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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

जितेश ने गिरधारी की तरफ आंखों से धमकाते हुए इशारा किया लेकिन गिरधारी ने जितेश को इग्नोर कर दिया

- अरे मैडम क्या गलत कह रहा हूं अभी-अभी तो इसी लंड ने आपकी गांड का उद्घाटन पूरी तरह से किया है इसी लंड ने आप की कुंवारी कोरी गांड को चोद के जवान औरत की गांड बनाया है और आप आप जरा सा इसको चूम चाट लोगी तो क्या हो जाएगा |

जितेश ने फिर से गिरधारी की तरफ के तरीके गिरधारी की तरफ आंखें तेरी

गिरधारी भी धीठ हो गया था उसे पता था अब तो सब कुछ हो चुका है अब किस बात की शर्म किस बात का दबाव .....वह जितेश कोई दबाव को इग्नोर करता हुआ बोला - अरे मैडम बस एक छोटी सी गरीब की तमन्ना है जब गांड में लंड ले लिया है तो मेरा मुंह में भी ले लो |

रीमा का गुस्सा पूरी तरह से अपने चरम पर पहुंच गया था यह वह रीमा नहीं तो जो कुछ जो कुछ देर पहले वासना में तड़प रही थी | वह अपने पूरे होशो हवास में अपने पूरे विवेक में लौट चुकी थी - क्या बकवास कर रहा है तुम्हारे जैसे आदमी की इतनी हैसियत |

रीमा गिरधारी और जितेश तीनों ही नंगे थे यहां तक कि रीमा की चूत और गांड से अभी भी सफेद रस रिस रहा था और उसके चूतड़, चूत सब पूरी तरह से उसे सनी हुए थे लेकिन रीमा को अपना ख्याल ही कहा था वह तो गिरधारी की बात पर तमतमा गयी थी इधर जितेश को भी थोड़ा सा गुस्सा आ गया वह गिरधारी को डांटते हुए बोला - गिरधारी थोड़ा आराम कर लेने दो ...... साले क्यों बक चोदी कर रहा है मैडम जी नहीं बोला तो मतलब नहीं है | मैडम को उस समय तेरा लंड चाहिए था उन्होंने बुला लिया था अब वह मना कर रही है मतलब मना कर रही है |

गिरधारी को यह बात समझ में नहीं आई वह ऐसे खयालो का था ही नहीं उसको तो लग रहा था कि उसने रीमा की गांड मार दी मतलब रीमा अब उसकी रंडी बन गई है जो चाहेगा उससे करवा सकता है |

उसने फिर से रीमा की तरफ जाते हुए लंड को हिलाया और बोला - अरे मैडम क्यों नखरे कर रही हो जब गांड में लंड ले लिया है तो जरा मुंह से चूमने चाटने में क्या घट जाएगी | मेरी भी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी | इतनी देर गांड में दनादन लंड पेला है तो कुछ नहीं हुआ तो एक बार मुंह से चूम दोगी तो क्या हो जाएगा |

रीमा का गुस्सा अपने चरम पर पहुंच गया लेकिन गिरधारी को समझ नहीं आ रहा था उस समय बात कुछ और थी और अब कुछ और | औरत को समझ पाना मर्द के लिए हमेशा से ही टेढ़ी खीर रहा है |

रीमा गुस्से से तमतमा गई थी और उसने गिरधारी को एक तमाचा जड़ दिया | गिरधारी हक्का-बक्का रह गया क्या हो गया ऐसा उसने क्या कह दिया अभी तो खुशी-खुशी उसका पूरा लंड अपनी गांड में घोंट रही थी और अब जरा सा चूमने चाटने को कह दिया तो इतना भड़क रही है ठीक है मूड नहीं है तो कोई बात नहीं |

लेकिन अब तक गिरधारी की हिम्मत बढ़ चुकी थी आखिर उसने रीमा की गांड मारी थी वह भी ताव में आकर बोला - क्या मैडम गांड खुशी-खुशी मरवा लेती हो जरा सा उसे चूम दोगी तो क्या घट जाएगा | अपनी गाड़ का छेद छुकर देखो मैडम अभी भी मेरे लंड पेलने के कारन मुहँ खोले खड़ा है | गौर से देखो शीशे में अपने जांघे उठाकर, तब समझ आएगा कितने जबरदस्त तरीके से मैंने तुमारी गांड मारी है और तुमने चुताड़ो को उछल उछल कर मेरा लंड घोंट कर अपनी गांड मरवाई है | अपनी चूत और लंड की हालत तो देखो पहले, फिर आखे तरेरना हम पर | हमने जबरदस्ती नहीं चोदा है तुम्हे |

सच में रीमा की गांड का छल्ला सूजकर खून की तरह लाल हो गया था और उसकी गांड का छेद खुला हुआ था | उसकी चूत के ओंठ भी खून की तरह लाल और सूजे हुए थे | कोई देखकर ही बता सकता था की कितनी जबरदस्त तरीके से उन्हें चोदा गया है पेला गया है ठोका गया है

रीमा के पास कोई जवाब नहीं था वह हक्की बक्की से सदमे में पीछे की तरफ बढ़ गई उसे लगा उसने यह क्या कर दिया इसी बात का तो उसे डर था आखिर उसने जो किया था उसके बाद एक मर्द की नजर में उसकी यही हैसियत थी एक बार जब कोई औरत किसी मर्द से खुलकर चुद जाती है तो उसे रंडी ही समझता है और यहां तो उसने जान ना पहचान फिर भी सीधे-सीधे अपनी गांड मारने को दे दी है |

गिरधारी की नजर में तो वो रंडी से भी बदतर हो गई थी |

रीमा क्या जवाब दे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा पीछे की तरफ हट गई लेकिन तभी जितेश उठा और उसने दनादन आठ दस लप्पड़ गिरधारी को रसीद कर दिए - साले भोसड़ी के मादरचोद समझ में नहीं आता है एक बार में मैडम क्या बोल रही है ......... समझ क्या रखा है मैडम को | मैडम को अपनी गांड मरवानी थी इसलिए उन्होंने तेरा लंड ले लिया अपनी गांड में | तेरी जगह कोई और होता तो उसका ले लेती | अब उन्हें तेरी यह दो कौड़ी की गन्दी सी शक्ल भी नहीं देखनी है चल फुटले यहां से | तुमने अपनी पूरी जिंदगी भर की अच्छी किस्मत का सारा मजा एक ही दिन में लूट लिया है अब या तो यहां से निकल ले नहीं तो सीधा ऊपर जाएगा मेरा गुस्सा तो तुझे पता ही है |

गिरधारी - ठीक है ठीक है जा रहा हूं, साला रंडियों का मूड ही नहीं समझ आता |

जितेश - साले अपनी औकात मत भूल ठीक है जबान लड़ाना बंद कर वरना अभी तो बहुत पिटेगा |

गिरधारी भी भड़क गया - जब देखो तब धमकाते रहते हो अभी तुम्हारी धमकी नहीं चलेगी और जाने से पहले एक बात बता देता हूं मैडम कान खोल कर सुन लो आप ही बार-बार पूछ रही थी ना इतनी देर से क्यों नहीं झड़ रहे हो क्यों नहीं झड़ रहे हो | मेरी पिचकारी जल्दी छूट जाती है इसीलिए मैंने कोकीन चाट ली थी क्योंकि आप तो बस अपनी गांड मरवाना चाहती थी और मैं नहीं चाहता था कि आप ही गांड में लंड डालकर २ मिनट अंदर बाहर करूं और पिचकारी छूट जाए इसीलिए मैंने कोकीन चाट ली थी लेकिन मेरे बॉस मुझसे इतना जलते हैं कि मेरे साथ साथ इन्होंने भी मुझसे पुड़िया छीनकर चाट ली थी इसीलिए आपको यह भी इतनी देर तक आप को चोदते रहे |

रीमा हैरानी से मतलब तुम दोनों कंपटीशन कर रहे थे और मेरा यह जिस्म का ख्याल किसी को नहीं आया

इसीलिए कहूं क्यों पोर्न फिल्मो की तरह बिल्कुल नॉनस्टॉप मुझे चोदते जा रहे थे | ना मेरे दर्द की परवाह थी न तकलीफ की | कैसे जानवरों की तरह इसने मेरी गांड को चीरा है तुम्हे जरा सा भी अंदाजा है जितेश |

रितेश सर झुकाता हुआ - देखो देना जो भी हुआ अब क्या बताऊं .......मुझे नहीं पता ये बार-बार मुझे चिढ़ा रहा था मुझे लगा कि चाहे जीतनी देर से तुम्हे चोद रहा होऊ इससे २ मिनट की पिचकारी से पीछे तो नहीं रहूंगा और इसीलिए मैंने भी थोड़ी सी ले लिया ना कि तुम तो जानती हो |

रीमा हाथो के बीच मुहँ मुहँ छिपाकर लगा जैसे रोने ही वाली थी - तुमने कोकीन खाकर मुझे चोदा नहीं है मेरा बलात्कार किया है मेरी दुर्गति की है | मै तुमसे चुदना चाहती थी, हो सकता है मै अपनी गांड भी मरवाना चाहती थी लेकिन अपना बलात्कार नहीं करवाना चाहती थी | तुमने मुझे और इसको हरामजादे को खुद को रोका क्यों नहीं | मैंने तो तुम पर भरोसा करके खुद को तुम्हे सौंप दिया था | गिरधारी की तरफ गुस्से से देखती हुई आदमी से कह दो मेरी नजरो से दूर हो जाए नहीं तो मेरे हाथो इसका खून हो जाएगा |
 
इधर गिरधारी रीमा की जिस्म पर एक निगाह डालता हुआ तेजी से कपड़े पहन कर के रंग से छिपकर पीछे की तरफ से निकल कर भाग गया |

रीमा और जितेश दोनों किर्त्व्यविमुध वही बिस्तर पर बैठे रहे | रीमा की वासना की तृप्ति की ख़ुशी धुएंकी तरह गायब हो गयी | बाहर अच्छा खासा उजाला हो गया था और सूरज भी अब ऊपर की तरफ चढ़ने लगा था हालांकि कमरे में बस दराजो से ही हल्की-फुल्की रोशनी आ रही थी | रीमा और रितेश दोनों ही बुरी तरह से पस्त हो चुके थे रीमा गिरधारी बातें सुनकर सोच में पड़ गई हे भगवान यह उसने क्या कर दिया उसने वास्तव में अपने ही शरीर की दुर्गति करा दी अपनी शक्ल आईने में कैसे देख पाएगी अब खुद से आईने में नज़ारे कैसे मिला पायेगी | रीमा यही सब सोच सोच कर गहरे सदमे में चली गयी |

