पास आ जाता है।

बिंदिया;पलंग पर साडी पहने लेटी हुई थी।

हिम्मत और विक्रांत को एक साथ देख वो समझ जाती है की क़यामत आने वाली है।

वो अपना पल्लू ठीक करते हुए पलंग पर बैठ जाती है।

हिम्मत;ए बिंदिया वहां क्या बैठी है यहाँ आ मेरे पास।

बिंदिया ;विक्रांत को देखते हुए हिम्मत के पास चली आती है।

चलिये आपने बहुत पी ली है।

और तुम बाहर जाओ इन्हें मै सुला दूँगी।

विक्रान्त; बिंदिया की कमर पर हाथ फेरते हुए

बहुत सती सावित्री बन रही है साली रंडी कहीं की।

मुझे भी सुला दे कभी अपने साथ।

बिंदिया ;ज़बान सँभाल के बात कर।

हिम्मत;चुप साली .....सही कह रहा है वो। जा खुश कर दे मेरे दोस्त को।

हिम्मत धक्का देकर बिंदिया को विक्रांत के पास धकेल देता है।

उस वक़्त बिंदिया को अंदाज़ा होता है की हिम्मत उसे क्या समझता है।

वो बेवकूफ हवेली की मालकिन बनने के सपने देख रही थी मगर हक़ीकत में हिम्मत उसे सिर्फ रात गुजारने के लिए यहाँ लाया था।

बिंदिया ;क्या कहा तुमने। तुमने मुझे समझ क्या रखा है।

इस के साथ सो जा उसके साथ वो कर ले। मै भी एक औरत हूँ।
 
हिम्मत के दिमाग की नस गरम हो जाती है और वो एक ज़ोरदार थप्पड बिंदिया के मुँह पर जड़ देता है।

और बिंदिया चक्कर खाकर बिस्तर पर जा गिरती है।

हिम्मत;साली रंडी है। रंडी बनकर रह मेरे सर पर मत नाच। देख मत विक्रांत चोद डाल साली को बहुत बातें करने लग गई है ये छिनाल आज कल। इसे इसकी असलियत बतानी ही पडेगी।।

विक्रान्त;आगे बढ़ता है और बिंदिया के बाल पकड़ के उसे खीचता है मगर बिंदिया हिम्मत की बातें सुनकर तिलमिला गई थी। वो विक्रांत को धक्का देकर पीछे की तरफ ढ़केलती है।

बिंदिया ;अपने हाथ दूर रख मुझसे कमीने।

विक्रान्त से रहा नहीं जाता।

साली मुझे गाली देती है। मुझे....

वो अपनी पिस्तोल निकाल के बिंदिया के मुँह में डाल देता है।

अपने मुँह में पिस्तोल के घुसते ही बिंदिया के जैसे होश उड़ जाते है।

आंखेँ फटी की फटी रह जाती है उसे विक्रांत के बारे में पता था की वो बहुत ग़ुस्से वाला इंसान है।

बिंदिया थोडी सँभल जाती है।

विक्रान्त;साली 6 की 6 अभी उतार दूंगा अभी के अभी अब चिल्ला। चिल्ला अब.....

विक्रान्त की आवाज़ सुनकर रानी और रुक्मणी भागते हुए बिंदिया के रूम के पास चली आती है।

हीम्मत;अपने कपडे निकाल देता है और बिंदिया के पास चला आता है।

हिम्मत को देख विक्रांत भी अपनी पेंट खोल के नीचे गिरा देता है।

विक्रान्त;बिंदिया के मुँह से पिस्तोल निकाल लेता है।

साली अगर आईन्दा मेरे सामने ऊँची आवाज़ में बात की न तो याद रख काम ख़तम करने में देरी नहीं करुँगा मैं।

हिम्मत;अब देख क्या रही है रंडी। मुँह खोल और चाट हमारा लंड।

दोनो एक दूसरे को देख हंसने लगते है और बिंदिया अपने हाथों में हिम्मत और विक्रांत का लंड पकड़ लेती है।

