• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

कॉलेज पहुचने के बाद मुझे समझ नही आ रहा था की मैं सुस के बारे मे कुछ बात करू या नही, आख़िर अज्जु ने पूछ ही लिया

"तो सुस तुझे अपने पिता से मिलवाने ले गयी थी ना? क्या हुआ…"

अब मैं उसे क्या बताता

"हुम्म उसके पापा से मिला … उन्होंने मुझे सुस का बॉडीगार्ड बना दिया है और साथ ही उसके घर मे भी रहने के लिए कहा है"

लेकिन मेरे चेहरे के भाव जैसे अज्जु से छिपे नही रह सके

"कोई और बात भी है क्या ?"

अज्जु मेरे चेहरे को घूर रहा था जिससे मुझे थोड़ी असहजता का आभास हुआ

"नही यार"

अज्जु ने उस समय तो कुछ नही कहा और बात आई गयी हो गयी…

"तो कल से स्नेहा मेडम के पास ट्यूशन शुरू करना है .."

नेहा बोल उठी थी ,वही अक्की का चेहरा लाल हो चुका था

हम सभी के होठों पर मुस्कान आ गयी..

"हा भाई याद है हमारे अक्की भाई की भी सेट्टिंग करवानी पड़ेगी"

और मैं भी हंस पड़ा,लेकिन अक्की का चेहरा थोड़ा सा मुरझा गया था..

"यार लगता है उनका तो पहले से ही सिर के साथ सेट्टिंग है...लगता है मेरा प्यार तो बस एकतरफ़ा ही रह जाएगा .."

अक्की के चेहरे मे आई ये उदासी मुझे अच्छी नही लगी..

"अबे अभी कैसे बोल सकता है की मेडम की सेट्टिंग होगी ही,हो सकता की वो महज दोस्त हो, जैसे तू और नेहा इतने अच्छे दोस्त हो अब कोई ग़लत समझ जाए तो क्या कर सकते है"

मेरी बात सुनकर जैसे अक्की की आँखो मे एक चमक आ गयी

"हा ये भी हो सकता है दोनो दोस्त ही होंगे "

अक्की की चाहत देखकर नेहा ने उसके माथे पर एक हल्की सी चपत लगा दी..

"पगलू कही का "

हम सभी के चहरे खिल चुके थे लेकिन अज्जु अभी भी मुझे अजीब निगाहो से देख रहा था…

***********

"बता बात क्या है,क्या बोला सुस ने तुझे, कुछ उल्टा सीधा किया होगा ना तो उसकी खैर नही है"

कॉलेज ख़त्म होने के बाद अज्जु ने मुझे अकेले मे बुला लिया था ,उसने अभी अभी एक सिगरेट जलाई और मेरे ओर बढ़ा दिया ..

मुझे समझ नही आ रहा था की मैं इसे कैसे बताऊ..

"अबे बोल ना ,मूह मे ताला लगा कर क्यो रखा है अब"

"यार वो बड़ी अजीब सी बात हुई कल ,बस भाई इसे अपने तक ही रखना किसी से कहना मत.."

और मैं उसे सब सच सच बताते गया ,वो कभी चौक्ता तो कभी हंस पड़ता था ,तो कभी गंभीर हो जाता था,मैने उसे ये भी बताया की भाभी सुस के दिए अपार्टमेंट मे नही जाना चाहती…

"ह्म तो तूने क्या फ़ैसला किया सुस को लेकर.."

यार मेरे दिमाग़ मे भी नही आया ये सब ,मुझे नही लगता की मुझे सुस से प्यार हो सकता है

..

"अच्छा ...और नेहा से"

मैं नेहा का नाम सुनकर चौक गया

"अब नेहा बीच मे कैसे आ गयी"

वो हल्के से हंस पड़ा

"साले तुझे क्या लगता है की हम लोग अंधे है, नेहा की आँखो मे तेरे लिए प्यार साफ साफ दिखता है ,भाई नेहा बहुत अच्छी लड़की है ... अगर तुझे सुस और नेहा के बीच चुनना पड़े तो मैं चाहूँगा की तू नेहा का साथ दे…"

नेहा और सुस , जैसे एक रस्सी के दो किनारे थे एक दूसरे से बिल्कुल ही अलग… जहाँ नेहा हल्की बयार (ठंडी हवा) थी तो सुस किसी तूफान की तरह .. नेहा किसी खिले हुए फुलो की खुसबु सी थी तो सुस जैसे इतरा का तीखा पन लिए..
 
नेहा का शरमाना उसकी जान थी तो सुस की स्वच्छंदता उसका गौरव था…

मेरे चेहरे मे टेन्षन साफ साफ दिखाने लगा था …

"अबे टेन्षन छोड़ तुझे जिससे प्यार हो जाए उससे प्यार करना , प्यार कोई ऐसी चीज़ तो नही ना जिसे ज़बरदस्ती करवाया जा सके ...बस एक चीज़ का ध्यान रखना रिलेशन्षिप मे कभी भी झूठ ना बोलना ...किसी का दिल ना तोड़ना ...दोनो ही अच्छी लड़किया है दोनो का ही दिल साफ है "

मैने उसकी बात पर सहमति मे सर हिलाया

"चल अब ये ट्राइ कर "

उसने अपने जेब से एक दूसरा सिगरेट निकाला जो की उपर से मुड़ा हुआ था..

"अबे ये क्या है"

वो हल्के से मुस्कुराया..

"बेहतरीन माल है भाई बाहर से मँगवाया है ,ट्राइ कर"

उसकी खुसबु कुछ अजीब ही थी ये तंबाखू तो नही था…

मैने उसे जलाया और पहला कश लगाया …

ऐसा लगा जैसे पूरा गला ही जल गया हो,उसका धुआ बड़ा ही तेज था ,मैं जोरो से खांसने लगा था ...मुझे देख कर अज्जु जोरो से हंस पड़ा ..