जितेश को ऐसे खा जाने वाली नजरों से देख रही थी जैसे जितेश ने उसका बलात्कार कर दिया हो | जितेश जानता था गलती उसे हो गई है और इसका एक ही तरीका था कि उसे रीमा को खुद की बांहों में ले लेना चाहिए वह जानता था कि रीमा नाराज होगी लेकिन उसे यह भी पता था वह उसे मना लेगा | जितेश रीमा के पास चला गया और उसे बाहों में लेने की कोशिश करने लगा लेकिन रीमा ने उसे झटक दिया इस बार जितेश ने थोड़ा सा ताकत से उसे अपनी तरफ खींच लिया रीमा के जिस्म में इतनी ताकत नहीं थी कि अभी वह प्रतिरोध कर सके उसके ऊपर से वह गहरे अवसाद में भी चली गई आखिर अब क्या करें | किसी तरह से जितेश की बाहों की तरफ खिसकती हुई चली गई |

इधर जितेश उठा और उसने तौलिया उठा कर के रीमा के जिस्म को पोंचना शुरू कर दिया | उसे पता था रीमा की हालत अभी ठीक नहीं है | इतनी बेदर्दी से चुदने के बाद में उसके गुलाबी छेदों में तकलीफ हो रही होगी इधर रीमा चुपचाप बैठी रही और अपने किए पर पछता रही थी |

जितेश रीमा को साफ करता रहा और रीमा बुत बनी बैठी रही | उसे समझ में नहीं आ रहा था, उसने क्या कर डाला वह क्या करें क्या ना करें कैसे खुद से नजरे मिलाये | उसे जितेश पर बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन उसे सबसे ज्यादा गुस्सा खुद पर आ रहा था आखिर उसने खुद को ही तबाह करने का फैसला किया् क्यों | उसकी वासना उसे कहीं का नहीं छोड़ेगी उसकी जिंदगी को नरक कर देगी | आज उसने खुद को अपनी नजरों में ही गिरा दिया | वो आज खुद की नजरो में वासना की भूखी रंडी बन गयी | जितेश रीमा की हालत थोड़ी थोड़ी समझ रहा था उसने रीमा को बाहों में ले लिया और बिस्तर पर लेट गया उसकी पीठ सहलाने लगा | रीमा उसकी बांहों में सिमटती चली गयी | लेकिन उसका वह सदमा उसे अंदर से पूरी तरह से खाए जा रहा था हाय यह मैंने क्या कर दिया कहां खुद को सड़क पर चलती नजरों से बचाती थी कहां खुद के पल्लू को पल-पल से खींच के ऊपर चढ़ाटी थी और आज कहां दो अजनबी के एक साथ दो दो लंड ले लिये अपने जिस्म में | जितेश भी बुरी तरह थक गया था और जल्दी ही सो गया | रीमा भी उसकी बांहों में सोचती विचरती आखिरकार सो गयी |

रीमा और जितेश दोनों ही बुरी तरह से थककर गहरी नीद में चले गए लेकिन कोई हा जिसकी दिन और रात दोनों की नीद उडी हुई थी वो था सूर्यदेव | मंत्री जी से बात करने के बाद उसकी रातो की नीद भी उड़ गयी थी | उसे समझ नहीं आ रहा था आखिर रीमा गायब कहाँ हो गयी | उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया | उसका दाव उसे ही उल्टा पड़ जायेगा ये उसने नहीं सोचा था | जिस शूटर को उसने जग्गू को मारने बेजा था, उसे जग्गू की लाश भी ठिकाने लगा देनी थी | जिससे किसी को कुछ पता न चले | अपने बेटे के गम में विलास खुद ही पागल हो जाता | जब लाश नहीं मिलती तो दिन रात पागलों की तरह अपने बेटे को खोजता रहता | वो मंत्री जी के साथ बिज़नस में आगे निकल जाता | लेकिन रीमा की वजह से सब गड़बड़ हो गया | अब विलास का सीधा शक सूर्यदेव पर था और उसके पास ये आखिरी मौका था उसके कहर से बचने का | लेकिन वो रीमा को लाये कहाँ से, उस गार्ड के चुतियापे से वो इतनी गहरी मुसीबत में फंस जायेगा ये उसे पता नहीं था | पागलो की तरह छटपटाता अपने घर में घूम रहा था | फिर उसे अपने सारे खास आदमियों को बुलावा बेजा | जो आ सके उनको लेकर एक कमरे में चला गया बाकि को फ़ोन पर ले लिया |

सूर्यदेव - देखो भाई लोगो बात बहुत सीधी है | मेरी कल रात मंत्री जी से बात हुई थी | उन्होंने हाथ खड़े कर दिए है |

उसका सबसे खास आदमी था कालू | उसका नाम कालू पड़ा ही इसलिए था क्योंकि भालू जैसा उसका शरीर और उसका रंग भी भालू जैसा ही था | लोग उसे भालू है या कालू है कहकर चिढाते थे | धीरे धीरे लोग उसे कालू कहने लगे |

कालू - बॉस मंत्री जी क्या बोले |

सूर्यदेव - मंत्री जी बोले है जान बचानी है तो उस छिनार रंडी कुतिया को ढूंढो और विलास के हवाले कर दो | बाकि मंत्री जी संभाल लेगें |

कालू - बॉस हम पूरी कोशिश कर रहे है |

सूर्यदेव - कोशिश से काम नहीं चलेगा हरामजादो | विलास हम सबको कुत्तो की मौत मरेगा | मुझे मारने से पहले तुम सबको मरेगा |

तुम सब के सब सालों किसी काम के नहीं हो एक औरत को नहीं ढूंढ पा रहे हो तुम सब कुत्तों की मौत मारे जाओगे विलास किसी को नहीं छोड़ेगा अपनी जान प्यारी है तो उस साली रंडी को ढूंढो |

कालू - बॉस विलास को कैसे पता चला कि जग्गू को हमने मारा है |

सूर्यदेव - उसे शक है मंत्री जी बोले है तुमारे इलाके में उसका बेटा मारा गया है इसलिए पहला निशाना वो हम पर ही सधेगा |

कालू - बॉस हम ढूंढ रहे है उस औरत को |

सूर्यदेव - लकीर पीटने से काम नहीं चलेगा | जमीन खोदो या आसमान चीर डालो मुझे वो औरत चाहिए | चाहे उसे पाताल से ढूंढ कर लावो | चौबीस घंटे में उसे जिन्दा ढूंढ के लाना है | समझे तुम सब के सब , नहीं तो कुत्ते की मौत मरोगे |

कालू - 24 घन्टे में ही क्या ?

सूर्यदेव - क्योंकि कल जग्गू की तेरहँवी कर रहा विलास, उसके बाद हमारी करेगा |

कालू - बॉस हमने अपना पूरा दम लगा रखा है और आपको यकीन से कह सकता हूँ वो यहाँ से भाग नहीं पाई है | स्कूटर से लड़ने के बाद कोई चलने फिरने की हालत में ही नहीं रहेगा | हो सकता है वो जंगल में कही छुप गयी हो, उसे कोई जानवर उठा ले गया हो या फिर वो नदी के दोनों तरफ बनी बस्ती में कही छुपी हो |

सूर्यदेव - तुम कर क्या रहे हो | पता लगावो कहाँ है वो और घसीट के यहाँ ले आवो | मुझे वो जिन्दा चाहिए कान खोलकर सुन लो |

कालू - हमने चप्पा चप्पा छान मारा है जंगल भी एक बार छान मारा है | मुझे लगता है वो कही छिपी हुई है | जब तक वो इधर उधर निकलेगी नहीं हमारी नजर में कैसे आएगी | अपने आदमी हर गली के मोड़ पर खड़े है | पान वाला ठेले वाला रिक्शा वाला सबको खबर है | जैसे ही किसी को कुछ पता चलता है तुरंत हमें इतल्ला करेगे |

सूर्यदेव - तुमने उसकी फोटो दिखाई है सबको, उसको पहचाने कैसे |

कालू - फोटो तो नहीं है हमारे पास बॉस |

सूर्यदेव - तो सालो क्या गांड मरा रहे हो | उसे कोई पहचानेगा जैसे गधो |

कालू - फोटो कहाँ से लाऊ बॉस |

सूर्यदेव - इस गेंडे जैसे शरीर में दिमाग भगवान् ने मेढक का लगा दिया है | अबे न्यूज़ चैनल खोल उसकी फोटो जब टीवी पर आये तो खीच और किसी दुकान पर जा उसकी फोटो निकलवा, उसके पोस्टर छपवा और हर जगह बटवा |

बॉस - सही कहाँ आपने, मै तुरंत जाकर करता हूँ |
 
सभी जाने लगे | सूर्यदेव कुछ सोचता हुआ - कालू तू रुक ये काम तो कोई भी कर सकता है |

कालू एक आदमी को ये काम सौंप दिया |

बाकियों के जाते ही सूर्यदेव ने उससे दरवाजा बंद करने को कहा |

सूर्यदेव - देख कालू तू मेरे साथ पिछले 9 साल से काम कर रहा है | अगर वो औरत नहीं मिली तो पिछले १० साल की सारी मेहनत बेकार जाएगी ऊपर से जान से हाथ धो बैठेगे सो अलग |

कालू - बॉस मै और बाकि सब जी जान लगा देगें उसको ढूढ़ने में |

सूर्यदेव - सुन ये बता वो पांचो कहाँ है |

कालू - मुझे उनकी कोई खबर नहीं |

सूर्यदेव - तो पता लगा, जरुरत पड़े तो उनसे मदद मांग | अभी उनकी जरुरत है हमारे अकेले के बस का नहीं | माफ़ी मांग लेगें सालो से | जिन्दा रहेंगे तो इनसे भी निपट लेगे |

असल में सूर्यदेव अपने साथ पहले काम करने वाले उन खास पांच आदमियों की बात कर रहा था जो अपने अपने काम में परफेक्ट थे लेकिन उन्हें सूर्यदेव के कमीनेपन पर ऐतराज था इसलिए एक एक करके उससे अलग हो गए | उनमे से एक जितेश भी था | सारे के सारे बेहरतीन शूटर और खतरों के खिलाड़ी थे | कोई भी काम ऐसे अंजाम देते थे जैसे भूत करके निगल गया हो | आस पास किसी को कानो कान खबर नहीं होती थी | सब को सूर्यदेव के काम करने के तरीके और सूर्यदेव द्वारा उन पर भरोसा न करने के कारन वो सब छोड़ कर चले गए | एक ने अपनी प्राइवेट जासूसी की एजेंसी खोल ली | दो लोग पुलिस के लिए काम करने लगे | एक आदमी ने अपना लकड़ी का कारोबार शुरू कर दिया | जितेश पुलिस और प्राइवेट दोनों तरह की कॉन्ट्रैक्ट किल्लिंग का ठेका लेने लगा | भले ही उनमे से कुछ ने बन्दुखे रख दी लेकिन उनके निशाने आज भी अचूक थे | उनके काम करने के तरीके भी, भूसे में से सुई ढूढ़ना उन्हें आता था | यही बात सूर्यदेव को चुभती थी वो उनसे असुरक्षित महसूस करता था | इसीलिए सूर्यदेव ने उनमे से सभी को जान से मारने की कोशिश की लेकिन उन सब की किस्मत अच्छी थी की सब के सब बच गए |

