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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

| कुछ ही देर बाद जितेश ने रीमा को अपने आगोश में ले लिया और उसको जांघो को फैला कर के उसकी पहले से ही उसके लंड रस से सनी हुई चूत में अपने लंड को सटाकर के पेल दिया | रीमा के मुंह से एक लंबी सिसकारी निकल गई |

रीमा - ओओओओओओओओओओओओओओह्ह्ह्हह्हह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊफ़्फ़्फ़ |

जितेश ने अपने होठों को रीमा के होठों से सटा दिया | जितेश रीमा कस कर के चूमने लगा उसे पता था अगर वह रीमा के होंठों को अपने होंठों में नहीं चिपका लेगा तो रीमा के मुंह से तेज तेज सिसकारियां निकलेंगी और नीचे लेटा हुआ उसका आदमी गिरधारी जो कि उसके नीचे ही काम करता था और रात में उसके पास आया था और यही सो गया था वह जाग जाएगा | उसने रीमा के होठों को कसकर अपने होठों में जकड़ लिया और चूसने लगा | इधर उसकी हिलती कमर रीमा की चूत में मुसल लंड को पेलने लगी | उसकी चूत फ़ैलने लगी और जितेश के लंड को अपने गुलाबी आगोश में लेने लगी | रीमा फिर से मुसल लंड से चुदने लगी थी | अभी तो रात बस खत्म हुई थी और सुबह फटने का समय हुआ था कुछ ही घंटों के अंदर रीमा की वासना फिर से अपने चरम पर थी | जितेश की भी ठरक अभी खत्म नहीं हुई थी इसीलिए दोनों फिर से चुदाई के नंगे खेल में जुट गए थे |

एक तरफ जितेश रीमा की चूत में कमर हिला हिला के लंड को पेल रहा था तो दूसरी तरफ रीमा की चूत में उसके मुसल लंड को अपने आगोश में ले रही थी | अं न कोई प्रतिरोध था न कोई विरोध था | रीमा की चिकनी चूत की दीवारों पर सटा सट जितेश का लंड फिसल रहा था | उसके जिस्म में उठ रही हवस की लपटों की आग रीमा के मुहँ से गरम सिसकारियो के रूप में निकल रही थी और सीधे जितेश के मुहँ में जा रह थी क्योंकि जितेश ने उसके मुंह से अपने ओंठो को कसकर चिपका रखा था | अब ना केवल जितेश अपनी कमर हिला रहा था बल्कि रीमा भी अपनी कमर हिला कर के उसके लंड को गहराइयों तक लेने की कोशिश कर रही |

चुदाई का नंगा खेल फिर से शुरू हो गया था और रीमा के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां उसके मुंह में ही घुट घुट के रह जा रही थी लेकिन जितेश के मोटे मुसल लंड की ठोकर आखिर कब तक रीमा का नाजुक बदन संभाल पता | कब तक जितेश की जोरदार ठोकरों को रीमा खामोश लबो से बर्दाश्त कर पाती | कब तक उन मादक कराहों को, उन कामुक सिसकारियां को अपने मुंह में घुट के रख पाती | जैसे ही एक मोटा तगड़ा लंड औरत की चूत के छेद में घुसता है उसका मुहँ का छेद अपने आप खुल जाता है | ये नैसर्गिक है रीमा इसको कब तक रोक सकती थी | जितेश के भीषण ठोकरों की तरंगे न केवल उसके जिस्खिम को हिलाए हुए पड़ी थी बल्रकि उनमे उसका मन भी कांप जाता था | उस कम्कापन की आवाजे आखिरकार उसके मुंह से निकलने वाली सिसकारियां के रूप में कमरे में गूंजने लगी | जितेश रीमा की चुदाई में इस कदर मशगूल हो गया था कि उसे पता ही नहीं चला कि कब उसके ओंठ रीमा के होठों से हटकर के उसी गर्दन और स्तनों पर चले गए |

रीमा की चूत पर पड़ती मुसल लंड की हर करारी ठोकर के साथ उसके मुंह से उसकी सिसकारियां निकल रही थी | उन दोनों के इस चुदाई के खेल की कामुक आवाजें आखिरकार गिरधारी के कानों तक पहुंच गई | सोते-सोते उसकी नींद टूट गई पहले तो उसे लगा जैसे वह कोई सपना देख रहा है लेकिन जब उसने नीचे जमीन से उठकर के बिस्तर की तरफ देखा तो जो नजारा उसने देखा उसे देखकर वह हैरान रह गया | रीमा और जितेश दोनों एक दूसरे की बाहों में गुथम गुत्था हुए चुदाई का नंगा हवसी खेल खेल रहे थे जिसका उसे अंदाजा तक नहीं था | जब वह यहां आया था तब उसने रीमा को देखा था, उसने जितेश से सवाल भी पुछा था लेकिन उसने टाल दिया था | जब जितेश ने जमीन वाली सुरंग का दरवाजा खोला और वो अन्दर आया तब वह पूरी तरह से चादर से ढकी हुई सो रही थी इसलिए उसे रीमा के जिस्म की झलक नहीं मिली थी |

उसने बस चादर की सलवटो और उभारो से रीमा के हुस्न का अंदाजा लगाया था | उसने जितेश से सवाल जवाब भी किये लेकिन जितेश ने सिर्फ काम की बात | उसके बाद दरी बिछाकर वो वही सो गया | अब एक तरफ सूरज अपनी रोशनी बिखेरने को तैयार हो गया था और इधर बिस्तर पर वह दोनों अभी भी रात के नशे में चूर एक दूसरे के चुदाई का खेल खेल रहे थे | अपने अपने जिस्अमो में लगी आग बुझाने में लगे हुई थे | गिरधारी ने जो भी अपनी आंखों से देखा उसे अभी तक यकीन नहीं हुआ कि उसने जो देखा है वही सच है लेकिन जो उसने देखा था वही सच है ये उसे मानना पड़ा | वह क्या करें उसे खुद समझ में नहीं आया कुछ उसके सामने एक खूबसूरत सी औरत को उसका बॉस चोद रहा था | जितेश का लंड आधे से ज्यादा रीमा की चूत में धंसा आगे पीछे हो रहा था और रीमा की गोरी उंगलियाँ उसके चूत दाने के आसपास टिकी हुई थी |

उसकी तरफ रीमा की गोरी चिकनी पीठ थी | उसके मांसल बसे बसे चूतड़ थे और गुदाज मांसल जांघे जो जितेश की कमर से चिपकी हुई नब्बे डिग्री का कोण उसके जिस्म के साथ बना रही थी | उसे अपने पैरो की तरफ अपनी गर्दन झुकानी पड़ी रीमा की गुलाबी मखमली चूत के दर्शन करने के लिए | लेकिन तब भी उसके रीमा की चूत का पिछला हिस्सा ही दिख पाया | कमरे का ये रोमांचक कामुक सीन देखकर उसके भी अरमान जगने लगे | रीमा के बारे में जानने की उसकी इक्षा तो तभी शुरू हो गयी थी जब वो इस कमरे घुसा था | कौन है ये औरत जो इतनी शिद्दत से मेरे बॉस से ख़ुशी खुसी चुद रही है | आखिर ये रंडी नहीं है तो रंडी की तरह चुद क्यों रही है | लगता है मेरे बॉस मुझसे झूठ बोल रहा है |

कोई शरीफ औरत किसी पराये मर्द से इस तरह से चूतड़ हिला हिलाकर थोड़े ही चुदती है | आखिर बॉस ने इतनी जल्दी इसको पता कैसा लिया | इतनी जल्दी इसको बिस्तर पर ले कैसे आये | इतनी जल्दी इसको जांघे खोलने के लिए राजी कैसे कर लिया | इतनी जल्दी इस औरत ने अपने कपड़े कैसे उतार दिए, न केवल कपड़े उतार दिए बल्कि बॉस का मुसल लंड भी घोट रही है | वो अपनी जगह से जितेश के पैरो की तरफ से जमींन पर रेंगता हुआ बेड के सिरहाने के उल्टा दिशा में बढ़ा | वो रीमा की चूत के दर्शन करना चाहता था जो अभी जितेश के लंड से अपने आगोश में लिए पूरी तरह से फैली हुई थी | आखिर कुछ दूर आगे जाने के बाद उसने सर को उचकाया और रीमा की गुलाबी मखमली चूत के दर्शन कर लिए | गुलाबी रंगत लिए हुए पतले ओंठो से घिरी उसकी चूत कितनी साफ़ और चिकनी थी | इसकी चूत पर तो बाल भी नहीं है | उसकी बीबी तो अपना जंगल कभी काटती ही नहीं |
 
गिरधारी भी तो इंसान था उसके अंदर भी तो भावनाएं थी और कमरे का इतना मादक कामुक माहौल देखकर वहीं भावनाएं उसकी भी भड़कने लगी थी और उसका असर सीधे उसके पजामे में सो रहे उसके लंड पर हो रहा था | ऐसी माहौल में दिमाग से ज्यादा लंड को हरकत में आना ही था और वो आने लगा | उसमें तनाव आने लगा था कुछ देर तक वो वही से अपने बॉस के लंड से रीमा की चूत की चुदाई देखता रहा | इधर उसका लंड फूलता रहा | जितेश उसका बॉस था इसलिए उसके लिए उसकी बात की अवहेलना करना मुश्किल था लेकिन रीमा की चुदाई देखकर उसका मूड बन गया था | वो धीरे धीरे खिसककर अपनी जगह पर वापस आ गया |

जितेश रीमा दोनों इस बात से बेखबर आपस में ही खोये हुए हवस का खुला खेल खेल रहे थे | गिरधारी अपनी दरी पर आकर लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा | लेकिन उससे रहा नहीं जा रहा था | लेटे होने की वजह से उसे बेड का कुछ भी नहीं दिख रहा था | तभी उसका हाथ उसके पेंट के ऊपर चला गया | वो हैरान था उसका लंड तो पहले ही फूल चूका है | उसने पैजामे की मोहरी खोली तो देखा उसके लंड नाथ तो पूरी तरह से तन्नाये खड़े है | अब इसका क्या करू | वो बहुत बुरी तरह फंस गया था | एक तरफ कमरे के माहौल के कारन चढ़ी ठरक थी दूसरी तरफ बॉस का डर | वो दरी पर लेटे लेटे दूसरी तरफ को करवट हो गया |

अब उसकी पीठ बेड की तरफ थी उसके बाद उसने अपने पजामे में हाथ घुसेड दिया और अपने लंड को मसलने लगा | बीच बीच में गर्दन घुमाकर खुद को थोडा उचकाकर बेड की तरफ भी देख लेता | जहाँ रीमा के गोरे बड़े बड़े मांसल चूतड़ जितेश के लंड की ठोकरों से हिल रहे थे |

