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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

रिया- प्लीज मुझे छोड़ दो। मैं कभी वैसा नहीं करेंगी दुबारा।

जय- "दुआरा करने की जररत पड़ेगी भी नहीं तुझे ..' बोलकर जय उसका ब्लाउज़ पीछे से खोल देता है।

रिया अपना हाथों से अपनी चूचियों को खुलने होने से बचाती हैं।

जय- हाथ हटा अपने।

रिया- मैं नहीं हटाऊँगी।

रिया का ब्लाउज़ उसके हाथों के सहारे था। जय स्माइल करते हुए उसके करीब जाता है, और उसके होंठों पर

अपनी उंगली रखता है।

जय- हटा अपना हाथ।

जय अब अपनी उंगली उसके होंठों पर फेर रहा था। जिससे रिया को एक अजीब सौ फीलिंग आ रही थी। रिया भी उसे देखने लगती है। रिया की आँखें अब जय के ऐसा करने से मदहोश होने लगती हैं। जय धीरे से उसके हाथ उसकी छाती पर से हटाता है। रिया उसको नहीं हटाने देती है। जय फिर से ट्राई करता है। इस बार भी वो नहीं हटाती। जय अब रिया के दोनों होंठों पर अपनी गंदी उंगली फेरने लगता है। रिया को जैसे नशा हो रहा था। उसकी आँखें बंद होने लगती है।

जय अब फिर से ट्राई करता है। इस बार रिया विरोध नहीं कर पाती, और रिया का ब्लाउज़ नीचे गिर जाता है। अब रिया ऊपर से सिर्फ ब्रा में भी। ब्रा में उसकी गोरी चूचियां कैद औं। इतने गोरे बदन की औरत जय ने सपने में भी नहीं देखी भी। जय तो जैसे पागल हो रहा था रिया की खूबसूरती देखकर। उसे पता आ अगर ये परी उसके नीचे आ गई तो उसके मजे ही मजे हैं।

जय अब उसके होंठों पर से उंगली हटा लेता हैं और अपने काले होंठ उसके गुलाबी होठों पर रख देता है। रिया ये उम्मीद नहीं कर रही थी । जय उसे अजीब सा किस कर रहा था। वो ठहरा गाँव वाला उसे किस

करना बिल्कुल नहीं आता था। जय अञ्च किस करते ह रिया की ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियां दबाने लगता है।

जय की हरकतों से न जाने क्यों रिया की चूत गीली हो रही थी। ऐस्सा अहसास उसे कभी नहीं हुआ था। खुद उसके पति के छने से भी उसकी चूत गीली नहीं हुई थी। आज इस काले बूढ़े के छने से उसकी चूत रस छोड़ रही

थी। खुद रिया को भी अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था।

जय के हाथ रिया के निपल को भी मसल रहे थे। रिया को अब जय के किस से तकलीफ हो रही थी तो

अपना मुँह हटाने की कोशिश कर रही थी। जय भी उसे फोर्स ना करते हुए किस तोड़ता है। लेकिन वो अपने हाथ उसकी ब्रा के अंदर रखता है। जय के हाथ रिया को चूचियों को जैसे गंध रहे थे।

जय- आह्ह... क्या चूचियां हैं तेरी। मेरी औरत से तो बहुत टाइट हैं।

रिया के लिए ये शर्म से लाल होने के लिए काग आ। वो अपना सिर झकार भी। बी एमोशन के साथ बह रही थी। जो थोड़ी देर पहले विरोध कर रही थी अब उसका जिस्म उसका साथ नहीं दे रहा था। जय अब रिया के पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा का हक निकालने लगता है। तभी उसे रिया रोकती है।

रिया- प्लीज़... नहीं ऐसा मत करो। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? क्यों मेरी लाइफ बर्बाद करना चाहते हो?

जय- तेरी गलती ये है की तूने मुझे थप्पड़ मारा। अब उस गलती की सजा भुगत।

रिया अपनी गलती को कोसने लगती है। लेकिन वो भी जानती थी की जय जो भी कर रहा है वो गलत है।

अब जय ब्रा का हुक निकाल देता है। रिया अपनी ब्रा नीचे गिरने से बचा रही थी।

जय- अपनी ब्रा छोड़, वरना नीचे से भी नंगी कर दूंगा।

रिया ये सुनकर उसकी तरफ गुस्से से देखता है, और कहती है- "तुम समझते क्या हो खुद का?"

जय- तेरा आशिका

रिया- "आशिक माइ फुट... दूर हटो मुझसे..." और रिया उसको खुद से दूर हटाने लगती है।

तभी जय उसकी साड़ी नीचे से उठाने लगता है।

रिया. प्लीज... नहीं।

-

जय- तो छोड़ अपनी ब्रा।

रिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे। आखीरकार, हालात के सामने वो हार मान लेती है

और अपनी सा छोड़ देती हैं। जय एकदम से उसकी ब्रा निकाल फेंकता है साइड में। जय के सामने अब रिया की गोरी गोरी चूचियां बिलकुल नंगी थी, और उसपर पिंक कलर के निपल। बस कयामत लग रहीं भी रिया उस वक्त।

जय के मुँह में पानी आ जाता है रिया की गोरी मस्त चूचियां देखकर। रिया अपना चेहरा दूसरी तरफ किए हए खड़ी थी। उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की वो इस हालत में एक बूढ़े के सामने खड़ी है। जय एक

बार रिया के चेहरे की तरफ देखता है, और फिर टूट पड़ता है उसकी गोरी चूचियों पर। जय रिया की चूचियां अपने मुँह में लेकर चूस रहा था एक-एक करके।

रिया- "अहह....

ये पहली बार था की किसी ने उसकी चूचियां चूमी थी। सौरभ सिर्फ उसकी चूचियां दबाता था। वो भी प्यार से। पता नहीं क्यों लेकिन रिया को जय का ऐसा करना एक अजीब अहसास करा रहा था।
 
जिंदगी में इतनी खूबसूरत चूचियां नहीं देखी थी। उसकी बीवी की तो काली थी। जिसे वो चूसकर थक चुका था। लेकिन रिया थी जवान और खूबसूरत। उसका मजा ही अलग था। रिया अब तक दो बार आलरेडी झड़ चुकी थी। चूचियां चूसते चूसते एक बार जय उसका एक निपल अपने दाँत से काटता है जिससे रिया को दर्द होता है।

रिया- हाय कमीने कहीं के।

गृहमाज मश्कराता है. और करता है

ता है, और कहता है- "क्या करंग तेरी चूचियां हैं ही इतने मस्त की रहा नहीं जाता..."

रिया कुछ नहीं बोलती।

जय का लण्ड पेंट में रोड की तरह सख्त हो चुका था। उसे अंदर रखने में अब जय को परेशानी हो रही

थी। वो अब रिया की चूचियां छोड़ता है। रिया जल्दी से अपनी चूचियां अपने हाथों से छुपा लेती है। जय अब अपनी पेंट की जिप खोलने लगता है। जिसे देखकर रिया दूसरी तरफ देखने लगती है शर्म के मारे। जय अपना काला मोटा लौड़ा बाहर निकालता है जो दिखने में ही गंदा लग रहा था। इसने भी राज की तरह खतना नहीं करवाया था। चमड़ी लण्ड के टोमे के ऊपर तक थी। जय अपना लण्ड हाथ में पकड़कर रिया को इस हालत में देखकर हिलाने लगता है।

रिया इधर घूमी हुई। उसे नहीं पता था की जय क्या कर रहा था?

