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हाय रे ज़ालिम.......complete

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रत्ना गाण्ड पीछे ठेल-ठेलकर चुदवा रही थी। तभी देवा ने अपना लंड रत्ना की चूत से निकालकर उसकी गदराई गांड में पेल दिया।रत्ना भी गांड पीछे धकेल कर देवा से अपनी गांड मरवा रही थी।

देवा:आह साली रंडी एक ही दिन में तू गांड मरवाने में एक्सपर्ट हो गई है साली।एक तेरी बेटी है साली खाली बोलती है भैया कैसे भी करो लेकिन गांड आज तक नहीं मरवाई साली रंडी। जिस दिन उसकी गांड मिलेगी साली को ऐसे पेलूँगा की सुबह चल नहीं पायेगी।

रत्ना:अरे बेटा मेरी गांड है ना। तुझे जितना मन करे अपनी माँ की गांड मार ले बेटा।तुझे जैसे मन करे मुझे चोद।मैं तुझे सेक्स का हर वो सुख दूंगी जो तुझे कोई नहीं दे पायेगा।

देवा: हाँ माँ तू ही मेरी पहली बीबी है और मैं हमेशा तुझसे प्यार करता रहूंगा।

रत्ना: हाय बेटे और जोर जोर से मार मेरी गांड।मेरी गांड मारने में तुझे बहुत मज़ा आ रहा है न।

देवा: हाँ माँ तेरी गांड दुनिया की सबसे अच्छी गांड है अब तो मैं इसे रोज चोदुंगा।

और देवा जोर जोर से रत्ना की गांड मारने लगता है।

देवा: आह तेरी माँ के चूत आहह ।वो इतनी ज़ोर से गाण्ड मार रहा था जैसे कोई रंडी को पैसे दे के चोदता है जितना चोदो उतना पैसे वसूल आह्ह्ह्ह।

रत्ना;साँस लेती उससे पहले देवा उसे झटका मारता जिससे उसकी साँसे रुक रुक के निकल रही थी। मुंह खोलती तो देवा अपनी जीभ रत्ना के मुंह में डाल देता उहह्ह्ह।

रत्ना; की चूत पानी छोडने लगती है । आह्ह्ह्ह देवा और जोर से आह्ह्ह ऐसे मेरे बेटे आहहह जोर से मार मेरी गांड।

देवा: भी जोश मे था उसका लंड भी पानी छोड़ने वाला था। वो रत्ना का पानी निकलने के बाद अपना लंड रत्ना की गाण्ड से बाहर निकाल देता है और रत्ना के बाल पकड़ के बैठा देता है और अपना लंड उसके मुँह में पेल देता है आह्ह्ह्ह।

पी माँ तेरे बेटे का पानी और अपना गाढा गाढा पानी रत्ना के मुँह में गिराने लगता है आह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह।

रत्ना; उह्ह्हहं गलप्प्प गलप्प गलप्प किसी प्यासे की तरह पानी पीने लगती है उहँन गलप्प गलप्प।

10 मिनट बाद दोनों निढाल होके एक दूसरे के पास पास लेट जाते है।
 
देवा;एक ऐसा इंसान एक ऐसा मरद था जिसके जिस्म में खून नहीं गरम गरम लोहा दौड़ता था। अपने जिस्म की तपीश को उसने कई साल तक बर्दाश्त किया मगर जब इन्तहा हो गई तो वो जिस्म का जवाला मुखी फट पड़ा और उस आग की लपटों में जो कोई भी आया वो खुद को बचा न सका ।

कहते है जवान खून को औरतें सूँघ लेती है।

और देवा तो ऐसा जवान था जिसकी जवानी उसके बस में नहीं थी और शायद यही वजह थी की एक माँ भी अपने सारे रिश्ते ताक पर रख कर अपने सगे बेटे को अपना सब कुछ सौंप चुकी थी।

