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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

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बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

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पान्न किरदार) परिचय

01. रवि वर्मा- उम्र 45 साल, एक मिल्क फैक्टरी का मालिक,

02. सावित्री- उम्र 30 साल, रवि वर्मा की तीसरी बीवी,

03. विशाल- उम्र 28 साल, रवि का बड़ा बेटा पहली पत्नी से, शादीशुदा,

04. नेहा- उम्र 25 साल, विशाल की पत्नी, बेहद खूबसूरत, फिगर 36-28-38, गोरा बदन,

05. सौरभ- उम्र 26 साल, रिया का पति, रवि का छोटा बेटा पहली पत्नी से, शादीशुदा,

06. रिया- उम्र 23 साल, सौरभ की पत्नी, मस्त, खूबसूरत,

07. खुशी उम्स 21 साल, जिया और रवि की छोटी बेटी दूसरी पत्नी से, अभी पढ़ती है, खूबसूरत,

08. नीलू- उम्र 35 साल, नौकरानी, रंग सौंवला,

09. जय- उम्र 47 साल, लारीवाला, गंदा, काला, एकदम बदसूरत,

10. राज- उम्र 45 साल, लारीवाला, गंदा, काला, एकदम बदसूरत,

11. अंजली- अंजली दीक्षित, उम्र 30 साल, रवि वर्मा परिवार की वकील, भरा जिम, बड़ी-बड़ी चूचियां, बड़ी

बड़ी गाण्ड बाहर निकली हुई,

12. शिखा पारिख- सावित्री की दोस्त,

13 पिंया

रवि की दूसरी पत्नी, जव्या और खुशी की मौं प्रिया और रवि की बड़ी बेटी दूसरी पत्नी से

14. नव्या
 
कड़ी_01 रात का समय है।

नीलू- "अहह... धौरेऽऽ अहह... अहह... अहह... तुम दोनों ओड़ा धीरे नहीं कर सकते क्या? अहह.. आह्ह.."

जय- साली धौरे करने में क्या मजा, जो तेज करने में है।

राज- हो रे नीलू तू मज़े कर। तेरी चूत और गाण्ड में लौड़ा डालने में जो मज़ा है वो साला रंडी चोदने में भी नहीं आता।

नीलू- बहुत दर्द होता है मुझे। दो लण्ड एक साथ लेना आसान है क्या? अहह... तुम दोनों का क्या है रोज मुझे चोदते हो। लेकिन मुझे जो सहना पड़ता है वो तुम दोनों को क्या मालूम?

राज- क्यों री क्या हो गया?

नीलू- ओह्ह... आज मालकिन पूछ रही थी कि मैं इतना लड़खड़ाकर क्यों चल रही हैं? मैंने तो बोल दिया कि मेरा पैर फिसल गया आ।

जय- कौन सी मालकिन ?

नीलू- ओहह... बड़ी मालकिन ने।

जय- ओहह... साला इन मालकिन लोगों को भी कोई काम नहीं है।

नीलू- कल जो तुम दोनों ने मेरी हालत की, इसके बाद मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। मालूम है?

राज- हाँ हाँ ठीक है, अब मूड खराब मत कर।

फिर वो दोनों नीलू को आधा घंटा चोदते हैं, और वहाँ पर सो जाते हैं तीनों।

यह हाल था उस आलीशान वर्मा मेशन के बाहर साइड में एक छोटे से कम का। रवि वर्मा, उम्र 45 साल, जो एक मिल्क फैक्टरी का मालिक हैं, और उसकी पत्नी सावित्री वर्मा, उम्र 30 साल। सावित्री रवि वर्मा की दूसरी पत्नी है। इसीलिए उनकी उम्र में इतना अंतर है। रवि वर्मा की पहली पत्नी अब नहीं रही। उसकी पहली पल्ली से तीन बच्चे हैं, दो बेटे और एक बेटी। दोनों बेटों की शादी हो चुकी हैं। बेटी अभी पढ़ाई कर रही है। बड़ा बेटा विशाल वर्मा, उम्र 28 साल और दूसरा बेटा सौरभ, उम्र 26 साल। इसके अलावा घर में एक नौकरानी हैं जिसका नाम नीलू है, उम्र 35 साल, साँवली औरत।

रोज दोनों बेटे और पिता फैक्टरी आफिस जाते थे। शाम में फिर वापस आते थे। यही आ रोज का रुटीन।

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आज सनडे था। फैक्टरी बंद तो नहीं थी लेकिन वहीं ज्यादा काम भी नहीं था। इतने में भी रवि वर्मा और उसके बेटे आफिस गये थे। रवि वर्मा अपने बिजनेस को लेकर बहुत सीरियस था। इधर घर में सनडे होने की वजह से घर की औरतें सुस्त होकर बैठी थी अपने-अपने रूम में।

इधर विशाल की पत्नी नेहा बाहर टहलने के लिए आती है। नोर्मलि घर की औरतें कम ही बाहर निकलती भी घर के। लेकिन सनई होने की वजह से नेहा बाहर निकली थी। नेहा एक बेहद खूबसूरत औरत हैं, 36-28-38 का मस्त फिगर, गोरा बदल। वो एक बड़े घर की लड़की औ। अमीर और खबसरत होने के कारण विशाल वर्मा ने उसे पसंद किया था। एकदम बला लगती थी लेहा। वां टहलते हुए उस बड़े घर के आगे से होकर जा रही थी। बाहर की फ्रेश हबा का आनंद ले रही थी। तभी वो थोड़ा घर के पिछले साइड की तरफ गई थी की उसे उधर बीड़ी की महक आई, तो उसने अपनी नाक पर हाथ रख लिया।

नेहा- "येवं की महक कहाँ से आ रही है?" उसे महक घर के पीछे साइड में बने छोटे से कम की तरफ से आती है। वो रूम नौकरों के लिए बना था। नेहा उधर जाती हैं।

उस रूम की एक खिड़की भी जो बंद भी। लेकिन दरवाजे से महक आ रही थी। नेहा को उधर जाते हए अजीब लग रहा था। वो इतने बड़े घर की बहू इस नौकर के रूम में क्यों जा रही है? लेकिन फिर भी वो हिम्मत करके दरवाजे के पास जाती है। वहीं से ज्यादा महक आ रही भी।

जब वो दरवाजे से अंदर देखता है तो दो लोग बौड़ी पी रहे थे और महक छोड़ रहे थे। वो दोनों लारी वाले थे, राज और जय। आज सजड़े आ तो वो दोनों को कोई काम नहीं था। इसलिए बेकार बैठे थे। दोनों एकदम गंदे काले आदमी, लुंगी और शर्ट में थे, एकदम बदसूरत, टिपिकल लावाल्ले। राज लगभग 50 साल का था और जय 57 साल का। उन दोनों ने नेहा को नहीं देखा था। वो बस बीड़ी पी रहे थे।

तभी अचानक राज की नजर दरवाजे पर जाती है, और नेहा को वहीं देखकर वो हड़बड़ा जाता है- "ओहह... ओहह.. मालकिन.."

राज की बात सुनकर जय भी डरकर दरवाजे की तरफ देखता है। नेहा को देखकर वो भी हर जाता है।

नेहा अब गुस्सा दिखाते हुए. “क्या हो रहा है यहाँ?"

