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Badla बदला compleet

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गतान्क से आगे...

आख़िरकार वो दिन भी आ ही गया जब प्रसून & रोमा की शादी हो गयी.देविका आज

बहुत खुश थी.उसने जैसे सोचा था सब कुच्छ वैसे ही हुआ.वो अपने बंगल के

दरवाज़े पे खड़ी जो चंद मेहमान आए थे उन्हे विदा कर रही थी.वीरेन भी उसके

साथ खड़ा था.कामिनी पहले ही उसकी कॉटेज मे जा चुकी थी.सारे मेहमआनो के

जाने के बाद देविका बंगल के अंदर चली गयी & वीरेन अपनी कॉटेज. अपनी कॉटेज

मे दाखिल होते ही वीरेन ने देखा की कामिनी कॉटेज के बेडरूम की खिड़की के

पास खड़ी बाहर देख रही थी,"क्या देख रही हो?",वीरेन ने उसे पीछे से बाहो

मे भर लिया. "वो दूसरी कॉटेज किसकी है?",वीरेन की कॉटेज बंगल से थोड़ा हट

के कुच्छ पेड़ो के पीछे इस तरह से बनी थी कि उसकी 1 खिड़की से बुंगला तो

दूसरी से मॅनेजर की कॉटेज नज़र आती थी & अगर कॉटेज के दूसरे कमरे की

खिड़की से देखते तो सर्वेंट क्वॉर्टर्स नज़र आ जाते लेकन उसकी कॉटेज

सिर्फ़ बंगले से ही नज़र आती थी. "वो मॅनेजर की कॉटेज है.",वीरेन ने उसकी

गर्दन पे चूमा. "लेकिन वाहा इतना अंधेरा क्यू है?",कामिनी ने अपने हाथ

अपने पेट पे बँधे उसके हाथो पे रख दिए. "पता नही.",वीरेन बस उसकी खुश्बू

महसूस करता हुआ उसे चूमे जा रहा था. "मॅनेजर तो वही रहता है फिर कोई

रोशनी क्यू नही है?",कामिनी ने अपना सवाल दोहराया. "अकेला आदमी है.सो गया

होगा.",उसने कामिनी की सारी का पल्लू नीचे गिरा दिया,"..अब उस बेचारे की

कॉटेज मे ऐसा गुल कहा जो गुलज़ार हो.",उसकी बात पे कामिनी को हँसी आ गयी

तो वीरेन ने उसे बाहो मे भरा & अपने बिस्तर की ओर ले जाने लगा.

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रोमा & प्रसून अपने कमरे मे अकेले थे.ये पहली बार था जब प्रसून अपनी मा

के अलावा किसी और औरत के साथ अपने बेडरूम मे रात को सोने वाला था.उसे

काफ़ी शर्म आ रही थी,उसे कपड़े बदलने थे & उसे समझ नही आ रहा की इस लड़की

की मौजूदगी मे वो ऐसा कैसे करे. शर्म तो रोमा को भी आ रही थी मगर वो

जानती थी की इस रिश्ते मे अगर वो ये उम्मीद करे की प्रसून पहल करेगा तो

वो शायद ज़िंदगी भर उस से चुद नही पाएगी.आख़िर था तो वो 1 मर्द के जिस्म

मे बच्चा ही.यहा उसे ही अपनी शर्मोहाया छ्चोड़ अपने पति को भी बेशर्म

बनाना होगा. "सुनिए..",प्रसून उसकी आवाज़ सुन घुमा,"..कपड़े बदलने है ना

आपको?",प्रसून ने हा मे सर हिलाया. "तो बदलते क्यू नही?",वो उसके करीब आ

गयी.प्रसून के गाल जैसे शर्म से जल रहे थे,"..मुझसे कैसा शरमाना.मैं तो

आपकी बीवी हू ना.",वो उसके पास बिस्तर पे बैठ गयी,"..लाइए मैं मदद करती

हू.",उसने उसका कुर्ता पकड़ के उपर किया तो प्रसून पीछे हो गया,"..मैं

खुद कर लूँगा." उसने उसकी तरफ पीठ की & कुर्ता उतारने लगा.रोमा को उसके

बच्पने पे हँसी आ गयी मगर उसने ठान लिया था की अपने पति से वो आज रात

दोस्ती कर ही लेगी.वो भी अपनी सारी उतारने लगी.प्रसून पाजामा उतारने के

लिए बाथरूम जाने लगा तो रोमा ने उसे रोका,"सुनिए." "क्या है?" "ज़रा ये

हुक्स खोल दीजिए ना.मुझ से नही खुलते,",वो उसके सामने ब्लाउस & पेटिकोट

मे खड़ी हो गयी.प्रसून का शर्म के मारे बुरा हाल था.काँपते हाथो से उसने

उसके सीने के बड़े-2 उभारो को ढँके हुए ब्लाउस के हुक्स खोले & फिर वाहा

से जाने लगा,"रुकिये,पहले यहा बैठिए.",हाथ पकड़ रोमा ने उसे अपने साथ

बिस्तर पे बिठाया. "मुझसे शरमाते क्यू हैं.मैं तो आपसे दोस्ती करने आई

हू.",प्रसून ने उसकी तरफ देखा. "हां.",रोमा ने उसका हाथ थाम लिया,"मैं

आपकी दोस्त हू.आप मुझे बताइए की आपको क्या अच्छा लगता है हम वही करेंगे."

भोले प्रसून को उसकी बात बहुत अच्छी लगी,"मुझे पैंटिंग बहुत पसंद है."

"सच.",रोमा ने बहुत खुशी से कहा,"तो दिखाइए ना." "अभी लाता हू.",रोमा ने

अपना ब्लाउस निकाल दिया.अब वो लाल ब्रा मे & पेटिकोट मे बिस्तर पे बैठी

थी. प्रसून उसे अपनी ड्रॉयिंग्स दिखाने लगा.रोमा उस से सॅट के बैठी थी &

उसे थोड़ा अजीब सा अभी भी लग रहा.उसकी नज़र बार-2 रोमा के ब्रा पे जा रही

थी,उसके बदन से आती खुश्बू उसे बहुत अछी लग रही थी & उसने देखा की उसके

पाजामे मे उसका लंड खड़ा हो गया है.1 बार फिर उसे शर्म आने लगी & उसने

अपनी 1 स्केचबुक अपनी गोद मे रख ली. "वाउ!",प्रसून के बाए अरफ़ बैठी रोमा

ने अपना दाया हाथ उसकी नंगी पीठ पे रखा तो वो सिहर गया,"..आप कितनी अच्छी

ड्रॉयिंग करते हैं,प्रसून.मुझे भी सिखाएँगे.",वो 1 बच्चे की तरह मचली मगर

अपने पति के चेहरे की उड़ी रंगत देख उसके माथे पे भी शिकन पड़ गयी. "क्या

हुआ प्रसून?",उसने उसके चेहरे पे हाथ फेरा,".आपकी तबीयत तो ठीक है?",उसके

माथे पे उसने हाथ रख देखा की कही उसे बुखार तो नही. "मैं ठीक हू." "फिर

क्या हुआ?",रोमा ने अपने बाए हाथ से उसका चेहरा अपनी ओर

घुमाया,"बोलिए.अपनी फ्रेंड से नही कहेंगे.",प्रसून को सब कुच्छ बहुत अजीब

सा लग रहा था मगा रोमा की करीबी उसे बहुत भा रही थी.उसका बदन,उसकी खुश्बू

उसे समझ नही आ रहा था की आख़िर ये हो क्या रहा था.रोमा का दाया गाल उसके

करीब था & उसने उसपे हल्के से चूम लिया. रोमा अपने गाल पे हाथ रखथोडा

पीछे हुई & अपना सर झुका लिया तो प्रसून घबरा गया & बिस्तर से उतरने

लगा,"नही." "क्यू जाते हैं?",रोमा ने उसे रोका. "तुम गुस्सा नही हो?",1

बार फिर प्रसून 1 मासूम बच्चा बन गया था. "नही तो..",रोमा फिर से उसके

करीब आ गयी,"..मैं तो आपकी बीवी हू.आप तो मुझे कभी भी प्यार कर सकते

हैं." "कभी भी?" "हां.",रोमा ने उसके होंठो पे अपने गाल रख दिए तो प्रसून

ने फिर से उसे चूमा.जवाब मे रोमा ने भी उसके गाल को चूम लिया.ये मस्ताना

हरकत बच्चो का खेल बन गयी.प्रसून उसका गाल चूमता तो रोमा भी उसका 1 गाल

चूम लेती.वो उसकी नाक चूमता तो वो भी ऐसा ही करती.दोनो हंसते हुए ये खेल

खेल रहे थे.रोमा 1 जवान लड़की थी & प्रसून दिमाग़ से बच्चा था मगर जिस्म

से हटटा-कट्ता जवान मर्द था.उसकी करीबी से वो भी मदहोश हो रही थी & उसके

अरमान भी जाग उठे थे. इस बार उसने प्रसून के नंगे बालो भरे सीने पे

बीचोबीच चूम लिया.खेल मे मगन प्रसून ने भी आव देखा ना ताव & उसके ब्रा से

झाँकते उसके बड़े क्लीवेज पे चूम लिया मगर चूमते ही उसे ऐसा लगा मानो

उसने बहुत बड़ी ग़लती कर दी & वो झट से पीछे हो गया लेकिन रोमा ने ऐसे

जताया जैसे उसे कुछ लगा ही ना हो & उसने झुक के प्रसून के पेट पे चूम

लिया. अब प्रसून को भी लगा की उसकी नयी दोस्त उसके साथ खेल ही रही

है.उसने भी उसके पेट पे चूम लिया.रोमा का जिस्म अब पूरी तरह से गरम हो

चुका था.वो बिस्तर पे ही खड़ी हो गयी,"उम्म....चलिए पहले कपड़े बदल लेते

हैं फिर खेलेंगे.",उसने अपनी पेटिकोट की डोर खोल दी.अब वो लाल रंग की लेस

की ब्रा & पॅंटी मे थी,"आप भी बदलिए ना कपड़े." बहुत शरमाते हुए प्रसून

ने अपना पाजामा नीचे किया.रोमा ने अपने पति को केवल 1 काले अंडरवेर मे

देखा तो जैसे उसकी टाँगो ने उसका साथ छ्चोड़ दिया.उसका गला सुख गया &

उसने थूक गटका.उसने अपनी पीठ प्रसून की तरफ कर दी & अपने बाल अपने हाथो

मे पकड़ अपनी पीठ से हटाए,"ज़रा ये हुक खोल दीजिए." प्रसून ने उसकी बात

मानी & जैसे ही उसने ब्रा के हुक्स को खोला रोमा उसे अपने सीने से नीचे

गिराती हुई घूम कर उसके सामने आ गयी.रोमा की 34 साइज़ की बड़ी-2 चूचिया &

उनपे सजे हुए जोश से कड़े भूरे निपल्स अब प्रसून की आँखो के सामने

थे.उसने ज़िंदगी मे पहली बार 1 औरत की नंगी चूचिया देखी थी,"ऐसे क्या देख

रहे हैं?" प्रसून ने जैसे अपनी बीवी का सवाल सुना ही नही.उसे वो गेंद

जीसी चीज़े बड़ी अजीब सी लग रही थी,"क्या हुआ?पहले कभी नही देखी क्या

आपने ये?",रोमा ने अपनी मस्त चूचियो की ओर इशारा किया.प्रसून ने ना मे सर

हिलाया. "तो अब देख लीजिए.",रोमा ने उसका हाथ पकड़ के अपने सीने पे रख

दिया.उसे खुद पे भी हैरत हो रही थी की वो इतनी बेबाक कैसे हो गयी थी की

पहली रात को ही अपने पति से ऐसे खुल के पेश आ रही थी.माना की वो

मंदबुद्धि था फिर भी उसकी शर्मोहाया यू हवा हो जाएगी उसे उम्मीद भी नही

थी. "उम्म..",प्रसून ने उसकी चूची को हौले से दबाया तो उसकी टाँगो ने

उसका साथ छ्चोड़ दिया & वो बिस्तर पे गिर पड़ी. "क्या हुआ

रोमा?सॉरी...मैं अब ज़ोर से नही दबाउन्गा..!",घबराया प्रसून आँखे बंद किए

रोमा के उपर झुका हुआ था.रोमा के अपने इस बुद्धू पति पे बहुत प्यार आया &

उसने उसे अपने उपर खींचा & उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए.उसकी ज़ुबान

