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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

रीमा कुछ नहीं बोली, उसे पता था जितेश ने उसे ताना मारा है | रीमा की हालात वैसे भी अच्छी नहीं थी | जितेश की बात सुनकर उसके दिमाग में बस एक ही ख्याल आया अब क्या होने वाला है | उसे शायद आभास हो गया था जिस तरह से दोनों उसको फिर से तेजी से चोदने लगे थे | आज तो ये मेरा कचूमर निकाल कर ही दम लेगे | रीमा अब उस पल के लिए पछता रही थी जब उसने गिरधारी को अपनी मदहोशी में गांड मारने के लिए बुला लिया था | वासना की मदहोशी की वो भूल कितनी महँगी पड़ने वाली थी इसका अंदाजा शायद उसे नहीं था | गिरधारी अपने लंड को अन्दर तक ठेलने लगा | रीमा समझ गयी अब बस इन ठोकरों को बर्दास्त करने के अलावा कोई चारा नहीं है | चाहे रो रो कर बर्दास्त करू या हंस हंस कर | ये दोनों तो आपस में ही मर्दानगी की रेस लगाने लग गए है | मेरा क्या होगा किसी को परवाह ही नहीं है | गिरधारी और जितेश में गहरी और तेज ठोकरों का मुकाबला सा होने लगा |

वो भूल गए जिन सुरंगों को चीरने में वो होड़ लगा रहे है वो रीमा के हांड मांस के बने जिस्म की है | उसे तकलीफ हो रही होगी | उन्हें तो इस वक्त बस अपनी अपनी मर्दानगी की परवाह थी, उनकी मर्दानगी की मुछे नहीं लचनी चाहिए एक दुसरे के सामने, भले ही रीमा की चूत और गांड दोनों फट के चिथड़े चीथड़े हो जाये | एक तो कोकीन का नशा ऊपर से हवस की गर्मी ऊपर से रीमा का गोरा गुलाबी बदन जिस्म, उसके जिस्म की संकरी मखमली सुरंगे आखिर क्यों न वो एक्सप्रेस ट्रेन की तरह अपने लंड दौडाए ,.......उसके ऊपर से अपनी मर्दानगी किसी से कम नहीं का तुर्रा | दोनों दनादन बिना रीमा की परवाह किये रीमा के छेदों को कुचलने लगे, दनादन लंड पेलने लगे | उनके लंड बीजली की तेजी से रीमा के जिस्म में गायब होने लगे | जितेश के भड़काने से गिरधारी कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया था | वो रीमा को कंघे से थामे हुए अपना पूरा लंड रीमा की गांड में पेले दे रहा था | रीमा की गांड पूरी तरह खुल गयी थी | आखिर गिरधारी ने रीमा की गांड के छेद को चोदने में आने वाली सारी रुकवाटे चीर के रख दी थी | उसने रीमा की गुलाबी गांड का छेद खोलकर फैला दिया था | उसका लंड सटासट रीमा की गांड की गहरइयो में गायब हो जा रहा था | जितेश में कहाँ मानने वाला था उसने भी रीमा को पेलना जारी रखा हुआ था | रीमा का आखिर दो लंडो का अरमान पूरा हो गया था | एक साथ दो लंड उसके जिस्म को चीर कर अंदर गायब हो जा रहे थे |

लेकिन गिरधारी जल्दी ही हांफने लगा और उसकी स्पीड कम पड़ गयी |

जितेश रीमा की चूत में बेतहाशा ठोकर मारता हुआ - बस भोसड़ी निकल गयी सारी अकड़ |

गिरधारी ने एक बार में करारा शॉट मारा और उनका पूरा लंड रीमा की संकरी गांड में पैबस्त ही गया |

रीमा - माआआआआआआरररररररररररररररररररररररर डाडाडाडाडाडाडाडाडाडाडालालालालालालालालाल मादरचोद, आराम से मार न, क्यों फाड़ने में तुला है भोसड़ी के | गाड़ मारने के लिए दी थी मरादार्चोद चिथड़े उड़ाने के लिए नहीं | भोसड़ी के रबर की पाइप नहीं मेरी गाड़ है बहनचोद, हांड मांस की संकरी गांड | हरामी के पिल्लै ने जान निकाल दी |

गिरधारी तो अपने ही नशे में था - मैडम गांड तो ऐसे ही मारी जाती है ये तो मरवाने से पहले सोचना था |

जितेश - तो भोसड़ी के लंड पेलता क्यों नहीं, मर्दानगी मुहँ से नहीं लंड से साबित करनी पड़ती है भोसड़ी के |

गिरधारी ने फिर से रीमा की गांड की गहराइयो तक लंड पेल दिया |

रीमा - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ मममममममममाआआआआआआआआआआ रेरेरेरीरेरेरेई |

जितेश - साले मैडम की ऐसी गांड मार की जब जब मैडम का चुताड़ो पर हाथ जाए तो तेरे लंड की ठोकरे याद आ जाये |

गिरधारी ने रीमा के चुताड़ो पर एक करारी चमाट मारी - आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् क्या कसी हुई गरम गरम गांड है मेरी |

रीमा तो दर्द से बेहाल थी और उसे अहसास था उसके चीखने चिल्लाने का अब उन पर कोई असर नहीं होने वाला | अपनी बेबसी लाचारी देख मायूस हो गयी | गिरधारी की ठोकरों से उसकी आँखों में आंसू आ गए | ये तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था | ऐसा लगता था गिरधारी के साथ साथ जितेश में जानवर बन गया है |

दो लंडो से चुदने की ख्वाइश पूरी हो गयी थी | भले ही इस समय दोनों लंड अपनी आपस में चुदाई की रेस लगाकर रीमा का कचूमर बनाने पर तुले हो | रीमा बंद आँखों से बस अपनी गांड और चूत की दीवारों की मसल रहे मोटे मुसल लंडो को गरमाहट को महसूस कर रही थी | ऐसा लग रहा था जैसे कोई तेजी से उसके अन्दर आ जा रहा है | रीमा के चौड़े मांसल भारी भरकम चूतड़ और जिस्म तेजी से हिल रहा था | रीमा ने आंसू पोंछ लिए | अब उसकी कोई सुनने वाला नहीं था | उसे पता था वो नहीं रुकने वाले | अब बस उनके लंडो से पिचकारी छुटे तो उसकी जान में जान आये | यही सोच उसने मुट्ठियाँ भींच की और ठोकरे बर्दाश्त करने लगी | जबदस्त चुदाई का माहौल बना हुआ था | किसी को किसी की परवाह नहीं थी | सब बस अपनी अपनी वासना की आग की लपते बुझाने में लगे थे | रीमा की चूत और गांड की दीवारों में रगड़ रहे मोटे लंड का अहसास उसके दिलो में घर कर रहा था | ये दिन शायद रीमा कभी नहीं भूलेगी | दो दो लंडो की चुदाई से मिले दर्द से कराहती, थकावट से चूर, बुरी तरह हांफती रीमा के जिस्मों मे लांस तेजी से गायब होकर अन्दर बाहर हो रहे थे |

जितेश रीमा की चूत पर ठोकरे मरता हुआ - मैडम मजा आ रहा है |

गिरधारी कहाँ पीछे रहने वाला था - मैडम कैसा महसूस हो रहा है गांड मरवा के, मजा आ रहा है या नहीं |

जितेश गिरधारी से कुढ सा गया |

उसने रीमा को एक करारा झटका मारा - मैडम ऐसे ही तो चुदना चाहती थी न | हचक हचक के, ये लो मेरा मुसल लंड अपनी चुत् में |

रीमा जितेश की ठोकर से कराह कर रह गयी | कुछ बोलना चाहती थी उससे पहले गिरधारी ने भी तेज ठोकर मारी - ये लो मैडम मेरा पूरा लंड अपनी कसी गांड में | मैडम आपकी गांड की सारी खुजली दूर कर दूंगा |

रीमा फिर दर्द से कराह उठी | उसकी आँखों में आंसू आ गए - कहाँ फंस गयी | किसको कोसु जब अपना नसीब ही ख़राब है अपनी ही बुद्धि भ्रष्ट थी | अब तो ये दर्द झेलना ही पड़ेगा |

गिरधारी - मैडम चिंता मत करो बॉस से दमदार तरीके से आपकी गांड की मालिस अपने लंड से करूंगा | ऐसा मजा आएगा आपको जिंदगी भर नहीं भूलोगी | आपकी गांड की सारी खुजली मिटा दूंगा मैडम ये लो मेरा मुसल लंड आआआआआआआआ |

गिरधारी अपना सारा दमखम झोक कर दनादन रीमा की कसी गांड के चीथड़े उड़ाने लगा | जितेश के मुकाबले गिरधारी की ठोकरे ज्यादा जोरदार थी | वह रीमा की गांड को बड़ी निष्ठुरता से ठोंक रहा था | गिरधारी की बर्बरता भरी गांड कुटाई कुछ देर तक रीमा बर्दास्त करती रही , लेकिन उसकी कठोर तेज ठोकरे दनादन लगातार उसके चुताड़ो और गांड पर पड़ रही थी इससे उसकी पिंडलियों में दर्द होने लगा | आखिरकार रीमा चीखते हुए उस न बर्दास्त कर पाने वाले दर्द के साथ जितेश के ऊपर ही लुढ़क गयी |
 
जितेश अपनी पूरी रौ में रीमा को चोद रहा था इसलिए उसे कुछ समय लगा समझने में की आखिर क्या हुआ | उसने रीमा का चेहरा उठकर देखा | बंद आँखों के साथ उसके चेहरे पर असीमित दर्द झलक रहा था | रीमा को अपने ऊपर इस तरह से दर्द से बेसुध देख जितेश को थमना पड़ गया | गिरधारी की हालत जितेश से कुछ अलग नहीं थी वो रीमा की गांड में बेतहाशा धक्के लगाता रहा | आखिरकार जितेश को उसे रोकना पड़ा , तब जाकर वो थमा | फिर भी उसने लंड बाहर नहीं निकाला | जितेश का लंड भी रीमा की चूत में धंसा रहा | दोनों अपनी अपनी सांसो को काबू करने लगे |

जितेश रीमा का चेहरा थाम - रीमा मैडम रीमा मैडम आप ठीक तो हो |

रीमा दर्द बर्दास्त करती आंखे बंद किये हुए - हूँ |

जितेश - रीमा मैडम क्या हुआ |

रीमा - कुछ नहीं बस थोड़ा सा थम जाओ, साँस ले लेने दो | मुझे नहीं पता था तुम लोग इस हद तक जाकर मेरी चूत गांड के चीथड़े उड़ाओगे | बस थोड़ा सा थम जावो |

जितेश - दर्द हो रहा है रीमा बेबी | गिरधारी भोसड़ी के रबर की पाइप में लंड नहीं पेल रहा है आराम से चोद मैडम को |

गिरधारी - बॉस अब क्या दर्द, क्या तकलीफ मैडम की गांड इतना मोटा लंड घोंट गयी, अब क्या अब तो सटासट लंड जा रह है गांड में |

जितेश - भोसड़ी के तो क्या गांड फाड़कर रख देगा मराद्चोद |

गिरधारी - अभी तो मै मैडम चोद हूँ क्यों सही कहा न मैडम | मैडम आज आपकी गांड की खुजली मिटा कर ही रहूँगा भले ही सारा दम निकल जाये | ऐसी गोरी चिकनी गुलाबी कसी हुई मख्खन मलाई जैसी गांड रोज रोज मारने को कहाँ मिलती है |

जितेश - मैडम चोद तुझे समझ नहीं आ रहा है मै क्या बोल रहा हूँ |

गिरधारी - बॉस मै तो बस मैडम की गांड की खुजली मिटा रहा था |

जितेश - भोसड़ी के मै भी तेरी गांड की ऐसे ही खुजली मिटाऊ तब समझ में आएगा | बहुत हो गया तेरा अब तू हाथ हिलाकर अपनी पिचकारी निकाल | बहुत देर तूने रीमा की मक्खन मलाई जैसी गांड का सुख लूट लिया |

बॉस - ये तो सरासर ज्यायती है |

जितेश - तू साला नीच आदमी तुझे किसी चीज की क़द्र करनी आती है | साले मैडम ने अपनी गांड मारने को दी है, पता है गांड मरवाने में कितनी तकलीफ होती है | साले पिस्टन की तरह लंड पेले जा रहा है |

