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Guest
जब उनका लंच आ गया तो तीनों ने एक साथ डाइनिंग टेबल पर बैठ कर साथ में ही खाना खाया. उस दौरान भी विजय और लोकेश बिलकुल नोर्मल बातें कर रहे थे. हमेशा की तरह. सुरभि को ये समझ ही नहीं आ रहा था कि ये चल क्या रहा था.
अचानक से लोकेश ने अजीब सी बात पूछी विजय को. “और सुनाओ,…कोई हॉट आइटम मिली क्या मुंबई में? सुना है वहाँ कि लड़कियाँ बड़ी मस्त हैं.”
“मैं वहाँ काम से गया था, लोकेश…कोई डेट पर थोड़े ही,” विजय झेंपते हुए बोला और हंस दिया.
“कभी कभी थोड़ी मस्ती भी करनी चाहिए, यार. अच्छा…सच बता... सारा दिन बस काम ही किया या फिर अपनी बीवी को इमप्रेस करने के लिए बोल रहा है?” लोकेश बोला.
विजय उसकी बात पर बस हँस दिया, कहा कुछ भी नहीं.
सुरभि बड़ी उलझन में थी. वो बार बार विजय के मन की थाह लेने की कोशिश कर रही थी पर उसे कुछ भी पता नहीं चल रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है.
लंच के बाद लोकेश अपने कमरे में चला गया. सुरभि और विजय दोनो ऊपर अपने बेडरूम में आ गए.
दरवाज़ा बंद करने के बाद विजय ने जैसे ही अपने कमरे की हालत देखी और अपने अस्त व्यस्त बिस्तर को देखा तो सब समझ गया कि यहाँ उसके पीछे से क्या चल रहा था.
“अच्छा…तो ये चल रहा था यहाँ. लोकेश यहीं था ना सुरभि?” विजय बोला.
सुरभि को समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दे. इसलिए उसने चुप रहना ही मुनासिब समझा.
“और तुम भी यहाँ उसके साथ थी ना...? बोलो... तुम दोनो इस बिस्तर पर साथ थे ना?
“विजय वो मैं….मैं…आइ एम वेरी सॉरी…” सुरभि के मुँह से शब्द बाहर ही नहीं निकल रहे थे इसलिए वो इतना बोलकर ही चुप हो गई.
“मुझे पहले से ही पता था कि एक ना एक दिन ये ज़रूर होगा…” विजय ने बैड की तरफ़ बढ़ते हुए कहा.
“तुम कैसे जानते थे…” सुरभि ने लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा.
“बस, मैं जानता था,” विजय ने बैड पर लेटते हुए कहा,
सुरभि चुपचाप नज़रें झुकाए दूर ही खड़ी रही.
“अच्छा… ये बताओ कि उसने तुम्हारे साथ कितनी बार किया?”
सुरभि को बड़ा ही अजीब लग रहा था कि वो ये क्या पूछ रहा था. वो असमंजस में पड़ गई कि क्या कहे. थोड़ी सी हिम्मत कर के उसने कहा, “बस, एक बार…”
“बस एक बार…? मुझसे कुछ मत छुपाओ सुरभि. इधर आओ मेरे पास और खुल के बताओ पूरी कहानी कि ये सब कैसे हुआ,” विजय ने बैड पे हाथ मार कर उसे अपने पास बुलाते हुए कहा.
वो झिझकते हुए उसके पास जा कर बैड पर बैठ गई और बोली, “क्यों जानना चाहते हो तुम ये सब... रहने दो. तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा.”
“मुझे क्या अच्छा लगेगा क्या नहीं तुम मुझ पर छोड़ दो. मैं सच जानना चाहता हूँ. बताओ कि ये सब कुछ कैसे हुआ…”
अचानक से लोकेश ने अजीब सी बात पूछी विजय को. “और सुनाओ,…कोई हॉट आइटम मिली क्या मुंबई में? सुना है वहाँ कि लड़कियाँ बड़ी मस्त हैं.”
“मैं वहाँ काम से गया था, लोकेश…कोई डेट पर थोड़े ही,” विजय झेंपते हुए बोला और हंस दिया.
“कभी कभी थोड़ी मस्ती भी करनी चाहिए, यार. अच्छा…सच बता... सारा दिन बस काम ही किया या फिर अपनी बीवी को इमप्रेस करने के लिए बोल रहा है?” लोकेश बोला.
विजय उसकी बात पर बस हँस दिया, कहा कुछ भी नहीं.
सुरभि बड़ी उलझन में थी. वो बार बार विजय के मन की थाह लेने की कोशिश कर रही थी पर उसे कुछ भी पता नहीं चल रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है.
लंच के बाद लोकेश अपने कमरे में चला गया. सुरभि और विजय दोनो ऊपर अपने बेडरूम में आ गए.
दरवाज़ा बंद करने के बाद विजय ने जैसे ही अपने कमरे की हालत देखी और अपने अस्त व्यस्त बिस्तर को देखा तो सब समझ गया कि यहाँ उसके पीछे से क्या चल रहा था.
“अच्छा…तो ये चल रहा था यहाँ. लोकेश यहीं था ना सुरभि?” विजय बोला.
सुरभि को समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दे. इसलिए उसने चुप रहना ही मुनासिब समझा.
“और तुम भी यहाँ उसके साथ थी ना...? बोलो... तुम दोनो इस बिस्तर पर साथ थे ना?
“विजय वो मैं….मैं…आइ एम वेरी सॉरी…” सुरभि के मुँह से शब्द बाहर ही नहीं निकल रहे थे इसलिए वो इतना बोलकर ही चुप हो गई.
“मुझे पहले से ही पता था कि एक ना एक दिन ये ज़रूर होगा…” विजय ने बैड की तरफ़ बढ़ते हुए कहा.
“तुम कैसे जानते थे…” सुरभि ने लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा.
“बस, मैं जानता था,” विजय ने बैड पर लेटते हुए कहा,
सुरभि चुपचाप नज़रें झुकाए दूर ही खड़ी रही.
“अच्छा… ये बताओ कि उसने तुम्हारे साथ कितनी बार किया?”
सुरभि को बड़ा ही अजीब लग रहा था कि वो ये क्या पूछ रहा था. वो असमंजस में पड़ गई कि क्या कहे. थोड़ी सी हिम्मत कर के उसने कहा, “बस, एक बार…”
“बस एक बार…? मुझसे कुछ मत छुपाओ सुरभि. इधर आओ मेरे पास और खुल के बताओ पूरी कहानी कि ये सब कैसे हुआ,” विजय ने बैड पे हाथ मार कर उसे अपने पास बुलाते हुए कहा.
वो झिझकते हुए उसके पास जा कर बैड पर बैठ गई और बोली, “क्यों जानना चाहते हो तुम ये सब... रहने दो. तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा.”
“मुझे क्या अच्छा लगेगा क्या नहीं तुम मुझ पर छोड़ दो. मैं सच जानना चाहता हूँ. बताओ कि ये सब कुछ कैसे हुआ…”