राज- ओहह... मालकिन ओहह... हम बस।

नेहा- क्या बस हाँ? यहाँ पर तुम दोनों सिगरेट पी रहे हो, और हवा खराब कर रहे हो।

राज- ओहह... सारी मालकिन।

नेहा- क्या सारी हाँ?

राज मन में- साली नाटक कर रही हैं। साली का रूवाब तो देखो।

नेहा- तुम दोनों को और कोई काम नहीं है?

जय- मालकिन आज काम कम है. इसलिए फैक्टरी में कुछ काम नहीं है।

नेहा- तो यहाँ पर सिगरेट पीने का?

जय- माफ कर दीजिये मालकिन।

नेहा- ठीक है ठीक है। आगे से ऐसा मत करना।

दोनों साथ में- "जी मालकिन...

फिर नेहा वहाँ से निकल जाती हैं।

राज की नजर नेहा की मटकती हई बड़ी गाण्ड पर भी। वो अपना लण्ड लुंगी के ऊपर से मसलते हुये कहता है "साली रंडी सुनकर चली गई। साली की गाण्ड में बहुत दम है.." कहकर दोनों हँसते हैं।

इधर नेहा घर में आकर सावित्री से- "माँजी, उन दोनों आदमियों को कुछ काम नहीं है क्या?"

सावित्री किसकी बात कर रही हो नेहा?

नेहा- वो। जो उस पीछे वाले रूम में हैं।

सावित्री वो। ट्रक ड्राइवर्स?

नेहा- हाँ।

सावित्री -लेकिन तुम वहीं क्यों गई औ?

फिर नेहा सब बताती है।

*****

*****
 
इधर राज और जय बात कर रहे थे।

जय- अरे उसने जाकर बोल दिया तो बड़े साहब को?

राज- अरे नहीं बोलेगी, क्यों डरता है?

जय- फिर भी। बोल दिया तो नौकरी गई।

राज भी अब ओड़ा सोचता है इस बारे में- "दर मत। में और एक बार माफी माँगकर आता है अभी।

जय- ठीक हैं।

फिर राज बाहर चला जाता है। नार्मली राज और जय कभी घर के अंदर नहीं जाते। राज मुख्य दरवाजे से अंदर जाता है। घर काफी आलीशान था, जो राज ने सपने में भी नहीं देखा था। वो चलते हुए किचेन के पास पहुँचा। उसे वहाँ नीलू दिखती है। नीलू की पीठ उसकी तरफ भी। वो अब धीरे से अंदर जाता है और उसको पकड़ लेता है।

नीलू अचानक डर जाती है।

राज- कैसी हो राड

नीलू- अरे राज तुम यहाँ क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे मालकिन आ गई तो लोचा हो जायगा।

राज- तेरी मालकिन से ही मिलने आया हैं।

नीलू- कौन सी मालकिन से और किसलिए?

राज. वो सब रहने दे। चल जा एक राउंड करते हैं।

नीलू- त पागल हैं क्या? यहाँ पर मालकिन आ गई तो मेरी और तेरी दोनों की नौकरी जाएगी।

राज- "कुछ नहीं होता तू र मत.." ऐसा बोलकर वो नीलू की चूत रगड़ने लगता है।

नीलू- "ओहह... करीम्म..."

राज लील से सटकर खड़ा था। उसका लण्ड खड़ा था, उस गंदी सी लुंगी में।

नीलू- करीम्म नहीं। कोई आ जाएगा, छोड़ो मुझे।

राज- "क्या नखरे कर रही है। कोई भी तो नहीं आ रहा..' कहकर राज उसके चूचे दबाने लगता है।

नीलू- "अहह... करीम्म मत करो..."

राज नीलू की गर्दन पर अपनी जीभ फेर रहा था- "मेरी रांड आज रात और मजे करेंगे.."

नीलू जो अब गरम हो चुकी थी, बोली- "हाँ मेरे राज..."

इस दृश्य के बीच राज और नीलू दरवाजे का भल गये थे। दरवाजे पर कोई खड़ा इन दोनों के कारनामे देख रहा

आ।

जो दरवाजे पर भी, वो और कोई नहीं नेहा थी। वो कुछ देर पहले ही आई ी। वो पहले तो हैरान भी इन दोनों को इस तरह देखकर। लेकिन उसे क्या पता कि ये बहुत दिनों से चल रहा है। नेहा चुप खड़ी होकर देख रही थी।

नीलू- करीम्म यही नहीं, कोई आ जाएगा।

राज- जील्ल राजी बस एक बार चोद लेने दे, फिर चला जाऊंगा।

नेहा चोदने का नाम सुनकर थोड़ा शर्माती है। उसे धिन आ रही थी। यह नौकरानी का चक्कर ट्रक वाले से। नेहा जाना चाहती थी वहाँ से, लेकिन पता नहीं क्यों वो नहीं गई थी।

तभी नीलू की नजर किचेन के एक ग्लास पा जाता है। जहाँ से उसे नेहा की परछाई दिखता है। नीलू झट से राज से अलग हो जाती है।

राज- "क्या हो गया रंडी?"

नेहा राज के मुँह से रंडी शब्द सुनकर गुस्सा हो जाती हैं। एक औरत को कोई गाली दे, उसे पसंद नहीं था। नेहा अपना गुस्सा कंट्रोल नहीं कर पाती।

नेहा- लील यह सब क्या है?

नेहा की आवाज सुनकर राज भी इधर घूम जाता है।

नीलू- "वो। मालकिन। मैं वो.."

नेहा- "तुम सबने इस घर को समझ क्या रखा है?" नेहा राज की तरफ गुस्से से देख रही थी- "और राज तुम... मैंने तुमको तब बोला था ना कोई भी गलत चीज मत करना...

राज- मालकिन गलती हो गई। माफ कर दो।

नेहा कुछ बोले बिना गुस्से से देखती रहती है।

राज मन में- “साली ने दूसरी बार डिस्टर्ब किया मुझे। वैसे साली माल है। क्या चूचे हैं? क्या गाण्ड है? एकदम मस्त गाण्ड लग रही हैं। साली यह हाथ लग जाए तो मेरे लौड़े के मजे हो जाएं. राज नेहा की तरफ घर रहा था, जो नेहा देख लेती हैं।
 
नेहा- क्या देख रहे हो?

राज. कुछ नहीं मालकिन।

नेहा- नीलू तुम बाहर जाओ।

नीलू चली जाती हैं बाहर।

नेहा उसके जाने के बाद- "तुम क्या घर रहे थे मुझे?"

राज नहीं मालकिन ऐसा कुछ नहीं है।

नेहा- झूठ मत बोलो, सच-सच बताओ। अब अगर एक भी झठ बोला जा तो मैं पापाजी को तुम दोनों के बारे में बता दूँगी।

राज- ओहह... मालकिन मैं ओहह... आप्न खब्बासरत हैं ना इसलिए बस देख रहा था।

नेहा को अपनी तारीफ सुनकर थोड़ा अच्छा लगता है, कहती है- "अच्छा मैं खूबसूरत हैं... और क्या देख रहे थे?"

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-

राज- और कुछ नहीं मालकिन।

नेहा- बता रहे हो या?

राज- ओहह... मालकिन में आपकी चूचियों को देख रहा था।

नेहा इस बात को सुनकर गुस्सा होती है, और कहती है- "क्या कहा? तुम्हारी हिम्मत कैंसे हुई मेरी चूचियों की तरफ देखने को?"

