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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

राज भी नेहा की तरफ बड़ी प्यासी नजरों से देखते हुए अपनी शर्ट निकालने लगता है। शर्ट निकालते ही उसकी सफेद बालों से भरी हुई छाती सामने आ जाती है। नेहा उसे देखकर शर्मा जाती है।

राज- "हाय मेरी जान शर्मा गई.."

राज अब अपनी पैंट उतार देता है। पैंट उतारते ही उसकी गंदी सी अंडरवेर सामने आ जाती है। राज को सिर्फ एक अंडरवेर में देखकर नेहा जल्दी से अपनी नजरें दूसरी तरफ कर लेती है। राज अब नेहा की तरफ जाने लगता है बेड़ पर चढ़कर। नेहा दूसरी तरफ नज़र किए हुए थी। अब राज नेहा के पैर के पास जाकर उसके एक पैर को चूमने लगता है।

नेहा- अहह... करीम्मा

नेहा ये सब पहली बार अनुभव कर रही थी। जो उसे अलग ही मजा दिला रहा था। राज पैरों को चूमते हुए नेहा के पैर की उंगलियां मुँह में लेकर चूसने लगता है।

नेहा- "अहह.. आह... राज ये क्या अहह.." और नेहा अब राज को देख रही थी कैसे वो अपने मुँह में लेकर उसके पैर की उंगलियां चूम रहा है।

राज ऐसे ही दोनों फैटों को चूमने के बाद थोड़ा ऊपर आता है। पैरों से होते हए वो नेहा का पेटीकोट भी ऊपर कर रहा था। अब नेहा की जांचं दिख रही थी। राज उधर भी चूमने लगता है।

नेहा- "अहह.."

नेहा को गोरी गोरी जांघे उफ्फ्फ.... बहुत हाट इश्य था। नेहा की साँसें तेज चल रही थी क्योंकी एक बदसूरत बूढ़ा उसके साथ यूं रोमांस कर रहा था। नेहा की आँखें मजे में बंद थी। नेहा हवस में सब कुछ भूल चुकी थी कि वो इतने बड़े घर की बहू है और किसी गंदे आदमी बो भी बूढ़े के साथ अपनी हवस मिटा रही हैं।

उधर से राज अब नेहा की गोरी पतली कमर तक पहुँचता है, और अपना मुँह सीधा नाभि पर रखकर वहीं एक बार चूमता है।

नेहा- "ओहह...

राज के खुरदरे होंठ नेहा के गोरे पेट पर चूम रहे थे। अब नेहा के हाथ अचानक राज के सिर पर आ जाते हैं

और वो राज के बालों में हाथ फेरने लगती है।

नेहा- “आहह."

थोड़ी देर में राज नेहा की ब्रा तक पहुँच जाता है। राज के सामने नेहा की गोरी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्रा में कैद थी। राज अब अपना मुँह नेहा की एक चुची पर ब्रा के ऊपर से रख देता है।

नेहा- "अहह..." और राज के मुँह की गर्मी अपनी चूचियों पर पाकर नेहा की आ3: निकल जाती है।

इमेजिन कीजिये जरा एक खूबसूरत जवान औरत के साथ एक काला गंदा बूढ़ा कर रहा हो। राज ब्रा के ऊपर से नेहा के निपल को अपने दांतों से काट ता है।

नेहा - "अहह... धीरे.."

नेहा के हाथ अभी भी राज के सिर पर घूम रहे थे। वो किसी और ही दुनियां में जा चुकी थी। हवस की दुनियां में। राज ऐसे ही दोनों चूचियां अपने मुँह से मसलने के बाद अब नेहा के खूबसूरत चेहरे के पास आ जाता है। नेहा जो गरम हो चुकी थी। पूरी हक्स के साथ राज को देखती है। दोनों एकदूसरे की आँखों में देखते हुए

अचानक ही दोनों एकदूसरे को पागलों की तरह किस करने लगते हैं।

नेहा- "उम्म्म्म .."

नेहा नीचे और राज उसके ऊपर। नेहा के लाल सीले होंठों को राज चूस रहा था। वैसे ही नेहा राज के काले होंठ चूस रही थी। नेहा हवस सब कुछ भूल गई थी की वो एक लो-क्लास बूढ़े को किस कर रही हैं। कुछ तीन मिनट किस करने के बाद राज खुद किस तोड़ देता है। राज खुद हैरान था जिस तरह से नेहा उसे किस कर रही थी। राज की साँसें फूली हुई थी। वो नेहा के ऊपर झुका हुआ उसको देखने लगता है। नेहा भी उसे देख रही थी।

राज- क्या बात है मेरी बुलबुल, बहुत गरम लग रही है आज?

नेहा- "तुमने ही तो किया है.." ऐसा बोलकर उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है।

राज- "अच्छा तो फिर मुझे ही तुझे शांत करना पड़ेगा.." और उसके ऊपर झुक कर उसके गल्ले को चूमने लगता है।

नेहा- "उम्म्म... अहह...

राज ने उसके दोनों हाथ अपने हाथों में बेड में टिकाए हुए थे। वो चेहरे के आस-पास सब तरफ चूम रहा था। राज के बालों वाली छाती नेहा की ब्रा के अंदर कैद चूचियों से लग रही थी। थोड़ी देर बाद राज बेड से उतर कर अपनी अंडरवेर निकालने लगता है। जिसे देखकर नेहा शर्म के मारे अपना मुँह दूसरी तरफ फेटकर लेटी है। राज अपनी गंदी सी अंडर निकाल देता है। अब वो पूरा नंगा था। उसका काला बटा बदल, और लटकता हुआ उसका काला बड़ा लौड़ा।

अब वो बेड पर चढ़ जाता है। नेहा की चूचियां ब्रा में कैद उसकी तेज साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही भौं। अब राज नेहा की कमर से उसका पेटीकोट नीचे करने लगता है। नीचे नेहा की गोरी जांचें अब सामने आ रही थी। राज अब पेटीकोट निकल देता है। अब नेहा सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

नेहा अपने पैरों पर राज का लण्ड महसूस कर रही थी। अब राज पर आते हुए नेहा के चेहरे के पास आता है। नीचे वो अपना खड़ा लौड़ा नेहा की पेटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर घिसने लगता है।

नेहा- "अह...

राज नेहा की तरफ देख रहा था। नेहा हबस में डूबी, उसकी आँखें मदहोश थी। थोड़ी देर बाद राज अब नीचे आकर नेहा की पैटी निकाल देता है। पैंटी निकालते हुए राज देखता है की नेहा की चूत झड़ चुकी है। गोली हो चुकी भी नेहा की चूत। जिसे देखकर राज के बदसूरत चेहरे पर एक कमीनी स्माइल आ जाती हैं।

अब राज पैंटी निकाल देता है। पैंटी निकालते हुए नेहा अपनी गाण्ड थोड़ा ऊपर करती हैं। अब नेहा की चूत राज के सामने औ, जो राज के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं औ। जो औरत कभी उसे डाँटती भी। आज उसी औरत को उसने इस हालत में लाकर रखा हुआ था। उसकी चूत इस बूढ़े के सामने बिल्कुल नंगी थी। अब राज झुक कर अपना मुँह चूत पर लगा देता है।

नेहा- उफफ्फ... उम्म्म्म ... अहह.."

राज नेहा की गीली चूत राज बड़े मजे से चाटने लगता है।

नेहा- "अहह... अहह... अहह... अहह... अहह.." और नेहा सिसकारियां लेते हए अब अपनी चूचियां ब्रा के ऊपर से हल्के हल्के दबा रही थी- "अहह... अहह... अहह..'

इस तरह राज का उसकी चूत चाटना एक अलग ही मजा दे रहा था। नेहा अपने होंठों भी काट रही थी। थोड़ी देर वैसा करने के बाद राज अब अपना काला लौड़ा नेहा की गुलाबी चूत पर सेट करता है
 
नेहा- "अहह.." और राज का काला लण्ड अपनी गरम चूत फा पाकर नेहा पागल सी हो रही थी।

राज नेहा के चेहरे को देखते हुए- "मेरी जान तेरी चूत तो बहुत गरम लग रही है। बोल क्या करूँ इसका?"

नेहा राज की तरफ हवस भरी नजरों से देख रही थी। राज भी उसकी तरफ देखते हुए अपना लण्ड उसकी चूत पर घिसने लगता है।

नेहा- "अहह... आहह.."

राज के लण्ड की चमड़ी का अहसास नेहा की लिए बहुत ज्यादा रोमांचक था। उससे कंट्रोल नहीं हो रहा था। वो राज का लण्ड बस अपनी चूत में लेना चाहती थी। लेकिन राज आज उसको सताने के मूड में था। वो अपना लण्ड वहीं पर घिस रहा था।

नेहा- "अहह.. अहह... प्लीज... राज अह.."

राज- ही बोल क्या करना है?

नेहा अपनी आँखें मदहोशी के आलम में खोलकर बंद करते हुए. "राज क्यों सता रहे हो मुझे अहह.."

राज- मैं कहां सता रहा हूँ। तू बस बता दे क्या करना है?

नेहा चुप रहती है इस बार। लेकिन उसके चेहरे पर निराशा साफ दिख रही थी। राज का काला लौड़ा नेहा की चूत को छूकर और गीली कर रहा था। राज के लण्ड के अहसास से ही नेहा की चूत गीली हुई जा रही थी।

नेहा- "अहह... राज उफफ्फ... प्लीज... अहह.."

तभी नेहा की मोबाइल पर किसी का काल आता है। नेहा का काल की तरफ खयाल ही नहीं जाता। वो तो बस मदहोशी के आलम में डूबी हुई थी। थोड़ी देर रिंग होने के बाद बंद हो जाती है। राज अभी भी अपना लौड़ा नेहा की चूत पर घिस रहा था। नेहा की गीली चूत उसे साफ बता रही थी की वो चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार है।

नेहा- "आह्ह.."

राज- बोल क्या करना है?

नेहा- "अहह.. प्लीज़्ज़.."

राज- डाल दं अंदर?

नेहा अपनी पलकें एक बार नीचे करती है। जैसे कह रही हो ही डाल दो तुम्हारा लण्ड अंदर मेरी चूत में।

राज- - ऐसे नहीं मेरी जान। अपने मुँह से बोल।

नेहा थोड़ा हैरानी से राज की तरफ देखते हुए- "नहीं.."

राज- "वरना पड़ी रह ऐसे हो। में अंदर नहीं डालने वाला..' कहकर राज एक बार लण्ड की टोपी थोड़ा अंदर करके बाहर कर लेता है।

नेहा- "अहह.. क्यों कर रहे हो ऐसा राज?

