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Adultery प्यास बुझाई नौकर से

उधर प्रीति लगातार रूबी के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी और सोच रही थी- “भाभी बाला की खूबसूरत हैं, पर भईया के लिए कितना तड़प रही हैं। इतनी खूबसूरत औरत कैसे अपने आदमी की बिना रातें काटती होगी?" उसे रूबी पे तरस अगया और उसने रूबी को अपनी बाहों में प्यार से भर लिया।

*****

*****

रूबी- क्या हुआ?

प्रीति- कुछ नहीं भाभी। आप बहुत अच्छी हो। दिल कर रहा है की आपको को किस कर लूँ।

रूबी- अच्छा जी।

प्रीति- “सच में भाभी.” और यह कहते हुए प्रीति ने रूबी के गाल पे किस कर लिया।

प्रीति ने कभी भी ऐसा नहीं किया था रूबी के साथ, इसलिए रूबी थोड़ा सा शर्मा गई। प्रीति ने इसके बाद रूबी की कमर को अपनी बाहों में ले लिया और दोनों ऐसे ही लेटे रहे।

प्रीति का चेहरा रूबी के गर्दन के पास था। रूबी को प्रीति की गरम सांसें अपनी गर्दन पे महसूस हो रही थी। कुछ देर ऐसा रहने के बाद अचानक रूबी को अपनी कमर पे प्रीति के हाथ फिराने का एहसास हुआ। रूबी समझने की

कोशिश ही कर रही थी की प्रीति का हाथ उसके चूतरों की गोलाईयों का जायजा लेने लगा। प्रीति के इस वार को रूबी संभाल नहीं पाई, और अपनी आँखें बंद किए प्रीति के हाथ के फिराने का एहसास करने लगी। अभी रूबी अपने अंदर की औरत से लड़ ही रही थी की तभी प्रीति ने चुप्पी तोड़ी।

प्रीति- भाभी एक बात पुडूं?

रूबी आँखें बंद किए हुए- “हाँ.."

प्रीति- लास्ट टाइम कब किया था?

रूबी- क्या?

प्रीति- सेक्स।

रूबी यह सुनकर चकित हो गई। इससे पहले कभी प्रीति और रूबी में ऐसी बात नहीं हुई थी, और आज अचानक प्रीति ने उससे सीधा सवाल पूछ लिया था। रूबी चुप रही।

प्रीति- बताओ ना भाभी। लास्ट टाइम कब किया था सेक्स? भइया के साथ ही किया था?

रूबी- हाँ।

प्रीति- वो तो काफी टाइम पहले हुआ होगा। उसके बाद?

रूबी- उसके बाद?

प्रीति- उसके बाद नहीं किया।

रूबी- उसके बाद लखविंदर था नहीं।

प्रीति- तो?

रूबी- तो क्या?

प्रीति- मेरा मतलब किसी और मर्द से।

 
रूबी- क्या बात कर रही हो प्रीति? ऐसा हो सकता है क्या? हमारे समाज में यह सब अलोड नहीं है।

प्रीति- हाँ... वो तो है। पर दिल तो करता ही है ना। एक औरत के लिए मर्द का साथ सबसे आनंददाई होता है। आप इतनी अच्छी हो, खूबसूरत हो तो आपके ऊपर गाँव के काफी लड़के मरते भी होंगे।

रूबी- “पता नहीं? मैंने कभी सोचा नहीं." और यह कहने के बाद रूबी चुप हो गई।

कछ देर ऐसे ही रूबी और प्रीति बिना आपस में बात किए पड़े रहे। प्रीति सोच रही थी की भाभी जिश्म की भूख में तड़प रही है पर इस समाज की बंदिशों के कारण वो अपने औरत होने का सुख अच्छे से नहीं ले पा रही है। काफी देर वो रूबी के चेहरे को देखती रही।

रूबी अपनी आँखें बंद किए सोने की कोशिश कर रही थी। मासूम सा चेहरा रूबी का प्रीति को बहुत अच्छा लग रहा था। अचानक प्रीति ने अपने होंठ रूबी के होंठों पे रख दिए और अपने हाथ से रूबी के चूतरों को सहलाने लगी। प्रीति के इस हमले से रूबी चकित हो गई पर उसने पीछे हटने की कोशिश नहीं की। प्रीति ने हल्का-हल्का रूबी के होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उधर रूबी जो की अंदर से सेक्स के लिए तड़प रही थी, बिल्कुल भी पीछे नहीं हटी और प्रीति को होंठ चूसने दिए।

