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#55
“आजा , सामने आ मुझे तेरा ही इंतज़ार था ,आज तुझे पाकर ही रहूँगा ” तांत्रिक ने अट्टहास करते हुए कहा.
सामने से एक गहरी फुफकार आई , हवा में जहर फ़ैल गया , पर तांत्रिक ने फौरन ही कोई मन्त्र पढ़ा .
“नागिन, तेरा मुझ से पाला पड़ा है , तूने बहुत मासूम लोगो को अपना शिकार बना लिया है पर अब तेरा समय बीता. तेरे पास दो रस्ते है या तो मेरी शरण में आजा या मौत के ” तांत्रिक ने कहा.
मामला गंभीर हो चला था . तांत्रिक मुझे बहुत पहुंचा हुआ लगता था . उसने अपने आस पास एक राख का घेरा बनाया हुआ था ,
“सामने आ ” उसने चीखते हुए कहा और बीन दुबारा से बजाने लगा. इस बार त्रीवता और जोर की थी उसके चेले भी उसका साथ दे रहे थे . और फिर मैंने वो होते देखा जो नहीं होना था . आग की लपटों में मैंने नागिन को लहरा कर आते हुए देखा, पर वो वैसी बिलकुल नहीं थी जैसा मैंने उसको देखा था , वो कमजोर थी बहुत कमजोर . शायद कुछ हुआ था उसे . मैंने पहली बार अपने माथे पर पसीना बहते हुए महसूस किया.
“बड़ी तमन्ना थी की मौका मिलेकिसी विलक्ष्ण नागिन का शिकार करने का पर तू तो कमजोर निकली . ”तांत्रिक ने कहा
“तेरा अंत कर सकू अभी इतनी जान बाकी है ” नागिन ने शांत आवाज में कहा
तांत्रिक- उफ़ ये अहंकार, ये गुरुर , अच्छा लगा मजा आयेगा तुझसे खेलने में .
तांत्रिक ने बीन पर कोई मन्त्र पढ़ा और अपनी कार्यवाही करने लगा. नागिन बेकाबू होने लगी , शिथिल होने लगी . वो लगातार उस पर कुछ फेक रहा था जिस से नागिन तिलमिला रही थी उसकी त्वचा से रक्त बहने लगा था , दर्द से बिलबिलाने लगी थी वो . अब मेरे बर्दाश्त से बाहर था ये सब . मैं नागिन की तरफ दौड़ पड़ा .
“तांत्रिक , रोक दे अपने जतन को वर्ना तेरे टुकड़े कर दूंगा मैं ” मैंने उसके और नागिन के बीच में आते हुए कहा .
तांत्रिक ने मुझे देखा और कहा- कौन है तू मुर्ख और यहाँ आने की गुस्ताखी कैसे की तूने,
मैं- मेरे बारे में उस से जाके पूछना जिसने तुझे यहाँ भेजा है . ये नागिन मेरी है , और मेरे रहते तू तो का साक्षात् यमराज भी अगर आ जाये तो इस से पहले मैं खड़ा हूँ , तेरे और नागिन के बीच में मैं वो दिवार हूँ जिसे तुझे बेधना होगा.
तांत्रिक- जो तेरी इच्छा, पहले तेरा रक्त पान करता हूँ .
तांत्रिक ने अपनी मुट्ठी में कुछ लिया और मेरी तरफ फेका. बदन में जैसे आग लग गयी हो पर अगले ही पल मैं ठीक हो गया. तांत्रिक की आँखे फटी रह गयी .
“असंभव , ये मुमकिन नहीं, कौन है तू ” उसने कहा .
मैं- तेरी मौत.
मैंने पास पड़ी लकड़ी का टुकड़ा उठाया और तांत्रिक की तरफ बढ़ चला , उसके चेले मेरे सामने आ गए , तांत्रिक अग्नि के पास गया और बैठकर मन्त्र पढने लगा. नागिन तड़पने लगी. मुझे और गुस्सा आने लगा था . दोनों चेलो को धर लिया मैंने और पीटने लगा उन्हें. छीना झपटी में मैंने एक का सर फोड़ दिया.