राज- त् सिर्फ बोल दे फिर देख।

नेहा भले ही हवस में भी लेकिन इतनी गंदी बातें उसने कथी कि भी नहीं की थी। वो ठहरी बड़े अच्छे खानदान में पली पड़ी। उसको इन सबका कोई अनुभव नहीं था।

राज- "बोल की डाल दो तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में..." और राज फिर से अपना लण्ड वहीं घिसता है। राज को हालांकी मजा आ रहा था यू नेहा को टीज़ करने में।

नेहा वो बात बोलने से झिझुक रही थी। लेकिन उससे अब कंट्रोल भी नहीं हो रहा था।

राज. बोलो भी जल्दी।

नेहा- “अहह.. राज प्लीज़...

राज. ये प्लीज़्ज़... ब्लीज़ नहीं चलेगा। बोलना है तो बोल वरना में जा रहा है।

नेहा मन में. "कमीना कहीं का... पता नहीं क्यों मुझे तड़पा रहा है... राज के वार से वो अब हार मान लेती हैं।

नेहा कहती है- "अहह... अहह... राज प्लीज़्ज़... तुम्हारा लण्ड डाल दो."

राज- लण्ड डाल दूं लेकिन कहां मेरी रानी?

नेहा- "उफफफो.. मेरी चूत में..."

राज खुश हो जाता है। नेहा जैसी खूबसूरत जवान औरत को उसने इतना कुछ बोलने पर मजबूर किया था, वो भी एक काला बदसूरत बूढ़ा होने के बावजूद। नेहा उतना बोलने पर ही शर्म से लाल हो गई थी। अब राज अपने लण्ड का नेहा की चूत पर दबाव डालता है। उसके ऊपर झुक कर वो लण्ड अंदर करने लगता है।

नेहा- “अहह.."

थोड़े दबाव के साथ उसका लण्ड अंदर जाने लगता है, और फिर नेहा की चूत से तो जैसे नदी बह रही थी। उसी नदी में में काला अजगर आसानी से जा रहा था।

नेहा- "अहह.." और इस बड़े लण्ड की घिसाई अपनी चूत की दीवारों पर नेहा को एक अजीब सा सकून दे रही धी- "अहह... अहह... अहह.. आ अहह... अहह... अहह .."

राज अब अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगता है।

नेहा- "अहह... अहह... अहह... अहह.." और नेहा को दहकती चूत को राज के लण्ड से अब राहत मिल रही थी।

तभी वहीं फिर से काल की रिंग होती हैं। इस बार नेहा अपनी साइड में मोबाइल की तरफ देखती है। नेहा मन में- "किसका काल होगा?" नेहा अपना हाथ बढ़ाकर मोबाइल लेती है, तो उसपर अपने पति का नाम देखकर थोड़ा दूर जाती है।

नेहा- विशाल्ल का काल

राज- ओहो तेरा पति। उठा फोन।

नेहा- नहीं नहीं उनको शक हो जायगा।

राज- मैं कहता हूँ ना... उठा।

नेहा- लेकिन?

राज अपनी एक उंगली नेहा के होंठों पर रखकर- "ओहह.. उठा फोन..."

नेहा झिझुकते हुए काल उठाती है- "हेल्लो.."

राज तब तक अपने हल्के-हल्के धक्के लगा रहा था।

विशाल- हाँ नेहा उठ गई?

नेहा- हाँ कब का।

विशाल- क्या कर रही हो?

तभी राज तेज धक्के लगाने लगता है। नेहा एक हाथ में अपना मुँह बंद कर लेती हैं। ताकी उसकी चीखें विशाल तक ना जा पाएं। राज का लण्ड बड़ी तेजी से नेहा की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। नेहा विशाल के सवाल का क्या जवाब देती? क्या बताती की वो इस वक्त एक काले बटे से चुदवा रही है।

नेहा- "वो.. वो... कुछ नहीं बस लेटी हुई थी।

विशाल- वो।

नेहा- तुम कब वापस आ रहे हो?

विशाल- अरे हों वही बताने के लिए मैंने काल किया था। हम लोग कल तक आ जाएंगे।

नेहा- कल तक... लेकिन क्यों?

विशाल- वो नेहा यहाँ कुछ काम है। हम लोग आ जाएंगे कल।

नेहा- हाँ ठीक है।

राज के धक्के अब और तेज हो रहे थे। नेहा बार-बार अपना मुँह पकड़कर अपनी चौखें बाहर नहीं आने दे रही थी। राज अब नेहा को और टोज करने के लिए नेहा की क्लिट पर अपनी उंगली रगड़ने लगता है। नेहा विशाल के पास बात करते हुए राज की ओर देखकर आँखों ही आँखों में वैसा ना करने का इशारा करती हैं।

लेकिन राज वैसा करता रहता है। राज अब लगातार नेहा को चोद रहा था। नेहा फोन पर बात करते हुए राज को तेज ना करने का इशारा कर रही थी। तभी राज नेहा के ऊपर एकदम झुक जाता है। नेहा के चेहरे के करीब जाता है। राज के बदसूरत चेहरे को इतना करीब पाकर नेहा की साँसें तेज चलने लगती हैं। क्योंकी एक तरफ तो वो अपने पति से फोन पर बात कर रही थी और दूसरी तरफ वो एक काले बूढ़े से चुदवा रही थी। धक्के लगाते हुए राज नेहा की आँखों में देखने लगता है। नेहा को भी आँखें उसे देखने लगती हैं। अब राज अपने काले होंठ उसके लाल होंठों की तरफ करने लगता है।

नेहा जिसे देखकर- "विशाल में काल खतम कर रही हैं। बाइ.." और वो जल्दी से काल काट देती हैं।

तभी राज उसके होंठों पर अपने होंठ रख देता है, और किस करने लगता है कामुकता से।

नेहा- उम्म्म्म

... अम्म्म ... उम्म्म्म

... अहह... उम्म्म्म

.."

राज किस करते हुए धक्के लगा रहा था। नेहा के होंठों को चूसते हुए उसे बहुत मज़ा आ रहा था। नेहा भी उसका साथ अच्छे से दे रही थी। वो तो जसे खुद को इस गंदे बदसूरत बूढ़े को सौंप चुकी भी। थोड़ी देर बाद किस तोड़कर राज नेहा की कमर पकड़कर 4-5 धक्के लगाकर, अपना लण्ड बाहर निकाल लेता है। नेहा की चूत तो जैसे राज के लण्ड कि बाहर जाने हो नहीं देना चाहती थी। नेहा की गोली चूत का रस राज के काले लण्ड पर लगा हुआ था। जिसे देखकर नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है। अब राज बेड पर लेट जाता है।

राज. “चल मेरी जान। अब त मेरे ऊपर आ जा.."
 
राज. “चल मेरी जान। अब त मेरे ऊपर आ जा.."

नेहा शर्मा जाती है। नेहा अब बेड में बैठकर एक बार राज के बड़े काले शरीर को देखती है। सफेद बालों वाली उसकी छाती देखकर उसे बहुत शर्म आती है।

राज- आ जा मेरे ऊपर मेरी जान।

नेहा अब राज के ऊपर चढ़ जाती है। उसकी नंगी गीली चूत राज को अपनी जांघों पर लगती है। नेहा वैसे ही बैठती है।

राज- मेरी जान तेरी यह ब्रा निकाल देना।

नेहा राज की तरफ देखते हुए अपने हाथ पीछे ले जाती है और ब्रा का हुक खोल देती हैं, और फिर निकाल देती है। उसकी बड़ी-बड़ी गांरी चूचियां सामने आ जाती हैं।

राज- हाय क्या चूचियां हैं मेरी गर्लफ्रेंड की?

नेहा शर्मा जाती है।

राज- अब मेरा लण्ड खुद ही ले लेना अपनी चूत में।

नेहा इसपर कुछ जवाब नहीं देती।

राज- चल चल जल्दी कर।

नेहा एक बार राज की तरफ स्माइल करती है, और फिर भीड़ा उठकर राज का लण्ड पकड़ लेती है और अपनी चूत लण्ड के पास लाती है। और फिर लगाकर अपनी चूत लण्ड पर दबाने लगती है- "अहह..वो अपने होठ काट रही थी। थोड़ा दबाव डालने पर लण्ड चला जाता है- "अहह.."

राज- "तेरी चूत की जो गर्मी है मेरी जान, हाय लाजवाब है..."

नेहा अब लण्ड सेट करके राज की छाती पर हाथ रखती हैं। नेहा खुद अब राज के लण्ड पर ऊपर-नीचे होने लगती है- "अहह... हाय अहह... अहह... आह्ह.. आहह.." और उसकी चूचियां हिल रहे थे खुद चुदते हुए।

राज बस लेटा हुआ था। वो तो इस खूबसूरत जवान औरत की हक्स को एंजाय कर रहा था। वो नेहा को खुद ऊपर-नीचे होते हुए देख रहा था। नेहा की चूत जो उसके लौड़े पर ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके लिए सपना ही था बस। नेहा राज के लण्ड पर ऊपर-नीचे हो हो रही थी की तभी सीढ़ियों से दीदी दीदी बोलते हुए रिया के आने की आवाज आती हैं। राज और नेहा दोनों की नजर दरवाजे पर पड़ती है जो खुला हुआ था।

नेहा एकदम दूर जाती है- "ओह नो... रिया.."

वो राज की ओर देखती है जो बिल्कुल भी परेशानी में नहीं लग रहा था। नेहा डर रही थी। क्योंकी रिया किसी भी वक्त यहाँ आने वाली थी। हालांकी रिया पहले भी उसका राज के साथ देख चुकी है। लेकिन इस वक्त वो खुद राज के ऊपर चढ़कर चुदवा रही थी।

अब नेहा राज के ऊपर से उठने लगती है तभी राज उसको पकड़ता है।

नेहा राज की तरफ देखते हुए- "क्या कर रहे हो छोड़ मुझे, रिया आ रही है.."

राज- आने देना मेरी जान। क्या कर लेगी वो?

नेहा- "नहीं नहीं छोड़ो तुम मुझे प्लीज़..."

राज- ठीक हैं लेकिन एक चुम्मा दे दे पहले।

नेहा- तुम पागल हो क्या? छोड़ो मुझे रिया आ जाएगी।

राज- चुम्मा दे जल्दी से।

नेहा अब कुछ भी सोचने की सिचुयेशन में नहीं थी। अब नेहा जल्दी से राज के गाल पर चुम्मा देती है। अब राज उसको छोड़ देता है।

नेहा- प्लीज.. तुम छुप जाओ।

राज- कहाँ छुप जाऊं ?

