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Adultery ऋतू दीदी

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प्रशांत: “मेरा यक़ीन करो, मैं सच बोल रहा हूँ। तुम मेरे साथ रूम पर चलो और अपने कानों से सुनो”

नीरु: “ताकि दीदी और जीजाजी हमें वह देख शर्मिंदा हो?”

प्रशांत: “अरे मेरा यक़ीन करो, वो तुम्हारा नाम लेकर ही चोद…”

नीरु: “अब चुप हो जा, और इस बारे में बात भी मत करना, सुनने में ही इतनी गिन्न आ रही है। तुम पहले तो ऐसी बातें नहीं करते थे। अगर तुम मेरा मूड बनाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हो तो सुन लो, मेरा मूड और ख़राब हो रहा हैं”

नीरु मेरी बात का विश्वास करने को तैयार नहीं थी। काश उस वक़्त मैं ऑडियो रिकॉर्ड ही कर लेता। मगर उस वक़्त तो मेरा दिमाग ही सुन्न हो गया था। मुझे एक चीज की ख़ुशी थी की निरु अभी तक जीजाजी के जाल में नहीं फंसी थी। दूसरी तरफ मुझे जीजाजी का करैक्टर पता चल गया था की निरु के लिए उनकी नीयत कैसी है। सबसे बड़ा धक्का ऋतू दीदी के लिए लाग। जीजाजी जब निरु का नाम लेकर ऋतू दीदी को चोद रहे थे तो ऋतू दीदी ने उनको नहीं टक, उलटा वो खुद सिसकिया मार मजे ले रही थी।

नीरु ने मुझे १५ मिनट तक रोके रखा ताकी जीजाजी और ऋतू दीदी अपनी चुदाई को ख़त्म कर ले। उसके बाद मैं ही निरु को जबरदस्ती रूम की तरफ लाया। मेरे पास रूम की चाबी तो थी ही पर फिर निरु ने बोल दिया की हम नॉक करके ही अन्दर जाएंगे ताकी जीजाजी और दीदी को सँभालने का मौका मिल जाए, पता नहीं वो कैसी स्तिथि में होंगे। दरवाज ऋतू दीदी ने खोला था। मतलब वॉशरूम में जिस लड़की की चुदाई हो रही थी वो ऋतू दीदी ही थी। वो अपने पति का इलाज क्यों नहीं कर देती जो उनकी छोटी बहन पर ऐसी नजर रखता हैं। जीजजी की शकल देख मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था।

मैंने सोच लिया अब मैं उस जीजा को अपनी निरु के आस पास नहीं आने दूंगा। आज वैसे भी बीच पर नहीं जाना था, सिर्फ साइट सन करना था। आज और अगले दिन हम लोग दूसरे एरिया में घुमने वाले थे जो की यहाँ से २-३ घन्टे दुरी पर था। इसलिए जीजाजी ने उसी एरिया में एक दिन के लिए होटल बुक किया था और अभी हमें अपने इस होटल से चेकआउट करना था। हम लोग ने होटल से चेकआउट किया और दूसरी जगह पहुच कर नए होटल में चेक-इन किया।

वहाँ पर उन्होंने दो रूम बुक किये थे। यह सुन निरु बहुत खुश हुयी और मेरा हाथ कस कर पकड़ लिया की आज रात वो अपना वादा निभा कर मुझे चोदने देगी। मै चुदाई से ज्यादा इस बात से खुश था की जीजाजी हमारे कमरे में नहीं होंगे। सामान रूम में रखते ही हम लोग कार में बैठ घुमने निकल गए। नीरु उस नी लेंथ ड्रेस में, हैट और गॉगल्स के साथ बहुत प्यारी लग रही थी, मैंने पुरे दिन उसका हाथ पकडे रखा और जीजाजी को उसके पास आने नहीं दिया।

जब भी जीजाजी निरु के पास आते मैं बीच में पहुच जाता। निरु को शायद थोड़ा अजीब भी लग रहा था मेरी हरकत देख कर पर वो खुश थी की हम घूमने आये थे और सुबह उसके उदास चेहरे के बाद अभी उसका खिलखिलाता चेहरा देख मुझे भी अच्छा लग रहा था। रात को डिनर के बाद हम होटल पहुचे। जीजाजी ने बोला की अभी सोने के लिए देर हैं तो हम लोग रूम में एक साथ थोड़ी देर टाइम पास करते है। मुझे पता था, जीजाजी निरु के साथ थोड़ा सा एक्स्ट्रा समय बिताने का कोई मौका नहीं छोडेंगे।

