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मैंने अनीश की गांड अपने दोनों हाथों से ओर भी ज्यादा कस कर पकड़ ली ओर जोर जोर से उसके लण्ड को चूसने लगी .. फिर मैंने राज ने सिखाया हुआ तरीका अपनाया ओर धीरे धीरे अनीश का पूरा लण्ड मेरे मुँह मैं ले लिया .. अनीश का लण्ड भी अब मेरे गले तक फस गया . अनीश को यह अपेक्षित नहीं था .. वो हक्काबक्का रहा गया ओर .. उत्तेजित हो कर जोर से आहे भरने लगा ओर उसकी पिचकारी का पानी मेरे मुँह मे धार छोड़ने लगा .. अनीश का लण्ड झटके पर झटके देकर मेरे मुँह मैं पानी डाल रहा था .. अनीश ने काम से काम १५-२० झटके दिए होंगे . मैंने महसूस किया की अनीश का वीर्य बहुत गाढ़ा ओर चिप चिपा था ओर ज्यादा था - राज के वीर्य की तुलना मैं .राज का लण्ड ८ - १० झटके देकर पानी छोड़ता था जब की अनीश के लण्ड के करीब २० झटके हो गए थे. उस दिन मुझे जवान मर्द ओर एक परिपक़्व (matured मर्द की वीर्य (पानी) मैं फरक का अंदाजा आया . ऊपर से अनीश एक खिलाडी - स्पोर्टमैन भी था ओर वही ताकत उसके लण्ड मैं भी थी . दोनों मर्द अपनी जगह सही ओर औरत को ख़ुशी देते हैं , दोनोका स्वाद अलग ओर अच्छा होता हैं.
झड़ने के बाद अनीश ने मुझे उठा कर जोर से कस कर छाती से लिपट लिया .. मुझे पागलों की तरह किस करने लगा .. संध्या मैं बहुत लकी हूँ .. तुम बहुत सुन्दर ओर हसीन ओर सेक्सी हो .. आई लव यू ..
मैंने भी उसको आई लव यू बोल दिया .. रात काफी हो गयी थी .. ९ बजे हॉस्टल पहुंचना था - समय का रेस्ट्रिक्शन था , हम जल्दी कपडे ठीक कर के ..हॉस्टल की तरफ चलने लगे .. अनीश ने मेरा हाथ उसके हाथ में कस कर पकड़ा था ओर उसने मुझे गर्ल्स हॉस्टल तक पहुंचा दिया .. वह गेट के बाहर फिर से मुझे देर तक किस किया ओर मेरी चूत पर हाथ रख कर ..गुड नाईट कह ओर हरिश बोला - तुम रोज ७ बजे प्लेग्राउंड आ जाना .. मैं तुझे रोज प्यार करना चाहता हूँ .. मैंने भी प्रॉमिस कर दिया ओर अनीश के लण्ड को प्यार से दबा दिया .. अनीश का लण्ड फिर से खड़ा होकर मुझे सलामी से रहा था .. मैं हसकर हॉस्टल के अंदर रूम मैं चली आयी ..
मेरी ओर अनीश का लव अफेयर चालू हो गया था ओर पूरी कॉलेज को पता चल गया था . मैं रोज अनीश से मिलने प्लेग्राउंड जाती, फिर हम बगीचे मैं प्यार करते ओर वह रोज मुझे हॉस्टल तक चलके छोड जाता. मुझे अब अनीश की पसीने से गीली बॉडी ओर उसकी महक की एडिक्शन हो गयी थी . पर हमें सेक्स करने के लिए सही जगह नहीं मिल रही थी, ना उस समय आज के जैसे कपल फ्रेंडली होटल्स थे ओर बाहर सुनसान जगह बहुत रिस्की होता था, मवाली लड़के घूमते फिरते थे .. हम दोनों रोज बातें करते की कैसे अकेले मैं हमें कुछ मिल पल मिल जाये ओर हम दोनों का मिलन सही मायने से हो जाये. मैं भी अनीश से चुदने के लिए बेताब थी , ओर अनीश का नाग भी मेरी बिल मैं विष घोलने को बेताब था.
