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रिया- प्लीज मुझे छोड़ दो। मैं कभी वैसा नहीं करेंगी दुबारा।
जय- "दुआरा करने की जररत पड़ेगी भी नहीं तुझे ..' बोलकर जय उसका ब्लाउज़ पीछे से खोल देता है।
रिया अपना हाथों से अपनी चूचियों को खुलने होने से बचाती हैं।
जय- हाथ हटा अपने।
रिया- मैं नहीं हटाऊँगी।
रिया का ब्लाउज़ उसके हाथों के सहारे था। जय स्माइल करते हुए उसके करीब जाता है, और उसके होंठों पर
अपनी उंगली रखता है।
जय- हटा अपना हाथ।
जय अब अपनी उंगली उसके होंठों पर फेर रहा था। जिससे रिया को एक अजीब सौ फीलिंग आ रही थी। रिया भी उसे देखने लगती है। रिया की आँखें अब जय के ऐसा करने से मदहोश होने लगती हैं। जय धीरे से उसके हाथ उसकी छाती पर से हटाता है। रिया उसको नहीं हटाने देती है। जय फिर से ट्राई करता है। इस बार भी वो नहीं हटाती। जय अब रिया के दोनों होंठों पर अपनी गंदी उंगली फेरने लगता है। रिया को जैसे नशा हो रहा था। उसकी आँखें बंद होने लगती है।
जय अब फिर से ट्राई करता है। इस बार रिया विरोध नहीं कर पाती, और रिया का ब्लाउज़ नीचे गिर जाता है। अब रिया ऊपर से सिर्फ ब्रा में भी। ब्रा में उसकी गोरी चूचियां कैद औं। इतने गोरे बदन की औरत जय ने सपने में भी नहीं देखी भी। जय तो जैसे पागल हो रहा था रिया की खूबसूरती देखकर। उसे पता आ अगर ये परी उसके नीचे आ गई तो उसके मजे ही मजे हैं।
जय अब उसके होंठों पर से उंगली हटा लेता हैं और अपने काले होंठ उसके गुलाबी होठों पर रख देता है। रिया ये उम्मीद नहीं कर रही थी । जय उसे अजीब सा किस कर रहा था। वो ठहरा गाँव वाला उसे किस
करना बिल्कुल नहीं आता था। जय अञ्च किस करते ह रिया की ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियां दबाने लगता है।
जय की हरकतों से न जाने क्यों रिया की चूत गीली हो रही थी। ऐस्सा अहसास उसे कभी नहीं हुआ था। खुद उसके पति के छने से भी उसकी चूत गीली नहीं हुई थी। आज इस काले बूढ़े के छने से उसकी चूत रस छोड़ रही
थी। खुद रिया को भी अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था।
जय के हाथ रिया के निपल को भी मसल रहे थे। रिया को अब जय के किस से तकलीफ हो रही थी तो
अपना मुँह हटाने की कोशिश कर रही थी। जय भी उसे फोर्स ना करते हुए किस तोड़ता है। लेकिन वो अपने हाथ उसकी ब्रा के अंदर रखता है। जय के हाथ रिया को चूचियों को जैसे गंध रहे थे।
जय- आह्ह... क्या चूचियां हैं तेरी। मेरी औरत से तो बहुत टाइट हैं।
रिया के लिए ये शर्म से लाल होने के लिए काग आ। वो अपना सिर झकार भी। बी एमोशन के साथ बह रही थी। जो थोड़ी देर पहले विरोध कर रही थी अब उसका जिस्म उसका साथ नहीं दे रहा था। जय अब रिया के पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा का हक निकालने लगता है। तभी उसे रिया रोकती है।
रिया- प्लीज़... नहीं ऐसा मत करो। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? क्यों मेरी लाइफ बर्बाद करना चाहते हो?
