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हो जाए अगर दिल दीवाना
चार जनवरी, बुधवार की रात को एक बजे उम्र में पच्चीस(25) साल का क्लीन शेव चेहरे वाला स्मार्ट और हैंडसम राज ऑफ़िस में कुर्सी पर बैठा टेबल पर ऑवर टाइम में काम करते हुए चाँदी की ईयर रिंग चैक कर रहा था.
रात के सवा एक बजे राज सभी ईयर रिंग चैक करके उठते हुए अपनी कुर्सी पीछे सरकाकर खड़ा हुआ और टेबल पर रखा सामान गिनकर बेसमेंट से सीढ़िया चढ़ते हुए ऊपर आया.
सामने सोफे पर उम्र में पैंतालिस(45) साल के क्लीन शेव चेहरे वाले बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम जयशर्मा अपने से चार साल बड़ी उम्र में उनचास(49) साल की बहुत ही सुन्दर पत्नी मिनी के साथ बैठे बातें कर रहे थे.
राज ने कहा—“सेठ जी, सभी ईयर रिंग लॉक लगाने के बाद चैक कर ली. अब बस पैक करना बाकि हैं. आप एक बार आकर देख लो.”
जयशर्मा—“अब सुबह देखेंगे, यार. सारा काम टेबल पर छोड़ दो और ऊपर कपड़ा डाल देना. एक से ऊपर टाइम हो गया. अब तुम भी जाओ.”
राज—“ये भी सही हैं.”
राज ने सीढ़िया उतरते हुए नीचे बेसमेंट में आकर सारा सामान टेबल से उठाकर जयशर्मा के केबिन में कपड़े से ढककर रख दिया और केबिन लॉक करके सीढ़िया चढ़ते हुए वापस ऊपर आकर ऑफ़िस के दरवाजे पर ताला लगाने लगा.
जयशर्मा और मिनी सोफे से उठकर खड़े हुए. मिनी चलकर राज के पास आई. राज ने मिनी को ऑफ़िस की चाबी दी और घर का दरवाजा खोलकर बाहर चला गया. मिनी ने घर का दरवाजा अन्दर से बन्द किया और मुड़कर बैडरूम की तरफ आने लगी.
मिनी के पास आते ही बैडरूम के दरवाजे के पास खड़े जयशर्मा ने एक हाथ मिनी के गले में डालकर कंधे पर रखते हुए दूसरे हाथ से बैडरूम के दरवाजे को खोला. दोनों पति–पत्नी बैडरूम के अन्दर चले गए और जयशर्मा ने बैडरूम का दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया.
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पूरी तरह सुनसान प्रिंस रोड़ पर बहुत ठंड भरी रात में घना कोहरा छाया हुआ था. थोड़ी–थोड़ी दूर पर सड़क किनारे लगे खम्बों पर लाईटें जल रही थी. थरथराती सर्दी में डरावनी आवाजें निकालती हुई सन–सन करती ठंडी–ठंडी हवाएँ चल रही थी.
राज हर रोज की तरह अपने दोनों हाथ पेन्ट की जेबों में डाले कड़ाके की सर्दी से काँपते हुए प्रिंस रोड़ पर तेज–तेज कदमों से चलता हुआ जा रहा था.
राज चलते–चलते ठंड से काँपता हुआ मन में बोला कि सेठ जी के घर और ऑफ़िस में तो सर्दी का पता ही नहीं चलता. वहाँ अन्दर तो ऐसा लग रहा था, जैसे मार्च–अप्रेल का महीना हो और बाहर आते ही पूरा शरीर काँपने लगा.
राज चलते हुए अभी पन्द्रह मिनट दूर आया, तभी उसने देखा कि सड़क पर आगे एक गाड़ी खड़ी हैं और गाड़ी के पास एक लड़के और एक लड़की के बीच मारपीट हो रही हैं. दो अन्य लड़के उनके पास खड़े हैं. राज चलते–चलते रुक गया और दूर खड़ा रहकर उनको देखने लगा.
