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हाय रे ज़ालिम.......complete

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कुछ महिनो में ये दोनों एक दूसरे के इतनी क़रीब आ गयी थी जितनी कभी सोची भी नहीं होंगी दोनों ने।

जहां नूतन अपनी सास से गाली से तो कभी प्यार से बात करती थी अकेले में । वही शालु भी नूतन की चूत में ऊँगली डाल कर उससे खूब अपनी गाण्ड और चूत चटवाती थी।

दोनो जल्दी जल्दी अपने काम निपटाकर घर में चली आती है।

पप्पू और नीलम उस वक़्त तक सो चुके थी।

दोनो जल्दी से शालु के रूम में चली जाती है और शालू झट से नूतन का हाथ पकड़ कर उसे अपने बिस्तर पर गिरा देती है।

शालु; छिनाल रंडी अब बता तेरी चूत।

बहुत बातें कर रही थी न । कल रात भी तुने मेरी चूत को इतने ज़ोर से काटी की अब तक दुःख रही है।

नुतन ;अपनी सलवार कमीज उतार कर नंगी हो जाती है

ओर शालु की साडी के अंदर अपने हाथ डाल कर अपने हाथ को उसकी फुली हुई चूत पर रख देती है।

शालु;अंदर कुछ नहीं पहनती थी।

जब से दोनों सास बहु एक दूसरे की चूत की दिवानी हुई थी तब से दोनों अंदर कुछ नहीं पहनती थी।

जब मौका मिलता शालु अपनी साडी उठा लेती और नूतन कुतिया की तरह उसकी चूत सूँघते हुए वहां चली आती और अपनी ज़ुबान से शालु की चूत चाटने लगती।

दोनो सास बहु पूरी तरह नंगी हो चुकी थी और बिस्तर पर एक दूसरे से चिपक कर चूत से चूत और चूचि से चूचि रगड रही थी।

नुतन ;अपनी दो उँगलियाँ शालु की चूत में घुस्सा देती है।

छिनाल सासु है तू मेरी

देवा से चुदवा नहीं सकती तो मेरे पीछे पड़ी है।

आह्ह्ह।

शालु;हरामज़ादी उन्हह इतनी अंदर मत घुस्सा आह्ह्ह

दरद होता है ना।

तेरी माँ ने यही सीखा कर भेजी थी तुझे की अपनी सास की चूत और गाण्ड चाटना आह्ह्ह्ह।

नुतन;हाँ मेरी माँ ने यही सीखा कर भेजी थी

वो अपने होठो को शालु के होठो पर रख देती है।
 
और दोनों सास बहु एक दूसरे की चूत को सहलाते हुए होठो को खोल कर मुँह में ज़ुबान डाल कर एक दूसरे का थूक चाटने लगती है।गालपप गलप्प।

शालु;आहह बिटिया आहह गलप्प गलप्प

नुतन;मेरी चूचि का दूध पियो न सासु माँ....

मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम खीच खीच कर उसे पीटी हो आह्ह्ह्ह्ह्ह।

शालु;उठ कर बैठ जाती है।

दोनो हाथों में नूतन के बड़े बड़े संतरो को पकड़ कर पहले उन्हें ज़ोर ज़ोर से मसलने लगती है और

जब वो हाथों में नहीं समाते तब अपने मुँह उन दोनों पर बारी बारी लगा कर नूतन के निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर उसे चुसने लगती है।

नुतन; अपना एक हाथ नीचे डाल कर शालु के ब्रैस्ट को मसलने लगती है।

दोनो औरतें लंड की आस में इतनी गरम हो चुकी थी की उन्हें पता भी नहीं था की उन्हें पप्पू देख रहा है।

शालु;बिस्तर पर लेट जाती है और अपने दोनों पैर खोल देती है।

आजा मेरी छिनाल अपनी माँ की चूत में घुस जा।

नुतन ;मुस्कुराते हुए अपनी ज़ुबान से पहले ढेर सारा थूक शालु की चूत पर गिराती है और फिर उसी थूक को शालु की चूत के पानी के साथ चाटने लगती है गलप्प गलप्प गलप्प।

शालु;आहह मेरी गाण्ड में भी ज़ुबान डालल आह्ह्ह्ह।

बिटिया धीरे ना।

नुतन;बहुत मीठी चूत है सासु माँ तेरी गलप्प गलप्प आअह्हह्हह्हह।

वह हलके से शालु की चूत के दाने को काट लेती है जिसकी वजह से शालु की कमर ऊपर की तरफ उठती चलि जाती है