खिड़की की आड़ में खड़ी रानी और उसके पीछे खड़ी रुक्मणी विक्रांत और हिम्मत को देख सहम गई थी मगर बिंदिया को देख उन्हें तरस नहीं आ रहा था।

रानी;चलो माँ।

रुक्मणी;उसका हाथ पकड़ के अपने से चिपका लेती है और धीमी आवाज़ में कहती है।

रुक थोडी देर।।

बिंदिया एक एक करके हिम्मत और विक्रांत के लंड को चुसने लगती है।
 
विक्रान्त;काफी दिनों से बिंदिया पर नज़र गडा कर बैठा हुआ था और आज उसकी दिल की मुराद पूरी हो रही थी।

मगर उसकी नज़रों के सामने उस वक़्त बिंदिया नहीं बल्कि उसे तो नीलम नज़र आ रही थी।

नीलम का वही भोला चेहरा जिसे देख विक्रांत अपना दिल हार बैठा था।

विक्रान्त;बिंदिया को नंगी कर देता है और उसे अपने लंड पर झुका देता है । पीछे से हिम्मत अपनी दो उंगलिया बिंदिया की चूत में घूस्सा कर अंदर बाहर करने लगता है।

अब तक ग़ुस्से में बैठी बिंदिया इस हमले से सिहर उठती है और उसके अंदर की औरत जाग जाती है।

बिंदिया ;आहह हरामी आहह मै तुझे छोड़ूँगी नहीं आहह।

विक्रान्त;साली छोड़ूँगा तो मै तुझे नहीं बहुत नाटक करती है ना तू । आज देख कैसे तेरी चूत सुजा न दूँ तो मेरा नाम भी विक्रांत नही।

हिम्मत का लंड भी तन चूका था वो नीचे लेट जाता है और बिंदिया को अपने ऊपर खीच कर अपने लंड पर बैठा देता है।

बिंदिया; आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।

हिम्मत;अपने लंड को बिंदिया की चूत पर लगा कर अंदर पेल देता है एक चीख़ के साथ बिंदिया हिम्मत से

चिपक जाती है और हिम्मत नीचे से अपने लंड को बिंदिया की चूत में आगे पीछे करने लगता है।।

थोड़ी ही देर गुज़री थी की बिंदिया पर पीछे से दुसरा ज़ोरदार हमला होता है और वो विक्रांत करता है सटा सट सटा सट वो बिंदिया के चूतडो पर थप्पड़ों की बरसात करने लगता है नीचे से हिम्मत के धक्के और ऊपर से विक्रांत का मरदाना हाथ चूतड़ पर पडने से बिंदिया रोने लगती है मगर उस वक़्त दोनों को उस

बेचारी पर कोई तरस नहीं आता वो बेरहम इंसान उसकी चूतड़ को लाल कर देता है।।

और अपने लंड पर थूक लगा कर उसे बिंदिया के गाण्ड की सुराख़ पर रगडते हुए अंदर की तरफ ड़ालने लगता है।

बिंदिया;नही आहह मेरी आहह मै मर जाऊँगी आहह।

विक्रान्त;मर जा साली रंडी।तेरे रेहने न रहने से मुझे कोई फर्क नहीं पडता आहह।

विक्रान्त;का विराट लंड बिंदिया की गाण्ड के सुराख़ को चीरता हुआ अंदर और अंदर चला जाता है।

अपने दोनों सुराखों में लंड महसूस करके बिंदिया के ऑंसू भी रुक जाते हैं और वो सिसक सिसक के

रोने लगती है । हर धक्का जानलेवा था बिंदिया को साँस लेने भर की मोहलत नहीं मिलती। जहाँ हिम्मत

नशे में बिंदिया को किसी कुतिया की तरह चोद रहा था वहीँ विक्रांत अपने थप्पड का जवाब

दे रहा था जो कई साल पहले बिंदिया ने विक्रांत को मारी थी।विक्रांत और हिम्मत बिंदिया को किसी गली की कुतिया समझकर चोद रहे थे।

