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राज—“अब तुम खुद ही अपने दिमाग में उल्टा–सीधा सोचो, उसका तो कोई ईलाज नहीं हैं. मैनें पहले भी बताया हैं, मुझे किसी भी तरह का नशा बिल्कुल पसन्द नहीं हैं, लेकिन दूसरों के नशा करने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि सबको नशे से होने वाले नुकसान पता होते हैं. अब उनको जानबुझकर मरना हैं, तो मरे.”
डॉली—“एम सॉरी, यार ! लेकिन मैं क्या करूँ ? रंगीला से धोखा खाने के बाद मेरी जीने की इच्छा ही खतम हो गई.”
राज—“यहीं तो गलती हैं तुम्हारी. धोखा उसने दिया और जीने की इच्छा तुम्हारी खतम हो गई. सबक सिखाओ उसे. उसको भी वहीं तकलीफ दो, जो तुम्हें हुई हैं.”
डॉली—“अब मैं क्या सबक सिखाऊँ उसे ? वो लड़का हैं, मैं लड़की हूँ. अगर मैनें उसे धोखा दिया होता, तब भी लोग मुझे बेकार बोलते. अब उसके धोखे के बारे में किसी को बताऊँ, तब भी बेकार मैं ही कहलाऊँगी. और मुझे तो पहले से ही सब बिगड़ैल बोलते हैं.”
राज—“तुम मुझे अपना दोस्त मानती हो ?”
डॉली—“तुम्हें शक हैं ?”
राज—“शक नहीं हैं, लेकिन अगर दोस्त मानती हो, तो फिर एक प्रोमिस करो, तुम रोओगी नहीं. मैं जो पूछ रहा हूँ, रोये बिना बताओगी.”
डॉली—“ऐसा क्या पूछ रहे हो ?”
राज—“पहले प्रोमिस.”
डॉली—“प्रोमिस. नहीं रोऊँगी. अब बताओ."
राज—“तुम्हारा बॉयफ्रैंड रंगीला, उसे तुमसे पैसे लेने की क्या जरूरत पड़ गई ? तुम बता रही थी, तुम उसे पैसे की मदद भी करती थी.”
डॉली—“वो अपने पापा के साथ ही, उनके बिजनेस में हेल्प करता हैं. उसने कई बार हिसाब में गड़बड़ करके अपने पापा के पैसे चुराए हैं. तो कई बार उसके पापा ने उसका ऑफ़िस जाना और उसको पैसे देना बन्द कर दिया. तब मैं उसे पैसे देती थी.”
राज—“अच्छा, तुम्हारे पास उसके कोई मैसेज, कोई फोटो वगैरह हैं, जिससे ये पता चलता हो, वो तुम्हारा बॉयफ्रैंड था और उसने तुम्हारे साथ रिलेशन बनाए हैं.”
डॉली—“फेसबुक पर बहुत मैसेज हैं, वॉट्सऐप पर मैसेज हैं. कुछ उसके साथ ली हुई सेल्फी हैं. बस और तो कुछ नहीं हैं.”
राज—“और वो तुम्हारे साथ उस टाइप की बातें करता था ?”
डॉली मुस्कुराते हुए आँखें ऊपर करके बोली—“किस टाइप की ?”
राज—“अरे, वो………तुम समझ जाओ ना.”
डॉली—“हाँ, करता था. बॉयफ्रैंड बनने के बाद वो ज्यादातर वैसी ही बातें करता था.”
राज—“और तुम ?”
डॉली—“मैं भी करती थी.”
डॉली ने सिगरेट बाहर फेंककर अपना मोबाइल उठाते हुए कहा—“एक मिनट रूको.”
डॉली ने मोबाइल में नेटऑन करके फेसबुक लॉग–इन की. फेसबुक पर रंगीला के मैसेज निकालकर मोबाइल राज को देते हुए कहा—“अब उसने मुझे ब्लॉक कर रखा हैं. ये उसके मैसेज हैं, तुम देख लो.”
राज ने मोबाइल लिया और डॉली की फेसबुक में डॉली और रंगीला के मैसेज पढ़ने लगा.
डॉली ने कहा—“ये मैसेंजर में देख लो ना. बार–बार क्लिक नहीं करना पड़ेगा.”
