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Adultery मेरी नशीली चितवन

मैंने अनीश की गांड अपने दोनों हाथों से ओर भी ज्यादा कस कर पकड़ ली ओर जोर जोर से उसके लण्ड को चूसने लगी .. फिर मैंने राज ने सिखाया हुआ तरीका अपनाया ओर धीरे धीरे अनीश का पूरा लण्ड मेरे मुँह मैं ले लिया .. अनीश का लण्ड भी अब मेरे गले तक फस गया . अनीश को यह अपेक्षित नहीं था .. वो हक्काबक्का रहा गया ओर .. उत्तेजित हो कर जोर से आहे भरने लगा ओर उसकी पिचकारी का पानी मेरे मुँह मे धार छोड़ने लगा .. अनीश का लण्ड झटके पर झटके देकर मेरे मुँह मैं पानी डाल रहा था .. अनीश ने काम से काम १५-२० झटके दिए होंगे . मैंने महसूस किया की अनीश का वीर्य बहुत गाढ़ा ओर चिप चिपा था ओर ज्यादा था - राज के वीर्य की तुलना मैं .राज का लण्ड ८ - १० झटके देकर पानी छोड़ता था जब की अनीश के लण्ड के करीब २० झटके हो गए थे. उस दिन मुझे जवान मर्द ओर एक परिपक़्व (matured मर्द की वीर्य (पानी) मैं फरक का अंदाजा आया . ऊपर से अनीश एक खिलाडी - स्पोर्टमैन भी था ओर वही ताकत उसके लण्ड मैं भी थी . दोनों मर्द अपनी जगह सही ओर औरत को ख़ुशी देते हैं , दोनोका स्वाद अलग ओर अच्छा होता हैं.

झड़ने के बाद अनीश ने मुझे उठा कर जोर से कस कर छाती से लिपट लिया .. मुझे पागलों की तरह किस करने लगा .. संध्या मैं बहुत लकी हूँ .. तुम बहुत सुन्दर ओर हसीन ओर सेक्सी हो .. आई लव यू ..

मैंने भी उसको आई लव यू बोल दिया .. रात काफी हो गयी थी .. ९ बजे हॉस्टल पहुंचना था - समय का रेस्ट्रिक्शन था , हम जल्दी कपडे ठीक कर के ..हॉस्टल की तरफ चलने लगे .. अनीश ने मेरा हाथ उसके हाथ में कस कर पकड़ा था ओर उसने मुझे गर्ल्स हॉस्टल तक पहुंचा दिया .. वह गेट के बाहर फिर से मुझे देर तक किस किया ओर मेरी चूत पर हाथ रख कर ..गुड नाईट कह ओर हरिश बोला - तुम रोज ७ बजे प्लेग्राउंड आ जाना .. मैं तुझे रोज प्यार करना चाहता हूँ .. मैंने भी प्रॉमिस कर दिया ओर अनीश के लण्ड को प्यार से दबा दिया .. अनीश का लण्ड फिर से खड़ा होकर मुझे सलामी से रहा था .. मैं हसकर हॉस्टल के अंदर रूम मैं चली आयी ..

मेरी ओर अनीश का लव अफेयर चालू हो गया था ओर पूरी कॉलेज को पता चल गया था . मैं रोज अनीश से मिलने प्लेग्राउंड जाती, फिर हम बगीचे मैं प्यार करते ओर वह रोज मुझे हॉस्टल तक चलके छोड जाता. मुझे अब अनीश की पसीने से गीली बॉडी ओर उसकी महक की एडिक्शन हो गयी थी . पर हमें सेक्स करने के लिए सही जगह नहीं मिल रही थी, ना उस समय आज के जैसे कपल फ्रेंडली होटल्स थे ओर बाहर सुनसान जगह बहुत रिस्की होता था, मवाली लड़के घूमते फिरते थे .. हम दोनों रोज बातें करते की कैसे अकेले मैं हमें कुछ मिल पल मिल जाये ओर हम दोनों का मिलन सही मायने से हो जाये. मैं भी अनीश से चुदने के लिए बेताब थी , ओर अनीश का नाग भी मेरी बिल मैं विष घोलने को बेताब था.

मेरे क्लास मैं अब सब लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गयी थी . सब मुझे अनीश के नाम से चिढ़ाते ओर मजाक करते थे .राजवीर पंजाब के भटिंडा से सरदार परिवार से था .. वह भी एक हॉकी प्लेयर था , बहुत मजाकिया ओर हसमुख स्वाभाव का था . हत्ता कट्टा सरदार , गोरा चिटा ओर बालों वाला बदन , ओर ऊपर पगड़ी ओर हलकी दाढ़ी , बहुत मरदाना लगता था . हमेशा मुझे अनीश के नाम से छेड़ता था . कोई भी बात बेझिझक बोल देता बिना कुछ सोचे समजे ओर उसकी यही बात मुझे पसंद थी . ऐसे मर्द सच्चे होते हैं - मन मैं कुछ नहीं रखते . सब के सामने क्लास मैं बिंदास हमेशा मुज़से कहता था - क्या यार तेरे जलवे सिर्फ अनीश के लिए , मुझे भी एक किस दे दे , मैं हंस कर - जा पगले - कह कर टाल देती..एक दिन क्लास मैं सबके सामने बोला - क्या यार अनीश के सात इतना टाइम स्पेंड करती हो . कुछ टाइम मेरे लिए भी निकाल दे , मैंने भी पूछा - तुझे टाइम दिया तो क्या करेगा , बिंदास हो कर राजवीर बोला - सब कुछ दूंगा, तुझे खुश कर दूंगा .मैंने भी उसे हंसकर - चुप हरामी गाली दी ओर चली गयी वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया था , पर उसकी शरारत कभी नहीं रुकती. मुझे अब कॉलेज के लड़को की फ़्लर्ट की आदत पद गयी थी. सिर्फ राजवीर ही नहीं , कई दोस्त मुज़से मजाक मैं ऐसे फ़्लर्ट करते थे . सब से ज्यादा फ़्लर्ट 3rd ओर 4th (फाइनल) ईयर के लड़के करते , उनके कॉलेज के आखरी साल बचे रहने से वो लड़की को पटाने के लिए डेस्पेरेट हो जाते है

तभी सितम्बर महीना आया ओर भगवन ने जैसे मेरी सुन ली . कॉलेज के स्पोर्ट्स इवेंट्स चल रहे थे , ओर अनीश को इंटरकॉलेज स्पोर्ट कम्पटीशन के लिए करीब के सिटी मैं २ दिन के लिए जाना था . कॉलेज उसको होटल ओर खाने पीने का अलाउंस दे रही थी .अनीश ने जिद की की मैं भी उसके सात जाऊ ओर दोनों एक कमरे मैं एक होटल मैं रहेंगे. पर मेरे पास हॉस्टल वार्डन को २ दिन बाहर जाने के लिए कोई बहाना नहीं था. हमें कोई मार्ग नहीं मिल रहा था . अब अनीश को जाने के लिए सिर्फ २ दिन रह गए थे ओर मेरे पास कोई पालन नहीं था. पर भगवन ने मेरी सुन ली ओर उस रात पता चला की वार्डन साहिबा दूसरे दिन गांव जाने वाली हैं, उनकी माँ की तबियत अचानक ख़राब हो गयी ओर वो हॉस्पिटल मैं दूसरे शहर मैं एडमिट हैं. हम खुश हो गए , मैंने मेरी रूम पार्टनर अनीता को पहले से पटा लिया था , वह सब से क्लास मैं कहेगी की मेरी तबियत ठीक नहीं हैं, मैं आराम कर रही हूँ . ओर हॉस्टल के peon को अनीश ने पैसे देकर पटा लिआ ओर उसने एडवांस मैं ही रजिस्टर पर मेरी अटेंडेंस लगा दी . दूसरे दिन मैंने बैग मैं सिर्फ ब्रश ओर जरुरी सामान रखा, एक एक्स्ट्रा कपडा,ओर एक दो स्पेशल कपडे (जो मैं आपको बाद मैं बताउंगी ) ओर कॉलेज के बहाने चुप चाप मैं गेट से बाहर चली गयी . कुछ दुरी पर अनीश अपनी बाइक पर मेरा वेट कर रहा था . रास्ता सिर्फ ४ घंटे का था , इसलिए हम दोनों ने बाइक से जाने का प्लान बना लिया. अनीश के पास रॉयल एनफील्ड की बुलेट थी , उस ज़माने मैं बहुत कम लोग अफ़्फोर्ड कर सकते थे . मैं अनीश के पीछे चिपक कर बैठ गयी ओर अनीश ने गाड़ी मुख्य रोड पर ले ली

अनीश ने टी शर्ट ओर जीन्स पहना था ओर मैंने भी टी शर्ट ओर जीन्स ही पहनी थी .. अब मैं अनीश के सात शरारत करने लगी .. रोड खाली था , ओर अनीश के साथ हैंडल पर बिजी थे पर मेरे साथ खाली थे , मैंने अनीश को कस कर पीछे से पकड़ लिआ ओर मेरे बूब्स उसके पीठ पर रगड़ दिए ,, वह सिसक गया - बोला - जानेमन मस्ती मत कर, मुझे रोड पर ध्यान देने दे .. मैंने कहा .. फिर दो ना ध्यान .. मैंने कब मना किआ ओर मैंने मेरे साथ उसके टी शर्ट को ऊपर कर के अंदर डाल दिए ओर उसके चेस्ट के बालों से खेलने लगी ..वह बोला रुक जा तू - तेरे से इंटरेस्ट के सात सब वसूल करूँगा, बंद कमरे मैं . मैंने कहा - कर लेना सब वसूल - ओर मैंने जोर से उसके दोनों निप्पल्स अपने ऊँगली से दबा दिए . वह जोर से.. आह .. कमीनी . मार डालेगी क्या .. मैंने कहा - नहीं जानू - ऐसे कैसे तुझे मरने दूंगी .. ओर फिर मैंने उसकी गर्दन पर किस किआ ओर जीभ फिरा कर उसको प्यार से चाटने लगी .. उसके कान भी धीरे से चबाये .. उसको सब अच्छा लग रहा था पर .. जानबूझ कर नखरे कर रहा था .. मैंने अब अपने हाथ उसके पेट पर फेरना चालू किआ ओर उसकी नाभि से खेलती रही .. ओर धीरे से हाथ उसके जीन्स के ऊपर उसके लण्ड पर रख दिया .. उस्का लण्ड बहुत टाइट ओर खड़ा हो कर फनफना रहा था ..टाइट जीन्स की वजह से मैं उसके जीन्स के अंदर हाथ नहीं डाल पा रही थी .. मैंने धीरे से उसकी जीन्स की ज़िप खोल दी ओर अपना हाथ अंदर डाल दिया .. उसके खड़े लण्ड की वजा से उसकी निकर बहुत टाइट थी - मुझे उस पोजीशन में उस्का लण्ड बाहर निकालना मुश्किल हो रहा था . मैं वैसे हे उसके लण्ड को बाहर से सहला ओर दबा रही थी. इस बीच कुछ कार ओर ट्रक वाले भी हमें क्रॉस कर के आगे गए .. बड़ी सावधानी बरतनी पड़ी .. अनीश बोला - मन कर रहा है तुझे यही रास्ते में उतार कर बीच सड़क पर नंगा कर के चोद दू ..

मैंने प्यार से उसे कस कर पकड़ लिया ओर उसकी गर्दन को चूमकर बोली - में मना नहीं करुँगी तुझे मेरी जान .

हम एक ढाबे पर खाना खाने रुक गए .. वहा पर कुछ खटिया भी पड़ी थी .. वहा सीमेंट की टंकी पर वाटर पंप चल रहा था .. हम वहा साथ पाँव धोने - गए .. वहा कुछ सरदारजी ट्रक वाले नहा भी रहे थे .. पानी बहुत ठंडा था .. फ्रेश हो गयी ..अनीश वहा बाथरूम मैं सुसु - पेशाब करने चला गया . तभी सामने मुझे एक हट्टा कट्टा मोटा सरदार नहाते नजर आया ओर वो अपनी बॉडी पर साबुन लगा था , मुझे अकेली देखकर वह कमीने अंदाज मैं मुस्कराया ओर उसने अपनी गीली निकर निचे खिसका दी ओर अपने लण्ड को साबुन लगाने लगा. वह अच्छा गोरा चिट्टा था ओर उसके सारे बदन पर काले काले बाल थे .. उस्का लण्ड देखकर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी .. इतना बड़ा लण्ड मैंने कभी देखा नहीं था .. मैं शर्मा कर वहा से भाग आयी. हमने दोनों ने खाना खाया ओर फिर से बुलेट पर चल दिए .. अब सिर्फ एक घंटे का सफर बाकी था .

में फिर से बाइक पर बैठ गयी .पर अब मेरी चूत नंगे सरदार को देखकर बहुत गीली हो गयी थी . मुझे बार बार सरदारजी का नंगा बदन ओर उस्का भयंकर लण्ड दिखाई देता .. ओर राजवीर का भी चेहरा आँखों मैं आता .. क्या राजवीर का भी लण्ड ऐसे ही होगा ? मेरे दिमाग मैं अब राजवीर को लेकर गंदे ख्याल आने लगे थे - मेरे दिमाग मैं राजवीर की नंगी तस्वीर बनना शुरू हुई .
 