मेरे क्लास मैं अब सब लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गयी थी . सब मुझे अनीश के नाम से चिढ़ाते ओर मजाक करते थे .राजवीर पंजाब के भटिंडा से सरदार परिवार से था .. वह भी एक हॉकी प्लेयर था , बहुत मजाकिया ओर हसमुख स्वाभाव का था . हत्ता कट्टा सरदार , गोरा चिटा ओर बालों वाला बदन , ओर ऊपर पगड़ी ओर हलकी दाढ़ी , बहुत मरदाना लगता था . हमेशा मुझे अनीश के नाम से छेड़ता था . कोई भी बात बेझिझक बोल देता बिना कुछ सोचे समजे ओर उसकी यही बात मुझे पसंद थी . ऐसे मर्द सच्चे होते हैं - मन मैं कुछ नहीं रखते . सब के सामने क्लास मैं बिंदास हमेशा मुज़से कहता था - क्या यार तेरे जलवे सिर्फ अनीश के लिए , मुझे भी एक किस दे दे , मैं हंस कर - जा पगले - कह कर टाल देती..एक दिन क्लास मैं सबके सामने बोला - क्या यार अनीश के सात इतना टाइम स्पेंड करती हो . कुछ टाइम मेरे लिए भी निकाल दे , मैंने भी पूछा - तुझे टाइम दिया तो क्या करेगा , बिंदास हो कर राजवीर बोला - सब कुछ दूंगा, तुझे खुश कर दूंगा .मैंने भी उसे हंसकर - चुप हरामी गाली दी ओर चली गयी वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया था , पर उसकी शरारत कभी नहीं रुकती. मुझे अब कॉलेज के लड़को की फ़्लर्ट की आदत पद गयी थी. सिर्फ राजवीर ही नहीं , कई दोस्त मुज़से मजाक मैं ऐसे फ़्लर्ट करते थे . सब से ज्यादा फ़्लर्ट 3rd ओर 4th (फाइनल) ईयर के लड़के करते , उनके कॉलेज के आखरी साल बचे रहने से वो लड़की को पटाने के लिए डेस्पेरेट हो जाते है
तभी सितम्बर महीना आया ओर भगवन ने जैसे मेरी सुन ली . कॉलेज के स्पोर्ट्स इवेंट्स चल रहे थे , ओर अनीश को इंटरकॉलेज स्पोर्ट कम्पटीशन के लिए करीब के सिटी मैं २ दिन के लिए जाना था . कॉलेज उसको होटल ओर खाने पीने का अलाउंस दे रही थी .अनीश ने जिद की की मैं भी उसके सात जाऊ ओर दोनों एक कमरे मैं एक होटल मैं रहेंगे. पर मेरे पास हॉस्टल वार्डन को २ दिन बाहर जाने के लिए कोई बहाना नहीं था. हमें कोई मार्ग नहीं मिल रहा था . अब अनीश को जाने के लिए सिर्फ २ दिन रह गए थे ओर मेरे पास कोई पालन नहीं था. पर भगवन ने मेरी सुन ली ओर उस रात पता चला की वार्डन साहिबा दूसरे दिन गांव जाने वाली हैं, उनकी माँ की तबियत अचानक ख़राब हो गयी ओर वो हॉस्पिटल मैं दूसरे शहर मैं एडमिट हैं. हम खुश हो गए , मैंने मेरी रूम पार्टनर अनीता को पहले से पटा लिया था , वह सब से क्लास मैं कहेगी की मेरी तबियत ठीक नहीं हैं, मैं आराम कर रही हूँ . ओर हॉस्टल के peon को अनीश ने पैसे देकर पटा लिआ ओर उसने एडवांस मैं ही रजिस्टर पर मेरी अटेंडेंस लगा दी . दूसरे दिन मैंने बैग मैं सिर्फ ब्रश ओर जरुरी सामान रखा, एक एक्स्ट्रा कपडा,ओर एक दो स्पेशल कपडे (जो मैं आपको बाद मैं बताउंगी ) ओर कॉलेज के बहाने चुप चाप मैं गेट से बाहर चली गयी . कुछ दुरी पर अनीश अपनी बाइक पर मेरा वेट कर रहा था . रास्ता सिर्फ ४ घंटे का था , इसलिए हम दोनों ने बाइक से जाने का प्लान बना लिया. अनीश के पास रॉयल एनफील्ड की बुलेट थी , उस ज़माने मैं बहुत कम लोग अफ़्फोर्ड कर सकते थे . मैं अनीश के पीछे चिपक कर बैठ गयी ओर अनीश ने गाड़ी मुख्य रोड पर ले ली