लड़का और लड़की लड़ते–लड़ते एक–दूसरे के बाल खिंचते हुए सड़क पर नीचे गिरे और एक–दूसरे के ऊपर–नीचे होते हुए सड़क पर लोट–पोट होने लगे. लड़की लड़के पर भारी पड़ने लगी और लड़की ने लड़के को दबोच लिया. इसी बीच पास खड़े दोनों लड़कों ने लड़की को पकड़कर लड़के को लड़की के हाथो से छुड़ाया और लड़की को लड़के से दूर किया.
लड़की दोनों लड़कों से छुटने के लिए छटपटा रही थी. सड़क पर गिरा लड़का उठा और लड़की को घूसे(मुक्के) और लातें मारने लगा. कुछ देर लड़की को पीटने के बाद लड़के ने लड़की के बाल पकड़े. दोनों अन्य लड़के लड़की को छोड़कर पीछे हट गए. लड़की के बाल पकड़ने वाले लड़के ने लड़की को सड़क किनारे गिरा दिया और गिराने के बाद चार–पाँच लातें मारकर पास खड़े दोनों लड़कों की तरफ आया.
तीनों लड़के गाड़ी के पास जाकर कुछ देर खड़े रहे. फिर लड़की को वहीं छोड़कर तीनों लड़के गाड़ी में बैठकर चले गए.
राज घबराकर सोचने लगा कि आगे जाऊँ या रास्ता बदल लूँ ? पता नहीं, क्या चक्कर हैं ? छोड़ यार ! क्यों मुसीबत को गले लगाना ? इन लड़कियों में भी अक्ल तो होती नहीं हैं. बेकार लोगों से प्यार, फिर ये हाल. वैसे भी आजकल टाइम बहुत खराब हैं. मैं मदद करने जाऊँ और ब्लात्कार या मर्डर के इल्जाम में खुद ही अन्दर हो जाऊँ. रहने दे, गोली मार.
राज ने अपना रास्ता बदल लिया और दूसरे रास्ते से जाने लगा. चलते–चलते राज ने कुछ याद करके खुद से कहा कि भूल गया क्या, राज ? कभी तू भूख से तड़पकर कचरे में से सड़े–गले फल उठाकर खा रहा था. उस वक्त तुझे रोता देखकर एक देवी जैसी नारी तेरे पास आई और तेरे आँशू पोंछकर तुझे अपने घर ले गई. जरा सोच अगर वो नारी भी तेरी तरह मुँह फेरकर चली जाती, तो फिर तेरा क्या हाल होता ? इतनी ठंड में बेचारी लड़की सड़क पर पड़ी हैं. वो लड़के उसे कितनी बुरी तरह मारकर गये हैं और तू उसकी मदद करने की जगह रास्ता बदलकर जा रहा हैं. कहीं मर गई तो ? नहीं यार ! कम से कम एक बार जाकर देख तो सही उसको. जो होगा देखा जाएगा.
राज तेज–तेज कदमों से चलता हुआ वापस प्रिन्स रोड़ पर आकर उसी तरफ चलने लगा. लड़की अभी तक वहीं सड़क किनारे पड़ी हुई दिखाई दी. राज धिरे–धिरे उसके पास आया.
बटन वाला घूटने तक आता हुआ कुर्ता और जींस पहने, दिखने में बहुत ही खूबसूरत उम्र में सताईस(27) साल की लड़की शराब के नशे में पूरी तरह धुत थी. उसे बिल्कुल भी होश नहीं था. लड़की के कपड़े अस्त–वयस्त और सर के बाल बिखरे हुए थे. लड़की सड़क किनारे पड़ी–पड़ी कुछ बड़बड़ा रही थी.
राज ने लड़की के पास बैठकर कहा—“आपका घर कहाँ हैं ? आपके घर का कोई नम्बर बता दो, मैं आपके घर से किसी को बुला लेता हूँ.”
राज की आवाज़ सुनकर लड़की ने राज की तरफ देखा और अपना हाथ राज की तरफ किया. राज ने लड़की का हाथ पकड़कर उसको सहारा देकर खड़ी किया.