प्रसून के मुँह मे घुस उसकी जीभ से लड़ने लगी तो प्रसून घबरा गया & उसकी

बाँहो से निकलने की कोशिश करने लगा मगर रोमा अब पूरी तरह से बेकाबू हो

गयी थी.उसने उसे नही छ्चोड़ा. प्रसून अपनी बीवी के उपर पड़ा हुआ था &

उसका लंड उसकी चूत पे था.उसका दिमाग़ कमज़ोर था उसका जिस्म नही & चूत को

महसूस करते ही उसकी कमर अपने आप हिलने लगी & वो अपने अंडरवेर के अंदर से

& उसकी पॅंटी के उपर से ही धक्के लगाने लगा.रोमा की कमर भी हिल रही

थी.अचानक प्रसून को अपने अंदर बहुत ही मज़ा जैसा कुच्छ लगा & उसकी कमर और

ज़ोर से हिलने लगी & वो अपने उंड़रएवर मे ही झाड़ गया. रोमा ने भी ये

महसूस किया & उसे थोड़ी खिज महसूस हुई.प्रसून को अब बहुत ज़्यादा शरम आई

& वो जल्दी से रोमा के उपर से उतरा & बाथरूम मे भाग गया.

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"ऊन्नह...ऊन्नह....!",कामिनी बिस्तर के हेडबोड को हाथो से पकड़े अपने

घुटनो पे बिस्तर पे थी & वीरेन उसकी अन्द्रुनि जाँघो को चूम रहा

था.पिच्छले 1 घंटे मे वो कोई 2 बार झाड़ चुकी थी मगर अभी तक उसकी चूत ने

उसके लंड से मुलाकात नही की थी. "आऐइययईईए....!",कामिनी ने हेडबोर्ड को

और ज़ोर से पकड़ लिया क्यूकी वीरेन की लपलपाति जीभ अब उसके दाने को चाट

रही थी & उसकी उंगली भी उसके चूत मे अंदर-बाहर हो रही थी.वो तीसरी बार

झड़ने के करीब पहुँच रही थी जब वीरेन ने अपनी ज़ुबान & उंगली को उसकी

चिकनी चूत से पीछे हटाया & अपना लंड उसमे दाखिल करा दिया. कमरे मे अंधेरा

था बस खिड़की से आती चाँदनी ही वाहा मौजूद थी & माहौल को और नशीला बना

रही थी.वीरेन उसकी चौड़ी गंद की फांको को फैलाते हुए अपने लंड को जड तक

उसकी चूत मे धँसाते हुए धक्के लगा रहा था.कामिनी का बुरा हाल था.लंड के

घुसते ही 3-4 धक्को मे ही वो झाड़ गयी थी मगर वीरेन की चुदाई मे उसे फिर

से तुरंत मस्त कर दिया था.चोद्ते हुए वीरेन झुका & अपने दाए हाथ से उसकी

चूचिया भींच के उन्हे मसलते हुए उसकी पीठ & गर्दन पे किस्सस की बौछार कर

दी. कामिनी अपने प्रेमी की मस्ताना हर्कतो से और मदहोश हो गयी & बेचैन हो

उसने अपना सर दाए तरफ घुमाया,वीरेन उसके बाए कंधे को चूमते हुए धक्के लगा

रहा था.सर घूमते ही कामिनी की नज़र कमरे की खिड़की पे पड़ी & उसके मुँह

से चीख निकलते-2 रह गयी.वाहा कोई आदमी खड़ा उनकी चुदाई देख रहा था जो

उसके सर घूमते ही वाहा से हट गया था. कामिनी को घबराहट हुई मगर उस वक़्त

उसका दिल उसके जिस्म का गुलाम था & उसका जिस्म वीरेन का लंड उसकी कोख पे

चोट कर उसके जिस्म मे मस्ती की लहरें दौड़ा रहा था.वीरेन ने अपना सर उसके

बाए कंधे से उठाया & उसके दाए तरफ घूमे हुए सर को अपने 1 हाथ से उपर कर

उसके लब से अपने लब लगा दिए.कामिनी भी उसकी किस मे सब भूल अपनी कमर

हिलाके चुदाई का मज़ा लेने लगी. "क्या कर रहे हैं,प्रसून?",बाथरूम मे

अपना अंडरवेर उतार के अपना लंड धोते प्रसून से रोमा ने पुचछा. "आप कितना

शरमाते हैं!",प्रसून उसे देख अपना लंड च्छुपाने लगा था,"ये देखिए मेरी भी

तो पॅंटी गीली हो गयी है.",रोमा ने इशारा किया तो प्रसून ने देखा की

सकमूच उसकी बीवी की पॅंटी के लेस पे भी 1 बड़ा सा धब्बा पड़ा हुआ था.वो

कुच्छ बोलता उस से पहले ही रोमा ने अपनी पॅंटी उतार दी & अपनी रस बहाती

चूत अपने पति के सामने कर दी. "ये देखिए..",प्रसून अपना नन्गपन भूल हैरत

मे रोमा की चूत देख रहा था.पहली बार उसने किसी जवान औरत को इस तरह नंगी

देखा था,"..चलिए उठिए.",उसने उसे हाथ पकड़ उठाया & फिर 1 तौलिया ले उसका

लंड पोंच्छ दिया.प्रसून ने दूर हटने की कोशिश की मगर रोमा ने उसकी 1 ना

सुनी. प्रसून तो झाड़ चुका था मगर रोमा की आग अभी भी वैसे ही भड़क रही

थी.प्रसून के लंड के एहसास ने उसे और पागल कर दिया था.सिकुड़ने के बावजूद

लंड कोई 4-5 इंच लंबा लग रहा था.उसके सख़्त होने पे उसकी लंबाई के बारे

मे सोच के रोमा की चूत फिर से गीली होने लगी. अपने पति का हाथ पकड़ वो

उसे वापस कमरे मे लाई & बिस्तर पे लिटा दिया,"आज से आपके सारे काम मैं

करूँगी.ठीक है.",वो भी उसके बगल मे लेट गयी,"..और आप भी 1 प्रॉमिस करिए."