जय- हाय क्या जिाम है तेरा एकदम गोरा।

रिया को कछ आवाज आती हैं, जैसे हिलने की। रिया जय की आवाज से उसकी तरफ देखती हैं तो हैरान रह

जाती है उसका बड़ा काला लौड़ा देखकर। रिया झट से अपनी नजर घुमा लेती हैं।

जय- देख ले कैसा है मेरा लण्ड? खूब मजे देगा तुझे।

रिया की हालत खराब भी जय की बातें सुनकर। दोनों अब ऑड़ा दूर खड़े थे। रिया अपनी चूचियां कवर किए हुए और जय अपना लण्ड पकड़े हुए। जय से रहा नहीं जा रहा था रिया की खूबसूरती देखकर। तभी वो उसकी तरफ बढ़ता है।

लेकिन अचानक रिया के मोबाइल पर किसी का काल आता है। रिया का मोबाइल उसके हाथ से नीचे गिरा हुआ

आ। रिया नीचे देखता है और उठाने के लिए नीचे झकती हैं। तभी उसकी चूचियां फिर से लटक जाती हैं। जय को ये दृश्य देखकर बड़ा मजा आ रहा था।

रिया मोबाइल पर अपने पति का काल देखकर डर जाती है। उसके चेहरे पर दूर साफ नजर आ रहा था। हो भी क्यों ना। वो इस वक्त छत पर आधी नंगी खड़ी है, एक बड़े काले ड्राइवर के सामने। रिया झट से काल उठाती है। अपने एक हाथ में मोबाइल पकड़े हुए और दूसरे हाथ से अपनी चूचियां छुपाने की कोशिश करते हुए।

रिया- हेलो सौरभ।

सौरभ- ही रिया, मैं अभी 5 मिनट में घर आ रहा है। तुम तैयार होकर रहना। एक काम है।

रिया- कैसा काम सौरभ?

सौरभ- "तुम खुश हो जाओगी। तुम सवाल मत करो। इस तैयार हो जाओ..." और सौरभ काल खतुम कर देता है।

रिया काल खतुम करके अपनी ब्रा और बलाउज़ उठा लेती हैं, और ब्रा पहन लेती है।

जय जो तब से इनकी बातें सुन रहा था, कहता है- "कहां जा रही है?"

रिया- तुमसे मतलब? में कोई तुम्हारी बीबी नहीं हूँ जो तुम पूछो उसका जवाब दूं?

जय- तो बन जा मेरी बीवी।

रिया- चुप करो।

जय- "तू ऐसे नहीं मानेगी?" और वो रिया की तरफ बढ़ने लगता है।

रिया- प्लीज़... मत को फिर से। मेरे पति घर आ रहे हैं। प्लीज़... मुझे जाना है।

जय- तु नहीं जा सकती।

रिया- क्यों?

जय- नहीं मतलब नहीं, समझी।

रिया- "प्लीज़... क्यों मुझे परेशान कर रहे हो। जाने दो मुझे प्लाज़्ज़.."

जय कुछ सांचकर- "ठीक है लेकिन एक शर्त पर?"

रिया- शर्त... कैसी शर्त?

जय- तुझे मेरे को चुम्मा देना होगा।

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रिया ये सुनकर चकित रह जाती है, और कहती है- "मैं वो नहीं करने वाली। बिल्कुल नहीं.."

जय- ठीक है तो फिर तू यहाँ से भी नहीं जाने वाली।

रिया- "प्लीज़... क्यों तुम ऐसा कर रहे हो मेरे साथ?" और रिया को एहसास होता है की टाइम जा रहा था। रिया कुछ देर इंतजार करके उधर से भागने की कोशिश करती है।

तभी जय उसे पीछे से पकड़ लेता है।

रिया- छोड़ो मुझो।

जय- मुझसे चालाकी?

रिया- प्लीज... जाने दो।

जय- चुम्मा दे।

रिया समझ नहीं पा रही थी की क्या करे? तभी बाहर नीचे से कार का हान होता है। रिया बोली- "ओह नहीं...

सौरभ आ गये प्लीज़... कमाने छोड़ मझे.." और रिया उसकी पकड़ से छुटने की कोशिश कर रही थी।

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जय- देख अब तो तेरा पति भी आ गया। जल्दी कर।

रिया के पास अब कोई चारा नहीं था। यह बात जय भी जानता था। वो रिया को छोड़ देता है। रिया लाचार होते हए जय की तरफ घूमती हैं। जय का बदसूरत चेहरा देखकर उसे जैसे उल्टी आ रही थी। जय उसे अपने गंदे दाँत निकालकर स्माइल करके दिखा रहा था।

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रिया झझक रही भी उसे किस करने में। तभी उसके मोबाइल पर फिर से उसके पति का काल आता है। वो समझ जाती है की सौरभ रूम में आ चुका है। अब तो रिया के पास बिल्कुल भी कोई चारा नहीं थी। रिया झट से अपनी आँखें बंद करती है और जय के काले होंठों पर अपने गुलाबी होंठ रख देती है, और किस करने लगती है ऊपर से हो।

जय जानता था रिया का किस बिल्कुल मॉर्डन है, उसकी तरह नहीं अनाड़ी की तरह। रिया के किस के जोश में जय रिया के चेहरे को पकड़कर अपनी तरफ खींचता है। रिया को अब तकलीफ हो रही थी सांस लेने में। एक मिनट किस करने के बाद रिया जैसे तैसे किस तोड़ती है और हाँ फते हुए अपने होंठ अपने हाथों से पोंछने लगती है। क्योंकी उसने अभी-अभी एक गंदे बढ़े के काले होंठ को किस किया था।

जय खुश था रिया के खुद उसको किस करने से।

रिया जल्दी से अपनी ब्लाउज़ पहनकर खुद को ठीक करती हैं और वहाँ से भाग जाती है।

जय. "साली अभी तेरे साथ बहुत कुछ करना बाकी है। मुझसे पंगा लेती है। देख मैं तेरी क्या हालत करता

-

इधर रिया भाग भागकर रूम में जाती है। वहीं सौरभ काल कर रहा था उसी को।

रिया- राजा

सौरभ- रिया तुम कहां हो यार। कब से काल लगा रहा हूँ तुमको, और मैंने तुमको तैयार रहने के लिए बोला था जा... तुम अभी तक नहीं हुई। तुम गई कहां थी?

रिया- "सौरभ बो में... वो में.. और रिया को समझ में नहीं रहा था की वो क्या बोले।

सौरभ- छोड़ो वो सब। जाओ जल्दी तैयार हो जाओ।

रिया जल्दी से वार्डरोब से एक साड़ी, ब्लाउज़ निकालकर बाथरुम चली जाती है। 10 मिनट बाद तैयार होकर दोनों रूम से बाहर निकलते हैं। तभी जय छत पर से उसी रास्ते से आ जाता है। रिया जय को देखकर डर जाती है।

सौरभ- "अरे तुम यहां क्या कर रहे हो पर? घर के अंदर?" सौरभ गुस्से से बोलता है।

जय- साहब वो टंकी में लोकेज का प्राब्लम था तो बड़ी मालकिन ने ठीक करने के लिए बोला था।

रिया को पता था की जय झठ बोल रहा है। रिया उसे गुस्से से देखती है। जय डबल मीनिंग बात कर रहा हैं, ये रिया को भी समझ में आ रहा था।

सौरभ- ठीक है, हो गया क्या?

जय- "नहीं साहब बहुत कुछ बाकी है.." ये बात जय रिया की तरफ देखकर बोलता है।

रिया तो शर्म से लाल हो जाती है।

सौरभ- ठीक है जल्दी कर देना।

जय- जी साहब।

सौरभ- चलो रिया हम लेट हो रहे हैं।

जाते हुए रिया एक बार जय को गुस्से से घूरती है।

जय उसे स्माइल करके दिखाता है। फिर रिया और सौरभ चले जाते हैं। जय भी वहाँ से चला जाता है नौकर क्वार्टर्स।

***** ****

कड़ी_26

इधर नेहा को माल में शापिंग करते हुए एक घंटा हो चुका था। राज बाहर इंतेजार कर रहा था उसका। वो इंतेजार कर-करके बोर हो रहा था।

राज- "साली क्या कर रही हैं अंदर? इतना देर क्यों लगा रही है ये? खरीदारी तो ऐसे कर रही है जैसे इसकी

शादी हो..."

थोड़ी देर बाद नेहा बाहर आ जाती हैं माल के। उसके हाथ में काफी सारे शापिंग बैंग थे। आज नेहा ने जमकर शापिंग की थी।

राज- "साला ये तो सारी दुकान उठा लाई है। इसके पति के पास पैसा बहुत है ना। त फिकर मत कर मेरी बलबल, तेरे सारे पैसों का में ठीक तरह से इस्तेमाल करेंगा एक दिन।

नेहा कार के पास पहुँचती है- "दरवाजा खोलो.."

राज. क्या जानेमन कुछ ज्यादा खरीदारी नहीं कर लो?

नेहा- तुमको क्या है? तुम्हारे पैसे से तो नहीं लिया ना?