जय- तेरी गलती ये है की तूने मुझे थप्पड़ मारा। अब उस गलती की सजा भुगत।
रिया अपनी गलती को कोसने लगती है। लेकिन वो भी जानती थी की जय जो भी कर रहा है वो गलत है।
अब जय ब्रा का हुक निकाल देता है। रिया अपनी ब्रा नीचे गिरने से बचा रही थी।
जय- अपनी ब्रा छोड़, वरना नीचे से भी नंगी कर दूंगा।
रिया ये सुनकर उसकी तरफ गुस्से से देखता है, और कहती है- "तुम समझते क्या हो खुद का?"
जय- तेरा आशिका
रिया- "आशिक माइ फुट... दूर हटो मुझसे..." और रिया उसको खुद से दूर हटाने लगती है।
तभी जय उसकी साड़ी नीचे से उठाने लगता है।
रिया. प्लीज... नहीं।
-
जय- तो छोड़ अपनी ब्रा।
रिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे। आखीरकार, हालात के सामने वो हार मान लेती है
और अपनी सा छोड़ देती हैं। जय एकदम से उसकी ब्रा निकाल फेंकता है साइड में। जय के सामने अब रिया की गोरी गोरी चूचियां बिलकुल नंगी थी, और उसपर पिंक कलर के निपल। बस कयामत लग रहीं भी रिया उस वक्त।
जय के मुँह में पानी आ जाता है रिया की गोरी मस्त चूचियां देखकर। रिया अपना चेहरा दूसरी तरफ किए हए खड़ी थी। उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की वो इस हालत में एक बूढ़े के सामने खड़ी है। जय एक
बार रिया के चेहरे की तरफ देखता है, और फिर टूट पड़ता है उसकी गोरी चूचियों पर। जय रिया की चूचियां अपने मुँह में लेकर चूस रहा था एक-एक करके।
रिया- "अहह....
ये पहली बार था की किसी ने उसकी चूचियां चूमी थी। सौरभ सिर्फ उसकी चूचियां दबाता था। वो भी प्यार से। पता नहीं क्यों लेकिन रिया को जय का ऐसा करना एक अजीब अहसास करा रहा था।
जय- "दुआरा करने की जररत पड़ेगी भी नहीं तुझे ..' बोलकर जय उसका ब्लाउज़ पीछे से खोल देता है।
रिया अपना हाथों से अपनी चूचियों को खुलने होने से बचाती हैं।
जय- हाथ हटा अपने।
रिया- मैं नहीं हटाऊँगी।
रिया का ब्लाउज़ उसके हाथों के सहारे था। जय स्माइल करते हुए उसके करीब जाता है, और उसके होंठों पर
अपनी उंगली रखता है।
जय- हटा अपना हाथ।
जय अब अपनी उंगली उसके होंठों पर फेर रहा था। जिससे रिया को एक अजीब सौ फीलिंग आ रही थी। रिया भी उसे देखने लगती है। रिया की आँखें अब जय के ऐसा करने से मदहोश होने लगती हैं। जय धीरे से उसके हाथ उसकी छाती पर से हटाता है। रिया उसको नहीं हटाने देती है। जय फिर से ट्राई करता है। इस बार भी वो नहीं हटाती। जय अब रिया के दोनों होंठों पर अपनी गंदी उंगली फेरने लगता है। रिया को जैसे नशा हो रहा था। उसकी आँखें बंद होने लगती है।
जय अब फिर से ट्राई करता है। इस बार रिया विरोध नहीं कर पाती, और रिया का ब्लाउज़ नीचे गिर जाता है। अब रिया ऊपर से सिर्फ ब्रा में भी। ब्रा में उसकी गोरी चूचियां कैद औं। इतने गोरे बदन की औरत जय ने सपने में भी नहीं देखी भी। जय तो जैसे पागल हो रहा था रिया की खूबसूरती देखकर। उसे पता आ अगर ये परी उसके नीचे आ गई तो उसके मजे ही मजे हैं।
जय अब उसके होंठों पर से उंगली हटा लेता हैं और अपने काले होंठ उसके गुलाबी होठों पर रख देता है। रिया ये उम्मीद नहीं कर रही थी । जय उसे अजीब सा किस कर रहा था। वो ठहरा गाँव वाला उसे किस