सूर्यदेव - सुनो जो भी अगले 48 घंटे में रीमा का पता बताएगा या उसे ढूढ़ कर लायेगा उसको १० लाख का इनाम मिलेगा | ये खबर पुरे कस्बे में फैला दो |

कालू ने अपने आदमियों को फ़ोन किया और उन पांचो का पता लगाने को बेजा | सूर्यदेव के लिए टिक टिक करता घडी का एक एक सेकेण्ड भारी था |

सूर्यदेव के आदमी नए सिरे से कस्बे और जंगल का चप्पा चप्पा टटोलने लगे | सूर्यदेव के आदमियों के एक टुकड़ी नदी किनारे जंगल में भी रीमा को खोज रही थी दूसरी तरफ कस्बे की पुलिस भी रीमा को खोजने में लग गई थी |

इधर रोहित भी रीमा को लेकर बहुत बेचैन था | उसके सब्र का प्याला छलक रहा था | आखिर कब तक इस नाकारा पुलिस के भरोसे बैठा रहे | उसे अब रीमा की चिंता होने लगी थी, उसके अन्दर ये दहसत भरने लगी थी कही कुछ अनहोनी तो नहीं हो गयी | पता नहीं रीमा कहाँ हो तुम, जिन्दा हो सही सलामत हो | बस एक खबर मिल जाती तुम जहाँ भी हो जैसी भी ही ठीक हो | आखिर कार इस बार रोहित ने अकेले फिर से उसी कस्बे जाने का फैसला किया | वो चाहता था अनिल पुलिस के साथ रहे | अनिल मान गए | रोहित उसी कस्बे की तरफ अपनी कार से निकल पड़ा | रोहित भी अपने शहर से उस कसबे में आ गया था उसे पता था रीमा यहीं कहीं है और कहीं नहीं गई | अगर वह जिंदा है तो यहीं मिलेगी इसीलिए उसने हाथ पर हाथ धरकर पुलिस के भरोसे बैठने की बजाय खुद अपने स्तर पर रीमा कोढूंढना शुरू कर दिया था |

गिरधारी वहां से चला गया था लेकिन उसके दिमाग से रीमा नहीं निकली थी उसके दिलो-दिमाग पर बस रीमा का गोरा गुलाबी जिस्म ही घूम रहा था | उसके वह उठे हुए मोटे-मोटे चौड़े चुताड़ो के पठारों की गुलाबी ढलान, उसके रस टपकाते गुलाबी रसीले ओठ, चिकना गोरा गुलाबी महकता बदन, उसकी गुलाबी कसी हुई गांड और गीली गुलाबी मखमली चूत .................आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह् रीमा तो जैसे औरत नहीं थी कयामत थी उसके लिए | उसके लिए तो आज का दिन ऐसा था जैसे रोज नमक रोटी तोड़ रहे इंसान को आज किसी ने रसमलाई और खीर खिला दी हो
 
गिरधारी वहां से चला गया था लेकिन उसके दिमाग से रीमा नहीं निकली थी उसके दिलो-दिमाग पर बस रीमा का गोरा गुलाबी जिस्म ही घूम रहा था | उसके वह उठे हुए मोटे-मोटे चौड़े चुताड़ो के पठारों की गुलाबी ढलान, उसके रस टपकाते गुलाबी रसीले ओठ, चिकना गोरा गुलाबी महकता बदन, उसकी गुलाबी कसी हुई गांड और गीली गुलाबी मखमली चूत .................आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह् रीमा तो जैसे औरत नहीं थी कयामत थी उसके लिए | उसके लिए तो आज का दिन ऐसा था जैसे रोज नमक रोटी तोड़ रहे इंसान को आज किसी ने रसमलाई और खीर खिला दी हो |

वो जितेश के यहाँ से दुत्कारे जाने के बाद, अपनी कुटिया में आकर लेता हुआ था | सुबह सुबह इतनी जोरदार मेहनत करने के बाद थक गया था | लेकिन रीमा के कारन उसे नीद नहीं आ रही थी | एक हाथ अपने पजामे में घुसेड़कर अपने लंड को सहला रहा था और अपने सुन्दर सपनो में खोया हुआ था | तभी किसी से उसकी झोपड़ी के बाहर आवाज लगायी | गिरधारी को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसक सपना तोड़ दिया हो |

बाहर एक आदमी था गिरधारी उसे जानता था | वो सूर्यदेव के लिए काम करता था |

उसे देखते ही गिरधारी का हाथ अपने आप अपनी कमर में घुसाई हुई पिस्टल पर चला गया | उसने दरवाजा खोलकर उस आदमी पर गन तान दी |

आदमी - अरे अरे इसकी कोई जरुरत नहीं है |

गिरधारी - क्यों आया है यहाँ |

आदमी - खबर देने |

गिरधारी - किसकी |

आदमी - कालू बॉस का संदेसा है | बड़े बॉस तुमारे बॉस से मिलना चाहते है |

गिरधारी - क्यों |

आदमी - पता नहीं |

गिरधारी - तो फुट ले यहाँ से, जब पता चल जाये तब आना | वर्ना इतनी गोली मरूँगा पिछवाड़े में साले कंफ्यूज हो जायेगा असली छेद कौन सा था |

गिरधारी के तेवर देखकर वो वहां से खिसक लिया | इधर गिरधारी बस फिर से लेता ही था वो फिर आकर बाहर आवाज देने लगा |

गिरधारी इस बार पिस्तौल तानकर ही निकला | इससे पहले गिरधारी कुछ बोलता वो बोल पड़ा - कालू बॉस से बात कर लो |

गिरधारी उसे घूरता रहा फिर उसने उसके हाथ से मोबाईल छीन लिया |

गिरधारी - हाँ हेलो बोल कालू |

कालू - मेरे बॉस तेरे बॉस से मिलना चाहते है |

गिरधारी - क्यों |

कालू - देख गिरधारी पुराणी बाते भुलाने का समय है ये | मेरे बॉस किसी मैडम को ढूंढ रहे है और उसमे तुम लोगो की मदद चाहिए | बॉस को हर हाल में वो मैडम अगले अड़तालीस घंटे में चाहिए | इसके लिए बॉस १० लाख तक पैसे भी देने को तैयार है |

गिरधारी - १० लाख , ऐसा क्या अर्जेंट है और वो मैडम क्यों चाहिए |

कालू - देख भाई अपना काम कर और पैसे ले, बात ख़तम |

गिरधारी - मुझे नहीं लगता मेरे बॉस मानेगे |

कालू - देख पीछे जो कुछ भी हुआ उसके लिए मेरे बॉस माफ़ी भी मांगना चाहते है एक बार कह दो बस जितेश बॉस आकार मेरे बॉस से मिल ले | तू बस उन तक संदेसा पंहुचा दे |

गिरधारी - ठीक है बता दूंगा |

कालू - अर्जेंट है |

गिरधारी - ठीक है गिरधारी ने जबान दे दी मतलब दे दी | तुमारे जैसे झूठे धोखेबाज नहीं है |

गिरधारी ने उसका फ़ोन वापस कर दिया | वो चला गया | गिरधारी फिर से बिसतर पर आकर लेट गया | उसे पता था कालू और उसके बॉस को कौन सी मैडम चाहिए | उसे अच्छे से पता था वो रीमा मैडम को ढूंढ रहे है और रीमा मैडम तो अपने बॉस के कब्जे में है | अब आएगा मजा | सालो से चुन चुन कर पिछला हिसाब चुकता किया जायेगा | ऊपर से मोटी रकम भी वसूली जाएगी मैडम के बदले | अभी तो बहुत टाइम है ऊपर से अभी वो जितेश के पास नहीं जाना चाहता था | उसे पता था बॉस गुस्सा होंगे | वैसे भी शाम होने वाली थी | कल सुबह जायेगा | यही सोचकर फिर से अपनी सपनीली दुनिया में खोकर अपने लंड को सहलाने लगा |

पूरी दुनिया की रीमा के लिए परेशान थी लेकिन रीमा तो किसी और चीज के लिए यही परेशान थी रीमा के जिंदगी को पल पल हर पल वहां खतरा था लेकिन जितेश की बाहों में सिमटने के बाद वह दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह रह रही हो वह अपनी ही चिंता में डूबती उतराती हुई उस कमरे के चारदीवारी में बंद थी | उसे अपनी वासना से मिले दुख तकलीफ, संतुष्टि तृप्ति, आनंद से ही फुर्सत नहीं थी जो वो समझ सके कि उसकी जान पर किस तरह से बन आई है और इस समय उसकी गर्दन पर तलवार लटक रही है |
 
सुबह-सुबह दो बड़े बड़े मुसल लंडो की हाहाकारी चौतरफा चुदाई के बाद में रीमा पूरी तरह से निचुड़ गई थी | भारी थकावट से गहरी नींद में सो रही थी लेकिन एक गहरी नीद लेने के बाद जितेश की आंख खुल गई | कोकीन के नशे का सुरूर उतर चूका था | उसका सर भारी हो रहा था | रीमा उसके पड़ोस में उल्टा लेटी हुई थी | उसका सर बिस्तर में धंसा हुआ था और उसके हाथ भी बिस्तर में ही फंसे हुए थे पेट के बल बिस्तर से चिपकी हुई बहुत गहरी नीद में सो रही थी | चेहरे और पीठ पर बिखरे बाल, गोरी चिकनी पीठ और उठे हुए चौड़े मांसल चूतड़, गोरी चिकनी जांघे, रीमा अभी भी उसे उतनी ही मादक और कामुक लग रही थी जितना उसने सोने से पहले लग रही थी |

उसकी मांसल गुदाज गोरी जांघो और चौड़े मांसल चुताड़ो की दो गुलाबी उठान अपनी दरार घाटी में रीमा के जिस्म के करिश्माई सुरंगे छिपा रखी थी |

जितेश उठा फ्रेश हुआ और फिर आकर बिस्तर पर लेट गया | उसका हाथ अनायास ही रीमा की पीठ पर चला गया | और उसकी पीठ सहलाते सहलाते उसके चुताड़ो को सहलाने लगा | उसके दिमाग में जमकर कूटी गयी रीमा की गांड को देखने की दिलचस्पी होने लगी |

