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हुस्न की आग़ और इश्क की बारिश

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बहनों का खिलौना

डॉली की लेक्सस जब मालाबार हिल की उस गगनचुंबी इमारत के निजी गैरेज में दाखिल हुई, तो लगा जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में प्रवेश कर रहा हूँ। मेरे पुराने जीवन की धूल और गंदगी पीछे छूट गई थी। निजी लिफ्ट हमें सीधे पेंटहाउस के अंदर ले गई, और दरवाज़ा खुलते ही मेरे सामने जो नज़ारा था, उसने मेरी साँसें रोक दीं। मुंबई शहर मेरे पैरों के नीचे एक टिमटिमाता हुआ कालीन लग रहा था, और घर की भव्यता किसी राजा के महल से कम नहीं थी।

मैं उस विस्मय में खोया ही हुआ था कि डॉली की आवाज़ ने मुझे ज़मीन पर ला पटका। "घुटनों के बल बैठो," उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ उस आलीशान कमरे की खामोशी में गूँज उठी।

मैंने तुरंत आज्ञा का पालन किया, इतालवी संगमरमर की ठंडी सतह मेरे घुटनों के नीचे चुभ रही थी। मैं उनके घर में एक कैदी, एक गुलाम के रूप में दाखिल हुआ था। तभी, निजी लिफ्ट के दरवाज़े के खुलने की धीमी आवाज़ हुई। एक और महिला अंदर दाखिल हुई।

वह डॉली की परछाई की तरह लग रही थी - वही कद, वही आकर्षक नैन-नक्श, बस कुछ साल बड़ी और उसकी आँखों में डॉली की तीखी धार की जगह एक चंचल शरारत थी। उसने एक खूबसूरत साड़ी पहनी हुई थी और उसके चेहरे पर आत्मविश्वास की वही चमक थी जो डॉली के चेहरे पर रहती थी।

"सुनेना, तुम आ गईं," डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा।

"कामिनी, तुमने बुलाया और हम चले आए," उस महिला ने कहा, उसकी नज़र मुझ पर पड़ी जो फर्श पर घुटनों के बल बैठा था। वह चौंकी नहीं, बस उसकी आँखों में एक मनोरंजक चमक आ गई। "और यह कौन है?"

"सुनेना, यह राज है," डॉली ने मेरा परिचय ऐसे कराया जैसे वह कोई नया फर्नीचर दिखा रही हों। "मेरा नया... प्रोजेक्ट।"

सुनेना मेरे पास आईं। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरी ठोड़ी को ऊपर उठाया, मुझे उनकी आँखों में देखने के लिए मजबूर किया। "बहुत सुंदर है, कामिनी," सुनेना ने कहा, उनकी आवाज़ रेशम की तरह मुलायम थी। "आँखें देखो इसकी, कितनी मासूमियत है। बिल्कुल वैसा ही जैसा तुम्हें पसंद है।"

"मैंने सोचा था कि तुम्हें यह पसंद आएगा," डॉली ने जवाब दिया, उनकी आवाज़ में गर्व था। "वास्तव में, मैंने तुम्हें यहाँ विशेष रूप से बुलाया है... इसे साझा करने के लिए।"

यह शब्द मेरे कानों में एक बम की तरह फटे। साझा करने के लिए? मैं एक वस्तु था, एक उपहार था, जिसे बहनों के बीच बाँटा जाना था। मेरे अंदर अपमान की एक लहर उठी, लेकिन उसके नीचे एक गहरी, काली उत्तेजना भी थी। दो खूबसूरत, शक्तिशाली महिलाओं द्वारा एक साथ वांछित होने का एहसास नशीला था।

सुनेना मुस्कुराईं। "तुम हमेशा मेरे लिए सबसे अच्छे खिलौने चुनती हो, कामिनी।"

उन्होंने मेरे बालों में हाथ फेरा। "क्या यह प्रशिक्षित है?"

"प्रशिक्षण अभी शुरू हुआ है," डॉली ने कहा। "लेकिन यह सीखता बहुत जल्दी है। है ना, राज?"

