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Adultery ऋतू दीदी

मै निरु को बिस्तर के पास ले आया और वो डॉगी स्टाइल में बिस्तर पर चढ़ कर बैठ गयी। मैं भी अब उसके पिछवाड़े पर आकर बैठ गया और उसकी साड़ी को पेटिकट सहित उसके मुड़े हुए घुटनों के ऊपर ले आया ताकी ऊपर उठने में आसानी हो। मै निरु की साड़ी का पल्लु कंधे से निकाल कर कमर तक नीचे उतार लाया।

उसकी पीठ लगभग पूरी नंगी मेरे सामने थी और उसका पतला फिगर मैं देख कर चोदने को लालायित था। मैने अब उसकी साड़ी और पेटिकट को जाँघो के ऊपर उठाया और गांड से हटा दिया। मैंने देखा की उसने पैंटी भी नहीं पहनी थी और उसकी गोरी गोल गांड मुझे चोदने को बुला रही थी। मैने अपनी उंगलिया उसकी चूत और गांड पर फेरानी शुरू की और वो तडपने लगी और आहें भरने लगी। थोड़ी बहुत ऊँगली मैंने उसकी चूत के छेद में भी उतार दी और रगडने लगा।

सच में उसकी चूत अच्छे से गीली हो चुकी थी। कुछ देर ऊँगली करने से ही उसकी तेज साँसें चलने लगी और पूरा बदन हिलने लगा। मैने अब अपने कपडे उतारे और चोदने की पोजीशन ली। मेरा लण्ड निरु की चूत से छूटे ही उसकी चूत से निकले पानी से गीला हो गया। मैंने उसको तडपाने के लिए ऐसे ही अपने लण्ड से उसकी चूत के बाहरि भाग को रगडा।

नीरु: "अंदर डाल कर जल्दी से चोदना शुरू करो, नहीं तो मैं ऐसे ही झाड़ जाउँगी। मैं एकदम भरी बैठि हूँ"

मैने अब "ओह्ह निरुउउउ" बोलते हुए अपने लण्ड को निरु की चूत में उतारा और निरु एक तेज आह के साथ ही काम्पने लगी। मैंने अब धीरे धीरे उसको अन्दर बाहर धक्के मार कर चोदना शुरू किया। चुदाई शुरू होते ही मैं बराबर "ओह्ह निरू क्या चूत हैं तुम्हारि, मजा आ गया। क्या फिगर हैं तुम्हारा निरु, तुम्हे चोद दु क्या मेरी प्यारी निरु"

नीरु मजे लेते हुए लगातार सिसकिया मार रही थी और मैं उसके नाम को लेकर ठीक वैसे ही कर रहा था जैसा उस दिन मैंने जिजाजजी को बाथरूम में निरु का नाम लेकर ऋतू दीदी को चोदते हुए सुना था। बिना डर के पहली बार, बिना प्रोटेक्शन निरु को चोदते हुए मुझे मजा आ रहा था और उसकी चूत में बने पानी से लगातार छप छप की आवाजें आ रही थी जो की मेरा और उसका नशा बढा रही थी।

नीरु: "आह प्रशांत अब बहुत मजा आ रहा हैं, अब रुकना मत और चोदते रहना.. आह्ह्ह्हुउउउ आयहहा..."

मुझे लग गया की अब निरु उस फेज में पहुच चुकी हैं जहाँ वो गहरे नशे में चली जाती है। मैंने अब उसकी परीक्षा लेनी शुरू की।

प्रशांत: "निरु मैं तुम्हारा नाम लेकर चोद रहा हूँ, तुम भी जीजाजी का नाम लेकर चुदवाओ, जैसे उस दिन चुदवा रही थी"

नीरु ने "ना" बोला और चुदवाती रही। मैंने अब अपने चोदने की स्पीड एक दम धीमी कर दि। निरु अब चिढ गयी और मुझे जोर से चोदने को बोलने लगी। पर मैंने जिद रख दी की उसको भी जीजाजी बोलना पडेगा।

वो ऐसे ही आँख बंद किये नशिली आवाज में तड़प रही थी और मेरे हलके धक्के उसको और ज्यादा तरसा रहे थे। फिर अचानक उसके मुँह से वो निकला जिसका मुझे वेट था।

नीरु: "जीजाजी जोर से चोदो"

मैने अब फिर से धक्के मारने की स्पीड बढ़ाई और उसको पहले की तरह चोदना जारी रखा।

प्रशांत: "निरु तुम्हे ऐसे चोद दू?"