नेहा जल्दबाजी में कुछ ज्यादा ही बोल गई थी। उसको बाद में अहसास होता है की ये उसने क्या बोला? उसको शर्म आती है। राज नेहा के मुँह से चूचियां शब्द सुनकर अब खुलने लगता है अपनी बातों में।

राज- "मालकिन अब आपकी चूचियां इतनी बड़ी-बड़ी हैं तो नजर चली जाती है.."

नेहा राज के मुँह से ये सुनकर हैरान होती हैं और गुस्से से कहती है- "क्या बोला तूने?"

राज- "जो अपने पूछा मालकिन... और राज नेहा की चूचियों को लगातार घरे जा रहा था।

नेहा को घिन आ रही थी की एक ट्रक ड्राइवर उसकी चूचियों को घूर रहा था। नेहा सोच रही थी ये उसकी ही गलती है की उसने राज से ये सब पूछा।

नेहा- तुम ज्यादा बात कर रहे हो। पापाजी को बोलकर पोलिस के हवाले करवा दूंगी।

राज- अरे मालकिन आप तो बुरा मान गई। में तो बस जो सच है वो बोल रहा था।

नेहा परेशान हो रही भी वहीं पर। राज की बातें उसे अजीब लग रही थी। वो इतने बड़े घर की बहू और एक ट्रक ड्राइवर उससे ऐसी बातें कर रहा था वो भी उसी के घर में।

राज- वैसे मालकिन आप हैं वाकई में बहुत खूबसूरत।

नेहा अब उतना गुस्सा नहीं औ, ओली. "अच्छा अच्छा ठीक है। उतना ओलकर बो जाने लगती है।

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राज तभी नेहा की बड़ी-बड़ी गाण्ड देखते हए. "वैसे मालकिन आपका और बहुत कुछ मस्त है."

नेहा राज की बात पर पीछे मुड़ते हुए उसकी नजर अपनी गाण्ड पर पाती है। नेहा फिर से राज की तरफ गुस्से से देखने लगती है- "क्या मतलब है तुम्हारा

राज- कुछ नहीं मालकिन, सच बता रहा हूँ। सच कहूँ तो आपसे खूबसूरत औरत मैंने जिंदगी में नहीं देखी है।

नेहा शर्मा जाती है और हँसती है। किसी भी औरत को उसकी तारीफ करना सबसे बड़ी कमजोरी होती है वो राज जानता था।

नेहा- "अच्छा... तुम जैसे को देखने भी कहीं मिलेगा?" ऐसा बोलकर वो हँसती है।

राज- "हाँ मालकिन। हम जैसों की औकात कहीं आप जैसे बड़े घर की औरतों को देखने को या कुछ करने की.."

नेहा ोड़ा हैरत से- "क्या कहा तुमने? कुछ करने की? उससे क्या मतलब है तेरा?"

राज ने जानबूझ कर यह कहा था। वो जानता था की नेहा उससे ये सवाल पूछेगी। राज बोला- "वो... मालकिन मेरा मतलब चदाई से था..." और राज अब खुलकर नेहा से बात कर रहा था।

नेहा का चेहरा चुदाई का नाम सुनकर शर्म से लाल हो जाता है। एक ट्रक ड्राइवर काला गंदा बढ़ा उसके सामने चुदाई की बात कर रहा था। नेहा मन में- "कितना गंदा आदमी है। मेरे सामने कैसे शब्द इस्तेमाल कर रहा है."
 
नेहा- देखो तुम मेरे सामने ये सब शब्द इस्तेमाल मत करो।

राज- तो कैसे शब्द इस्तेमाल कर मालकिन?

नेहा- मुझे नहीं पता।

राज- "मालकिन अब चुदाई की चुदाई नहीं बोलेंगे तो और क्या बोलेंगे'

राज फिर से चुदाई शब्द इस्तेमाल कर रहा था नेहा के सामने। इसी बीच राज नेहा के पूरे जिश्म को स्कैन कर रहा था। नेहा के मस्त फिनगर का वो दीवाना हो गया आ।

राज- "मालकिन एक बात बोलं? आपके पति बहत लकी हैं जो उनको आप जैसी माल बीवी मिली..." और राज अब नेहा को माल बोल रहा था।

नेहा को अपनी तारीफ अच्छी तो लगती है लेकिन माल बोलने पर उसे गुस्सा भी आता है- "मैंने बोला ना गंदे शब्द मत इस्तेमाल करो.."

राज- "मालकिन मेरी जिंदगी में एक ही स्वाहिश रह गई है कि मैं किसी बड़े घर की औरत को चोदूं.."

नेहा इस बात पर हँसती हुई- "सपने अच्छे देख लेते हो। जो कभी होने वाला ही नहीं है उसके बारे में क्यों सोच रहे हो? वैसे तुम्हारे पास हैं ना नीलू। उसी से काम चला लो.." बोलकर वो हैंसने लगती हैं।

राज- लेकिन मालकिन... मझे तो गोरी बदन वाली मस्त माल चाहिए जो अमीर हो।

है

राज अब हिमांड तो ऐसे कर रहा था जैसे उससे किसी ने पूछा हो की उसे कैसी लड़की चाहिए? राज उत्तना बोलकर नेहा के करीब जाने लगता है। राज को अपने पास आता देखकर नेहा को थोड़ा अजीब लगता है। काला गंदा बढ़ा जो एक गंदी सी लुंगी और शर्ट में था एक खूबसूरत औरत की तरफ बढ़ रहा था। उसकी लुंगी का एक हिस्सा जो एक तरफ से खुलता आ ची हवा से इधर-उधर उड़ रहा था। जिससे उसकी काली जांघं दिख रही भी। नेहा समझ नहीं पा रही थी के राज उसकी तरफ क्यों आ रहा है?

नेहा- इधर क्यों आ रहे हो?

राज कुछ नहीं बोलता और उसकी तरफ बढ़ते रहता है। वो नेहा के नजदीक पहुँच कर- "मालकिन आपकी साड़ी पर कुछ रेंग रहा है.."

नेहा को छोटे कीड़े मकोड़ों से इर लगता था। राज की बात सुनकर नेहा- "आआआ... क्या है ओहह.." और नेहा इरते हुए इधर-उधर अपनी साड़ी झटकने लगती हैं।

असल में वहाँ कुछ नहीं था ये सब राज का प्लान था।

नेहा- किधर है?

राज- मालकिन इधर आइए मैं निकाल देता हूँ।

नेहा उसके इर में बिना कुछ सोचे राज के पास चली जाती है। राज लेहा के अपने पास आते ही उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींचता है। दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे। नेहा की बड़ी बड़ी चूचियां इस वक्त राज की छाती से दबी हुई थीं। नेहा लेकिन काड़े के इर में भी। उसे कुछ भी होश नहीं था की वो इस बङ्गत एक गंदे लारीवाले बूढ़े की बाहों में है। एक खूबसूरत औरत जो इस घर की बहू है वो एक गंदे लारीवाले काले बूढ़े से चिपकी हुई थी।

राज- इरिये मत मालकिन, में अभी कीड़ा निकाल देता है।

नेहा- ही जल्दी निकालो।

राज अब अपने हाथ नेहा की पीठ पर चलाने लगता है। उसको नेहा के गोरे जिम से मदहोश कर देने वाली खुश्बू आ रही थी। राज अब अपने काले हाथ नेहा की गाण्ड पर धीरे से रख देता है।

राज मन में- "क्या गाण्ड हैं साली की। नेहा मेरी जान तेरी गाण्ड तो मस्त हैं। मेरा लौड़ा मरा जा रहा है इसमें जाने के लिए। तेरी गाण्ड तो में ऐसा मागंगा को त चलने के लायक नहीं बचेगी.."