"जी, मालकिन," मैंने फुसफुसाते हुए कहा, यह महसूस करते हुए कि अब मुझे दो मालकिनों को जवाब देना होगा। सुनेना यह सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़ीं। यह मेरे जीवन के सबसे लंबे और सबसे कामुक रातों में से एक की शुरुआत थी।

वे दोनों मुझे लिविंग रूम में ले गईं। उन्होंने मुझे कमरे के बीच में एक मूर्ति की तरह खड़ा कर दिया, और खुद आरामदायक सोफे पर बैठ गईं, हाथों में शराब के गिलास लिए। वे मुझे देख रही थीं, मेरे शरीर का मूल्यांकन कर रही थीं, और मेरे बारे में ऐसे बात कर रही थीं जैसे मैं सुन नहीं सकता।

"इसकी त्वचा देखो," सुनेना ने कहा। "बिल्कुल बेदाग। और कंधे कितने चौड़े हैं।"

"और यह आज्ञाकारी भी है," डॉली ने कहा। "मैंने इसे अपने पुराने जीवन को पूरी तरह से त्यागते हुए देखा है। अब यह सिर्फ हमारा है।"

उनकी बातें मेरे लिए कामुक यातना थीं। वे मेरे शरीर और मेरी आत्मा के टुकड़े-टुकड़े कर रही थीं, और फिर उन्हें अपनी पसंद के अनुसार फिर से जोड़ रही थीं। हर शब्द मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था, मेरे लंड को पत्थर की तरह सख्त बना रहा था।

कुछ देर बाद, सुनेना उठीं और मेरे पास आईं। उन्होंने मेरे शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। उनके हाथ ठंडे थे, और उनका स्पर्श मेरे शरीर पर सिहरन पैदा कर रहा था। डॉली सोफे पर बैठी देखती रहीं, जैसे कोई निर्देशक अपने नाटक का मंचन देख रहा हो।

"इसे स्पर्श करना पसंद है," डॉली ने निर्देश दिया। "इसकी पीठ पर... यहाँ।"

सुनेना ने अपनी उंगलियों को मेरी पीठ पर फेरा, और मैं अनजाने में कांप उठा। उन्होंने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया, और फिर डॉली भी उठीं। अब वे दोनों मेरे सामने खड़ी थीं, दो शिकारी देवियों की तरह जो अपने शिकार के साथ खेलने के लिए तैयार थीं।

"यह आज रात हमारी पूजा करेगा," डॉली ने घोषणा की।
 
उन्होंने मुझे फर्श पर उनके बीच घुटनों के बल बैठने का आदेश दिया। वे सोफे पर बैठ गईं, उनकी टाँगें मेरी पहुँच में थीं। उन्होंने एक खेल शुरू किया। वे बारी-बारी से मुझे अपने पैरों से छेड़तीं। सुनेना अपने पैरों को मेरी छाती पर फेरतीं, जबकि डॉली अपनी नुकीली एड़ी से मेरे लंड को हल्के से छूतीं।

यह एक धीमी, कामुक यातना थी, जो मेरी सहनशीलता की हर सीमा का परीक्षण कर रही थी। उनके संयुक्त ध्यान ने मुझे पागल कर दिया। मैं एक ही समय में दो दिशाओं से खींचा जा रहा था, दो शक्तिशाली धाराओं के बीच फँसा हुआ था।

वे सिर्फ मेरे शरीर के साथ नहीं खेल रही थीं; वे मेरे दिमाग के साथ खेल रही थीं, मुझे दिखा रही थीं कि मेरा नियंत्रण कितना कम है, और उनका कितना पूर्ण। जब उन्हें लगा कि मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता, तो डॉली ने फुसफुसाते हुए कहा, "चलो, इसे हमारे आरामगाह में ले चलते हैं।"

वे मुझे डॉली के विशाल मास्टर बेडरूम में ले गईं। शहर की रोशनी कांच की दीवारों से अंदर आ रही थी, जिससे कमरा एक जादुई चमक से भर गया था। उन्होंने मुझे बिस्तर के बीच में पीठ के बल लेटने का आदेश दिया। मैं उस विशाल बिस्तर पर एक छोटी सी भेंट की तरह लग रहा था।

और फिर, मेरे सामने, उन्होंने एक दूसरे को धीरे-धीरे निर्वस्त्र करना शुरू कर दिया। यह एक कामुक नृत्य था, एक दूसरे के लिए और मेरे लिए एक प्रदर्शन। उनके शरीर, जो एक-दूसरे से इतने मिलते-जुलते थे, फिर भी सूक्ष्म रूप से भिन्न थे, मेरे सामने प्रकट हुए। डॉली का शरीर एक अनुभवी योद्धा की तरह गठा हुआ और शक्तिशाली था, जबकि सुनेना का शरीर थोड़ा नरम और अधिक स्त्रैण था।

जब वे दोनों पूरी तरह से नग्न हो गईं, तो वे बिस्तर पर मेरे दोनों ओर चढ़ गईं। मैं स्वर्ग में था, दो खूबसूरत परियों के बीच फँसा हुआ।

