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Guest
कुछ देर दोनों एक दूसरे के जिश्म की गर्मी लेते रहे। जिससे कमरे का माहौल गरम होने लगा था। रामू धीरे-धीरे अपने दोनों हाथ रूबी की पीठ पे चलाने लगा। रूबी के जिश्म में तरंगे उठने लगी। रूबी और जोर-जोर से राम को अपने से चिपका लेती है। अब तो दोनों के बीच हवा निकलने के लायक भी जगह नहीं बची थी।
रामू- मेरी जान बहुत तड़पाया है तुमने। ऐसे लग रहा है जैसे बरसों बाद मिल रहे हों।
रूबी- सच में।
रामू- आज आपने प्यार करने के लिए सारे दरवाजे खोल दिए हैं। आज के बाद हमें कोई रोक नहीं पाएगा।
रूबी- मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हूँ। तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ। बस कभी मुझे छोड़कर मत जाना।
राम- नहीं प्यारी, मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊँगा। तुम तो मेरे दिल की रानी हो।
रूबी- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ राम्।
राम- हम भी अपको अपनी जान से भी ज्यादा चाहते हैं।
रामू और रूबी एक दूसरे की आँखों में देखते हैं। दोनों को आँखों में एक दूसरे को पाने की चाहत दिखाई देती है। रामू अपने चेहरे को आगे लेजाकर अपने होंठ रूबी के गुलाबी होंठों पे रख देता है। रूबी भी उसके होंठों का स्वागत अपने होंठ खोलकर करती है, और दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगते हैं।
दोनों एक दूसरे के होंठों में बिजी थे और इधर रामू अपने हाथ दुबारा से रूबी की पीठ पे चलाने लगता है। रूबी अपने होंठों को और ज्यादा रामू के होंठों में दे देती है। दोनों की जुबान आपस में लड़ने लगी थी। इधर रामू के हाथ रूबी के विशाल चूतरों पे चलने लगते हैं, और उनका जायजा लेने लगते हैं। चूतरों पे मर्द के हाथ लगने से रूबी रामू के साथ और खुल जाती है और रामू के होंठों को बुरी तरह चूसने लगती है, मानो जैसे बरसों की प्यासी हो।
रामू रूबी की नाइटी के ऊपर से ही रूबी के चूतरों की दरार में उंगली घुसेड़ने लगता है। इससे यह होता है की नाइटी रूबी के चूतरों की दरार में घुस जाती है मानो मछली के मुँह में कोई शिकार फँसा हो। तभी रूबी को ध्याना आता है की कमरे का दरवाजा तो लाक किया ही नहीं।
रूबी- रामू दरवाजा तो बंद कर दो।
राम रूबीके होंठों को छोड़कर दरवाजे की तरफ बढ़ता है और दरवाजा बंद करने के बाद वो कमरे में पड़े दिए को जला देता है। दिए की रोशनी से पूरे कमरे में हल्का-हल्का उजाला हो जाता है।
रूबी- दिया क्यों जला दिया?