मैंने उसी उत्तेजना मैं फिर से अनीश के जीन्स की ज़िप खोल दी .. ओर मेरा हाथ में सीधा उस्का नंगा तना हुआ लण्ड आ गया . मैं सकपका गयी ..अरे यह क्या .. अनीश जोर जोर से हसने लगा . अब खेलो रानी ..जितना जी चाहे खेल मेरे लण्ड से .. कमीनी तुझे अब ऐसे चोदूंगा रूम ले जाकर , तू भी यद् रखेंगी .. अनीश ने ढाबे के बाथरूम मैं पेशाब करते वक्त अपनी निकर निकाल दी थी ताकि मुझे आसानी हो. मैं भी यही चाहती थी . मेरे दिल की बात अनीश तक अपनेआप पहुँच जाती थी . मैं अपने दोनों हातों से अनीश के लण्ड से खेलने लगी .. उस्का इतना बड़ा लण्ड किसी को भी रास्ते पर चलने वाले को दिख सकता था ... पर नसीब से रोड पूरा खाली था सिवाय कुछ कार ओर ट्रक के .. ओर आजु बाजु खेत थे ओर रास्ते के दोनों बाजु बड़े बड़े पेड़ थे. मैंने अनीश के टोपे को पकड़ लिआ ओर प्यार से मसाज करने लगी ओर दूसरे साथ से उसके टट्टे दबाने ओर खेलने लगी .. अनीश बहुत उत्तेजित हो गया था .. ऐसे रोड पर पब्लिक प्लेस मैं हमने कभी नहीं किया था . अनीश का लंड अब जोर जोर से फुफकार रहा था . ओर मैं जान गयी की किसी भी वक्त वो अपना पानी निकाल देगा .

तभी अचानक अनीश ने बाइक स्लो की.. ओर रास्ते के बाजु एक बड़े पेड़ की पास रुका दी..मैं कुछ बोलू उससे पहल वह बोला जल्दी उतरो जानू .. ओर खुद भी बाइक से उतर गया ओर बाइक वहा स्टैंड पर लगा दी .. वह खींच कर मुझे बड़े पेड़ के पीछे ले गया .. जल्दी नीचे बैठो संध्या .. ओर उसने मेरे मुँह मैं अपना लण्ड दे दिया . मुझे मालूम था अनीश अपने चरम सीमा पर हैं ओर कभी भी पानी निकाल देगा .. पर रास्ते पर रिस्की था इसलिए मैं जल्दी से जल्दी उसका पानी निकालना चाहती थी . मैंने धीरे से उसका पूरा लण्ड मुँह मैं ले लिया ओर आगे पीछे करने लगी .. मुझे मालूम था की पूरा लण्ड मुँह मैं जायेगा तो अनीशजल्दी अपना पानी निकाल देगा . अनीश अब होश खो बैठा था ..उस्का लण्ड फुफकार मार रहा था .. मैंने भी जोर से उस्का पूरा लण्ड चूसना शुरू किया ओर उस्का पूरा ८ इंच का नाग अपने गले मैं फसा लिया .. अनीश बोला - ले कमीनी . पी ले मेरा रस. बन जा मेरी बच्चों की माँ .. ओर उसके बाद उसके लण्ड ने एक के बाद एक ऐसे अनेक झटके दिए ओर उसके वीर्य का फवारा मेरे मुँह मैं उमड़ आया . मुझे उसके वीर्य का स्वाद पसंद था . अनीश को मुझे उसका पानी पिलाना बहुत पसंद था ..मैं भी उसके लण्ड से पूरा एक एक बूँद चूस चूस कर पी गयी . अब अनीश शांत हो गया, उसने मुझे खड़ा किया ओर बहुत देर तक मुझे किस करता रहा .. मुझे वहा सुनसान सड़क पर डर लग रहा था .. मैंने कहा अनीश यहाँ बहुत रिस्की हैं.. जल्दी यहाँ से चलो .

हम बहुत जल्दी होटल पहुँच गये . अनीश अक्सर इस होटल मैं स्पोर्ट्स कम्पटीशन की दौरान रुकता था . होटल मैनेजर से पहचान हो गयी थी ओर अनीश ने उससे पहल ही बात कर रखी थी . इसलिए हमें कोई दिक्कत नहीं हुई. कम्पटीशन दूसरे दिन थी .चुकी अनीश स्टेट लेवल चैंपियन था उसको डायरेक्ट फाइनल इवेंट्स मैं एंट्री थी ..क्वालीफाइंग राउंड्स उसको नहीं देने थे . हमारे पास अब पूरा दिन ओर रात थी, अनीश ने रूम मैं आते ही मुझे कस कर पकड़ लिया .. ओर मेरे टी शर्ट निकाल कर फेक दी ..ओर मेरे मम्मे चूसने लगा .. उस ने मेरा एक एक कपडा निकाल कर फेक दिया ओर खुद भी नंगा हो कर बिस्तर पर लेट गया .. अनीश बोला - जानेमन अब दो दिन ऐसे ही रूम मैं फुल टाइम नंगा रहेंगे .. कभी कपडे नहीं पहनेगे. मैंने कहा ठीक हैं..जैसे तेरी मर्जी .. उसने मुझे जोर से अपने ओर खींच लिया..आओ जानू .. आज मेरा सपना पूरा होगा..तुम्हारा ओर मेरा मिलन होगा ..मैंने उसको धीरे से सर पर चूमा .. कहा ..बस जानू मुझे १५ मिनट दो .. तुम तब तक बाहर से मेडिकल की दुकान से यह गोलिया (गर्भा निरोधक - जो मुझे राज खिलाता था ) ले कर आओ ओर कुछ जूस ओर खाने का सामान भी, अनीश ने कहा अब रुका नहीं जाता, उसने कंडोम लाया था .. मैंने कहा बस सिर्फ १५ मिनट .. ओर मुझे उसका वीर्य मेरे बच्चेदनी मैं चाहिए .. हामरे बीच रबर का कंडोम नहीं रहेगा ... जाओ जल्दी से. अनीश थोड़ा नाराज हो गया पर बिना कंडोम के चोदने की ख्याल से खुश हो गया .

अनीश के जाने के बाद मैंने अपनी बैग से स्पेशल सामान निकाला. १५ मिनट के बाद अनीश आया ओर दरवाजे पर रिंग की .. मैंने शरमाते हुए दरवाजा खोल दिया .. अनीश मुझे देखता ही रहा गया .. wow .. क्या बात हैं - बस इतना ही कहा पाया ओर रूम के अंदर आकर दरवाजा लगा दिया. अनीश ने मुझे प्यार से अपनी बाँहों मैं जकड लिया ओर बोला - मेरी जानेमन ऐसा सरप्राइज मैंने कभी सोचा भी नहीं था .. आई लव यू

दोस्तों यह बात सच हैं की अनीश और मैं कई बार ओरल सेक्स कर चुके थे . अनीश को मेरे चूत के होंठ मतलब (वैजिनल लिप्स) चूसने मैं भी बहुत मजा आता था . यह भी सच हैं की यह होंठ चूत की सील फटने की वजह से होते हैं .. अब राज के मोटे तगड़े लण्ड ने मेरी सील को तोड़ मरोड़ के ऐसे मेरी ज़िल्ली फाड़ दी थी की मेरी चूत के लिप्स एक खूबसूरत फूल की तरह लगते थे .

अनीश ने इतनी बार मेरी चूत चाटी और देखी और उसको पता था की मैं वर्जिन नहीं हूँ . उसको मेरी फटी झिल्ली साफ दिखाई देती और वह उसको बड़ी प्यार से चाटता और चूसता . उसे इस बात से फरक नहीं पड़ता की मैं वर्जिन या कुंवारी नहीं थी . हम प्यार का इजहार करते, पर कभी एक - दूसरे से कभी शादी या किसी बंधन का वादा नहीं करते . ना ही कभी अनीश ने मुझे मेरे विर्जिनिटी या टूटी सील का राज पूछा न ही मैंने कभी उसका पास्ट पूछने की कोशिश की.. हम सिर्फ आज मैं जीना चाहते थे और बहुत खुश थे .

अनीश ने मुझे बाँहों मैं ले लिए था .. संध्या तुम इतनी सुन्दर हो . यह सरप्राइज मैंने कभी नहीं सोचा .. आई लव यू
 
मैंने लाल कलर की खूबसूरत सारी पहनी थी , जो मैंने कॉलेज की फंक्शन्स के लिए घर से लेकर आयी थी . वह डिज़ाइनर सारी थी और थोड़ी ट्रांसपेरेंट जिससे मेरा स्लीवलेस बैकलेस ब्लाउज साफ़ दिखता था . मैंने सारी एकदम नीचे लो वैस्ट पहनी थी . मेरी कमर के काफी नीचे और मेरी चूत से थोड़ा ऊपर . मैंने मेरे झाटें साफ़ राखी थी नहीं तो इस सारी के ऊपर सब को मेरी झाटें जरूर दिख जाती. सारी के ऊपर मेरी नाभि और पेट खुला था. खैर झाटों से मैं बच गयी पर अपनी गांड की दोनों कूल्हों की चिर को छुपा ना सकी. मैंने सिर्फ पेटीकोट पहना था और अंदर कोई पैंटी नहीं पहनी थी. मैंने मेरे लिप्स पर लाल रंग की लिपस्टिक लगा राखी थी, आँखों मैं मस्कारा और एक बड़ी लाल रंग की बिंदी भी लगा ली थी . मैंने अपने बाल खुले रखे थे और अपने बालों मैं एक बड़ा सा मोगरे का गजरा भी लगा लिया था , जो मैंने पहले ही कॉलेज के मंदिर के बाहर खरीद लिया था . मुझे पता था की यह सब मेहनत बेकार जाने वाली हैं क्यूंकि ५ मिनट मैंअनीश मुझे नंगा कर देगा ..पर वह ५ मिनिट भी बेशुमार कीमती थे. मेरे इस रंग रूप को देखकर अनीश मदहोश हो गया और उसका खड़ा लंड मेरी गांड पर चिपक गया . अनीशने मुझे खींच कर बाँहों मैं ले लिए और मुझे जोर जोर से किस करने लगा , मेरे ओंठों को चूसने लगा .उसने मेरे खुली गांड की दरार पर हाथ फेरा और मेरी गांड हाथों से दबा के मसल दी . वह बार बार मेरे बालों को और मेरे गजरे सूंघता और अपनी उंगलितों से गजरे पर लगे मोगरे के फूलों को तोड़ मरोड़ देता . मेरा स्लीवलेस और बैकलेस ब्लाउज़ उसे पागल कर रहा था .. वह मेरी बगल और पीठ को चुम रहा था और चाट रहा था . मैंने उसका टी शर्ट निकल दिया और उसकी बरमूडा भी ..वह अब मेरे सात बिलकुल नंगा था . क्या सन था - मैं बिलकुल एक दुल्हन की तरह कपडे मैं थी और वह पूरा नंगा होकर मुझे प्यार कर रहा था . उसे मेरे कपडे निकालने मैं कोई जल्दी नहीं थी . अनीश बोला - मेरी जान तुम इस कपड़ों मैं जन्नत की पारी लग रही हो , कोई भी मर्द आज तुम्हे प्यार करने से नहीं रोक पाता ..वह मेरे पीठ पर किस करते करते निचे कमर तक गया और फिर मेरी गांड की दरार को चाटने लगा ... उसने मेरी पेटीकोट और सारी और भी नीचे सारखा दी.. ताकि मेरी गांड की दरार को और भी नीचे चाट सके .. वह मेरी गांड को चाट रहा था, काट भी रहा था .. फिर उसने मुझे बेड पर सुला दिया .. और मेरी सारी और पेटीकोट खोल कर अपना सर अंदर डाल दिया ... वह मेरी जंघे चाट रहा था , काट रहा था .. मेरे जांघें फैला कर मेरी चूत के अजु बाजु काट रहा था , चाट रहा था और चूमी ले रहा था . उसने सर बाहर निकल लिया और मेरे ब्लाउज़ को नीचे खींच लिया .. मैंने कोई ब्रा नहीं पहनी थी .. वह मेरे दोनों आम पकड़ कर चूसने लगा .. मेरी निप्पल्स चूसने लगा और काटने लगा .. फिर एक झटके मैं उसने मरा ब्लाउज़ निकाल दिया और सारी भी पेटटीकट के सात नीचे खिसका कर निकाल दी .. अब मैं मेरे अनीश की बाँहों मैं पूरी नंगी थी और उससे चुदने का इंतजार करने लगी .. मेरी चूत गीली हो गे थी .. वो अनीश के लण्ड का स्वागत करने के लिए ख़ुशी से पानी बहा रही थी. अनीश का मुसलदार लण्ड मेरे चूत के दाणे को रगड़ रहा था . अनीश ने भी ना आव देखा ना ताव .. उसके लण्ड के सुपडे को मेरी चूत की मुँह पर सटा दिया और एक जोरदार धक्का लगा दिया .. मैं जोर से दर्द से करहा उठी .. उह माँ .. उसका लण्ड अभी आधा ही गया था . राज के बाद ६ महीने के बाद सेक्स कर रही थी, इन ६ महीनो मैं मेरी चूत बिना लण्ड के टाइट हो गयी थी , अनीश ने कहा सब्र करो डार्लिंग .. शरू मैं दर्द होगा..फिर मजा आएगा ..वह मेरे होंठ चूसने लगा और दूसरे हातों से मेरे मम्मे दबाने लगा . मैं फिर से उत्तेजित हो गयी और अनीश की गांड अपने दोनों हाथों से पकड़ कर खुद के ऊपर खींच लिया . अनीश आह कर के कसमसा गया .. उसका पूरा लण्ड मेरी टाइट चूत मैं प्रवेश कर गया था ..अनीश बोला ..मेरी जान ..तेरी चूत कितनी टाइट और कसी हुई हैं.. लगता हैं मेरा लण्ड अपने भट्टी की आग में जला देगी. मैंने कहा- नहीं मेरे राजा देखो अभी इस भट्टी से में कैसे तेरे लण्ड को सकून देती हूँ . मेरी चूत बहुत गीली थी और अपना पानी बहाकर उसके लण्ड का प्रवेश का इंतजार कर रही थी. अनीश का लण्ड एक बड़े केले जैसे था और मेरे दाणे से भी रगड़ रहा था . इसके कारन मेरी चूत बहुत गरम हो गयी और उत्तेजित भी.. अनीशका लंड मुझे हर जगह अंदर से छू रहा था और मैं बेबस हो गयी थी . अनीश मेरे पैर ओर भी ऊपर कर दिये और मेरी छाती पर चिपका दिये.. जिससे मेरी चूत और भी खुल गयी और उसका लण्ड आसानी से पूरा अंदर चला गया .. मैं फिर से कन्हा उठी .. हाई मेरे राजा .. मiर डालोगे क्या .. अनीशने बड़ी कमीनी नजरों से मुस्कराते कहा .. नहीं रानी मैं तुझे मरने नहीं दूंगा .. सूत सहित तेरा प्यार वापस लौटाऊंगा .. मेरा ही तीर मेरे ऊपर उलट आया था अब.मैंने भी उसको पकड़ के चूमना शुरू किया और उसकी गर्दन पर जोर से चूमकर / चूस कर एक बड़ा निशान बना दिए .. अनीश इससे और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया और मुझे जोर जोर से चोदने लगा .. मेरी चूत का बांध अब टूट गया और मैं जोर से ाआअह कर के झड़ गयी .. मेरी चूत से बहुत सारा पानी निकल गया .. जिससे अनीशके लंड को और भी आसानी हो गयी .. अनीश अभी भी नहीं झाड़ा था. वो कुछ देर रुक गया और मेरी निप्पल्स को प्यार से चूसने लगा . मैं भी शांत हो गयी थी ..पर मेरे हाथ अनीश के सर पर उसके बालों को सहला रहे थे , उसके पीठ पर घूम रहे थे और उसकी गांड भी सहला रहे थे . बड़ा ही प्यारा, कोमल और सेंसुअल सिन था . अनीश ने धीरे से मेरी जीभ चूसना शुरू किया और फिर मुझे भी उसकी गीली जीभ चूसने दी .. उसकी गीली जीभ चूसने मैं बाद मजा आ रहा था .. मुझे लग रहा था की जैसे मैं उसकी जीभ नहीं , उसका लण्ड चूस रही हूँ , और उसका दूसरा लण्ड मेरी चूत मैं फुफकार रहा था .. हमारे बीच में बड़ा ही संवेदलशील और कामुक सम्भोग हो रहा था. मैं अब फिर से गरम हो गयी और उत्तेजित भी . अनीश मुझे अपने लण्ड से धीरे धीरे धक्के देकर चोद रहा था . उसके टट्टे मेरी चूत के नीचे टकरा रहे थे . उसके लण्ड के धक्के कभी रुके नहीं थे .. एक स्पोर्टमैन होने की वजह से गजब का स्टैमिना और कण्ट्रोल था .. उसका कण्ट्रोल तभी छूटता जब मैं उसका पूरा लण्ड अपने गले तक मुँह मैं लेती.
 