रीमा जितेश को रोकती हुई - उसे मना मत करो प्लीज बस थोड़ा सा थम लो | मैं इस हालात में तुम दोनों को नहीं रोकना चाहती थी लेकिन क्या करू बर्दास्त से बाहर हो गया | मुझे पता है तुम लोग अपनी पूरी रौ में हो |

जितेश - कोई बात नहीं मैडम, आपको तकलीफ और दर्द देकर थोड़े मजे लुटेगें |

दोनों अपना अपना लंड रीमा के जिस्म की गुलाबी कसी सुरंगों में घुसेड़े पड़े रहे | रीमा अपनी बेलगाम सांसो और धडकनों दोनों को काबू करने की असफल कोशिश करते हुए अपनी पिंडलियों का दर्द सँभालने लगी | आखिर कार रीमा उन दोनों हाहाकारी लंडो के आगे पस्त ही हो गयी | उन लंडो ने उसके जिस्म को हरा दिया | उन लंडो ने उसको इस कदर चोदा की उसकी पिंडलियाँ जवाब दे गयी | रीमा जितेश और गिरधारी के पसीने से लथपथ जिस्मो के बीच में सैंडविच बनी हुई थी | अपने हालातों पर उसे रोना आ रहा था | अपने जिस्म की दुर्दशा देखकर मन कर रहा था जोर जोर से दहाड़ मार कर रोये | उसकी वासना ने उसे किस गर्त में धकेल दिया था | आज यहाँ एक अनजान सी गुमनाम अँधेरी बस्ती के एक छोटे से कमरे में वो अपना सब कुछ लुटाये दे रही है | नहीं जानती अपने जिस्म और जवानी को न्योछावर करने के बाद भी उसे कुछ हासिल होगा की नहीं | आखिर वो कर क्या रही है | जिस गोरे कमसिन जिस्म की रंगत तक नहीं उतरने देती थी वो जिस्म दो मर्द भूखे भेडियों की तरह नोच रहे है | जिस चूत को इतना नजाकत से चिकना बनाकर, सबसे बचाकर रखती थी | आज उसे चूत को इस तरह लुटते पिटते कुचलते देख उसे रोना क्यों नहीं आ रहा | आखिर क्यों एक अनजान मर्द को अपनी सबसे कीमती चीज सौंप दी क्या लगता है वो तेरा | गिरधारी को तो तू जानती तक नहीं, वो तेरे जिस्म के उस हिस्से को चीर रहा है जहाँ तू अपनई उंगली घुसेड़ने से भी डरती है | ये सब क्या है रीमा, तू वासना में इतनी अन्धी हो गयी है की अपने जिस्म की दुर्दशा करवाने पर तुली हुई है | ये चुदाई नहीं है, ये तेरे जिस्म को चोद नहीं रहे है | ये गिद्ध बनकर तेरे जिस्म को नोच रहे है | बोटी बोटी नोच रहे है | गलती उनकी नहीं है | उनकी तो फितरत ही यही है, जहाँ चूत देखेगे वहां टूट पड़ेगे | इस तरह से अपने जिस्म को इन भूखे भेडियों से नुचवाने के लिए तूने खुद को इनके सामने परोस दिया है | अपनी इस हालत के लिए तू ही जिम्मेदार है | उसका बहुत तेज रोने का मन कर रहा था | तभी उसके चुताड़ो पर फिर से ठोकरे लगनी शुरू हो गयी | दनादन सटासट तेज ठोकरे |

गिरधारी - मैडम अब ज्यादा रुका नहीं जा रहा, थोड़ा बर्दाश्त कर लो, अब तो आराम से आपकी गांड में लंड जा रहा है | आआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह मैडम मै सारी दुनिया की बद्शाहत छोड़ दो ऐसी गांड के लिए | क्या गद्देदार नरम नरम चूतड़ है आपके |

रीमा - तो आराम से करो, मैंने कब रोका है, जब बेतहाशा ठोकरे मारोगे तो मेरा जिस्म भी जवाब दे जाता है |

गिरधारी - अब आराम आराम से चोदुंगा आपको | आपको तकलीफ थोड़े पहूँचानी है, बल्कि मै तो आपको गांड मरवाने का वो सुख देना चाहता हूँ जो आप जिंदगी भर न भूले | मै सच में स्वर्ग की सैर कर रहा हूँ आपके के आगे तो वहां की अप्सरा भी फ़ैल है | मैडम मै बस जिंदगी भर आपकी गांड ही मारता रहना चाहता हूँ | कितनी कोमल गुलाबी कसी गरम गांड है आपकी |
 
रीमा समझ गयी इसके दिमाग में वासना बुरी तरह चढ़ गयी है अब इसका अंत निकट है |

ये गिरधारी था | उससे अब और रुका नहीं जा रहा था | रीमा गर्दन घुमाकर देखने लगती है | आखिर वो रीमा की गांड जोर जोर से मारने लगा | रीमा फिर कराह उठी | जितेश भी कमर हिलाने लगा | रीमा के जिस्म में घुसते उसके जिस्म को चीरते दो लंड | रीमा के दिमाग में बस एक शब्द गूंजा - दो लंड | कितनी औरते दो लंड लेने की हिम्मत एक साथ जुटा पाती है | रीमा ने दो लंड एक साथ लिए थे | बस अपने अंतर्मन की एक आवाज पर | आखिर वो अफ़सोस क्यों करे | उसका जिस्म है, उसके जिस्म को चीरते लंड, भले ही उसकी आज दर्द से चीर कर रख दिया हो लेकिन जिस्म की में भरी हवस को भी तो बुझा डालेगे | कुछ दिन तक ये जिस्म हवस की आग में जलकर उसकी रातो की नीद नहीं ख़राब करेगा | मै क्यों शर्म करू, क्यों फालतू का सोचु | मेरे जिस्म की मखमली सुरंगों को इसलिए चीरा है इसलिए मुझे चोदा है क्योकि मै चाहती थी |

तकलीफ तो होगी ही, थोड़ा जोश में आकर कुछ ज्यादा तेज ठोकरे लगा दी लेकिन औरत का जिस्म बना ही ठोकरे खाने के लिए | क्या गलत कर रहे हो वो, मुझे चोद ही तो रहे है मेरे कहने पर चोद रहे है | अब सब कुछ मेरे मन का मेरे कहे अनुसार तो नहीं होगा | मेरी ख्वाइशे है तो उनकी भी ख्वाइशे है, मै अपनी ख्वाइशे पूरी कर रही हूँ और वो अपनी | चूत थोड़े ठोकर मारेगी, लंड ही ठोकर मारेगा, मारने दो न ठोकरे, बस उनके मुसल लंडो को अपने जिस्म के अन्दर महसूस करो, देखो न कितनी गहराई तक जा रहे है | बस उस अहसास को अपने दिल में संजोओं, दर्द तो साथ में मिलेगा ही | जब तक दर्द से भागोगी तब तक चुदाई के इस अहसास को भी नहीं जी पावोगी |

गिरधारी - अब ठीक है मैडम, इतनी आराम से आपकी गांड मारू |

रीमा - हाँ बस ऐसे ही करते रहो |

जितेश - मैडम की गांड का अच्छे से बाजा बजा, गांड से जब तक पक पक पक की आवाज न निकले तब तक लगता ही नहीं किसी की गांड मारी जा रही है |

रीमा - तुम उसे भड़का रहे हो | मेरी जान निकलवाना चाहते हो | मुझे सब पता है तुम उससे जल रहे हो |

जितेश - भला मै क्यों .........|

गिरधारी रीमा के चूतड़ पर तड़ाक से अपनी चपत लगाता हुआ - बिलकुल सही कहाँ मैडम | मै आपकी गांड मार रहा हूँ यही सोचकर बॉस की झांटे राख हुई जा रही है | ये लो मैडम मेरा मुसल लंड अपनी गांड में | इतना कहकर उसने रीमा के चूतड़ पर एक करारी चपत जमा दी |

रीमा - आआआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह मादरचोद गांड में लंड पेल भोसड़ी के, चूतड़ क्यों बजा रहा है चोट लगती है |

गिरधारी - इसका भी तो मजा लूटो, गांड के साथ साथ जब तक चूतड़ भी लाल ना हो जाये तब तक पता कैसे चलेगा की गांड मरवाई है | | इतना कहकर उसने फिर से रीमा के चुताड़ो पर एक चपत मारी |

रीमा बिलबिला कर रह गयी - तेरी तो साले भड़वे मादरचोद दो टके के नाली के कीड़े, हरामजादे चोट लगती है |

गिरधारी - मजा भी तो तुम्ही लूट रही हो मैडम, ये लो मेरा लंड अपनी गांड में अन्दर तक |

इतना कहकर उसने एक जोरदार करारा झटका मारा | वो फिर से रीमा के चूतड़ पर चपत मारने वाला था लेकिन जितेश ने बीच में हाथ डाल दिया इसलिए बस हलके से चपत लगी |

रीमा - तू नहीं मानेगा मादरचोद ..............तेरी तो |

इससे पहले रीमा पीछे की तरफ मुड़ती जितेश ने रीमा को चूम लिया और रीमा की बात उसके मुहँ में घुट कर रह गई | जितेश ने भी रीमा के चुताड़ो पर चपत लगायी | उसकी देखादुनी में गिरधारी ने भी जारी रखा | दोनों रीमा को चोदते हुए उसके चुताड़ो को लाल करने लगे | रीमा को बड़ा रोना आया | दोनों ने उसके चुताड़ो को तबला बना दिया | वो अन्दर ही अन्दर कुढ़ कर रह गयी |

रीमा कुछ देर तक तो चुताड़ो पर पड़ रहे थप्पड़ो को बर्दाश्त करती रही फिर बोल ही पड़ी - क्या कर रहे हो तुम लोग | मेरे चुताड़ो का तबला बना दिया है |

गिरधारी - मैडम चुदाई में सिर्फ लंड पेलाई ही नहीं होती, थोड़ा मसलना कुचलना चिकोटी काटना , इन सबका भी थोड़ा सा इसका मजा लो | हम तो आपको जी जान से सारा मजा देने की फ़िराक में और आप हमसे ही शिकायते करे जा रही हो |

गिरधारी की इस बढ़ी हिम्मत पर रीमा खीझ गयी - तुमारी गांड में अभी अपना हाथ घुसेड़ के तुमारे चूतड़ लाल करूंगी तब समझ में आएगा |

गिरधारी खीसे निपोरता हुआ - करो न मैडम, आपके लिए तो जान हाजिर है, आप मेरी गांड मरोगी ये तो मेरी खुशनसीबी होगी |

रीमा झुन्झुलाती हुई - कहाँ फंस गयी मै |

गिरधारी - दो लंडो के बीच |

रीमा - ओफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ये तो सर पर ही चढ़ा जा रहा है, तूम कुछ बोलते क्यों नहीं |

जितेश - मैंने तो पहले ही कहाँ था बहुत ही लीचड़ किस्म का इंसान है मै तो मुहँ नहीं लगाता | तुमने ही उसे चढ़ाया है तुम ही जानो |

चिकोटी से जितेश को याद आया, उसने रीमा के निप्पल मसला दिए |

रीमा - आआआआआऔऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊउचचचचचचचचचचचचचचचचचच |

इससे पहले रीमा जितेश से शिकायत करती जितेश ने तेजी से जाकर उसके चूत दाने को मसल दिया | ये टीजिंग रीमा की चुदाई में मसाले की तरह और मजा डाल रही थी लेकिन रीमा को तो इससे भी शिकायत थी भले ही उसे कितना भी मजा आ रहा हो |

