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हाय रे ज़ालिम.......complete

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अपने एकलौते बेटे के नीचे टाँगें खोल कर चुदाना उसे दिवाना बना देता है और वो अपने देवा के चेहरे को पकड़ कर उसके होठो को अपने मुँह में लेकर नीचे से दना दन दना दन हर धक्के का साथ देते हुए कमर को ऊपर उठाने लगती है।

आह।और जोर से बेटा और जोर से

आह खूब डाल मुझे अंदर तक हर उस जगह पहुँच जा जहाँ तेरे बापु भी नहीं पहुँच पाये थे आह्ह्ह्ह।

मेरी चूत सिर्फ तेरी है मेरे लाल आहहह.....

चोद अपनी माँ को जोर जोर से चोद मुझे आहहह।

रत्ना वो पहली औरत थी जो देवा के धक्कों को बड़ी आसानी से सह रही थी और मस्ती में उससे और ज़ोर से पेलने के लिए कह रही थी।

सच कहा है किसी ने ग़ुरू ग़ुरू होता है और चेला चेला।

यहाँ वो औरत थी जिस ने इस सांड को पैदा किया था।

भला वो उस लंड से कैसे पनाह माँगती।

आज देवा को अपनी माँ की ताकत का एहसास हुआ था।

देवा;जितने ज़ोर से लण्ड को चूत में घुसाता

रत्ना उतने ही ताकत से अपनी कमर को ऊपर उठा कर उसे और अंदर ले लेती है।

रत्ना पागल हो गई थी अपने दोनों हाथों के नाखुनो से वो देवा के पीठ को कुरेदते हुए उसे और ज़ोर जोर से चोदने के लिए कह रही थी।

जब माँ पुकारती है तो बेटे को आना पड़ता है।

और देवा वही कर रहा था वो रत्ना को जबरदस्त धक्के के साथ पेल रहा था।

और रत्ना अपने बेटे को इतनी आसानी से रुकने देने वालों में से न थी।

रूम में पच पच फच फच की आवाज़ें गूंज रही थी।

रत्ना के बीच बीच में चीखने की आवाजे।

जब देवा का लण्ड उसके बेच्चेदानि से टकरा जाता था तो उसकी चीख निकल जाती थी।

देवा पसीने में नहा चूका था और उसके नीचे लेटी हुई रत्ना भी दम दम हो गई थी मगर दोनों के कमर लगातार हील रही थी।

देवा की पकड़ अपने माँ की चुचियों पर और मज़बूत होती चली जाती है।

और रत्ना की चूत से पानी टिप टिप करके रिसने लगता है।

वो जोश रात भर कम नहीं होने वाला था ये दोनों अच्छी तरह से जानते थे।

दोनो पिछले ३०मिनट से एक दूसरे को धक्के मारने में लगे हुए थे

और लण्ड की मार चूत पर जारी थी।

रत्ना अपना मुँह खोल देती है और उसकी ज़ुबान बाहर की तरफ निकल आती है।

उसे साँस लेने में दिक्कत हो रही थी।

देवा के धक्कों से उसे सँभलने का मौका नहीं मिल रहा था।

रत्ना -चोद मुझे बेटा चोद अपनी माँ को

अपनी माँ को चोद रहा है ना तु

मेरी चूत में अपना लंड डाल कर जहाँ से मैंने तुझे निकाला था वहीँ अपना मोटा लण्ड डाल के आहह्ह्ह

कैसी है तेरी माँ की चूत मेरे लाल

आह और जोर से चोद आहह।
 
देवा;माँ तेरी चूत मुझे पहले मिल गई होती तो कसम से कहीं भी नहीं जाता दिन रात इसी में पडा रहता मै आहह्ह्ह्ह।

रत्ना;आज से इसी में रखूँगी तुझे दिन रात मुझे चोदेगा ना अपनि माँ को। जब दिल कहेगा मेरा आह ह ह माँ ।

देवा;हाँ माँ आज से बस तुझे ही चोदुँगा मैं हर जगह।

रत्ना;कहाँ कहाँ चोदेगा मुझे आहह्ह्ह

देवा;हर जगह माँ हर जगह।

जब तक तेरे तीनो सुराख़ में नहीं डाल देता तब तक नहीं रुकुंगा आज मैं।

रत्ना;तीनो सुराखों में देवा

देवा;हाँ माँ तेरी चूत और मुँह तो ले चुके है मेरा लण्ड बस तेरी गाण्ड बाकी है आहह उसे भी चोद लूँ एक बार तभी रुकेगा तेरा बेटा आहह।

रत्ना;मैं भी तुझे रुकने नहीं दूंगी बेटा।

हर जगह लूँगी तेरा लंड।

देवा: कहाँ कहाँ.......