"अबे देख इसे ऐसे पीते है"उसने गहरा कस लिया और धुवे को थोड़ी देर तक अंदर रहने दिया और फिर पूरा धुआ छोड़ दिया ,धुवे के साथ साथ ही एक तीखी सी गंध पूरे महॉल मे फैल गयी थी…

उसने सिगरेट मुझे थमा दिया ..

मैने भी एक गहरा कस लिया ,अब मैं तैयार था दो गहरे कस लगाने के बाद ही मेरा शरीर गर्म होने लगा था.. हम दोनो ने मिलकर आख़िर इसे ख़त्म कर दिया..

पूरा शरीर गर्म हो चुका था ऐसा लगा जैसे मैं किसी और ही दुनिया मे खो गया हू,एक मदहोशी सी फैल गयी थी, सब कुछ थोड़ा अजीब सा लग रहा था बहुत ही मज़ा आ रहा था ...सब कुछ रंगीन हो जाता कभी ऐसा लगता जैसे मई किसी कॉमिक्स की दुनिया मे आ गया हू...ऐसे ही हालत मे मैं कब घर पहुच गया पता भी नही चला…

कमरे मे जाते ही मैं धडाम से बिस्तर मे गिर गया , सामने जैसा पूरा ब्राम्‍हांड ही नाच रहा हो , मैं जहाँ भी ध्यान लगाता मुझे ऐसा लगता जैसे मैं उसी मे खो सा गया हू , पंखे की टक टक की आवाज़ मेरे कानो मे आने लगी , पहले तो वो आवाज़ मुझे बहुत ही सुकून पहुँचाने वाली थी ऐसे लग रहा था जैसे कोई बड़ी सी पावर ही मिल गयी हो , मैं पंखे की एक एक टक टक को सुन सकता था धीरे धीरे वो और भी धीमा होने लगा था , मैं अपनी ही इस सकती पर विस्वास नही कर पा रहा था की पंखा जो की इतना तेज़ी से घूम रहा था मैं उसके हर एक मूव्मेंट को सुन सकता हू , लेकिन थोड़ी ही देर मे ये तक तक इतना भारी हो गया जैसे कोई मेरे सर मे कई किलो का हथौड़ा मार रहा हो, उसकी आवाज़ इतनी भारी थी की मुझे लगा कही मैं इस अवस्था मे मर ही ना जाऊ ,जैसे ही मेरे दिमाग़ मे मरने का ख्याल आया मेरा सारा मज़ा जैसे चूर चूर हो गया , मैने तुरंत ही अपनी आँखे खोल दी और पंखे की आवाज़ से कान को हटाने की कोशिस करने लगा लेकिन ये भी मेरे लिए बड़ा ही मुस्किल हो रहा था जैसे तैसे मैने दूसरे चीज़ मे ध्यान लगाया लेकिन हर जगह एक ही प्राब्लम ….

पहले तो मज़ा आता था लेकिन फिर वही डर की कही मैं इसी मे खो ना जाऊ…

मेरी हालत बड़ी ही अजीब सी हो गयी थी , गला बार बार सुख़्ता था ऐसा लगता था जैसे अंदर की त्वचा सुखकर चिपक जाएगी , मैं जल्दी से पानी पी लेता …

तभी मेरी नज़र दरवाजे मे गई तो जैसे मेरा दिल ही रुक गया सामने भाभी खड़ी हुई मुझे अजीब सी निगाहो से देख रही थी …

“तूने गांजा पिया है ??“

उन्होने कुछ सूंघते हुए कहा , अब मेरी फटी , इस साले अज्जु को मैं ढेरो गालिया दे रहा था उसने मुझे सिगरेट बोल कर ना जाने क्या पिला दिया था ..

“नही भाभी पता नही क्या था वो अज्जु ने “

मेरी बात सुनकर वो हल्के से हँसी ,मुझे समझ नही आया की वो क्यो हंस रही थी लेकिन उस समय डर के कारण मेरे दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी और मैं खड़ा हुआ बिस्तर का किनारा चबा रहा था ,

“चलो कोई बात नही मैं खाना यही ले आती हू खा कर सो जा “

मैने बस हा मे सर हिलाया ..

आज ऐसा लगा जैसे मैं सदियो से भूखा था खाने का स्वाद क्या होता है जैसे मुझे आज ही पता चला था, खाने का एक नीवाला मूह मे जाते ही मेरा ध्यान उसपर आ जाता था , मूह के लार के मिलने से लेकर उसके चबाने तक सब कुछ मैं ध्यान से देख पा रहा था , लेकिन अंत ऐसा लगता जैसे मैं खाते खाते सो ना जाऊ मेरी आँखे बंद हो गयी थी , इसलिए अपना दिमाग़ थोड़ा इधर उधर घुमाने की कोशिस करता, मेरी निगाहे भाभी पर पड़ी जो की मुझे मुस्कुराते हुए देख रही थी ..

मुझे खुद की ओर देखता हुआ मैं थोड़ा डर गया, कही मैं कोई अजीब हरकत तो नही कर रहा था??:?:

मैं फिर खाने की ओर देखता और फिर पेट की भूख ऐसे लगती जैसे सदियो से कुछ नही खाया हो , मैं जल्दी से नीवाला उठाता था और फिर से वही सब …

जैसे जैसे मेरा पेट भरा मेरा नशा थोड़ा और भी गहरा गया था , भाभी ने मुझे हाथ पैर धोकर सोने को कह दिया , मैने इन 15-20 मिंट मे ही जैसे कई जीवन जी लिए , नींद आ नही रही थी कमरे मे मैं अकेला था , और आज पहली बार मुझे भूतो से डर लगने लगा था, अभी अभी तो भाभी थाली उठा कर बाहर निकली थी और थोड़े देर मे ही ये अकेलापन मुझे काटने को दौड़ने लगा , हाथ पैर जैसे तैसे धो लिया लेकिन कमरे मे अकेले रहने के दर से मैं तुरंत ही कमरे से बाहर चला गया …मुझे भाभी आती हुई दिखी उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर फिर से मुझे कमरे मे ले जाकर बिठा दिया था ……..

“चल सो जा क्या बहकी बहकी हरकते कर रहा है “

उन्होने हल्के से मेरे गालो मे एक चपत लगा दी …..