"क्या?",प्रसून अपनी इस दोस्त की बातो से हैरान था. "कि आप मुझ से कभी भी

नही शरमाएँगे.ओके!" "ओके,प्रॉमिस." "थॅंक्स.",रोमा ने उसके गाल पे चूम

लिया & फिर उसे उसकी 1 स्केचबुक थमा दी,"चलिए अपनी और ड्रॉयिंग्स

दिखाइए." प्रसून उसे खुश होके ड्रॉयिंग्स दिखाने लगा & उनके बारे मे

बताने लगा. "आपके चाचा तो बहुत अच्छी ड्रॉयिंग करते हैं,प्रसून.आप उनसे

क्यू नही कहते की आपको सिखाएं." "हां,चाचा भी मुझे बेस्ट पेंटर कहते

हैं.पर मुझे तो सब आता है.मैं उनसे क्यू सीखू?",प्रसून के मासूम सवाल पे

रोमा को हँसी आ गयी.वो उसके बाई तरफ लेटी थी,उसने करवट बदली & प्रसून के

गाल पे प्यार से हाथ फेरा,"वो आपसे बड़े हैं ना & पता है उन्हे बहुत

प्राइज़स भी मिले हैं.वो आपको नये-2 रंगो के बारे मे भी बताएँगे & अलग-2

ड्रॉयिंग्स के बारे मे भी.",रोमा ने ये जानते ही की प्रसून ड्रॉयिंग करता

है,ये तय कर लिया था की वो अपने पति को अपने इस हुनर को और निखारने के

लिए ज़रूर प्रेरित करेगी. प्रसून ने जैसे उसकी बात नही सुनी थी & वो उसके

सीने को देखे जा रहा था,"क्या देख रहे हैं?" "तुम्हारे यहा पे बॉल क्यू

नही हैं?",उसने उसकी छातियो पे हाथ फेरा तो रोमा के बदन मे बिजली सी दौड़

गयी. "तो आपका सीना भी तो मेरे जैसा नही.",उसने उसके सीने के बालो मे हाथ

फिराया,"..जो आपके पास है वो मेरे पास नही & जो मेरे पास है वो आपके पास

नही.भगवान जी ने हमे जान के ऐसे बनाया है ताकि हम दोनो 1 दूसरे के पास से

वो ले लें जो हमारे पास नही है." उसने उसका हाथ पकड़ के अपनी चूत पे

लगाया"देखिए ये जगह भी आपके जैसी नही है ना." "हां.",प्रसून का लंड 1 बार

फिर खड़ा हो गया.रोमा की चूत पे हाथ फिराते हुए उसने अपनी 1 उंगली अंदर

डाल दी,"ऊव्व!" घबरा के प्रसून ने हाथ पीछे खींच लिया,"इतनी ज़ोर से नही

प्रसून आराम से कीजिए.",रोमा उठ के बैठ गयी तो प्रसून भी बैठ गया.दोनो

आमने-सामने बैठे थे,"..हां ऐसे ही धीरे से अंदर बाहर कीजिए.",उसने प्रसून

का हाथ पकड़ उसे उंगली से चूत मारना सिखाया.उसका दिल तो कर रहा था की

प्रसून के तने लंड को जो अब 9 इंच का हो गया था पकड़ के हिला दे मगर उसे

डर था की उसका अनारी पति कही फिर ना झाड़ जाए. "अब ऐसे इस्पे गोल-2..हां

बिल्कुल ऐसे..आअहह..",वो उसे अपने दाने को छेड़ना सीखा रही थी,"..रुक

क्यू गये?" "तुम्हे दर्द हो रहा है,तुम कराहती हो." "ओह्ह..मेरे

राजा!",उसने अपने भोले-भले पति के होंठ चूम लिए,"..जब मज़ा आता है तब भी

लड़किया कराहती हैं & आप घबराईए मत अगर मुझे तकलीफ़ होगी तो मैं आपको

बोलूँगी की रुक जाइए.ठीक है!",प्रसून ने बच्चो जैसे सिर हिलाया & उसकी

चूत मारने लगा.थोड़ी ही देर मे रोमा उसकी उंगलियो से परेशान हो अपनी कमर

हिलाके झड़ने लगी.उसने प्रसून की कलाइया कस के पकड़ के उन्हे रोक

दिया,उसे बहुत तकलीफ़ सी हो रही थी मगर साथ ही इतनी खुशी भी हो रही थी की

उसके आँसू निकल आए. "तुम रो रही हो,रोमा?",प्रसून उसे हैरत से देख रहा

था. "नही मेरी जान.",रोमा ने उसे खींच के अपने सीने से लगा लिया & उसके

सर को चूमने लगी.प्रसून का लंड उसके पेट मे चुभ रहा था.अब वक़्त आ गया था

की उसके अनारी पति को खिलाड़ी बनाया जाए. वो उसे लिए-दिए लेट गयी.बीवी के

उपर लेटते ही प्रसून की कमर फिर से खुद बा खुद हिलने लगी.अब उसे रोमा का

उसके मुँह मे अप्नी जीभ डालना भी बहुत अच्छा लग रहा था.रोमा ने उसे बोल

कर उसकी जीभ भी अपने मुँह मे घुस्वाई.प्रसून को इस खेल मे बहुत मज़ा आ

रहा था.उसके आंडो मे मीठा सा दर्द हो रहा था जिसका एहसास उसके लिए

बिल्कुल अनोखा था. "प्रसून,आप अपने घुटनो पे बैठ जाइए..",रोमा ने अपनी

टाँगे फैला प्रसून को उनके बीच लिया,"..हां..अब इसे यहा

घुसाइये..",प्रसून को मा की कही बात याद आ गयी & वो अपना लंड रोमा की चूत

मे धकेलने की कोशिश करने लगा. "ऊओवव्व..!रुकिये,प्रसून....ऐसे नही ..1

मिनिट..",उसने उसका लंड पकड़ा & अपनी चूत पे रखा,"..हां अब हल्के से

घुसाइए.",प्रसून ने उसकी बात मान हल्के से धक्का लगाया मगर नाकाम रहा.

"फिर से कोशिश कीजिए..",रोमा समझ गयी की उसकी कसी चूत की वजह से ये हो

रहा है,"..1 मिनिट रुकिये.",उसने दाए हाथ मे लंड को पकड़ा & बाए की 2

उंगलियो से अपनी चूत को फैलाया,"..अब घुसाइए." "आहह..!",इस बार लंड थोड़ा

अंदर घुसा & इसके बाद तो जैसे प्रसून को सब खुद समझ मे आ गया.उसने ऐसे

ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू किए की ना सिर्फ़ रोमा की चूत मे वो जड़ तक

समा गया बल्कि 4 धक्को मे ही रोमा दोबारा झाड़ गयी.उसे पता ही ना चला की

उसे बहुत दर्द हो रहा है क्यूकी उसके उपर तो खुमारी च्छाई हुई थी. प्रसून

1 बार झाड़ चुका था & अब उसे वक़्त लग रहा था मगर वो था तो अनारी ही.वो

बस उउन्ण उउन्ण करता पागलो की तरह धक्के लगाए जा रहा था,"प्रसून..",अपनी

बीवी की आवाज़ सुन अपने हाथो पे आँखे बंद किए,उठे प्रसून ने उसे देखा तो

रोमा ने उसे खींच के अपने उपर सुला लिया & उसके हाथो को अपनी चूचियो पे

लगा दिया,"..इन्हे दबाइए & इन्हे किस भी कीजिए." धक्के लगाता प्रसून अपनी

नयी-नवेली दुल्हन से इस खेल के नये-2 गुर सीखने लगा.

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क्रमशः.........
 
बदला पार्ट--26 गतान्क से आगे... aakhirkar vo din bhi

aa hi gaya jab Prasun & Roma ki shadi ho gayi।devika aaj bahut khush

thi।usne jaise socha tha sab kuchh vaise hi hua।vo apne bungle ke

darwaze pe khadi jo chand mehman aaye the unhe vida kar rahi thi.Viren

bhi uske sath khada tha.Kamini pehle hi uski cottage me ja chuki

thi.sare mehmano ke jane ke baad devika bungle ke andar chali gayi &

viren apni cottage. apni cottage me dakhil hote h viren ne dekha ki

kamini cottage ke bedroom ki khidki ke paas khadi bahar dekh rahi

thi,"kya dekh rahi ho?",viren ne use peechhe se baaho me bhar liya.

"vo dusri cottage kiski hai?",viren ki cottage bungle se thoda hat ke

kuchh pedo ke peechhe is tarah se ban th k uski 1 khidki se bungla to

dusri se manager ki cottage nazar aati thi & agar cottage ke dusre

kamre ki khidki se dekhte to servant quarters nazar aa jate lekn uski

cottage sirf bungle se hi nazar aati thi. "vo manager ki cottage

hai.",viren ne uski gardan pe chuma. "lekin vaha itna andhera kyu

hai?",kamini ne apne hath apne pet pe bandhe uske hatho pe rakh diye.

"pata nahi.",viren bas usk khushbu mehsus karta hua use chume ja raha

tha. "manager to vahi rehta hai fir koi roshni kyu nah hai?",kamini ne

apna sawal dohraya. "akela aadmi hai.so gaya hoga.",usne kamini ki

sari ka pallu neeche gira diya,"॥ab us bechare ki cottage me aisa gul

kaha jo gulzar ho.",uski baat pe kamini ko hansi aa gayi to viren ne

use baaho me bhara & apne bistar ki or le jane laga.

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roma & prasun apne kamre me akele the.ye pehli baar tha jab prasun

apni maa ke alawa kisi aur aurat ke sath apne bedroom me raat ko sone

wala tha.use kafi sharm aa rahi thi,use kapde badalne the & use samajh

nahi aa raha ki is ladki ki maujoodgi me vo aisa kaise kare. sharm to

roma ko bhi aa rahi thi magar vo janti thi ki is rishte me agar vo ye

ummeed kare ki prasun pahal karega to vo shayad zindagi bhar us se

chud nahi payegi.aakhir tha to vo 1 mard ke jism me bachcha hi.yaha

use hi apni sharmohaya chhod apne pati ko bhi besharm banana hoga.

"suniye..",prasun uski aavaz sun ghuma,"..kapde badalne hai na

aapko?",prasun ne haa me sar hilaya. "to badalte kyu nahi?",vo uske

karib aa gayi.prasun ke gaal jaise sharm se jal rahe the,"..mujhse

kaisa sharmana.main to aapki biwi hu na.",vo uske paas bistar pe baith

gayi,"..laiye main madad karti hu.",usne uska kurta pakad ke upar kiya

to prasun peechhe ho gaya,"..main khud kar lunga." usne uski taraf

pith ki & kurta utarne laga.roma ko uske bachpane pe hansi aa gayi

magar usne than liya tha ki apne pati se vo aaj raat dosti kar hi

legi.vo bhi apni sari utarne lagi.prasun pajama utarne ke liye

bathroom jane laga to roma ne use roka,"suniye." "kya hai?" "zara ye

hooks khol dijiye na.mujh se nahi khulte,",vo uske samne blouse &

petticoat me khadi ho gayi.prasun ka sharm ke mare bura haal

tha.kaanpte hatho se usne uske seene ke bade-2 ubharo ko dhanke hue

blouse ke hooks khole & fior vaha se jane laga,"rukiye,pehle yaha

baithiye.",hath pakad roma ne use apne sath bistar pe bithaya. "mujhse

sharmate kyu hain.main to aapse dosti karne aayi hu.",prasun ne uski

taraf dekha. "haan.",roma ne uska hath tham liya,"main aapki dost

hu.aap mujhe bataiye ki aapko kya achha lagta hai hum vahi karenge."

bhole prasun ko uski baat bahut achhi lagi,"mujhe painting bahut

pasand hai." "sach.",roma ne bahut khushi se kaha,"to dikhaiye na."

"abhi lata hu.",roma ne apna blouse nikla diya.ab vo laal bra me &

petticoat me bistar pe baithi thi. prasun use apni drawings dikhane

laga.roma us se sat ke baithi thi & use thoda ajib sa abhi bhi lag

raha.uski nazar baar-2 roma ke bra pe ja rahi thi,uske badan se aati

khushbu use bahut achi lag rahi thi & usne dekha ki uske pajame me

uska lund khada ho gaya hai.1 baar fir use sharm aane lagi & usne apni

1 sketchbook apni god me rakh li. "wow!",prasun ke baaye araf baithi

roma ne apna daya hath uski nangi pith pe rakha to vo sihar

gaya,"..aap kitni achhi drawing karte hain,prasun.mujhe bhi

sikhayenge.",vo 1 bachche ki tarah machli magar apne pati ke chehre ki

udi rangat dekh uske mathe pe bhi shikan pad gayi. "kya hua

prasun?",usne uske chehre pe hath fera,".aapki tabiyat to thik

hai?",uske mathe pe usne hath rakh dekha ki kahi use bukhar to nahi.

"main thik hu." "fir kya hua?",roma ne apne baye hath se uska chehra

apni or ghumaya,"boliye.apni friend se nahi kahenge.",prasun ko sab

kuchh bahut ajib sa lag raha tha maga roma ki karibi use bahut bha

rahi thi.uska badan,uski khushbu use samajh nahi aa raha tha ki aakhir

ye ho kya raha tha.roma ka daya gaal uske karib tha & usne uspe halke

se chum liya. roma apne gaal pe hath thoda peechhe hui & apna sar

jhuka liya to prasun ghabra gaya & bistar se utarne laga,"nahi." "kyu

jate hain?",roma ne use roka. "tum gussa nahi ho?",1 baar fir prasun 1

masum bachha ban gaya tha. "nahi to..",roma fir se uske karib aa

gayi,"..main to aapki biwi hu.aap to mujhe kabhi bhi pyar kar sakte

hain." "kabhi bhi?" "haan.",roma ne uske hotho pe apne gaal rakh diye

to prasun ne fir se use chuma.jawab me roma ne bhi uske gaal ko chum

liya.ye mastana harkat bachcho ka khel ban gayi.prasun uska gaal

chumta to roma bhi uska 1 gaal chum leti.vo uski naak chumta to vo bhi

aisa hi karti.dono hanste hue ye khel khel rahe the.roma 1 jawan ladki

thi & prasun dimagh se bachcha tha magar jism se hatta-kaat jawan mard

tha.uski karibi se vo bhi madhosh ho rahi thi & uske arman bhi jaag

uthe the. is baar usne prasun ke nange baalo bhare seene pe

beechobeech chum liya.khel me magan prasun ne bhi aav dekha na taav &

uske bra se jhankte uske bade cleavage pe chum liya magar chumte hi

use aisa laga mano usne bahut badi galti kar di & vo jhat se peechhe

ho gaya lekin roma ne aise jataya jaise use kcuhh laga hi na ho & usne

jhuk ke prasun ke pet pe chum liya. ab prasun ko bhi lga ki uski nayi

dost uske sath khel hi rahi hai.usne bhi uske pet pe chum liya.roma ka

jism ab puri tarah se garam ho chuka tha.vo bistar pe hi khadi ho

gayi,"umm....chaliye pehle kapde badal lete hain fir khelenge.",usne

apni petticoat ki dor khol di.ab vo laal rang ki lace ki bra & panty

me thi,"aap bhi badaliye na kapde." bahut sharmate hue prasun ne apna

pajama neeche kiya.roma ne apne pati ko kewal 1 kale underwear me

dekha to jaise uski tango ne uska sath chhod diya.uska gala sukh gaya

& usne thuk gatka.usne apni pith prasun ki taraf kar di & apne baal

apne hathoi me pakad apni pith se hataye,"zara ye hook khol dijiye."

