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रीमा अन्दर से रो पड़ी, उसका प्रतिरोध एक पल में स्वाहा हो गया, उसका चट्टानी फौलादी इरादा बस जिस्म एक तरंग के भंवर में उड़ गया | मन में घनघोर निराशा भर गयी | उफफ्फ्फ्फ़ नानानान्नाहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीही क्या मेरा बदन भी ....................उफ्नफ्हींफ्फफ्फ्फ़ नहींहीहीहीहीहीही रीमा ये नहीं हो सकता .............................. इसको वही मिलेगा जो मै चाहूंगी | रीमा को यकीन नहीं हुआ उसके बदन की छुपी हुई खवाइश इस तरह की निर्लज्जता की हद तक बदरंग और डार्क हो सकती है | अब क्या बस यही दिन देखना बचा था उसे | एक गार्ड से गांड मरवाने का ख्याल ही उसको इतना घटिया लगा कि उसका मन कसैला हो गया लेकिन उसके बदन की प्रतिक्रिया कुछ और ही थी, आखिर हवस की दुनिया में दिमाग का क्या काम विचारो का क्या काम | उसके मन के कोने में दबा ये अनोखी वासना का डार्क रोमांच उसके शरीर का रोम रोम खड़ा हो गया | नहीं नहीं ये संभव नहीं है बिलकुल नहीं ..................
गार्ड ने रीमा की पिछली सुरंग की फौलादी जकड़न को चीरते हुए उसकी सुरंग में एक उंगली घुसेड़ दी |
रीमा ने मुहँ से एक लम्बी चीख निकल गयी - आआआआआआआआआआआअ ईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआआ |
उसका लंड रीमा की चूत की दरार पर रगडन खा रहा था | रीमा जिस्म के अन्दर की अनजानी सी वासना की तरंग से सिहर उठी लेकिन अगले ही पल वो अपनी नैतिकता की आवाज सुनकर अपनी चेतना में लौटी |
रीमा ने अपने अन्दर का सारा आत्मबल इकठ्ठा किया और गार्ड को जोर से झटका दिया - छोड़ो मुझे वरना मै शोर मचा दूँगी, फिर सारे गार्ड आ जायेंगे और तुमारा वो हस्र करेगें ....................जिंदगी भर ..................|
गार्ड का वासना का नशा काफूर हो गया ........ गार्ड एक झटके में पीछे हट गया | कुछ देर तक रीमा की गुस्से से लाल लाल आंखे देखता रहा | फिर निराश होकर - क्या मैडम दिखा दी न अपनी औकात | इससे अच्छी तो रंडी होती है पैसे भले ही लेती हो लेकिन कम से कम खड़े लंड को धोखा तो नहीं देती |
रीमा वैसे भी गुस्से से लाल थी गार्ड की बातो ने उसमे और पेट्रोल छिड़क दिया | रीमा ने उसे एक करारा चाटा रसीद कर दिया |
गार्ड भी झुन्झुला गया - एक तो अपना जिस्म दिखा दिखा कर लंड खड़ा कर देती हो और ऊपर से चोदने भी नहीं देती | क्या चाहती हो मैडम |
रीमा भी गुस्से की वजह से अपने काबू में नहीं थी - औकात में रह अपनी |
गार्ड - ठीक है मैडम, इतना कहकर गार्ड अपने कपड़े समेटने लगा |
गार्ड - अपनी चूत अपनी गांड में घुसेड़ लो, रखो अपनी चूत और गांड अपने पास, हाथ से काम चला लूँगा |
गुस्से में रीमा वही नंगी खड़ी कांपती रही | रीमा को लगा वो जीती बाजी जीतते जीतते हार गयी | गार्ड अपने कपड़े पहनने लगा, रीमा के लिए करो या मरो की स्थिति थी | आखिर क्या करे वो | गार्ड ने उसकी गांड में उंगली घुसेड़ कर उसके कुछ अनजाने अरमान जगा दिए थे | आग तो उसके तन बदन में भी लगी हुई थी लेकिन सबसे जरुरी था उसके लिए आजाद होना | वासना और आजादी के मानसिक द्वन्द के ताने बाने में रीमा उलझ कर रह गयी | एक गार्ड के साथ वो इस हद तक चली गयी यही क्या कम था लेकिन आगे जो भी वो सोच रहा था उसको करने की हिम्मत रीमा में नहीं थी |
