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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

पार्टी अपने शबाब पर थी , सुस ने केक काटा और पार्टी शुरू हो गयी , काजल और तिवारी के बाकी के लोग भी अपने अपने कामो मे लगे हुए थे, मोनिका ने भी मुझे पहले प्यार के लिए बधाई दी ..

मैं नेहा से कुछ बात नही कर पा रहा था क्यो की वो मुझसे थोड़ा शर्मा रही थी, वही सुस को उसके पिता मेहमआनो से मिलवा रहे थे थोड़ी देर बाद मेरे सभी दोस्त 1स्ट फ्लोर मे जाकर नाचने लगे थे ..

सभी अपने अपने दोस्तो के ग्रूप के साथ मस्त थे पार्टी का शबाब पूरे जोरो पर चल रहा था सुस भी हमारे ग्रूप को जाय्न कर चुकी थी और सभी दो दो पग लगा कर थिरक रहे थे , ऐसे मैं भी सबके साथ नानच रहा था लेकिन फिर भी मेरा ध्यान कई जगह बनता हुआ था , मैं कभी कभी काजल को देख लिया करता कभी कभी उससे आँखो ही आँखो मे बाते भी हो जाया करती थी की सब सही है या नही …

क्योकि मेरा ध्यान बता हुआ था इसलिए मैं ठीक से एंजाय भी नही कर पा रहा था आख़िर मे मुझसे रहा नही गया और मैं काजल के पास चला गया ..

“सब ठीक तो है ना “

“अभी तक तो ठीक ही लग रहा है , सभी जगह पर सेक्यूरिटी लगे हुए है और कंट्रोल रूम से सब चेक किया जा रहा है ..”

“जीवा का कोई आदमी दिखा क्या ??”

“फिलहाल तो नही “

“आज निशाने पर कौन हो सकता है “

काजल ने मुझे घूरा

“तुम इतना दिमाग़ मत लगाओ यार .. जाओ आपने दोस्तो के साथ एंजाय करो “

और वो फिर से वाकी टॉकी मे किसी के साथ बात करने लगी ..

मुझे पता था की इस समय काजल बहुत ही चिंता मे है और बिज़ी है , लेकिन फिर भी उसका मुझसे इस तरह से बात करना मुझे बिल्कुल पसंद नही आया ..

तभी मैने देखा की एक कपल ध्यान से सागर की तरफ देख रहा है, वो मुस्लिम कपल था , महिला ने बुर्क़ा पहन रखा था वही पुरुष ने सफेद रंग का पठानी शूट डाला हुआ था , और सर पर एक पठानी टोपी भी थी , उसकी लंबी लंबी दाढ़ी थी .. दाढ़ी को लाल रंग से रंगा गया था.. सब कुछ ही सामान्य सा लग रहा था लेकिन मर्द बार बार सागर की ओर इशारा कर रहा था ..
 
ये मुझे थोड़ा खटक गया .. मैं पास ही बने बार मे चला गया जहाँ पर सागर भी अपने कुछ दोस्तो के साथ खड़ा हुआ था, मैने एक पेग विस्की ऑर्डर की और हल्के हल्के चुस्किया लेकर पीने लगा ..

मेरा ध्यान अब भी उस ख़ातून (महिला) और सागर पर ही टिका हुआ था …

थोड़ी ही देर हुए थे की प्रदेश के मुख्य मंत्री जी के आने के कारण महॉल थोड़ा गर्म हो गया था, सभी उनसे मिलने को बेताब हो रहे थे और तभी तिवारी ने सागर को अपने पास आने का इशारा किया , सागर ने हा मे सर हिलाया और अपने मोबाइल मे कुछ देखा , उस समय तक तिवारी सीएम को सुस से मिलवा रहा था साथ ही तिवारी की पूरी फॅमिली भी थी सागर भी मोबाइल मे कुछ देखता हुआ उनके ओर जाने लगा , तभी मेरा ध्यान उन महिला पर पड़ा जो की बुर्क़े मे थी वो भी हलचल मे आ गयी और सागर के पास जाने लगी , मैं तुरंत ही हरकत मे आया और अपना पेग पीकर जानबूझकर थोड़ा लड़ खड़ाते हुए उस महिला और सागर के बीच जा पहुचा , महिला और मेरी आँखे मिल गयी ..

जैसे उसने बुर्क़ा पहन रखा था सिर्फ़ उसकी आँखे ही मुझे दिखाई दे रही थी ..

एक पल के लिए ऐसा लगा की सारी दुनिया ही रुक सी गयी हो…

क्योकि मैं उन आँखो को पहचानता था , अच्छे से जानता था , बचपन से इन्ही आँखो ने तो मुझे ममता का घूट पिलाया था ..

“भाभी ..??”