नीरु: "हॉ, जीजाजी चोद दो मुझे ऐसे... एआईए.. ओह्ह्ह जीजाजी क्या चोदते हो तुम... ऐसे ही जोर से चोद दो"

प्रशांत: "ओह मेरी प्यारी निरु, अपने जीजा से चुदवाओगी न तुम"

नीरु: "हां जीजाजी चोद दो"

प्रशांत: "निरु मैं तुम्हारा ब्लाउज खोल कर तुम्हारे मम्मे नंगे कर दू"

नीरु: "खोल दो जीजाजी"

मैने निरु के ब्लाउज की गाँठ पीछे से खोल दी और बाकी का ब्लाउज उसने खुद ही पूरा अपने हाथों से निकाल कर दूर कर दिया। मै पीछे से चोदते हुये, उसके मम्मे लटकते हुए और हिलते हुए देख सकता था।

प्रशांत: "निरु, मेरी साली, तुम्हारे मम्मे तो बहुत जबरदस्त हैं "

नीरु: "आयी... जीजा जी जोर से चोदो अपनी साली को... मेरे बाकी के कपडे भी पूरे खोल कर चोदो.. चोद दो अपनी साली को जीजाजी"

नीरु ने अपनी साड़ी पेट से अपने पेटिकट से बाहर निकाल कर अपने पेटिकट की डोरी खोल दि। साड़ी अलग कर उसने अपना पेटिकट ऊपर खिसका कर अपने सर से निकाला और पूरी नंगी हो गयी।
 
प्रशांत: "वाह निरु, पूरी नंगी तुम बहुत सेक्सी लग रही हो, तुम्हारे जीजाजी अब तुम्हे पूरा चोदेगे, तुम रेडी हो"

नीरु: "अपनी पूरी नंगी साली को चोद दो जीजाजी.. ओह जीजाजी... मेरा...होने वाला हैं... जीजाजी... जोर से मारो"

मैने अब निरु को झटके मारने शुरू किये, मेरा खुद का जूस अब मेरी लण्ड की नलि में भर चुका था और पिचकारी छुट्ने के करीब थी। पर मैं कोशिश कर रहा था की पहले निरु झड़ जाए।

प्रशांत: "ओह्ह निरु, क्या सेक्सी फिगर हैं, तुम्हारे जीजा तुमको पूरा चोद देंगे, ओह्ह्ह निरु तुम्हे चोदने में मुझे क्या मजा आ रहा हैं"

नीरु :"अह्ह्ह जीजाजी... मुझे भी मजा आ रहा हैं... मैं आने वाली होऊँ...अह्ह्ह जीजाजी...ओह्ह्ह जीजाजी चोदो आह आ आ आह आयी माँ...आहह जीजाजी... हो गया.. मेरा"

मैने अब अगले १५-२० जोर के झटके मारे और पहली बार अपना सारा जूस निरु की चूत में खाली कर दिया। निरु वही तकिये पर सर टिकाये वैसे ही डॉगी स्टाइल में बैठि रही। मैने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसके साइड में गया। निरु तेज तेज साँसें ले रही थी। १५- २० सेकंड के बाद वो अपनी साँसें समेटते हुए उठी और मेरी छाती पर बंद मुठियो से मारने लगी।

नीरु: "जब मेरा होने वाला था तभी मुझको जीजाजी का नाम लेने को बोलकर फसाया तुमने, ऐसे तुमको ज्यादा मजा आया फिर?"