रत्ना: खेत में

नहाते हुए

पेशाब करते हुए

किचन में

खाना खाते हुए

हर जगह मुझे चोदना मेरी बेटी की चूत चाटते हुए भी चोदना।

मेरी बहु के सामने नंगी करके चोदना मुझे देवा।

देवा;हाँ माँ मैं चोदुंगा तुझे अपनी बहन ममता की चूत पर झुका कर।

तेरी बहु नीलम के सामने भी तुझे चोदुँगा तुझे आहह्ह्ह ले साली मेरा लंड।

एक घंटे तक जबरदस्त चुदाई चलती है फिर दोनो एक दूसरे से चिपक जाते है।

और लम्बी लम्बी साँसें लेते हुए देवा अपना सारा पानी अपनी माँ रत्ना के चूत में निकालने लगता है

उसके साथ साथ रत्ना भी झड़ती चली जाती है।

दोनो एक दूसरे को चुमते हुए अपनी साँसें ठीक करने लगते है।
 
ठीक उसी समय

शालु के घर में-

कुछ इस तरह का माहौल था।

शालु;अपनी गाण्ड और चूत अपनी बहु नूतन से चटवा रही थी।

और नूतन अपनी सास के कमर पर थप्पड मारते हुए दो उँगलियाँ चूत में घुस्सा कर चूत के दाने को चाट रही थी।

वो दोनों नहीं जानती थी की पप्पू अपने लंड को हाथ में लिए उनके पीछे खड़ा है।

नुतन;को तब पप्पू का एहसास होता है जब पीछे से पप्पू अपने लंड को नूतन के गाण्ड की दरार में घीसने लगता है।

दोनो सास बहु पीछे पलट कर देखते है।

पहले तो सहम जाते है फिर पप्पू को भी नंगा देख शालु समझ जाती है की डरने की कोई बात नहीं है।

नुतन;अपनी टाँगें थोड़ा सा खोल देती है और पप्पू पीछे से अपने लंड पर थूक लगा कर उसे नूतन की चूत में पेल देता है।

नुतन ; उईईईईई माँ....

अपनी सास की चूत को ज़ोर से काट लेती है और शालु भी चीख पड़ती है।

उसकी चीख नीलम के कानो तक पहुँच जाती है और वो नींद से जग जाती है।

नीलम को अपनी माँ के रूम से चीखने की आवाज़ सुनाई देती है वो उठ कर जैसे ही दरवाज़े के करीब पहुँचती है सामने का नज़ारा देख उसके पैर वही थम जाते है।

अंदर एक बहु अपनी सास की चूत चाट रही थी और एक बेटा अपनी माँ के सामने अपनी पत्नी को चोद रहा था।

नीलम;के हाथ पैर काँपने लगते है।

ये सब देख कर वो भाग कर अपने बिस्तर पर जाकर कंबल ओढ़ लेती है।

थर थर काँपती नीलम को यक़ीन करना मुश्किल भी था। उसका दिमाग घुमने लगता है।

और पप्पू के धक्के आज नूतन के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे थे।
 
शालु; छिनाल काट क्यों रही है मेरी चूत आह्हह्हह्हह्हह।

नुतन : आपका बेटा मेरी चूत को उधेड रहा है ना रोकिये न जी आह्ह्ह्ह।

पप्पू;चुप करो छिनाल रंडी हो तुम दोनों साली आज नहीं छोड़ूँगा तुम दोनों को आह्ह्ह्ह।