मेरे मूह अनायास ही निकाला , वही वो मुझे देखकर हड़बड़ाई और जल्दी से पलट कर दूसरी ओर जाने लगी .. मैं भी उनके पीछे हो लिया .. लेकिन तभी मेरी नज़र उस शख्स पर पड़ी जो भाभी के साथ आया था उसने गण निकाल लिया था और ..

ढायं ढायं ढायं…

तीन गोली सीएम और तिवारी के उपर चलाई गयी लेकिन तीनो निशाने पर नही लगी , उससे पहले की सभी का ध्यान उस तक जाता वो अपने पीछे उगे हुए पेड़ो की ओर छलाँग लगा देता है … वही भाभी बंगले के मुख्य मकान की ओर भाग रही थी ..

सीएम और तिवारी के सेक्यूरिटी वाले पागलो की तरह उस आदमी के पीछे दौड़े और गोलिया चलाने ही वाले थे की दूसरी ओर से ढायं ढायं .. कुछ और गोलिया चली , सभी झुक गये थे यहाँ तक की सेक्यूरिटी वालो को भी अब समझ नही आ रहा था की इधर जाए दो तरफ़ से गोली चल रही थी .. वो लोग बैठ गये थे कुछ एक तरफ़ तो कुछ दूसरी तरफ़ भागे ..

लेकिन तब तक वो चालाक व्यक्ति ना जाने कहा गायब हो गया था वही दूसरी ओर से गोली चलाने वाला अब भी किसी की नज़र मे नही आया था , सभी सेक्यूरिटी वाले सीएम और तिवारी के परिवार को घेर कर मुखे भवन की ओर चल पड़े थे , मुझे भी जब इन सबसे होश आया तब तक भाभी मुख्य भवन मे जा चुकी थी , मैं उन्हे पकड़ने के लिए भाग ही रहा था की काजल भी वहाँ आ गयी ..

“तुम उसे पकड़ने की ब्जाय इधर कहा भाग रहे हो “

“भाभी …भाभी इधर भागी है , वो उसके ही साथ ही जिसने गोलिया चलाई है “

“क्या “ काजल भी चौकी ,

सभी तरफ़ अफ़रा तफ़री का महॉल था ,

तिवारी का परिवार सेक्यूरिटी के घेरे मे था वही तिवारी इस हमले से मानो बौखला गया हो …

वो सेक्यूरिटी घेरे को तोड़ कर बाहर आ गया था ..

“कौन है मादरचोद जो मुझे और मेरे परिवार को मारना चाहता है “
 
वो अपनी बंदूक निकाल कर गरजा …

मैं और काजल जब मुखे मकान मे पहुचे तो वहाँ भाभी हमे कही नही दिखी , बस एक वॉशरूम से एक बुर्क़ा ज़रूर मिला ..

“लगता है वो भाग गयी है ..”

बुर्क़े को देखकर मैने कहा था

“यहाँ से भागना इंपॉसिबल है … उन्होने भेष बदला था और अटॅक के बाद तुरंत ही अपने कपड़े उतार कर फेक दिए , अब वो सामान्य कपड़ो मे मेहमानों के साथ घुल मिल गये होंगे …लेकिन सीसीटीवी फुटेज से कैसे बचेंगे , जाने के सभी रास्ते तो बंद है ..”

अब तक सभी गेट बंद कर दिए गये थे , उस व्यक्ति का भी कपड़ा और बंदूक मिल चुका था जिसने गोली चलाई थी , मजेदार बात ये थी की जो गोली दूसरी तरफ़ से चलाई गयी थी वहाँ कोई था ही नही बल्कि बस एक ऑटोमॅटिक बंदूक को सेट किया गया था जो बिना किसी टारगेट के हवा मे गोलिया चला रहा था …

सभी को पता था की जिसने भी ये सब किया है वो अभी यही मौजूद है , सेक्यूरिटी के साथ साथ पुलिस वाले भी गस्ट लिस्ट से सभी का नाम और पहचान मिलन कर रहे थे ताकि जिस पर भी शक़ हो उसे अलग कर पूछतज किया जाए ..

वही सीसीटीवी फुटेज से उस पठान शूट वाले आदमी और उस बुर्क़ा वाली महिला की भी पहचान चल रही थी ..

महॉल गमगीन हो गया था ..

कही किसी को कोई भी नही मिल रहा था ..

“तिवारी ये सब क्या है , तमाशा बना कर रखा है तुमने अभी एलेक्षन सर पर है और ये सब ..”

सीएम तिवारी पर चिल्ला रहा था

“अरे भैया जी , आप ये क्या कह रहे हो , मैं इतना तो नही गिर सकता की मैं खुद के परिवार पर ही हमला करवा दूं ..”

