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हाय रे ज़ालिम.......complete

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अपडेट 17

जब देवा घर पहुँचता है तो उसे रत्ना के साथ शालु बात करते दिखाई देते है पास में ममता भी बैठी हुई थी।

देवा;हाथ मुंह धो के उन के पास जाके बैठ जाता है।

रत्ना के चेहरे पे परेशानी के बदल छाये हुए थे। ममता भी उदास दिखाई दे रही थी।

देवा;क्या बात है माँ आप दोनों इतने उदास क्यों दिखाई दे रही हो।

रत्ना;देवा तेरी मामा की तबियत बहुत ख़राब हो गई है।

अभी अभी उनके गांव से एक आदमी ये संदेशा दे के गया है बेटा। मेरा मन बहुत घबरा रहा है पता नहीं क्या हुआ है तेरे मामा को।

देवा;माँ आप चिंता क्यों करते हो अगर आपका मन नहीं लग रहा तो चलो मै आपको मामा के घर छोड आता हूँ।आपको उनसे मिलके अच्छा लगेगा।

शालु;हाँ रत्ना देवा बिलकुल ठीक कह रहा है तुम एक बार हो आओ अपने मायके से।

ममता; मैं भी चलुंगी।

रत्ना;तू चलेगी तो यहाँ देवा के खाने पीने का कौन ध्यान ख्याल रखेगा।

शालु;अरे मै क्या मर गई हूँ देवा हमारे घर खाना खा लिया करेगा।तुम उसकी बिलकुल चिंता मत करो।

रत्ना;आँखों ऑखों में देवा से पूछती है और देवा उसे जाने की इजाज़त दे देता है।रात के खाने के बाद देवा रत्ना और ममता को ले के मां के घर निकल जाता है।

रत्ना;देवा तू भी कुछ दिन वह रुक जा।

देवा;माँ तुम्हे तो पता है ना फसल तैयार खडी है अगर मै वहां रुक गया तो साल भर के मेंहनत मिटट्टी में मिल जाएँगी । मै फसल की कटाई के बाद तुम लोगों को लेने आ जाऊंगा और कुछ दिन वही रूकूंगा। ठिक है।

रत्ना;जैसा तुझे ठीक लगे बेटा अपने खाने पीने का ख्याल रखना।

बातों बातों में वो सभी देवा के मामा के घर पहुँच जाते है।
 
देवा के मामा माधव सिंह एक ४५ साल के शख्स थे ।

उनके २ बच्चे थे। एक लड़का रामु और लड़की नूतन।

रामु की शादी दो साल पहले हो चुकी थी और नूतन अभी अभी जवान हुई थी।

रामु की पत्नी का नाम था कौशल्या लेकिन सभी उसे काशी कहके बुलाते है।।उमर 19 साल।

देवा की मामी का नाम था देवकी।उमर 35 साल।एक हंसमुख मिज़ाज़ औरत

देवा का नाम उन्होंने ही अपने नाम पे रखा था देव।

वो बचपन से देवा को अपने सगे बेटे की तरह मानती थी।

देवा;रत्ना और ममता के साथ मां के घर में दाखिल होता है उन्हें देख सभी खुश हो जाते है।खास तौर पे देवकी।उसके ऑखें जैसे ही देवा से मिलती है वो खुद को नहीं रोक पाती। तेज़ कदमों से चलके आते हुए देवा को अपने सीने में छुपा लेती है।

देवकी;देवा कितना सूना लग रहा है मेरा बच्चा अपने मामी को भूल गया न । तुझे एक दिन भी यहाँ की याद नहीं आये ।

देवा;शर्मिंदा सा हो जाता है और देवकी से माफ़ी माँगते हुए घर के बाकी सभी लोगों से भी मिलता है।

रत्ना तो अपने भाई के खैर ख़ैरियत पुछने बैठ जाती है।

देवकी देवा को जाने नहीं देना चाहती थी। पर जब देवा और रत्ना उसे समझाते है और देवा फसल की कटाई के बाद वापस आने का वादा करता है तो देवकी मान जाती है और देवा वापस घर की तरफ निकल जाता है।।