राज ऐसा सोचते हुए एक बार नेहा की गाण्ड दबाता है हल्के से। नेहा चुपचाप वैसे ही खड़ी थी। इसी बीच राज का काला मोटा लण्ड उसकी लुंगी में खड़ा हो चुका था। जो अब नेहा को अपने आगे से चुभ रहा था। इस पोजीशन में उसका लण्ड नेहा को साड़ी के ऊपर से चूत पर चुभ रहा था। नेहा इससे ओड़ा नीचे देखती है। वो देखती हैं की राज की लंगी में एक बड़ा सा तंब बना हुआ है। और वो तंब उसके आगे से चभ रहा है। नेहा को अहसास होता है कि वो क्या है?

नेहा तभी राज से दूर हटने लगती है। तभी राज फिर से नेहा की कमर में हाथ डालते हुए उसे अपनी तरफ खींचता है। इस बार दोनों के चेहरे आमने सामने थे। नेहा का खूबसूरत चेहरा राज के काले बदसरत चेहरे के सामने था। नेहा के मुँह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था। राज के हाथ नेहा की कमर को जकड़े हुए थे। जिसकी वजह से नेहा हिल भी नहीं पा रही थी। नेहा लगातार राज को देख रही थी। सवालों भरे चेहरा से।

इतनी देर तक देखने के बाद अब राज नेहा की आँखों में देखते हुए उसके गुलाबी होंठों की तरफ अपने काले सूखे हुए होंठ बढ़ाने लगता है। नेहा के लिए बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था। एक काला बूदा ट्रक ड्राइवर उसको किस करने की कोशिश कर रहा था। राज के होठ नजदीक आते ही नेहा अपने हाथ बीच में लाती है, जिसकी वजह से राज के काले होंठ एक बार नेहा के गोरे हाथों को चूमते हैं। नेहा अपना हाथ जल्दी से हटा लेटी है। नेहा फिर एकदम से राज की पकड़ से निकलती हैं, और बाहर भाग जाती है।
 
कड़ी_03

राज नेहा की मटकती हुई गाण्ड देखकर एक बार अपना लण्ड लुंगी के ऊपर से मसलता है- "हाय मेरी जान... आज ना सही लेकिन तुझे मैं अपनी बनाकर रहगा.."

एक काला बढ़ा जो एक ट्रक ड्राइवर है इस बड़े घर की खूबसरत बहु को लाइन मार रहा था। फिर राज भी वहीं से निकल जाता है।

नेहा अपने रूम में जकर दरवाजे बंद करके उसके पीछे चिपक के खड़ी हो जाती है। उसकी सांस फूली हुई थी। उसकी धड़कनें तेज चल रही थी। नेहा नीचे जो भी उस गंदे बटे ट्रक ड्राइवर के साथ हुआ वो सोच रही थी। कैसे उस काले बूटे ने उसको अपनी बाहों में लिया था और अपने करीब खींचा था? कैसे उसके सूखे हुए काले होंठ अपने गुलाबी जरम होंठों के करीब आए थे। कैसे उस बूढ़े का काला मोटा लण्ड उसकी चूत पर चुभ रहा था साड़ी के ऊपर से। पता नहीं क्यों वो सब चिकर नेहा को अपनी चूत गीली होती महसूस हुई। नेहा भी हैरान भी इससे। फिर वो झट से बाथरूम चली जाती हैं।

राज इधर पीछे अपने रूम में पहुँच चुका था।

जय- क्या हुआ माफ कर दिया मालकिन ?

राज हँसता हुआ. "उस रंडी से में क्यों माफी मांगू? उस साली को तो में चोदने का सोच रहा हूँ.."

जय राज की बात सुनकर ओड़ा चकित आ- "अबे वो मालकिन है। मरवाएगा क्या?"

राज- मुझे पता था तू ऐसे ही बोलेगा। कब तक उस नीलू को चोदते रहेंगे। साला कुछ फ्रेश माल चाहिए मुझे। वो भी एक अमीर घर की हो तो और भी मजा आ जाए त देख में कैसे उस रंडी की मेरे लौड़े पर बैठाता हैं।

जय- अब्जे ऐसी बात है तो मेरे लिए भी कुछ कर।

राज- सन कर तुझे भी मिलेगा। पहले मैं तो चोद लें उसको।

ऐसे बोलकर दोनों हँसते हैं। ऐसे ही शाम हो जाती हैं।

शाम में विशाल के घर आने के बाद भी नेहा उसे कुछ नहीं बताती। वो बताती भी क्या? रात में खाने के बाद विशाल और नेहा अपने रूम में लेटे हुए थे। तभी विशाल नेहा के ऊपर आकरर उसकी चूचियां दबाने लगता है।

नेहा- क्या बात है आज बड़े मई में लग रहे हो?

विशाल- "हीं डालिंग, आज मह है... वैसा बोलकर वो झक कर नेहा के गले को चूमता है, और नीचे अपनी पेंट नीचे करके अपना छोटा सा लण्ड बाहर निकालता है और फिर नेहा का पाजामा भी नीचे करता है। नेहा रात में अक्सर पेंटी और ब्रा नहीं पहनती भी। तो उसकी चूत में विशाल लण्ड घुसाकर चुदाई करने लगता है।

नेहा थोड़ी देर में- "आइ आइ आहह... विशाल आह.." करने लगती है।

विशाल ज्यादा देर नहीं टिक फ्ता और वो छुट जाता है। नेहा शोड़ा निराश हो जाती हैं। विशाल फिर लेट जाता

हैं। नेहा भी अपना पाजामा ऊपर करके लेट जाती हैं।

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अगली सुबह तीनों आफिस जा चुके थे रोज की तरह। पीछे आज जय और राज भी काम पर जा चुके थे। फिर दोपहर का टाइम था। घर की औरतें अपने-अपने कमरे में आराम कर रही थी। लेकिन नेहा बाहर नीचे हाल में बैठकर टीवी देख रहीं भी। इधर राज कुछ यादे से फैक्टरी में कुछ बहाना बनाकर वापस इधर आ जाता है। वो पीछे रूम में जाकर मुख्य दरवाजे से अंदर आता है।

इधर नेहा प्यास लगने की वजह से किचेन में गई हई थी पानी पीने। राज अंदर आकर इधर-उधर झाँकने लगता है। तभी उसे किचेन से कुछ आवाज आती है। वो किचेन की तरफ जाता है, और अंदर नेहा को देखकर एक कातिल मुश्कान लाता है अपने चेहरे पर।

राज मन में- “आह्ह... मेरी बुलबुल यहाँ पर है..."