रामू- “अरे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। दरवाजा बंद है और हमें कोई नहीं देख सकता। इस उजाले में तुम्हें भोगने का मजा आएगा। वर्ना अंधेरे में कुछ पता नहीं चलता। अब कम से कम तुम्हें अच्छे से देख तो सकता हूँ.” कहकर रामू रूबी के पास आकर फिर से उसके होंठ चूसने लगता है।
रूबी भी खुलकर रामू के होंठों का रसपान करने लगती है। साथ ही साथ रामू के हाथ दुबारा से रूबी के चूतड़ों से खेलने लगते हैं। रूबी की चूत गीली होने लगती है। कुछ देर और होंठों का रसपान करने के बाद रामू रूबी को अपने से अलग करता है।
रामू- मेरी जान, तुम इस दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो।
रूबी शर्माकर अपना चेहरा नीचे झुका लेती है।
रामू- मैं हम दोनों के पहले मिलन के बाद से तुम्हारे लिए और ज्यादा तड़प रहा हूँ। मैं सोच रहा था पता नहीं दुबारा हमें कब मौका मिलेगा? पर आज तुमने अपने प्यार का इम्तिहान पास कर लिया है। तुमने मेरा दिल जीत लिया है। मैं तुम्हें अपना भरपूर प्यार देना चाहता हूँ। इस नाइटी को अपने जिश्म से अलग कर दो, जिससे हम दोनों के बीच कोई पर्दा ना रहे।
रामू- मेरी जान बहुत तड़पाया है तुमने। ऐसे लग रहा है जैसे बरसों बाद मिल रहे हों।
रूबी- सच में।
रामू- आज आपने प्यार करने के लिए सारे दरवाजे खोल दिए हैं। आज के बाद हमें कोई रोक नहीं पाएगा।
रूबी- मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हूँ। तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ। बस कभी मुझे छोड़कर मत जाना।
राम- नहीं प्यारी, मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊँगा। तुम तो मेरे दिल की रानी हो।
रूबी- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ राम्।
राम- हम भी अपको अपनी जान से भी ज्यादा चाहते हैं।
रामू और रूबी एक दूसरे की आँखों में देखते हैं। दोनों को आँखों में एक दूसरे को पाने की चाहत दिखाई देती है। रामू अपने चेहरे को आगे लेजाकर अपने होंठ रूबी के गुलाबी होंठों पे रख देता है। रूबी भी उसके होंठों का स्वागत अपने होंठ खोलकर करती है, और दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगते हैं।
दोनों एक दूसरे के होंठों में बिजी थे और इधर रामू अपने हाथ दुबारा से रूबी की पीठ पे चलाने लगता है। रूबी अपने होंठों को और ज्यादा रामू के होंठों में दे देती है। दोनों की जुबान आपस में लड़ने लगी थी। इधर रामू के हाथ रूबी के विशाल चूतरों पे चलने लगते हैं, और उनका जायजा लेने लगते हैं। चूतरों पे मर्द के हाथ लगने से रूबी रामू के साथ और खुल जाती है और रामू के होंठों को बुरी तरह चूसने लगती है, मानो जैसे बरसों की प्यासी हो।
रामू रूबी की नाइटी के ऊपर से ही रूबी के चूतरों की दरार में उंगली घुसेड़ने लगता है। इससे यह होता है की नाइटी रूबी के चूतरों की दरार में घुस जाती है मानो मछली के मुँह में कोई शिकार फँसा हो। तभी रूबी को ध्याना आता है की कमरे का दरवाजा तो लाक किया ही नहीं।
रूबी- रामू दरवाजा तो बंद कर दो।
राम रूबीके होंठों को छोड़कर दरवाजे की तरफ बढ़ता है और दरवाजा बंद करने के बाद वो कमरे में पड़े दिए को जला देता है। दिए की रोशनी से पूरे कमरे में हल्का-हल्का उजाला हो जाता है।
रूबी- दिया क्यों जला दिया?
रामू- “अरे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। दरवाजा बंद है और हमें कोई नहीं देख सकता। इस उजाले में तुम्हें भोगने का मजा आएगा। वर्ना अंधेरे में कुछ पता नहीं चलता। अब कम से कम तुम्हें अच्छे से देख तो सकता हूँ.” कहकर रामू रूबी के पास आकर फिर से उसके होंठ चूसने लगता है।
रूबी भी खुलकर रामू के होंठों का रसपान करने लगती है। साथ ही साथ रामू के हाथ दुबारा से रूबी के चूतड़ों से खेलने लगते हैं। रूबी की चूत गीली होने लगती है। कुछ देर और होंठों का रसपान करने के बाद रामू रूबी को अपने से अलग करता है।
रामू- मेरी जान, तुम इस दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो।
रूबी शर्माकर अपना चेहरा नीचे झुका लेती है।
रामू- मैं हम दोनों के पहले मिलन के बाद से तुम्हारे लिए और ज्यादा तड़प रहा हूँ। मैं सोच रहा था पता नहीं दुबारा हमें कब मौका मिलेगा? पर आज तुमने अपने प्यार का इम्तिहान पास कर लिया है। तुमने मेरा दिल जीत लिया है। मैं तुम्हें अपना भरपूर प्यार देना चाहता हूँ। इस नाइटी को अपने जिश्म से अलग कर दो, जिससे हम दोनों के बीच कोई पर्दा ना रहे।