prasun ne uski baat mani & jaise hi usne bra ke hooks ko khola roma

use apne seene se neehe girati hui ghum kar uske samne aa gayi.roma ki

34 size ki badi-2 chhatiya & unpe saje hue josh se kade bhure nipples

ab prasun ki aankho ke samne the.usne zindagi me pehli baar 1 aurat ki

nangi chhatiya dekhi thi,"aise kya dekh rahe hain?" prasun ne jaise

apni biwi ka sawal suna hi nahi.use vo gend jisi chize badi ajib si

lag rahi thi,"kya hua?pehle kabhi nahi dekhi kya aapne ye?",roma ne

apni mast choochiyo ki or ishara kiya.prasun ne na me sar hilaya. "to

ab dekh lijiye.",roma ne uska hath pakad ke apne seene pe arkh

diya.use khud pe bhi hairat ho rahi thi ki vo itni bebak kaise ho gayi

thi ki pehli raat ko hi apne pati se aise khul ke pesh aa rahi

thi.maana ki vo mandbuddhi tha fir bhi uski sharmohaya yu hawa ho

jayegi use ummeed bhi nahi thi. "umm..",prasun ne uski choochi ko

haule se dabaya to uski tango ne uska sath chhod diya & vo bistar pe

gir padi. "kya hua roma?sorry...main ab zor se nahi

dabaunga..!",ghabraya prasun aankhe band ki roma ke upar jhuka hua

tha.roma ke apne is buddhu pati pe bahut pyar aaya & usne use apne

upar khincha & uske hotho se apne honth laga diye.uski zuban prasun ke

munh me ghus uski jibh se ladne lagi to prasun ghabra gaya & uski baho

se nikalne ki koshish akrne laga maga roma ab puri tarah se bekabu ho

gayi thi.usne use nahi chhoda. prasun apni biwi ke upar pada hua tha &

uska lund uski chut pe tha.uska dimagh kamzo tha uska jism nah & chut

ko mehsus karte hi uski kamar apne aap hilne lagi & vo apne underwear

ke andar se & uski panty ke upar se hi dhakke lagane laga.roma ki

kamar bhi hil rahi thi.achanak prasun ko apne andar bahut hi maza

jaisa kuchh laga & uski kamar aur zor se hilne lagi & vo apne

underewar me hi jhad gaya. roma ne bhi ye mehsus kiya & use thodi khij

mehsus hui.prasun ko ab bahut zyada sham aayi & vo jaldi se roma ke

upar se utra & bathroom me bhag gaya.

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"oonnhhh...oonnhhh....!",kamini bistar ke headboad ko hatho se pakde

apne ghutno pe bistar pe thi & viren uski andruni jangho ko chum raha

tha.pichhle 1 ghante me vo koi 2 baar jhad chuki thi magar abhi tak

uski chut ne uske lund se mulakat nahi ki thi.

"aaaiiyyeeeee....!",kamini ne headboard ko aur zor se pakad liya kyuki

viren ki laplapati jibh ab uske dane ko chat rahi thi & uski ungli bhi

uske chut me andar-bahar ho rahi thi.vo teesri baar jhadne ke karib

pahunch rahi thi jab viren ne apni zuban & ungli ko uski chikni chut

se peechhe hataya & apna lund usme dakhil kara diya. kamre me andhera

tha bas khidki se aati chandni hi vaha maujood thi & mahaul ko aur

nashila bana rahi thi.viren uski chaudi gand ki fanko ko failate hue

apne lund ko jud tak uski chut me dhansate hue dhakke laga raha

tha.kamini ka bura haal tha.lund ke ghuste hi 3-4 dhakko me hi vo jhad

gayi thi magar viren ki chudai me use fir se turant mast kar diya

tha.chodte hue viren jhuka & apne daye hath se uski choochiya bhinch

ke unhe maslate hue uski pith & gardan pe kisses ki bauchhar kar di.

kamini apne premi ki mastana harkato se aur madhosh ho gayi & bechain

ho usne apna sar daye taraf ghumaya,viren uske baye kandhe ko chumte

hue dhakke laga raha tha.sar ghumate hi kamini ki nazar kamre ki

khidki pe padi & uske munh se chikh nikalte-2 reh gayi.vaha koi aadmi

khada unki chudai dekh raha tha jo uske sar ghumate hi vaha se hat

gaya tha. kamin ko ghabrahat hui magar us waqt uska dil uske jism ka

ghulam tha & uska jism viren ka.viren ka lund uski kokh pe chot kar

uske jism me masti ki lehren dauda raha tha.viren ne apna sar uske

baye kandhe se uthaya & uske daye taraf ghume hue sar ko apne 1 hath

se upar kar uske lab se apne lab laga diye.kamini bhi uski kiss me sab

bhul apni kamar hilake chudai ka maza lene lagi. "Kya kar rahe

hain,Prasun?",bathroom me apna underwear utar ke apna lund dhote

prasun se roma ne puchha. "aap kitna sharmate hain!",prasun use dekh

apna lund chhupane laga tha,"ye dekhiye meri bhi to panty gili ho gayi

hai.",roma ne ishara kiya to prasun ne dekha ki sacmuch uski biwi ki

panty ke lace pe bhi 1 bada sa dhabba pada hua tha.vo kuchh bolta us

se pehle hi roma ne apni panty utar di & apni ras bahati chut apne

pati ke samne kar di. "ye dekhiye..",prasun apna nangapan bhul hairat

me roma ki chut dekh raha tha.pehli baar usne kisi jawan aurat ko is

tarah nangi dekha tha,"..chaliye uthiye.",usne use hath pakad uthaya &

fir 1 tauliya le uska lund ponchh diya.prasun ne dur hatne ki koshish

ki magar roma ne uski 1 na suni. prasun to jhad chuka tha magar roma

ki aag abhi bhi vaise hi bhadak rahi thi.prasun ke lund ke ehsas ne

use aur pagal kar diya tha.sikudne ke bavjood lund koi 4-5 inch lamba

lag raha tha.uske sakht hone pe uski lambai ke bare me soch ke roma ki

chut fir se gili hone lagi. apne pati ka hath pakad vo use vapas kamre

me layi & bistar pe lita diya,"aaj se aapke sare kaam main

karungi.thik hai.",vo bhi uske bagal me let gayi,"..aur aap bhi 1

promise kariye." "kya?",prasun apni is dost ki baato se hairan tha.

"ki aap mujh se kabhi bhi nahi sharmayenge.ok!" "ok,promise."

"thanx.",roma ne uske gaal pe chum liya & fir use uski 1 sketchbook

thama di,"chaliye apni aur drawings dikhaiye." prasun use khush hoke

drawings dikhane laga & unke bare me batane laga. "aapke chacha to

bahut achhi drawing karte hain,prasun.aap unse kyu nahi kehte ki aapko

sikhayen." "haan,chacha bhi mujhe best painter kehte hain.par mujhe to

sab aata hai.main unse kyu sikhu?",prasun ke masum sawal pe roma ko

hansi aa gayi.vo uske bayi taraf leti thi,usne karwat badli & prasun

ke gaal pe pyar se hath fera,"vo aapse bade hain na & pata hai unhe

bahut prizes bhi mile hain.vo aapko naye-2 rango ke bare me bhi

batayenge & alag-2 drawings ke bare me bhi.",roma ne ye jaante hi ki

prasun drawing karta hai,ye tay kar liya tha ki vo apne pati ko apne

is hunar ko aur nikharne ke liye zarur prerit karegi. prasun ne jaise

uski baat nahi suni thi & vo uske seene ko dekhe ja raha tha,"kya dekh

rahe hain?" "tumhare yaha pe baal kyu nahi hain?",usne uski chhatiyo

pe hath fera to roma ke badan me bijli si daud gayi. "to aapka seena

bhi to mere jaisa nahi.",usne uske seene ke balo me hath firaya,"..jo

aapke paas hai vo mere paas nahi & jo mere paas hai vo aapke paas

nahi.bhagwan ji ne hume jaan ke aise banaya hai taki hum dono 1 dusre

ke paas se vo le len jo humare paas nahi hai." usne uska hath pakad ke

apni chut pe lagaya"dekhiye ye jagah bhi aapke jaisi nahi hai na."

"haan.",prasun ka lund 1 baar fir khada ho gaya.roma ki chut pe hath

firate hue usne apni 1 ungli andar daal di,"ooww!" ghabra ke prasun ne

hath peechhe khinch liya,"itni zor se nahi prasun aram se

kijiye.",roma uth ke baith gayi to prasun bhi baith gaya.dono

aamne-samne baithe the,"..haanmaise hi dhire se andar bahar

kijiye.",usne prasun ka hath pakad use ungli se chut marna

sikhaya.uska dil to kar raha tha ki prasun ke tane lund ko jo ab 9

inch ka ho gaya tha pakad ke hila de magar use darr tha ki uska anari

pati kahi fir na jhad jaye. "ab aise ispe gol-2..haan bilkul

aise..aaahhhhh..",vo use apne dane ko chhedna sikha rahi thi,"..ruk

kyu gaye?" "tumhe dard ho raha hai,tum karahti ho." "ohh..mere

raja!",usne apne bhole-bhale pati ke homth chum liye,"..jab maza aata

hai tab bhi ladkiya karahti hain & aap ghabraiye mat agar mujhe taklif

hogi to main aapko bolungi ki ruk jaiye.thik hai!",prasun ne bachho

jaise sir hilaya & uski chut marne laga.thodi hi der me roma uski

ungliyo se pareshan ho apni kamar hilake jhadne lagi.usne prasun ki

kalaiya kas ke pakad ke unhe rok diya,use bahut taklif si ho rahi thi

magar sath hi itni khushi bhi ho rahi thi ki uske ansu nikal aaye.

"tum ro rahi ho,roma?",prasun use hairat se dekh raha tha. "nahi meri

jaan.",roma ne use khinch ke apne seene se laga liya & uske sar ko

chumne lagi.prasun ka lund uske pet me chubh raha tha.ab waqt aa gaya

tha ki uske anari pati ko khiladi banaya jaye. vo use liye-diye let

gayi.biwi ke upar letate hi prasun ki kmara fir se khud ba khud hilne

lagi.ab use roma ka uske munh me apniu jibh dalna bhi bahut achha lag

raha tha.roma ne use bol kar uski jibh bhi apne munh me

ghuswayio.prasun ko is khel me bahut maza aa raha tha.uske ando me

meetha sa dard ho raha tha jiska ehsas uske liye bilkul anokha tha.