मैंने अब उत्तेजना मैं अपने हातों से उसके बाल पकड़ लिए और उसको खींच कर फिर से उसके लिप्स चूसने लगी .. मेरी इस हरकत से वह गरम हो गया और जोर से धक्के मारने लगा .. अब वह उसका पूरा लण्ड बाहर निकाल कर फिर से पूरा अंदर घुसेड़ देता . वह अपने फौलादी लण्ड से बड़े और फुल स्ट्रोक मार कर मेरी चूत पेल रहा था . मैं इससे और भी उत्तेजित हो गयी.. मैं उसकी छाती को किस करने लगी और जोर से उसके निप्पल्स और छाती को चूसने लगी ... वह और भी कामुक हो गया ..गालिया देने लगा .. ले रानी पूरा लण्ड ले ले .. आज तेरी चूत मैं अपना पानी डाल दूंगा .. बोल तैयार हो ? मैंने कहा हाँ मैं पूरी तैयार हूँ .. अनीश बोलै .. मेरे बच्चे की माँ बन जाएगी ... मैंने कहा हाँ .. तेरे १५ - २० बच्चों की माँ बन जाऊंगी .. वह अब हाफ रहा था .. करीब एक घंटे से मुझे चोद रहा था .. मैं एक बार झाड़ गयी थी और अब दूर बार झड़ने को तैयार थी .. मैं उसकी छाती को चाट रही थी..मैंने उसके निप्पल्स को जोर से चूसा और अपने दातों से काट लिया .. वह जोर से चिल्लाया .. कामिनी .. ले ले ..पूरा पानी पी ले ..और जोर से मेरी चूत में उसके लंड ने कई झटके देकर पानी की फंवारें छोड़ दिया .. आह .. आह कर के मैं गिनती रही..हर एक झटके से उसके लण्ड का गरम लावा मेरे चूत मैं जाता रहा .. अनीश क़े मोटे लम्बे जहरीले नाग ने अपना जहर मेरी चूत मैं उगल दिया था इसी वक्त मेरी चूत भी फिर से झड़ गयी थी और जोरदार पानी छोड गयी थी ..अनीश मदमस्त होकर मेरे ऊपर लेट गया ..उसने अभी अपना लण्ड बाहर नहीं निकाला था .. मैं भी शांत हो कर उसको कस के पकड़कर उसके बालों पर साथ फेर रही थी . उसका गरम वीर्य मेरी चूत को अंदर तक सेंक रहा था . थोड़ी देर तक हम वैसे ही एक दूसरे की बाँहों मैं नंगे पड़े रहे, अनीश का लंड भी सिकुड़ कर मेरी चूत से बाहर आ गया था .. अनीश ने मेरा चेहरा अपने दोनों हातों मैं ले लिया..मेरे सर पर पप्पी ली... और कहा . आई लव यू बेबी .. मैंने भी उसको हलके से किस कर लिया और बोला - आई लव यू टू. फिर वह मेरे ऊपर से उठकर बाजु मैं लेट गया ..मैं भी उसके बाँहों मैं अपना सर रख कर सो गयी .

दोस्तों इस तरह आखिर में तीन महीनों के इंतजार का बाद हम एक हो गये थे ..हमारा मिलन हो गया था . हमारे बीच का सम्भोग सिर्फ कामुक ही नहीं सवेदनशील भी था .. उसमे प्यार भी था .. जो कोई अपेक्षा नहीं रखता था .
 
हम दोनों पसीने से लथपथ थे . जब आँख खुली तब देखा की अनीश अभी भी सोया था . मेरा सर उसके छाती पर था और एक हाथ उसके नाभि पर . मैं सोचने लग गयी - अनीश एक चैंपियन स्पोर्टमैन था . उसको खेलने में मजा आता और मुकाबले मैं अगर मजबूत प्रतिद्वंदी हो तो खेल का मजा और भी ज्यादा आता हैं . मुझे अनीश के लिए सेक्स में एक मजबूत खिलाडी बनना पड़ेगा, जिससे उसका मजा और रूचि टिकी रहे और बढ़ती रहे, मेरी चूत से अभी भी अनीश का वीर्य और मेरा पानी का मिश्रण बहा रहा था .. बेडशीट पर बहुत बड़ा गीले पानी का दाग पड़ गया था - जो चिपचिपा और सूखने लगा था. .

अनीश का लण्ड अब सो रहा था फिर भी ५-६ इंच लम्बा और मोटा था. अजीब बात थी की उसके लण्ड की चमड़ी (foreskin ) उसके सुपडे को पूरा ढक कर आगे आधा एक इंच ढीली निकल आती थी . मेरा साथ उसके पेट पर से उसके लण्ड पर चला गया और मैं उसकी ढीली चमड़ी से खेलने लगी . मैं उसके लण्ड की चमड़ी को अपने उँगलियों मैं दबाती, घुमाती, मसल देती. उसके चमड़ी को आगे पीछे कर के उसके लण्ड के सुपडे को बाहर निकलती और फिर से उसे ढक देती. कितनी मुलायम और लचीली चमड़ी दी.. उसके कठोर और कड़क लण्ड पर . यही चमड़ी उसके लण्ड का साथ देती जब वह चूत से रगड़ कर घिस जाती और सब से ज्यादा घिस कर यही चमड़ी उसके लण्ड को भी और मेरी चूत को भी सब से ज्यादा मजा देती . मैं बड़ी प्यार से उसके चमड़ी के सात खेल रही थी और देखते ही देखते अनीश का लण्ड फिर से तैयार हो कर पूरी सलामी ठोक रहा था . अनीश उठ गया था और मेरे बालों पर से हाथ फेर रहा था .. मेरा गजरा आधा बिखर गया था - कुछ फूल टूट गए थे , कुछ फूल मसल गए थे पर उसकी सुगंध और भी ज्यादा बढ़ गयी थी . अनीश उन मसले फूलों की खुश्बू ले रहा था और उनको अपने चहरे पर मसल रहा था .

अनीश बोलै - मेरी जान क्या कर रही हो , मैंने कहा - छोटे अनीश से खेल रही हु .. वह हंस कर पूछा - अच्छा रानी मुझे बता - तुझे मेरा लण्ड पसंद. मैंने कहा - हां बहुत पसंद हैं .. फिर अनीश ने कहा - बताओ तो - कोन ज्यादा पसंद हैं - मैं या यह छोटा अनीश ..

मैंने भी उसको छेड़कर कहा दिया - मुझे तो छोटा अनीश सबसे ज्यादा पसंद है .. अनीश ख़ुशी से चहक उठा और मुझे चूमने लगा .. उसने मेरे दोनों बूब्स हातों में लिए .. रानी इतने प्यारे आम हैं..और वह उन्हें चूसने और चाटने लगा .. मेरे एक निप्पल्स को उसने मुँह मैं ले लिया और अपनी जीभ से रगड़ने लगा .. मेरे दोनों बूब्स को चाट चाट कर उसने अपनी थूक से पूरा गिला कर दिया ... फिर वह उठा .. मेरे छाती के दोनों बाजु अपने घुटने रख दिए ..उसने मेरे दोनों बूब्स एक सात पकड़ लिए और जोड़ दीये .. और दोनों बूब्स की दरार मैं अपने लोहे जैसे कड़क लण्ड को घुसेड़ कर मेरी बूब्स पर अपने लण्ड को रगड़ने लगा . मेरे लिए यह बहुत नया था पर अच्छा लग रहा था . मेरे बूब्स पर लण्ड रगड़ने से मैं गरम हो रही थी .. और अनीश के लण्ड का टोपा मुझे साफ़ दिखाई दे रहा था .. अनीश ने कहा - रानी मेरे लंड के टोपे को अपने जीभ से चाटो . और मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल दी .. जैसे अनीश आगे धक्के मरता वैसे मेरी जीभ उसके लंड के सुपडे पर रगड़ जाती.. और जब वह पीछे होता .. उसका सूपड़ा मेरे बूब्स को रगड़ देता . अनीश बहुत उत्तेजित हो गया .. कहा - वाह रानी तेरे मम्मे एकदम मुलायम हैं .. माखन की तरह .. इनको फेट-फेट-कर पूरा घी निकल दू .. मैंने कहा - हाँ मेरे राजा - निकल दे घी ..पीला दे मुझे तेरा घी.. मैंने भी अनीश के गांड अपने दोनों हाथों से पकड़ राखी थी और उसके धक्के के साथ आगे पीछे कर रही थी .. तभी मैंने मेरा सर ऊपर उठाया और उसके लण्ड का टोपा मुँह मैं ले लिया - अनीश मदहोश हो गया - आह रानी .. क्या मस्त लण्ड चूसती हैं तू .. वह और जोर जोर से मेरे मम्मे अपने गरम लण्ड से रगड़ने लगा. मैं भी हर धक्के के सात उसके लण्ड को मुँह मैं ले लेती . अनीश बहुत देर तक मेरे मम्मे चोदते रहा .. मुझे अब एक अच्छे प्रतिद्वंदी के तरह अलग पैतरा आजमा कर उसको चरम सीमा तक ले जाना था .. नहीं तो खेल ख़तम नहीं होगा और वह ऐसे ही घंटो तक मेरी मम्मे को चोदते रहेगा . मैंने धीरे से अपने मम्मे पर से उसके हाथ हटा दीये और उसकी आंखों मैं नजरें मिला कर उसका मोटा लण्ड पूरा मुँह मैं ले लिया . अनीश को मेरा यह दाव अपेक्षित नहीं था .. मेरे गले मैं उसका लण्ड फास गया और मैं प्यार से उसको चूसने लगी .. वह ख़ुशी से आवेश मैं आकर अपना लण्ड पूरा बाहर निकालता और फिर से अंदर मेरे गले तक घुसेड़ देता . अअअअअ आह .. कर के उसके लण्ड ने बड़ा झटका लगाया और कई झटकों के सात मेरे मुँह मैं एक के बाद एक अपने गाढ़े वीर्य का फंवारा छोड़ दिया .. मैं भी उसका गाढ़ा वीर्य चूसते रही..और गटक गयी .. मैंने उसके लण्ड को तब तक मुँह से बाहर नहीं निकाला - जब तक आखरी बूँद नहीं पी ली .

अनीश ने अपना लण्ड मेरी मुँह से बाहर निकाला और अब उसने पीछे हो कर मेरी टांगे फैला दी और..अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया . अनीश एक अच्छा खिलाडी था .. जानता था की उसको मुझे भी परस्त करना है .. मेरी चिकनी चूत को आजु बाजू सब तरह से चाट रहा था .. फिर उसने मेरे चूत के लिप्स पर अपने ओंठो के लिप्स रख दीये और पूरी चूत चूसने लगा .. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और मेरी चूत ख़ुशी के मारे गरम हो कर गीली हो रही थी .. फिर अनीश ने अपनी जीभ से मेरे दाणे को चाट कर मुँह मैं ले लिया .. मेरा दाणा भी फूलकर कड़क हो गया था .. अनीश बोलै - आह मेरी जान .. तेरी कोमल चूत पर यह दाणा किसी छोटे से एक सेंटीमीटर के लण्ड जैसे दिख रहा हैं ..ऐसे लग रहा मैं एक छोटूसा लण्ड चूस रहा हूँ - अनीश प्यार से मेरा कड़क मोटा दाना चूसने लगा .. मैं कसमसा गयी.. मेरी चूत मैं आग लग गयी थी .. मैंने कहा - अनीश प्लीज छोड़ दो .. पर वह और जोर से मेरे दाणे को चूसने लगा और अपने दोनों हातों से मेरी गांड दबाने लगा .अब उसकी उंगलिया मेरे गांड की छेद से खेल रही थी .. मेरे सब्र का बांध टूटने वाला था .. तभी अनीश ने मेरे दाणे को हलके से अपने दातों से चबा दिया .. और उसकी एक ऊँगली मेरी गांड मैं हलके से डाल दी.. मैं हाई .. आआह्ह आह्हः .. करके उसके सर को अपने चूत पर जोर से दबा दी और..मेरे चूत झड़ने से पानी की गंगा बहने लगी .. अनीश वैसे ही मेरी चूत को चाट चाट कर सब पानी पीते रहे .. वाह रानी ये तो स्वर्ग का अमृत हैं..इतना मीठा शहद .. मेरी चूत का सारा पानी चाट कर वह मेरे बाजु लेट गया और मुझे अपनी बाँहों मैं कस कर पकड़ लिया .. हम एक दूसरे से लिपट गए और प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे ..