राज- तेरे बायफ्रेंड के पास पैसे नहीं हैं तो मार ले ताने।

नेहा- तुम दरवाजा खोली।

राज दरवाजा खोलता है। नेहा बैगस अंदर रखती हैं।

नेहा- "एक मिनट में आती हैं... फिर वो वालम माल चली जाती है।

राज- फिर से?

थोड़ी देर बाद नेहा वापस आती है। अभी भी कछ बैंगस थे उसके पास।

राज- तुझे क्या आज पूरी दुकान खरीदने का इरादा है क्या?

नेहा उसके तरफ देखते हुए- "हाँ दुकान ही ले लेनी है पूरी। तुम चलो अब.."

राज- बिल्कुल मेरी जान... चलते हैं।

नेहा बैठ जाती है। फिर राज कार चला देता हैं। नेहा खुश भी। आज उसने काफी सारी शापिंग की औ। राज नेहा को देख रहा था मिरर से।

राज- बहुत खुश है आज मेरी गर्लफ्रेंड।

नेहा उसकी तरफ देखकर स्माइल करते हुए. "चुप रहो, और कार चलाओ.."

राज- चल ला किधर भी घूमकर आते हैं।

नेहा- क्या, पागल हो क्या?

राज- हाँ पागल हो गया है तेरे प्यार में।

नेहा- "क्या प्यार? तुम सच में पागल हो गये हो। पहले शकल देखो अपनी मिरर में। बूढ़े कहीं के... नेहा की कहने के अंदाज में एक अलगपन था। एक अदा के साथ वो बोल रही थी।

राज- चल ना।

नेहा- मैं क्यों आऊँ तुम्हारे साथ किधर भी? तुम हो कौन मेरे?

राज- तू मेरी गर्लफ्रेंड है और बायफ्रेंड गर्लफ्रेंड कहीं भी घूम फिर सकते हैं।

नेहा शर्मा जाती है।

राज. तो तैयार है ना तू?

नेहा- मैंने कहा ना, मुझे नहीं जाना किधर भी।

राज- "एक बार अपने इस बूढ़े बायफ्रेंड की मुराद पूरी कर दे..."

नेहा बटे बायफ्रेंड की नाम से शर्मा जाती हैं।

नेहा मन में. "कमीना कहीं का। घुमाने जाना है इसको। बड़ा आया गर्लफ्रेंड को घुमाने वाला। जेब में 10 रूपये नहीं हैं। घुमाने जाना है इसको.." फिर नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है।
 
नेहा- एक रूपये भी है क्या जेब में?

राज- तू किसलिए है। तू मेरी गर्लफ्रेंड है ना... तू ही पैसे दे दे।

नेहा चुप रहती है। राज कार चलता हुआ रोड साइड फर एक चाटवाले के पास रोकता है।

नेहा कार इधर रुकी हुई देखकर- “यहां क्यों कार रोकी?"

राज- चल चाट खाते हैं मेरी जान।

नेहा- मुझे नहीं खानी समझे तुम।

राज- ऐसा क्यों बोल रही है? कुछ तो रहम कर अपने इस डे बायफ्रेंड पर मेरी जान।

नेहा- मुझे नहीं खानी।

राज- एक बार मेहरबानी कर दे, सिर्फ एक बार।

नेहा मन में- "इतना बोल रहा है कमीना। चलकर खा लेती हैं। एक बार खाने में कोई प्रोबलम नहीं हैं। अपने सो काला बायफ्रेंड के साथ..."

इसी के साथ नेहा के चेहरे पर एक शरारती स्माइल फैल जाती है। राज उत्तर चुका था। नेहा भी अब दरवाजा खोलकर उतर जाती है। नेहा की खूबसूरती वहीं खड़े कुछ लो-क्लास लोग देखकर हयान रह जाते हैं। गोरा बदन, खूबसूरत जुल्फे, सब कुछ बस लाजवाब। राज आगे जाता है।

राज- ये चाटवाला दो पानी-पूरी बना।

चाटवाला नेहा को देख रहा था। चाटवाला धीरे से- "साहब कौन है ये?"

राज- मेरी गर्लफ्रेंड है।

चाटवाला ये सुनकर चकित रह जाता है की इतनी खूबसूरत औरत इतने गंदे बूदें की गर्लफ्रेंड। चाटवाला हैरानी से नेहा को देखने लगता हैं। गर्लफ्रेंड वाली बात नेहा ने भी सुनी थी। नेहा को गुस्सा आ रहा था की राज सबसे बोलते फिर रहा था की वो उसकी गर्लफ्रेंड है।

चाटवाला दो पानी-पटी बनाकर देता है। राज और नेहा खाने लगते हैं। नेहा को भी खट्टा अच्छा लगता था। वो भी मजे से खाने लगती है पानी-पी। वो जल्दी से खतम कर देती हैं।

राज- अरे एक और बनाना।

नेहा कुछ नहीं बोलती। चाटवाला बनाकर दे देता है। नेहा फिर से खाने लगती है।

नेहा इस बार राज के नजदीक जाकर- "राज तुम ये क्या कर रहे हो?"

राज- क्या कर रहा हूँ?

नेहा- गर्लफ्रेंड वाली बात तुमने उसको क्यों बताई?

राज- अब तू गर्लफ्रेंड है तो बताई।

नेहा उसको घूरने लगती है। वो साथ में खा भी रही थी। वहीं खड़े लोग नेहा को राज के इतना करीब देखकर हैरान रह जाते हैं। उनकी तो लगा था की राज ड्राइवर ही होगा, और जरर नेहा उसकी मालोकन। लेकिन नेहा को राज के इतना करीब देखकर सब लोग बिलकुल हरान थे। खाने के बाद हा कार की तरफ जाने लगती है।

तभी राज- "जानेमन पैसे दे दे..."

नेहा रुक कर पीछे गुस्से से राज को देखती है। क्योंकी राज ने फिर से उसे लोगों के सामने जानेमन बोला था। नेहा अपने पर्स में से 500 रुपये निकालकर राज को दे देती है। राज उसको अपने गंदे दाँत दिखाते हुए स्माइल करता है। नेहा कार में जाकर बैठ जाती है। राज चाटवाले को अपनी जेब से 50 रुपये देता है, और नेहा को दिए हुए 500 रूपये खुद रख लेता है।

चाटवाला- साहब छुट्टा तो नहीं है। 10 रूपये रह गये।

राज- " रख ले रख ले। मेरी तरफ से टिप समझ... और उसकी तरफ आँख मारता है।

राज फिर कार में जाकर कार दौड़ा देता है। वहीं खड़े लोग सब चकित थे। वहाँ खड़े लोग बातें कर रहे थे।

"यार ये माल उस बटे के हाथ कैसे लगी होगी?"

" हाई यार, साली बड़े घर की लग रही है। लेकिन उस आदमी के साथ कैसे?" ऐसी ही बातें होती हैं।

इधर कार में नेहा- "तुम पागल हो क्या? उधर क्यों बोल रहे थे की मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ कहकर..

राज- जानेमन लोगों को भी पता चलना चाहिए ना की हम दोनों बायफ्रेंड-गर्लफ्रेंड हैं।

नेहा उसे घूरते हुए- "देखो तुम हद से ज्यादा बढ़ रहे हो। मैं कोई तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं हूँ समझे?"

राज- मेरी जान तू मान या ना मान... तू है मेरी और सिर्फ मेरी।

नेहा को समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या बोले? क्योंकी ये बूढ़ा उसको अपनी बनाने पर तुला हुआ था। नेहा चुप करके बैठ जाती है।

राज- मेरी जान आगे आकर बैठना।

नेहा- क्या?

राज- बैठ जा... मजा आएगा।

नेहा- किसको?

राज हँसकर- "दोनों को..."

नेहा के चेहरे पर भी स्माइल आ जाती हैं।

राज कार रोकता है, और कहता हैं- "चल आ जा आगे..."

नेहा- मैं नहीं आने वाली।

राज- अरे आ ना.. कुछ नहीं होता।

नेहा- मुझे पता है कुछ ना कुछ गलत हरकत करोगे तुम।

राज- अब करने के लिए बचा क्या है मेरी बलबल? सब कुछ तो कर लिया तेरे साथ।

नेहा शर्म से लाल हो जाती है, और कहती है- “रहो बदमाश कहीं के...."