और ……..

और जैसे फूल खिल गये, कुछ हो गया, उनके बोलने पर मुझे उनके दांतो की साफ पंक्तिया साफ साफ दिखाई देने लगी थी , उनके गुलाबी होंठ जैसे शराब के भरे हुए प्याले थे जो छलकने को बेताब लग रहे थे , मुझे ऐसा लगा जैसे वो स्वर्ग की कोई अप्सरा हो…

मेरी नज़रें उनके चेहरे मे ही खो गयी थी , मुझे ऐसा लगा जैस वो रंग सफेद कपड़े पहने हुए कोई पारी हो जो मेरे सामने खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी …

मैं मुस्कुराता हुआ उनके चेहरे को ही देख रहा था ..

“सोनू…? बाबू..? सुन रह है मेरी बात “

भाभी मेरे आँखो के सामने आपना हाथ चला रही थी लेकिन मैं तो उनकी खूबसूरती मे ही खोया हुआ था ..

“आप परी हो … आप अप्सरा हो .. आप कितनी सुंदर हो”

मैं उन्हे देखते हुए बोलता रहा , और उन्होने अपना हाथ अपने माथे मे दे मारा ..

“हे भगवान ये लड़का भी ना गांजा मार के आ गया अब इसका नशा कैसे उतारू ..चल यहाँ सो जा “

उन्होने मुझे पकड़ कर बिस्तर मे बिठा दिया और मुझे वही लिटा भी दिया . वो खुद अपने कमरे मे जाकर समान जमाने लगी थी , लेकिन मेरी निगाहे अभी भी उनपर ही थी , लेकिन फ़र्क ये था पहले जो निगाहे उनके चेहरे पर थी अब वो उनके जिस्म मे चली गयी ..

उनके जिस्म के हर हिस्से को देखकर मेरे अंदर की चिंगारी जैसे जलने लगी थी , उनके सारी से झाँकते हुए उनके गोरे गोरे पेट को देखकर मेरा गला ही सुख गया , मेरा लिंग ऐसे अकड़ गया था जैसे की जीवन मे कभी ना हुआ हो , मेरे हाथ अपने ही आप उसपर चलने लगे थे , इतना मज़ा मुझे कभी नही आया था ,
 
उनके पेट से होते हुए मेरी नज़र उनके गुमावदार और गोल मटोल पिछवाड़े मे जा टिकी , जैसे मुझसे अब रहा नही गया, वो झुकी हुई कोई काम कर रही थी जिसके कारण उनका पिछवाड़ा और भी उभर कर सामने आ रहा था, मुझे ऐसा लगा जैसे ये कोई बड़ा सा आइस क्रीम हो , वैसे ही गोल गोल और उभरे हुए मैं उनके पास चला गया था , वो अपने काम मे ही बिज़ी थी और मैं ललचाए बच्चे की तरह उनके पिछवाड़े को देखता हुआ उनके पास पहुच गया , मैं अपने घुटनो पर बैठ कर आँखे बड़ी किए उसे देख रहा था इतनी बड़ी आइस क्रीम …:

मैने अपने हाथो से उसे पकड़ लिया कही वो दूर ना हो जाए और फिर जीभ निकाल कर मैने पूरी ताकत लगा कर उसे चाट लिया ..

“छी ये क्या कर रहा है , भाग “

भाभी को जैसे ही अहसास हुआ वो चौक कर सीधी हो गयी और मुझे बड़े ही आश्चर्य से देखने लगी

“ये क्या कर रहा था “

उन्होने थोड़ा डाँटते हुए कहा

“मैं तो आइस क्रीम खा रहा था “

“क्या ..?”

उन्होने आश्चर्य से कहा और फिर जोरो से हंस पड़ी ..

“इस अज्जु ने तुझ क्या पिला दिया है “

उनको हँसता हुआ देखकर मुझे तो समझ ही नही आ रह था की आख़िर बात क्या हो गयी है, उन्होने झुककर मेरे गालो मे हल्की सी पप्पी दे दी ..

“आइस क्रीम सुबह खा लेना अभी जा के सो जा तू बहुत ही नशे मे है “

लेकिन उनकी बात का मुझपर कोई भी असर नही पड़ा, जिसे वो मेरी ओर झुकी उनका पल्लू गिर गया था , उन्होने भी सम्हलने की कोई कोसिस नही की क्योकि ये आम सी बात थी … लेकिन आज ..?? आज मेरे लिए नही … मैने जैसे ही उनके ब्लाउस से झाँकते हुए उनके वक्षो को देखा जिस्म की गर्मी फिर से बढ़ने लगी ..और लिंग मे अकड़न सी होने लगी ..

लेकिन भाभी की नज़र मेरी नज़रो को पहचान गयी थी

‘अब क्या आम खाने का दिल कर रहा है “

वो जोरो से हँसी लेकिन उनके ऐसा बोलते ही मुझे दो मोटे ताजे आम दिखाई देने लगे …

“वाउ इतने ताजे और भरे हुए आम “

मेरे मूह मे तो पानी आ गया, और मैने उन आमों को जोरो से दबा दिया ..

“हे भगवान , लड़के तू जा के सो जा “

उन्होने मुझे आँखे दिखाई लेकिन मेरा ध्यान तो उन आमों पर ही था ,

“ये आमों को कपड़ो मे कौन रखता है “

मैने बड़े ही मासूमियत से पूछा , और भाभी की खिलखिलाती हुई हँसी फिर से मेरे कानो मे पड़ी ..

“तू पागल हो गया है जाकर सो जा “

मैं किसी बड़े ही आग्याकारी बच्चे की तरह अपने बिस्तर मे चला गया, कुछ देर पहले मेरा लिंग तन गया था लेकिन अभी मुझे याद भी नही था की आख़िर क्यो …मेरे दिमाग़ मे आम आए और मैं जैसे आम को खाने किसी बगीचे मे ही पहुच गया …

तभी मुझे अहसास हुआ की मैं तो अकेला हू और अकेले मे भूत वागरह भी तो आ सकते है……….

