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Adultery ऋतू दीदी

मैने कभी सोचा नहीं था की निरु कभी जीजाजी के करैक्टर टेस्ट के लिए मानेंगी पर वो मान चुकी थी। अभी तक मैं जीजाजी को एक्सपोज करने का अकेला ट्राई कर रहा था, अब निरु मेरे साथ थी तो मेरा प्लान सक्सेस होना तो लग रहा था।

मुझे अच्छा सा प्लान बनाना था, ताकी अगर मैं झूठा भी साबित हुआ और जीजा जी के मन में निरु के लिए गन्दी भावना ना हो तो भी उन दोनों के रिश्ते पर फ़र्क़ ना पड़े और हम अच्छे से सिचुएशन को कवर कर सके। हलंकी मुझे पूरा भरोसा था की जीजाजी के मन में निरु के लिए क्या था। निरु ने भी मेरे मन में डाउट डाल दिया था की उस दिन वॉशरूम में मैंने “निरु” सुना था या “ऋतू”। मै अब तक अपने प्लान में फेल होता आया था और अब किसी गलती की गुंजाईश नहीं थी।

मैं अपने और निरु के फ़ोन में एक एप्प इनस्टॉल कर दिया। यह मेरे प्लान का हिस्सा था। नीरु बाकी के सफर के दौरान चिन्तित ही रही, शायद वो भी यही सोच रही होगी की वो यह सब कैसे करेगी और मेरा डाउट सच साबित हो न हो तो भी क्या होगा। हम लोगो ने डिनर ट्रैन में ही कर लिया था। मैंने निरु को मैसेज कर बता दिया था की हमें अपना प्लान घर जाते ही एक्सेक्यूट करना है। यह पढ़कर निरु घबरा गयी थी और मेरी तरफ बुझि आँखों से देखने लगी।

अब हम अपने शहर पहुच गए और टैक्सी से घर की तरफ जा रहे थे। जीजाजी निरु का उतरा उतरा चेहरा देख कर उसको खुश करने की कोशिश कर रहे थे और निरु उनकी तरफ देख एक सुखी स्माइल देती और फिर उदास हो जाती। मैंने ही जीजाजी को बोला की शायद निरु सफर की थकान की वजह से उदास हैं। हम लोग घर पहुचे। जीजाजी का प्रोग्राम पहले से तय था की रात को वो लोग हमारे घर रुकेंगे और अगली सुबह ही अपने घर के लिए निकलेँगे। जीजाजी और दीदी हमारे गेस्ट रूम में चेंज करने गए और मैं निरु के साथ अपने बेडरूम मे। निरु का मूड अभी भी ख़राब था और परेशान थी।

प्रशांत: “निरु तुम रेडी हो?”

नीरु ने उतरे हुए चेहरे के साथ बेमान से अपनी गर्दन हां में हिलायी।

प्रशांत: “तो फिर प्लान के मुताबिक अपने कपडे उतारो और सिर्फ ब्रा और पैंटी में आ जाओ”

नीरु ने अपना शर्ट निकला और ब्रा में आ गयी। फिर अपनी जीन्स निकाल दि। अब वो सिर्फ लके वाले ब्लू कलर्ड ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। निरु को देख मेरी भावनाये भड़क रही थी, जीजाजी का क्या हाल होने वाला था मुझे पता था।

प्रशांत: “तुम बेड पर डॉगी स्टाइल में बैठ जाओ और पीछे मुड़कर मत देखना। मैं जीजाजी और दीदी के कमरे में जाकर किसी बहाने से जीजाजी को तुम्हारे पास भेजूँगा”

नीरु: “अगर उन्होंने कुछ नहीं किया और पुछ लिया की मैं ऐसे क्यों बैठि हूँ तो?”

प्रशांत: “तो बोल देना, तुम मेरा वेट कर रही थी। उनको भी पता हैं की मियाँ बीवी में यह सब चलता हैं”

नीरु: “प्रशांत मुझे डर लग रहा है, अगर जीजाजी ने सच में मेरे साथ कुछ कर दिया तो!”

प्रशांत: “मैं बाहर ही तो हूँ, मैं अन्दर आ जाऊंगा। मेरे पास रूम की चाबी भी है। तुम चिन्ता मत करो। हमें सिर्फ जीजाजी को एक्सपोज करना है।

अच्छा बताओ अगर उन्होंने तुम्हारे साथ कुछ करने की कोशिश की तो तुम क्या करोगी?”

नीरु: “पता नहीं!”

प्रशांत: “क्या बोल रही हो, पता नहीं !!”

नीरु: “मैं उनको रोक दूंगी और चिल्लाऊंगी”

प्रशांत: “ठीक हैं, गूड, तुम जल्दी से बैठ जाओ, मैं जीजाजी को भेजता हूँ”

नीरु अब डरते हुए बेड पर डॉगी स्टाइल में जा बैठि। उसका पिछवाडा दरवाजे की तरफ था। मैं अब बाहर गया।

अब मेरे प्लान के शुरू होने की बारी थी। मुझे जीजाजी का टेस्ट लेने से पहले निरु का एक टेस्ट लेना था। आखिर निरु के मन में जीजाजी के लिए क्या चल रहा हैं वो देखना था। जीजजी और ऋतू दीदी का दरवाजा अभी भी बंद था। मैंने २-३ मिनट वेट किया। फिर मैं अपने बेडरूम का दरवाजा खोल अन्दर गया औए दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया। नीरु का शरीर दरवाजे की आवाज सुनकर पूरा हील गया, उसको लग रहा था की जीजाजी रूम में आ चुके है।

मैं चलते हुए बेड के करीब गया। मेरे कहे अनुसार निरु ने पीछे पलट कर नहीं देखा था। मै बेड पर चढ़ गया और घुटनों के बल निरु के पिछवाड़े आ गया। निरु के शरीर में हल्का सा कम्पन था। उसको बात इतनी आगे निकलने की उम्मीद नहीं थी। मैने उसकी पैंटी पकड़ी और उसकी गांड से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया। उसके हाथ पैर अब बुरी तरह से थर्र थर्र काम्पने लगे थे। निरु की पैंटी मैंने अब जाँघो से नीचे कर घुटनों तक लाया।