राज- आ ना आगे।

नेहा- नहीं।

राज- ठीक है तो फिर कार भी नहीं चलाऊँगा।

नेहा- क्या? कमीले चुपचाप कार चलाओ। मुझे घर पहुँचना है।

राज- तू आगे बैठ फिर मैं चलता है।

नेहा- क्या पागलपन है ये? प्लीज... कार चलाओ।

राज. तू बैठ रही है या नहीं?

नेहा मज़बर थी- "ठीक है.." और नेहा दरवाजा खोलकर बाहर आती हैं फिर आगे आकर बैठ जाती है। बैठते हुए वो एक बार राज को गुस्से में देखती है।

राज- ये हुई ना बात।

नेहा- चुप रहो। देखो राज ये सब ज्यादा हो रहा है।

राज- क्या ज्यादा हो रहा है मेरी जान?

नेहा चुप रह जाती है।

राज अब कार चलाने लगता है। गियर चेंज करते हुए वो नेहा के हाथ से हाथ लगा रहा था। दोनों के हाथ बार बार टच हो रहे थे।

राज. जानेमन, तुझे देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा। एक बार हिला दे ना।

नेहा- क्या? बिल्कुल नहीं। तुम सच में पागल हो। तुमने मुझे समझ क्या रखा है? मत भूलो तुम ड्राइवर हो।

राज- ड्राइवर हूँ साथ में तेरा बायफ्रेंड भी तो हूँ। कर देना।

नेहा- मैंने कहा ना। नहीं।
 
राज अपना काला लौड़ा पेंट से बाहर निकालता है।

नेहा जिसे देखकर दूसरी तरफ देखने लगती है।

राज- देख कैसे तड़प रहा है मेरा लण्ड तेरे लिए।

नेहा दूसरी साइड देखती रहती है, और कहती है- "शर्म नहीं आती ऐसी बातें करते हर।

राज- अपनी गर्लफ्रेंड से कैसी शर्म? हिला ना ।

नेहा जा में गर्दन हिलाती है। राज का काला लण्ड बिना एक्सन के भी बड़ा लगा रहा था। आस-पास सफेद झांटें भी। एकदम गंदा लग रहा था।

राज- "कर देना... बस एक बार ... बोलकर राज नेहा का गोरा हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रखता है।

नेहा झट से अपना हाथ हटा लेती है। राज फिर से उसका हाथ अपने काले लण्ड पर रखता है। इस बार वो पिना हाथ भी नहीं हटाता। नेहा के गोरे हाथ में राज का बेहद गंदा लण्ड था। नेहा को महसूस हो रहा था की राज के लण्ड की नसें फूल रही हैं। मुरझाए होने के बाद भी उसका लण्ड काफी बड़ा लग रहा था। राज एक हाथ से ड्राइव कर रहा था और दूसरे हाथ से नेहा का हाथ पकड़कर उसे ऊपर-नीचे हिला रहा था।

नेहा शर्म के मारे इधर नहीं देख रही थी। राज अब धीरे से अपना हाथ हटा लेता हैं नेहा के हाथ से। नेहा अंजाने में राज का लण्ड हिलाती रहती है। राज को भी बहत मजा आ रहा था। हो भी क्यों ना। वो ठहरा एक काला बदसूरत बूढा, उसका काला गंदा लौड़ा एक खूबसूरत बड़े घर की बहू हिला रही थी। नेहा के हाथ का जादू बहुत जल्दी चल रहा राज के लण्ड पर। बो झड़ने के करीब आ। तभी नेहा को पता नहीं क्या हो जाता है की वो अपना हाथ हटा लेती है। राज हैरान रह जाता है। उसकी मूठ निकलने ही वाली थी की उसने हाथ जो हटा लिया। नेहा हसने लगती है।

राज. ये क्या किया तुमने? ऐसा अधरा मत छोड़ मुझे।

नेहा- "ऐसा ही होना चाहिए तुमको.." और नेहा से जा रही थी।

राज का लण्ड झटके खा रहा था। झड़ने के इतना करीब आकर उसके लण्ड पर नेहा ने जैसे हौड़ा मार दिया था। राज अब अपने हाथ से ही अपना लण्ड हिलाने लगता है। उसकी जल्द ही मूठ निकल जाती है।

राज- "तू देखने, इसका बदला कैंसे लेता हूँ में तुझसे?"

नेहा उसे ठेंगा दिखाती है। जल्द ही घर आ जाता है। नेहा दरवाजा खोलकर राज की तरफ देखकर हँसती है और अपने बैंगस लेकर अंदर चली जाती है। राज भी कार पार्क करके नौकर क्वार्टर्स चला जाता है।

वहाँ पर जय लेटा हुआ था।

राज- अबे क्या कर रहा है?

जय- कुछ नहीं बस लेटा हूँ।

राज- उस छोटी वाली से काम हुआ या नहीं?

जय- कर रहा हूँ। साली को मसल चुका हूँ एक बार।

राज- "शाबाश दोनों एक नम्बर की रंडिया हैं। इन दोनों को अपनी रखेल बनाकर रखना है..." कहकर दोनों हँसते हैं।

सौरभ रिया को लंच पर ले गया था। एक रोमांटिक लंच डेट पर। वो जाकर वापस आ जाते हैं। रिया खुश थी कि उसका पति उससे इतना प्यार करता है।

शाम में डिनर के बाद सब लोग अपने-अपने रूम में चले जाते हैं। रिया और सौरभ अपने रूम में।

सौरभ- रिया कैसी रही लंच डेट?

रिया- अच्छी थी। बिलकुल फिल्मी टाइप।

सौरभ- कभी डिनर पर भी चलते हैं। ऐसा बोलकर वो रिया को अपनी बाहों में ले लेता है।

रिया- "अच्छा... लेकिन मुझे तो नहीं जाना... और वो हँसती है।

सौरभ- क्यों?

रिया- ऐसे ही।

फिर दोनों के बीच पति पत्नी वाला प्यार होता है। एक घंटे बाद दोनों थक कर लेट जाते हैं।

सौरभ- यार ये पानी नहीं है इधर।

रिया- सारी। लगता है यह गवार नीलू पानी रखना भूल गई। मैं अभी लेकर आती हैं।

रिया अपनी साड़ी ठीक करके दरवाजा खोलकर बाहर चली जाती है। वो सीढ़ियां उतरकर किचेन में चली जाती है।

वो फ्रिज के पास जाकर उसमें से ठंडा पानी निकालती हैं, जो एक बोतल में था। फिर एक जग लेकर उसमें वो पानी डालती हैं। फिर जैसे ही वो फ्रिज़ का दरवाजा बंद करने लगती है। किसी के दो हाथ उसको पीछे से पकड़ लेते हैं। उसकी कमर के पास कोई दो काले हाथ उसको घेरे हर थे। रिया चौक जाती है।

रिया- "कौन है? छोड़ो मुझे.."

रिया ज्यादा जोर से नहीं चिल्लाती। वो आदमी उसको पकड़े रहता है। उसकी गोरी कमर पर अपने काले हाथ लगाते रहता है। वो रिया से बिल्कुल चिपका हुआ था पीछे से। रिया उसकी पकड़ से छुटने की कोशिश कर रही थी। लेकिन थोड़ी देर पहले पति के साथ चुदाई की वजह से वो काफी थक चुकी थी। विरोध करने की भी उसमें ताकत नहीं थी।

वो आदमी अब रिया के गले को पीछे से चूमने लगता है। रिया को महसूस हो रहा था की उस आदमी का लण्ड उसकी गाण्ड को दरार में जा रहा है। रिया चाहे थकी हुई थी, लेकिन अब वो इस आदमी की हरकतों से गरम हो रही थी। वो आदमी लगातार अपने काले हाथ रिया की कमर पर चला रहा था। गोरी पतली कमर, गले को चमने की वजह से रिया की आँखें भी अब मदहोशी में बंद होने लगी भी। वो आदमी अब अपने हाथ धीरे से रिया की चूचियों पर ले जाता है। फिर मसलने लगता है।

रिया की मस्त चूचियां वो अच्छी तरह से मसलने लगता है। वो चूचियां बड़ी ही सेक्सी अंदाज में मसल रहा था। जैसे आंटा गंध रहा हो। चचियां दबाते हए वो रिया के गले पर चुम्मा दे रहा था। रिया सिसकारियां भी अब् लेने लगी भी। उसका विरोध भी काफी हद तक कम हो चुका था। रिया के लिए खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। जिसका फायदा पीछे खड़ा आदमी बखब्बी उठा रहा था। वो आदमी अब अपना हाथ रिया के ब्लाउज के अंदर डाल देता है, और ब्लाउज के अंदर से वो रिया की गोरी चूचियां दबाने लगता है। रिया के निपल टाइट हो चुके थे जिसे वो आदमी पिंच कर रहा था। इतनी खूबसूरत औरत की नंगे चूचियां उस आदमी के लिए बहुत कुछ था। उस आदमी का लण्ड बिल्कुल टाइट रिया की गाण्ड को पीछे से तंग कर रहा था।

रिया- "प्लीज़... छोड़ो मुझे कौन हो तुम्म अह्ह.." रिया अपनी मदहोश आवाज़ में बोलती हैं।

वो आदमी कुछ नहीं बोलता।

रिया का पति अपने कमरे में लेटा हआ रिया के पानी लाने का इंतजार कर रहा था। लेकिन उसे क्या पता के उसकी बीवी को कोई अंजान आदमी कैसे मसल रहा है?

