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ऋतु ने अपनी पैंटी उतार दी और मेरे लौड़े पर अपनी चूत को रखकर बैठ गई।
मेरा लण्ड दो-तीन दिन से चूत का प्यासा था। ऋतु की चिकनी चूत में जाकर उसको मजा आने लगा। मैं ऋतु
की चूत में अपना लण्ड डालकर बैठा हुआ था। मैंने उसकी चूचियों को दबाया और कहा- "करा ना.."
ऋतु मेरे लण्ड को अपनी चूत में लेकर ऊपर-नीचे होने लगी। मैं अत को नीचे से धक्के मार कर चोदने लगा, और जिस बात के लिए मैंने ऋतु से कहा था वहीं हुआ। मरे केबिन का दरवाजा खुला और अंजू एकदम से अंदर आ
गई। अंजू ने मेरे केबिन में आते ही हम दोनों को देख लिया।
ऋतु मेरे लण्ड के ऊपर चढ़ी हुई थी। अंजू को देखकर ऋतु के होश उड़ गये। वो मेरे लण्ड के ऊपर से ऐसे उठकर भागी, जैसे मेरा लण्ड ना हो कोई लोहे की गरम रोड हो। ऋतु जैसे ही उठी तो मेरे नजर अंजू पर पड़ी। अंजू के सामने मैं नंगा बैठा था। मेरे ताजे ताजे चूत से निकले लण्ड को अज ने देखा तो कुछ देर उसकी निगाहें मेरे लौड़े को ही निहारती रही। मैं कुछ सोच ही नहीं पा रहा था। ऋतु सोफे के पीछे जाकर छुप गई थी।
फिर मैंने अपने पास पड़ी ऋतु की सलवार को उठाकर अपने लण्ड के ऊपर रख दिया।
अंजू भी अब तक खुद को संभाल चुकी थी, उसने अपनी नजरों को नीचे कर लिया, फिर बोली- "सर आई आम वेरी सारी। मुझे ऐसे अंदर नहीं आना चाहिये था। पर ऋतु का सेल बाहर इतनी देर से बज रहा था। मैं उसको देने आई थी..."
अंजू की बात तो में समझ रहा था। पर में उसकी नजरों को देखकर समझ गया था की इसके मन में भी मेरे लौड़ें को देखकर कुछ ना कुछ हुआ है।
मैंने कहा- "अंजू, तुम्हारी कोई गलती नहीं है। ये सब अचानक हो गया.."
अंजू रुकी नहीं और भागकर बाहर चली गई।
अंजू के जाने के बाद ऋतु सोफे के पीछे से बाहर आई और मुझसे कहने लगी- "अब क्या होगा। अंजू ने सब देख लिया..."
मैंने कहा- "इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। मैंने तुमसे पहले ही पूछा था?"
ऋतु बोली- "मैंने किया तो था पर पता नहीं... ओहह... माई गोड अब क्या होगा?" कहते हए ऋतु सोफे पर धम्म में बैठ गई।
मैंने कहा- अब जो हो गया सा हो गया। अब कुछ नहीं हो सकता।
अतु बोली- "अंजू अब सबको बता देगी..."
मैंने कहा- नहीं वो ऐसा नहीं करेगी। पर ये हो सकता है।
ऋतु- "कभी उसके मुँह से अगर निकल गया तो?"
.
..
मैंने ऋतु में कहा. "पहले काम पूरा करो फिर सोचते हैं."
-
-
पर
ऋतु मेरे लौड़े को फिर से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। लण्ड को फिर से खड़ा करने के बाद ऋतु ने कहा "अब कैसे करना है?"
मैंने कहा- अब तुम घोड़ी बन जाओ।
ऋतु घोड़ी बन गई। मैंने जल्दी से ऋतु की चूत में अपना लण्ड डालकर धक्के मारते हुए कहा- "ऋतु एक
आइडिया आया है मेरे दिमाग में?"
ऋतु में कहा- क्या?
मैंने कहा- अगर अंजू को भी अपने लण्ड के नीचे ले लें तब हो सकता है। इस बात की बाहर निकलने की कोई गुंजाइश ही ना रहे." फिर मैंने ऋतु को कहा- "तुम्हारी कभी अंजू से सेक्स की बात होती है?"
ऋतु ने कहा- कभी कभार हल्की-फुल्की।
मैंने कहा- जैसे की मतलब वो क्या कहती है?
ऋतु ने कहा- वो अक्सर मुझे यही कहती है की उसको अपनी लाइफ में कुछ करना है। उसके लिए वो कुछ भी कर सकती है।
मैंने कहा- ये तो मैं भी जानता है। पर इससे क्या लगता है?
ऋतु ने कहा- "मैंने उसको एक बार कहा था की अगर तुम्हें काई लाइफ में मौका मिले और उस माके के बदले तुम्हें सेक्स करवाना पड़े तो कर लोगी?"
मैंने कहा- फिर उसने क्या कहा था?
ऋतु बोली- "उसने कहा था की सोचेंगी उस टाइम पर। शायद हाँ भी कर सकती हैं..."