अब शाम हो गयी थी .. हमें भोउक भी लगी थी और खाना भी खाना था .. अनीश ने पूछा - जानम खाने के सात थोड़ी बियर पियोगी .. थकान चली जाएगी .. मैंने कहा सिर्फ थोड़ी से मंगा लो - काल तुम्हारा खेल का कम्पटीशन भी हैं ..

अनीश ने फ़ोन पर ही खाना आर्डर किया और २ ठंडी बियर भी मंगवा ली ..हम बाथरूम में जाकर फ्रेश होने के लिए नहाने लगे .बाथरूम बहुत छोटा था , मुश्किल से हम दोनों शावर के नीचे खड़े हो गए चिपक कर .. एक दूसरे को साबुन लगाने लगे .. अनीश ने कहा - रानी तुम्हारे गोरे शरीर पर तो मेरे दातों के और चूसने से बहुत लाल लाल निशान पड़ गए .. और वह मुझे एक - एक निशान दिखाने लगा .. जैसे की उसने अपना निशान मुझ पर लगा कर मुझे उसका बना दिया था. मेरी चूत भी लाल हो कर सूज गयी थी .. मैंने देखा की अनीश के गर्दन , छाती पर भी वैसे निशान थे .. और उसके पीठ और गांड पर मेरे नाख़ून के खरोंच थी..हम दोनों हंस दीये - बराबर की टक्कर वाले खिलाडी हैं .
 
हम बाथरूम से बाहर आकार एक दूसरे को टॉवल से सुखाने लगे .. तभी दरवाजे पर बेल बजी .. मैं जल्दी से अपने कपडे लेने भागी .. तभी अनीश ने मुझे पेट से पकड़ लिया - नहीं रानी कपडे नहीं . मैं चौंक गयी .. अनीश प्लीज रूम सर्विस बॉय हमें नंगा नहीं देख सकता .. अनीश बोलै नहीं रानी -हम दोनों ने यह फैसला किया था की रूम मैं पूरा टाइम नंगा रहेंगे . अब हम हमारा फैंसला नहीं तोड़ सकते ..

मैं अनीश की तरफ देखने लगी .. वह बड़ी शरारती और कमीने अंदाज में मेरे दोनों हातों को अपने हातों मैं पकड़कर मुस्करा रहा था ..

मैंने डरते हुए दरवाजे key - hole से देखा, अनीश बाहर हाफ्ते हुए खड़ा था. मैंने दरवाजा खोला, रूम की बत्ती ऑफ ही थी, अच्छा था, मैं अँधेरे मैं सब छुपाना चाहती थी. अनीश अंदर आ गया, वह पसीने से लटपट पूरा भीगा था . मैंने दरवाजा फिर से ठीक से बंद कर दिया, मैं पीछे जाकर अनीश को लिपट गयी. उसकी छाती को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर कहा - अनीश आई ऍम सॉरी , मैं तुज़से बहुत प्यार करती हूँ . अनीश ने मुझे खींच कर अपनी बाँहों मैं भर लिया मैं उसको लिपट कर जोर से रोने लगी. वह मुझे शांत करने लगा, बोला - मैं भी तुम से बहुत प्यार करता हूँ संध्या , प्लीज चुप हो जावो , गलती मेरी हैं . और मेरी आंखें पोंछने लगा और चुप कराने लगा. मैंने उससे कहा, जल्दी सो जाते हैं अनीश, कल सुबह हमें कम्पटीशन के लिए जाना हैं. मैं बिस्तर पर लेट गयी, अनीश ने अपने सरे कपडे उतर दिए , और पूरा नंगा होकर मेरी बाजू लेट गया. मैं उसके बाँहों मैं चली गयी और सो गयी.

दूसरे दिन हम जल्दी सुबह सात बजे उठे, और तैयार हो कर ९ बजे कम्पटीशन के जगह चले गए. अनीश ने ३ इवेंट्स की रेस मैं भाग लिया था - २०० M , 400m , 800m , और तीनो रेस में वह जीत गया और गोल्ड मेडल जित लिया . हर रेस के जीतने के बाद वह दौड़ कर मेरी तरफ आता , मुझे प्यार से पकड़कर ऊपर उठाता और चुम लेता . सब खिलाडी उसे जल भूनकर देखते , उसके लिए मैं एक बड़ी ट्रॉफी थी.

जब हम वापिस होटल आये, नदीम वही रेसप्शन पर बैठा था . वह मुझे घर घर का गन्दी वासना भरी नजरों से बलात्कार कर रहा था. मैं अनीश के पीछे छुप गयी. हम रiत भर वहा रहकर दूसरे दिन सुबह जाना था.

मुझे बार बार रात की घटना याद आ रही थी , दुखी कर रही थी, और खुद पर गुस्सा भी आ रहा था. मैंने दरवाजा क्यों खुला रखा ? मैंने नदीम को अनीश कैसे समाज लिया ? सब मेरी गलती थी .. मेरे आँखों से अभी भी आंसू आ रहे थे..अनीश ने कहा - जानू आई ऍम सॉरी ..मुझे पता नहीं था कल की बात का तुम्हे इतना बुरा लगेगा . मैंने उससे कहा - अब में तुमसे बिल्कुन नाराज नहीं हूँ, बस ऐसे ही .. लाइट मत जलाओ , बस ऐसे अँधेरे मैं तुम मेरे पास आ जाओ . अनीश मुझे पास पकड़कर, चूमने लगा , मेरे कपडे निकालने लगा , बहुत जल्दी हम दोनों नंगे थे , हमने तब से लेकर रात भर बहुत प्यार किया. अनीश ने कम से कम मुझे ४-५ बार चोद ही डाला था, मैं भी अपने गुस्से में उससे चुदते चली गयी. अनीश की प्यार और काम क्रीड़ा की प्रहार से खुद का गुस्सा शांत कर रही थी. बेखबर अनीश खुश था, में उसको पूरा सात दे रही थी.

दोस्तों जब कभी किसी लड़की पर जबरदस्ती होती हैं तब उसके मन और आत्मा पर भारी आघात होता हैं और दर्द के घाव जिंदगी भर की लिए उमट जातें हैं. मुझे बार बार नदीम का गन्दा, भद्दा चेहरा और नंगा बदन और उसका हिंसक रूप आँखों के सामने दिखाई देता . आगे की जिंदगी में , मैं बहुत ज्यादा मजबूत हो गयी. बाहर की दुनिया से बची रही, पर फिर से ऐसी घटना होने से रोक नहीं पायी. आगे मेरे सात मेरी जिंदगी ने फिर से दो बार ऐसे खेल खेला और खेल खेलने वाले बाहर के नहीं बल्कि घर की चार दीवारी में रहने वाले मर्द थे . यह कैसे हुआ , क्यों हुआ, कब हुआ, सब बाद में घटना क्रम के हिसब से बताउंगी .

दूसरे दिन हम फिर से कॉलेज , हँसते, खेलते , छेड़-छाड़ करते बाइक से वापस आ गए. पर मेरा मन अभी भी शांत नहीं था. में २ दिन कॉलेज गयी , अनीश से मिलती , पर शाम को उसको मिलने नहीं गयी. तबियत ठीक नहीं का बहाना बनाया .

इस एक घटना ने मेरी जिंदगी हिला कर रख दी. दुनिया में नदीम जैसे शैतान हर नुक्कड़ पर मौके का फ़ायदा उठाने तैयार खड़े रहते हैं. मैं अब उस दिन से अनीश की मिलने जाती, पर गार्डन में अकेले जाने से मना करती. कोई सेफ जगह हो तो ही हम जाते थे और एक दूसरे से खूब प्यार करते. मेरी रूम पार्टनर अनीता ने बहुत पूछने की कोशिश की - क्या हुआ, अनीश के सात सेक्स हुआ क्या? कैसे रहा एक्सपीरियंस, पर मैं हंस कर उसे कुछ नहीं बताती और टाल देती थी. मैंने देखा की राजवीर और अनीता कुछ ज्यादा ही करीब आ गए थे और सात - सात बैठा करते. कॉलेज मैं यह भी अफवाह फ़ैल गयी की उनका भी अफेयर चल रहा.

एक दिन राजवीर और मैं लेबोरेटरी मैं प्रैक्टिकल कर रहे थे. राजवीर मेरा पार्टनर था, हम ऐसे ही हमेशा की तरह हंसी मजाक कर रहे थे.. राजवीर ने हँसते हुए कहा - संध्या मेरे सात भी कही बाहर चलो..मजे करेंगे . मैंने गुस्से मैं कहा - चुप , थप्पड़ पड़ेगी तुझे एकदिन. वो बोला - क्या यार , मैं तुमपर इतना मरता हूँ..तू ध्यान भी नहीं देती. मैंने कहा - तू तो अनीता के सात हैं. उसने कहा - मैं उसके सात हूँ क्यूंकि तू उसकी रूम पार्टनर हैं. खैर मैंने बात टाल दी .

फर्स्ट ईयर की एग्जाम के बाद, सर्दियों की छुट्टीयो में , मैं मुंबई आ गयी . हमें बुआ की लड़की वर्षा के शादी मैं जाना था . मम्मी - पापा को तो जाना जरुरी था - लड़की के मामा - मामी जो थे. शादी गांव मैं थी. हम लोग २ दिन पहले ही बुआ के घर पहुँच गए. मैं वर्षा को देखकर एकदम खुश हो गयी..वह भी मेरा ही इंतजार कर रही थी. तभी पीछे से अकार किसी ने मेरे आँखों पर साथ रखकर मेरी ऑंखें बंद कर दी और जोर से उसकी और खींच कर - अलग तोते की आवाज निकाल कर पूछा - पहचानो कोण हैं? मैं थोड़ा पीछे की तरफ फिसल कर उसके शरीर पर गिर गयी. एकदम मजबूत , छाती और हाथ लग रहे थे.. कोई भारदस्त मर्द.. सब हंस रहे थे .. मैं सोचने लगी कोण हैं.. मैंने एक दो नाम बताये पर सब गलत थे . उसने फिर से आवाज बदल कर शैतानी अंदाज मैं कहा - हार मान लो.. जो कहूंगा वो करना पड़ेगा ? .. बुआ बोली - अब छोड़ उसे..शैतान..मेरी भांजी इतने दिन बाद आयी. तंग मत कर उसे. मेरी आँखें खुल गयी..मैंने पलटकर देखा.. चेहरे पर तेज, शैतानी अंदाज, स्लीवलेस बनियान मैं कसी गठीली बॉडी और टाइट शॉर्ट्स - एकदम सेक्सी गांव का नौजवान मेरे बुआ का लड़का बंटी था. २ सालों मैं वह कितना बदल गया था. वह मुज़से २ साल बड़ा था . मैंने कहा - बंटी तुम.. और झूठा झूठा अपने दोनों हाथों की मुट्ठी से उसके छाती पर मारने लगी. सब हंस रहे थे.. उसने फिर से मुझे चिढ़ाकर बोला - अरे क्यों मुझे मार रही, देखो मुज़से पंगा मत लो..तुमने काबुल किया हैं मैं जो मागूंगा वह तुम दोगी. मैंने भी जीभ बाहर निकाल कर उसे चिढ़ाकर ठेंगा दिखा दिया. उस दिन बहुत सारे रिश्तेदार भी आ गए. शाम को मेहँदी थी - एक बड़े हॉल मैं . हम सब चचेरे, ममेरे, फुफेरे, मौसेरे भाई - बहन बहुत हंसी मजाक कर रहे थे .. हम सब बहुत दिन के बाद ऐसे फॅमिली फंक्शन मैं एकसात मिल रहे थे. हम सब ने वही हॉल मैं एक सात सोने का फैंसला किया. बातें भी होंगी और एक दूसरे के सात टाइम भी स्पेंड करेंगे. तभी मेरी आँखें स्वप्निल से टकरा गयी . स्वप्निल मेरी बुआ का भतीजा था - उनके बड़े जेठ का बेटा. वह मुज़से बहुत फ़्लर्ट कर रहा था - मामा की बेटी - के रिश्ते से और शैतानी भी कर रहा था. उसकी नज़रों से साफ़ उसकी नियत का पता चल रहा था, स्वप्निल शहर से था और MBA कर रहा था, ६ फ़ीट हाइट, जिम बॉडी ,और आकर्षक पर्सनालिटी थी. उसने एक दो बार मजाक में मेरा साथ पकड़कर भी मरोड़ दिया था. रात को बहुत ठंडी थी, हमने बहुत भारी भारी रजाई और ब्लैंकेट लिए थे.

कुछ देर बाद हम सब सोने लग गए थे , सब लड़के बाहर चले गए थे..शायद पीने का कुछ प्रोग्राम था. मैंने सलवार कुर्ता पहना था और एक मोटी रजाई लेकर मैं वहां अपनी चचेरी बहन सुमन दीदी के बाजू सो गयी. थक गयी थी, जल्दी नींद आ गयी. बीच रात मैं मेरी ऑंखें खुली. मुझे अपने पैरों पर कुछ स्पर्श महसूस हुआ. मैंने ऑंखें बंद रखी थी. मेरे दूसरी तरफ कोई रजाई ओढ़कर सोया था .. उसके साथ मेरी रजाई के अंदर आकर ..मेरे पैरों पर घूम रहे थे. कोण था पता नहीं - पर साथ किसी मर्द का था. मैं डर के मारी चुप रही - कही सुमन दीदी या बाकि घर वाले जग न जाये. धीरे धीरे उसके साथ मेरे घुटने से जांघों पर आये और मेरी जंघा सहलाने लगा. ठंडी के दिन, उसपर उसका गरम साथ.. मुझे उत्तेजित करने लगे थे .. और मेरी चूत गीली हो रही थी. उसका साथ धीरे धीरे अब मेरी चूत की तरफ बढ़ रहा था . कोन है ये ? स्वप्निल या बंटी ? उसने सलवार के ऊपर से मेरी चूत पर हाथ फेर कर प्यार से सहलाने लगा. मेरी पैंटी और सलवार अब मेरी चूत के पानी से गीली हो गयी थी. मुज़मे एकदम हिम्मत आयी..मैंने उसका साथ जोर से पकड़ कर हटा दिया. वह शायद डर गया होगा - और अँधेरे में उठकर कमरे की दूसरी बाजू - जहाँ सब लड़के सोये थे - वहां चला गया.