पुरा बदन ऐठने लगता है और शालु की आँखों के सामने देवा का लहराता हुआ लंड घुमने लगता है।

शालु;मुझे चोद मेरी बिटिया आह्ह्ह्ह।

आह देवा को बुला ला ना।

आह माँ आआआआआ।

नुतन ;अपनी ज़ुबान को नीचे लाते हुए शालु की गाण्ड भी चाटने लगती है।

शालु;इशारे से नूतन को अपनी कमर उसके मुँह की तरफ करने के लिए कहती है और जैसे ही दोनों ६९ की पोजीशन में आ जाते है।

शालु भी नूतन की चूत पर टूट पडती है और पूरे रूम में सिसकारियों की आवाज़ें गूँजने लगती है।

दरवाज़े पर खड़ा पप्पू ये देख अपनी लूल्ली को सहलाने लगता है।

आज पहली बार उसका लंड भी इतना बड़ा हो गया था जैसा कभी नहीं हुआ था।

शायद अपनी माँ और पत्नी को इस हालत में देख उसके लंड ने भी जवानी की करवट मारी थी।

पप्पू;बिना आवाज़ किये रूम में चला आता है।
 
उधर देवा खेत से घर आ चुका था।

वो रत्ना को आवाज़ देता है।

देवा;माँ कहाँ हो खाना दे दो बहुत भूख लगी है।

अचानक दरवाज़ा खुलता है।

और हुस्न की मल्लिका

अपने पूरे शबाब में बाहर निकालती है।

हाथों में हरी हरी चूडियाँ।

बदन पर सिर्फ ब्लाउज और लहंगा पहने हुए।

गले में देवा का दिया हुआ मंगलसुत्र।

होंठो पर मुस्कान लिए वो देवा की तरफ बढ़ती है।

देवा ने इससे पहले उसे कभी इस हाल में नहीं देखा था।

आज वो स्वर्ग की अप्सरा लग रही थी।

रत्ना;अपनी जवानी के दिनों में जितनी खूबसूरत लगती थी आज वो वैसे ही लग रही थी।

देवा का मुँह खुला का खुला रह जाता है।

उसके माथे पर पसीना आने लगता है।

सबसे ज़्यादा हैरत उसे इस बात की थी की आज रत्ना ने मंगलसुत्र पहनी थी।

रत्ना;देवा के क़रीब आती है।

भूख लगी है ना।

बोल क्या लेगा।

वो अपने दोनों ब्रैस्ट को हलके से हिलाते हुए देवा की तरफ देखते हुए कहती है।

देवा;सब कुछ भूल जाता है।

रत्ना के बदन से आती हुई महक उसे दिवाना बना रही थी।

उसे पहले तो यक़ीन नहीं हो रहा था की वो रत्ना ही है और जब यक़ीन हुआ तो पैरों तले की ज़मीन खिसक गई थी।

देवा;खाना खाने बैठ जाता है।

और रत्ना उसे खाना परोस कर उसके सामने बैठ जाती है।

देवा;बार बार रत्ना की तरफ देख रहा था।

रत्ना;आज बहुत गर्मी है ना देवा।

ये कहते हुए रत्ना अपने ब्लाउज के ऊपर के तीन बूटनों में से दो खोल देती है।

बाहर आने को बेताब ब्रैस्ट आधे से ज़्यादा बाहर की तरफ आ जाते है।

ब्रा नहीं होने की वजह से रात के अँधेरे में भी रत्ना के दोनों ब्रैस्ट जुगनू की तरह चमक रहे थे।

देवा;आज तुम बहुत सुन्दर लग रही हो।

माँ आआआआ.....