"हमेशा याद रखो, राज," डॉली ने फुसफुसाया, मेरे होठों को चूमते हुए। "खुशी एक विशेषाधिकार है जो हम तुम्हें दे रही हैं।"

उन्होंने एक साथ मेरे शरीर की खोज शुरू की। एक मुझे चूम रही थी, जबकि दूसरी मेरे शरीर को अपने हाथों और होठों से पूज रही थी। यह एक सिम्फनी की तरह था, जहाँ हर स्पर्श एक नोट था, और मैं वह वाद्ययंत्र था जिस पर वे अपनी धुन बजा रही थीं।

उन्होंने बारी-बारी से मुझे मुख मैथुन का सुख दिया, एक-दूसरे के साथ एक चंचल प्रतियोगिता में, यह देखने के लिए कि कौन मुझे ज़्यादा तड़पा सकता है। मैं आनंद की लहरों में डूब रहा था, मेरा शरीर अब मेरा अपना नहीं था; यह उनकी खुशी का एक पात्र बन गया था।

"अब," डॉली ने घोषणा की। "देखते हैं यह हमारी सवारी कैसे करता है।"

पहले सुनेना मेरे ऊपर बैठीं। वह धीमी और कामुक थीं, हर गति का आनंद ले रही थीं। डॉली उनके बगल में लेटी थीं, उन्हें और मुझे एक साथ सहला रही थीं, पूरे दृश्य को एक मालकिन की तरह निर्देशित कर रही थीं। उन्होंने सुनेना के कान में फुसफुसाया कि कैसे चलना है, कहाँ छूना है, मुझे और भी ज़्यादा आनंद देने के लिए।

फिर, उन्होंने जगह बदली। डॉली मेरे ऊपर आईं, और उनकी ऊर्जा बिल्कुल अलग थी। वह जंगली, शक्तिशाली और अधिकारपूर्ण थीं। उन्होंने मुझे ऐसे चलाया जैसे वह मेरे शरीर की हर प्रतिक्रिया को जानती हों, हर कमजोर नस से वाकिफ हों। सुनेना अब सहायक की भूमिका में थीं, मेरे हाथों को पकड़कर, मेरी छाती को चूमकर, पूरे अनुभव को और भी तीव्र बना रही थीं।

यह एक ऐसा संभोग था जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। यह तीन शरीरों का एक जटिल नृत्य था, जो इच्छा, शक्ति और पूर्ण समर्पण से प्रेरित था। उन्होंने मुझे एक साझा चरमोत्कर्ष की ओर धकेला, एक ऐसा विस्फोट जो न केवल शारीरिक था, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक भी था। जब हम तीनों एक साथ चरम पर पहुँचे, तो यह एक विजय थी - उनकी विजय, मेरे शरीर और आत्मा पर।

संभोग के बाद, हम तीनों बिस्तर पर एक दूसरे से उलझे हुए लेटे रहे, हमारी साँसें और पसीने एक दूसरे में मिल रहे थे। हवा में शांति थी, लेकिन यह एक तूफ़ान के बाद की शांति थी। बहनें एक-दूसरे से धीरे-धीरे बात कर रही थीं, हँस रही थीं, और मैं चुपचाप लेटा हुआ, उनकी बातचीत सुन रहा था।

"इसका प्रदर्शन कैसा था?" डॉली ने पूछा, जैसे वे किसी नई कार का परीक्षण कर रही हों।

"बहुत अच्छा," सुनेना ने उत्तर दिया, मेरे बालों में अपनी उंगलियों को फेरते हुए। "इसमें सहनशक्ति है। बस आज्ञाकारिता में थोड़े और प्रशिक्षण की जरूरत है, लेकिन वह तुम पर छोड़ती हूँ।"

"मैं उस पर काम करूँगी," डॉली ने वादा किया।

वे मेरे बारे में, मेरे सामने, ऐसे बात कर रही थीं जैसे मैं कोई वस्तु हूँ। और अजीब बात यह थी कि मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं थी। मुझे अपनी जगह पता थी।

कुछ देर बाद, सुनेना जाने के लिए तैयार हो गईं। उन्होंने डॉली को गले लगाया और चूमा। फिर, वह मेरे पास आईं और मेरे माथे पर एक हल्का सा चुंबन दिया। "मुझे बहुत मज़ा आया, कामिनी। अपना नया खिलौना साझा करने के लिए धन्यवाद। हमें यह जल्द ही फिर से करना होगा।"