रत्ना और देवा बेसुध से एक दूसरे से लिपटे पड़े थे। रात भर और सुबह की चुदाई ने दोनों को जिस्मानी तौर पर थका ज़रूर दिया था मगर आत्मा अब भी प्यासी थी।

दूसरी तरफ नीलम ने सारी रात जाग कर निकाली थी ।

वो जब भी आँखें बंद करने की कोशिश करती उसे अपनी माँ और भाई चुदाई करते नज़र आते।

वो बेचैन थी।

उसके मन में कई सवाल थे मगर जबाब एक भी न था। वो जानती थी की इस मुश्किल वक़्त में देवा ही है जो उसकी उलझन को सुलझा सकता है।

वो सुबह होते ही देवा के घर की तरफ चल पडती है।

उधर रत्ना अभी अभी फिर से जागी थी।

वो अपने ऊपर देवा को देख पहले तो शर्मा जाती है

फिर मुस्कुरा कर देवा को देखने लगती है।

देवा का ढीला ढाला लंड अब भी रत्ना की चूत के किनारों को छु रहा था।

सुबह की ठण्डी ठण्डी हवा जब जिस्म से होकर गुज़रती तो रत्ना के तन बदन में कंपकंपी सी होने लगती।

देवा की रात की सारे बातें उसका चुमना उसका चोदना उसका चाटना सब कुछ रत्ना की आँखों से सामने घुमने लगता है।

और उसके हाथ खुद ब खुद नीचे सरकते जाते है और देवा के लंड पर आकर रुक जाते है।

वो उसे बाहर निकाल कर अपने मुठी में भर लेती है।

वो ढिला पड़ चूका था मगर रत्ना जानती थी की उसे कैसे खड़ा करना है।

रत्ना;अपने होठो को देवा के कान के क़रीब लाकर धीरे से सरगोशी करती है।

अब जग भी जा मेरे लाल रात की चांदनी में तो माँ को चोद चूका अब सुबह की रौशनी में भी भोग लगा दे ।।

देवा;को जैसे करंट सा लगता है और वो एक झटके में अपना सर उठा कर रत्ना की तरफ देखने लगता है।

शर्म ओ हया का दूर दूर तक कोई निशान नहीं था ।

एक जूनून था एक जोश था ।
 
रत्ना;अपना मुँह खोल कर अपनी जूबान बाहर निकाल कर देवा की आँखों में देखने लगती है।

अपनी माँ की बात को समझ कर देवा भी अपना मुँह खोल देता है और अपनी माँ की मीठी मिठी रस से भरी हुई ज़बान को अपने मुँह में खीच लेता है।

गलप्प गलप्प गलप्प ऊँह याह आहा गलप्प गलप्प

देवा;अपने मुँह का थूक रत्ना के मुँह में गिराने लगता है जिसे अमृत समझ कर रत्ना भी पीने लगती है।

एक हाथ से देवा रत्ना की चूत को सहलाने लगता है।

चुत पर गरम हाथ लगते ही रत्ना देवा से और चिपक जाती है और अपने दोनों हाथों में देवा के सर को थाम कर देवा को चुमने लगती है।

आह उई अहह ओह्ह।

देवा;की उँगलियाँ काम करने लगती है वो धीरे धीरे अंदर घूसने लगती है और रत्ना अपनी आँखे बंद कर लेती है।

रत्ना;बेटा ऐसा ना कर आहह ना।

एक चीख़ रत्ना के मुँह से निकलती है और उसी वक़्त नीलम दरवाज़े पर पहुँचती है उसके पैर वो आवाज़ सुनकर वही थम जाते है।

ये वैसी ही चीखें थी जैसे नीलम ने रात में अपनी माँ शालु के मुँह से सुनी थी।

उसका सर घुमने लगता है और माथे पर पसीने आने लगता है।

वो धीरे से दरवाज़ा अंदर की तरफ ढ़केलती है।

और अंदर का नज़ारा देख उसकी ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की साँस नीचे अतक सी जाती है।