मैं तुरंत ही खड़ा हो गया भाभी अब भी कुछ कर रही थी …

थोड़ी देर तक मैं आम के ख्वाब देखता हुआ सोया था इसलिए अब मुझे लग रहा था जैसे मेरा नशा थोड़ा कम हो गया है ..

“भाभी आओ ना जल्दी “

भाभी ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और उठ कर अपने कमरे से मेरे बिस्तर तक आ गयी

“क्यो अकेले नींद नही आ रही है मेरे सोनू को “

उन्होने बड़े ही प्रेम से मेरे बालो को सहलाया और मैं किसी बच्चे की तरह उनके सीने से जा लगा , वही आम अब मेरे गालो से टकरा रहे थे , मन मे बहुत ही ललक जगा की इसे मूह मे भरकर चूस लू लेकिन भाभी का डर भी था, लेकिन सीने से लगे हुए लिंग मे तनाव फिर से आने लगा ..

‘मेरे साथ सो जाओ ना “

अब मैं थोड़े दिमाग़ लगा कर खेलने की सोची ,, क्यो ना भाभी को यही सुला लिया जाए और फिर ………..?:ओ

और फिर भाभी के उपर चढ़ जाउन्गा … वाह क्या कोमल जिस्म है भाभी का पूरा मक्खन सा उसे चाटूँगा ..

मेरे दिमाग़ मे आते ही मेरे लिंग मे इतना तनाव आया की लगा जैसे वो फट ही जाएगा और इसी मज़े और उत्तेजना ने मुझे थोड़ा कमीना भी बना दिया था ..

“भाभी लेट जाओ ना मेरे साथ “

वो बेचारी मेरे प्लान से अंजान प्यार से मेरे बाजू मे लेट गयी और मुझे हमेशा की तरह ही अपने सीने से लगाए रखा ..

अब मेरी शैतानी शुरू हो गयी मैं लेते लेते ही उनके आमों को हल्के हल्के से चूसने लगा

“हे ये क्या कर रहा है??”

वो थोड़ी हड़बड़ाई

“भाभी चूसने दीजिए ना आम को बहुत मन कर रहा है मन कर रहा था की काट के खा जाऊ “

“बाबू ये आम नही है “

भाभी की साँसे थोड़ी तेज हो गयी थी

“जानता हू की ये आपके बूब्स है , लेकिन मुझे इसे चूसना है जोरो से .. इस कपड़े को उतारो …प्लीज़ भाभी वरना मैं मर जाउन्गा …मेरा ये फट जाएगा “

इस बार मैं झूठ नही बोल रहा था उत्तेजना मे मेरे लिंग की हालत बहुत ही बुरी थी , नशो मे खून ऐसे दौड़ रहा था की लगा जैसे तन कर वो फट ही जाएगा ..

मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सच मे उत्तेजना मे मर जाउन्गा और मैने भाभी का हाथ पकड़ कर सीधे अपने लिंग मे रख दिया , भाभी को जैसे एक करेंट सा लगा होगा लेकिन साथ ही उन्हे ये भी पता था की मैं जो भी कर रहा हू वो महज मेरे नशे के कारण है ……

वो शादी शुदा थी उन्हे जिस्म के रिश्तो और करमो के बारे मे पता था , पहले तो वो डर गई और उठ गयी लेकिन मैने फिर से उन्हे जोरो से खिच लिया और इस बार मैं उनके उपर था और वो मेरे नीचे ..
 
मैने जीवन मे पहली बार किसी पर ऐसे बल का प्रयोग किया था और वो मेरी प्यारी भाभी मा थी … वो भाभी मा जिन्होने मुझे सबसे ज़्यादा प्यार दिया था लेकिन मैं नशे और हवस का अँधा उनके आँखो के दर्द को नही देख पाया ..

उनकी आँखे बहने लगी थी लेकिन मेरे जिस्म मे तो मानो हवस की आग अपने चर्म मे बढ़ गयी थी ..

मैं उनके उपर चढ़ गया था, जल्दबाज़ी मे मैने उनके सारी को उनके घुटनो तक उठा दिया और उनका पैर भी थोड़ा फैला दिया था जिसमे मेरी कम्र सेट हो सके … और अपने कमर को उनके कमर के उपर ले जाकर अपने लिंग को उनके जाँघो के बीच मे रगड़ने लगा ..

हम दोनो ही अपने पूरे कपड़े पहने हुए थे लेकिन फिर भी इस रगड़ का आनंद इतना ज़्यादा था की मेरी आँखे बंद हो गयी और मेरे होंठ अपने आप ही भाभी की उन उरोजो पर टिक गये जिन्होने मुझे ममता देकर बड़ा किया था ..

मैं ब्लाउस के उपर से ही उनके वक्षो को चूस रहा था कभी कभी मैं उन्हे काट भी लेता था , वही भाभी बुरी तरह से छट पटा रही थी , सारी का पल्लू खुला हुआ था और मैने उनके दोनो हाथो को उनके सर के पास जकड़ रखा था , वो हिल नही पा रही थी और मुझे खुद को छोड़ने की रिक्वेस्ट कर रही थी , लेकिन मुझमे तो जैसे शैतान ही समा चुका था, लिंग के रगड़ाव और उरोजो को चूसने का मज़ा ही इतना था की मैं उनके आँखो से बहते हुए आँसुओ को नही देख पा रहा था …

तभी उन्होने पूरा ज़ोर लगाया और मुझे अपने उपर से हपता दिया , मैं और कुछ कर पता उससे पहले ही ..

‘चटाक़ ………..’ एक जोरदार थप्पड़ मेरे गालो मे आ कर लगा , लेकिन लिंग के तनाव का ज़ोर ऐसा था की मैं उनपर फिर से टूटने ही वाला था की उन्होने मुझे एक लात मेरे पेट मे लगा दी मैं पेट पकड़कर बैठ गया था …

उन्होने तेज़ी दिखाई और अपने कमरे मे घुस गयी वो जल्दी ही वापस आई उनके हाथो मे एक हरे रंग की छोटी सी पुदीने वाली बोटल थी , उन्होने पूरी बोतल मेरे मूह मे घुसा दी ..