देवा जब घर पहुँचता है तो काफी रात हो चुकी थी वो काफी थक भी चूका था। बिना माँ और बहन के घर उससे काटने को दौडता है वो किसी तरह बिस्तर पे सर रखता है और थकान के कारण उसे नींद भी लग जाती है।

सुबह देवा जल्दी उठके जब खेतों में जाने के तैयारी कर रहा था तो घर के दरवाज़े पे दस्तक होती है। जब वो दरवाज़ा खोलता है तो सामने शालु हाथ में नाश्ते की थाली लिए उसे खड़ी मिलती है।

देवा;अरे काकी इतनी सुबह सुबह और ये सब क्या है।

शालु;तेरी माँ ने मुझे सब बता दी थी कल रात ही की तू कब उठता है कब खेत में जाता है और तुझे कब खाना देना है चल जल्दी से बैठ मै तेरे लिए गरम गरम पराठे बनाके लाई हूँ।
 
देवा;मुस्कुराता हुआ नाशता करने लगता है।

अब कैसी तबियत है काका की।

शालु;ठीक है ये मुई शराब की लत पता नहीं कैसे लग गई उन्हें।

उनका घर में होना न होना एक सामान है।

देवा;क्या मतलब।

शालु;कुछ नहीं पराठे कैसे बने है।

देवा;बहुत अच्छी जिसने भी बनाये है ना दिल कर रहा है उसके हाथ चूम लूँ।

शालु;शरमाते हुए धत अपने काकी को चूमेगा।

देवा;आहहहह क्यों इसमें बुराई क्या है।

कहो तो अभी चुम लूँ।

शालु;चल हट बेशरम कही का । सब जानती हूँ तेरे करतूतों को मैं।

देवा;हाय काकी कभी मुझे भी जानने दो ना आपके बारे में।

शालु;तू चुप चाप नाश्ता करता है या नही।

और देवा हँसता हुआ नाश्ता ख़तम करने लगता है।

शालु;दोपहर का खाना तू घर आके खा लेना ठीक है।

अरे हाँ एक बात तो मै तुझे बताना भूल ही गई।

वो आज दोपहर में लड़के वाले आ रहें है।

देवा;किसलिये।

शालु;अरे बाबा रश्मि नहीं तो नीलम दोनों में से किसी एक को पसंद करने बस एक बार दोनों की अच्छे से शादी हो जाये तो समझो मैंने गंगा नहा ली।

नीलम का नाम सुनते ही देवा के चेहरे का रंग उड़ जाता है।

शालु तो बर्तन उठाके चली जाती है पर देवा वही चारपाई पे बैठ जाता है।

नीलम देवा का बचपन का प्यार।

पुरे गांव में नीलम जैसे लड़की नहीं थी । शरीफ समझदार ।

देवा को वो बचपन से पसंद थी और कही न कही नीलम भी देवा को चाहती थी पर दोनों सिर्फ आँखों के इशारो में एक दूसरे की खैर ख़ैरियत पूछा करते थे।

न देवा में हिम्मत होती उससे बात करने की ना नीलम कभी कोशिश करती।
 
बचपन की मोहब्बत धीरे धीरे परवान चढ़ती रही और जब शालु ने नीलम की शादी की बात की तो देवा के दिल में बहुत ज़ोर का दर्द हुआ था।

वो फैसला कर लेता है की चाहे कुछ भी हो जाये वो नीलम को किसी और की होने नहीं देगा पर सबसे पहले उसे अपने दिल की बात नीलम को बतानी थी।

वो उदास दिल से अपने खेत में चला जाता है।

उसे खेत में काम करते करते ११ बज जाते है।

उसे रानी का ख्याल आता है आज उसका दिल हवेली में जाने को नहीं कर रहा था पर वो जानता था की अगर वो नहीं गया तो हिम्मत राव कही नाराज़ न हो जाए।

वो धीमे कदमों से हवेली पहुँचता है।

हवेली में सन्नाटा पसरा हुआ था बाहर दो कार में से सिर्फ एक कार खडी थी। वो हवेली के अंदर चला जाता है।