कम्बल में गर्मी बढ़ने लगी थी। प्रीति ने सोच लिया था की वो आज अपनी भाभी की अंदर की आग को कम से कम आज की रात तो शांत करेगी। ताकी उसकी प्यारी भाभी आज सुख की नींद सो सके। प्रीति ने अपना हाथ रूबी के चूतरों से हटा लिया और उसे रूबी की नाइटी में लेजाकर उसके बायें मम्मे को पकड़ लिया और धीरे-धीरे दबाने लगी।

प्रीति के इस हमले से अंदर की आग से लड़ रही रूबी ने एकदम सरेंडर कर दिया, और अपने आपको प्रीति को समर्पित कर दिया और आनंद की लहरों में खोने लगी। प्रीति अपने होंठों से रूबी के होंठों का रसपान कर रही थी और हाथ से रूबी के बायें मम्मे को दबा भी रही थी। अब यह बात तो दोनों के सामने खुल गई थी की आज रात ननद और भाभी के जिस्मानी संबन्ध बनेंगे, तो प्रीति ने कम्बल को एक साइड में फेंक दिया और दुबारा से रूबी के होंठों पे टूट पड़ी। रूबी ने भी आगे बढ़कर उसका साथ दिया।

 
रूबी और प्रीति दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने में मदहोश थी। प्रीति ने रूबी के बदन से नाइटी को उतार दिया और अब रूबी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। इधर प्रीति फिर से उसके होंठों का रस पीने लगी। जिश्म की भूख में तड़प रही रूबी उसका पूरा साथ दे रही थी। अब प्रीति ने अपने एक हाथ को रूबी की ब्रा के अंदर घुसा दिया, और उसके निपल के साथ खेलने लगी। रूबी के अंदर एक करेंट सा लगा और अपनी आँख बंद किए प्रीति के हाथ के घूमने का मजा लेने लगी। प्रीति ने रूबी के होंठों का रस पीते-पीते उसकी ब्रा का हक खोल दिया और ब्रा को एक साइड फेंक दिया, और उसकी चूचियों को अपने हाथों में पकड़कर मसलने लगी। अब धीरे धीरे प्रीति अपने होंठों को रूबी की गर्दन के पास ले गई और रूबी की गर्दन को चूमना शुरू कर दिया।

रूबी आँखें बंद किये मदहोशी में खोती जा रही थी। प्रीति ने अपनी थूक से गर्दन गीली कर दी थी। अब उसने गर्दन को चूमना छोड़ दिया और रूबी के नंगे उभारों को देखने लगी। गोरे रंग के उभार और ऊपर ब्राउन कलर की निपल कमरे की धीमी लाइट में भी चमक रहे थे। कुछ देर ऐसे ही निहारने के बाद उसकी नजरें रूबी की नजरों से टकराई, तो रूबी ने शर्माकर आँखें बंद कर ली और हल्का सा मुश्कुरा दी। प्रीति अपनी भाभी को मुश्कुराते देखकर खुश थी। उसने आगे बढ़कर रूबी के एक उभार के निपल को अपने दाँतों में लेकर हल्का सा काट लिया। रूबी के बदन में मानो चींटियां रेंगने लगी।

प्रीति ने निपल को चाटा और उभार को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। इससे रूबी के अंदर की आग और भड़क गई थी। उसकी सांसें फूलने लगी थी। प्रीति जितना हो सकता था रूबी के उभार को अपने होंठों में भरकर चूस रही थी। प्रीति के उभार को चाटने और चूसने से रूबी अपने आप पे कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। कुछ देर बाद प्रीति ने दूसरे उभार की तरफ ध्यान दिया और पहले वाले को छोड़ दिया। चूसा हुआ उभार प्रीति के थूक से चमक रहा था।