वो एक बार अपना लण्ड मसलता हैं और रूम के अंदर चला जाता हैं। नेहा की गाण्ड उसकी तरफ भी इसलिए वो राज को नहीं देख पाई भी। नेहा ने इस वक्त एक मस्त रेड साड़ी पहनी हुई थी। जिसमें से उसकी गोरी नाभि साफ दिख रही थी। उसका ब्लाउज़ भी सिर्फ एक होरी पर टिका हुआ था। ऐसे में राज अब नेहा के पीछे जाकर उससे चिपक जाता है। नेहा अचानक डर जाती है।

राज- "क्या नीलू रानी क्या कर रही हो?" और राज जानबूझ कर झूठ बोल रहा था। चिपक के खड़े होने की वजह से उसका मोटा काला लण्ड नेहा की बड़ी गाण्ड पर चुभ रहा था।

नेहा हड़बड़ाते हुए- "हेयी कौन हो तुम, छोड़ो मुझे..."

राज के हाथ नेहा की नंगी गोरी कमर को जकड़े हुए थे। जिससे नेहा निकलने की कोशिश कर रही थी। राज नेहा की आवाज पहचान कर भी नाटक करते हए- "नीलू रानी अञ्च मत तड़पा। बस मुझे अब चोदना है तुझे..."

नेहा चोदने की बात सुनकर डर जाती है। एक काले गंदे ट्रक ड्राइवर बूढ़े के मुँह से अपनी चुदाई की बात सुनकर नेहा को घिन आती हैं। नेहा बोलती हैं- "मैं चिल्लाऊँगी। छोड़ो मुझे.."

राज मन में- “साली ने चिल्लाया तो सब लोग जमा हो जाएंगे... इतना सोचकर वो नेहा को छोड़ देता है।

-

-

नेहा राज की पकड़ से छूटते ही उसकी तरफ घूमकर- "तुम पागल हो गये हो क्या? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की?"

राज फिर से झठ बोलते हए- "वो सारी मालकिन मुझे नहीं पता था आप हैं। मुझे लगा नीलू है...

नेहा राज की तरफ गुस्से से देख रही थी- "झठ बोल रहे हो तुम। तुमको पता था की मैं हैं.."

राज- "कसम से मालकिन मुझे नहीं पता था की आप हैं। मुझे लगा नीलू है...

नेहा- "अगली बार से ऐऐसा कुछ हुआ ना...."

राज नेहा की बात काटते हुए बोलता है- "तो आप खुद को नहीं रोक पायेंगी मालकिन.."

नेहा राज की बात सुनकर हैरान थी, बोली- "क्या बोला तुमने बदतमीज इंसान?"

राज- मालकिन अब मैं सच ही तो बोल रहा है।

नेहा को राज की बातें अजीब लग रही थी। उसे पता था राज के अंदर कमीनापन भरा हुआ है। उसे गुस्सा आ रहा था राज पर। नेहा बोली- "क्या बकवास कर रहे हो? में और तेरे साथ कंट्रोल खो दंगी? असम्भव.

नेहा मन में. "कितना कमीना बूटा है। कैसी गंदी-गंदी बातें कर रहा है?"

राज- शर्त लगा लो मालकिन आप हर जाओगी।

नेहा- "मैं और तुमसे हारंगी?' ऐसा बोलकर वो हँसती हैं।

राज- एक बार जीत कर तो दिखाईए?

नेहा को गुस्सा भी आ रहा था की एक काला ड्राइवर गंदा बूदा उसको हराने की बात कर रहा था। एक ड्राइवर की इतनी हिम्मत? नेहा अब अपना ईगो ला रही थी जिसमें वो भूल गई थी के वो इस घर की बहू है।

नेहा- हारने का सवाल ही नहीं उठता।

राज- अच्छा मालकिन तो देखते हैं।

नेहा- अगर तुम हर गये तो?

राज- आप जो चाहेंगे वो करेगा।

नेहा- सच में?

राज- हौं।

नेहा हँसती है इसपर, और कहती है- "ठीक है। अगर मैं हारी तो तुम जो चाहोगे वो दे देंगी.."

राज नेहा की ये बात सुनकर स्माइल करता है। जैसे उसे कोई खजाना मिल गया हो, और कहता है- "सोच लो

जो चाहे वो देना पड़ेगा..."

नेहा बिना कुछ सोचे समझे- "हाँ ठीक है.."

राज- "तो तैयार होजाओ मालकिन...' कहकर राज नेहा के पीछे चला जाता है।

नेहा अब घोड़ा घबरा रही थी। उसे अब होश आ रहा था की ये उसने क्या कर दिया? एक गंदे ट्रक बढ़े को अपने जिश्म को छूने को इन्वाइट कर दिया।

राज अब एकदम से नेहा को अपने से सटा लेता है। नेहा एकदम से उस काले बटे से चिपक जाती है। राज के हाथ लेहा की कमर पर थे। राज के हाथ अपनी जंगी कमर पर पाते ही नेहा मदहोश होने लगती है। अभी से उसकी ये हालत भी। फिर तो उसने कहीं शर्त लगा ली थी राज से। राज अब नेहा की गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ रहा था। नेहा की बड़ी-बड़ी गाण्ड जो उस साड़ी में कैद थी, उसपर अपना काला मोटा लण्ड जो झांटों से भरा हुआ है, और लुंगी में मौजूद हैं, राज रगड़े जा रहा था।

नेहा की आँखें राज की हरकत से बंद हो गई ी। उसने अपनी जिंदगी में ऐसा महसूस नहीं किया ।

तभी नीलू जो बाहर किसी काम से गई थी, अब किचेन में आने लगती है। लेकिन दरवाजे के पास पहुँचकर अंदर

का दृश्य देखकर वो वहीं रुक जाती है। अंदर देखकर नीलू मन में- "ये राज के साथ कौन है अंदर? तभी उसे उस औरत की साड़ी देखकर याद आता है.."

जील- "अरे ये तो नेहा मालकिन हैं। लेकिन इस राज ने मालकिन को क्यों पकड़ रखा है। इसका मतलब राज ने मालकिन को पटा लिया। लेकिन कैसे? और मालकिन मान कैसे गई इस काले बूढ़े के साथ ये सब करने को। मुझे क्या करना है? कम से कम राज और जय अब रोज-रोज मुझे नहीं चाहेंगे। अब नेहा मालकिन को इन दोनों के लण्ड लेने होंगे। मेरी जान छुटी बस.."
 
कड़ी_04

राज इधर अंदर नेहा की नाभि से हाथ हटाते हए अब ऊपर ले जाने लगता है। नेहा को अहसास होता है की राज के हाथ कहा जा रहे हैं।

नेहा- नहीं प्लीज.. वहाँ हाथ मत लगाओ।

राज- क्या मालिकल आप बस शर्त जीतने पर ध्यान दीजिये। बाकी चीजों पर नहीं... इतना बोलकर राज नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियां पकड़ लेता है।

नेहा- “आहह.." करती है।

राज का अकड़ा हआ काला मोटा लण्ड पहले ही उसकी गाण्ड पर चुभ रहा था। अब उसके हाथ नेहा की चुचियों पर थे। नेहा की आँखें बंद भी। अब राज नेहा की दोनों चूचियां अपने दोनों हाओं से मसलने लगता है। नेहा की जरम जवान चूचियां एक काला बढ़ा मसल रहा था।

इधर दरवाजे से नीलू पूरा इश्य एंजाय कर रही थी।

नेहा राज की हरकतों से गरम हो रही थी। तभी राज उससे चिपके हुए ही उसके गले को चूमने लगता है। नेहा की खूबसरत गोरी गर्दन पर राज का काला बदसूरत चेहरा चम रहा था। ओड़ी देर बाद राज चूचियां मसलना छोड़कर। अपने हाथ नीचे ले जाने लगता है, लेहा की चूत की तरफा जिसे नेहा भौंप लेती है। नेहा झट से उसका हाथ वहाँ जाने से रोकती है।

नेहा- प्लीज़्ज़... वहाँ नहीं।

राज- "क्या हुआ मेरी रानी?" और अब राज नेहा को मालकिन नहीं बोल रहा - "वैसे मेरा नाम राज हैं

और तेरा"

नेहा- क्यों तुझे क्यों जानना है?