राज ने कहा—“इसमें तो बहुत सारे मैसेज हैं. अगर तुम बुरा ना मानो तो दो–चार दिन के लिए तुम्हारा मोबाइल मुझे दे सकती हो ?”
डॉली—“हाँ, ले लो. बस एक सिम–कार्ड निकाल दो. वो मॉम–डेड कॉल करते हैं ना, इसलिए.”
राज ने मोबाइल डॉली को देते हुए कहा—“लो तुम खुद निकाल लो.”
डॉली ने मोबाइल लेकर खोला और उसमें से एक सिम निकालकर मोबाइल राज को वापस दे देते हुए कहा—“अब जितने मरजी दिन रख लो.”
राज ने मोबाइल लेकर मोबाइल को वापस बन्द(मोबाइल का ढक्कन लगाकर) करके अपनी जेब में डाल लिया.
डॉली ने गाड़ी के ड्रोअर में से एक पुराना मोबाइल निकालकर राज को दिये मोबाइल में से निकाली हुई सिम पुराने मोबाइल में डालकर पुराना मोबाइल ऑन करके सामने छोड़ दिया.
राज ने कहा—“अच्छा, एक बात बताओ ? तुमने कोई सवाल–जवाब किये बिना अपना मोबाइल दे दिया. अगर मैनें मोबाइल में से तुम्हारा कोई सीक्रेट निकालकर तुम्हारे लिए कोई प्रोब्लम कर दी तो ?”
डॉली ने हँसकर कहा—“कोई बात नहीं, यार ! इस बहाने शराब पीने का एक और बहाना मिल जाएगा. मरूँगी तो शराब से ही, खुदखुशी तो नहीं करूँगी.”
राज—“अरे, मजाक कर रहा हूँ. मैं कोई प्रोब्लम नहीं करूँगा. मुझे तुम्हारी ये मरने वाली बातें बहुत बुरी लगती हैं. तुम ऐसे मत बोला करो.”
डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा—“लेकिन अभी तो तुमने कहा, जिनको जानबुझकर मरना हैं, मरे.”
राज ने नाराज होते हुए कहा—“ओहो, अब मैं चलता हूँ. तुम भी अपने घर जाओ.”
राज गाड़ी से उतरने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोलने लगा.
डॉली ने राज का बाजू पकड़कर कहा—“एम सॉरी, यार.”
राज ने गाड़ी का दरवाजा छोड़कर डॉली का हाथ हटाकर कहा—“अब सॉरी क्यों बोल रही हो ? तुम्हें मरना हैं ना, मरो.”
डॉली ने स्टैरिंग पर हाथ रखकर मुँह नीचे कर लिया. डॉली की आँखें भीग गई.
राज ने डॉली के आँशू निकलते देखकर कहा—“अब रोने क्यों बैठ गई ?”
डॉली ने आँशू पोंछ लिए, लेकिन मुँह से कुछ बोली नहीं.
राज ने मन में कहा कि क्या हैं यार ये. जब देखो, रोने लग जाती हैं.
राज ने डॉली का बाजू पकड़कर कहा—“तुम एक बात बताओ, अब कोई दोस्त मरने की बात करे, तो बुरा नहीं लगता क्या ? मैनें तो तुम्हारे साथ थोड़ा हँसने के लिए मजाक में कहा. तुम बोलती हो, शराब पीकर ही मरूँगी. उस रात की तरह ये भी तो बोल सकती थी, सर फोड़ूगी, फिर तेरा.”
डॉली—“वो तुम्हें थोड़े ही कहा था. वो तो नशे में तुम्हें रंगीला समझकर कहा था. मुझे तो याद भी नहीं, तुमने ही बताया.”
राज—“मेरा मतलब तुम खुद के बारे में बुरा मत बोला करो और तुम रोज रात को बारह–एक बजे बाद घर जाती हो. आज तो हम सुबह नौ बजे से साथ घूम रहे हैं. आज तो जल्दी घर जाओ.”
डॉली—“ठीक हैं. चलो पहले तुम्हें छोड़ देती हूँ.”
राज—“हाँ, चलो.”