जैसे ही वो रानी के कमरे के दरवाज़े के सामने पहुँचता है उसे अंदर से रानी की आवाज़ आती है।

रानी;अंदर आ जाओ देवा।

देवा;हैरान होके रूम के अंदर चला जाता है।

मालकिन आपको कैसे पता की मै बाहर खड़ा हूँ।।

रानी;मेरे दिल ने कहा की तू बाहर खड़ा है देवा और मेरा दिल मुझसे कभी झूठ नहीं कहता।

अरे बुधू मैंने तुझे खिडकी से देख ली थी।

अच्छा ये बता कैसी लग रही हूँ मैं।

पतली सी चोली घाघरे में रानी सचमूच क़यामत लग रही थी

कुछ पलों के लिए तो देवा नीलम को भी भूल जाता है।

देवा;बहुत खूबसूरत छोटी मालकिन।

रानी;मालकिन नहीं रानी बोलो मुझे।

देवा;मालकिन मेरा मतलब है रानी । चलिये कार सीखने चलते है।

रानी;नहीं आज नहीं वैसे भी माँ और बापू शहर गए है डॉ को माँ की तबियत दिखाने । तो हम दोनों बिलकुल अकेले है इसका मतलब समझते हो तुम।

देवा;नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा मै चलता हूँ।।

रानी;जल्दी से दरवाज़ा बंद कर देती है।

जब देखो वही घर जाना । इधर आओ मेरे पास और अगर तुमने मेरी किसी भी बात से इंकार किया तो जानते हो ना मै किस से तुम्हारी शिकायत करुँगी।

देवा;बिस्तर पे बैठ जाता है।
 
रानी उसकी गोद में उछल के बैठ जाती है और अपनी दोनों ब्रैस्ट देवा की छाती पे रगडने लगती है।आहह देवा मेरे देवा आज मै अकेली हूँ मुझे आज तू कुछ भी कर सकता है । पागल कर दिया है तूने मुझे देवा।

वो देवा के पूरे चेहरे को नाक को गाल को और होठो को चुमने लगती है।

देवा चुप चाप बैठा रहता है वो बुरी तरह डरा हुआ था एक तरफ खाई दूसरे तरफ कुंवा वो जाता भी तो किधर जाता।

रानी ज़मीन पे बैठ जाती है और देवा की पेंट नीचे करने लगती है।

देवा;मालकिन नहीं नही ये पाप मुझसे मत करवाओ। मुझे माफ़ कर दीजिये।

रानी देवा की पेंट नीचे उतरते ही देवा के लंड को हाथ में लेके हिलाने लगती है।

मुझे जो चीज़ पसंद आ जाती है मै उसे हासिल करके रहती हूँ।

देवा;मगर मालकिन नही।

रानी देवा के लंड को अपने मुंह में ले के चुसने लगती है गलप्प गलप्प।

इस चीज़ की उम्मीद देवा को बिलकुल नहीं थी उसका जिस्म सुंन पड़ जाता है और उसके हाथ रानी के बालों में चले जाते है।

मर्द को दर्द नहीं होता पर मरद के लंड को कोई मुंह में लेके चुसे तो ना चाहते हुए भी लंड खड़ा ज़रूर हो जाता है।

ओर यही देवा के साथ भी हुआ।

वो जितना खुद को दिल ही दिल में इस काम से रोक रहा था उतना ही उसका लंड तेजी से खड़ा होने लगता है।

उसने गांव की सावली मोटी गाण्ड वाली औरतों को चोदा था पर आज पहली बार एक बहुत ही खूबसूरत लड़की उसके लंड को बड़े प्यार से चूस रही थी वो खुद पे काबू नहीं कर पा रहा था।

रानी;आहह बहुत बड़ा है देखना मेरे मुंह में भी नहीं जा रहा पता नहीं मै कैसे ले पाऊँगी यह। गलप्प गलप्प....