तुम दोनों आपस में मिलकर मुझे परेशान कर रहे हो | मै किसी से बात नहीं करूंगी | रीमा किसल के रह गयी | वो अपनी चुदाई पर दिमाग दौड़ाने लगी | अपने जिस्म में जाते लंडो के बारे ,में सोचने लगी | आखिर क्या बुराई है दो लंडो से चुदने में | हाँ मैंने ...........मैंने लिए है दो लंड, मुसल लंड एक साथ, आगे भी लूंगी | जब मेरी मर्जी होगी तब लूंगी | इसी विचार के आते ही जादू की तरह उसके अन्दर से वो ग्लानी पता नहीं कहाँ फुर्र हो गयी | इसी के साथ वो खुद को अपने अंतर्समन में ही साबित करने में लग गयी | दिन रात अपनी ख्वाइशो के अरमानो में घुट घुट कर जीने से बेहतर है जब मौका मिले तो अपने मन की करना | क्या करूंगी इस खूबसूरत जिस्म का जब इसका कोई कदरदान ही नहीं होगा | क्या करूंगी इस कमसिन चूत की गुलाबी कोमलता को बचाकर जब कोई इसे चाहने वाला ही नहीं होगा | इसे कोई चाहेगा तो तब जब इसका स्वाद ले पायेगा | जब मर्द को औरत कुछ खास तरह से सुख देती है तो मर्द भी उसका दीवाना हो जाता है | ये गांड का दर्द कल को मीठे अहसास में तब बदल जायेगा, जब अपने चाहने वाले को चूत के साथ साथ गांड की सैर भी कराउंगी | सब औरते गांड नहीं मरवाती लेकिन जो मरवाती है उनके चाहने वाले उनसे कितना खुस रहते है | मर्द भी खुस हो जाते है आखिर औरत तकलीफ और दर्द बर्दास्त करके उसको एक नया सुख दे रही है | इसी दर्द में तो औरत का सारा मजा छुपा हुआ है |

गिरधारी की ठोकरे रीमा के मुहँ से कराह निकाले दे रही थी - आआआअह्ह्ह मेरी संकरी गुलाबी गांड को चीरता ये लंड मेरे जिस्म में कैसे दर्द भरी तरंगे भर रहा है | ये ऐसे ही गांड मारता रहा तो मुझे पागल कर देगा | ये अहसास अलग है रीमा, इसी दर्द के अन्दर उस अहसास को देखो, इस तुमारी चूत तुम्हे कभी नहीं दे पायेगी | उसकी दीवारों में उठने वाली तरंगे उमंगें अलग तरह की होती है लेकिन मेरी पिछवाड़े की गुलाबी दीवारे इस लंड से टकराकर कुछ अलग ही दर्द भरा मजा दे रही है | अपने इसी दर्द में, इसी कराह में डूब जावो रीमा, यही तुम्हे वासना के इस मकडजाल से बाहर निकलेगा | जमकर अपना हुस्न और जवानी लुटाओ | जितना लुटावोगी, उतना ही मजा मिलेगा | गिरधारी आराम से रीमा की गांड मार रहा था वो नहीं चाहता था पिछली बार की तरह इस बार मामला खराब हो जाये, पिछली बार रीमा की गांड में अपने पुरे लंड की भीषण ठोकरे से रीमा की पिंडलियों में दर्द होने लगा था |

तुमारे जिस्म में कुछ नहीं घटेगा, बल्कि तुम्हे चोदने वाले मर्द न केवल तुमारे बंद छेदों को खोलेगे बल्कि अपनी कीमती मलाई तुम्हे और देकर जायेगे | किस बात से डर रही हो रीमा | आज तक चुदाई से औरत का कभी कुछ घटा है | ये जिस्म ये जवानी लुटाने के लिए ही बनी है, जितना इसे लूटाओगी, उतना वासना की तृप्ति हासिल करोगी | रीमा को न जाने क्यों मुसल लंडो की लगती उन ठोकरे से उसके अन्दर एक नया विस्वास पैदा हुआ | उन दोनों की चुदाई से रीमा अपने अंतर्मन की उहापोह से बाहर आ गयी | आखिर जिस चुदाई का हौवा उसने अपने दिमाग में बना रखा था उसी ने उसके सारे डर को दूर किया |
 
जितेश अब और रुकने या थमने को तैयार नहीं था | उसे पता था जब तक रीमा उसके ऊपर पड़ी है और गिरधारी दनादन रीमा की गाड़ में लंड पेलता रहेगा उसे रीमा की चूत को गहराई से चोदने का मौका नहीं मिलेगा | आखिरकार रीमा की दो गुलाबी सुरंगे थी तो एक ही जिस्म का हिस्सा | जब चूत में मोटा लंड जाता है तो चूत चारो तरफ को फ़ैल जाती है | जब गांड के छल्ले को चीर कर गांड में मुसल लंड जाता है तो गांड की दीवारे भी अन्दर फ़ैल जाती है | लेकिन यहाँ तो दोनों तरफ से लंड घुसा पड़ा था | अब गाड़ की और चूत की दीवारे फैलकर कहाँ जाये | इसलिए दो लंड लेने में औरत का कलेजा मुहँ को आ जाता है | गिरधारी को पोजीशन रीमा की गांड को बेतहाशा पेलने के लिए सही थी | वो ज्यादा ताकत लगाकर झटके मार सकता था और मार रहा था | ये एडवांटेज जितेश के पास नहीं था | एक तो उसे रीमा के जिस्म को भी संभालना था और नीचे से कमर हिलाने की एक सीमा थी | ऊपर से उसके लंड पेलने मे सबसे बड़ी ठोकर तो गिरधारी का रीमा की गांड में धंसा हुआ लंड था | दोनों रीमा के जिस्म के अन्दर आप में बेतहाशा रगड़ रहे थे | ऐसा लग रहा था जैसे बाहर जितेश और गिरधारी की मर्दानगी की कुश्ती चल रही हो और रीमा के जिस्म के अन्दर उनके लंड आपस में लड़ रहे हो | इस दोनों की नूरा कुश्ती में पिस तो रीमा ही रही थी | आखिर कार जितेश रीमा को हटाकर उसके ऊपर आ गया | गिरधारी रीमा के नीचे जाकर लेट गया | रीमा को गिरधारी की शक्ल ही नहीं पसंद थी भले ही वो उसकी गांड मार रही हो | उसे पता था ये कितना लीचड़ इंसान है पक्का उसे चूमने चटाने की कोशिश करेगा और रीमा को उससे घिन आएगी | इसीलिए रीमा भी जितेश की तरफ मुहँ करके अपने चूतड़ गिरधारी के पेट पर सटा दिए | पलक झपकते ही दोनों के लंड रीमा के जिस्म में गायब हो गए |

जितेश रीमा को चोदने लगा | गिरधारी भी अपनी कमर हिलाने लगा | अब बस चुदाई ही चुदाई हो रही थी | चुदाई के दौर पर दौर बीतते जा रहे थे लेकिन मजाल है जो किसी के लंड से पिचकारी छूटना शुरू हुई हो | रीमा को अब तक तो दर्द के मारे ही होश नहीं था | अब तक वो इतनी लम्बी दोतरफा चुदाई से बुरी तरह थककर पस्त हो चुकी थी | अब उसके हाथ और पैरो में जान नहीं बची थी | वो बस चुदे जा रही थी चुदे जा रही थी | दोनों उसके जिस्म में अपना लंड पेले जा रहे थे पेले जा रहे थे | गिरधारी ने अपना लंड बाहर खीचा था, उसी वक्त रीमा की उंगलियाँ जितेश की गोलियों को सहला रही थी | उसकी उंगलियाँ अपनी खुली गांड की सुरंग को टटोलने लगी | इससे पहले वो मुयाना कर पाती गिरधारी ने फिर से लंड पेल दिया |

तभी रीमा को ख्याल आया आखिर ये लोग इतनी देर से उसे चोद रहे है फिर झड़ क्यों नहीं रहे है | इतनी मर्दाना ताकत वाले लंड तो उसने पहली बार अपनी जिंदगी में देखे थे | उसका चुदवा चुदवा के बुरा हाल हो गया था | उसकी गांड बुरी तरह दुःख रही थी लेकिन गिरधारी का लंड पेलना ख़तम ही नहीं हो रहा था | गिरधारी के लंड ने उसकी गांड की चीथड़े कर दिए थे | उसकी गांड का छेद पूरी तरह चिर कर फ़ैल गया था | जितना मोटा गिरधारी का लंड था इतनी चौड़ी उसकी गांड की सुरंग हो गयी थी | मन ही मन बडबडा रही थी कितनी कसी हुई गांड थी मेरी, इसने चोद चोद कर कैसी सुरंग बना दी है | इतनी कसी गांड को इतनी देर तक बिना थके ये लंड कैसे पेल रहा है | अब तो सटासट इसका लंड जा रहा है, धीरे धीरे मार मेरी गांड मादरजात | अब खुल गयी है तो पूरा एक्सप्रेस ट्रेन बनकर दौड़ रहा है | हाय धीर धीरे ठोकर मार हरामी के लंड मेरी गांड को और कितना दुखायेगा | हरामजादे दर्द हो रहा है | जब तेरी गांड मरूंगी तब पता चलेगा |

अभी जितेश भी तो नहीं थक रहा है | कब से मुझे चोदना शुरू किया था, उसके लंड ने भी मेरी चूत का कूट कूट के बुरा हाल कर दिया था | अब तो चूत की दीवारे भी पस्त हो गयी, उन्होंने भी जितेश के लंड से चिपकना छोड़ दिया है और एक चौड़ी सी सुरंग बना दी है |

चूत के ओंठ ठोकर खा खा कर लाल हो गए है |फिर भी न तो इसका लंड मुरझा रहा है न इसमें से पिचकारी छुट रही है न ये थकावट महसूस कर रहा है | आखिर हो क्या रहा है | जितेश बहुत जोर से रीमा की चूत की कुटाई कर रहा था | उसकी कमर पुरजोर लगाकर रीमा की चूत में लंड पेल रही थी | उसके करारे जोरदार गहरे झटको की पीड़ा रीमा के चेहरे पर साफ़ देखि जा सकती थी |

हाय मेरी कमर दुखाने लगी है तेरे झटके झेल झेल कर आखिर कब तक झेलू इस मर्द के करारे झटके, ऐसा क्या हो गया है, रात में तो सही टाइम पर पिचकारी फुट पड़ी थी अब क्या हो गया है | रीमा के लिए दोनों का इस तरह बिना रुके बिना थके चोदना किसी पहेली से कम नहीं था | उसने पहले भी चुदाई की थी उसे पता था ताकतवर से ताकतवर मर्द भी इतनी देर में निपट जाता है |

इतनी लम्बी चुदाई के बाद अब तो रीमा की चूत की दीवारे भी सुख गयी थी | इसीलिए रीमा की चूत में लंड पेलने को जितेश को ताकतवर झटके मारने पड़ रहे थे | नीचे से गिरधारी ऊपर से जितेश, आखिर और कितना चुदेगी रीमा | कब ये दोनों झडेगें | कब इस दर्द और तकलीफ से छुटकारा मिलेगा | कोई नहीं रीमा जब तक चुद रही हो जवानी के मजे लूटती रहो | अभी तो तुमारे बदन में बहुत जान है | अभी तो घन्टे दो घन्टे लगातार ठोकरे बर्दास्त कर सकती हो | रीमा की कराहे जितेश का जोश और बढ़ा रही थी | जितेश तो रीमा को चोद रहा था लेकिन गिरधारी अपना लंड गांड में थामे बस कमर ही हिला पा रहा था | रीमा को लगा अगर ऐसे ही चलता रहा तो सुबह की शाम हो जाएगी, दोनों में से जब एक मुझे चोदेगा तो दूसरा थमा रहेगा | जब दूसरा चोदेगा तो पहला थमा रहेगा | आखिर ये कब तक चलेगा | ऐसे तो दोनों में से कोई झाड़ेगा ही नहीं | दोनों मिलकर मेरा कचूमर निकालते रहेंगे | लंड तो मेरी चूत और गाड़ में जा रहे है, इन्हें तो बस पेलने से मतलब है, हर करारी ठोकर पर दीवारे तो मेरी मखमली गुलाबी चूत और कसी गांड की छिल रही है | इन्हें क्या है दे ठोकर पर ठोकर लंड पेले जा रहे है | ठोकर तो मेरी पिंडली पर लग रही है | कमर तो दर्द से मेरी सीधे नहीं होगी | गाड़ की दीवारों की जलन अभी कम नहीं हुई है इन्होने चूत को भी चोद चोद कर सुखा डाला है | अब ऐसे सुखी सुरंगों में लगातार धक्के मारते रहेंगे तो मेरी चूत और गांड तो आज ही शहीद हो जाएगी | यही सोचकर रीमा बिना कुछ कहे एक करवट झुकने लगी | उसे घूमता देख जितेश भी उससे आकर चिपक गया | रीमा को अपने चूत में भी जलन महसूस होने लगी थी | उसने ढेर सारी लार निकल कर जितेश के लंड पर मल दी | इधर गिरधारी ने ये देख अपनी ही लार रीमा की गांड के खुले छेद में भर दी | फिर से रीमा की पेलाई का सिलसिला शुरू हो गया | दोनों के चेहरो के हाव भाव बता रह इथे अब उनकी मजिल दूर नहीं है बशर्ते कोई व्यवधान न आये |