रत्ना;हलके से मुस्कुरा देती है।

और देवा की बात अनसुनी करके इधर उधर देखने लगती है।

देवा;तुमने मेरा मंगलसूत्र पहना है रत्ना।

रत्ना;हाँ ये पड़े पड़े ख़राब न हो जाये इसलिए मैंने सोची इसे पहन लेती हूँ।

अब जब इसे देने वाला तैयार है तो मै इसे क्यों न लूँ।

अपने गले में।

इसलिए पहन ली अच्छा लग रहा है न।
 
देवा;बहुत सुन्दर लग रहा है तेरे गले में।

रत्ना;देवा के सामने झुकती है।

और कुछ लेगा इतना कम क्यों खा रहा है।

ऐसे खाएगा तो जल्दी थक जायेगा।

बहुत मेंहनत करनी है तुझे देवा।

वो देवा की आँखों में झाँकते हुए कहती है।

देवा;अगर ऐसी बात है तो मुझे दूध दे दे माँ।

दूध से मुझे बहुत शक्ति मिलती है और काम में भी मन लगा रहता है।

रत्ना;दूध तो अभी कच्चा है मैंने तपाया नही।

देवा;मुझे कच्चा दूध सबसे अच्छा लगता है माँ।

रत्ना;देवा के पास आकर अपना हाथ सीधा उसके लंड पर रख कर ज़ोर से दबा देती है।

क्या बच्चे जैसा माँ माँ लगा रखा है।

बड़ा हो गया है अब तु।

तेरी रत्ना तेरे नाम का मंगलसुत्र पहन सकती है और तू अब भी बच्चा बना हुआ है।

जा मै तुझसे बात नहीं करती।

ये कहकर रत्ना बनावटी ग़ुस्सा दिखाते हुए अपने रूम में चली जाती है।

देवा;खाना ख़तम करके नहाने चला जाता है।

जब वो नहा कर अपने रूम में आता है तो उसे खुद में बहुत बदलाव नज़र आता है।

उसका जिस्म एकदम पत्थर की तरह सख्त हो चूका था और लंड था की बैठने का नाम नहीं ले रहा था।

वो कपडे पहनने लगता है मगर फिर न जाने क्यों अपने बदन पर सिर्फ टॉवल लपेट कर रत्ना के रूम में चला जाता है।

जब वो रत्ना के रूम में पहुँचता है तो रत्ना

बिस्तर पर पड़ी नज़र आती है।

वो उसके पास जाकर बैठ जाता है।

और धीरे से उसे आवाज़ देता है।

रत्ना..........
 
अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।

अपडेट 100 यानि अगला अपडेट बहुत खास होनेवाला है जिसमे रत्ना की जबरदस्त चुदाई होनेवाली है।

बहुत सारे कमेंट और के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
 
अपडेट 100

देवा;रत्ना को अपनी तरफ घुमा लेता है।

रत्ना;कसमसाते हुए देवा की आँखों में देखने लगती है।

चेहरे पर हलकी सी मुस्कान लिए न जाने कितने जुगनू जगमगा रहे थे उन दोनों की आँखों में।

एक हसीन खवाब जो मुदत्तों के बाद पूरा होने की कगार पर था।

एक दिल में छुपा हुआ सा एहसास।

वो जिस्म की खवाहिश जो बदन के रौंगटे खड़ा कर दे।

आज ये दो जिस्म बेताब थे अपने अपने रूह को सुकून पहुँचाने के लिये।।

देवा;अपना एक हाथ अपनी माँ की छाती पर रख कर हलके से दबाता है।

रत्ना; आह्ह क्या कर रहे हो । मुझे बहुत नींद आ रही है देवा।

देवा;जिस पल की लिए देवा जी रहा था।

उस पल का हर एक लमहा मै महसूस करना चाहता हूँ माँ।

तेरे बदन की खुशबु मुझे सोने नहीं देती।

तेरे होठो की लर्ज़िश मुझे जीने नहीं देती।

इस खूबसूरत एहसास को पाने के लिए अब तक ज़िंदा है तेरा बेटा वरना कब का मर चूका होता।

रत्ना;अपना हाथ देवा के मुँह पर रख देती है।

ऐसा मत बोल ।

मेरी ज़िन्दगी का मक़सद है तु।

आज से रत्ना तेरी हुई आज से मै तन मन और धन से तुझे अपने आप को सौंपती हूँ।

अपने हर दिल की मुराद को अच्छी तरह से पूरी कर ले।

देवा;अपने हाथ की पकड़ को और मज़बूत करते हुए ब्लाउज के ऊपर से रत्ना की मदमस्त चुचियों को दबाने लगता है।

एक बिजली सी रत्ना के बदन से हो कर गुज़र जाती है।

दोनो के होंठ कांप रहे थे।

वो बस एक गुज़ारिश कर रहे थे।

की उन्हें अपने मेहबूब से मिला दो।

रत्ना;अपने एक हाथ को देवा के सर के पीछे ले जाकर उसके बालों में जकड लेती है और उसे अपने ऊपर झुकाते चली जाती है।