देवा और रत्ना 69 की पोजीशन में थे देवा की ज़ुबान अपनी माँ की चूत को चाट रही थी और रत्ना अपने बेटे के लंड को अपने मुँह में लिए चुसे जा रही थी।

गालप्प गलप्पप्प

गलप्प आअह्हह्हह्हहहह गलप्प

देवा

आह्ह्ह्ह गलप्प गलप्पप्प।

देवा;माँ मुझे रोज़ चाहिए तेरी चूत गलप्प गलप्प्प।

रत्ना;तेरी ही हूँ। बेटा चाट न बहुत अच्छा चाटता है रे आहह माँ आह्ह।

नीलम के आने के बाद माँ को भूल तो नहीं जायेंगा न रे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।

देवा;माँ तो आखिर माँ होती है।

गलप्प गलप्प गलप्पप्पप्प।

देवा;अपनी सबसे बड़ी ऊँगली को रत्ना की चूत की गहराइयों में घुसा देता है।

जितना ज़ोर का झटका रत्ना को लगता है उतना ही तेज़ धक्का नीलम को अपनी चूत में महसूस होता है।

एक अजीब सा अहसास नीलम महसूस करने लगती है।जिस चीज़ को देख कल रात उससे ग़ुस्सा आ रहा था आज वही सब फिर से देख उससे अच्छा लग रहा था।

मगर वो अब भी परेशान थी।

रत्ना;इस सब से अन्जान अपने देवा के लंड को अपने मुँह में लेकर चुसने लगती है।

गलप्प गलप्प गलप्प्प।
 
ये मेरा है ये मुझे रोज़ना चाहिए मेरे लाल गल्लप मेरा सिर्फ मेरा गलप्प गलप्प गप्पप्प आह्ह्ह्ह।

दोनो गरम हो चुके थे। एक बेटे का लंड जब माँ चुसे तो उसे खड़ा होने में बस पल भर की देरी लगती है।

देवा;अपनी माँ को लिटा देता है और दोनों टाँगें खोल देता है।

रत्ना;को लगता है जैसे अब देवा अंदर डाल देगा मगर देवा अपनी माँ की चूत पर झुकता है और अपने होठो से रत्ना की चूत को खोल कर अपनी ज़बान अंदर डाल देता है गलप्प गलप्प्प।

रत्ना;चीख पड़ती है उसकी चीख सुनकर नीलम फिर से होश में आ जाती है।

उससे किसी के क़दमों की आवाज़ सुनाई देती है जो बाहर से आ रही थी।

नीलाम झट से दूसरे रूम में घुस जाती है।

थोड़ी देर बाद नीलम को ढूँढ़ती हुए शालु वहां आ पहुँचती है।

वो जैसे ही रत्ना को आवाज़ देने के लिए दरवाज़े के सामने पहुँच कर मुँह खोलती है सामने माँ बेटे को ऐसी हालत में देख झट से एक तरफ हो जाती है।

शालु;की साँसे फुलने लगती है।

वो मन में सोचने लगती है।

दैया रे दैया देवा अपनी माँ को भी चोदता है।

तभी तो मै सोचूँ रत्ना दिन ब दिन इतनी जवान कैसे होती जा रही है।

शालु;फिर से एक कोने से अंदर झाँक कर देखने लगती है।

रत्ना; बेटा अब घुसा भी दे चूत से आग फूट रही है रे.......