"prasun,aap apne ghutno pe baioth jaiye..",roma ne apni tange faila

prasun ko unke beech liya,"..haan..ab ise yaha ghusaiye..",prasun ko

maa ki kahi baat yaad aa gayi & vo apna lund roma ki chut me dhakelne

ki koshish karne laga. "ooowww..!rukiye,prasun....aise nahi ..1

minute..",usne uska lund pakda & apni chut pe rakha,"..haan ab halke

se ghusaiye.",prasun ne uski baat maan halke se dhakka lagaya magar

nakam raha. "fir se koshish kijiye..",roma samajg gayi ki uski kasi

chut ki vajah se ye ho raha hai,"..1 minute rukiye.",usne daye hath me

lund ko pakda & baye ki 2 ungliyo se apni chut ko failaya,"..ab

ghusaiye." "aahhhhh..!",is baar lund thoda nadra ghusa & iske baad to

jaise prasun ko sab khud samajh me aa gaya.usne aise tabadtod dhakke

lagane shuru kiye ki na sirf roma ki chut me vo jad tak sama gaya

balki 4 dhakko me hi roma dobara jhad gayi.use pata hi na chala ki use

bahut dard ho raha hai kyuki uske upar to khumari chhayi hui thi.

prasun 1 bar jhad chuka tha & ab use waqt lag raha tha magar vo tha to

anari hi.vo bas uunn uunn karta paglo ki tarah dhakke lagaye ja raha

tha,"prasun..",apni biwi ki aavaz sun apne hatho pe aankhe band

kiye,uthe prasun ne use dekha to roma ne use khinch ke apne upar sula

liya & uske hatho ko apni choochiyo pe laga diya,"..inhe dabaiye &

inhe kiss bhi kijiye." dhakke lagata prasun apni nayi-naveli dulhan se

is khel ke naye-2 gur sikhne laga.

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kramashah...........
 


गतान्क से आगे... "वीरेन..",बिस्तर पे पेट के बल पड़ी कामिनी ने अपनी पीठ

पे पड़े अपने प्रेमी को पुकारा. "हूँ..",वीरेन कुच्छ ही देर पहले झाड़ा

था & उसके सिकुदे लंड से अभी भी थोड़ा पानी कामिनी की चूत मे रिस रहा था.

"मुझे लगा की उस खिड़की के बाहर कोई खड़ा था." "क्या?",वीरेन फ़ौरन उठा

अपना अंडरवेर पहनते हुए खिड़की के पास पहुँच उसे खोल बाहर देखा,"..यहा तो

कोई भी नही है.",वो वैसे ही कॉटेज के बाहर निकल गया.कामिनी ने भी अपने

बदन पे चादर डाली & उसके पीछे-2 अंदर के कमरे से बाहर के कमरे मे आई.तब

तक वीरेन वापस अंदर आके दरवाज़ा बंद कर रहा था. "मुझे तो कोई नज़र नही

आया.तुम्हे यकीन है की तुम्हे वेहम नही हुआ था?" "हां,वीरेन मुझे यकीन

है,वाहा कोई तो था." "जो भी था.वो अब चला गया.",उसने उसके कंधे पे हाथ

रखा & दोनो वापस बेडरूम मे आ गये & बिस्तर पे लेट गये. "कौन होगा वीरेन?"

"पता नही ऐसी बेहूदा हरकत कौन करेगा.हो सकता है कोई रात का चौकीदार हो

जिसने हमारी आवाज़े सुन ली हो & छुप के हमारी चुदाई देखने लगा हो.",वीरेन

ने 1 बार फिर उसे बाँहो मे भर लिया. "हूँ..",कामिनी ने पहले सोचा की उसे

दवा की डिबिया के बारे मे बताडे मगर फिर उसने सोचा की क्यू ना पहले थोड़ी

छनबीन करले & उसने वो बात अपने दिल मे ही रखी.जितनी देर वो सोच रही थी

उतनी देर मे वीरेन ने अपना अंडरवेर निकाल दिया था & 1 बार फिर उसके जिस्म

से खेलने लगा था.कामिनी ने भी उसके बदन पे अपनी बाहे लपेट दी & उसकी

हर्कतो का लुत्फ़ उठाने लगी. ------------------------------

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"आआआआहह...प्रसुउउन्न्न्न्न..!",रोमा झाड़ रही थी मगर प्रसून अभी भी उसके

उपर चढ़ा धक्के लगाए जा रहा था. "ऊहह..आअहह..!",प्रसून भी बहुत ज़ोर से

कराहा & रोमा ने उसका गर्म वीर्या अपनी चूत मे भरता मेशसूस किया.उसे बहुत

मज़ा आया था,उसने अपने पति को बाहो मे भर लिया & उसके सर को चूमने लगी.

प्रसून के लिए ये बिल्कुल अनोखा एहसास था.ऐसा मज़ा उसे कभी नही आया

था.उसे अपनी ये नयी दोस्त बहुत अच्छी लगी थी & उसने सोच लिया था की अब वो

रोज़ उसके साथ ये खेल खेलेगा.

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काफ़ी रात हो गयी थी.कामिनी ने सर घूमके पास मे सोए वीरेन को देखा & फिर

बिस्तर से उठ गयी.अपना सूटकेस खोल उसने अपना ट्रॅक्सयूट निकाल के फटफट

पहना & पैरो मे जूते डाले.वो जानती थी की वीरेन अब सीधा सुबह होने पे

उठेगा & उठते ही 1 बार फिर उसके नशीले जिस्म के साथ खेलने मे जुट जाएगा.

जूते के फीते बाँध वो कॉटेज से निकली & आसपास का जायज़ा लेने लगी.खिड़की

के नीचे की फूलो की क्यारी किसी जूते के तले मसली हुई थी यानी की उसे कोई

वेहम नही हुआ था.उसने उस जगह के आस-पास देखा,जब दावत हो रही थी उस वक़्त

थोड़ी बारिश हुई थी & उसकी वजह से मिट्टी गीली थी & उसपे किसी के जुतो के

निशान थे. वीरेन तो नंगे पाँव बाहर गया था तो ये निशान आख़िर थे

किसके?कामिनी उन निशानो के पीछे जाने लगी तो वो कॉटेज से कुच्छ दूरी पे

बनी झाड़ियो के पास जाके ख़त्म हो गये.कामिनी उन झाड़ियो के पार हो गयी &

देखा की निशान फिर शुरू हो गये हैं. उनके पीछे चलते हुए वो मॅनेजर'स

कॉटेज तक पहुँच गयी..जो भी था वो यही से आया था.उसे डर तो बहुत लग रहा था

मगर ये पता करना ज़रूरी था की कौन जासूसी कर रहा है.कॉटेज के पास पहुँच

कामिनी हैरत मे पड़ गयी. कॉटेज के दरवाज़े पे 1 ताला लगा था.आस-पास काफ़ी

धूल थी जोकि बारिश की वजह से थोडा जम गयी थी मगर उसपे वो जूतो के निशान

नही थे.कामिनी ने तले को जाँचा.ताला मज़बूत था & लगता था की काफ़ी दीनो

से लगा हुआ है.उसने कॉटेज की खिड़कियो से अंदर झाँका मगर अंदर की हालत

देख कर लगा नही की वाहा हाल मे कोई आया था. कामिनी ने कॉटेज की अच्छे

तरीके से छन्बिन करने के बाद वाहा से वापस वीरेन की कॉटेज की तरफ आते हुए

सर घुमा के देखा तो उसे बुंगला & सर्वेंट क्वॉर्टर्स नज़र आए.उसने

क्वॉर्टर्स को चेक करने का फ़ैसला किया.क्वॉर्टर्स 4 2 मंज़िला इमाराते

थी.पहली 3 के बाहर खड़ी हो कामिनी ने अंदर की आवाज़ो पे कान लगाया.हर

क्वॉर्टर से पंखे के चलने की आवाज़ आ रही थी.तीनो इमारतो की पहली मंज़िलो

को भी सर उठा के देखने पे उसे ऐसा ही लगा की अंदर मौजूद लोग सो रहे हैं.

कामिनी अब चौथी इमारत के पास थी.उसने निचली मंज़िल के क्वॉर्टर की खिड़की

पे कान लगाया तो उसे हल्की चीख सुनाई दी जोकि शायद पीछे की ओर से आई

थी.वो भाग के क्वॉर्टर के पीछे पहुँची मगर पिच्छला दरवाज़ा बंद था.पीछे

के कमरे की खिड़की थोडा ऊँची थी.कामिनी ने पास पड़ी कुच्छ ईंटो को खिड़की

के नीचे लगाया & उनपर खड़े हो अंदर झाँका. अंदर रजनी उसी पोज़िशन मे थी

जिसमे थोड़ी देर पहले वो थी जब उसने उस आदमी को खिड़की पे देखा था-यानी

की हाथो & घुटनो पे.उसे देखते ही कामिनी को चीख का कारण समझ आ गया.इंदर

रजनी क पीछे घुटनो पे खड़ा उसकी गंद मे अपना लंड घुसा रहा था. कामिनी

नीचे उतरी & उन ईंटो को वापस उनकी जगह पे रखा.वो इंदर को तो पहचान गयी थी

मगर वो लड़की कौन थी?उसे इतना तो समझ आ गया था की उसकी खिड़की के बाहर

खड़ा इंसान इंदर नही था.तो फिर था कौन? सवाल का जवाब ढूंडती कामिनी वापस

वीरेन की कॉटेज मे आ गयी थी.उसने अपने कपड़े & जूते उतारे.वीरेन अभी भी

बेख़बर सो रहा था.नंगी हो वो जैसे ही बिस्तर पे लेटी की उसके दिमाग़ मे 1

ख़याल कौंधा.कही शिवा तो नही था वो झाँकने वाला शख्स?..वो बंगल के अंदर

से आया होगा & फिर देख के चला गया होगफा?मगर वो क्या देखने आया था?..कही

उसी ने तो सुरेन जी की दवा के साथ छेड़ खानी तो नही की थी? कामिनी ने

करवट बदली..हां..वही था..& आज रात भी वो ज़रूर वीरेन को नुकसान पहुचने की

गरज से यहा आया होगा लेकिन जब उसने देख की वो अकेला नही है तो वाहा से

चला गया होगा..मगर वो क्यू उसे नुकसान पहुचाना चाहता था?....आख़िर वीरेन

को नुकसान पहुँचा के क्या मिलता उसे? उसने फिर करवट बदली..या फिर ऐसा तो

नही की वो किसी के कहने पे ऐसा कर रहा हो?..मगर किसके कहने

पे?...देविका!..तो क्या देविका ने ही अपने पति की दवा के साथ कुच्छ छेड़

खानी कर उसे मारा था & अब देवर को भी मारना चाहती थी?..लेकिन वो ऐसा क्यू

करेगी?वीरेन को कोई दिलचस्पी नही थी पैसो मे & सुरेन जी के बाद सब कुच्छ

तो वैसे भी उसी का होता..तो फिर क्या वजह हो सकती थी?..या कही ऐसा तो नही

की शिवा ही सब कुच्छ हड़पने के चक्कर मे हो मगर दोनो भाइयो की मौत से उसे

क्या हासिल होगा?..उनके बाद तो सब देविका के पास होगा. और तब कामिनी को

जैसे सब समझ मे आ गया.सुरेन जी ने जो सारी वसीयते लिखी थी उन तीनो सुरतो

मे ये नही लिखा था की उन दोनो भाइयो की मौत के बाद जब देविका हर चीज़ की

अकेली मालकिन होगी,उस वक़्त अगर वो दूसरी शादी कर ले तो क्या होगा?
 