प्रशांत: "मैंने मजबूर थोड़े ही किया था, तुम ना बोल सकती थी"

नीरु: "मैं तब कितनी देर से तड़प रही थी, तुमने ही बदमाशी की हैं जानबूझ कर। ऐसे वक़्त में तुम अगर मेरे दुश्मन का नाम लेने को बोलते तो भी ले लेति, फिर जीजाजी क्या चीज है। वैसे भी नाम कुछ भी लो पर चोद तो तुमहि रहे थे न!"

प्रशांत: "पर चुदते हुए तो तुमने जीजाजी को ही याद किया। इसकी सजा तुम्हे मिलेगी"

नीरु: "ठीक हैं, कल मैं तुम्हे तुम्हारी फेवरेट काऊबॉय पोजीशन में चुदुंगी। तुम भी चाहे जिसका नाम ले लेना। उस दिन तुम ऋतू दीदी को चोदते हुए देख बड़ा एक्ससिटेड हो रहे थे, तुम भी ऋतू दीदी का नाम ले लेना"

अगले दिन मैं नीचे लेटा और निरु मेरे ऊपर आकर मुझे चोदने लगी। मेरी तो ऋतू दीदी का नाम लेने की इच्छा नहीं हो रही थी क्यों की जीजाजी को तो सच पता ही था और कभी न कभी निरु को पता चल सकता था। मागर निरु ने ही मुझको पूछा की मैं ऋतू दीदी का नाम क्यों नहीं ले रह। तो मैंने एक दो बार ऋतू दीदी का नाम ले भी लिया। चुदते हुए निरु एक बार फिर नशे में चली गयी थी। मैने निरु को बोला की मैं ऋतू नाम ले रहा हूँ तो वो भी नीरज नाम ले ले। वो मान गयी। मैं "ऋतू मुझे चोद दो" बोल रहा था तो निरु "नीरज मैं तुम्हे चोदूंगी" बोल रही थी। जैसे जैसे चुदाई आगे बढ़ी मैंने अपने बोल अचानक बदल दिए।

प्रशांत: "ओह निरु, अपना जीजाजी को नहीं चोदोगी"

नीरु कुछ नहीं बोली और ऊपर नीचे उछलते हुए मुझे चोदती रही बस "हां नीरज मैं तुम्हे चोदूंगी" बोली।

मैने फिर नीचे लेटे थोड़े झटके मारे और कहा की "निरु अपने जीजाजी को अच्छे से चोद दो"।

मेरे झटके खाकार निरु हल्का सा चीखी और फिर "हां जीजाजी निरु चोदेगी आपको.. ओह्ह जीजाजी मैं चोदूंगी आपको, जोर से चोदूंगी"

प्रशांत: "हां निरु, चोद दो अपने जीजाजी को"

नीरु: "हां जिअज्जी ओह मजा आ रहा हैं जीजाजी"

प्रशांत: "मुझे चोद कर मेरे बच्चे की माँ बनोगी न निरु"

नीरु: "हां जीजाजी, मुझे चोद कर अपने बच्चे की माँ बना दो, ओह्ह जीजाजी मेरे बूब्स पकड़ लो"
 


हा हा हा दोस्तो बहुत गुस्सा आ रहा है आपको कहानी के हीरो पर

अभी तक आपकी पारखी नज़रों ने जो देखा है उससे तो यही लगता है

मुझे खुशी है कि आपको कहानी पसंद आ रही है

चलिए आगे देखते हैं क्या होता है
 
नीरु बैठे बैठे उच्छल कर मुझको चोद रही थी और उसके टाइट मम्मे ऊपर नीचे उच्छल रहे थे जिनको अब मैंने पकड़ लिए और दबाने लगा। नीरु अब आँख बंद करे तड़पते हुए मुझे चोदती रही और अपने मुँह से लगातार "ओह जीजा जी चोद दो मुझे " कहते हुए मुझे चोदती रही। जब वो झड़ने लगी तब मेरे ऊपर पूरा लेट गयी और उसके नंगे मम्मे मेरे सीने से चिपक गए और वो जोर से चीखी "आह जीजाजी क्या चोदा हैं"।

