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Adultery Hawas ke ghulam ( हवस के गुलाम )

अंजलि: शरमाते हुए नीचे देखती है.. उसे बोलने के अलावा और कुछ समझ नहीं आता...

अंजलि: चाचा आप मेरे पास तो आइए... मुझे आपका वो पेनिस चाहिए...

और बुरी तरह से शरमाने लग जाती है..

सलीम: वो क्या होता है...

अंजलि: नीचे देखते हुए समझ जाती है कि सलीम उसे वल्गर वर्ड यूज़ कर वाना चाहता है..

अंजलि: चाचा मुझे आपका लंड चाहिए.

सलीम : तो ऐसे माँग ना रंडी...

अंजलि अपने लिए रंडी शब्द सुन कर सुन्न रह जाती है...

सलीम: तो लेना अब किसका इंतजार कर रही है...

अंजलि सामने देखती है तो उसके दिल की धड़कन किसी ट्रेन की तरह चल रही थी... उसके सामने एक काले रंग का विकराल हथियार था...

अंजलि: ओह माइ गॉड ....... ये ये क्या है..

सलीम: मेरा लंड है दिख नहीं रहा क्या...

अंजलि के मूह से अचानक निकल जाता है...

अंजलि: वो तो है लेकिन इतना बड़ा और मोटा... ये मेरे अंदर कैसे जाएगा...

सलीम ज़ोर से हंस देता है...

सलीम: तुझे इसे चूत में नहीं लेना है ना....

अंजलि एक दम से सलीम की बात सुनकर शरमा जाती है..

और साथ ही सोचने लगती है इसका तो देव से कहीं बहुत ज़्यादा बड़ा है कम से काम 4 या 4.5 इंच...

सलीम: चल शुरू होज़ा...

अंजलि सलीम के लंड को अपने कंपकँपाते हुए हाथो से पकड़ लेती है... उसके दिल की धड़कन अब इस वक़्त सलीम खुद सुन सकता था... इतनी तेज थी..

अभी मुश्किल से 10 या 20 सेकेंड ही हुए थे की सलीम ने कहा कि

सलीम: अब क्या इसे हिलाती रहे गी या अपनी चूत का रास्ता भी दिखाएगी...

 
अंजलि: अचानक से सलीम के कहने से डर जाती है और उसके लंड को छोड़ देती है...

सलीम: वापस पकड़ इसे...

अंजलि: फिर से लंड पकड़ लेती है..

अंजलि: आप यूँ बार बार डराते क्यूँ हो मुझे...

सलीम: तो तू एक बार में कहना क्यूँ नहीं मानती कि तू मुझसे प्यार करती है...

अंजलि: इस से क्या फ़र्क पड़ता है..

सलीम: इसे अपनी चूत पर लगा...

अंजलि डरती हुई सलीम के लंड को अपनी चूत के मूह के पास ले जाती है...

तभी सलीम एक धक्का मारता है... सलीम के लंड का टोपा अंजलि की चूत के मूह को लग जाता है.

बस ये इतना करना था कि अंजलि की चूत पानी पानी हो जाती है...

अंजलि के मूह से एक आह भी निकल जाती है..

अंजलि: आवाज़ .. हम्म्म मेने कहा था ना अंदर मत डालना..

सलीम: तेरी चूत को किस कर रहा है मेरा लंड देख अंदर नहीं है...

अंजलि : अचानक से नीचे अपनी चूत देखती है और शरमा जाती है...

सलीम: अब मेरी तीसरी शर्त सुन...

अंजलि सलीम की ओर देखती है...

सलीम: मेरे लंड को अपनी चूत से घिस जब तक कि तेरा पानी नहीं निकल जाता ...

अंजलि : चुप चाप सलीम के लंड को देखने लग जाती है...\

सलीम: चल जाने दे... मेने तुझसे पाँच शर्ते पूरी करने को कहा था ना अब सिर्फ़ एक शर्त पूरी करदो...

अंजलि सलीम की ओर देखने लगती है...

सलीम: तुम्हे मुझे ज़्यादा झेलना भी नहीं पड़ेगा..

अंजलि: कैसी शर्त... सच तो ये है कि में ऐसा क्यूँ कर रही हूँ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा..

सलीम: तो सुन तू सीधी लेट टांगे खोल कर.. चुप चाप..

अंजलि: व्हाट....?

सलीम: अब और बोली तो यही चोद दूँगा में...

अंजलि: ये क्या बकवास है...

सलीम अचानक से अंजलि के कंधो को धक्का देकर बेड पर गिरा देता है और खुद उपर चढ़ जाता है...