गार्ड अपनी शर्ट पहन चूका था, वो अपने खड़े लंड को थामते हुए पेंट पहनने लगा |
रीमा को कुछ तो करना था वर्ना अब तक का किया सब ख़त्म - बस औरत की एक न पर सारी मर्दानगी लंड में जाकर घुस गयी |
गार्ड कुछ नहीं बोला |
रीमा - बड़ी कसमे खा रहे थे मुझे आजाद करवाने की, अब क्या निचुड़े लंड की तरह सारा जोश ख़तम हो गया |
गार्ड भी आवेश में - आप ने भी तो वादा किया था चूत मिलेगी चोदने को, आपके बस का कुछ है नहीं, आप रहने दो सारे बड़े लोग ऐसे ही होते है, लंड भी घोटना है और चूत के फटने से भी फटती है | |
रीमा - तुम न एक नंबर के गड फट्टू हो, तुमारे बस का ही नहीं था मुझे यहाँ से निकाल पाना | तुमसे अच्छे हिजड़े होते है कम से कम अपना वादा तो निभाते है |
गार्ड - मैडम आपके बस का नहीं है किसी से चुदवाना | फटती आपकी है चुदवाने में, शायद इसीलिए आपको आपके पति का लंड भी नसीब नहीं हुआ | मुझे छोड़ो आप अपने पति के ;लंड को नहीं खुस रख पाती होंगी शायद इसलिए जल्दी चले गए दुनिया से |
गार्ड की इस बात ने रीमा को अन्दर तक हिलाकर रख दिया |
गार्ड यही नहीं रुका - चूत कितनी भी खूबसूरत हो, कितनी भी अमीर हो चोदेगा तो उसे लंड ही | आपको अपने ऊपर इतना गुमान है लेकिन ऐसे गुमान का क्या फायदा तो चूत लंड खाने को ही तरस जाए | मेरी ख्वाइश का तो छोड़िये आप तो अपने मरहूम पति को भी नहीं देती होंगी | आप अपने रूप में अन्धी हो चुकी है |
रीमा के सब्र का बांध टूट गया , ऐसे उसे आजतक किसी ने चुनौती नहीं दी थी रीमा को अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा गुमान अपनी खूबसूरती और चूत पर ही था | गार्ड की इस बात ने रीमा के अस्तित्व की नीव ही हिला दी | एक औरत एक चूत के रूप में उसके अस्तित्व को ही नकार दिया | रीमा का पूरा वजूद ही हिल गया | | रीमा गार्ड की तरफ लपकी और एक जोरदार झन्नाटेदार झापड़ उसे रसीद कर दिया | उसके बाद बाथरूम में गहरी ख़ामोशी पसर गयी | रीमा और गार्ड दोनों ही सर झुकाए नीचे फर्श को देखते रहे |
कुछ देर बाद गार्ड बस अपने गाल को सहलाता अपनी पेंट ऊपर चढ़ाने लगा |
रीमा पछताने लगी उसे गार्ड की थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था | रीमा ने अपने हाथो अपनी आजदी का टिकट फाड़ दिया था | रीमा का गुस्सा अब उसकी लाचारी और पछतावे में बदलने लगा | उतर गया | रीमा पछताने लगी | आखिर गार्ड गलत क्या कह रहा है | अगर उसे चुदवाना नहीं था तो उसने उसको झूठी दिलासा क्यों दी उसके अरमान क्यों जगाये | क्अया गलती है गार्पड की | उसकी तो इतनी हिम्नीमत नहीं थी की रीमा के बदन को हाथ से छूकर तक देख सके | उसी ने तो उकसाया उसे | उसी ने गार्ड की हिम्मत को चार चाँद लगाये | अब उसकी हिम्मत इतनी बढ़ गयी की वो उसकी गांड में लंड पेलने के सपने देखने लगा | वो गांड जिसको रीमा ने आजतक किसी मर्द को हाथ नहीं लगाने दिया लंड पेलना तो द्दो की बात है | अपनी आजादी के लिए वो इतनी स्वार्थी हो जाएगी की किसी की भी भावनाओं से खेलेगी | ये जो भी हुआ, उसकी वजह से हुआ , बात यहाँ तक कभी पहुँचती ही नहीं अगर वो गार्ड को उसकी औकात में रखती और सच दिखाती | अब झूठ के तो पैर होते नहीं, एक झूठ को बचाने के लिए दूसरा बोलना पड़ा और नौबत यहाँ तक आ गयी | फिर भी उसकी उंगली गांड में जाते ही उसकी पिंडलियों और चूत में होने वाली सनसनाहट क्या थी | कही वो भी तो ..........