कुछ सेकण्ड्स के बाद उसको अहसास हुआ की उसने क्या किया हैं और अपना मुँह छिपाए वो मेरे ऊपर से उठी और सीधा वॉशरूम में भागी। पूरे १५ मिनट्स के बाद वो वॉशरूम से बाहर आई और वो रो रही थी। मैंने उसको रोने का कारण पूछा तो मुझ पर ही भड़क गयी की मैंने ही उसको करप्ट कर दिया और जीजाजी का नाम लेकर चोदने को मजबूर किया था। मैने उसको शांत कर लाइटली लेने को बोला। मगर मैं खुद समझ नहीं पा रहा था की मैं इसका क्या मतलब निकलूँ। मैंने उसको करप्ट किया था या वो खुद ही रेडी थी।

ये ९ महिने मेरे लिए बहुत मुश्किल से गुजरे। रह रह कर जीजाजी और निरु के चुदते हुयी तसवीरे ही घूम रही थी। जब बच्चा पैदा हुआ तो मुझे उस बच्चे की शकल जीजाजी जैसी लग रही थी। नीरु की प्रेगनेंसी से लेकर बच्चा पैदा होने तक मैंने निरु को कई बार बोला हैं की कहीं यह बच्चा जीजाजी का तो नहीं और निरु हमेशा बात को मजाक में उडा देती। उसको लगता की मैं मजाक कर रहा हूँ, पर मैं उसको सीरियसली पुछ रहा होता था। कभी कभी तो कोफ़्त कहकर निरु बोल ही देती की

"हॉ, यह बच्चा जीजाजी का ही है। क्या करना हैं?"

मै सिर्फ मुँह फाड़े उसको देखते ही रहता और वो मेरे गालो को खींच कर मुझे शांत कर देती। हालाँकि निरु का उस बच्चे से दिल लग चुका हैं पर बच्चा जब माँ का दूध पीना छोड़ देगा तब वो बच्चा ऋतू दीदी को सौंप दिया जाएगा। मेरे मन में शक़ का कीड़ा आज भी कुलबुला रहा है। मैंने निरु को बोला हैं की मैं वो एक्सपेरिमेंट आज भी करना चाहता हूँ ताकी जीजाजी का सच बाहर आए, पर निरु हमेशा बात को मजाक में उडा लेती है। मैने अपनी उम्मीदें नहीं खोयी है। मैं कोसिश करता रहूँगा की मैं यह सच पता लगा कर रहु और निरु को फिर मना लु की वो अपने जीजाजी का टेस्ट ले।

कहानी लिखी जाने तक बच्चा जीजाजी और ऋतू दीदी को सौंप दिया गया। बच्चा मिलने से जीजाजी बहुत खुश थे और जीजाजी जब प्रशांत से मिले तो उसको माफ़ कर दिया, क्यों की ऋतू दीदी ने अपनी गलती मान कर माफ़ी मांग ली थी। जीजाजी ने प्रशांत को अकेले में यह भी बताया की बच्चा ना होने की वजह से ऋतू दीदी को हाइपर सेक्स की बीमारी हो गयी थी। वो एक दिन भी बिना सेक्स के नहीं रह सकती है। अब शायद बच्चा मिलने से वो बीमारी ठीक हो जाए। शायद इसी हाइपर सेक्स की बीमारी के कारण ऋतू दीदी ट्रैन में अपना क्लीवेज दिखा रही थी और जीजाजी को वॉशरूम में और रात को हमारे सामने छोड़ रही थी। मगर वॉशरूम में निरु का नाम लेकर छोड़ने का रहस्य आज भी बना हुआ है।

एन्ड नोट: प्रशांत अब खुद एक बार फिर निरु-जीजाजी-ऋतुदीदी के साथ घूमने का प्लान के बारे में सोच रहा हैं, जहा वो अपना एक्सपेरिमेंट फिर से करना चाहता है। मेरे हिसाब से उसे शक़ करना बंद कर देना चाहिए और निरु के साथ आराम से रहना चहिये। जीजाजी ने प्रशांत पर एक अहसान ही किया हैं की निरु को यह नहीं बताया की प्रशांत ने निरु की दीदी के साथ क्या गलत काम किया हैं।