लड़की खड़ी होने के बाद राज का कॉलर पकड़कर बोली—“साले कमीने, मुझे धोखा देता हैं. छोड़ूगी नहीं तुझे.”
राज मन में बोला कि अरे, ये क्या हो रहा हैं ?
राज अपना कॉलर छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोला—“मैं तो आपकी मदद के लिए आया हूँ.”
लड़की राज को धक्का देकर लड़खड़ाखड़ाते हुए बोली—“मैनें तुझे कितना प्यार किया. तेरे लिए अपने मॉम–डेड से झगड़े किये और तू एक साल मजे लेने के बाद कहता हैं, तेरे जैसी बहुत मिलती हैं. किस–किस से शादी करूँ ?”
राज टेन्शन में आकर मन में सोचने लगा कि लगता हैं, उस लड़के ने शादी का वादा करके टाइमपास किया और छोड़ दिया. अब ये शराब के नशे में मुझे वहीं धोखेबाज लड़का समझ रही हैं.
लड़की हाँफते हुए इधर–उधर देखकर एक पत्थर उठाकर बोली—“अब कहाँ जाएँगा बचकर ? आ सामने ! बताती हूँ तुझे, मैं कितनी बेकार हूँ.”
लड़की को पत्थर मारते देखकर राज पीछे हटते हुए बोला—“अरे…क्या कर रही हो ? लग जाएगी.”
लड़की आँखों से गुस्सा दिखाते हुए बोली—“साले, आगे आ. पीछे क्यों हट रहा हैं ? सर फोड़ूँगी आज तेरा.”
लड़की ने राज की तरफ पत्थर फेंका.
राज खुद को पत्थर लगने से बचाकर लड़की के पास आया और लड़की को पकड़कर बोला—“देवी जी, मेरे ऊपर रहम करो. मैनें आपको धोखा नहीं दिया.”
लड़की खुद को राज से छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली—“छोड़ कमीने, इतनी आसानी से तुझे जाने नहीं दूँगी.”
राज ने लड़की को समझाने की कोशिश की, लेकिन लड़की राज की बात सुनने की जगह गन्दी–गन्दी गालियाँ निकालते हुए राज पर हाथ–पैर चलाने लगी.
जब लड़की राज के काबू में नहीं आई तो राज मन में बोला कि इन बेवड़ों का एक ही ईलाज हैं.
राज ने लड़की के दोनों गालों पर एक के बाद एक पाँच जोरदार चांटे(थप्पड़) जड़ दिये. राज के चान्टों से लड़की के दोनों गाल लाल हो गए. लड़की सड़क पर गिर पड़ी और लड़की ने रोना शुरू कर दिया.
राज घबराकर मन में बोला कि लगता हैं ज्यादा हो गया.
राज लड़की के पास आया और नीचे बैठकर लड़की को बिठाते हुए बोला—“एम सॉरी, प्लीज रोईये मत.”
लड़की सड़क पर बैठकर बच्चों की तरह रोते–रोते बोली—“यार ! क्या हो गया तुझे ? मेरे प्यार में क्या कमी रह गई ? तेरे लिए क्या नहीं किया मैनें ? जब तू प्रोब्लम में था, तो तुझे पैसे दिये. तेरी खुशी के लिए तेरे साथ बिस्तर पर भी सो गई. तूने जो–जो कहा, मैनें सब किया. तेरे मतलब पूरे हो गए, तो अब तू मुझे मार रहा हैं. तू चाहे जितना मरजी मार ले. लेकिन मुझे छोड़कर मत जा. मैं तेरे बिना जी नहीं सकती. प्लीज यार ! तू एकदम से इतना कैसे बदल गया ? आई लव यू, यार. लव यू सॉ मच.”
लड़की को रो–रोकर गिड़गिड़ाते हुए देखकर राज को दया आने लगी.
लड़की राज के पैर पकड़कर बोली—“प्लीज यार ! मैं तेरे पैर पकड़ती हूँ. तू जो बोलेगा, वो सब करूँगी. बस तू मुझे छोड़कर मत जा.”