इधर वो आदमी अब रिया की कमर से अपने हाथ साड़ी के अंदर से नीचे ले जाते हुए उसकी पेंटी पर ले जाता है। उस आदमी को महसूस होता है की रिया की पेटी गीली हो चुकी है। उसे पता था की रिया उसके टच से ही गरम हो गई हैं। वो आदमी अब रिया की नंगी गोरी पीठ पर हल्के-हल्के चुम्मे देने लगता है। रिया भी नेहा की तरह एक डॉटी वाला ब्लाउज़ पहनती औ। इस वक्त भी उसने ऐसा ही एक ब्लाउज पहना हुआ था। अब वो आदमी रिया की ब्लाउज़ की डोरी निकालने लगता है।

रिया- "प्लीज़... मत करो.." रिया उस आदमी को रोकने की कोशिश करते हुए कहती है।

लेकिन वो आदमी उसका हाथ हटा लेता है और डोरी खींच देता है। अब रिया की परी पीठ नंगी थी। वो आदमी बस टूट पड़ता है उस गोरी पीठ पर। चुम्मों की बारिश कर देता है उस चिकनी पीठ पर।

रिया की सिसकारियां निकल रही थी अबा रिया खुद को भी पता नहीं था की आखीरकार, वो आदमी है कौन। लेकिन इतना जरूर अहसास आ उसे की उस आदमी ने उसको बहुत गरम कर दिया है। वो आदमी अब अपना शर्ट निकलकर ऊपर से नंगा हो जाता है। उस आदमी को बालों से भारी हुई छाती, प्रशीने के बू भी आ रही थी। काले सफेद बालों से भरी हुई थी वो छाती। अब वो आदमी रिया की नंगी पीठ से पीछे से चिपक जाता है, और उसकी चूचियां पकड़ लेता है।

रिया- “आहह.."

उस आदमी को गरम छाती के अपनी नंगी पीठ के मिलन का अहसास ही रिया के जिस्म में करेंट सा दौड़ जाता है। रिया का जिक्ष्म अब उसका बिल्कुल भी साथ नहीं दे रहा था। वो अभी-अभी अपने पति के साथ सेक्स करके आई थी, लेकिन इस आदमी ने फिर से उसे गरम कर दिया था। शोड़ी देर चूचियां दबाने के बाद वो आदमी अब अपने हाथ नीचे लाता है पेटी तक ले जाता है, और पेंटी के अंदर एक हाथ डालता है। जैसे ही उस आदमी का हाथ नेहा की दहकती गरम चूत पर पड़ता है रिया की एक लंबी सिसकारी निकलती हैं।

रिया- "अहह... आहह..."

जैसे उसे किसी चीज की राहत मिली हो। जैसे गरम लोहे पर किसी ने पानी डाल दिया हो। रिया की आँखें अब नशीली हो गई थी। उस आदमी की उंगलियां अब रिया की चूत से खेलने लगती हैं। वो आदमी ऊपर से ही अपनी उंगलिया रिया को गुलाबी चूत पर फेर रहा था।

रिया के हाथ अब उत्तेजना में कुछ करने के लिए मचल रहे थे। उसे समझ मेंनहीं आ रहा था की वो क्या करे? उस आदमी ने उसे पागल कर दिया था। रिया अब भल चुकी थी कि वो इस घर की बहू है। इतने बड़े घर की बहू। रिया की क्लिट को भी वो आदमी छेड़ रहा था। उस आदमी को रिया के चत कर पता चल रहा था की रिया काफी गरम हो चुकी है।

अब वो आदमी अपनी उंगली रिया की चूत में डाल देता है। चूत में उंगली जाते हो रिया अपने हाथ आगे लेजाकर साड़ी के ऊपर से ही उस आदमी के हाथ पर रख देती है और दबाने लगती है। उस आदमी के चेहरे पर स्माइल आ जाती है।

रिया- "अहह... उफ्फ्फ

.. अहह.. उम्म्म्म

..."

वो आदमी रिया की चूत को अब टटोलने लगता है अपनी उंगली से। रिया को गुलाबी चूत को जो लगातार अपना रस छोड़ रही थी। वो आदमी अब अपना एक हाथ बाहर निकालकर रिया के चेहरे के पास ले जाता है। रिया अपनी आँखें धीरे से खोलकर उस हाथ को देखती है। वो हाथ काला एकदम गंदा लग रहा था। उसकी उंगलियों पर चिपचिपा सा कुछ दिख रहा था।

रिया को समझने में देर नहीं लगती के वो क्या है? वो जानती थी के बी उसी का चूत रस है। रिया की आँखें शर्म के मारे झुक जाती हैं। वो आदमी अपना हाथ रिया के खूबसूरत चेहरे के और करीब लाता है। रिया को नहीं पता था की वो आदमी क्या चाहता है? वो आदमी अब अपनी रस से भरी एक उंगली रिया के मुँह के करीब लाता है। रिया अब समझती है की वो क्या चाहता है? रिया अपना ही रस कभी नहीं चसना चाहती थी, लेकिन यही सिचुयेशन ही कुछ ऐसी बन गई थी। रिया झिझक रही थी। तभी वो आदमी अपने दूसरे हाथ की उंगली रिया की चूत में भी वो और अंदर घुसाता है।

रिया- "अहह..."

रिया का मुँह खुलते ही वो आदमी अपनी उंगली रिया के मुँह में डाल देता है। रिया को पहली बार अपनी ही चूत के रस का स्वाद मिलता है, जो थोड़ा नमकीन, थोड़ा पानी जैसा आ। रिया को बहुत शर्म आ रही थी खुद से की वो इस वक्त किचेन में खड़ी है, एक अंजान आदमी के साथ ये सब करते हुए। रिया की चूत अब झड़ने की बिल्कुल नजदीक थी। तभी वो आदमी जोर-जोर से अपनी उंगली उसकी चूत में अंदर-बाहर करने लगता है।

रिया- "अहह.. उम्म्म्म

... आहह.." करती हैं।

रिया की चूत से पूछ-पूछ-पूछ की आवाज आ रही थी। जो रिया की चूत के रस का था, जो उंगली करने से आ रही थी। वो आदमी पटी रफ़्तार से उसकी चूत में उंगली कर रहा था।

रिया- "अहह.. उम्म्म्म

.."