“तुम चुनाव जीतने के लिए कितने गिर सकते हो तिवारी ये तो हमे अच्छे से पता है लेकिन अगर ये तुम्हारा प्लान है भी तो कम से कम हमे तो बता देते .. इससे जो सिंपती मिलेगी उससे हमारी पार्टी का ही तो फ़ायदा है “

सीएम की बात सुन कर तिवारी बुरी तरह से झुंझला गया था ..

“अरे भैया जी आप समझते क्यो नही ये सब मैने नही करवाया है “

तिवारी बुरी तरह से झुंझला गया था ..

“अरे तुमने नही करवाया है तो किसकी इतनी हिम्मत हो गयी जो भारी पार्टी मे इतनी सेक्यूरिटी मे आकर खुले आम गोलिया चला दे और पकड़ाए भी नही … सॉफ दिख रहा है की इसमे किसी अंदर के आदमी का हाथ है “

सीएम की बात सुनकर तिवारी को जैसे साँप ही सूंघ गया था ..
 
“सर फ़िक्र मत कीजिए सीसीटीवी की फुटेज चेक होई रही है वो मिल ही जाएगा “ काजल ने कहा था

“अरे क्या घंटा मिलेगा सब साले मिले हुए है , कही मुझे ही मारकर सीएम की खुर्शी हथियाने का प्लान तो नही था तेरे तिवारी ..”

सीएम की इस बात से तिवारी का भेजा ही गर्म हो गया था ..

“साले अब चुप कर , अगर तुझे मारना होता ना तेरे घर मे घुसकर मारता और तू मेरा झांट भी नही उखाड़ पाता … जानता है ना मैं कौन हू … जिसके नाम से तेरे जैसे लोग कभी पेंट मे मूत दिया करते थे वो दया संकर तिवारी हू मैं ..”

तिवारी के इस रूप को देखकर सीएम सकते मे आ गया था वो कुछ बोलने वाला था लेकिन फिर कुछ सोचकर चुप हो गया .. भाई जान का डर सभी को होता है , भले ही वो सीएम था लेकिन वो अभी तिवारी के घर मे था … और तिवारी ठहरा पुराना गॅंग्स्टर..

तभी एक सेक्यूरिटी का आदमी दौड़ता हुआ आया ..

“सर दो महिलाए पकड़ी गयी है … उनका नाम गस्ट लिस्ट मे नही है और किसके साथ आई है वो भी नही बता रही ..”

हम सभी तेज़ी से वहाँ से बाहर की ओर भागे ..

जब हम वहाँ पहुचे तो उन दोनो को देखकर हम सभी का मूह खुला का खुला रह गया था …

पहली महिला नेहा की आँखो मे देख रही थी ..

“मोंम…???”

नेहा की आँखे गीली थी और मेरे बाकी के दोस्त अपना मूह फाडे उसे ही देख रहे थे ..

“ये .. इन्हे मैने बुलाया है …”

सुस ने नेहा के कंधे पर हाथ रखकर कहा और सेक्यूरिटी ने उन्हे सम्मान के साथ छोड़ दिया , अब बारी थी दूसरी महिला की जिसकी नज़र तिवारी के उपर थी ..

और मेरी नज़र उस महिला के उपर ..

वही तिवारी का मूह खुला का खुला था , सफेद सलवार मे लिपटी हुई यौवन की उस देवी की तो मैं पूजा किया करता था, लेकिन उन्होने मेरी ओर देखा तक नही ..

“कोमल ..????”

तिवारी के मूह से अनायास ही निकल गया ..

“आप किसके साथ बताइए ..”

सेक्यूरिटी की एक महिला ने भाभी से कहा , उन्होने कुछ भी नही कहा , मैं आगे बढ़कर कुछ ही वाला था की ..

“इन्हे छोड़ दो इन्हे मैने इन्वाइट किया था …”

तिवारी ने कहा था .. उसका मूह अब भी खुला का खुला ही था ….
 
“सेक्यूरिटी कॅमरा से सॉफ सॉफ पता चल रहा है की बुर्क़े वाली तुम्हारी भाभी ही है , लेकिन मैने सब फुटेज मिटा दिए है “

काजल ने मेरे कानो मे कहा ,

“लेकिन वो लोग है कहा “

ना ही भाभी और ना ही नेहा की मा दिखाई दे रही थी ,तिवारी भी पहले इधर उधर की चीज़ो मे लगा फिर उन दोनो को ढूँढने लगा ..

“नेता जी वो दोनो तो चले गये ..”

सेक्यूरिटी के एक आदमी ने कहा और तिवारी ने बस एक गहरी सांस छोड़ी ..