अनीश ने टी शर्ट ओर जीन्स पहना था ओर मैंने भी टी शर्ट ओर जीन्स ही पहनी थी .. अब मैं अनीश के सात शरारत करने लगी .. रोड खाली था , ओर अनीश के साथ हैंडल पर बिजी थे पर मेरे साथ खाली थे , मैंने अनीश को कस कर पीछे से पकड़ लिआ ओर मेरे बूब्स उसके पीठ पर रगड़ दिए ,, वह सिसक गया - बोला - जानेमन मस्ती मत कर, मुझे रोड पर ध्यान देने दे .. मैंने कहा .. फिर दो ना ध्यान .. मैंने कब मना किआ ओर मैंने मेरे साथ उसके टी शर्ट को ऊपर कर के अंदर डाल दिए ओर उसके चेस्ट के बालों से खेलने लगी ..वह बोला रुक जा तू - तेरे से इंटरेस्ट के सात सब वसूल करूँगा, बंद कमरे मैं . मैंने कहा - कर लेना सब वसूल - ओर मैंने जोर से उसके दोनों निप्पल्स अपने ऊँगली से दबा दिए . वह जोर से.. आह .. कमीनी . मार डालेगी क्या .. मैंने कहा - नहीं जानू - ऐसे कैसे तुझे मरने दूंगी .. ओर फिर मैंने उसकी गर्दन पर किस किआ ओर जीभ फिरा कर उसको प्यार से चाटने लगी .. उसके कान भी धीरे से चबाये .. उसको सब अच्छा लग रहा था पर .. जानबूझ कर नखरे कर रहा था .. मैंने अब अपने हाथ उसके पेट पर फेरना चालू किआ ओर उसकी नाभि से खेलती रही .. ओर धीरे से हाथ उसके जीन्स के ऊपर उसके लण्ड पर रख दिया .. उस्का लण्ड बहुत टाइट ओर खड़ा हो कर फनफना रहा था ..टाइट जीन्स की वजह से मैं उसके जीन्स के अंदर हाथ नहीं डाल पा रही थी .. मैंने धीरे से उसकी जीन्स की ज़िप खोल दी ओर अपना हाथ अंदर डाल दिया .. उसके खड़े लण्ड की वजा से उसकी निकर बहुत टाइट थी - मुझे उस पोजीशन में उस्का लण्ड बाहर निकालना मुश्किल हो रहा था . मैं वैसे हे उसके लण्ड को बाहर से सहला ओर दबा रही थी. इस बीच कुछ कार ओर ट्रक वाले भी हमें क्रॉस कर के आगे गए .. बड़ी सावधानी बरतनी पड़ी .. अनीश बोला - मन कर रहा है तुझे यही रास्ते में उतार कर बीच सड़क पर नंगा कर के चोद दू ..
मैंने प्यार से उसे कस कर पकड़ लिया ओर उसकी गर्दन को चूमकर बोली - में मना नहीं करुँगी तुझे मेरी जान .
हम एक ढाबे पर खाना खाने रुक गए .. वहा पर कुछ खटिया भी पड़ी थी .. वहा सीमेंट की टंकी पर वाटर पंप चल रहा था .. हम वहा साथ पाँव धोने - गए .. वहा कुछ सरदारजी ट्रक वाले नहा भी रहे थे .. पानी बहुत ठंडा था .. फ्रेश हो गयी ..अनीश वहा बाथरूम मैं सुसु - पेशाब करने चला गया . तभी सामने मुझे एक हट्टा कट्टा मोटा सरदार नहाते नजर आया ओर वो अपनी बॉडी पर साबुन लगा था , मुझे अकेली देखकर वह कमीने अंदाज मैं मुस्कराया ओर उसने अपनी गीली निकर निचे खिसका दी ओर अपने लण्ड को साबुन लगाने लगा. वह अच्छा गोरा चिट्टा था ओर उसके सारे बदन पर काले काले बाल थे .. उस्का लण्ड देखकर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी .. इतना बड़ा लण्ड मैंने कभी देखा नहीं था .. मैं शर्मा कर वहा से भाग आयी. हमने दोनों ने खाना खाया ओर फिर से बुलेट पर चल दिए .. अब सिर्फ एक घंटे का सफर बाकी था .