डॉली ने गाड़ी स्टार्ट की और आम्रपाली सर्किल की तरफ चल पड़ी.
सताईस दिन बाद दस जून, शनिवार को रात के दस बजे डॉली गाड़ी चलाते हुए राज को ऑफिस से घर लेकर आ रही थी.
राज—“आज वहाँ नारायण की दुकान पर गाड़ी चलना. जहाँ तुमने एक बार संडे को मेरे बारे में पूछा था.”
डॉली—“वहाँ क्यों ?”
राज—“तुम चलो तो, कोई प्रोब्लम हैं क्या वहाँ चलने में ?”
डॉली—“मुझे कोई प्रोब्लम नहीं हैं. लेकिन उस रात जब तुम मुझे बिल्डिंग में ले गए थे, तब तुमने ही तो कहा था, आप यहाँ से चली जाओ. अगर किसी ने देख लिया, तो गलत मतलब निकालेगें. इसलिए तो मैं यहाँ बिल्डिंग से दूर चौराहे पर गाड़ी रोकती हूँ.”
राज ने हँसकर कहा—“अरे, वो छः महिने पुरानी बात हो गई. अब तो लोगों ने गलत मतलब निकाल भी लिए.”
डॉली ने हैरान होकर कहा—“क्या गलत मतलब निकाल लिए ?”
राज—“वहीं मतलब, जो एक लड़के और एक लड़की को साथ देखकर अक्सर लोग निकालते हैं. कॉलोनी में मुझे जानने वाले आधे से ज्यादा लोगों को पता हैं. पिछले दो महिने से तुम मुझे सुबह घर से ऑफ़िस और शाम को ऑफ़िस से घर छोड़कर जाती हो. हम घंटों गाड़ी में बैठे बातें करते हैं.”
डॉली—“ओह…लेकिन सबको पता कैसे चला ?”
राज—“किसी ने देख लिया होगा. गाड़ी में बैठते या गाड़ी से उतरते. फिर एक ने दो को बताया होगा, दो ने चार को बताया होगा, चार ने दस को बताया होगा. बस ऐसे ही फैलती हैं बातें. अब सब यहीं सोचते हैं, इस बिल्डिंग में रहने वाले राज का उस गाड़ी वाली लड़की के साथ चक्कर चल रहा हैं. चार–पाँच दिन पहले सुबह–सुबह पड़ौस का एक आदमी हँस–हँसकर मुझे बोल रहा था, कल रात गाड़ी में क्या हो रहा था ? बारह बजे से एक बजे तक गाड़ी जोर–जोर से हिल रही थी.”
डॉली हैरान होकर बोली—“गाड़ी कब हिल रही थी ?”
राज ने हँसकर कहा—“गाड़ी नहीं हिल रही थी. उसका दिमाग हिला हुआ हैं. गलत सोचने वाले तो गलत सोचते ही हैं.”
डॉली—“तो अभी दुकान पर किसलिए जा रहे हैं ?”
राज—“अरे, वो तो दुकानवाला नारायण और अंकित, जो तुम्हें ऑटो से फ्री में घर छोड़कर आया था. उन दोनों के पास चल रहे हैं. इन दोनों को तुम्हारे बारे में सब पता हैं. ये दोनों बहुत अच्छे लोग हैं.”
डॉली—“अच्छा.”
डॉली ने नारायण की दुकान के सामने गाड़ी साइड में खड़ी करके रोककर बन्द कर दी. राज और डॉली अपनी–अपनी तरफ से गाड़ी के गेट खोलकर गाड़ी से उतरे और गेट वापस बन्द करके नारायण की दुकान पर चल पड़े.
नारायण की दुकान के आगे बनी चौकी पर अंकित के साथ बैठा नारायण खड़ा होकर दुकान के अन्दर गया. राज अंकित के पास चौकी पर बैठ गया. नारायण दो कुर्सी लेकर दुकान से बाहर आया और एक कुर्सी डॉली को देकर दूसरी कुर्सी पर खुद बैठ गया. एक कुर्सी पर डॉली बैठ गई.