गिरधारी को जितेश के मोटे लंड से चुदती हुई रीमा की चूत और हिलते भारी-भरकम चूतड़ दिख रहे थे उसकी नंगी पीठ भी गिरधारी की तरफ ही थी और उसकी चूत में सटासट जाता हुआ जितेश का लंड भी उसे दिख रहा था आखिरकार उसे रहा नहीं गया वह उठ कर बैठ गया और अपनी पैंट के अंदर फूल कर तन गए लंड को देखने लगा था | काश उसकी किस्मत में भी चोदना लिखा होता | उसके दिलो दिमाग में चुदाई की ललक घुस गयी थी लेकिन किसी भी तरह से वो बॉस को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था |

लेकिन रीमा के जिस्म का मादक हुस्न उसे पगलाए दे रहा था | दिलो-दिमाग पर रीमा का नशा चढने लगा था | उसको रीमा की पूरी नंगी पीठ और भारी-भरकम चूतड़ देख रहे थे और उसकी चूत में जाता हुआ जितेश का लंड भी दिख रहा था | वो उचककर रीमा जितेश की चुदाई को काफी देर तक देखता रहा | इधर जितेश का लंड की मां की चूत में सटासट जा रहा था तो उधर गिरधारी के हाथ में उसका लंड उसकी के पजामे के अन्दर तेजी से फिसल रहा था | इतनी खूबसूरत औरत को इतने करीब से चुदते हुए उसने पहली बार देखा था | उसकी आंखें फटी की फटी रह गई आखिर वह भी तो इंसान था | उसकी आंखों के सामने एक खूबसूरत हसीन गुलाबी मखमली औरत की चूत को उसका बॉस बड़ी बेदर्दी से चोद रहा था |

यह देख कर वह भी पूरी तरह से मदहोश हो गया | रीमा के मुहँ से निकलती सिसकारियां उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी | गजब है क्या ऐसी औरते भी होती है इस दुनिया में | उसके लिए तो रीमा अजूबा ही थी, क्योंकि जब वो अपनी बीबी को चोदता था तो वो तो हमेशा इधर उधर हाथ पाँव पटक के दर्द होने का नाटक करती थी | लेकिन मैडम तो बॉस का लंड भो घोटे ले रही है और मजे में कराह भी भर रही है | ऐसी औरत को एक बार चोदने को मिल जाये फिर तो जन्नत जाने की भी जरुरत नहीं है |

वो वापस अपने बिस्तर पर लुढ़क गया और दूसरी तरफ करवट करके लेट गया | उसने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और पजामे को नीचे खिसका दिया | उसका पूरी तरह से तना हुआ लंड अब आजाद था | उसने करवट लेटे लेटे ही अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया | तेजी से उस पर हाथ फिराने लगा |

इधर रीमा काफी देर से जितेश की बाहों में ही पड़े पड़े चुद रही थी | वह चाहती थी अब जितेश नीचे लेटे और रीमा उसके ऊपर आ जाए | वो उसके ऊपर बैठकर उसके लंड को अपनी चूत में डालकर कुछ देर घुड़सवारी करे | यही सोचकर रीमा जितेश की बाहों ने निकली | रीमा जैसे ही उठकर जितेश के ऊपर आने को हुई, उसकी नजर जमीन पर दरी बिछाये आदमी पर पड़ गयी, जिसका पैजामा उसके घुटनों का खिसका हुआ है और उसकी कमर की आड़ में उसका हाथ तेजी से हिल रहा है | वो अपने मोटे मोटे लंड को बहुत तेजी से उठा रहा था | ये देखकर रीमा सन्न रह गयी |

जैसी हालत में थी वैसे ही जितेश के ऊपर झुक गयी और तेजी से अपने ऊपर चादर खीचकर डाल ली | वह कमरे में एक अनजान आदमी को वो भी इस हालत में देखकर दंग रह गयी | यह कौन है, कहां से आया, कब आया, क्या मै सपना देख रही है एकबारगी तो उसे यकीन ही नहीं हुआ | फिर उसने अपनी आंखों को मलकर देखा और तब भी उसे वो करवट के बल लेटा आदमी ही दिखाई दिया, जो तेजी से अपना लंड मुठिया रहा था | रीमा को हकीकत पर यकीन हुआ | वह जितेश से चिपक गई और उसके कान में पुछा - जितेश यह कौन है?
 
वो अपने मोटे मोटे लंड को बहुत तेजी से उठा रहा था | ये देखकर रीमा सन्न रह गयी | जैसी हालत में थी वैसे ही जितेश के ऊपर झुक गयी और तेजी से अपने ऊपर चादर खीचकर डाल ली | वह कमरे में एक अनजान आदमी को वो भी इस हालत में देखकर दंग रह गयी | यह कौन है, कहां से आया, कब आया, क्या मै सपना देख रही है एकबारगी तो उसे यकीन ही नहीं हुआ | फिर उसने अपनी आंखों को मलकर देखा और तब भी उसे वो करवट के बल लेटा आदमी ही दिखाई दिया, जो तेजी से अपना लंड मुठिया रहा था | रीमा को हकीकत पर यकीन हुआ | वह जितेश से चिपक गई और उसके कान में पुछा - जितेश यह कौन है?

जितेश ने माथा पीठ लिया उसके मुहँ से बस एक शब्द निकला - धत्त तेरे की इसको तो मै भूल ही गया, तुमारा हुस्न मुझे पागल कर देगा, तुमारे गोरे गुलाबी बदन की चमक के आगे इसका तो मुझे ध्यान ही नहीं रहा |

रीमा - मतलब तुम इसे जानते हो |

जितेश - हाँ तुम्हे क्या लगता है ये भूत बनकर यहाँ आ गया | रात में आया था जब तुम सो गयी थी उसके बाद, बाहर पुलिस बहुत छान बीन कर रही थी इसलिए यही लेट गया |

रीमा दबी आवाज में बिफर पड़ी - मतलब तुम इस हालत में किसी को यहाँ रुकने की इजाजत कैसे दे सकते हो | मतलब मैंने रात में भी तुमारी बाहों में पुरी की पूरी नंगी सो गयी थी |

जितेश उसकी बात कटाता हुआ - चिंता की कोई बात नहीं है रात में मैंने तुम्हे चादर में लपेट कर ढक दिया था |

रीमा - क्या चिंता की बात नहीं है | रात में नहीं देखा तो क्या हुआ अब इसने हमें सब कुछ करते हुए देख लिया है |

जितेश भी हैरान रह गया | उसने हल्का सा सर उठा कर देखा तो देखा | नीचे दरी पर लेता गिरधारी दूसरी तरफ को मुहँ घुमाये बहुत तेजी से लंड को मुठिया रहा है |

रीमा फिर से बिफर पड़ी - मतलब तुम इतने लापरवाह कैसे हो सकते हो, मुझे बताया तक नहीं | आँखों से ही इशारा कर देते |

जितेश - क्या करू, सारी बुद्धि तो तुमारे हुस्न से हर ली है | जब आंख खुली तो तुम सामने थी , अब जब तुम अपने प्राकृतिक रूप में सामने थी तो भला मुझे और कुछ कैसे याद आ सकता है |

रीमा दांत पीसती हुई बेहद धीमी आवाज में - तुम्हे मजाक सूझ रहा है मेरी यहाँ जान निकली जा रही है | उसके मेरा सब कुछ देख लिया और तुम्हे भी | उसने हमें चुदाई करते हुए भी देख लिया है | अब क्या होगा | रीमा शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी |

जितेश भी उसे दबे स्वर में - तुम बेवजह परेशान हो रही हो | कुछ नहीं होगा | वो मेरा खास आदमी है रात में वह एक नए कॉन्ट्रैक्ट के लिए पैसे लेकर आया था | चारो तरफ पुलिस तुमारे चक्कर में हर घर को सूंघ रही है इसलिए यही रूक गया | तुम परेशान मत हो अपना पालतू है ये |

रीमा - कितना पालतू है वो दिख रहा है, अगर तुम न होते यहाँ पर तो अब अपने हाथ की जगह तक मुझ पर चढ़ अपनी कमर हिला रहा होता | देख लिया कितना पालतू है |

जितेश - तुम हो ही इतनी हसीन, ऊपर से तुमारे बदन को बिलकुल उसी अवतार में देख लिया है जिस हालत में तुम पैदा हुई थी | आखिर खूबसूरत जवान नंगी औरत की जवानी का नशा से कौन बचा है, इसलिए हाथ हिला रहा |

रीमा - किसी दिन अपनी कमर मुझ पर हिला रहा होगा, तब ये शायरियां बघारना |

उधर गिरधारी के दिलोदिमाग में लाखो सवाल थे और उसका हाथ उसके तने हुए लंड पर था | आखिर ये मैडम है क्या चीज लेकिन जो भी है कमाल की चीज है | क्या कमाल की औरत है हमारे यहाँ औरते सुबह सुबह उठकर पूजा पाठ भजन कीर्तन करती है | एक ये औरत है जो सुबह सुबह लंड की पूजा करती है, मुसल लंड घोंट रही है | मन तो नहीं मान रहा लेकिन इसकी हरकतों से साफ पता चल रहा है कि यह कोई बहुत बड़ी रंडी है | सुना है बड़े शहरो की रंडियां बड़ा सज धज के रहती है बड़ी गोरी चिट्टी होती है | पक्का है बॉस इसको भी वही से लाये होंगे | क्योंकि यहाँ की रंडियां इतनी खूबसूरत कब से होने लगी | यह तो कमाल के गुलाबी गोरे सफ़ेद जिस्म की मालकिन है | इतनी गोरी औरत इतने खूबसूरत जिस्म की मालकिन रंडी कैसे हो सकती है | हो सकता है क्यों नहीं हो सकता | वहां बड़े शहर में बड़े बड़े पैसे वाले है खूब पैसा खर्च करते है | बॉस में इसे लाखो पर तय करके ही लाये होंगे | पक्का है जैसे ये चुद रही है ऐसे घरेलु औरते तो कभी लंड नहीं घोटती | घरबार वाली होती तो इतने मोटे मुसल लंड को लेकर हाथ पाँव पीठ पीट कर अब तक आधे मोहल्ले को बता चुकी होती की आज मेरी चूत फाड़ी जा रही है | मुझे तो रात में ही यकीन हो गया था की ये एक नंबर की छिनार चुदक्कड रंडी है | पैसो की मोटी मोटी गड्डियो के आगे अपनी जांघे खोलती होगी | पैसे में बहुत दम है, बॉस ने इसकी गुलाबी चूत के लिए लाखो मुहँ पर मार दिए होंगे और ये एक पल में नंगी हो गयी होगी | बॉस चकाचक इसे चोद रहा है पक्का है ये महँगी वाली रंडी है | बॉस रात भर मौज-मस्ती के लिए लाया होगा | अब सुबह होने से पहले पुरे पैसे वसूल लेना चाहता है |

