देवा के दिल की कलि कलि खिलने लगती है । अपने खवाबों को जब इंसान पूरा होते देखता है तो हर किसी का यही हाल होता है।
जो उस वक़्त देवा का हो रहा था।
ममता ;क्या बात है भैया बड़े खुश लग रहे हो।
देवा;खुश होने जा रहा था की बिल्ली आ गई।
ममता ;बिल्ली कहाँ है बिल्ली।
देवा;ममता का हाथ पकड़ के उसे अपने पास बैठा देता है और धीरे से उसके कान में कुछ
खुसूर पुसुर करता है जिसे सुनकर ममता पहले चौंकती है और फिर उसके होठो पर मुस्कान फ़ैलती चली जाती है।
देवा;सुन आज देवकी मामी और तेरे ससुराल वाले आने वाले है।
मेरे लिए ज़रा गरम पानी रख दे जिस्म बहुत दुःख रहा है
थोडा गरम पानी से नहा लुँगा तो मेरा दर्द भी दूर हो जायेगा और अंग भी साफ हो जायेगा।
ममता ;इतराते हुए।
हाँ हाँ क्यों नहीं। आज तो मेरे भैया को मै अपने हाथों से नहलाऊँगी।
देवा;सच्ची।
ममता;मुच्ची।
देवा;लुच्ची।
ममता ;क्या कहा मुझे लुच्ची।
अभी बताती हूँ वो देवा की छाती पर मुक्कों की बरसात कर देती है और देवा हँसता हुआ अपनी बहन ममता को अपने बाहों में समेट लेता है।
इस झडप में ममता देवा के नीचे आ जाती है और देवा का भारी जिस्म ममता का नरम मख़मली जिस्म पर टीक जाता है।
ममता;आहह सच कहूं तो मुझे आपकी बहुत याद आएँगी शादी के बाद।
देवा;मुझे भी बहुत आयेगी।
ममता ;झूठे कहीं के मेरे जाने के बाद तुम्हारी तो चाँदी होने वाली है।
देवा;वो कैसे
ममता;वो ऐसे की मै जाऊँगी और नूतन वहां से आएगी और जब नूतन आएगी तो मुझे अच्छी तरह पता है की पप्पू भैया में वो बात कहाँ जो मेरे सैयां में है ।
देवा;तुझे ये सब कैसे पता।
ममता ;लो कर लो बात मेरी भी ऑंखें है भइया।
सब पता है मुझे।
देवा;मुस्कुराते हुए अच्छा सब पता है। ज़रा मुझे भी बता दे अपने इन रसीले होठो से। वो ममता के होंठो पर झुकता है और उन्हें अपने होठो से लगा कर चूसने लगता है गलप्प गलप्प गलप्प्प गप्पप्प।
ममता ;भइया मुझे शादी के बाद भी करेंगे ना भूल तो नहीं जाओंगे न अपनी बहन को माँ।
देवा;कैसे भूल सकता हूँ तुझे मै ममता आहह तेरी चूत मुझे बहुत पसंद है और जिसकी सबसे ज़्यादा पसंद है वो मिल जाने के बाद भी इसे चोदना बंद नहीं करुँगा मै आअह्हह्हह्हह।
ममता ;किसकी चूत आपको मेरी चूत से भी ज़्यादा अच्छी लगती है भइया आह्ह्ह्ह।
देवा;माँ की.... मुझे माँ को नंगा करके चोदने का बड़ा मन है ममता।
बस माँ मान जाए आह्ह्ह्ह।
ममता ;माँ कभी नहीं मानेगी आहह ।
देवा;दिल में सोचने लगता है वो क्या नहीं मानेगी जब उसकी चूत मेरा लंड देखेगी तो खुद ब खुद मान जाएगी।
वो अपनी ही दुनिया में खोये हुए एक दूसरे के जिस्मो का मजा ले रहे थे। इस बात से अन्जान की रत्ना बाहर खड़ी सब सुन रही है।
और सिर्फ सुन नहीं रही बल्कि देवा के एक एक शब्द का उसके जिस्म पर इतना गहरा असर हो रहा था की
उसकी चूत से कतरा कतरा पानी बहकर जांघों को भिगोता हुआ नीचे ज़मीन पर गिर रहा था।
रत्ना;देवा नहाना हो गया होगा तो बाहर आ जा। महमान आ गये है।
देवा; ये सुनकर अपने लंड को ममता की चूत की गहराइयों में उतारता हुआ सटा सट ममता की
कमर को पकडता हुआ उसे चोदने लगता है। देवा के धक्कों से ममता की चूत भी घायल हो जाती है और दोनों एक साथ झरने लगते है।
थोड़ी देर बाद जब दोनों बहार आते हैं तो ये देख हैरान रह जाते है की रत्ना अभी तक वहां से गई नहीं थी।
रत्ना;ये लो देवा आज तुम ये कपडे पहनना और ममता तू ये पहन ले।
मेहमान अभी नहीं आये है मगर थोडी देर में आ जाएंगे।
ये कहकर रत्ना वहां से किचन में चलि जाते है और उसके जाने के बाद देवा ममता की तरफ देख मुस्कुरा देता है।
शालु और उनका परिवार भी देवा के घर मेहमान नवाजी में शामिल हो जाता है