नेहा- बाथरूम में जाओ जल्दी।

राज जल्दी से बाथरूम में चला जाता है। नेहा बेड के साइड में पड़े हुए उसके और राज के कपड़े उठाकर वार्डरोब में डाल देती हैं और खुद भी बाथरूम में चली जाती हैं। तभी दरवाजा खुलता है।

रिया- दीदी आप कहाँ हो?

नेहा- "रिया में यहाँ बाथरूम में हैं.." इधर नेहा बाथरूम में लंगी राज के आगे खड़ी थी। राज नेहा की नंगी गाण्ड को देख रहा था।

रिया- दीदी में थोड़ा बाहर जा रही हूँ । एक दो घंटे में आ जाऊँगी।

नेहा- कहां जा रही हो रिया?

रिया- वो दीदी कुछ काम है।

नेहा- ठीक है। अपना खयाल रखना।

इधर राज अब नेहा की नंगी गाण्ड से वो खुद नंगा चिपक जाता है। नेहा को अपनी गाण्ड पर राज का काला लौड़ा चुभता है।

नेहा- "अहह.." और नेहा की मुँह से एक सेक्सी सिसकारी निकलती है।

रिया जिसे सुन लेती है, और कहती है- “क्या हुआ दीदी?"

नेहा डर जाती है। वो राज को ऐसे ना करने का इशारा करती हैं। लेकिन राज पीछे से नेहा की चूत म अपना लौड़ा घिसने लगता है। नेहा अपना मुँह पकड़ लेती है। ताकी उसकी आवाज बाहर ना जा पाए।

नेहा- "ओव्ह... ओव्ह... रिया कुछ नहीं.."

रिया- आप ठीक हो ना दीदी?

नेहा- हाँ हाँ में ठीक हूँ।

रिया- ठीक है दीदी मैं चलती हूँ। बाइ।

नेहा- "बाइ.." फिर रिया वहीं से चली जाती हैं।

इधर राज नेहा की चूत में अपना लौड़ा घुसाने ही वाला था।

नेहा उसकी पकड़ से छूटकर बाहर जाते हुए- "छोड़ो ना... तुमको तो बस यही पड़ी रहती हैं.."

राज- रुक रुक किधर भाग रही है?

नेहा बाहर भाग जाती है। राज भी उसके पीछे भागने लगता है। बेड के पास पहुँचने तक राज उसे पीछे से पकड़ लेता है।

नेहा- "अहह.. छोड़ो .."

राज नेहा का कमर सख्ती से पकड़ते हए- "ऐसे कसे मेरी जान? में अपनी गर्लफ्रेंड का साथ कुछ भी कर सकता हूँ.."

नेहा इस बात से शर्मा जाती हैं। दोनों नंगे थे। एक तो बूढ़ा और दूसरी इस घर की खूबसूरत बहू। नेहा छटपटाने लगती है- "छोड़ा ना राज मैं थक गई हूँ।....

राज मन में- "ये साली बहुत नखरे कर रही है। साली के बड़े मजे लेता हूँ।.."

राज अब नेहा को छोड़ देता है। नेहा झट से उसकी पकड़ से निकलकर जरा सा दूर चली जाती है। राज गुस्सा होने की आक्टिंग करता है। जिसे देखकर नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं।

राज. मेरे कपड़े कहाँ है?

नेहा मुश्कुराते हुए- "क्यों? जा रहे हो क्या?"

राज- ही जा रहा हूँ। मेरे कपड़े कहाँ है?

नेहा बड़े ही शरारती अंदाज में. "मैं नहीं दूगी.."

राज सीरियस होने की आक्टिंग करते हुए- "मैंने कहा मेरे कपड़े दो.."

नेहा- मैं नहीं देने वाली।

राज अब अपने कपड़े ढूँढने लगता है। उसे रूम में कहीं पर भी कपड़े नहीं मिल रहे थे। इसलिए बेड के नीचे सब देखता है। उसे वहीं पर भी नहीं मिलते।

राज- मेरे कपड़े दे रही हो या नहीं?

नेहा- नहीं मतलब नहीं।

नेहा मुस्कुरा रही थी। उसे राज को सताने में मजा आ रहा था। उसकी शर्म सब जा चकी भी। राज जैसा काला बूढ़ा उसके सामने नंगा घूम रहा था, और उसे जरा सी भी शर्म नहीं आ रही थी। लेकिन के राज चलते हुए नेहा उसका काला गंदा सा झांटों से घिरा हुआ लण्ड जब हिल-इल रहा था तो उसे शर्म जरूर आ रही थी।

इधर राज ढूँढते हुए वार्डरोब तक पहुँच जाता है। राज के वार्डरोब खोलते ही उसके कपड़े दिख जाते हैं। वो अपने कपड़े निकाल लेता है, और एक-एक करके पहन लेता है। अब राज बाहर जाने लगता है।

नेहा वहीं पर खड़ी राज को जाते हुए देखने लगती है। राज जाते हुए नेहा को गुस्सा हो ऐसा दिखाता है। जिसपर नेहा मुश्करा देती है। अब राज रूम से बाहर चला जाता है। राज खुश था क्योंकी नेहा अब उसके कंट्रोल में पूरी तरह से थी।

नेहा अपने रूम में "कमीना कहीं का। लगता है गुस्सा हो गया.." और नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है। वो अब वापस बाथरूम में जाकर नहाकर फ्रेश हो जाती है।

इधर रिया दो घंटे बाद घर वापस आती है। कार मुख्य दरवाजे तक आती है। लेकिन यहाँ तो कुछ और ही हुआ है। रिया कार में जल्दी-जल्दी उतरती हैं और भागकर कार का पीछे का दरवाजा खोलती है। दरवाजा खुलते ही वहीं से जय लड़खड़ाता हआ बाहर आता है। उसे चलने में कुछ तकलीफ हो रही थी। जय धीरे से कार से उतरता है। रिया वहीं खड़ी थोड़ी टेन्शन में लग रही थी।

रिया- आप ठीक तो हैं?

जय- रहने दे। तूने जो किया है, उसके बाद कैसे ठीक हो सकता है।

रिया- देखिए मैंने कोई जानबूझ कर थोड़ी किया। वो गलती से हो गया।
 
असल में हुआ ये था कि रिया जब अपने काम से वापस आ रही थी, तो जय रोड से चलते हुए आ रहा था। रिया उसी रोड से आ रही थी। कार धीरे थी लेकिन रिया का ध्यान भटकने की वजह से एक जगह जय को हल्का सा धक्का लग जाता हैं कार से। तभी जय के गिरने की वजह से यह सब हुआ। उस वक़्त रिया जय की कार से लेकर इधर तक आ जाती है। इधर जय चलने की कोशिश करता है लेकिन उससे नहीं होता।

असल में जय को हुआ कुछ भी नहीं था। वो तो बस आक्टिंग कर रहा था कुछ होने की।

जय को यू लड़खड़ाता देखकर रिया को बुरा लगता है। लेकिन उसका मन तब उसे जय को हमदर्दी दिखाने से मना करता है, जब वो कल की चुदाई के बारे में याद करती है। इसी दरिंदे ने उसके साथ घिनौना खेल खेला था। लेकिन रिया काफी हद तक एमोशनल भी थी। उससे जय की यह हालत देखी भी नहीं जा रही थी। जय ऐसे ही दो-तीन बार झळ मूठ का चलने की कोशिश करता है लेकिन नहीं हो पाता।

तभी रिया कहती है- "अरे किये तकलीफ हो रही है तो मैं किसी को बुलाती हूँ..." और रिया आस-पास कोई है क्या देखती है लेकिन उसे कोई नजर नहीं आता।

रिया मन में- "ओफ्फो... अब क्या करूँ यहाँ कोई भी नहीं है। इससे तो चला भी नहीं जा रहा। इस कमीने की पही सजा है। इस ने कल मेरे साथ स... लेकिन इसकी इस हालत की जिम्मेदार में ही हूँ । तो मेरा ही फर्ज बनता है इसकी मदद करने का।

जय तब एक और बार कोशिश करता है। इस बार वो नीचे गिरने की आक्टिंग करता है।

रिया जिसे देखकर उसके पास जाकर- "अरे रुको मैं ही मदद करती हूँ...

रिया के चेहरे पर थोड़ा गुस्सा था। जो देख कर जय भी समझ जाता है की यह किस बात का है। कल की चुदाई के बाद आज वही औरत उसकी मदद कर रही थी। अब जय उठ खड़ा होता है। रिया उसके बगल में आ जाती है। जय खुद अपना एक हाथ रिया के कंधे पर रखता है। रिया एक बार के लिए जय की तरफ गुस्से से देखती है, फिर चुप रहती हैं। अब दोनों नौकर क्वार्टर की तरफ चलने लगते हैं।

क्या मस्त लग रहे थे दोनों। एक जवान खूबसूरत, तो दूसरा एक काला बदसूरत बूढ़ा। चलते हुए रिया की चूचियां जय को अपनी साइड में दबी हुए महसूस हो रही थीं। जय जानबूझ कर उससे चिपकने की कोशिश कर रहा था। वो अपना हाथ जो कंधे पर रखा हुआ था रिया के, उसे वो थोड़ा नीचे लाने की कोशिश कर रहा था रिया की चूचियां के ऊपर। वो दोनों चलते हुए नौकर क्वार्टर्स के पास पहुँच जाते हैं।

रिया- ठीक है तो, यहां से अंदर जा सकते हैं ना आप?

जय- यहाँ तक लाकर आधे में ही छोड़ रही है।

रिया फिर से उसकी तरफ गुस्से से देखती हैं। फिर वो अंदर जाने लगती हैं। रिया दरवाजा खोलती हैं। अंदर राज नहीं था। वो कहीं बाहर गया हुआ था। अंदर आने के बाद ।

जय- "वो जो चारपाई हैं वहीं तक ले चल मुझे..."

रिया उधर जाने में उसकी मदद करने लगती है। चारपाई तक पहुँच कर जय उधर लेटने लगता है। वो लेट हो रहा था की वो जानबूझ कर रिया के हाथ पकड़े रखता है। जिससे रिया भी जय के ऊपर गिरने लगती हैं।

रिया- "आहह.."