रीमा - मुझे अब एक साथ चोदो लगातार, रुकना नहीं | मै इस थोडा आगे थोड़ा पीछे पेलाई चुदाई के खेल से थक गयी हूँ | मुझे आगे पीछे दोनों जगह एक साथ लंड चाहिए | तेज तेज चोदो, जमकर चोदो | जो कुछ होगा देखा जायेगा | अब किसी भी कीमत पर रुकना नहीं | मै नहीं पूरा दिन इस दर्द से गुजर कर नहीं चुदती रहना नहीं चाहती हूँ |

जितेश - ठीक है मैडम जैसा आपका आदेश | ये लो घोटो मुसल लंडो को | इतना कहकर उसने जबरदस्त ठोकर लगायी | उसका लंड रीमा की चूत में पैबस्त हो गया |

रीमा - आआआआआआआआआआआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्ह |

गिरधारी - ये लो मैडम | इतना कहकर उसने भी अपना लंड घुसेड दिया |

रीमा - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ मममममममाआआआआआआआ |

दोनों के लंड रीमा के जिस्म की गहराइयो में फिसलने लगे | ठोकरे जबरदस्त थी दर्द को बर्दास्त करने को रीमा ने मुट्ठियाँ भीच ली | उसकी गांड का दर्द और जलन तो अब जैसे उसके जिस्म का हिस्सा बन गए थे | उसकी जलती गांड की गुलाबी सुरंग पर पड़ती हर ठोकर रीमा को दर्द से कराहने पर मजबूर कर देती | आखिर क्या करे गांड मरवाने पर दर्द तो बोनस के रूप में मिलता ही है | आखिर इतना ही आसान होता तो हर औरत ख़ुशी ख़ुशी अपनी गांड न मरवा लेती | लेकिन उसके साथ तो नियति कुछ ज्यादा ही निष्ठुर हो गयी थी | एक तो उसे मुसल लंड मिला उपर से झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा | उसके गाड़ के दर्द और जलन के जाने का इन्तजार अंतहीन हो गया | आखिर कब तक मुसल लंड उसकी गांड को कूटते रहेंगे | उसकी गांड को कब सुकून मिलेगा लेकिन जीतनी देर तक उसकी गाड़ की कुटाई होगी उतना ही दर्द से भरा मजा भी तो वो लुट रही है, वो गांड की दीवारों से रगड़ खाता उसका मोटा लंड और उसकी सनसनाहट | जितेश भी तो मेरी चूत की दीवारों का कचूमर बनाये दे रहा है | मेरी चूत इतनी देर तक कभी नहीं चुदी | अब शायद महीने 6 महीने चुदाई नहीं मांगेगी | ये दर्द भरी कराहटे ही तो उसके आनंद की निशानी है |
 
आखिर कब तक इस दर्द में जीकर मजा लेती रहेगी, अपनी वासना की तड़प में ये मत भूल तेरे जिस्म की सुरंगे तेरे ही बदन का हिस्सा है | जब ये हवस की आग शांत होगी, तो इन लंडो से मिले जख्मो को तुझे ही सहलाना होगा | ठीक करना होगा | अभी तो ख़ुशी ख़ुशी गांड मरवाकर, दो दो लंड लेकर उसका दर्द झेलकर मन ही मन खुश हो रही है लेकिन जब तेरी गांड और चूत की दीवारों की गर्मी शांत होगी, तो यही गांड और चूत तुझे इन लंडो से मिले झटको को याद दिलाएगी | परपराएगी, नासूर की तरह दुखेगी, फिर मलहम लगाती हुई इधर उधर कूदती रहना | क्योंकि इतनी कुटाई के बाद तुझे ये शांति से एक जगह तो बैठने नहीं देगी | उठते बैठे, दुखेगी, परपराएगी, इन लंडो की ठोकरों के जख्मो का अहसास कराएगी, अपनी जलती दीवारों की जलन महसूस कराएगी | गांड मरवाने का अहसास सिर्फ गांड मरवाने तक ही सीमित नहीं रहेगा | पुरे बदन को वो दर्द महसूस होगा |

उनकी ठोकरों से कराहती रीमा अपने में ही खोयी थी उधर दोनों के लंड उसकी गांड और चूत की गहराइयों में तेजी से फिसल रहे थे और उनके फिसलने की गर्मी से उसके पूरे तन बदन में आग लगी हुई थी दो 2 लौंडो की चुदाई की भीषण गर्मी से रीमा को भले ही अभी उतना दर्द का एहसास ना हो रहा हो और भले ही अभी वह वासना में नहाई हुई तो दो लंडो को बड़ी आराम से अपनी जिस्म की सकरी कसी हुई सुरंगों में ले रही हो लेकिन उसे भी पता था जब जिस्म ठंडा होगा तब उसे इस मजे की कीमत का एहसास होगा उसके जिस्म का रोया रोया दूखेगा और उसे दर्द का अहसास कराएगा |

रीमा को चोदते चोदते उन दोनों का भी दम निकल गया था लेकिन उनकी कमर थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी और लंड झड़ने का नाम नहीं ले रहा था वह दोनों भी अपनी जवानी और कोकीन के नशे में दनादन रीमा के चूतड़ों पर आगे पीछे दोनों तरफ से ठोकरें मारे जा रहे थे आगे से जितेश और पीछे से गिरधारी दोनों रीमा के चौड़े नरम चूतड़ों और कमर को कस के थामे हुए रीमा के जिस्म की कसी हुई गुलाबी सुरंगों में उतरे हुए जा रहे थे | अपनी जिस्म की हवस की भूख मिटा रहे थे और उनके जिस्म की आग थी कि बुझने का नाम भी नहीं ले रही थी | अपने जिस्म पर पड़ रही है लगातार दो लंडो की ठोकरें का दर्द भरा अहसास अब उसके तन के साथ-साथ उसके मन में भी बसने लगा था | उसे लगने लगा था अब उसके जिस्म ने जवाब देना शुरू कर दिया है |

रीमा को अहसास होने लगा कही ज्यादा लम्बी चुदाई के चक्कर में उसकी चूत और गांड का वाट न लग जाये | ऐसा ना हो कहीं लंड दनादन ठोकरें मारकर उसकी दोनों गुलाबी मखमली से रंगों को छील कर रख दे और उन से खून निकाल दे हालांकि उसकी गुलाबी रंग के अभी भी वासना की गर्मी से भरी हुई थी और मोटे मुसल जैसे लंडो को अपनी सुरंगों के अंतर में जितना ले सकती थी ले रही थी लेकिन इतनी देर से चुदाई हो रही थी इतनी देर तक कभी उन्होंने लंड की ठोकरे बर्दाश्त नहीं करी थी रीमा इतनी देर तक कभी नहीं चुदी थी इसीलिए उसकी चूत की दीवारों की सहनशक्ति खत्म हो रही थी | अपनी कसी करारी कोरी गांड में तो उसने बस दूसरी बार लंड लिया था इसीलिए उसकी गांड की दीवारें तो पहले से ही दर्द और जलन से हाथ खड़े किये हुए थी रीमा को भी अब इस बात का अहसास होने लगा था कि अगर इसी तरह उसकी चूत और गांड लंड बरसते रहे तो शायद वह उठने के काबिल भी नहीं रहेगी उसको लगने लगा था कि अब तक इन लंडो को झ ड़ जाना चाहिए था

रीमा के दिमाग में बस एक ही सवाल आया - आखिर ये लोग झड़ क्यों नहीं रहे है, आखिर इनकी सफ़ेद मलाई क्यों नहीं निकला रही |

आखिर उसने अपने सवाल को फिर से अपने दिमाग में दोहराया और हैरानी से चुदाई से उसका ध्यान उन लोगों के झड़ने पर चला गया एक पल सोचने के बाद उसने सोचा क्यों ना इन्ही से पूछ लो आखिर ऐसा आज क्या हो गया है | मर्योद तो तो गरम गुलाबी कसी हुई चूत पाकर दनादन चोदते हैं जल्दी से झड़ जाते हैं यहां इन दोनों का यह हाल है कि पहली बार ही मेरी गांड और चूत मार रहे हैं और उसके बावजूद भी झड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं | जितेश तो मुझे लग रहा है घंटे भर से ज्यादा हो गया | रात में इतना वक्त तो नहीं लगाया था | इस तरह से चोदते हुए इन दोनों का भी दम निकल गया होगा और इसकी कमर धक्के मारते मारते टेढ़ी नहीं हो गई होगी लेकिन यह दोनों रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं आखिर ऐसा क्या हो गया है

थकी हारी रीमा कमजोर आवाज में बोली - आखिर तुम लोग इतनी देर से दनादन मेरे जिस्म में लड़ पेल रहे हो फिर भी झड़ने का नाम नहीं ले रहे हो आखिर माजरा क्या है |

गिरधारी रीमा की गांड में लंड पेलता हुआ खीसे निपरोने लगा - मैडम को अब याद आई | लगता है चुदते चुदते थक गयी |

रीमा - थक गयी का क्या मतलब है चुदाई का एक टाइम होता है इतनी देर में तो आदमी 5 बार झड़ जाता है और तुम लोगों की एक बार भी पिचकारी नहीं छुट्टी है |

गिरधारी फिर खीसे निपोर कस हंसने लगा |

रीमा बिलकुल मरी हुई आवाज में धीरे से बोली - अच्छे से अच्छा हट्टा कट्टा मर्द भी आधे घंटे से ज्यादा नहीं चोद पाता है और तुम लोगों को चोदते हुए आधे घंटे से काफी ज्यादा हो गया है आखिर तुम लोग झड़ क्यों नहीं रहे हो | ठोकरे खा खा कर मेरी कमर दुखने लगी है, गांड छिल गयी है और चूत सूजने की कगार पर है |

गिरधारी ही ही ही ही करके हंसता हुआ हंसने लगा उसको हंसता देख रीमा हैरान हो गई | तभी जितेश ने गिरधारी के मुंह पर हाथ लगा दिया और उसे चुप रहने को बोला | दोनों ने दनादन रीमा की गांड और चूत में लंड डालने की स्पीड और बढ़ा दी अब उनके ऊपर भी वासना का सुरूर है जमकर तांडव कर रहा था | दोनों जल्दी से जल्दी रीमा की गहरी गुलाबी सुरंगों में झड़ जाना चाहते थे क्योंकि दोनों रीमा को चोदते चोदते खुद भी बुरी तरह से थक गए थे | सोचो जब चोदने वालो की हालत बुरी हो गयी थी तो रीमा की क्या हालत होगी इसका तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था | बस अब वह दोनों भी झड़ना चाहते थे | इसीलिए रीमा की जिस्म को कसकर थामे दोनों तरफ से उसके जिस्म की सुरंगों में अपनी मुसल लंडो के पेल रहे थे |

रीमा उनकी ठोकरों से कराहती हुई - आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ओह्ह्ह्हह आखिर कोई कुछ मुझे भी बताएगा |

गिरधारी कुछ बोलने को हुआ | जितेश गिरधारी के मुंह पर हाथ लगा कर चुप करता हुआ बोला - कुछ नहीं बेबी बस हम भी अब झड़ने वाले है |

गिरधारी और जितेश दोनों ही दनादन पूरी तेजी के साथ अपनी कमर रहे थे और उनके मुसल हाहाकारी लंड रीमा की सुरंगों में अंदर बाहर हो रहे थे |

रीमा - अब बर्दास्त नहीं हो रहा है | मेरी चूत गांड कमर जांघे सब दुखने लगी है | कितनी देर और चोदोगे मुझे |

