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पप्पु, “और भाई क्या बात है बड़े खुश लग रहे हो…।कुछ मिल गया है क्या…”
देवा: “मैं तो रोज की तरह ही हुँ…क्या मिलेगा भला…”
पप्पु: “नहीं आज बहुत अलग लग रहा है, क्या बात है २-३ दिन से सही से मिलने भी नहीं आया…कहाँ लगा हुआ था…”
देवा:“कहीं नहीं घर पर ही तो था मैं…”
पप्पु, “घर पर था…पर कल रात को जब मै आया था तब दरवाजा क्यों नहीं खोला फिर…कहाँ मशरूफ़ था…”
देवा समझ गया की ११ बजे यही साला आया था।
देवा “हम लोग सो गए थे जल्दी कल…कब आया था तू वैसे…कोई जरुरी काम था क्या.....”
पप्पु: “वो कल रात को ही नूतन को अपनी माँ भाई की याद आ रही थी तो मैंने कहा की कल चलते है …और तुझसे भी पुछ लेते है साथ चलने को इस बहाने ममता से भी मिल आयेगा…पर तू बाहर ही नहीं निकला…फिर नूतन ने भी कहा की ३-४ दिन बाद ही चल लेंगे सब साथ…”
देवा:“अच्छा…माँ भी कल कह रही थी की ममता को कुछ दिन के लिए ससुराल से ले आओ…कुछ दिन यहाँ रह लेगी…”
पप्पू फिर से गधो की तरह मुस्कुराने लगा…
देवा: “लगता है तेरा गांड मराने को बहुत मन कर रहा है काफी दिनों से मारी भी नहीं है मैंने…”
पप्पु, “क्यों भाई मेरी क्या मारोगे…जब इतना कड़क माल अपने ही घर में तुम्हे मिल गया हो…रात दिन मारने के लिए…”
पप्पू की बात सुनकर देवा चौंक गया।
देवा: “कैसा माल…कोंन सा माल…क्या बोल रहा है तू…”
पप्पु: “चोर की दाढी में तिनका…साले माँ ने सब बता दिया है…आखिरकर रत्ना काकी को भी शामिल कर ही लिया ना तूने…”
देवा समझ जाता है की पप्पू को पता है सब, इसलिए बहाना बनाने का कोई फायदा नहीं…
देवा:“शालू..... बहन की लौड़ी के पेट में कुछ रुकता नहीं…”
पप्पू और देवा हँसने लगते है।
पप्पु: “लौड़ा डाल दे मुँह में कुछ नहीं बोल पाएगी,,,,”
और देवा जोर जोर से हँसने लगता है…
देवा: “पर साले और किसी को मत बताइयो यह बात अभी…”
पप्पू मन में सोचता है।
क्या देवा को बताना चाहिए की नीलम को सब पता चल गया है?
देवा: “मैं तो रोज की तरह ही हुँ…क्या मिलेगा भला…”
पप्पु: “नहीं आज बहुत अलग लग रहा है, क्या बात है २-३ दिन से सही से मिलने भी नहीं आया…कहाँ लगा हुआ था…”
देवा:“कहीं नहीं घर पर ही तो था मैं…”
पप्पु, “घर पर था…पर कल रात को जब मै आया था तब दरवाजा क्यों नहीं खोला फिर…कहाँ मशरूफ़ था…”
देवा समझ गया की ११ बजे यही साला आया था।
देवा “हम लोग सो गए थे जल्दी कल…कब आया था तू वैसे…कोई जरुरी काम था क्या.....”
पप्पु: “वो कल रात को ही नूतन को अपनी माँ भाई की याद आ रही थी तो मैंने कहा की कल चलते है …और तुझसे भी पुछ लेते है साथ चलने को इस बहाने ममता से भी मिल आयेगा…पर तू बाहर ही नहीं निकला…फिर नूतन ने भी कहा की ३-४ दिन बाद ही चल लेंगे सब साथ…”
देवा:“अच्छा…माँ भी कल कह रही थी की ममता को कुछ दिन के लिए ससुराल से ले आओ…कुछ दिन यहाँ रह लेगी…”
पप्पू फिर से गधो की तरह मुस्कुराने लगा…
देवा: “लगता है तेरा गांड मराने को बहुत मन कर रहा है काफी दिनों से मारी भी नहीं है मैंने…”
पप्पु, “क्यों भाई मेरी क्या मारोगे…जब इतना कड़क माल अपने ही घर में तुम्हे मिल गया हो…रात दिन मारने के लिए…”
पप्पू की बात सुनकर देवा चौंक गया।
देवा: “कैसा माल…कोंन सा माल…क्या बोल रहा है तू…”
पप्पु: “चोर की दाढी में तिनका…साले माँ ने सब बता दिया है…आखिरकर रत्ना काकी को भी शामिल कर ही लिया ना तूने…”
देवा समझ जाता है की पप्पू को पता है सब, इसलिए बहाना बनाने का कोई फायदा नहीं…
देवा:“शालू..... बहन की लौड़ी के पेट में कुछ रुकता नहीं…”
पप्पू और देवा हँसने लगते है।
पप्पु: “लौड़ा डाल दे मुँह में कुछ नहीं बोल पाएगी,,,,”
और देवा जोर जोर से हँसने लगता है…
देवा: “पर साले और किसी को मत बताइयो यह बात अभी…”
पप्पू मन में सोचता है।
क्या देवा को बताना चाहिए की नीलम को सब पता चल गया है?