पूरा महॉल ही बदल चुका था , नेहा बहुत ही अपस्टेट दिखाई दे रही थी , वही बाकी लोग भी खामोशी ही थे, उनमे से अभी तक किसी को ये नही पता था की दो महिलाओ मे एक मेरी भाभी है लेकिन वो इसलिए दुखी और परेशान थे क्योकि दूसरी महिला नेहा की मा थी …

“तुम दोनो मेरे साथ चलो मैं तुम्हे छोड़ देती हू”

काजल ने मुझे और नेहा से कहा , उसने मेरी आँखो मे देखते हुए ये कहा था , मुझे समझ आ चुका था की इसके पास कोई अलग ही प्लान होगा ..

मैने नेहा के कंधे पर हाथ रखा

“चलो चलते है, अक्की तुम अज्जु के साथ आ जाना “

अक्की ने भी हामी भर दी थी

“मुझे अभी भी यकीन नही हो पा रहा है अंकित की मेरी मों.. वो तो एक सीधी साधी सी इंसान है वो इन सब मे .. नही इन गोलियो के चलने से उनका कोई भी कनेक्षन नही हो सकता , लेकिन वो यहाँ आई क्यो थी “

नेहा मेरे गले से लग कर रोने लगी थी , मैने उसकी पीठ को सहलाया

“अभी घर चलो नेहा , इन सब के बारे मे बाद मे सोचेंगे “

उसने हा मे सर हिलाया और आँखो से आँसू को पोछते हुए मेरे और काजल के साथ बाहर आई ..

काजल ने एक गाड़ी की तरफ़ इशारा किया, वो काले काँच वाली एक suv थी ..

दरवाजा खुलते ही नेहा थोड़ी हड़बड़ाई .

“कुछ मत बोलो चुपचाप बैठ जाओ “ मैने उसके कानो मे कहा था ..

“लेकिन ये लोग “

नेहा ने अंदर देखते हुए कहा , मैने उसके कंधे को पकड़कर हल्के से दबा दिया

“बस बैठ जाओ “

काजल और मैं भी उसमे बैठ गये और कार चल पड़ी..

“आपने ये क्यो किया मा और ये कौन है “

कार के चलने पर नेहा ने कार मे बैठी हुई अपनी मा से कहा ..

उसने भाभी की तरफ़ इशारा किया ..

“अभी इन सब सवालो का समय नही है नेहा .. पहले हम किसी सुरक्षित जगह पर पहुच जाए “

काजल ने गाड़ी चलाते हुए नेहा को जवाब दिया ..

सभी चुप थे , कोई भी किसी से कुछ नही बोल रहा था ,,

काजल ने ही नेहा की मा और मेरी भाभी को वहाँ से सबकी नज़रो से बचाकर निकाला था ..

*******
 
“ये आख़िर हो क्या रहा है आप वहाँ क्या कर रही थी और आपके साथ वो आदमी कौन था “

हम अभी शहर से दूर एक घर के एक कमरे मे थे , मैं अभी भाभी के सामने खड़ा हुआ था , उनके चेहरे मे चिंता के भाव घूम रहे थे..

“मैं संपत मामा के साथ ही सोनू …”

अभी तक नेहा को समझ आ गया था की ये औरत मेरी भाभी है , वो जैसे अब चुप ही हो गयी थी ..

“लेकिन आप उनके साथ वहाँ .. क्या आप तिवारी को मारने गयी थी ??”

“नही .. मुझे तो कहा गया था की सागर को बेहोश करना है , इसके लिए उसके मोबाइल मे एक मेसेज डालकर उसका ध्यान मेरी तरफ आकर्षित कराया जाता फिर मुझे बस उसे ये कहना था की वो बंगले के मुख्य मकान से लगे स्टोरी रूम की तरफ मुझे मिले … वहाँ मुझे एक सुई चुभनी थी ताकि वो बेहोश हो जाए और हम उसे उठा कर ले जाए …”

“लेकिन वो मेसेज देख कर क्यो..??”

काजल भाभी की बातों को बड़े ही ध्यान से सुन रही थी

“क्योकि तिवारी के हेड ऑफ सेक्यूरिटी संपत मामा से मिला हुआ था , उसने सागर को पार्टी मे लड़की सप्लाइ करने के लिए कहा था ..”

“और आप वो लड़की थी “उनका बात सुनकर मेरा मानो खून खौल गया ये संपत भाभी से ये सब करवा रहा था..

“हा .. मैं बस एक चारा थी , हेड ऑफ सेक्यूरिटी ही हमारा आदमी था इसलिए प्राब्लम नही होती लेकिन फिर पता चला की और भी कई लोग को सेक्यूरिटी की ज़िम्मेदारी मिली है और सब साथ मिलकर काम करेंगे , फिर भी हमारा प्लान तो एकदम बढ़िया था, इसी तरह की कोई प्राब्लम नही थी ,, फिर पता नही मामा ने गोलिया क्यो चलाई ये तो प्लान मे था ही नही … “

सभी सोच मे पड़ गये थे ..काजल अचानक से ही बोल पड़ी

“कुछ तो गड़बड़ ज़रूर है .. जीवा कहा था ..”