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end of part-1

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part -2 start

आपणे इस कहानी का पिछला हिस्सा पढ़ा होगा। अब उस कहानी का दूसरा हिस्सा पेश हैं जहा शायद पिछली कहानी में छूटे हुए आपके सवालो के जवाब मिल जाए। कहानी के पिछली हिस्से को जलदी से याद करवा देता हूँ। प्रशांत को शक़ था की उसकी वाइफ निरु का उसके जीजाजी के साथ नाजायज रिश्ता हैं और जो बच्चा निरु ने पैदा किया वो जीजाजी से हुआ है। वो बच्चा जीजाजी ने अडॉप्ट कर भी लिया था क्यों की उनकी बीवी ऋतू बच्चा पैदा नहीं कर पा रही थी। प्रशांत का शक़ अभी भी बना हुआ था। आगे की कहानी प्रशांत की ज़ुबानी आगे बढ़ाते हैं...

रात को सोने से पहले मैं ड्राइंगरूम में बैठे अकेले टीवी देख रहा था। निरु बेडरूम में सोने की तयारी कर रही थी। मैंने टीवी बंद किया और बेडरूम की तरफ बढ़ा। अन्दर से निरु के बुदबुदाने की आवाज आ रही थी।

वो दबी आवाज में किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी। मेरे कान खड़े हो गए, कहीं वो अपने नीरज जीजा से तो बात नहीं कर रही? वो फ़ोन पर फुसफुसाते हुए बात कर रही थी और मुझे दरवाजे पर खड़े होकर साफ़ कुछ सुनायी नहीं दे रहा था। इसलिए मैं चुपके से कमरे के अन्दर दाखिल हुआ।

नीरु मेरी तरफ पीठ कर बात कर रही थी और उसके थोड़ा पास में जाने पर मुझे उसके मुँह से धीरे से

"आई लव यू"

बोलने की आवाज आयी। मेरी आहट सुनकर निरु एकदम पलटी और चौंक गयी। नीरु ने फ़ोन पर

"बाद में कॉल करती हूँ"

बोलकर फ़ोन काटा और मुझसे बात करने लगी।

नीरु: "एकदम से कैसे आ गए? मुझे तो दर्रा ही दिया"

प्रशांत: "तुम क्या कोई गलत काम रही थी क्या?"

नीरु: "मैं क्यों भला कोई गलत काम करुँगी?"

प्रशांत: "किस से बात कर रही थी?"

नीरु: "कोई नाहि, मेरी एक सहेली थी"

प्रशांत: "कौन सी सहेली थी?"

नीरु: "तुम इतना क्यों पुछ रहे हो?"

प्रशांत: "इतना फुसफुसाते हुए धीरे बात कर रही थी, इसलिए पुछ रहा हूँ की कौन था और क्या बात थी"

नीरु: "मेरी सहेली पायल के साथ उसकी कोई पर्सनल बात कर रही थी"

(मै मन में सोचने लगा की कौन लड़की अपनी सहेली को " ई लव यू" बोलति है। पर मैंने निरु को अभी यह नहीं बताया की मैंने उसका लास्ट सेंटेंस सुन लिया था।)

मै चाहता था की मैं खुद उसका फ़ोन चेक करू की उसने किसको फ़ोन किया था।

नीरु: "कहाँ खो गए? सोना नहीं हैं क्या? कहीं मुझे चोदने का प्लान तो नहीं हैं तुम्हारा आज?"