थोड़ी देर बाद रिया का हौप ओर्गेज्म होता है। वो बहुत ज्यादा झड़ी थी। जैसे उसके जिस्म में से बहुत कुछ निकल गया हो। रिया हॉफने लगती है। वो थोड़ा झुक गई थी अकने की वजह से। वो आदमी अपना हाथ उधर से निकालकर एक बार रिया की चूचियां पकड़ लेता है और दो-तीन बार जोर-जोर से दबाता है और अचानक ही अपनी शर्ट पहनकर उधर से चला जाता है।

रिया वहाँ पर खड़ी पूरी तरह से अविश्वास में थी, जो भी उसके साथ थोड़ी देर पहले हआ। वो जिंदगी में पहली बार इतना झड़ी भी। थोड़ी देर बाद रिया अपनी सांसों पर काबू पाती है और अपनी साड़ी ठीक करता है।

रिया- "कौन था वो आदमी? ये क्या हो रहा है मेरा साथ? दिल में वो बुड्ढ़ा ख़ूसट और अब ये कौन था? कहीं वहाँ तो नहीं, और मुझे भी ना जाने क्या हो जाता है। मुझे ये सब रोकना होगा। ये बहुत गलत हो रहा है मेरे साथ... और रिया अब पानी का जग लेकर वापस सौदियां से चली जाती हैं। रूम में जाकर देखा तो सौरभ सो गया

रिया- "ओह नहीं। सौरभ तो सो गये। पता नहीं कितनी देर लगी मुझे पता नहीं कौन था वो कमीना आदमी। ये मेरा जिम भी न जाने क्यों मेरा साथ नहीं देता उस वक्त? रिया सांच-सांचकर थक जाती है। वो वैसे भी फाजिकल्ली अक चुकी थी। इसलिए वो अब बेड पर लेट जाती है और नींद की आगोश में चली जाती है।

***** ****
 
सुबह जब रिया उठती है तो उसका पति आफिस जा चुका था। वो काफी लेट उठी थी। रिया को लेटे हुए कल रात का दृश्य याद आता है जब किसी आदमी ने किचेन में उसके साथ इतना सब कुछ कर दिया था। लेकिन उसे अभी तक पता नहीं चल पाया था की वो आदमी आखीरकार, था कौन।

लेकिन एक बात नोटिस करने वाली थी उसके लिए की उस अंजान आदमी की हरकतों ने उसको झड़ने पर मजबूर कर दिया । रिया नहीं समझ पा रही थी की उसकी जिंदगी में क्या हो रहा है। उसे नहीं पता था की इतने बड़े घर की बहू होने के बावजूद उसे आगे क्या-क्या सामना करना पड़ेगा। रिया इसके बारे में ज्यादा ला सोचते हुए फ्रेश होकर नीचे चली जाती है।

इधर नौकर क्वार्टर्स में आज जय काम पर गया हुमा । फैक्टरी में ट्रक चलाने। लेकिन हमेशा की तरह आलसी पड़ा हुआ था। ऊपर से नेहा की पति का उसपर मेहरबानी दिखना। राज के मजे थे बस। राज लेटा हुआ सिगरेट पी रहा था। तभी उधर उसे बाहर कुछ आहट महसूस हई। पहली बार तो वो अनदेखा कर देता है लेकिन दूसरी बार भी आहट होने पर राज अब दरवाजा से झौंक कर बाहर देखता है।

बाहर नेहा को टहलता देखकर वो खुश हो जाता है एकदम। नेहा ने हमेशा की तरह बैंकलेश साड़ी पहनी हुई थी। और आगे से उसकी गोरी कमर दिख रही थी थी। उसके खूबसूरत चेहरे पर लाल लिपस्टिक और बिखरे गजब की लग रही थी नेहा उस वक़्त। लोकल नेहा इतना तैयार किसके लिए हुई थी? राज नेहा को बस देखता रह जाता है। नेहा हालांकी बस टहल रही थी। लेकिन बार-बार वा नौकर क्वार्टर्स की तरफ देख रही थी। राज के लिए नेहा का उधर देखना ही काफी था।

तभी राज दरवाजा पर आते हुए. "मेरी बुलबुल क्या माल लग रही है तू आज? क्या इरादा है?

नेहा दरवाजर की तरफ देखते हुए एक बार के लिए स्माइल करती है, और कहती है- "क्या कहा? माल.."

राज- हाँ मेरी जान।

नेहा- चुप रहो तुम समझे।

राज- तू चीज़ ही मस्त है मेरी बुलबुल। चुप रहना नहीं होगा मुझसे।

नेहा के चेहरे पर फिर से स्माइल आ जाती है, और कहती है- "तुम बस चुप करी.."

तभी वहाँ एक आदमी आता है जो दिखने में वर्कर लग रहा था। उसके हाथ में कुछ कटिंग मशीन और कुछ सामान था। उधर मुख्य दरवाजे से सावित्री वर्मा आ रही थी उसके साथ। वो नेहा की तरफ ही आ रही थीं। राज उनको आता देखकर नौकर क्वार्टर में चला जाता है। लेकिन वो छुपकर सब देख रहा था।

सावित्री उधर आकर- " बहू ये आदमी घास काट देगा इधर को। तुम इसे अपने हिसाब से बता दो कहीं काटना है। ठीक है?"

नेहा- जी मम्मीजी, मैं बता दूँगी।

सावित्री ठीक है में थोड़ा बाहर जा रही हैं। आते-आते शायद देर हो जायेगी।

नेहा- "जी मम्मीजी."

फिर सावित्री चली जाती हैं।

नेहा- ये तुम इधर से शुरू कर दो।

वर्कर- जी मेडम।

फिर वो वर्कर काम शुरू कर देता है कटिंग का। दरवाजे से राज बाहर झाँक रहा था। नेहा जानती थी की राज जरूर उसे देख रहा होगा। नेहा दरवाजे की तरफ देखती है तो उसे राज का काला बदसूरत चेहरा दिखता है लेकिन आजकल नेहा को जैसे मस्ती चड़ी हई थी। नेहा राज के चेहरे पर गुस्से का भाव देख पा रही थी। जैसे राज को वर्कर को लेकर जलन हो।

नेहा मन में "ता कमीने को इस आदमी से जलन हो रही हैं। कमाने को अपनी गर्लफ्रेंड को किसी और के करीब देखकर गुस्सा आ रहा है। इसको और गुस्सा दिलाता है."

नेहा कुछ सोच कर उस वर्कर के करीब जाती है।

नेहा- "हाँ भैय्याजी उधर भी करना।

नेहा थोड़ा झक कर देख रही थी जिसमें उसकी हल्की क्लीवेज उस वर्कर को भी दिख रही थी। नेहा तिरछी नजर से राज को देख रही थी जो काफी गुस्से में लग रहा था। नेहा जो कल तक इन गंदे लो-क्लास लोगों से दूर हो रहती भी, आज एक गंदे बढ़े हाइवर को जलाने के लिए एक लो-क्लास वर्कर के करीब जाकर उसे अपना क्लीवेज दिखा रही थी। सच में ही नेहा की लाइफ काफी चेंज हो गई थी। नेहा एक बार के लिए हँस पड़ती है राज को

गुम्सा आता देखकर।

नेहा मन में. "बिहेव तो ऐसे कर रहा है जैसे मेरा पति हो। कमीना कहीं का...

वो वर्कर भी बौखला गया था इतनी खूबसूरत औरत का क्लीवेज देखकर। नेहा की नजर उसके काम पर कम राज पर ज्यादा थी। पता नहीं क्यों? लेकिन नेहा को मजा आ रहा था राज को तड़पाने में। थोड़ी देर बाद नेहा को पीछे से राज आवाज देता है।
 
राज- मेरी जान।

वो वर्कर ये बात सुन लेता है। उसको ताज्जुब होता है कि ये बूढ़ा काला आदमी इस खूबसूरत औरत को जान बोल रहा है। वो वर्कर नेहा की तरफ हानी से देखने लगता है। नेहा खुद ये उम्मीद नहीं कर रही थी।

नेहा राज को घूर कर देखती है। फिर उस वर्कर की तरफ देखते हुए- "तुम काम करो जल्दी.."

नेहा फिर राज के और नजदीक जाकर- "तुम्हारा दिमाग खराब है क्या? उस आदमी के सामने क्यों ऐसा बोला तुमने

राज- "वो सब छोड़... त उसके इतना करीब क्यों जा रही है?"

नेहा को अब शोड़ी मस्ती सूझती है- "मैं कुछ भी करें तुमको उससे क्या?"

राज कन्फ्यू ज होते हुए- "क्या?"

नेहा- मेरी मर्जी। मैं जो चाहे करूँ ।

राज- ये मत भूल की तू मेरी गर्लफ्रेंड है।

नेहा- नहीं हूँ मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड।

राज- "क्या बोली?" और ऐसा बोलकर राज नेहा को अंदर खींच लेता है। जो वो वर्कर देख नहीं पता। अंदर खींचकर राज नेहा को दीवार से सटा देता है।

नेहा- क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे।

राज तू क्या बोल रही थी मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है ?

