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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

[SIZE=150%] धीरे धीरे रीमा का जिस्म फिर से गरम होना शुरू हुआ, रोहित ने अपने मोटे लंड के फूले हुए सुपाडे से रीमा का फूला चूत दाना जोरे से रगड़ दिया और फिर रोहित ने लंड को रीमा की गुलाबी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया

मोटे मुसल जैसे लंड के फूले हुए सुपाडे से लालिमा लिए चूतदाना रगड़ने से रीमा बहुत जल्दी फिर से पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी | रीमा की आहे फिर निकालनी शुरू हो गयी, कुछ ही पलो में रीमा फिर से वासना के भंवर में मस्त होकर सिसकारियां भरने लगी, उसकी चूत की दीवारों से फिर पानी झरने लगा |रोहित ने रीमा की गुलाबी चिकनी चूत पर अपना लंड रगड़ना अनवरत जारी रखा | रीमा वासना में मस्त होकर सिसकारियां भरती रही |

इन्ही मादक कराहो के बीच रोहित ने लंड को रीमा की चूत के छेद पर रखा, और रगड़ने लगा |

रीमा की कराहे और सिसकारियां बढती जा रही रही थी | रोहित ने कमर को और झुकाते हुए लंड को रीमा की चूत से सटा दिया और उसकी चूत रगड़ने लगा | रीमा भी उसकी चूत को सहलाते रोहित के लंड पर हाथ फेरने लगी |

रोहित ने रीमा की चिकनी गुलाबी गीली चूत को सहलाते सहलाते रीमा की चूत के ओठ खोल दिए और और अपने खड़े लंड का फूला सुपाडा उसकी मखमली गुलाबी चूत पर सटा दिया | रीमा को लगा अब बस रोहित अपना मुसल लंड उसकी चूत में पेल देगा | रोहित रीमा की जांघो को अपने और करीब ले आया और अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर लगा दिया

रोहित ने कमर पर जोर लगाया, और अपने मोटे लंड का फूला हुआ सुपाडा रीमा की चूत में पेलने की कोशिश करने लगा | उसने आइस्ते से रीमा के कसे संकरे चूत छेद पर दबाव बढ़ाया और अपने सुपाडे को रीमा की गीली चूतरस से भरी चूत के हवाले करने लगा |रीमा की चूत के गुलाबी ओंठ उसके फूले सुपाडे के इर्द गिर्द फ़ैल गए |

रीमा की चूत पर लंड सटाने के बाद उसने दो बार लंड को चूत में पेलने की कोशिश की और दोनों बार चिकनी चूत की कसी दीवारों और उसके चारों तरफ फैले चिकने चूत रस के कारन के कारन लंड फिसल गया | रोहित ने इस बार लंड को जड़ से पकड़कर चूत के मुहाने पर लगाया और जोर का धक्का दे मारा | रीमा की चूत की मखमली गुलाबी गीली दीवारों को चीरता हुआ लंड का सुपाडा चूत में घुस गया |

रोहित के लंड का मोटा सुपाडा अन्दर जाते ही रीमा दर्द से कराह उठी, रीमा का पूरा शरीर काम उत्तेजना के कारन गरम था , चूत भी गीली थी, लगातार उसकी दीवारों से पानी रिस रहा था और रीमा भी रोहित का मोटा फूला हुआ मुसल लंड चूत में अन्दर तक लेने के लिये मानसिक रूप से तैयार थी फिर भी रोहित का लंड इतना लम्बा और मोटा तगड़ा था किसी भी रोज चुदने वाली औरत की चीखे निकाल दे, और रीमा की चूत ने तो बरसो से लंड के दर्शन नहीं किये थे |

रीमा-आआअह्ह्ह आआआआआह्हह्हह्हह्हहईईईईईईईईई स्सस्सस्स रोहित आह्ह्हह्ह स्सस्सस्सस, हाय मै मर गयी, प्लीज रोहित बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज इसे बाहर निकाल लो, वरना मेरी चूत फट जाएगी, आआआआऐईईईईईईईऊऊऊऊऊऊऊऊ |

चूत की दीवारों में हाहाकार मच गया, दर्द के मारे चूत का बुरा हाल हो गया, रीमा ने मुट्ठिया भीच ली, उसके जबड़े सख्त हो गए और अपने निचले ओठो को दांतों के बीच में कसकर दबा लिया | पुरे शरीर को कड़ा करके दर्द बर्दाश्त करने की कोशिश करने लगी |

चूत की दीवारे पूरा जोर लगाकर लंड को बाहर ठेलने की कोशिश कर रही थी लेकिन रोहित कमर से पूरा दबाव बनाये हुए था, जिससे दर्द से फाड़फाड़ती चूत की दीवारों अपनी हर कोशिस के बाद भी लंड को बाहर की तरफ ठेलने में नाकाम रही | चूत की मखमली चिकनी गीली दीवारों के पास और कोई रास्ता ही नहीं बचा था, आखिर रोहित के गरम लोहे जैसे सख्त, खून के भरने से फूलकर मुसल बन गए मोटे लंड के फूले हुए सुपाडे को अपने आगोश में लेना ही पड़ा, चूत की गुलाबी दीवारों की सलवटे फैलने लगी | रीमा दर्द से चीखने लगी, रोहित की सख्त पकड़ के नीचे उसका पूरा कसमसाने लगा, खुद को रोहित की पकड़ से आजाद करने की कोशिश करने लगी | पैर पटकने लगी, अपनी गुदाज जांघो को सिकोड़ने लगी, नितम्बो को नीचे की तरफ दबाने लगी ताकि भीषण दर्द से बेहाल रीमा की चूत से सुपाडा बाहर निकल जाये |

रोहित ने अभी सिर्फ अपने लंड का सुपाडा घुसाया था और रीमा की दर्द भरी कराह सुनकर वो सोच में पड़ गया | अभी इसका ये हाल है तो जब पूरा लंड जायेगा ये तो बेहोश ही हो जाएगी | रीमा की हालत देखकर रोहित रीमा की चूत से लंड निकालने वाला ही था लेकिन निकाला नहीं बल्कि, रोहित ने रीमा की ओठो पर ओठ रख दिए और उसे बेतहाशा चूमने लगा | कुछ देर तक चूमता ही रहा |

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[SIZE=150%] दर्द से परेशान रीमा ने रोहित की कमर को घेरकर ऊपर चुताड़ो तक अपनी गोरी जांघे सटा दी और रोहित के नितम्बो को जकड लिया | रोहित रीमा को चुमते चुमते ही कमर हिलाने लगा |