नहीं रीमा बिल्कुल नहीं | आखिर अपने आत्मसम्मान को गिरवी रखकर रीमा वो ये काम कैसे कर सकती है जो उसने आज तक कभी नहीं किया | करना तो दूर कभी उसके गलती से भी ख्वाब नहीं देखे | क्या इसके बाद वो खुद से नजरे मिला पायेगी | वो अपने अतीत में घूमने लगी |
रीमा की दुनिया में वासना और हवस और सेक्स की दुनिया में सब कुछ गलत ही लगता था | उसे लगता था एक बार शादी के बाद सिर्फ पति के साथ ही चुदाई करनी चाहिए और पति के जाने के बाद वह इसी चीज दिमाग में भरकर जीती रही | रीमा को कभी एहसास ही नहीं हुआ कि औरत की ख्वाहिश भी हो सकती हैं औरत की वासना भी हो सकती है और उस वासना को औरत अकेले ही बुझा सकती है उसे पहली बार अपने अंदर की वासना का अहसास प्रियम और रोहित ने कराया | रोहित और प्रियम ने उसके मस्तिष्क की वर्जनाओं को तोड़ा जिनको लेकर वह काफी सालों से जी रही थी | प्रियम का लंड चूसकर और उसके बाद में रोहित के साथ में चुदाई करने के बाद में भी रीमां को समझ में आया कि सेक्स के कई रूप होते हैं पहले ही रीमां को लगता था सिर्फ चूत की चुदाई ही सेक्स का एक रूप है और बाकी सब गलत है लेकिन प्रियंम का लंड चूसने के बाद में उसके मन के अंदर का ये बंधन टूट गया इसी तरह से रोहित के साथ चुदाई करने के बाद में दूसरे पुरुष के साथ में लंड से चुदाई का खुला खेल करने का उसके मन का भरम टूट गया | जब उसने रिवर लाउन्ज में मालविका और कामिनी को बेधड़क गांड में लंड लेटे देखा था | कितनी बिंदास होकर कितनी बेफिक्र होकर वो अपनी गांड चुदवा रही थी मोटा मुसल लंड अपनी गुलाबी सुरंग की गहराइयो में उतार रही थी तो उसे देख देख कर रीमा हैरान हो रही थी | उसने मालविका और कामिनी को एक निचले दर्जे की चुद्द्कड़ औरते मान लिया था | उसे उस समय लग रहा था वो जो भी कर रही है वो घटिया है और इसलिए वो दोनों औरते भी घटिया है | लेकिन रोहिणी ने उसके दिमाग का ये चट्टान की तरह मजबूत बंधन भी तोड़ दिया | | रोहिणी ने रीमा के अंदर के और भी मानसिक बंधनों को तोड़ दिया रोहिणी ने उसे एक नया रास्ता दिखाया वह रास्ता था उसकी पिछली सुरंग का | रीमा को यकीन ही नहीं हुआ गाड़ की कुटाई से भी उसकी चूत में हलचल मच सकती है, न केवल हलचल बल्कि चूत का पानी छुडवा सकती है | रीमा के लिए ये सब एक अलग अनुभव था उर जब वो खुद इस अहसास से गुजारी तो उसे मालविका और कामिनी होने का मतलब समझ आया | रीमा को यकीन ही नहीं था कि इस तरह की वासना का भी कोई रूप होता है | लेकिन एक बार जब रीमा को एहसास हो गया उसके बाद उसके लिए सेक्स का एक नया मोर्चा खुल गया था | रीमा समझ गयी वासना में कुछ भी सही गलत नहीं होता | वासना की आग बस वासना की ही आग होती है, जो इसमें जलता है उसे ही पता होता है की वो