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Guest
मैं पसीने से लथपथ थी. मेरे बदन से सिर्फ धर्मेश अंकल के शरीर की मर्दाना खुशबू आ रही थी. कोई भी सिर्फ दूर से सूंघ कर बता देता की मैं किसी मर्द से चुदी हूँ और मेरे शरीर पर उस मर्द की खुशबू ने कब्ज़ा कर लिया है. अनीश का ऑफिस से आने का टाइम भी हो गया था. मैं बाथरूम गयी और नहाने लगी .. पर धर्मेश के बदन की मर्दाना खुशबू मेरे शरीर से नहीं जा रही थी. २-३ बार साबुन लगाकर नहाने के बाद मैं बाहर आयी और थक कर संतुष्टि से सो गयी.
मैंने सिर्फ एक चादर ओढ़ ली और धर्मेश अंकल का कहना मान कर पूरी नंगी सो गयी. कुछ देर बाद अनीश आया .. मेरी आंखें खुली तो देखा की वह पूरा नंगा था. उसने मेरी चादर बाजु कर दी थी .. और वह मेरे नंगे जिस्म को चुम रहा था चाट रहा था. उसका ५ इंच का छोटा लण्ड एकदम सख्त होकर फुफकार रहा था.. मेरे चूचियां चूसने के बाद वह मेरे ओंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा.. मेरी जीभ चूसने लगा ..
अनीश - मम संध्या रानी आज तू बड़ी हॉट और सेक्सी लग रही है .. लगता हैं मेरा वीर्य पीने के लालसा मैं तड़प कर नंगी सोई है..
मैंने भी अपने दोनों साथ अनीश के गले मैं डाल कर उसको चुम लिया..हाँ मेरे राजा..तुम्हारा इंतजार था.
अनीश - संध्या तुम्हारा किस बड़ा हॉट लग रहा आज..अलग महक आ रही है.. तुम्हारे शरीर से भी बहुत अच्छी अलग महक आ रही.
ओह ! यह क्या.. मैं भूल गयी..मैंने मुँह साफ़ नहीं किया था.. धर्मेश का वीर्य का स्वाद बहुत देर अपने मुँह मैं रखना चाहती थी. क्या अनीश समझ गया की यह वीर्य की महक है?
मैंने कहा - हाँ आज आपका वीर्य नहीं मिला तो मज़बूरी में दही क्रीम खा लिया ..
अनीश - यह बात है .. ? फिर अच्छे काम में देरी नहीं करते ..
और अनीश ने उसका लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया.. अनीश का छोटा ५ इंच का लण्ड.. मैं आसानी से चूस लेती थी..उसके लण्ड की महक और वीर्य की खुशबू बस यही उसके लण्ड की खासियत थी. छोटा लण्ड था पर सुन्दर था..और कड़क सख्त दमदार.. बाकी लम्बाई और मोटाई मैं बुरी तरह मार खा गया.. पर उस कमी के लिए उसने मुझे काफी बड़े-बड़े लण्ड वाले मर्दों से चुदवाया था ..और बड़े खुले विचारों का था. बहुत जल्दी वह मेरे मुँह मैं झड़ गया..मैं बड़े प्यार से बहुत देर तक अपने मुँह मैं उसके वीर्य की महक और स्वाद लेती रही. फिर भी मुझे कमी लग रही थी.. धर्मेश अंकल की महक और वीर्य का चस्का लग गया था..लालसा पैदा हो गयी थी.
शाम को कुछ देर बाद यासीन हमें खाना खाने बुलाने आया.. मैंने एक टॉप और स्कर्ट पहन ली..अंदर कुछ नहीं था.. अनीश ने कहा- तुम जाओ , मैं फ्रेश होकर आता हूँ. मैं खाने के डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी.. कुछ देर बाद धर्मेश अंकल आये तो वह मेरे बाजु वाली खुर्ची पर बैठ गए..मैंने उन्हें मुस्कराते देखा और कहा - यहाँ अनीश बैठता है..
धर्मेश अंकल - धीरे से - कोई बात नहीं. कुछ दिन मैं उसकी जगह ले लूंगा ..और हंस दिए
मैं भी मुस्करा दी..