मैने अपने नीचे के कपडे खिसकाएं और नीचे से नँगा हो गया। निरु ने मुझे अभी तक नहीं रोका था। हालाँकि वो डर से बुरी तरह काम्प रही थी। मैने डॉगी स्टाइल में चोदने की पोजीशन ली और उसकी नंगी गांड पर अपने दोनों हाथ रख दिए। उसकी थर्र थर्र काम्पती गांड पर रखे मेरे हाथ भी कम्पन करने लगे थे। नीरु की हालत देखकर मेरा लण्ड तो वैसे ही कड़क हो चुका था। मैंने अपना एक हाथ निरु की गांड से हटा कर अपने लण्ड को पकड़ा और निरु की चूत और गांड की दरार में रगड़ा। नीरु के मुँह से आह करती हुयी साँस निकली।
 
मैंने अपना लण्ड निरु की चूत के छेद पर अडा लिया। मुझे उम्मीद थी की निरु अब पलट कर मुझे रोक देगी या चिल्लायेगी पर ऐसा नहीं हुआ। मैने अपना लण्ड निरु की चूत में थोड़ा घुसाया और निरु के मुँह से एक तिखी आह निकली और फिर मैंने अपना लण्ड धीरे धीरे पूरा निरु की चूत में उतार कर उसकी गांड को दोनों हाथों से थाम लिया। नीरु गाय की तरह चुपचाप बैठि रही। मैंने अपना लण्ड एक बार थोड़ा बाहर खींच फिर तेजी से अन्दर घुसा दिया। निरु ने मुँह खोल कर एक लम्बी आह निकाली। निरु की गांड ऐसे कम्पन कर रही थी जैसे कोई हल्का सा भूकम्प आ गया हो।

मैने अब धक्के मारना शुरू किया और निरु तेज सांन्सें मारते हुए डरी हुयी सिसकियाँ भरने लगी और उसके मुँह से “जीजाजी” निकला और उसके २ सेकंड के बाद “ओह नो” निकला। जैसे जैसे मेरा लण्ड निरु की चूत में अन्दर बाहर हो रहा था मेरे दिल पर चाक़ू चल रहा था। मै समझ नहीं पा रहा था की निरु ने अब तक मुझे रोका क्यों नहीं।

वो मुँह से “जीजा जी ओह नो” बोल रही हैं पर उसका शरीर उसकी आवाज का साथ देकर कोई विरोध नहीं कर रहा था। अगर मैं यह एक्सपेरिमेंट नहीं करता तो शायद अभी जीजाजी निरु को चोद रहे होते और निरु उनको चोदने भी देती। निरु के लिए तो अभी यही सच्चाई थी की वो अपने जीजा से चुदवा रही थी और वो भी बिना विरोध के।

मुझे ही डर लग रहा था क्युकी मैं बिना प्रोटेक्शन के निरु को चोद रहा था। बाद में जब उसको पता चलेगा की मैं उसको बिना प्रोटेक्शन के चोद रहा था तो मुझे पर ही गुस्सा करेगी। मुझे निरु बिना प्रोटेक्शन के १५ सेकंड से जायदा चोदने नहीं देति, मगर फिलहाल वो मुझे जीजाजी समझ कर २-३ मिनट से बिना प्रोटेक्शन चोदने दे रही थी। नीरु का दिल रो रहा था या नहीं पर मेरा मेरा दिल रो रहा था। निरु ने मेरा दिल तोड़ दिया। उसको अपने जीजाजी से चुदवाते हुए जरा भी ऑब्जेक्शन नहीं था।

क्या निरु अपने जीजा से चुदवाने को मेंटली तयारी थी? शायद मेरी ही गलती है। मैंने उसके जीजाजी पर शक़ कर उसको मेंटली तैयार कर दिया था। ट्रेन में भी वो जिस तरह से जीजाजी को लेकर गंदे मजाक कर रही थी हो सकता हैं उसको मैंने इन सब कामो के लिए खुद ही तैयार कर दिया था। मेरा दिमाग ख़राब हो गया और मैंने जोर जोर के झटके मार निरु को चोदना शुरू कर दिया।

निरु की भी आहें अब तेज सिसकियों में बदल गयी और अब वो “जीजाजी… धीरे” बोले जा रही थी। मेरे दिल में और आग लग गयी। वो “जीजाजी मत करो” भी कह सकती थी। मगर उसने धीरे करने को कहा, मतलब वो चुदवाने को तैयार हैं अगर जीजाजी उसको धीरे धीरे प्यार से चोदे तो।

अपनी चूत में पड़ते झटके से निरु अब बेहाल हो गयी और मुँह खोलते हुए एक बड़ी आह भरी और

“ओह माय गॉड जीजाजी… आआह्ह्ह … ओह्ह्ह्हह जीजाजी … स्लो … उम्म्म्म … आईए … जीजाजी … आआह्ह … धीरे” बोलते हुए अपना सर ऊपर छत की तरफ उठा यह सब बोलति रही। इन सब तेज झटको और निरु की सिसकिया सुनकर मेरी गोटियो में जमा मेरा जूस अब लण्ड की नलि में इकट्ठा हो गया था। अब मेरा जूस मेरे लण्ड से बाहर आने को उतारू था।

मैने अपने शरीर को टाइट कर लिया और अपने जूस को छुट्ने से रोके रखा। मगर अब मेरे लिए यह मुश्किल था। मैंने अपना लण्ड निरु की चूत से निकाल दिया। नीरु की तेज तेज आती सिसकियों का संगीत अब एकदम बंद हो गया था। उसका सर जो छत की तरफ खड़ा था अब उसकी गर्दन झुक गयी और वो नीचे पड़े पिलो को देख रही थी। मुझे समझ नहीं आया की क्या करू?