रीमा नहीं चाहती थी कि रोहित उस पर दया करके उसकी कसी हुई चूत से जो अभी भीषण दर्द से वेहाल में से लंड बाहर निकाल ले |रोहित भी समझ गया रीमा दर्द बर्दाश्त कर रही है | एक तरह से रीमा रोहित की कमर को अपनी गोरी गुदाज जांघो से कसकर जकड लिया, और दर्द बर्दाश्त करने की कोशिश करने लगी | अब उसे कुछ देर रीमा की गोरी गुदाज जांघो के बंधन में रहकर ही कमर हिला हिला कर रीमा को चोदना होगा |

दोनों के बदनो की गरमी एक दूसरे में घुलने लगी, पसीना एक दूसरे में मिलने लगा और गरम गरम सांसे एक दूसरे की बदन से टकराने लगी | रीमा ने रोहित की कमर पर बनाये जांघो का कसाव को ढीला कर दिया, रोहित उसका इशारा समझ गया, रोहित ने कमर को हल्का सा पीछे लेकर झटका दिया, लेकिन लंड अपनी जगह से चूत थोडा और आगे खिसक गया | फिर उसने धीरे धीरे लंड को रीमा की संकरी गुलाबी चिकनी चूत में उतारना शुरू कर दिया |

रोहित ने रीमा को अभी हलके हलके धक्के लगाकर चूत के मुहाने की दीवारों को नरम करने में लगा था | जितना अन्दर तक लंड घुस गया था वहां तक धक्के मार रहा था | दर्द के बावजूद भी रीमा की मादक कराहे निकल रही थी - यस यस आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्आ ऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह यस यस चोदो मुझे, चोदो इस चूत को, कसकर चोदो|

कुछ देर रोहित ने अपनी कमर पर पूरा जोर डालकर एक तगड़ा झटका लगाया और लंड थोडा और अन्दर खिसक गया | इस अचानक हमले से चूत की दीवारों से भयानक घर्षण हुआ | चूत की गुलाबी गीली दीवारों को रोहित के लंड ने थोडा और चीर दिया, दीवारों की सलवटे फैलती चली गयी, भयानक घर्षण से रीमा की मक्खन जैसी नरम गुलाबी गीली दीवारों में जलन शुरू हो गयी, ऐसा लग रहा था किसी ने लोहे की गरम राड उसके चूत में घुसेड दिया हो| दर्द और जलन से रीमा की चूत की दीवारे बेहाल थी, दर्द के मारे चूत की दीवारों में खून का दौरान तेज हो गया था, और वो बेतहाशा फाड़फाड़ने लगी |

रीमा दर्द के कराहते हुए कांपते होठो से बोली - पेलो न बेदर्दी से, जो होगा देखा जायेगा, अब ठेल तो पूरा अन्दर तक, जितना ताकत से घुसेड सकते हो, डाल दो अन्दर तक, जहाँ तक जा सकता है जाने दो, उसके लिए राह बनावो, मेरी और मेरी चूत की परवाह न करो तुम, कब तक मेरी चूत के दर्द के चक्कर में लंड को इस तरह तड़पाते रहोगे | जब तक लंड चूत को चीरेगा नहीं, ये ऐसे ही नखरे दिखाती रहेगी | पेल दो पूरा लंड मेरी चूत की गहराई में |

रोहित ने रीमा को उलटा करकर घुटनों के बल ला दिया और पीछे से धीरे से उसकी दर्द से बेहाल चूत में मुसल लंड पेल दिया | रोहित रीमा को पीछे से चोद रहा था रीमा अपने चूत दाने को सहलाकर अपना ध्यान दर्द से हटा रही थी | रीमा को पता था की जब रोहित का लंड उसकी संकरी चूत के छेद को अन्दर गहराई तक चीरेगा तो उसे दर्द होना ही है |

रीमा ने अब आगे होने वाले दर्द को बर्दाश्त करने के लिए तकिये में अपना मुहँ दबा लिया, ओठ भींच लिए, मुट्ठियाँ भींच ली, और पैर के पंजो और उंगलियों को सिकोड़ कर खुद को दर्द झेलने के लिए तैयार कर लिया | रोहित ने एक लम्बा झटका लगाया

रीमा के मुहँ से घुटी घुटी चीख निकल गयी, उसके दोनों आँखों में आंसू आ गए लेकिन रोहित ने लंड पर दबाव बनाते हुए उसे रीमा की चूत में घुसेड़ना जारी रखा | रीमा कभी पैर पटकती कभी सर झटकती | लेकिन रोहित ने रीमा की चूत में लंड पेलना जारी रखा | उसने रीमा की चूत को चोदना जारी रखा |

जरा जरा सा खिसकता हुआ लंड धीरे धीरे रीमा की चूत में समां रहा था | रीमा की चूत की आपस में चिपकी दीवारे रोहित के लंड के लिए जगह बनाती जा रही थी, चूत की दीवारों की सिलवटे गायब होती जा रही थी, मक्खन जैसे नरम गुलाबी दीवारे जितना ज्यादा फ़ैल सकती थी फ़ैल जा रही थी और रोहित के मुसल जैसे लंड को कसकर जकड़ ले रही थी | रोहित रीमा को लगातार चोद रहा था अपना लंड उसकी चूत में ठेलता जा रहा था | उसने फिर से रीमा को सीधा किया और पहले की तरह चोदने लगा | रीमा की पिंडलियाँ और नितम्ब उसकी चूत में हो रहे दर्द के कारन उसकी कमर को नीचे की तरफ ठेल रहे थे लेकिन रोहित रीमा को हिलने का कोई मौका नहीं दे रहा था | रीमा रोहित के लंड की खाल की सलवटे और फूली हुए नसे अपनी चूत की दीवारों पर महसूस कर रही थी लेकिन उसका दर्द के मारे बुरा हाल था, दर्द के कारन उसकी आँखो में आंसू आंसुओं की धारा बह रही थी,फिर भी उसने रोहित को रुकने का इशारा किया नहीं किया | रोहित भी लगातार धक्के लगाकर रीमा को चोदता रहा |