राज ने जेब से डॉली का मोबाइल निकालकर कहा—“मैनें पिछले बीस दिनों में डॉली और रंगीला के बीच फेसबुक और वॉट्सऐप पर हुई बातों के सारे मैसेज पढ़कर देखे हैं और सभी मैसेज के स्क्रीन–शॉट निकालकर सारे स्क्रीन–शॉट मेरी आईडी से डॉली की आईडी में मैसेज कर दिये हैं.”
अंकित—“बस फिर अब डॉली जी को बोल दे, फेसबुक पर पोस्ट करने के लिए.”
नारायण—“पहले देख तो लो, कौनसे मैसेज करने हैं और कौनसे मैसेज नहीं करने.”
राज—“सभी मैसेज पोस्ट किये जा सकते हैं. बस उन चार लड़कियों के नाम को मिटा देगें. बाकि बहुत सारे मैसेज में वो लड़का अपनी करतूत खुद ही डॉली को बता रहा हैं. और सबसे खास बात. डॉली ने उसे कभी कोई गलत या गन्दी बात नहीं कहीं. डॉली ने सिर्फ उसकी गन्दी बातों के जवाब दिये हैं. इसके इलावा डॉली ने उसको बहुत बार कहा हैं, कि मुझे ऐसी बातें करना पसन्द नहीं हैं. वो ही हर बार गन्दी–गन्दी बातें करता था.”
डॉली हैरान होकर इधर–उधर देखते हुए सबकी बातें सुनने के बाद बोली—“कोई मुझे भी बताएगा, क्या बात हो रही हैं ?”
राज, अंकित और नारायण तीनों हँस पड़े.
राज—“हाँ, तुम्हें ही तो सब कुछ करना हैं. हमने तो बस सोचा हैं.”
डॉली—“क्या ?”
राज—“तुम उस लड़के रंगीला के बारे में सब कुछ, उसकी एक–एक घटिया बात फेसबुक पर पोस्ट करो. वो कैसे लड़कियों को पटाता हैं ? लड़कियों को पटाने के लिए क्या–क्या नाटकबाजी करता हैं ? पटाने के बाद लड़की को बिस्तर तक लाने के लिए क्या–क्या करता हैं ? लड़कियों के साथ कितनी घटिया और गन्दी बातें करता हैं. उसके घरवाले उसके बारे में सब कुछ जानने के बाद भी किस तरह हर बार उसको बचाते हैं ? और जब लड़की से उसका मन भर जाता हैं, फिर वो किस तरह दुत्कार कर घटिया–घटिया और गन्दी–गन्दी बातें बोलकर लड़की को छोड़ देता हैं ? ये सभी बातें पूरी डिटेल के साथ पोस्ट करो.”
डॉली—“लेकिन इससे होगा क्या ?”
राज—“उसके बारे में सबको सब कुछ पता चल जाएगा. हो सकता हैं, वो घबराकर तुमसे शादी कर ले.”
डॉली—“अरे, लेकिन पता चलने से क्या होगा ? सब यहीं कहेंगे, मैनें ही उसे फँसाया होगा.”
राज—“ये सब अनुमान हम पहले से ही लगा चुके हैं. पिछले एक–डेढ़ महिने से रोज सुबह एक–दो घंटे हम तीनों तुम्हारे बारे में ही बात करते हैं. उस लड़के को सबक सिखाने का सिर्फ एक यहीं तरीका हैं. क्योंकि उसने तुम्हारे साथ सब कुछ तुम्हारी मरजी से ही किया हैं. मैनें तुम्हारी उससे दोस्ती की शुरुआत से लेकर उसके ब्लॉक करने तक का एक–एक मैसेज पढ़ा हैं, पहले तुम्हें गर्लफ्रैंड बनाने के लिए भी वहीं हाथ धोकर तुम्हारे पीछे पड़ा था और गर्लफ्रैंड बनाने के बाद रिलेशन बनाने के लिए भी वहीं तुम्हारे पीछे पड़ा था. और मैसेज पढ़कर लगता हैं, जब उसने पहली बार तुम्हारे साथ रिलेशन बनाए, तब यकिनन उसने ड्रिंक में कुछ ऐसा मिलाया था, जिससे तुम उसे रोक ना सको. वरना ड्रिंक तो तुम रोज करती हो, लेकिन मेरे साथ तो तुमने कभी कोई ऐसी–वैसी बात नहीं की. और हाँ, इस तरीके से तुम उसे शादी के लिए मजबुर भी कर सकती हो, उसने शादी के वादे भी तो किये थे, सबूत के तौर पर ये मैसेज हैं.”