नुतन और ममता की शादी की तारिख पक्की होने वाली थी।
सभी लोग बहुत खुश थे। जहाँ एक तरफ नूतन अपने देवा की बाहों में आने को बेक़रार थी वही कोमल भी खुश थी देवा उसके घर आता रहेगा।
पंडित जी 15 दिन बाद का मुहूर्त निकालते है और सभी ये बात सुनकर एक दूसरे का मुँह मीठा कराते है।
रत्ना;देवकी को इस बात के लिए मना लेती है की नूतन और ममता की शादी एक मंडप में होगी और देवकी को अपने परिवार के साथ यहाँ आना होगा।
ताकी ममता को यहाँ से विदा करके अपना आशिरवाद दे सके।
देवा के लिए ख़ुशी की बात भी थी और चिंता की भी उसे बहुत सी तैयारियाँ करनी थी और वो उस दिन के बाद से अपनी बहन की शादी की तैयारियों में इतना मगन हो जाता है की खाने पीने की भी उसे परवाह नहीं रहती।
दिन तो शादी की तैयारियों में बीत जाता है लेकिन हर रात देवा की सुहागरात होती है।वह ममता को हर पोजीशन में चोदता है और रत्ना उनकी चुदाई देखकर अपनी गरम चूत रगड़ती है।
देवा अच्छी से अच्छी शादी करने की इच्छा में वो हर छोटा बड़ा काम पूरी ईमनदारी और मेहनत से अंजाम देता है
और देखते ही देखते वो 15 बिन भी गुज़र जाते है और वो शुभ दिन भी आ जाता है जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था।
देवा;ने अपनी बहन ममता की शादी में किसी किस्म की कसर नहीं छोड़ा था सब काम वक़्त से पहले उसने पूरे कर दिये थे।
और वो दिन भी आ गया था जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था।
बाराती आ चुके थे और शादी लगने में १ घण्टा बाकी था।
ममता को रत्ना और देवकी सजा रही थी की तभी देवा भी वहां आ जाता है।
देवा;अरे वाह
मेरी प्यारी बहनिया बनी है दुलहनिया।
सज के आये हैं दूल्हे राजा।
ममता के चेहरे पर हलकी सी शर्म की लाली बिखर जाती है।
हर लड़की की ज़िन्दगी में उसकी शादी सबसे बड़ा दिन होता है।
एक तरफ जहाँ देवा से जुदा होने का गम था ममता को। वही दूसरी तरफ नई ज़िन्दगी शुरु करने की जुस्तजू भी थी।
रत्ना;देवकी मै ज़रा बाहर देख कर आती हूँ मेहमान ठीक से हैं की नही।
और देवा तू भी जल्दी से बाहर आ जा।
रत्ना;देवा के बगल से गुज़रते हुए कहती है।
रत्ना बेहद खूबसूरत लग रही थी इतने दिनों से उसकी चुदाई नहीं हुई थी।
शायद यही वजह थी की उसकी जवानी में बुढ़ापे का अक्स बहुत कम झलकता था।
वो अपनी साडी हमेशा नाभि के थोड़ा ऊपर बाँधती थी
उसकी नाभि आधी दिखाई देती थी और उसी का जादू देवा के सर चढ़ कर बोलता था।
बडी बड़ी मख़मली ब्रैस्ट को हिलाते हुए और अपनी कमर को मटकाते हुए रत्ना जैसे ही देवा के पास से गुज़रती है देवा से रहा नहीं जाता और वो देवकी के मौजूदगी में रत्ना का हाथ पकड़ लेता है।
रत्ना सकते में आ जाती है उसे उस वक़्त देवा से इस तरह की हरकत की बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी।
वो ड़रते हुए देवा की तरफ घूमती है
देवकी;का ध्यान उन दोनों की तरफ नहीं था।
रत्ना;इशारे से देवा को हाथ छोड़ने के लिए कहती है।
हलांकी वो ये बात ज़ोर से भी कह सकती थी मगर जब से देवा ने उसे मंगलसुत्र लाकर दिया था रत्ना न तो देवा पर चीखती थी और न उसकी किसी भी बात का बुरा मानती थी।
देवा;एक मिनट माँ।
वो रत्न को घुमा देता है और उसके पीछे आकर धीरे से उसके कानो के पास कहता है।
देवा;अपने गरम हाथों को रत्ना की पीठ पर रख के पहले उसे रत्ना की चिकनी पीठ पर घुमाता है।
और फिर धीरे से रत्ना की पीठ पर चुमटी काट लेता है।
रत्ना के मुँह से एक दबी सी सिसकी निकल जाती है
उन्हह।
देवा;बटन को बड़ी धीरे से बंद कर रहा था जिससे रत्ना को और भी ज़्यादा डर लग रहा था की कहीं देवकी उसे देख न ले।
देवा;बटन बंद कर एक बार देवकी की तरफ देखता है
देवकी;उन दोनों को ही देख रही थी।