मेरा मूह पुदीने की कड़वाहट से बुरी तरह से खराब हो चुका था उन्होने पानी मेरी ओर बढ़ा दिया , मैं बहुत सारा पानी पी गया था , लेकिन उसकी कड़वाहट अभी भी मेरे मूह मे थी साथ ही मेंतोल के कारण मूह और पेट अजीब तरीके से ठंडा ही लग रहा था ……….

“इसे तेरे गांजे का नशा काटने के लिए लाई थी , अब चुपचाप सो जा “

उन्होने अपने आँखो के आँसू को पोछते हुए कहा और तेज़ी से अपने कमरे मे चली गयी , आज पहली बार दोनो के कमरे के बीच का दरवाजा बंद किया गया था …..

मुझे भाभी के इस अजीब से व्यवहार से गुस्सा आ रहा था , मैने उनके साथ आख़िर क्या ऐसा कर दिया था की वो इतना गुस्सा दिखा रही थी ……..

मुझे अभी भी इस चीज़ का अहसास ही नही था… मैं अपने मूह की कड़वाहट से लड़ता हुआ पानी पीता और दिमाग़ को इधर उधर लगाता हुआ सोने की कोशिस करने लगा था …………
 
अपडेट 26

सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरे सामने रात की सब बाते चल गयी , दिल ग्लानि से भर उठा था मैं भाभी के पैर पकड़कर रोना चाहता था, उनसे माफी माँगना चाहता था …

लेकिन भाभी का कही अता पता ही नही था …

दोपहर का वक़्त हो चला था , आज मैं कॉलेज भी नही गया था मैने पूरी हवेली ही छान मार दी लेकिन भाभी का कही पता नही चला…..

कही वो मेरे रात के ग़लत काम से बुरा तो नही मान गयी ???

कही वो मुझसे नाराज़ होकर कही चली तो नही गयी ??

ये डर मेरे अंदर भरने लगा था ..

भाभी को खोना मेरे लिए ऐसा था जैसे मेरा पूरा जहाँ ही उजड़ गया हो …

मैं पागलो की तरह हवेली मे इधर से उधर भाग रहा था और सभी को भाभी के बारे मे पूछ रहा था लेकिन कोई भी ये नही जानता था की आख़िर भाभी है कहा …………

आख़िर मैं संपत मामा के कमरे मे पहुचा ..

कमरा अंदर से लगा हुआ था मैने उसे जोरो से खटखपताया ..

“कौन है ..???”

अंदर से रानी की आवाज़ आई जो की संपत की गर्लफ्रेंड थी ..

“मैं हू …सोनू ..”

कुछ ही देर मे कमरे का दरवाजा खुल गया , मेरे सामने रानी खड़ी थी जिसका मदमस्त यौवन उसके गुलाबी रंग के झीनी सी नाइटी से झाँक रहा था , ऐसा लगा जैसे वो गहरी नींद से जागी हो , बाल बिखरे हुए थे , आँखो मे नींद अभी भी छाई हुई थी और वो जैसे थी वैसे ही बाहर आ गयी थी , उसने एक बहुत ही हल्की पारदर्सी सी नाइटी डाली हुई थी जिसमे से उसका पूरा जिस्म झाँक रहा था , पूरा का मतलब पूरा क्योकि अंदर उसने कुछ भी नही पहन रखा था , वो मुझसे कोई 6-7 साल की बड़ी रही होगी और जिस्म पूरी तरह से भरा हुआ था लेकिन कही से ज़्यादा फैला नही था …एक बार को मेरी भी नज़र उसके जिस्म पर पड़ी …

लेकिन फिर मुझे याद आया की भाभी को मैने इसी हवस के कारण ही खो दिया .. मैने अपनी आँखे जल्द ही उसके चेहरे मे लगा दी ..

“भाभी कहा है ??”

“वो तो गयी “

मेरे दिल ने जैसे धड़कना ही बंद कर दिया ……..

आँखो से आँसू बस छलकने ही वाले थे की मेरे दिमाग़ मे एक दूसरा प्रश्न भी आ गया …..

“कहा ?????”

मैने थोड़े जोरो से बोला

“संपत के साथ गयी है कुछ काम से … तू क्यो इतना हड़बड़ा रहा है?? रुक फोन लगाती मैं उसको …”

उसकी बात से मेरी सांसो मे जैसे अचानक से जान आ गयी …मैने एक गहरी सांस ली क्योकि थोड़े देर से मुझे ऐसा लगा था जैसे मेरी साँसे ही रुक गयी हो …
 
“हेलो संपत …आईला.. कहा रे तू …क्या झोल झपट कर रहे हो रे तुम दोनो …आजी सप्त.अरे उसका सोनू आया ना इधर को … ले बात करवा रे इसको …अरे करी तनी की नही करी तनी …”

उसने फ़ोन मुझे दे दिया ,(दोस्तो रानी की बात सुनकर आपको लगेगा की मेरी हिन्दी को क्या हो गया … मेरी हिन्दी ठीक है लेकिन रानी का टोन ही ऐसा है वो बात ही ऐसे करती है , थोड़ा हैदरा वादी टच , तो कभी अचानक से भोजपुरी टच मे आ जाती है तो कभी थोड़ा मराठी टच ..हो जाता है :

“हेलोभाभी ??”

“क्या हुआ सोनू …”

“आप कहा हो ??”

“तुझे क्या करना है “

“भाभी मुझे माफ़ कर दो ..”

मेरा गला भर गया था ..

“चल अभी फोन रख मैं संपत मामा के साथ हू, मिलकर बात करूँगी “

“भाभी आप मुझे छोड़कर तो नही जाओगी ना ..”

मैं लगभग रोने ही वाला था

“आ के बात करेंगे ..”

इतना ही कहकर उन्होने फोन को रख दिया ..