“मुझे नही पता शायद कालिया बनकर अपनी बस्ती मे ..”

काजल बहुत देर तक सोचती रही फिर बोल उठी

“जिस तरह से गोलिया चलाई गयी थी और जैसे गोली चलाने वाला गायब हो गया था इससे दो चीज़े तो सॉफ है ..पहली ये गोलिया किसी को मरने के लिए नही बल्कि बस डरने के लिए चलाई गयी थी , वरना ऐसी जगह से गोली चलाने पर तिवारी और उसके साथ के सभी लोग आराम से मारे जा सकते थे , और दूसरा जैसा तुमने बताया कोई अंदर का आदमी उनसे मिला हुआ था इसलिए गोली चलाने वाला आराम से निकल गया , तुम सागर की ओर जा रही थी फिर अंकित को देखकर तुमने अपनी दिशा बदल ली थी , क्या उससे प्लान चेंज हुआ होगा ..”

“मुश्किल है क्योकि बात तो बस सागर को उस कमरे तक लाने की थी , मेसेज मिलने के बाद तो वो वहाँ आता ही आता ऐसे भी उसने मुझे देख लिया था, भले ही मैं दिशा बदल दी हो लेकिन इससे प्लान तो चेंज नही हो जाता “

“मतलब संपत पहले से ही गोली चलाने के लिए वहाँ आया था “

“हा शायद इसलिए मैं और भी घबरा गयी , मुझे तो सब पर से भरोशा ही उठ सा गया है , क्या सही है क्या ग़लत कुछ समझ ही नही आ रहा .. संपत और जीवा मामा ने मुझसे कहा था की तिवारी ने मेरी मा की जिंदगी बर्बाद कर दी , और जीवा गैंग को भी धोखा दे कर बर्बाद कर दिया..

उन्होने मुझे तिवारी के बारे ऐसे ऐसे चीज़े बताई की मुझे लगा की तिवारी एक दरिन्दा है , मुझे लड़ना सिखाया गया , और गैंग को फिर से चालू करने की बात कही गयी लेकिन …….

लेकिन जो हुआ उससे वो मैं भी हस्टप्रद हू, और तिवारी की वो आँखे …….. वो किसी दरिंदे की आँखे तो नही लगी मुझे , जैसे उसने मा का नाम लिया और जैसे वो मेरे चेहरे कोई देख रहा था ………और जैसा उसने मेरे साथ व्यवहार किया ..”

भाभी की ये बात तो सही थी , तिवारी की आँखो मे नफ़रत तो नही थी , ना ही डर था जब उसने भाभी को देखा तो उसके चेहरे के भाव कुछ अलग ही थे , बात सोचने वाली थी की उसके घर मे हमला हुआ था और जो मेजर सस्पेक्ट थी उसे तिवारी ने बचा लिया ..

लेकिन तिवारी भाभी से कुछ बोल पाए उससे पहले ही काजल ने उन्हे और नेहा की मा को वहाँ से बाहर निकाल दिया ..
 
लेकिन तिवारी भाभी से कुछ बोल पाए उससे पहले ही काजल ने उन्हे और नेहा की मा को वहाँ से बाहर निकाल दिया ..

“शायद जीवा गैंग को तुम्हारी नही तुम्हारे चेहरे की ज़रूरत थी जो तुम्हारे मा से मिलती है “

काजल ने एक सिगरेट सुलगा ली थी , और वो नेहा की मा की ओर मूडी

“और महिमा जी आप वहाँ क्यो गयी थी “

महिमा ने एक गहरी सांस छोड़ी

“मेरी कहानी तो सभी जानते है , जब नेहा छोटी ही थी तो तिवारी और जीवा ने मिलकर मेरे पति इनस्पेक्टर सत्यप्रकास की हत्या कर दी थी , उस समय मेरी बच्ची छोटी थी इसलिए मैने जहर का घूट पी लिया और शहर आकर इसकी परवरिश करने लगी , नेहा को हमेशा इस बदले की आग से दूर रखा ताकि वो सलामत रह सके , लेकिन मैं उसे कैसे भूल सकती थी , इसलिए मैने अपने तरीके से काम करना शुरू किया .. दिन भर जॉब करती अपनी बेटी को पलटी लेकिन जीवा और तिवारी के बारे मे जानकारी इकठ्ठा करते रहती थी , इसी उम्मीद मे की एक दिन कुद्रट मुझे भी मौका देगी और सही मौका आने पर मैं अपने पति की मौत का बदला ले सकूँगी …. मैं वहाँ भी जानकारी जुपटाने ही गयी थी लेकिन मुझे नही पता था की वहाँ ये सब हो जाएगा , और मेरी बेटी भी वहाँ मौजूद होगी ..”

