• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

होली (complete) बजाज का सफरनामा

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
तब तक एक किशोर, चेहरा रंग से अच्छी तरह पुता और साथ में मेरी बड़ी छिनाल ननद.

वो हँस के मुझसे बोली, “ये तेरा छोटा देवर है. ज़रा शर्मीला है लेकिन कस के रंग लगाना…” फिर क्या था,

“अरे शर्म क्या.? मैं इसका सब कुछ छुडा दूंगी, बस देखते रहिये.” और मैंने उसे कस के पकड़ लिया.

वो बेचारा ना-ना करता रहा, लेकिन मेरी ननद और जेठानी इतने ज़ोर-ज़ोर से मुझे ललकार रही थी कि मुझे कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा था. उसके चेहरे पे मैंने कस के रंग लगाया, मुलायम गाल रगड़ डाले…..

“हाय भाभी, रंग देवर के साथ खेल रही है या उसके कपड़ो के साथ…अरे देवर-भाभी की होली है, ज़रा कस के….” जेठानी ने चढ़ाया, “अरे फाड़ दे कपड़े इसके…पहले कपड़े फाड़ फिर इसकी गाण्ड.”

फिर क्या था.? मैंने पहले तो कुर्ता खींच के फाड़ दिया. जेठानी ने उसके दोनों हाथ पकड़े तो मैंने पजामे का नाडा भी खोल दिया. अब वो सिर्फ चड्डी में. ननद ने भी उसके साथ मिल के मेरी साड़ी खींच दी और चोली खींचते हुए फाड़ दी. पेटीकोट को ऊपर नाड़े में ही खौंस दिया मैंने…..

चड्डी उसकी तनी हुई थी. एक झटके में मैंने उसे भी नीचे खींच दिया और उसका 6 inch का तन्नाया लंड बाहर. शरमा कर उसने उसे छिपाने की कोशिश की लेकिन तब तक उसे गिरा के मैं उसके ऊपर चढ़ चुकी थी. दोनों हाथों में कालिख लगा के उसके गोरे लंड को कस-कस कर मुट्ठिया रही थी. तब तक मेरी ननद ने मेरी भी वही हालत कर दी और बोली, “भाभी अगर हिम्मत है तो इसके लंड को अंदर ले के होली खेलिए.”

मैं तो चुदासी थी ही, थोड़ी देर चूत मैंने उसके लंड के ऊपर रगड़ी और फिर एक झटके में अंदर.

“साले, ये ले मेरी चुची. रगड़, मसल और कस के चोद….. अगर अपनी माँ का बेटा है तो दिखा दे कि तू असली मर्द है….. ले ले चोद और अगर किसी रंडी, छिनाल की औलाद है तो…..” मैंने बोला और हचक-हचक के चोदना शुरू कर दिया.

इतनी देर से मेरी प्यासी चूत को लंड मिला था. वो कुछ बोलना चाहता था लेकिन मेरी जेठानी ने उसका मुँह रंग लगाने के साथ-साथ बंद भी कर रखा था. थोड़ी देर में अपने आप वो चूतड़ उछालने लगा और फिर मैंने भी अपनी चूत सिकोड़ के, चुचियाँ उसके सीने पे रगड़-रगड़ के चोदना शुरू कर दिया. मेरे बदन का सब रंग उसकी देह में लग रहा था. ननद मेरी चुचियों पर रंग लगाती और वही रंग मैं उसके सीने पर पोत देती.

थोड़ी देर तक तो वो नीचे रहा लेकिन फिर मुझे नीच गिरा कर खुद ऊपर चढ़ के चोदने लगा. नशे में चूर मुझे कुछ नहीं पता चल रहा था बस मज़ा बहुत आ रहा था. कल रात से ही जो मैं झड नहीं पाई थी और बहुत चुदासी हो रही थी. वो तो चोद ही रहा था, साथ में ननद भी कभी मेरे चुचक पर तो कभी clit पे रंग लगाने के बहाने फ्लिक कर देती.

तभी मैंने देखा कि ननदोई जी, उन्होंने उंगली के इशारे से मुझे चुप रहने को कहा और कपड़े उतार के अपना खूब मोटा कड़ा लंड (penis)…………… मैं समझ गई और मेरे पैर जो उसकी पीठ पे थे पूरी ताकत से मैंने कैची की तरह कस के बांध लिये. वो बेचारा तिलमिलाता रहा… लेकिन जब तक वो समझे उसकी गाण्ड चिर कर उन्होंने खूब मोटा लाल सुपाडे वाला लंड उसकी गाण्ड के छेद पर लगा दिया था और कमर पकड़ कर जो करारा धक्का मारा एक बार में ही पूरा सुपाड़ा अंदर पैबस्त हो गया. बेचारा चीख भी नही पाया क्योंकि उसके मुँह में मैंने जानबूझ के अपनी मोटी चुची ठेल दी थी.

“हाँ ननदोई जी, मार लो साले की गाण्ड….. खूब कस के पेल दो पूरा लंड अंदर, भले ही फट जाए साले की…… बाद में मोची से सिलवा लेगा. (मैं सोच रही थी कि मेरा देवर है तो ननदोई जी का तो साला ही हुआ ना..) लेकिन छोडना मत.”