भाभी सच मे मुझसे गुस्सा थी मैं रो ही देता लेकिन मेरे सामने रानी खड़ी थी

“अरे क्या हुआ रे तेरे कू … भौजी से झगड़ा हुआ क्या “

उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बिस्तर मे बिठा दिया …

मैं पहली बार संपत के कमरे मे आ रहा था , ये कोई बड़ा कमरा नही था एक सामान्य कमरा ही था , एक कोने मे बिस्तर था जिसमे अभी मैं और रानी बैठे हुए थे …लेकिन हमारे कमरो से थोड़ा बड़ा कमरा था और थोड़ा सुसज्जित भी था ..

“मामी मैने भाभी का दिल दुखा दिया ..”

मैं रो पड़ा था

“अरे बचुवा.. रोते नही है ना बबुआ ….. अरे लड़ाई झगड़ा तो होते ही रहता है ना , और हम तुम्हारी मामी वामी नही है ना , हम तो संपत की गर्ल फिरेंड है … हम संपत से शादी थोड़ी ना किए है , बस हमारा छान छड़ी का ही रिश्ता है बबुआ… सब लोगान तो हम संपत की रखेल भी कहते है लेकिन हम उसकी फिरेंड ज़्यादा है … “

वो हल्के से हंस पड़ी , उसके चेहरे से ही लग रहा की वो अपने इस जीवन से खुस है ..

“तो क्या आप मामा से प्यार नही करती “

“अरे पियर वियर तो सब फालतू का चक्कर है रे , एक चुड होती है एक लवाड़ा होता है जब दोनो मिलते है तब पायर होता है, तूने देखी है की नही किसी की देख ऐसी दिखती है “

उसने अपनी नाइटी को थोड़ा उपर किया , ऐसे तो उसका पूरा ही जिस्म दिखाई दे रहा था लेकिन थोड़ा धुंधला , नाइटी के नीचे से उसने अपनी योनि मुझे थोड़ा फैलाते हुए दिखा दी….

मेरी साँसे ही रुक गयी थी अभी तक जो मैं भाभी की बात सोच रहा था सब कुछ एक ही झटके मे काफुट हो गया था , जैसे किसी ने एक चुटकी बजाई हो और सब कुछ गायब हो गया हो …वैसे ही मेरे दिमाग़ से भी सब कुछ अचानक से ही गायब हो गया था …..

उसने मेरे हाथ को अपनी योनि की दीवार से टीका दिया .. योनि अभी गीली थी उसने मेरी एक उंगली खोल दी और अपने योनि मे उसे घुसा दिया …
 
मैं जैसे किसी सम्मोहन मे फँस गया था , रानी का जिस्म साफ साफ मेरे नज़रो के सामने था , वो नंगी थी… हा एक झीना सा कपड़ा उसके शरीर मे डाला गया था लेकिन ये उसके भरे हुए मादक जिस्म को ढकने के लिए नाकाफ़ी था …….

मेरी एक उंगली अंदर ही गयी थी की वो जैस पिघल सी गयी , उसने मुझे खुद से सटा लिया …

मैं थोड़ा डर भी गया था ..

“क्यो रे तूने आज तक किसी लड़की की चुदाई की है “

मैने ना मे सर हिलाया

“तब तो आज और भी मज़ा आएगा “

मैं समझ नही पा रहा था की इसका क्या उत्तर दूं या फिर इसका क्या उत्तर हो सकता था ..

उसने मुझे अपने उपर खिच लिया और और बिस्तर मे लेट गयी ..

“बचुआ आज हमरी चुड ही फाड़ डियो “

मैं एक अजीब सी अवस्था मे फँसा हुआ था, दरवाजा अभी भी खुला हुआ था और ये इतनी बेताबी से मुझे अपने उपर लिपटा ली थी ..

उसने मेरी असमंजस को देखा तो खड़े होकर तुरंत ही दरवाजा बंद कर दिया ..

“अरे क्यो डर रहा है तेरी भाभी और संपत अभी नही आएँगे “

इस बार उसने सही सही हिन्दी बोली थी ..

“लेकिन मामी “

“मामी की मा की चुड … साले तेरे मामा ने मुझसे शादी नही की है जो मैं तेरी मामी हो गयी , वो मेरा बाय्फ्रेंड है उससे ज़्यादा कुछ नही समझे चल अब जल्दी बता चोदेगा की नही मुझे .”

कहते है ना की एक फ़ैसला बडाल दे आपकी जिंदगी ………..

वैसा ही एक फ़ैसला मुझे अभी करना था , मैं बुरी से असमंजस मे फँसा हुआ था की आख़िर करू तो क्या करू ..लिंग तो बोल रहा था की बाबू ऐसी माल मिल रही है और तेरी वर्जिनिटी भी टूट जाएगी कर ले मज़े फिर ऐसा मौका नही मिलेगा ..

वही दिल कह रहा था की ये भाभी से धोखा होगा …

थोड़ी दोनो की बात ही सुन लेते है ..

लिंग: भाभी से धोखा ???? चूतिए भाभी तुझे देने वाली थोड़ी है जो उससे धोखा हो जाएगा

दिल : अरे हवस इंसान को बर्बाद कर देता है , कल साले तेरे चक्कर मे भाभी मुझसे नाराज़ हो गयी है

लिंग: अच्छा और तू जब उसे देखकर धड़कता है तब क्या , तू अपना काम कर और मुझे अपना काम करने दे , ऐसा माल है साली देख तो सही और कितनी गीली है … मैं तो सोच सोच कर ही बेताब हो जाता हू की जब मैं इसके अंदर जाउन्गा तो कितना मज़ा आयगा … आ हा :हाइपर: :व्हाप्पी:

दिल : अबे कमीने मामी है ये तेरी शर्म कर और उम्र देख इसकी और तेरी … तू इसके सामने बच्चा लग रहा है

लिंग: भोसड़ी वाले चुड सबकी एक सी ही होती है समझ गया

दिल : अच्छा तुझे बड़ा पता है … कितनो के अंदर गया है तू आज तक :

(जैसे लिंग का तो दिमाग़ ही खराब हो गया हो )