प्रशांत: "बूब्स तो चुसने ही नहीं देति, चुदाई का पूरा मजा भी नहीं आता आजकल"

नीरु: "एक मिनट, यह बताओ की चोदने और बूब्स चुसने का क्या रिलेशन हैं? चुदाई का मजा अलग होता हैं"

प्रशांत: "जब से बच्चा हुआ हैं, तब से तुमने मुझे अभी तक बूब्स नहीं चुसने दिया है। जैसे खाने के बाद मीठा खाते हैं वैसे ही चुदाई के पहले बूब्स चुसने में मजा आता हैं"

नीरु: "जब तक मेरे बूब्स का दूध पूरा सुख नहीं जाता मैं तुम्हे नहीं चुसने दूंग। मुझे अच्छा नहीं लगेगा, मेरे बच्चे के अलावा कोई और दूध चूसेगा तो"
 
प्रशांत: "मगर बच्चा यहाँ हैं कहाँ? वो तो ऋतू दीदी और नीरज जीजाजी को गोद दे दिया है। अभी यहाँ बचा हुआ हूँ सिर्फ मैं, मुझे ही चुसने दो। चलो अपना टीशर्ट और ब्रा निकलो। वैसे भी तुम्हारे बूब्स अब और भारी हो गए हैं, मैं तड़प रहा हूँ उनको देखने, दबाने और चुसने के लिए"

नीरु: "दूध तो मेरा बच्चा ही पीयेंगा।"

प्रशांत: "तुम्हारा बच्चा तो वह ऋतू दीदी के मोठे मम्मे चुस रहा होगा"

(नीरु ने मुट्ठि बना कर मुझे २-३ मुक्के मार दिए जो मुझे काफी जोर के लगे थे।)

नीरु: "शर्म नहीं आति, मेरी दीदी के लिए ऐसे गंदे शब्द बोल रहे हो!"

प्रशांत: "शर्म की क्या बात हैं? यह तो नार्मल हैं, एक बच्चा तो अपनी माँ के मम्मे ही चुसगा। बच्चे को थोड़े ही पता हैं की उसकी असली माँ ऋतू नहीं बल्कि निरु है। उसको तो जो मम्मे सामने नंगे दीखेंगे वो उनको चुस लेगा।"

नीरु: "तुम्हे भी पता हैं की ऋतू दीदी के मम्मो में दूध नहीं हैं, तो वो अपना दूध कैसे पीला सकती हैं! मजाक की आड़ में अश्लील बातें मत करो मेरी दीदी के बारे में"

प्रशांत: "यह तो और भी अच्छा हैं की ऋतू दीदी के बूब्स में दूध नहीं हैं, जीजाजी तो चुसने के मजे ले ही पाएँगे। यहाँ तड़प तो मैं रहा हूँ मम्मे चुसने के लिए"

नीरु: "तो तुम भी चले जाओ वहाँ, बेशर्म कही के!"

प्रशांत: "मैं वह गया तो फिर जीजाजी यहाँ आ जायेंगे तुम्हारे मम्मो को चुसने के लिए"

नीरु: "तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है। पहले भी तुमने मेरे मुँह से जीजाजी का नाम बुलवाते हुए मुझे अपने से चुदने को मजबूर किया और अभी भी ऐसी गन्दी बात कर रहे हो!"

प्रशांत: "तो फिर मुझे मम्मे चुसने दो"

नीरु: "बिलकुल नहीं"

प्रशांत: "अपने जीजाजी की तो कोई बात नहीं टालती तुम, वो बोलते तो उनको तो चुसने देती न?"

नीरु ने वही पड़ा तकिया उठाया और मुझे मारने लगी। मैंने भी उसको पकड़ कर बिस्तर पर गिरा दिया। मैंने उसकी नाइटी को नीचे से ऊपर उठाया और वो हँसते हुए चिल्लने लगी। मैने उसकी नाइटी को कमर से ऊपर तक उठाया और पेट नँगा कर उसकी पैंटी निकाल चूत भी नंगी कर दि। उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसकी पूरी नाइटी सर से बाहर निकलने के लिए थोड़ा ऊपर उठाया पर उसने रोक दिया। वो अपने बूब्स नंगे नहीं करना चाहती थी। मैंने अपने कपडे खोले और नँगा हो गया। फिर से उसकी नाइटी निकालने लगा पर फिर से उसने मुझे रोक दिया।

नीरु: "नहीं, पिछले कुछ दिनों से मम्मो में बहुत दर्द हो रहा है। इसलिए घर पर ब्रा भी नहीं पहन रही हूँ। नाइटी खोलोगे तो मेरे बूब्स नंगे होकर बाहर आ जायेंगे"