'खिलौना'। इस शब्द ने मेरे नए अस्तित्व को पूरी तरह से परिभाषित कर दिया।

जब सुनेना चली गईं, तो डॉली मेरी ओर मुड़ीं। मैं अभी भी बिस्तर पर थका हुआ लेटा था। उनकी आँखों में कोई कोमलता नहीं थी, बस एक गहरी संतुष्टि थी। "तुमने आज रात अच्छा प्रदर्शन किया," उन्होंने कहा, जैसे कोई प्रशिक्षक अपने पालतू जानवर की प्रशंसा कर रहा हो जिसने एक नया करतब सफलतापूर्वक किया हो। "तुमने मेरी बहन को खुश किया। इससे मैं खुश हुई।"

उन्होंने मुझे बिस्तर पर सोने के लिए आमंत्रित नहीं किया। उन्होंने फर्श पर पड़ी उस चटाई की ओर इशारा किया, जो मेरे आगमन के बाद से वहीं थी। "अब, अपनी जगह पर जाओ। कल एक लंबा दिन है।"

मैं चुपचाप उस आनंद के बिस्तर से उतरा और दासता की उस कठोर चटाई पर लेट गया। मैंने अभी-अभी अपने जीवन का सबसे तीव्र यौन अनुभव किया था, लेकिन अंत में, मेरी जगह वही थी - उनकी मालकिन के पैरों के पास।

मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने आज रात अपनी सेवा का एक नया स्तर हासिल किया था। मैं अब सिर्फ एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं था; मैं एक पारिवारिक रहस्य था, एक साझा खिलौना था। मेरी दुनिया एक ही समय में बहुत बड़ी और बहुत छोटी हो गई थी। और इस नई, अस्थिर हकीकत में, मुझे एक अजीब सा सुकून मिला।

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अगली सुबह जब सुनेना गईं, तो पेंटहाउस में एक अजीब सी खामोशी छा गई। पिछली रात का जुनून, तीन शरीरों की उलझन, और बहनों के बीच का तनावपूर्ण खेल अब समाप्त हो चुका था। सुनेना की विदाई शांत थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अधूरी कहानी थी, एक ऐसी इच्छा जो शायद अभी भी सुलग रही थी।

मैं, हमेशा की तरह, फर्श पर अपनी चटाई पर बैठा था, यह देखने का इंतजार कर रहा था कि मेरी मालकिन का अगला कदम क्या होगा।

डॉली ने दरवाज़ा बंद किया और एक गहरी साँस ली। वह मेरी ओर मुड़ीं, और उनकी आँखों में वह परिचित, ठंडी शक्ति थी, लेकिन आज उसमें कुछ और भी था - एक गहरी, लगभग शिकारी संतुष्टि।

"वह चली गई," उन्होंने कहा, जैसे यह एक युग का अंत हो। "अब, यहाँ सिर्फ तुम और मैं हैं।"

उन्होंने अपने फोन पर एक त्वरित कॉल किया। "हाँ, मैं आज ऑफिस नहीं आऊँगी," मैंने उन्हें कहते सुना। "मेरे सभी अपॉइंटमेंट्स रद्द कर दो। मैं आज छुट्टी पर हूँ।"

उन्होंने फोन काट दिया और मेरी ओर देखा, उनकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जिसने मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ा दी। "मैंने आज का दिन तुम्हारे लिए लिया है, राज," उन्होंने घोषणा की। "या यूँ कहें, कि मैंने आज का दिन खुद के लिए लिया है, ताकि मैं तुम्हारा, अपनी सबसे कीमती संपत्ति का, पूरा आनंद ले सकूँ।"

यह एक वादा था, एक धमकी थी, और एक निमंत्रण था। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे लिविंग रूम की ओर ले गईं, जहाँ रात के जुनून के बाद सूरज की रोशनी चमक रही थी।

"आज कोई खेल नहीं होगा, कोई परीक्षा नहीं होगी," उन्होंने कहा, मुझे अपने विशाल, सफेद चमड़े के काउच पर बैठाते हुए। यह पहली बार था जब उन्होंने मुझे अपने फर्नीचर पर बैठने की अनुमति दी थी। "आज सिर्फ आनंद होगा। मेरा आनंद।"

उन्होंने मुझे नंगा होने का आदेश दिया, और फिर वह मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं। यह एक ऐसी मुद्रा थी जिसमें शक्ति का संतुलन पूरी तरह से उसके पक्ष में था, भले ही वह शारीरिक रूप से नीचे थीं।

डॉली ने मेरे लंड को ऐसे देखा जैसे कोई पारखी किसी अनमोल हीरे को देख रहा हो। "पिछली रात," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा, "मैंने अपनी बहन को तुम्हारे साथ खेलते हुए देखा। वह तुम्हारे आकार से मोहित थी। लेकिन वह यह नहीं समझती कि असली शक्ति आकार में नहीं, बल्कि उसके उपयोग में है।"

उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया, और उनका स्पर्श किसी विशेषज्ञ का था। उन्होंने उसकी प्रशंसा शुरू की, लेकिन यह सुनेना की तरह भावुक नहीं थी। यह अधिक तथ्यात्मक, अधिक अधिकारपूर्ण थी। "यह एक हथियार है, राज। एक सुंदर, शक्तिशाली हथियार। और यह मेरा है।"

फिर, उन्होंने उसे अपने मुँह में ले लिया। यह एक ऐसा मुख मैथुन था जो घंटों तक चलता रहा। यह सिर्फ एक क्रिया नहीं थी; यह एक घोषणा थी। उन्होंने अपनी जीभ, अपने होठों और अपने गले का इस्तेमाल करते हुए, मेरे आनंद के हर स्तर का पता लगाया। वह मुझे बार-बार चरम के कगार पर ले जातीं, हर बार पीछे हट जातीं, मुझे अपनी दया पर तड़पता हुआ छोड़ देतीं।

वह मुझे सिखा रही थीं कि मेरा आनंद पूरी तरह से उनका है, जिसे वह जब चाहें, जैसे चाहें, दे सकती हैं। हर बार जब मैं लगभग स्खलित होने वाला होता, वह रुक जातीं, मेरी आँखों में देखतीं और मुस्कुरातीं। "अभी नहीं," वह फुसफुसातीं। "मैं तय करूँगी कब।" यह मेरे जीवन की सबसे मीठी यातना थी।

घंटों की उस मीठी यातना के बाद, जब मेरा शरीर आनंद और प्रत्याशा की चरम सीमा पर था, डॉली पीछे हटीं। उनकी साँसें तेज थीं, और उनकी आँखें वासना से गहरी हो गई थीं।

"तुमने मुझे बहुत आनंद दिया है," उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ में एक कर्कशता थी। "अब, तुम्हारी बारी है कि तुम अपनी मालकिन का स्वाद चखो।”

उन्होंने काउच पर अपनी पीठ टिका दी और अपनी टाँगें फैला दीं, मुझे अपने पास बुलाया। यह एक शाही आदेश था। मैं उनके पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गया और उनकी पूजा करने लगा। उनकी योनि का स्वाद शक्ति और स्त्रीत्व का एक मादक मिश्रण था। मैंने अपनी जीभ का इस्तेमाल उनकी हर संवेदनशील नस को जगाने के लिए किया, उनकी हर सिसकारी, हर कंपकंपी को एक व्यक्तिगत जीत के रूप में महसूस किया।

मैं उन्हें आनंद दे रहा था, और ऐसा करने में, मैं खुद को उनके और भी करीब महसूस कर रहा था। वह मेरे ऊपर कराह रही थीं, मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में जकड़े हुए, जब तक कि वह एक शक्तिशाली, कंपकंपाते हुए ऑर्गेज्म तक नहीं पहुँच गईं।

लेकिन वह रुकी नहीं। जैसे ही उनके ऑर्गेज्म की लहरें शांत हुईं, उन्होंने मुझे काउच पर मेरी पीठ के बल लेटने का आदेश दिया। वह मेरे ऊपर चढ़ गईं, उनकी पसंदीदा काउगर्ल मुद्रा में, जहाँ वह पूरी तरह से नियंत्रण में थीं।

"अब," उन्होंने हाँफते हुए कहा, जब उन्होंने मेरे कठोर लंड को अपने अंदर लिया, "हम देखेंगे कि तुम अपनी मालकिन की सवारी कैसे करते हो।"

यह दिन का हमारा पहला संभोग था, और यह पूरी तरह से उसकी शर्तों पर था। वह मेरे ऊपर एक कुशल घुड़सवार की तरह चलीं, अपनी गति और गहराई को नियंत्रित करते हुए, अपने आनंद को अधिकतम करने के लिए। मैं नीचे लेटा हुआ, उन्हें देख रहा था - उनके शक्तिशाली जांघें, उनके उछलते हुए स्तन, उनके चेहरे पर परमानंद की अभिव्यक्ति। यह एक ऐसा दृश्य था जो मेरे दिमाग में हमेशा के लिए अंकित हो गया। उन्होंने मुझे तब तक अपने नीचे रखा जब तक कि वह एक और, और भी अधिक तीव्र चरमोत्कर्ष तक नहीं पहुँच गईं, अपनी जीत की घोषणा करते हुए एक विजयपूर्ण चीख के साथ।
 
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