क्या महसूस कर रहा हिया | बाकि दुनिया के लिए ये समझ पाना मुश्माकिल था | जिसने कभी चूत गांड में लंड नहीं लिया वो इसकी प्यास तड़प और दर्कोद को कैसे जान सकता है | रीमा को भी ऐसी ही एक अनजान सी तड़प ललचा रही थी | अब तो रीमा को किसी तरह की कोई शर्म और हया नहीं थी वह सेक्स के पूरी तरह से महसूस करने के चक्कर में रहती थी को सेक्स के पूरे मजे लेती थी और यही बात आज उसके काम आ रही थी आज वह इस गार्ड के साथ में वासना के जिस भंवर में फंसी फस करके अपनी आजादी की राह देख रही थी वहां पर उसे रोहिणी के सिखाये गुर बहुत काम आ रहे थे | शायद उसके अन्दर गांड में लंड लेने की लालसा शायद रोहिणी की ही पैदा की हुई थी या शायद उसे मालविका या कामिनी याद आ रही होंगी | रिवर लाउन्ज के वो सीन कभी भी रीमा की दिलो दिमाग से मिटे ही नहीं | शायद वहां वो सब कुछ इसीलिए इतने गौर से पूरी तरह से डूब कर देख रही थी | शायद उसे हमेशा के लिए सहेज लेना चाहती थी | आज जैसे ही मौका लगा अब सब कुछ आँखों के सामने तैर गया | वो अपनी वासना के आगे लाचार थी | उसकी अनचाही लालसा उसे उसी तरफ खीचे लिए जा रही थी | उसने आजतक कभी किसी का असली लंड अपनी गांड में नहीं लिया था लेकिन यही मौका था जब वो एक अनजान आदमी का लंड अपनी गांड में महसूस कर एक नया अनुभव ले सकती थी | उसने सोचा जब कामिनी अपनी गांड में लंड ले सकती है मालविका ले सकती है तो वो क्यों नहीं | क्या वो उनसे कम मॉडर्न है कम पढ़ी लिखी है | रोहिणी दीदी ने भी तो बोला था कट्टो अपने पिछवाड़े को मजबूत कर | एक बार लत लग गयी तो चूत चुदवाना भूल जाएगी | मजबूरी में ही सही लेकिन अपनी उन जंगली वासनाओं का पता आज तक रीमा को भी नहीं चला और रीमा की इस छिपी वासना का आगे भी किसी को पता तक नहीं चलेगा | रीमा ने सोचा कि इस वक्त उसके पास सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है, उसकी आजादी की आखिरी उम्मीद वही है | क्यों ना एक नया प्रयोग किया जाए उसे पता था गार्ड इसके बाद उसके लिए मर मिट जाने को राजी होजायेगा | वो किसी भी हाल में गार्ड को यहाँ से जाने कैसे दे सकती है
गार्ड ने रीमा की पिछली सुरंग की फौलादी जकड़न को चीरते हुए उसकी सुरंग में एक उंगली घुसेड़ दी |
रीमा ने मुहँ से एक लम्बी चीख निकल गयी - आआआआआआआआआआआअ ईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआआ |
उसका लंड रीमा की चूत की दरार पर रगडन खा रहा था | रीमा जिस्म के अन्दर की अनजानी सी वासना की तरंग से सिहर उठी लेकिन अगले ही पल वो अपनी नैतिकता की आवाज सुनकर अपनी चेतना में लौटी |
रीमा ने अपने अन्दर का सारा आत्मबल इकठ्ठा किया और गार्ड को जोर से झटका दिया - छोड़ो मुझे वरना मै शोर मचा दूँगी, फिर सारे गार्ड आ जायेंगे और तुमारा वो हस्र करेगें ....................जिंदगी भर ..................|
गार्ड का वासना का नशा काफूर हो गया ........ गार्ड एक झटके में पीछे हट गया | कुछ देर तक रीमा की गुस्से से लाल लाल आंखे देखता रहा | फिर निराश होकर - क्या मैडम दिखा दी न अपनी औकात | इससे अच्छी तो रंडी होती है पैसे भले ही लेती हो लेकिन कम से कम खड़े लंड को धोखा तो नहीं देती |