जितेश उसे सांत्वना देते हुए बोला - बस थोड़ा सा और बर्दाश्त कर लो | मुझे पता है तुम थक गई हो काफी देर से हम दोनों तुम्हें चोद रहे हैं | तुम्हारी जगह कोई और औरत होती तो शायद बेहोश हो गया होती लेकिन तुम कमाल की रीमा, इतनी भीषण ठोकरे खाने के बाद इतने मोटे मोटे मुसल दो दो लंड एक साथ घोटने के बाद अब तक हमारा साथ दे रही ही | इतनी देर से चोदने के बाद हमारा लंड अपनी चूत में ले रही ही | दो दो लंडो से इतनी देर तक एक साथ चुदवाने के बाद भी पूरे होशो हवास में इस तरह से हमारे साथ राजी खुशी ख़ुशी चुद रही हो | यह किसी चमत्कार से कम नहीं है तुम ना केवल राजी खुशी चोद रही हो अपनी कमर उचका उचका कर हमारे दोनों को एक साथ अपनी चूत और गांड की गुलाबी मखमली गहराई तक ले रही हो | हम किस्मत वाले हैं जो इस तरह से तुम्हे चोदने का मौका मिला है |

गिरधारी - हां मैडम आप तो बहुत ही कमाल की हो इस तरह से आप जैसी हसीन औरत को चोदने का कभी सपने में भी नहीं सोच सकते हैं

गिरधारी भी जितेश के लंड के साथ मिलकर दनादन रीमा की गांड में लंड पेल रहा था | रीमा के चूतड़ों पर दनादन ठोकरे मारता हुआ गिरधारी बोला - आह मैडम कितनी देर से आपकी गांड को खोलने कोशिश कर रहा हूं इतनी देर से अपने लंड से रगड़ रगड़ के कूट कूट के कूट कूट के आपकी गांड की कसी हुई गुलाबी दीवारों को नरम बनाने की कोशिश कर रहा हूं अब जाकर आपकी गांड बिल्कुल मक्खन मलाई की तरह खुल रही है और बंद हो रही है लेकिन आपकी गांड का कसा छल्ला अभी भी मेरे लंड पर फांसी का फंदा डालकर मेरे लंड को कस के जकड़े हुए हैं | आपकी गांड तो अब बिल्कुल मक्खन मलाई की तरह नरम हो गई है | आआआह्ह्ह्ह मैडम |

रीमा भी चाहती थी कि उनका जोश कम ना हो |

रीमा -बस ऐसे ही मेरी गांड में अपना मुसल लंड पेलते रहो

गिरधारी रीमा के चूतड़ पर थाप मारता हुआ - मैडम बहुत कसी हुई थी गांड आपकी, अभी भी देखो कैसे लंड की खाल छील के रखे दे रही है |

रीमा कराहती हुई - जमकर मनचाहे तरीके से बाजा बजा दिया है मेरी गांड का | कितनी तेज जलन हो रही, पूरी गांड में आग लगी पड़ी है | इतनी तेज गांड को रगडोगे तो लंड तो छिलेगा ही |

गिरधारी के धक्के बदस्तूर जारी थे - मेरी गांड का पसीना निकल आया मैडम आपकी गांड मारने में |

रीमा - कितने आराम से पूरा लंड पेल रहे हो फिर भी कह रहे हो कसी गांड है मेरी | मुझसे पूछो, गांड तो मेरी मारी है, पूरी गांड में ऐसे लग रहा है जैसे किसी ने नश्तर डालकर चीर डाला हो |

गिरधारी - दम निकाल लिए मैडम आपने गांड में लंड पिलवाने में |

रीमा गर्व से फूली नहीं समायी - किसी ऐरे गैरे की गांड थोड़े मार रहे हो,यह रीमा की गांड है रीमा की कच्ची करारी कोरी गांड |

दोनों के लंड अब बिना किसी रोकटोक के सटासट रीमा के जिस्म में आ जा रहे थे | न केवल गिरधारी का लंड रीमा की नरम होकर फ़ैल गयी गुलाबी गांड में आराम से आ जा रहा था बल्कि जितेश भी रीमा को चूत की गहराइयों तक चोद रहा था |

जितेश भी तो चुदाई की उसी रौ में था रीमा की बाते सुन उसका जोश भी बढ़ा - मुसल लंड से गाड़ फड़वा के मजा आया मोरी रंडी रानी |
 
रीमा ने भी उसी रौ में जवाब दिया - तुम भी तो मेरी मक्खन मलाई जैसी चूत चोद रहे हो मेरे लंड राजा | मेरी गुलाबी मखमली चूत कूट के मजा आया |

जितेश - हाँ मोरी चुद्द्कड़ रानी तोहरी चूत तो बिलकुल मक्खन मलाई है ऐसा लग रहा है जैसे मेरा लंड मक्खन मलाई की गुलाबी सुरंग में जा रहा है, और आ रहा है | इतनी गरम और गुनगुनी कसी हुई मखमली चूत मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं चोदी |

मोरी रानी न केवल तोरी रसमलाई भरी चूत बल्कि तोरा जिस्म और तू भी कमाल की है |

रीमा - तो चोदो ना मोरे राजा, अब बस हचक के चोद के मेरी चूत में अपनी सारी गाढ़ी मलाई उड़ेल दो |

रीमा भी चाहती थी अब वह जल्दी से निपट जाएइसीलिए उनके जोशो खरोश में कोई कमी ना आए इसीलिए उनकी उत्तेजना में अपने शब्दों से आंगर भर रही थी

जितेश - हां मोरी रंडी रानी तेरी चूत लबालब बाहर दूंगा अपने लंड रस से |

दोनों की धक्के और तेज हो गए अब तो सांस लेने की भी फुर्सत नहीं थी ना गिरधारी के पास ना रीमा के पास और ना ही जितेश के पास | अब तो पूरे कमरे में बस चुदाई है और उसकी आवाज ही गूँज रही थी रीमा की ठुकाई आगे पीछे दोनों तरफ से और उसके चूतड़ों पर पड़ती दोनों की करारी ठोकरे .....रीमा के मुंह से निकलती सिसकारियां और दर्द भरी कराहे | रीमा बस किसी तरह खुद को समेटे चुद रही थी कराह रही थी ये सब उसकी सोच से परे था | वो खुद हैरान थी कैसे उसका शरीर लगातार उन लंडो को निगल रहा है | तीनो की हफाती गरम सांसे एक दुसरे की वासना में घुलकर गायब हुई जा रही थी |

अब तीनों को एक दूसरे का होश नहीं था गिरधारी और जितेश की कमर अपनी फुल स्पीड में चल रही थी रीमा की दोनों गुलाबी सुरंगे अपनी पूरी चौड़ाई तक फैली हुई वासना की आग में भट्गठी बनी खुलेमन से दोनों लंडो को अपने आगोश में लेकर उसके अन्दर की हवस को निचोड़ रही थी |

जितेश अब वासना से कराहने लगा था - आह बेबी अआह्ह आपकी चूत बहुत गर्म और कसी हुई है |

रीमा भी बुरी तरह से हांफती हुई - ओह्ह्ह्ह बेबी ओह्ह्ह्हह बेबी बस मेरी गरम चूत को ऐसे ही चोदते रहो, चोदते रहो , बस चोदते रहो | मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मुझे चोदते रहो मोरे राजा |

जितेश - इतनी देर चोदने के बाद भी कितनी गरम चूत है तुम्हारी, इतना पेलने के बाद भी इस चूत की चुदाई खत्म नहीं हुई है देखो मेरी चूत रानी कैसे राजी खुशी मेरे लंड को घोटे जा रही है |

रीमा - अह्ह्ह्हह ओफ्फ्फ्फूफोफोफ़ जिस लंड की चूत दीवानी हो जाती है उसके लिए खुद को भी कुर्बान कर देती है बस ऐसे ही चोदते रहो मेरे राजा | चोद चोद के अपनी रीमा रानी की सारी प्यास बुझा दो |

जितेश - तुमारी चूत की प्यास बुझाने के बाद ही पिचकारी निकलेगी मैडम | इतनी कमाल की चूत है तो मेरा भी कुछ फर्ज बनता है ना आपकी चूत का ख्याल रखने का |

अब तो बस दोनों ही वासना में कुछ भी बडबडा रहे थे | किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कौन क्या कर रहा है क्या बोल रहा है | रीमा के जिस्म में दोनों लंड लगातार जा रह थे |

रीमा - अपने मोटे लंड से कूट-कूट के कचूमर निकाल दिया है मेरी चूत का, देख रही हूँ कैसे ख्याल रख रहे हो |जितेश - मोरी रंडी रानी तुमको हचक हचक के चोदेगें नहीं तो तुमारी चूत की प्यास कैसे मिटायेगें और आराम से चोदते तो तुमको मजा नहीं आता है ना तुमारी प्यासी चूत को मजा आता |

इतना हचक हचक के मोटे लंड से चुदाई से उसके अंदर की प्यास थोड़ा कम होगी | देखो ना मोरी चुद्दकद लंद्खोर रंडी 1 घंटे से ज्यादा देर से चुद रही है तुमारी चूत फिर भी मजाल है कि उफ्फ्फफ्फ्फ़ तक निकली हो | रीमा - निकालने का मौका कहां दे रहे हो वो तो कब से चीख चिल्ला रही है की अब बस करो अब बस करो | तुमारा लंड उसे साँस लेने कहाँ दे रहा है, दनादन तो लंड पेले जा रहे हो |

जितेश - इसमें मेरी गलती क्या है तुमारी चूत ही मेरे लंड को बाहर नहीं निकलने दे रही है यह खुद ही नहीं चाहती मेरा लंड उसे उसे बाहर आए मैं तो बस तुमारी चूत का गुलाम बनके कर उसे सेवा कर रहा हूं मैडम |

रीमा को एक बार गर्व की एहसास हुआ इतनी देर चुदाई के बाद भी उसकी चूत की दीवारें पूरी तरह से लंड को अपने आगोश में जकड़े हुई है

पीछे से रीमा की गांड में दनादन पूरा लंड अंदर बाहर करता हुआ गिरधारी भी हंसता हुआ बोला - कोई अच्छा काम जरूर किया होगा जो आपकी गांड मारने का मौका मिला है आपकी जैसी खूबसूरत गुलाबी गोरी औरत को चोदने का ख्याल ही मेरे जैसे आदमी के लिए बहुत बड़ी चीज है यहां तो आपकी कोरी कोरी गांड को मारने का मौका मिला है |

रीमा - हां बस ऐसे ही मेरी गांड मार के उसकी सारी खुजली मिटा दो बस ऐसे ही पेलते रहो मेरी गांड में लंड |

तीनों वासना में पूरी तरह से डूब गए थे और दोनों रीमा के जिस्म से चिपके हुए रीमा के जिस्म में पूरा का पूरा समा जाने को पूरा जोर लगा रहे थे | जैसे-जैसे का चरम आ रहा था वैसे-वैसे उनके धक्के तेज हो रहे थे और वह पूरा का पूरा सीमा के जिस्म में समा जाने में की पूरी कोशिश कर रहे थे रीमा के गहरे गुलाबी अंतर में बहुत तेजी से दोनों के तने हुए मुसल लंड तेजी से अंदर बाहर हो रहे थे|

दोनों के मोटे लंड दनादन ठोकरे मार रहे थे और रीमा के दोनों गुलाबी छेदों दोनों के मुसल लंडो को पूरी तरह से अपने में समाये ले रहे थे | रीमा कराह रही थी और वह दोनों रीमा को जी भर के दना दन चोद रहे थे |

रीमा का थका हारा पस्त जिस्म दनादन लंड की ठोकरों से फिर से गरम हो गया था | रीमा भी उनके लंड को कसकर अपने जिस्म के अन्दर भींच रही थी |

रीमा - आआआआऐईईईईईईईऊऊऊऊऊऊऊऊ आआआआह्बह्सह्ह बस ऐसे ही चोदते रहो ओह माय गॉड ओह माय गॉड ओह माय गॉड ओह माय गॉड ओह माय गॉड ओह माय गॉड ओह माय गॉड फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क, यस बेबी यस बेबी यस बेबी यसओह माय गॉडओह माय गॉडओह माय गॉडओह माय गॉड बेबी |

रीमा की नजर घडी की तरफ गयी जब उसकी आंख खुली थी, तब से अब तक दो घन्टे हो चुके थे - दो घन्टे से चुद रही हूँ मुझे यकीन नहीं हो रहा मुझे ये लोग दो घन्टे से चोद रहे है |
 