लिंग: मादरचोद तेरे कारण नही जा पाता कही , वरना आज तक ना जाने कितनी गुफाओ मे उल्टी करके आ गया होता

दिल : अबे मैं प्यार करता हू और प्रेम मे जो मज़ा है वो कही नही है … ना जाने कितने कवि है जिन्होने मेरे बारे मे शायरी की है , कहानिया लिखी है सब मेरी ही बाते करते है ..:)

लिंग:: : साले वो सब इसलिए क्योकि मैं खड़ा हो जाता हू , सभी दिल दिल बोलकर आख़िर मे चने पर ही आ जाते है ..:
 
सुना नही है क्या की प्यार मुहब्बत धोखा है और पटक के चोदने मौका है :

और अगर कवि शायरो को तुझसे इतना ही प्रेम है तो साले सेक्स क्यो करते है … और मुझे हिलाते क्यो है

(लिंग की बात से दिल बुरी तरह से झल्ला गया )

दिल :अरे तू क्या जाने की प्रेम क्या है .. तेरे रगड़ने से तो बस कुछ देर का मज़ा ही मिलता है , लेकिन दिल लगाने से…

लिंग: जीवन भर की सज़ा

दिल : साले मेरे नही तेरे कारण लोग परेशान रहते है , तू उन्हे ग़लत कम करवा देता है जिससे जीवन भर दुख मे रखना पड़ता है , तेरे कारण कई लोगो को अपनी नौकरानी और रंडियो से शादी करनी पड़ गई :

“अबे चूतिए कहाँ गुम हो गया तू “

रानी की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी और लिंग और दिल की बातों से मैं बाहर निकल आया ..

“वो वो …”

अपने ही दिमाग़ के दो हिस्सो की बात सुनकर मेरे चेहरे मे एक मुस्कान आ गयी थी ..

“क्या मुस्कुरा रहा है , इतनी हॉट माल तेरे सामने है और तू खड़ा खड़ा हंस रहा है “

रानी ने आश्चर्य से मुझे देखा ..

“आज नही मामी फिर कभी “

मैं मुस्कुराते हुए उठा और बाहर निकल गया, वही रानी मुझे आँखे फाडे हुए देखते रह गयी ………
 
अपडेट 27

“तुम चाहते क्या हो सोनू “

भाभी कमरे मे आते ही बोल उठी

“मतलब …मैं .. मैं आपसे कल के लिए माफी माँगना चाहता हू भाभी “

“माफी …. तुमने क्या ग़लत किया जिसके लिए मुझसे माफी माँग रहे हो , ग़लती तुम्हारी नही बल्कि उस नशे की थी जिसमे तुम थे …और तुमने रानी को क्यो मना किया ??”

जैसा मुझे लगा ही था ये सब भाभी का ही कारनामा था , भाभी ने ही रानी को ये सब करने को कहा हुआ था ..

मैं कुछ भी नही बोला

“एक तरफ़ तुम्हे जिस्म की आश् है और दूसरी तरह तुम मिलते हुए जिस्म को भी ठुकुरा देते हो”

उनकी आवाज़ मे कुछ अजीब सी बात थी

“जिस्म नही भाभी मुझे बस प्यार चाहिए “

“प्यार ???” भाभी के होठों मे एक व्यंगात्मक सी मुस्कान खिल गयी

“कल जो तुमने किया वो प्यार था ??”उन्होने उसी मुस्कान के साथ कहा

“आप ने ही तो कहा की कल जो मैने किया वो सब नशे के कारण था “

“हा लेकिन नशे मे इंसान के भीतर का सच बाहर आ जाता है … और मैं ये नही बोल रही हू की ये ग़लत है … तुम्हारी उम्र ऐसी है की तुम्हे किसी महिला के जिस्म की ज़रूरत है …और इस उम्र मे किसी के प्रति आकर्षण का हो जाना एक स्वाभाभिक सी बात है…”

भाभी इतना बोल कर चुप हो गयी थी , समझ नही आ रहा था की आख़िर वो बोलना क्या चाह रही थी, एक तरफ़ तो वो मुझे खुद से दूर रखना चाहती थी फिर ये भी कहती थी की ये सब ग़लत नही है तो वो बोलना क्या चाहती है … ये सब सही है लेकिन उनके साथ नही …और एक मैं हू जो सब बस उनके साथ ही करना चाहता हू ..

मैने सुस के प्रपोज़ल को ठुकरा दिया था और अब रानी के खुल्लमखुल्ला दिए गये निमंत्रण को भी ठुकुरा दिया ..

“भाभी मैं तो बस एक से ही आकर्षित हू “

ये बोलते हुए पता नही क्यो मेरी आँखो मे आँसू आने लगे थे , गला भारी होने लगा और मेरी नजरे भी झुक गयी … मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई बेहद ही ग़लत बात बोल दी हो..

भाभी की नज़र मेरे चेहरे पर ही जम सी गयी थी ..

मैं चुप हो चुका था और भाभी भी कुछ नही बोल रही थी , आख़िर मैने नजरे उठाई , भाभी मुझे प्यार से देख रही थी

“तू जो चाहता है वो नही हो सकता ये जानते हुए भी क्यो तू खुद को धोखा दे रहा है …मैं तुझे नही मिल सकती “

“भाभी मुझे आपको पाना भी नही है मुझे बस आपके सिवा दूसरा कोई पसंद ही नही आता… आप ही बताओ की मैं क्या करू ..”

भाभी अपना सर पकड़कर बैठ गयी थी

वो बहुत देर तक कुछ सोचती रही ..

फिर अचानक से उठ खड़ी हो गयी

“और अगर मैं तुझे मिल जाऊ तो …”

मैं कुछ ना समझने वाली स्तिति मे था मुझे नही पता की भाभी आख़िर बोल क्या रही थी ..

“मतलब???”

“मतलब अगर हम दोनो वो कर ले जो की पति पत्नी या प्रेमी एक दूसरे के साथ करते है तो ..??”