निरु को सब सच्चाई बता दु या थोड़ा इन्तेजार करू की अब वो शायद पीछे मुड कर मुझे रोक दे। अपना लण्ड में फिर अन्दर डालना नहीं चाह रहा था क्यों की मैं झड़ जाता। नीरु कुछ सेकण्ड्स ऐसे गर्दन झुकाये डॉगी स्टाइल में बैठि रही। मैंने ही अब अपना एक हाथ उसकी गांड से हटाया और अपनी उंगलिया उसकी चूत और गांड के छेद के बाहर रगडना शुरू किया। जैसे ही मेरी उंगलियो ने निरु के छेद को रगडा तो निरु की झुकि हुयी गर्दन थोड़ी उठी और अब वो फिर सामने देखने लगी और एक हलकी आह निकली।

जैसे जैसे मैं निरु की चूत और गांड के छेद को रगड रहा था मैंने देखा उसकी गांड और जाँघे काम्प रही थी, जैसे बरफ के पानी में खड़ा कर दिया हो और उसकी ठण्ड से कम्पकपी छूट रही हो। मैने अब अपनी मिडिल फिंगर निरु की चूत में थोड़ी घुसेड दि। निरु की चूत का तापमान एकदम गरम था।

अपनी ऊँगली वही रखते हुए मैंने अब अपना थंब निरु की गांड में घुसेड दिया। नीरु के दोनों छेद जैसे ही मेरी उंगलियो से बंद हुए तो उसकी एक कराह निकली। मैंने अब अपनी दोनों उंगलिया उसके छेद में और अन्दर उतार दी और अन्दर बाहर करने लगा।

निरु के मुँह से एक बार फिर रह रह कर आह आह निकलने लगी। मेरा लण्ड की नलि में जमा पानी अब शांत हो चुका था पर निरु की सिसकियों से मेरा लण्ड अभी भी कड़क था। मुझे निरु पर गुस्सा भी आ रहा था। वो मेरी उंगलियो से चुद कर सिसकिया भर मजे ले रही थी। मैने अपनी उंगलिया उसके दोनों छेद से बाहर निकली और निरु की गर्दन एक बार फिर झुक गयी और आहें बंद हुयी। मैंने फिर पोजीशन लेकर अपना लण्ड उसके दोनों छेद पर रगडा।
 
निरु के मुँह से एक बार फिर रह रह कर आह आह निकलने लगी। मेरा लण्ड की नलि में जमा पानी अब शांत हो चुका था पर निरु की सिसकियों से मेरा लण्ड अभी भी कड़क था। मुझे निरु पर गुस्सा भी आ रहा था। वो मेरी उंगलियो से चुद कर सिसकिया भर मजे ले रही थी। मैने अपनी उंगलिया उसके दोनों छेद से बाहर निकली और निरु की गर्दन एक बार फिर झुक गयी और आहें बंद हुयी। मैंने फिर पोजीशन लेकर अपना लण्ड उसके दोनों छेद पर रगडा।

नीरु मुँह बंद किये हम्म्म हम्म्म कर रही थी। मैंने अपना लण्ड एक बार फिर निरु के चूत में उतार कर धक्के मारना शुरू किया और निरु फिर सर उठाये सिसकिया भरने लगी "जीजा जी...ओह नो" कहना शुरू कर दिया।थोड़ी देर चोदने के बाद ही मुझे लगा की निरु अब झड़ने वाली है। उसकी सिसकिया अब बहुत घरी और लगातार आ रही थी। बीच बीच में वो

"जीजाजी.. ओह...नो"

जरूर बोल रही थी।

नीरु का शरीर अब एकदम कड़ा हो चुका था। निरु के मुँह से जानी पहचानी

"हूउउउन... हुउउउउन... ऊऊह्ह्ह ह्हुउउ उउउ... ीीेहठ"

की आवाज आ रही थी। इसी तरह आवाजें निकालते हुए निरु अब झड़ चुकी थी और थोड़ा शांत हो गयी थी। नीरु को झड़ता देख मेरे लण्ड का पानी बाहर निकलने को उफ़नने लगा था। मन में इतना गुस्सा भर गया की निरु मुझे अपने जीजाजी समझ मुझसे पूरा मजा लेकर झड़ चुकी थी। एक तरह से वो मन से अपने जीजाजी से चुदवा चुकी थी। मै झड़ने के करीब था और निरु की चूत में नहीं झड़ सकता था।

मैंने गुस्से में वो किया जो आज तक नहीं किया था। मैंने हमेशा सुना था की गांड मार भी सकते हैं और इच्छा भी थी। शादी के इन एक साल में मैंने दो-तीन बार निरु को बोला था की हम गांड मारते हैं पर निरु ने मना कर दिया की दर्द होता है। मेरे सामने निरु की गांड का छेद था और अब झड़ने के लिए उसकी गांड से बेहतर जगह नहीं हो सकती थी। मैने अपना लण्ड निरु की चूत से निकाला और उसकी गांड के छेद को खोल उसमे डाल दिया।

निरु के मुँह से चिल्लाते हुए

"ओह्ह्ह्ह जिजाजीई" निकला।

मैने निरु की गांड में हलके हलके धक्के मारने शुरू किया और हर धक्के के साथ लण्ड गांड में जाते ही निरु

"ओह्ह्ह्ह जीजा" कहति

मुझे गांड मारने से निरु ने हमेशा मना किया पर आज वो मुझे जीजा समझ गांड भी मारने दे रही थी। मेरा गुस्सा अब सातवे आसमान पर था। मैंने एक जोर का झटका निरु की गांड में मारा और निरु की चख निकली

"आईईए"

मैं दूसरा झटका मारने के लिए लण्ड पीछे खीचा और उसके पहले ही निरु उच्छल कर आगे खिसक गयी और मेरा लण्ड निरु की गांड के बाहर आ गया। पीछे मुडते हुए निरु के मुँह से निकला

"जीजाजी नहीं, दर्द हो..."