उसकी गांड और चूत एक ही समय में दर्द कर रही थी।विक्रांत गांड मारने के साथ साथ बिंदिया की चूचियों पर भी थप्पड़ मार रहा था।थप्पड़ से बिंदिया की गांड तो पहले ही लाल कर दिया था।बिंदिया को आज अपनी औकात पता चल गई थी।
 
दोनो अपना अपना ग़ुस्सा बिंदिया पर निकालने रहते है और बाहर खड़ी रानी और रुक्मणी की जवान

चुत में आग भड़क उठती है । ये देख कर की एक औरत दो मरदों के बीच में कैसे दबी हुए चुद रही है।

रुक्मणी;रानी का हाथ पकड़ के उसे अपने रूम में ले जाती है और देखते ही देखते दोनों माँ बेटी पल भर में नंगी हो जाती है।

रानी;माँ बापु उस बेचारी के साथ ऐसा कैसे कर सकते है

रुक्मणी;रानी के होठो को चुमते हुए उसके निप्पल्स को मरोडते हुए।

बिटिया मरद होते ही ऐसे हैं बेरहम । काश कोई मुझ पर भी ऐसे तरस न खाये आह्ह्ह्ह

रानी;अपने दो उंगलिया रुक्मणी की चूत में डाल देती है और दोनों एक दूसरे को चुमते हुए बिस्तर पर गिर जाती है।

रात के 2 बजे तक हिम्मत और विक्रांत बिंदिया को अलग अलग तरह से चोदते हुए हलकान कर देते है।।

तब जाकर उन तीनो की आँख लगती है ।

उधर गांव में प्रिया के चूत जग जाती है।

जब से देवा ने उसकी ऑंखों के सामने उसकी माँ को चोदा था तबसे उसकी ऑंखों से जैसे नींद गायब

हो गई थी । वो काफी देर से करवट बदल रही थी मगर नींद उसकी ऑंखों से नदारद थी।।

आखीरकार वो कुछ सोचते हुए देवा के पास चली जाती है।

देवा;गहरी नींद में सोया था।

प्रिया ;उसके पास जाकर बैठ जाती है और उसके लंड पर से कंबल हटा देती है।।

देवा;नंगा ही सोया हुआ था।

प्रिया;कुछ देर तक देवा के लंड को देखती रहती है और फिर मुस्कुराते हुए उसे अपने हाथ में

पकड़ लेती है। पहली बार किसी मरद के डण्डे को उसने अपने हाथों में लेकर हिलाई थी । उसका तन बदन

काँपने लगता है। एक जवान मरद उसके सामने नंगा सोया हुआ था। वही आदमी जो थोडी देर पहले उसकी माँ को उसकी ऑंखों के सामने चोद चूका था।।

प्रिया;जवान थी कुँवारी थी वो अपने आप को रोक नहीं पाती और झुक कर देवा के लंड को अपने मुँह में ले लेती है गलप्प गलप्प।

अपने लंड पर दबाव महसूस करके देवा जग जाता है

देवा;प्रिया तुम यहाँ।
 
प्रिया;हाँ देवा मै पागल हो जाऊँगी। मुझे नींद भी नहीं आ रही मुझे कुछ कर देवा मुझे कुछ कर।

देवा की नज़र दरवाज़े की तरफ जाती है और उसे महसूस होता है की कोमल दरवाज़े की आड़ में छुपी हुई सब सुन रही है।।

देवा;नहीं नहीं मै तुझे कुछ नहीं करुँगा तुझे कुछ हो गया तो।

प्रिया;कुछ नहीं होंगा। मुझे कुछ करो ना ....