जय और रिया दोनों एक के ऊपर एक गिर जाते हैं। जय पीठ के बल चारपाई पर गिरता है तो रिया उसके ऊपर सामने से गिरती है। कुछ देर के लिए वहाँ सन्नाटा छा जाता है। सब कुछ इतना जल्दी हआ था की किसी को भी संभालने का मौका नहीं मिला।

अब सियेशन ये थी कि रिया जय के सीने पर पड़ी हुई थी। उसकी चूचियां जय की छाती से दबी पड़ी थी। उसका खूबसूरत चेहरा जय के बदसूरत चेहरे के बिल्कुल सामने था, और नीचे जय का खड़ा लौड़ा उसकी पैंट के अंदर से रिया की चूत को ताड़ने में

एक मिनट बाद उस सन्नाटे की चुप्पी जय का एक धक्का तोड़ देता है। जय के नीचे से धक्का लगाने की वजह से रिया की चूत को साड़ी पर से एक झटका सा लगता है। जो रिया के जिस्म में बिजली सा दौड़ा देता है। रिया के मुंह से एक हल्की सिसकारी निकलती है।

रिया- “आहह.. तभी रिया को भी होश आता है की वो किस तरह जय के ऊपर पड़ी हुई है।

लेकिन अगले ही पल जय के हाथ उसकी कमर को जकड़ लेते हैं।

रिया- “आहह..."

जय की इस हरकत से रिया जय की तरफ देखने लगती हैं। उसके बाल उसके खूबसूरत चेहरे पर बिखरे हए थे। जो जय को पागल बनाने के लिए काफी थी। दोनों एक दूसरे को देखने लगते हैं। रिया के होंठ जैसे कौंपने लगते हैं। रिया के लिए हद से बाहर था खुद को कंट्रोल करना। क्योंकी नीचे से जय का काला लौड़ा उसकी चूत को साड़ी के ऊपर से तंग कर रहा था। और जय की यह हरकतें। फिर भी रिया इन सब फाइट ते हुए अपने आपको जय की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करती हैं। लेकिन इसी चक्कर में वो और भी कस जाती है जय की जकड़ में।

रिया- छोड़ो मुझे।

जय इतना सुनते ही अपना बदसूरत सा चेहरा रिया के खूबसूरत चेहरे के पास ले जाता है। दोनों की गरम साँसें एक दूसरे को महसूस हो रही थी। तभी ना जाने रिया किस दुनियाँ में खो जाती है, या कहिए एमोशन्स में बह जाती है। जय अपने काले होंठ रिया के गुलाबी होंठों पर रख देता है। और आश्चर्य की बात ये है की रिया जरा भी विरोध नहीं करती उस समय। लेकिन साथ भी नहीं दे रही थी।

जय खुद ही रिया के हॉठ अब चूसने लगता है। अपने हाथ जिससे उसने रिया की कमर को जकड़ रखे थे उन्हें अब वो रिया की गाण्ड पर लेजाकर दबाने लगता है। एक कामुक फीलिंग दोनों को आ रही थी अब। रिया की दोनों गाण्ड के फांकों को जय अच्छी तरह से मसल रहा था। बहुत ही कामुक दृश्य हो चुका था वहीं। रिया के बाल जय के चेहरे के आस-पास बिखरे पड़े थे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई दो प्रेमी सालों बाद बिछड़ने के बाद किस कर रहे हों।

जय अब रिया की गाण्ड से हाथ हटाते हुए रिया के सिर के पीछे अपना हाथ लेजाकर उसको अपनी तरफ खींचने लगता है। वो पूरे जोश में रिया को किस कर रहा था। इस तरह किस करने से रिया को तकलीफ होने लगती है।

रिया- "उम्म्म्म

... हम्म... उम्म्म्म

... उम्म्म .."

लेकिन अचानक ही रिया जय की पकड़ से छूट जाती है और उठ खड़ी हो जाती है। वो अपना मुँह अपने हाथों से पांछने लगती है। वो एक बार जय की तरफ गुस्से से देखती है, लेकिन कुछ नहीं बोलती। वो अब एक साइड जाकर जय की तरफ पीठ करके खड़ी हो जाती है। जय को भी हैरानी हो रही थी कि रिया यहीं से जा सकती औ लेकिन वो गई नहीं।

जय मन में- "साली को लण्ड चाहिए, लेकिन बताती नहाँ?" फिर जय अब खड़ा हो जाता है चारपाई से।

और रिया के पास चला जाता है और उसे पोछे से पकड़ लेता है।

रिया- "आअहह... छोड़ो मुझे..."

लेकिन जय उसे नहीं छोड़ता।

रिया- मैंने कहा छोड़ो मुझे बदतमीज।

जय को ऐसा बोलने पर थोड़ा गुस्सा आता है और वो रिया को पलटा कर दीवार से सटा देता है। और उसके हाथ भी दीवार से सटाकर उसके चेहरे के करीब जाता है। रिया उसकी तरफ देखने लगती है।

जय- "क्या मिर्ची है तू, एकदम तीखी... कल बहुत मजा आया तुझे चोदने मैं.."

रिया दूसरी तरफ मुँह कर लेती हैं।

जय- "क्या हुआ शर्म आ गई क्या?" और जय उसका चेहरा अपनी तरफ घुमा लेता है। अब जय रिया के मुँह को पकड़ते हुए खोलता है। रिया के होंठ बाहर को आते हैं। जय उसकी तरफ मुँह बढ़ाता है।

तभी दरवाजा पर राज की एंट्री होती है। राज के चेहरे पर एक कमीनी स्माइल आ जाती हैं।

लेकिन रिया राज को देखकर डर जाती है। उसको इतना अपमान कभी महसूस नहीं हुआ था। दो मर्दों के सामने उसकी इतनी लज्जा महसूस हो रही थी। राज के आते ही जय रिया को छोड़ देता है। रिया जल्दी में जाने लगती है। दरवाजे तक पहुँचकर राज भी उसको जाने के लिए रास्ता दे देता है। रिया फिर भागकर वहाँ से चली जाती है।

इधर राज अंदर जय के पास आकर- "वाह वाह क्या बात है बे? इस माल को यहीं तक ले आया.."

जय- क्या फायदा साली बहुत नाटक करती है। कुछ देर पहले तो साली कुछ भी नहीं बोल रही थी और अचानक पता नहीं साली को क्या हो गया की साली नाटक करने लगी।

राज- अबे ज्यादा जोर जबरदस्ती मत कर। साला ये जो माल है कछ देर ही मजा उठा पाएगा।

जय- बात तो तेरी सही हैं। ये अमीर घर की औरतें, सालियो को घमंड बहुत होता है अपनी खूबसूरती पर। वैसे कहाँ गया था तू?

राज- शराब लाने गया था। आज भी दोनों अकेली हैं।

जय- क्या बात कर रहा है, तुझे कैसे पता?

राज- अरे वो जो मेरी वाली है ना... उसके पति ने फोन किया आ उसको तब पता चला।

जय- क्या बात है? आज तो साली को अपने लण्ड की दीवानी बनाकर रहूँगा... राज और जय दोनों हैंसते हैं इसपर।

राज- हाँ बे तेरे तो मजे हैं। में तो अपनी वाली से गुस्सा होने का नाटक करके फँस गया।

जय इसपर हँसता है। वो दोनों ऐसे ही बातें करते हैं। ऐसे ही रात में खाना खाने के बाद रिया और नेहा बाहर हाल में ही बैठकर बातें कर रही थी।

रिया- दीदी क्या आप आज मेरे साथ मेरे रूम में सो सकती हैं?

नेहा समझ जाती है की रिया किसलिए ऐसा कह रही हैं। फिर भी वो अंजान बनकर- "क्यों रिया क्या हुआ, कोई प्राब्लम है क्या?"

रिया मन में- "मैं दीदी को बता भी नहीं सकती की उस कमीने ने मेरे साथ क्या किया है?"

रिया- नहीं दीदी, कुछ नहीं हुआ है। मैं तो बस अकेली महसूस कर रही थी इसलिए।

नेहा- ठीक है। मैं आ जाऊँगी।

रिया- थैक्स यू दीदी।

रिया मन में- "दीदी रहेंगी तो वो कमीना आएगा भी नही....

अब रिया को थोड़ी राहत मिलती हैं। लेकिन रिया को क्या पता को उसी जय की मदद खुद्र नेहा ने थी कि भी कल। लेकिन रिया नेहा पर बहुत भरोसा करती थी। अब दोनों थोड़ी देर और बातें करके रिया के रूम में चली जाती हैं।

नेहा- "तुम्हारे पास नाइट गाउन है ना रिया?"

रिया- हाँ दीदी क्यों?

नेहा- मुझे पहनना है।

रिया- "अभी देती हूँ दीदी... और रिया उसे एक मस्त शार्ट नाइट गाउन निकाल कर देती है।

नेहा- ये तो बहुत छोटा है, क्या बात है?

रिया शर्मा जाती है।

नेहा उसे पहन लेती है। उस नाइट गाउन में नेहा की गोरी जांघे बहुत ही सेक्सी लग रही थी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियां तो बस पूछो मत। ऊपर से उसका वो खूबसूरत चेहरा और मौंग में सिंदूर और गले में मंगल सूत्र । उफफ्फ... गजब की हाट लग रही थी नेहा।

नेहा- रिया तुम भी पहन लो ना। वैसे भी साड़ी में सोने में दिक्कत हैं ।

रिया- "में साड़ी में नहीं सोती दीदी। वो तो कभी-कभी... फिर रिया बार्डरोब से एक और बिल्कुल उसी तरह का शार्ट गाउन पहन लेती हैं। रिया भी नेहा की तरह एकदम पटाका लग रही थी।

नेहा- बहुत सेक्सी लग रही हो? सौरभ यहीं होता तो शायद बेहोश ही हो जाता।

रिया मुस्कुरा देती है, और कहती हैं- "आप भी ना दीदी। वैसे आप कहां कम लग रही हो?"

नेहा- थैक्स यू। चलो अब सोते हैं।

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रिया- "ही ठीक है दीदी.." फिर दोनों बेड पर लेट जाती हैं। कुछ देर बाद दोनों को नींद आ जाती है।

……………………………………

इधर नौकर क्वार्टर्स में राज और जय दोनों लुंगी में बैठे हुए थे।

जय- आज तो साली को अपनी बनाकर रहूँगा।

राज- बना ले, बना ले। मेरी वाली तो सिर्फ मेरी हो चुकी हैं।

जय- चल मैं जा रहा हूँ उस साली के पास। तू नहीं जा रहा क्या तेरी वाली के पास?

राज- मैं थोड़ी देर में जाऊँगा।

जय- "चल ठीक है..." फिर जय वहीं से निकल पड़ता है।

इधर राज के दिमाग में कुछ चल रहा था। जो भी था कुछ तो मास्टरमाइंड था। जो सबकी सोच के बाहर था। वो क्या सोच रहा था ये बताना बहुत मुश्किल है।
 
इधर जय घर के अंदर आ जाता है। वो सीढ़ियों से होते हुए रिया के रूम तक पहुंचता है। जब वो खिड़की से अंदर देखता है तो थोड़ा मायूस हो जाता है।

जय मन में- "साली मुझे जला कर इसको साथ में लेकर सो रही है..."