कामिनी

को शिवा की चाल समझ आ रही थी,वीरेन की मौत के बाद वो देविका से शादी करता

& फिर प्रसून & देविका को भी अपने रास्ते से हटा देता.उसके बाद हर चीज़

उसकी थी. कामिनी को पसीने छूट गये.क्या शिवा इतना ख़तरनाक आदमी

था?..लेकिन अगर उसने अभी कुच्छ कहा तो हो सकता है वो संभाल जाए & उसे

झूठा भी साबित कर दे उसके पास सबूत जो नही था कोई.उसे बहुत संभाल के कदम

उठाने थे.सबसे पहले तो उसे वीरेन को आगाह करना था & फिर ये पक्का करना था

की देविका शिवा के साथ मिली हुई थी या फिर शिवा उसे धोखे मे रख उसका

इस्तेमाल कर रहा था. उसने जमहाई ली,उसे नींद आ रही थी.उसने आँखे बंद कर

ली & इन सारे ख़यालो को दिमाग़ से निकाल सोने की कोशिश करने लगी.सुबह

होने मे कुच्छ घंटे ही थे & उसे पता था की सूरज की पहली किरण के साथ ही

वीरेन 1 बार फिर उसके जिस्म के साथ खेलने मे जुट जाएगा.वो उस से पहले

अपनी नींद पूरी कर लेना चाहती थी.उसने करवट ली & बेख़बर सो रहे वीरेन के

सीने से सर लगा के सोने लगी. "देविका जी,..",कामिनी सहाय परिवार के बंगल

के ड्रॉयिंग रूम मे वीरेन & देविका के साथ बैठी चाइ पी रही थी,"..प्रसून

की शादी हो गयी है,अब मुझे लगता है की आपको अपनी वसीयत तैय्यार कर लेनी

चाहिए." "जी.",देविका अपने कप से चाइ पीती रही.थोड़ी देर की खामोशी के

बाद उसने प्याली मेज़ पे रखी,"..कामिनी जी,क्या मैं कुच्छ दिन रुक के ये

वसीयत कर सकती हू?" "ये तो आपकी मर्ज़ी है.",कामिनी के दिमाग़ मे पिच्छले

रात के ख़याल घूमने लगे & वो देविका की बातो से ये भाँपने की कोशिश करने

लगी की वो & शिवा मिले हुए थे या फिर देविका का इस्तेमाल हो रहा

था,"..लेकिन मेरी राई तो यही होगी की जितना जल्दी करें उतना अच्छा होगा."

"ठीक है.मैं कुच्छ दीनो मे आपके पास आती हू." "बहुत अच्छे.",रजनी चाइ के

झूठे प्याले & बाकी खाने का समान वाहा से हटा रही थी.

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"ये देखो,कामिनी.",वीरेन कामिनी का हाथ पकड़े उसे पेड़ो के झुर्मुट से

निकल 1 खुली सी जगह मे ले आया था.आज सवेरे के नाश्ते के बाद से ही वो उसे

एस्टेट की 1 जीप मे वाहा की सैर करा रहा था. "वाउ!",कामिनी की नज़रो के

सामने 1 पानी की छ्होटी सी झील थी. "सुंदर है ना?",वीरेन उसके पास आ अपनी

बाँह उसकी कमर मे डाल उसके साथ कुद्रत के उस हसीन नज़ारे को उसके साथ

निहारने लगा. "बहुत." "पता है मैने क्या सोचा है की अगली बार जब हम यहा

आएँ तो मैं तुम्हारी पैंटिंग बनाउन्गा." "अच्छा!",कामिनी घूम के उसके

सामने उस से सॅट के खड़ी हो गयी,"..कैसी पैंटिंग बनाएँगे जनाब?जैसी आजकल

आप अपने स्टूडियो मे बनाते हैं?",बड़ी शोखी के साथ उसके सीने पे उसने

अपने हाथ रख दिए & उसके शर्ट के बटन्स से खेलने लगी. "आपने बिल्कुल ठीक

समझा,मोहतार्मा!",वीरेन ने भी उसे उसी अंदाज़ मे जवाब दिया.दोनो अपनी ही

बातों पे आप ही हंस पड़े & 1 दूसरे की बाहो मे समाते हुए चूमने लगे.दोनो

प्रेमी 1 दूसरे मे खोए हुए थे & दोनो मे से किसी का ध्यान पेड़ो के पीछे

छुपे उनकी हर्कतो पे नज़र रखे हुए इंदर पे गया ही नही.

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प्रसून 1 ही रात मे रोमा का दीवाना हो गया था.जिस बात के बारे मे उसे

उसकी मा ने बताया था,उसकी बीवी ने उसे उस खेल की हक़ीक़त से वाकिफ़ कराया

था & उसे वो हक़ीक़त बड़ी ही पूर्कशिष & नशीली लगी थी.रोमा अभी-2 नहा के

निकली थी & उसके बदन पे बस 1 तौलिया बँधा था.उस तौलिए के उपर से प्रसून

को,उसका हल्का सा क्लीवेज & मस्त,मांसल जंघे,बड़ी ललचाती हुई सी लग रही

थी. वो आगे बढ़ा & अपनी बीवी को बाहो मे भर लिया & चूमने लगा,"अरे!अरे!

क्या करते हैं?..औउ...अभी नही..प्लीज़ प्रसून...ऊव्व...!",रोमा ने हंसते

हुए उसे परे धकेला. "उम्म..क्यू नही?",प्रसून ने उसे फिर से बाहो मे भरना

चाहा.प्रसून के हाव-भाव & सोच तो 1 बच्चे जैसी थी मगर हरकते वो बडो वाली

करना चाह रहा था.रोमा को इस बात से बड़ी हँसी आ रही थी.टवल उतार कर उसने

बिस्तर पे रखे ब्रा को अपने कंधो पे चढ़ाया. "हर चीज़ का 1 वक़्त होता

है..",उसने अपनी पीठ प्रसून के आगे की,"..अब बिना शरारत किए मेरे हुक्स

लगाइए.",प्रसून ने हुक्स लगाने के बजाय पीछे से उसे बाहो मे भर उसकी

चूचिया मसल दी & उसे चूमने लगा.अपनी गंद मे चुभता पति का तगड़ा लंड तो

रोमा को भी मदहोश कर रहा था मगर अभी अगर वो प्रसून के साथ चुदाई मे लग

जाती तो उसे देर हो जाती & उसे ये बिल्कुल अच्छा नही लगता की शादी के बाद

पहली ही सुबह वो देर से अपने कमरे से बाहर आए. "ओई मा..!",वो उसकी

गिरफ़्त से किसी तरह निकली & जल्दी से खुद ही हुक्स लगा लिए,"..मैने कहा

ना प्रसून की हर चीज़ का 1 वक़्त होता है.ये सब हम रात को करेंगे.",उसने

जल्दी से अपनी पॅंटी चढ़ाई.प्रसून के चेहरे पे उदासी & गुस्सा दोनो आ गये

थे & वो बच्चो की तरह रूठ कर बिस्तर के कोने पे बैठ गया. रोमा ने फटफट

अपनी सारी पहनी & अपने रूठे हुए पति के आपस आ बैठी,"नाराज़ क्यू होते

हैं?",उसने उसका चेहरा अपनी तरफ किया,"..देखिए अभी मम्मी नीचे हमारा

नाश्ते पे इंतेज़ार कर रही होंगी ना!हूँ?" प्रसून ने हा मे सर हिलाया.

"तो उन्हे इंतेज़ार कराना बुरी बात होगी ना?" उसने फिर से हां मे सर

हिलाया. "इसलिए तो मना कर रही थी.हम रात को ये सब करेंगे.",उसने उसे खड़ा

किया,"..ठीक है ना.अब तो नाराज़ मत रहिए.",उसने उसके गाल पे चूमा,"..चलिए

नीचे मम्मी के पास चलें." "चलो.",प्रसून अपनी बीवी का हाथ थाम कमरे से

निकल गया. -------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः...........
 
बदला पार्ट--27 गतान्क से आगे... "Viren..",bistar pe pet ke bal padi

Kamini ne apni pith pe pade apne premi ko pukara. "hun..",viren kuchh

hi der pehle jhada tha & uske sikude lund se abhi bhi thoda pani

kamini ki chut me ris raha tha. "mujhe laga ki us khidki ke bahar koi

khada tha." "kya?",viren fauran utha apna underwear pehante hue khidki

ke paas pahunch use khol bahar dekha,"..yaha to koi bhi nahi hai.",vo

vaise hi cottage ke bahar nikal gaya.kamini ne bhi apne badan pe

chadar dali & uske peechhe-2 andar ke kamre se bahar ke kamre me

aayi.tab tak viren vapas andar aake darwaza band kar raha tha. "mujhe

to koi nazar nahi aaya.tumhe yakin hai ki tumhe vaham nahi hua tha?"

"haan,viren mujhe yakin hai,vaha koi to tha." "jo bhi tha.vo ab chala

gaya.",usne uske kandhe pe hath rakha & dono vapas bedroom me aa gaye

& bistar pe let gaye. "kaun hoga viren?" "pata nahi aisi behuda harkat

kaun karega.ho sakta hai koi raat ka chaukidar ho jisne huamri aavaze

sun li ho & chhup ke humari chudai dekhne laga ho.",viren ne 1 bar fir

use baho me bhar liya. "hun..",kamini ne pehle socha ki use dawa ki

dibiya ke bare me batade magar fir usne socha ki kyu na pehle thodi

chhanbeen karle & usne vo baat apne dil me hi rakhi.jitni der vo soch

rahi thi utni der me viren ne apna underwear nikal diya tha & 1 baar

fir uske jism se khelne laga tha.kamini ne bhi uske badan pe apni

baahe lapet di & uski harkato ka lutf uthane lagi.

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"aaaaaaaahhhhhh...prasuuunnnnn..!",roma jhad rahi thi magar prasun

abhi bhi uske upar chadha dhakke lagaye ja raha tha.

"oohhh..aaahhhhh..!",prasun bhi bahut zor se karaha & roma ne uska

garm virya apni chut me bharta meshsus kiya.use bahut maza aaya

tha,usne apne pati ko baaho me bhar liya & uske sar ko chumne lagi.

prasun ke liye ye bilkul anokha ehsas tha.aisa maza use kabhi nahi

aaya tha.use apni ye nayi dost bahut achhi lagi thi & usne soch liya

tha ki ab vo roz uske sath ye khel khelega.