इधर जब यह नजारा रीमा और जितेश ने देखा तो दोनों हक्के बक्के रह गए आखिर अब करें तो क्या करें चोरी तो उनकी ही पकड़ी गई है | इस तरह से दोनों नंगे बदन एक दूसरे को से चिपके हुए और चोदते हुए आखिर उनको एक तीसरे आदमी ने पकड़ लिया है | अब क्या करें कि रीमा तो काफी घबरा गई थी उसको तो उसकी तरफ देखने से भी शर्म आ रही थी |

जितेश ने रीमा को ढांढस बंधाया चिंता मत करो यह गिरधारी मेरा बहुत खास आदमी है या यूं कह लो एक तरह से मेरा पालतू है जब तक मैं इशारा नहीं करूंगा यह काटना तो दूर भौकेंगा तक नहीं | रीमा जितेश के सीने से सर चिपकाकर चादर ओढ़ ली | उसके अन्दर हिम्मत नहीं थी की वो उसका सामना करे |

रीमा फुसफुसाई - काटेगा नहीं लेकिन चोद तो सकता है आखिर हवस पर किसका जोर, वहां कोई बॉस नहीं होता | एक बार लंड खड़ा हो गया और अगर सामने चूत है तो आदमी जान पर खेलकर भी उसमे घुसने की कोशिश करता है |

इधर रितेश भी जुगत भिड़ाने लगा कि आखिर क्या किया जाए | तब तक गिरधारी खुद ही पलट का ये देखने ;लगा की अब वो लोग क्या कर रहे है | लेकिन जैसे ही उसने गर्दन घुमाई जितेश उसी की तरफ देख रहा था | रीमा उसके सीने से चिपकी पूरी तरह से खुद को चादर से ढके हुई थी | अपनी चोरी पकडे जाने से थोड़ा सा डर गया | उसके हाथ से उसका लंड छुट गया | उसने अपने तने हुए लंड को जबरन अपने पजामे में घुसेड़ने की असफल कोशिश की | खुस की आंखे मूंद कर सोने की नौटंकी करने लगा | उसे भी पता था की जितेश ने पकड़ लिया है लेकिन इंसान की फितरत होती है जब तक मजबूर न हो जाये सच से आंखे नहीं मिलाता |
 
जितेश भावहीन चेहरे से - क्या हो रहा है | इसी तरह का नाटक करने की जरूरत नहीं है | नौटंकी बंद कर दे |

ग्लानी और डर से भरा हुआ नजरे झुकाए - कुछ नहीं बॉस |

जितेश - कुछ नहीं |

वो चुप रहा |

जितेश सख्ती से - मैंने पुछा ये क्या हो रहा है |

गिरधारी - सब कुछ तो पता है आपको बॉस, बताइए कैसे सब्र करते |

जितेश - जब खुद की ठरक नहीं संभलती तो बाहर निकल जाता | पता है रीमा मैडम कितना डर गयी तेरी इस हरकत से |

गिरधारी - क्या बात कर रहे है बॉस, भला इतनी छोटी सी चीज से भला ऐसी औरत कभी डरती है उसके लिए तो ये रोज का काम होगा |

जितेश तेज आवाज में बोला - क्या मतलब है तेरा |

गिरधारी - क्यों मुझ पर सुबह सुबह बरस रहे है | आप अपने मजे लो, मुझे अपने मजे लेने दो | मै बिलकुल आपको डिस्टर्ब नहीं करूंगा |

जितेश - क्या बकवास कर रहा है |

गिरधारी - बॉस आप लगे रहो, जो कर रहे थे करते रहो चिंता की बात नहीं है मैं समझ सकता हूं हर किसी के साथ ऐसा ही होता है | मैं बस अपना हाथ से काम चला लूंगा आप अपने काम में लगे रहो |

जितेश - तू कपड़े पहन और निकल ले यहाँ से |

गिरधारी - ये तो ज्यायती है बॉस |

जितेश भड़कता हुआ - तू जाता है या तुझे लात मार कर भगाऊं |

गिरधारी - क्या बॉस इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो, मैंने कहाँ न मै हाथ से काम चला लूँगा | बस थोड़ीसी झलक दिखा देना बीच बीच में | आप जो कर रहे थे करते रहो | मै बस बीच बीच में थोड़ा देख लूँगा तो मेरे मन भी खुस हो जायेगा | आपको बिलकुल डिस्टर्ब नहीं करूंगा | बस मैडम की एक झलक ही काफी है मरे लिए |

जितेश - क्या बकवास कर रहा है, तेरी हरकत की वजह से कितना डर गयी है मैडम | चल भाग ले यहाँ से वरना अभी मै तुझे झलक दिखाता हूँ |

गिरधारी - बॉस बस देखने की ही तो गुजारिश कर रहा हूँ | जो कुछ खर्चा पानी हो काट लेना |

रीमा भी चादर के अन्दर से ये सारी बाते सुन रही थी | उसकी बाते सुनकर रीमा शर्म से गड गयी | उसके बारे में ऐसा आजतक किसी ने नहीं सोचा था | धरती फट जाये और वो उसमे समां जाये | हाय अब ये दिन देखने के लिए मै जिन्दा हूँ | इसने तो मुझे रंडी समझ लिया |

जितेश उसका इशारा तो समझ गया लेकिन उसके मुहँ से ही सुनना चाहता था - खर्चा पानी मतलब |

गिरधारी - हमारी औकात तो साहब 50 100 वाली ही है | आपको जितना लगे मेरे हिस्से में से काट लेना | मुझे पता है मैडम की फीस लाखो में होगी, इतनी हमारी औकात नहीं लेकिन दूर बैठ कर देखने भर की फीस तो भर ही सकता हूँ |

जितेश को गुस्सा आ गया, वो रीमा को रंडी समझ रहा था - मैंने तुझे रात में ही समझाई थी तुझे समझ न आई | मैंने बोला था तुझे दुबारा ये शब्द अपनी जुबान पर लाया तो यही तेरी लाश पड़ी होगी |

गिरधारी - क्यों गरज रहे हो साहब, जो आँखों से देख रहा हूँ उसे कैसे झुठला दू | ढील डौल और नैन नक्शों से मैडम पैसो वाली सोसाइटी की लागती है वहां कुछ और नाम से बुलाते होंगे लेकिन काम तो हर जगह एक ही होता है | रातो रात कहाँ से आपकी मासुका पैदा हो गयी | अगर ये आपकी सच्च्ची मासुका होती तो हाथ तक न लगाने देती | आप तो.............................. |

जितेश उसे धमकता हुआ - आखिरी बार बोल रहा हूँ चुप हो जा नहीं तो यही तुझे गोली मार दूंगा | तू अब कुछ ज्यादा बोल रहा है, अपनी हद लाँघ रहा है | रीमा मैडम के बारे में जो कुछ भी तू सोच रहा है वैसा बिलकुल नहीं है |

गिरधारी - ठीक है बॉस आपकी बात मान लेता हूँ लेकिन मेरे कुछ सवालो के जवाब तो दे दो | आखिर ये रंडी नहीं है तो रंडी की तरह चुद क्यों रही है | कोई शरीफ औरत किसी पराये मर्द से इस तरह से चूतड़ हिला हिलाकर थोड़े ही चुदती है | आखिर बॉस ये इतनी जल्दी आपसे चुदने को राजी कैसे हो गयी | इतनी जल्दी इसको आप बिस्तर पर ले कैसे आये | इतनी जल्दी इसको जांघे खोलने के लिए राजी कैसे कर लिया | इतनी जल्दी इस औरत ने अपने कपड़े कैसे उतार दिए, न केवल कपड़े उतार दिए बल्कि बॉस आपका मुसल लंड भी घोट रही है |

जितेश उसके सवालो से सन्न रह गया | उसकी ख़ामोशी बता रही थी की उसके पास कोई जवाब नहीं है | उसके संयम की सारी हदे टूट चुकी थी | पता नहीं कैसे अब तक खुद को रोके हुए था |

गिरधारी - है कोई जवाब आपके पास बॉस |

जितेश का गुस्सा अब काबू से बाहर चला गया | वो बेड से उतरा और गिरधारी को लातो घूंसों से पीटने लगा - बोल रहा हूँ चुप हो जा नहीं तो आज यहाँ से जिन्दा नहीं जायेगा | बिस्तर पर लेती हर औरत मर्द के सामने रंडी ही होती है | बिना रंडी बने अपने मर्द को वो कोई सुख नहीं दे पायेगी | तेरी बीबी भी तेरे सामने हर रात को रंडी बनती है ताकि तू खुश रह सके | दुनिया की हर औरत इसलिए रंडी बनती है ताकि उनके मर्दों की प्यास बुझा सके और उन्हें खुश रख सके | (उसे झिन्झ्कोरता हुआ ) तू बता क्या तेरे सामने तेरी बीबी रंडी नहीं बनती | बिना उसके रंडी बने ही तू उसे चोद लेता है | जिनकी बिबिया बिस्तर पर रंडी नहीं बनती उन घरो के मर्द बाहर मुहँ मारते फिरते है |

गिरधारी को पीट पीट कर उसकी हालत ख़राब कर दी |

रीमा अपनी लाज शर्म छोड़ नंगी ही बीच बचाव को आ गयी नहीं तो शायद जितेश उसे पीट पीट कर अधमरा ही कर डालता |

रीमा - छोड़ दो जितेश | जितेश की ताकत के आगे रीमा का क्या बस था लेकिन रीमा ने उसके ओंठो अपने ओंठ चिपका दिए | जितेश को ठेलती हुए किसी तरह से गिरधारी से दूर बिस्तर पर लायी |

रीमा - हे जितेश मेरी तरफ देखो मेरी तरफ , सिर्फ मेरी आँखों में |

उसका चेहरा थामकर चूमने हुए , उसकी आँखों में आंखे डालते हुए - दुनिया में किस किस का मुहँ बंद करोगे, मेरी तरफ देखो | तुम क्या सोचते हो मेरे बारे में मेरे लिए बस वही मायने रखता है | बाकि दुनिया की परवाह किसको है |