तभी पम्मी मौसी और अनीश भी आ गए..और हमारे सामने वाली चेयर्स पर बैठ गए..
धर्मेश अंकल - अरे अनीश .. शायद मैं तेरी जगह बैठ गया.. तुम यहाँ बैठ जाओ.
अनीश - अरे नहीं अंकल..कोई फरक नहीं पड़ता.. आप जहा चाहे बैठ लो.. घर की बात है.
धर्मेश अंकल - चलो ठीक है.. अनीश तू ठीक कहता है..घर की बात है.. ठीक है ना संध्या ..तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं..?
और धर्मेश अंकल ने उनका साथ मेरे जांघों पर रख दिया.. वह धीरे से उनके हाथों से मेरा स्कर्ट ऊपर करने लगे.मेरी खुली जांघों को सहलाने लगे
मैंने कहा - कोई परेशानी नहीं अंकल .. घर की बात है..और आप तो बुजुर्ग है..हमारे अंकल है.. आप बस आदेश दीजिये.
धर्मेश अंकल - अरे संध्या आदेश क्या देना.. बस हम तेरा ख्याल रखने आये है..बहुत प्यार से तुझे संभालेंगे ..
धर्मेश अंकल मुस्करा दिए और एक आंख मार दी..मैं उनके इशारे सब समझ रही थी.. उन्होंने मेरा स्कर्ट ऊपर कर के अपना साथ अब मेरी चिकनी चूत पर रख दिया था और बड़े प्यार से सहला रहे थे.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी.. मेरी चूत से पानी बह रहा था..वही पानी से धर्मेश अंकल मेरी चूत की मालिश कर के सहला रहे थे. बाकि सब लोग खाना खा रहे थे..और यासीन सबको परोस रहा था.. धर्मेश एक साथ से खाना खा रहे थे और दूसरे साथ से मेरी चूत को मसल रहे थे. मेरी चूत से लगातार पानी बह रहा था. तभी धर्मेश ने उनकी एक ऊँगली मेरी चूत मैं डाल दी..
मैं - आह....उफ़..
पम्मी मौसी - क्या हुआ संध्या सब ठीक है ना..
मैंने कहा - कुछ नहीं मौसी बस थोड़ा पेट मैं गड़बड़ है..
पम्मी मौसी -हां प्रेगनेंसी मैं यह सब होते रहता है..
तभी धर्मेश अंकल ने मेरी चूत के अंदर दो ऊँगली डाल दी..और मेरी चूत की दीवाल को कुरेद कर पानी निकाल रहा था..फिर उन्होंने अपनी दोनों उँगलियों से मेरी चूत का पानी बाहर निकाला और मुँह मैं डालकर चाटने लगे..
धर्मेश - वाह ! यासीन .. क्या अचार बनाया है ! मुझे यही अचार पसंद है.
और बेशरम जैसे ऊँगली पर लगा मेरी चूत का पानी जीभ बाहर कर के लपलपा कर चाटने लगे. मुझे बड़ी शर्म आयी.
पम्मी मौसी - हाँ तो खा लो जितनी आपको खानी है .. वैसे मैंने सुना है की संध्या भी बहुत अच्छी चटनी बनती है. संध्या तेरे अंकल के लिए एक दिन बना देना ..इन्हे चटनी बहुत पसंद है.
धर्मेश अंकल ने फिर से अपनी उंगलिया मेरी चूत मैं डाल दी..और बोले - हाँ संध्या..चटनी जरूर बनाना .. और सिर्फ मेरे लिए..मैं तेरी पूरी चटनी अकेले खा लूंगा.. और मुझे फिर से आँख मार दी..
मैंने कहा..हाँ धर्मेश अंकल जरूर बनाउंगी..स्पेशल चटनी..सिर्फ आपके लिए..
यासीन हमें रोटी परोसने आया ... उसने कहा .. हां संध्या मैडम .सब को जैसे चटनी चाहिए सिर्फ आप ही बना सकती है..और वो मुस्करा दिया .