उसने गिरधारी को रीमा की कसी गुलाबी गांड का जबरदस्त तरीके से बाजा बजाते देखा था | तभी से उसके मन में एक भावना जग गयी थी जैसे गिरधारी ने एक ऐसा अनमोल खजाना लूट लिए जिस पर पहला हक़ शायद उसका था सिर्फ उसका | वो अन्दर ही अन्दर इस बात के लिए अभी भी कुढ़ रहा था कि वो दो टके का नीच आदमी गिरधारी रीमा जैसी अप्सरा जैसे हुस्न और जिस्म की मालकिन औरत की गांड का सारा मजा लूट ले गया | उससे ये बात बर्दाश्त नहीं हो रही थी |

पिछले कुछ दिन से उसने रीमा को संभाला है, उसके जख्मो की उसने मरहम पट्टी करी है, उसने उसे नहलाया है खिलाया है, उसका दिल बहलाया है, उसका हर ख्याल रखा है | इसीलिए उसने भी उसे अपना सब कुछ सौंप दिया | उसका हक़ बनता है रीमा के जिस्म को भोगने का क्योंकि वो ही तो उसका ख्याल रख रहा है | उसी ने उसके लिए खतरा उठाया है | ये गिरधारी भोसड़ी वाला मौके पर आकर सीधे छक्का मार गया | न लेना एक था न देना दो और फ्री में रीमा की गुलाबी गांड की मलाई चाट गया | नहीं रीमा सिर्फ उसकी है सिर्फ उसकी, जो हुआ सो हुआ लेकिन गिरधारी को वो इस तरह से जीतने नहीं देगा | साला जिंदगी भर गिरधारी उसे चिढ़ायेगा की उसकी बजाय रीमा ने उसे अपनी गांड मारने को दी | वो लीचड़ तो मेरा दिमाग खा जायेगा, उस लीचड़ को औकात में रखना ही होगा | साला रीमा की गांड मार कर उसकी जुबान कितनी कैची की तरह चलने लगी | साला मेरा कुत्ता मुझे ही आँख दिखाने लगा | वो साला मुझे क्या आंख दिखायेगा, उसे मै इस लायक छोडूंगा ही नहीं | जिस चीज के लिए वो उछाल रहा है वो चीज मै भी हासिल करूंगा ताकि उसको जवाब दे सकू | साला अकेला रीमा की कसी गुलाबी गांड के मजे नहीं ले सकता |

गिरधारी की इर्ष्या में जितेश को न जाने कौन सा नशा चढ़ गया | जब से उसने गिरधारी को रीमा की गांड मारते हुए देखा था तब से अंदर ही अन्दर कुढा जा रहा था | उसे गिरधारी से तो हर हाल में आगे ही रहना था हर मामले में इसीलिए उसका मन भी मचलने लगा था उसे शायद लग रहा था गिरधारी जो खजाना लूट ले गया है उसे लूटने से वह वंचित रह गया है | वो रीमा के चूतड़ सहला रहा था | और उसकी गुलाबी गांड के उस कसे हुए छल्ले को देख रहा था, जो सुबह ही अपने जीवन के सबसे मोटा लंड से चीरा गया था | उसे रीमा की गांड में बहुत दिलचस्पी होने लगी थी | आखिर कुछ देर तक हो यही सब सोचकर लेटा रहा |
 
फिर उसने सीधे होते तनते लंड की तरफ देखा उसके अंदर शायद यही ख्वाहिश थी जो उसके मन में चल रहा था | आखिरकार उसने हिम्मत करके धीरे से रीमा को अपनी बाहों में जकड़ के बाएं दाएं करवट लिटा दिया अब वह ठीक रीमा के पीछे आ गया था | उसने अपने जिस्म को रीमा के जिस्म से चिपका लिया था उसने रीमा के घुटने थोड़े से मोड दिए थे | अब उसके भारी-भरकम ऊंचे ऊंचे चूतड़ों के उठान उसके बिल्कुल लंड के करीब आ गई थी वह पीछे से ही रीमा को बाहों में भर कर उसके बड़े बड़े मांसल उठे हुए उरोजों को मसलने लगा था | रीमा बहुत गहरी नींद में सो रही थी और उसे कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था | जितेश ने गौर से रीमा के जिस्म को देखा | बड़े बड़े ऊंचे ऊंचे चौड़े चूतड़ों की घाटी में छिपा हुआ उसका गुलाबी गांड का छेद की कसावट में वो सख्ती नहीं बची थी बल्कि उंगली तो आराम से घुस रही थी | इससे पहले रीमा ने कभी दो लंडो की तो छोड़ो एक लंड से भी कभी ढंग से चुदाई नहीं करी थी | आज जितेश उसे दो बार बेतहाशा चोद चुका था | ऊपर से गिरधारी के साथ में मिलकर उसने रीमा की गुलाबी संकरी सुरंगों को जो चौड़ा किया है | रीमा के देह में न तो जान बची थी न ताकत | उसका शरीर गहरी थकावट से चूर होकर गहरी नींद में सो रहा था | जोश में आकर के वासना की हवस में डूब कर के कुछ भी कर डालना एक अलग बात है लेकिन हर चीज का एक साइड इफेक्ट होता है उसमें जोश में वासना में डूब कर 2 लंडो को से चुदने के लिए हामी तो भर दी | लेकिन उसकी तो एक लंड से ही चीखे उबल पड़ती थी यहाँ तो दो दो मोटे तगड़े मुसल लंड, रीमा का बदन न तो ऐसी चुदाई का अभ्यस्त था न ऐसी ठोकरे बर्दास्त करने के काबिल | ऐसी चुदाई के लिए धीरे धीरे जिस्म को उसका आदी बनाना पड़ता है | यहाँ दो लंडो की चुदाई तो छोड़ो रीमा को नियमित रूप से रोज चुदने की आदत नहीं थी | यहां पर तो दो दो मुसल लंडो की भीषण ठोकरें थी जिसकी वजह से उसका पूरा बदन सर से लेकर कमर तक सब कुछ झटको से हिल गया था | वह उसका शरीर बहुत ही गहरी थकान में से भर गया था और इसीलिए वह बहुत गहरी नींद में सो गई थी लेकिन उसकी चूत और गांड के छेद को देखकर लग रहा था जैसे कि उन पर किसी ने बड़े-बड़े लंड उसे काफी घनघोर ठुकाई करी हो |

जितेश से रहा नहीं जा रहा था, धीरे धीरे उसके विवेक को उसकी वासना और इर्ष्या हरे ले रही थी |

वो रीमा के पीछे आकर उससे बिलकुल वैसे ही सट गया जैसे गिरधारी सट था | रीमा का नरम गुलाबी बदन का कोमल स्पर्श उसे पागल बनाने लगा | रीमा के जिस्म की गुलाबी गंध उसकी वासना की आग में घी डाल उसे और भड़काने लगी | रीमा के जिस्म का स्पर्श होते ही उसका लंड झटके लेकर सीधा होने लगा | जितेश रीमा के उरोजों को हलके हाथो से सहला रहा था | उसकी छाती रीमा की पीठ से सटी थी और उसकी कमर रीमा की कमर से सटी थी | उसका लंड रीमा के चौड़े मांसल नरम चुताड़ो की दो पहाड़ियों के बीच झटके खा रहा था | जितेश के अन्दर की दुविधा धीरे धीरे एकतरफा वासना से घिर कर खतम होती जा रही थी | उसके अन्दर का सही गलत का फर्क रीमा के जिस्म को फिर से भोगने की चाहत में ख़त्म होता जा रहा था | वैसे भी उसे ज्यादा सोचने की आदत थी नहीं | पहली बात रीमा को लेकर वो हिचकिचा रहा था | आखिर क्यों वो इतना सोच रहा है, जब रीमा ने अपनी गांड में लंड लेने से पहले नहीं सोचा | जो होगा देखा जायेगा | वैसे भी मैडम कौन सी दूध की धूलि है एक नंबर की चुद्दकड़ है | गिरधारी से खुजली मितवा रही थी फिर मुझसे क्या हर्ज है | इतने कसे चिकने उठान लिए मांसल चूतड़, चोदो जितेश देखा जायेगा | थोड़ा रोना धोना होगा और क्या | सब औरतो के यही नखरे होते है, जो ख्याल रखता है उसी को दुनिया भर का लेक्चर पिलाती है बताया क्यों नहीं पुछा क्यों नहीं, बिना मेरी मर्जी के कैसे छुआ कैसे अन्दर डाला, कैसे चोदा | बाहर किसी अनजान के खूटे से फाड़वा के आ जाएगी तब कुछ नहीं | चोदो साला देखा जायेगा, जानबूझकर वैसे भी रीमा तुम्हे अपनी गांड तो नहीं मारने देगी | अभी मौका है चौका मार दो, एक बार लंड घुस जायेगा फिर तो बिना माल छोड़े बाहर थोड़े आएगा | भला कोई औरत पूछ के अपनी गांड मारने देगी जितेश, चल अपने अरमान पुरे कर ले, फिर बाद में थोडा रोना धोना होगा, हाथ पैर पटकना होगा और थोड़ा गुस्सा थोड़ी नाराजगी ये सब तो हर मर्द औरत में चलता ही रहता है | आखिर उसने अपना मन मजबूत किया |

उसने अपने कमर को रीमा के चुताड़ो से और कसकर सटा लिया | फिर उसे कुछ याद आया | उसने लपक कर सिराहने से वैसलीन की डिबिया उठाई और ढेर सारी वैसलीन रीमा की गुलाबी गांड के मुहाने पर उड़ेल दी | फिर अपने तने हुए लंड पर वैसलीन मलने लगा | फिर उसने रीमा के चुताड़ो को थोड़ा फैलाकर उसकी गांड की सुरंग के कसे मुहाने पर अपना फूला मोटा सुपाडा सटा दिया |

