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Guest
मोना- क्योंकि तुमने मेरी मदद की , तुम्हे मेरे बारे में जानना चाहिए
मैं- वो इसलिए की इन्सान ही इन्सान के काम आता है , मुझे तो मालूम भी नहीं था की आप कौन हो , क्या हो, कहाँ की हो .
मोना- इसलिए मैं प्रभावित हुई हु, तुमसे ,
मैं मुस्कुरा दिया.
मोना- देव, कभी कोई काम हो तो मुझे कह सकते हो .
मैं- जी, शुक्रिया
मोना- कभी भी किसी भी समय तुम मुझसे मिलने आ सकते हो , बस मैं कोर्ट में न रहू उस समय
मैंने सर हिला दिया .
मैं वापिस जाने को उठा की मुझे कुछ याद आया
मैं- एक बात पुछू
मोना- हाँ
मैं- वो हवेली किसकी है वैसे
मोना- एक मुसाफिर की .
मोना की बात सुनकर मैं फिर मुस्कुरा पड़ा
मोना- क्या हुआ .
मैं- जी कुछ नहीं .
मोना से विदा लेकर मैं वापिस अपने गाँव की बस में बैठ गया . रस्ते भर मैं उस तस्वीर के बारे में सोचता रहा , किसी मुसाफिर की थी वो हवेली और एक मुसाफिर मैं भी था , क्या वो मेरी थी , एक मिनट ताऊ ने मुझे जो चाबी दी, क्या वो उस हवेली की ही थी . सोचते सोचते मेरे सर में दर्द होने लगा.
मैं सीधा अपने खेत पर गया . तो देखा की रूपा वहां पहले से मोजूद थी .
रूपा- तेरा ही इंतज़ार कर रही थी मैं
मैं- किसलिए
रूपा- किसलिए का क्या मतलब , क्या मैं तेरा इंतजार नहीं कर सकती
मैं- अरे नाराज क्यों होती है बस ऐसे ही पूछा मैंने
रूपा- आज हलवा बनाया था मैंने तो तेरे लिए लायी हु
मैं- एक मिनट मैं हाथ पाँव धो लू जरा
मैं वापिस आया तब तक रूपा ने चूल्हा जला दिया था .
रूपा- ठण्ड बहुत है चाय बस बनी ही
मैंने डिब्बा उठाया और हलवा खाने लगा. कसम से रूपा बड़ा स्वादिष्ट खाना बनाती थी .
“ले चाय ” उसने मुझे कप दिया.
मैं- तू नहीं पीयेगी
रूपा- कितनी बार बताऊ, दूध पसंद है मुझे ,
उसने अपने कप में दूध भरते हुए कहा
मैं हंस पड़ा
रूपा- तू ऐसे बेमतलब मत हंसा कर
मैंने चाय की चुस्की भरी
रूपा- ये बताने आई थी की कुछ दिन मिल नहीं पाऊँगी तुझे
मैं- क्यों भला सब राजी ख़ुशी तो है
रूपा- मैं जूनागढ़ जा रही हूँ,
मैं- क्यों
रूपा-शादी में
मैं- अपनी रिश्तेदारी है उधर
रूपा- नहीं
मैं- तो कैसे
रूपा- तू क्या करेगा ये जानकार , हर बात बतानी जरुरी तो नहीं
मैं- क्या बात है रूपा , क्या बताना नहीं चाहती तू मुझे
रूपा- क्या बताऊ तुझे , बापू के किसी जान पहचान वाले की शादी है इसलिए जा रहे है बस अब और मत पूछना
मुझे लगा की कुछ तो छुपा रही है रूपा पर मैंने बात को टाल दिया.
मैं- रूपा तू किसी हवेली के बारे में जानती है जो खो गयी .
रूपा के हाथ से कप निचे गिर गया .
मैं- वो इसलिए की इन्सान ही इन्सान के काम आता है , मुझे तो मालूम भी नहीं था की आप कौन हो , क्या हो, कहाँ की हो .
मोना- इसलिए मैं प्रभावित हुई हु, तुमसे ,
मैं मुस्कुरा दिया.
मोना- देव, कभी कोई काम हो तो मुझे कह सकते हो .
मैं- जी, शुक्रिया
मोना- कभी भी किसी भी समय तुम मुझसे मिलने आ सकते हो , बस मैं कोर्ट में न रहू उस समय
मैंने सर हिला दिया .
मैं वापिस जाने को उठा की मुझे कुछ याद आया
मैं- एक बात पुछू
मोना- हाँ
मैं- वो हवेली किसकी है वैसे
मोना- एक मुसाफिर की .
मोना की बात सुनकर मैं फिर मुस्कुरा पड़ा
मोना- क्या हुआ .
मैं- जी कुछ नहीं .
मोना से विदा लेकर मैं वापिस अपने गाँव की बस में बैठ गया . रस्ते भर मैं उस तस्वीर के बारे में सोचता रहा , किसी मुसाफिर की थी वो हवेली और एक मुसाफिर मैं भी था , क्या वो मेरी थी , एक मिनट ताऊ ने मुझे जो चाबी दी, क्या वो उस हवेली की ही थी . सोचते सोचते मेरे सर में दर्द होने लगा.
मैं सीधा अपने खेत पर गया . तो देखा की रूपा वहां पहले से मोजूद थी .
रूपा- तेरा ही इंतज़ार कर रही थी मैं
मैं- किसलिए
रूपा- किसलिए का क्या मतलब , क्या मैं तेरा इंतजार नहीं कर सकती
मैं- अरे नाराज क्यों होती है बस ऐसे ही पूछा मैंने
रूपा- आज हलवा बनाया था मैंने तो तेरे लिए लायी हु
मैं- एक मिनट मैं हाथ पाँव धो लू जरा
मैं वापिस आया तब तक रूपा ने चूल्हा जला दिया था .
रूपा- ठण्ड बहुत है चाय बस बनी ही
मैंने डिब्बा उठाया और हलवा खाने लगा. कसम से रूपा बड़ा स्वादिष्ट खाना बनाती थी .
“ले चाय ” उसने मुझे कप दिया.
मैं- तू नहीं पीयेगी
रूपा- कितनी बार बताऊ, दूध पसंद है मुझे ,
उसने अपने कप में दूध भरते हुए कहा
मैं हंस पड़ा
रूपा- तू ऐसे बेमतलब मत हंसा कर
मैंने चाय की चुस्की भरी
रूपा- ये बताने आई थी की कुछ दिन मिल नहीं पाऊँगी तुझे
मैं- क्यों भला सब राजी ख़ुशी तो है
रूपा- मैं जूनागढ़ जा रही हूँ,
मैं- क्यों
रूपा-शादी में
मैं- अपनी रिश्तेदारी है उधर
रूपा- नहीं
मैं- तो कैसे
रूपा- तू क्या करेगा ये जानकार , हर बात बतानी जरुरी तो नहीं
मैं- क्या बात है रूपा , क्या बताना नहीं चाहती तू मुझे
रूपा- क्या बताऊ तुझे , बापू के किसी जान पहचान वाले की शादी है इसलिए जा रहे है बस अब और मत पूछना
मुझे लगा की कुछ तो छुपा रही है रूपा पर मैंने बात को टाल दिया.
मैं- रूपा तू किसी हवेली के बारे में जानती है जो खो गयी .
रूपा के हाथ से कप निचे गिर गया .