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हाय रे ज़ालिम.......complete

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अपनी माँ के मुह से देवा की मर्दांनगी की प्रशंसा सुनके पप्पू भड़क गया था और जोर जोर से अपनी माँ शालु को पेल रहा था।

नुतन बड़ी बड़ी आँखों से अपनी सास को अपने पति से चुद्वाते देख अपनी चूत रगड रही थी।

कुछ पल ऐसे ही पप्पू शालु को चोदते हुए पोजीशन बदलता है और अब पीछे से ही शालु को स्लैप पर लेटाये अपना लंड धडा धड पेलने लगता है शालू की चूत में।

कुछ पल बाद पप्पू अपना लंड शालु की चूत से बाहर निकालता है और सामने बैठी अपनी नंगी बीवी के पास ले जाता है जो अब भी नहीं झडी थी, पर पूरी नंगी थी।

नुतन पप्पू को अपना छोटा सा लंड हिलाता हुआ देख कर उसकी तरफ आते हुए समझ गयी की पप्पू झड़ने वाला है और अपना पानी उसके मुँह में गिराना चाहता है।

तो नूतन ने भी अपना हाथ उसके लंड पर ले गयी और बैठे हुए ही लंड को अपने होठों के ऊपर रखकर हिलाने लगी और कुछ ही पलों में पप्पू ने अपना वीर्य छोड दिया।

उसका वीर्य ज्यादा नहीं था पर कुछ बूँद वीर्य की नूतन के मुँह से निकलकर उसके नंगी चुचियों पर गिर गयी थी।

कुछ देर तक पप्पू के लंड से वीर्य की सारी बूँदे नूतन निकाल चुकी थी।

और फिर नूतन ने अपने जिस्म पर लगा हुआ सारा वीर्य अपने हाथ से इकठा कर लिया और अपने मुँह में डालकर निगलने लगी।

शालु भी उठ खड़ी हुई और अपने बेटे के सामने जमीन पर बैठी और उसके लंड के टोपे पे लगे हुए कुछ वीर्य को चाटने लगी और चाट चाट कर उसका लंड साफ़ कर दिया।
 
अगला आपडेट आज ही थोड़ी देर में।

इस कहानी के 200 पेज पूरा होने पर सभी को थैंक्स
 
अपडेट 108

पप्पू के घर की रसोई में कुछ पल पहले ही पप्पू ने अपनी माँ की चूत को अपनी ही बीवी के सामने चोदा था और अपना वीर्य अपनी बीवी और माँ के मुँह में छोड़ा था।

पप्पू तो जल्दी झड ही जाता है पर शालु और नूतन चुदक्कड़ औरते है उनकी भूख इतनी जल्दी कभी शांत नहीं होती…

दूसरी तरफ,,, वीना का घर

नीलम को इन्तजार करते हुए 15 मिनट हो चुके थे की तभी दरवाजे पे दस्तक होती है।

वीना की माँ तेजा दरवाजा खोलती है,, यह तेजा का बेटा वरुण था वो भी खेतो में काम करता है।

उमर में वीणा से २ साल छोटा है

वरून को देखके नीलम मुस्कुराती है और वरुण भी उसे देख के मुस्कराता है।

वरुण: नमस्ते दीदी आप यहाँ कैसी।

नीलम: वरुण भाई वीणा से मिलने आयी हु वो नहा रही है तो इन्तेजार कर रही हूँ।

वरुण: अच्छा ठीक है,, आप कुछ लोगी चाय?? पानी

नीलम: नही वरुण तुम मै ठीक हूँ।तुम आराम करो खेतो पे काम होगा थक गए होगे।

और वरुण अंदर चला जाता है।

नीलम वहीँ बैठे हुए फिर से इन्तेजार करने लगती है पर तभी उसके कानो में वो ही आवाज पड़ती है जो उसने कल रात अपने घर में और आज सुबह देवा के घर में सुनी थी…