सलीम: अब अगर ज़्यादा हिलेगी तो लंड अंदर भी डाल सकता हूँ..

 
सलीम अचानक से अंजलि के कंधो को धक्का देकर बेड पर गिरा देता है और खुद उपर चढ़ जाता है...

सलीम: अब अगर ज़्यादा हिलेगी तो लंड अंदर भी डाल सकता हूँ..

देख अब मेरे पास सिर्फ़ 1.30 मिनिट है. 1.30 मिनिट में अगर तू पिघल गयी तो में समझूंगा कि तू मुझसे प्यार करती है और तू मेरा साथ देगी... वरना में चुप चाप चला जाउन्गा..

अंजलि: क्या करोगे...

सलीम: कुछ नहीं वही तीसरी शर्त..मेने तुझसे कहा था कि मेरा लंड अपनी चूत से घिस... लेकिन तू नहीं मानी .... तो अब वो काम में खुद करूँगा..

अंजलि: अगर अंदर डाला तो में जान दे दूँगी... समझे आप..

सलीम: पंडित हूँ कुछ तो ईमान होगा मेरा... यकीन कर तेरे बिना कहे तो मेरा लंड भी तेरी चूत को टच नहीं करता...

अंजलि: मेने कब कहा टच करने को..

सलीम: मना भी तो नहीं किया ना...

अंजलि शर्म से साइड में मूह कर लेती है..

सलीम: मेरी तरफ देख इन 1.3० मिनिट तू सिर्फ़ मुझे देखेगी और कुछ नहीं..

अंजलि धीरे से सलीम की ओर गर्दन घुमा ती है.. तभी सलीम अपना लंड अंजलि की चूत पर रख देता है... अंजलि सलीम के लंड की गर्मी अपनी चूत पर पाकर धनुष की तरह हो जाती है..

तभी सलीम एक घिस्सा मारता है.. सलीम का लंड अंजलि की चूत के अंतिम छोर से उपर तक रहते हुए अंजलि की नाभि तक आ जाता है...

और अंजलि के मूह से एक मध्यम सी कराह निकल जाती है...

सलीम: लंड को चूत पर घिसते हुए.... अंजलि... तू मुझसे सच में प्यार करती है..

अंजलि:. ह्म्‍म्म्म आअहह नाआ हाअ... . ह्म

सलीम: क्या हाँ ना लगा रखी है ठीक से बोल...

अंजलि सलीम की ओर देखती है और सलीम फिर से एक धक्का मारता है.. और अंजलि की चूत गीली होने लगती है..

अंजलि मन ही मन सोचती है...

( चाचा अपनी उम्र तो देखो.. कब्र में पैर पसारने की है और तुम यहाँ मुझ खूबसूरत औरत के साथ ऐश कर रहे हो... बड़े किस्मत वाले हो...)

सलीम अब जल्दी जल्दी धक्के मारने लगता है...

 
सलीम के धक्को से अंजलि परेशान हो जाती है.. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और सलीम उसे लगातार पानी छोड़ने पर मजबूर कर रहा था...

अंजलि अचानक से अपने हाथ उपर लेजाकर सलीम को गले लगा लेती है...

हाअ आअहह ज़ोर से....

सलीम: पहले बोलो प्यार करती हो..

अंजलि को एहसास हो जाता है कि वो क्या बोल गई...

लेकिन फिर भी अपनी अकड़ दिखाने के लिए..

अंजलि: नहीं करती बिल्कुल भी नहीं..

सलीम: बस 30 सेकेंड की बात और है..

सलीम अब ऐसे धक्के मार रहा था जैसे सच में अंजलि को चोद रहा हो.. अंजलि का सर बेड पर उपर नीचे हो रहा था.. और बेड चू चू कर रहा था... कुछ ही सेकेंडो में अंजलि झड जाती है.. और सलीम का पूरा लंड चिकना हो जाता है अंजलि के पानी से...

तभी सलीम थोड़ी सी चालाकी दिखता है.. और अपने लंड को अंजलि की चूत के मूह पर फिट कर देता है और हल्का सा झटका देता है.. सलीम के लंड का टोपा अंजलि की चूत में घुस जाता है...

अंजलि एक दम से हुए दर्द से काँप जाती है साथ ही पूरा शरीर काँप ने लगता है..

अंजलि: कमीने बाहर निकाल...

सलीम: मेने अंदर कहाँ डाला..

अंजलि: मेने कहा ... आसान हूओ ह्म्‍म्म्म अंजलि एक बार फिर से झड़ने लगती है...