डॉली—“एम सॉरी, यार ! लेकिन मैं क्या करूँ ? रंगीला से धोखा खाने के बाद मेरी जीने की इच्छा ही खतम हो गई.”
राज—“यहीं तो गलती हैं तुम्हारी. धोखा उसने दिया और जीने की इच्छा तुम्हारी खतम हो गई. सबक सिखाओ उसे. उसको भी वहीं तकलीफ दो, जो तुम्हें हुई हैं.”
डॉली—“अब मैं क्या सबक सिखाऊँ उसे ? वो लड़का हैं, मैं लड़की हूँ. अगर मैनें उसे धोखा दिया होता, तब भी लोग मुझे बेकार बोलते. अब उसके धोखे के बारे में किसी को बताऊँ, तब भी बेकार मैं ही कहलाऊँगी. और मुझे तो पहले से ही सब बिगड़ैल बोलते हैं.”
राज—“तुम मुझे अपना दोस्त मानती हो ?”
डॉली—“तुम्हें शक हैं ?”
राज—“शक नहीं हैं, लेकिन अगर दोस्त मानती हो, तो फिर एक प्रोमिस करो, तुम रोओगी नहीं. मैं जो पूछ रहा हूँ, रोये बिना बताओगी.”
डॉली—“ऐसा क्या पूछ रहे हो ?”
राज—“पहले प्रोमिस.”
डॉली—“प्रोमिस. नहीं रोऊँगी. अब बताओ."
राज—“तुम्हारा बॉयफ्रैंड रंगीला, उसे तुमसे पैसे लेने की क्या जरूरत पड़ गई ? तुम बता रही थी, तुम उसे पैसे की मदद भी करती थी.”
डॉली—“वो अपने पापा के साथ ही, उनके बिजनेस में हेल्प करता हैं. उसने कई बार हिसाब में गड़बड़ करके अपने पापा के पैसे चुराए हैं. तो कई बार उसके पापा ने उसका ऑफ़िस जाना और उसको पैसे देना बन्द कर दिया. तब मैं उसे पैसे देती थी.”
राज—“अच्छा, तुम्हारे पास उसके कोई मैसेज, कोई फोटो वगैरह हैं, जिससे ये पता चलता हो, वो तुम्हारा बॉयफ्रैंड था और उसने तुम्हारे साथ रिलेशन बनाए हैं.”
डॉली—“फेसबुक पर बहुत मैसेज हैं, वॉट्सऐप पर मैसेज हैं. कुछ उसके साथ ली हुई सेल्फी हैं. बस और तो कुछ नहीं हैं.”
राज—“और वो तुम्हारे साथ उस टाइप की बातें करता था ?”
डॉली मुस्कुराते हुए आँखें ऊपर करके बोली—“किस टाइप की ?”
राज—“अरे, वो………तुम समझ जाओ ना.”
डॉली—“हाँ, करता था. बॉयफ्रैंड बनने के बाद वो ज्यादातर वैसी ही बातें करता था.”
राज—“और तुम ?”
डॉली—“मैं भी करती थी.”
डॉली ने सिगरेट बाहर फेंककर अपना मोबाइल उठाते हुए कहा—“एक मिनट रूको.”
डॉली ने मोबाइल में नेटऑन करके फेसबुक लॉग–इन की. फेसबुक पर रंगीला के मैसेज निकालकर मोबाइल राज को देते हुए कहा—“अब उसने मुझे ब्लॉक कर रखा हैं. ये उसके मैसेज हैं, तुम देख लो.”
राज ने मोबाइल लिया और डॉली की फेसबुक में डॉली और रंगीला के मैसेज पढ़ने लगा.
डॉली ने कहा—“ये मैसेंजर में देख लो ना. बार–बार क्लिक नहीं करना पड़ेगा.”
राज ने कहा—“इसमें तो बहुत सारे मैसेज हैं. अगर तुम बुरा ना मानो तो दो–चार दिन के लिए तुम्हारा मोबाइल मुझे दे सकती हो ?”