में फिर से बाइक पर बैठ गयी .पर अब मेरी चूत नंगे सरदार को देखकर बहुत गीली हो गयी थी . मुझे बार बार सरदारजी का नंगा बदन ओर उस्का भयंकर लण्ड दिखाई देता .. ओर राजवीर का भी चेहरा आँखों मैं आता .. क्या राजवीर का भी लण्ड ऐसे ही होगा ? मेरे दिमाग मैं अब राजवीर को लेकर गंदे ख्याल आने लगे थे - मेरे दिमाग मैं राजवीर की नंगी तस्वीर बनना शुरू हुई .
झड़ने के बाद अनीश ने मुझे उठा कर जोर से कस कर छाती से लिपट लिया .. मुझे पागलों की तरह किस करने लगा .. संध्या मैं बहुत लकी हूँ .. तुम बहुत सुन्दर ओर हसीन ओर सेक्सी हो .. आई लव यू ..
मैंने भी उसको आई लव यू बोल दिया .. रात काफी हो गयी थी .. ९ बजे हॉस्टल पहुंचना था - समय का रेस्ट्रिक्शन था , हम जल्दी कपडे ठीक कर के ..हॉस्टल की तरफ चलने लगे .. अनीश ने मेरा हाथ उसके हाथ में कस कर पकड़ा था ओर उसने मुझे गर्ल्स हॉस्टल तक पहुंचा दिया .. वह गेट के बाहर फिर से मुझे देर तक किस किया ओर मेरी चूत पर हाथ रख कर ..गुड नाईट कह ओर हरिश बोला - तुम रोज ७ बजे प्लेग्राउंड आ जाना .. मैं तुझे रोज प्यार करना चाहता हूँ .. मैंने भी प्रॉमिस कर दिया ओर अनीश के लण्ड को प्यार से दबा दिया .. अनीश का लण्ड फिर से खड़ा होकर मुझे सलामी से रहा था .. मैं हसकर हॉस्टल के अंदर रूम मैं चली आयी ..
मेरी ओर अनीश का लव अफेयर चालू हो गया था ओर पूरी कॉलेज को पता चल गया था . मैं रोज अनीश से मिलने प्लेग्राउंड जाती, फिर हम बगीचे मैं प्यार करते ओर वह रोज मुझे हॉस्टल तक चलके छोड जाता. मुझे अब अनीश की पसीने से गीली बॉडी ओर उसकी महक की एडिक्शन हो गयी थी . पर हमें सेक्स करने के लिए सही जगह नहीं मिल रही थी, ना उस समय आज के जैसे कपल फ्रेंडली होटल्स थे ओर बाहर सुनसान जगह बहुत रिस्की होता था, मवाली लड़के घूमते फिरते थे .. हम दोनों रोज बातें करते की कैसे अकेले मैं हमें कुछ मिल पल मिल जाये ओर हम दोनों का मिलन सही मायने से हो जाये. मैं भी अनीश से चुदने के लिए बेताब थी , ओर अनीश का नाग भी मेरी बिल मैं विष घोलने को बेताब था.