रीमा - आआआहाआआह्इह्तह्नीह गॉड गॉड गॉड गॉड गॉड गॉड तेजी से कितनी तेजी चुद रही हूं मै | दो दो लंडो से चुद रही हूँ मै मेरे जिस्म के गुलाबी अंतरों को चीर के रख दिया है तुम दोनों | आआआआह्हा आअह्ह्हा आआह्हा आह्ह्ह फिर भी मेरे अंदर अभी भी तुम दोनों के लंड से चुदने की चाहत मची हुई है |

आआह्ह आःह्ह आआह्ह आआईइ आईई बस जी भर के चोद डालो मुझे | जितना तुम्हारे जिस्म में जान है जितना तुम्हारे लंड में जान है मेरे जिस्म की इन गुलाबी सुरंगों को चीर के रख दो | आआह्ह आःह्ह आआह्ह आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ .....................बस ऐसे ही चोदते रहो ऐसे दनादन दनादन चोदते रहो मुझे |

रीमा का जिस्म पस्त हो गया था लेकिन उसके अंदर की हवस और दो लंडो की दोतरफा भीषण ठोकरे उसके जिस्म को गरमाए हुए थी | रीमा पूरी तरह से वासना में नहाई हुई थी और वह चाहती थी जल्दी से जल्दी अब उसके जिस्म में जा रहे दोनों मुसल लंड अपने गर्म लावे को उसकी तपती हुए सुरंगों में उतार दें | अब वह दोनों लंडो के के गर्म सफ़ेद उबलते लावे से नहा कर अपनी चूत और गांड की सुरंगों की आग को बुझाना चाहती थी इसीलिए चाहती थी दोनों जल्दी से जल्दी झड़ जाए | इधर तो वह दोनों भी अपने लंड को रीमा की गुलाबी सुरंगों में मसल मसल के अपने जिस्म में उबल रहे सफेद गरम लावे को रीमा के जिस्म की गुलाबी सुरंगों में उड़ेल देना चाहते थे |

रीमा भी यही चाहती थी वो जल्दी से झड़ जाए इसीलिए उनमें जोश भरने में लगी हुई थी |

रीमा - आआह्ह आआईइ आआह्ह आआईइ आआह्ह आआईइ यस बेबी चोदो चोदो चोदो चोदो चोदो चोदो चोदो चोदो ओह माय गॉड यस यस यस यस यस यस यस यस यस | बस ऐसे ही चोदते रहो, चोद चोद के अपनी रीमा रानी को अपने सफ़ेद रस से नहला दो |

दोनों के लंड सटासट रीमा के मांसल चौड़े चुताड़ो पर ठोकर मार रहे थे और उसके जिस्म की सुरंगों में गायब हो जा रहे थे | इतने मोटे मोटे लंड जिस तरह से पूरी तरह से उसके जिस्म में गायब हो जा रहे थे उसे ऐसा लग रहा था जैसे रीमा की जिंदगी का बस यह आखिरी पल है | इसे वो जीभर के जी लेना चाहती है |

दोनों मनचाहे तरीके से रीमा को ठोकरे मार रहे थे | दोनों ने रीमा को कसकर थाम रखा था और उसके चूतड़ों पर अपनी कमर की बेतहाशा झटके लगा रहे थे | दोनों के लंड रीमा के जिस्म में बहुत तेजी से गायब हो जा रहे थे | रीमा का पूरा जिस्म इतनी तेज ठोकरों से कांप रहा था | दोनों ने रीमा को कसकर दोनों तरफ से थाम रखा था इसके बावजूद उसका पूरा शरीर भीषण झटको से थरथरा रहा था हिल रहा था काँप रहा था और रीमा अपने जिस्म की बची खुची ताकत बटोर अपने जिस्म की सुरंगों को तो दो मुसल लंडो से चीरवा रही थी चुदवा रही थी | अपनी रीमा के बस में कुछ नहीं था यह रीमा को भी पता था | अब वह उन दो जिस्मों के बीच में किसी सैंडविच की तरह पिस रही थी | वह दोनों उसे दोतरफा धक्के मार के चोद रहे थे और वह उन दोनों के लंड को अपने जिस्म में पूरा का पूरा उतारने को मजबूर थी | मजबूर क्या यही तो उसकी चाहत थी दो मोटे लंड उसे ऐसे ही बेतहाशा चोदे और अब उसे दो मोटे लंड बेतहाशा ही चोद रहे थे | रीमा का उन लंडो पर कोई जोर नहीं था मुसल लंड अपनी सारी गर्मी की रीमा की चूत और गांड में उतारे दे रहे थे | जितनी ताकत गिरधारी और जितेश के जिस्म थी सारी ताकत अपने लंड पर लगाकर कर रीमा को पेल रहे थे | उनके जिस्म का सारा अस्तित्व ही रीमा के जिस्म के गुलाबी अंतर में उतर जाने में लगा हुआ था | उन्हें अब और कुछ नहीं चाहिए था बस रीमा के अंदर उसके गुलाबी छेदों की गहराई के आखिरी छोर तक उतर जाना चाहते थे और दनादन उतर भी रहे थे |

रीमा बस उन दोनों के रहमों करम पर उनके जिस्म से चिपकी हुई थी कि गिरधारी के पास ज्यादा जगह थी कमर हिलाने के लिए इसलिए उसकी कमर तो बिल्कुल सुपर फ़ास्ट स्पीड से हिल रही थी और उसका लंड रीमा की गांड में किसी इंजन में चलते हैं तेज पिस्टन की तरह चोद रहा था | रीमा बुरी तरह से हिल रही थी |

रीमा चुद रही थी और वह चोद रहे थे और वह भी बेतताशा चोद रहे थे कैसे चोद रहे थे जैसे उन्होंने कभी किसी औरत को नहीं चोदा था | रीमा भी ऐसे ही चुद रही थी जैसे वो जिंदगी में कभी नहीं चुदी थी | बिल्कुल बेतरबीब फुल स्पीड में नॉन स्टॉप दनादन सटासट अपना सब कुछ झोंक कर .......सब कुछ गवा कर ....सब कुछ न्योछावर कर के .... पूरी तरह से उन दो मर्दो की गुलाम बनकर अपना पूरा जिस्म उन्हें सौंप दे रही थी ताकि अपने जिस्म की वासना मिटा सके | ये ऐसी चुदाई थी जो शायद रीमा को बरसों बरसों तक याद रहेगी क्योंकि इस तरह से दो मर्दो के हाथ की कठपुतली बनकर इतनी बेरहमी से ..इतनी बेदर्दी से ..इतनी वाहियात पाशविक तरीके... से शायद उसको भी अंदाजा नहीं था वैसे कुछ जानवरों की तरह चुद रही थी |
 
रीमा चुद रही थी और वह चोद रहे थे और वह भी बेतताशा चोद रहे थे कैसे चोद रहे थे जैसे उन्होंने कभी किसी औरत को नहीं चोदा था | रीमा भी ऐसे ही चुद रही थी जैसे वो जिंदगी में कभी नहीं चुदी थी | बिल्कुल बेतरबीब फुल स्पीड में नॉन स्टॉप दनादन सटासट अपना सब कुछ झोंक कर .......सब कुछ गवा कर ....सब कुछ न्योछावर कर के .... पूरी तरह से उन दो मर्दो की गुलाम बनकर अपना पूरा जिस्म उन्हें सौंप दे रही थी ताकि अपने जिस्म की वासना मिटा सके | ये ऐसी चुदाई थी जो शायद रीमा को बरसों बरसों तक याद रहेगी क्योंकि इस तरह से दो मर्दो के हाथ की कठपुतली बनकर इतनी बेरहमी से ..इतनी बेदर्दी से ..इतनी वाहियात पाशविक तरीके... से शायद उसको भी अंदाजा नहीं था वैसे कुछ जानवरों की तरह चुद रही थी |

इस तरह की पासविक वासना को लेकर वह भी हैरान थी लेकिन जो भी हो रहा था और रीमा की मर्जी और मन के खिलाफ तो नहीं था | अपने मन की ही तो कर रही थी उसका जिस्म पूरी तरह से पस्त हो गया था ...जिस्म पूरा थका हुआ था ..और पूरी तरह से जितेश और गिरधारी के हाथ में था | उसके हाथ पाँव जांघे कमर पूरी तरह से पस्त थे | उसके जिस्म की दो सुरंगे थी जो अभी पूरी तरह से आग की भट्ठी बनी हुई थी और उनको आग की भठ्ठी बनाने में बड़ा हाथ था इतनी तेज धक्कों का, जो रीमा की चूत और गांड में लगी आग को बुझाने की बजाय और भड़का रहे थे | उसने सपने में भी नहीं सोचा था ये वासना की यह आग रीमा को पूरी तरह से जलाकर खाक कर देने वाली थी ऐसी चुदाई होगी उसने भी नहीं सोचा था और ना ही उसको चोदने वालों ने सोचा था लेकिन वह सब हो रहा था जो उनमे से किसी ने नहीं सोचा था | वह दोनों की रीमा को दनादन सो चोद रहे थे और रीमा उन दोनों के जिस्म के बीच में पिसती हुई पूरी तरह से खुद को उनके हवाले करके उनसे बेतहाशा चुद रही थी |

रीमा के जिस्म पर पड़ रही दनादन ठोकरें रीमा के लिए बर्दाश्त से बाहर थी लेकिन मजाल है जो रीमा के मुंह से उफफ्तफ्कफ्फ़ निकल जाए वह अपने जिस्म की सारी ताकत बटोर के बस उन दोनों के मुसल लंडो को अपने जिस्म गुलाबी सुरंगों की गहराइयों को चीरता हुआ महसूस कर रही थी

रीमा - आआह्ह आआह्ह आआह्ह आआह्ह हां हां हां हां हां हां बस अब चीर के रख दो रुकना नहीं बिल्कुल नहीं बस जान चाहे भले निकल जाए लेकिन ऐसे ही पेलते रहो, चोदते रहो यस यस यस बेबी ऐसे ही चोदते रहो, फाड़ दो मेरी चूत फाड़ दो मेरी गांड |

आपकी गांड को चीर के रख देंगे मैडम - गिरधारी दनादन ठोकरे लगाता हुआ बोला |

रीमा भी वासना के जोश में - तो चीर दो ना |

गिरधारी - यह लो मैडम यह लो मैडम |

रीमा उसकी हर ठोकर पर - आआईइ ममाआआअ आईई आआईइ ममाआआअ आआईइ आआईइ आआईइ रेरेरेरेरेरेरेरेरे आआआआह्हा आअह्ह्हा आआह्हा आह्ह्ह |

गिरधारी रीमा की गांड पर जोरदार ठोकर मार रहा था उसका पूरा लंड रीमा की गांड में लंडअंदर तक घुसा जा रहा था | इधर जितेश रीमा के चुताड़ो को कसकर थामे हुए था ताकि उसका लंड भी रीमा की चूत की गहराइयों में तेजी से जा सके जबकि गिरधारी उसको कंधे से पकड़े हुए उसके उसके जिस्म को पीछे की तरफ ठेल रहा था | दोनों केवल रीमा की चूत और गांड में अपने लंड को नहीं पेल रहे थे बल्कि अपने लंड पर रीमा के जिस्म को भी ठेल रहे थे | जिससे कि उनके लंड रीमा के जिस्म के अंदर दोगुनी स्पीड से अंदर जा रहे थे |

रीमा की चूत और गांड के मुहाने इन भीषण तेज ठोकरों से जल उठे | उसकी चूत और गांड दोनों ही आग की भट्ठी बन गई थी | इतनी तेज लंड उसे चोदेगे उसने नहीं सोचा था इतनी कस कर इतनी बेदर्दी से उसे कुचलेगे | हालांकि उसके मन में हमेशा से इस तरह से लंड लेने का ख्याल आता था लेकिन यह इस स्तर तक पहुंच जाएगा यह उसने भी नहीं सोचा था | गिरधारी और जितेश के लंडो ने रीमा को पूरी तरह निचोड़ लिया था | उसके जिस्म में जान नहीं बची थी लेकिन वह अपनी सारी ताकत कट्ठा करके उनके मोटे मोटे लंडो को अपने जिस्म के अंदर पूरी तरह से उतारने में लगी हुई थी | इस चुदाई को पूरी तरह से अपने दिलो दिमाग में भी भर लेना चाहती थी | वह चाहती थी ये चुदाई उसके दिलो-दिमाग में बैठ जाए | आज ना उसे कोई रोकने वाला था ना उसे कोई टोकने वाला था आज ना ही उसका कोमल मन उसे रोक रहा था और ना ही उसकी नैतिकता से रोक रही थी | भले ही उसने ऐसा कुछ न सोचा हो लेकिन वह जिस तरह से चुदना चाहती थी उसी तरह से चुद रही थी | उसके मन के कोने में दबे हुए हैं वहशी अरमान आज पूरी तरह उसके दिमाग पर हावी थे | उसके वहशी अरमानो का नतीजा था कि खुद को फूलों की तरह से बचाकर रखने वाली रीमा आज दो दो लंडो से खुद को कुचलवा रही थी |