रोहित समझ गया था रीमा को भीषण दर्द हो रहा होगा, आखिर उसका लंड है ही इतना मोटा तगड़ा और रीमा की चूत में सालो से कोई लंड नहीं गया था, इसलिए उसकी चूत का छेद बहुत संकरा और दीवारे कुछ ज्यादा ही सख्त हो चुकी थी | रोहित के लिए इसमें कुछ ज्यादा अलग नहीं था, उसने जीतनी भी लडकियों को चोदा था लंड चूत में डालते समय लगभग सबका ही हाल ऐसा हो जाता था | रोहित ने रीमा का चेहरा तकिये से निकाला और उसके दर्द से भरे चेहरे को एकटक देखने लगा, उसकी आँखों के किनारे से होकर कान की तरफ बहती आंसुओं की धार पोंछी और पूरे चेहरे को बेतहाशा चूमने लगा | रोहित ने रीमा के ओठो पर अपने ओठ रख दिए और जीभ उसके मुहँ में घुसेड दी और कसकर उसे चूमने लगा | रोहित ने रीमा की पोजीशन फिर बदल दी , अब वो उसे घुटनों पर ले आया | रीमा को चुदाई में दर्द हो रहा था और रीमा कई सालो बाद चुद रही थी इसलिए उसे ज्यादा देर एक पोजीशन में चोदना ठीक भी नहीं था | रोहित ने अपने खून से भरे मोटे फूले हुए लंड को उसकी चूत पर रखा और फिर से एक झटके में रीमा की गीली दर्द से बेहाल चूत पेल दिया | रीमा के मुहँ से चीख निकल गयी | रोहित पीछे से उसकी चूत में सटासट लंड पेलने लगा |

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[SIZE=150%] रीमा फिर से भीषण दर्द से कराह उठी उसने बिस्तर में अपना मुहँ छिपा लिया, बिस्तर की चादर को कसकर जकड लिया, इस कारन उसकी चीख उसके चेहरे और बिस्तर के बीच में ही घुटकर रह गयी | रीमा की दोनों आँखों से दर्द के कारन लगातार आंसू बह रहे थे | रीमा से दर्द बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसने रोहित को रोक दिया और सीधी होकर पीठ के बल बिस्तर पर लेट गयी | रोहित रीमा के ऊपर आ गया, रीमा ने रोहित को अपनी बांहों में जकड लिया और उसकी कमर पर पैर जमा दिए | रीमा की गोरी गुदाज जांघे और कोमल हाथ रोहित के बलिष्ट शरीर के इर्द गिर्द लिपट गए | रोहित ने रीमा की चूत पर लंड सटाकर अन्दर की ओर पेल दिया और कमर हिलाकर धक्के लगाने लगा | रीमा से कसकर रोहित को जकड़ लिया और अपनी नाजुक संकरी चूत में उसका लंड फिर से लेने लगी | रीमा के मुहँ से अब भी दर्द भरी कराहे ही निकल रही थी |

रोहित जोर जोर से कमर हिलाकर रीमा की गुलाबी गीली चूत की दीवारों को जो उसके लंड को कसकर जकड़े थी को चीर कर, रगड़ता हुआ अपने मोटे मुसल जैसे लंड को रीमा की चूत में पेल रहा था, और हर धक्के के साथ चूत की गहराई के आखिरी छोर तक जाने का रास्ता बना रहा था |

रीमा कांपती हुए आवाज में – रोहित अब देर मत करो, दर्द होता है तो होने दो| लंड को पूरी ताकत से चूत की आखिरी गहराई तक उतार दो, पूरा का पूरा लंड चूत के अन्दर डाल दो| मुझे मेरे चूत के आखिरी कोने तक जमकर चोद डालो | मुझे तुमारा पूरा लंड चाहिए | जो होगा देखा जायेगा | ये चूत है ही इसी लायक, जब तक मोटा तगड़ा लोहे जैसा सख्त लंड इसे कुचलेगा नहीं ये ऐसे ही नखरे दिखाती रहेगी | इस पर जितनी दया दिखावोगे उतना ही ये नाटक करेगी,बिना सख्ती किये ये तुमारे लंड को अपनी गहराई में उतरने का रास्ता नहीं देने वाली | मरी चूत फटती है तो फट जाने दो |

रोहित के धक्के बदस्तूर जारी थे और रीमा की कराहे भी |

जलन के कारन रीमा की चूत की गुलाबी दीवारों से रिसने वाला पानी बंद हो गया था, जिससे उसकी चूत सूख गयी थी, इससे रोहित को लंड पेलने में ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा था और चूत की दीवारों से रगड़ भी ज्यादा हो रही थी जो असुविधा जनक था | कम से कम आरामदायक लंड पेलने के लिए वो आदर्श स्थिति नहीं थी | पहले रीमा की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी लेकिन अब उसकी दीवारे दर्द के कारन खुश्क हो गयी है | रोहित ने अपने लंड को बाहर निकाला और पास में पड़े चिकने तेल से सरोबार कर लिया | थोडा सा तेल रीमा की चूत के छेद पर उड़ेल दिया | फिर रीमा की चिकनी चूत के छेद पर रखकर ठेल दिया | रोहित का लंड रीमा की गुलाबी नरम चूत की दीवारों को चीरता हुआ अन्दर चला गया |

रोहित ने रीमा को सख्ती से जकड लिया और अपनी कमर पर पूरा जोर लगा दिया | रोहित का लंड वासना की आग में तप रही रीमा की चूत की दीवारों के प्रतिरोध को धराशाई करता हुआ, चीरता हुआ चूत की गहराईयों में जा धंसा | चूत की गुलाबी दीवारों की सलवटे गायब हो गयी, दीवारों के दोनों छोर अलग अलग हो गए और दर्द से कांपती रीमा की चूत की दीवारे फैलती चली गई और रोहित के लंड ने आखिरकार अपने जरुरत भर की जगह बना ली | इतनी भीषण रगड़ के कारन रीमा की चूत की गुलाबी मखमली दीवारे फिर से बुरी तरह जल उठी, वही भीषण दर्द फिर से लौट आया | दर्द से बेहाल रीमा की चूत की दीवारे तड़पते हुए रोहित के आग की तरह तप रहे मुसल जैसे मोटे लंड को अपनी जकड़न से बांधने की असफल कोशिश करने लगी, लेकिन अब न रोहित न ही रीमा को जलन की परवाह थी न दर्द की | रोहित ने कमर उठाई और फिर में अपना मुसल लंड रीमा की नाजुक सी चूत में पेल दिया | लंड के लिए राह बनाते हुए चूत की दीवारे फैलती चली गयी और अन्दर जाते ही रोहित के लंड को फिर से जकड लिया | रोहित अब बेदर्दी से बिना किसी दया के रीमा की चूत में लंड पेल रहा था |

इतना बड़ा लंड था कि रीमा की जांघो के बीच में बना संकरा सा चूत का छेद पूरी तरह एयरटाइट हो गया था, उसकी चूत पुरी तरह से भरी भरी महसूस हो रही थी जबकि लंड का कुछ भाग अभी भी बाहर था | रोहित तेजी से रीमा की चूत में लंड ठेल रहा था |