नेहा- छोड़ो मुझे।

राज- और तू उस आदमी के इतना करीब क्यों जा रही थी?

नेहा जानती भी राज उस आदमी से जलन महसूस कर रहा है, बोली- "तुमको उससे क्या, में कुछ भी करेंग?" लेकिन नेहा के चेहरे पर स्माइल आ रही थी। वो अपनी खुशी छुपाए नहीं पा रही थी।

लेकिन राज जेलसी में ये सब नहीं देख पा रहा था, कहा- "देख में बोल रहा हूँ की उसके करीब मत जा.'

नेहा- क्या मत जा हाँ? क्या कर लोगे तुम?

राज- "क्या कर लेंगा, अभी देख?" और राज नेहा की चूचियों पर अपना मुँह रख देता है साड़ी के ऊपर से ही, और मसलने लगता है।

नेहा- "हे राज.. छोड़ो मुझे क्या कर रहे हो?"

राज- "तुझे सीधी बात समझ में नहीं आती ना... अब देख..' कहकर राज बड़े पागलपन तरीके से नेहा की चूचियों को मसल रहा था।

नेहा की सिसकारी शुरू हो चुकी थी. "अहह... राज.." और नेहा उसको हल्का-हल्का अपने से दूर करने की कोशिश कर रही थी। नेहा जानती भी अगर राज को यहाँ नहीं रोका तो वो यहाँ पर उसकी चुदाई कर देगा।

नेहा- प्लीज़... राज मत करो। छोड़ो मुझे।

राज- तुझे बहुत नजदीक जाना है ना उसके। अब जा।

नेहा- सारी ... अब नहीं जाऊँगी। छोड़ो मुझे।

राज- तू फिर से जाएगी।

नेहा- मैं नहीं जाऊँगी।

राज- अगर गई तो?

नेहा- तो क्या?

राज- तू अगर उसके आस-पास भी गई ना.. तुझे जो मैं कहूँगा वो करना पड़ेगा।

नेहा- मैं नहीं जाऊँगी।

राज- चल ठीक है। अब अपने बायफ्रेंड को एक चुम्मा दे।

नेहा- मैं नहीं देने वाली।
 
राज- अपने बायफ्रेंड को ना करेंगी क्या?

नेहा- मैं नहीं देने वाली, समझे तुम।

राज- दे रही हैं या मैं खुद ले लें बोल?

नेहा- "मैं लेने नहीं देंगी..' बोलकर नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है।

राज अब अपने काले होंठ नेहा की रेड लिपस्टिक लगाए हुए होंठों की तरफ बढ़ा देता है। नेहा को पहली की तरह राज से घिन नहीं आ रही थी। राज के होठ नेहा के होंठों को छु जाते हैं। होठ ते ही नेहा के जिश्म में एक बिजली सी दौड़ जाती है। दोनों के होंठों लाक हो जाते हैं।

राज अब नेहा को किस करने लगता है, अनाड़ी जैसा। नेहा को तकलीफ हो रही थी राज के अजीब किस से। हवस में तो वो कैसे भी राज का किस सह लेती औ। लेकिन आज वो बिलकुल होश में भी। नेहा को राज का किस करने का तरीका बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था। नेहा जोर से राज को पीछे धकेलती है।

राज नेहा को देखने लगता है- "क्या हुआ?"

नेहा- मुझ तकलीफ हो रही है।

राज- "किससे तकलीफ हो रही है?"

नेहा किस शब्द इस्तेमाल करना नहीं चाहती थी। इसलिये कहा- "तुम जो कर रहे थे उससे...

राज- क्या कर रहा था मैं?

नेहा राज की तरफ हैरानी से देखती हैं।

राज- बोल?

नेहा- किस से।

राज- क्यों?

नेहा- तुमको किसने सिखाया किस करना?

राज- किसी ने नहीं। अस नंगी वीडियोस देखकर सीखा है।

नेहा पार्न वीडियोस का नाम सुनकर शर्म से लाल हो जाती हैं. और कहती हैं- "चुप करो कमीने। मेरे सामने इतनी गंदी बातें कर रहे हो?"

राज- तुझे मेरी ये बातें गंदी लगी तो तेरी चुदाई जब किया था तब गंदा नहीं लगा ?

नेहा- छोः... कमीने चुप रह।

राज- मेरी जान... मुझे नहीं आता चमने, तो तू ही सिखा दे। मैंने देखा त खुद से कितना मस्त चूमती है। उस दिन कैसे पागलों की तरह मुझे चूम रही थी।

नेहा फिर से शर्मा जाती है। वो कुछ बोलने की हालत में नहीं औ। राज की बातें उसे गरम कर रही थी। उसको ये भी पता था कि अगर राज फिर से शुरू हो गया तो वो खुद को रोक नहीं पाएगी।

राज- सिखा जा?

नेहा कुछ नहीं बोलती। उसे बहुत शर्म आ रही थी एक काले गंदे बूढ़े को किस करना सिखाने की बात से।

राज- चल शुरू हो जा।

नेहा को न जाने क्या सूझता है की वो राज का चेहरा धीरे से अपने दोनों गोरे हाथों से पकड़ती हैं और अपने लाल लिपस्टिक वाले होंठ उसके काले होंठों की तरफ बढ़ाती हैं। हालांकी उसे अजीब लग रहा था एक बदसूरत काले आदमी को मैं किस करने से। लेकिन उसकी हवस अब उसके सिर चढ़ चुकी थी। नेहा अब अपने होंठ उसके काले होठों पर रख देती हैं। नेहा पहले राज का काला ऊपरी होंठ चूसती है, और फिर निचला। ऐसा आराम से नेहा उसे किस कर रही थी। राज को भी मजा आ रहा था नेहा की किस में।
 
नेहा को न जाने क्या सूझता है की वो राज का चेहरा धीरे से अपने दोनों गोरे हाथों से पकड़ती हैं और अपने लाल लिपस्टिक वाले होंठ उसके काले होंठों की तरफ बढ़ाती हैं। हालांकी उसे अजीब लग रहा था एक बदसूरत काले आदमी को मैं किस करने से। लेकिन उसकी हवस अब उसके सिर चढ़ चुकी थी। नेहा अब अपने होंठ उसके काले होठों पर रख देती हैं। नेहा पहले राज का काला ऊपरी होंठ चूसती है, और फिर निचला। ऐसा आराम से नेहा उसे किस कर रही थी। राज को भी मजा आ रहा था नेहा की किस में।

अब राज भी उसे किस करने लगता है। दोनों ही अब गरम हो चुके थे। दोनों की जुबान एकदूसरे से खेल रही औं। दोनों का किस वाइल्ड ही हो रहा था की तभी बाहर से वो वर्कर आवाज देता है।

वर्कर- मेडम ।

नेहा उसकी आवाज सुनकर किस तोड़ती है और बाहर जाने लगती है।

राज- "उस कुत्ते की तो मैं... मेरी गर्लफ्रेंड क्यों हिस्टर्ब कर रहा है?"

नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है।

राज- जल्दी वापस आ।

नेहा कुछ नहीं बोलती और चली जाती है। नेहा बाहर जाकर- "क्या है?"

वर्कर- मेडम वो इधर भी घास कट करनी है क्या?

नेहा- नहीं नहीं उधर से करना।

वर्कर को नेहा की हालत देखकर ताज्जब होता है। कुछ देर पहले तो वो ठीक-ठाक थी लेकिन अब उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे, लिपस्टिक थोड़ी फैली हुई थी।

नेहा- और जल्दी-जल्दी करो काम।

वर्कर- जी मेडम।

नेहा शोड़ी देर वहाँ खड़ी रहती हैं। लेकिन फिर उसके कदम नौकर क्वार्टर्स की तरफ चले जाते हैं। वो राज को नजरअंदाज नहीं कर पा रही थी। नेहा दरवाजा के करीब जाकर अंदर देखती है, तो राज बीड़ी पी रहा था। उसकी पीठ नेहा की तरफ भी। नेहा मुश्करा रही थी। नेहा के लिए ये सब करना अब एक अइवेंचर की तरह लग रहा था। राज की केयरिंग से सब कुछ उसे अच्छा लगने लगा था। नेहा दरवाजे से अंदर जाती है। लेकिन राज वैसे ही खड़ा था। नेहा खुद भी नहीं जानती थी कि वो फिर से क्यों आई इस बढ़े के पास? नेहा थोड़ा

आगे बढ़ती है।

राज अब इधर मुड़ता है- "आ गई?"