वो तो बस दो लंडो की लौड़ी बनकर रह गयी थी | न तो उसके हाथ में कुछ था न वो कुछ कर सकती थी | वह तो बस अपने जिस्म की बची हुई ताकत बचाकर उन लोगों को अपनी गहराइयों में जब तक जितनी देर तक महसूस कर सकती थी कर रही थी | हर चीज का एक समय होता है और उसके बाद उसका अंत होता है इस भीषण दोतरफा चुदाई का भी अंत होना था | आखिर इतनी देर से रीमा इसी में तो दिलो जान से लगी थी |

जितेश ने रीमा के चूतड़ थोड़ा ऊपर उठा दिए और बुलेट ट्रेन की स्पीड से चोदने लगा | उसकी चूत में जितेश का लंड अब दना दन दना दन दना दन दना दन दना दन दना दन दना दन दना दन दना दन दना दन जा रहा था अब तो किसी को भी सांस लेने की भी फुर्सत थी इतनी तेज चुदाई चल रही थी | उपर से गिरधारी भी पूरी ताकत लगाकर रीमा की गांड को फाड़ने पर लगा हुआ था | रीमा के मोटे मोटे बड़े बड़े मांसल चुताड़ो का तो जैसे कीमा बन गया हो | उसके चूतड़ों पर पड़ती ठोकरों से उसके गुलाबी गोरे कपाट लाल हो गए थे |

इस बेतहाशा दर्द भरी जुदाई से रीमा बुरी तरह कराह रही रही थी लेकिन अपने जिस्म को दे रही तकलीफ में भी उसको अपने मन की वासना की आग बुझाने की किरण नजर आ रही थी | अपनी वासना की आग बुझाते बुझाते रीमा उस मोड़ पर पहुंच गई थी जहां पर उसे अपने जिस्म को हो रही तकलीफ का अहसास तक नहीं था | अपने गुलाबी नरम गुदाज मांसल गोरे बदन को लेकर रीमा इतनी क्रूर कैसे हो सकती है | कैसे उसने दो जानवरों को अपने मोटे मुसल लंडो से उसे कुचलने की इजाजत दे दी और अब वह दोनों लंड उसे उसी तरह से कुचल रहे थे | इधर दर्द से बिलखती बस खुद को किसी तरह से समेटे हुए उन दोनों को अपने अंतरों में आते जाते महसूस कर रही थी इस वक्त ना वो केवल पूरी ताकत कट्ठा करके खुद के जिस्म को समेटे हुए थी बल्कि अपने मन को भी समेटे हुए थी क्योंकि उन दोनों की ठोकरें इतनी तेज थी जो ना केवल रीमा के जिस्म को तितर-बितर कर सकती थी बल्कि उसके कोमल मन की भी धज्जियां उड़ा सकती थी | गिरधारी और जितेश को तो बस इस समय रीमा की गहरी गुलाबी सुरंगों में अपने जिस्म में धधकती आग उतारने का अंधा जोश चढ़ा हुआ था | उन्हें इसके अलावा और कुछ नहीं सूझ नहीं रहा था | वह बस रीमा की गुलाबी सूरंगों में दनादन खुद को उतारने में लगे हुए थे |

उन्हें रीमा के दुख दर्द तकलीफ से कोई लेना-देना नहीं था | उन्हें तो एहसास भी नहीं था एक मोटा लंड जब किसी केअंदर घुसता है तो कितनी तकलीफ होती है | यहां तो दो-दो मोटे मुसल तने हुए लंड थे | दोनों एक साथ दनादन रीमा को चीर के रख दे दे रहे थे | रीमा दर्द से बड़बड़ा रही थी, बिलख रही थी तड़प रही थी लेकिन उन दोनों लंडो को अपने अंतर में ले भी रही थी | उन्हें मना नहीं कर सकती थी ना मना करना चाहती थी | अब तो बहुत देर हो चुकी थी अब तो अगर वह उन्हें रोकना भी चाहे तो भी कोई फायदा नहीं | अब तो बस वह चाहती थी किसी तरह से यह सिलसिला रुक जाए और उनके जिस्म में जल्दी आग के फव्वारे छूट पड़े और उससे वो सरोबार हो जाये |
 
गिरधारी से अब रहा नहीं जा रहा था, गिरधारी का जोश अब उतरने को ही था, उसकी कोकीन का असर भी खत्म हो गया था | दो चार मिनट में झड़ जाने वाला गिरधारी आधे घंटे तक रीमा की कसी हुई गांड को चीरता रहा | कोकीन उसे इससे ज्यादा क्या दे सकती थी अब तो उसे झड़ना ही था लेकिन उसके नशे में वह पूरी तरह से उत्तेजित था और उसने रीमा की चुताड़ो को थोड़ा सा ऊपर उठाया और दना दन दना दन पूरा लंड अपना रीमा की गांड में उतार दिया |

इतनी देर से अपनी गांड पर पड़ रही मुसल लंड की भीषण ठोकरों के बाद रीवा की संकरी कसी गांड तो पूरी तरह से खुल गई थी लेकिन लगातार लगाती ठोकरों और लंड पेलाई की वजह से उसमें इतनी तेज जलन दर्द हो रहा था कि अब तक वह उसे उबर नहीं पाई थी इसी बीच इस नए भीषण हमले ने तो जैसे रीवा के पूरे जिस्म को दर्द से नहला दिया | रीमा को भी पता था यह आखरी बार है और इसके बाद में उसे उसकी गुलाबी गांड में निचुड़ जाना है | आखिर में जीतेगी रीमा ही | इसीलिए वह गिरधारी के इस भीषण ठोकरों को भी आंखें बंद करके बर्दाश्त करने लगी | इधर नीचे से जितेश भी रुकने के मूड में नहीं था | उसकी भी कमर तेजी से हिल रही थी लेकिन उसके मुकाबले गिरधारी की ठोकरे ज्यादा ताकतवर और तेज थी | जितेश ने रीमा को कस कसकर खुद से चिपका लिया | जिस्म पर पड़ रही इस तरह की भीषण ठोकरों को और अपनी कोमल गांड का कचूमर बनते वो गर्दन घुमाकर देखने लगी | वह कराह रही थी चीख रही थी लेकिन अब ना तो उसकी चीख से किसी को कोई फर्क पड़ रहा था और ना ही उसके गांड और चूतड़ पर लगने वाले धक्को से |

दर्द के इन आखिरी पलो को उसे बर्दाश्त करना ही होगा | आखिरकार रीमा ने ही तो उन्हें अपना जिस्म सौंपा था अब खुद उन्हें कैसे मना कर सकती थी, वासना के इस चरम पर तो बिलकुल नहीं | अब तो जो करना चाहे वह कर सकते थे | रीमा के जिस्म की यह दुर्गति रीमा की ही खुद की गलती थी | रीमा को उसके जिस्म पर पड़ रही है हर ठोकर रीमा को अपनी गलती का एहसास तो करा रही थी लेकिन उसकी वासना भी अपने अहंकार में अपने जिस्म की दुर्गति को नकार रही थी | आखिरकार रीमा ने ही तो बुलाया था कहा था कि वह आकर उसकी गांड मारे और अब उसकी गांड मार रहा था , ऐसे मार रहा था ऐसे लंड पेल रहा था जैसे उसकी गांड में आज तक किसी ने नहीं पेला| जिस कसी गांड में एक उंगली तक नहीं जाती थी उसमें एक मोटा लंड दनादन किसी पिस्टन की तरह से अंदर बाहर हो रहा था और उसके चूतड़ों पर बेतहाशा ठोकर मार रहा था और दूसरी तरफ से जितेश का लंड रीमा की चूत में धंसा हुआ था | रीमा जाये तो कहां जाए | दोनों के बीच में सैंडविच बन के रह गई | ऐसा लग रहा था जैसे दो पाटों के बीच में किसी ने मक्खन को रख करके और दोनों पाते चला दिए हो | इसी तरह वह दो मर्दों के जिस्मो की चुदाई में पिघल कर रह गयी | यही उसकी किस्मत थी उसकी मक्खन मलाई जैसे चूत और गांड को इसी तरह से पत्थर जैसे कठोर दोनो लंडो से कुचलना लिखा था | वह अपने चरम के उफान पर खड़े दनादन रीमा को चोद रहे थे और वो तन मन से पूरी तरह से चुद रही थी | आखिरी मानेगी तो ऐसी चुदाई ही तो मांगी थी रीमा ने | उसके तपते का हर हिस्सा अब दुखने लगा था | जितेश और गिरधारी की तेज ठोकरों के साथ में रीमा का अस्तित्व तिनके की तरह हवा में उड़ा जा रहा था | रीमा किस मुंह से उन्हें रोकेगी किस मुझसे कहेगी बस करो मेरे जिस्म का बलात्कार करना बंद करो | मेरे जिस्म को इस तरह से नोचना बंद करो | लूटना खसोटना बंद करो लेकिन इसी तरह से तो वो लूटना चाहती कि कोई उसे इसी तरह बेदर्दी से मसले कुचले चोदे और अब इसी तरह से उसे गिरधारी और जितेश मसल रहे थे |

गिरधारी की ठोकरों ने रीमा के न केवल जिस्म को बल्कि उसके अस्तित्व को हिलाकर रख दिया था | गिरधारी की ठोकरें ने रीमा की कमर में वह दर्द पैदा कर दिया जिसमे उसका पूरा जिस्म कहा गया था लेकिन अब इस वासना के चरम पर किस को किस की फिक्र थी | गिरधारी अपनी वासना के ऐसे चरम पर था जहां आदमी को औरत के छोड़ो खुद के जिस्म का ख्याल रहता है नहीं रहता | उसके खुद के लंड की खाल भी छिलने के कगार पर पहुंच गई थी और उसके सुपाडे का बुरा हाल था , वहां वह रीमा की गांड का क्या ख्याल रखता | वासना चीज ही ऐसी है जहां पर जिस्म बेमानी हो जाते हैं बस रह जाती है तो वासना वासना वासना और उसकी आग बुझाने की अंधी ललक | इधर जितेश भी रीमा की चूत की कुटाई लगातार जारी रखें |

कुछ ही देर में गिरधारी फड़फड़ाने लगा और उसकी कोकीन का नशा उतरते ही हुए वो अपने चरम की तरफ जाने लगा | उसकी गोलियां फटने लगी और उनकी गोलियों में भरा हुआ सफेद गाढ़ा गरम लावा उसके जिस्म की आग की तपिश को जलाता हुआ उसकी वासना की झील के बाँध को चीरता हुआ ऊपर की तरफ बह निकला और रीमा की गहरी गुलाबी जलती गांड में छूटने लगा |

इसी के साथ जैसे लग रहा था गिरधारी के भी प्राण छूट गए वह बस इसी लाश की तरह से अकड़ गया उसका लंड पूरी तरह से रीमा की गांड में धंसा हुआ था और उसके लंड से लगातार गर्म सफेद लावे की पिचकारियाँ रीमा की गांड की जलती दीवारों को ठंडा करने में लगी थी | गिरधारी की एक्सप्रेस ट्रेन पैसेंजेर हो गयी | वह बस हल्के हल्के से अपनी कमर हिलाने लगा | रीमा की तो जैसे जान वापस आ गई हो उसे लग नहीं रहा था कि वह आज जिंदा बच पायेगी | जब तक लंड की ठोकरे लगती रही ऐसा लगा जैसे उसकी जान उसके हलक में अटकी रही | जैसी उसकी आज दोनों के लंडो से ठुकाई हुई थी उससे लग ही रहा था कि आज उसकी जान निकल जाएगी लेकिन पहली बार उसे एहसास हुआ कि वह अभी जिंदा है और अब मरेगी नहीं आखिर उसकी वासना उसे उस मोड़ पर ले आई थी जहां पर उसे मौत साफ-स साफ दिखाई देने लगी थी | रीमा मौत के मुंह से वापस लौट आई | गिरधारी हिलती कमर बता रही थी कि उसकी पिचकारिया दनादन रीमा की जलती हुई गांड में छूट रही है | ऐसा लगा जैसे किसी ने रीमा की गांड को जलते हुए कोयले की भट्टी के पास से निकालकर पानी के टैंक में डुबो दिया हो | उसकी जलती हुई गांड में गिरधारी के सफ़ेद सफेद लावे ने जैसे बाहर ला दी हो | रीमा उस ठंडक और तृप्ति के अहसास में डूबने लगी | इसी पल के लिए वह इतनी देर तक कराहती रही, बिलखती रही खुद को कुचलवाती मसलवाती रही चुदवाती खुद की कोरी करारी गांड मरवाती रही | गिरधारी के लंड से सफ़ेद लावा रीमा की गांड की कसी दीवारों को भरने के बाद बूंद बूंद कर बाहर रिसने लगा |