नेहा ने अपनी मा को कस कर जकड़ लिया

“नही मा अब तो हर लड़ाई हम साथ मिलकर ही लड़ेंगे ..”

“नही बेटी इन सबसे दूर रहना ही सही है..”

“नही मा .. पापा के कातीलो को तो सज़ा मिलेगी .. ज़रूर मिलेगी “

मैं कमरे से बाहर आ चुका था काजल मेरे बाजू मे खड़ी हुई थी , हम दोनो ही सिगरेट की गहरी गहरी कस लगा रहे थे ..

“तुम्हे क्या लगता है तुम्हारी भाभी सही बोल रही है ??”

काजल की बात सुनकर मेरे माथे मे बाल आ गयी

“क्या पता ?? अब तो किसी की बात पर भरोशा ही नही होता “

मैने एक गहरा कस लगाया ..

“तो अब .. अगर भाभी सही कह रही होगी तो समझ लो की वापस जीवा के पास जाना भी कहट्रे से खाली नही है , पता नही की उनका प्लान क्या था जिसमे इसे घुसा दिया गया था , और अगर वो झूठ बोल रही है अगर वो संपत के साथ इस प्लान मे शामिल थी तो भी उनको जीवा के पास ले जाना सही नही होगा, पता नही वो फिर इससे क्या करवाए ..”

“तो… कहा ले जाऊ भाभी को , कितने दिन लोगो की नज़रो से छुपा कर रख पाउन्गा ..”

काजल सोच मे पढ़ गयी

“आख़िर ये सब चल क्या रहा है वो तब ही पता चल पाएगा जब हमे ये पता चलेगा की आख़िर पस्त मे हुआ क्या था , क्यो की सबकी अपनी अपनी कहानी मिलेगी .. लेकिन एक शख्स है जो तुम्हे सही कहानी बता सकती है ..”

काजल की बात सुनकर मेरी आँखे सिकुड गयी

“कौन..??”

“कोमल .. आरती की मा.. आख़िर सब कुछ उससे ही तो जुड़ा हुआ है “

मैने भी हा मे सर हिलाया …
 
हम वही खड़े थे जहाँ से चले थे , मेरा गाँव ..

काजल किसी काम की वजह से हमारे साथ नही आई थी , नेहा , महिमा(नेहा की मा ) , भाभी और मैं एक गाड़ी से रातो रात यहाँ पहुच गये थे ..

वही कॉलेज के बाहर की छोटी सी चाय की तपरी जो की अभी बंद थी ..

उसे देखकर भाभी एक बार के लिए एमोशनल हो गयी ..

भाभी ने अपने घर का पता बताया , घर क्या था 2 कमरो की झो ही कहिए ..

लेकिन उसमे भी ताला लगा था ,

पढ़ोस की महिला ने जैसे ही भाभी को देखा वो उन्हे गला लगाकर रोने लगी ..

“आरती तू कहा थी , और ये क्या सुनने मे आया की तू अपने देवर के साथ भाग गयी .. ऐसा क्यो किया बेटी तूने .. तेरे मा बाप तो जैसे टूट ही गये ये सब सुनकर “

उस महिला की बात से भाभी पर क्या असर हुआ ये तो मुझे नही पता लेकिन हा मुझे अपने भाई पर ज़रूर जोरो का गुस्सा आया , जो गुस्सा उस समय हालत की वजह से मैने अपने अंदर दबा लिया था .. उसने ना सिर्फ़ हमे हमारे ही घर और जिंदगी से निकाल दिया बल्कि हमारे पवित्र रिश्ते को भी बदनाम किया था ..

“मा बाबू जी कहा है काकी “

भाभी ने अपने आप को संभालाते हुए कहा

“क्या पता बेटी जब से वो खबर आई कुछ दिन तक तो उन्होने तुम्हारा रास्ता देखा लेकिन फिर अचानक से गायब हो गये किसी को कुछ भी नही बताया की कहा जा रहे है कब आएँगे ..”

उनकी बात सुनकर सभी के माथे मे बाल पड़ गये थे ..

अब आख़िर ये लोग कहा गायब हो गये थे ..

मैने सबसे दूर हटकर काजल को फोन लगा दिया ..

“ सच को सामने लाने के लिए कोमल का मिलना बहुत ज़रूरी है सोनू , अगर वो नही मिली तो … हमारा तो कुछ नही जाएगा लेकिन रीडर्स का ज़रूर भेजा ख़त्म हो जाएगा :हहे:”

(जस्ट जोकिंग)

“हा आप सही कह रही हो लेकिन .. लेकिन आख़िर वो गयी कहा होगी ..”