एक हसीन रात में दो घरों में दो माएँ अपने बेटों से चुद रही थी।

पप्पू;अपना चप्पु नूतन के बाद शालु पर भी चला देता है।

आज सालों बाद उसे अपने लंड में ताकत का अहसास होता है। आज वो जल्दी झडा भी नहीं था।

बल्कि डटकर अपनी माँ और पत्नी की चूत का सामना कर रहा था।

कुछ देर बाद फिर से रत्ना ने देवा के लण्ड को चूस चूस कर खड़ा कर चुकी थी।

दोबारा उसे अपने अंदर लेने की चाह उसे बेचैन कर रही थी।

देवा;अपने पास में पड़ी हुई तेल की बोतल उठा लेता है और उसे अपने लण्ड पर उंडेल कर लंड चिकना कर देता है।

रत्ना को समझते हुए देर नहीं लगती की देवा ऐसा क्यूँ कर रहा है।

लण्ड पर तेल लगाने के बाद देवा रत्ना को एक करवट लेटा देता है

बडी सी चमकती हुए गाण्ड देवा के सामने आ जाती है

इस गाण्ड को तो देख देख कितनी बार देवा अपने लंड को खड़ा करके

शालु पदमा किरण रानी ममता देवकी की चूत में घुसाया करता था।और आज यही गाण्ड देवा के सामने झुकि हुई थी।

देवा;एक थप्पड अपनी माँ रत्ना के गाण्ड पर जड़ देता है।

रत्ना;आहह्ह्ह्ह

क्या करते हो जी पत्नी हूँ मै आपकी।

देवा;उसे सहलाते हुए

छिनाल भी तो है।

इतने सालों से तडपा जो रही है एक गाण्ड पर थप्पड क्या मारा चीख पड़ी साली रंडी।

रत्ना;अहह दर्द होता है ना।

देवा;असली दर्द अब होंगा मेरी जान को।

देवा अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे रत्ना के गाण्ड के भूरे टाइट सुराख़ पर घिसता है

रत्ना;अपनी ऑंखें बंद कर लेती है।

वो जानती थी दर्द भी होंगा मगर मीठा मीठा

और वही होता है देवा के लंड का सुपाडा रत्ना के गाण्ड में अटक जाता है।

रत्ना;आहह गया क्क्या.........

वह पीछे मुड़ कर देखती है।

सिर्फ सामने का हिस्सा गया था और रत्ना की आँखों में ऑंसू आ गये थे।
 
देवा उसे पूरी तरह उलटा लिटा देता है और रत्ना अपने कमर को ऊपर की तरफ उठा लेती है।और अपने दोनों हाथो को पीछे करके अपनी गांड के छेद को फैला देती है।

देवा;दोनों हाथों में कमर को पकड़ कर लंड को धीरे धीरे अपनी माँ रत्ना के गांड में उतारता चला जाता है।

रत्ना अपनी चीखें छूपाने के लिए बेडशीट अपने मुँह में ठूँस लेती है।

मगर गुं गुं हूं की आवाज़ें फिर भी उसके मुँह से निकल रही थी

देवा;तब तक नहीं रुकता जब तक पूरा का पूरा लंड रत्ना की टाइट गाण्ड में नहीं चला जाता।

जब देवा लण्ड को खिचता है तो थोड़ा सा खून भी उसके लंड में लग जाता है।

जो रत्ना के गाण्ड से निकल रहा था।

देवा: बहुत दर्द हुआ क्या मेरी जान।

रत्ना हाँ में सर हिला देती है।

देवा;तुझे दर्द हो रहा था तो मुझे रुकने के लिए बोली क्यूँ नही।

रत्ना;मुड कर देवा की आँखों में देखने लगती है।

बहुत तड़पाया हैं मैंने तुझे

जो तड़प का दर्द तूने सहा है मेरी वजह से उस दर्द के सामने ये दर्द तो कुछ भी नहीं है।

रुक मत खोल दे आज अपनी माँ के हर सुराख़ को।

और देवा अपने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए तेल से सना हुवा लंड गप की आवाज़ के साथ अपनी माँ रत्ना की गांड में पूरा उतार देता है।

रत्न;आअह्हह्हह्हह

और ज़ोर से नही.....