नीलम के तन बदन में अचानक से बिजली दौड़ती है और वो गद्दे को जोर से दबा देती है ।खटिये को जोर से जब वो दबाती है तब उससे गद्दे के नीचे कोई चौकोर चीज के होने का आभास होता है।

और वो तुरंत अपना हाथ से गद्दे को थोड़ा ऊपर उठाती है और चौंक जाती है यह जान कर की वो चौकोर डब्बा एक कंडोम का पैकेट होता है…

नीलम का दिमाग कंडोम के पैकेट को देख कर सटक जाता है और वो सोचने लगती है हे भगवन यह कंडोम इस घर में क्या कर रहा है।

दरसल नीलम ने ऐसा इसलिए कहा क्युकी वीणा के पिता तो १० साल पहले ही छत्त से गिरकर मर गए थे और वीणा की माँ विधवा हो गयी थी और ना हीं वरुण की शादी हुई है…जिसका यह मतलब निकलता है की इस घर मै सिर्फ वीना,वरुण और तेजा रहते है यानी माँ बेटी और बेटा, तो भला इस घर में कंडोम का पैकेट क्या कर रहा है??

और तभी उसके दिमाग में वो दृश्य आता है जिसमे उसका भाई पप्पू अपनी माँ को चोद रहा है और देवा अपनी माँ को…

और वो यह सोचती है…इसका मतलब वीणा का भाई भी अपनी माँ को…
 
नीलम यह पक्की तरह तो नहीं कह सकती थी की वरुण अपनी माँ को चोदता है, पर तभी नीलम के कान में एक और सिसकारी गूँजती है और वो इस बार अन्दाजा लगा लेती है की यह आवाज रसोई से आ रही थी।

वह नाजुक कदमों से खड़ी होती है और धीरे धीरे बिना कोई आवाज करे रसोई की तरफ कदम बढ़ने लगती है।

दूसरी तरफ,,, पप्पू का घर

पप्पू के झड़ने के बाद वो अपने कपडे ठीक करके रसोई के बाहर आ गया था, पर नूतन और शालु अब भी गरम थी।

दोनो पूरी नंगी एक दूसरे के सामने खड़े हुई थी रसोई में

पर शालु ने खुद पर क़ाबू करते हुए कहा।

शालु: कपडे पहन ले पप्पू के बापू बाहर ही बैठे है अंदर आ सकते है कभी भी।

शालु यह कहते हुए अपने कपडे पहनने लगी और नूतन अपने कपडे उठा कर पप्पू के पीछे पीछे अपने कमरे में चलि गयी।

दूसरी तरफ वीना का घर

नीलम अब रसोई के काफी क़रीब पहुच चुकी थी और अब तक सिसकियो की आवाज भी तेज हो चुकी थी। नीलम का दिल अचानक तेजी से धडक रहा था।

वह चलते हुए जैसे ही रसोई के पास पहुची पीछे से दरवाजे पे दस्तक हुई और नीलम भागते हुए दोबारा खटिये पर आकर बैठ गयी।

सिसकियो की आवाज अब बंद हो गयी थी और कुछ ही पल में नीलम ने देखा की रसोई से तेजा बाहर आ रही है और दरवाजे की तरफ बढ़ रही है।

नीलम की साँसे काफी तेज चल रही थी वो सोच रही थी की घर में तो सिर्फ तेजा और वरुण है क्युकी वीणा तो नहा रही है तो यह सिसकी की आवाज सिर्फ तेजा की हो सकती थी और यह कंडोम तो एक मरद के काम की चीज है यानी वरुण।

तेजा ने अब दरवाजा खोला और सामने पड़ोस वाली काकी थी । वह भी अंदर आ कर नीलम के बराबर में बैठ गयी और साथ में तेजा भी और वो दोनों गप्पपे लडाने लगी।

नीलम को अब समझ आ चुका था की इस घर में भी कोई गड़बड़ है,,

कुछ सोचने के बाद नीलम उठकर जाने लगी।

नीलम: अच्छा काकी मै जा रही हूँ। वीना से कहना मै बादमे आके मिल लुंगी उससे।

तेजा: अरे बेटी इंतजार कर ले थोड़ा और आती ही होगी वो।

नीलम: नहीं काकी मुझे घर जाना है अब मै बाद में मिल लुंगी।

और नीलम अपने घर की ओर चल दी,, रास्ते में अपने आपसे कई सवाल करते हुए की आखिर यह सब हो क्या रहा है .....क्या यह आज कल बहुत आम हो गया है क्या??
 