दूसरे दिन सुबह उठकर चाय -नाश्ता ले रहे थे, तभी बुआ ने कहा - बंटी जाओ - तबेले से दूध ले कर आओ .. आज मेहमान ज्यादा हैं. बुआ का अपना भैंसो का बड़ा तबेला था - १५ - २० गाय और भैंसे थी. बहुत बड़ा खेत भी था. मैंने कहा - बुआ मैं भी जाउंगी.. मुझे भी गाय और भैंसे दखनी हैं. मैं झट से बंटी के सात चली गयी. बंटी ने एक बड़ी स्टील की बाल्टी ली और उसमे एक लोटा पानी और एक चम्मच तेल डाल दिया . जाते जाते मैंने बंटी से कहा - आपने यह पानी और तेल क्यों लिया ? बंटी ने कहा - दूध निकालना है न काम आएगा - अभी i तुम खुद देख लेना. जैसे हम तबेले गए .. वहां हरिया - बुआ का ७० साल का बुड्ढा नौकर एक कच्छी मैं था..और भैंसों का पानी से नहला रहा था. उसका पूरा बदन काला और तेल से चमक रहा था. मुझे देखकर बोला - आज संध्या बिटिया भी आ गयी ? बंटी ने कहा - हाँ हरिया चाचा, संध्या को देखना हैं की दूध कैसे निकलते . हरिया ने कहा - तू ही बता दे बंटी , और वह उनकी भैंसों को एक साथ से पानी की रबर की नली से पानी डाल कर और दूसरे हातों से भैंसों को साबुन से रगड़ का नहलाने लगे. बड़ा अजीब नजारा था - भैंसो का तेल और पानी लगा कर चिकना नहलाना - और हरिया सिर्फ गीली कच्छी मैं था.. बहुत बार उसकी कच्छी भी भैंसे की शरीर से रगड़ जाती और वहां अब एक बड़ा तम्बू बन गया था. मैं जानती थी उनका बूढ़ा लण्ड खड़ा हो गया था.
 
बंटी वही पास मैं एक धुली हुई जर्सी गाय के पास बाल्टी ले कर बैठ गया. मैं भी उसके पास जाकर देखने लगी. उसने बाल्टी से पानी और तेल का मिश्रण गाय की स्तन पर लगा कर गीले कर दिए . वह अपने दोनों हातों से गाय की स्तन को मसलने लगा. ऐसा करते वक़्त उसने मेरी तरफ देखा और आँख मार दी - मैं शर्मा गयी. वह बोला - ऐसे करने से गाय गरम हो जाती और दूध निकालना आसान हो जाता. मुझे लग रहा था की मैं कितनी मुर्ख हूँ, बंटी से कैसे कैसे सवाल कर दिये थे. बंटी अब अपने दोनों पैरों पर बैठ गया था और एक - एक स्तन को नीचे खींचकर मसल रहा था. मैं पास जा कर देखने लगी - मैंने कहा - बंटी दूध तो नहीं आ रहा. उसने कहा रुको जरा - इतना आसान नहीं हैं - फिर उसने एक स्तन को जोर से नीचे खिंचा - उससे एक जोरदार धार निकली - जो मेरे मुँह पर और छाती पर आ गिरी. मैं एकदम हड़बड़ा गयी - और गीली होने से बचने पीछे हो गयी तो नीचे जोर से बैठ गयी. हम दोनों बहुत हंसने लगे. यह क्या बंटी .. ऐसे करते हैं? देखो मैं दूध से गीली हो गयी, अब कपड़ों पर निशान आ जायेंगे.. बंटी ने कहा - पास आओ मैं सारा दूध चाट कर साफ़ कर देता हूँ. मैंने उसके गाल को हल्का प्यार से थप्पड़ मार दिया - चुप - कमीने. हरिया यह सब देख रहा था - उसके कच्ची अब डबल साइज की हो गयी थी. हरिया ने कहा - बबुआ - संध्या को भी सीखा दे दूध निकालना. उनके इस डबल मतलब के बातों से मैं शर्मा गयी. मैंने कहा - नहीं , मैंने नहीं सीखना , गाय लात मारेगी, मुझे डर लगता हैं.

बंटी ने कहा - डर मत संध्या मैं हूँ.. यहाँ आ जा..मेरे पास . मैं थोड़ा आगे हो गयी - बंटी के पास बैठ गयी.. बंटी ने कहा - पकड़ो इसको और नीचे खींचो - जोर से. मैंने बंटी का देखकर , उस गाय के एक - एक स्तन को अपने दोनों हातों से पकड़ लिया और जोर से नीचे की तरफ खिंचा.. पर कुछ भी नहीं हुवा - एक बून्द भी दूध नहीं आया . मैंने और ३-४ बार कोशिश की. मैं बहुत निराश हो गयी. बंटी ने कहा - अरे कोशिश करो - मैं सिखाता हूँ.. बंटी ने मेरे दोनों हातों को पकड़ लिया - और गाय के स्तनों को ऊपर पकड़ने लगा.. फिर उसने मेरी मुट्ठी जोर से दबायी और नीचे खिंचा - कुछ एक दो बून्द आयी.. मैं खुश हो गयी. उसने कहा हाँ ऐसे ही जोर से दबाकर. बंटी मेरे पीछे एकदम पास बैठा था..मैं अपने दोनों टांगों पर बैठी थी, और मेरे पीछे बंटी . मेरी गांड बंटी के जांघों के बीच थी. मुझे उसका ठोस कड़ा लण्ड मेरी गांड पर रगड़ता महसूस हुआ. मैंने कहा - बस बंटी अब सीख गयी.. उसने कहा - ठीक से संध्या - अब तुम्हे और प्रैक्टिस करनी पड़ेगी..पीछे से वह और मेरे पास आकर अपनी जांघों के बीच मेरी गांड जकड ली. अब दूध की धार अच्छी मोटी आ रही थी..बंटी ने कहा - हा संध्या ऐसे ही - करते रहो - उसने अब उसका एक हाथ मेरे साथ से हटा लिया और मेरी गांड के ऊपर नीचे से रख दिया. अब उसका एक साथ मेरे एक साथ के ऊपर था - जो गाय की स्तन को रगड़ कर दूध निकाल रहा था और दूसरे हातों से वह मेरी गांड सहला था. अब उसका हाथ और आगे की तरफ आ गया और मेरी चूत पर था . तभी मने देखा की हरिया अब नयी भैंस को नहला रहा था - कच्छे मैं से उसका काला मोटा लण्ड बाहर आ गया था और भैंस की पीठ पर रगड़ रहा था.

मैं एकदम होश मैं आयी..मैंने कहा - अब बस बंटी , मैं जाती हूँ.. और वहां से उठकर जल्दी जल्दी घर के तरफ जाने लगी. मुझे बंटी ने कहा - प्लीज रुको न संध्या - अब तुझे बहुत कुछ सिखाना हैं.. मेरा भी दूध निकाल देती. और वह और हरिया जोर जोर से हंसने लगे. मैं जल्दी जल्दी वहां से बूआ की घर की तरफ जाने लगी . तभी पैर में जोर की मोच की वजह से मैं किसी से टकरा गयी.. आह .. ओह माँ .मर गयी . कह कर मैं गिरने वाली थी की उस आदमी ने मुझे जोर से जकड लिया और अपनी बाँहों मैं कस लिया. उसने कहा - ऐसे कैसे मरने देंगे तुम्हे.. तुम्हारे दिवाना तुम्हारे पास हूँ. मैंने देखा - स्वप्निल था. नाशीली आँखों से मुस्कराता मुझे देख रहा था और उसके दोनों साथ मेरे स्तन पर रगड़ रहे थे. मैं कुछ देर उसके आँखों मैं खो गयी..फिर खुदको संभल कर बोली - थैंक यू , मुझे छोड़ो अब - जाने दो. उसने कहा अरे ऐसे कैसे जाओगी - तेरी पैर मैं मोच आ गयी..तुझे गोदी मैं उठाकर ले जाता हूँ - और उसने मुझे झट से अपनी गोदी में उठा लिया. मैंने गुस्से मैं कहा - छोड़ो मुझे - कोई देख लेगा - गांव मैं बदनामी हो जाएगी और उसके चंगुल से निकल कर लड़खड़ाकर घर के तरफ चली गयी. बाहर बुआ चारपाई पर बैठी थी. पूछा - अरे संध्या क्या हो गए - ऐसे क्यों चल रही. मैंने बताया - बुआ पैर मैं मोच आ गयी. बुआ ने कहा - ठीक हैं - मैं हरिया से बोलूंगी. वह अच्छी से मालिश कर देगा - पैर की नस ठीक हो जाएगी.

मैं वहां चारपाई पर बैठ गयी. मैं सोचने लगी - स्वप्निल और बंटी दोनों चचेरे भाई बड़े कमीने निकले . पर रह रह कर मेरा दिमाग रात की घटना पर जाता था. कोण होगा वह? स्वप्निल या बंटी ?

घर मैं बहुत भीड़ थी. हरिया काका मेरे पैर की मालिश करने की लिए एक कटोरे मैं सरसों का गरम तेल लेकर आये. मुजसे बोले - बिटिया छत पर चलो, यहाँ भीड़ में तुझे असुविधा होगी, ओर कुर्ते में तेल लग जायेगा , इसलिए कोई गाउन या मैक्सी पेहेन लो. तब तक में छत पर जाकर तैयारी करता हूँ. मैं सोंचने लगी की हरिया चाचा को क्या तैयारी करनी हैं ? मैंने घर में जाकर एक गाउन पहन लिया. में अभी भी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी. तभी हरिया काका निचे आये, ओर बोले - अरे बिटिया रुको, में मदत करता हूँ ओर उन्होंने मुझे कमर से पकड़ लिया ओर सीढ़ियों से ले जाने लगे. मुझे अपना पैर मोड़ने में दिक्कत हो रही थी, दर्द हो रहा था . उन्होंने मुझे अपने एक साथ से आगे से मेरी कमर को पकड़ कर सहारा दिया, ओर दूसरा साथ पीछे मेरी गांड को पकड़कर उठाने लगे, ताकि चलने में आसानी हो. लूज़ गाउन में उनका आगे का साथ मेरे मम्मों को मसल रहा था ओर उसका दूसरा साथ मेरी गांड पर सब जगह फेर रहा था, में शर्मा रही थी, पर कोई इलाज नहीं था. छत पर मैंने देखा की दरवाजे पर पानी की टंकी थी ओर साइड में बड़ी दीवाल, जहा हरिया ने एक खटिया पर मोटी रजाई डाल कर रखी थी. बाहर से कोई वहा देख नहीं सकता था. हरिया ने मुझे बोला - आह ! बहुत दर्द हो रहा, रुको, उन्होंने मुझे गोदी में उठा लिया ओर बांकी की सीढ़ियां चढ़कर धीरे से खटिया पर बिठा दिया. मुझे यह सब बड़ा अजीब लग रहा था ओर गुस्सा भी आ रहा था. पर अब सत्तर साल के बुड्ढे को क्या कहना ? ऐसे भी इसका एक पैर स्वर्ग में हैं, यह बुड्ढा क्या करेगा? इस रंगीन बुड्ढे को बस ऐसे ही दबाने ओर मसलने में ख़ुशी मिलती होगी.