रीमा वैसे भी गुस्से से लाल थी गार्ड की बातो ने उसमे और पेट्रोल छिड़क दिया | रीमा ने उसे एक करारा चाटा रसीद कर दिया |
गार्ड भी झुन्झुला गया - एक तो अपना जिस्म दिखा दिखा कर लंड खड़ा कर देती हो और ऊपर से चोदने भी नहीं देती | क्या चाहती हो मैडम |
रीमा भी गुस्से की वजह से अपने काबू में नहीं थी - औकात में रह अपनी |
गार्ड - ठीक है मैडम, इतना कहकर गार्ड अपने कपड़े समेटने लगा |
गार्ड - अपनी चूत अपनी गांड में घुसेड़ लो, रखो अपनी चूत और गांड अपने पास, हाथ से काम चला लूँगा |
गुस्से में रीमा वही नंगी खड़ी कांपती रही | रीमा को लगा वो जीती बाजी जीतते जीतते हार गयी | गार्ड अपने कपड़े पहनने लगा, रीमा के लिए करो या मरो की स्थिति थी | आखिर क्या करे वो | गार्ड ने उसकी गांड में उंगली घुसेड़ कर उसके कुछ अनजाने अरमान जगा दिए थे | आग तो उसके तन बदन में भी लगी हुई थी लेकिन सबसे जरुरी था उसके लिए आजाद होना | वासना और आजादी के मानसिक द्वन्द के ताने बाने में रीमा उलझ कर रह गयी | एक गार्ड के साथ वो इस हद तक चली गयी यही क्या कम था लेकिन आगे जो भी वो सोच रहा था उसको करने की हिम्मत रीमा में नहीं थी |
गार्ड अपनी शर्ट पहन चूका था, वो अपने खड़े लंड को थामते हुए पेंट पहनने लगा |
रीमा को कुछ तो करना था वर्ना अब तक का किया सब ख़त्म - बस औरत की एक न पर सारी मर्दानगी लंड में जाकर घुस गयी |
गार्ड कुछ नहीं बोला |
रीमा - बड़ी कसमे खा रहे थे मुझे आजाद करवाने की, अब क्या निचुड़े लंड की तरह सारा जोश ख़तम हो गया |
गार्ड भी आवेश में - आप ने भी तो वादा किया था चूत मिलेगी चोदने को, आपके बस का कुछ है नहीं, आप रहने दो सारे बड़े लोग ऐसे ही होते है, लंड भी घोटना है और चूत के फटने से भी फटती है | |
रीमा - तुम न एक नंबर के गड फट्टू हो, तुमारे बस का ही नहीं था मुझे यहाँ से निकाल पाना | तुमसे अच्छे हिजड़े होते है कम से कम अपना वादा तो निभाते है |
गार्ड - मैडम आपके बस का नहीं है किसी से चुदवाना | फटती आपकी है चुदवाने में, शायद इसीलिए आपको आपके पति का लंड भी नसीब नहीं हुआ | मुझे छोड़ो आप अपने पति के ;लंड को नहीं खुस रख पाती होंगी शायद इसलिए जल्दी चले गए दुनिया से |
गार्ड की इस बात ने रीमा को अन्दर तक हिलाकर रख दिया |
गार्ड यही नहीं रुका - चूत कितनी भी खूबसूरत हो, कितनी भी अमीर हो चोदेगा तो उसे लंड ही | आपको अपने ऊपर इतना गुमान है लेकिन ऐसे गुमान का क्या फायदा तो चूत लंड खाने को ही तरस जाए | मेरी ख्वाइश का तो छोड़िये आप तो अपने मरहूम पति को भी नहीं देती होंगी | आप अपने रूप में अन्धी हो चुकी है |
रीमा के सब्र का बांध टूट गया , ऐसे उसे आजतक किसी ने चुनौती नहीं दी थी रीमा को अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा गुमान अपनी खूबसूरती और चूत पर ही था | गार्ड की इस बात ने रीमा के अस्तित्व की नीव ही हिला दी | एक औरत एक चूत के रूप में उसके अस्तित्व को ही नकार दिया | रीमा का पूरा वजूद ही हिल गया | | रीमा गार्ड की तरफ लपकी और एक जोरदार झन्नाटेदार झापड़ उसे रसीद कर दिया | उसके बाद बाथरूम में गहरी ख़ामोशी पसर गयी | रीमा और गार्ड दोनों ही सर झुकाए नीचे फर्श को देखते रहे |