दूसरी तरफ....देवा का घर।

रत्ना अपने नये पति की बाहों में चैन से नंगी सो रही थी उससे चिपके हुए....की तभी देवा की आँख खुली उसने अपनी नजर घडी पर दौड़ायी जो इस वक़्त दोपहर के 1 बजा रही थी।

फिर उसकी नजर अपने बराबर में पड़ी नंगी रत्ना पर गयी और वो उसके नंगे जिस्म को देखते हुए ख़ुशी से (मन में) “आज तो मजा ही आ गया क्या मस्त औरत है मेरी अपनी माँ... सच्ची अब तक कितनी औरतो को छोड चुका हूँ…पदमा,रुक्मनि,देवकी,किरण,प्रिया,काशी,बिंदिया,रश्मि ममता,शालु,कोमल,रानी,रुक्मणी…पर अपनी ही माँ को चोदने का अलग ही एहसास हुआ था।

जो मजा अपनी ही माँ की चुत में लण्ड डाल कर मिला था वो किसी की चुदाई कर के नहीं मिला आज तक…

याहाँ तक की ममता को भी चोद कर इतना मजा कभी नहीं आया।।

और यह सोचते हुए देवा की नजर अपनी माँ की चूत पर गयी।

रत्ना अपने पैर खोले हुए सो रही थी इस वजह से उसकी चूत का दाना देवा को साफ़ नजर आ रहा था…

रत्ना पीठ के बल लेटी थी इसलिए उसके चुचे भी देवा को दिख रहे थे।

देवा मुस्कुराते हुए अपने बराबर में लेटी नंगी रत्ना के जिस्म को देख रहा था और अपनी कामयाबी पे खुश हो रहा था।

देवा अब जान चुका था की उसकी पूरी जिंदगी में चुदाई भरी पड़ी है…

उसे अब भी बहुत औरतो को चोदना है और अपने लंड का दास बनाना है।

पर अभी वो सिर्फ अपनी माँ को अच्छे से निचोड़ना चाहता था…

नंगी रत्ना को देखकर देवा का लंड खड़ा होने लगता है देवा अपनी माँ के चूत के छेद पर अपना लंड सेट करता है और सोते हुई रत्ना की चूत में अपना मोटा लंड एक ही झटके में आधा पेल देता है रत्ना नींद में ही कसमसाने लगती है और देवा अपनी माँ के रसीले होंठो को चूसता हुए अपनी माँ को पेलने लगता है।जब देवा का लंड पूरा रत्ना की बच्चेदानी से टकराता है तो रत्ना पूरी तरह जग जाती है और अपनी गांड उछाल उछाल कर देवा से चुदवाने लगती है।

रत्ना:आह्ह्ह बेटा क्या कर रहा था मुझे उठा दिया होता ऐसे सोते हुए कोई अपनी माँ की बुर में लंड पेलता है क्या।

देवा:माँ तेरी चूत ही इतनी मस्त है की मुझसे सबर नहीं होता । जी चाहता है दिन रात मेरा लंड तेरी चूत में ही रहे हर समय हर पल।

रत्ना:मुझे भी अपनी चूत में हर पल तेरा लंड चाहिए बेटा।चोद अपनी माँ को हर समय जैसे तेरा मन करे वैसे चोद मुझे।मेरी जन्मों जन्मों की प्यास बुझा दे।

देवा: ले साली रंडी ले अपने चूत में मेरा लंड।

ये कहकर देवा अपनी माँ को कुतिया बना देता है और अपना लंड अपनी माँ की गीली चूत में एक झटके में ही पूरा पेल देता है और अपनी कुतिया बनी माँ को किसी रंडी की तरह चोदने लगता है।
 