हम चारो जीजाजी -दीदी के रूम में गए। जैसे ही निरु बेड पर बैठि तो मैं उसके पास ही बैठ गया और ऋतू दीदी को निरु के दूसरी तरफ बैठा दिया, ताकी जीजाजी निरु से दूर रह। थोड़ी देर बातें करने के बाद जीजाजी ने अपना अगला तीर फ़ेंका।

जीजजी: “अरे निरु, मैं तुम्हे बताना ही भूल गया, यहाँ होटल में एक पेंटिंग गैलेरी भी हैं, तुम देखने चलोगी?”

नीरु: “हॉ, अभी चलो”

अब मैं आपको बता दु की निरु को शुरू से ही पेंटिंग का बहुत शौक है। शहर में जब भी कोई एक्जीबिशन लगता हैं तो वो मुझे जबरदस्ती पकड़ कर जरूर ले जाती हैं। मै उन पेंटिंग्स को देखकर बोर होता हूँ पर वो वह बहुत सारा टाइम लगा देती थी और मुझे पेंटिंग की बारीकियां समझती रहती थी। नीरु पेंटिंग गैलेरी देखने जाने के लिए खड़ी हो गयी। मुझे लग गया की यह जीजाजी की चाल हैं ताकी निरु को मुझसे दूर कर सके। मैं भी तुरन्त उठ खड़ा हुआ की निरु को जीजाजी के साथ अकेले नहीं जाने दूंगा।
 
प्रशांत: “मैं भी चलूँगा”

नीरु: “प्रशांत, तुम और पेंटिंग गैलेरी! तुम्हे कब से शौक लग गया? जब लेकर जाती हूँ तो तुम हर पेंटिंग में बेतुकी कमिया निकल कर बुराई करते हो। तुम यही रहो, मैं जीजाजी के साथ ही जाउँगी ताकी कोई तो पेंटिंग का जानकार हो साथ में”

नीरु मेरी बात समझ ही नहीं रही थी। सुबह वॉशरूम में जीजाजी ने जो हरकत की थी उसके बाद मैं निरु को जीजा के साथ नहीं भेज सकता था। निरु ने मुझको फिर बिस्तर पर बैठा दिया। जीजजी ने निरु का हाथ पकड़ लिया और जाने लगे। मेरा खून खोल गया और मैं फिर उठने लगा पर तभी ऋतू दीदी ने मेरी कलाई पकड़ कर मुझे बैठे रहने को कहा। मै और ऋतू दीदी आज तक एक दूसरे की हर बात मानते हैं तो मैं बैठा रहा और जीजाजी निरु का हाथ पकडे दरवाजे के बाहर चले गये।

मैने सोचा की वैसे भी वो पेंटिंग गैलेरी में जा रहे थे तो वह पब्लिक प्लेस में जीजाजी मेरी निरु का क्या कर लेंगे। इतना तो निरु संभाल ही लेगी।

ऋतू दीदी: “प्रशांत, मैं तुम्हे खा थोड़े ही जाउंगी जो मुझसे दूर भाग रहे हो!”

प्रशांत: “नहीं दीद, वो बात नहीं हैं”

ऋतू दीदी: “तो फिर क्या बात हैं? मैं निरु जितनी सुंदर नहीं हूँ, फिगर भी उसके जैसा अच्छा नहीं हैं…”

प्रशांत: “नहीं, वो बात नहीं हैं, आप बहुत अच्छी दिखती हो। आपको किसी ने गलत बोल दिया हैं, आपका फिगर तो बहुत अच्छा हैं”

ऋतू दीदी: “निरु से भी अच्छा फिगर हैं?”

अब मैं हिचकिचाने लगा की ऋतू दीदी को अचानक क्या हो गया। उन्होंने इस तरह की बातें तो मेरे साथ कभी नहीं की थी।

ऋतू दीदी: “मैं तुम्हे अच्छी लगती हूँ न?”