देवा;मैंने कहा न मै कुछ भी नहीं करने वाला तुझे।

मेरी बहन इस घर में आने वाली है । तू जा यहाँ से वरना मुझे तेरी माँ को आवाज़ देना पडेगा।

प्रिया;हरामी कहीं के अगर तूने मुझे अभी के अभी कुछ नहीं किया न तो मै गांव वालों को बता दूँगी और तेरी बहन कभी इस घर में नहीं आ पाएगी।।

देवा के दिमाग की बती जल जाती है अगर ममता की शादी इस घर में करनी है तो प्रिया का मुँह बंद होना

बाहुत जरुरी था और उसका मुँह एक ही शर्त पर बंद किया जा सकता था उसके मुँह में लंड डाल कर।

उस वक़्त देवा के लंड से अच्छी चीज़ वहां कोई नहीं थी।

देवा;प्रिया की गर्दन पकड़ के उसे अपने लंड पर झुका देता है और उसकी कमर अपने मुँह की तरफ कर देता है । इस तरह दोनों एक दूसरे के लंड और चूत की तरफ घूम जाते है।

प्रिया;अपने मुँह में देवा का लंड लेकर चुसने लगती है और देवा प्रिया की चिकनी चूत को चाटने लगता है गलप्प गलप्प।

देवा;जानता था की अगर उसने प्रिया को चोद दिया तो गलत हो जाएगा। वो अभी कुँवारी थी और अगर वो पेट से हो गई तो उससे उसे शादी भी करनी पड़ सकती है।

देवा;के दिमाग में एक बात बसी हुई थी की चोदो उसी को जो चुदने के बाद अपने गले में टाँगे न डाल दे।

मतलब जिससे शादी न करनी पड़े। पदमा शालु और रश्मि को देवा ने इसलिए चोदा था की वो किसी और की अमानत थी और उन्हें चोदने से उसे उनसे शादी नहीं करने पडती।

देवा;सिर्फ नीलम को अपनी दुल्हन बनाना चाहता था और किसी को नही।

देवा;अपने दाँतो से प्रिया की चूत को कुरेदने लगता है।जवानी की आग में जलती प्रिया चीखने लगती है और कुछ ही पालों में देवा के मुँह पर उसकी चूत से गाढा गाढा पानी निकलने लगता है।
 
देवा;उसे अपने मुँह पर से हटा देता है और प्रिया अपनी चूत के दाने को सहलाती हुई झड़ने लगती है माँ

मा आह्ह्ह्ह्ह्ह।

कमला अपने बिस्तर पर से प्रिया को आवाज़ देती है।

प्रिया अरे ओ प्रिया कहाँ गई।

प्रिया;देवा की तरफ देखती है।

देवा;जा तेरी माँ तुझे बुला रही है और प्रिया अपनी माँ कोमल के पास चलि जाती है।

सुबह देवा नहा कर कोमल से मिलने आता है।

उसके साथ देवकी भी थी।

कोमल;दोनों को ऑंगन में बैठा कर चाय देती है।

देवा;काकी मै आज गांव जा रहा हूँ।

हमारे तरफ से ये रिश्ता पक्का समझो और मै चाहता हूँ की नूतन के साथ ही ममता की भी शादी हो जाए

क्यूं मामी।

देवकी;हाँ कोमल। एक बेटी गांव से जाएगी तो दूसरी गांव में आ जाएगी। तुम क्या कहती हो।।

कोमल;अरे भाई मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है भला।

देवा;तो ठीक है आप मामी के साथ अगले हफ्ते गांव आ जाइये वहीँ शादी की तारिख भी पक्की कर लेंगे।

बहन की शादी है बहुत सी तैयारियॉ करनी है।

कोमल;दिल तो तुझे भेजने को नहीं कर रहा मगर जानती हूँ तुझ पर सारी ज़िम्मेदारियाँ है।

देवकी;हाँ देख न जबसे आया था मेरे पास रुका ही नहीं कोई बात नहीं बेटा बहन तेरी यहीं आने वाली है फिर तो रोज़ आना पडेगा तुझे।

देवा;मुस्कुरा देता है।

कुछ देर उनसे बातें करने के बाद देवा कौशल्या से भी मिलकर उसे घर आने का कहकर अपने गांव के तरफ चल देता है।
 