देवा;माँ मुझे तेरी गाण्ड मारनी है।

रत्ना;नहीं नहीं वहां नहीं बहुत बड़ा है तेरा.... मुझे और भी दर्द देंगा क्या।

देवा;बेटे का तो काम ही होता है माँ को दर्द देना।

पहले जब तू मुझे जनि थी तब तुझे दर्द दिया था अब जब तुझ में फिर से जाऊँगा तब भी दर्द दूँगा।

देवा;की बात सुनकर रत्ना को हंसी आ जाती है और वो पास में पड़ी तेल की बोतल उठा कर अपने चूचि पर उंडेल देती है।

ले पहले इसकी धार तो बना ले उसके बाद मैदान में उतरना।

रत्ना;अपने हाथो में देवा का लंड थाम कर उसे अपने दोनों चूचियों के बीच में घीसने लगती है।।

देवा;का लंड फुंफकारने लगता है।

एक तो खड़ा लंड ऊपर से तेल में सना हुआ।

देवा;के मुँह से किसी जोश में आये हुए सांड की तरह आवाज़ें निकलने लगती है।

वो अजीब आवाज़ें करने लगता है।

उसके जोश को और ज़्यादा रत्ना बढाने लगती है और कभी अपने मुँह में लेकर तो कभी अपने चूचि पर घिस कर देवा की आँखों में देखने लगती है।

देवा;से अब रहा नहीं जाता और वो अपनी माँ की कमर पकड़ कर उसे घुमा कर कुतिया बना देता है और पीछे आकर पहले लंड को चूत और गाण्ड दोनों पर घीसने लगता है।
 
जिस काम से रत्ना देवा को तड़पा रही थी अब वही काम देवा रत्ना के साथ कर रहा था।

रत्ना;सिसकने लगती है डाल दे हरामी आहह ज़ालिम मत तड़पा अपनी माँ को आह्ह पेल दे कमीने....

देवा; लंड की टोपी को गाण्ड के सुराख़ पर टीका देता है और एक झटके में पूरी सामने का हिस्सा अंदर घूसा देता है।

गांड थी छोटी लंड था बड़ा होना क्या था रत्ना चीख़ पड़ती है और उसकी चीख़ सुनकर नीलम वहां से शालु के सामने से बाहर भाग जाती है।

शालु हक्की बक्की सी खड़ी देखती रह जाती है।

इस सब से अनजान देवा अपने काम में लगा रहता है और जैसे कोई साँप अपने बिल में घुसता है वैसे ही देवा अपनी माँ की गाण्ड में घुसता चला जाता है।

चींखें सिसकारियों में तब्दील हो जाती है।

तेल में सना हुआ लंड रत्ना की गाण्ड को पच फच आवाज़ के साथ खोलता चला जाता है।

रत्ना;बहुत मजा आ रहा है रे बेटा मारते रह ऐसे ही आह्ह्ह्ह माँ।

शालु;मज़ा तो मुझे भी बहुत आ रहा है माँ बेटे की मस्त चुदाई देख कर।

देवा और रत्ना अपना सर उठा कर दरवाज़े में खड़ी शालु की तरफ देख कर हैरान रह जाते है।
 
अपडेट 102

शालु को देख कर रत्ना की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी और वो स्तब्ध हो गई, देवा भी शालु को देख कर थोड़ा चौंक गया पर रत्ना के जितना नहीं…

शालु: तो आखिरकार तूने अपनी चूत को शांत करवाने का ठान ही लिया पर अपने ही सगे बेटे को फाँसना…तू तो बड़ी कमिनी निकली रे रत्ना।

रत्ना अभी तक देवा के नीचे ही लेटी थी वो बहुत शॉकड हो गयी थी शालु को देखकर । उसे कुछ समझ नही आ रहा था क्युकी देवा ने उसकी गांड जबसे मारी थी तबसे उसके सोचने समझने की शक्ति थोड़ी ढीली हो गयी थी…कुछ पल ऐसे ही लेटे रहने के बाद रत्ना को सिचुएशन की गंभीरता का अहसास हुआ, देवा का लंड अब भी उसकी मोटी गांड में घूस्सा हुआ था,,, देवा भी वही उसी पोजीशन में खड़े हुए दोनों औरतो को देख रहा था…कभी रत्ना का ख़ूबसूरत नंगा जिस्म जिसको वह कल रात से कई बार निचोड चुका था और तो कभी शालु को जिसे उसने कई बार चोदा था।