जैसे ही वो गिरा . मैंने दुसरे को धक्का दिया और तांत्रिक की तरफ बढ़ा. पास में ही त्रिशूल खड़ा था मैंने उसे लिया और तांत्रिक के कंधे में घोंप दिया. वो चीख पड़ा . मैंने अग्नि में रेत फेंकी और तांत्रिक को धर लिया. वो लगातार अब भी मन्त्र बुदबुदा रहा था , नागिन मीमिया रही थी .
मैंने उसके अन्डकोशो पर वार किया तो वो तिलमिला गया .
“हरामजादे, मैंने तुझसे कहा था न की मैं तेरी मौत हूँ अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूँ , ” मैंने तांत्रिक का हाथ तोड़ दिया .
“आह्ह्ह्हह्ह ” चीखा वो . पर अब उसे चीखते ही रहना था , क्योंकि उसे सामना करना था मेरे गुस्से का. मैंने पास में पड़ी कटार उठाई और उसे काटने लगा. जैसे कोई कसाई बकरे को काटता है . तांत्रिक की चीखे दूर दूर तक गूँज रही थी पर मेरे मन में कोई रहम नहीं था . जब तक मेरा मन शांत नहीं हुआ मैं उसके टुकड़े करते रहा . उसके चेले भाग गए.
फिर मैं नागिन की तरफ गया . वो बेहाल पड़ी थी . मैंने उसे अपनी बाँहों में लिया .
“कुछ नहीं होगा तुझे , मैं हूँ न कुछ नहीं होगा तुझे. ” मैंने कहा
उसकी पीली आँखों से मैंने आंसू गिरते देखे.
ऐसा असहनीय दर्द मैंने तो महसूस किया था , समझ नहीं आ रहा था की क्या करू . कहाँ ले जाऊ इसे. पर तभी जैसे चमत्कार सा हुआ. मेरे सर पर जो लगी थी , खून की बूंदे नागिन के बदन पर पड़ी तो उसे राहत मिली. जहाँ मेरा खून गिरा था वहां उसके जख्म भरने लगे.
मैंने कटार उठाई और अपनी हथेली को काटा. रक्त धारा बहने लगी. मैं रक्त उसके शरीर पर मलने लगा. उसके जख्मो में सुधार होने लगा. पर तभी उसने मुझे दूर धकेल दिया.
“मत कर ” धीमी आवाज में बोली वो .
मैं- मेरे खून से अगर तुझे राहत मिलती है तो मेरी बूँद बूँद तेरी है .
नागिन- मैंने कहा न मत कर .तू जा यहाँ से , चला जा .
मैं- नहीं जाऊंगा , और तुझे भी नहीं जाने दूंगा. आजतक तू हमेशा मेरी ढाल बनके रही है , मुझ पर आने वाली हर मुशीबत को परे ही रोका है तूने आज जब मेरी बारी है तो मैं कैसे पीछे हट सकता हूँ.
नागिन- मानता क्यों नहीं मेरी बात चला जा , दूर रह मुझसे, मुझे कमजोर मत कर . मुश्किल से संभाला है खुद को , इस से पहले की बिखर जाऊ चला जा यहाँ से , चला जा , मेरी जरा भी परवाह है तुझे तो चला जा यहाँ से
मैं- ठीक है चला जाऊंगा, तेरी नजरो से दूर हो जाऊंगा पर जाने से पहले इतना बता जब दूर ही करना था तो आई क्यों . ठुकराना ही था तो अपनाया क्यो मुझे. जा रहा हूँ पर जाने से पहले मैं तेरा कर्ज चुकाना चाहता हूँ .और तू मना नहीं करेगी मुझे
मैंने अपना हाथ आगे कर दिया , वो मेरे पास आई और अपने दांत मेरी कलाई में गडा दिए.