अब प्रीति ने दूसरे उभार को चूसना शुरू कर दिया और अपने हाथ से पहले वाले उभार को मसलने लगी। रूबी काम की अग्नि में जल रही थी और अपने उभारों को ऊपर को और उठाकर चुसवाने लगी थी। नीचे रूबी की चूत गीली हो गई थी। वो अपना हाथ प्रीति के सिर के पीछे लेजकर अपने उभारों की तरफ दबाने लगी। कुछ देर रूबी के उभारों को चूसने के बाद प्रीति ने उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया। उसके बाद प्रीति उठी और रूबी की पैंटी में हाथ डाल दिया और चूत की बाहरी दीवारों के साथ खेलने लगी। रूबी प्रीति के इस वार को सहन नहीं कर पाई और अपने चूतरों को प्रीति की उंगलियों की मूव्मेंट के साथ-साथ घुमाने लगी और सिसकियां लेने लगी। उसकी हालत पतली हो रही थी।

प्रीति- भाभी कैसा महसूस हो रहा है?

रूबी- बहुत मजा आ रहा है। उफफ्फ... उम्म्म... तुमने क्या जादू कर दिया है प्रीती?

प्रीति- भाभी आप बहुत खूबसूरत हो। आज मैं आपकी चूत की आग को ठंडी करूंगी।

रूबी- “हाँ। क्यों तड़पा रही हो... उफफ्फ.."

प्रीति ने अब अपनी एक उंगली को रूबी की गीली चूत में धकेल दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगी। रूबी पूरे मजे में अपनी आँखें बंद किये धीरे-धीरे अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रही थी। प्रीति ने देखा की रूबी पर उसका पूरा कंट्रोल है। उसकी प्यारी भाभी अपनी कमर को हिला-हिलाकर उसकी उंगली ले रही थी। प्रीति ने देखा रूबी उसके कंट्रोल में है तो उसने अच्छा मौका देखकर उससे पूछा।

प्रीति- भाभी एक बात पुडूं, बुरा तो नहीं मानोगी?

रूबी- तुम्हारी किसी बात काआ आज तक्क आहह... बुरा माना है मैंने? हम दोनों अच्छी सहेलियां भी तो हैं। पूछ लो उफफ्फ..."

प्रीति- भाभी आपका भईया के इलावा किसी और से सेक्स करने का मन नहीं किया?

रूबी चुप रही और कोई जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद प्रीति की एक और उंगली पहली वाली का साथ रूबी की चूत का पानी निकालने में देने लगी। प्रीति को एहसास हुआ की रूबी की चूत ज्यादा सेक्स ना करने के कारण काफी टाइट है। कुछ देर बाद प्रीति ने फिर से पूछा।

प्रीति- बताओ ना भाभी?

 
रूबी ने कुछ नहीं बोला, बस सिसकियां लेती रही। प्रीति ने अब अपनी उंगलियों की रफ्तार तेज कर दी। रूबी ने अपने हाथों से बेडशीट को पकड़ लिया। उसे लगा की वो झड़ने की कगार पे पहुँचने वाली है। तभी प्रीति ने उंगलियों को चूत के अंदर-बाहर करना बंद कर दिया। रूबी ने आँखें खोली और देखा की प्रीति उसकी तरफ ही देख रही थी। रूबी ने फिर से आँखें बंद कर ली और प्रीति को दुबारा करने के लिए बोला।

प्रीति- भाभी मैं आपको शांत कर दूंगी। पर पहले मेरी बात का जवाब दो। इतनी खूबसूरत औरत कैसे बिना चुदवाए रह सकती है?

रूबी को हार माननी पड़ी, और बोली- “अब मर्द घर पे ना हो तो मजबूरी में दिन ऐसे ही काटने पड़ते हैं।

प्रीति- भाभी प्लीज... सच में बताओ की आपका कभी दिल नहीं किया किसी के साथ संबंध बनाना को?

रूबी- तुम यह सब क्यों पूछ रही हो? मेरी अंदर की आग को ठंडा करो।

प्रीति- भाभी मैं इसलिए पूछ रही हूँ, क्योंकी मुझसे आपका ऐसे अंदर ही अंदर घुटकर जीना अच्छा नहीं लग रहा। सेक्स इंपार्टेट पार्ट है लाइफ का, और आप इससे वंचित हो।

रूबी हल्का सा मुश्कुराई और बोली- “तो क्या करूं?”