प्रशांत: "वो ही तो मैं चाहता हूँ। एक बार दिखाओ तो सही कितने बड़े हो गए हैं"

नीरु: "एक बार तुम मेरे मम्मे नंगे देख लओगे तो फिर बिना दबाये छोडोगे नहीं, इसलिए मैं यह रिस्क नहीं लुंगी"

प्रशांत: "प्लीज न नीरु, दिखाओ अपने मम्मे"

मगर निरु ने अपनी नाइटी नहीं निकलने दि। मैं खुद ही उस पर चढ़ गया। उसने मुझे बूब्स पर हाथ लगा कर मसलने तो नहीं दिया पर मैंने अपना सीना उसकी छाती पर रख कर जब उसको चोदना शुरू किया तो जरूर ऊपर नीचे रगड़ से मेरे सीने ने निरु के मम्मो को दबा कर रगड़ दिया था। बिना कंडोम पहने तो वो वैसे भी मुझे चोदने नहीं देती थी, अभी बूब्स को हाथ लगाना भी वर्जित हो गया था। खैर मैंने निरु को चोदने के ही मजे ले लिए थे।
 
मा बनने के बाद उसका शरीर भी अब और गुदगुदेदार हो गया था, जिस तरह से उसके मम्मे बढ़ गए थे। हालाँकि उसको देखने पर कोई फ़र्क़ महसूस नहीं होता, अभी भी वो वैसे ही पतली कमर वाली फिट लड़की थी। एक बार तो मन किया की उस से जीजाजी का नाम बुलवाते हुए चोदता हूँ, पर फिर अपना प्लान ड्राप कर दिया की मुझे खुद को अच्छा नहीं लगेगा अगर वो सच में जीजाजी का नाम लेते हुए चुदवाने के मजे लेगी तो।

जब मैं निरु को चोदने के बाद उस पर से उठा तो देखा की उसकी छाती से नाइटी थोड़ा गीली हो गयी है। निरु का ध्यान दिलाया तो वो हल्का सा चिखि।

नीरु: "मेरा दूध निकाल दिया तुमने! मेरी नाइटी पर दूध के दाग लग जाएंगे अब। तुम्हे दबाने से मन किया था मैंने"

यह कहते हुए वो उठ बैठि और दूसरी नाइटी निकाल कर वॉशरूम में चली गयी। थोड़ी देर बाद वो चेंज करके आयी।

नीरु: "अब से तुम मेरे ऊपर आकर नहीं चोदोगे। तुम्हारे सीने से दब कर मेरा दूध निकल जाता है। या तो बैठे बैठे चोदना या फिर मेरे फेवरेट डॉगी स्टाइल में"

प्रशांत: "तुम मेरे ऊपर बैठ कर मुझे क्यों नहीं चोद लेती?"

नीरु: "अच्छा, ताकी तुम मेरे उछलते हुए मम्मो देख पाओ, इसलिए न? नॉटी!"

मै संतुष्ट होकर लेट गया था। निरु को भी नींद आ गयी थी। मैंने फिर उसका फ़ोन उठाया यह चेक करने के लिए की वो फ़ोन पर किस से बात कर रही थी पर उसके फ़ोन पर लॉक लगा हुआ था। सूबह भी मैंने ट्राई किया की किसी तरह उसके फ़ोन को देख पाउ और उसको शक़ भी न हो की मैं क्या कर रहा हूँ।

मैंने किसी बहाने से उसका फ़ोन माँगा और उसने अनलॉक करके दे दिया। मैने कल रात के कॉल लॉग्स देखे और पाया की कल रात निरु अपने जीजाजी से ही बात कर रही थी। मेरा दिमाग भन्ना गया। मैंने कल रात सुना था की वो फ़ोन पर "आई लव यू" बोल रही थी और वो उस वक़्त जीजाजी से ही बात कर रही थी। मै सोचने लगा की अब मैं क्या करु। पिछली बार गलती की थी जो शक़ हुआ फिर भी खुल कर निरु से कुछ नहीं पूछा था। मैंने सोच लिया की मैं खुल कर उसको पूछुंगा।

प्रशांत: "निरु, कल रात तुम पायल से ही बात कर रही थी न?"