“हुम्म एक काम करो एक अड्रेस देती हू वहाँ चले जाओ , शायद वहाँ तुम्हे कोई हेल्प मिल जाए “

काजल ने मुझे मेरे गाँव से 20 किमी दूर जंगल की तरफ़ एक आश्रम का पता दिया ..

मैं सभी को लेकर उस आश्रम की तरफ़ निकल पड़ा..

“हमे कोमल जी को ढूँढना है और तुम ये हमे कहा बाबा वबा के पास ले जा रहे हो “

नेहा ने मुझे गुस्से से कहा

“यार जब कही से कोई उम्मीद नही दिखती ना तो एक ही सहारा बचता है… “
 
“यार जब कही से कोई उम्मीद नही दिखती ना तो एक ही सहारा बचता है… “

मेरी बात सुनकर सभी चुप थे ,

“लेकिन ये बाबा है कौन ??“ इस बार महिमा आंटी ने कहा था

“क्या पता, सुना है कोई बहुत ही सिद्ध बाबा है , सब कुछ जानते है .. कुछ लोग तो उन्हे देवता की तरह पूजते है .. “

जो जानकारी मैने आश्रम के बारे मे अभी तक जुटाई थी उसी आधार पर मैने कहा था ..

कुछ देर के सफर के बाद ही हम आश्रम के बाहर खड़े थे ..

वो आश्रम कोई बहुत ही खास नही लग रहा था बस घास फूस की कुछ झौपड़िया और बस जंगल का साम्राज्य ..

कोई घेरा नही था , जहाँ से पता चलता की आश्रम कहाँ से शुरू होता है और कहा ख़त्म .

हा पास मे एक झरने का आभास ज़रूर हो रहा था, कितनी शांति थी वहाँ ..

जहाँ तक गाड़ी जा सकती थी हम वहाँ तक गाड़ी से गये फिर हमने पगडंडी पकड़ ली थी ..

थोड़ी ही दूर मे हमे लोग मिलने शुरू हो गये वो पेड़ो के नीचे ध्यान लगाए बैठे हुए दिख रहे थे ..

हम थोड़ी ही दूर गये थे की

“हे भगवान “

ये आवाज़ महिमा की थी ,हम सभी ने उस ओर देखा जहाँ वो देख रही थी , सभी का मूह खुला का खुला ही रह गया था

जवान जोड़े पूर्ण तह नंग अवस्था मे एक दूसरे से संभोग मे लिप्त थे .. जैसे दुनिया की कोई भी खबर नही हो , एक दूसरे को ऐसे खा रहे थे जैसे कोई फल को चूस रहे हो , इतना सुंदर संभोग का दृश्य मैने कभी नही देखा था ..

हम सभी की नज़रें वहाँ ऐसे जाम गयी की हम खुद को ही भूल गये थे .. नेहा ने मेरे हाथो को जोरो से पकड़ लिया था ,,

“अरे ये सब क्या देख रहे हो आगे चलो, ना जाने ये कैसी जगह आ गयी मैं अपने जवान बेटी के साथ “

महिमा ने अपना सर झटक कर कहा , उसकी बात से हम सभी को जैसे होश आया , मेरी और नेहा की नज़रें मिली और वो शर्मा गयी .. वही भाभी के चेहरे मे बस एक हल्की सी मुस्कान थी ..

हम थोड़े और आगे गये तो हमे एक विदेशी सी महिला मिल गयी

“नमस्कार आप लोगो का स्वागत है .. क्या आप ही अंकित है “

उसकी हिन्दी सुनकर मैं भी थोड़ा दंग था क्योकि वो पूरी विदेशी लग रही थी , लेकिन थोड़ी इंडियन .. जैसे कोई नृ होई .. भरा हुआ मांसल बदन जो हर ज़रूरत की जाग से कसा हुआ था ..

उसे देख कर मेरे मूह से निकल गया ‘सन्नी लिओन यहाँ’

एक सफेद सारी मे लिपटी हुई टपकती हुई जवानी का झरना थी वो , बस एक सफेद सारी थी उसके जिस्म पर .. बस एक सारी

उसके उभारो को देखकर तो किसी भी मर्द का ईमान डोल जाए तो मैं क्या चीज़ था ..

नेहा ने एक बार मेरे कमर मे जोरो की चींटी की ..

“खा जाओगे क्या उसे जो ऐसे घूर रहे हो “

उसकी आवाज़ मे जलन की बू साफ साफ सुनाई दे रही थी ..

“जी आपको कैसे पता की हम ..”