उसने एक लम्बी साँस ली और अपनी कमर का जोर आगे की तरफ बढ़ा दिया | भले ही रीमा की गांड सुबह सुबह ही मोटे लंड से चीरी गयी हो लेकिन उसकी गांड का छल्ला अब तक पुराने शेप में आ चूका | वो नरम था लेकिन खुला हुआ नहीं था | जितेश को उसे फ़ैलाने के लिए जोर लगाना पड़ा | पहली कोशिश में जितेश असफल रहा | वो जल्दबाजी भी नहीं करना चाहता था | वो जब तक हो सके रीमा को सोते हुए ही उसको चोदना चाहता था | उसे पता था आंख खुलते ही रीमा दुनिया भर के नखरे शुरू कर देगी | इसलिए जल्दबाजी करके उसे अपना काम ख़राब नहीं करना था | उसने अपने लंड को कसकर मसला और धीरे से रीमा की चूत में घुसा दिया | रीमा की नरम चूत में उसके लंड का मोटा सुपाडा फिसलता चला गया | जितेश ने आइस्ते से कमर हिलानी शुरू की | चार पांच धक्को में ही रीमा की चूत गीली होनी शुरू गयी | उसने लंड को चिकना और गीला करना शुरू कर दिया | रीमा की चूत के गीलपन से जितेश का सुपाडा भीग गया | जितेश ने रीमा की गुलाबी चूत से अपना सुपाडा बाहर खीचा और रीमा की गुलाबी कसी गांड के मुहाने पर फिर लगा दिया | उसने अपने लंड को सख्ती से पकड़ा और रीमा की पिछली सुरंग पर सटाकर अन्दर घुसेड़ने लगा | कमर और हाथ का कसकर जोर लगाते ही उसके लंड का सुपाडा रीमा की पिछली सुरंग के कसे छल्ले को फ़ैलाने लगा और जितेश का लंड रीमा के गहरे गुलाबी गांड में धसने लगा | रीमा की गांड का कसा छल्ला नरम था आसानी से फैलाता चला गया | जितेश के लंड का फूला सुपाडा रीमा के जिस्म में घुसकर गायब हो गया | रीमा गहरी नीद में थी लेकिन उसका अचेतन मन उसके शरीर में हो रही हरकतों पर प्रतिक्रिया दे रहा था | इसलिए उसकी चूत में लंड घुसाते ही उसकी चूत गीली होकर जितेश के लंड को भिगोने लगी थी | जितेश का लंड रीमा की गहरी गुलाबी संकरी गांड की मुहाने को चीर कर उसके जिस्म में धंस गया था | जितेश वही थम गया, रीमा थोड़ा सा कसमसाई लेकिन फिर शांत हो गयी | जितेश ने एक लम्बी राहत की साँस ली | वो वैसे ही पड़ा रहा | कुछ देर के लिए जैसे सोने का नाटक करने लगा |
 
कुछ देर तक जब रीमा की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई तो जितेश ने अपने सुपाडे को बाहर खीचा और फिर अन्दर घुसेड दिया | रीमा को उसने पीछे से अपनी बांहों में जकड़ रखा था | रीमा पूरी तरह से उसकी बाहों की गिरफ्त में थी | उसने सोच रखा था अगर रीमा की आँख खुल गयी तो उसे क्या करना है | अगर रीमा जग जाती है तो वो सोने का नाटक करेगा | रीमा को देखेगा कैसे रियेक्ट करती है | वो पहले भी रीमा की चूत में लंड घुसेड़कर सो चूका है | अगर रीमा पूछेगी तो कह देगा, रीमा ने ही उसकी गांड में लंड घुसेड़कर सोने को बोला था | वो तो बस उसकी बात मान कर वही कर रहा है जो वो चाहती थी | उसके अपने लंड के सुपाडे को रीमा की गांड में घुसाए रखा | रीमा की गांड का छल्ला इतनी कुटाई के बाद अब इतना जिद्दी नहीं रहा गया था | वो आराम से जितेश के लंड की बात मानकर फैलकर चौड़ा हो गया था | जितेश ने हौले हौले अपनी कमर हिलानई शुरु कर दी | बमुश्किल इंच डेढ़ इंच ही उसका लंड रीमा की गुलाबी गांड की दूरी तय कर रहा था लेकिन बड़ी मंजिल तय करने का ये छोटा कदम भी बहुत महत्वपूर्ण था | जितेश को इस छोटे कदम की अहमियत पता थी | जितेश थोड़ा निराश था की वो रीमा की कोरी करारी गांड नहीं मार पाया | रीमा की कोरी करारी गांड मारने का सपना पालना तो बेवखूफी थी इसलिए जो मिल रहा था उसी में खुश रहने में भलाई थी | रीमा जैसी कमसिन गोरी जवान अप्सरा की गांड मारने को मिल रहा था ये कहाँ से कम था | उसके शहर में पूछो, कितने मर्दों के दिलो पर सांप लोटते थे रीमा को देखकर | जितेश को तो खुद को किस्मतवाला समझना चाहिए जो उसे रीमा की तीनो सुरंगों का सफ़र करने का मौका मिल रहा है | जितेश दुनिया का वो पहला मर्द था जिसने रीमा के मुहँ चूत और अब गांड तीनो छेदों में अपना लंड पेला था | शायद जितेश को भी अहसास नहीं था उसने क्या हासिल कर लिया है, उसे क्या मिल गया है | रीमा भले ही सो रही हो लेकिन उसका अचेतन इन हलके हलके उसकी गांड में सरकते लंड के धक्को से अनजान नहीं था | उसका अचेतन मन बार बार रीमा के चेतन मन को यह अहसास करा रहा था की उसके शरीर में कुछ हो रहा है | रीमा की आँख तो नहीं खुली लेकिन रीमा फिर से पेल के बल लुढ़ककर बेड से चिपक गयी | जब तक जितेश ने लंड पेलना नहीं शुरू किया था तब तक उसे कसकर बाहों में थामे रखा था लेकिन अब रीमा उसकी बाहों से आजाद होकर फिर से पेट के बल लेट गयी | जितेश का लंड अब हवा में सीधा तना हुआ था |

आखिर जितेश को उठना पड़ा | इस बार जितेश ने रीमा को अपनी बांहों में भरने की कोशिश नहीं की | बल्कि उसके पीछे उसके ऊपर आ गया | उसने रीमा के चुताड़ो के पीछे जांघो के पास दोनों तरफ अपने पैरो को मोड़कर उसके घुटने बेड पर टिका दिए | अब रीमा के उठे हुए चूतड़ और उसकी दरार घाटी बिलकुल उसकी आँखों के सामने थी | रीमा के चुताड़ो को फैलाकर जितेश ने सख्ती से अपने फूले हुए मोटे लंड को थामा और रीमा की पिछली सुरंग पर सटा दिया | उसके जोर लगाते ही उसके तगड़े लंड का फूला सुपाडा रीमा के मांसल नरम चुताड़ो के मांस में गायब हो गया | वो अभी भी किसी जल्दबाजी के मूड में नहीं था | पता नहीं शायद उसे कही डर था अगर रीमा जग गयी तो उसे गांड मारने से मना कर देगी |

लेकिन वो किसी भी हाल में गिरधारी के रीमा की गांड मारने के बाद पीछे नहीं रहना चाहता था | वह चाहता था जैसे गिरधारी ने रीमा की जमकर गांड मार कर जबरदस्कीत मजा लिया है वैस ही कुछ मजा वो भी लुटे | मर्द कितना भी समझदार हो लेकिन औरतो के बारे में सब मर्दों की राय एक जैसी ही होती है | एक बार जब कोई मर्द किसी औरत की जांघे खोल पाता है फिर वो उसे एक अगल नजरिये से ही देखता है | उसे औरत को चोदने में या चोदने के लिए पूछने में कोई झिझक नहीं होती | कई बार तो बिना मर्जी के ही उसे चोद डालता है, उसे लगता है आखिर उससे छिटक के ये जाएगी कहाँ | जितेश के साथ भी कुछ ऐसा ही मनोविज्ञान चल रहा था | जब तक उसने रीमा को नंगा सिर्फ देखा था तब तक वो उसे छूने से पहले भी पूछता था | उसकी चूत चूची देखने में हिचक रहा था | फिर जब उसे एक बार चोद लिया तो उसके अन्दर की वो सारी झिझक हिचक खतम हो गयी, वो समझ गया था रीमा को चोदना आसन है, ये बहुत आसानी से चुदने को राजी हो जाती है | फिर जब उसने गिरधारी को उसकी गांड पर ठोकरे लगाते देखा तब से उसका दिमाग भन्ना रहा है | उसने रीमा के बारे में ऐसा कुछ सोचा नहीं था लेकिन रीमा की हरकतों ने उसके दिमाग की नसे फाड़ दी | अब वो अपने घायल मन को इकठा कर उस हकीकत को अपने दिलो जहन में उतार रहा था की जो हुआ वही सच है हकीकत है लेकिन उसके अन्दर रीमा के जिस्म से बेरोकटोक खेलने की हिम्मत बढ़ गयी | अब उसे रीमा को चुने या चोदने के लिए उससे पूछने की जरुरत महसूस नहीं हो रही थी | बाकि मामलों में भले ही वो रीमा का ख्याल रखे और सवेदनशील रहे लेकिन चुदाई के मामले में रीमा की उन्मुकत्ता ने उसे एक खास केटेगरी में डाल दिया था | मर्दों की खास कटेगरी, एक नंबर की चुद्दकद | जितेश के लिए फिलहाल अभी रीमा का यही वजूद था, आगे चलकर भले ही उसके विचार बदल जाये | हर वो औरत जो अपने लिए सेक्स मांगती है उसे मर्द इसी केटेगरी में डाल देते है | जितेश भी कुछ अलग नहीं था | रोहित इस मामले में कुछ ज्यादा उदार था उसने रीमा की लेबलिंग नहीं की थी क्योंकि उसका अलग अलग औरतो के साथ एक लम्बा अनुभव था इसलिए या शायद वो रीमा से उतना गहरे से अटैच नहीं था या उसको लेकर सेंटीमेंटल नही था | वो बस रीमा जैसी थी उसे वैसे ही देखता था | उसको लेकर अपने दिमाग में कोई अलग इमेज नहीं गढ़ता था |

जितेश की जिंदगी में ज्यादा औरते आई नहीं और रीमा जैसी खूबसूरत तो बिलकुल नहीं | जितेश रीमा को लेकर सेंटीमेंटल हो गया था | वो इस तरह के माहौल में पला बढ़ा नहीं था जहाँ आदमी औरत कौन किसको चोद रहा है ये बात कोई मायने नहीं रखती हो | एक आदमी दो औरत , दो आदमी एक औरत ये सब उसके लेवल से बहुत ऊपर की बाते थी | भले ही उस वक्त वो रीमा को कुछ कह न पाया हो लेकिन उसके मन में मलाल तो था ही रीमा को गिरधारी के साथ शेयर करने का | यही मलाल उसे रीमा की सोते हुए गांड मारने पर मजबूर कर रहा था | वो भले ही रीमा के साथ सामान्य बनने की कोशिश कर रहा था लेकिन ये सब उसके लिए सामान्य नहीं था | उसकी ट्रेनिंग ऐसी थी की वो सब्र कर लेता था और अपने मन के भाव सामने नहीं आने देता था लेकिन रीमा उसके लिए पर्सनल हो गयी थी | वो उसके लिए सेंटीमेंटल हो गया था | यही भाव उसे इस वक्त रीमा की पिछली सुरंग में अपना लंड पेलने पर मजबूर कर रहा था | आखिर कोई कैसे रीमा के साथ वो कर सकता है जो उसने भी नहीं किया | शायद जितेश के अंदर भी यही असुरक्षा थी कि रीमा उसकी है तो कोई दूसरा कैसे मजा ले सकता है आखिर कैसे रीमा ने उसके लीचड़ नौकर को अपनी गांड मारने की इजाजत दे दी थी | उसे तो यह नहीं अच्छा लगा था हालांकि जितेश कुछ कर नहीं सकता था | इसलिए उसने कुछ कहा नहीं लेकिन अब सोती हुई रीमा की गांड मार रहा था |