अपडेट 76

देवा देवकी और कौशल्या से विदाई लेकर अपने गांव अपने माँ रत्ना और बहन ममता के पास आ रहा था।

की तभी उससे ख्याल आता है की सुनार के पास उसने कुछ सामान बनाने के लिए दिया था वो ट्रेक्टर को सुनार की दुकान की तरफ घुमा देता है।

सूनार देवा को देखते ही उसकी चीज़ें उसे थमा देता है और अपनी चीज़ों को वैसे ही पाकर जैसा उसने सोचा था देवा दिल ही दिल में बहुत खुश होता है। वो पैसे देकर तेजी से अपने घर पहुंचना चाहता था।

मगर सफ़र अभी बाकी था।

देवा;शालू के घर के सामने से अपने घर की तरफ जा ही रहा था की उसे एक अजनबी आदमी शालु के घर से कुछ दूर अपनी मोटर साईकल पर सिगरेट पीता हुआ दिखाई देता है।

देवा ने इससे पहले उस आदमी को गांव में कभी नहीं देखा था। वो जब उस अजनबी आदमी की आंखो

का पीछा करता है तो पाता है की वो शालु के घर में देख रहा है और शालु के घर में नीलम और शालु कपडे धो रही है।

शालु और नीलम दोनों का ध्यान उस आदमी की तरफ नहीं था वो और कोई नहीं विक्रांत था।

अपने जान से भी ज़्यादा हरदिल अज़ीज़ नीलम को वो आदमी हवस की निगाहों से देख रहा था। ये देख

देवा का खून गरम हो जाता है और वो विक्रांत के पास ट्रेक्टर रोक के नीचे उतर के विक्रांत के सामने खड़ा हो जाता है।

विक्रान्त;देवा को ऐसे देखता है जैसे बस उसे इसी का इंतज़ार था। अगर वहां गांव के कुछ लोग नहीं होते तो शायद विक्रांत वहीँ अपने बन्दूक की 6 की 6 गोलियां देवा की छाती में उतार देता।

देवा;कौन हो तुम वो गरज कर बोला था।

विक्रान्त भी छाती चौडी करके उसकी ऑखों में देखते हुए कहता है।

विक्रान्त सिंह नाम है मेरा।

देवा;तुझे पहले गांव में कभी नहीं देखा।

विक्रांत ;क्यूँ तू यहाँ का हवालदार है जो हर एक की खबर रखता फिरता है । जा जा अपना काम कर।

देवा;विक्रांत का कन्धा पकड़ के दहाडता हुआ उससे कहता है।

तू जो कोई भी है और जहाँ से भी आया है एक बात अच्छी तरह से सुनले अगर दूबारा इस घर के आस पास भी फटका न ज़मीन में गाड दूंगा। समझा चल रास्ता नाप।

विक्रान्त;तेरे माँ का बैदा मारू मुझे धमकी देता है साले।

वो देवा पर झपटता ही है की उन दोनों की आवाज़ सुनकर गांव के दूसरे लोग भी वहां आ जाते है और शालु भी घर के बाहर आ जाती है।
 
शालु; देवा अरे देवा क्या हुआ

देवा;विक्रांत को धक्का देकर पीछे ढकेल देता है।

कुछ नहीं काकी ये साला मुझे ठीक नहीं लग रहा था इसलिए हालचाल पूछ रहा था इसके।

शालु;अरे रश्मि नीलम देख देवा अपने मामी के घर से आ गया है।

घर तो आ वहां क्या कर रहा है।

देवा;बाद में आता हूँ काकी।

पहले घर हो आता हूँ।

देवा;विक्रांत को घूरता हुआ अपने घर चला जाता है और विक्रांत भी हवेली के तरफ निकल पडता है।

देवा को देखते ही ममता भागते हुए आँगन में से दरवाज़े के पास आ जाती है और उछल कर देवा से लिपट जाती है।