देवा;मालकिन बस अह्ह्ह्ह वरना बहुत देर होजाएगी आहह्ह्ह्हह्ह।

रानी देवा का लंड छोड़ के बिस्तर पे लेट जाती है और अपनी पतली सी पेंटी को थोड़ा नीचे करके देवा को दावत देती है।

चल आजा ज़रा तू भी थोड़ा रस पी ले ।
 
देवा खुद को रोक नहीं पाता और वो रानी की पेंटी खीच के उसके चूत पे टूट पडता है । बिना बाल वाली इतनी चिकनी चूत उसने पहली बार देखा था। गुलाबी पंखडियाँ और छोटा सा दाना जो छूट को खोल बंद कर रहा था।

रानी चूत को थोड़ा सा खोलती है आहह चल मुंह डाल दे अंदर आजा।

देवा अपने मुंह को रानी की चूत में पूरी तरह घुसा देना चाहता था वो चूत को इतनी बुरी तरह चुसने लगता है जैसे कोई जंगली जानवर अपने शिकार पे झपटता है।गल्पप गलप्प।

रानी;आहह ज़ालिम ऐसे ही चुस्स आहह तेरी हर बात निराली है देवा आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।

देवा रानी की गांड को सूँघता हुआ चूत को चाटने लगता है गलप्प गलप्प। पहली बार जब देसी कुत्ते को विदेशी हड्डी मिले तो वो उसे नहीं छोडता । बस देवा भी कुछ इसी तरह नौकर मालिक का रिश्ता ताक पे रख के अपने धुन में मगन था।

रानी चीखती रही पर देवा ने उसकी चूत से मुंह तभी हटाया जब रानी का गाढा गाढा पानी उसके चेहरे को भिगोने लगता है।

रानी देवा को गिरा के अपने नीचे कर लेती है और उसके लंड पे अपनी चूत की फाँके फँसा के आगे पीछे करने लगती है।

रानी;आहह देवा मुझे प्यार कर। मुझे अपनी बना ले आहह;

देवा के लंड पे रानी की चूत घीसने से देवा का दिमाग काम करना बंद कर देता है।

रानी देवा के लंड को हाथ में पकड़ के चूत के मुंह पे लगाती है आहह यहाँ डाल दे रे।

देवा जैसे ही रानी को अपने नीचे लाके दोनों टाँगें चौडी करके लंड को चूत में घुसाने वाला था की देवा की गर्दन में का वो तावीज़ जो उसे रत्ना ने बुरी नज़र से बचाने के लिए बचपन में पहनाई थी उसके आँखों के सामने आ जाता है और देवा अपने लंड को रानी की चूत के ऊपर से हटा देता है।

रानी;क्या हुआ डाल न आह्ह्ह्ह्ह।
 
देवा अपने कपडे उठाके पहनने लगता है वो रानी से कुछ नहीं कहता।

रानी बौखला जाती है। तू मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकता। मुझे इस तरह बीच में छोड़ के नहीं जा सकता देवा मेरी तरफ देख मै क्या कह रही हूँ। तुझे सुनाइ दे रहा है की नही।

देवा फिर भी कुछ नहीं बोलता और अपने कपडे पहन के वहां से चला जाता है।

रानी चीखने लगती है चिल्लाने लगती है पूरी हवेली में उसकी चीख की ख़ौफ़नाक आवाज़ गूँजने लगती है।

एक घंटे बाद जब हिम्मत राव और रुक्मणी हवेली पहुँचते है ।

रुक्मणी अपने कमरे में चले जाती है और हिम्मत राव रानी के।

रानी हिम्मत राव को देखते ही उस पे टूट पडती है उसकी चूत आग उगल रही थी। ठण्डा पानी चाहिए था उसकी चूत को।

हिम्मत राव;अरे बिटिया क्या हुआ आराम से अभी अभी तो मै आया हूँ।

रानी;मुझे नहीं पता मुझे कुछ नहीं पता बस मुझे करो जल्दी मेरे छूट में डालके चोदो मुझे आह्ह्ह्ह्ह्ह।

वो आया था मुझे अधूरा छोड़ के चला गया मै मर जाऊँगी। बापू आप सुन रहें है ना जल्दी करो न आह्ह्ह।