राज- बता जा मेरी बुलबुल?

TAN

=

नेहा- नेहा।

नेहा उतना बोली ही थी की राज उसकी चूत पर हाथ रख देता है साड़ी के कम से।

नेहा- “आहह... करीम्म प्लीज़... ऐसा मत करो।

राज- क्या मेरी नेहा रानी?

नेहा- मालकिन से सीधा नेहा?

राज- जाम में क्या रखा हैं नेहा रानी। लण्ड के लिए चत या गाण्ड चाहिए बस।

नेहा राज की बात सुनकर शर्मा जाती है- "तुमको शर्म नहीं आती एक औरत के साथ ऐसी बात करते हए"

राज. शर्म कैसी नेहाजी। चुदाई में शर्म करने से काम नहीं बनता।

जता।

नेहा फिर से शर्मा जाती है। नेहा मन में "ये बदा कितनी घटिया बातें कर रहा है?"

राज नेहा की चूत एक बार दबाते हुए।

नेहा- “आहह.."

राज- देखो तो कैसे तेरी चत गीली हो गई हैं।

नेहा का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है। एक खूबसूरत औरत जो इस बड़े घर की बहू है, उसकी चूत एक काला बूढ़ा जो एक ट्रक ड्राइवर है उसकी हरकतों से गीली हो गई थी।

नेहा हिम्मत जुटते हुए- "प्लीज़्ज़... करीम्म वहाँ से अपना हाथ हटाओ.."

राज चूत और मसलते हुए- "क्यों नेहा रानी?"

नेहा- "प्लीज़... अहह...

नेहा की आह्ह... निकल जाती है। क्योंकी राज अपना अकड़ा हआ लण्ड एक बार नेहा की बड़ी गाण्ड में झटका देता है, जैसे वो उसे चोद रहा हो। नेहा के ऊपर दोहरा वार हो रहा था। एक तो राज के हाथ उसकी चत को मसल रहे थे और दूसरा राज का काला मोटा लण्ड उसकी गाण्ड को तंग कर रहा था।

राज- नेहा रानी मुझसे चुदवाएगी क्या?

नेहा चकित थी। एक काला बढ़ा जिसकी हैसियत कुछ भी नहीं है, वो नेहा जैसी खूबसूरत औरत, जो इस घर की बहू है उसको चोदने की बात कर रहा है।

नेहा- चुप करो बदतमीज़ कहीं के।

नीलू इधर दूर से मांच रही थी- "वाह रे राज क्या पटा रहा है नेहा मालकिन को। सीधा पूछ रहा है चुदाई के लिये, और मालकिल भी कुछ कम नहीं हैं। राज के लण्ड के मजे ले रही हैं अपनी बड़ी गाण्ड पर। पता नहीं ये राज नेहा मालकिन की क्या हालत करेगा? नेहा मालकिन की तो खैर नहीं अभी..."

इधर रूम में। राज- "क्यों नेहा मेरी जान चुदाई नहीं करवानी?" राज का एक अलग अहसास दिला रहा था।

बार-बार चुदाई शब्द इस्तेमाल करना नेहा को

नेहा- "मालकिन में अब सीधा ज्ञान पर आ गये। मैं क्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ जो ऐसा बोल रहे हो?"

.

..

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राज- "हाँ त मेरी गर्लफ्रेंड है मेरी जान... एक काला बड़ा खुबसूरत नेहा को अपनी गर्लफ्रेन्ड बोल रहा था।

नेहा इस बात पर हँसते हुए- "अपनी शकल देखी हैं आईने में बूटे। मैं और तेरी गर्लफ्रेंड?" वैसा बोलकर वो हँसने लगती है।

राज मन में- "अब हँस ले मेरी बुलबुल... जल्द ही तुझे मैं अपनी रांड़ बनाऊँगा।..."

राज- हौं तू मेरी गर्लफ्रेंड है।

नेहा को हँसी बंद नहीं हो रही थी। नेहा को इतना हँसता देखकर राज थोड़ा गुस्सा हो जाता है और एक बार जोर से नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियां दवा देता है।

नेहा- आह्ह... करीम्म।

राज- इतना क्या हँस रही है? मैंने बोला ला तू मेरी गर्लफ्रेंड है।

नेहा राज को सीरियस होता देख कर- "तुम पागल हो क्या? मैं भला तुम जैसे बूढ़े की गर्लफ्रेंड क्यों बनेंगी?"

राज उसकी चूत मसलते हुए- "बनी नहीं है तो अन जा जा.."

नेहा- बिल्कुल नहीं जूदे।

राज- बन जा जा मेरी बलबल।

नेहा- छी... नहीं।

राज- अब मुझे मेरी गर्लफ्रेंड की तरफ से किस चाहिए।

नेहा किस की बात सुनकर हैरत में पड़ जाती हैं। नेहा मन में- "छी.... ये बड़ा मुझे किस करना चाहता है। सच में ही पागल हो गया है ये..."

राज अब नेहा को अपनी तरफ घुमा लेता हैं। अब नेहा का खूबसूरत चेहरा राज के काले बदसूरत चेहरे के सामने भा। नेहा उसको देख रही थी। राज जो करना चाहता है वो नेहा जानती थी। लेकिन वो एक काले बदसूरत बूटे को किस नहीं कर सकती थी।

राज- "मुझे किस दे दे मेरी रानी..' बोलकर वो अपने सखे होंठ आगे बढ़ाने लगता है।

नीलू दरवाजे पर से राज का बदसूरत चेहरा नेहा के करीब आता देखकर मन में- "वाह वाह राज... क्या रोमांस चल रहा है?"

नेहा इधर एकदम से राज की पकड़ से छूटकर भागते हुए- "कभी नहीं बूटे... और हसती है।

राज- चुम्मा दे दे मेरी बुलबुल।

नेहा हँसते हुए- "कभी नहीं..' बोलकर वो भागने लगती है।

नीलू भी दरवाजे पर से बाहर छुप जाती है।

नेहा भागकर मीदियां चढ़ कर जाने लगती है।

राज से रहा नहीं जा रहा था। वो भी नेहा के पीछे भागता है। सौदियां चढ़कर भागते हुए नेहा की गाण्ड मटक रही औ, जो राज देख रहा था। नेहा भागकर अपने रूम में पहच जाती है झट से दरवाजा बंद करने वाली थी की राज दरवाजा पकड़ लेता हैं। नेहा दरवाजा बंद करने की कोशिश करती हैं लेकिन राज उसे करने नहीं देता।

