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Guest
“वो तो है बड़ी ही प्यारी लड़की है लेकिन मैं याद रखूँगा आपकी बात की उससे सिर्फ़ दोस्ती रहे और दोस्ती वाला प्रेम रहे ना की आशिक़ी वाला, ऐसे भी मेरी तो आशिक़ी सिर्फ़ एक से ही है ……….आप से “
उन्होने मेरे गालो पर हल्की सी चपत लगा दी ..
हम ऐसे ही घंटो बातें करते रहते थे दिन भर की बाते करते थे वो मुझे अपने किस्से सुनाया करती तो मैं उन्हे अपने ..
अचानक वो बोली
“सोनू मुझे एक चीज़ आज भी थोड़ी ख़टकती है , यहाँ कुछ तो अजीब है लोग हमारे उपर ऐसे प्रेम लूटाते है कि मुझे समझ ही नही आता ख़ासकर संपत की मा मुझे खुद को नानी कहलावती है जबकि वही सभी लोग उन्हे अम्मा कहते है …कुछ तो है यहाँ ..”
मैं भी उनकी बात से सहमत था
“हाँ भाभी मुझे भी ऐसा ही लगता है , ख़ासकर संपत बाकियो के लिए तो बॉस है लेकिन मेरे लिए बेहद ही नर्म रहता है ..”
“और ये जीवा कौन है ??”
“सभी तो कहते है कि वो ही इस गांग का असली बॉस है लेकिन वो कौन है , कहाँ रहता है , ये सिर्फ़ संपत को पता है… यहाँ तक कि जग्गा
को भी उसके बारे मे नही पता जो की पूरा धंधा संभालता है ..”
“अजीब बात है ना जो मुखिया है उसी का पता नही है , और ये लोग कितने पवरफुल है जो तिवारी जैसा आदमी भी इनसे डरता है ..??”
“भाभी तिवारी मंत्री है वो डरता नही है बल्कि बस इन लोगो से छोटी मोटी चीज़ो के लिए उलझता नही है , क्योकि मैने सुना है कि जीवा भाई की पहुच ग़रीब बस्तियो मे बहुत ज्यदा है और वही से तिवारी की पार्टी के भी एमएलए और एंपी है , तो उनका दबाव भी तिवारी पर रहता है और ये भी सुना है की पहले तिवारी, जीवा भाई का ही आदमी हुआ करता था फिर ना जाने क्या हुआ कि दोनो मे दुश्मनी हो गई और तिवारी ने दूसरा गॅंग जाय्न कर लिया, सुना है बहुत ही खून ख़राबा हुआ और फिर जीवा भाई खुद गायब हो गये और उनका पूरा गॅंग इस हवेली मे
आ गया … उन्होने पुराना शहर छोड़ दिया था , वही तिवारी भी इस शहर की ओर नही देखता था लेकिन जब से वो मंत्री बना है वो भी राजधानी मे आता जाता रहता है , लेकिन ये भी सुना है कि जीवा, तिवारी की गद्दारी को अभी भी नही भूला है ना ही तिवारी भूला है बस दोनो एक दूसरे से भिड़ने से बचते है ताकि दोनो का काम सही से चलता रहे ..”
मेरी बात सुनकर भाभी ने एक गहरी सांस ली
“यानी कि जीवा गायब है ताकि तिवारी उसे ढूँढ ना सके और तिवारी यहाँ सिर्फ़ सरकारी काम से आता जाता है ताकि जीवा से टकराव ना हो ..??”
“हाँ शायद ऐसा ही …..”
मैने भी हां मे सर हिलाया
“लेकिन बेटा तू इन सबमे ना पड़ना ये उनकी पर्सनल दुश्मनी है , हमे इससे क्या … दोनो ना ही भिड़े तो अच्छा है .. तू बस अपनी पढ़ाई पर
ध्यान दे तू पढ़ ले कही जॉब कर ले तो फिर हम ये शहर ही छोड़ कर चले जाएँगे “
मैने हां मे सर हिलाया और उन्होने हमेशा की तरह प्यार से मेरा माथा चूम लिया …….