हरिया काका मुझे खटिया पर बिठा कर मेरे पैरों के पास नीचे जमीन पर बैठ गया. उसने उँगलियों पर कटोरी में से तेल लगाया ओर धीरे धीरे मेरे पैर पर लगाने लगा. उन्होंने मेरे पैर की कोई नस जोर से दबाई तो मैं - आह....करके चीख उठी. हरिया बोला - उह नस सच मैं लचक गयी हैं.. लगता हैं ऊपर तक खिंच गयी हैं. मैं अभी देखता हूँ कोनसी नस खिंच गयी है. मैं तुम्हारा पैर दबाऊंगा तुम बताना कहा दर्द होता हैं. उन्होंने मेरा पैर नीचे से दबाना चालू गया.. मैं उन्हें बताती - हाँ चाचा यहां .. अब वह मेरे घुटने तक साथ ले कर आये, जिस से मेरी मैक्सी ऊपर हो गयी थी. फिर उन्होंने मेरी जांघों तक गाउन उठा ली ओर जांघों को दबाने लगे.. एक जगह सच मैं दर्द हो रहा था... उन्होंने कहा - हा यही नस हैं, पकड़ लिया..फिर से उन्होंने मेरे जांघ ओर पैर के बीच दबाया - वहा जोर से दर्द हुआ -- आह मर गयी.. अब मेरा गाउन..मेरी कमर के ऊपर पर था ओर मेरी नंगी टांगें ओर पैंटी सब चाचा को दिख रही थी. चाचा मेरी जांघों पर तेल लगाकर मालिश कर रहे थे ओर बिलकुल मेरी पैंटी के पास रुकते. मेरी पैंटी गीली होने लगी थी. मैंने झट से हरिया का हाथ हटाया - ऐसे नहीं चाचा..गाउन नीचे रहने दो, नहीं तो मैं चली जाउंगी. चाचा ने कहा - अरे पगली गुस्सा क्यों होती हो ? पर दर्द कम हो रहा ना ? मैंने कहा - हां , तभी चाचा ने कहा - बिटिया थोड़ी खड़ी रहो २ मिनट .. मैं जैसे खड़ी हो गयी - चाचा ने कहा - तेरी पैंटी पर तेल के दाग लग जाएगा, दाग से ख़राब हो जाएगी, इसे निकाल ले.. और उन्होंने. एकदम से मेरी पैंटी दोनों तरफ से पकड़कर एक झटके मैं नीचे कर दी.. ओर मुझे फिर से खटिया पर बिठाकर मेरी पैंटी मेरे पैरों से निकाल दी. मैं एकदम से सदमे मैं थी.. सब इतनी जल्दी कैसे हो गया. ? मैंने तिलमिलाकर हरिया को गाल पर थप्पड़ मार दिया - कमिने, मैं तेरी पोती की उम्र की हूँ, शर्म नहीं आती. तेरी औकात क्या हैं? हरिया ने कहा - अरे बेटी तू गलत समज रही हैं..सरसो के तेल के दाग जाते नहीं, मैं तो अच्छा सोच रहा था.. चाचा मेरे तलवों को पकड़कर नीचे से ऊपर जाँघों तक नस पकड़ते हुए तेल से मालिश करने लगे. मुझे अच्छा लग रहा था, दर्द कम हो रहा था. मेरा गाउन इससे मेरी कमर के ऊपर तक चला जाता ओर , चाचा को मेरी नंगी खूबसूरती का दर्शन हो रहा था. तभी मैंने मेरे तलवों पर गरम, सख्त चीज महसूस की. मैंने निचे देखा.. चाचा की लुंगी आगे से खुली ओर वह मेरे पैर उनके लुंगी के अंदर डाल कर अपने लण्ड को मेरे तलवों से मसल रहे थे . उनका एक साथ मेरी गाउन को मेरी कमर की ऊपर पकड़ रखा था. ओर दूसरा साथ मेरी जांघों की तेल से मालिश कर रहा था ओर धीरे धीरे मेरी चूत की तरफ बढ़ रहा था. हरिया बोला - बिटिया क्या तुम बंटी से गाय का दूध निकालना सीख गयी ? मैंने कहा - नहीं चाचा मुज़से नहीं होता. हरिया बोले - अरे इसमें मायूस होने की क्या बात हैं? प्यार से करोगी तो सब होगा. उन्होंने फिर से मेरी जांघ की नस पकड़ ली.. मुझे दर्द हुआ - आह.. ! मैंने भी जोर से मेरे पैर का तलवा उनके लण्ड के टट्टे पर दबा दिया. हरिया चाचा एकदम उठ गए..लुंगी खोल दी - आह ! बिटिया क्या करती हो ! मेरे टट्टे फोड़ देगी क्या.. ? ओर मेरे सामने उनका लण्ड ओर टट्टे अपने दोनों हातों से सहलाने लगे. ! मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी. हरिया चाचा का काला लण्ड - जहरीले नाग की तरह बड़ी बड़ी फुफकार मार रहा था . ओर उनके टट्टे भी उनके जांघों के नीचे तक लटक रहे थे. इतने नीचे लटकते टट्टे ओर लण्ड मैंने कभी नहीं देखा था. उनकी दर्द से मुझे बुरा भी लगा .. मैंने कहा सॉरी हरिया, मुझे एकदम बहुत ज्यादा दर्द हुआ.. तुम लुंगी पहनो जल्दी से. हरिया चाचा बोले..बिटिया लगता हैं..तुम्हारे कमर तक मोच चली गयी.. ऐसे करो तुम खटिया पर पीठ के बल सो जाओ. पूरा दर्द ठीक कर दूंगा. उन्होंने फिर से उनकी लुंगी पेहेन ली..आगे की तरफ थोड़ी खुली थी. मैं जैसे पीठ के बल लेट गयी.. चाचा ने मेरे दोनों पैर ऊपर उठा दिए ओर मेरी पेट पर से छाती पर घुटने टक्कर दबाने लगे. इससे मेरे गांड एकदम ऊपर, आ गयी, मेरी चूत एकदम खुलकर बाहर आ गयी . वह मेरे पैर उठता , फिर से मोड़कर मेरे सिने से चिपका देता .. ऐसे करते वक्त हरिया को थोड़ा मेरे ऊपर झुकना पड़ता .. मैंने उनका लण्ड खुली लुंगी से अपनी चूत पर रगड़ता महसूस किया. मैंने कहा - यह क्या कर रहे हो हरिया..जाओ.. उठो. हरिया ने कहा कुछ नहीं बिटिया..इससे से तेरा दर्द सारा ख़तम हो जायेगा .. ओर उसने उसके मोटे लण्ड का सूपड़ा मेरे चूत पर रख दिया .
 
सटाक..!! मैंने उसे एक जोरदार थप्पड़ लगा दिया ..जा हरामजादे ! ..कमीने.. ओर उससे धकेलने लगी.. पर इसका उल्टा असर हुआ.. जिस ताकद से मैं ऊपर उठकर उसको थप्पड़ मारी, उसका लण्ड सिररररर .. करता हुआ मेरी गीली चूत के अंदर पूरा घुस गया. आह..मैं चीखने लगी..पर उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह लेकर मुझे चूमने लगा. मेरे होंठ चूसने लगा.

मैं उसको धक्का मरने लगी,

तभी उसने मेरे बाल जोर से पकड़ केर खींचे.. बोला - चुप मादरचोद.. आज तक मुझे किसी ने थप्पड़ नहीं मारा .. तेरी हिम्मत कैसे हुई.. आज तेरी चूत की चटनी बना कर खाऊंगा. गांव का देहाती मर्द , औरत पर जोर जबरदस्ती करके कैसे काबू मैं रखना उसे पता था.

मैं डर गयी . दर्द से मेरी आँखों से आंसू आ रहे थे. हरिया..मुझे जोर जोर से धक्के मार कर चोद रहा था. वह करहा रहा था - आह .. इतनी खूबसूरत, चिकनी चूत पहली बार मिली. क्या मस्त चूत हैं..एकदम कुंवारी भैंसे जैसी. '

मैं उसको दूर लेटना चाहती थी पर, मेरे दोनों हाथ उसने मेरे सर पर ले जाकर एक साथ से पकड़ रखे थे.. ओर दूसरे साथ से वह मेरे मम्मे दबा रहा था. मैंने कहा - जंगली कही का ! छोड़ मुझे.. मेरे दिमाग काम कर रहा था - मन कर रहा था उसका खून पी जाऊ... पर . आह..उह....उफ़...करके मेरी चूत ने उसके लण्ड के स्वागत मैं अपना पानी छोड़ दिया !! यह क्या ? हे भगवन.. !

हरिया बोला - देखो बिटिया..मजा आ रहा न..बस कुछ देर ओर..बहुत मजा आएगा..सारा दर्द दूर हो जायेगा.

मुझे गुस्सा भी आ रहा था ओर शर्म भी.. मेरे कमीना शरीर ओर भूखी चूत मेरे सात नहीं दे रही थी. जैसी उसका रिमोट हरिया के पास था... उसका रिमोट - हरिया का काला मोटा १० इंच का नाग था. हरिया ने फिर से मेरे घुटने ऊपर उठाये ओर मेरे कंधे के बाजू ऊपर रख दिए.. इससे मेरी गांड ओर भी ऊपर हो गयी, ओर उसका लण्ड सीधा पूरा पूरा मेरी चूत की अंदर बाहर जाने लगा .. उसके लटके हुए टट्टे ..मेरी गांड पर थप - थप की आवाज से टकरा जाते. उसका मोटा लण्ड सीधा मेरे दाणे से घिसकर चूत मैं अंदर - बाहर धक्के लगाता. मेरा दाणा मसल कर रख दिया..मैं फिर से आह.....उफ्फ्फ..कर के दूसरे बार झड़ गयी

ओर हरिया ने भी.. ले रंडी...ले हरिया को थप्पड़ मारने का अंजाम - ओर आह..अहह..करके कई झटके मारके, मेरी चूत मैं अपना दूध डाल दिया.

मुझे होश आया , वैसे मैं झट से हरिया को अपने ऊपर से धकेल दी ..ओर गाउन नीचे कर के..नीचे घर मैं चली गयी. बाथरूम जाकर अच्छे से साथ-पाँव धो कर चूत भी धो डाली. ओर ... मेरी पैंटी ? वो तो छत पर ही थी ? पर मुझे अब वापस छत पर नहीं जाना था. मैं अपने कमरे मैं चली गयी .

तभी मैंने महसूस किआ..मेरी मोच ओर दर्द..सब चला गया था. मैं थक कर सो गयी.

तभी दोपहर को बुआ मुझे उठाने आयी..संध्या कब तक सोयेगी..खाना भी नहीं खाया..चल उठकर खाना खा ले.. आज संगीत का कार्यक्रम हैं शाम को ..जल्दी तैयार भी होना हैं , तुझे तो बहुत नाचना हैं आज.

मैंने कहा - हा बुआ जी, बहुत नाचूंगी, मेरी प्यारी बहन की शादी जो हैं. . मैंने खाना खाया ओर शाम की तैयारी मैं लग गयी. दोपहर का चाय ले रही थी, बंटी ओर स्वप्निल भी थे. मुझे बड़ी अजीब तरह से निहार रहे थे ओर कमीने नजरों से चोद रहे थे. मुझे बड़ा अजीब लगा. क्या हो गया अब इनको? शाम को मैं दुल्हन के सात तैयार हो कर मंडप मैं गयी. मैंने एक अच्छा नीले - लाल रंग का शरारा पहना था. माँ की जिद्द थी अच्छीसे तैयार हो जाऊ ओर खूबसूरत दिखू ताकि रिश्तेदार देखे ओर आगे चलकर कोई अच्छा सा रिश्ता आये. में गहरे नीले रंग के शरारा में बहुत सुन्दर लग रही थी, ओर बैकलेस टॉप के वजह से मेरी गोरी पीठ सबको आकर्षित कर रही थी.

स्वप्निल ओर बंटी मुझे देखकर आंखें सेख रहे थे. स्वप्निल के पास एक सोनी का हैंडीकैम था जिससे वह सब की छोटी छोटी वीडियो ले रहा था. संगीत मैं बहुत जोर-शोर से नाच-गाना हो रहा था. मैं, बंटी ओर स्वप्निल दोनों एक दूसरे के सात मिलकर बहुत नाच रहे थे . दोनों मुज़से शरारत भी करते. यही तो होता हैं शादियों मैं. हर जवान लड़का - लड़की की फ़िराक मैं रहता हैं. दूल्हा - दुल्हन के सात वह भी अपने लण्ड की प्यास बुझाने का इंतजाम शादियों मैं आई लड़कियों को पटाकर करना चाहता हैं. बंटी की शैतानी बढ़ रही थी, नाचते-नाचते धीरे से वह अपने हातों से मेरे मम्मे दबा देता, या गांड मसल देता. उसकी हिम्मत बढ़ गयी थी.

मेंने उसको डांट दिया - या क्या कर रहे हो बंटी, शर्म करो . मैं तुम्हारी बहन हूँ.

बंटी ने मुझे फिर से जोर से कमर पर पकड़ लिए ओर हलके से गालों को चुम लिया. बोला - मामा की लड़की हैं तू, पहला अधिकार मेरा था.

मैंने कहा - चुप शैतान, कोनसा अधिकार , किसका अधिकार, ओर था मतलब?

उसने कहा इधर आ कुछ दिखता हूँ.. ओर मुझे एक कार्नर मैं ले कर गया, जहाँ कोई नहीं था . उसने अपनी जीन्स की जेब से कुछ निकाला ओर मुझे दिखाया ..

मेरे होश उड़ गए.. मुझे पसीना छुट गया.. मैं गिरने वाली थी पर उसने मुझे पकड़कर संभाल लिया...

बंटी ने कहा - अरे संध्या .. देख तू डर मत . क्या मैं तुझे बुरा लगता हूँ, हम बचपन से सात मैं खेले हैं. क्या तुझे लगता हैं मैं तेरे सात कुछ बुरा करूँगा. बंटी के साथ मैं मेरी पैंटी थी जो हरिया ने सुबह जबरदस्ती निकाली थी. मैं वहा पर खुर्ची पर बैठ गयी. मैंने झूठ का तीर लगाया - कहा यह तो ऊपर सूखने डाली थी. तुझे कहा मिली.

उसने कहा - चल झूठी , अभी भी झूठ बोलेगी. मैंने तुझे सुबह छत पर मजे लेकर हरिया से चुदते हुए देखा. इसका वीडियो भी हैं स्वप्निल के पास . देख उसको वहा खड़ा हैं.

मैंने देखा ..स्वपनील दूसरे कोने में खड़ा मुस्करा रहा था. मुझे - साथ हिला कर - हाई किया और अपना हैंडीकैम दिखा कर मुस्कराने लगा.

मेरे आँखों से अब आंसु बहने लगे.

बंटी ने मेरी पैंटी फिर से अपने जीन्स की जेब मैं डाल दी और बोला - संध्या प्लीज रो मत यार , मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा. पर क्या यह गलत नहीं की तुम हरिया जैसे बुड्ढे ७० साल नौकर से ख़ुशी और मजे से चुदवा रही थी. क्या मैं इतना बुरा हूँ

मैंने कहा - मैं मजे नहीं कर रही थी, उसने मेरे सात जबरदस्ती की. तुम दोनों क्या चाहते हो?

बंटी ने कहा - बस आज की रत - कल शादी हो जायेगी तब तुम वापस अपने घर चली जाओगी.

मैंने कहा - बंटी प्लीज ऐसे मत करो. यह गलत हैं .

बंटी ने कहा - संध्या प्लीज आज रात आ जाना, मना मत करो. मैं बताऊंगा तुझे कहा आना हैं. और हाँ एक और बात. तुम्हारी अभी जो पैंटी पहनी हुई हैं , वो मुझे निकाल कर दो, अभी.

मैंने कहा - नहीं, मैं नहीं दे सकती. तेरे पास मेरी एक पैंटी हैं, वह भी वापस दे दे मुझे.

बंटी ने कहा - प्लीज संध्या..यह पैंटी मेरे पास रहने दो, मुझे तुम्हारी याद आएगी तो इसको सूंघ कर तुम्हे याद करूँगा, इस पैंटी को तेरी चूत समज़कर रोज रात को मेरा लंड इसपर रगडूंगा.