तभी जय की नजर अंदर लेटी हुई नेहा पर जाती है। नेहा की गोरी गोरी जांघे उस शार्ट गाउन में काफी हद तक एक्सपोज हो रही थी, और नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियां भी एकदम मस्त लग रही थीं। जय का लण्ड नेहा को इस हालत में देखते ही खड़ा हो जाता है, और वो अपना लण्ड पेंट के ऊपर से मसलता है एक बार।

जय मन में- "ये साली भी एकदम पटाका है। क्या मस्त लग रही है?"

नेहा का चेहरा खिड़की की तरफ था और रिया दूसरी साइइ चेहरा करके लेटी हुई थी। जय यहीं पर खड़े रहकर नेहा को देख रहा था की उसके कंधे पर कोई हाथ रखता है। जय की साँसे एक बार के लिए रुक जाती हैं। लेकिन जब वो घूमकर देखता है तो उसकी जान में जान आती हैं। वो राज था।

राज- क्या हुआ बे, यहाँ क्या देख रहा है?

जय- उधर देख कैसे दोनों एक साथ सो रही हैं।

राज भी अंदर देखता है- "ओहो तो दोनों को हमसे बचना है। तू फिकर मत कर मैं अभी मैं तेरी वाली को लाइन पर लाता हूँ." कहकर राज अब खिड़की के करीब जाता है और अपना काला लौड़ा पैंट में से बाहर निकाल लेता हैं, और खिड़की से अंदर से दिखे ऐसी पोजीशन में आता है। अब वो अपना लण्ड हिलाने लगता है।

राज- "चहस्स्सस्स चस्मशमशह.."

राज नेहा को आवाज देने जैसी कोशिश करता है। नेहा को भी नींद नहीं आई थी तो दो-तीन आवाजों से ही उसकी आँख खुल जाती है। उसकी पहली नजर खिड़की पर जाती है, और खिड़की पर यह काला लण्ड देखकर वो हैरान रह जाती है। लेकिन अगले ही पल राज का बदसूरत चेहरा देखकर वो समझ जाती है। उसके चेहरे पर एक शरारती स्माइल आ जाती है, और वो उसके लौड़े को देखे जा रही थी।

नेहा के शरीर में राज के बड़े लण्ड को देखकर अजीब सी बेचैनी होने लगती है। उसका हाथ धीरे-धीरे गाउन के ऊपर से अपनी पैटी पर जाने लगता है। उसके होंठ काट रहे थे एकदूसरे को। उफफ्फ... एक खूबसूरत औरत एक बड़े काले बदसूरत आदमी के लण्ड को देखकर अपनी चूत सहला रही थी। नेहा को अहसास नहीं था की यहाँ पर जय भी है। उसे नहीं पता था की जय भी उसके गोरे जिस्म को देख रहा है राज की तरह। नेहा अपनी चूत को सहलाते हुए गरम हो चुकी थी।

अगर राज उसके पास अब होता तो शायद वो उसके ऊपर टूट पड़ती। लेकिन वो रिया के साथ भी तो उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। तभी उसकी नजर उधर घूमकर सोई हुई रिया पर जाती है। रिया की गोरी जांघे भी काफी हद तक एक्सपोज हो रही थी। हालांकी नेहा ने कभी किसी भी लड़की के साथ सेक्स नहीं किया आ। लेकिन आज वो इस वक्त बहुत गरम थी और इस प्यास के आगे उसे कुछ भी सूझा नहीं रहा था। नेहा का हाथ धीरे से रिया की जांघों पर पहुँचता है। वो वहाँ पर सहलाने लगता है। उसका दूसरा हाथ अपनी पटा पर आ चुका था। लेकिन उसकी नजर राज के काले लौड़े पर ही थी।

रिया जिसको अभी-अभी नींद लगी थी। अपनी जांघों पर किसी के हाथों के अहसास से वो जाग जाती है और इधर घूम जाती है, और नेहा को ऐसा करता देखकर थोड़ी हैरान रह जाती है।

रिया- दीदी क्या हुआ?

नेहा- "ओहह... वो कुछ नहीं.." और नेहा बेड में बैठ जाती है ताकी रिया का ध्यान खिड़की पर ना जाए

रिया भी बैठ जाती है।

राज भी खिड़की से हट जाता है।

रिया- दीदी क्या हुआ? ये आप।

नेहा- "रिया, वो मैं थोड़ा... विशाल नहीं है ना यहीं तो..."

रिया के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं- "दीदी में समझ गई। आप विशाल भैया को मिस कर रही हो। हैं ना?"

नेहा- हाँ रिया, क्या करू समझ में नहीं आ रहा है?

रिया कुछ सोचकर- “मैं कुछ मदद करू दीदी?"

नेहा- तुम क्या मदद करोगी?

रिया- आप बस देखते जाइए। दीदी आप लेट जाइए।

नेहा वैसे ही करती है। अब रिया नेहा की चूचियों पर अपने हाथ रखकर हल्का-हल्का दबाने लगती है, जैसे मसाज कर रही हो। नेहा जो अपने होश में वापस आ गई थी रिया के ऐसा करने से फिर से गरम होने लगती है। रिया नेहा की दोनों चूचियों को हल्के-हल्के मालिश कर रही थी। सिर्फ नेहा ही नहीं रिया भी अब गरम होने लगती है। ऐसे ही करते हए अब नेहा की हल्की सिसकारियां निकलने लगती हैं।

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नेहा- "ओहह.. ओहह... ओदन अहह... अहह.."

रिया अच्छी तरह से मालिश कर रहीं भी, जैसे उसे कोई अनुभवी हो। थोड़ी देर बाद रिया नीचे से नेहा की पेटी नीचे कर देती है, सिर्फ घुटनों तक। नेहा की चूत देखकर ही रिया समझ जाती है की उसकी दीदी काफी गरम हो गई है। क्योंकी नेहा की चूत गीली हो चुकी औ। वहीं हाल रिया का भी था । उसके लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। रिया अब नेहा की चूत में एक उंगली घुसाती है धीरे से।

नेहा- "आअह्ह.. राइ... ..." और नेहा की मुँह से राज निकलने ही वाला था। ना जाने कैसे उसने खुद को कंट्रोल किया।

रिया नेहा की तरफ हैरानी से देखते हुए- "क्या हुवा दीदी?"

नेहा- कुछ नहीं।

रिया अब अपनी उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगती है।

नेहा- "अहह.. अहह.." और नेहा इस उंगली चुदाई का लुत्फ उठाने लगती है। उसके हाथ अपनी चूचियों को खुद ही मसलने लगते हैं। उसको होंठ एकदसरे को काटने लगते हैं- "उहह ऊहह... अहह.. हाय उह.. अहह..." और नेहा की आँखें मदहोश हो रही थी।

रिया भी इन सबसे काफी गरम भी। वो तो चाहती थी की नेहा भी उसके साथ ऐसा करे। नेहा झड़ने के करीब ही थी की एक मोबाइल की रिंग दोनों को डिस्टर्ब कर देती है। वो रिंग नेहा के रूम से आ रही थी। घर में ज्यादा शोर भी नहीं था तो आसानी से उधर की आवाज इस रूम में आ रही थीर रिंग की आवाज से रिया भी रुक जाती है।

नेहा- "मेरा मोबाइल तो रूम में ही रह गया। पता नहीं किसका होगा? शायद विशाल का... कहकर नेहा जल्दी से खुद को ठीक करती है, और कहती है- "मैं अभी आती हैं रिया...' कहकर नेहा बाहर जाने लगती है। दरवाजे से बाहर जाते हुए उसे खयाल आता है की यहां तो राज था लेकिन वो अब वहाँ पर नहीं था। नेहा जल्दी से अपने रूम की ओर जाने लगती है।
 
इधर रिया तो जैसे प्यासी ही रह गई थी। उसने तो सोचा था की नेहा भी उसकी चूत में उंगली करेगी। लेकिन उस फोन की रिंग में सब कुछ बिगाड़ दिया था। लेकिन रिया फिर भी गरम थी। उसका एक हाथ अपनी पैंटी पर पहुँच जाता है और अगले ही पल वो अपनी पैटी नीचे खींच देती है, और अपनी गौली गुलाबी चूत में उंगली करने लगती है। उसको नहीं पता था की जय खिड़की पर खड़ा होकर उसको देख रहा था। रिया की आँखें अपनी चूत में उंगली करते हुए बंद थी।

रिया- "हाय ओहह .. अहह ... आहह आहह... अहह आहह..."

रिया की बंद आँखों से अचानक ही उसे खयालों में जय दिखाई देने लगता है। वो जय का काला बूढ़ा जिश्म, वो सफेद बालों वाली छाती, वो बदसूरत चेहरा, और झांटों से घिरा हुआ उसका काला मोटा लौड़ा। ये सब रिया के खयालों में आने लगता हैं।

रिया लाख कोशिश कर रही थी की ये सब वो ना सोचे। लेकिन उसका जिश्म तो जैसे जय की मौंग कर रहा था। इसी बीच वो अपनी चूत में और तेजी से उंगली करने लगती हैं। रिया को जय की कि हई चुदाई याद आने लगती हैं। वहीं उसकी चूत भी काफी गीली हो गई थी। चूत में उंगली करने की वजह से उसका नाइटगाउन ऊपर उठ चुका था। उसकी पूरी गोरी जांघे दिख रही थी।

आप इमेजिन कीजिये की एक खूबसूरत बड़े घर की बहू किसी एक गंदे बदसूरत काले के बारे में सोचकर अपनी चूत सहला रही हो। वो अपनी आँखें बंद किए हुई थी बिना यह जाने की जय अब रूम के अंदर आ चुका है।

जय अब बिल्कल रिया के सामने बेड के किनारे खड़ा हो जाता है और अपना लौड़ा बाहर निकालकर हाथ में पकड़कर धीरे से ऊपर-नीचे करने लगता है।

उधर नेहा अपने रूम में जाकर बेड से अपना मोबाइल लेकर बात करने लगती है। वो उसके पति का काल था तो वो उसमें लग जाती हैं। बेड पर लेटकर वो बात कर रही थी अपने पति के पास।

नेहा- विशाल तुम बस जल्दी आ जाओ।

तभी वहीं राज आ जाता है। राज को देखकर नेहा के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ जाती हैं।

नेहा- विशाल, जल्दी आ जाना वरना कही देरी ना हो जाये?

विशाल- कैसी देरी?

नेहा राज की तरफ शरारती लुक देते हुए- “कहीं कोई तुम्हारी बीवी की मजबूरी का गलत फायदा ना उठ ले.."

.

विशाल- अरे कौन इतनी हिम्मत करेगा की तुम्हारी तरफ आँख उठकर भी देखे?