जितेश ने अपने लंड पर जोर डाला | उसका लंड रीमा की गांड को चीरता हुआ अन्दर धंसने लगा | रीमा के जिस्म में धंसते मुसल लंड का दर्द फिर से जगने लगा | रीमा की गांड फिर से दर्द से सिसकने लगी | उसका ;लंड बस थोड़ा सा आगे बढ़ा था रीमा नीद में भी कसमसा कर रह गई थी शायद वो इतनी गहरी नींद में भी इस बात का एहसास कर गई थी कि उसके साथ कुछ गलत हो रहा है | उसके चेहरे पर दर्द की लकीरे उभर आई | जितेश का आधा लंड रीमा के चुताड़ो की दरार में गायब हो गया था | रीमा के अंतर्मन में कहीं एहसास हो गया था कि कोई नुकीली चीज उसे चीरती हुआ अन्दर धंस रही है | उसकी गांड अभी भी दर्द से भरी हुई थी भले ही अभी उसका शरीर ठंडा पड़ा हुआ था | जितेश जहाँ था वही थम गया | कुछ ही देर में रीमा सामान्य हो गई और फिर से उसकी सांसों की आवाजों से पता चलने लगा वह गहरी नींद में चली गई है जितेश ने अपने लंड को हल्का सा बाहर निकाला लेकिन उसका सुपारा तो रीमा की गांड के कसे छल्ले में अटक गया था | आगे जितेश ने हौले हौले कमर हिलाने में भलाई समझी | रीमा की कमर के ऊपर हल्के हल्के धक्के लगाने लगा था |

जितेश के धक्के अब आगे की तरफ बढ़ने लगे थे, रीमा कब तक गहरी नींद में सोती रहती जब उसके पीछे से कोई मुसल लंड उसके जिस्म में मुसल लंड पेल रहा था | जितेश का मोटा लंड रीमा को गांड के मुहाने को चीर अन्दर तक जा रहा था | आखिर कैसे न उसका जिस्म का अचेतन मन उसके चेतन मन को जगा देता | उसे भी एहसास हुआ, कुछ तो गड़बड़ है, आखिर उसके चुताड़ो में दर्द कैसा उभर रहा है , आखिर क्यों उसकी गांड का दर्द उसे फिर से सिसकने पर मजबूर किये दे रहा है | इधर जितेश था की अपनी सनक में अपनी जिद में रीमा की परवाह किये बिना उसके चुताड़ो को चीरता हुआ उसके जिस्म में घुसा जा रहा था | रीमा की कच्ची नीद टूट गयी जैसे ही उसकी आंख खुली है उसे एहसास हुआ उसके पूरे जिस्म का कोना कोना दर्द के मारे और थकावट से चूर चूर हो रहा है | ऊपर से उसकी गांड में दर्द भी हो रहा था और वह दर्द उसके चूतड़ों और पिंडलियों जांघो में तक महसूस हो रहा था | उसे आँख खुलते ही अहसास हो गया आखिर माजरा क्या है | जितेश उसके चूतड़ थामे अपनी कमर का पूरा जोर उसके चुताड़ो पर लगा रहा है | उसने जिदेस को अपने ऊपर पाया और उसके लंड को अपनी गांड में यह क्या है | आखिर जितेश कर क्उया रहा है बिना उसकी मर्सजी के बिना उसकी सहमती के आखिर जितेश उसके जिस्म में घुस कैसे सकता है | जितेश की तरफ गर्दन घुमाकर कर देखा जो एक हाथ से उसके चूतड़ को और एक हाथ से उसके कंधे को थामे उसके कानों पर अपनी गरम गरम सांसे छोड़ रहा था |
 
जितेश उसके चूतड़ थामे अपनी कमर का पूरा जोर उसके चुताड़ो पर लगा रहा है | उसने जिदेस को अपने ऊपर पाया और उसके लंड को अपनी गांड में यह क्या है | आखिर जितेश कर क्उया रहा है बिना उसकी मर्सजी के बिना उसकी सहमती के आखिर जितेश उसके जिस्म में घुस कैसे सकता है | जितेश की तरफ गर्दन घुमाकर कर देखा जो एक हाथ से उसके चूतड़ को और एक हाथ से उसके कंधे को थामे उसके कानों पर अपनी गरम गरम सांसे छोड़ रहा था |

रीमा हैरान परेशान, हाय जितेश तो मेरी गांड मार रहा है बिना मुझसे पूछे बिना मुझे बताये | आखिर ये हो क्या रहा है | क्या इसने भी मुझे रंडी ही बना दिया | रीमा ये क्या हो रहा है तुमारे साथ |

रीमा - जितेश यह क्या है |

जितेश - वही जो तुम चाहती थी |

रीमा गुस्से से - क्या चाहती थी, प्लीज निकालो इसे मुझे दर्द हो रहा है |

जितेश - वही जो तुम नीद में बडबडा रही थी, मुझे भींच कर अपनी तरफ खीच कर मांग रही थी |

रीमा - आह्ह्ह्हीईईईईईइ जितेश दुःख रहा है |

जितेश - मुझे माफ कर दो, लेकिन नीद में तुम यही तो मुझसे मांग रही थी |

रीमा - बकवास मत करो, प्लीज रुक जावो, निकालो अपने लंड को मुझे दुःख रहा है |

जितेश ने कमर हिलानी बंद नहीं करी | रीमा की गांड सच में दुःख रही थी |

रीमा - जितेश प्लीज .............रुक जावो मान जावो ....................बहुत दुःख रहा है |

जितेश नहीं रुका | उसे पता था अभी रुक गया तो वो रीमा की गांड फिर नहीं मार पायेगा | रीमा अपनी बेबसी लाचारी पर रोने लगी |

रीमा रोते हुए - कब मैंने कहा तुमसे ये करने के लिए |

जितेश - झूठ मत बोलो |

रीमा - तो अब रुकने को कह रही हूँ मान जावो | आआआआअह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है |

उसकी गांड सच में किसी नए जख्म की तरह दुःख रही थी | उसकी आंखे आंसुओं से डबडबा आई | आखिर वो क्या करे, कैसे रोके | लड़ भी तो नहीं सकती, हाथा पाई करे क्या, उसमे भी तो नहीं जीतेगी | आखिर जिसको अपना जिस्म सौंप दिया उससे हाथा पाई का क्या मतलब है | दर्द से सिसकती रीमा जितेश ने नीचे बिस्तर से चिपकी हुई थी |

आखिर जितेश को अपने वासना के नशे में रीमा का ख्याल आया | रीमा की आंसू से भरी आँखे देखा कम से कम उसके अन्दर उससे झूठ बोलने की ग्लानी तो आई |

आखिर वो रीमा से झूठ कैसे बोल सकता है | उसे कम से कम सच तो बताना ही चाहिए |

जितेश - मुझे माफ़ कर दो रीमा बेबी मुझसे रहा नहीं गया था | बहुत कोशिश करी खुद को रोकने की लेकिन तुमारे जिस्म ने मुझे पागल बना दिया | मैंने तुमसे झूठ बोला था की तुमने नीद में अपनी गांड मारने के लिए कहा | प्लीज बेबी मुझे माफ़ कर दो | मुझसे खुद पर काबू नहीं हो रहा था | गिरधारी जब तुम्हारी गांड मार रहा था तो उसे देख मैं पागल हो गया था | उसे देखकर मुझसे रुका नहीं गया |

रीमा - जितेश तुमने मुझसे झूठ भी बोला | आआआआह्ह ओह गॉड ये दुःख रहा है |

जितेश - बेबी बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो , फिर सब ठीक हो जायेगा | मुझे पता है तुम्हे तकलीफ हो रही है लेकिन जितना खुद को रोक सकता था रोकने की कोशिश करी मैंने |

रीमा दर्द सिसकते हुए - आआआऐईईईईइरीईईईई जितेश तुम्हें पता है मेरी गांड कितना दर्द कर रही है |

जितेश - हां बेबी मैं जानता हूं लेकिन गिरधारी जो तुम्हारी गांड मार रहा था तो मुझे लग रहा था शायद कुछ अधूरा रह गया है मैं उसे ही पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं |

रीमा - ओहोहोहो जितेश तुम्हें एहसास भी है मुझे कितना तीखा दर्द हो रहा है, कितना दुःख रहा है |

जितेश - हां जानता हूं बेबी अब इसके बाद में कभी दर्द नहीं होगा | मैं तुमारी गांड के छल्ले को पूरी तरह से खोल दूंगा |

रीमा - आआअईईई रिरिरिरिरिर्नरी नहीं जितेश तुम मेरी पहले से चिरी गांड के जख्मो को और गहरा कर रहे हो | तुम एक औरत के दर्द को कभी नहीं समझ पाओगे |

जितेश - ऐसी बात नहीं है |

जितेश की लगातार कमर हिल रही थी |

रीमा - तुम मर्द हो बस पेलना जानते हो, कितना दर्द हो रहा है ऊहोहोहोहो ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़ गॉड गॉड माआआअय्य्यीईईईईरेरेरेरे |

जितेश - बेबी बस कुछ सेर और बर्दाश्त कर लो |

रीमा - तुम मर्द कुछ नहीं समझते तुम्हे लंड के पेलने से मतलब है , किसी की दुखती गांड का दर्द क्या जानो |

जितेश - अब जो हो गया सो हो गया प्लीज कुछ देर बर्दाश्त करो न | मैं क्या करूं तुमने मुझे पागल कर दिया है तुमने मुझे अपना दीवाना बना लिया है | जब मैंने गिरधारी को तुम्हारी गांड को इस तरह से बेशर्मी से लंड पेलते हुए देखा तो मुझे बहुत दुख हुआ था | इसीलिए मैं प्यार से तुम्हारी गांड मारना चाहता हूं और तुम्हें गांड मारने का सुख देना चाहता हूं जिसकी तुम्हें शायद तलाश थी बेबी |

रीमा - नहीं जितेश मेरी गांड अभी बहुत दुख रही है प्लीज अपना लंड बाहर निकाल लो बेबी |

जितेश - रीमा बेबी अब मैं लंड को तो बाहर नहीं निकाल सकता प्लीज थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो......... तुम्हें भी बड़ा मजा आएगा | मैंने इसीलिए ढेर सारी क्रीम तुम्हारी गांड में उड़ेल दी है ताकि तुम्हें किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो | तुमारे गांड के छल्ले को तो किसी ने किसी दिन फैलना ही था | वर्ना जब ही यदा कदा लंड जायेगा तो ऐसे ही दुखेगी | जब लगातार दो बार मुसल लंड की ठोकरें पड़ेगी तो तुमारी गांड हमेशा के लिए हर तरह का लंड को लेने की आदी हो जाएगी | फिर चाहे जीतनी गाड़ मरवाना कभी नहीं दुखेगी |