नेहा- क्या लग रहा है?

राज नेहा के करीब जाकर उसे कमर से पकड़कर अपनी तरफ खींचता है। नेहा राज की बाहों में थी अब आगे से। उसकी चूचियां राज की छाती से चिपकी हुई, दोनों के चेहरे आमने सामने। राज अब पीछे से नेहा की गाण्ड साड़ी के ऊपर से दबाने लगता है।

नेहा- "अहह... राज..."

राज के हाथ नेहा की गाण्ड को मसल रहे थे। बहुत ही सेक्सी दृश्य चल रहा था। एक खूबसूरत बड़े घर की बहू और उसी घर के बड़े ड्राइवर के बीच। नेहा अपने हाथ राज के सीने पर रखे हुए थी। राज नेहा के गले को चूमने में लगा हुआ था।

नेहा- "अहह.." और उसकी सिसकारियां गूंजने लगती है कमरे में।

राज थोड़ी देर बाद नेहा की साड़ी ऊपर करता है।

नेहा की पेटी अब नजर आ रही थी।

राज- "मेरी जान पेंटी तो मस्त लग रही है। अंदर का माल देखते हैं कैसा है?"

नेहा शर्मा जाती है। अगले ही पल राज नेहा की पैंटी नीचे कर देता है ऑड़ा। नेहा अपनी चूत छुपाने में लग जाती है। कटीम अब अपनी पैंट की जिप खोलता है, जिसकी आवाज से नेहा का चेहरा लाल पड़ जाता है। उसे पता चल जाता है की राज आगे क्या करने वाला है।

नेहा- नहीं राज नहीं।

राज- "क्या नहीं? तू बस चुप रह.. और राज अब अपना काला लण्ड बाहर निकालता है, और नेहा के हाथ उसकी चत से हटाकर अपना लौड़ा सेट करता है वहीं।

नेहा लण्ड पाते ही पागल सी हो जाती हैं। एक तगड़े लण्ड का अहसास, जो लण्ड उसकी चूत को पहले नाप चुका है। राज अब लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगता है।

नेहा- "अहह... आहह... करती है।

तभी राज को किसी का काल आता है। वो मोबाइल उठाने के लिए नेहा से दूर हट जाता है। नेहा एक बार के लिए तड़प उठती है। वो आलमोस्ट राज को जाने से रोकती है, लेकिन किसी तरह वो खुद को रोक लेती हैं।

राज अपना लण्ड अंदर डाले बिना ही मोबाइल पर बात करने लगता है। नेहा भी उसी हालत में खड़ी रहती है। फोन पर बात करके राज इधर नेहा की तरफ घूमता है।

राज- मेरी जान मुझे कुछ काम हैं, में जा रहा हूँ।

नेहा कुछ नहीं बोलती। उसको गुस्सा तो बहुत आ रहा था राज पर, उसे अधूरा छोड़ने पर। लेकिन वो चुप रहती है। नेहा के लिए ये बहुत शर्मनाक था। इधर एक बड़ा उसको इस हालत में ऐसे छोड़कर जा रहा था, जैसे वो उसका पति हो। राज अब उधर से निकल जाता है। नेहा अब अपनी साड़ी ठीक करती है।

नेहा- "कमीना कहीं का। छोड़ूँगी नहीं मैं उसे." और नेहा भी उधर से चली जाती है।

उधर रिया अपने रूम में बैठी मोबाइल पर कुछ कर रही थी। उसके दिमाग में अभी भी जय वाली बात चल रही थी। फिर वो कल की बात जब उस अंजान आदमी ने उसके साथ जो किया था। उसका हाथ अचानक ही साड़ी के ऊपर से अपनी चूत पर चला जाता है। वो अपने होश खो रही थी। उसने कभी नहीं सोचा था की कोई गंदा आदमी उसके साथ ऐसी हरकत करेगा। अब जो वैसी हरकत हो चुकी है तो रिया को उतना बुरा भी नहीं लग रहा था। रिया वैसे नेचर से बहुत दृध भी। लेकिन उसका जिश्म उसकी दृढ़ता का बिल्कुल साथ नहीं दे रहा

था।

रिया अपनी चूत सहला रही थी। उसकी चूत उसके साथ हुई हरकतों को सोचकर गीली हो रही थी। वो झड़ने के करीब औ की उसे उसके पति का काल आता है और वो उसमें बिजी हो जाती है।

उधर नेहा अपने रूम में आई हुई थी। वो बहुत गुस्से में लग रही थी। गुस्सा राज के ऊपर था- "उसने मुझे समझ क्या रखा है। कमीना बूढ़ा?" फिर नेहा फ्रेश होने चली जाती है।

बाहर आकर वो बेड पर लेट जाती है तभी उसे विशाल का काल आता है।

नेहा- हाँ बोलो।

विशाल- नेहा, मैं आज नहीं आ पाऊँगा। वो एक दोस्त ने उसके घर इन्वाइट किया है। कल तक आ जाऊँगा।

नेहा- लेकिन विशाल?

विशाल- "नेहा में अभी थोड़ा बिजी हैं। कल मिलते हैं बाइ... और विशाल काल खतम कर देता है।

नेहा- "ये विशाल भी ना मेरी एक बात नहीं सुनते। आजकल मेरे लिए टाइम ही नहीं हैं उनके पास। और एक वो कमाना है हमेशा मेरे आस-पास रहने की कोशिश करता है..."

राज का प्लान नेहा पर बखूबी काम कर रहा था। राज नेहा को उसके पति से दूर करने में कामयाब हो रहा था। और नेहा को राज की गंदी ही सही लेकिन हरकतें अच्छी लगने लगी थी। ऐसे ही शाम हो जाती है। डिनर के बाद सब अपने रूम में चले जाते हैं।
 
जय भी आज किसी काम से गया हुआ आ। सिर्फ राज ही बचा था उधर। आज राज ने कुछ सोच कर रखा था। रात में 11:00 बजे बो मेनगेट से होते हुए अंदर जाता है, और सीधा किचेन में जाता है। वहाँ पर नीलू किचेन का काम फिनिश कर रही थी। राज उसे पीछे से जाकर पकड़ लेता है।

राज- है नीलू क्या कर रही है? कितने दिन हो गये तेरी चूत मारे हुए।

नीलू - हाँ हाँ । तुम तो मुझे भूल ही गये हो। नेहा मालकिन से मिलने के बाद।

राज- क्या करें नीलू तेरी नेहा मालकिन हैं ही इतनी मस्ता साली को चोदकर मन ही नहीं भरता।

नीलू- "राज संभाल के... कहीं मालिक को पता चल गया तो तेरी खैर नहीं.." और नीलू हँसती है।

राज- मालिक को कैसे पता चलेगा? नेहा मालकिन मेरे से चुदने के लिए तैयार रहती हैं।

नीलू- "क्या बात है राज, नेहा मालकिन को अपनी रंडी बना रहे हो?" और दोनों हँसते हैं।

राज- चल मैं जा रहा है उसके पास।

नीलू- ओहो क्या बात है। रहा नहीं जा रहा क्या हमारी मालकिन के बिना? जरा संभल कर करना। हमारी मालकिन बहुत नाजुक हैं।

राज. वो साली संभाल कर करने की चीज नहीं हैं।

दोनों फिर से हँसते हैं। राज फिर वहाँ से सादियां चढ़ते हए ऊपर चला जाता है। राज नेहा के रूम के बाहर नहुँच चुका था। दरवाजा लाक था।

नेहा ने विशाल नहीं आएगा आज रात, इसीलिए उसने दरवाजा लाक किया हुआ था। अब राज थोड़ा टेन्शन में

आता है। लेकिन उसे पता आ क्या करना है। वो अब दरवाजा लाक करता है।

नेहा दरवाजे की आवाज सुनकर अंदर से- "कौन है?

राज कुछ जवाब नहीं देता। वो दरवाजा नाक करते रहता है।

नेहा- कौन हैं? क्यों डिस्टर्ब कर रहे हो?

राज फिर भी जवाब नहीं देता। नेहा अन निराश होकर दरवाजा खोलती है, और राज को यहाँ देखकर हैरान रह जाती है।

नेहा- तुम्म।
 
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