प्रीति- कुछ नहीं। मैं तो वैसे ही बोल रही थी।

रूबी- तो अब खतम करो खेल को। मेरी जान क्यों तंग कर रही हो?

प्रीति- पहले बताओ कभी गाँव के लड़कों ने आपको ऐसी नजर से देखा है?

रूबी- “यार तुम्हें क्यों लगता है की सिर्फ मुझे देखेंगे ओह्ह.."

प्रीति- वो इसलिए भाभीजी की इतनी खूबूरत औरत बिना मर्द के हो तो आस-पास के मर्द उसे पटाने की कोशिश तो जरूर करेंगे।

रूबी की हँसी निकल पड़ी।

प्रीति- बताओ ना भाभी। कभी आपको लगा है के कोई आस-पास का लड़का आपको देखता हो।

रूबी- ऐसे तो सभी लड़के होते हैं। लड़की देखी नहीं और मुँह में पानी आ जाता है।

प्रीति- आपको देखकर तो आएगा ही, किसे के भी मुँह में पानी। इतनी सेक्सी फिगर वाली औरत जो भोगने को मिलेगी।

रूबी भोगने वाला शब्द सुनकर शर्मा गई।

प्रीति- बताओ ना भाभी किसी ने गाँव में कोशिश नहीं की आपको पटाने की?

रूबी- तुम बहुत जिद्दी हो। मुझे बीच भंवर में छोड़ दिया। कम से कम मंजिल तक तो पहुँचा देती।

प्रीति- हाँ मैं जिद्दी हूँ। पहले बताओ तो मैं आगे बढंगी।

 
प्रीति- बताओ ना भाभी किसी ने गाँव में कोशिश नहीं की आपको पटाने की?

रूबी- तुम बहुत जिद्दी हो। मुझे बीच भंवर में छोड़ दिया। कम से कम मंजिल तक तो पहुँचा देती।

प्रीति- हाँ मैं जिद्दी हूँ। पहले बताओ तो मैं आगे बढंगी।

रूबी कुछ देर चुप रही और फिर बोली- “हाँ... वैसे तो गाँव के काफी लड़के हैं जो मुझे देखते हैं। पर मैंने कभी उनको घास नहीं डाला। पड़ोस वाला निखिल भी है और भी काफी हैं। लेकिन मैं इंटेरेस्ट नहीं लेती।

प्रीति- आपने कभी उनके बारे में सोच-सोचकर उंगली नहीं डाली चूत में?

रूबी- किया है बाबा... अब कर डालो।

प्रीति- तो रियल लाइफ में क्यों नहीं सोचा?

रूबी- "तुम कैसी ननद हो जो अपनी भाभी को किसी गैर मर्द की बाहों में देखना चाहती हो?" अब रूबी बेचारी उसे क्या बताती की उसके दिल में रामू के लिए कुछ फीलिंग्स आ रही हैं कुछ दिन से। क्या पता उसके बताने से प्रीति को अच्छा ना लगता की उसकी भाभी उसके भाई को धोखा दे सकती है।

प्रीति- अरे नहीं भाभी शारीरिक सुख का हक सबको है। मैं तो सिर्फ यह कहना चाहती हूँ के अगर कभी आपको इस टापिक पे बात करनी हुई तो आप मेरे साथ कर सकते हो।

रूबी- कौन सा टापिक?

प्रीति- अगर आप किसी मर्द में इंट्रेस्टेड हुए। मेरा मतलब किसी मर्द की तरफ आकर्षित हुए तो मुझे बता देना।

रूबी- “धत्... बेशर्म कहीं की..." और इसके बाद कमरे में शांति फैल गई।

प्रीति ने अपना चेहरा रूबी के चेहरे के पास लेजाकर पूछा- “भाभी आपको पहली बार किसने भोगा था?