रीमा - नहीं जितेश अभी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा है, बहुत दर्द कर रहा है प्लीज मत करो |

जितेश ने और गहराई तक लंड पेलते हुआ - जानता हूं बेबी ....... बस थोड़ी देर और बर्दाश्त कर लो उसके बाद में सब ठीक हो जाएगा, बस थोड़ा सा |

रीमा - नहीं जितेश प्लीज बहुत दर्द हो रहा है प्लीज रुक जाओ |

जितेश - बेबी मेरी जान प्लीज बस कुछ देर और बस कुछ देर और दर्द भरी गांड में लंड ले लो , बर्दाश्त कर लो उसके बाद में तुम अपनी गांड में चाहे जितना बड़ा मोटा लंड लेना हो ले लेना बिल्कुल दर्द नहीं होगा | ये बस एक बार की तकलीफ है, एक बार अपनी गांड पूरी तरह से रवां हो जाने दो बस इसके बाद तुम्हारी गांड में कभी कोई तकलीफ नहीं होगी |

रीमा - अभी मुझसे बर्दाश्त के बाहर है प्लीज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज् जितेश हहह्हहहह्हहाईईईईईईईईई रेरेरेरेरेरेरेरे |
 
जितेश हालात को सँभालने की कोशिश बहुत कर रहा था लेकिन रीमा की हालत देखकर अब उसे भी लगने लगा था उसे थमना न पड़ जाए | जितेश ने आखिरी कोशिश करी - बेबी बस एक बार बर्दास्त कर लो, पहली बार जब चूत चुदती है तो उसके फटने पर भी दर्द होता है न | उसके बाद जिंदगी भर के मजे | बेबी मै बोल रहा हूँ थोड़ी सी हिम्मत रखो, बस एक बार तुमारी गांड के कपाट खुल जाये अच्छे से, फिर मनचाहा लंड घोटती रहना | तुम्हे पता है बेबी आर्मी में हमें पहले छ महीने इतना रगड़ के ट्रेनिंग करायी जाती है पूछो मत | लगता है अब निपट गए तब निपट गए | हर दिन किसी नरक की तरह होता है, उन पहले 6 महीनो में हमें रगड़ कर इतना मजबूत कर देते है की पूछो मत | वो शुरुआत की ट्रेनिंग इतनी तकलीफदेह होती है की बर्दाश्त करना मुश्किल होता है | पता है जब हम यहाँ से जाते है तो हमारा शरीर उतना कठिन मेहनत का आदि नहीं होता इसलिए ज्यादा तकलीफ होती है | एक बार वो ट्रेनिंग कम्पलीट हो गयी फिर जिंदगी भर मुश्किलों से जूझने के काम आती है | समझ लो तुमारी गांड की आर्मी स्टाइल ट्रेनिंग हो रही है | जितना ज्यादा दर्द से गुजर अपनी गांड मसलाओगी, उतना ही आगे चलकर तुमारी गांड लंड लेने के लिए मजबूत हो जाएगी |

जितेश - एक बार सह लो इसके बाद तुम्हे गांड मरवाते कभी कोई तकलीफ नहीं होगी, एक बार तुमारी गांड का छल्ला लंड से रगड़ खाकर मजबूत हो गया फिर क्या लंड क्या मुसल लंड सब गपागप लील लोगी | एक बार लंड से रगड़ खाकर अपने गांड के छल्ले को फैलने तो दो ढंग से | फिर तुम मेरा क्या मेरे जैसे दो दो लंड एक साथ घोंट लेना अपनी गांड में |

रीमा दर्द से बिलखती हुई - तुम समझ क्यों नहीं रहे बेबी बहुत दर्द हो रहा है, बहुत दुःख रही है मेरी गांड, पहले से जख्मी गांड की और दुर्गति मत करो प्लीज | प्लीज रुक जावो |

जितेश भी वासना के नशे में बुरी तरह डूबा हुआ था - बेबी बस यह तुम्हारे दर्द की आखिरी घड़ी है उसके बाद तुम्हें कभी कोई दर्द नहीं होगा, बस एक बार अच्छे से मरवा लो....... यह जो भी दर्द हो रहा है बस यह समझ लो तुम्हारे जिंदगी का आखरी दर्द है इसके बाद तुम्हें गांड मरवाने में कभी दर्द नहीं होगा | बेबी बस एक बार.....मेरी प्यारी बेबी स्वीट बेबी प्लीज |

रीमा बिलखती हुई - बेबी मर जाऊंगी......... बेबी बहुत दुख रहा है प्लीज देखो न बहुत दुख रहा है |

जितेश - बस कुछ देर और ...... बेबी थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो नहीं पता है ना तुमने इतना मोटा लंड घोंट लिया है कुछ देर इसे अपनी गांड की मालिश करने दो उसके बाद तुम्हारी कोमल गांड की सारी मांसपेशियां की जकड़न ये दूर कर देगा | तुमारे जिद्दी गांड के छल्ले को रबर की तरह नरम बना रहा हूँ | फिर तुमारी गांड रबर की तरह नरम फ़ैलने वाली और मजबूत हो जाएगी | फिर तुम्हारी गांड किसी भी मोटे से मोटे खूंटे जैसे लंड को लेने के लिए भी पूरी तरह से तैयार हो जाएगी |

रीमा की नाजुक गांड का तीखा दर्द अब बर्दाश्त से बाहर था - कैसे बर्दाश्त करूं इस दर्द को ..... बहुत तकलीफ हो रही है, लग रहा है पहले किसी ने नस्तर चला दिया हो गांड के अन्दर और अब तुम अपने मोटे मुसल से उस कटी फटी गांड को कूट रहे हो | नहीं मै मर जाउंगी जितेश प्लीज रूक जावो .....................ह्हाआआआआआआआआआआआआआ ईईईईईईईइ माआआआआआआ रीईईईईईईईईईए |

रीमा ने तकिये में मुहँ धकेल दिया | जितेश दुविधा में फंस गया, क्या करे, एक तरफ दर्द से तड़पती रीमा और दूसरी तरफ उसकी गांड में धंसा उसका फूला हुआ मोटा लंड | बीच मझधार में जब लंड को थमना पड़ता है तो बहुत खराब लगता है | जितेश हर हाल में रीमा की गांड ही मारना चाहता था | वो भी एक नंबर का जिद्दी था | कुछ देर चूत में डाल कर चोद सकता था लेकिन उसकी भी जिद थी, जब रीमा गिरधारी से अपनी गांड फड़वा सकती है तो फिर उसके लिए थोड़ी दी तकलीफ नहीं बर्दाश्त कर सकती |

जितेश - मै समझ सकता हूँ |

रीमा बिफर पड़ी - तुम कुछ नहीं समझते, तुम्हे सिर्फ अपनी पड़ी है |

जितेश को भी लगा रीमा कुछ ज्यादा ही नाटक कर रही है - ऐसा नहीं है |

रीमा उसी रौ में - तुम्हे मेरी कोई परवाह नहीं, यहाँ दर्द से पूरी गांड रो रही है और तुम उसे कुचले जा रहे हो कुचले जा रहे हो |

जितेश - बकवास मत करो .........परवाह न होती तो इतना आराम से करता, तुमारी गांड को गिरधारी ने कुचला है कूटा है जानवरों की तरह चोदा है, मैंने नहीं | ये दर्द उसका दिया हुआ है मेरा नहीं | क्यों बुलाया था उसे अपने पीछे, क्या जरुरत थी उसकी | तुमारी वो मुराद क्या मै नहीं पूरी कर सकता था | मुझे पता है तुम्हे बहुत तकलीफ हो रही क्योंकि तुमने ही उसे अपनी गांड मारने के लिए बुलाया हुआ था | ......................................................कोई बात नहीं बेबी कभी-कभी दर्द और तकलीफ भी बहुत मजा देते हैं |

रीमा भी ताव में - तुम कुछ नहीं जानते मेरे बारे, मुझे पर रौब झाड़ना बंद करो |

जितेश - मै तुम्हे अच्छी तरह से जान गया हूँ | तुम्हे लगता है परवाह नहीं तुमारी | मुझे ही दुनिया भर के नखरे दिखा रही हो क्यूंकि मै नखरे झेल रहा हूँ, गिरधारी फ्री फंड में तुमारी गांड बुरी तरह कूट के चला गया क्या उखाड़ लिया उसका, उसके दिए दर्द को मै ही तो सहला रहा हूँ |

रीमा - हाँ तो बुला लिया था मेरी मर्जी ....,मेरा जिस्म है मुझे लगा उसे बुलाना चाहिए तो बुला लिया | मेरी मर्जी ने उसने मेरी गांड में लंड घुसेड़ा था तुमारी तरह चोर बनकर सोते समय नहीं |

जितेश - मै चोर हूँ |

रीमा - नहीं असल में तुम जलनखोर हो | मैंने गिरधारी को अपनी गांड सौंप दी ये तुमसे बर्दास्त नहीं हुआ | तुमारे मर्दानगी को ठेस पहुची | इसलिए सोते हुए मेरी गांड मार कर गिरधारी का मुकाबला कर रहे थे क्योंकि तुम्हे पता था अपने होशो हवास में तुम्हे मै ऐसा करने नहीं दूँगी |

जितेश भी उसी ताव में बोल गया - हाँ मुझे बुरा लगा, और लगना भी चाहिए | मुझे तुमारी परवाह है, मै तुमसे प्यार करता हूँ |

रीमा - झूठ सरासर झूठ , कितनी परवाह करते हो वो तो साफ़ दिख रहा है |

जितेश - अच्छा अब मै झूठा भी हो गया, तुम राह चलते किसी से भी गांड मरवा लो तो कुछ नहीं, मै अपनी दिल की ख्वाइश का इजहार भी कर दू तो झूठा, लापरवाह , हवस का दरिंदा |

रीमा - मैंने ये तो नहीं कहा |

जितेश - मतलब तो यही था न |

रीमा - तुम होते कौन हो मुझ पर इस तरह से हुकुम चलाने वाले | मै तुमारी गुलाम नहीं हूँ, मेरी जो मर्जी होगी वो करूंगी, तुम हो कौन तुमारा मेरा रिश्ता क्या है जो इतना हक़ जता रहे हो |

जितेश को ये बात चुभ गयी - ठीक है मै कोई नहीं, अजनबी हूँ फिर तुमारी परवाह क्यों करू, जैसा करोगी वैसा भुगातोगी |