ज़लिम और ज़ुल्म कर अपनी माँ पर

तेरा हर ज़ुल्म सहना चाहती हूँ मै आज से हर रात हर सुबह हर घडी ही चोद मुझे आहह्ह्ह।

देवा: घच घच अपनी माँ की गाण्ड मारने लगता है

हलांकी दोनों को दर्द भी हो रहा था मगर वो मोहब्बत ही क्या जिस में दर्द न हो।

सच्ची मोहब्बत में दर्द भी होता है और उस दर्द का मजा भी खूब होता है।

कुछ देर बाद रत्ना को भी मज़ा आने लगता है और वह अपनी गांड ख़ुशी ख़ुशी मरवाने लगती है देवा के हर धक्के का जबाब देने लगती है।

देवा: आह साली रंडी कितनी टाइट गांड है तेरी रत्ना।मेरा लंड फँस गया था।लगता है आज तक तेरी गांड किसी ने मारी नहीं ये बोलकर देवा रत्ना की चूतड़ पर एक थप्पड़ मारता है।
 
रत्ना: हाँ बेटे मेरी गाँड बिलकुल कुँवारी थी इसे मैंने अपने बेटे के लिए ही संभाल के रखा हुआ था।तेरा बाप को भी वहाँ कभी हाथ लगाने नहीं दिया।आज पूरी तरह फाड़ दे मेरी गांड मेरे बेटे....

देवा: बहुत मस्त गांड है तेरी माँ ।तेरी गाँड में कितनी गर्मी है । मेरा लंड आज धन्य हो गया है अब तो रोज तेरी गांड मारूँगा साली।तेरी मतवाली गांड को आज पूरी खोल दूँगा।

रत्ना: पेल मेरे शेर जैसे मन करे वैसे पेल आज से रत्ना तेरी है जब बोलेगा तब अपनी गांड खोल देगी तेरी माँ.....

देवा: आह्ह्ह माँ कितना मज़ा आ रहा है तेरी गांड मारने में आह्ह्ह साली कितनी गरम है तू। आज से तू मेरी रांड है।

ये कहकर देवा रत्ना की गाण्ड मारने लगता है।एक घंटे तक गांड मारने के बाद देवा रत्ना की गांड में ही झड़ जाता है।इस बीच रत्ना दो बार चुकी थी।

रात गुज़रती रही देवा अपनी माँ की गाण्ड से लेकर चूत तक और चूत से लेकर मुँह तक हर एक सुराख़ खोलता चला गया।

दोनो रात भर न रुके न थके सुबह सुबह जब सूरज निकलने वाला था तब दोनों नंगे एक दूसरे की बाँहों में

लिपट कर सो जाते है।

मगर उस वक़्त भी रत्ना की खवाहिश के मुताबिक देवा अपना लंड रत्ना की चुत में ही रखता है।
 
चुदाई जारी रहेगी......

बहुत सारे कमेंट के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.

Vanraj bhai ratna ki chudai to hoti rahegi kai sare update me.kahani pasand karne ke liye thanks.
 
अपडेट 101

सूरज सर पे आ चूका था जब रत्ना की नींद खुलती है तो वह खुद को एकदम नंगी देवा की बाँहों में पाती है।

देवा का लंड अब भी उसकी चूत में था लेकिन मुर्झाया हुआ था।

रत्ना के उठने से देवा का लंड उसकी चूत से बाहर आ जाता है। रत्ना जब देवा का लौडा देखती है तो उससे रहा नही जाता वह तुरंत उसे चुम लेती है।

फिर रत्ना अपने कपडे उठा के पहनने लगती है तभी वह देवा की तरफ देखती है जो अभी सो रहा था लेकिन नंगा था। रत्ना तब यह फैसला लेती है की वह कपडे तब तक नहीं पहनेगी जब तक उसका देवा उससे नहीं कहता।

और वह नंगी ही रसोई में जाके काम करने लगती है।

देवा की नीन्द खुली तो रत्ना उसे वहाँ नहीं दीखी लेकिन उसके कपडे जमीन पे पड़े थे।

देवा अपने बदन पे लुंगी डाल के रूम से निकल जाता है

वह किचन की तरफ जाता है।

वहाँ उसे रत्ना पूरी नंगी दिखाई देती है।

देवा तुरंत अपनी लुंगी खोल देता है।

रत्ना जब उसके लंड को एकदम खड़ा हुआ देखती है उसकी नज़रें झुक जाती है।

दोनो एक दूसरे के सामने खड़े थे।

देवा धीरे धीरे रत्ना के तरफ बढ़ता है।

और रत्ना के सामने जा के खड़ा हो जाता है।

दोनो अपने पूरे जोश में थे।

देवा रत्ना से चिपक जाता है चिपकने के वजह से देवा का खड़ा लंड रत्ना की जांघ में चला जाता है और रत्ना के चुचे देवा की चौडी छाती में धँस जाते है।

