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Guest
अपने लिए ऑर्थोडॉक्स वर्ड सुन दिव्या को भी थोड़ा बुरा लगता है, वैसे तो वो उसी साड़ी में केक काटने चली जाती पर कर्नल के कमेंट से वो उसे गलत साबित करना चाहती थी। राजेश दिव्या को छोड़ पहले ही बाहर चला जाता है और उसे तैयार होकर आने को कहता है। दिव्या भी एक खूबसूरत सी हॉट ड्रेस निकाल कर तैयार होने लगती है। इस दौरान राजेश बाहर कर्नल को ज्वाइन कर लेता है जो रेणुका के साथ सोफे पर बैठा जाम पी रहा था। कर्नल के हाथ में जाम था तो दूसरा से वो रेणुका के मम्मे सहला रहा था।
राजेश को देख वो रेणुका को राजेश के लिए भी एक पेग बनाने का इशारा करता है।
लाला: ये देखो मेरा शेर आया है, इसकी हालत देखते हुए लगता है कि इसने रात के लिए कोई कसर ही नहीं छोड़ी होगी।
राजेश: कहाँ अंकल आपने भी गलत समय पर बुला लिए, अभी तो शुरू ही किया था।
लाला: कोई नहीं, अभी सब कर लेते तो रात में क्या करते, वैसे मैं समझ सकता हूँ तुम्हारी परेशानी, दिव्या को देखते हुए मुझसे ही नहीं रहा जा रहा। दो बार रेणुका को चोदा है पर देखो अभी भी मेरा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा।
कर्नल अपनी पेंट की ओर इशारा करता है, उसका लंड सच में किसी नाग की तरह फन फैलाए खड़ा था।
राजेश: धीरे बोलिए ना अंकल कहीं दिव्या सुन न ले।
लाला: अरे डरो मत यहां के सभी कमरे साउंड प्रूफ हैं। चिल्लाओगे तो भी दिव्या को सुनाई नहीं देगा।
राजेश: ठीक है पर वो अचानक से आ गई तो।
लाला: इतना क्यों डरते हो अभी तो उसे कम से कम घंटा भर लगेगा आने में। अब नंगी तो आएगी नहीं ना। (हहहहा)। बैठो इतने ये जाम लो।
राजेश: नहीं अंकल, मुझे ज्यादा हो जाती है।
लाला: अरे लो, एक दो से कुछ नहीं होता।
वो इतना कह ग्लास राजेश के हाथ में पकड़ा देता है। कुछ ही देर में राजेश २-३ पेग पी चुका था, तीनों साथ बैठे गप्पे लड़ा रहे थे, रेणुका के देख राजेश का भी मन करने लगा था उन्हें दबाने का। कुछ देर बाद दिव्या रूम का दरवाजा खोल कर बाहर आती है तो उसे देख तीनों का मुँह खुला का खुला रह जाता है।
]
दिव्या एक टैंक टॉप और शोर्ट स्कर्ट में थी जिसमें उसका एक एक अंग बाहर आने को तैयार था पहनकर उनके सामने खड़ी थी। तीनों को इस हालत में देख दिव्या को भी अपनी खूबसूरती पर गर्व फील होने लगता है। उसकी स्कर्ट उसकी गांड से बस थोड़ी ही नीचे तक थी, अगर वो झुके तो उसकी पेंटी के दर्शन होने से कोई नहीं रोक सकता था।
कर्नल का ग्लास तो उसके मुंह के पास ही रुक गया था।
राजेश को देख वो रेणुका को राजेश के लिए भी एक पेग बनाने का इशारा करता है।
लाला: ये देखो मेरा शेर आया है, इसकी हालत देखते हुए लगता है कि इसने रात के लिए कोई कसर ही नहीं छोड़ी होगी।
राजेश: कहाँ अंकल आपने भी गलत समय पर बुला लिए, अभी तो शुरू ही किया था।
लाला: कोई नहीं, अभी सब कर लेते तो रात में क्या करते, वैसे मैं समझ सकता हूँ तुम्हारी परेशानी, दिव्या को देखते हुए मुझसे ही नहीं रहा जा रहा। दो बार रेणुका को चोदा है पर देखो अभी भी मेरा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा।
कर्नल अपनी पेंट की ओर इशारा करता है, उसका लंड सच में किसी नाग की तरह फन फैलाए खड़ा था।
राजेश: धीरे बोलिए ना अंकल कहीं दिव्या सुन न ले।
लाला: अरे डरो मत यहां के सभी कमरे साउंड प्रूफ हैं। चिल्लाओगे तो भी दिव्या को सुनाई नहीं देगा।
राजेश: ठीक है पर वो अचानक से आ गई तो।
लाला: इतना क्यों डरते हो अभी तो उसे कम से कम घंटा भर लगेगा आने में। अब नंगी तो आएगी नहीं ना। (हहहहा)। बैठो इतने ये जाम लो।
राजेश: नहीं अंकल, मुझे ज्यादा हो जाती है।
लाला: अरे लो, एक दो से कुछ नहीं होता।
वो इतना कह ग्लास राजेश के हाथ में पकड़ा देता है। कुछ ही देर में राजेश २-३ पेग पी चुका था, तीनों साथ बैठे गप्पे लड़ा रहे थे, रेणुका के देख राजेश का भी मन करने लगा था उन्हें दबाने का। कुछ देर बाद दिव्या रूम का दरवाजा खोल कर बाहर आती है तो उसे देख तीनों का मुँह खुला का खुला रह जाता है।
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दिव्या एक टैंक टॉप और शोर्ट स्कर्ट में थी जिसमें उसका एक एक अंग बाहर आने को तैयार था पहनकर उनके सामने खड़ी थी। तीनों को इस हालत में देख दिव्या को भी अपनी खूबसूरती पर गर्व फील होने लगता है। उसकी स्कर्ट उसकी गांड से बस थोड़ी ही नीचे तक थी, अगर वो झुके तो उसकी पेंटी के दर्शन होने से कोई नहीं रोक सकता था।
कर्नल का ग्लास तो उसके मुंह के पास ही रुक गया था।