और मुझे देखते ही उसने अपना एक हाथ अपने मुँह पर रख लिया। उसने अपना मुँह फिर आगे किया और चेहरा तकिये में घुसा कर सुबकना शुरू कर दिया।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की यह रोना धोना किस कारण से था। जीजाजी से चुदने की शर्म की वजह से था या फिर राहत थी की उसने जीजाजी से नहीं चुदवाया बल्कि मुझसे चुदवाया था। मै घुटनों के बल चलते हुए उसके साइड में आया। उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसको दिलासा दिया। मुझे आखिर अच्छा लगा की देर से ही सही पर निरु ने चुदाई को रोकने को कहा था। मगर काफी देर भी कर दी थी।
 
प्रशांत: "निरु, रोना बंद करो। कुछ नहीं हुआ है, मैं ही हूँ"

नीरु ने तकिये से मुँह निकला और मेरी तरफ देखा। उसकी आँखें आँसुओ से भरी थी। उसका रोता हुआ चेहरा देख मुझे अच्छा नहीं लगा। झूठा ही सही, मैंने उसका दिल तोड़ दिया था। नीरु अब घुटनों के बल खड़ी हो गयी। फिर मेरी तरफ पलती और मेरे सीने से लग फिर सुबकने लगी। मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसको शांत किया। थोड़ी देर बाद वो पीछे हति और सुबकते हुए बात करने लगी।

नीरु: "ऐसा क्यों किया तुमने? पता हैं मेरे दिल की धड़कन कितनी तेज हो गयी थी, मुझे हार्ट अटैक आ जाता तो? क्यों किया तुमने ऐसा?"

हलाँकि मैं भी निरु का करैक्टर टेस्ट ले रहा था पर सच सुनकर उसको बुरा लगता। इसलिए मैंने झूठ बोल दिया।

प्रशांत: "मैं बस चेक कर रहा था की तुम प्लान को ढंग से फॉलो करोगी या नहीं। तुम कुछ गड़बड़ कर दोगी तो प्लान फेल हो जाएगा। तुमने मना बोलने में बहुत देर कर दी"

नीरु: "मैं इन्तेजार कर रही थी की तुम अन्दर कब आओगे। मैं रोकना चाह रही थी पर जीजाजी को फेस करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। जब तुम इतनी देर नहीं आये तो फिर मुझको ही रोकना पड़ा"

प्रशांत: "अब रोना बंद करो, कुछ भी नहीं हुआ है। तुम अब असली टेस्ट के लिए रेडी हो? मैं अब सच में जीजाजी को बुलाने वाला हूँ"

नीरु: "मुझसे नहीं होगा प्रशांत अब यह सब। मुझे नहीं करना"

प्रशांत: "अरे तुमने बहुत अच्छा किया है। सोचो अगर जीजाजी ने आकर कुछ नहीं किया तो! सब ठीक हो जायेगा न"

नीरु: "अभी जो हुआ उसके बाद मुझे डर लग रहा है। अगर सच में जीजाजी ने मुझे चोद दिया तो?"

प्रशांत: "तो फिर मैं अन्दर आ जाऊँगा"

नीरु: "तुम टाइम पर नहीं आये और तब तक जीजाजी ने मुझे चोदना शुरू कर दिया तो? मुझे यह रिस्क नहीं लेना। मैं यह सब बुरी फीलिंग फिर से नहीं लेना चाहती"

प्रशांत: "अभी तो मैं अन्दर ही था तो कैसे आता? मैं एकदम टाइम पर आ जाऊंगा। मैंने तुम्हारे और मेरे फ़ोन में एक एप्प डाउनलोड की है। एक फ़ोन यहाँ रखकर वीडियो बनाएगा और दूसरा बाहर मेरे पास रहेगा। जैसे ही जीजाजी कुछ गड़बड़ करेंगे, मैं अन्दर आ जाउँगा"

नीरु: "मुझे इस पर भरोसा नहीं है। तुम यहीं कमरे में रहो"

प्रशांत: "मैं यहाँ रहूँगा तो जीजाजी कुछ करेंगे ही नहीं। उनका टेस्ट कैसे होगा?"

नीरु: "तुम यहीं कहीं छूप जाओ। बेड के नीचे या अलमारी में"

प्रशांत: "उनको क्या लगेगा की हमने उनको जान बूझकर ट्रैप किया है। मुझे बाहर ही रहना होगा। जीजाजी जैसे ही तुम्हारे साथ कुछ करने लगेगे, तुम चिल्ला कर मुझे बुला लेना"

नीरु: "नहीं, जीजाजी ने कुछ किया तो मैं उन्हें मना नहीं बोल पाउँगी। अभी भी मैं मना नहीं बोल पायी थी"

प्रशांत: "हो जायेगा निरु"

नीरु: "ऋतू दीदी का क्या होगा? उनका तो जीजाजी से भरोसा उठ जाएगा। मुझे किसी को इस हालात में नहीं डालना है। जीजाजी पकडे गए तो हंगामा होगा और हम चारो के रिश्ते के लिए ठीक नहीं हैं"

प्रशांत: "तो फिर तुम्हे जीजाजी की सच्चाई कभी पता नहीं चलेगी"

नीरु: "मुझे फ़र्क़ नहीं पडता, मुझे नहीं जानना की उनकी सच्चाई क्या हैं"

प्रशांत: "मगर मुझे जानना है। मैं अब और उस आदमी को तुम्हे गलत नीयत से छूने नहीं दे सकता"

नीरु: "जीजाजी को आने दो, उन्हें मेरे साथ जो करना हैं उन्हें करने दो। मैं कुछ नहीं कहूँगी और तुम भी कुछ नहीं कहोगे। मुझे देखना हैं की मुझे चोदने के बाद उनके मन में कोई रिगरेट होता हैं की नहीं। उनके मन में ज़िन्दगी भर जो शर्मिन्दगी रहेगि, वोहि उनके लिए सबसे बड़ी सजा होगी"

प्रशांत: "यह क्या बोल रही हो? मैं उनको तुम्हे चोदते हुए सिर्फ देखते ही रहु?"

नीरु: "हॉ। हम दोनों तो इस सदमे को भूल कर आगे बढ़ भी जायेंगे पर ऋतू दीदी का क्या होगा? उनको तो जीजाजी के साथ ही रहना होगा। वो तो माँ भी नहीं बन सकती, उनका तो सिर्फ जीजाजी ही आसरा है। उनका तो घर टूट जाएग। कैसे भी हो, जीजाजी उनके पति हैं"

प्रशांत: "मैं इसके लिए रेडी नहीं हूँ। मैं तुम्हे जीजाजी के साथ चुदते हुए नहीं देख सकता। कैसी बात कर रही हो? कोई पति अपनी बीवी को किसी के साथ चुदते हुए चुपचाप देखते रहे बस?"
 