देवा के होंठ जब अपने माँ रत्ना के होठो के इतने करीब थे, की दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा रही थी।

देवा अपने माँ से एक सवाल पूछता है।

क्या तुम मुझे अपना पति स्वीकार करती हो रत्ना।और रत्ना उसे जवाब नहीं देती बस उसे अपने होठो से लगा लेती है,और दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपक जाते है।

यूं तो इससे पहले भी ये कई मर्तबा एक दूसरे से मिले थे मगर आज जो जज़्बा दोनों के अंदर था वो इससे पहले कभी नहीं महसूस हुआ था।
 
देवा अपने ज़ुबान को बाहर निकाल कर रत्ना के मुँह में डालने लगता है और रत्ना भी उसका साथ देते हुए अपना मुँह खोल कर देवा की जीभ को चुसने लगती है।

वो इस अंदाज़ में देवा की जीभ चूस रही थी जैसे उसके मुँह में देवा का लंड हो।

चटखारे मारते हुए अपने मुँह का थूक देवा के मुँह में उंडेलती हुई उसके जीभ को चूस रही थी।

देवा का बदन गरम हो चूका था जिस्म पर मौजूद वो टॉवल भी उसे बोझ लग रही थी वो उसे फेंक देता है और रत्ना को मसलते हुए उसके ऊपर चढ जाता है उसका खड़ा लंड रत्ना के साडी के ऊपर से उसकी चूत से जा टकराता है।वो चुभन पहली नहीं थी।मगर आज उस चुभन को अंदर महसूस करना चहती थी रत्ना।

रत्ना;आह ह ह मुझे नंगी कर दे पूरी तरह।

देवा;मुस्कुराते हुए बैठ जाता है और एक झटके में उसका ब्लाउज निकाल देता है।

साडी को कमर से खींच कर अलग कर देता है।

और पेंटी को नीचे उतार देता है।फूलों सी महकती हुई रत्ना हुश्न की मल्लिका अपने पुरे शबाब के साथ देवा के सामने नंगी हो जाती है।

देवा;माँ आज मै तुझे मर्द का एहसास कराना चाहता हूँ।

तेरे मर्द का, तेरे देवा का ,तेरे बेटे के लंड से ,तेरी तडपती हुई चूत को गीला करना चाहता हूँ।

बोल माँ मुझसे चुदाएगी ना ,लेंगी न मेरा लंड तेरी चूत में।

रत्ना;आह ह ह ह ह

मेरी चूत अब मेरी नहीं रही देवा ये

तुम्हारी हो गई है तुम मालिक हो अब इसके साथ जो चाहें वो कर सकते हो ।

आह मसलो मेरी चूत के दाने को

बहुत तडपाती है ये तुम्हारे रत्ना को मेरे लाल।

देवा;अपने माँ की बड़ी बड़ी चुचियों पर टूट पड़ता है

वो बड़े बड़े खरबूज़ की तरह चुचियों को अपने मुँह में भर लेता है गप्प गप

रत्ना की चूत भी चीखने लगती है।

मिलन का वो वक़्त करीब आ गया था।

देवा का हाथ नीचे बढ़ कर रत्ना के चुत को सहलाने लगता है और रत्ना भी अपने नाज़ुक से हाथों में देवा का लंड दबोच लेती है।

दोनो की साँसें फूल चुकी थी दोनों एक दूसरे के अंदर जाने के लिए बेताब थे

मगर ये हसीन वक़्त देवा को बड़े मुददत्तों के बाद नसीब हुआ था वो कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था।

वो नीचे निप्पल्स को हलके हलके अपने दांतों से काटने लगता है और उसे खीचते हुए एक ऊँगली उसके बाद दूसरी ऊँगली भी रत्ना के चूत में डाल देता है।

रत्ना -आहह मार डालेगा आज तू मुझे आह

आह ह ह ह ह ह।
 
देवा;अभी नहीं जाने मन।

वो नीचे सरकते हुए पेट से होते हुए चूत तक पहुँच जाता है और अपनी माँ की चूत की महक में जैसे खो जाता है।

एक दिलकश जगह वो जगह जो हर किसी को नसीब नहीं होती।

बस देवा जैसे किस्मत वाले उस मुक़ाम तक पहुँच पाते है।

रत्ना अपने दोनों पैरों को और खोल देती है।

देख जब तू इस चूत से निकल रहा था तब भी मेरे पैर ऐसे ही खुले हुए थे।

और आज जब तू इस में दूबारा जायेंगा तब भी ऐसे ही हैं।

आजा अपने माँ की चूत में देवा।

आह अह्ह्ह

देवा अपनी ज़ुबान को रत्ना की चूत पर रख कर गाण्ड के सुराख़ से लेकर चूत के दरार तक चाटने लगता है गप्प गल्प गल्प गल्प गल्प.....