नेहा- प्लाज़्ज़... करीम्म मत करो ये सब में शादीशुदा हैं।

राज- तू मेरी गर्लफ्रेंड भी है।

नेहा राज की बात सुनकर शर्मा जाती है।

राज- "अब शर्मा मत, और आने दे अपने बायफ्रेंड को अंदर

और राज धक्के से दरवाजे खोल देता है।

नेहा पीछे होती है। राज फिर दरवाजे को लाक कर देता है, और नेहा की तरफ देखने लगता है। नेहा भी राज की तरफ देख रही थी। इस वक़्त खूबसूरत नेहा, जो इस घर की बहू है। वो एक काला बदसूरत बूटा जो एक ट्रक हाइका है, उसके साथ खुद उसी के रूम में बंद है। राज अब नेहा की तरफ बढ़ने लगता है। नेहा पीछे जा रही

थी। राज और आगे आता है। फिर नेहा पीछे होती हैं। फिर जेङ्गा दीवार तक पहुँच कर सक जाती है।

का

राज फिर उसकी तरफ आता है। अब वो उसके पास जाकर। उसकी नंगी कमर में हाथ डालता है और उसके खूबसूरत चेहरे के पास अपना बदसूरत चेहरा ले जाता है। दोनों की नजरें आपस में मिल जाती हैं। दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। तभी राज अपने सूखे काले होंठ नेहा के गुलाबी नरम होठों की तरफ बढ़ाता है। वो बहुत ही नजदीक पहुँचा था की नेहा अपना मुँह फेर लेती है।

राज- "मैंह इधर कर जानेमन। जरा अपने बायफ्रेंड को तेरे गुलाबी होंठों को चूसने तो दे.."

नेहा राज के बार-बार खुद को उसकी गर्लफ्रेंड बोलने से शर्मा रही थी। एक बूढ़ा उसको अपनी गर्लफ्रेंड बनाने पर तुला हुआ था। इस बात को सोचकर वो मन में हैंस रही थी।

नेहा- मुझे नहीं बनाना तेरी गर्लफ्रेंड।

राज- अच्छा चल अपना पति समझ कर ही चुम्मा दे दे डालिंग।

नेहा इस बात पर जोर से हसती है, और कहती है- "गर्लफ्रेंड नहीं तो अब अपनी पत्नी बनाना चाहते हो?"

राज उसकी आँखों में देखते हुए- "हौं डालिंग.."

नेहा हसते हुए- "तुम्हारे ये सपने कभी फूले नहीं होंगे राज जी..' और अब नेहा भी राज को जी बोल रही थी।

राज- "होंगे हालिंग जरूर होंगे। मैं तुझे अपनी बीवी बनाकर रहूँगा। अभी तो गर्लफ्रेंड से काम चल जाएगा।

नेहा का चेहरा राज की ये बात सुनकर शर्म से लाल पड़ जाता है। आखीरकार, क्यों ना हो? एक काला दसूरत बढ़ा उसको अपनी बीवी बनाने की बात जो कर रहा था। फिर राज नेहा के होंठों की तरफ बढ़ने लगता है।

नीलू इधर नीचे किचेन में सोचती है- "लगता है राज आज नेहा मालकिन के साथ सुहागरात मनाकर ही

आएगा..." ऐसा सोचकर वो हैंसती है।

राज रूम में जो हरकत करने जा रहा था, वो नेहा किसी हालत में भी नहीं चाहती थी। लेकिन अब उसे भागने के लिए जगह बची भी नहीं थी। तभी वो हो जाता है जिसकी कल्पना नेहा ने जिंदगी में नहीं की थी। इतने बड़े घर की बहू बनने के बाद तो बिल्कुल भी नहीं।

राज नेहा के गुलाबी होंठों पर अपने सूखे गंदे से होंठ रख देता है। इतने बड़े घर की बहू को इस वक्त एक श्रद्धा ट्रक ड्राइवर उसके ही बेडरूम में दीवार से सटाकर किस कर रहा था। राज नेहा के होंठ चूस रहा था। नेहा बिल्कुल भी साथ नहीं दे रही थी। वो राज की पकड़ से निकलने की कोशिश कर रही औ| लेकिन राज को मजबूत पकड़ उसकी गोरी नंगी कमर पर थी। वो नेहा को हिलने भी नहीं दे रहा था और उसके गुलाबी होंठ चूसे जा रहा था। नेहा का जैसे दिमाग फट गया । आखीर कार, एक काला बूटा ट्रक ड्राइ का उसके कोमल गुलाबी होठों को चूसे जा रहा था।

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राज ठीक से तो नहीं लेकिन किस कर रहा था। वो नेहा के ऊपर के होंठों को कभी चसता, तो कभी नीचे के। वो बाहर से ही किस कर रहा था। उसे किस करना वैसे भी नहीं आता था। भला एक अनपद गंवार बड़े ट्रक हाइका को किस करना कहां से आता होगा। ऐसे ही ऑड़ी देर किस करने के बाद, किस तोड़ते हुये राज अपनी पकड़ ओड़ा दीली करता है। जिससे नेहा राज को दूर करती हैं खुद से। नेहा जोर-जोर से सांस लेने लगती है। उसकी सांस फूली हुई थी।

नेहा- बदतमीज बूटे... तेरी हिम्म्त कसे हुई मुझे किस करने की?

राज को नेहा का ' अचानक गुस्सा होना थोड़ा अजीब लगता है। राज बोलता है- “क्या हुआ नेहाजी?"

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नेहा- क्या हुआ? मेरी जान ही निकल दी थी।
 
राज- अरे ऐसे कैसे मैं अपनी गर्लफ्रेंड को मरने देगा।

नेहा- चुप करो।

राज फिर से नेहा की तरफ बढ़ने लगता है।

नेहा- मेरे पास मत आओ तुम।

राज- क्यों मेरी जाल? अपने बायफ्रेंड को कुछ करने तो दो।

नेहा- तुम मेरे बायफ्रेंड नहीं हो।

राज- लोकन त मेरी गर्लफ्रेंड तो है।

नेहा- "चुप रहो.."

तभी साविनी वर्मा, नेहा की सास कर आवाज आई- "नेहा:.."

नेहा सावित्री की आवाज सुनकर डर जाती है। उसको डर आ की अगर सावित्री यहीं आ गई तो पता नहीं क्या होगा? नेहा- "प्लीज.. जाओ यहीं से..."

राज- चला जाऊँगा जानेमजा पहले एक चुम्मा तो दे दे।

नेहा- “नहीं, बिल्कुल नहीं। प्लीज़... जाओ यहाँ से.."

राज. नहीं जाऊँगा जब तक तू चुम्मा नहीं देगी।

नेहा- प्लीज़... राज जाओ यहाँ से।।

राज. चला जाता हूँ अगर तू मुझे बाद में चुम्मा देने का वादा करती हो तो।

नेहा- नहीं, मैंमें नहीं दूंगी।

राज- फिर में नहीं जाऊँगा।

नेहा मन में- "यह कमीना बढ़ा में जाने वाला नहीं है। अब में क्या करूँ? मैं इस गंदे बूढ़े को किस नहीं कर सकती। लेकिन ये ऐसे जाएगा भी नहीं।

नेहा- प्लीज़... राज ऐसा मत करो। चले जाओ यहाँ से।

राज- नहीं मतलब नहीं। तभी फिर से आवाज आती है।

सावित्री नेहा कहाँ हो?

नेहा- आई।

नेहा- प्लीज... राज जाओ।

राज- चुम्मा दो।

नेहा चिदकर- "ठीक है, बाद में..'