डॉली—“हाँ, ले लो. बस एक सिम–कार्ड निकाल दो. वो मॉम–डेड कॉल करते हैं ना, इसलिए.”
राज ने मोबाइल डॉली को देते हुए कहा—“लो तुम खुद निकाल लो.”
डॉली ने मोबाइल लेकर खोला और उसमें से एक सिम निकालकर मोबाइल राज को वापस दे देते हुए कहा—“अब जितने मरजी दिन रख लो.”
राज ने मोबाइल लेकर मोबाइल को वापस बन्द(मोबाइल का ढक्कन लगाकर) करके अपनी जेब में डाल लिया.
डॉली ने गाड़ी के ड्रोअर में से एक पुराना मोबाइल निकालकर राज को दिये मोबाइल में से निकाली हुई सिम पुराने मोबाइल में डालकर पुराना मोबाइल ऑन करके सामने छोड़ दिया.
राज ने कहा—“अच्छा, एक बात बताओ ? तुमने कोई सवाल–जवाब किये बिना अपना मोबाइल दे दिया. अगर मैनें मोबाइल में से तुम्हारा कोई सीक्रेट निकालकर तुम्हारे लिए कोई प्रोब्लम कर दी तो ?”
डॉली ने हँसकर कहा—“कोई बात नहीं, यार ! इस बहाने शराब पीने का एक और बहाना मिल जाएगा. मरूँगी तो शराब से ही, खुदखुशी तो नहीं करूँगी.”
राज—“अरे, मजाक कर रहा हूँ. मैं कोई प्रोब्लम नहीं करूँगा. मुझे तुम्हारी ये मरने वाली बातें बहुत बुरी लगती हैं. तुम ऐसे मत बोला करो.”
डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा—“लेकिन अभी तो तुमने कहा, जिनको जानबुझकर मरना हैं, मरे.”
राज ने नाराज होते हुए कहा—“ओहो, अब मैं चलता हूँ. तुम भी अपने घर जाओ.”
राज गाड़ी से उतरने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोलने लगा.
डॉली ने राज का बाजू पकड़कर कहा—“एम सॉरी, यार.”
राज ने गाड़ी का दरवाजा छोड़कर डॉली का हाथ हटाकर कहा—“अब सॉरी क्यों बोल रही हो ? तुम्हें मरना हैं ना, मरो.”
डॉली ने स्टैरिंग पर हाथ रखकर मुँह नीचे कर लिया. डॉली की आँखें भीग गई.
राज ने डॉली के आँशू निकलते देखकर कहा—“अब रोने क्यों बैठ गई ?”
डॉली ने आँशू पोंछ लिए, लेकिन मुँह से कुछ बोली नहीं.
राज ने मन में कहा कि क्या हैं यार ये. जब देखो, रोने लग जाती हैं.
राज ने डॉली का बाजू पकड़कर कहा—“तुम एक बात बताओ, अब कोई दोस्त मरने की बात करे, तो बुरा नहीं लगता क्या ? मैनें तो तुम्हारे साथ थोड़ा हँसने के लिए मजाक में कहा. तुम बोलती हो, शराब पीकर ही मरूँगी. उस रात की तरह ये भी तो बोल सकती थी, सर फोड़ूगी, फिर तेरा.”
डॉली—“वो तुम्हें थोड़े ही कहा था. वो तो नशे में तुम्हें रंगीला समझकर कहा था. मुझे तो याद भी नहीं, तुमने ही बताया.”
राज—“मेरा मतलब तुम खुद के बारे में बुरा मत बोला करो और तुम रोज रात को बारह–एक बजे बाद घर जाती हो. आज तो हम सुबह नौ बजे से साथ घूम रहे हैं. आज तो जल्दी घर जाओ.”
डॉली—“ठीक हैं. चलो पहले तुम्हें छोड़ देती हूँ.”
राज—“हाँ, चलो.”
डॉली ने गाड़ी स्टार्ट की और आम्रपाली सर्किल की तरफ चल पड़ी.
सताईस दिन बाद दस जून, शनिवार को रात के दस बजे डॉली गाड़ी चलाते हुए राज को ऑफिस से घर लेकर आ रही थी.