रोहित हर बार थोड़ी सी कमर उठाता और पूरा का पूरा लंड रीमा की चूत में ठेल देता, हर धक्के के साथ रीमा के मुहँ से एक वासना भरी मादक कराह निकलती | जब रीमा का दर्द थोडा कम हुआ तो उसने आंखे खोली, और समाने रोहित का चेहरा देखकर हल्का सा शर्मा गयी | मै अपने देवर की बांहों में, उसके समाने पूरी तरह से नंगी होकर उससे अपने बदन की आग बुझवा रही हूँ | मेरा सगा देवर मुझे चोद रहा है और मै जांघे उठा कर अपनी नाजुक सी फूल सी कोमल चूत में उसका लंड ले रही हूँ |

इतना मोटा लंड की लगता है जैसे चूत का कोना कोना लंड से भर गया हो अब कही भी १ मिमी की भी गुंजाईश नहीं है | इस तरह से कोई लंड से उसकी चूत ऊपर तक टाइट पैक हो जाएगी, उसके अन्दर की सारी जगह घेर कर उसकी चूत को चूत के मुहँ तक इस कदर कसकर भर देगा उसने कभी सोचा नहीं था | रोहित ने कमर हिलाने की स्पीड तेज कर दी, हर धक्के के साथ रोहित का मोटा लंड रीमा की चूत का हर कोना भरता हुआ उसकी अंतर की गहराई के आखिर छोर तक पहुँच जाता और फिर एक झटके में बाहर आकर फिर अन्दर चला जाता | रीमा की चूत की दीवारे फिर से चूत रस छोड़ने लगी थी | लगातार चोदते रहने से रोहित बुरी तरह हांफने लगा था | वो कुछ सुस्ताना चाहता था ताकि उसकी सांसे काबू में आ सके | उसने रीमा से दोनों हाथ अपने चुताड़ो पर रखकर उन्हें फ़ैलाने को कहा | रीमा से अपनी जांघो के सर से मिला दिया और दोनों हाथो से चुतड फैला दिए | रोहित ने धीरे से उसकी चूत में लंड घुसेडा और हलके धक्के धक्के लगाने लगा | रीमा अपनी नाजुक सी छोटी गुलाबी चूत में इतना मोटा लंड देखकर हैरान थी |रोहित ने आइस्ते आइस्ते लयबद्ध तरीके से रीमा की चूत में लंड पेलने लगा |

रीमा ने फिर से चुतड छोड़ अपनी जांघे सीधे करी और रोहित की कमर पर अपनी जांघो का घेरा बना लिया | रोहित रीमा को चूमता हु आराम से धक्के लगा रहा था | रीमा भी इस आराम से हो रही चुदाई का पूरा मजा ले रही थी |

रोहित को अब लंड को चूत में पेलने के लिए थोडा कम ताकत लगानी पड़ रही थी | रोहित ने एक करारा झटका लगाया और लंड चूत को चीरता हुआ सीधा रीमा के बच्चे दानी के मुहँ से टकराया और रोहित ने पूरा जोर लगा दिया | रोहित का मोटा लम्बा लंड पूरा का पूरा रीमा की नाजुक चूत में समा गया, रोहित को ये करने में समय कुछ ज्यादा लगा लेकिन आखिरकार उसने कर डाला |

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[SIZE=150%] रीमा की आंखे फ़ैल गयी, रीमा की बच्चे दानी के मुहँ पर बहुत दबाव पड़ रहा था लेकिन रोहित कुछ देर के लिए वैसे ही ठहर गया | फिर रीमा के स्तनों को जकड़कर धक्के लगाने लगा | रीमा का पूरा शरीर कांपने लगा, शायद उसे इस दर्द में भी ओर्गास्म हो गया था | कुछ देर तक वो तेज तेज कराहाती रही और उसका पूरा शरीर कांपता रहा |

रीमा के मुहँ से कामुक और दर्द भरी कराह निकलती रही-यस यस यस यस यस ओह गॉड आह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्ह स्सस्सस्स आःह्ह ओह्ह्ह्हह स्सस्सस्स ओह गॉड, ओह्ह्ह्ह गॉड यस यस यस

जब वो थोडा शांत हुई-मुझे माफ़ कर दो रोहित मेरा खुद पर काबू ही नहीं है, मै फिर से झड गयी |

रोहित उसकी बात अनसुनी करते हुए किसी और ही धुन में था,, हांफते हुए बोला - तुमने कर दिखाया |

रीमा –क्या?

रोहित उसका हाथ पकड़कर चूत के पास ले गया |

रीमा समझ गयी, उसे यकीन ही नहीं हुआ, इतना लम्बा मोटा मुसल जैसा लंड, उसकी चूत में पूरा का पूरा समां गया | रीमा रोहित के लंड को पेट के निचले हिस्से में महसूस कर रही थी | रीमा ने अपनी वासना से भरी सुर्ख आँखों से रोहित की तरफ देखा | रोहित ने सर हिलाया | रीमा अब सातवे आसमान पर थी, रोहित का लंड पूरा का पूरा उसके अन्दर था ये उसके लिए गौरव की बात थी | जैसे आदमियों के लिए लगातार बिना रुके कई चूत चोदना गौरव की बात की होती है उसी तरह से कोई भी औरत हो जब वो बड़े से बड़ा लंड अपनी चूत में पूरा का पूरा घुसेड लेती है तो उसके अन्दर का स्त्री गौरव चरम पर पंहुच जाता है | उसके अन्दर का सब डर भय मिट गया था, अब उसे किस बात की चिंता होनी थी अब तो वह खुलकर चुदेगी, हचक हचक के चुदेगी |

रीमा – अब बस जी भर के चोद लो जैसे मुझे चोदना चाहते हो |

रीमा बस अभी झड़ी थी इसलिए रोहित ने हल्के हल्के चूत में लंड पेलना जारी रखने का फैसला किया | रोहित ने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए | जैसे जैसे लंड चूत में अन्दर बाहर होता रीमा के मुहँ से सिकरियां निकलने लगती|

रोहित ने धीरे धीरे फिर चोदने की स्पीड बढ़ा दी और अब वो रीमा की चूत की अंतिम गहराई तक सीधे सीधे चोदने लगा, रीमा की चूत को इतने गहराई तक कभी किसी ने नहीं चोदा था, जैसे रोहित चोद रहा था | एक तो मोटा सा लंड, वो भी भी पूरी ताकत के साथ चूत की दीवारों को चीरता हुआ, आखिरी छोर पर जाकर बच्चेदानी के मुहँ से टकरा रहा था |