प्रशांत: “आप क्या बोल रही हैं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं!”

ऋतू दीदी ने अपने दिल पर हाथ रख दिया और बोलना जारी रख।

ऋतू दीदी: “तुम ट्रैन में मेरे यहाँ छाती को देख रहे थे न?”

मै अब बुरी तरह झेप गया था। निरु ने मुझे बताया था की अगर कोई लड़कियों को बुरी नजर से देखते या घूरता हैं तो लड़कियों को पता चल जाता है। यह बात सच साबित हुयी थी।

ऋतू दीदी: “क्या देखना हैं तुम्हे, बताओ?”

प्रशांत: “नहीं दीदी कुछ नहीं। आपको कोई ग़लतफ़हमी हुयी होगी”

ऋतू दीदी: “वह बीच पर तुम जान बूझकर मेरी छाती पर पानी डाल गीला कर रहे थे और फिर मेरी छाती को दबा भी दिया था”

प्रशांत: “पानी तो जीजाजी भी डाल रहे थे। और वो हाथ तो एक्सीडेंटली लग गया था आपको संभालते वक़्त”

ऋतू दीदी: “दो बार सेम एक्सीडेंट हो गया था?”

प्रशांत: “हां सच मे, आपको फिर भी बुरा लगा हो तो सोर्री, मैं चलता हूँ”

ऋतू दीदी: “रुको, कुछ दिखती हूँ”

दीदी अपने बैग से कुछ निकाल लाए। मैंने देखा यह उनकी वोहि ब्रा और पैंटी थे जो सुबह वो वॉशरूम में भूल गए थे और मैंने सूँघा था और फिर उनकी पैंटी अपने लण्ड पर भी रगडी थी। उन्होंने वो पैंटी मुझे दिखायी।

ऋतू दीदी: “पहचाना?”

प्रशांत: “निरु की नहीं हैं यह”

ऋतू दीदी: “फिर भी तुमने इसको अपने कहा लगाया? यह देखो इस पर कैसे छोटे बाल लगे हैं”

मैने उनकी पैंटी को अपने लण्ड पर रगड़ा था और उसमे मेरे लण्ड के घुंगराले छोटे बाल लग गए थे।

प्रशांत: “मैंने कुछ नहीं किया, यह मेरे नहीं हैं, यह आपके…”

मैं तो यह भी कहना चाहता था की पैंटी पर लगे यह बाल दीदी की चूत के भी हो सकते हैं पर यह बात कैसे कहता!

ऋतू दीदी: “मेरे बाद तुम ही तो वॉशरूम में गए थे, और यह मेरे बाल नहीं हो सकते”

यह कह कर ऋतू दीदी ने एक झटके में अपनी केप्री और पैंटी नीचे खिसका दि। उनकी चूत मेरे सामने थी जो एक दम चिकनी साफ़ थी। यहाँ तक की निरु की चूत पर भी अधिकतर छोटे छोटे बाल होते ही हैं पर दीदी ने चिकनी चूत मेन्टेन की थी। एक तरफ मेरी बदमाशी पकड़ी गयी थी और मैं बुरी तरह फंस चुका था और दूसरी तरफ दीदी ने अपनी चूत दिखा कर मुझे हैरान कर दिया था।
 
naik wrote: ↑ 30 Mar 2020 22:58

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यह कह कर ऋतू दीदी ने एक झटके में अपनी केप्री और पैंटी नीचे खिसका दि। उनकी चूत मेरे सामने थी जो एक दम चिकनी साफ़ थी। यहाँ तक की निरु की चूत पर भी अधिकतर छोटे छोटे बाल होते ही हैं पर दीदी ने चिकनी चूत मेन्टेन की थी। एक तरफ मेरी बदमाशी पकड़ी गयी थी और मैं बुरी तरह फंस चुका था और दूसरी तरफ दीदी ने अपनी चूत दिखा कर मुझे हैरान कर दिया था।

हमेशा शांत, समझदार, शर्मो हया का ध्यान रखने वाली दीदी ने अपने कपडे कितनी आसानी से खोल कर अपने शरीर का सबसे संवेदनशील अंग दिखा दिया था। मुझे लगा वो अपने कपडे फिर पहन लेगी पर उन्होंने अपनी केप्री और पैंटी पूरी उतार नीचे से नंगी हो गयी। मेरी हालत ऐसी थी की काटो तो खून नहीं। मैं दीदी का कैसा अवतार देख रहा था।