राज—“आज वहाँ नारायण की दुकान पर गाड़ी चलना. जहाँ तुमने एक बार संडे को मेरे बारे में पूछा था.”
डॉली—“वहाँ क्यों ?”
राज—“तुम चलो तो, कोई प्रोब्लम हैं क्या वहाँ चलने में ?”
डॉली—“मुझे कोई प्रोब्लम नहीं हैं. लेकिन उस रात जब तुम मुझे बिल्डिंग में ले गए थे, तब तुमने ही तो कहा था, आप यहाँ से चली जाओ. अगर किसी ने देख लिया, तो गलत मतलब निकालेगें. इसलिए तो मैं यहाँ बिल्डिंग से दूर चौराहे पर गाड़ी रोकती हूँ.”
राज ने हँसकर कहा—“अरे, वो छः महिने पुरानी बात हो गई. अब तो लोगों ने गलत मतलब निकाल भी लिए.”
डॉली ने हैरान होकर कहा—“क्या गलत मतलब निकाल लिए ?”
राज—“वहीं मतलब, जो एक लड़के और एक लड़की को साथ देखकर अक्सर लोग निकालते हैं. कॉलोनी में मुझे जानने वाले आधे से ज्यादा लोगों को पता हैं. पिछले दो महिने से तुम मुझे सुबह घर से ऑफ़िस और शाम को ऑफ़िस से घर छोड़कर जाती हो. हम घंटों गाड़ी में बैठे बातें करते हैं.”
डॉली—“ओह…लेकिन सबको पता कैसे चला ?”
राज—“किसी ने देख लिया होगा. गाड़ी में बैठते या गाड़ी से उतरते. फिर एक ने दो को बताया होगा, दो ने चार को बताया होगा, चार ने दस को बताया होगा. बस ऐसे ही फैलती हैं बातें. अब सब यहीं सोचते हैं, इस बिल्डिंग में रहने वाले राज का उस गाड़ी वाली लड़की के साथ चक्कर चल रहा हैं. चार–पाँच दिन पहले सुबह–सुबह पड़ौस का एक आदमी हँस–हँसकर मुझे बोल रहा था, कल रात गाड़ी में क्या हो रहा था ? बारह बजे से एक बजे तक गाड़ी जोर–जोर से हिल रही थी.”
डॉली हैरान होकर बोली—“गाड़ी कब हिल रही थी ?”
राज ने हँसकर कहा—“गाड़ी नहीं हिल रही थी. उसका दिमाग हिला हुआ हैं. गलत सोचने वाले तो गलत सोचते ही हैं.”
डॉली—“तो अभी दुकान पर किसलिए जा रहे हैं ?”
राज—“अरे, वो तो दुकानवाला नारायण और अंकित, जो तुम्हें ऑटो से फ्री में घर छोड़कर आया था. उन दोनों के पास चल रहे हैं. इन दोनों को तुम्हारे बारे में सब पता हैं. ये दोनों बहुत अच्छे लोग हैं.”
डॉली—“अच्छा.”
डॉली ने नारायण की दुकान के सामने गाड़ी साइड में खड़ी करके रोककर बन्द कर दी. राज और डॉली अपनी–अपनी तरफ से गाड़ी के गेट खोलकर गाड़ी से उतरे और गेट वापस बन्द करके नारायण की दुकान पर चल पड़े.
नारायण की दुकान के आगे बनी चौकी पर अंकित के साथ बैठा नारायण खड़ा होकर दुकान के अन्दर गया. राज अंकित के पास चौकी पर बैठ गया. नारायण दो कुर्सी लेकर दुकान से बाहर आया और एक कुर्सी डॉली को देकर दूसरी कुर्सी पर खुद बैठ गया. एक कुर्सी पर डॉली बैठ गई.
राज ने जेब से डॉली का मोबाइल निकालकर कहा—“मैनें पिछले बीस दिनों में डॉली और रंगीला के बीच फेसबुक और वॉट्सऐप पर हुई बातों के सारे मैसेज पढ़कर देखे हैं और सभी मैसेज के स्क्रीन–शॉट निकालकर सारे स्क्रीन–शॉट मेरी आईडी से डॉली की आईडी में मैसेज कर दिये हैं.”