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kafi raat ho gayi thi.kamini ne sar ghumake paas me soye viren ko

dekha & fir bistar se uth gayi.apna suitcase khol usne apna tracksuit

nikal ke fatfat pehna & pairo me jute dale.vo janti thi ki viren ab

seedha subah hone pe uthega & uthate hi 1 bar fir uske nashile jism ke

sath khelne me jut jayega. jute ke feete bandh vo cottage se nikali &

aaspaas ka jayza lene lagi.khidki ke neeche ki phoolo ki kyari kisi

jute ke tale masli hui thi yani ki use koi vaham nahi hua tha.usne us

jagah ke aas-paas dekha,jab davat ho rahi thi us waqt thodi barish hui

thi & uski vajah se mitti gili thi & uspe kisi ke juto ke nishan the.

viren to nange panv bahar gaya tha to ye nishan aakhir the

kiske?kamini un nishano ke peechhe jane lagi to vo cottage se kuchh

duri pe bani jhadiyo ke paas jake khatm ho gaye.kamini un jhadiyo ke

paar ho gayi & dekha ki nishan fir shuru ho gaye hain. unke peechhe

chalte hue vo manager's cottage tak pahunch gayi..jo bhi tha vo yehi

se aaya tha.use darr to bahut lag raha tha magar ye pata karna zaruri

tha ki kaun jasoosi kar raha hai.cottage ke paas pahunch kamini hairat

me pad gayi. cottage ke darwaze pe 1 tala laga tha.aas-paas kafi dhool

thi joki barish ki vajah se thoda jam gayi thi magar uspe vo jooto ke

nishan nahi the.kamini ne tale ko jaancha.tala mazboot tha & lagta tha

ki kafi dino se laga hua hai.usne cottage ki khidkiyo se andar jhanka

magar andar ki halat dekh kar laga nahi ki vaha haal me koi aaya tha.

kamini ne cottage ki achhe tarike se chhanbin karne ke baad vaha se

vapas viren ki cottage ki taraf aate hue sar ghuma ke dekha to use

bungla & servant quarters nazar aaye.usne quarters ko check karne ka

faisla kiya.quarters 4 2 manzila imarate thi.pehli 3 ke bahar khadi ho

kamini ne andar ki aavazo pe kaan lagaya.har quarter se pankhe ke

chalne ki aavaz aa rahi thi.teeno imarato ki pehli manzilo ko bhi sar

utha ke dekhne pe use aisa hi laga ki andar maujood log so rahe hain.

kamini ab chauthi imarat ke paas thi.usne nichli manzil ke quarter ki

khidki pe kaan lagaya to use halki chikh sunai di joki shayad peechhe

ki or se aayi thi.vo bhag ke quarter ke peechhe pahunchi magar pichhla

darwaza band tha.peechhe ke kamre ki khidki thoda oonchi thi.kamini ne

paas padi kuchh eento ko khidki ke neeche lagaya & unpar khade ho

andar jhanka. andar Rajni usi position me thi jisme thodi der pehle vo

thi jab usne us aadmi ko khidki pe dekha tha-yani ki hatho & ghutno

pe.use dekhte hi kamini ko chikh ka kaaran samajh aa gaya.Inder rajni

k peechhe ghutno pe khada uski gand me apna lund ghusa raha tha.

kamini neeche utri & un eento ko vapas unki jagah pe rakha.vo inder ko

to pehchan gayi thi magar vo ladki kaun thi?use itna to samajh aa gaya

tha ki uski khidki ke bahar khada insan inder nahi tha.to fir tha

kaun? sawal ka jawab dhoondti kamini vapas viren ki cottage me aa gayi

thi.usne apne kapde & jute utare.viren abhi bhi bekhabar so raha

tha.nangi ho vo jaise hi bistar pe leti ki uske dimagh me 1 khayal

kaundha.kahi shiva to nahi tha vo jhankane vala shakhs?..vo bungle ke

andar se aaya hoga & fir dekh ke chala gaya hogfa?magar vo kya dekhne

aaya tha?..kahi usi ne to Suren ji ki dawa ke sath chhedkhani to nahi

ki thi? kamini ne karwat badli..haan..vahi tha..& aaj raat bhi vo

zarur viren ko nuksan pahuchane ki garaj se yaha aaya hoga lekin jab

usne dekh ki vo akela nahi hai to vaha se chala gaya hoga..magar vo

kyu use nuksan pahuchana chahta tha?....aakhir viren ko nuksan

pahuncha ke kya milta use? usne fir karwat badli..ya fir aisa to nahi

ki vo kisi ke kehne pe aisa kar raha ho?..magar kiske kehne

pe?...Devika!..to kya devika ne hi apne pati ki dawa ke sath kuchh

chhedkhani kar use mara tha & ab devar ko bhi marna chahti thi?..lekin

vo aisa kyu karegi?viren ko koi dilchaspi nahi thi paiso me & suren ji

ke baad sab kuchh to vaise bhi usi ka hota..to fir kya vajah ho sakti

thi?..ya kahi aisa to nahi ki shiva hi sab kuchh hadapne ke chakkar me

ho magar dono bhiyo ki maut se use kya hasil hoga?..unke baad to sab

devika ke paas hoga. aur tab kamini ko jaise sab samajh me aa

gaya.suren ji ne jo sari vasiyate likhi thi un teeno surato me ye nahi

likha tha ki un dono bhaiyo ki maut ke baad jab devika har chiz ki

akeli malkin hogi,us waqt agar vo dusri shadi kar le to kya

hoga?kamini ko shiva ki chaal samajh aa rahi thi,viren ki maut ke baad

vo devika se shadi karta & fir prasun & devika ko bhi apne raste se

hata deta.uske baad har chiz uski thi. kamini ko paseene chhut

gaye.kya shiva itna khatarnak aadmi tha?..lekin agar usne abhi kuchh

kaha to ho sakta hai vo sambhal jaye & use jhutha bhi sabit kar de

uske paas saboot jo nahi tha koi.use bahut sambhal ke kadam uthane

the.sabse pehle to use viren ko aagah karna tha & fir ye pakka karna

tha ki devika shiva ke sath mili hui thi ya fir shiva use dhokhe me

rakh uska istemal kar raha tha. usne jamhai li,use nind aa rahi

thi.usne aankhe band kar li & in sare khayalo ko dimagh se nikal sone

ki koshish karne lagi.subah hone me kuchh ghante hi the & use pata tha

ki suraj ki pehli kiran ke sath hi viren 1 baar fir uske jism ke sath

khelne me jut jayega.vo us se pehle apni nind puri kar lena chahti

thi.usne karwat li & bekhabar so rahe viren ke seene se sar laga ke

sone lagi. "Devika ji,..",Kamini Sahay parivar ke bungle ke drawing

room me Viren & Devika ke sath baithi chai pi rahi thi,"..Prasun ki

shadi ho gayi hai,ab mujhe lagta hai ki aapko apni vasiyat taiyyar kar

leni chahiye." "ji.",devika apne cup se chai piti rahi.thodi der ki

khamoshi ke baad usne pyali mez pe rakhi,"..kamini ji,kya main kuchh

din ruk ke ye vasiyat kar sakti hu?" "ye to aapki marzi hai.",kamini

ke dimagh me pichhle raat ke khayal ghumne lage & vo devika ki baato

se ye bhanpne ki koshish karne lagi ki vo & Shiva mile hue the ya fir

devika ka istemal ho raha tha,"..lekin meri rai to yehi hogi ki jitna

jaldi karen utna achha hoga." "thik hai.main kuchh dino me aapke paas

aati hu." "bahut achhe.",Rajni chai ke juthe pyale & baki khane ka

saman vaha se hata rahi thi.

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"ye dekho,kamini.",viren kamini ka hath pakde use pedo ke jhurmut se

nikal 1 khuli si jagah me le aaya tha.aaj savere ke nashte ke baad se

hi vo use estate ki 1 jeep me vaha ki sair kara raha tha.

"wow!",kamini ki nazro ke samne 1 pani ki chhoti si jhil thi. "sundar

hai na?",viren uske paas aa apni banh uski kamar me daal uske sat

kudrat ke us haseen nazare ko uske sath niharne laga. "bahut." "pata

hai maine kya socha hai ki agli baar jab hum yaha aayen to main

tumhari painting banaunga." "achha!",kamini ghum ke uske samne us se

sat ke khadi ho gayi,"..kaisi painting banayenge janab?jaisi aajkal

aap apne studio me banate hain?",badi shokhi ke sath uske seene pe

usne apne hath rakh diye & uske shirt ke buttons se khelne lagi.

"aapne bilkul thik samjha,mohtarma!",viren ne bhi use usi andaz me

jawab diya.dono apni hi baaton pe aap hi hans pade & 1 dusre ki baaho

me samate hue chumne lage.dono premi 1 dusre me khoye hue the & dono

me se kisi ka dhyan pedo ke peechhe chhupe unki harkato pe nazar rakhe

hue Inder pe gaya hi nahi.

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Prasun 1 hi raat me roma ka deewana ho gaya tha.jis baat ke bare me

use uski maa ne bataya tha,uski biwi ne use us khel ki haqeeqat se

wakif karaya tha & use vo haqiqat badi hi purkashish & nashili lagi

thi.roma abhi-2 naha ke nikli thi & uske badan pe bas 1 tauliya bandha

tha.us tauliye ke upar se prasun ko,uska halka sa cleavage &

mast,mansal janghe,badi lalchati hui si lag rahi thi. vo aage badha &

apni biwi ko baaho me bhar liya & chumne laga,"are!are! kya karte

hain?..ouuiii...abhi nahi..please prasun...ooww...!",roma ne hanste

hue use pare dhakela. "umm..kyu nahi?",prasun ne use fir se baaho me

bharna chaha.prasun ke haav-bhav & soch to 1 bachche jaisi thi magar

harkaet vo bado wali karna chah raha tha.roma ko is baat se badi hansi

aa rahi thi.towel utar kar usne bistar pe rakhe bra ko apne kandho pe

chadhaya. "har chiz ka 1 waqt hota hai..",usne apni pith prasun ke

aage ki,"..ab bina shararat kiye mere hooks lagaiye.",prasun ne hooks

lagane ke bajay peechhe se ue baaho me bhar uski chhatiya masal di &

use chumne laga.apni gand me chubhta pati ka tagda lund to roma ko bhi

madhosh kar raha tha magar abhi agar vo prasun ke sth chudai me lag

jati to use der ho jati & use ye bilkul achha nahi lagta ki shadi ke

baad pehli hi subah vo der se apne kamre se bahar aaye. "ouii

maa..!",vo uski giraft se kisi tarah nikli & jaldi se khud hi hooks

laga liye,"..maine kaha na prasun ki har chiz ka 1 waqt hota hai.ye

sab hum raat ko karenge.",usne jaldi se apni panty chadhai.prasun ke

chehre pe udasi & gussa dono aa gaye the & vo bachcho ki tarah ruth

kar bistar ke kone pe baith gaya. roma ne fatfat apni sari pehni &

apne ruthe hue pati ke apas aa baithi,"naraz kyu hote hain?",usne uska

chehra apni taraf kiya,"..dekhiye abhi mummy neeche humara nashte pe

intezar kar rahi hongi na!hun?" prasun ne haa me sar hilaya. "to unhe

intezar karana buri baat hogi na?" usne fir se haan me sar hilaya.

"isliye to mana kar rahi thi.hum raat ko ye sab karenge.",usne use

khada kiya,"..thik hai na.ab to naraz mat rahiye.",usne uske gaal pe

chuma,"..chaliye neeche mummy ke paas chalen." "chalo.",prasun apni

biwi ka hath tham kamre se nikal gaya.

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kramashah...........
 