फिर दीदी ने अपना टॉप निकाला और सिर्फ ब्रा में खड़ी थी। उनके ब्रा से उनके मम्मो का उभार बाहर निकल रहा था। इसका कुछ नजारा मैं ट्रैन में देख ही चुका था पर अब पूरा अच्छे से दिख रहा था। उन्होंने अब अपने ब्रा का हुक खोलने हाथ पीठ पर किये। मैं भी उस नज़ारे को देखने को आतुर था। कल बीच पर गीले टॉप में उनके मम्मो का साइज तो मैं नाप ही चुका था पर अब मुझे बिना कपड़ो के उनके मम्मो के असली दर्शन होने वाले थे।

ऋतू दीदी अब मेरे सामने पूरे नंगे खड़े थे और मैं उनके मम्मो पहली बार नंगे देख खुश हुआ। ट्रेन में उनके क्लीवेज देख जो तड़प जागी थी वो आखिर शांत हुयी। अभी मैं ना बोल पा रहा था, न हील पा रहा था और न वहाँ से जा पा रहा था। कुछ समझ नहीं आया की क्या करू ? सामने एक खूबसूरत औरत नंगी खड़ी हो मुझे इन्वाइट कर रही थी। ऋतू दीदी के मम्मो के निप्पल एक काले अंगूर की तरह मुझे चुसने को बुला रहे थे। मैंने तो आज तक निरु के निप्पल ही चखे थे जो एक किसमिस की तरह थे, यह अंगूर कैसे टेस्ट करेंगे ये जानना था।

ऋतू दीदी: “अब अच्छे से देख लो। छु कर भी देख लो, कल शायद टॉप के ऊपर से छूने का मजा नहीं आया होगा तुम्हे”

मै अब बुरी तरह शर्मा गया। ऋतू दीदी ने कपडे तो खुद के उतारे थे पर इज्जत मेरी उतार रही थी की मैंने अपनी ही बीवी की बड़ी बहन के कपड़ो में जानने की कोशिश की थी और छुआ था।

मैने डरते हुए सिर्फ “सॉरी” बोला और वहाँ से जाने लगा। ऋतू दीदी आगे आकर मेरे और रूम के दरवाजे के बीच खड़ी हो गयी।

ऋतू दीदी: “क्या हुआ, देख कर मजा नहीं आया? कल रात को तो मुझे नीरज के साथ चोदता देख इतने मजे ले रहे थे की निरु को भी जबरदस्ती चोद दिया था”

यह सुन मुझे और भी झटका लगा। ऋतू दीदी को सब कुछ पता था। फिर तो उनको यह भी पता होगा की उनके पति अपनी साली के साथ क्या कर रहे है। उन्होंने अपने पति से चुदते वक़्त उनको निरु का नाम लेने से क्यों नहीं रोका ? अगर मैं गलत हूँ तो उनके पति और वो खुद भी तो गलत ही है। सवाल कई थे मगर पुछ नहीं पा रहा था क्यों की मैं ऋतू दीदी को इस तरह देख अवाक रह गया था। ऋतू दीदी ने आगे बढ़ाकर मेरा टीशर्ट जबरदस्ती निकाल दिया और अपनी उंगलिया मेरे सीने पर फिराते हुए मेरे फिगर की तारीफ़ करने लगी।

फिर वो मुझे धकेलते हुए बिस्तर तक ले आई और बिस्तर पर गिरा दिया। मुझे कही न कही अच्छा लग रहा था पर ऋतू दीदी से यह उम्मीद नहीं थी। उन्होंने अब मेरे शॉर्ट्स के बटन और चेन खोल कर मुझे नीचे से नँगा कर दिया। इतना सब कुछ देखने के बाद मेरा लण्ड तो वैसे ही कड़क होकर सर उठाये खड़ा था। ऋतू दीदी की नाजुक उंगलियो ने मेरे लण्ड को अपने में लपेट लिया। फिर वो मेरे लण्ड को रगडने लगी। मै मुँह खोल कर तेज साँसें ले रहा था। ऋतू दीदी की उंगलियो में वैसा ही जादू था जैसा निरु की उंगलियो में था।