देवा की ज़ुबान लम्बी थी सामने का हिस्सा नुकीला था

वो बहुत कम औरतों के चूत पर झुकता था और जब झुकता था तो उसकी ज़ुबान ही लंड का काम कर देती थी।

औरत अपनी टाँगें खोलने पर मजबूर हो जाती थी

चुत का मीठा मीठा पानी झरने से बहते हुआ देवा के मुँह तक पहुँच जाता था।

रत्ना का भी यही हाल था।

उसकी चूत इतनी पनिया गई थी की ज़ुबान जितने अंदर जाता रत्ना अपने कमर को उतना ऊपर उठा लेती।

इस एहसास में की देवा उसे चोद रहा है मगर वो कहाँ जानती थी की असली एहसास अभी बाकी है।

देवा अपने एक ऊँगली को रत्ना के गाण्ड के भूरे छेद में डाल कर उसे अंदर बाहर करने लगता है।

रत्ना का मुँह खुलता चला जाता है।

हलक सुखने लगता है मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल पाता।

ऐसा लगने लगता है रत्ना को जैसे की उसकी जान उसकी चूत से खीच रहा है।

रत्ना अपने दोनों हाथों से देवा के सर को अपने चूत पर दबाने लगती है।देवा काफी देर तक रत्ना की रसीली चूत को अपनी जीभ से चाटता जाता है।

देवा की ज़ुबान अपना काम कर गई थी

रत्ना की चूत का उस रात का पहला पानी बाहर बह निकला था।

जिसे देवा बड़े चाव से चटता चला जाता है।

जब रत्ना की साँसें थोडी धीमी होती है तो वो देवा की तरफ देखने लगती है।

देवा का मुँह पूरी तर्ह रत्ना के पानी से गीला था।

रत्ना की आँखों में खून उमड़ आया था।

वो देवा के तरफ लपकती है और उसके मुँह को चाटने लगती है।

गलप्प मेरी चूत का पानी है ना ये गल्प गल्प गल्प.....

मेरी जान के मुँह पर से मै साफ़ कर देती हु इसे गलप्प

गलप गलप्प

वो दीवानी हो गई थी चूत की आग आज सर में चढ़ गई थी।
 
देवा अपने ज़ुबान को भी बाहर निकाल देता है।और रत्ना उसे भी चाटने लगती है।

मगर जैसे ही वो देवा से और चिपकती है

एक नोकीला मोटा चीज़ उसके पेट से टकरा जाती है।

रत्ना नीचे देखती है।

वो देवा का खड़ा लंड था जो झटके पर झटके मार रहा था।

देवा-माँ तू पेशाब को कैसे बैठती है।

रत्ना नीचे ज़मीन पर बैठ जाती है

ऐसे पेशाब करती है तेरी माँ।पैर खुले हुए चूत चौडे गांड पीछे की तरफ निकले हुए

चूचियाँ सामने की तरफ लटके हुए।

बहुत हसीन लग रही थी रत्ना।

देवा अपने लंड से रत्ना के गाल सहलाने लगता है।

रत्ना- मेरा गला सूख रहा है।मै पानी पीकर आती हूँ।

देवा-पानी तो यही है। चल मुँह खोल।

रत्न देवा के आँखों में देखते हुए जैसे ही अपना मुँह खोलती है देवा उसके मुँह में अपना लंड डाल कर उसका सर पीछे से पकड़ लेता है।

रत्ना को समझ नहीं आता की देवा क्या कर रहा है।

मगर अगले ही पल उसे तब एहसास होता है जब देवा का पेशाब उसके हलक में गिरने लगता है।

पेशाब की महक रत्ना को और मदहोश कर देती है और वो देवा के लंड से निकला पिशाब पीने लगती है