मैंने पूछा - फिर दूसरी पैंटी क्यों चाहिए. उसने कहा - स्वपनील भैय्या को चाहिए , देख उसके पास तेरा वीडियो हैं. चुप चाप दे दे जल्दी से.

मैंने खड़े होकर, अपने घागरे के अंदर से पैंटी नीचे खिसकाकर निकाल दी और बंटी के साथ में दे दी .

बंटी बहुत खुश हो गया. अब मैं ड्रेस के अंदर पूरी नंगी थी. बंटी ने मेरी दूसरी पैंटी भी जेब मैं डाल दी और बोला, चल अब डांस करते हैं, फिर बाद मैं आज रात को मिलना भी हैं.

मैंने देखा बंटी स्वपनील के पास गया और दोनों मुस्करा कर बातें कर रहे थे. फिर धीरे से सब से छुपाकर बंटी ने उसको मेरी पैंटी दे दी. स्वपनील ने मेरी पैंटी को रुमाल की तरह फोल्ड कर के सूंघ लिया खुद की जेब मैं रख दी. मेरी तरफ देख कर आँख मार दी.
 
हम सब ने रात का खाना खाया और फिर से डांस करने लगे.. स्वपनील और बंटी दोनों मुझसे बहुत मस्ती कर रहे थे, उनको पता था मैं घागरे के अंदर नंगी हूँ. बीच मैं घागरे के ऊपर से मेरी चूत सहला देते. मेरी चूत भी गीली हो गयी थी. एक दो बार बंटी ने मुझे कोल्ड ड्रिंक्स लाकर दी और आंख मारी, उसमे कुछ व्हिस्की मिला दी थी. बंटी और स्वप्निल दोनों अब बहुत पी चुके थे. औंरतैं भी कोल्ड ड्रिंक के नाम से मिक्स्ड शराब पी रही थी. अब बहुत सारे लोग सोने चले गये थे . में भी माँ और बाकी लोगों के सात घर में जाने लगी, थोड़ा नशा था पर किसी को समज नहीं आ रहा था. तभी बंटी ने - दरवाजे पर मुझे इशारा कर के रोक लिया. मैंने बाकी लड़कियों से कहा - आप जाईये मैं बाथरूम हो कर आती हूँ. बंटी मुझे साथ पकड़ कर तबेले की तरफ ले गया और अंदर जाकर धीरे से तबेले का दरवाजा बंद कर दिया. उसने एक स्विच स्टार्ट कर दिया जिससे तबेला मैं जीरो बल्ब से हलकी रोशनी हो गयी. वहा बहुत सारा सूखा चारा का ढेर लगा था. गाय / भैंसे आराम कर रही थी, तबेले मैं गोबर और गोमूत्र की अजीब गंध आ रही थी. मैंने देखा सूखे चारे के पीछे चारे का ढेर लगा था और उसपर एक गद्दी बिछाकर , स्वपनील एकदम नंगा हो कर अपना मोटा बड़ा लंड हिला रहा था. स्वपनील बोला - आह ! आ गयी मेरे सपनो की रानी, कब से तेरे लिए मेरा लंड तन कर खड़ा हैं. मैं स्वपनील को देखती रहा गयी. सुन्दर काया, शरीर पर एक भी बाल नहीं, किसी ग्रीक गॉड की तरह लग रहा था, उसने मुझे अपने नंगे शरीर पर खींच लिया. बंटी ने झट से खुदके कपडे निकले और वह भी पूरा नंगा हो गया . बंटी स्वपनील के मुकाबले मैं सावला था पर उसके शरीर पर बहुत सारे काले बाल थे. उसका लंड भी काला था. स्वपनील मुझे ओंठों को चूसकर चूमने लगा. उसने उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर ड़ाल दी और मेरे ओंठो को चूस चूस कर अपने हातों से मेरे कपडे निकालने लगा. अब मैं पूरी नंगी हो गयी थी. बंटी ने देर न लगायी, झट से मेरे पाँव खोलकर मेरी चूत को चूमने लगा और अपनी जीभ से चाटने लगा. बंटी बोला - स्वपनील भैय्या, संध्या की चूत देखो..एकदम साफ़, चिकनी हैं, और बहुत लाल हैं. क्या महक हैं और लाजवाब स्वाद हैं. इसके चूत का पानी शहद जैसे मीठा लग रहा. स्वपनील अब मेरे बूब्स मसल रहा था और मेरे होंठ चूस रहा था. स्वपनील बोला - हाँ हरिया ने चुदाई कर के इसकी चूत सुजा दी होगी. स्वपनील ने मुझे अपने शरीर पर उठा लिया और चूमने लगा. अब उसके होंठ मेरे ओंठो पर थे और मेरे मम्मे उसके छाती से रगड़ रहे थे और उसका मोटा लंड मेरी जांघों से खेल रहा था. बंटी मेरे ऊपर आकर सो गया और पीछे से मेरी गर्दन चाटने लगा. बंटी का लण्ड मेरी गांड की दरार मैं फिसल रहा था. मै दोनों के बीच सैंडविच हो गयी थी. मेरे आगे- पीछे दो मर्द मुझे चुम रहे थे, प्यार कर रहे थे. दोनों एकदम एक - दूसरे से अलग. जहाँ स्वपनील एकदम सुन्दर, गोरा , चिकना शरीर, बिना बालों वाला, और उसका गोरा - गुलाबी कटा हुआ ७ इंच का मोटा लंड था , वही पर बंटी गांव का देहाती जबरदस्त काले बालों से भरा बदन , सांवला , और उसका लण्ड एकदम काला लंड - ८ इंच का और खूबसूरत चमड़ी के सात, केले जैसे आकार का था. जैसे की बंटी बालों वाला शेर और स्वपनील चिकना बाघ - दोनों मेरा शिकार कर रहे थे, दोनों मैं जैसे होड़ लगी थी. दोनों अब मेरा एक एक आम पकड़ कर जोर जोर से चूस रहे थे. बंटी ने कहा - इतने खूबसूरत मम्मे कभी नहीं देखे. इसकी निप्पल्स देखो - एकदम कड़क हो गए हैं, अंगूर जैसे. तभी स्वपनील का साथ मेरे चूत को सहलाते - मेरे दाणे को ढूंढ लिया और उसको रगड़ने लगा. स्वपनील ने कहा - आह बंटी इस कमीनी का दाणा भी मस्त हैं..बिलकुल अंगूर जैसे रसीला . यह सुनते हे बंटी फिर से मेरे गांड की तरफ गया और मेरी चूत चूसने और चाटने लगा. वह मेरे दाणे को ओंठो से और दातो से चबाता, फिर जीभ से चाटता और मैं.. सी ..सी करती रह गयी. स्वपनील मेरे निप्पल्स और बंटी मेरा दाणा चूस रहे थे और इसी बीच मैं थर- थरकर कांपने लगी और मेरा पानी छूट गया -- आह ...! कमीनो.. ! आह.!. बंटी मेरा पूरा पानी चाटने लगा. बंटी कहा - आह स्वपनील भैय्या इसने तो पानी का झरना बहा दिया. स्वपनील ने कहा - अब तो शुरुवात हैं, देख यह रात भर अब कैसे रंडी बन कर हमें मजा देगी.

फिर स्वपनील थोड़ा ऊपर खिसक गया और अपना लंड मेरी मुँह के पास ला कर मेरे मुँह मैं घुसेड़ दिया. बंटी कैसे पीछे रहा सकता - उसने मेरे पाँव ऊपर किये और उसके लंड का सुपडा मेरी चूत पर चिपका दिया और एक हल्का धक्का मारा - उसका लंड मेरी चूत को चिर कर आधा अंदर चला गया. मैं स्वपनील का गोरा गुलाबी लंड चूसने लगी. गुलाबी लंड चूसने का अपना अलग मजा होता हैं. ऐस लगता हैं जैसे कोई मीठा फल चूस रही हूँ. मैंने स्वपनील के टट्टे भी चाटें. फिर मैंने स्वपनील का लंड धीरे से पूरा मुँह मैं गले तक अंदर ले लिया. या मेरा स्वपनील पर पलटवार था. स्वपनील बोला - माँ कसम , क्या मस्त लोडा चूस रही हैं. सच मैं बंटी , इतनी भाभीयों की चुदाई की, लेकिन संध्या जैसे किसी ने मेरा लोडा पूरा अंदर तक मुँह मैं लेकर नहीं चूसा. यह तो बहुत बड़ी खिलाडी लग रही. - वही दूसरी और मैं बंटी की कमर पर अपने दोनों पैर कस के पकड़ लिये. इससे अब बंटी का पूरा लंड मेरे चूत के अंदर आगे पीछे आसानी से फिसल रहा था. मैंने अपने एक साथ मैं स्वपनील के टट्टे पकड़ कर उन्हें सहलाकर दबाने लगी और उसका पूरा लंड मुँह मैं अंदर - बाहर करने लगी, जीभ फेर कर चाटने लगी और जोर जोर से चूसने लगी. . दूसरे साथ से मैंने बंटी के गांड और टट्टे सहलाने लगी और अपनी चूत से उसके लंड को जोर से जकड लिया. स्वपनील और बंटी दोनों पागल हो गए. स्वपनील का पूरा लंड मेरे मुँह मैं था और उसकी गोटियां मेरे साथ मैं .. वह मेरे मुँह को जोर जोर से चोदने लगा वह ज्यादा देर टिक नहीं सका और आह..! आह..! कर के बहुत सारे झटके देकर अपना पानी मेरे मुँह मैं डाल दिया. वही बंटी भी यह सब देख कर गरम हो गया.. बोला - आह कितनी टाइट चूत हैं, एकदम गीली और वह भी उसका लंड मेरी चूत मैं बड़े बड़े धक्के देकर अंदर बाहर करने लगा. मैंने उसकी गांड की छेद में धीरे से एक ऊँगली ड़ाल दी .. वह आह..! मेरी लण्ड की रानी..! बहुत सारे झटके देकर मेरी चूत मैं झड़ गया. दोनों मेरे ऊपर लेट गये, स्वपनील का लंड अभी भी मेरे मुँह मैं था, और बंटी का लंड मेरी चूत मैं. धीरे धीरे फिसल कर निकल गये. दो मर्दों के सात यह मेरा फर्स्ट टाइम था . मुझे राज अंकल की बात याद आयी - संध्या तुम चाहे तो कुछ भी कर सकती हो, बस सेक्स एन्जॉय करना, उसको गलत नहीं समजना. मुझे भी स्वपनील और बंटी के सात मजा आया था. क्या यह गलत था? वह रिश्ते मैं मेरे भाई थे ? पर क्या मैं उनको सिर्फ एक मर्द की दॄष्टि से नहीं देख सकती हूँ. कुछ पल हसीन और रंगीन बिताने से क्या कोई महा प्रलय आ जायेगा. क्या हरिया के सात मुझे मजा नहीं आया था? क्या उसकी गलती यह हैं की वह गरीब था, नौकर आदमी हैं? या सत्तर साल का बुड्ढा? क्या उसको भी ख़ुश रहने का अधिकार नहीं हैं ? कुछ देर हम मदमस्त हो कर एक दूसरे से चपके रहे. चुम्मा चाटी करते रहे. स्वपनील और बंटी फिर से जल्दी से गरम हो गये. दोनोंके लंड फिर से आस्मान छूने लगे. शायद यही फरक था हरिया और स्वपनील-बंटी मैं. हरिया ७० साल का बुजुर्ग था. स्वपनील और बंटी दोनों जवानी के शिखर पर थे. झट से फिर से लंड खड़े हो गये. यही खूबी होती हैं - बुजुर्ग आदमी, परिपक्व आदमी और जवान मर्द , सबकी अपनी अपनी खूबी होती हैं. सब अपनी जगह सही हैं, सबका अपना अलग आनंद हैं. मुझे यह पता चल गया था की सेक्स मैं मर्द की उम्र का कोई असर नहीं होता हैं. आम कैसे भी हो - कच्चा, पका, उसको खाने का तरीका आना चाहिए , फिर कच्चे आम का स्वाद नामक से लो, या पके आम का स्वाद शक्कर या दूध के सात. इसलिए शायद आम फलों का राजा हैं. स्वपनील ने कहा - इस बार मैं चोदूगा संध्या को, बंटी तू भी देख संध्या का कमाल का लण्ड चूसती हैं.
 
मेरे मन और दिमाग की सीमा भी अब ढल चुकी थी. मुझे कुछ गलत नहीं लग रहा था. मुझे अब सब एन्जॉय करना था. बंटी को मेरी चूत बहुत पसंद आ गयी थी. वह फिर से उसे चाटने लगा. मेरी चूत मैं से उसका पानी बाहर बह रहा था . मैंने भी पलटकर उसका काला लंड मेरे मुँह मैं ले लिया . अब हम ६९ की पोजीशन मैं एक दूसरे को चूस रहे थे. इसी बीच स्वपनील ने मेरे पैर उठाकर उसका मोटा लंड मेरी चूत मैं घुसा दिया. मेरी चूत बंटी के पानी से अंदर तक गीली थी. स्वपनील का लंड अंदर तक आसानी से चला गया. यद्यपि स्वपनील का ७ इंच का गुलाबी लंड बंटी के ८ इंच के लंड से थोड़ा छोटा था, पर मोटाई मैं स्वपनील के लंड से ज्यादा था. इसलिए स्वपनील का लण्ड मेरी चूत के अंदर से बहुत ज्यादा रगड़ रहा था.

मैं बंटी के काले लंड को प्यार से चूस रही थी. बंटी के काले लंड का स्वाद स्वपनील के गुलाबी लंड से अलग था. दोनों के लंड के स्वाद की अपनी खुबिया थी, दोनों ले लंड की महक मुझे स्वर्ग का आनंद दे रही थी. बीच में मैं स्वपनील के लंड पर की काली चमड़ी (फोरस्किन) भी चबा देती, चूस देती. फोरस्किन या लंड की चमड़ी, कड़क लोहे जैसे लंड पर इतनी मुलायम और कोमल होती हैं. कड़क लंड को चूसकर, मुलायम चमड़ी को चबाने और चूसने का अपना मजा होता हैं. शायद प्रकृति ने इसलिए ये सर्वानंद का कॉम्बिनेशन दिया हैं - कड़क लंड के सात मुलायम लंड की चमड़ी (फोरस्किन), फूली - कोमल चूत के साथ कड़क चूत का दाणा , मुलायम मम्मे के साथ कड़क निप्पल्स. यही कॉम्बिनेशन सर्वानंद की अनुभूति देती हैं.