नीरु: "तुम भी अज़ीब हो। मुझे दो बार नँगा जीजा जी के सामने लगभग छोड़ कर चले गए थे। भूल गए?"

प्रशांत: "नंगा रख कर जाने में और चोदने में फ़र्क़ हैं"

नीरु: "तो फिर यह एक्सपेरिमेंट ही मत करो। जो चल रहा हैं उसको चलने दो"

प्रशांत: "मैं चाहता हूँ की जीजाजी गलत हैं तो ज़िन्दगी भर तुमसे दूर ही रहो"

नीरु: "तो ठीक हैं, सिर्फ तुम्हारे लिए मैं एक बार फिर करने को रेडी हूँ। तुम अन्दर आ जाना पर चिल्ला कर ऋतू दीदी को मत पता लगने देना की जीजाजी ने क्या हरकत की है। हम जीजाजी को समझा देंगे। मुझे ऋतू दीदी का घर नहीं तोडना है। मैं ज़िन्दगी भर जीजाजी से फिर दूर ही रहूँगी और बात भी नहीं करूंगी"

प्रशांत: "ठीक हैं"

नीरु: "मगर अभी नहीं, सुबह करेंगे। अभी मेरी सारी एनर्जी ख़त्म हो चुकी हैं"

मै और निरु अब सो गए और मैं थोड़ी देर सो नहीं पाया क्यों की मैं अभी भी निरु को समझ नहीं पाया था। हालाँकि उसकी चुदाई मैंने ही की थी पर उसने मन में तो जीजाजी से ही चुदवाया था। अगली सुबह हम दोनों जल्दी उठ गए थे। उस दिन हम दोनों को ऑफिस भी जाना था पर उसके पहले जीजाजी का टेस्ट लेना था। जीजाजी भी उठ चुके थे क्यों की उनको भी अपने घर के लिए निकलना था।

नीरु: "तुम फिर सोच लो प्रशांत। तुम्हे यह एक्सपेरिमेंट करना है। बहुत बड़ी गड़बड़ भी हो सकती है। तुमने पहले भी जो प्लान किये थे वो बिगड गए थे। कुछ बुरे सच बाहर ना ही आये तो अच्छा हैं।"

प्रशांत: "तुम क्या चाहती हो? एक बुरे इंसान का सच हमें पता न चले?"

नीरु: "पता चले पर कोई बतंगड ना बने, कोई बवाल खड़ा न हो बस"

प्रशांत: "तो फिर क्या करे की सच भी पता लगे और बवाल भी न हो"

नीरु: "तुम अभी वाक के लिए बाहर चले जाओ। मैं यहाँ पर कल की तरह पोजीशन ले लुंगी। जीजाजी को अन्दर आने दो। देखति हूँ की वो क्या करते है। मुझे गुस्सा आया तो मैं उनको अच्छे से हैंडल कर लुंगी। तुम अनजान बने रहना की उन्होंने क्या किया हैं और दीदी को भी नहीं बतायेंगे। यह बात मेरे और जीजाजी के बीच ही रहेगी। तुम्हे यह सब पता हैं, इस बात का जीजाजी को पता नहीं चलेगा"

प्रशांत: "कल रात तो तुम रोक नहीं पायी, अभी कैसे रोकोगी?"

नीरु: "अब मैं तैयार हूँ, मैं कर लुंगी। तुम रूम में मत आना। मेरे साथ गलत होगा तो मैं ही सम्भालूंगी"

प्रशांत: "मैं तुम्हरे फ़ोन पर वीडियो चालू करके जा रहा हूँ, मैं बाहर से अपने फ़ोन पर देखते रहुंगा। जरुरत हुयी तो मैं अन्दर आ जाऊँगा"

नीरु: "ठीक हैं, तुम वीडियो पर देख लेना। पर जीजाजी को हैंडल मैं ही करुँगी। मैं कमजोर नहीं हूँ"

और प्लान के मुताबिक मैंने निरु को कल की तरह अन्दर के कपड़ो में डॉगी स्टाइल में बेड पर बैठा दिया। निरु का फ़ोन मैंने अपने बेड के हेड रेस्ट पर खड़ा कर दिया था ताकी वीडियो शूटिंग होती रहे। जीजजी और दीदी घर जाने के लिए रेडी हो रहे थे। मैं उनको बोलकर बाहर चला गया की जीजाजी को निरु ने बुलाया हैं और मैं आधे घन्टे के लिए वाक करने जा रहा हूँ।

बाहर गार्डन में आकर मैंने अपने फ़ोन पर एप्प चालु कर वीडियो देखना शुरू किया। निरु बिस्तर पर डॉगी स्टाइल में बैठि थी। आज के दिन जीजाजी की सच्चाई बाहर आने वाली थी। मै इन्तेजार कर रहा था की कब जीजाजी रूम में आए। निरु भी परेशानी की मुद्रा में थी की अब क्या होने वाला था। तभी एक धडाम की आवाज आयी। उस आवाज से निरु पूरा हील गयी और फिर एक और हलकी धडाम की आवाज आई और मेरे फ़ोन की स्क्रीन पर अँधेरा छा गया। आवाज आनी भी बंद हो गायी। मैं अपने फ़ोन को थप्पड़ मारने लगा जैसे खराबी मेरे फ़ोन में ही हो।
 
मैने २-३ मिनट इन्तेजार किया की वो वीडियो फिर चालू होगा पर वो नहीं हुआ। मेरी दिल की धड़कने बढ़ने लगी। कही निरु मुसीबत में तो नहीं है। हालाँकि वीडियो में अब तक जीजाजी आते दीखे नहीं थे। मैने डरते डरते निरु को फ़ोन लगया, हालाँकि यह गलत टाइम हो सकता था। मगर निरु का फ़ोन लग ही नहीं रहा था। मुझे और टेंशन होने लगी।

मैने फिर अपने घर की तरफ बढ़ चला। मुझे नहीं पता रूम में जीजाजी आये होंगे या नहीं, उन्होंने कुछ किया भी होगा या नहीं। लिफ़्ट भी उस दिन कुछ ज्यादा ही देरी से आयी। ५ मिनट बाद मैं अपने घर के दरवाजे के बाहर था।

चाबि तो मैं लेकर ही गया था तो मैंने डरते हुए दरवाजा खोला। दरवाजे के पास ही जीजाजी-दीदी के बैग पैक पड़े थे। उनमे से एक बैग नीचे गिरा पड़ा था। पास में सोफ़े पर ऋतू दीदी डरे हुए बैठे थे। मैंने एकदम नार्मल रहने की एक्टिंग की। मैने वो बैग सीधा किया और ऋतू दीदी को पूछा की जीजाजी कहा है?