इधर गिरधारी को धीमा पड़ता देख जितेश ने भी अपनी ठोकरे बढ़ा दी है और दनादन सीमा की चूत में अपने लंड को पेलने लगा | जाहिर सी बात है उसका चरम भी करीब था | गिरधारी झड़ के बाद वैसे ही बीमा के बदन से चिपक गया और उसका लंड रीमा की गांड की गहराइयों में पूरी तरह से धंसा रहा | इधर जितेश रीमा के चूत पर दनादन ठोकरें मारने लगा | उधर गिरधारी का लंड रीमा की गांड में आराम फरमाने लगा | जितेश को भी ज्यादा देर नहीं लगी और वह भी अपनी जिस्म में इतनी देर से उबल रही वासना की गर्मी को चरम पर पहुंचा गया | बेतहाशा धक्वको की ठोकरों ने उसके लंड में तेज सनसनाहट पैदा कर दी | वह भी अब खुद को संभाल नहीं पाया और उसका लंड भी जवाब दे गया उसकी गोलियों से फिर से सफेद लावे की धार बह निकली और उसके लंड से निकलकर रीमा की चूत की गहराइयो में झरने लगी | रीमा की चूत जितेश के सफेद लावे से भरने लगी गिरधारी ने रीमा की गांड को पहले ही सफेद लावे से पूरी तरह से भर दिया था | जितेश की कमर कुछ देर तक हिलती रही और हिलती कमर के साथ जितेश का रस रीमा की चूत में निकलता रहा |

रीमा तो जैसे जन्नत में पहुंच गई हो उसकी जलती हुई दीवारों पर जितेश की फुहारे, उसकी गाड़ की बिलखती दीवारों पर गिरधारी की फुहारे , रीमा को जैसे नया जीवन मिल गया हो | जैसे मरते हुए को अमृत मिल गया हो रीमा की सुख की कल्पना भी नहीं की जा सकती है | जो चूत घंटे भर से से ज्यादा मुसल लंड से रगड़ी गई हो उसकी दीवारों की हालत उसकी चूत की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है इतनी देर मसली जा रही चूत की दीवारों पर जब जितेश की गरम फुहारे पड़ी तो ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी चूत को नया जीवन दे दिया होगा एक नया जीवनदान मिला हो उसकी चूत की दीवारों में एक नई जान सी आ गई उसकी चूत जो इतनी देर से जितेश के लैंड से रगड़ खाकर जल रही थी उसकी आग पूरी तरह से शांत हो गई | अब वह पूरी तरह से जितेश के उस गुनगुने लावे में गोते लगाने लगी | रीमा को तो जैसे खुशी का ठिकाना ही नहीं था | दो दो लंडो का सफ़ेद गाढ़ा रस उसकी गुलाबी सुरंगों में भरा हुआ था | इसकी अहसास की तृप्ति तो बस रीमा ही महसूस कर सकती थी | उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता | आखिर इतनी देर खुद को दो मर्दो के हवाले करके मुसल लंडो से कुचलवाने और चुदवाने के बाद उसके हाथ में सिर्फ वह गाढ़ा सफेद रस ही तो था जो सिर्फ उसका था | बाकी आदमी तो जितनी देर औरत के अंदर रहता है बस उतनी देर ही वो उसका होता है | रीमा को अच्छे से पता था जब तक मर्द औरत की चूत में रहता है तब तक ही मर्द पूरी तरह से उसका होता है इसीलिए उसे पता था खुद को इस तरह से चुदवाने के बाद उसे सिर्फ कुछ हासिल होगा तो वह है उसके मन के कोनों में दबि वासना की तृप्ति और यह मीठा सफेद रस | इसके अलावा तो उसके हाथ कुछ आना भी नहीं था |
 
यही तो रीमा को चाहिए था रीमा जानती थी उसने जो किया है वह उसे नहीं करना चाहिए था लेकिन आखिर कब तक हो अपने के अरमानों को कुचलती रहती उसके अंदर जो भी कुंठा होगी शायद चुदाई के बाद कम हो जाए वैसे भी अगर वह अपने मन के दबे अरमानों को पूरा नहीं करती तो अंदर ही अंदर खुद को कोसती रहती अब कम से कम अपने मन में दबी वासनाओं के कारण खुद को नहीं कोसेगी | सही गलत क्या है इसका फैसला करने का यह सही वक्त नहीं था अभी वक्त था बस इसे साथ में डूब जाने का दो दो और उनका सफेद गाढ़ा रस उसकी दोनों सुरंगों को पूरी तरह से लबालब भरे हुए था और उसमे उतराती इठलाती रीमा मन ही मन उस लम्बे दौर के दर्द को बर्दास्त करने के बाद गहरी शांति में थी |

हर चीज का अंत होता है इस चुदाई का भी अंत हुआ इस भीषण चुदाई का रीमा के जीवन की अब तक की सबसे खतरनाक सबसे रोमांचक सबसे दुसह्सिक चुदाई ऐसी चुदाई जिसमें रीमा ने अपने मन के कोने में दबे हुए सारे अरमान खोल दिए अपने जिस्म के सारी सुरंगे खोल दी और उन सुरंगों के दरवाजों में मोटे मोटे मुसल लंडो को आने-जाने की बेरोकटोक इजाजत दे दी | ऐसी चुदाई जब उसके जिस्म में हाहाकारी लंड बेधड़क अंदर बाहर हुए और वह बिना किसी ना नुकुर के पूरी तरह से इन दोनों के लंडो से मिले दर्द को पूरी तरह उसने बर्दास्त किया | जी भर के जी दोनों लंडो के अहसास को दिलो दिमाग में उतारा | इसका अहसास उसके अन्तर्मन में सालों तक जिंदा रहेगा | इस एहसास को वह अपने अंदर सालों तक जिंदा रखेगी वह तकलीफ देह था, बर्दास्त न कर पाने वाले दर्द से गुजरने वाला था लेकिन एक ऐसा एहसास था तो शायद औरत को बिना तकलीफ के मिल भी नहीं सकता था इस तरह से दो दो लंड उसके जिस्म को चीर रहे थे यह कैसा एहसास था जो औरत के नसीब में तभी होगा जब वह अपने जिस्म में दो लंडो को घुसने देगी | उसने अपने जिस्म में दोनों लंडो को घुसने दिया, एक बेहद तकलीफ भरा लेकिन बहुत ही खास चुदाई का अनुभव जो वो कभी नहीं भूलेगी | उसने भी सपने में नहीं सोचा था ऐसे भी मर्द होते हैं, जो औरत की चोद चोद कर जान निकाल देते है | रीमा के परपराते दोनों गुलाबी छेद उसको उसकी चुदाई का मीठा दर्द भरा अहसास करा रहे थे |

लेकिन कुछ तो गड़बड़ है इतनी देर तक चुदाई करने का स्टैमिना कहां से आ गया कहीं कुछ तो ऐसा था, तभी उन दोनों के नरम होते लंड बाहर की तरह खिसकने लगे | रीमा जितेश के सीने से चिपकी अपनी सांसे काबू करने लगी उसके शरीर में तो जान थी ही नहीं इसीलिए पूरी तरह से जितेश पर निढाल पसर गयी | इधर दोनों ने अपने अपने लंड रीमा की सुरंगों से बाहर खींच लिया और उनके लंडो का बाहर आना था कि रीमा की सूरंगों में भरा हुआ सफेद लावा भरभरा कर बह निकला

जो लावा अब तक रीमा के अंतरों से रिस रहा था अब वह धार बनकर बहने लगा और उसकी जांघ और चूतड़ों को भिगोने लगा था | जितेश और गिरधारी दोनों के लंड पूरी तरह से लंड रस से सने हुए थे रीमा की चूत का पूरा इलाका भी उनसे सन गया था | रीमा की गांड से और चूत से निकलता हुआ लंड रीमा की जांघों को भी भिगो रहा था | इधर लंड निकालते ही गिरधारी ने रीमा को देखा और बोला - मां कसम से जान निकल गई |

रीमा सर घुमा कर पीछे देखने लगी |

गिरधारी - हां मैडम क्या चुदाई हुई है |

रीमा उसका आशय समझने की कोशिश कर रही थी |

गिरधारी - क्या मैडम क्या जिस्म की मालकिन हो आप..... क्या कसी कसी गांड थी | आपकी कसी गांड ने मेरे लंड का तेल निकाल दिया | गांड आपकी मार रहा था और पसीना मेरी गांड से छूट रहा था | एक ही बार में पूरा का पूरा लंड ही चूस लिया | मन तो था एक बार और आपकी गांड मारू लेकिन आपकी गांड ने एक ही बार में सारा दम निकाल लिया |

रीमा सर घुमा कर पीछे देखने लगी है - क्या बकवास कर रहा है, एक बार और गांड मारू, तेरे घर की खेती है मादरचोद |

रीमा को गाली देते देख सकपका गया - अरे मैडम गुस्सा मत होइए , आपकी गांड को खोलने में पूछिए मत इतनी ताकत लगाई है इतनी ताकत में १० औरतो को चोद डालता |

रीमा जितेश से - इसको भगाओ यहाँ से नहीं तो अब मेरे हाथो पिटेगा |

गिरधारी को रीमा से कोई मतलब ही नहीं था वो तो अपनी धुन में ही रमा हुआ था - अरे मैडम आप जैसी खूबसूरत कमसिन मक्खन मलाई जैसा औरत को एक बार चोद के जी कहां भरेगा| एक बार और आपकी गांड मारने का मन था लेकिन आपने तो एक ही बार में बेदम कर दिया है अब तो दुबारा लंड भी नहीं खड़ा होगा ऐसा चूस कर निचोड़ दिया है आपने |

रीमा - जितेश तुम कुछ कहते क्यों नहीं |

जितेश रीमा के चूतड़ सहला रहा था और रीमा पीछे की तरफ जितेश गिरधारी को देख रही थी |

गिरधारी - क्या मैडम इसको देख रही हो इसीलिए आपकी गांड की कसकर ठुकाई करी है |

अब तक तीनों की वासना का नशा उतर चुका था लेकिन रीमा के हुस्न का जादू अब पूरी तरह से गिरधारी के ऊपर चढ़ चुका था और दिमाग अपने पूरे होशो हवास में धीरे-धीरे वापस आ गई थी उसे गिरधारी की बातें बहुत ही वाहियात और शर्मनाक लग रही थी हालांकि वह इस बात से अनजान नहीं थी कि गिरधारी ने ही उसकी गांड को चीरकर फालूदा बना दिया है लेकिन फिर भी वह वासना का दौर खत्म हो चुका था और वो अब भी वैसी ही गंदी गंदी बातें कर रहा है | रीमा ब अपने असली मोड में वापस आ गई थी|

इधर गिरधारी अपने लंड को जड़ से पकड़कर हिलाता हुआ बोला - एक बार चाटो ना मैडम |

रीमा जितेश की तरफ देखती हुई बोली - क्या बकवास कर रहा है

गिरधारी हैरान सा - बकवास नहीं मेरा लंड चूसने के लिए तो कह रहा हूं |

रीमा - अब ये मेरा दिमाग ख़राब कर रहा है |

गिरधारी - मैडम बस चुम्मी ही दे दो |

रीमा जितेश की तरफ देखती हुई - इससे बोलो जितेश अपने होश में तो है ना .......क्या क्या बक रहा है |
 
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