हिम्मत राव दरवाज़ा बंद करके अपने कपडे उतार देता है और अपने लंड को अपनी बेटी के मुंह में डाल देता है। रानी हवस के नशे में हिम्मत राव के लंड को हलक तक घुस्सा के चुसने लगती है और कुछ देर में ही वो हिम्मत राव के लंड को खड़ा कर देती है।

रानी;बस बापू अब आ जाओ मेरे ऊपर और बिलकुल तरस मत खाना मुझे पे।

हिम्मत राव;रानी की दोनों टाँगें चौडी करके अपने लंड को चूत पे घिसता है।

रानी :आहह हरामी घिसता क्या है अंदर ड़ालने को कह रही हूँ अंदर ड़ालता क्यों नहीं आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।

हिम्मत राव का लंड रानी को खोलता हुआ अंदर तक चला जाता है और रानी अपने पैर हिम्मत राव के कमर से लपेट के अपनी चूत की आग को ठण्डा करने लगती है।
 
अपडेट 18

देवा;अपने घर जाने के बजाये शालु के घर चला जाता है ।

सुबह शालु ने उसे जो नीलम के रिश्ते के बारे में बात बताई थी वो उसके दिमाग से निकली नहीं थी।

उसे रानी पे बहुत ग़ुस्सा आ रहा था । पता नहीं वो मुझसे क्या चाहती है। क्यों वो ऐसा कर रही है। क्या मै मालिक या बड़े मालकिन को सब बता दुं।।यही सब बातें उसके दिमाग में घूम रही थी।

जब वो शालु के घर में दाखिल हुआ तो शालु और पप्पू मेहमानो के खातिरदारी कर रहे थे।

लडके वालो की तरफ से 2 औरतें 2 मरद और खुद लड़का भी आया हुआ था।देखने में अच्छे घर के लग रहे थे। लड़का भी ठीक था।

शालु;उन लोगों से देवा का परिचय कराती है।

देवा;कुछ बहाना बनाके घर के दूसरे कमरे में चला जाता है जहाँ नीलम तैयार हो रही थी जैसे ही उसकी नज़र देवा पर पडती है।

वो खुश हो जाती है पर अगले ही पल उसका चेहरा मायूस हो जाता है।

नीलम देखने देखने में रश्मि से बहुत अच्छी थी।

नीलम;क्यों आये हो यहाँ जाओ बाहर जा कर बैठो।

देवा;नीलम के सामने रखे टूल पे बैठ जाता है।

नीलम की ऑखों में आये ऑंसू देवा से छुपे नहीं थे। वो जानता था अगर आज उसने नीलम से अपने दिल के बात नहीं कहा तो बहूत देर हो जाएगी।

पर औरतों को जानवर की तरह चोदने वाले देवा का दिल बहुत नाज़ुक था। किसी गुलाब की पंखुडे पे रखे उस पानी के क़तरे के तरह।

देवा;नीलम तू बाहर उन लोगों के सामने मत जा।

नीलम; क्यों?वो लोग मुझे देखने आये है मुझे तो जाना होंगा।

तूम क्यों मुझे रोक रहे हो।
 
देवा;देखो नीलम मै जानता हूँ की तुम भी जानती हो फिर क्यों तुम नहीं समझ रही की मै क्या चाहता हूँ ।

नीलम;देखो गोल मोल बातें मुझे समझ नहीं आती। साफ़ साफ़ कहो क्या कहना है तुम्हें।

देवा;नीलम का हाथ पकड़ के अपने हाथ में ले लेता है उसका हाथ नीलम के हाथ से भी ज़्यादा काँप रहा था।