रूबी- तुम्हारे भईया ने।

प्रीति मुश्कुरा दी और अपने गुलाबी होंठ रूबी के गुलाबी होंठों पे रख दिए।

रूबी भी प्रीति के होंठों का पूरा रसपान कर रही थी। प्रीति ने कुछ देर रूबी के होंठ चूमने के बाद अपनी नाइटी खोल दी और साथ में ही अपनी ब्रा भी खोलकर फेंक दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। अब उसने रूबी की पैंटी को उतार दिया और रूबी अब पूरी तरह नंगी प्रीति के सामने अपने जिश्म की नुमाइश कर रही थी।

प्रीति ने रूबी की जांघों को फैला दिया और चूत के मुहाने को देखने लगी। प्रीति ने रूबी की तरफ देखा और दोनों की नजरें आपास में टकराई। रूबी की आँखों में जैसे रिक्वेस्ट थी। प्रीति नीचे झुक कर अपनी नाक रूबी की चूत के पास लेकर गई तो चूत में से वासना की दुर्गंध आ रही थी। इस दुर्गंध ने प्रीति को पागल कर दिया और उसने अपने होंठ रूबी की चूत के मुहाने पे रखकर चूम लिया और उंगलियों से चूत को रगड़ने लगी।

इसके बाद धीरे-धीरे चूत को चूसना शुरू कर दिया। प्रीति की थूक और रूबी की चूत का रस आपस में मिक्स हो रहा था। प्रीति की जुबान रूबी पे मानो जादू सा कर रही थी। रूबी दुबारा से मदहोशी के आलम में जाने लगी। उसके अंदर काम की उतेजना बढ़ रही थी। अब प्रीति ने अपनी स्पीड थोड़ी सी बढ़ा दी।

इधर रूबी का बुरा हाल था और वो अपनी कमर ऊपर करके के प्रीति के होंठों से चूत चुसवाने लगी। प्रीति ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। अब प्रीति अपनी जुबान को भी चूत के अंदर हल्के-हल्के धकेल रही थी। रूबी प्रीति के हमले का पूरा मजा ले रही थी। अब प्रीति ने भी अपनी पैंटी उतार दी और रूबी की टांगों को फैलाकर उनके बीच में आ गई और फिर से उसकी चूत चूसने लगी।

आज प्रीति ने रूबी के अंदर की औरत जो के काफी टाइम से सोई हई थी, बारा से जगा दिया था। रूबी के अंदर ज्वालामुखी फूटने की कगार पे पहुँच चुका था। रूबी ने अपनी दोनों टाँगें हवा में ऊपर उठा दी और प्रीति के सिर को हाथों से पकड़कर अपनी चूत में दबाने लगी।

प्रीति रूबी की इस हरकत से समझ गई की भाभी अब चरमसुख की ओर बढ़ रही है और किसी भी टाइम चरमसुख को प्राप्त कर लेगी। भाभी को उसकी मंजिल तक पहुँचाने के लिए प्रीति ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अपने एक हाथ से अपनी चूत को भी रगड़ने लगी।

इधर रूबी के जिश्म में अकड़न सी आने लगी। उसका गला सूखने लगा था। रूबी की चूत अपने रस और प्रीति के थूक से पूरी तरह गीली हो चुकी थी। रूबी प्रीति के होंठों को अपने अंदर समेट लेना चाहती थी- “आअहह... ऊई म्माँ। तभी कुछ पल के लिए रूबी की सांस अटक गई और उसका यौवन रस चूत के रास्ते बाहर निकलने लगा।

प्रीति ने अपनी जुबान से अपनी प्यारी भाभी के रस को पीना शुरू कर दिया। रूबी हल्के-हल्के झटके लगाकर अपना रस छोड़ती जा रही थी, और प्रीति अपनी जुबान से उसे चाट-चाट कर चूत को सुखा रही थी। इधर प्रीति का बदन भी अकड़ने लगा। अब रूबी का जिश्म ढीला पड़ने शुरू हो गया और उसने अपनी टाँगें बेड पे फैला दी। कुछ देर बाद प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया। प्रीति ने अपनी चूत को रूबी की चूत सटा दिया और दोनों की चूत का रास आपस में मिलने लगा।

रूबी ने आँखें खोलकर प्रीति की तरफ देखा, मानो उसका शुक्रिया कर रही हो। दोनों मुश्कुरा पड़ी। प्रीति खुश थी की उसने भाभी की प्यास भुझा दी। कुछ देर बाद दोनों कम्बल में नींद के आगोश में खो गये।