रीमा ने उसके हाथ को अपनी नरम छातियों पर ले आई | वो जितेश का पूरा धयान खुद पर केन्द्रित करवाना चाह रही थी |

रीमा - मेरी आँखों में देखो जितेश, अगर तुम्हे बुरा लगा है तो खुलकर वो सब करो जिसका डर तुम्हे दुनिया दिखा रही है | मै हमेशा ऐसे ही सोचती हूँ | मै तुमारे लिए रंडी बनने के लिए तैयार हूँ | आज तुम मुझे रंडी की तरह ही चोदो | देखती हूँ देख लेने उसके बाद तुम्हे ये शब्द इतने तीखे नहीं लगेगे | उस पर की बजाय मुझ पर ध्यान दो |
 
जितेश का गुस्सा काफी हद तक कम हो गया था | वो फिर से रीमा की मादकता में खोने की कोशिश करने लगा | रीमा उसे चूमती रही | वो रीमा के जिस्म को मसलता रहा | उसके बाद जहाँ गाडी रुकी थी वही से फिर से शुरू करना था | देखते ही देखते रीमा जितेश के ऊपर आ गयी | अभी तक वो गिरधारी से खुद के जिस्म को छिपा रही थी लेकिन इस लडाई ने वो पर्दा भी ख़त्म कर दिया |

रीमा ने जितेश के लंड पर ढेर सारी लार उड़ेली और उसे अपनी गुलाबी चूत के मुहाने पर सटाकर बैठती चली गयी | जितेश का तना सख्त लंड रीमा की चूत की दीवारों को चीरता हुआ, भीषण रगड़न के साथ अन्दर तक समां गया | रीमा ने तीन चार बार कमर हिलाई और जितेश के लंड के लिए अपनी चूत में जगह बनायीं | उसके बाद आराम से कमर हिलाकर उसका लंड पानी चूत में सटासट लेने लगी |

इधर गिरधारी जितेश से पिटने के बाद जमीन पर ही फ़ैल गया और रोने लगा - और मारो और मारो |

गिरधारी जमीन पर अपनी छाती पीट पीट रो रहा था | रीमा को पहले पहले लगा वो नौटंकी कर रहा है लेकिन उसके आँखों के निकले आंसू लगा, सच में वो रो रहा है |

गिरधारी - भाग क्यों गए, आवो और मारो, और पीटो, बॉस जो हो | दिन रात लगा रहता हूँ पीछे पालतू कुत्ते की तरह उसका यही सिला दिया है | आज तक कभी चु तक नहीं करी | जो दे देते हो रख लेता हूँ |

जितेश उसकी नौटंकी से परेशान हो रहा था लेकिन इससे पहले जितेश कोई प्रतिक्रिया से रीमा ने झुककर उसके ओंठो को अपने आगोश में ले लिया | रीमा जितेश के कान में फुसफुसाई - तुम्हें चिंता करने की कोई बात नहीं है, उसे बडबडाने दो |

इतना कहकर उसने अपनी नुकीली पहाड़ियों की चोटियों को जितेश के मुहँ से सटा दिया | जितेश में किसी छोटे बच्चे की तरह उन्नत उरोजो की पहाड़ियों से बह रहे रस का रस स्वादन करने लगा |

रीमा जितेश का ध्यान गिरधारी की नौटंकी से हटाने में लगी थी लेकिन उसका खुद का ध्यान अब उसी की तरफ चला गया |

ऐसा लग रहा था वो सच में बहुत दुखी है - और पीटो आकर मुझे, मै तो तुमारा कुत्ता हूँ न | जब मन करेगा रोटी का टुकड़ा फेक दोगे जब मन करेगा दुत्कार दोगे | कितनी जल्दी भूल गए जिस गोली पर तुमारा नाम लिखा था उसे मैंने अपने कंघे पर झेला था | लेकिन आखिर कुत्ता तो कुत्ता होता है |

जितेश फिर से वासना की मस्ती में डूबने लगा था | कुछ ही पलो में उसका गुस्सा जैसे फुर्र हो गया | रीमा ने उसकी तरफ सवलिया नजरो देखा | उसने पलके बंद कर इशारा किया, जैसे वो गिरधारी की बातो को सहमती दे रहा हो |

गिरधारी रोता हुआ - क्या कुछ नहीं किया हाय इस पालतू ने अपने मालिक के लिए | तीन चाकू मारे थे हाथ में लेकिन उफ़ जो मैंने अपने मालिक को छोड़ा हो | जो कुछ मिलता है सब तुमारे चरणों में लाकर रख देता हूँ फिर भी ये सिल दिया मुझे | वो भी एक औरत के लिए |

एक औरत की वजह से मुझ पर हाथ उठा दिया | मेरी इतने दिनों की दिन रात की सेवा का भी ख्याल नहीं आया |

जीत तो तुमसे सकता नहीं, आपाहिज जो हूँ इसलिए और पीट लो | मालिक जो हो, मेरा भाग्य तुमारे हाथ में जो है |

रीमा भी कामुकता के नशे में उतारने लगी थी लेकिन गिरधारी की बकवास अब उसे परेशान कर रही थी |

रीमा जितेश के कान बुदबुदाती हुई - कितना नौटंकी बाज है |

जितेश - मैंने पहली बार हाथ उठाया है | उसके बाये हाथ में तीन बार चाकू से वार हुआ था और मै तीस फीट से ज्यादा ऊँचाई से लटक रहा था लेकिन इसने मुझे पकडे रखा, नहीं तो आज शायद मै जिन्दा नहीं होता |

रीमा ने एक करारा झटका नीचे की तरफ मारा | उसके मांसल चूतड़ जितेश की जांघो से जाकर टकराए और उसका पूरा लंड रीमा की गुलाबी मखमली सुरंग में | जितेश और रीमा दोनों के मुहँ से मादक कराह एक साथ निकल गयी |

दोनों एक साथ कामुकता के जोश में कराह उठे - आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् |

रीमा - उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह्ह्ह्ह बेबी तुमारा लंड कितना बड़ा है ...................... मेरी पूरी चूत भर गयी है |

गिरधारी की बडबडाना रीमा के कामुक माहौल में खलल डाल रहा था |

रीमा - ओओ फोफोफ़ जितेश अब ये चुप कैसे होगा |

रीमा के लयबद्ध कमर हिलाने से जितेश तो स्वर्ग की सैर करने लगा था | मादक कराह के साथ - आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् पता नहीं |

रीमा - मुझे देखने की ही इजाजत मांग रहा था, देखने दो न | अब कौन सा पर्दा बचा है वैसे भी उसने सब कुछ तो देख लिया है | अभी भी देख ही रहा है

जितेश - मै उसके साथ चार सालो से काम कर रहा हूँ, उंगली पकड़ कर पन्हुचा पकड़ने वालो में से है | बहुत ही लीचड़ और बेह्शर्म किस्म का इन्सान | मेरे काम धंधे में ऐसे आदमी की जरुरत पड़ती है इसलिए पाल रखा है | लेकिन मुहँ नहीं लगाता हूँ |

रीमा - ऐसा भी क्या जोंक है, हम दोनों को इस तरह नंग धढंग देखकर अरमान जाग जाग गए होंगे, हिलाने दो न अपने हाथ से |

रीमा जितेश के उपर जोरो से उछलती हुई - गलती हमारी ही है | अब क्या करे |

जितेश और रीमा के दिलो दिमाग पर वासना का नशा पूरी तरह से हावी हो चूका था | अब दुसरी तरफ ध्यान लगाने की हालत में नहीं थे | दोनों एक दुसरे में खो से गए |

गिरधारी उधर जमीन पर अपनी छाती पीटता रहा | उसकी कर्कश आवाज उन दोनों के कामुक मादक माहौल को ख़राब कर रही थी |

जितेश से रीमा अनुरोद्ध करती हुई - इससे कुछ बोलो न बेबी | इतनी मेहनत से फोकस आता है ये सारा मूड ख़राब कर रहा है | ये हमारी इंटिमेसी को डिस्टर्ब कर रहा है |

रीमा की कामुक आवाज और तेज उफनती सांसो के बीच निकले शब्द जैसे जितेश के दिल में उतर गए |

जितेश हांफता कांपता कड़क आवाज में बोला - चुप हो जा, देख ले जितना देखना है मैडम |

गिरधारी की आवाज बंद हो गयी | जब उसने ऊपर सर उठा कर देखा तो हैरान रह गया | औरत मर्द पर चढ़ी बैठी है | क्या ऐसा भी होता है | उसकी आंखे फटी की फटी रह गयी | पहली बार वो रीमा के हुस्न का दीदार खुली आखो से भरपूर कर रहा था | कितनी गोरी है, कितने बड़े बड़े दूध है और कैसे फूटबाल की तरह उछाल रहे है |वो हैरान था उसने हमेशा औरत को मर्द की जांघ के नीचे ही देखा था | जिस तरह से खुद को उछाल उछाल कर जितेश का लंड रीमा अपनी चूत में घोंट रही थी वो देखकर गिरधारी तो बस रीमा के गोरे गुलाबी बदन का उछलना ही देखता रहा | उसका रोना धोना सब बंद हो चूका था लेकिन अंदर से वो दुखी था क्यूंकि जितेश ने उस पर हाथ उठाया |

गिरधारी - मुझे मारा क्यों ?

जितेश को ये खलल बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था - गलती हो गयी अब आगे से नहीं होगा |

गिरधारी - लेकिन मुझे मारा क्यों ?