मैंने भी प्यार से बंटी का पूरा लंड मुँह मैं लेकर गले तक निगल लिया. वही स्वपनील के लंड पर मेरे और बंटी के पानी से बहुत चिकनाहट महसूस हो रही थी. दोनों जल्दी से झड़ गये. इस दौरान मैं ४ बार झड़ गयी थी. और मेरे दोनों जवान शेर दो-दो बार झड़ गये थे. मैंने उन दोनों के लण्ड के पानी का स्वाद मुँह मैं लेकर चख लिया था. हम सब अब थक गये थे.

मैंने कहा - अब हमें चलना चाहिए, किसी को पता चला की अगर मैं घर पर नहीं हूँ तो फसाद हो जायेगा. बंटी और स्वपनील ने कहा - हाँ मन तो नहीं कर रहा तेरी चूत से जुदा होने का, पर यह भी सच हैं. मैंने कहा - अब तो मेरी पैंटी दे दो? दोनों हंसकर बोले - नहीं, यह तो तेरी तरफ से हमारा गिफ्ट हैं. मैं हंस दी - अरे मेरा वीडियो डिलीट कर देना प्लीज. स्वपनील ने कहा - कोन सा वीडियो ? कैसे वीडियो? तुझे क्या लगता की हम इतने कमीने हैं की तेरा वीडियो लेंगे. वह तो हमने सिर्फ तुझे हरिया के सात देख लिया था. वीडियो की हमने झूठी स्टोरी बना दी. मैंने गुस्से मैं कहा - बड़े कमीने हो तुम दोनों. मुझे कितनी टेंशन आ गयी थी. बंटी ने कहा - क्या करते, तुझे मानाने का यही तरीका था. कल रात को स्वपनील ने तुझे छूने की कोशिश की तो तूने मना कर दिया. पर हाँ..हम सच मैं तेरे सात चुदाई करना चाहते थे. तुझे गलत लगा तो सॉरी. पर प्लीज हमसे गुस्सा मत होना और नाराज भी नहीं. मैंने कहा - नहीं अब मैं नाराज नहीं हूँ. पर आगे से ऐसे झूठ मत बताना. स्वपनील शरारती अंदाज मैं बोला - मतलब अब आगे तू हमें बिना इंकार किये चोदने देगी. मैं हंस दी और कहा - मैं इंकार नहीं करुँगी. अब चलो मुझे घर तक छोड़ दो . मैं चुपके से घर मैं घुसी और दीवाल से लग कर सो गयी. मेरी चूत अभी भी स्वपनील और बंटी के पानी से गीली थी. मैं घोड़े बेचकर सो गयी.

दूसरे दिन शादी थी. बहुत भीड़ ओर शोरगुल था. सुबह में उठकर नहाने गयी.. मैंने देखा, मेरी एक पायल पाँव में नहीं थी. कहा गिर गयी होगी? में सोच रही थी. तभी मेरे ख़याल में आया की कही रात को तबेले में तो नहीं गिर गयी. घर में किसी को बोल भी नहीं सकती थी. नहीं तो राज खुल जाता. मैंने सोचा ढूंढना तो पड़ेगा, नहीं तो बाद में किसी को वहा पायल मिल गयी तो , पूरा भांडा फुट जायेगा. मेरे पास पायल का दूसरा जोड़ था. मैंने वह पेहेन लिया ओर सोचा जब सब शादी में मशगूल होंगे तब ढून्ढ लुंगी. घर में मैंने सब जगह देख लिया था. कही नहीं मिल रही थी. में तैयार हो कर शादी वाले मंडप पर चली गयी.

मैंने के डिज़ाइनर पिंक रंग की साड़ी पहनी थी. सब मुझे देख कर निहार रहे थे. स्वप्निल ओर बंटी दोनों माँ से मजाक कर रहे थे. मुझे देखकर स्वप्निल ने माँ से कहा - मामी आपकी बेटी तो बहुत सुन्दर हैं, में तो मामा की लड़की से ही शादी करूँगा ! ओर सब ठहाके लगा कर हंसने लगे. बंटी ने भी कह दिया - मै सगा भांजा हूँ .. पहला हक मेरा है.. ! स्वप्निल ने कहा - यह क्या तेरे सात गाँव में रहेगी? यह तो मेरे से ही शादी करेगी. बंटी ने भी कह दिया - हां यह मेरे सात गाँव में ही रहेगी. ओर आंख मारते हुए बोला - अब तो इसको दूध निकालना भी आता है. हंसी मजाक हो रहा था. शाम हो रही थी, शादी की रस्मे चल रही थी ओर सब DJ म्यूजिक पर थिरक रहे थे. में भी कुछ देर नाची ओर सोचा क्यों ना तबेले में जाकर पायल ढूंढ लू. सबकी नजर बचा कर मंडप से बाहर आयी. बाहर कोई नहीं था. में धीरे से तबेले का दरवाजा खोल कर अंदर चली गयी. में

वहा पर जिस जगह हम सब - में, बंटी ओर स्वप्निल - तीनो रात को सोये थे, उस जगह चारे के ढेर में पायल ढूंढने लगी. "क्या ढूंढ रही हो बिटिया " - हरिया की आवाज थी. मैंने हड़बड़ा कर डर कर पीछे देखा. हरिया वैसे ही नंगा - सिर्फ एक लाल रंग की लंगोटी में था. उसका काला - मांसल बदन तेल की वजह से चमक रह था. मैंने कहा - अरे कुछ नहीं हरिया. में जाती हूँ. में मुड़कर बाहर जाने लगी पर हरिया ने बीच आकर मेरा रास्ता रोक लिया. वह मरे बिलकुल पास खड़ा था. उसके बदन से मुझे भैसो की, गोबर की ओर गोमूत्र की बदबू आ रही थी. वह बोला - अरे बताओ बिटिया - डरो मत, क्या ढूंढ रही हो? मैं तेरी मदत कर दूंगा. मैंने उसे अपने से दूर धकेला - दूर हाटों - मुझे तेरी बदबू से उलटी हो जायेगी. पर वह अपनी जगह से बिलकुल नहीं हिला. उसने मेरे दोनों साथ पकड़ कर पीछे एक साथ में जकड लिए, ओर अपने होंठ मेरे ओंठों पर रखकर चूमने लगा. उसके मुँह से गन्दी तम्बाकू की बदबू आ रही थी. मैंने कहा..प्लीज मुझे छोड़ दो हरिया..शादी में सब मेरी राह देख रहे होंगे. हरिया ने कहा - झूटी .. तू यहाँ फिर से मुझसे चुदने आयी ना? ओर उसने मेरे बैकलेस चोली की गांठ खोल दी, जिस से मेरी चोली खुल कर सामने से नीचे गिर गयी ओर मेरे बूब्स एकदम हरिया के मुँह के नीचे थे.

मैंने झट कहा - कमीने मुझे जाने दे. में यहाँ अपनी पर्स ढूंढने आयी जो कल यहाँ गिर गयी थी. हरिया ने कहा - तेरी पर्स मेरे पास हैं. में हक्काबक्का राह गयी. अब यह क्या है? तुझे चाहिए तेरी पर्स? मैंने कहा - हा . हरिया ने एक साथ से मेरे दोनों साथ पकडे थे.. अपने दूसरे हातों से उसने अपना लंगोट खींच के फेक दिया. मैंने शर्मा कर दूसरी तरफ मुँह फेर लिया. उसने कहा - यह ले तेरी पर्स..ले ले अपने हातों से. मैंने कहा मुझे छोडो, वहा कोई पर्स नहीं, मुझे नहीं देखना तेरा काला भद्दा सांड का लण्ड. तुम्हे ऐसे नंगा होने में शर्म नहीं आयी. हरिया ने मुझे एक चपट लगा दी - सटाक.. कहा - कमीनी कल तो ख़ुशी से चुद रही थी मेरे लण्ड से. आज तुझे यह लण्ड भद्दा लग रह है . तूने कब देखा सांड का लण्ड. अभी समजा, की तू यहां सांड का लण्ड देखने आती है. अगली बार आएगी तुझे सांड के लण्ड से भी चुदवा दूंगा. देख तो, सच में तेरा पर्स यहाँ है..उसने मेरा जबड़ा पकड़कर मेरा चेहरा नीचे उसके लण्ड की तरफ कर दिया. मैंने उसके लण्ड को देखा, .मैं अवाक राह गयी.. यह क्या.. मेरी पायल उसके लण्ड ओर टट्टे पर बंधी थी. में पसीना पसीना हो गयी. हरिया ने कहा - बिटिया . यही ढूंढने आयी थी ना. ले ले अपने हातों से खोलकर. मेरे पास ओर कोई रास्ता नहीं था. मैं अपने दोनों हाथों से मेरी पायल खोलने लगी, पर पता नहीं हरिया ने बहुत अजीब ढंग से बाँधी थी, खोल नहीं पा रही थी. में उसको निकलने वही उसके पैरो के पास घुटने पर नीचे बैठ गयी. मेरे होतों के मुलायम स्पर्श से हरिया का लण्ड पूरा खड़ा होकर तन गया था. इससे मुझे पायल निकालने में दिक्कत हो रही था. हरिया का लण्ड फनफना रह था ओर मेरे गाल ओर होंठ से लग रह था. हरिया ने मेरा सर पकड़ा ओर अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया. उसका सिर्फ आधा लण्ड मेरे मुँह में गया था. मैं बुरी तरह से फंसी थी. मुझे पायल भी लेनी थी, जल्दी मंडप पर भी जाना था, ओर दिल में हरिया का लण्ड से मजे लेने का भी मन कर रह था. मैंने सोचा की अच्छी से अगर हरिया का पूरा लण्ड निगल कर इसको चुसू तो जल्दी से हरिया का लण्ड झड़ जायेगा ओर में फ्री हो जाउंगी. मैंने भी मुँह ऊपर कर के धीरे से - हरिया का काला - १० इंच का लण्ड पूरा गले तक निगल लिया ओर उसके काले सुपडे को चूसने लगी. उसके मूत्र छेद को जीभ डाल कर चाटने लगी ओर जोर से चूसने लगी. हरिया बोला - वाह बिटिया - ऐसे तो तू जल्दी तेरा पर्स ले लेगी. अब मेरी चोली साइड में गिर गयी थी..में सिर्फ साडी में टॉपलेस थी ओर हरिया ला लण्ड पकड़कर पूरा ऊपर से नीचे मुँह में अंदर बाहर कर के चूस रही थी.

मैंने हरिया के दोनों बड़े बड़े गेंद जैसे अण्डे अपने दोनों हातों में ले लिए ओर प्यार से सहलाने लगी ओर मसलने लगी. इससे हरिया का लण्ड ओर भी ज्यादा फनफनाने लगा. उसने मुझे नीचे घास पर धकेल कर सुला दिया. एक झटके में मेरी साडी ऊपर कर दी ओर मेरी पैंटी खींच कर निकाल दी. अब हरिया को मेरी चूत दिख रही थी. उसने बिना कुछ कहे .. अपने लण्ड का सूपड़ा मेरी चूत पर रख कर जोर से झटका दे दिया. मेरी चूत पहले से बहुत गीली थी. बड़े प्यार से खुलकर उसने हरिया के लण्ड का स्वागत अपने अंदर किया. हरिया अब जोर जोर ऊपर नीचे से धक्के देने लगा. वह अपने चरम सीमा पर था. उसने मेरे दोनों आम आपने हातों में ले लिये ओर जोर होर से चूसने लगा. मेरी चूत भी जवाब दे गयी..आह..आह.. कर के गंगा-जमुना बहाने लगी.. कुछ देर हरिया मेरी चूत के अंदर उसका लण्ड डाल कर रुक गया. .जब तक मेरी कम्पन शांत नहीं हुई तब तक. उसने फिर धीरे धीरे अपने लण्ड को धक्के मारना चालू कर दिया. अब मेरी चूत के पानी ने उसके मोटे काले लम्बे लण्ड का रास्ता ओर भी आसान कर दिया था. हरिया ने अब उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर घुसेड़ दी.. बोला -चूस रंडी ..मेरी जीभ को लण्ड की तरह चूस. उसकी जीभ सच में बहुत लम्बी ओर मोटी थी. मुँह में अंदर गले तक जाती थी. में भी हरिया के जीभ को लण्ड की तरह चूसने लगी. बहुत मजा आ रह था. ऐसे लग रह था की में एक लण्ड मुँह से चूस रही हूँ ओर दूसरा लण्ड अपनी चूत में ले रही हूँ. दो लण्ड का मजा में पिछले रात - बंटी ओर स्वप्निल के लण्ड से खेलकर ले चुकी थी. मुझे फिर से वाह सुनहरे पल याद आ गये ओर बंटी ओर स्वप्निल के जवान नंगे बदन मेरी आँखों के सामने नाचने लगे.

हरिया - बिटिया कितनी कसी हुई चूत हैं तेरी. ऐसे लगता हैं कंवारी चूत है. मैंने भी अपने चूत से हरिया के लण्ड को जोर को जकड लिया , जिससे वह आह..आह...करके मेरी चूत में झटके देने लगा. मेरे चूत में हरिया का गरम गरम पानी अंदर तक चला गया. ८-१० झटके , हर झटके के सात हरिया का लण्ड मेरी प्यासी चूत को अपना गरम पानी पिलाता. में भी जोर से एक बार फिर कसकर झड़ गयी. मैंने जोर से हरिया की गांड अपने हातों से पकड़कर अपनी चूत के तरफ दबा दी. मेरे नाख़ून हरिया के गांड को छील दिये. हरिया के लण्ड के सुपडे ने पूरा मेरे चूत के अंदर घुसकर मेरे बच्चेदाणी का द्वार खोला ओर अपना गरम पानी पीला दिया.
 
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