नीलम;दिल में सोचने लगती है।

इतना बड़ा हट्ठा कट्टा है पर ज़रा सी दिल की बात इससे कही नहीं जाती।

अरे बोल भी दे वरना बाप बनने के बजाये कही मामा न बन जाए।

देवा;हाँ कुछ कहा तुमने।

नीलम;नहीं तो तुम कुछ बोलने वाले थे। बोलो।

देवा;हाँ वो मै ये कहना चाहता था।मतलब हूँ की तुम बाहर नहीं जाओगी।

नीलम; क्यों।

देवा;क्यों की मै चाहता हूँ।।

नीलम;ग़ुस्से से हाथ छोड़ो। हाथ छोडो मेरा

बाहर निकलो यहाँ से और आज के बाद मुझे अपनी सुरत मत दिखाना बुज़दिल कही के।

देवा के दिमाग में यही एक अलफ़ाज़ घुमने लगता है।

बुज़दिल बुज़दिल बुज़दिल।

और वो नीलम का हाथ पकड़ के उसे अपनी तरफ घुमाता है और एक हाथ उसके कमर में पीछे से डालके उसे अपनी छाती से चिपका लेता है।दोनो की ऑखें एक हो जाती है। दिल की धड़कने एक साथ एक आवाज़ में धड़कने लगती है सिर्फ दोनों के साँस की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

नीलम के होंठ कांपने लगते है पिछले कई सालो से वो जो शब्द सुनना चाहती थी वो देवा के ज़ुबान पे देख उसका अंग अंग आज नाचने को कह रहा था ।

देवा;नीलम मै तुमसे बेपनाह प्यार करता हूँ और मै तुमसे ही शादी करूँगा किसी और से नही।तुम सिर्फ मेरे लिए जन्मी हो और मै इसलिए। ताकि तुम्हें हमेशा प्यार कर सकुं।।तुमहे मेरे मोहब्बत की कसम आज के बाद तुम किसी पराये मर्द के सामने नहीं जाओगी।

नीलम के कांपते होंठ देवा के लरज़ते होंठो को चूम लेते है।

बुधु कही के पहले नहीं बोल सकते थे।

मै भी तुमसे बहुत बहुत प्यार करती हूँ देवा। मै सिर्फ तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी।
 
दोनो एक दूसरे की बाहों में सीमट जाते है।

और बाहर खडी शालु के चेहरे पे मुसकान फ़ैल जाती है।

देवा कुछ देर बाद घर चला जाता है।

शालु;मेहमानो के सामने सिर्फ रश्मि को लाती है।

वो लोग नीलम को भी देखना चाहते थे पर शालु उनसे कहती है की वो अभी बहुत छोटी है और हमे अभी उसकी शादी नहीं करनी।

देवा;अपने घर में लेटा हुआ था उसे पता नहीं था की शालु के घर क्या हुआ है।

वो अपने सोच में खोया हुआ था की तभी शालु हाथ में खाने की प्लेट लिए घर के अंदर दाखिल होती है।

शालु;अरे देवा तू क्यों चला आया खाना भी नहीं खाया चल आ जा जल्दी से खाले।

देवा;भूख नहीं है काकी।

शालु;भूख कैसे नहीं है चुपचाप खा ले अरे हाँ मै तुझे एक बात तो बताना भूल ही गई उन लोगों को मेरी लड़की पसंद आ गई है।

देवा;का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है कौन काकी।

शालु;मेरी सबसे खूबसूरत बेटी सबसे अच्छी तुझे तो पता है ना कौन।

देवा;थूक निगलते हुए कौन पसंद आ गई काकी बोलो न।

शालु;अरे देवा खाना ठण्डा हो रहा है चल आ जा न बाबा।

देवा;पहले बोलो कौन।

शालु;देवा के एकदम क़रीब जाके उसके ऑखों में झाँकते हुए। रश्मि।

देवा;चैन की साँस लेता है और शालु के चेहरे पे दबी दबी सी हंसी दिखाई देती है। काकी खाना लगाओ बड़े ज़ोरो की भूख लगी है । क्या तुम भी फ़ुज़ूल के बातें लेके बैठ गई।

शालु; अच्छा बेटा वाह।

देवा;काकी खाना मै एक शर्त पे खाऊंगा।

शालु;खाने में भी शर्त । अच्छा बोल क्या है।

देवा;खाना तुम मुझे खिलाओगी। वो भी मेरी गोद में बैठ के।
 
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