मैंने आँखें बंद कर ली और अगले ही पल मेरे लण्ड को मुँह की गर्मी लगी। मैने आँखें खोली तो ऋतू दीदी मेरा लण्ड अपने मुँह में ले चुस रही थी। मैंने सोचा नहीं था की २ दिन के अन्दर हम दोनों के रिश्ते इतने बदल कर यहाँ तक पहुच जाएंगे। ऋतू दीदी अब मेरे लण्ड पर बैठ गयी थी और उनकी चूत की नर्माहट मेरे कड़क लण्ड को ठंडक दे रही थी। ऋतू दीदी अब मेरे ऊपर झुक गए और उनके मम्मे मेरे ऊपर लटक गए। नीरु और ऋतू दीदि, दोनों के मम्मे बड़े है।
 
पर निरु के मम्मे झुकने पर भी अपनी गोल शेप कायम रखते हैं, पर ऋतू दीदी के मम्मे लटकने के बाद गोल की बजाय लंबे हो गए। ऋतू दीदी ने मुझे उनके मम्मे चुसने को बोला और एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह मैंने उनके निप्पल रूपी काले अंगूर को अपने होंठों में दबा लिया।

उन अंगूर का स्वाद उतना ही मजेदार था जितना मुझे निरु के किशमिश जैसे निप्पल चुसने में आता है। ऋतू दीदी ने मुझे अच्छे से चुसने को बोला और मैंने उनके लटकते मम्मो को अपने मुँह में भर लिया और चुसने लगा। जब मेरा मन भर गया तो मैंने उनके मम्मो को चुसना छोड़ा और ऋतू दीदी सीधा बैठ गयी। फिर उन्होंने मेरे लण्ड को अपनी चूत के छेद पर रगड़ा। मेरी तो जान सुख कर हलक में आ गयी की यह क्या हो रहा है।

मैं अब ऋतू दीदी को चोदने वाला था, या ऋतू दीदी खुद मुझसे चुद रही थी। मेरा लण्ड अब ऋतू दीदी की चूत की गर्मी का अहसास कर रहा था और आधा उनकी चूत में उतार चुका था। ऋतू दीदी ने भी एक ठंडी आह भरी और मेरा लण्ड पूरा अपनी चूत में उतार ही दिया।

ऋतू दीदी ने अब ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया और मेरा लण्ड उनकी चूत में अन्दर बाहर रगड़ खाने लगा। ऋतू दीदी की जानी पहचानी सी सिसकिया चालु हो गयी जो मैंने वॉशरूम के बाहर से सुनि थी। चुदाई से मैं भी मजे में सरोबार हो आनंद ले रहा था। कभी सपने में भी ऋतू दीदी को चोदने के बारे में नहीं सोचा था। हालाँकि कल रात ऋतू दीदी को चोदते हुए देख मैंने निरु को जरूर चोदा था।

अब ३-४ मिनट हो चुके थे और मेरा लण्ड ऋतू दीदी की चूत को चोदे जा रहा था। प्रेगनेंसी के डर से निरु ने मुझे कभी भी १०-१५ सेकण्ड्स से ज्यादा अपनी चूत को बिना प्रोटेक्शन के चोदने नहीं दी थी। मगर आज मुझे कोई ठोकने वाला नहीं था। ऋतू दीदी को प्रेगनेंसी का कोई डर नहीं था और वो मुझे खुलकर बिना प्रोटेक्शन के चोद रही थी। इस से पहले सिर्फ कल रात जब मैं जबरदस्ती निरु को बिना प्रोटेक्शन के चोद रहा था तब इतना मजा आया था। मगर अभी तो झड़ने के टाइम लण्ड बाहर निकालने का भी झंझट नहीं था।

ऋतू दीदी के चूत के जूस की चिकनाई मैं अपने लण्ड पर महसूस कर सकता था। मेरे आनंद की आज कोई सीमा नहीं थी। मैंने जो नहीं माँगा था वो भी मिल रहा था। नीरु ने वादा किया था की वो मुझे आज रात चोदेगी पर उसके पहले ही उसकी बहन ने मुझे चोद दिया था। यह दोनों पति पत्नी चुदाई के मामले में बहुत ओपन है।
 