नेहा मन में- "तुम्हें क्या पता विशाल। आँख क्या यहाँ पर तो बहुत कुछ कर चुका है ये बूढ़ा तुम्हारी बीवी के साभ." सोचते हुए ही नेहा शर्मा जाती है।

विशाल- ठीक है में रखता हूँ। कल मिलते हैं बाइ।

नेहा- बाइ।

दोनों काल खतम करते हैं। काल खतम करने के बाद नेहा राज को देखने लगती है। राज अभी भी गुस्सा होने की आक्टिंग करने लगता है।

नेहा- क्या चाहिए

राज- कुछ नहीं। मेरी निक्कर यहीं रह गई थी वहीं लेने आया था।

नेहा शर्मा जाती है।

राज- जल्दी दे वो मुझे। जाना है जल्दी।

नेहा मन में- "कमीना कहीं का। अच्छा बहाना है इधर आने के लिए.."

नेहा अब बेड से उतरकर बाईरोब तक जाकर ढूँढने लगती है। उसकी पीठ राज की तरफ थी। नेहा एक शार्ट नाइट गाउन में होने की वजह से पीछे से वो बहुत हाट लग रही थी। राज का लौड़ा तो हिचकोले खा रहा था उसकी पेंट में। ढूँढने हुए नेहा को राज की निक्कर मिल जाती हैं। एकदम गंदी बड़ी सौ। नेहा को देखकर हो घिन आ रही थी लेकिन कुछ था जिससे वो अब उसको अपने हाथ में एक बार कसकर भींच लेती है, और फिर वापस मुड़ती हैं। नेहा राज की तरफ बढ़ने लगती है। उसकी साँसें तेज चलने लगती हैं।

पता नहीं क्यों उसका मन हो रहा था की वो राज से कहे की मत जाओ। वो चाहती थी की राज रूक जाए,

और उसको छोड़कर कहीं ना जाए। उसको वैसे भी राज की केयर अच्छा लगने लगी थी। वो अब राज के करीब पहुँचकर रुक जाती है।

राज- दे मुझे।

लेकिन नेहा वैसे ही खड़े रहती है। राज का गुस्से की आक्टिंग करने के पीछे वजह ये थी की वो नेहा के मुँह से सब सुनना चाहता था। वो नेहा को बिल्कुल बेशर्म बनाना चाहता था। वो चाहता था की नेहा खुद उसको चोदने के लिए कहे। इतने खूबसूरत बड़े घर की बहू को वैसे सिचुयेशन में लाना उसके लिए किसी सपने के मूटा होने से कम नहीं होगा। राज नेहा को सिर्फ खड़ा देखकर अब अपना हाथ बढ़ाकर उसके हाथ से अपनी निक्कर लेने लगता है। लेते हुए उसका हाथ नेहा के गोरे हाथ से टच होता है।
 
नेहा की सिसकारी निकलती है- "ओहह... नेहा कुछ देर पहले झड़ने के इतना करीब थी। ऐसे में एक मर्द का टच उसे मदहोश कर देता है।

लेकिन राज नेहा के हाथ से अपनी निक्कर लेकर वापस जाने के लिए मुड़ता ही है की नेहा के हाथ उसे रोक लेते हैं। नेहा अपने हाथ से राज के हाथ को पकड़ लेती हैं। यही तो राज चाहता था की नेहा खुद उसके पास आए।

राज- छोड़ो मेरा हाथ

नेहा- नहीं छोडूंगी।

राज हल्के से अपना हाथ उससे छुड़ाने की कोशिश करता है।

नेहा- नाराज़ हो मुझसे?

राज- मुझे तुमसे बात नहीं करनी।

नेहा मुश्कुराते हुए- "क्यों?"

राज फिर से जाने लगता है, तो नेहा फिर से उसका हाथ पकड़ लेती है।

राज- मुझे क्यों रोक रही है तू?

नेहा चाहे राज का हाथ पकड़ रही हो, लेकिन उसके अंदर अभी भी शर्म थी।

राज- क्या चाहिए तुझे? जाने दे ना मुझे।

नेहा- क्यों जा रहे हो?

राज. सोने जा रहा हूँ।

नेहा- मत जाओ।

राज- क्यों ना जाऊँ?

नेहा दूसरी तरफ मुँह करके मुश्कुराती है।

राज- जल्दी बोल, में जा रहा हैं।

नेहा मन में- "कमीना कहीं का... जानता सब कुछ है फिर भी नाटक कर रहा है...

राज. "छोड़ो मेरा हाथ, मैं जा रहा हूँ.."

राज ऐसा बोलकर घूमने ही वाला था की नेहा अचानक ही उसके गले लग जाती है। वो अपने हाथ राज की पीठ पर कसकर भौंच लेती हैं। नेहा की चूचियां राज की छाती से दब जाती हैं।

जरा सोचिए ऐसी खूबसूरत बड़े घर की बहू किसी काले बूढ़े के गले लगी हुई हो। नेहा का शार्ट नाइट गाउन उस दृश्य को और भी हाट बना रहा था।

राज खुद हैरान था नेहा की इस हरकत से। उसने नहीं सोचा था की नेहा ऐसा कुछ करेगी। वो कहते हैं ना हवस में इंसान का खुद पर कंट्रोल नहीं रहता। राज की बस यही चाहिए था।

राज मन में- "ये अब पूरी तरह से मेरी हो गई है। अब इसे मुझसे कोई दूर नहीं कर सकता। ये अब मेरे बिना नहीं रह सकती.' और राज भी अब अपने हाथ नेहा की पीठ पर घुमाने लगता है। बड़े हीहाट लग कर रहे थे दोनों।

इधर रिया के रूम में वो आँखें बंद किए हुए अपनी चूत सहला रही थी, और उसके बिल्कुल सामने खड़ा था जय, उसका आशिक। रिया को बिल्कुल भी इस बात का अहसास नहीं आ। वो तो बस अपनी चूत को सहलाने में मगन थी, अपने होंठ अपने ही दांतों से काट रही थी। वहीं जय भी अपना लौड़ा हिला रहा था धीरे-धीरें। उसका काला लौड़ा जैसे रिया की गुलाबी चूत को सलामी दे रहा था। जैसे उसका लण्ड मिस कर रहा था रिया की चूत को।

वहीं हाल रिया का था। बिना किसी अहसास के ही सही लेकिन सच तो यही था की रिया की चूत जय के लौड़े के लिए हो तरस रही थी, और ये बात जय भी बखबी जानता था अब् रिया अपनी चूत को सहलाते हार झड़ने के काफी करीब थी।

जय को भी ये बात समझ में आ जाती हैं क्योंकी रिया का शरीर अकड़ रहा था। जय को अब एक आइडिया आता है। वो जल्दी से आगे बढ़ कर रिया की चूत जो नंगी थी पैंटी नीचे किए होने की वजह से, सीधा अपना लौड़ा वहाँ लगा देता है।

रिया की चूत में जैसे करूँट दौड़ जाता है। वो अपनी आँखें खोलती है, और जय को देखकर चौंक जाती है।

लेकिन जय की अगली चाल उसको शांत कर देती है। जय रिया की चूत पर अपना लण्ड रगड़ने लगता है। रिया पहले से ही गरम थी, उसपर जय का लण्ड लगाना उसकी चूत पर बहुत ज्यादा था और उसके कंट्रोल के बाहर था।

रिया मन में- "मेरी ही गलती है। मैं ऐसे सरे-आम उंगली करूँगी तो यह कमीना तो आएगा ही..."

जय अंदर नहीं डाल रहा था लण्ड अभी भी। रिया के विरोध ना करने के बावजूद भी।

रिया ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे जय के सामने। ऐसा काफी वक्त तक जय करते रहता है। जो अब रिया को निराश कर रहा था।

रिया अब गुस्से में- "दूर हटो मुझसे, नहीं करना तो?"

जय को यकीन नहीं हो रहा था की इस तीखी मिची ने ऐसा कहा। वो जानता था कि अब रिया बहुत तड़प रही है। रिया को भी अब अहसास होता है की जल्दबाजी में उसने क्या कह दिया है? वो अब अपने शब्द वापस भी नहीं ले सकती भी। जय अब एक जोर का धक्का लगाता है। जिससे उसका आधे से ज्यादा लण्ड एक ही बार में अंदर चला जाता है।

रिया- "अहह.." और रिया की आँखें बड़ी हो जाती है दर्द के मारे। इतना बड़ा लण्ड एक ही बार में उसकी चूत में जो गया था- "कमीने बाहर निकाल्लो... हाय दरद हो रहा है."

जय कहां बाहर निकालने वाला था अपना लण्ड। थोड़ी देर रुक कर अब जय धक्के लगाने लगता है।

रिया- "हाय अहह... अहह... अहह... अहह... अहह.." और रिया अभी भी उस नाइट गाउन में थी।

जय. वैसे मस्त लग रही है तू।
 
जय को यकीन नहीं हो रहा था की इस तीखी मिची ने ऐसा कहा। वो जानता था कि अब रिया बहुत तड़प रही है। रिया को भी अब अहसास होता है की जल्दबाजी में उसने क्या कह दिया है? वो अब अपने शब्द वापस भी नहीं ले सकती भी। जय अब एक जोर का धक्का लगाता है। जिससे उसका आधे से ज्यादा लण्ड एक ही बार में अंदर चला जाता है।

रिया- "अहह.." और रिया की आँखें बड़ी हो जाती है दर्द के मारे। इतना बड़ा लण्ड एक ही बार में उसकी चूत में जो गया था- "कमीने बाहर निकाल्लो... हाय दरद हो रहा है."

जय कहां बाहर निकालने वाला था अपना लण्ड। थोड़ी देर रुक कर अब जय धक्के लगाने लगता है।

रिया- "हाय अहह... अहह... अहह... अहह... अहह.." और रिया अभी भी उस नाइट गाउन में थी।

जय. वैसे मस्त लग रही है तू।

रिया उसपर कुछ भी रिएक्सन नहीं देती। वो जानता थी कि जय का तो कुछ नहीं है। वो तो कुछ भी बोलेगा। लेकिन उसका काला बड़ा लौड़ा तो उसे ही अपनी चूत में सहना था। जय उसको चोद रहा था बिना रुके। रिया अपनी नजरें झकाए हुए जय के धक्कों को सह रही थी। कभी-कभी उसकी नजर जय के बदसूरत चेहरे पर जा रही थी, और जब भी जा रही थी उसे खुद पर घिन आ जाती है की कैसे? आखीर कार, वो कैसे इस आदमी से चुदवा सकती है?