मेरे क्लास मैं अब सब लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गयी थी . सब मुझे अनीश के नाम से चिढ़ाते ओर मजाक करते थे .राजवीर पंजाब के भटिंडा से सरदार परिवार से था .. वह भी एक हॉकी प्लेयर था , बहुत मजाकिया ओर हसमुख स्वाभाव का था . हत्ता कट्टा सरदार , गोरा चिटा ओर बालों वाला बदन , ओर ऊपर पगड़ी ओर हलकी दाढ़ी , बहुत मरदाना लगता था . हमेशा मुझे अनीश के नाम से छेड़ता था . कोई भी बात बेझिझक बोल देता बिना कुछ सोचे समजे ओर उसकी यही बात मुझे पसंद थी . ऐसे मर्द सच्चे होते हैं - मन मैं कुछ नहीं रखते . सब के सामने क्लास मैं बिंदास हमेशा मुज़से कहता था - क्या यार तेरे जलवे सिर्फ अनीश के लिए , मुझे भी एक किस दे दे , मैं हंस कर - जा पगले - कह कर टाल देती..एक दिन क्लास मैं सबके सामने बोला - क्या यार अनीश के सात इतना टाइम स्पेंड करती हो . कुछ टाइम मेरे लिए भी निकाल दे , मैंने भी पूछा - तुझे टाइम दिया तो क्या करेगा , बिंदास हो कर राजवीर बोला - सब कुछ दूंगा, तुझे खुश कर दूंगा .मैंने भी उसे हंसकर - चुप हरामी गाली दी ओर चली गयी वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया था , पर उसकी शरारत कभी नहीं रुकती. मुझे अब कॉलेज के लड़को की फ़्लर्ट की आदत पद गयी थी. सिर्फ राजवीर ही नहीं , कई दोस्त मुज़से मजाक मैं ऐसे फ़्लर्ट करते थे . सब से ज्यादा फ़्लर्ट 3rd ओर 4th (फाइनल) ईयर के लड़के करते , उनके कॉलेज के आखरी साल बचे रहने से वो लड़की को पटाने के लिए डेस्पेरेट हो जाते है
तभी सितम्बर महीना आया ओर भगवन ने जैसे मेरी सुन ली . कॉलेज के स्पोर्ट्स इवेंट्स चल रहे थे , ओर अनीश को इंटरकॉलेज स्पोर्ट कम्पटीशन के लिए करीब के सिटी मैं २ दिन के लिए जाना था . कॉलेज उसको होटल ओर खाने पीने का अलाउंस दे रही थी .अनीश ने जिद की की मैं भी उसके सात जाऊ ओर दोनों एक कमरे मैं एक होटल मैं रहेंगे. पर मेरे पास हॉस्टल वार्डन को २ दिन बाहर जाने के लिए कोई बहाना नहीं था. हमें कोई मार्ग नहीं मिल रहा था . अब अनीश को जाने के लिए सिर्फ २ दिन रह गए थे ओर मेरे पास कोई पालन नहीं था. पर भगवन ने मेरी सुन ली ओर उस रात पता चला की वार्डन साहिबा दूसरे दिन गांव जाने वाली हैं, उनकी माँ की तबियत अचानक ख़राब हो गयी ओर वो हॉस्पिटल मैं दूसरे शहर मैं एडमिट हैं. हम खुश हो गए , मैंने मेरी रूम पार्टनर अनीता को पहले से पटा लिया था , वह सब से क्लास मैं कहेगी की मेरी तबियत ठीक नहीं हैं, मैं आराम कर रही हूँ . ओर हॉस्टल के peon को अनीश ने पैसे देकर पटा लिआ ओर उसने एडवांस मैं ही रजिस्टर पर मेरी अटेंडेंस लगा दी . दूसरे दिन मैंने बैग मैं सिर्फ ब्रश ओर जरुरी सामान रखा, एक एक्स्ट्रा कपडा,ओर एक दो स्पेशल कपडे (जो मैं आपको बाद मैं बताउंगी ) ओर कॉलेज के बहाने चुप चाप मैं गेट से बाहर चली गयी . कुछ दुरी पर अनीश अपनी बाइक पर मेरा वेट कर रहा था . रास्ता सिर्फ ४ घंटे का था , इसलिए हम दोनों ने बाइक से जाने का प्लान बना लिया. अनीश के पास रॉयल एनफील्ड की बुलेट थी , उस ज़माने मैं बहुत कम लोग अफ़्फोर्ड कर सकते थे . मैं अनीश के पीछे चिपक कर बैठ गयी ओर अनीश ने गाड़ी मुख्य रोड पर ले ली