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प्रीति ने अपनी जुबान से अपनी प्यारी भाभी के रस को पीना शुरू कर दिया। रूबी हल्के-हल्के झटके लगाकर अपना रस छोड़ती जा रही थी, और प्रीति अपनी जुबान से उसे चाट-चाट कर चूत को सुखा रही थी। इधर प्रीति का बदन भी अकड़ने लगा। अब रूबी का जिश्म ढीला पड़ने शुरू हो गया और उसने अपनी टाँगें बेड पे फैला दी। कुछ देर बाद प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया। प्रीति ने अपनी चूत को रूबी की चूत सटा दिया और दोनों की चूत का रास आपस में मिलने लगा।

रूबी ने आँखें खोलकर प्रीति की तरफ देखा, मानो उसका शुक्रिया कर रही हो। दोनों मुश्कुरा पड़ी। प्रीति खुश थी की उसने भाभी की प्यास भुझा दी। कुछ देर बाद दोनों कम्बल में नींद के आगोश में खो गये।

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अगले दिन रूबी प्रीति से नजरें नहीं मिला पा रही थी। सुबह का नाश्ता भी कर लिया था, और प्रीति और रूबी में कोई बात नहीं हुई थी सुबह से। प्रीति तो नार्मल ही थी, पर रूबी को शर्म आ रही थी। उसने तो सुबह से सास ससुर से भी कुछ खास बात नहीं की थी। जब सुबह खाना खाने के बाद सीमा कामवाली आई और अपनी सफाई का काम करने लगी। रूबी ने उससे सफाई करवाई।

सीमा ने काम खतम होने के बाद बोला- “मैं 15 दिन तक नहीं आ सकती मुझे कहीं जाना है.."

कमलजीत- ठीक है। पर तू अपनी जगह किसी को तो काम पे लगवा दे तब तक।

सीमा- बीवीजी ऐसा तो कोई नहीं है, पर मैं अपनी बेटी को बोल सकती हूँ।

रूबी- वो स्कूल नहीं जाती क्या?

सीमा- जी जाती है। पर अगर आप बोलते हैं तो 15 दिन काम पे आ जाएगी।

रूबी ने कुछ देर सोचा और बोली- “नहीं रहने दे दो, हम मैनेज कर लेंगे...'

सीमा- जी अच्छा।

सीमा वापिस अपने घर चली गई और रूबी, प्रीति और कमलजीत घर के पीछे के पार्क में धूप का आनंद लेने लगे और बातें करने लगे।

कमलजीत- बहू, घर की सफाई काम अब कैसे मनेज करेंगे?

रूबी- मम्मीजी, मैं सोचती हूँ की राम को सफाई के लिए बोल देते हैं। वैसे भी वो सफाई के टाइम ज्यादार फ्री होता है। उसे पगार भी ज्यादा दे देंगे। वो बोल भी रहा था सेलरी बढ़ाने को।

कमलजीत- हाँ वो तो है। मैं तुम्हारे ससुरजी से बात करती हूँ।

प्रीति- मम्मी, पापा तो रात को आएंगे। राम को काम भी तो समझाना होगा भाभी ने। आप फोन पे बात कर लो।

रूबी- हाँ जी। मम्मीजी फोन पे पूछ लो और मैं काम भी समझा दूंगी।

कमलजीत- "ठीक है। मेरा फोन अंदर है, मैं पूछकर आती हूँ..." और कमलजीत इतना बोलते ही घर के अंदर जाने के लिए चल पड़ी। अब प्रीति और रूबी सिर्फ दोनों ही पार्क में थी और धूप का आनंद ले रही थी।

प्रीति ने अपनी आँखें रूबी के चेहरे पे गड़ा रखी थी। रूबी को मालूम था की प्रीति उसकी तरफ ही देख रही है पर वो अंजान बनने की कोशिश कर रही थी और अपने आप को अखबार में बिजी दिखा रही थी। हालांकी उससे कुछ भी पढ़ा नहीं जा रहा था। तभी प्रीति ने चुप्पी तोड़ी।

प्रीति- भाभी क्या हुआ?

रूबी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और आँखें अखबार में गड़ाई हए बोली- “कुछ भी तो नहीं.."

 
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