यासीन ने मुझे और धर्मेश को देख लिया था.. पर शायद उसको अपने मालिक के शौक का अंदाजा बहुत अच्छी से था. मैं शर्मा गयी..और धर्मेश अंकल फिर से उंगलिया बाहर करके चाटने लगा. मैं बहुत गरम हो गयी थी.. छटपटा रही थी.. बस झड़ने के कगार पर लाकर धर्मेश ने मुझे प्यासा छोड दिया था.
मैंने सिर्फ एक चादर ओढ़ ली और धर्मेश अंकल का कहना मान कर पूरी नंगी सो गयी. कुछ देर बाद अनीश आया .. मेरी आंखें खुली तो देखा की वह पूरा नंगा था. उसने मेरी चादर बाजु कर दी थी .. और वह मेरे नंगे जिस्म को चुम रहा था चाट रहा था. उसका ५ इंच का छोटा लण्ड एकदम सख्त होकर फुफकार रहा था.. मेरे चूचियां चूसने के बाद वह मेरे ओंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा.. मेरी जीभ चूसने लगा ..
अनीश - मम संध्या रानी आज तू बड़ी हॉट और सेक्सी लग रही है .. लगता हैं मेरा वीर्य पीने के लालसा मैं तड़प कर नंगी सोई है..
मैंने भी अपने दोनों साथ अनीश के गले मैं डाल कर उसको चुम लिया..हाँ मेरे राजा..तुम्हारा इंतजार था.
अनीश - संध्या तुम्हारा किस बड़ा हॉट लग रहा आज..अलग महक आ रही है.. तुम्हारे शरीर से भी बहुत अच्छी अलग महक आ रही.
ओह ! यह क्या.. मैं भूल गयी..मैंने मुँह साफ़ नहीं किया था.. धर्मेश का वीर्य का स्वाद बहुत देर अपने मुँह मैं रखना चाहती थी. क्या अनीश समझ गया की यह वीर्य की महक है?
मैंने कहा - हाँ आज आपका वीर्य नहीं मिला तो मज़बूरी में दही क्रीम खा लिया ..
अनीश - यह बात है .. ? फिर अच्छे काम में देरी नहीं करते ..
और अनीश ने उसका लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया.. अनीश का छोटा ५ इंच का लण्ड.. मैं आसानी से चूस लेती थी..उसके लण्ड की महक और वीर्य की खुशबू बस यही उसके लण्ड की खासियत थी. छोटा लण्ड था पर सुन्दर था..और कड़क सख्त दमदार.. बाकी लम्बाई और मोटाई मैं बुरी तरह मार खा गया.. पर उस कमी के लिए उसने मुझे काफी बड़े-बड़े लण्ड वाले मर्दों से चुदवाया था ..और बड़े खुले विचारों का था. बहुत जल्दी वह मेरे मुँह मैं झड़ गया..मैं बड़े प्यार से बहुत देर तक अपने मुँह मैं उसके वीर्य की महक और स्वाद लेती रही. फिर भी मुझे कमी लग रही थी.. धर्मेश अंकल की महक और वीर्य का चस्का लग गया था..लालसा पैदा हो गयी थी.
शाम को कुछ देर बाद यासीन हमें खाना खाने बुलाने आया.. मैंने एक टॉप और स्कर्ट पहन ली..अंदर कुछ नहीं था.. अनीश ने कहा- तुम जाओ , मैं फ्रेश होकर आता हूँ. मैं खाने के डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी.. कुछ देर बाद धर्मेश अंकल आये तो वह मेरे बाजु वाली खुर्ची पर बैठ गए..मैंने उन्हें मुस्कराते देखा और कहा - यहाँ अनीश बैठता है..
धर्मेश अंकल - धीरे से - कोई बात नहीं. कुछ दिन मैं उसकी जगह ले लूंगा ..और हंस दिए
मैं भी मुस्करा दी..
तभी पम्मी मौसी और अनीश भी आ गए..और हमारे सामने वाली चेयर्स पर बैठ गए..
धर्मेश अंकल - अरे अनीश .. शायद मैं तेरी जगह बैठ गया.. तुम यहाँ बैठ जाओ.