अनीश ने टी शर्ट ओर जीन्स पहना था ओर मैंने भी टी शर्ट ओर जीन्स ही पहनी थी .. अब मैं अनीश के सात शरारत करने लगी .. रोड खाली था , ओर अनीश के साथ हैंडल पर बिजी थे पर मेरे साथ खाली थे , मैंने अनीश को कस कर पीछे से पकड़ लिआ ओर मेरे बूब्स उसके पीठ पर रगड़ दिए ,, वह सिसक गया - बोला - जानेमन मस्ती मत कर, मुझे रोड पर ध्यान देने दे .. मैंने कहा .. फिर दो ना ध्यान .. मैंने कब मना किआ ओर मैंने मेरे साथ उसके टी शर्ट को ऊपर कर के अंदर डाल दिए ओर उसके चेस्ट के बालों से खेलने लगी ..वह बोला रुक जा तू - तेरे से इंटरेस्ट के सात सब वसूल करूँगा, बंद कमरे मैं . मैंने कहा - कर लेना सब वसूल - ओर मैंने जोर से उसके दोनों निप्पल्स अपने ऊँगली से दबा दिए . वह जोर से.. आह .. कमीनी . मार डालेगी क्या .. मैंने कहा - नहीं जानू - ऐसे कैसे तुझे मरने दूंगी .. ओर फिर मैंने उसकी गर्दन पर किस किआ ओर जीभ फिरा कर उसको प्यार से चाटने लगी .. उसके कान भी धीरे से चबाये .. उसको सब अच्छा लग रहा था पर .. जानबूझ कर नखरे कर रहा था .. मैंने अब अपने हाथ उसके पेट पर फेरना चालू किआ ओर उसकी नाभि से खेलती रही .. ओर धीरे से हाथ उसके जीन्स के ऊपर उसके लण्ड पर रख दिया .. उस्का लण्ड बहुत टाइट ओर खड़ा हो कर फनफना रहा था ..टाइट जीन्स की वजह से मैं उसके जीन्स के अंदर हाथ नहीं डाल पा रही थी .. मैंने धीरे से उसकी जीन्स की ज़िप खोल दी ओर अपना हाथ अंदर डाल दिया .. उसके खड़े लण्ड की वजा से उसकी निकर बहुत टाइट थी - मुझे उस पोजीशन में उस्का लण्ड बाहर निकालना मुश्किल हो रहा था . मैं वैसे हे उसके लण्ड को बाहर से सहला ओर दबा रही थी. इस बीच कुछ कार ओर ट्रक वाले भी हमें क्रॉस कर के आगे गए .. बड़ी सावधानी बरतनी पड़ी .. अनीश बोला - मन कर रहा है तुझे यही रास्ते में उतार कर बीच सड़क पर नंगा कर के चोद दू ..
मैंने प्यार से उसे कस कर पकड़ लिया ओर उसकी गर्दन को चूमकर बोली - में मना नहीं करुँगी तुझे मेरी जान .
हम एक ढाबे पर खाना खाने रुक गए .. वहा पर कुछ खटिया भी पड़ी थी .. वहा सीमेंट की टंकी पर वाटर पंप चल रहा था .. हम वहा साथ पाँव धोने - गए .. वहा कुछ सरदारजी ट्रक वाले नहा भी रहे थे .. पानी बहुत ठंडा था .. फ्रेश हो गयी ..अनीश वहा बाथरूम मैं सुसु - पेशाब करने चला गया . तभी सामने मुझे एक हट्टा कट्टा मोटा सरदार नहाते नजर आया ओर वो अपनी बॉडी पर साबुन लगा था , मुझे अकेली देखकर वह कमीने अंदाज मैं मुस्कराया ओर उसने अपनी गीली निकर निचे खिसका दी ओर अपने लण्ड को साबुन लगाने लगा. वह अच्छा गोरा चिट्टा था ओर उसके सारे बदन पर काले काले बाल थे .. उस्का लण्ड देखकर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी .. इतना बड़ा लण्ड मैंने कभी देखा नहीं था .. मैं शर्मा कर वहा से भाग आयी. हमने दोनों ने खाना खाया ओर फिर से बुलेट पर चल दिए .. अब सिर्फ एक घंटे का सफर बाकी था .
में फिर से बाइक पर बैठ गयी .पर अब मेरी चूत नंगे सरदार को देखकर बहुत गीली हो गयी थी . मुझे बार बार सरदारजी का नंगा बदन ओर उस्का भयंकर लण्ड दिखाई देता .. ओर राजवीर का भी चेहरा आँखों मैं आता .. क्या राजवीर का भी लण्ड ऐसे ही होगा ? मेरे दिमाग मैं अब राजवीर को लेकर गंदे ख्याल आने लगे थे - मेरे दिमाग मैं राजवीर की नंगी तस्वीर बनना शुरू हुई .