कुछ देर बाद गार्ड बस अपने गाल को सहलाता अपनी पेंट ऊपर चढ़ाने लगा |
रीमा पछताने लगी उसे गार्ड की थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था | रीमा ने अपने हाथो अपनी आजदी का टिकट फाड़ दिया था | रीमा का गुस्सा अब उसकी लाचारी और पछतावे में बदलने लगा | उतर गया | रीमा पछताने लगी | आखिर गार्ड गलत क्या कह रहा है | अगर उसे चुदवाना नहीं था तो उसने उसको झूठी दिलासा क्यों दी उसके अरमान क्यों जगाये | क्अया गलती है गार्पड की | उसकी तो इतनी हिम्नीमत नहीं थी की रीमा के बदन को हाथ से छूकर तक देख सके | उसी ने तो उकसाया उसे | उसी ने गार्ड की हिम्मत को चार चाँद लगाये | अब उसकी हिम्मत इतनी बढ़ गयी की वो उसकी गांड में लंड पेलने के सपने देखने लगा | वो गांड जिसको रीमा ने आजतक किसी मर्द को हाथ नहीं लगाने दिया लंड पेलना तो द्दो की बात है | अपनी आजादी के लिए वो इतनी स्वार्थी हो जाएगी की किसी की भी भावनाओं से खेलेगी | ये जो भी हुआ, उसकी वजह से हुआ , बात यहाँ तक कभी पहुँचती ही नहीं अगर वो गार्ड को उसकी औकात में रखती और सच दिखाती | अब झूठ के तो पैर होते नहीं, एक झूठ को बचाने के लिए दूसरा बोलना पड़ा और नौबत यहाँ तक आ गयी | फिर भी उसकी उंगली गांड में जाते ही उसकी पिंडलियों और चूत में होने वाली सनसनाहट क्या थी | कही वो भी तो ..........नहीं रीमा बिल्कुल नहीं | आखिर अपने आत्मसम्मान को गिरवी रखकर रीमा वो ये काम कैसे कर सकती है जो उसने आज तक कभी नहीं किया | करना तो दूर कभी उसके गलती से भी ख्वाब नहीं देखे | क्या इसके बाद वो खुद से नजरे मिला पायेगी | वो अपने अतीत में घूमने लगी |
रीमा की दुनिया में वासना और हवस और सेक्स की दुनिया में सब कुछ गलत ही लगता था | उसे लगता था एक बार शादी के बाद सिर्फ पति के साथ ही चुदाई करनी चाहिए और पति के जाने के बाद वह इसी चीज दिमाग में भरकर जीती रही | रीमा को कभी एहसास ही नहीं हुआ कि औरत की ख्वाहिश भी हो सकती हैं औरत की वासना भी हो सकती है और उस वासना को औरत अकेले ही बुझा सकती है उसे पहली बार अपने अंदर की वासना का अहसास प्रियम और रोहित ने कराया | रोहित और प्रियम ने उसके मस्तिष्क की वर्जनाओं को तोड़ा जिनको लेकर वह काफी सालों से जी रही थी | प्रियम का लंड चूसकर और उसके बाद में रोहित के साथ में चुदाई करने के बाद में भी रीमां को समझ में आया कि सेक्स के कई रूप होते हैं पहले ही रीमां को लगता था सिर्फ चूत की चुदाई ही सेक्स का एक रूप है और बाकी सब गलत है लेकिन प्रियंम का लंड चूसने के बाद में उसके मन के अंदर का ये बंधन टूट गया इसी तरह से रोहित के साथ चुदाई करने के बाद में दूसरे पुरुष के साथ में लंड से चुदाई का खुला खेल करने का उसके मन का भरम टूट गया | जब उसने रिवर लाउन्ज में मालविका और कामिनी को बेधड़क गांड में लंड लेटे देखा था | कितनी बिंदास होकर कितनी बेफिक्र होकर वो अपनी गांड चुदवा रही थी मोटा मुसल लंड अपनी गुलाबी सुरंग की गहराइयो में उतार रही थी तो उसे देख देख कर रीमा हैरान हो रही थी | उसने मालविका और कामिनी को एक निचले दर्जे