“आजा , सामने आ मुझे तेरा ही इंतज़ार था ,आज तुझे पाकर ही रहूँगा ” तांत्रिक ने अट्टहास करते हुए कहा.
सामने से एक गहरी फुफकार आई , हवा में जहर फ़ैल गया , पर तांत्रिक ने फौरन ही कोई मन्त्र पढ़ा .
“नागिन, तेरा मुझ से पाला पड़ा है , तूने बहुत मासूम लोगो को अपना शिकार बना लिया है पर अब तेरा समय बीता. तेरे पास दो रस्ते है या तो मेरी शरण में आजा या मौत के ” तांत्रिक ने कहा.
मामला गंभीर हो चला था . तांत्रिक मुझे बहुत पहुंचा हुआ लगता था . उसने अपने आस पास एक राख का घेरा बनाया हुआ था ,
“सामने आ ” उसने चीखते हुए कहा और बीन दुबारा से बजाने लगा. इस बार त्रीवता और जोर की थी उसके चेले भी उसका साथ दे रहे थे . और फिर मैंने वो होते देखा जो नहीं होना था . आग की लपटों में मैंने नागिन को लहरा कर आते हुए देखा, पर वो वैसी बिलकुल नहीं थी जैसा मैंने उसको देखा था , वो कमजोर थी बहुत कमजोर . शायद कुछ हुआ था उसे . मैंने पहली बार अपने माथे पर पसीना बहते हुए महसूस किया.
“बड़ी तमन्ना थी की मौका मिलेकिसी विलक्ष्ण नागिन का शिकार करने का पर तू तो कमजोर निकली . ”तांत्रिक ने कहा
“तेरा अंत कर सकू अभी इतनी जान बाकी है ” नागिन ने शांत आवाज में कहा
तांत्रिक- उफ़ ये अहंकार, ये गुरुर , अच्छा लगा मजा आयेगा तुझसे खेलने में .
तांत्रिक ने बीन पर कोई मन्त्र पढ़ा और अपनी कार्यवाही करने लगा. नागिन बेकाबू होने लगी , शिथिल होने लगी . वो लगातार उस पर कुछ फेक रहा था जिस से नागिन तिलमिला रही थी उसकी त्वचा से रक्त बहने लगा था , दर्द से बिलबिलाने लगी थी वो . अब मेरे बर्दाश्त से बाहर था ये सब . मैं नागिन की तरफ दौड़ पड़ा .
“तांत्रिक , रोक दे अपने जतन को वर्ना तेरे टुकड़े कर दूंगा मैं ” मैंने उसके और नागिन के बीच में आते हुए कहा .
तांत्रिक ने मुझे देखा और कहा- कौन है तू मुर्ख और यहाँ आने की गुस्ताखी कैसे की तूने,
मैं- मेरे बारे में उस से जाके पूछना जिसने तुझे यहाँ भेजा है . ये नागिन मेरी है , और मेरे रहते तू तो का साक्षात् यमराज भी अगर आ जाये तो इस से पहले मैं खड़ा हूँ , तेरे और नागिन के बीच में मैं वो दिवार हूँ जिसे तुझे बेधना होगा.
तांत्रिक- जो तेरी इच्छा, पहले तेरा रक्त पान करता हूँ .
तांत्रिक ने अपनी मुट्ठी में कुछ लिया और मेरी तरफ फेका. बदन में जैसे आग लग गयी हो पर अगले ही पल मैं ठीक हो गया. तांत्रिक की आँखे फटी रह गयी .
“असंभव , ये मुमकिन नहीं, कौन है तू ” उसने कहा .
मैं- तेरी मौत.
मैंने पास पड़ी लकड़ी का टुकड़ा उठाया और तांत्रिक की तरफ बढ़ चला , उसके चेले मेरे सामने आ गए , तांत्रिक अग्नि के पास गया और बैठकर मन्त्र पढने लगा. नागिन तड़पने लगी. मुझे और गुस्सा आने लगा था . दोनों चेलो को धर लिया मैंने और पीटने लगा उन्हें. छीना झपटी में मैंने एक का सर फोड़ दिया.