जितेश गरजते हुए - बोला न गलती हो गयी |

बड़ी मुश्किल से दोनों कामुकता में डूबने का माहौल बना पा रहे थे और वो एक पल में ही उसकी ऐसी की तैसी करे दे रहा था |

गिरधारी कुछ देर तक रीमा के हुस्न को घूरता रहा | उसका लंड फिर से तनने लगा | उसे रीमा बहुत अच्छी लग रही थी | इतनी अच्छी की उसके लिए सीने पर गोली खा ले |

जितेश रीमा आपस में अपने जिस्मो की आग की ताप बढ़ाने में लगे हुए थे |

जैसे ही वो दोनों फिर से वासना की रौ में पंहुचे गिरधारी ने फिर एक सवाल पूछ लिया -तुमने मुझे मैडम के लिए मारा है, आगे फिर नहीं पीटोगे इसकी क्या गारंटी है |

जितेश का लंड रीमा चूत में पूरा का पूरा धंसा हुआ था, दोनों अब जमकर चुदाई करना चाहते थे लेकिन बीच में गिरधारी अड़चन बनकर उनके सारे मूड का सत्यानाश कर देता | रीमा और जितेश दोनों के लिए ये मंद्बुधि अब झेला नहीं जा रहा था | मन कर रहा था उसे उठाकर बाहर फेंक दे |

जितेश कुछ बोलता उससे पहले रीमा ने उसके मुहँ पर हाथ रखकर - अब ये तुम्हे कभी नहीं मारेगे | मेरी कसम | तुमने कहाँ था तुम हमें डिस्टर्ब नहीं करोगे | अब तुम अपना काम करो हमें अपना करने दो |

रीमा की पतली सी मीठी सी मादक आवाज उसे अपने कानो में ऐसी लगी जैसे किसी ने उसे फूल फेंककर मारा हो | वो रीमा की आवाज सुनकर अन्दर तक गनगना गया |
 
रीमा और जितेश फिर आपस में चिपक गए | गिरधारी ने भी रीमा और जितेश को देखकर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए | रीमा कमर हिलाने लगी और जितेश भी नीचे से कमर हिलाने लगा | ऊपर से रीमा का झटका और नीचे से जितेश का, रीमा की चूत में दनादन लंड अन्दर बाहर होने लगा | दोनों की सांसो की गर्माहट फिर से उफनने लगी |

इधर कपड़े उतार कर गिरधारी भी तेजी अपने लंड को मसलने लगा | जल्दी ही उसका लंड पहले की तरह कड़क हो गया | मुठ मारते मारते वो तेज आवज में कराहने लगा | रीमा गर्दन घुमाकर उसकी तरफ देखने लगी | उसकी कमर हिलानी बंद हो गयी |

रीमा को अपनी तरफ देख गिरधारी कराहता हुआ - मैडम आप चिंता मत करो मैं हाथ से काम चला लूंगा |

रीमा ने तुरंत मुहँ घुमा लिया लेकिन उसके शब्द उसके कानो को चीरते हुए उसके दिल तक घुस गए | हाथ भले ही उसका अपंग हो गया हो लेकिन लंड में बहुत जान थी | कड़क तगड़ा लंड था | रीमा के दिमाग में पहली बार उसके लड़ का ख्याल आया | रीमा का ध्यान इस तरफ गया ही नहीं था | रीमा ने इस नजरिये से सोचा भी नहीं था | नीचे से जितेश धक्के पर धक्के लगा रहा था | रीमा की कराहे तो छुट रही थी लेकिन उसका ध्यान कही और ही चला गया | उसके दिमाग में बस बारबार एक ही वाकया गूम रहा था - आप चिंता मत करो मैं हाथ से काम चला लूंगा |

दुनिया के कितने मर्द एक खूबसूरत नंगी औरत को इस तरह से सामने चुदते हुए देख ऐसा कह सकते है | जितेश रीमा के उरोजो से खेल रहा था | नीचे से लग रहे धक्को से उसका बदन हिल रहा था लेकिन वो कही और ही खो गयी | रीमा पूरी तरह से नंगी होकर एक मर्द के सामने चुद रही थी और उसे सिर्फ इसी बात में सतोष था की वो उसके नंगे जिस्म को देख प् रहा | सच ही कहावत है छोटे आदमी का दिल बड़ा होता है और मन संतोषी | अगर वो चाहे तो क्या उसे हासिल नहीं कर सकता लेकिन अपनी हद लाघने को तैयार नहीं है | उसके लिए बस रीमा के खूबसूरत जिस्म को निहारने में ही स्वर्ग का सुख मिल जायेगा | रीमा के अन्दर उसके लिए हमदर्दी पनपने लगी |

रीमा की सेक्स में दिलचस्पी न देखते हुए आखिरकार जितेश ने पूछ लिया - क्या हुआ |

रीमा - कुछ नहीं बस ऐसे ही, कुछ सोच रही थी |

जितेश - कमाल करती हो, मेरा सारा ध्यान अपने ऊपर लगवा कर खुद किसी और के बारे में सोच रही हो |

रीमा - नहीं ऐसा नहीं है |

जितेश अब वासना के आवेग में पूरी तरह डूब चूका था |

उसने रीमा के चुताड़ो पर एक जोरदार ठोकर मारी और ठहर गया - तो फिर क्या है बताओ तो सही क्या हुआ |

रीमा - आआआआह्नह्हींह्ह कुछ नहीं बस ऐसे ही, बेबी तुम चोदो न मुझे तुम क्यों रुक गए |

जितेश - मै अकेला चोदु ? क्या चल रहा है दिमाग में बतावो न बेबी तभी तो पता चलेगा |

जितेश फिर से रीमा को चोदने लगा | रीमा सिसकारियां भरने लगी |

रीमा - जितेश क्या जो हम कर रहे हो ैं वह ठीक है मतलब मतलब वह आदमी नीचे लेटा हुआ अकेला और हम यहां पर जवानी का मजा लूट रहे हैं चुदाई कर रहे हैं क्या यह ठीक है |

जितेश बोला - मैं कुछ समझा नहीं |

रीमा - मेरा मतलब साफ है वह नीचे वहां अकेला लेटा हुआ है और हम यहां अपने अपने जिस्म की भूख और वासना में डूबे हुए हैं |

जितेश रीमा की चुताड़ो पर लगातार ठोकरे मारता हुआ - तो क्या हुआ हर कोई ऐसे ही तो करता है |

रीमा -हां लेकिन जब तीसरा आदमी होता है तब भी क्या हम ऐसे ही करते हैं |

जितेश पुरे जोश में था - पहेली मत बुझावो |

रीमा जितेश की ठोकरों को अपनी चूत की गहराई में महसूस कर रही थी लेकिन उसका दिमाग कही और ही था |

रीमा - अगर हमें पता होता कि कोई तीसरा यहां नहीं है तब तो ठीक था लेकिन जब हमें पता है वो तीसरा यही है और वह सब कुछ देख चुका है या देख रहा है तो क्यों ना हम उसे अपने खेल में शामिल कर लें |

जितेश थोड़ा हैरान होता हुआ - यह क्या बकवास कर रही हो रीमा |

तीसरे के ख्याल से ही रीमा के मन कोने में एक रोमान्च सा पैदा होने लगा | वो वासना में पूरी तरह डूब चुकी थी |

जितेश की बेतहाशा चुदाई से वो मदहोश हो चुकी थी इसलिए अब उसका विवेक भी वासना के चश्मे से ही सब सोच समझ रहा था | तीसरे का ख्याल आते ही उसके दिमाग में नूतन घूम गयी | कैसे इतनी कच्ची उम्र में वो आराम से दो लंड को एक साथ चूस रही थी | कुछ तो अलग अहसास होता होगा जिससे मै अनजान हूँ | जिस अहसास को नूतन इतनी कच्ची उम्र में अनुभव कर चुकी है उससे मै अभी तक अनजान हूँ | रीमा को लगा नूतन उससे आगे कही निकल गयी जबकि वो कल की छोकरी है, नहीं मै कैसे पीछे रह सकती हूँ | कैसे कपिल एक साथ दो लडकियों बारी बारी से चोद रहा था | आखिर वो सब कर सकते है तो मै क्यों नहीं, मै तो उनसे हर मामले में बेहतर हूँ |उसके मन की दबी लालसाओ की परते खुलने लगी थी, उसके अन्दर की दबी रीमा अपने खोल से बाहर आकर इस रीमा को निगलने लगी |

उसने रिवर लॉज में एक साथ दो औरतें देखी थी और कैसे दोनों औरतें कपिल को सारा सुख देने को आतुर थी | जब 2 औरतें एक मर्द को सुख दे सकती हैं तो क्या एक औरत दो मर्दो को सुख नहीं दे सकती | रीमा अपने ही अन्दर के छिपे जंगली रीमा के आगोश में सामने लगी | अपने मन के उस कोने में झाकने लगी थी जहाँ जाने से वो हमेशा डरती थी | जब भी उसे वासना का बुखार चढ़ता तभी उसके मन के कोने की परते खुलती थी | रीमा अपने मन को टटोलने से झिझक रही थी | पता नहीं क्या निकल कर आ जाये वो उसके सामने हजार सवाल छोड़ जाये | ऐसे ख्याल उसे आते ही तब थे जब उसके अंदर की वास्तविक वासना जग जाती थी | उसे पता था अब वह वह नहीं रहेगी जो वह खुद थी वह कोई हो जाएगी | उसके मन के कोने में बैठी हुई थी उसी की अंतर्उमन की वासना का एक रूप जिसकी परछाई से बजी वो भागती रहती थी | उसके मन में बार-बार वही शब्द घूम रहा था मैं हाथ से काम चला लूंगा | रीमा के दिमाग में बस यही चल रहा था कि आखिर उसकी क्या गलती है | रीमा की ही एक प्रतिलिपि उसके असली रूप को ढककर उसके सामने आ गया | वासना में फडफडा रही रीमा को ये रूप ज्यादा सहज लग रहा था, जहाँ उसका मन एक तरफ़ा था न कोई प्रतिरोध न कोई बंधन | सब कुछ सोचने करने के उन्मुक्त आजाद |

हमारी चुदाई देख कर ही तो उसके मन में यह ख्याल आया होगा आखिर मेरे गोरे नंगे जिस्म को देख कर तो उसका लंड खड़ा हुआ होगा इसमें उसकी क्या गलती है दो औरतें एक आदमी को एक साथ वासना का नंगा नाच कर सकती हैं तो एक औरत क्या दो आदमियों को एक साथ खुश नहीं कर सकती |

उसकी गुलाबी चूत में लग रहे जितेश के लगातार लग रहे तेज दनादन धक्को ने उसे वासना के सागर में और गहरे तक डुबो दिया |
 
रीमा भीषण चुदाई से कांपती आवाज में बोली - जितेश मैंने एक बार देखा था कि 2 औरतें एक आदमी को एक साथ चोद रही थी |

जितेश हांफता हुआ - तो |

रीमा - तो एक औरत दो आदमी भी तो हो सकते है |

जितेश रीमा के शब्दों को समझता हुआ - क्या बकवास कर रही हो रीमा ऐसा कैसे हो सकता है | मतलब तुमने सोचा भी कैसे |

रीमा - गुस्सा मत हो जितेश मैं सिर्फ इतना कह रही हूं | आखिर उसकी क्या गलती है मेरे गोरे नंगे जिस्म को देख कर ही तो उसके अंदर की भावनाएं जागी है और उसका लंड खड़ा हुआ है तो क्या हम उसे इसी तरह से छोड़ दें उसी के हाल पर |

जितेश के बेतहाशा लग रहे धक्के रुक गए - वह मेरा एक तरह से नौकर है और मैं जो कहूंगा वह वही करेगा | उसके साथ मै तुम्हे ......... सोचकर ही मन कसैला हो जा रहा है | वो रीमा के चूत दाने को मसलने लगा | रीमा ने भी उसके ओंठो से अपने ओंठ सटा दिए |