“काजल कामिनी ने फोन किया था , आइए अंदर आइए “

काजल कामिनी ??? उसने बड़े ही सपाट रूप से कहा था उसके चेहरे मे कोई शिकन तक नही आई थी ..

और वो कहा अंदर आने के लिए कह रही थी , साला यहाँ तो कोई बाउंड्री ही नही था , बस जैसे कोई जंगल हो और जंगल मे कुछ जगह को सॉफ करके छोटा ग्राउंड जैसा बना दिया गया हो ..

हम उसके पीछे चले गये ..

“बाबा जी है ना हमे उनसे ही मिलना है “

मैने उससे पूछ लिया ..

“हा हमारे सिद्ध महाराज बाबा जी आपने भक्तो को घ्यान दे रहे है “

उसने बड़े ही प्यार से कहा

“क्या वो सच मे सिद्ध है “

महिमा के मूह से अचानक से निकल गया

“हा बिल्कुल .. मैं सालो पहले उनके पास अपने पति से झगड़ा करके आई थी ताकि वो हम दोनो को मिला दे .. तब से मैं उनके ही पास हू …”

उसने मुस्कुराते हुए कहा

“और आपका पति ..” नेहा ने पूछ लिया

“मुझे क्या पता ..: “ उसने बेखयाली से कहा

एक पेड़ के नीचे चबूतरा जैसा बना था जिसमे एक व्यक्ति बैठा था .. तो ये ही है वो बाबा जी .. सामने कुछ लोग बैठे हुए थे , हम भी उनमे शामिल हो गये ..

“बाबा जी मेरा पति बहुत ही कमजोर हो गया है कुछ भी नही कर पाता ..”

एक महिला और उसका पति जो की किसी कंकाल की तरह ही दिख रहा था दोनो ही हाथ जोड़कर खड़े हुए ..
 
“ये कुछ नही कर पाता तो दूसरे से करवा देता हू पुत्री …”

पास खड़े एक पहलवान की तरफ इशारा करते हुए बाबा जी ने कहा

उसे देखकर महिला तो जैसे उछल ही पड़ी लेकिन वो इंसान बोल पड़ा

“नही नही महराज ऐसा अन्याय ना करना .. जो करना है मैं ही करूँगा “

“बाबू तूने दारू पी पी कर अपना पूरा माँस तो गला ही दिया अब कुछ करने जाएगा तो बची खुचि हड्डिया भी गल जाएगी “

“नही महराज आप कुछ ऐसा उपाय बताओ की मैं ही कर पाऊँ ..”

“अच्छा ठीक है तो पुत्री इसे दूध पिलाया करो “

“महराज दूध तो पिलाती हू लेकिन साला पिता कम है और मसलता ज़्यादा है ..”महिला की बात सुनकर बाबा जी मुस्कुरा उठे

“अरे बेटी अपना नही कुतिया का दूध पिलाओ इसे तब जाकर कुत्तों जैसे चढ़ाई करेगा तुम्हारे उपर “

महराज की बात सुनकर महिला शर्मा गयी थी

“महराज अगर घोड़ी का पीलॉये तो ..”

“देखो बाबू ज़्यादा लालच नही करते घोड़ी का दूध पीकर अगर ये पढ़ोस की घोड़ियो पर चढ़ने लगा तो फिर तुम्हे ही दुखो होगा ..जाओ कल्याण होगा “

दोनो ही उनका चरन स्पर्श करके वहाँ से निकल गये ..

तभी दूसरी औरत खड़ी हुई ..

“बाबा जी पिछले सप्ताह आपको बताया था ना की मुझे गर्मी बहुत रहती है .. आपने गाजर और खीरा लेने को कहा था “

“हा पुत्री .. तुमने गाजर लिया “

“जी महराज लिया लेकिन फ़ायदा नही हुआ ..”

“श कैसे लिया ..??”

“दो दिन तो आगे से ही लिया फिर सोचा की पीछे से ले के देखु तो पीछे से लिया , फिर खीरा आगे से और गाजर पीछे से लिया फिर..”

“रूको रूको … बेटी लेने का मतलब ऐसा लेना नही उसे मूह से लेना था “

“महराज मूह मे भी लिया ना”

वो शर्मा गयी थी

“बेटी मूह मे नही लेना था .. मूह से लेना था .. मतलब खाना था “

उसकी बात सुनकर वो थोड़ी उदास हो गयी ..

“श खाना था क्या…”

“हा अब की बार उसे खाना , लेने के लिए हम दूसरी चीज़ दे देंगे जो शहर की महिलाओ की असली सहेली होती है .. जिसका नाम दिल से शुरू होता है .. दिल दो… कहा जाता है “

“जाई हो महाराज की ..”

वो महिला चिल्ला उठी ..
 
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