चार जनवरी, बुधवार की रात को एक बजे उम्र में पच्चीस(25) साल का क्लीन शेव चेहरे वाला स्मार्ट और हैंडसम राज ऑफ़िस में कुर्सी पर बैठा टेबल पर ऑवर टाइम में काम करते हुए चाँदी की ईयर रिंग चैक कर रहा था.
रात के सवा एक बजे राज सभी ईयर रिंग चैक करके उठते हुए अपनी कुर्सी पीछे सरकाकर खड़ा हुआ और टेबल पर रखा सामान गिनकर बेसमेंट से सीढ़िया चढ़ते हुए ऊपर आया.
सामने सोफे पर उम्र में पैंतालिस(45) साल के क्लीन शेव चेहरे वाले बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम जयशर्मा अपने से चार साल बड़ी उम्र में उनचास(49) साल की बहुत ही सुन्दर पत्नी मिनी के साथ बैठे बातें कर रहे थे.
राज ने कहा—“सेठ जी, सभी ईयर रिंग लॉक लगाने के बाद चैक कर ली. अब बस पैक करना बाकि हैं. आप एक बार आकर देख लो.”
जयशर्मा—“अब सुबह देखेंगे, यार. सारा काम टेबल पर छोड़ दो और ऊपर कपड़ा डाल देना. एक से ऊपर टाइम हो गया. अब तुम भी जाओ.”
राज—“ये भी सही हैं.”
राज ने सीढ़िया उतरते हुए नीचे बेसमेंट में आकर सारा सामान टेबल से उठाकर जयशर्मा के केबिन में कपड़े से ढककर रख दिया और केबिन लॉक करके सीढ़िया चढ़ते हुए वापस ऊपर आकर ऑफ़िस के दरवाजे पर ताला लगाने लगा.
जयशर्मा और मिनी सोफे से उठकर खड़े हुए. मिनी चलकर राज के पास आई. राज ने मिनी को ऑफ़िस की चाबी दी और घर का दरवाजा खोलकर बाहर चला गया. मिनी ने घर का दरवाजा अन्दर से बन्द किया और मुड़कर बैडरूम की तरफ आने लगी.
मिनी के पास आते ही बैडरूम के दरवाजे के पास खड़े जयशर्मा ने एक हाथ मिनी के गले में डालकर कंधे पर रखते हुए दूसरे हाथ से बैडरूम के दरवाजे को खोला. दोनों पति–पत्नी बैडरूम के अन्दर चले गए और जयशर्मा ने बैडरूम का दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया.
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पूरी तरह सुनसान प्रिंस रोड़ पर बहुत ठंड भरी रात में घना कोहरा छाया हुआ था. थोड़ी–थोड़ी दूर पर सड़क किनारे लगे खम्बों पर लाईटें जल रही थी. थरथराती सर्दी में डरावनी आवाजें निकालती हुई सन–सन करती ठंडी–ठंडी हवाएँ चल रही थी.
राज हर रोज की तरह अपने दोनों हाथ पेन्ट की जेबों में डाले कड़ाके की सर्दी से काँपते हुए प्रिंस रोड़ पर तेज–तेज कदमों से चलता हुआ जा रहा था.
राज चलते–चलते ठंड से काँपता हुआ मन में बोला कि सेठ जी के घर और ऑफ़िस में तो सर्दी का पता ही नहीं चलता. वहाँ अन्दर तो ऐसा लग रहा था, जैसे मार्च–अप्रेल का महीना हो और बाहर आते ही पूरा शरीर काँपने लगा.
राज चलते हुए अभी पन्द्रह मिनट दूर आया, तभी उसने देखा कि सड़क पर आगे एक गाड़ी खड़ी हैं और गाड़ी के पास एक लड़के और एक लड़की के बीच मारपीट हो रही हैं. दो अन्य लड़के उनके पास खड़े हैं. राज चलते–चलते रुक गया और दूर खड़ा रहकर उनको देखने लगा.