उसे चुमते हुए रीमा बोली - तो क्या हुआ वह तुम्हारा नौकर है तो वह भी इंसान ना | फिर इस वासना के रिश्ते में कोई छोटा बड़ा नहीं | ये रिश्ता इंसानों की दुनिया से नहीं बनता | ये रिश्ता लंड और चूत की दुनिया का रिश्ता है, यहाँ इंसानों के नहीं लंड और चूत के नियम चलते है | मैं नहीं चाहती कि वह इस तरह से अकेला बेबस होकर .......................................................|

जितेश - तुम अपने होश में नहीं हो |

रीमा कामुकता से जितेश की तरफ देखती हुई - पता है वो इतना वफादार क्यों है क्योंकि बहुत छोटी सी चीज से भी उसे संतोष हो जाता है | वो सिर्फ इस बात से खुस है की वो मुझे देख पा रहा है, उसने इससे ज्यादा कुछ नहीं माँगा | वरना बड़ी बड़ी हवेलियों में घर के नौकर मौका मिलने पर हवेली की मालकिन के साथ साथ हवेली की बहुओं को भी चोद डालते है | जब चूत खुद सामने जांघे फैलाकर बैठी हो तो कौन उसे सिर्फ देखकर खुश होता है |

जितेश हांफता हुआ- तुमसे जीतना तो बहुत मुश्किल है | बताओ क्या करना चाहती हो |

जितेश के दनादन धक्के लगाकर अपने लंड को जिस वासना के सुरूर में डुबोया था वो चुदाई का चढ़ा सारा नशा फिर से उतरने लगा | उसका लंड रीमा की चूत से बाहर आ गया |

रीमा - मैं चाहती हूं तुम उसे यहां पास में बुला लो |

जितेश - फिर क्या करोगी |

रीमा - मुझे भी नहीं पता नहीं मैं क्या करूंगी | लेकिन मैं चाहती हूं जिस तरह से मैं तुम्हें सुख दे रही हूं, तुम पर अपना सब कुछ लुटा रही हूँ इसी लूट की छिटकन का ही वो मजा ले ले |

जितेश - कही तुमारा दिल उसके लंड पर तो नहीं अटक गया है | कही मेरे बाद उसे चोदने के लिए अपनी चूत तो नहीं दे दोगी |

रीमा खामोश रही | उसे खुद नहीं पता था वो क्या कर रही है फिर जितेश के सवाल का जवाब कहाँ से देती |

जितेश के अन्दर रीमा की बातो इर्ष्या घर कर गयी, आखिर रीमा सिर्फ उसकी है वो आखिर रीमा को उस नौकर के साथ नहीं नहीं ये नहीं हो सकता , उसने रीमा से वादा माँगा - मुझे लगता है मेरे बाद उसे अपनी चूत चोदने के लिए दोगी, पक्का है उसके लंड को देखकर तुमारी लार टपकने लगी है , तुमारी चूत की दीवारे फड़कने लगी | उसका लंड अपनी चूत में लेने के लिए उतावली हो रही हो | चूत को चोदने के लिए तो मुझे तो रात में लाखों कसमे वादे खिला रही थी | जनम जन्मान्तर की कसमे | अब उसके लंड को देखकर तुमारा मन बेईमान हो गया है | सच बोलो, उससे चुदने की ख्वाइश जग गयी है |

रीमा मजबूती से प्रतिकार करती हुई - नहीं |

जितेश - तो फिर क्या करोगी | जब उसे कोई दिक्कत नहीं है तो तुम उसको लेकर इतनी परेशान क्यों हो रही हो |

रीमा - मैं परेशान नहीं हो रही हूं मैं बस चाहती हूं जैसे मैं तुम्हें सुख दे रही हूं अपने हुस्न और जवानी का समुन्दर तुम पर लुटा रही हूँ उसकी कुछ बुँदे उसे भी मिल जाये |

अब तक रीमा के चूत दाने को मसल रहे जितेश के हाथ भी रुक गए |

जितेश - तुम न पागल हो गयी हो |

रीमा ने फिर से जितेश का हाथ अपने चूत दाने से सटा दिया - मै तुम पर इतना भरोसा करती हूँ की सब कुछ तुम्हे सौंप दिया, तुम इतना भरोसा नहीं कर सकते |

जितेश निरुत्तर हो गया | रीमा के जवाब के आगे उसे कुछ कहते नहीं बना |

रीमा ने जितेश का बाहर झूल रहा लंड अपनी चूत में घुसेड लिया | जितेश घूर घूर कर गिरधारी को देख रहा था |

जितेश - तो बतावो क्या करना है |

रीमा - अब तुम्हें कुछ नहीं करना है जो तुम्हें करना था तुम कर रहे थे और वही करते रहो |

जितेश - क्या ?

रीमा उसे चूमती हुई - मुझे चोदो न बेबी क्या इधर उधर की बातो में पड़े हो , जमकर कसकर चोदो न|

जितेश को अभी भी संतोष नहीं हुआ उसने पूछा - तुम क्या करने वाली हो |

रीमा - कुछ नहीं बाद मोरे राजा अब मुझे चोदो ............. कितनी देर से तडपा कर रखा है मेरी गुलाबी मखमली चूत को , और कितना तड़पावोगे, मेरी चूत तुमारे लंड की भूखी है सिर्फ तुमारे, इसीलिए ये सिर्फ तुमारा लंड खाएगी | अभी आगे और हमेशा, अब खुश |

जितेश उसे लेकर लुढ़क गया | रीमा नीचे हो गयी और जितेश ऊपर हो गया | जितेश ने रीमा की चूत में गहरे धक्के लगाने शुरू कर दिए | रीमा को चोदते चोदते वो दाहिनी तरफ को खिसकता चला गया |
 
इधर रीमा को बार बार देखकर बहुत तेजी से गिरधारी अपना लंड मसल रहा था | रीमा ने एक उंगली से इशारा करके उसे अपने पास बुलाया | पहली बार में वो रीमा का इशारा समझ नहीं आया लेकिन फिर तेजी से उठाकर रीमा के बेड के पास आ गया | उसके पास आते ही रीमा बेड पर तितली की भांति फ़ैल गयी | उसका एक स्तन जितेश बुरी तरह से मसल कर उसकी चूत पर अपने मुसल लंड की जोरदार ठोकरे लगा रहा था | रीमा के बदन की गर्मी फिर बढने लगी | इधर गिरधारी के पास आते ही रीमा ने उसके लंड को हलके हाथो से थाम लिया, और उसे मुठीयाने लगी | ये देख जितेश इर्ष्या से जल उठा, उसके अन्दर का मर्दवादी अहंकार जाग गया वो खुन्नस में रीमा को जोरदार धक्के मारने लगा जिससे रीमा का पूरा बदन हिल रहा था | रीमा के मुहँ से तेज कराहे निकलने लगी - आआअह्रीह्माह्ह आआआआआ ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह ओओओओओओह्ह्हह्ह्ह्ह बेबी आआआअह्ह बेबी | रीमा भी समझ गयी आखिर उसकी चूत पर इतनी तेज ठोकरे क्यों पड़ रही है | लेकिन उन्ही ठोकरे से उसकी चूत में ऐसी तरंग पैदा करी की रीमा वासना के समन्दर में और गहराई तक गोते लगाने लगी |

उसके मुहँ से जितेश के हर धक्के की प्रतिध्वनि निकल रही थी | रीमा का जिस्म तेजी से हिल रहा था लेकिन उसने गिरधारी के लंड को कसकर हाथ में थाम रखा था | उसके लंड को मसलते मसलते रीमा ने अपने कांपते रसीले गुलाबी ओंठ उसके अंगारे की तरह जलते लंड के सुपाडे से सटा दिए | जितेश की तेज ठोकरे उसे हिलाए पड़ी थी इसलिए वो आसनी से उसके सुपाडे को आराम से नहीं चूस पा रही थी, कभी वो उसके अनुमान से ज्यादा घुस जाता, कभी तो वो उससे दूर हो जाती | रीमा के गुलाबी ओंठो का रसीला स्पर्श और गीली जुबान का खुरदुरा रोमांचकारी स्पर्श गिरधारी तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया | ये देखकर जितेश ने पूरी ताकत लगाकर रीमा की चूत में लंड पेल दिया | उसकी ठोकर से रीमा का बदन आगे की तरफ उछाल गया | ठोकर के लगते ही रीमा न चाहते हुए भी गिरधारी का आधा लंड घोंट गयी | गिरधारी का तो जैसे जैकपोट लग गया, रीमा जैसी हसीन औरत उसका लंड चूस रही है | उसके जीवन में ये किसी चमत्कार से कम नहीं था | वो बस रीमा जैसी गुलाबी गोरी अप्सरा के लंड चूसने के ख्याल से ही रोमाचित होकर उत्तेजना के चरम पर पहुँच गया था |

रीमा की चुताड़ो पर लगने वाली ठोकरों की कराहे अब रीमा के मुहँ में ही घुट जा रही थी | उसकी तेज सांसे उसे जल्दी ही मुहँ खोलकर साँस भरने को मजबूर कर देती |

रीमा के जीवन में ये पहला मौका था जब वो एक नहीं दो दो लंडो के साथ अपनी हवस बुझाने में जुटी थी | ये सोचकर ही उसकी चूत झरने लगी | दो लंडो का ख्याल ही उसे रोमांच की पराकाष्ठा पर पंहुचाये दे रहा था | रीमा के जिस्म के दो छेद और दोनों मुसल लंडो से भरे हुए | उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके जीवन में कभी कोई ऐसा मौका आएगा | एक लंड चूत पर दनादन ठोकरे मार रहा था और उन्ही ठोकरे से हिलता जिस्म दुसरे लंड को मुहँ के आगोश में अपने आप समेट दे रहा था | रीमा का बदन अब उसके काबू से बाहर जा रहा था | वो समझ नहीं पा रही थी वो कहाँ ध्यान लगाये |