ऋतू दीदी की आँखों में आंसू आ गए। मैं उनके पास पहुंच। मुझे डर था की कहीं जीजाजी ने निरु को चोदना चालू तो नहीं कर दिया और ऋतू दीदी ने देख लिया हो। मैने ऋतू दीदी से रोने का कारण पूछा और जीजाजी कहाँ हैं यह भी पुछा। ऋतू दीदी ने जो कहा उस से मेरे होश जरूर उड़ गए। ऋतू दीदी ने जीजाजी को यह बता दिया था की उस दिन मेरे और ऋतू दीदी के बीच चुदाई हुयी थी। मैने अपना माथा पीट लिया। इस तरह के सीक्रेट कौन सी औरत अपने पति को बताती हैं?

फिर उन्होंने सुबकते हुए बताया की जीजाजी मेरे बेडरूम में निरु से बात करने गए हैं। मेरे तो हाथ पैर कॉंम्प उठे। एक तरफ यह डर था की जीजाजी अब मेरी पोल निरु के सामने खोल डेंग। निरु तो मुझे तलाक देकर अलग हो जाएगी। इतनी खूबसूरत बीवी मुझे मिली हैं, इतनी ख़ुशी से रह रहे थे तो एक गलती अब भारी पड़ने वाली थी। दूसरी तरफ यह डर भी था की निरु के फ़ोन को क्या हुआ होगा और वो आवाज़े क्या थी।

जीजाजी और निरु कहीं मेरी और ऋतू दीदी की चुदाई का बदला लेने के लिए आपस में ही चुदाई न कर ले। कहाँ तो मैं जीजाजी के करैक्टर पर शक़ कर के निरु को बहला रहा था और अब मेरा ही करैक्टर खुल कर निरु के सामने आने वाला था। मै घर पर भाग्ता हुआ आया था की मैं जीजाजी को निरु के साथ गलत हरकत करते हुए पकडूँगा पर अब तो मेरी ही हरकत पकड़ी गयी थी और मेरी हिम्मत नहीं थी की उस वक़्त मैं अपना बेडरूम खोल कर उन दोनों का सामना भी कर पाऊं।

मै वही नजरे झुकाये बैठा रहा। हाथ पैर अभी भी कॉंम्प रहे थे और मन में अलग अलग तरह के बुरे विचार आ रहे थे। ऋतू दीदी के सुबकने से मेरे बेडरूम से आती आवाजें भी सुनाई नहीं दे रही थी। मेरे मन में कल रात की निरु की आवाजें गूँज रही थी

"जीजाजी ओह न... जीजाजी धीरे... जीजाजी दर्द हो रहा है... वगैरह"

ईसी तरह चिन्ता में ५ मिनिट्स, फिर १० मिनिट्स हो चुके थे। ना तो बेडरूम का दरवाजा खुला और ना ही अन्दर से कोई आवाज आई और न ही मेरी कुछ करने की हिम्मत थी। मै खुद सोचने लगा की जब अन्दर से निरु और जीजाजी बाहर आयेंगे और मुझसे सवाल पुछेंगे तो मैं क्या जवाब दूंगा? क्या मैं सारा ईल्जाम ऋतू दीदी पर डाल दू? मगर मैं भी तो भागीदार था।

मै ऋतू दीदी से ही पुछ लीया की क्या जीजाजी गुस्से में थे। ऋतू दीदी ने एक बार फिर रोता मुँह बना कर अपने आंसू पोछे और सुबकने लगी। मेरी तो उनके कंधे पर हाथ रख दिलासा देने की भी हिम्मत नहीं हुयी। मैं अब अपने जवाब तैयार करने लगा की मैं क्या बोलुंगा। या फिर मैं खुद ही जीजाजी पर चढ़ जाऊँगा की वो भी तो निरु का नाम लेकर ऋतू दीदी को चोद रहे थे।

तभी बेडरूम का दरवाजा खुला और जीजाजी बाहर आए। मैं अपनी जगह खड़ा हो गया की अब कुछ सुनने को मिलेंगा। जीजा जी ने बोला "ऋतू चलो" और ऋतू दीदी उठ कर बैग्स के पास आए। वो दोनों दरवाजे के बाहर चले गए और मैंने दरवाजे तक जाकर देखा वो लिफ्ट में थे। मैंने दरवाजा बंद किया और अब मुझे निरु का सामना करना था।
 
मै डरते हुए बेडरूम के अन्दर पहुंचा। निरु अलमारी के सामने खड़ी थी और सिर्फ पैंटी पहने थी। उसके हाथ में ब्रा थी। यह ब्रा और पैंटी कल रात वाला नहीं थी। मेरा दिल धक् से रह गया, क्या सच में मेरे और ऋतू दीदी के बारे में सुनकर निरु का दिल टूट गया होगा और उसने जीजाजी से चुदवा लिया होगा? मेरे अन्दर आते ही निरु ने मेरी तरफ देखा और अपने आँख को पोंछी। क्या वो रो रही थी? अपनी आँखें पोछते ही वो मेरी तरफ देख मुस्कुरायी तो मुझे बहुत राहत मिली की वो मुझसे नाराज नहीं थी। मै उसकी तरफ बढा और उसके नजदीक पहुंचा तब तक उसने ब्रा पहन लिया था। मैंने अब थोड़ा डरते हुए निरु से बात की।

प्रशांत: "निरु तुम ठीक हो!"

नीरु: "नहीं, जीजाजी और दीदी जा रहे हैं तो थोड़ा इमोशनल हो गयी।"

प्रशांत: "जीजाजी ने कुछ कहा तुमसे। और वो फ़ोन पर वीडियो बंद हो गया। जीजा ने कुछ किया..."