उन्होने मेरे गालो पर हल्की सी चपत लगा दी ..
हम ऐसे ही घंटो बातें करते रहते थे दिन भर की बाते करते थे वो मुझे अपने किस्से सुनाया करती तो मैं उन्हे अपने ..
अचानक वो बोली
“सोनू मुझे एक चीज़ आज भी थोड़ी ख़टकती है , यहाँ कुछ तो अजीब है लोग हमारे उपर ऐसे प्रेम लूटाते है कि मुझे समझ ही नही आता ख़ासकर संपत की मा मुझे खुद को नानी कहलावती है जबकि वही सभी लोग उन्हे अम्मा कहते है …कुछ तो है यहाँ ..”
मैं भी उनकी बात से सहमत था
“हाँ भाभी मुझे भी ऐसा ही लगता है , ख़ासकर संपत बाकियो के लिए तो बॉस है लेकिन मेरे लिए बेहद ही नर्म रहता है ..”
“और ये जीवा कौन है ??”
“सभी तो कहते है कि वो ही इस गांग का असली बॉस है लेकिन वो कौन है , कहाँ रहता है , ये सिर्फ़ संपत को पता है… यहाँ तक कि जग्गा
को भी उसके बारे मे नही पता जो की पूरा धंधा संभालता है ..”
“अजीब बात है ना जो मुखिया है उसी का पता नही है , और ये लोग कितने पवरफुल है जो तिवारी जैसा आदमी भी इनसे डरता है ..??”
“भाभी तिवारी मंत्री है वो डरता नही है बल्कि बस इन लोगो से छोटी मोटी चीज़ो के लिए उलझता नही है , क्योकि मैने सुना है कि जीवा भाई की पहुच ग़रीब बस्तियो मे बहुत ज्यदा है और वही से तिवारी की पार्टी के भी एमएलए और एंपी है , तो उनका दबाव भी तिवारी पर रहता है और ये भी सुना है की पहले तिवारी, जीवा भाई का ही आदमी हुआ करता था फिर ना जाने क्या हुआ कि दोनो मे दुश्मनी हो गई और तिवारी ने दूसरा गॅंग जाय्न कर लिया, सुना है बहुत ही खून ख़राबा हुआ और फिर जीवा भाई खुद गायब हो गये और उनका पूरा गॅंग इस हवेली मे
आ गया … उन्होने पुराना शहर छोड़ दिया था , वही तिवारी भी इस शहर की ओर नही देखता था लेकिन जब से वो मंत्री बना है वो भी राजधानी मे आता जाता रहता है , लेकिन ये भी सुना है कि जीवा, तिवारी की गद्दारी को अभी भी नही भूला है ना ही तिवारी भूला है बस दोनो एक दूसरे से भिड़ने से बचते है ताकि दोनो का काम सही से चलता रहे ..”
मेरी बात सुनकर भाभी ने एक गहरी सांस ली
“यानी कि जीवा गायब है ताकि तिवारी उसे ढूँढ ना सके और तिवारी यहाँ सिर्फ़ सरकारी काम से आता जाता है ताकि जीवा से टकराव ना हो ..??”
“हाँ शायद ऐसा ही …..”
मैने भी हां मे सर हिलाया
“लेकिन बेटा तू इन सबमे ना पड़ना ये उनकी पर्सनल दुश्मनी है , हमे इससे क्या … दोनो ना ही भिड़े तो अच्छा है .. तू बस अपनी पढ़ाई पर
ध्यान दे तू पढ़ ले कही जॉब कर ले तो फिर हम ये शहर ही छोड़ कर चले जाएँगे “
मैने हां मे सर हिलाया और उन्होने हमेशा की तरह प्यार से मेरा माथा चूम लिया …….