तभी सलीम अपना लंड बार निकाल कर मूठ मारने लगता है ...

सलीम अपना सारा माल अंजलि के मम्मो पर डाल देता है...

अंजलि अभी भी काँप रही थी उसे समझ नहीं आरहा था कि वो इतनी जल्दी कैसे झड सकती है..

उसकी चूत में अभी भी सुरसूराहट होरही थी.. कम से कम 2- 3 मिनिट तक अंजलि किस्तो में झड़ती रही..

सलीम: देखो अंजलि अपनी चूत को कितना पानी छोड़ रही है.. अब तो मान जाओ तुम्हे मुझसे प्यार है... इश्क़ है...

मेरी मदद करो... में तुम्हारी ननद से बहुत प्यार करता हूँ मेरी मदद कर प्लीज़... ऐसा कह कर सलीम वहाँ से निकल जाता है..

 
अंजलि सलीम की बाते तो सुन चुकी थी लेकिन कुछ रिक्ट करने की हालत में नहीं थी... कारण ये था कि उसकी चूत में अभी भी सुरसूराहट हो रही थी...

करीब 30 मिनिट बाद अंजलि हिम्मत जुटा कर बिस्तर से उठती है और वॉशरूम में जाकर शवर के नीचे खड़ी हो जाती है.. अंजलि की जांघे काँप रही थी.. उसके पैरो में खुद का वजन भी संभाल पाने की हिम्मत नहीं हो रही थी..

किसी तरह शवर के नीचे खड़े होने के बाद वो धीरे से अपनी पीठ दीवार के सहारे लगाकर नीचे बैठने लगती है.. अपने सारे बदन को सॉफ करने के बाद उसे तोड़ा बहुत आराम महसूस होने लगता है... अंजलि जल्दी से शवर बंद करके वॉशरूम से बाहर आती है.. उसके शरीर पर पानी की बूंदे ऐसे चमक रही थी जैसे कि कोई हीरे से जड़ी हुई मूरत हो...

अंजलि अपने कबाड़ की तरफ जाती है वहाँ से जल्दी से अपनी साड़ी , ब्लाउज, पेटिकोट, ब्रा पेंटी निकाल कर पहन ने लगती है... उसके मन में कयि तरह के सवाल चल रहे थे.. एक प्रकार की उधेड़ बुन चल रही थी...

कभी सोचती है आख़िर देव ने ऐसा क्या किया जो सलीम उनसे इतना नाराज़ है.? कभी सोचती है.. हे भगवान मेने ये कैसे होने दिया एक हिंदू बुड्ढे को मेरे बदन के साथ खेलना... उसे तो देखना भी पाप था.... ओह गॉड... कभी सोचती है.. आख़िर ऐसा क्या राज है देव का जो में नहीं जानती सिर्फ़ सलीम चाचा जानते है.... और मम्मी जी ने मुझसे क्यूँ छुपाया.. कभी सोचती है.. सलीम चाचा के स्पर्श करने से में पागल क्यूँ हो गयी थी... में ऐसी तो नहीं थी.. मुझसे तो अब काबू ही नहीं रहा.. जैसे मेरा शरीर मुझसे ही बग़ावत करने पे तुला है... कभी सोचती है.. क्या में सलीम चाचा से प्यार... नहीं नहीं में शादी शुदा हूँ... देव मेरे पति है.. सुंदर है. यंग है.. पोलीस ऑफीस है.. हॅंडसम और मुझसे प्यार करते है... फिर में कैसे उस बुड्ढे सलीम चाचा से प्यार कर सकती हूँ... कभी नहीं... कभी सोचती है... और ये सलीम चाचा मुझसे कह रहे थे कि मेरी ननद से प्यार करते है और मेरी मदद चाहिए.. मुझे क्या दलाल समझा है.. या किसी कोठे की बाई जो मुझसे एक लड़की का सौदा करने जैसी हरकत कर रहे है.. मदद तो ऐसे माँग रहे थे जैसे मेरे कोई ख़ास दोस्त हो.. ... मेरे सिवा किसी और को कैसे देख सकते है..

इतना सोचना था कि...

लास्ट का विचार आते ही उसकी पेंटी फिर से गीली हो जाती है.. अंजलि की चूत में फिर से खुजली चलने लगती है और पानी टपक ने लगता है.. ये देख कर अंजलि शरमा जाती है.. अंजलि अब वापस अपनी पेंटी निकाल कर उसे धोने वॉशरूम में चली जाती है.. अंजलि वॉशरूम में अपनी पेंटी धोकर सूखने के लिए वही डाल देती है.. अंजलि जैसे ही बाहर आती है.. उसका फोन बजने लगता है...