नीरु: "बाहर जोर से कुछ गिरने की आवाज आई और डर के मारे हिलने से वो मेरा फ़ोन बेड से नीचे गिर गया और बंद हो गया। मैं बहुत डर गयी और अपना गाउन पहन लिया। सोर्री, मैं वो एक्सपेरिमेंट नहीं कर पायी, मुझे बहुत डर लग रहा था"

प्रशांत: "तुम रो क्यों रही थी, जीजा जी कुछ बोल रहे थे?"

नीरु: "जीजाजी बहुत इमोशनल लग रहे थे तो मैं भी उनको देख इमोशनल हो गयी। इतना इमोशनल तो वो मेरी शादी के टाइम पर विदाई में हुए थे। फिर कुछ अज़ीब सी बातें कर रहे थे, की मैं खुश हु या नहीं, हमारी शादीशुदा लाइफ अच्छे से चल रही या नहीं पुछ रहे थे। तुम्हारा ध्यान रखने को कह रहे थे। और बहुत सी बातें की।"

नीरु इस बीच तैयार भी होती जा रही थी। मैं समझ नहीं पा रहा था की जीजाजी ने सच में मेरे और ऋतू दीदी के रीलेशन के बारे में निरु को नहीं बताया था।

प्रशांत: "तुम उनको बाई बाई बोलने बाहर क्यों नहीं आयी?"

नीरु: "वो चले गए? मुझे ऋतू दीदी को बाई भी बोलना था। मैंने सोचा पहले मैं ऑफिस के लिए तैयार हो जाती हूँ। मेरा फ़ोन तो ख़राब हैं, तुम अपना फ़ोन दो मैं अभी फ़ोन करती हूँ दीदी को"

(अगर मेरे फ़ोन से ऋतू दीदी को फ़ोन जाएगा और जीजाजी को पता चलेगा तो और बवाल होगा तो मुझे निरु को रोकना पडा।)

प्रशांत: "अब तक तो वो निकल गए होंगे। तुम बाद में ऑफिस से फ़ोन कर लेना ऋतू दीदी को"

मैने नोट किया की निरु के कल रात के ब्रा और पैंटी वहीं बिस्तर के पास पड़े थे। मैंने वो पैंटी उठा ली और ऊँगली से छु कर चेक किया तो वो थोड़ी गीली थी। मेरे शक़ की सुई फिर घूमने लगी। निरु की चूत गीली हैं मतलब पक्का उसने जीजाजी से चुदवाया होगा।

प्रशांत: "यह तुम्हारी पैंटी गीली कैसे!"

नीरु ने मेरे हाथ से पैंटी खींच ली और अपना नीचे पड़ा ब्रा भी उठा लिया और बाथरूम में ले जाते हुए मुझे जवाब दिया।

नीरु: "बेशरम कही के, तुम्हे बड़ा चेक करने हैं मेरे अन्दर के कपडे। अभी थोड़ी देर पहले ही बाथरूम करके आई थी , थोड़ा लग गया होगा। तुम मुझ पर शक़ कर रहे हो?"

प्रशांत: "नहीं, कोई कुछ भी कहे, हम एक दूसरे पर भरोसा बनाये रखेंगे"
 
जीजाजी ने निरु को मेरा सच नहीं बताया था और मुझे भी जीजाजी और निरु का सच नहीं पता चला था।

मगर मैं अब भविष्य में जीजाजी का सामना करने की हालत में नहीं था। कुछ वीक्स बाद पता चला की निरु प्रेग्नेंट हो गयी थी। मेरे तो होश ही उड़ गए और सारा शक़ जीजाजी पर था। मैंने निरु को एबॉर्शन के लिए बोला तो उसने मन बोल दिया और उलटा मुझ पर ही गुस्सा करने लगी की मैंने जो उसको दो बार बिना प्रोटेक्शन के चोदा था उसी गलती की वजह से वो प्रेग्नेंट हुयी है। उसने मेरे और अपने घर वालों को भी बता दिया और मुझे डाट पड़ी की मैंने एबॉर्शन के लिए क्यों बोला? मैंने हमारे करियर की ही बात की पर सच तो यह था की मुझे वो बच्चा जीजाजी का लग रहा था।

फिर मुझे इस तरह निराश देखकर निरु ने एक दिन मुझे बोला की हम यह बच्चा जीजाजी और ऋतू दीदी को दे देंगे, उनको वैसे ही बच्चा नहीं हो रहा हैं तो वो गोद ले लेंगे। मेरा शक़ अब और भी गहरा हो गया था। मुझे समझ नहीं आया की मैं खुश हो जाऊ की बच्चा अपने असली बाप के पास जाएगा और मुझे किसी और का पाप अपने ऊपर नहीं लेना पडेगा। या फिर मुझे दुखी होना चाहिए की इसका मतलब यह सब प्लांड था और जीजाजी ने जानबूझकर निरु को चोदकर अपने खुद का बच्चा पैदा किया था।

नीरु के घर वालें, जीजाजी और ऋतू दीदी बहुत खुश हुए पर मेरे घर वालों ने ऑब्जेक्शन कर दिया की पहला बच्चा तो हम ही रखेंगे। मगर मैं यह कैसे होने देता, मैं बीच में कूद पड़ा और ऐलान कर दिया की यह पहला बच्चा तो जीजाजी और ऋतू दीदी ही गोद लेंगे।घूमने जाने से पहले जीजाजी ने बोला था की निरु उनके बच्चे की ही माँ बनेगी । उस वक़्त मुझे वो मजाक लगा पर जीजाजी ने शायद वो सच करके दिखा दिया था। फाइनली सब सेट हो गया। निरु बहुत खुश थी। उसको तो पता ही था की यह बच्चा उसने वैसे ही जीजाजी से पैदा किया था उन्ही के लिये। निरु खुश होकर मुझे थैंक यू बोलने आई

नीरु: "मुझे बहुत अच्छा लगा की तुम यह बच्चा ऋतू दीदी को देने के लिए मान गए। इस चक्कर में हमने कितने दिनों से सेक्स नहीं किया है। मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, चलो मेरे साथ जो करना हैं कर लो। कुछ टाइम बाद प्रेगनेंसी में मैं तुम्हे चोदने नहीं दूंगी।"

प्रशांत: "कोई बात नाहि, मैं आज तुम्हे जम कर चोदूंगा की आने वाले टाइम का भी चोद दूंगा"

नीरु: "अब तो मैं वैसे ही प्रेग्नेंट हूँ तो तुम मुझे पहली बार बिना प्रोटेक्शन के पूरा चोद सकते हो। तो जितना मजा लेना हैं आज ले लो"

प्रशांत: "हां यार, बिना प्रोटेक्शन के बिना डरे हुए पूरा चोदने में कितना मजा आता हैं, क्या बताऊ!"