आधा घंटा की जबरदस्त चुदाई के बाद देवा अपना सारा वीर्य अपनी माँ के मुँह में निकाल देता है जिसे रत्ना बहुत मज़े से चाट चाट के निगल लेती है।

अभी भी दोनों लगता था की प्यासे है।

देवा रत्ना को हर जगह नंगा करके चोदना चाहता था।

वह उसे रात दिन अपने लंड के नीचे रखना चाहता था

वह उसके तीनो सुराखों के बिलकुल अंदर तक अपना लंड डालकर पानी निकालना चाहता था…

पर अभी उसे यह एहसास होता है की उसका खेत पर जाना जरुरी है क्युकी आज से उसके खेत के बाहरी भाग में बीज बोने का काम शुरू करना था।

देवा न चाहते हुए भी उठता है और अपने कपडे पहनने लगता है, रत्ना की भी नींद खुल जाती है जब देवा थोड़ी आवाजे करता है।

देव: माँ मै जरा खेत पे जा रहा हु शाम तक लौट आउंगा

रत्ना: बेटा आज मत जा खेत पर अपनी माँ के पास ही रह।

देवा: नहीं माँ जाना जरुरी है इन्ही दिनों फसल बोनी होती है अगर देर कर दी तो समय चला जाएगा।

रत्ना: दुखी मन से नंगी बिस्तर से उठते हुए बैठी रहती है।

जल्दी आना मै इन्तजार करुँगी बेटा…

देवा: मेरी जान तुझसे ज्यादा मुझे जल्दी होगी घर आने की।

रत्ना भी मुस्कुराते हुए बेड पर से उठ कर अपनी सलवार उठाने लगती है…

देवा: नहीं जान सलवार नहीं ब्रा पेंटी पहनो और उसके ऊपर एक प्यारा सा रात वाला गाउन डाल लो और मेरा इन्तजार करना…

यह कहते हुए देवा रत्ना की चुचियों को दबा कर चला जाता है।

रत्ना थोड़ी देर वैसे ही पडी रहती है नंगी और फिर उठकर कर अलमारी से अपनी सबसे खूबसूरत ब्रा और पेंटी निकालती है और शीशे की तरफ अपनी पीठ पलटकर पहनने लगती है।

और पीछे मुडकर अपनी मोटी गांड देखके मुस्कुराती है…

“हाय राम एक ही दिन में कितनी फूला दी है देवा ने”

ये सोचते हुए रत्ना ब्रा पेंटी में ही बैडरूम के बाहर आकर पहले घर का दरवाजा बंद करती है और फिर रसोई में आकर अपने देवा के लिए रात का खाना बनाने लगती है…
 
अपडेट 109

देवा बड़ी ख़ुशी में अपने घर से निकलते हुए अपने खेतो की तरफ जाने लगता है।

उसे उसकी जीत की बहुत ख़ुशी थी।

आज उसने एक किला जो फ़तह किया था, जो हर बेटे के नसिब में नहीं होता, पर हर बेटा मन ही मन उस किले को फ़तह करना चाहता है।

वह बड़ी ख़ुशी में अपनी खेतो की तरफ जा रहा था की तभी उसे सामने से नीलम आती हुई दिखाई दी जो थोड़ी देर पहले ही तेजा के घर से अपने घर की तरफ निकली थी।

नीलम भी अपनी दुनिया में गुम थी और सोच रही थी की क्या यह चुदाई का खेल इतना आम हो गया है आज कल की घर वालो के बीच भी हो सकती है?

क्या चुदाई इतनी आम हो चुकी है की माँ बेटे जैसा नाजुक रिश्ता भी नहीं टिकता आज कल?