मैंने कहा- तुम अब जाओ, मैं कल बात करूंगा।
ऋतु के जाने के बाद मैं अपने केबिन से बाहर आ गया। अंजू भी जाने की तैयारी कर रही थी।
मेरा लण्ड दो-तीन दिन से चूत का प्यासा था। ऋतु की चिकनी चूत में जाकर उसको मजा आने लगा। मैं ऋतु
की चूत में अपना लण्ड डालकर बैठा हुआ था। मैंने उसकी चूचियों को दबाया और कहा- "करा ना.."
ऋतु मेरे लण्ड को अपनी चूत में लेकर ऊपर-नीचे होने लगी। मैं अत को नीचे से धक्के मार कर चोदने लगा, और जिस बात के लिए मैंने ऋतु से कहा था वहीं हुआ। मरे केबिन का दरवाजा खुला और अंजू एकदम से अंदर आ
गई। अंजू ने मेरे केबिन में आते ही हम दोनों को देख लिया।
ऋतु मेरे लण्ड के ऊपर चढ़ी हुई थी। अंजू को देखकर ऋतु के होश उड़ गये। वो मेरे लण्ड के ऊपर से ऐसे उठकर भागी, जैसे मेरा लण्ड ना हो कोई लोहे की गरम रोड हो। ऋतु जैसे ही उठी तो मेरे नजर अंजू पर पड़ी। अंजू के सामने मैं नंगा बैठा था। मेरे ताजे ताजे चूत से निकले लण्ड को अज ने देखा तो कुछ देर उसकी निगाहें मेरे लौड़े को ही निहारती रही। मैं कुछ सोच ही नहीं पा रहा था। ऋतु सोफे के पीछे जाकर छुप गई थी।
फिर मैंने अपने पास पड़ी ऋतु की सलवार को उठाकर अपने लण्ड के ऊपर रख दिया।
अंजू भी अब तक खुद को संभाल चुकी थी, उसने अपनी नजरों को नीचे कर लिया, फिर बोली- "सर आई आम वेरी सारी। मुझे ऐसे अंदर नहीं आना चाहिये था। पर ऋतु का सेल बाहर इतनी देर से बज रहा था। मैं उसको देने आई थी..."
अंजू की बात तो में समझ रहा था। पर में उसकी नजरों को देखकर समझ गया था की इसके मन में भी मेरे लौड़ें को देखकर कुछ ना कुछ हुआ है।
मैंने कहा- "अंजू, तुम्हारी कोई गलती नहीं है। ये सब अचानक हो गया.."
अंजू रुकी नहीं और भागकर बाहर चली गई।
अंजू के जाने के बाद ऋतु सोफे के पीछे से बाहर आई और मुझसे कहने लगी- "अब क्या होगा। अंजू ने सब देख लिया..."
मैंने कहा- "इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। मैंने तुमसे पहले ही पूछा था?"
ऋतु बोली- "मैंने किया तो था पर पता नहीं... ओहह... माई गोड अब क्या होगा?" कहते हए ऋतु सोफे पर धम्म में बैठ गई।
मैंने कहा- अब जो हो गया सा हो गया। अब कुछ नहीं हो सकता।
अतु बोली- "अंजू अब सबको बता देगी..."
मैंने कहा- नहीं वो ऐसा नहीं करेगी। पर ये हो सकता है।
ऋतु- "कभी उसके मुँह से अगर निकल गया तो?"
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मैंने ऋतु में कहा. "पहले काम पूरा करो फिर सोचते हैं."
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ऋतु मेरे लौड़े को फिर से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। लण्ड को फिर से खड़ा करने के बाद ऋतु ने कहा "अब कैसे करना है?"
मैंने कहा- अब तुम घोड़ी बन जाओ।
ऋतु घोड़ी बन गई। मैंने जल्दी से ऋतु की चूत में अपना लण्ड डालकर धक्के मारते हुए कहा- "ऋतु एक
आइडिया आया है मेरे दिमाग में?"
ऋतु में कहा- क्या?
मैंने कहा- अगर अंजू को भी अपने लण्ड के नीचे ले लें तब हो सकता है। इस बात की बाहर निकलने की कोई गुंजाइश ही ना रहे." फिर मैंने ऋतु को कहा- "तुम्हारी कभी अंजू से सेक्स की बात होती है?"
ऋतु ने कहा- कभी कभार हल्की-फुल्की।
मैंने कहा- जैसे की मतलब वो क्या कहती है?
ऋतु ने कहा- वो अक्सर मुझे यही कहती है की उसको अपनी लाइफ में कुछ करना है। उसके लिए वो कुछ भी कर सकती है।
मैंने कहा- ये तो मैं भी जानता है। पर इससे क्या लगता है?
ऋतु ने कहा- "मैंने उसको एक बार कहा था की अगर तुम्हें काई लाइफ में मौका मिले और उस माके के बदले तुम्हें सेक्स करवाना पड़े तो कर लोगी?"
मैंने कहा- फिर उसने क्या कहा था?
ऋतु बोली- "उसने कहा था की सोचेंगी उस टाइम पर। शायद हाँ भी कर सकती हैं..."
मैंने कहा- तुम अब जाओ, मैं कल बात करूंगा।
ऋतु के जाने के बाद मैं अपने केबिन से बाहर आ गया। अंजू भी जाने की तैयारी कर रही थी।