ममता ;भैया मेरे भैया कब से घर आ रहे थे।

माँ देखो भैया आ गए है।

ममता की आवाज़ सुनकर रत्ना भी बाहर निकल आती है और जैसे ही देवा की नज़रें रत्ना से मिलती है दोनों की ऑंखों में एक चमक सी आ जाती हैं।

देवा के वो शब्द की जब मै वापस आऊँगा तुझे अपनी माँ नहीं पत्नी बनाउंगा।

रत्ना के कानो में गूँजने लगते है।

देवा आगे बढाता है और रत्ना को अपने गले से लगा लेता है।

माँ मुझे तेरी बहुत याद आ रही थी।

रत्ना;मुझे भी बेटा बहुत देर कर दिया तुने

आह।

देवा;अपने मज़बूत हाथों से रत्ना की कमर को मसल देता है और धीरे से उसके कानो में कहता है।

माँ मैं मंगलसुत्र लाया हूँ तेरे और ममता के लिये।

ये सुनकर रत्ना का जिस्म थरथरा जाता है । होंठ सूखने लगते है और वो देवा से अलग हो जाती है।

अब ये प्रेम एक तरफ़ा नहीं रहा था कुछ दिन पहले तक सिर्फ देवा अपनी माँ से प्यार करता था।

मगर अब रत्ना के दिल के बंजर ज़मीन पर भी हलकी हलकी बुन्दा बाँदी होने लगी थी । उसे भी

देवा के गैर मौजूदगी में एहसास हुआ था की देवा ही इस घर का असली करता धरता है।

और वही है जो तन से मन से और धन से ममता और उसकी सारी इच्छाये पूरी कर सकता है।

रत्ना;देवा को घर के अंदर ले आती है और तीनो बैठ कर बातें करने लगते है।

रत्ना और ममता यहाँ की बातें देवा को बताने लगती है और देवा वहां की बातें सुनाता है।

देवा से जब रत्ना को पता चलता है की उसे भी ये रिश्ता बहुत पसंद है और वो लोग अगले हफ्ते शादी की तारीख पक्की करने आने वाले हैं तो रत्ना का दिल ख़ुशी से झूम उठता है।
 
मगर ममता का दिल जैसे धडकना भूल जाता है उसे सबसे ज़्यादा गम अपने देवा से बिछड़ने का था।

वो तीनो बातें कर ही रहे थे की वहां रश्मि और नीलम भी आ जाती हैं।

देवा;अरे रश्मि तू कब आई।

वो पूछ रश्मि से रहा था मगर नज़रें नीलम पर जमी हुई थी।

नीलम शर्मा कर ममता के पास बैठ जाती है।

रश्मी;मुझे तो आये पाँच दिन हो गये मगर तुम कहा थे।

देवा;बस अपनी बहना के लिए उसका ससुराल देखने गया था।

ममता वहां से उठकर अंदर अपने रूम में चली जाती है।

रत्ना: मैं कुछ खाने के लिए लाती हूँ।

नीलम;काकी आप बैठो मै ले आती हूँ।

रत्ना;अरे हाँ अच्छा हुआ नीलम तू आ गई। मै तुझे संदेशा भेज के बुलवाने ही वाली थी।

नीलम;क्यूँ काकी।

रत्ना;अरे बेटा घर में अब मेहमानो का आना जाना शुरू रहेगा मै सोच रही थी की पीछे के जो दो नए कमरे हैं उनकी साफ़ सफाई कर लूं । आगे चल कर देवा की शादी के बाद काम आएंगे ।

देवा;माँ मेरी शादी कब करने वाली हो।

रत्ना;बस शादी का नाम सुनकर ये ऐसे उछलता है जैसे बारिश में कछवे और मेंढ़क उछलते है।