की चुद्द्कड़ औरते मान लिया था | उसे उस समय लग रहा था वो जो भी कर रही है वो घटिया है और इसलिए वो दोनों औरते भी घटिया है | लेकिन रोहिणी ने उसके दिमाग का ये चट्टान की तरह मजबूत बंधन भी तोड़ दिया | | रोहिणी ने रीमा के अंदर के और भी मानसिक बंधनों को तोड़ दिया रोहिणी ने उसे एक नया रास्ता दिखाया वह रास्ता था उसकी पिछली सुरंग का | रीमा को यकीन ही नहीं हुआ गाड़ की कुटाई से भी उसकी चूत में हलचल मच सकती है, न केवल हलचल बल्कि चूत का पानी छुडवा सकती है | रीमा के लिए ये सब एक अलग अनुभव था उर जब वो खुद इस अहसास से गुजारी तो उसे मालविका और कामिनी होने का मतलब समझ आया | रीमा को यकीन ही नहीं था कि इस तरह की वासना का भी कोई रूप होता है | लेकिन एक बार जब रीमा को एहसास हो गया उसके बाद उसके लिए सेक्स का एक नया मोर्चा खुल गया था | रीमा समझ गयी वासना में कुछ भी सही गलत नहीं होता | वासना की आग बस वासना की ही आग होती है, जो इसमें जलता है उसे ही पता होता है की वो क्या महसूस कर रहा हिया | बाकि दुनिया के लिए ये समझ पाना मुश्माकिल था | जिसने कभी चूत गांड में लंड नहीं लिया वो इसकी प्यास तड़प और दर्कोद को कैसे जान सकता है | रीमा को भी ऐसी ही एक अनजान सी तड़प ललचा रही थी | अब तो रीमा को किसी तरह की कोई शर्म और हया नहीं थी वह सेक्स के पूरी तरह से महसूस करने के चक्कर में रहती थी को सेक्स के पूरे मजे लेती थी और यही बात आज उसके काम आ रही थी आज वह इस गार्ड के साथ में वासना के जिस भंवर में फंसी फस करके अपनी आजादी की राह देख रही थी वहां पर उसे रोहिणी के सिखाये गुर बहुत काम आ रहे थे | शायद उसके अन्दर गांड में लंड लेने की लालसा शायद रोहिणी की ही पैदा की हुई थी या शायद उसे मालविका या कामिनी याद आ रही होंगी | रिवर लाउन्ज के वो सीन कभी भी रीमा की दिलो दिमाग से मिटे ही नहीं | शायद वहां वो सब कुछ इसीलिए इतने गौर से पूरी तरह से डूब कर देख रही थी | शायद उसे हमेशा के लिए सहेज लेना चाहती थी | आज जैसे ही मौका लगा अब सब कुछ आँखों के सामने तैर गया | वो अपनी वासना के आगे लाचार थी | उसकी अनचाही लालसा उसे उसी तरफ खीचे लिए जा रही थी | उसने आजतक कभी किसी का असली लंड अपनी गांड में नहीं लिया था लेकिन यही मौका था जब वो एक अनजान आदमी का लंड अपनी गांड में महसूस कर एक नया अनुभव ले सकती थी | उसने सोचा जब कामिनी अपनी गांड में लंड ले सकती है मालविका ले सकती है तो वो क्यों नहीं | क्या वो उनसे कम मॉडर्न है कम पढ़ी लिखी है | रोहिणी दीदी ने भी तो बोला था कट्टो अपने पिछवाड़े को मजबूत कर | एक बार लत लग गयी तो चूत चुदवाना भूल जाएगी | मजबूरी में ही सही लेकिन अपनी उन जंगली वासनाओं का पता आज तक रीमा को भी नहीं चला और रीमा की इस छिपी वासना का आगे भी किसी को पता तक नहीं चलेगा | रीमा ने सोचा कि इस वक्त उसके पास सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है, उसकी आजादी की आखिरी उम्मीद वही है | क्यों ना एक नया प्रयोग किया जाए उसे पता था गार्ड इसके बाद उसके लिए मर मिट जाने को राजी होजायेगा | वो किसी भी हाल में गार्ड को यहाँ से जाने कैसे दे सकती है