ऋतू दीदी के चूत के जूस की चिकनाई मैं अपने लण्ड पर महसूस कर सकता था। मेरे आनंद की आज कोई सीमा नहीं थी। मैंने जो नहीं माँगा था वो भी मिल रहा था। नीरु ने वादा किया था की वो मुझे आज रात चोदेगी पर उसके पहले ही उसकी बहन ने मुझे चोद दिया था। यह दोनों पति पत्नी चुदाई के मामले में बहुत ओपन है।

बिना कपड़ो के मुझे चोदते हुए ऋतू दीदी लगभग निरु जैसी ही लग रही थी। निरु भी मुझे इसी तरह ऊपर आकार चोदती है। क्यों की यह मेरा फेवरेट पोजीशन है। शायद निरु ने कभी ऋतू दीदी से जिक्र किया होगा इसलिए ऋतू दीदी मुझे मेरी फेवरेट पोजीशन में चोद रही थी।

निरु मुझे इस पोजीशन में मेरे कहने पर ही चोदती हैं वार्ना निरु का फेवरेट पोजीशन तो डॉगी स्टाइल में चढ़ने का है। फिलहाल चुदते हुए मेरा जूस मेरी गोटियो से निकल कर मेरे लण्ड की नलि में चढ़ने लगा था और बाहर आने को उतारू था। ऋतू दीदी की भी हालत अब ख़राब हो चुकी थी और अब वो मेरे सीने पर अपनी छाती रख लेट कर चोदने लगी। ऋतू दीदी के नर्म मुलायम मम्मे मेरी छाती पर चिपके हुए रगड़ रहे थे।

अब ऋतू दीदी अचानक बोलना शुरू हो गयी “प्रशांत, चोद दो मुझे। प्लीज, मुझे चोद डालो जितना जोर से चोदना हैं।”

मैने नीचे लेटे लेटे एक दो धक्के लण्ड के उनकी चूत में मारे और तब दो बार उनकी सिसकिया एकदम तेज हुयी। मैने उनको उनकी कमर और पीठ से कस कर पकड़ लिया और फिर अपना हाथ उनके नंगे बदन पर घुमाने लगा।

वो लगातार मुझे धक्के मार कर अभी भी चोद रही थी। मैने अब अपने दोनों हाथ ऋतू दीदी की नंगी गांड पर रख दिए। उनकी गांड बड़ी तेजी से आगे पीछे हील रही थी, जिस से मेरे हाथ भी आगे पीछे हो हील रहे थे। नीरु जब मुझे चोदती हैं तो मुझे उसकी गांड पर कभी हाथ नहीं रखने देती पर ऋतू दीदी ने मुझे रखने दिया।

मैं अपनी उंगलिया उनकी गांड की दरार से होते हुए नीचे ले जाने लगा। मेरी ऊँगली मेरे लंड के नीचे छु गयी, जो की चिकना हो चुका था। मेरा लण्ड चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और मेरी ऊँगली वो सब महसूस कर रही थी। मैने अपने शरीर को टाइट करते हुए अपने लण्ड के पानी को बाहर आने से रोके रखा। मगर जिस गति से ऋतू दीदी मुझे चोद कर खुद आहें भर रही थी और मेरा नाम लिए मुझे चोदने को बोल रही थी, मुझसे रुका नहीं गया। मै अब रिलीज़ होना चाहता था। मैंने ऋतू दीदी की चूत में झटका मारा और ऋतू दीदी ने एक तेज आह भरते हुए कहा

“ओह प्रशांत, और मारो”

मैने फिर एक के बाद एक झटके मारते हुए मेरे लण्ड का जूस तेजी से छोडना शुरू कर दिया। मेरे लण्ड का जूस आज कुछ ज्यादा ही स्पीड से बाहर छूट रहा था और मेरी चीखे निकल रही थी। ऋतू दीदी भी लगभग चीख रही थी “आईए प्रासाहनत्तत्त …हहह …चूऊद दो मुझे … प्रासाहंत … मेरी चूत … चोद दो प्लीज”

मैने अपने लण्ड का सारा पानी ऋतू दीदी की चूत में खाली कर दिया। यह ज़िन्दगी में पहली बार था जब मैंने अपने लण्ड का सारा माल चूत में उतारा था।