एक तरफ उसकी चूत में लंड पेलता जितेश, दुसरे उसके मुहँ में फिसलता उसके पालतू का लंड | गिरधारी भी पूरी तरह मदहोश था | जितेश गुस्से जलन और वासना से भरा हुआ और रीमा इनके बीच मचलती उछलती अपनी ही कल्पनावो की दुनिया में चली गयी | दुनिया में कितनी औरते है जिन्हें एक साथ दो लंडो का सुख नसीब होता है | वो अन्दर से बहुत खुश थी और वासना में पूरी तरह मदमस्त थी | न अब वो दिमाग पर जोर लगा रही थी न उसे कुछ सोचना था | वो बस वासना के इस बहते तुफान में तैरती रहना चाहती थी | जितेश के धक्को से आराम से गिरधारी का लंड उसके मुहँ में अन्दर बाहर हो रहा था | गिरधारी की तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था | उसका हाथ अपने आप ही रीमा के स्तन की तरफ बढ़ा गया | लेकिन इससे पहले वो उसको दबोच कर मसलता, जितेश ने उसे अपने काबू में ले लिया | मायूस हो वो फिर से पीछे आ गया | तभी जितेश रीमा के ऊपर तक छाता हुआ उसे आकर चूमने लगा | रीमा के मुहँ से गिरधारी का लंड निकल गया | जितेश ने रीमा को अपने चुताड़ो पर जांघे सटाने को कहाँ और उसको अपनी बांहों में भर लिया | रीमा भी उससे चिपक गयी | जितेश रीमा का कसकर चोदने लगा |

इधर गिरधारी मायूस हो गया | आखिर कार रीमा जितेश की गिरफ्त से एक हाथ निकाल कर उसके लंड को मसलने लगी |

गिरधारी के चेहरे की ख़ुशी गायब हो गयी थी | इधर जितेश को भी रीमा को चोदते हुए बहुत देर हो गयी थी | बीच बीच में रूकावटो कारन वो अभी तक झड़ा नहीं था इसलिए इस बार लगातार चोद कर निपट जाना चाहता था | रीमा पूरी तरह से उसके कब्जे में थी और उसका लंड बेतहाशा उसकी चूत में दनादन जा रहा था | रीमा और जितेश दोनों की सांसे तेज थी |

जितेश रीमा को वैसा ही चोद रहा था जैसे वो चुदना चाहती थी लेकिन फिर भी वो खुद को खुद के अहसासों को, खुद की अतृप्त ख्वाइशो को, खुद के अरमानो को जितेश के उसकी चूत पर पड़ते धक्को से जोड़ नहीं पा रही थी | उसे कुछ कम सा लग रहा था | आखिर किस चीज की कमी है, सब कुछ तो वैसा ही हो रहा है जैसा वो चाहती थी | फिर उसके मन में इतना खालीपन क्यों है | इधर गिरधारी अब रीमा के बायीं तरफ खड़ा था | रीमा बाये हाथ से उसके लंड को मसल रही थी | रीमा जितेश की बाहों में थी जो दाहिनी तरफ को लुढका हुआ उसे अपनी बांहों में समेटे था | इसीलिए उसके उठे हुए मांसल बड़े बड़े चूतड़ गिरधारी की तरफ थे और उन पर लग रही ठोकरो से हिल रहे थे | पता नहीं क्यों लेकिन शायद जितेश रीमा के चुताड़ो को उठाकर गिरधारी को करीब से ये अहसास कराना चाहता था कि औकात में रहो | रीमा और रीमा का जिस्म सिर्फ उसका है और देखो कैसे मै रीमा की चूत को हचक हचक के चोद रहा हूँ | रीमा भी कितनी ख़ुशी ख़ुशी चुद रही है |

सब कुछ गिरधारी के इतना करीब हो रहा था कि उसका हाथ अपने आप ही रीमा के चुताड़ो पर चला गया | रीमा को जितेश ने दाहिनी करवट कर खुद से चीपका लिया था | उसकी जांघो को फैलाकर उसकी चूत त्रिकोण को खुद से चिपका लिया था | रीमा का चेहरा अब गिरधारी से उलट था | जैसे ही गिरधारी ने रीमाके चुताड़ो पर हाथ रखा जितेश ने रीमा को चोदते हुए आँखों से घुड़की दिखाई, जैसे कहना चाह रहा हो तुमारी मजाल कैसे हुई रीमा के गोरे नाजुक बदन को छूने की | रीमा सिर्फ मेरी है सिर्फ मेरी, उसे सिर्फ मै चोदुंगा बल्कि मै ही चोद रहा हूँ | वो भी देखो कैसे मेरी चौड़ी छाती से चिपकी चुद रही है | उसने गिरधारी के हाथ की हटाने की कोशिश की लेकिन इससे पहले वो रीमा के एक चूतड़ को अपने हाथ में ले चूका था | इधर रीमा के हाथ से उसका लंड कब का छूट चूका था इसलिए इसने झुकते हुए दोनों हाथो से रीमाके चूतड़ थाम लिए और उनकी मालिश करने लगा | जितेश कुढ़ कर रह गया | रीमा तो जितेश की चुदाई में पूरी तरह मदहोश हो गयी थी | जितेश रीमा को एक पल भी कुछ और सोचने का मौका नहीं देना चाहता था |

गिरधारी के लिए रीमा के मांसल गोरे बदन का स्पर्श ही उसके लिए किसी जन्नत से कम नहीं था | वो तो इसी खुसी में ही दोहरा हुआ जा रहा था | रीमा के चुताड़ो पर फिसलती उंगलियाँ उसके चुताड़ो की दरार सहलाती हुई , रीमा की चूत में जा रहे जितेश के मुसल लंड के बहुत करीब पहुँच गयी | गिरधारी को रीमा के चूतड़ बहुत अच्छे लग रहे थे | वो उन्ही की मालिश में मशगूल हो गया और उसकी उंगलियाँ रेंगते रेंगते रीमा के पिछली सुरंग के मुहाने पर पहुँच गयी | रीमा ने एक सिसकारी, इससे पहले गिरधारी कुछ और करता जितेश ने अपने दोनों हाथ रीमा के चुताड़ो पर चिपका दिए और उसके कसकर चूमकर चोदने लगा |

जितेश तेज सांसो के साथ - तुम्हे मजा आ रहा है न बेबी |
 
जितेश तेज सांसो के साथ - तुम्हे मजा आ रहा है न बेबी |

रीमा - बस ऐसे ही चोदते रही |

जितेश - मै तुमको मोटे मुसल लंड से गहराई तक चोद रहा हूँ, ऐसे ही तुम चुदना चाहती थी न बेबी |

रीमा - ऊऊऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ बेबी हाँ बिलकुल ऐसे ही | बेबी बस ऐसे ही चोदते रहो |

जितेश को पता था उसने जरा सी भी ढील दी तो गिरधारी रीमा के चुताड़ो पर कब्जिज़ा जमा लेगा इसीलिए उसने रीमा को चोदते चोदते न केवल उसके दोनों चुताड़ो को अपनी हथेलियों में ले रखा था बल्कि एक उंगली उसकी कसी गांड में घुसाने लगा ताकि उसके चिकने चुताड़ो पर अच्छी पकड़ बने | जैसे ही उसकी उंगली रीमा की गांड की कसे छल्ले को चीरती हुई अन्दर गयी |

रीमा जोर से सिसक पड़ी - ऊऊऊऊऊऊऊओईईईईईईईईईईइम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्ममाआआआआआआ |

जितेश ने जोश जोश में दो बार उंगली और अन्दर तक घुसेड़ कर अन्दर बाहर कर दी | रीमा सिसक कर जितेश से कसकर लिपट गयी - ऊऊऊऊऊऊऊओह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह गॉड सिसिसिसिसीईईईईईईईईईईईईईईइ |

इतनी देर की दनादन चुदाई का मजा एक तरफ और ये किंकी अहसास एक तरफ | रीमा के चुताड़ो की घाटी में तो जैसे किसी ने राख में दबी चिंगारी भड़का दी हो |

पिछले सुरंग की वासना अब तक अधूरी थी और बस जरा सी हवा मिलते ही भड़क गयी | जो तड़प गार्ड के लंड ने अधूरी छोड़ दी थी वो फिर से जिन्दा हो गयी | इतनी देर की चुदाई में आखिर रीमा क्या मिस कर रही थी उसका जवाब उसे मिल गया | सब कुछ था उसकी चुदाई में, मोटा मुसल तगड़ा लंड, गहरे जोरदार धक्के, उसे चूमने चाटने सहलाने वाला मर्द, उसके उरोजो को मसलने वाले हाथ और उसे क्या चाहिए था यही पहेली बनकर उसके दिमाग में घूम रहा था | जितेश की चुदाई से रीमा पूरी तरह मदहोश हो गयी थी अब उसे कुछ होश नहीं था वो कहाँ है क्या कर रही है | उसे बस इतना पता था वो जितेश की बाँहों में उसके मुसल लंड के करारे धक्के के कारन उछल रही है |

गिरधारी की नजर से रीमा की सिसकारी नहीं बच पाई - बॉस मैडम की गाड़ में उंगली करो न उन्हें मजा आ रहा है |

गिरधारी इतनी गौर से रीमा को निहार रहा है ये देखकर जितेश दंग रह गया |

जितेश गिरधारी की बातो से किलस गया - चूप रह भोसड़ी के |

गिरधारी - बॉस करो न, देखो कैसे मैडम सिसकी थी |

रीमा भी चुदाई में पूरी तरह मदहोश - करो न बेबी |

गिरधारी का जोश बढ़ा - देखो अब तो मैडम भी कह रही है |

अपनी आँखों से गिरधारी को घुड़कता हुआ जितेश - दूर हट भोसड़ी के मादरजात |

रीमा की वासना अब उसे सब कुछ भूलकर इसी में डूब जाने को कह रही थी - बेबी करो न पीछे भी करो न |

जितेश - रीमा तुम होश में नहीं हो | तुम्हे खुद नहीं पता तुम क्या बकवास कर रही हो |

गिरधारी - अरे बकवास नहीं बॉस मैडम को पिछवाडी में ज्यादा मजा आ रहा है |

जितेश - तेरी आकर गांड मारू भोसड़ी के तब पता चलेगा पिछवाडी का मजा |

रीमा जितेश से चिपकी हुई उसके कंधे पर अंध मुदी आँखों में वासना के तैरते डोरे से मदहोश - एक बार कर दो न |

जितेश - तुम पागल हो गई हो |

रीमा - मैं पागल नहीं हो गई हूं, जब आगे इतनी देर किया है तो थोड़ा पीछे कर दो |

जितेश - तुम होश में नहीं हो |

रीमा - मैं होश में नहीं हूं लेकिन मैं चाहती हूं जितना मजा मुझे आगे आया है उतना ही पीछे भी दे कोई |

जितेश - ये तुम ऐसी बहकी बहकी बाते क्यों कर रही हो | एक तरफ तो इतनी नैतिकता और संस्कारों की बातें करती हो और दूसरी तरफ यह क्या है कौन सी दुनिया में चली गई हो |

रीमा - ये वासना की दुनिया है बेबी, बस ऐसे ही चोदते रहो, इसी चुदाई के लिए बहुत तड़पी हूँ मै | काश ऐसे ही कोई पीछे की खुजली भी थोड़ी सी मिटा देता |

गिरधारी - मैडम तो एक नंबर की चुद्द्कड़ है, मै कहता न ये पूरा खेली खाई हुई है | इतना चुदने के बाद भी कैसे बिन पानी मचली की तरह तड़प रही है | इसकी प्यास एक लंड से नहीं बुझने वाली |

गिरधारी का उत्साह देख जितेश - भोसड़ी सोचना भी मत वर्ना तेरी कुत्ते से गांड मरवाउंगा |

रीमा - जितेश बेबी तुम इतनी देर से मुझे चोद रहे हो, एक बात पूंछु |

जितेश - हाँ पूछो |

रीमा - तुम बस अपने काम पर ध्यान दो, जो कर रहे हो करते रहो | मेरी सब गुलाबी सुरंगों की गहराइयों में उतर कर मेरी प्यास बुझावो |

जितेश - वही तो कर रहा हूँ लेकिन सुरंगों का क्या .......................?