करना बिल्कुल नहीं आता था। जय अञ्च किस करते ह रिया की ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियां दबाने लगता है।
जय की हरकतों से न जाने क्यों रिया की चूत गीली हो रही थी। ऐस्सा अहसास उसे कभी नहीं हुआ था। खुद उसके पति के छने से भी उसकी चूत गीली नहीं हुई थी। आज इस काले बूढ़े के छने से उसकी चूत रस छोड़ रही
थी। खुद रिया को भी अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था।
जय के हाथ रिया के निपल को भी मसल रहे थे। रिया को अब जय के किस से तकलीफ हो रही थी तो
अपना मुँह हटाने की कोशिश कर रही थी। जय भी उसे फोर्स ना करते हुए किस तोड़ता है। लेकिन वो अपने हाथ उसकी ब्रा के अंदर रखता है। जय के हाथ रिया को चूचियों को जैसे गंध रहे थे।
जय- आह्ह... क्या चूचियां हैं तेरी। मेरी औरत से तो बहुत टाइट हैं।
रिया के लिए ये शर्म से लाल होने के लिए काग आ। वो अपना सिर झकार भी। बी एमोशन के साथ बह रही थी। जो थोड़ी देर पहले विरोध कर रही थी अब उसका जिस्म उसका साथ नहीं दे रहा था। जय अब रिया के पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा का हक निकालने लगता है। तभी उसे रिया रोकती है।
रिया- प्लीज़... नहीं ऐसा मत करो। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? क्यों मेरी लाइफ बर्बाद करना चाहते हो?
जय- तेरी गलती ये है की तूने मुझे थप्पड़ मारा। अब उस गलती की सजा भुगत।
रिया अपनी गलती को कोसने लगती है। लेकिन वो भी जानती थी की जय जो भी कर रहा है वो गलत है।
अब जय ब्रा का हुक निकाल देता है। रिया अपनी ब्रा नीचे गिरने से बचा रही थी।
जय- अपनी ब्रा छोड़, वरना नीचे से भी नंगी कर दूंगा।
रिया ये सुनकर उसकी तरफ गुस्से से देखता है, और कहती है- "तुम समझते क्या हो खुद का?"
जय- तेरा आशिका
रिया- "आशिक माइ फुट... दूर हटो मुझसे..." और रिया उसको खुद से दूर हटाने लगती है।
तभी जय उसकी साड़ी नीचे से उठाने लगता है।
रिया. प्लीज... नहीं।
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जय- तो छोड़ अपनी ब्रा।
रिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे। आखीरकार, हालात के सामने वो हार मान लेती है
और अपनी सा छोड़ देती हैं। जय एकदम से उसकी ब्रा निकाल फेंकता है साइड में। जय के सामने अब रिया की गोरी गोरी चूचियां बिलकुल नंगी थी, और उसपर पिंक कलर के निपल। बस कयामत लग रहीं भी रिया उस वक्त।
जय के मुँह में पानी आ जाता है रिया की गोरी मस्त चूचियां देखकर। रिया अपना चेहरा दूसरी तरफ किए हए खड़ी थी। उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की वो इस हालत में एक बूढ़े के सामने खड़ी है। जय एक
बार रिया के चेहरे की तरफ देखता है, और फिर टूट पड़ता है उसकी गोरी चूचियों पर। जय रिया की चूचियां अपने मुँह में लेकर चूस रहा था एक-एक करके।
रिया- "अहह....
ये पहली बार था की किसी ने उसकी चूचियां चूमी थी। सौरभ सिर्फ उसकी चूचियां दबाता था। वो भी प्यार से। पता नहीं क्यों लेकिन रिया को जय का ऐसा करना एक अजीब अहसास करा रहा था।