देवा अब शालु को देख कर उसे आँखों ही आँखों में कुछ उल्टा न कहने का इशारा करता है,, शालु उसे कोई जवाब नहीं देती और उन दोनों के ओर बढ़ने लगी।

रत्ना अब समझ गयी थी की वह पकड़ी गयी है अपने ही बेटे के साथ चुदवाते हुए और कोई बहाना भी नहीं मारा जा सकता, तो वह तुरंत उठ कर बेड की चादर खीचते हुए ओढ़नी लगती है,, देवा का लंड उसकी गांड से बाहर आ जाता है,,, शालु अब आकर उनके सामने सोफ़े पर बैठ जाती है और बोलती है…

शालु,, अब क्यों उठ रही है और खुद को छुपा रही है,,,वही लेटी रह अपने सगे बेटे क नीचे और मजे लेती रह नंगी लेटे हुए ही…क्या फर्क पडता है अगर कोई तुम दोनों को देख लेता है तो...

रत्ना अब डरने लगती है,, वो मन ही मन सोचती है हे राम शालु ने मुझे अपने ही सगे बेटे से चुदवाते हुए देख लिया है,, मैं तो अब बदनाम हो जाऊंगी अगर गाँव में और किसी को पता चला तो क्या होगा।लोग कहेंगे यह कैसी बदजात औरत है जो अपने ही बेट के साथ सोती है और बेशर्मो की तरह चुदवाती है।

मुझे कुछ करना ही होगा यह बात किसी भी हाल में इस घर के बाहर नहीं जानी चाहिए…मुझे शालु से बात करनी ही होगी और उससे समझाना होगा की वो किसी और से इस बारे में कुछ न कहे…

रत्ना बोलने ही वाली थी की तभी शालु खड़ी हो जाती है और चीख़ते हुए कहती है…।
 
शालु: बदजात औरत अपनी चूत की आग शांत करने के लिए तूने अपने ही सागे बेटे को फाँस लिया,, यह तो बेचारा जवानी का मारा है,, इसकी उम्र में तो यह सब चीजे करना आम बात है,,, तू तो बूढी हो रही है,,,और समझदार भी है…तुझे शर्म नही आयी अपने बेटे के साथ चुदवाते हुए,, और बेशरमी से अपनी चूत और गांड मरवा रही है। हे भगवन क्या क्या हो रहा है इस दुनिया में…घोर कलयुग आ चुका है…हे भगवन अब तो अवतार ले ही लो और पापियो का नाश कर दो…

रत्ना अपने खूबसूरत जिस्म को ढके हुए शालु की बाते सुन रही थी और अब उसकी आँखों में पानी आने लगा था,, ऐसा लग रहा था की रत्ना सोच रही हो की मैंने सचमूच एक घोर पाप कर डाला है और दुनिया और भगवन इस गंदे कर्म के लिए मुझे कभी माफ़ नही करेंगे…

देवा भी वहां नंगा खड़ा हुआ था क्युकी वह उन दोनों औरतो को चोद चुका था । उसे उनके सामने नंगा होने का कोई फ़र्क़ नहि था। देवा भी शालु की बाते सुन कर शॉक था और मन ही मन सोच रहा था की… यह साली छिनाल क्या बक रही है…खुद तो अपने ही बेटे से चुदवाती है और यहाँ चूतियापा कर रही है…

शालु अब भी अपना प्रवचन दे रही थी और रत्ना का रोना चलु हो गया था । जब देवा ने रत्ना को सिसकते हुए देखा तो उसे शालु पे ग़ुस्सा आने लाग। वह कुछ बोलना तो चाह रहा था पर उसे समझ में नहीं आ रहा था की शालु और उसके बीच का सम्बन्ध रत्ना के सामने बताना ठीक रहेगा की नही,,,कहिं ऐसा न हो की रत्ना उससे चुदवाना छोड़ दे यह जान कर की मै कितनी औरतो की ले चुका हूँ…