मेरे जीवन की यह अब तक की बेस्ट चुदाई थी। ऋतू दीदी इसके कुछ सेकण्ड्स तक और मुझे चोदने को बोलति रही इसलिए मैं अपने झटके उनकी चूत में मारता रहा। ऐसा मेरे साथ पहले भी हुआ था की मैं झड़ गया पर निरु नहीं झड़ी थी, वो भी मुझे इसी तरह चोदते रहने को बोलति हैं, पर एक बार झड़ने के बाद मैं ज्यादा देर उसको चोद नहीं पाता और वो मुझसे नाराज हो खुद ही मुझे चोद कर अपना पूरा करती है।

पर आज मेरे साथ ऋतू दीदी थी, जिनकी मैंने आज तक कोई बात नहीं ताली थी तो मैं झड़ने के बाद भी उनको चोदे जा रहा था। वो खुद भी आगे पीछे हो मुझे चोद रही थी और मैं तभी रुका जब उन्होंने भी धक्के मारना बंद कर दिया था।

ऋतू दीदी भी झड़ चुकी थी और उहोने मेरे होठो को अपने नाराम होंठो में भर कर चूमना शुरू किया। उनके होंठ निरु की तरह बहुत सॉफ्ट थे और मुझे अच्छा लगा। चुदाई के मजे तो ले लिए पर अब वो ख़ुमार उतरने के बाद मैं सोचने लगा की यह मैंने क्या कर दिया। मैंने निरु को धोखा देकर ठीक नहीं किया हैं। मै अब तक जीजाजी को निरु के साथ सम्बन्ध पर शक़ कर रहा था और अब मैंने खुद अपनी बीवी की बड़ी बहन यानी बड़ी साली को चोद दिया था।
 
Shakti singh wrote: ↑ 02 Apr 2020 16:55
Nice update bro. Lagta h ye ritu Didi and jija K hi plan h hero ko apne nazaro me girane ka. Taki uski pati aur bahan ke sambandh se koin problem n ho.

Aage Kya hota dekhte h.

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Jaldi update dena we bhi Mega Wala ok
 
ऋतू दीदी भी झड़ चुकी थी और उहोने मेरे होठो को अपने नाराम होंठो में भर कर चूमना शुरू किया। उनके होंठ निरु की तरह बहुत सॉफ्ट थे और मुझे अच्छा लगा। चुदाई के मजे तो ले लिए पर अब वो ख़ुमार उतरने के बाद मैं सोचने लगा की यह मैंने क्या कर दिया। मैंने निरु को धोखा देकर ठीक नहीं किया हैं। मै अब तक जीजाजी को निरु के साथ सम्बन्ध पर शक़ कर रहा था और अब मैंने खुद अपनी बीवी की बड़ी बहन यानी बड़ी साली को चोद दिया था।

मुझे किश करने के बाद ऋतू दीदी ने मुझे थैंक यू बोला और मुझ पर से उठि। उन्होंने मुझे पहले वॉशरूम में जाने दिया। मैं वॉशरूम में कपडे लेकर आया और सफाई के बाद कपडे पहनने लगा। फिर मेरे मन में एक विचार आया। कही ऋतू दीदी और नीरज जीजाजी आपस में मिले हुए तो नहीं है। हो सकता हैं की यह सब उनका प्लान हो की ऋतू दीदी मुझे फँसा कर चोदेगी और दूसरी तरफ जीजाजी मेरी बीवी निरु को फँसा कर चोदेगे। कहीं जीजाजी दूसरे रूम में निरु को चोद तो नहीं रहे।

मैंने अपनी पॉकेट चेक की वहाँ मेरे रूम की चाबी नहीं थी। मै वॉशरूम से एक टेंशन लिए बाहर आया। ऋतू दीदी अभी भी नंगी खड़ी थी और फिर वो अन्दर वॉशरूम में गयी। मैने टेबल पर देखा तो मुझे दोनों रूम की चाबिया पड़ी दीखि और मैंने चैन की साँस ली। ऋतू दीदी वॉशरूम के बाहर आये उसके पहले ही मैंने अपने रूम की चाबी ली और बाहर आ गया। मै सोचने लगा की अपने रूम में जाऊं या निरु के पास जाऊं। अपने रूम में गया तो बाद में निरु आकर पुछेगी की मैंने ऋतू दीदी को उस रूम में अकेला क्यों छोड़ दिया था।