अंजलि जल्दी से फोन तक आती है और देखती है कि किसका फोन है.. सामने लिखा नाम देखा तो देव......

अंजलि ने फोन उठाया तो और बोली...

अंजलि:, हेलो....

बीप बीप बीप बीप.....

(फोन डिसकनेक्ट)

अंजलि ने फिर से कॉल किया.. लेकिन आउट ऑफ नेटवर्क आ रहा था..

अभी अंजलि अपने विचारों से बाहर निकली ही थी कि घर के डोर की बेल बजती है..

अंजलि सीडियाँ उतरती हुई नीचे आती है… अंजलि देखती है कि सलीम चाचा डोर ओपन करने गये हुए है.

दरवाजा जैसे ही खूलकता है.. कामया भाभी बोलते हुए अंजलि के गले लगती है…

लेकिन थोड़ी देर में उसे पता चल जाता है कि वो उसकी भाभी नहीं बल्कि सलीम चाचा है..

 
कामया थोड़ा आसेहज महसूस करती है और नीचे गर्दन करती हुई आगे चली जाती है… वही कामया के साथ आई बाहर खड़ी आरती मूह खोले खड़ी थी.. ये सब इतना जल्दी हुआ कि किसी को समझने में भी नहीं आया..

वही अंजलि ये सब देख कर अपनी जगह मूरत बनी खड़ी थी… अंजलि के मनोभाव ऐसे थे कि वो उन्हे किसी को समझा भी नहीं पाती.. समझती कैसे खुद समझती तो समझा पाती.

जहाँ एक ओर अंजलि को कामया पर सलीम चाचा के गले लगने पर गुस्सा था वही दूसरी और जलन थी कि आख़िर सलीम चाचा कामया को क्यूँ प्यार करते है…

तभी सलीम अपना गला सॉफ करते हुए आरती से बोलता है..

सलीम: आप अंदर नहीं आएँगी क्या? (सलीम ये सब बोल कर वापस महॉल नॉर्मल कर देता है..)

अंजलि: अरे आरती बाहर क्यूँ खड़ी हो? आओ अंदर आ जाओ.. अपना ही घर है ससुराल नहीं है.....

आरती शरमाती हुई अंदर आ जाती है.. वही कामया और अंजलि दोनो एक दूसरे को ताली देते हुए हँसने लगती है…

अंजलि: अच्छा कामया ये तो बताओ तुम इतना खुश क्यूँ थी जो आते ही मेरे गले लग जाने वाली थी… और अपने कंधे से कामया के कंधो को एक हल्का सा धक्का मारती है..

कामया शरमा जाती है..

कामया: भाभी वो भैया का फोन आया था. बोल रहे थे कि वो नहीं आ पाएँगे.. वो सनडे तक वहाँ से रवाना होंगे..

अंजलि: इसमे इतनी खुशी की क्या बात है?

आरती: भाभी कितनी भोली हो.. ये पार्टी करना चाहती है यहाँ पर… वो भी हार्डकोर पार्टी.. वित मास्क आंड डॅन्सिंग.

अंजलि: चोन्कने का मूह बनाते हुए पागल है क्या.. तेरे भैया जान से मार डालेंगे……

कामया: तभी तो खुश हूँ वो नहीं आ रहे तो हम पार्टी आराम से कर सकते है..

आरती: हाँ भाभी काफ़ी दिन हो गये मेने भी पार्टी नहीं की है.. पहले हॉस्टिल में तो अपने फ्रेंड्स के साथ खूब पार्टी हो जाती थी.. बट अब नहीं..( अपना सॅड सा फेस बना लेती है)

अंजलि: ठीक है लेकिन हार्डकोर पार्टी??????

आरती : एक दिन की तो बात है…

कामया: प्लीज़ भाभी मान जाओ ना..

अंजलि: सोचने का नाटक करते हुए ठीक है लेकिन कोई भी अननोन पर्सन नहीं आएगा पार्टी में..

कामया: ओन्ली फ्रेंड्स पक्का..

आरती: यस ओन्ली फ्रेंड्स..

अंजलि: ओके और ये मास्क का क्या खेल है.. ?

आरती: भाभी मास्क पार्टी कपल वग़ैरा करते है.. बट हम लोगो ने सोचा जो कपल डॅन्स होगा उसमे हम इसे यूज़ करेंगे..