देवा;मुस्कुराते हुए रत्ना की पीठ को चूम लेता है।
रत्ना;आहह हह
वा अब वहां और नहीं रुक सकती थी। वो बिना कुछ बोले वहां से बाहर निकल जाती है।
और देवा के साथ साथ देवकी की ऑंखें भी चमक जाती है।
ममता; जो आईने के सामने बैठी हुई थी अपने सामने लगे आईने में से सारा तमाशा देख रही थी।
उसे पता था जब वो पहली बार अपने ससुराल से मायके में आएगी तब तक देवा रत्ना को अपने नीचे सुला चूका होगा और वो भी उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। जब वो अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेते हुए अपनी माँ रत्ना की चूत को चाटेगी।।
देवकी को भी यकीन हो चला था की इन दोनों माँ बेटे के बीच कुछ न कुछ तो ज़रूर चल रहा है मगर वो वक़्त इन सब बातों का नहीं था। बारात दरवाज़े पर खड़ी थी।
और उन्हें सब का अच्छी तरह से ख्याल रखना था।
नुतन और ममता को हवन मंडप में लाया जाता है।
एक तरफ पप्पू और दूसरी तरफ हरी बैठ जाते है।
पंडित जी शादी के मंत्र पढना शुरू कर देते है।
देवा की नज़रें किसी को मंडप में तलाश करने लगती है।
वो जो सुबह से संवर रही थी अपने भाई की शादी के लिए नहीं बल्कि देवा के लिये।
देवा की तलाश करती हुए नज़रें एक कोने में जाकर रुक जाती है जब उसे हुस्न की मल्किका
और अपने जवान लंड की असली मालकिन नीलम एक कोने में उसकी तरफ देखते हुए दिखाई देती है।
ममता और नूतन से भी ज़्यादा हसींन लग रही थी नीलम।
अपने ब्लैक कलर के चूड़ीदार कपड़ों में वो स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
चेहरे पर हज़ारों सपने सजाये और अपने मेहबूब की एक नज़र की मोहताज नीलम की नज़रें जैसे ही देवा से टकराती है दोनों के दिल में हज़ारों दिए जल उठते है।
ये एक अजीब मोहब्बत थी।
जहां सिर्फ दिल की बातें नज़रों से बयान होते थे।
एक दूसरे से बहुत काम बात करने के बावजूद भी दोनों को एक दूसरे की हर अच्छी बुरी चीज़ के बारे में पता थी।
अगर देवा को जुकाम हो जाये तो नीलम का सर दर्द करने लगता था।
वो दो जिस्मो में एक जान की तरह थे।
अपने पाकीज़ा मोहब्बत को बचपन से संभाले हुए नीलम बड़ी हुई थी। बस इस उम्मीद में की एक दिन देवा उसका हाथ पकडेगा और उसे दूर उस दुनिया में ले जायेंगा जहाँ सिर्फ मोहब्बत पलती हो।
जहां एक तरफ देवा और नीलम ऑंखों ही ऑंखों में एक दूसरे से बातें कर रहे थे वही दूसरी तरफ हरी की बहन और कोमल की बेटी प्रिया भी किसी बाज़ की तरह देवा पर नज़रें गड़ाये बैठी थी। जो आग देवा वहां जलाकर आया था वो अब भयंकर रूप ले चुकी थी और उस आग से उठते शोले जो प्रिया के तन बदन में हलचल मचा रहे थे।
बस प्रिया से एक सवाल कर रहे थे की ज़ालिम इस चूत की आग को कौन बुझायेगा और प्रिया अपनी चूत को बार बार रगड के उससे दिलासा दे रही थी की वो आयेगा और सारे गीले शीकवे एक रात में ख़तम कर देगा।
पंडित जी हरी और पप्पू को अपनी अपनी पत्नियों को मंगल सूत्र पहनाने के लिए कहते है।
और शादी के बाकी के सारे रस्म ओ रिवाज भी पूरे हो जाते है।
कई दिन की मेंहनत आज रंग लाई थी। जहाँ ममता का रो रो कर बुरा हाल था वही नूतन भी देवकी के गले लग कर सिसक पड़ी थी।
हर माँ के लिए अपनी बेटियों को घर से बिदा करना बहुत मुश्किल होता है मगर ये हर माँ की खुशकिस्मती होती है की उसकी बेटी अपने मायके नहीं बल्कि ससुराल में रहे।
रत्ना;ममता का हाथ हरी के हाथ में देकर उसे बिदा कर देती है।
और देवकी नूतन को पप्पू के हवाले करके सबके साथ अपने गांव रवाना हो जाती है।
सुबह जो घर मेहमानो की चीख पुकार से गूंज रहा था वही घर रात होते होते खाने को दौड़ने लगता है।
रत्ना को अकेलापन महसूस न हो इसलिए नीलम रत्ना के पास ही रुक गई थी।