अनीश - अरे नहीं अंकल..कोई फरक नहीं पड़ता.. आप जहा चाहे बैठ लो.. घर की बात है.
धर्मेश अंकल - चलो ठीक है.. अनीश तू ठीक कहता है..घर की बात है.. ठीक है ना संध्या ..तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं..?
और धर्मेश अंकल ने उनका साथ मेरे जांघों पर रख दिया.. वह धीरे से उनके हाथों से मेरा स्कर्ट ऊपर करने लगे.मेरी खुली जांघों को सहलाने लगे
मैंने कहा - कोई परेशानी नहीं अंकल .. घर की बात है..और आप तो बुजुर्ग है..हमारे अंकल है.. आप बस आदेश दीजिये.
धर्मेश अंकल - अरे संध्या आदेश क्या देना.. बस हम तेरा ख्याल रखने आये है..बहुत प्यार से तुझे संभालेंगे ..
धर्मेश अंकल मुस्करा दिए और एक आंख मार दी..मैं उनके इशारे सब समझ रही थी.. उन्होंने मेरा स्कर्ट ऊपर कर के अपना साथ अब मेरी चिकनी चूत पर रख दिया था और बड़े प्यार से सहला रहे थे.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी.. मेरी चूत से पानी बह रहा था..वही पानी से धर्मेश अंकल मेरी चूत की मालिश कर के सहला रहे थे. बाकि सब लोग खाना खा रहे थे..और यासीन सबको परोस रहा था.. धर्मेश एक साथ से खाना खा रहे थे और दूसरे साथ से मेरी चूत को मसल रहे थे. मेरी चूत से लगातार पानी बह रहा था. तभी धर्मेश ने उनकी एक ऊँगली मेरी चूत मैं डाल दी..
मैं - आह....उफ़..
पम्मी मौसी - क्या हुआ संध्या सब ठीक है ना..
मैंने कहा - कुछ नहीं मौसी बस थोड़ा पेट मैं गड़बड़ है..
पम्मी मौसी -हां प्रेगनेंसी मैं यह सब होते रहता है..
तभी धर्मेश अंकल ने मेरी चूत के अंदर दो ऊँगली डाल दी..और मेरी चूत की दीवाल को कुरेद कर पानी निकाल रहा था..फिर उन्होंने अपनी दोनों उँगलियों से मेरी चूत का पानी बाहर निकाला और मुँह मैं डालकर चाटने लगे..
धर्मेश - वाह ! यासीन .. क्या अचार बनाया है ! मुझे यही अचार पसंद है.
और बेशरम जैसे ऊँगली पर लगा मेरी चूत का पानी जीभ बाहर कर के लपलपा कर चाटने लगे. मुझे बड़ी शर्म आयी.
पम्मी मौसी - हाँ तो खा लो जितनी आपको खानी है .. वैसे मैंने सुना है की संध्या भी बहुत अच्छी चटनी बनती है. संध्या तेरे अंकल के लिए एक दिन बना देना ..इन्हे चटनी बहुत पसंद है.
धर्मेश अंकल ने फिर से अपनी उंगलिया मेरी चूत मैं डाल दी..और बोले - हाँ संध्या..चटनी जरूर बनाना .. और सिर्फ मेरे लिए..मैं तेरी पूरी चटनी अकेले खा लूंगा.. और मुझे फिर से आँख मार दी..
मैंने कहा..हाँ धर्मेश अंकल जरूर बनाउंगी..स्पेशल चटनी..सिर्फ आपके लिए..
यासीन हमें रोटी परोसने आया ... उसने कहा .. हां संध्या मैडम .सब को जैसे चटनी चाहिए सिर्फ आप ही बना सकती है..और वो मुस्करा दिया .
यासीन ने मुझे और धर्मेश को देख लिया था.. पर शायद उसको अपने मालिक के शौक का अंदाजा बहुत अच्छी से था. मैं शर्मा गयी..और धर्मेश अंकल फिर से उंगलिया बाहर करके चाटने लगा. मैं बहुत गरम हो गयी थी.. छटपटा रही थी.. बस झड़ने के कगार पर लाकर धर्मेश ने मुझे प्यासा छोड दिया था.