अंकित—“बस फिर अब डॉली जी को बोल दे, फेसबुक पर पोस्ट करने के लिए.”
नारायण—“पहले देख तो लो, कौनसे मैसेज करने हैं और कौनसे मैसेज नहीं करने.”
राज—“सभी मैसेज पोस्ट किये जा सकते हैं. बस उन चार लड़कियों के नाम को मिटा देगें. बाकि बहुत सारे मैसेज में वो लड़का अपनी करतूत खुद ही डॉली को बता रहा हैं. और सबसे खास बात. डॉली ने उसे कभी कोई गलत या गन्दी बात नहीं कहीं. डॉली ने सिर्फ उसकी गन्दी बातों के जवाब दिये हैं. इसके इलावा डॉली ने उसको बहुत बार कहा हैं, कि मुझे ऐसी बातें करना पसन्द नहीं हैं. वो ही हर बार गन्दी–गन्दी बातें करता था.”
डॉली हैरान होकर इधर–उधर देखते हुए सबकी बातें सुनने के बाद बोली—“कोई मुझे भी बताएगा, क्या बात हो रही हैं ?”
राज, अंकित और नारायण तीनों हँस पड़े.
राज—“हाँ, तुम्हें ही तो सब कुछ करना हैं. हमने तो बस सोचा हैं.”
डॉली—“क्या ?”
राज—“तुम उस लड़के रंगीला के बारे में सब कुछ, उसकी एक–एक घटिया बात फेसबुक पर पोस्ट करो. वो कैसे लड़कियों को पटाता हैं ? लड़कियों को पटाने के लिए क्या–क्या नाटकबाजी करता हैं ? पटाने के बाद लड़की को बिस्तर तक लाने के लिए क्या–क्या करता हैं ? लड़कियों के साथ कितनी घटिया और गन्दी बातें करता हैं. उसके घरवाले उसके बारे में सब कुछ जानने के बाद भी किस तरह हर बार उसको बचाते हैं ? और जब लड़की से उसका मन भर जाता हैं, फिर वो किस तरह दुत्कार कर घटिया–घटिया और गन्दी–गन्दी बातें बोलकर लड़की को छोड़ देता हैं ? ये सभी बातें पूरी डिटेल के साथ पोस्ट करो.”
डॉली—“लेकिन इससे होगा क्या ?”
राज—“उसके बारे में सबको सब कुछ पता चल जाएगा. हो सकता हैं, वो घबराकर तुमसे शादी कर ले.”
डॉली—“अरे, लेकिन पता चलने से क्या होगा ? सब यहीं कहेंगे, मैनें ही उसे फँसाया होगा.”
राज—“ये सब अनुमान हम पहले से ही लगा चुके हैं. पिछले एक–डेढ़ महिने से रोज सुबह एक–दो घंटे हम तीनों तुम्हारे बारे में ही बात करते हैं. उस लड़के को सबक सिखाने का सिर्फ एक यहीं तरीका हैं. क्योंकि उसने तुम्हारे साथ सब कुछ तुम्हारी मरजी से ही किया हैं. मैनें तुम्हारी उससे दोस्ती की शुरुआत से लेकर उसके ब्लॉक करने तक का एक–एक मैसेज पढ़ा हैं, पहले तुम्हें गर्लफ्रैंड बनाने के लिए भी वहीं हाथ धोकर तुम्हारे पीछे पड़ा था और गर्लफ्रैंड बनाने के बाद रिलेशन बनाने के लिए भी वहीं तुम्हारे पीछे पड़ा था. और मैसेज पढ़कर लगता हैं, जब उसने पहली बार तुम्हारे साथ रिलेशन बनाए, तब यकिनन उसने ड्रिंक में कुछ ऐसा मिलाया था, जिससे तुम उसे रोक ना सको. वरना ड्रिंक तो तुम रोज करती हो, लेकिन मेरे साथ तो तुमने कभी कोई ऐसी–वैसी बात नहीं की. और हाँ, इस तरीके से तुम उसे शादी के लिए मजबुर भी कर सकती हो, उसने शादी के वादे भी तो किये थे, सबूत के तौर पर ये मैसेज हैं.”