लड़का और लड़की लड़ते–लड़ते एक–दूसरे के बाल खिंचते हुए सड़क पर नीचे गिरे और एक–दूसरे के ऊपर–नीचे होते हुए सड़क पर लोट–पोट होने लगे. लड़की लड़के पर भारी पड़ने लगी और लड़की ने लड़के को दबोच लिया. इसी बीच पास खड़े दोनों लड़कों ने लड़की को पकड़कर लड़के को लड़की के हाथो से छुड़ाया और लड़की को लड़के से दूर किया.
लड़की दोनों लड़कों से छुटने के लिए छटपटा रही थी. सड़क पर गिरा लड़का उठा और लड़की को घूसे(मुक्के) और लातें मारने लगा. कुछ देर लड़की को पीटने के बाद लड़के ने लड़की के बाल पकड़े. दोनों अन्य लड़के लड़की को छोड़कर पीछे हट गए. लड़की के बाल पकड़ने वाले लड़के ने लड़की को सड़क किनारे गिरा दिया और गिराने के बाद चार–पाँच लातें मारकर पास खड़े दोनों लड़कों की तरफ आया.
तीनों लड़के गाड़ी के पास जाकर कुछ देर खड़े रहे. फिर लड़की को वहीं छोड़कर तीनों लड़के गाड़ी में बैठकर चले गए.
राज घबराकर सोचने लगा कि आगे जाऊँ या रास्ता बदल लूँ ? पता नहीं, क्या चक्कर हैं ? छोड़ यार ! क्यों मुसीबत को गले लगाना ? इन लड़कियों में भी अक्ल तो होती नहीं हैं. बेकार लोगों से प्यार, फिर ये हाल. वैसे भी आजकल टाइम बहुत खराब हैं. मैं मदद करने जाऊँ और ब्लात्कार या मर्डर के इल्जाम में खुद ही अन्दर हो जाऊँ. रहने दे, गोली मार.
राज ने अपना रास्ता बदल लिया और दूसरे रास्ते से जाने लगा. चलते–चलते राज ने कुछ याद करके खुद से कहा कि भूल गया क्या, राज ? कभी तू भूख से तड़पकर कचरे में से सड़े–गले फल उठाकर खा रहा था. उस वक्त तुझे रोता देखकर एक देवी जैसी नारी तेरे पास आई और तेरे आँशू पोंछकर तुझे अपने घर ले गई. जरा सोच अगर वो नारी भी तेरी तरह मुँह फेरकर चली जाती, तो फिर तेरा क्या हाल होता ? इतनी ठंड में बेचारी लड़की सड़क पर पड़ी हैं. वो लड़के उसे कितनी बुरी तरह मारकर गये हैं और तू उसकी मदद करने की जगह रास्ता बदलकर जा रहा हैं. कहीं मर गई तो ? नहीं यार ! कम से कम एक बार जाकर देख तो सही उसको. जो होगा देखा जाएगा.
राज तेज–तेज कदमों से चलता हुआ वापस प्रिन्स रोड़ पर आकर उसी तरफ चलने लगा. लड़की अभी तक वहीं सड़क किनारे पड़ी हुई दिखाई दी. राज धिरे–धिरे उसके पास आया.
बटन वाला घूटने तक आता हुआ कुर्ता और जींस पहने, दिखने में बहुत ही खूबसूरत उम्र में सताईस(27) साल की लड़की शराब के नशे में पूरी तरह धुत थी. उसे बिल्कुल भी होश नहीं था. लड़की के कपड़े अस्त–वयस्त और सर के बाल बिखरे हुए थे. लड़की सड़क किनारे पड़ी–पड़ी कुछ बड़बड़ा रही थी.
राज ने लड़की के पास बैठकर कहा—“आपका घर कहाँ हैं ? आपके घर का कोई नम्बर बता दो, मैं आपके घर से किसी को बुला लेता हूँ.”
राज की आवाज़ सुनकर लड़की ने राज की तरफ देखा और अपना हाथ राज की तरफ किया. राज ने लड़की का हाथ पकड़कर उसको सहारा देकर खड़ी किया.