जैसे ही वो गिरा . मैंने दुसरे को धक्का दिया और तांत्रिक की तरफ बढ़ा. पास में ही त्रिशूल खड़ा था मैंने उसे लिया और तांत्रिक के कंधे में घोंप दिया. वो चीख पड़ा . मैंने अग्नि में रेत फेंकी और तांत्रिक को धर लिया. वो लगातार अब भी मन्त्र बुदबुदा रहा था , नागिन मीमिया रही थी .
मैंने उसके अन्डकोशो पर वार किया तो वो तिलमिला गया .
“हरामजादे, मैंने तुझसे कहा था न की मैं तेरी मौत हूँ अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूँ , ” मैंने तांत्रिक का हाथ तोड़ दिया .
“आह्ह्ह्हह्ह ” चीखा वो . पर अब उसे चीखते ही रहना था , क्योंकि उसे सामना करना था मेरे गुस्से का. मैंने पास में पड़ी कटार उठाई और उसे काटने लगा. जैसे कोई कसाई बकरे को काटता है . तांत्रिक की चीखे दूर दूर तक गूँज रही थी पर मेरे मन में कोई रहम नहीं था . जब तक मेरा मन शांत नहीं हुआ मैं उसके टुकड़े करते रहा . उसके चेले भाग गए.
फिर मैं नागिन की तरफ गया . वो बेहाल पड़ी थी . मैंने उसे अपनी बाँहों में लिया .
“कुछ नहीं होगा तुझे , मैं हूँ न कुछ नहीं होगा तुझे. ” मैंने कहा
उसकी पीली आँखों से मैंने आंसू गिरते देखे.
ऐसा असहनीय दर्द मैंने तो महसूस किया था , समझ नहीं आ रहा था की क्या करू . कहाँ ले जाऊ इसे. पर तभी जैसे चमत्कार सा हुआ. मेरे सर पर जो लगी थी , खून की बूंदे नागिन के बदन पर पड़ी तो उसे राहत मिली. जहाँ मेरा खून गिरा था वहां उसके जख्म भरने लगे.
मैंने कटार उठाई और अपनी हथेली को काटा. रक्त धारा बहने लगी. मैं रक्त उसके शरीर पर मलने लगा. उसके जख्मो में सुधार होने लगा. पर तभी उसने मुझे दूर धकेल दिया.
“मत कर ” धीमी आवाज में बोली वो .
मैं- मेरे खून से अगर तुझे राहत मिलती है तो मेरी बूँद बूँद तेरी है .
नागिन- मैंने कहा न मत कर .तू जा यहाँ से , चला जा .
मैं- नहीं जाऊंगा , और तुझे भी नहीं जाने दूंगा. आजतक तू हमेशा मेरी ढाल बनके रही है , मुझ पर आने वाली हर मुशीबत को परे ही रोका है तूने आज जब मेरी बारी है तो मैं कैसे पीछे हट सकता हूँ.
नागिन- मानता क्यों नहीं मेरी बात चला जा , दूर रह मुझसे, मुझे कमजोर मत कर . मुश्किल से संभाला है खुद को , इस से पहले की बिखर जाऊ चला जा यहाँ से , चला जा , मेरी जरा भी परवाह है तुझे तो चला जा यहाँ से
मैं- ठीक है चला जाऊंगा, तेरी नजरो से दूर हो जाऊंगा पर जाने से पहले इतना बता जब दूर ही करना था तो आई क्यों . ठुकराना ही था तो अपनाया क्यो मुझे. जा रहा हूँ पर जाने से पहले मैं तेरा कर्ज चुकाना चाहता हूँ .और तू मना नहीं करेगी मुझे
मैंने अपना हाथ आगे कर दिया , वो मेरे पास आई और अपने दांत मेरी कलाई में गडा दिए.