देवा इन ही खयालो मै खोया हुआ सही और गलत का फैसला सोच ही रहा था की रत्ना के मोटे मोटे आँसु टपकने लगे थे। वो चाहते हुए भी शालु के सामने कुछ बोल नहीं पा रही थी और सिर्फ रोते जा रही थी…जब शालु ने देखा की रत्ना के आंसू निकल गए है तो वो झुक गयी उसके आगे और उसके आंसू पोंछने लगी थी…

शालु,,,अरे मेरी नाजुक कली तू तो रोने लगी…मुझे माफ़ कर दे मै तो बस मजे ले रही थी।

ये बात सुनके रत्ना चौंक गयी और रोते हुए ही शालु को देखने लगी जिसके मुखडे पर अब एक शैतानी मुस्कान थी,,देवा भी यह देख के समझ गया की शालु सिर्फ मजाक कर रही थी। शालू मन ही मन सोचने लगी।

यह तो मेरे टेस्टइ फेल हो गयी…

रत्ना के मुँह से अब भी शब्द नहीं निकल रहे थे और वह अब बहुत कंफ्यूज हो गयी थी…अभी तक शालु उससे दुनियादारी की बात कर रही थी और अब अचानक वो बोल रही है की मै मजाक कर रही थी…
 
आखिर यह सब हो क्या रहा है…भला एक माँ को अपने बेटे से चुदवाते देख कोई औरत ऐसा मजाक कैसे कर सकती है…रत्ना के पल्ले कुछ नहीं पड रहा था…देवा अब मुस्कुरा रहा था और शालु को देखते हुए अपने लंड को मसलने लगा…

शालु रत्ना को अपनी तरफ सवालिया नज़रो से देखते हुए समझ गयी की रत्ना कंफ्यूज हो गयी है…वह बोलती है,,,मेरी जान तू तो बड़ी कमिनी निकली अपने ही बेटे से चुदवा रही थी और अपनी सबसे अच्छी सहेली को इस बारे मै बताया तक नहीं…

रत्ना को कुछ समझ नहीं आ रहा था पर तब भी उसे महसूस हो गया की वो पकड़ी तो गयी है पर शालु किसी को कुछ नहीं बतायेगी। वह अब थोड़ी रिलैक्स होने लगती है,, अब भी उसने अपने बदन को ढ़का हुआ था,,,वह हकलाते हुए कहती है…

रत्ना: ओह्ह्ह…मैं…वोह.....शालु…वाह…दरअसल,,,शालु..... थी…की…वाह…मुझे...माफ़…मुझे माफ़……कर ...दे......मैं..... वो…

रत्ना को हकलाते देख कर शालु मंद मंद मुस्कुराने लगती है और सोचने लगती है की मैंने ज्यादा मजाक कर लिया ।यह तो बहुत डर गयी है…

शालु: साली तू तो बड़ी कुतिया की तरह गाँड मरा रही थी वो भी अपने ही सगे बेटे से बेशरम होकर…रंडी लग रही थी बिलकुल…

मैंने सोचा था की अगर मै तेरे सामने भी आ जाऊ तब भी तू अपना रन्डीपना नही छोड़ेगी और मेरे सामने ही अपने बेटे से अपनी गांड मरवाती रहेगी…पर तेरी तो गांड ही फट्ट गयी मुझको देख कर और मोटे मोटे आंसू बहाने लगी…कम से कम घर का दरवाजा तो बंद कर लेती अपनी चुदाई शुरू करने से पहले…इतना भी कण्ट्रोल नहीं हुआ तुझे…यह बोलते हुए शालु हँसने लगी।

रत्ना शालु की बाते सुनकर चौंक सी गयी और वह ....अब तक भरोसा कर चुकी थी की शालु किसी से कुछ नहीं कहेगी और मै अब भी अपने बेटे…अपने सुहाग…अपने मालिक देवा से मस्त होके चुदवा सकती हूँ।…यह सोचते हुए रत्ना के चेहरे पर फिर से ख़ुशी की लहर आ गयी।
 
चुदाई जारी रहेगी......