लड़की खड़ी होने के बाद राज का कॉलर पकड़कर बोली—“साले कमीने, मुझे धोखा देता हैं. छोड़ूगी नहीं तुझे.”
राज मन में बोला कि अरे, ये क्या हो रहा हैं ?
राज अपना कॉलर छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोला—“मैं तो आपकी मदद के लिए आया हूँ.”
लड़की राज को धक्का देकर लड़खड़ाखड़ाते हुए बोली—“मैनें तुझे कितना प्यार किया. तेरे लिए अपने मॉम–डेड से झगड़े किये और तू एक साल मजे लेने के बाद कहता हैं, तेरे जैसी बहुत मिलती हैं. किस–किस से शादी करूँ ?”
राज टेन्शन में आकर मन में सोचने लगा कि लगता हैं, उस लड़के ने शादी का वादा करके टाइमपास किया और छोड़ दिया. अब ये शराब के नशे में मुझे वहीं धोखेबाज लड़का समझ रही हैं.
लड़की हाँफते हुए इधर–उधर देखकर एक पत्थर उठाकर बोली—“अब कहाँ जाएँगा बचकर ? आ सामने ! बताती हूँ तुझे, मैं कितनी बेकार हूँ.”
लड़की को पत्थर मारते देखकर राज पीछे हटते हुए बोला—“अरे…क्या कर रही हो ? लग जाएगी.”
लड़की आँखों से गुस्सा दिखाते हुए बोली—“साले, आगे आ. पीछे क्यों हट रहा हैं ? सर फोड़ूँगी आज तेरा.”
लड़की ने राज की तरफ पत्थर फेंका.
राज खुद को पत्थर लगने से बचाकर लड़की के पास आया और लड़की को पकड़कर बोला—“देवी जी, मेरे ऊपर रहम करो. मैनें आपको धोखा नहीं दिया.”
लड़की खुद को राज से छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली—“छोड़ कमीने, इतनी आसानी से तुझे जाने नहीं दूँगी.”
राज ने लड़की को समझाने की कोशिश की, लेकिन लड़की राज की बात सुनने की जगह गन्दी–गन्दी गालियाँ निकालते हुए राज पर हाथ–पैर चलाने लगी.
जब लड़की राज के काबू में नहीं आई तो राज मन में बोला कि इन बेवड़ों का एक ही ईलाज हैं.
राज ने लड़की के दोनों गालों पर एक के बाद एक पाँच जोरदार चांटे(थप्पड़) जड़ दिये. राज के चान्टों से लड़की के दोनों गाल लाल हो गए. लड़की सड़क पर गिर पड़ी और लड़की ने रोना शुरू कर दिया.
राज घबराकर मन में बोला कि लगता हैं ज्यादा हो गया.
राज लड़की के पास आया और नीचे बैठकर लड़की को बिठाते हुए बोला—“एम सॉरी, प्लीज रोईये मत.”
लड़की सड़क पर बैठकर बच्चों की तरह रोते–रोते बोली—“यार ! क्या हो गया तुझे ? मेरे प्यार में क्या कमी रह गई ? तेरे लिए क्या नहीं किया मैनें ? जब तू प्रोब्लम में था, तो तुझे पैसे दिये. तेरी खुशी के लिए तेरे साथ बिस्तर पर भी सो गई. तूने जो–जो कहा, मैनें सब किया. तेरे मतलब पूरे हो गए, तो अब तू मुझे मार रहा हैं. तू चाहे जितना मरजी मार ले. लेकिन मुझे छोड़कर मत जा. मैं तेरे बिना जी नहीं सकती. प्लीज यार ! तू एकदम से इतना कैसे बदल गया ? आई लव यू, यार. लव यू सॉ मच.”
लड़की को रो–रोकर गिड़गिड़ाते हुए देखकर राज को दया आने लगी.
लड़की राज के पैर पकड़कर बोली—“प्लीज यार ! मैं तेरे पैर पकड़ती हूँ. तू जो बोलेगा, वो सब करूँगी. बस तू मुझे छोड़कर मत जा.”