वह अपने मन में कुछ ऐसे ही सवाल लिए हुए अपने घर की तरफ जा रही थी की तभी उसे भी देवा आता हुआ दिखाई दिया।

देवा को देखते ही नीलम को सुबह वाली बाते याद आने लगी।

उसकी आँखों के सामने वो दृश्य घुमने लगे जिनमे देवा अपनी माँ की गांड मार रहा था और उसकी माँ उसे और जोर से चोदने को बोल रही थी…

साथ ही साथ उसके दिमाग में रात वाली घटना भी घुमने लगी जिसमे उसका अपना भाई पप्पू अपनी माँ शालु और अपनी बीवी नूतन को एक साथ एक ही बिस्तर पर नंगा करके चोद रहा था।

ये सब उसके दिमाग में कुछ ही पलो में आता गया और तभी तेजा के घर में जो बात हुई थी वो भी उसके दिमाग में आयी और उसके सवाल का जवाब थोड़ा साफ़ होता हुआ लगने लगा।

3 जगहो पर एक जैसी स्थिति ने नीलम के दिमाग में एक बात डाल दी थी जिससे नीलम धीरे धीरे मानने लगी थी।

उसे लगने लगा था की यह चीज लगता है बहुत आम हो चुकी है…

ये सब सोचते हुए उसकी नजर सामने पड़ी, देवा उसको देखते हुए और मुस्कुराते हुए उसकी ही तरफ आ रहा था।
 
नीलम ने सामने से आते देवा को देख अपने कदम धीमे कर दिए, देवा ने ध्यान दिया की आज नीलम के चेहरे पर पहली वाली मुस्कान नहीं थी जो अक्सर उसके चेहरे पर आती थी जब वो देवा को देखती थी।

देवा को थोड़ी हैरानी हुई, क्युकी ऐसा पहली बार हुआ था की नीलम उसे खुश नही लगी।

वह समझ गया कुछ तो बात है।

दोस्तो इसे कहते है सच्चा प्यार…

जो बिना बोले ही सब समझ जाता है,, सिर्फ देखने भर से ही आशिक़ को पता चल गया की उसकी लैला दुखी है या फिर वो परेशान है किसी बात से।

नीलम को परेशान देख देवा भी हँसना बंद कर देता है और उसकी तरफ बढ़ता हुआ उसके सामने आ जाता है।

वो हँसी जिसके है हम दीवाने।

वो हुस्न का जादु जिसके है हम मस्ताने,

वो खिला हुआ चेहरा जिसकी है हमे आदत,

उस चेहरे पे ये कैसी शिकन?

नीलम देवा के मुँह से बात सुनकर थोड़ी चिंता में आ गई। वो नहीं चाहती थी की देवा यह बात अभी जाने की उसने सुबह उसके घर पर सब देखा था।

वह अब भी देवा से उतना ही प्यार करती थी, जितना कल तक करती आयी है।

इसलिये उसने सोचा की देवा को कुछ नहीं पता लगना चाहिए और उसके लिए मुझे उसके सामने ऐसा ही दीखना होगा की मै किसी बात को लेकर सोच में हूँ।

ये बात मन में ठानते हुए नीलम देवा की तरफ देखते हुए मुस्कराती है, नीलम को मुस्कराता देख देवा भी फिर से खिल उठता है और उससे कहता है।

क्या बात है आपका चेहरा बोल रहा है की आपके मन में कोई बात है जिसे लेकर आप परेशान हो?

नीलम देवा के मुँह से यह सुनकर सम्भलती हुई बोलती है

“नननहहीं कोई बात नहीं है, भला मै क्यों परेशान होने लगी”

देवा को कुछ गड़बड़ लगती है नीलम के सँभालते हुए बोलने से, पर वो ज्यादा नहीं सोचता और नीलम की हँसी को याद करके सोचता है शायद कुछ ज्यादा बड़ी बात नहीं होगी। मेरी जान तो अब खुश ही लग रही है…

और ऐसा कहते हुए वो नीलम की तरफ और क़रीब में आते हुए उसके माथे पर आ रही उसकी बालों की इक लट को ऊपर करता हुआ उसके माथे को चुम्म लेता है।