अब मैं क्या बोलता उनकी बात को मैं समझ तो गया था लेकिन मैं रियेक्शन क्या दूं मुझे समझ भी नही आ रहा था , मेरे दिल मे लड्डू फुट रहे थे लेकिन मेरी आँखे भी तो गीली हो रही थी … मुझे लग रहा था की भाभी ये सब मजबूरी मे कर रही थी वही दूसरी ओर दिल मे एक नयी तरंग भी फुट रही थी , शायद मेरे मन की गहराई मे ये इच्छा बलवती होते जा रही थी की मैं भाभी को अपना बना लू..

जी हा अपना बना लू जिस्म के लेवाले मे भी अपना बना लू …

हमारे जिस्म का मिलन हो जाए … हमारी आत्मा का मिलन हो जाए ..

लेकिन आख़िरकार ये सभी कुछ सिर्फ़ बोलने की बाते ही थी आख़िर मुझे महसूस हुआ की मैं जिस्म मे होने वाली एक संवेदना जो की शायद मेरे लिंग मे होगी और मुझे थोड़ी देर के लिए सुख देगी उसके लिए अपने भाभी के सम्मान से खेल रहा हू , जिस्म का मिलना और आत्मा का मिलना बस एक बहाना ही था … आख़िर करना तो सेक्स ही था ..

सेक्स और वो भी अपनी भाभी के साथ .. अपनी भाभी मा के साथ … नही नही क्या ये पाप है ..???

मेरे मन मे चल रहे विचार मेरे चेहरे मे स्पष्ट दिखाई देने लगे थे ..

भाभी ने अपना सर ना मे हिलाया जैसे कह रही हो की ये नही सुधरेगा ..

“तुझे खुद भी पता है की तू क्या चाहता है ??”

भाभी की आवाज़ मे अब थोड़ा गुस्सा भी आ गया था ..

“भाभी मैं आपके सम्मान से नही खेलना चाहता “

उन्होने एक गहरी सांस ली ..

“तुझे मेरे सम्मान की भी फ़िक्र है लेकिन फिर भी तू नशे मे मेरी इज़्ज़त के चिथड़े उतारने से भी पीछे नही रहता .. तुझे मैं भी चाहिए लेकिन तुझे जिस्म के मिलन से भी परहेज है ..

जब मैं सामने से तुझे ऑफर दे रही हू तो भी तुझे दिक्कत है ..

क्या तुझे अपनी भाभी का बलात्कार करके ही मज़ा आएगा “

कहते कहते भाभी का गला ही भर गया था , अजीब सी दुविधा थी , कमरे की हवा मे एक अजीब सी खामोशी घुलने लगी थी ..
 
“भाभी मैं कैसे समझाऊ की आप मेरे लिए क्या हो …कल जो मुझसे हुआ वो मेरी नशे के आवेग मे हुआ मैं आपसे वादा करता हू की मैं कभी ऐसे नशे नही करूँगा , जिसमे मैं सही और ग़लत का फ़र्क भी भूल जाऊ … रही बात जिस्म की तो हा मैं आपको पाना चाहता हू , अपना बनाना चाहता हू , खुद मे मिला लेना चाहता हू एक हो जाना चाहता हू लेकिन ……..लेकिन मैं आपके जिस्म का भोग करके ये सब नही करना चाहता , मैं प्रेम की गहराई मे गोते लगा कर ये सब करना चाहता हू ..

शायद देखने से दोनो ही एक लगे लेकिन मेरे लिए दोनो मे बहुत ही फ़र्क है … मैं आपको प्रेम करना चाहता हू आपको हवस की नज़रो से नही देखना चाहता …

मेरी आँखे अब भी आपके जिस्म पर टिक जाती है लेकिन फिर भी मेरा यकीन मानिए की मैं आपसे ही प्रेम करता हू आपके रूप या जिस्म से नही .. आप मेरे लिए क्या हो मैं ये नही समझा सकता , बस समझ लो की मेरे लिए आप मेरी सब कुछ है …”

मेरी आँखे गीली थी , भाभी की आँखे गीली थी … एक अजीब सा रिश्ता जो ना मैं समझ पा रहा था ना ही भाभी लेकिन ये रिश्ता हमारे बीच बन गया था ..

प्रेम तो हमारे बीच हमेशा से ही था लेकिन ये प्रेम का कौन सा स्वरूप था इसी प्रश्न के उत्तर की तलाश हमे अभी भी थी , हम दोनो ही एक दूसरे के आँखो से बहते हुए नीर को अपने हाथो से सॉफ कर रहे थे, उन्होने मुझे अपनी ओर खिच लिया और अपने सीने से लगा लिया , वो बार बार मेरे सर को पकड़ती और मेरे माथे को चूम लेती थी ..

कितनी अजीब सी बात होई रही थी , वही छातिया थी कभी ये मेरे अंदर हवस जगाती थी तो कभी प्रेम , कभी ये शुकून देती थी तो कभी शुकून ही छीन लेती थी , वही भाभी का जिस्म था जो कभी मेरे लिंग मे अकड़ ला देता था तो कभी दिल मे प्रेम की लहर पैदा कर देता था , कभी उसका स्पर्श ही उत्तेजना का कारण बन जाता था आज उससे लिपटे हुए भी उसमे सामने की कामना करते हुए भी कोई भी उत्तेजना नही थी , बस एक शांति थी …

वो मेरे बालो को सहला रही थी मैं उनके सीने से चिपका हुआ उस प्रेम को महसूस कर रहा था ..

वो अपना जिस्म मेरे लिए न्यौछावर करने को तैयार थी , प्रेम तो वो पहले से मुझपर जी भर कर लूटा रही थी, और मैं अभागा अभी भी अंतरद्वंद मे फँसा हुआ था , अभी भी मेरा जिस्म और भावनाओ के बीच एक द्वंद चल रहा था… मैं एक कदम उठाने को भी सोच रहा था .. खैर अभी मैं कुछ नही सोचना चाहता था अभी तो मैं बस उस नर्म और ममता की गर्मी से गर्म जिस्म के स्पर्श को महसूस करना चाहता था बस उसमे खोए रहना चाहता था ………….
 
Back
Top