रोहित का लंड चूत का छेद पूरी तरह से भरते हुए चूत की दीवारों से इस कदर चिपका जाता की रीमा लंड के ऊपर की हर सिकुडन, फूली हुई नसे, यहाँ तक की उसके लंड में हो रहे खून के तेज बहाव को महसूस कर सकती थी | तभी रोहित ने लंड को थोडा और अन्दर ठेलने की कोशिश की | चूत की दीवारे अपनी अंतिम सीमा तक फ़ैल गयी | रीमा को महसूस हुआ की रोहित का लंड नाभि से बस कुछ ही नीचे गहरे से उसकी टाइट चूत में धंसा हुआ है | रोहित ने रीमा के ओठो को अपने मुहँ में ले लिया और अपनी जीभ उसके मुहँ में डाल दी और दोनों के ओठ जीभ आपस में गुथाम्गुत्था हो गए |

रोहित ने महसूस किया की अब रीमा की चूत का संकरा छेद थोडा सा खुल गया है और उसकी चूत के बीच की दीवारों की संकरी जगह फ़ैलने लगी है, अब उसके लिए लंड पेलना थोडा थोडा आसान हो गया है , रीमा की चूत की दीवारों का विरोध अब कमजोर हो गया है और उनका लंड पर कसाव भी ढीला हो चला है | रीमा को चोदना अब रोहित के लिए पहले से ज्यादा आसान है, रीमा की चूत रोहित के मोटे लम्बे लंड के मुताबिक खुद को एडजस्ट कर चुकी थी | अब रोहित चोदने की स्पीड मनमुताबिक घटा बढ़ा सकता था | ऐसा नहीं है की लंड में दर्द नहीं होता,जब चूत कसी हुई हो तो लंड को भी उसे चोदने में दिक्कत होती है | अब रोहित के लंड पर दबाव कम पड़ रहा था और वो आसानी से रीमा की चूत में अन्दर तक जा रहा था | रोहित तेजी से धक्के धक्के लगाते हुए बीच में पूरा लंड अन्दर तक पेल के कुछ देर रुक जाता |

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[SIZE=150%] रीमा की चूत की दीवारे अपनी अधिकतम सीमा तक फ़ैल कर रोहित के लंड को अपने आगोश में लेने की पूरी कोशिश करती | इसी के चलते बच्चे दानी भी काफी ऊपर तक उठ जाती और रीमा को नाभि के नीचे तक रोहित का लंड महसूस होता | चूत की इस गहराई तक कोई लंड जा सकता है उसने सपने में भी नहीं सोचा था | लगातार बच्चे दानी पर ठोकर लगने से उसको हलक हल्का दर्द होने लगा था लेकिन उसने रोहित को ये बात नहीं बताई | वो रीमा के इस नए दर्द से बेपरवाह मोटे मुसल जैसे लंड को रीमा की संकरी चूत में उसके आखिर छोर तक एक झटके में पेल देता | इस तरह से चोदने से रीमा एक तरफ आनंद में गोते लगाने लगाती दूसरी तरह उसे दर्द भी सहना पड़ता | लेकिन रीमा चुदाई के उत्तेजना में सब कुछ भूल जाती, चूत की दीवारों से लगातार पानी रिस रहा था और दोनों पसीने से नहाये हुए थे | रोहित को लगाने लगा की अब वो ज्यादा देर तक रीमा को चोद नहीं पायेगा | उसका चरम अब करीब था, रीमा तो दो बार पहले ही झड चुकी थी | फिर भी रोहित चाहता था कि रीमा उसके झड़ने से पहले ही झड जाये | यही सोचकर उसने धक्को की स्पीड थोड़ी कम कर दी | रीमा का वासना से तपता शरीर उसके मन के नियंत्रण से पहले ही बाहर था | उसकी गीली चूत के अन्दर मचे तूफान को शांत करने के लिए किस तरह चूत की दीवारे लंड के चारो तरफ फैलती चली जा रही थी | उसका पूरा शरीर कापने लगा था, उसके स्तन और शरीर में अकडन आ गयी थी, पूरा शरीर पसीने से नहाया हुआ था | रोहित ने रीमा की हालत का अंदाजा लगा लिया, वो भी ज्यादा देर तक नहीं रुक पायेगी | इसलिए अपना हाथ रीमा के चुतड के नीचे ले जाकर, उसके नरम ठोस गोल चुतड को अपनी हथेली में भरकर, रीमा को अपनी तरफ ऊपर की तरफ ठेलने लगा | रीमा की कमर ऊपर उठने से उसकी चूत का छेद और चौड़ा हो गया, रोहित ने तेजी से अपना मोटा मुसल जैसा लंड रीमा की चूत में पेल दिया | लंड रीमा की दीवारों को फाड़ता हुआ चूत की जड़ में जाकर बच्चे दानी के मुहँ से जोर से टकराया |

जिन चूत की दीवारों ने इतने मोटे लंड को बड़े आराम से अन्दर जाने दिया, खुद को फैलाकर फैलाकर लंड के लिए रास्ता बनाया, उसे चूत की दीवारों की कुचलने रगड़ने चीरने में बिलकुल भी दया नहीं आई | टक्कर इतनी जोर से लगी की रीमा की चीख निकल गयी | कमर ऊपर उठने पूरा लंड चूत में जाकर धंस गया और रोहित ने भी बड़ी बेरहमी से लंड को पेला था | रोहित ने फिर से उसी स्पीड से लंड निकालकर अन्दर डाल दिया | रीमा के पैर कमर पिंडलिया चूत की इस गहराई में इतनी जोरदार टक्कर के कारन कांपने लगे | दर्द और उत्तेजना के कारन रीमा की आंखे बंद थी | रोहित झटके पर झटके लगा रहा था और पूरी गहराई तक जाकर जोरदार टक्कर मार रहा था | उसे रीमा को दर्द देने में मजा आ रह था, पहली बार रीमा के दर्द भरे चेहरे को देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी|

एक हाथ वो रीमा के चुतड के नीचे लगाये था जबकि दूसरे हाथ से बारी बारी से रीमा के स्तनों को बुरी तरह मसला रहा था | रीमा की उत्तेजना चरम पर थी इसलिए उसे इस तरह से स्तन मसलवाने में भी आनंद महसूस हो रहा था लेकिन रोहित तो सिर्फ दर्द देने के लिए रीमा की छाती को बुरी तरह मसल रहा था | रोहित अब रीमा की चूत में इतने जोरदार झटके लगा रहा था की उसकी गोलिया रीमा के चुताड़ो और गांड से टकराने लगी थी | रीमा वासना से सरोबार हो आनंद के सागर में गोते लगा रही थी, उसे तो इस बात का अहसास ही नहीं था कि झड़ने की कगार पर पहुँच चूका रोहित अब उसे पूरी स्पीड से चोद रहा था, उसे अपनी चूत की गहराई में लंड के सुपाडे से लगने वाली जोरदार ठोकर से होने वाले दर्द का भी अहसास नहीं था, उसके कोमल से गोरे स्तनों पर नाखून गड़ाती रोहित की उंगलियो का भी होश नहीं था, रोहित की वजह से गोरे स्तन लाल हो चले थे और उन पर नाखुनो के निशान साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे |

