संदूक में क्या है?अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।
अपडेट 100 बहुत खास होनेवाला है जिसमे रत्ना की जबरदस्त चुदाई होनेवाली है।
बहुत सारे कमेंट और लाइक के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
मगर एक बात की कसम खा ले अभी की जिस किसी ने भी तेरे बापू के साथ ये किया है तू उसे भी एक दिन इसी तरह अर्थी पर लिटा के दम लेगा।
रत्ना की आवाज़ में दर्द था। गुस्सा था।
एक जूनून था और इन्साफ की गुहार थी अपने बेटे से की अगर तूने अपने बाप के कातिल को सजा नहीं दिया तो तू मेरी औलाद नही।
देवा;अपनी माँ के सर पर हाथ रख देता है।
मै कसम खाता हूँ माँ तेरे सर की।
आज मै अपने पिता को आग दे रहा हूँ।
बहुत जल्द उनका कातिल भी यहाँ इसी तरह अर्थी पर लेटा होगा।
एक बेटे ने अपने माँ के सर पर
अपने बाप की लाश के सामने कसम खाया था।
जैसे जैसे आग उस चिता से लिपटी चलि जाती है वैसे वैसे देवा के अंदर की आग भी सुलगती चली जाती है।
गुस्सा और जूनून अपने चरम पर पहुँच जाता है।
रुक्मणी देवा और रत्ना तीनो जानते थी की इस के पीछे कौन है।
सभी गांव वाले चिता को आग देकर धीरे-धीरे लौट जाते हैं लेकिन देवा वहीं से बैठा रहता है। तब उसकी मां रत्ना बाद में उसे घर चलने के लिए बोलती है।
रत्ना: कब तक बैठा रहेगा बेटा चल हम लोग घर चलते हैं।
देवा: तुम घर जाओ मैं थोड़ी देर रुक के आता हूं कुछ देर मै अकेले रहना चाहता हूं।
यह सुनकर रत्ना अपने घर लौट आती है ।
तभी देवा को फिर से वो तीनों लोग दिखने लगते है अब देवा को समझ में आने लगा कि वो तीनों कौन है।चूँकि पहली बार सिर्फ एक अधेड़ आदमी मिला था उसने भी अपना चेहरा ढक रखा था और उस दिन वे तीनो एक साथ रात में ही मिले थे और देवा उनका चेहरा ठीक से नहीं देख पाया था। आज भी रात हो चुकी है इसलिए देवा को साफ़ नही दिख रहे है और पिछली बार की तरह तीनों ने अपना चेहरा भी ढका हुआ है।
देवा:आप लोग अपना चेहरा क्यों हमेशा मुझसे छुपाये रहते है और सिर्फ मुझे दिखाई देते है क्यों।
देवा का बाप:बेटे हमारे पास अब इंसानो की तरह शरीर
नही है इसलिए हम सभी को दिखाई नहीं देते है । हमारा चेहरा भी सड़ गल चूका है तुम देख नहीं पाओगे।
तुम्हारे साथ हमारा गहरा रिश्ता है इसलिए तुम सिर्फ हमारी परछाई देख रहे हो।
एक देवा का बाप था और बाकि दोनों रुक्मिणी के माता पिता थे।
देवा के पिता बोलते हैं बेटे हमारी आत्मा बहुत दिन से भटक रही थी। आज हमें इस योनि से मुक्ति मिल गई है।
अब हमें ईश्वर के पास जाना ही होगा क्योंकि हमारा बुलावा आ चुका है बड़ी मुश्किल से हमने इतनी देर तक सिर्फ इसलिए इंतजार किया ताकि हम तुमसे अकेले में मिल सके।
देवा: बापू मैं जानना चाहता हूं कि आप लोगों का यह हाल किसने और कैसे किया था क्या हमें बता सकते हैं
आप लोग।
देवा का बाप: बेटे हम ज्यादा कुछ तो नहीं बता सकते लेकिन हमको जिस आदमी ने मारा उसका नाम है हिम्मत राव क्योंकि इससे ज्यादा हम नहीं बता सकते हमें यहाँ ज्यादा देर रुकने का इजाजत नहीं है। हमें जल्द से जल्द जाना होगा।
देवा: मैं आप तीनों से ये वादा करता हूँ की हिम्मत राव की उसके किये की सजा जरूर मिलेगी।
फिर तीनों देवा से आंसू भरी बिदाई लेते हैं और धीरे-धीरे आकाश की तरफ जाकर अदृश्य हो जाते है।
उसके लूल्ली में वो ताकत नहीं था जो औरत को चीखने पर मजबूर कर दे।
दोनो औरतें अपनी चूत की आग आपस में बुझा रही थी।
नुतन को पहले ममता की चूत चाटने में मजा आता था और अब ये आदत उसने अपनी सास को भी लगा दी थी।
नीलम और पप्पू के सो जाने के बाद दोनों सास बहु
शालु के रूम में रात भर नंगी रहती और अपनी चूत में बैगन डाल डाल कर उसे ठण्डा करने की कोशिश करती। मगर लंड जैसा मज़ा किसी में नहीं आता।
नुतन पप्पू नीलम और शालु को खाना देने के बाद उनके साथ खाना खाने बैठ जाती है।
नीलम और पप्पू अपनी धुन में खाना खा रहे थे मगर शालु की नज़रें बार बार नूतन के ब्रैस्ट की तरफ जा रही थी और नूतन बार बार अपने होठो को दाँतो के नीचे दबा कर शालु से कुछ कहना चाहती थी।
पप्पू और नीलम खाना खा कर रूम में सोने चले जाते है
नुतन सारे बर्तन उठा कर उन्हें धोने चलि जाती है।
शालु भी उसका हाथ बटाने उसके साथ घर के पीछे चलि जाती है।
वो लोग वहीँ अपने कपडे और बर्तन धोया करते थे।
नुतन सलवार कमीज में थी और शालु साडी में।
दोनो आस पास बैठ कर बर्तन साफ़ कर रही थी।
दोनो चुप थी मगर आँखें सब कुछ कह रही थी।
शालु;क्यूँ री छिनाल क्या देखे जा रही है कब से मुझे।
नुतन ;तेरी चूत की महक आ रही थी मुझे
वो सूँघ रही थी।
शालु; रंडी है तू नूतन मुझे पता होता तो कभी मेरे बेटे से तेरी शादी नहीं करती।
नुतन ;तुम भी कहाँ कम हो सासु माँ। देवा से भी चुदवाती हो अपने बेटे से भी और अब अपनी बहु की चूत के पीछे पड़ी हो।
शालु;चल जल्दी जल्दी साफ़ कर छिनाल कहीं की फिर तुझे बताती हूँ ।