रत्ना: आहह .....रत्ना अपने पति देवा को अपनी बाँहों में भर लेती है।

देवा रत्ना को अपनी बाँहों में समेट लेता है।

देवा रत्ना को अपनी गोद में उठा लेता है और उसे अपने कमरे में ले जाता है और उसके सामने जाके खड़ा हो जाता है।

देवा:रत्ना अपने पति के लौडे को चूम चाट और गीला कर ताकि तुझे रगड के चोदूँ मैं।

और रत्ना के सर को पकड़ के अपने लंड पे झुकाता है।

रत्ना तो पहले से ही बेचैन थी। आह गलप्प गलप्प गप्प गलप्प आह्ह्ह्ह्ह् आह्ह्ह्ह्ह्ह गलप्प।

वो तेजी से देवा के लंड को चूस रही थी। उसका थूक उसकी चूत पे गिर रहा था । गलप्प गलपप

देवा; आह्ह्ह्ह रत्ना आहह आहह। देवा अपनी कमर हिलाने लगता है जैसे रत्ना का मुँह चोद रहा हो। आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह रत्ना आह्ह्ह्ह।
 
देवा रत्ना के चुचे मुँह में लेते हुए चूसने लगता है।

रत्ना; उन्हहह

देवा;इनमे दूध कब आयेगा मेरी रानी।

रत्ना;उन्हह देवा जब तू मुझे दिन रात चोदेगा और मुझे पेट से कर देगा आह्ह्ह मै तेरे बच्चे को पैदा करूँगी तब.....

देवा;चुचक को काटते हुए। तब मुझे दूध पिलायेगी।

रत्ना;तू पीयेगा देवा?

देवा;हाँ हर रात।

रत्ना;कैसे आह्ह्ह्ह।

देवा;तेरी चूत में लौडा डाल के तेरे ऊपर चढ़के तेरे चुचे को अपने मुँह में लेके जब मै तुझे चोदूँगा तब.....

रत्ना;ये सुनके पागल होने लगती है ।देवा मै पिलाऊंगी अपने पति को अपना दूध आह्ह्ह्ह देवा मै तुझे ताजा गरम दूध। मेरे चुचे से पिलाऊँगी आह्ह्ह आह्ह्ह।

अब देवा के लंड में और रत्ना के चूत में फिर से सरसराहट होने लगी थी।

देवा रत्ना को अपने ऊपर खीच लेता है।

तेरी चूत बहुत टाइट है माँ।

देवा रत्न के होठो को चुमते हुए सुन माँ।

मै तुझे और शालु को एक साथ चोदना चाहता हूँ।

और देवा रत्ना की गाण्ड को सहलाने लगता है।

रत्ना; हाँ देवा जो चाहोगे वैसे होगा उन्हहहह मै अब कही भी लुंगी अपने बेटे का लौडा मेरे बेटे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।

देवा का लंड तन चूका था वो रत्ना के पैर चौड़े करके अपने लंड पे उसको बैठाने लगता है अह्ह्ह्ह माँ............

रत्ना- ओह्ह देवा मै अंदर तक चीर गयी हूँ।

और रत्ना अपनी कमर हिलाने लगती है।ओहह्ह्ह्ह मेरे देवा तेरा लौडा कितना मोटा है। आह्ह्ह्ह मेरे बच्चेदानी तक जा रहा है आअह्हह्हह्हह।

देवा: हाँ माँ ये तेरे चूत के लिए ही बना है आह्ह्ह्हह दोनों लगातार एक दूसरे में समाते जा रहे थे। देवा नीचे से रत्ना को चोदे जा रहा था और रत्ना ऊपर से अपनी गाण्ड हिलाने लगती है ।

देवा रत्ना की गाण्ड में ऊँगली डालते हुए आह्ह्ह्ह

आह तेरी गाण्ड भी मारनी है मुझे.....