बहुत सारे कमेंट के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
 
अपडेट 103

रत्ना को मुस्कुराते देख शालु बोली....हाये मेरी जान बड़ी खुश लग रही है लगता है अपने बेट के साथ बहुत मजे कर लिए है…और वो देवा को देखने लगी। रत्ना भी शर्मा जाती है और अपना चेहरा छुपा लेती है।

अब रत्ना काफी रिलैक्स थी…वो बोली,,,शालु तू तो जानती ही है की देवा के बापू के जाने के बाद से मैंने सिर्फ मूली गाजर से काम चलाया है…तू अच्छे से जानती है की मेरी राते कैसे गुजरी है…कितनी तकलिफ में रही हूँ मैं…

5 साल से मै खुद पर कितना कण्ट्रोल करके आयी हूँ…कई बार मैंने सोचा भी था क्यों न किसी से करवा लु बाहर…पर बदनामी के डर से मैंने कभी कोई ऐसा कदम नही उठाया…5 साल मेरी जिंदगी और मेरी चूत के लिए 100 सालो के बराबर गुजरी है…दुनियादारी की फिकर में मेरी सारी जिंदगी तडपती हुई गुजरी है…

इसी सोच में की देवा के बापू लौट आयेंगे और हम फिर से ख़ुशी से रहेगे…ऐसा सोचते हुए मैंने कभी दूसरी शादी भी नही करी…लेकिन अब जब मैं जान गयी की देवा के बापू इस दुनिया में नहीं रहे है…

मेरी उम्र इतनी ज्यादा है की अब कौन मुझसे शादी करेगा…कौन अब मेरा हाथ थामेगा इस उमर में…पर तभी मेरे जीवन में एक नयी उमंग आयी…और वो कोई और नहीं मेरा प्यारा…राज दुलारा…मेरा मेहनती बेटा था…देवा ने मुझे यह एहसास दिलाया की मै अब भी जवान हुँ…और मुझे यह विश्वास दिलाया की मुझे अपनी जिंदगी में ही सब कुछ पाने का पूरा अधिकार है जो मैंने इन 5 सालो में कभी नहीं पाया…देवा ही मेरी जिंदगी में एक नया पडाव लाया…और मुझे समझाया की मै अभी बुढी नहीं हुई हूँ… मै अब भी बहुत सुन्दर और गदराये बदन की औरत हुँ…

उसी ने मेरी सोयी हुई औरत को जगाया जिसे मै 5 सालो से दफनाये बैठी थी…उसी ने मेरे जिस्म की आग को चिंगारी दी और मुझ को सुखी रहने का आमंत्रण दिया…उसी ने मुझे यह एहसास कराया की इस दुनिया में मै अब भी अपने जिस्म को फिर से चैन और सुख दे सकती हूँ।

मेरे देवा ने ही यह एहसास दिलाया की मै किसी भी मरद को लुभा सकती हूँ…मेरे अपने सगे बेटे ने ही मुझे यह भरोसा दिलाया की जो हम करेंगे वह किसी मायने में गलत नहीं होगा…क्युकी माँ बेटे होने से पहले हम दोनों औरत और मरद है…हमारी भी अपनी जरूरतें है…हमे भी किसी का अपने बदन पर स्पर्श चाहिए…हमे भी पूरा हक़ है वह करने का जो एक औरत और मरद के बीच होना नेचुरल है…चाहे हमारे बीच माँ-बेटे की दिवार है पर उस दिवार को गिराने से किसी का नुकसान नहीं अगर यह बात किसी और को बाहर न पता चले…
 
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