अब आगे की कहानी प्रशांत की ज़ुबानी जारी हैं…

मै फिर नीचे पेंटिंग गैलरी ढूँढ़ने गया। मुझे कहीं कोई बोर्ड नहीं दिख। मैंने होटल के रिसेप्शन पर एक स्टाफ से पूछा की “यहाँ आर्ट गैलरी कहाँ हैं?” उसने जवाब दिया की ऐसी कोई गैलरी नहीं है। मेरा माथा ठनका। कुछ तो गड़बड़ है। मैं और निरु किसी जाल में फ़ांस गए हैं। मै तो दीदी से चुद ही चुका हूँ, कहीं निरु भी जीजाजी से चुद ना जाए, मुझे उसको बचाना होगा।

फिर मुझे याद आया की होटल वालों के पास तो रूम की डुप्लीकेट चाबी होती है। कहीं जीजाजी ने उस चाबी से मेरा रूम तो नहीं खोल लिया। मैने रिसेप्शन पर झूठ बोला की मेरे रूम की चाबी मेरे रूम में रह गयी हैं और मुझे डुप्लीकेट चाबी से रूम खुलवाना है। उन्होंने बताया की थोड़ी देर पहले ही बुकिंग करने वाले Mr. नीरज की रिक्वेस्ट पर वो रूम उन्होंने डुप्लीकेट चाबी से खोला हैं।

मै वहाँ से भागा और वो स्टाफ वाला देखते रह। मैं अपने रूम के बाहर पहुंचा। घबराहट में मुझसे चाबी भी ढंग से नहीं लग रही थी। मेरी बीवी की इज्जत खतरे में थी और मुझे उसको बचाना था। मैंने दरवाजा खोला और दरवाजे के पास जीजाजी मुस्कुराते हुए खड़े थे।

जीजजी: “तुम आ गए ? निरु का ध्यान रखो”

इसके बाद मुझे गूडनाईट बोलते हुए वो दरवाजा बंद कर बाहर निकल गए।

ऐसा लगा जैसे वो मुझे चिढा रहे हो की मैंने आने में देर कर दी और उन्होंने निरु को चोदने का काम पहले ही कर दिया हैं। मै रूम में आगे बढा तो देखा की निरु बेड पर डॉगी स्टाइल में बैठि है। हालाँकि उसने कपडे पहने हुए थे पर फिर भी मन में एक डर था। मै उसके पीछे था तो उसने मुझे अभी तक देखा नहीं था। इस पोजीशन में उसकी घुटनों तक की ड्रेस ऊपर चढ़ चुकी थी और उसकी गोरी जाँघे दिख रही थी।

मैने उसके पास जाते ही उसकी गांड पर हाथ रख फील किया की उसने अन्दर पैंटी पहनी हैं या नहीं। तभी निरु मेरी तरफ गर्दन घुमाते हुए बोली।

नीरु: “जीजाजी फिर से नहीं, दर्द हो रहा हैं…।”

फिर मुझे वहाँ देख कर बोलते बोलते रुक गयी। मुझे तो हार्ट अटैक आ जाना चाहिए था पर मैं इस सिचुएशन के लिए मेंटली तैयार था। नीरु के चेहरे पर दर्द भरे एक्सप्रेशन थे। जरुर जीजाजी ने निरु को डॉगी स्टाइल में बड़ी बेरहमी से चोदा होगा और निरु दर्द से बेहाल हैं की चुदने के बाद भी डॉगी स्टाइल में बैठि हैं।

प्रशांत: “क्या हो रहा था यहाँ?”

नीरु: “तुम सो जाओ, कुछ नहीं हुआ”

प्रशांत: “मैंने तुम्हारी गांड पर हाथ रखा तो तुमने यह क्यों कहा की जीजा जी दर्द होगा”

नीरु: “तुम गुस्सा तो नहीं होगी न?”

प्रशांत: “क्या कर दिया तुमने!”

मेरे शब्द तो लगभग जुबान में अटक कर बड़ी मुश्किल से निकल रहे थे।
 
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