रीमा वासना के परमानन्द में डूबी हुई थी और बडबडा रही थी - ओह यस ओह यस, चोदो मुझे, अन्दर तक चोदो मुझे, अपने मोटे लंड से फाड़ दो मेरी चूत को, चीर के रख दी इन जालिम चूत की दीवारों को, दिन रात ये मुझे वासना की आग में जलाती रहती है, बुझा दो इनकी आग, मसल कर रख दो इन्हें, चोदो रोहित और जोर से चोदो मुझे

रीमा ने शरीर में जबदस्त अकडन आ गयी थी, उसने अपना सर तकिये में दबा लिया | उसके दिमाग में प्रियम की शक्ल कौंध गयी, कैसे वो उसका मुहँ चोद रहा था, कैसे झटका मर कर ऊसने लगभग उसका दम ही घोट दिया था | वैसे ही उसका बाप मुझे बड़ी बेदर्दी से चोद रहा है,इसने मेरी चूत को ऐसे चोदा है जैसे मुझे इससे पहले किसी ने नहीं चोदा, मेरी छोटी सी नाजुक सी चूत में अपना मोटा सा मुसल लंड डालकर उसे सुरंग बना दिया है | इतनी तेज पेलता है की मेरी जान निकल जाती है | ठोकरे मार मार कर मेरी बच्चेदानी सुजा दी होगी, इतना तो पक्का है | इतन दर्द उसे पुरे जीवन में नहीं हुआ जितना रोहित ने चुदाई में दिया है, इसी दर्द के लिए ही तो तड़प रही थी, यही तो वो चाहती थी कोई उसे मसले कुचले रगड़े पेले और जबदस्त पेले | औरत की जिंदगी यही है उसे दर्द में ही मजा आता है | तभी रोहित का एक तेज झटका और उसकी कमर और पिंडली में भीषण दर्द पैदा कर गया, रीमा- आआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह ओअओअओअओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह गॉड मर गई ओह गॉड |

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[SIZE=150%] रोहित नहीं रुका उसने एक और करार झटका दिया और रीमा का अकड़ा हुआ शरीर कांपने लगा| उसकी कमर नितम्ब जांघे, पेट सब कुछ अपने आप हिलाने लगा, वो झड़ने लगी | पूरा शरीर कंपकपी से कापने लगा, रोहित कुछ पल के थम सा गया | रीमा के हाथ पांव सब ढीले पड़ने लगे| उसकी जांघे की पकड़ अब शिथिल हो चली | रीमा का कम्पन थमते ही रोहित ने टॉप गियर लगा दिया, जितनी तेज लंड चूत में पेल सकता था पेलने लगा| रीमा की चूत की गहराई में लग रही ठोकर से रीमा को फिर दर्द होने लगा लेकिन वो जानती थी रोहित अब बस निपटने वाला है इसलिए आंख बंद करके ओठ भींच के दर्द बर्दास्त करने लगी | रोहित जितने गहरे जितने तेज धक्के लगा सकता था लगा रहा था |

वो रीमा के अन्दर समां जाने को आतुर था | रोहित के मुहँ से भी कराहने की आवाज निकलने लगी | रीमा बेसब्री से ओठ दबाये, बच्चेदानी पर लग रहो जोरदार ठोकर से होने वाला दर्द बर्दास्त कर रही थी | वो इसी तरह से चुदने के तो ख्वाब देखती थी |आज रोहित उसका ख्वाब पूरा कर रहा था, भले ही इसमे दर्द हो लेकिन उसकी सालो की दबी कामना पूरी हो रही थी | चूत के आखिरी कोने तक हचक हचक के चुदाई, जिसमे चूत का कोई कोना बचे ना | पूरी चूत लंड से भरी हो और हवा जाने के भी जगह ना हो |

रोहित के कराहने की आवाज और तेज हो गयी | रोहित रीमा को बेतहाशा चूमने लगा, अपनी लार और जीभ दोनों उसके मुहँ में उड़ेल दी औरउसके मुहँ की लार को पीने की कोशिश करने लगा | रोहित की गोलियां फूलने लगी, उनके अन्दर भरा गरम गाढ़ा लंड रह ऊपर की तरह बह चला | तेज कराहने की आवाज के साथ अपने कुछ अंतिम धक्के अपनी पूरी ताकत से लगाने लगा | एक धक्का इतना तेज था की रीमा दर्द से बिलबिला गयी और उसकी कमर अपने आप नीचे की तरफ खिसक गयी| रोहित ने झट से चुतड के नीचे लगे हाथ से उसकी कमर को ऊपर उठाया और चूत में अन्दर तक लंड पेल दिया |

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हर धक्के के साथ रोहित को अहसास हो रहा था की उसके अन्दर कोई ज्वालामुखी फटने वाला है और उसके गरम लावे से वो रीमा की चूत का हर कोना भर देगा | उसकी लटकती गोलियों से गरम सफ़ेद लावा ऊपर की तरफ बह निकला और अगले तेज झटके के साथ उसके अन्दर का गरम सफ़ेद गाढ़ा लावा तेज पिचकारी के साथ लंड के छेद से निकल कर रीमा की चूत में गिरने लगा |

पहला शूट सीधे रीमा की बच्चे दानी से टकराया | रोहित ने झटके लगाने नहीं रोके, लेकिन लंड को वो चूत की गहराई में ही आगे पीछे कर रहा था | एक दो तीन .......और इसी तरह 15 छोटी पिचकारियो से उसने रीमा की चूत लबालब भर दी |

रोहित का लावे जैसा गरम लंड रह, चुदाई से आग की भट्ठी बन गयी चूत की दीवारों पर बिलकुल वैसा ही था जैसा गरम तवे पर पानी की बूंदे | रोहित के लंड रस से रीमा की चूत की दीवारे तर हो गयी | उनकी बरसो से लंड रस से तर होने की मुराद पूरी हो गयी | रोहित का गाढ़ा सफ़ेद लंड रस इतना यदा था की रीमा की चूत के दीवारे उसे रोक नहीं पाई और उनसे रिसकर वो बाहर चूत के चारो तरफ छिटकने लगा |