उसने रीमा की कमर ऊपर को उचकाते हुए - अपने चूतड़ ऊपर को उठावो | रीमा को पता था अगर वो उसकी बात नहीं मानती तो जितेश जबरदस्ती करता |
 
गुस्से और दर्द से भरी रीमा ने घुटनों के बल पर बिस्तर पर बैठ गई और उसने अपनी गांड को हवा में उड़ा दिया था | अब जितेश रीमा के ऊपर आ गया था और उसकी पीठ झुककर किसी कुत्ते की तरह उसकी गांड में लंड ठूंस दिया | जितेश ने रीमा के चूतड़ को थामा और अपना लंड उसकी गांड में गहराई तक उतार दिया | जितेश कुत्ते की तरह उसे कुतिया बनाकर उसकी गांड को मारने लगा था | रीमा की आंखों में सचमुच में आंसू थे आखिर रीमा कहां से कहां पहुंच गई | उसके अंदर की वासनाओं ने आज उसे सचमुच का जानवर बना दिया था | क्या वह सचमुच में इस तरह से कुत्तिया बन कर के किसी अनजान आदमी से अपनी गांड मरवाना चाहती थी | उसकी गांड की सुरंग की गहराइयों में एक अनजाने आदमी का मुसल लंड अंदर तक उसकी गहराइयों को न केवल नाप रहा था बस उसे मसल रहा था और कुचल रहा था | अपने बेतहाशा ठोकरों से उसके पूरे वजूद को हिलाए हुए पड़ा था | रीमा को सचमुच में अंदर से ऐसा लगा जैसे रो पड़ेगी लेकिन जितेश की ठोकरें कम ही नहीं हो रही थी | वह तो दनादन बढ़ती जा रही थी | जैसे-जैसे रीना का गांड का छेद नरम होकर फ़ैल गया था पूरी तरह से खुल गया था वैसे-वैसे जितेश का लंड के अन्दर जाने की स्पीड भी बढ़ गई थी | अब तो बिल्कुल फरारी कार की टॉप स्पीड के अंदाज में तेजी से सटासट रीमा की गांड में लंड पेला रहा था | उसके लंड की ठोकरे के साथ में ऐसा लग रहा था जैसे कोई रीमा से उसका वजूद...... उसका अस्तित्व उससे कोई छीन कर के लिए जा रहा हो | रीमा एक जिंदा लाश की तरह बन गई थी | कोई भी आ सकता है उसे लूट सकता है और उसको लूट भी रहा था | आखिर उसका अपना कोई वजूद नहीं है क्या वह बस अपनी वासना की दासी बनकर रह गई है और इसी तरह से अनजान लोगों के द्वारा अपने जिस्म को लूटने देना उसकी नियति बन गई है |अभी सुबह तक तो आपकी जो मर्जी से चुद रही थी तो अब किसी दूसरे की मर्जी से चोदने में क्या अंतर है | इस अंतर को नहीं समझ पा रही थी उसे लग रहा था जब तक वह अपनी ख्वाहिशों से चुद रही है तब तक उसका खुद का अस्तित्व बना हुआ था लेकिन अब उसकी बिना ख्वाहिश के भी उसे कोई चोद रहा है तो उसे ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने उसका वजूद ही खत्म कर दिया हो | रीमा हीनता के बहुत गहरे अवसाद में थी और उसकी आंखें आंसुओं से भरी हुई थी | जितेश अपनी वासना में अँधा होकर उसके आंसुओं को नहीं देख पा रहा था | जितेश के अपने चौड़े मांसल चूतड़ों पर पड़ती उसके मुसल लंड की ठोकरों से रीमा कराह रही थी |

उसके दर्द में वासना कम और दर्द ज्यादा था | वह दर्द शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ उससे ज्यादा मानसिक पीड़ा का था| जितेश उसके साथ ऐसा कैसे कर सकता है | वासना के रौ में बहकर करके मैंने जो गलती कर दी क्या जितेश ने उसे हकीकत मान लिया | आखिर जितेश उसे इस तरह इस हद तक गिरा हुआ कैसे समझ सकता है क्या मैं बस जितेश की लौंडी बनकर रह गई हैं जब चाहे जिस तरह से इस्तेमाल कर ले , उसके मन में मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे जिस्म के अंदर घुसने का ख्याल भी कैसे आ गया आखिर जितेश के जानवर बन गया है क्या .. वासना ने उसे भी पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है क्सया रीमा कुछ भी समझ नहीं पा रही थी | वह बस नीचे की तरफ झुकी हुई बिस्तर में अपना मुंह छुपाए हुए दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी जो लगातार उसे जितेश के लंड से उसकी गांड पर पड़ने वाली ठोकरों से मिल रहा था |

रीमा - आआआआआआआआह्हीईईईईईईईईईइ माआआआआआआआआईईईईईईईईई रीईईईईईईईईईए चीईईईईएरररररररररर

दादादादादादादाद्द्लालालालालाल |

रीमा - धीरेरेरेरेरेरेर करो जितेश, बहुत दर्द हो रहा है |

रीमा की कराहती आवाज से जितेश को और जोश आ गया | वो रीमा की दुखती गांड को बुरी तरह चीरने लगा |

रीमा हर धक्के के साथ - जितेश मत करो बहुत दुःख रहा, आआह्ह्ह प्लीज रुको मत करो आआऐईईईईईईईईईई माआआआ दर्द्द्दद्द्द्दद हो रहा है |

रीमा - आःह्ह्ह जितेश नहीं प्लीज जितेश नहीं रुको नहीं नहीं रुको प्लीज दर्द हो रहा है प्लीज |

इधर जितेश गुस्से में दनादन कमर हिला रहा था | रीमा ने उसे गुस्सा दिला दिया था | उसने मन में ठान ली थी अब और रीमा के नखरे बर्दाश्त नहीं करेगा | बिलखती है तो बिलखने दो, रोती है तो रोने दो, सिसकती है तो सिसकने दो, कराहती है तो कराहे, चीखती है तो चीखे वो नहीं रुकेगा | जितेश ने रीमा के चुताड़ो को उचका दिया और सटासट उसकी गांड में लंड पेलने लगा |

रीमा भी समझ गयी अब जितेश रुकने वाला नहीं है | उसे भीषण पीड़ा के दौर से गुजरना ही होगा | वो जितेश के बाहुबल के आगे कही नहीं टिकेगी | प्रतिरोध करे भी तो कैसे, कहाँ से लाये इतना नैतिक बल जो उसे जितेश की आक्रामक वासना के खिलाफ उसे खड़ा कर सके | उसके मन में किसी तरह की कोई खुशी नहीं थी उसकी आंखों में आंसू थे उसके साथ जो भी हो रहा था पता नहीं वह उसकी वासना की लाचारी थी या बेबसी थी लेकिन उसका मन इसकी गवाही नहीं दे रहा था लेकिन उसका जिस्म और परिस्थितियां कुछ ऐसी थी कि उसे वह सब करना पड़ रहा था | कहाँ वह खुशी-खुशी अपने अंदर की वासनाओं को पूर्ति करना चाहती थी लेकिन यहां अब वह अपनी वासनाओं की दासी बन गई थी, उसकी वासना ने उसे अपने जाल में फंसा लिया था | अब वह चाहकर भी अपने आसपास होने वाली चीजों को रोक नहीं सकती थी आखिर किस मुंह से जितेश को रोके प्रतिरोध करे |

रीमा जितेश के सामने गिडगिडाते हुए - प्लीज जितेश ऐसा मत करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है

जितेश- कोई बात नहीं रीमा बेबी मैं आराम से करूंगा |

रीमा - नहीं जितेश प्लीज प्लीज रुक जाओ सच में मुझे बहुत दर्द हो रहा है

जितेश - मैडम थोड़ा बहुत दर्द तो होगा ही थोड़ा बर्दाश्त कर लो ना .....|

रीमा कराहती हुई मिन्नतें कर रही थी - प्लीज रुक जाओ ना जितेश.... प्लीज नहीं...... जितेश ऐसा मत करो .......प्लीज मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं तुम मेरी बात क्यों नहीं मान रहे हो...... प्लीज मुझे दर्द हो रहा है बहुत दर्द हो रहा है |

जितेश भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ था - मैडम दर्द तो तब भी हो रहा था जब गिरधारी आपकी गांड मार रहा था तब आपने उसे क्यों नहीं रोका प्लीज थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो बस इतनी देर में हो जाएगा |

रीमा इनकार करती हुए - नहीं जितेश प्लीज अपना लंड बाहर निकाल लो मेरी गांड फट जाएगी मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं ...........प्लीज जितेश मेरी बात मान लो ..........प्लीज तुम मेरा क्यों रेप करने पर तुले हुए हो मैं नहीं चाहती तुम मेरी गांड मारो मुझे बहुत तकलीफ हो रही है , बहुत दुःख रही है |

जितेश हलके हलके धक्के लगाता हुआ - तकलीफ तो हो रही है तुमको मैं तो बस थोड़ा सा ही तो........... मैं थोड़ी सी मोहलत मांग रहा हूं.............थोड़ा और बर्दाश्त कर लो .............. इतनी देर गिरधारी से गांड मरवाई है थोड़ा और बर्दाश्त कर लो |

जितेश अपनी कमर हौले हौले हिलाता हुआ - तब तुमको तकलीफ नहीं हो रही थी मैंने देखा कितनी बेतहाशा वो तुमारे चूतड़ों पर ठोकरे मार रहा था और अपना लंड पूरा का पूरा तुमारी गांड में घुसेड़े दे रहा था | किस तरह से उसने तुमारी गांड का कचूमर निकाल दिया था | मैंने अपनी आंखों से देखा है | उसकी ठोकर इतनी तेज होती थी कि मेरा लंड अपने आप ही तुमारी चूत में घुस जाता था |

फिर मेरे हल्के हल्के झटकों से आपको क्या दिक्कत है मैडम थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो बस मेरी भी इच्छा है मेरी भी कुछ तो तमन्ना है मेरी छोटी सी तमन्ना ही तो थी और वह पूरी हो जाएगी |

जितेश अब वासना की गर्मी में नहाने लगा था - आआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह मैडम कितनी कसी हुई आपकी गांड है | गिरधारी के द्वारा फ़ैलाने के बाद भी आपको छल्ला तो मानने को तैयार ही नहीं है | मेरे लंड की खाल को बिल्कुल नोच के रखे दे रहा है इतनी कसी हुई गांड है आपकी | मेरा तो दम निकला जा रहा है आपकी गांड में लंड पेलने में |

रीमा को भी पता था जितेश नहीं मानेगा - प्लीज जितेश मान जाओ तुम मुझे बहुत तकलीफ दे रहे हो मेरी गांड बहुत दर्द हो रहा है मैं मर जाऊंगी प्लीज ऐसा मत करो |
 
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