थोड़ी देर की चुदाई के बाद अब जय अपना लण्ड बाहर निकाल लेता है उसकी चूत से। रिया थोड़ा रिलीफ महसूस करती है। जय अब रिया को साइड में करके खुद लेट जाता है, और रिया को खुद पर खींच लेता है। रिया का चेहरा जय के बदसूरत चेहरे के बिल्कुल ऊपर आ। जय अब पीछे से अपना लण्ड रिया की चूत पर सेट करके धकेल देता है।

रिया- "अहह..." की सिसकारी के साथ एक बार जय को देखती है उसकी आँखों में।

जय इस तरह रिया के आँखों में देखने से अपने होंठ उसके होंठों की तरफ बढ़ाता है। रिया जो अब किसी भी तरह से विरोध करने की हालत में नहीं थी, वो बस चुप रहती है बिना किसी हलचल के। अगले ही पल जय के काले होंठ उसके गुलाबी होंठों को छू लेते हैं। और फिर क्या था जय रिया को कामुकता से किस करने लगता है। नीचे से जय के धक्के भी लगातार जारी थे। जय रिया को किस करते हुए उसकी पीठ पर अपने हाथ फेर रहा था। एकदम सेक्सी चढ़ाई चल रही थी दोनों के बीच। थोड़ी देर बाद जय किस तोड़ देता है।

रिया- "अहह... हाय आहह .."

जय उसकी कमर पकड़कर अच्छी तरह से धक्के लगा रहा था। रिया अपने हाथ बेड से टिकाए हुए थी। ऐसे ही जय उसको 5 मिनट और चोदता है। इस बीच रिया 3 बार झड़ चुकी औ। रिया के चेहरे पर संतोष का अहसास साफ नजर आ रहा था। रिया वैसे ही जय के ऊपर पड़ी रहती हैं। चूत में उसके अभी भी जय का लण्ड था।

रिया थोड़ी देर बाद जय के ऊपर से उठती है। वो उठकर बेड के साइड में खड़ी हो जाती है। जय भी उतरकर अब उसके पास आ जाता है, और उसका नाइट गाउन पकड़कर ऊपर करने लगता है। रिया भी ना जाने क्यों अपने हाथ ऊपर करके उसकी मदद कर देती हैं। अब रिया सिर्फ ब्रा में खड़ी भी जय के सामने। अब जय रिया को देखते हुए उसकी चूचियां ब्रा के ऊपर से पकड़ लेता है।

रिया- "आह्ह.." उसके मुंह में हल्की सिसकारी निकलती है।

जय- बहुत गरम है क्या तू आज?

रिया उसको ही देखती रहती है। वो भी रफ लुक दे रही थी जय को। जैसे कोई लड़ाई चल रही हो उसके और जय के बीच। थोड़ी देर में ही चूचियां ब्रा के ऊपर से दबाने के बाद अब जय रिया के पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा का हुक निकाल देता है। रिया अब विरोध नहीं कर रही थी। ब्रा निकलते ही रिया की गोरी चूचियां जैसे उछलकर बाहर आ जाती हैं। जय झट से उन चूचियों के ऊपर टूट पड़ता है, और दोनों चूचियां पकड़कर अपना मुँह लगा देता है।

रिया- "ओवश्वह... अहह.." और उसकी आँखें मजे में बंद हो जाती हैं।

जय और रिया दोनों नंगे खड़े थे रूम में। जय रिया की दोनों चूचियों के निपल बारी-बारी मुँह में लेकर चूसने लगता है।

रिया- “आहह.." और रिया का हाथ धीरे से जय के सिर पर चला जाता है। वो वहाँ पर सहलाने लगती हैं। वो अब अपना गोरा खूबसूरत बदन जय को सौंप चुकी थी। थोड़ी देर बाद जय रुक जाता है। इस तरह रुकने से रिया अब उसे देखने लगती हैं। दोनों की नजरें आपस में मिल जाती हैं।

जय- "बहुत गर्मी हैं तुझमें आज लगता हैं... ऐसा बोलकर जय उसे अपनी कमर तक ऊपर उठा लेता है।

रिया अपने दोनों पैर जय के अगल बगल डाल लेती हैं। दोनों के चेहरे आमने सामने थे। अचानक ही रिया एमोशन्स की शिकार होते हुए खुद ही अपने होंठ जय की तरफ बढ़ा देती है। जय उससे थोड़ी मस्ती करने के लिए अपने होंठ पीछे कर लेता है। जिसपर रिया जय को गुस्से से देखती है। रिया को तो जैसे जय से हारना ही नहीं था। वो अब जय की गर्दन के पीछे अपना हाथ डालती है और उसको अपनी तरफ खींचती है, और अपने गुलाबी होंठ उसके काले गंदे होंठों पर रख देती है और किस करने लगती है। इस बार जय कुछ नहीं कर रहा था। जो भी हो रहा था बस रिया की तरफ से, जय बस उसे उठाए था।

***** ***
 
उधर नेहा के रूम में इश्य ही चेंज हो गया था। नेहा और राज दोनों चुदाई कर रहे थे। बड़े ही जोश में।

दोनों एक अलग ही मजे के साथ चुदाई कर रहे थे। जैसे दोनों बरसों से बिछड़े हों। वैसे ही वो रात भर चुदाई करते हैं। राज झड़ने के बाद नेहा को ऊपर पड़ा हुआ था।

नेहा- हे राज उठो ना अब्।

राज- कुछ देर रहने दे ना। तेरे जिश्म की गर्मी बहुत अच्छी लगती है।

नेहा- हटो ना मुझे दर्द हो रहा है।

राज अब उसके ऊपर से हट जाता है। नेहा वैसे ही पड़ी हुई थी चुदाई के बाद थकी हुई। दोनों बिल्कुल नंगे थके हुए पड़े हुए थे। थोड़ी देर बाद नेहा खुद उठ जाती है बेड से, और बाथरूम चली जाती है। बाथरूम से आकर वा देखती है की राज वैसे ही लेटा हुआ है बिल्कुल नंगा बेड पर। एक बार के लिए नेहा राज को देखकर बहुत शर्म आती हैं। फिर वो अपने कपड़े पहन लेती हैं। फिर साइड टेबल से पानी पीने लगती है। पानी पीते हुए वो राज को देख रही थी।

नेहा मन में- "कमीना कहीं... का सब कुछ करके आराम से लेटा हुआ है। क्या करूँ उठाऊ या यही सोने दूं?

आखीरकार, थक भी गया होगा ना ये मेरी तरह। नहीं नहीं कल तो विशाल आ जाएंगे। सुबह-सुबह आ गये तो?"

नेहा पानी पीकर- "राज उठो... नेहा राज हिलाते हुए बोलती है।

राज उठने का नाम नहीं ले रहा था।

नेहा फिर से ट्राई करती है- "उठो राज और जाओ अब्.."

राज इस बार जागते हुए- "क्या मेरी जान। काम हो गया तो अपने बायफ्रेंड को भगा रही है...'

नेहा शर्मा जाती है- "चुप करो । काम क्या सिर्फ मेरा हुआ है। तुमने मजे ही नहीं किए क्या? जाओ अब..."

राज. यहाँ सो जाता हूँ ना मेरी जान।

नेहा- नहीं राज प्लीजज़... कल मेरे पति आ जाएंगे।

राज - तू क्यों डरती है? उससे पहले में चला जाऊँगा जा।

नेहा- नहीं नहीं तुम जाओ।

राज मन में- "ये साली नहीं मानेगी.." सांचकर राज अब बेड पर से उठ जाता है। और अपना लौड़ा हाथ में पकड़ते हुए कहता है- "चला जाऊँ क्या?"

नेहा जो राज के लण्ड पकड़ने से शर्मा जाती है, कहती हैं- " हाँ जाओ.."

राज अब अपने पूरे कपड़े पहन लेता है और फिर चला जाता है।

नेहा भी अब फ्रेश होकर सो जाती है।

उधर जय भी रिया के रूम से जा चुका था ।

रिया भी सो चुकी थी अब तक।

……………………………….
 
उस घटना को अब 3 हफ्ते हो चुके थे। इन हफ्तों में न ही रिया और जय के बीच कुछ हुआ और न ही नेहा राज के बीच क्योंकी नेहा और रिया दोनों के पति अब ज्यादा टाइम अपनी-अपनी पत्नियों को देने लगे थे। ऐसे में जय और नेहा के लिये करीब जाना उन दोनों के लिए बहुत मुश्किल हो गया था।

इस बीच नेहा और रिया भी कहीं ना कहीं जय और राज को मिस कर रहीं भी। प्रिया का तो पता नहीं लेकिन नेहा ज़रूर राज की चुदाई को मिस कर रही थी। लेकिन उन ३ हफ्तों के बाद विशाल और सौरभ को कंपनी के किसी काम से आउट आफ सिटी जाना पड़ता है एक महीने के लिए। तो रिया और नेहा फिर से अकेली पड़ गई थी।

ऐसे ही एक दिन दोपहर में रिया अपने बेडरूम में आलीशान बेड पर लेटी हुई थी। उसने गाउन पहनी हुई थी। वो लेटे हुए कुछ कर रही थी। उफफ्फ... रिया का एक हाथ उसकी पैंटी के अंदर से चूत को सहला रहा । रिया की आँखें मैं अपनी चूत सहलाते हए बंद थी। वो अपनी चूत को शांत कर रही थी। लेकिन क्यों? उसका पति तो इन तीन हफ्तों में उसके पास ही था फिर भी क्यों?

असल में जय ने जो उसकी चुदाई की भी, उसके सामने उसके पति की चुदाई एकदम फीकी थी। रिया की नजरों के सामने जय की चुदाई वाला दृश्य घूमने लगता है। इसी बीच वो अपनी उंगली और तेजी से अंदर बाहर करने लगती है। हल्की-हल्की सिसकारियां भी निकल रही थी उसकी।

रिया- "ओहह... आह्ह.. उहह .."

रिया जय के उस काले लौड़े के बारे में सोचने लगती है। वहाँ लण्ड जिससे उसकी चूत की बुरी हालत हो गई थी। लेकिन कहीं ना कहीं उसने जय की वो चुदाई एंजाय की थी।

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उधर नौकर क्वार्टर्स में राज और जय दोनों काम पर नहीं गये थे। वो दोनों कुछ बातें कर रहे थे।

राज- साला कितने दिन हो गये हैं चोदे हुए मेरी माल को। आज साला दोनों के पति चले गये। अब मजा आएगा।

जय- "हाँ आज से मस्त चुदाई होगी..."

उनकी चूचियां, उनकी चूत सज सांच कर इन दोनों न जाने कितनी बार मुठ मारी है। राज को जय की बातें सुनते हुए कुछ आइडिया आता है। राज अब वो आइडिया जय को बताता है। जिसे सुनकर जय के चेहरे पर भी एक कमीनी स्माइल आ जाती है।

जय- हाँ ये भी ठीक है वैसे।

राज- अब आएगा मजा।

दोनों दाँत निकालकर हंसने लगते हैं। आखीरकार, क्या था इन दोनों के दिमाग में?