नीरु: "तुम्हे कैसे पता? मैंने तो तुम्हे कभी बिना प्रोटेक्शन पूरा चोदने ही नहीं दिया?"

(अब उस भोलि निरु को क्या पता की मैं उसकी बड़ी बहन को बिना प्रोटेक्शन के बिना डरे पूरा चोद चुका हूँ।)

प्रशांत: "वो उस रात को लगभग तुम्हे पूरा चोद दिया था। याद हैं जब ऋतू दीदी जीजाजी के साथ कर रही थी"

नीरु: "उस रात तो तुमको लंड मेरी चूत से बाहर निकालना पड़ा था, आज तो तुम्हे मेरी चूत में ही सारा जूस निकालने को मिलेंगा। और तुम्हे बड़ा याद हैं उस दिन ऋतू दीदी क्या कर रही थी। बहुत घूरने के मजे लिए होंगे तुमने तो!"

प्रशांत: "किसी और को चोदते हुए देखते हैं तो भी तो उतना ही मजा आता हैं न!"

नीरु: "चलो न, आज की चुदाई को स्पेशल बनाती है। तुमने उस दिन कहा था की अगले २४ घन्टे में मेरी स्पेशल चुदाई होगी और तुमने वादा निभा कर सच में मेरी स्पेशल चुदाई की थी। मैं कितना डरते डरते चुदवा रही थी, तुमने सच ही कहा था की वो चुदाई मुझे हमेशा याद रहेगी"

प्रशांत: "तो फिर क्या प्लान हैं? आज क्या स्पेशल करू?"

नीरु: "मेरे फेवरेट डॉगी स्टाइल में चोदना और तुम मेरा नाम लेकर चोदोगे। उस दिन तुम बता रहे थे की तुमने बाथरूम में जीजाजी को निरु निरु बोलते हुए चोदते सुना था। वोही अब बोलते हुए चोदना"

प्रशांत: "ठीक हैं, मगर फिर तुमको भी उस दिन की तरह जीजाजी जीजाजी बोलते हुए चुदवाना पड़ेगा"

(नीरु यह सुनकर शर्म से लाल हो गयी और मुझे एक हल्का सा हाथ पीठ पर मार दिया।)

नीरु: "हट पागल। तुम्हे क्या पता उस वक़्त मेरे दिल में क्या चल रहा था। हालत ख़राब हो गयी थी मेरी सोच सोच कर"

प्रशांत: "उस दिन तो तुम्हे चुदवाते वक़्त पता नहीं था पर आज तो पता हैं की मैं ही चोद रहा होँऊंगा, तो फिर जीजाजी का नाम लेने में क्या हैं"

नीरु: "नहीं, मैं किसी और का नाम नहीं लुंगी। तुम मेरा नाम लेकर चोदोगे बस"

प्रशांत: "तो फिर इसमें क्या स्पेशल हैं?"

नीरु: "तुम्हारे लिए स्पेशल यह हैं की तुम बिना प्रोटेक्शन पहली बार पूरा चोद सकते हो और मेरे लिए स्पेसल हैं की तुम पहली बार मेरे नाम का जाप करते हुए मुझको चोदोगे"
 
नीरु स्पेशल तैयार होने बेडरूम में गयी और मुझे कहा की मैं उसके बुलाने के बाद ही अन्दर जाऊँगा और वो कमरे की रौशनी एकदम कम रखेगी ताकी रोमांटिक माहौल रहे। कुछ मिनट्स बाद ही उसने दरवाजा थोड़ा खोल मुझे आवाज दि। मैं अब बेडरूम में पंहुचा तो देखा की अन्दर बहुत धीमी रौशनी थी।

कमरा अन्दर महक रहा था। निरु सामने वोहि साड़ी पहने खड़ी थी जो उसको जीजाजी ने दी थी और उसने यह साड़ी जीजाजी के यहाँ आने वाले दिन पहनी थी।

नीरु साड़ी में वैसे ही डबल सेक्सी लगती हैं तो मेरे लण्ड का जूस तो अन्दर उबाल मारने लगा। मैं सीधा निरु की तरफ बढ़। मैने निरु के पास जाकर उसकी नंगी कमर पर हाथ रखा और एक साँस छोड़ते हुए उसकी स्माइल और चौड़ी हो गयी। मैंने जीजाजी की ही स्टाइल में निरु की तारीफ़ की।

प्रशांत: "वाह निरु, आज तो बड़ी कमाल की लग रही हो"

नीरु: "आपके लिए ही तैयार हुयी हूँ जी..."

(नीरु शायद जीजाजी बोलने वाली थी पर बोलते बोलते ही रुक गयी थी।)

मैने निरु को घुमाया और उसको पीछे से आकर उसके पतले पेट पर हाथ रख पकड़ लिया। मेरा लण्ड अब तक कड़क हो चुका था और निरु की साड़ी को चिरता हुआ जैसे अन्दर घूसने को उतारू था।

नीरु ने अपने सर का पिछला हिस्सा मेरे कंधे पर रख दिया और मैं उसकी गर्दन और कंधे पर चुमने लगा।निरु आँख बंद किये आहें भर रही थी। मैने अब एक हाथ उसके पेट से हटा कर उसके ब्लाउज पर रख दिया और मैं उसके मम्मो को महसूस कर पाया, क्यों की उसने अन्दर ब्रा नहीं पहना था।

नीरु: "जल्दी से चोद दो मुझे, मेरा जूस निकल रहा हैं और कपडे गंदे हो जायेंगे"
 
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