राज के मुंह पर कातिल मुश्कान फैल जाती हैं।

नेहा अपनी बात पर यकीन नहीं कर रही थी। वो ऐसा कैसे बोल गई?

राज- "ठीक है मेरी जान। बाद में आता हैं..." और राज चला जाता है छप-छपकर।

नेहा भी थोड़ी देर बाद बाहर चली जाती हैं।

राज पीछे कोठी में चला जाता है। अभी भी शाम नहीं हुई थी। जय अभी भी इयूटी से आया नहीं था। राज रूम में बैठकर बीड़ी पी रहा था और नेहा के बारे में सोच रहा था- "साला हरामी क्या माल फँसाया है। साली मस्त माल है। इसकी चुदाई में तो मजा आ जाएगा। साली को अपनी बनाकर रखेंगा। राज तेरे अच्छे दिन आ गये लगता है.." और ऐसा बोलकर वो हँसता है।

शाम में सब घर आ जाते हैं। खाना खाकर सब लोग हाल में बातें कर रहे थे। ऐसा रोज नहीं होता था की सब परिवार एक साथ बैठकर बातें करें। लेकिन कभी-कभी ऐसा होता था।

इधर जय भी आ चुका था। वो पीछे चला जाता है। जहाँ राज अपने मोबाइल पर पोर्न देख रहा था।
 
कड़ी_05

जय- "अबे साले हर वक्त यहीं करता है क्या? कुछ तो काम कर। आज भी पहले चला आया। पहले आकर किया किया?"

राज- अब्बे कुछ काम से आया था।

जय- कैसा काम? मैं भी तो सुनं।

राज- अञ्चे उस नेहा मालकिन को पटमैं रहा था।

जय- क्या पट गई। क्या मार खाकर आया है।

राज- अबे साली को मसलकर आ रहा हैं।

जय- क्या बात कर रहा है। साली कैसे मान गई।

राज- वो सब छोड़। अधे तुझे कोई नहीं चाहिए क्या?

जय- चाहिए ला... साले दिला जा।

राज- अबे ऐसे ही मिल जाएगी क्या? हलवा है क्या? ओड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी। यह बड़े घर की औरतें साली बहुत कड़क होती हैं।

जय- किसकी बात कर रहा है त?

राज- अबे सौरभ भाई की बीवी है ना रिया मालेकिला मस्त माल है। ट्राई कर।

जय- क्या बात कर रहा है। तूने कब देखा उसको?

राज- अरे आज देखा था। क्या माल दिखती है।

असल में आज नेहा के रूम से आते हुए राज की नजर सौरभ की पत्नी रिया पर पड़ गई थी। रिया 23 साल की एक मस्त खसरत औरत भी। वो भी एक अमीर परिवार से थी। यह भी एकदम परी की तरह लगती भी। नेहा से दो साल छोटी, एकदम पताका।

इधर रूम में। जय- क्या बात है राज मजा आ जाएगा। क्या खबर दी है। अब देख में कैसे पटाता है उसको।

राज- अबे ज्यादा खुश मत हो। ध्यान से करना जो भी कर रहा है। अगर कुछ उल्टा सीधा हो गया ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

- हाँ हाँ देखता जा तू।

फिर दोनों ऐसे ही बातें करते हैं। थोड़ी देर बाद राज घर की तरफ जाता हैं। दरवाजे के पास जाने के बाद वो देखता है की सब लोग बातें कर रहे हैं। फिर वो चुपके चुपके अंदर जाने लगता है। अंदर सब लोग हाल में थे तो उसे पता था अगर वो ऐसे पकड़ा गया तो उसकी खैर नहीं। हाल में दो बड़े सोफे थे जिसपर बैठकर सब लोग बातें कर रहे थे। सामने बड़ी सी टीवी भी चालू भी।

इधर राज सबकी नजर से छपते हए सोफे के पीछे वाली दीवार तक पहुँच जाता है। वहीं वो देखता है की नेहा सोफे के आखीर में बैठी हुई है और उसके साइड में उसका पति भी था। राज लेकिन किसी भी हालत में नेहा के साथ कुछ करने का इशादा करके आया आ। वहीं सब परिवार मेंबर्ज़ हंसी मजाक कर रहे थे। राज लार मानने वाला बिल्कुल नहीं था। वो अब सोफे के पीछे धीरे से चला जाता है। वहीं पर जहाँ नेहा बैठी हुई थी। राज के लिए अच्छी बात ये थी की उसको किसी ने अभी तक नहीं देखा था। राज अब धीरे से जहाँ नेहा बैठी थी वहीं बिल्कुल पीछे जाकर, धीरे से अपने हाथ से नेहा को छूता है। इस तरह से राज किसी को भी नहीं दिख रहा था क्योंकी वो सोफे के पीछे था।

किसी का हाथ टच होते ही नेहा जैसे उछल पड़ती है। वो जब नीचे देखती है तो एक काला हाथ उसको छू रहा

था। उसे जल्द ही पता चल जाता है की ये राज है। नेहा को उछलकर देखकर उसका पति

विशाल- क्या हुभा नेहा?

नेहा को कुछ में समझ नहीं आता के क्या बोले- "वी... वो कुछ नहीं।

विशाल- आर यू योर?

नेहा- हाँ कुछ नहीं।

नेहा का उसके पति को ऐसा बोलना राज के लिये काफी था और मस्ती करने के लिए नेहा के साथ। लेकिन नेहा राज का हाथ झट से हटा देती है। लेकिन राज फिर से अपना हाथ ले जाता है आगे। नेहा बार-बार हटा भी रही भी उसका हाथा नेहा वहां परेशान महसूस कर रही थी। नेहा जानती थी यह आदमी इतनी आसानी से यहाँ से जाने वाला नहीं है। नेहा अब तोड़ा सोफे की तरफ मुँह करते हुए।

नेहा- "प्लीज..."

राज भी पक्का खिलाड़ी था था- "बिल्कुल नहीं."

नेहा जानती थी की यही राज का जवाब होगा। नेहा मन में- "मैं यहाँ सकी तो ये बढ़ा कुछ ना कुछ करेगा। इससे अच्छा है मैं यहीं से चली जाऊँ। वो इतने लोगों के सामने आ भी नहीं पाएगा... नेहा ये सांच तो रही थी। लेकिन हम सब को ये बात समझ नहीं आती की वो उस बूढ़े की हरकत के बारे घरवालों को क्यों नहीं बता रही है। खैर, अब नेहा उठती है।

विशाल- क्या हुआ नेहा?

नेहा- वो कुछ नहीं मैं रूम में जा रही हूँ।

विशाल- क्यों बैठा ला।

नेहा- वो थोड़ा काम है।

विशाल- हाँ ठीक है।

नेहा फिर जाने लगती है। नेहा एक नजर सोफे के पीछे दौड़ाती हैं। वहां पर राज छिपकर बैठा हुआ। वो नेहा को देखकर गुस्से का इजहार करता है। नेहा चुपचाप चली जाती है। लेकिन बी जाते-जाते रुक जाती है क्योंकी उसे लगा की राज उसके पीछे आने की कोशिश कर रहा है। उसे डर लग रहा था की कहाँ इस मवाली को किसी ने उसके पीछे जाते हुए देख लिया तो क्या सोचेगा। नेहा इर रही थी। वो जल्दी से रूम की तरफ चली जाती है।
 
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