नीरु: "हॉ, क्या हुआ!"

प्रशांत: "यह देखो कॉल लोग, तुम अपने जीजा से बात कर रही थी"

यह सुनकर निरु का चेहरा फीका पड़ गया। उसने तुरन्त मेरे हाथ से उसका फ़ोन छीन लिया।

नीरु: "मैंने तुम्हे अपना फ़ोन जासूसी करने के लिए नहीं दिया था"

प्रशांत: "तुम मुझसे क्या छुपा रही हो? फ़ोन जीजाजी को किया और मुझे झूठ बोला की पायल से बात कर रही थी"

नीरु: "हां तो क्या हो गया? जरुरी तो नहीं की मैं हर चीज बताऊ की किस से क्या बात कर रही हूँ!"
 
प्रशांत: "अगर तुम फ़ोन पर किसी को "आई लव यू' बोलो तो फिर भी मुझे तुमसे पूछने का अधिकार नहीं हैं? तुम्हारा तुम्हारे जीजाजी के साथ क्या चल रहा हैं? सच सच बतओ, तुमने अपने जीजाजी से चुदवाया हैं न? और वो बच्चा तुमने पैदा किया हैं, वो जीजाजी के चोदने से ही पैदा हुआ हैं न? आज मुझे तुम खुल कर सच बतओ। तुमने कितनी बार अपने जीजाजी से चुदवाया हैं"

नीरु: "तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया हैं!"

प्रशांत: "हॉ, हो गया दिमाग खराब। तुम अपने जीजाजी को छुपकर आई लव यू बोलति हो। उनके बच्चे की माँ बन जाती हो, मैं पागल ही था जो मुर्ख बनता रहा। पर अब नहीं"

नीरु ने मुझे गुस्से से देखा और तेजी से चलते हुए बेडरूम में गयी। मैं उसके पीछे गया की अब वो क्या नाटक करती हैं जब उसकी चोरी पकड़ी गयी है। उसने अलमारी खोली और एक एनवलप निकल। मेरे पास आई और मेरे मुँह पर वो एनवलप मरा। फिर सुबकते हुए वो दनदनाते हुए बेडरूम से बाहर चली गयी।

मैने वो एन्वेलप खोला। वो किसी होटल में बुकिंग का था। वो मेरे बर्थडे की पार्टी का बुकिंग था। तभी निरु फिर से रोती हुयी अन्दर आई और रोते हुए ही मुझसे कहने लगी।

नीरु: "तुम्हारे बर्थडे के लिए जीजाजी के साथ मिलकर सरप्राइज प्लान किया था। जीजाजी के मिलने वाले का होटल था, इसलिए केक पर क्या लिखवाना हैं वो उनको बता रही थी। "आई लव यू प्रशांत' लिखवाना चाहती थी, पूरा बोलने के पहले ही तुम रूम में आ गए थे इसलिए पूरा नहीं बोल पायी थी। और तुमने मेरे करैक्टर पर इतना बड़ा ईल्जाम लगा दिया!"

प्रशांत: "मैं तो बस पुछ रहा था। तुम मुझे सब सच भी तो बता सकती थी!"

नीरु: "यह पूछने का कौनसा तरीका हैं की मैंने जीजाजी से चुदवाया हैं और वो बच्चा उन्होंने ही पैदा करके दिया हैं!"

प्रशांत: "अरे मैं तो हमेशा की तरह मजाक कर रहा था"

नीरु: "मुझे तो नहीं लगा की तुम मजाक कर रहे थे। मुझे अब तुम्हारा बर्थडे नहीं मनाना हैं, वो बुकिंग मैं कैंसिल करवा रही हूँ। तुम्हारा बर्थडे तुम अकेले ही मनाना, मैं वीकेंड पर अपने घर जा रही हूँ"

मैने निरु को समझाने की कोशिश की पर वो नहीं मानि। फ्राइडे इवनिंग में ही वो अपने मायके चली गयी।
 
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