जैसे नीलम के शरीर में एक बिजली सी दौड़ती है और उसे भी देवा पर प्यार आने लगता है।।पर तभी उसे वो रात और सुबह वाली घटना याद आती है और वो वैसे ही स्थिर खड़ी रहती है।

देवा प्यार से उसके हाथो को पकडता है और दोनों चलने लगते है।

नीलम मैंने माँ से कह दिया है हमारे रिश्ते के बारे में काकी से बात करने को…देवा ने कहा।

नीलम को यह सुनकर मन ही मन बहुत ख़ुशी हुई की देवा अपनी माँ के साथ उसका हाथ माँगेंगा और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी।

दोनो एक दूसरे के हाथ प्रेमियो की तरह पकडे हुए पप्पू के घर की तरफ बढ़ रहे थे…

और बीच बीच में कुछ बाते भी कर रहे थे।

थोड़ी देर बाद देवा ने नीलम को उसके घर के बाहर छोड दिया और अपने खेतो की तरफ बढ़ने लगा।
 
अपने खेतो के पास जाते हुए उसे एक झोपडी दिखाई दी, वो पदमा की थी, और देवा को याद आया की पदमा से मिले हुए कितने दिन हो चुके है और पदमा तो उसके बच्चे की माँ भी बनने वाली है।

यह सोचते हुए देवा ने पदमा के घर का दरवाजा खटखटाया।

कुछ पल बाद पदमा ने ही दरवाजा खोला।

अरे देवा बेटा…

देवा पदमा के मुँह से बेटा सुनकर थोड़ा आश्चर्य में आया पर जब उसकी नजर थोड़े पास बैठे पदमा के पति पर पड़ी तो वह समझ गया।

नमस्ते पदमा काकी, वो मै अपने खेतो की तरफ जा रहा था तो सोचा आपका हाल चल पता करते चलुँ।

और बिशन काका(पदमा का पति) सब बढ़िया??

बिशन: हाँ बिटवा सब ठीक है…तू बता आज कल कहाँ रहता है…दिखता नही।

अरे काका हम तो यहीं रहते है पर आप नहीं दीखते…

बिशन: बिटुआ तुम तो जानत हो हम गाड़ी चलावत है तो बहुत दिंनो तक नही आवत घर पर…अब कुछ दिनों छुट्टी लेवत…हमरी लुगाई पेट से जो होवत…

देवा: अच्छा काका। मुझे पता है की काकी माँ बनने वाली है। वैसे कौन सा महीना चल रहा है।

देवा ने मुस्कुराते हुए पदमा को आँख मारी और पदमा शर्म में अपना चेहरा दूसरी तरफ करके बोलती है।

पाँचवा चल रहा है देवा बेटा।

देव: अच्छा काकी…ख्याल रख्ना अपना।

और काका तुम बताओ तबियत ठीक है?

बिशन: कहाँ बिटवा आज काल,,उमर खत्म होवत कहाँ ठीक रहत,,,अब अपने नए बिटवा की शकल देखत हम तीर्थ हो आवत।

अरे काका ऐसा न बोलो अभी तो आप काफी जवान हो…

ये बात बोलते हुए उसने पदमा की तरफ देखा जो देवा को एक थप्पड़ दिखा रही थी…

कुछ देर देवा पदमा और बिशन से बाते करता रहा, पदमा को अच्छा लगा की देवा उसका हाल चाल जानने तो आया।

फिर देवा पदमा के घर से निकल कर अपने खेतो की तरफ बिना रुके चल दिया और वहां पहुच कर उसने कुछ नए मजदुर बुलवाये और खेतो में हल चलवाना शुरू करवाया…अब देवा को इस साल की फसल के लिए बीज बोने थे तो हल चलवाना ही था…

1 हफ्ता तो हल चलने में ही लगने वाला था यह सोचते हुए देवा अपने खेतो का मुआयाना कर रहा था।