रत्ना अपने हाथ में देवा के टेस्टिस को पकड़ कर उसे दबाने लगती है

जिससे देवा का लंड और मोटा होता चला जाता है।

बहुत सारा पेशाब पीने के बाद रत्ना का बदन ऐंठने लगता है।

उसे लंड चाहीये था अपने चुत में मगर देवा उसका मुँह मीठा किये बिना उसे ये देना नहीं चाहता था।

देवा इशारे से रत्ना को अपने लंड को फिर से मुँह में लेने के लिए कहता है।

और प्रेम दीवानी रत्ना अपने देवा के लंड को अपने मुँह में लेकर उसे सर से लेकर जड़ तक चाटने लगती है

गलप गलप्प

आह गल्प गल्प

मेरा लंड मेरे मुँह में कितन अच्छा लगता है गल्प गलप गलप्प गलप्प आह्ह्ह गलप्प।

मेरे पति का लंड मै रोज चूसूंगी गप गप

देवा;आह माँ धीरे धीरे चूस ना दर्द हो रहा है आह

रत्ना; चूसने दो ना जी गल्प गल्प गाल्प

देवा;बरसों का प्यासा था।
 
आज जब कुआँ खुद चल कर प्यासे के पास आया था तो देवा एक बूंद भी गँवाना नहीं चाहता था वो अपनी रत्ना को रात भर पेलना चाहता था।

उसे रात भर अपने लंड के नीचे लेटाकर चोदना चाहता था।

देवा;अपनी माँ को गोद में उठा लेता है और उसे बिस्तर पर लेटा देता है।

और झट से उसके ऊपर चढ़ जाता है।

अपने दोनों हाथों में रत्ना की चूचियों को पकड़ कर वो रत्ना को चुमते हुए अपने लंड को रत्ना के चूत पर घीसने लगता है।

माँ तेरी चूत मुझे चाहिए।

रत्ना-हाँ हाँ ले ले मेरी चूत बेटा आह आह

चोद डाल अपनी माँ को बना ले तेरे लंड की रानी आह्ह्ह्ह

और मत तडपा मुझे डाल न अंदर आहह्ह्ह।

देवा;कहाँ डालूँ माँ....

रत्ना;नीचे हाथ डाल कर देवा के लंड को अपने हाथ में पकड़ लेती है और उसे अपने चूत के मुहाने पर लगा देती है।

यहाँ मेरे बच्चे यहाँ....

देवा;अब तो मना नहीं करेगी ना.....

रत्ना;नहीं नहीं अब मना नहीं करुँगी जब जहाँ जैसे चाहेगा वहाँ चुदायेगी तेरी माँ तुझसे। बस डाल दे अपना मूसल मेरी चूत के अंदर।

देवा;अपने कमर को ऊपर की तरफ उठाता है और दन से उसे रत्ना की चूत पर दबा देता है।

एक बेटे का लंड पहली बार सारे बंधन तोड कर सारी कस्मे भूल कर अपनी माँ की रसीली चूत में घुस जाता है।

रत्ना चीख पडती है।

जानें कितने बरसों के बाद रत्ना की चूत में कोई लंड गया था।

रत्ना चीख उठती है।

हाय रे ज़ालिम धीरे कर दर्द होता है।

उउन्ह।

देवा;आज वो रात नहीं है जब एक बेटा अपनी माँ के दर्द को सुनकर रुक जाए।

वो दूसरा धक्का देता है और ये वाला धक्के से लंड रत्ना के बच्चेदानि तक जा रहा है।

रत्ना की कमर ऊपर की तरफ उठ जाती है और रत्ना के दोनों पैर देवा के कमर से लिपट जाते है ।

वो लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है।

देवा;कुछ पल उस एहसास को महसूस करता है और फिर अपनी माँ की दोनों चुचियों को मसलते हुए लंड को आगे पीछे करता चला जाता है।

रत्ना;हाय रे ज़ालिम बेटा मेरा आहह मेरी चूत है ना वो आहह....

मेरे बेटे धीरे से कर ना आह

पहले पहले धक्के तो कुँवारी को भी दर्द देते है।

रत्ना तो दो बच्चों की माँ थी।

उसे ज़्यादा वक़्त नहीं लगता खुद को सँभालने में।

जब चूत की चिकनाहट लंड को सहलाने लगती है और जब चूत की दिवारें पूरी तरह खुल जाती है तो रत्ना भी पागल सी हो जाती है।
 
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