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[SIZE=150%] रोहित का लावे जैसा गरम लंड रह, चुदाई से आग की भट्ठी बन गयी चूत की दीवारों पर बिलकुल वैसा ही था जैसा गरम तवे पर पानी की बूंदे | रोहित के लंड रस से रीमा की चूत की दीवारे तर हो गयी | उनकी बरसो से लंड रस से तर होने की मुराद पूरी हो गयी | रोहित का गाढ़ा सफ़ेद लंड रस इतना यदा था की रीमा की चूत के दीवारे उसे रोक नहीं पाई और उनसे रिसकर वो बाहर चूत के चारो तरफ छिटकने लगा |

रोहित ने झड़ने के बाद रीमा की चूत की गहराई में हलके हलके धक्के लगाने जारी रखे, रीमा की लंड रस से भरी चूत में लम्बे गहरे धक्के लगाता रहा, जिससे उसका लंड रस रीमा की चूत रस के साथ अच्छी तरह मथ गया | रोहित न्र धीरे धीरे स्पीड कम करते हुए कुछ देर बाद धक्के लगाने बिलकुल बंद कर दिए | रीमा की लंड रस से भरी चूत से उसका लंड फिसल कर बाहर आ गया | उसका लंड रीमा की चूत रस और अपने ही सफ़ेद लंड रस से पूरी तरह सना हुआ था | जैसे ही रीमा की चूत से रोहित का लंड निकल, रीमा की चूत से लंड रस की एक धार सी बह निकली |

दोनों पसीने से कई बार नहा चुके थे, रोहित अपने लंड को लंड रस से सनी चूत की गहराई में ठेल कर थका हुआ हाफता हुआ रीमा के ऊपर पसर गया और रीमा के नरम होंते स्तनों पर ही सर रखकर लेट गया | रीमा ने भी रोहित को बांहों में भर लिया और उसके बाल सहलाने लगी |

रीमा और रोहित दोनों की सांसे उखड़ी हुई थी, दोनों सांसो को काबू में करने लगे | रीमा अपनी चूत में वो अभी भी हलका कम्पन महसूस कर रही थी | रोहित का लंड रीमा की चूत के अन्दर ही सिकुड़ने लगा था | रीमा का पूरा शरीर इस तकलीफ भरी जोरदार चुदाई से थक के चूर हो चूका था, उसकी कमर में हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था | रीमा संतुष्ट थी तृप्त थी लेकिन उसे अजीब सा लग रह था, उसका देवर उसकी बांहों में पड़ा अपनी सांसे काबू में कर रहा था | उसने कभी सपने में भी सोचा नहीं था की वो अपने देवर से ही चुदेगी, उसकी वासना और हवस की पूर्ति उसका देवर करेगा | लेकिन अब उसकी हवस का पिटारा खुल चूका था, अब पीछे जाने का कोई मतलब नहीं रहा गया था | उसके देवर का मोटा लंड उसकी गीली चूत के अन्दर पड़ा हुआ, उसे लंड ही तो चाहिये था, चाहे आदमी का हो या बच्चे का, उसे खड़ा लंड चाहिए था जो उसको चोद सके, जो उसकी चूत की गहराई तक जाकर उसकी चूत की दीवारों की मालिश कर सके, उसके औरतपन को लूट ले , उसके जिस्म को जीभर के भोगे सके, उसके स्तनों को जमकर निचोड़ सके, उसे उसके औरत का अहसास कराये, एक समपूर्ण औरत | उसके जिस्म की वासना को तृप्त करे, उसे एक तृप्त औरत का अहसास कराये | अब वो इस बात से इंकार नहीं कर सकती थी की वो एक औरत है और उसे अपनी वासना पूर्ति के लिए एक आदमी (लंड) की जरुरत है जो उसे चोद सके, उसे तृप्त कर सके, उसके जिस्म की भूख मिटा सके |

क्या वो जिंदगी के ऐसे दौर में पंहुच गयी जहाँ उसका अपनी कामनाओं, वासनाओं पर काबू नहीं रहा, क्या उसका शरीर उसके नियंत्रण से बाहर जा रहा है | क्या वो अपनी वासना और हवस की इस कदर गुलाम बन चुकी है की उसे न देवर के रिश्ते का कोई लिहाज रहा न उसके बेटे से | क्या उसके जीवन में नैतिकता के लिए अब कोई जगह नहीं बची है | क्या शरीर की हवस उसे तृप्त करना अब उसके जीवन लक्ष्य है, क्या वासना की आग मे तड़पते अपने बदन की आग बुझाना ही सबसे जरुरी है | क्या आने वाले दिनों में मै बिना लंड के रह पाउंगी | कही चुदाई मेरे जिस्म की ऐसी जरुरत तो नहीं बन जाएगी कि उसके लिए मै कोई भी हद पार कर जाऊ | क्या आने वाले दिनों में रोहित और प्रियम के लंड मेरे जिस्म की जरुरत बन जायेगें, क्या मै उनके लंड की दासी बन जाउंगी | इतने सालो तक चुदाई के लिए तड़पी हूँ लेकिन क्या ये चुदाई अब मुझे अपना गुलाम तो नहीं बना लेगी | मन में ऐसे न जाने कितने विचार आ जा रहे थे | तभी उसने रोहित को अपना नरम हो चूका स्तन सहलाते चूसते देखा| उसकी तरफ देख कर हल्की स्माइल करी | रोहित स्तन के अलावा उसके बाकि शरीर पर भी हाथ फिरने लगा, उसका लम्बा मोटा लंड अब सिकुड़ कर धीरे धीरे चूत से खिसककर बाहर निकलने लगा था | रीमा तो चाहती थी की रोहित का लंड इसी तरह उसकी चूत की गहराई में घुसकर आराम फरमाता रहे, लेकिन ये संभव कहाँ था | रोहित के लंडरस और चूतरस से सने सिकुड़े लंड के निकलते ही रीमा की चिकनी सफाचट चूत से लंडरस और चूत रस का मिश्रण निकल कर बहने लगा |

रीमा रोहित के लंड रस को बेकार नहीं जाने देना चाहती थी, इसलिए उसने झट से उठकर उसका सारा लंड रस चूत के अन्दर से निचोड़ हथेली पर रख लिए, और पी गयी | जब वो खडी होने के लिए उठी तो उसके पांवों में लड्खाहट थी और उसकी नाभि के नीचे हो रहे दर्द का उसको अहसाह हुआ | इसलिए फिर से बेड पर पसर गयी और रोहित से लिपट लेट गयी | दोनों एक दूसरे को सहलाने लगे |

रोहित के लिए रीमा को चोदना किसी स्वर्ग की सैर से कम नहीं था | रोहित रीमा की नाभि में उंगली घुमाते हुए – मजा आया रीमा|

रीमा - हूँ |

रोहित - क्या हूँ?

