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रत्ना का हाथ अपने बेटे के सर पर चल रहा था।
अपने बेटे के दुःख को उसने अच्छे से भाँप लिया
और वो भी रोने लगी…
रत्ना:“बेटा यह तो एक न एक दिन होना ही था…पर अब हो गया है तो तुझे मजबूत होना होगा…मैं जानती हूँ की नीलम से तो बहुत प्यार करता है…मै उसे तुझसे दुर नहीं होने दूंगी बेटा…तु फिकर मत कर…”
रत्ना देवा के सर पर ममता भरी स्पर्श से सहलाते हुए देवा को दिलासा देती है और वायदा करती है।
कुछ पल देवा अपनी माँ की गोद में पड़ा सिसकता रहता है…
दोस्तो क्या अजीब बात है न, वो मरद जो इतना अपनी चुदाई से अच्छे अच्छो को रुला देता है।
वह मरद जिसकी आवाज इतनी बुलन्द है की लोग डर जाते है।
आज उसी मरद के आंसू नहीं रुक रहे है।
अपनी माँ की गोद में लेटे हुए…
रत्ना अपने बेटे के सर को प्यार से काफी देर तक सहलाती रहती है।
अपने बेटे के दुःख को देख कर रत्ना की आँखों में भी पानी आ जाता है।
देवा कुछ पल ऐसे ही अपनी माँ की गोद में पड़ा रोता रहता है और कुछ देर बाद थक कर उसकी आँख लग जाती है।
रत्ना देवा के सर को ऐसे ही सहलाती रहती है…
और फिर हल्के हाथो से अपने देवा की गरदन को अपनी गोद से उठाकर चारपाई से
उठ जाती है और देवा को सोता हुआ देखने लगती है…
अपने देवा के चेहरे पर रत्ना को आज वो दर्द दिखा है जो वो तब से सहती आ रही है जबसे देवा के बाबू लापता हुए थे।
और इसी बात ने रत्ना को मन ही मन यह डर डाल दिया की देवा की भी जिंदगी में ऐसा दुःख न हो जो मै सहन कर रही हूँ इतने सालो से।
रत्ना: (मैं ) “नही, मै यह नहीं होने दूंगी…”
और रत्ना ने कमरे की लाईट को बुझा दिया और अपने कमरे में जाकर लेट गयी…
आज का यह दिन देवा के लिए बहुत दुःख लाया था।
शायद देवा इस दिन को और नहीं जीना चाहता था।
इसलिये वो सो गया।
अपनी नीलम के ख्वाबो में डूबता हुआ…
अपने बेटे के दुःख को उसने अच्छे से भाँप लिया
और वो भी रोने लगी…
रत्ना:“बेटा यह तो एक न एक दिन होना ही था…पर अब हो गया है तो तुझे मजबूत होना होगा…मैं जानती हूँ की नीलम से तो बहुत प्यार करता है…मै उसे तुझसे दुर नहीं होने दूंगी बेटा…तु फिकर मत कर…”
रत्ना देवा के सर पर ममता भरी स्पर्श से सहलाते हुए देवा को दिलासा देती है और वायदा करती है।
कुछ पल देवा अपनी माँ की गोद में पड़ा सिसकता रहता है…
दोस्तो क्या अजीब बात है न, वो मरद जो इतना अपनी चुदाई से अच्छे अच्छो को रुला देता है।
वह मरद जिसकी आवाज इतनी बुलन्द है की लोग डर जाते है।
आज उसी मरद के आंसू नहीं रुक रहे है।
अपनी माँ की गोद में लेटे हुए…
रत्ना अपने बेटे के सर को प्यार से काफी देर तक सहलाती रहती है।
अपने बेटे के दुःख को देख कर रत्ना की आँखों में भी पानी आ जाता है।
देवा कुछ पल ऐसे ही अपनी माँ की गोद में पड़ा रोता रहता है और कुछ देर बाद थक कर उसकी आँख लग जाती है।
रत्ना देवा के सर को ऐसे ही सहलाती रहती है…
और फिर हल्के हाथो से अपने देवा की गरदन को अपनी गोद से उठाकर चारपाई से
उठ जाती है और देवा को सोता हुआ देखने लगती है…
अपने देवा के चेहरे पर रत्ना को आज वो दर्द दिखा है जो वो तब से सहती आ रही है जबसे देवा के बाबू लापता हुए थे।
और इसी बात ने रत्ना को मन ही मन यह डर डाल दिया की देवा की भी जिंदगी में ऐसा दुःख न हो जो मै सहन कर रही हूँ इतने सालो से।
रत्ना: (मैं ) “नही, मै यह नहीं होने दूंगी…”
और रत्ना ने कमरे की लाईट को बुझा दिया और अपने कमरे में जाकर लेट गयी…
आज का यह दिन देवा के लिए बहुत दुःख लाया था।
शायद देवा इस दिन को और नहीं जीना चाहता था।
इसलिये वो सो गया।
अपनी नीलम के ख्वाबो में डूबता हुआ…