रत्ना-उन्हह आह्ह्ह्ह ले लो न देवा मेरी गाण्ड।

मुझसे पुछो मत बस मारो मेरी गाण्ड ओहह आह।

रत्ना थकने लगी थे उन्हह सुन उठ सुन न देवा

देवा बोल माँ.....

रत्ना;अपने नीचे लो न आह्ह्ह्ह्ह्ह।

देवा;उसे पलटते हुए नीचे कर लेता है और लौडा जड़ तक पेलने लगता है अहह आह्ह्ह्हह।

रत्ना; हाँ आह्ह्ह्ह्ह्ह।

देवा;रत्ना की चूत से लंड निकाल लेता है।
 
रत्ना:आह्ह्ह क्या हुआ वो जल्दी से देवा के लंड को पकड़ लेती है और अपनी चूत पे घीसने लगती है।

देवा:वहां नहीं तेरी गाण्ड में माँ।

रत्ना:देवा का मतलब समझ गई थी। वो अपने हाथ पे थूकती है और देवा के लंड पे मलती है फिर देवा के लंड को अपनी चूत के पानी से गिला करते हुये।

अपनी गाण्ड के छेद पे लगा देती है।

आह्ह्ह डाल देवा।

देवा : आहह माँ थोड़ा पैर खोल आहह और देवा पक की आवाज़ से अपना लंड अंदर ड़ालने लगता है आह्ह्ह्ह्ह्ह।

देवा का पूरा 9 इंच का लंड रत्ना की तपती हुई गाण्ड में जा चुका था।

देवा रत्ना के चुचे मुंह में ले के चुसने लगता है।

वो बच्चे की तरह उसकी चुचियों को चुसे जा रहा था।

रत्ना: उन्हह देवा मेरी गाँड आह्ह्ह्ह।

देवा: धीरे धीरे रत्ना की गाण्ड मारने लगता है अभी वो आराम से मार रहा था।

रत्ना:ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह करर न इससे भी चौड़ा अपनी माँ की गाण्ड को आहह आह्ह्ह।

अब दोनों पूरे जोश में आ चुके थे। देवा रत्ना के पैर अपने काँधे पे रख देता है जिससे रत्ना की गांड और फ़ैल चुकी थी और देवा का लंड थोड़ा आसानी से अंदर तक जा रहा था।

देवा: “हाय माँ... तेरी गाण्ड तो 18 साल की कुंवारी छोकरी के चूत जैसे कसी हुई है। देखो कितने प्यार से मैंने पूरा लौड़ा तुम्हारी गाण्ड में पेल दिया बताओ तुम्हें दर्द हुआ?” देवा रत्ना की लटकती चूची दबाते हुए बोला। अब देवा रत्ना की गाण्ड से आधा के करीब लण्ड बाहर करके धीरे-धीरे फिर भीतर पेलने लगा था।

रत्ना:“रात को पहली बार जब तेरा लंड मेरी गाँड के अंदर घुसा था तो एक बार तो मेरी जान ही निकल गई थी। लेकिन अब जब अंदर जाता है तो गाण्ड में एक मीठी-मीठी सुरसुरी सी होती है। मारो मेरे राजा। आज फिर से तुमने मुझे एक नया मजा दिया है, एक नये स्वाद से अवगत कराया है...” रत्ना ने देवा की चूची दबाते हाथ को पकड़कर अपनी चूत पर रखते हुए कहा।

अब देवा ने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। नीचे से रत्ना भी गाण्ड उछालने लगी थी। देवा समझ गया की रत्ना पूरी मस्ती में है, और गाण्ड मरवाने का मजा लूट रही है। अगले 5 मिनट तक देवा ने अपनी माँ रत्ना की गाण्ड खुब कस के मारी। देवा पूरा लौड़ा गाण्ड से बाहर खींचकर एक ही धक्के में जड़ तक पेल रहा था। तेल से पूरी चिकनी गाण्ड में लण्ड ‘पक-पक’ करता अंदर-बाहर हो रहा था।

थोड़ी देर बाद रत्ना की गाण्ड से लौड़ा निकाल लिया, फिर रत्ना को कुतिया बनाकर पीछे से चढ़कर अपनी माँ रत्ना की चूत में एक ही शाट में पूरा लण्ड पेल दिया और रत्ना को बेतहाशा चोदने लगा।
 
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