रीमा खामोश रही, उसे नहीं समझ आ रहा था क्या बोले, उसे हल्की हल्की शर्म भी लग रही थी | वो वहां से उठकर जाना चाहती थी लेकिन रोहित की गिरफ्त से निकलने का बहाना नहीं मिल रहा था |

रोहित - रीमा कुछ बोलो न, मजा आया न, दम निकल गया मेरा, कुछ तो बोलो | रोहित ने एक चिकोटी काट ली |

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[SIZE=150%] रीमा - आऔऊऊऊऊउच, क्या कर रहे हो |

रोहित - जो पूछ रहा हूँ उसका जवाब दो न |

रीमा - ऊऊफ़ बाबा क्या बोलू मै |

रोहित - कुछ भी जो तुमारा मन करे, कुछ सेक्सी सा, कुछ गन्दा सा, बतावो न इतने सालो बाद चुदकर मजा आया कि नहीं |

रीमा शिकायत करते हुए- छी छी.......... तुम्हे अभी भी उसी की पड़ी है, तुम मर्दों को औरतो के मुहँ से ये सब सुनने में बड़ा मजा आता है | .......................

थोड़ा रूककर बताने लगी - मुझे क्या खाक मजा आया, जान निकाल दी अपने मुसल लंड से बच्चेदानी पर ठोकर मार मार कर, अभी भी दर्द हो रहा है | इतना बड़ा लंड था पूरा का पूरा एक झटके में ही पेल देते थे |

रोहित - चुदाई में लंड ही पेलते है ?

रीमा - हाँ लंड ही पलते है लेकिन ऐसे .................... मुझे तो चुदाई के कारन किसी बात का होश ही नहीं था, ऊपर से मेरी कमर उठा कर भी चोद दिया, जो कुछ बची कुची चूत फ़ैलने खिचने से रह गयी थी उसको भी चीर के फैला दिया | भला ऐसे भी कोई चोदता है, मेरी नाभि तक तुमारा वो मुसल लंड आ रहा था, मैंने महसूस किया है, मेरी चूत है कोई नरम मांस की सुरंग नहीं की अपना लंड पेलते ही जावो पेलते ही जावो | एक ही झटके में पूरा लंड चूत में पेल देते थे कलेजा मुहँ को आ जाता था | बच्चे दानी पर पक्का है सुजन आ गयी होगी, इतनी बेदर्दी से ठोकरे मारी है जान ही निकल जाती थी | अभी उठने को हुई, खड़ी भी न हो पाई | लगता है अगले दो तीन दिन तो ठीक से नहीं ही चल पाऊँगी |

रोहित - ड्रामा क्यों करती हो, कुछ भी तो नहीं हुआ है | अभी देखना कैसे चूतड़ उछाल उछाल कर चलोगी |

रीमा - तुम्हें कैसे पता चलेगा, लंड घुसता तो मेरे अन्दर था न, मेरा जिस्म गरम था और मेरी चूत भी गरम थी इसलिए ले लिया पूरा लंड अपने अन्दर लेकिन अब उसकी दीवारों में भी दर्द होना शुरू हो गया है |

रोहित सफाई देता हुआ – अरे तुम्ही ने तो कहा था हचक हचक के चोद दो, चूत की गहराई तक | मैंने चोद दिया |

रीमा-हाँ मैंने कहा था ताकि तुम थोडा निश्चिन्त होकर चुदाई करो, इसका ये मतलब नहीं था की मेरी बच्चेदानी ठोकरे मार के सुजा दो |

रोहित- अब ठीक से नहीं चोदता तो शिकायत करती, की चोदने में कसर क्यों छोड़ दी | और अगर तुम्हे दर्द हो रहा था तो बोली क्यों नहीं|

रीमा –अब तुम्हे क्या डिस्टर्ब करते, तुम मन लगाकर मेरी नाजुक से चूत को ऐसे चोद रहे थे, जैसे जिंदगी में आखिरी बार हो, इसलिए मैंने सोचा मै ही दर्द बर्दाश्त कर लू |

रोहित- तो अब शिकायत क्यों कर रही हूँ |

रीमा- मुझे लगा तुम समझोगे, तुम मर्द बस एक ही बात को ठीक से समझते हो लंड को चूत में कैसे पेलना है और कैसे चूत को चोदना है बाकि कुछ तुमारे पल्ले पड़ता ही नहीं | तुम्हे औरत के जिस्म में उस छेद के अलावा और कुछ दिखाई ही नहीं देता | भरा पूरा हांड मांस का जिस्म होता है, जैसे तुमारा है वैसे मेरा है | फिर भी जैसे ही लंड से गरम लावा निकलता है तुम मर्दों की बुद्धि के दरवाजे बंद हो जाते है |

रोहित हसने लगा-दर्द में ही तो मजा है, इतना पेल के इतनी अन्दर तक अगर तुमको न चोदता तो अभी भी तुम मेरा लंड हाथो मे लेकर सहला रही होती, तुमारी चुदास ख़तम नहीं होती|

रीमा – तुम सब मर्द एक जैसे होते हो, बस तुम्हे चूत से मतलब है औरत की, उसके नाजुक बदन की कोई परवाह ही नहीं, न ही उसकी भावनाओं की कोई क़द्र है | अपना पेट भर जाये, बस एक बार चोद लो फिर अगली चुदाई तक औरत जिन्दा है या मर गयी, कोई मतलब नहीं रहता | रीमा उसने करवट बदल ली |

रोहित - ऐसा नहीं है |

रोहित ने उसको पीछे से बांहों में भर लिया | उसका सिकुड़ा हुआ लंड रीमा के चुतड में छु रहा था | पता नहीं अब आगे क्या होने वाला था | रीमा रोहित की गिरफ्त से आजाद होकर उठकर नहाने के लिए जाने लगी | बेड से उठकर रीमा ने अपने आप को आईने में देखा, जितना वो सुबह से शाम तक सजी धजी थी सब रोहित ने लूट लिया , उसने अपनी छाती करीब को शीशे के करीब करते हुए, स्तनो पर नाखूनों से बने निशान देखने लगी, फिर एक टांग ऊठा कर नीचे चूत देखने लगी, उसकी गुलाबी चूत गहरे लाल रंग की लालिमा लिए हुए थी, ये उस मोटे लंड से बुरी तरह कुचलने मसलने की कारन हुआ था | उसकी चूत में हल्की सी सुजन सी आ गयी थी, और ये उसकी हवस की तृप्ति की ये एक छोटी सी कीमत थी |

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