पहले बहन को बिदा तो कर दे उसके बाद ले अइयो जोरु भी।

नीलम बुरी तरह शरमा जाती है और उसका शरमाना किसी से छुपता नही।

देवा;नीलम एक अच्छी से चाय बना कर लाओ। दर्द से सर फटा जा रहा है मेरा।

नीलम चाय बनाने चली जाती है और रत्ना कुछ घर के काम निपटाने अंदर चली जाती है।

देवा;क्यों री साली क्या हाल है तेरा।

रश्मी; सुख कर काँटा हुए पड़ी हूँ न भूख लग रही है न पानी पीने को मन कर रहा है।

देवा;लगता है तेरा पति ठीक से ठोकता नहीं तुझे।

रश्मी;नहीं न। इसलिए तो यहाँ आई हूँ ज़रा मेरे ज़ालिम से जी भर कर ठुक जाऊँ मगर तू है की मामी के वहां जा मरा था।

देवा;इधर उधर देख रश्मि की ब्रैस्ट को मरोड़ देता है।

तू चिंता मत कर साली आज रात तेरे घर पर जी भर कर करेंगे तेरी माँ के सामने।

रश्मी;और नीलम कहाँ जाएगी।

देवा;वो तू मुझ पर छोड दे।

दोनो मुस्कुराने लगते है और देवा रत्ना से बात करने अंदर चला जाता है।
 
देवा;रत्ना के पास आकर दो डिबियाँ उसके हाथ में रख देता है।

रत्ना;क्या है ये।

देवा;खुद देख लो।

रत्ना;जब एक एक करके वो डिबियाँ खोलकर देखती है तो हैरान रह जाती है देवा सच में दो मंगलसुत्र लेकर आया था।।

रत्ना; ये सब क्या है देवा।

देवा;अपनी माँ रत्ना को अपनी छाती से लगा लेता है।

माँ ये मेरा प्यार है मै तुझे अपनी पत्नी बनाना चाहता हूँ माँ।

तूझे सब कुछ देना चाहता हूँ।

मै तुझे देवा की रत्ना बनाना चाहता हूँ माँ।

रत्ना;काँपने लगती है।

देवा पागल मत बन ये पाप होगा मै तेरी माँ हूँ।

मैने तुझे जनम दिया है बेटा।

देवा;मुझे कुछ नहीं सुनना।

मै चाहता हूँ तुम लाल शादी वाली साडी पहनकर मेरे रूम में आओ।

और मै तुझे अपने हाथों से ये पहना कर अग्नि को साक्षी मान कर तुझे हमेशा हमेशा के लिए अपना बनाना चाहता हूँ।

अब मुझसे एक पल भी रहा नहीं जा रहा।

रत्ना;दोनों डिबियाँ अपने पास रख लेती है।

और एक हल्की सी चपत देवा के गाल पर मारती है।

नही ऐसा मै कभी नहीं होने दूँगी।

तु मेरा देवा है मेरा बेटा है।

बेटा ही बनकर रहेगा।

तेरे लिए मै अच्छी सी लड़की लाऊँगी जो तुझे ठीक कर देगी । बड़ा आया मुझसे शादी करने वाला।

चल जा यहाँ से उसकी आवाज़ में न वो ग़ुस्सा था और न वो नफरत थी जो एक माँ की आवाज़ में आ जाता है जब कोई बेटा ऐसी नाजायज़ मांग करता है।

देवा;मुस्कुरा देता है अब मुझे यक़ीन हो चला है की मेरी माँ जल्द ही मेरे बाहों में होंगी।

तुझसे एक बात कहना था।

नीलम को यही रोक लो आज की रात वैसे भी ममता शादी की बात को लेकर थोड़ी परेशान लग रही है मुझे। उसका दिल भी बहल जायेगा।

रत्ना;हाँ नीलम को तो मै रोकने ही वाली थी।

नीलम; चाय बना कर वहां ले आती है और देवा की तरफ बढाती है।

देवा;हाथ में चाय लेने के बहाने नीलम को छु लेता है।।

एक तरफ हवस का मारा देवा औरत को अपने नीचे पटक पटक के चोदने के लिए तैयार रहता था।

मगर नीलम का सामना होते ही उसका हाल बेहाल हो जाता था न कुछ वो ठीक से बोल पाता था और न उसे होश रहता था की वो कर क्या रहा है।
 
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