साथ में मैं कस के उसकी पीठ पकड़े हुए थी. तिल-तिल कर उनका पूरा लंड समा गया. एक बार जब लंड अंदर घुसा तो फिर तो वो लाख कसमसाता रहा, छटपटाता रहा, लेकिन ननदोई जी भी सटा-सट, गपा-गप उसकी गाण्ड मारते रहे. एक बात और….. जितनी ज़ोर से उसकी गाण्ड मारी जा रही थी उतना ही उसके लंड की शक्ति और चुदाई का जोश बढ़ता जा रहा था. हम दोनों के बीच वो अच्छी तरह से Sandwich बन गया था. लंड उसका भले ही ‘मेरे उनके’ या ननदोई की तरह लम्बा-मोटा ना हो पर देर तक चोदने और ताकत में कम नहीं था. जब लंड उसकी गाण्ड में घुसता तो उसी तेजी से वो मेरी चूत में पेलता और जब वो बाहर निकलते तो साथ में वो भी. थोड़ी देर में मेरी देह काँपने लगी.

मैं झड़ने के कगार पर थी और वो भी… जिस तरह उसका लंड मेरी चूत में हो रहा था.

“ओह्ह…ओह्ह… हा..हआआआआ…
 
बस….ओह्ह्ह्ह…… झड़ रहीईईईइ हूऊउउऊ……” कस-कस के मैं चूतड़ उचका रही थी और उसकी भी आँखे बंद हुई जा रही थी.

तब तक ननद ने एक बाल्टी पानी हम दोनों के चेहरे पे कस के फेंका और हमारे चेहरों से रंग भी उतरने लगा. अब थोड़ा नशा भी हल्का हो गया था.

मैंने उसे देखा तो…….

“अरे ये………..ये तो मेरा भाई है.” मैंने पहचाना लेकिन तब तक हम दोनो झड़ रहे थे और मैं चाह के भी उसको हटा नहीं पा रही थी. सच पूछिए तो मैं हटाना भी नहीं चाह रही थी. क्योंकि मेरी रात भर की प्यासी और पनियाई चूत में वीर्य की बरसात जो हो रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे कई सालों के बाद सावन इतना झूम के बरसा हो.

ननदोई अभी भी कस के उसकी गाण्ड मार रहे थे. हम लोगों के झड़ने के थोड़ी देर बाद जब वो भी झड़ के हटे, तब मेरा भाई मुझसे अलग हो पाया.

जब मेरा भाई मुझसे अलग हुआ तो मेरे पास ही खड़ा हो गया. ननदोई सा मेरे सामने ही नंगे खड़े थे. मेरी नज़र उनके लौड़े पर थी. ननद ने चोली और घाघरी पहन रखी थी जो पूरी तरह से रंग, कीचड़ और गोबर से सनी हुई थी.

मैंने मेरे भाई की ओर देखा, उसका लंड अब मुरझा चुका था. वो घूर-घूर कर मेरे मम्मे देखे जा रहा था. मुझे शर्म सी आने लगी तो ख्याल आया कि मैं सबके सामने नंगी खड़ी हूँ. जल्दी-जल्दी मैंने अपने नाड़े में खोंसे हुए पेटीकोट को बाहर निकाला और पास ही पड़ी मेरी साड़ी को देह से लपेट लिया. मेरी चोली का कुछ पता नहीं था.? चूंकि साड़ी मेरी छिनाल छोटी ननद की थी, इसलिए थोड़ी छोटी थी. मेरी पूरी देह को ढक नहीं पा रही थी. मेरे कड़े चुचक साड़ी में से साफ़-साफ़ झलक रहे थे. ननदोई सा और मेरा भाई मुझे घूरे जा रहे थे.

तब तक मेरी छोटी ननद भी आ गई थी. रंग से सराबोर थी बेचारी. वो और जेठानी जी मेरे भाई को लेके रसोईघर की तरफ़ चली गई. मैं समझ गई कि फिर से छोटी छिनाल ननद को खुजली हो रही है परन्तु इस बार तो मेरी जेठानी भी साथ में थी. हाँ भई, मेरी चुदाई देख कर तो उनकी चुत भी पनिया गई होगी और फिर अपने ननदोई जी का मोटा लंड भी तो देख लिया था उन्होंने. खैर मेरे मन में ये ख्याल भी आया कि जेठानी जी ने भी तो ननदोई जी का लंड घोंटा ही होगा कई बार. क्योंकि मेरे ससुराल में तो सब के सब चुदक्कड ही थे.
 
अब मुझे भी वहाँ खड़े रहने में शरम आ रही थी तो मैं भी अपने कमरे में की तरफ़ दौड़ी. कमरे में आ कर मैंने अपनी ननद की साड़ी को एक कोने में फ़ेंक दिया ओर अपने लिए अलमारी में कपड़े ढूंढने लगी.

मैंने सोचा कि मेरे भाई को रसोईघर में ले जाकर पहले तो उसकी पेट पूजा करवाएंगे, लेकिन खाने के लिये तो गुझिया और ठंडाई ही तो थे. मैं समझ गई के ये दोनों छिनाल रान्डे पहले तो मेरे भोले-भाले भाई को भांग वाली गुझिया और ठंडाई पिलाएगी और फिर इसके लंड को अपनी-अपनी चूत में घोंट के खायेन्गी.

चलो कोई बात नहीं, वो भी मेरा भाई है. हमारा खानदान भी कोई कम चुदक्कड नहीं है.!
 
दोस्तों कहानी कैसे लगी ये कहानी किसी ने मेरे को email पर भेजी थी जो आपके लिए इस साइट पर डाली है कृपया करके बताये कहानी कैसे लगी आप सब को
 
जल्द ही इससे बेहतरीन कहानी लेम आ रहा हु अगर ये पसंद आई हो तो कृपया करके कमेंट जरूर करे
 
Back
Top