रीमा ने बोलना जारी रखा - क्या लेकिन किन्तु परन्तु लगा रखा है | दुनिया क्या सभी औरते बस चूत में ही लंड लेती है | दुनिया में बहुत सी औरतें हैं जो एक साथ दो दो लंड के साथ खेलती है एक साथ दो लंड को अपनी सुरंगों में लेती है |

जितेश - ठीक लेकिन जो रात को कसमे खिलवा रही थी उसका क्या |

रीमा - मैंने तो अपना पूरा जिस्म तुम्हे सौंप दिया है जो लूटना है लुट लो, मैंने रोका है क्या, बस मेरी प्यास बुझा दो |

जितेश - तुम सच में होश में नहीं हो , तुमसे तो बात ही करना बेकार है|

रीमा - हाँ मै होश में नहीं हूँ और होश में आना भी नहीं चाहती हूँ | यह मेरे अंदर की वासना है और कुछ नहीं है, जब तक यह नहीं मिटेगी मै होश में नहीं आउंगी | मैं इसी वासना में तिल तिल पर जलती रहूंगी |

जितेश को लगा रीमा नहीं मानेगी | आखिर वो रीमा की चूत से लंड खीच कर बाहर निकाल लिया और उसके पिछवाड़े की खुजली मिटाने की तयारी करने लगा |

रीमा - ये क्या कर रहे हो बेबी | मेरी चूत से लंड क्यों निकाल लिया, मेरी चूत को चोदो न मै कितना तड़प रही हूँ |

जितेश कुछ समझ नहीं पाया फिर रीमा के काहे अनुसार जितेश ने बिना किसी सवाल जवाब के रीमा की चूत में लंड पेल दिया और ठोकरे मारने लगा | उसने अपने हाथ रीमा के चुताड़ो पर जमा दिए और सबसे बड़ी उंगली रीमा की पिछली सुरंग धँसता चला गया | रीमा सिसकारियां भरने लगी | इधर उसका लंड और पीछे उसकी उंगली एक साथ अन्दर बाहर होने लगे |

रीमा अपनी कमुकता के समन्दर में तैरने लगी - यस बेबी यस बेबी ऐसे ही चोदो मुझे | और जोर से चोदो, और कसकर चोदो बेबी, अन्दर तक चोदो | बड़ा मजा आ रहा है | बस ऐसे ही चोदते रहो |

जितेश - बेबी मजा आ रहा है और और जोर से चोदु |

रीमा - हाँ बेबी और जोर से चोदो | मसल कर रख दो मेरी चूत को कुचल कर रख दो मेरी चूत को |

जितेश और तेज धक्के लगाने लगा | जितेश पुरे रौ में था और कसकर रीमा को चोदकर जल्दी से अपने चरम को हासिल करना चाहता था | उसे भी लग रहा था थोड़ी देर उसने इसी तरह से रीमा को और चोदता रहा तो उसका लंड सफ़ेद लावा उगलने लगेगा |

इसी चक्कर में उसकी उंगली का रीमा की पिछली सुरंग में अन्दर बाहर होना रुक गया |

रीमा - बेबी पीछे भी करो न |

गिरधारी रीमा की चुदाई देखकर वही खड़ा खड़ा लंड मसल रहा था - मैडम उंगली से कुछ नहीं होगा, मोटा मुसल जब तक गांड में नहीं जायेगा इसकी खुजली नहीं मिटेगी |
 
जितेश और तेज धक्के लगाने लगा | जितेश पुरे रौ में था और कसकर रीमा को चोदकर जल्दी से अपने चरम को हासिल करना चाहता था | उसे भी लग रहा था थोड़ी देर उसने इसी तरह से रीमा को और चोदता रहा तो उसका लंड सफ़ेद लावा उगलने लगेगा |

इसी चक्कर में उसकी उंगली का रीमा की पिछली सुरंग में अन्दर बाहर होना रुक गया |

रीमा - बेबी पीछे भी करो न |

गिरधारी रीमा की चुदाई देखकर वही खड़ा खड़ा लंड मसल रहा था - मैडम उंगली से कुछ नहीं होगा, मोटा मुसल जब तक गांड में नहीं जायेगा इसकी खुजली नहीं मिटेगी |

जितेश अपनी रौ में था इसलिए उसने गिरधारी की बार पर गौर नहीं किया |

रीमा इतनी ज्यादा वासना में डूब चुकी थी कि गिरधारी जितेश का फर्क नहीं जान पाई - तो मोटा मुसल घुसेड़ कर इसकी खुजली मिटा दो न बेबी, किसने रोका है तुम्हे |

जितेश और गिरधारी ने क्या सही सुना, दोनों हक्के बक्के रह गए, नहीं शायद उनसे कुछ सुनने में गलती हुई है |

गिरधारी को यकीन नहीं हुआ - क्या कहा मैडम दुबारा बोलना |

रीमा - तो घुसेड़ दो न मुसल किसने रोका है | गिरधारी की तो जैसे बांछे खिल गयी | उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा | उसक लंड जोश में आकर झटके मारने लगा |

जितेश उसे टोकता हुआ - रीमा क्या बकवास कर रही हो तुम होश में तो हो न | उसने रीमा को कसकर झिझोड़ा |

इधर गिरधारी भाग कर गया और अपने पजामे से एक पुड़िया निकाल कर उसका पाउडर चाट लिया |

असल में वो कोकीन थी | गिरधारी का लंड भले ही मुसल हो लेकिन चुदाई करते वक्त बहुत ज्यादा देर तक नहीं टिकता था | उसकी पिचकारी जल्दी ही निकल जाती थी, ऐसा नहीं था की उसने कोई कमी थी लेकिन अपना अपना स्टैमिना होता है | एक बार जब वो रंडी चोदने गया था तो जल्दी निपटने के कारन रंडी उसे ताने मारने लगी थी और फिर उसी ने ये सफ़ेद पाउडर दिया था | शुरुआत में तो सिर्फ चुदाई के लिए चाटता था लेकिन धीरे धीरे उसे इसकी आदत हो गयी अब तो बस मजे के लिए भी चाट लेता था | तब से कोकीन की एक पुड़िया वो हमेशा अपनी जेब में रखता था | उसने देखा था कैसे रीमा जितेश से जोर जोर से चुदाई की मांग कर रही थी, जबकि जितेश अपनी फुल स्पीड में रीमा को चोद रहा था | जब बॉस की चुदाई से मैडम के जिस्म की आग न बुझ रही तो मै किस खेत की मुली हूँ | गिरधारी ने अपने मन ही मन में सोचा - लगता है मैडम की चुदास बहुत तगड़ी है | जब बॉस के चोदने से इसकी चूत की गर्मी कम नहीं हो रही तो मेरी क्या बिसात है | इसीलिए उसने कोकीन चाट ली | उसने कुछ ज्यादा ही कोकीन चाट ली |

इधर जितेश रीमा को सही गलत समझाने में लगा हुआ था इसी बीच गिरधारीको कोकीन चाटता उसने देख लिया था | इसलिए वो आखे तरेरने लगा था | रीमा को भूल जितेश अपने अहम् और इर्ष्या में घिरकर रह गया |

गिरधारी को उसने अपनी तरफ बुलाया | गिरधारी उसके पास आते ही कान में फुसफुसाया - बॉस आज इस रेस में तो आपको हरा के ही मानूंगा |

जितेश - साले औकात भूल गया |

गिरधारी - तभी तो बोल रहा हूँ, आज आपको हराने के बाद ही बिस्तर से उतारूंगा | मैडम की सारी खुजली मिटा दूंगा |

जितेश को पता था गिरधारी चुदाई में उसे हराने की बात कर रहा था | वैसे भी उसके पास एडवांटेज था | जितेश इतनी देर से रीमा को चोद रहा था इसलिए उसका पहले झड़ना स्वाभाविक था जबकि गिरधारी ने तो अभी शुरुआत भी नहीं करी थी |

जितेश उसके बाल पकड़ कर अपनी तरफ खीचता हुआ - साले मै पिछले आधे घंटे से जो इस रेस में दौड़ रहा हूँ वो | तू बार बार हमारी चुदाई में उंगली न करता तो अब तक रीमा मैडम की गुलाबी चूत मेरे सफ़ेद गाढे लंड रस से लबालब भरी होती |

गिरधारी - बहाने मत बनावो, आज तो आप हारने वाले वो |

इससे पहले गिरधारी सतर्क हो पाता | जितेश ने उसके गले की हसुये में दो उंगली गडा कर उसकी मुट्ठी खोल ली और उसकी कोकीन की पुड़िया छीन ली और उसमे का पाउडर चाट लिया | उसे एक झटका सा लगा, जैसे नीद से जगा हो | उसकी थकावट एक नए जोश और फुर्ती में बदल गयी | जितेश वैसे भी गिरधारी से अन्दर से कुढा बैठा था | रीमा के आगे उसका बस नहीं चला वरना रीमा को चोदना तो छोड़ो छूने तक नहीं देता | जब उसे लगा गिरधारी ने कोकीन सिर्फ इसलिए ली है ताकि वो उसे ज्यादा जोर जोर से और देर तक चोद सके और रीमा की नजर में तारीफ हासिल कर सके | तो उसके अन्दर की इर्ष्या चरम पर पहुँच गयी | रीमा उसकी थी और उसे कोई उससे ज्यादा देर तक चोदे ये उसे कैसे बर्दास्त होता | उसने भी कोकीन चाट ली |
 
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