अंजलि: लेकिन:

कामया अंजलि के कंधो को पकड़ कर उसे सीडियों से साइड में करती है…

कामया: ओह हो भाभी कितने सवाल पूछती हो.. अब नो लेकिन वेकीन… हम पार्टी की तैयारी करते है… चलो आरती..

आरती: ये शुवर बेब…हहेहहे (दोनो बहने खिलखिलते हुए उपर चली गयी)

 
अंजलि सलीम की बाते तो सुन चुकी थी लेकिन कुछ रिक्ट करने की हालत में नहीं थी... कारण ये था कि उसकी चूत में अभी भी सुरसूराहट हो रही थी...

करीब 30 मिनिट बाद अंजलि हिम्मत जुटा कर बिस्तर से उठती है और वॉशरूम में जाकर शवर के नीचे खड़ी हो जाती है.. अंजलि की जांघे काँप रही थी.. उसके पैरो में खुद का वजन भी संभाल पाने की हिम्मत नहीं हो रही थी..

किसी तरह शवर के नीचे खड़े होने के बाद वो धीरे से अपनी पीठ दीवार के सहारे लगाकर नीचे बैठने लगती है.. अपने सारे बदन को सॉफ करने के बाद उसे तोड़ा बहुत आराम महसूस होने लगता है... अंजलि जल्दी से शवर बंद करके वॉशरूम से बाहर आती है.. उसके शरीर पर पानी की बूंदे ऐसे चमक रही थी जैसे कि कोई हीरे से जड़ी हुई मूरत हो...

अंजलि अपने कबाड़ की तरफ जाती है वहाँ से जल्दी से अपनी साड़ी , ब्लाउज, पेटिकोट, ब्रा पेंटी निकाल कर पहन ने लगती है... उसके मन में कयि तरह के सवाल चल रहे थे.. एक प्रकार की उधेड़ बुन चल रही थी...

कभी सोचती है आख़िर देव ने ऐसा क्या किया जो सलीम उनसे इतना नाराज़ है.? कभी सोचती है.. हे भगवान मेने ये कैसे होने दिया एक हिंदू बुड्ढे को मेरे बदन के साथ खेलना... उसे तो देखना भी पाप था.... ओह गॉड... कभी सोचती है.. आख़िर ऐसा क्या राज है देव का जो में नहीं जानती सिर्फ़ सलीम चाचा जानते है.... और मम्मी जी ने मुझसे क्यूँ छुपाया.. कभी सोचती है.. सलीम चाचा के स्पर्श करने से में पागल क्यूँ हो गयी थी... में ऐसी तो नहीं थी.. मुझसे तो अब काबू ही नहीं रहा.. जैसे मेरा शरीर मुझसे ही बग़ावत करने पे तुला है... कभी सोचती है.. क्या में सलीम चाचा से प्यार... नहीं नहीं में शादी शुदा हूँ... देव मेरे पति है.. सुंदर है. यंग है.. पोलीस ऑफीस है.. हॅंडसम और मुझसे प्यार करते है... फिर में कैसे उस बुड्ढे सलीम चाचा से प्यार कर सकती हूँ... कभी नहीं... कभी सोचती है... और ये सलीम चाचा मुझसे कह रहे थे कि मेरी ननद से प्यार करते है और मेरी मदद चाहिए.. मुझे क्या दलाल समझा है.. या किसी कोठे की बाई जो मुझसे एक लड़की का सौदा करने जैसी हरकत कर रहे है.. मदद तो ऐसे माँग रहे थे जैसे मेरे कोई ख़ास दोस्त हो.. ... मेरे सिवा किसी और को कैसे देख सकते है..

इतना सोचना था कि...

लास्ट का विचार आते ही उसकी पेंटी फिर से गीली हो जाती है.. अंजलि की चूत में फिर से खुजली चलने लगती है और पानी टपक ने लगता है.. ये देख कर अंजलि शरमा जाती है.. अंजलि अब वापस अपनी पेंटी निकाल कर उसे धोने वॉशरूम में चली जाती है.. अंजलि वॉशरूम में अपनी पेंटी धोकर सूखने के लिए वही डाल देती है.. अंजलि जैसे ही बाहर आती है.. उसका फोन बजने लगता है...

अंजलि जल्दी से फोन तक आती है और देखती है कि किसका फोन है.. सामने लिखा नाम देखा तो देव......

अंजलि ने फोन उठाया तो और बोली...

अंजलि:, हेलो....

बीप बीप बीप बीप.....

(फोन डिसकनेक्ट)

अंजलि ने फिर से कॉल किया.. लेकिन आउट ऑफ नेटवर्क आ रहा था..

 
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