दोपहर से शाम होने लगी थी देवा आज खेतो में बहुत काम कर रहा था।

कुछ पल बाद शाम के 6 बज चुके थे, देवा दोपहर से मजदूरो से अपने खेतो में काम करवा रहा था, पर अब समय आ चुका था घर जाने का।

तो देवा ने मजदूरो को उसकी देहाड़ी दी और उन्हें रवाना करके सारा सामान खेतो के अस्तबल में रखवाया।

अस्तबल को ताला लगा कर देवा अपने घर की तरफ जा ही रहा था की उसे रुक्मणी और रानी की याद आई, और वो अपना रास्ता बदलकर हवेली की तरफ बढ़ने लगा।
 
अपडेट 110

दूसरी तरफ..... देवा का घर।

रत्ना अभी भी सिर्फ ब्रा और पेंटी पहने हुए ही घर में घुम रही थी, वो सुबह से इसी हाल में घुम रही थी।

पहले उसने ब्रा पेंटी पहनी अपने बेटे देवा के लिए रसोई मै खाना बनाया और फिर घर के बाकी काम भी, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना, पोछा लगाना, कपडे धोना। सारा काम सिर्फ ब्रा और पेंटी पहने ही किया था…और उसके गले में मंगलसुत्र भी था देवा के नाम का।

रत्ना अपने बेटे की आदर्श पत्नी बन चुकी थी।

देवा ने उससे जाने से पहले कहा था की वो एक नाईट गाउन में उसका शाम को इन्तजार करे।

रत्ना की नजर घडी पर गयी उसमे ६:३० बज चुके थे।

देवा किसी भी पल आता होगा, मै जल्दी से तैयार हो जाती हूँ।

ये सोचते हुए रत्न ब्रा पेंटी पहने अपने कमरे में जाती है और अपनी अलमारी से एक बहुत ही सुन्दर सा नाईट गाउन निकाल कर पहन लेती है जो थोड़ा पारदर्शी भी था।

और दरवाजे के पास ही खटिया पर बैठ कर देवा के आने का इन्तजार करने लगती है।

दूसरी तरफ.....देवा

देवा हवेली की तरफ जाता है और अंदर पहुच कर देखता है की हवेली के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा हुआ है…

ये यहाँ ताला कैसे? ये दोनों कहाँ चलि गयी…

ये सोचते हुए देवा बाहर से गुजर रहे एक व्यक्ति से पूछता है की सब कहाँ गए?

वह व्यक्ति उसे बताता है की रुक्मणी की माँ चल बसी कुछ दिनों पहले, तबसे वो लोग उनके मायके गए हुए है इसलिए यहाँ ताला लगा हुआ है…

देवा यह जानकार सोचने लगा की अब नही लगता की रुक्मणी और रानी काफी दिनो तक वापस गाँव आयेंगे।

दूसरी ओर पदमा पेट से है, तो देवा उससे भी नहीं चोद सकता, शालु और नूतन घर पर है तो वहाँ पर नीलम भी है घर पर इसलिए वो उन्हें भी नहीं चोद सकता और रुक्मणी रानी भी गाँव से बाहर गयी हुई है…

देवा का दिमाग मचल गया यह सोचकर की कोई औरत नहीं है इस वक़्त…

पर तभी उसे याद आया की उसकी जिंदगी की सबसे हसीन औरत तो है अभी चोदने के लिए…

और वो है उसकी अपनी माँ…उसकी रत्ना।

ये सोचते ही देवा के चेहरे पर मुसकान आ गयी।

वह मन ही मन सोचने लगा अब कुछ दिन सिर्फ और सिर्फ उसकी माँ ही है उसकी प्यास बुझाने के लिये और कोई भी औरत नहीं है।

ये बात देवा के बदन में एक बिजली की तरह दौड़ती हुई उसके रोम रोम में एक ऊर्जा पैदा कर देती है।

और वो ज्यादा देर न करते हुए हवेली से दुर अपने घर की तरफ बढ़ने लगता है…वो जानता है कोई उसका घर पर बेसब्री से इन्तजार कर रहा है…
 
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