राज उस दिन रात को खाने के बाद, बहुत दिन बाद नौकर क्वार्टर्स से होते हुए मुख्य दरवाजे से अंदर चला आता है। वो सीढ़ियों से होते हुए नेहा के बेडरूम तक पहुँच जाता है। अंदर लाइट जल रही थी। नेहा सोने की तैयारी कर रही थी। राज अंदर खिड़की से देखता है, तो नेहा गाउन में थी और बहुत हाट लग रही थी। लेकिन वो कुछ मायूस सी लग रही थी। उसके खूबसूरत गोरे चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी। जिसे देखकर राज की समझ में कुछ-कुछ आ जाता है। अब वो दरवाजा पर नौक करता है।

नेहा खटखट सुनकर- "इस वक्त कौन होगा?"

नेहा जाकर दरवाजा खोलती हैं और राज को सामने देखकर एकदम उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है। लेकिन अगले ही पल उसका चेहरा गुस्से से भर जाता है।

नेहा- क्या है? क्यों आए हो?

राज- अरे क्या बात है मेरी जान। गुस्सा क्यों हो रही है।

नेहा- तुममें मतलब?

राज मन में- "ये साली बहुत नखरे दिखा रही हैं। इसकी लाइन पर लाना पड़ेगा..."

राज- गुस्सा क्यों होती है?

नेहा- मुझे तुमसे बात नहीं करनी।

राज- क्या हुआ वो तो बता?

नेहा- तुमको उससे क्या? तुम जाओ यहाँ से।

राज इस बात पर नेहा को अंदर धकेलता हैं और दीवार से सटा देता है।

नेहा- क्या कर रहे हो?

राज- जो इतने दिनों तक नहीं किया।

नेहा- कहां थे फिर इतने दिनों तक?

राज- तेरा पति जो था घर पर।

नेहा- अच्छा। मेरे पति से इतना डरते हो?

राज- डरता तो मैं उसके बाप से भी नहीं हैं। तू कहे तो तुझे यहीं से भगा ले जाऊ। बोल क्या बोलती है?

नेहा मुश्कुराते हुए- "इतनी हिम्मत... क्या बात है?"

राज- बोल चलेगी मेरे साथ?

नेहा- नहीं नहीं मैं यही खुश हैं। वैसे भी तुम्हारे पास है क्या जीने के लिए?

राज- तू खुश रहे उतना तो है मेरे पास। अपनी गर्लफ्रेंड के लिए उतना तो कर ही सकता हूँ।

नेहा- हाँ हाँ पता है। बस नाम की गर्लफ्रेंड बनाई हुई है।

राज- "अभी बताता हूँ किसलिए बनाई हुई है?"

इतना बोलकर राज अपने काले होंठ नेहा की लाल लिपस्टिक वाले होंठ पर रख देता है, और उसके होंठों को चूसने लगता है। नेहा भी विरोध किए बिना उसका साथ देने लगती हैं। दोनों हल्के से किस कर रहे थे। दोनों एकदूसरे के होंठ अच्छी तरह से चूस रहे थे। ऐसे ही एक मिनट किस करने के बाद राज किस तोड़ता है, और नेहा को देखने लगता है। नेहा मैं राज को अपनी तरफ देखते देखकर शर्मा जाती हैं।

नेहा- क्या हुआ?

राज- इतने दिन से प्यासी भी ना तू ?

नेहा को पता था राज क्या कहने की कोशिश कर रहा है- “नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं हैं..."

राज- झठ बोलने से कुछ नहीं मिलने वाला। और तूफिकर मत कर। आज तेरे लिए एक सरप्राइज है।

नेहा. सरप्राइज... लेकिन क्या?

राज- "वो तुझे पता चल जाएगा बाद में..." और राज झुक कर उसकी गर्दन पर चूमने लगता है।

नेहा- "उफफ्फ... अहह..."

राज उसको चूमते हुए अचानक उसको अपनी गोद में उठा लेता है।

नेहा- “आहह... क्या कर रहे हो? गिर जाऊँगी.."

राज उसको बेड तक ले जाता है और लिटा देता है, और खुद उसपर झुक कर फिर से चूमने लगता है। नेहा भले ही राज को गुस्सा दिखा रही थी थोड़ी देर पहले, लेकिन उसकी हरकतें नेहा को हमेशा की तरह पागल बनाने वाली थी। थोड़ी देर चूमने के बाद राज अब बेड़ से उतरता है और अपने कपड़े निकालने लगता है।

नेहा जिसे देखकर स्माइल करती है, और मस्ती में कहती है- "कपड़े क्यों निकाल रहे हो?"

राज- तुझे क्या लगता है, किसलिए निकाल रहा हूँ?

नेहा- "मुझे नहीं पता.." ऐसा बोलकर नेहा हँसती है।

राज मन में- "जितना हँसना है हँस ले। आज तुझे बहुत सहना है.."

राज कपड़े निकालकर बिल्कुल नंगा हो जाता है। उसके काले लौड़े को बहुत दिनों बाद देखने के बाद नेहा के चेहरे पर अजीब सी चमक आ जाती हैं। जैसे उसने इस काले लण्ड को इतनो दिनों से बहुत मिस किया हो। राज अब बेड पर आ जाता है। नेहा भी बैठ जाती है। राज अब नेहा का गाउन नीचे से उठाता है। नेहा भी उसे निकालने में मदद करती हैं अपने हाथ ऊपर करके।

नेहा अब सिर्फ ब्रा में थी। उसने पैटी नहीं पहनी थी। नेहा की ऐसी हालत में देखकर राज का लण्ड बहीं पर हिचकोले खाने लगता है। जिसे देखकर नेहा शर्मा जाती है। अब राज अपने हाथ नेहा की पीठ के पीछे लेजाकर उसकी ब्रा को निकाल देता है, और ब्रा निकालकर साइड में फेंक देता है।

अब वो नेहा को हल्के से धक्का देता है जिससे वो बेड में गिरती हैं। अब राज उसके ऊपर झुक कर उसकी चूचियां अपने दोनों हाथों में थाम लेता हैं और अपना मुँह उनपर लगा देता है। नेहा की गोरी दूध जैसी चूचियों पर इस काले बदसूरत से दिखने वाले बट्टे का मुँह आ। राज अब एक-एक करके निपल मुँह में लेकर चूसने लगता है। नेहा को ऐसी फीलिंग कभी नहीं आई थी। कोई उसकी चूचियों को किसी बच्चे की तरह नहीं चूसा था।

राज जैसे उसका दूध पी रहा हो वैसे कर रहा था, जो नेहा को पागल सा बना रहा था।

जेमा मदहोशी के आलम में- "अहह... वो आडराज उफफ्फ... आहह..." करने लगती हैं।

दोनों नंगे थे नेहा के बेड पर। इश्य काफी हाट लग रहा था वहाँ का। इतनी खूबसूरत जवान औरत के साथ एक काला बदसूरत बूढ़ा यह सब कर रहा था। थोड़ी देर ऐसे ही नेहा की चूचियों पर, और निपल पर मुँह लगाकर चूसने के बाद राज अब रुक जाता है, और थोड़ा नीचे आकर उसकी नाभि को चूमता है।

नेहा- "कुचो.."

राज उधर से होते हए और नीचे नेहा को गुलाबी चूत तक पहुंच जाता है। नेहा की चूत दो बार झड़ चुकी थी। उसकी गुलाबी चूत गीली लग रही थी। राज नेहा के खूबसूरत चेहरे की तरफ एक बार देखकर अपनी कमीनी स्माइल चेहरे पर लाता है। वो जानता था की नेहा अब उसके कंट्रोल में हैं पूरी तरह से। राज फिर अचानक से अपना मुँह नेहा की गुलाबी चूत पर रख देता है।

नेहा- "अहह.." और नेहा के दोनों हाथ राज के सिर पर आ जाते हैं। वो वहाँ पर सहलाने लगती है मदहोशी के आलम में।

राज अब उसकी चूत चाटने लगता है। नेहा को मजा आ रहा था राज के ऐसा करने से। सोचिए जरा ऐसी खूबसूरत जवान औरत की चूत एक काला गंदा बदसूरत सा दिखने वाला बुड्ढ़ा चाट रहा हो।

नेहा राज का मुँह अपनी चूत पर दबा रही थी- "अहह... उफफ्फ... अहह.."

राज के ऐसा करने से नेहा अब काफी गरम हो चुकी थी। वो अब तड़प रही थी राज का लण्ड अपनी चूत में लेने के लिए।

नेहा- "प्लीज़..."

राज- "क्या?"

नेहा गरम थी। वो अपनी शर्म-ओ-हया सब भूल जाना चाहती भी अब "अंदर करो..."

राज के बदसूरत चेहरे पर एक कमीनी स्माइल आ जाती है- "क्या अंदर कसै? सीधे से बोल?"

नेहा- कमीने जानते हो की क्या करना है।

राज- तू बता क्या अंदर करूँ?

नेहा- तुम्हारा ल....

राज- हाँ हाँ बोल।

नेहा- तुम्हारा लण्ड।

राज- मेरा लण्ड कहाँ डालूं?

नेहा राज की तरफ देखती हैं- "क्यों सता रहे हो राज मुझे?"

राज- मेरी जान तुझे सताने में बहुत मज़ा आता है।

नेहा अपनी हवस को रोक नहीं पा रही थी, कहा- "तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में डाला..."

राज- "ये हुई ना बात... और राज उधर से उठकर बेड पर लेट जाता है- "मेरी जान... तुझे मेरा लण्ड अपनी चूत में लेना है ना... तो खुद ही ले ले.."

नेहा राज की तरफ थोड़ा गुस्से से देखती है। नेहा अब उठकर बेड पे बैठ जाती हैं। वो एक बार राज के बूढ़े जिश्म को देखती है। फिर वो एक बार राज के काले बड़े लौड़े को देखती है जो झांटों से घिरा हुआ था।

नेहा अब राज के ऊपर आ जाती है, और उसके सफेद बालों से भारी हुई छाती पर अपने कामल गोरे हाथ रखती हैं। नीचे उसकी चूत पर राज का काला लौड़ा दस्तक दे रहा था। उसके लण्ड के अहसास से ही नेहा पागल सी हो रही थी। वो अब धीरे से उसका लण्ड पकड़ती है और उसके ऊपर झुकते हुए अपनी तड़पती हुई चूत पर सेट. करती हैं, और उसपर दबाव डालने लगती है।
 
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