गतान्क से आगे... रात को कामिनी फिर से वीरेन के साथ उसकी कॉटेज मे नंगी

पड़ी हुई थी.वो अपनी बाई करवट पे लेटी थी & वीरेन अपनी दाई पे उसके

सामने.वीरेन का लंड उसकी चूत मे था.कामिनी ने अपनी दाई जाँघ वीरेन की

जाँघ के उपर चढ़ाई हुई थी,दोनो प्रेमी 1 दूसरे से लिपटे हुए 1 दूसरे को

चूम रहे थे. वीरेन ने अपना बाया हाथ उसकी गंद की दाई फाँक पे रखा & अपनी

कमर हिलाके चुदाई शुरू कर दी.कामिनी ने भी जवाब मे वीरेन की गंद को अपने

दाए हाथ मे भींच लिया & अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी.वीरेन की चुदाई से

कामिनी हवा मे उड़ रही थी मगर उसकी 1 नज़र उस खिड़की पे ही थी जहा उसने

पिच्छली रात किसी साए को देखा था. "ऊव्वव..!",वीरेन के लंड के धक्को से

बहाल कामिनी की आहे निकलने लगी थी & वो उसकी गंद पे अपने नखुनो के निशान

छ्चोड़ रही थी.वीरेन भी बस अब जल्द से जल्द उसके साथ-2 अपनी मंज़िल पे

पहुँचना चाहता था.अपनी प्रेमिका के जिस्म से खेलते हुए उसे कोई 2 घंटे

होने को आए थे जिस दौरान वो तो 3-4 बार झाड़ चुकी थी मगर वो अभी तक 1 बार

भी नही झाड़ा था. दोनो प्रेमियो के दिल की धड़कने बहुत तेज़ हो गयी थी

साथ ही उनकी कमर के हिलने की रफ़्तार भी.कामिनी अब बिल्कुल मदहोश हो चुकी

थी मगर फिर भी उसने अपनी आँखे बंद नही की & खिड़की पे ही लगाए रखी.तभी

उसकी चूत मे बन चुका तनाव अचानक जैसे ढीला पड़ने लगा & उसके रोम-2 मे

खुशी भरने लगी.उसकी बाहो मे क़ैद वीरेन भी ज़ोर-2 से आहें भर रहा

था.झड़ने की खुशी को दिल मे शिद्दत से महसूस करती कामिनी ने अपनी चूत मे

अपने प्रेमी के गढ़े,गरम विर्य का गीलापन महसूस किया & समझ गयी की वो भी

झाड़ चुका है. आज रात उसे खिड़की पे कोई साया नही दिखाई दिया.रात काफ़ी

गहरी हो चुकी थी & उसे उमीद थी की अब आज रात कोई उनकी जासुसु नही

करेगा,"वीरेन.." "हूँ.",वीरेन उसकी चूचियो मे अपना चेहरा च्छुपाए वैसे ही

पड़ा था. "अगली बार यहा कब आओगे?",उसने उसके बालो मे प्यार से उंगलिया

फिराते हुए उसके सर को चूम लिया. "अगले महीने.क्यू?",उसने उसके सीने से

सर उठाया. "बस ऐसे ही पुचछा था.मैं तुम्हारे साथ फिर से यहा आना चाहती

हू.ये जगह बहुत खूबसूरत है & मैं 1 बार फिर इस खूबसूरती का लुत्फ़

तुम्हारे साथ उठाना चाहती हू.",बात दरअसल ये थी की कामिनी को वीरेन की

फ़िक्र होने लगी थी.सवेर चाइ पे जब उसने देविका से वसीयत की बात की तो

उसने कुच्छ समय वो काम करने की बात कही थी & इस से उसे ये खटका हुआ था की

कही देविका & शिवा मिलके तो ये खेल नही खेल रहे.ऐसी सूरत मे उनका अगला

शिकार वीरेन ही था.उसने सोचा की वीरेन को अपने शक़ के बारे मे बता दे मगर

ना जाने क्यू उसका दिमाग़ उसे ऐसा करने से रोक रहा था. अपनी प्रेमिका की

बात से वीरेन को काफ़ी खुशी हुई थी.उसने उसके नर्म होंठो को चूम लिया &

उसके गले से लग गया.ऐसा करने से कामिनी की मोटी चूचिया उसके चौड़े सीने

से पीस गयी.उसका हाथ खुद बा खुद कामिनी की कसी हुई गंद पे चला गया

था.चूचियो की गुदगुदी & गंद के नर्म,मस्त एहसास & कामिनी की प्यारी बात

ने उसे फिर से मस्त कर दिया & वो 1 बार फिर उसके जिस्म की गहराइयो मे

डूबने लगा. ------------------------------

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"तुमने सेक्यूरिटी सिस्टम्स के लिए जो कंपनी तय की है उसे अगले महीने

बुला के डील फाइनल कर लेते हैं.",देविका ने 1 फाइल पे दस्तख़त कर उसे

किनारे किया & दूसरी खोल ली.शिवा उसके सामने उसके डेस्की की दूसरी तरफ

बैठा उसे देख रहा था. "हूँ.",उसके दिल मे 1 बार ख़याल आया की उस दूसरी

कंपनी के सेल्स रेप के उसे रिश्वत देने की बात के बारे मे अपनी प्रेमिका

को जो अब उसकी बॉस भी थी,बता दे मगर फिर उसने सोचा की क्यू वो उसे नाहक

परेशान करे!ये सब तो चलता ही रहता था & फिर देविका पे अब काम का कितना

बोझ भी था.वो एकटक उसे निहारे जा रहा था & बेख़बर देविका अपना काम किए जा

रही थी.शिवा के दिल ने उस वक़्त ये दुआ माँगी की बस ये पल यही थम जाए &

वो बस ऐसे ही अपनी महबूबा के सामने बैठा उसे निहारता रहे,क़यामत के दिन

तक. देविका ने नज़रे उठाई & अपने आशिक़ को खुद को निहारते पाया तो काम की

मसरूफ़ियत के बावजूद उसके गुलाबी होंठो पे मुस्कान खिल गयी..कितना चाहता

था ये शख्स उसे?..अगर हालात कुच्छ और होते तो वो कब का इसको अपना पति बना

चुकी होती.ऐसा आशिक़ तो किस्मतवालो को मिलता है!मगर ये मुमकिन नही

था..शिवा तुम मुझे पहले क्यू नही मिले?..देविका के दिल मे हुक उठी..क्या

हो जाता अगर मिल भी जाता तो?..उसके ज़हन ने उसके दिल से पूचछा..ये

शनोशौकत ये ऐशोआरम तो ये शख्स तुम्हे कभी नही दे पाता....ज़माने की नज़रो

मे वो उसका नौकर है मगर हक़ीक़त मे तो वो उसका आशिक़ है.अभी उसके पास

दौलत & इश्क़ दोनो हैं.अगर शिवा उसे पहले मिल जाता तो वो इस दौलत से तो

महरूम रह जाती..जो होता है वो अच्छे के लिए होता है! "क्या देख रहे

हो?",दिल की जद्ड़ोजेहाद को देविका ने चेहरे पे नही आने दिया था. "दुनिया

का सबसे हसीन चेहरा." "अच्छा.अब बहुत देख लिया,अब जाओ.काम नही

तुम्हे?",उसने शिवा को प्यार से झिड़का. "हां वो तो है.",आ भरता शिवा उठ

खड़ा हुआ & दरवाज़े की ओर मूड गया. "शिवा..",महबूबा की आवाज़ सुन वो

घुमा,"..उदास क्यू होते हो,जानम!अपनी हर रात तो मैने तुम्हारे नाम कर दी

है.",शिवा को महबूबा के प्यार के इज़हार से बहुत खुशी हुई & वो बेज़री जो

उसके चेहरे पे आई थी वो गायब हो गयी & वो वाहा से निकल गया. रात के 10

बजे इंदर अपने क्वॉर्टर मे अंधेरे मे बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था.उसे

एस्टेट मॅनेजर की नौकरी करते 1 महीने से उपर हो गया था मगर सुरेन सहाय की

मौत के बाद वो अपने प्लान के अगले कदम अभी तक नही उठा पाया था.इस वक़्त

उसे शिवा सबसे बड़ा ख़तरा नज़र आ रहा था.वो बहुत वफ़ादार था & अभी तक

इंदर को उसकी कोई भी कमज़ोरी या कोई ऐसी बात का पता नही चला था जिसे वो

उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकता. उसे बौखलाहट होने लगी मगर अभी उसे थोड़ी

देर बाद रजनी के पास जाना था & उसके पास शराब पी के जाना ठीक नही था.शिवा

के बारे मे जानने के लिए 1 बार उसके कमरे की तलाशी लेना ज़रूरी था क्यूकी

साथ काम करने वालो से उसके बारे मे कोई भी काम की बात नही पता चली थी

लेकिन शिवा बंगल के अंदर रहता था & वो बंगल के अंदर घुसे कैसे,ये उसकी

समझ मे नही आ रहा था. तभी उसकी निगाह मे,जोकि बंगल से क्वॉर्टर्स की ओर

आते रास्ते पे थी,उसके हाथो की कठपुतली का अक्स उभरा.बंगल के अंदर काम

करने वालो के लिए देविका ने वर्दी बनवाई थी.नौकर तो कमीज़ & पॅंट &

सर्दियो मे कोट पहनते थे वही नौकरानिया या तो सारी या फिर घुटनो से नीचे

तक की काले रंग की पूरे या आधे बाज़ू की ड्रेस पहनती थी. रजनी ने भी इस

वक़्त आधे बाज़ू वाली ड्रेस पहनी हुई थी.रसोई मे काम करते वक़्त पहनने

वाला एप्रन अभी भी उसकी ड्रेस के उपर बँधा था & हाथो मे 1 छ्होटा सा बॅग

था जिसमे कभी-कभार वो लंच ले जाती थी.नौकरो को सारा खाना बंगले मे ही

मिलता था मगर रजनी & कुच्छ और लड़किया कभी-कभार अपने घर से भी कुच्छ

बनाके ले जाती थी ज़ेयका बदलने की गरज से. उसे देखते ही इंदर की आँखे चमक

उठी & वो अपनी कुर्सी से उठ फुर्ती से अपने दरवाज़े से निकल गया.

"आहह..!",रजनी ने दरवाज़ा खोल अभी क्वॉर्टर मे कदम रखा ही था की इंदर ने

उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया,"..कैसे चोरो की तरह आते हो?!!डर के मारे

मेरी तो जान ही निकल गयी थी!",इंदर ने दरवाज़ा बंद किया & 1 मद्धम रोशनी

वाला बल्ब जला दिया. "देखो,तो मेरा दिल कैसे धड़क रहा है.",शोखी से

मुस्कुराती रजनी ने अपने सीने की ओर इशारा किया.इंदर ने उसे दरवाज़े के

बगल की दीवार से लगा के खड़ा किया हुआ था & खुद उस से सॅट के खड़ा था.

"अभी शांत करता हू इसे.",उसने अपना दाया हाथ रजनी की कमर के पीछे कर उसके

एप्रन की ड्राइव को खोला & बाए से उसके हाथ का बॅग & क्वॉर्टर की चाभी

लेके बगल की दीवार मे बने शेल्फ पे रख दिया.डोर खुलते ही रजनी ने एप्रन

को गले से निकाला & अपनी बाहे अपने प्रेमी के गले मे डाल दी. इंदर का हाथ

रजनी की गंद पे फिर रहा था & जैसे ही उसने उसके गंद को दबा उसकी चूत को

अपने लंड से पीसा उसे रजनी की ड्रेस मे से उसकी कमर के पास कुच्छ

चुबा,"ये क्या है?",रजनी के खुले होंठ जोकि उसके होंठो की ओर बढ़ रहे

थे,सवाल सुन वही रुक गये. "ओह्ह..ये है.",उसने जेब मे हाथ डाल कर 1 चाभी

निकाली,"..ये तो बंगले की चाभी है." "क्या?",बड़ी मुश्किल से इंदर अपनी

हैरानी & खुशी को च्छूपा पाया,"..बंगल की चाभी तुम्हारे पास कैसे

आई?",उसका दाया हाथ रजनी की ड्रेस को उपर कर उसकी बाई जाँघ को उठा के उसे

सहला रहा था. "ये बंगले की रसोई के दरवाज़े की चाभी है.देविका मॅ'म ने

मुझे दे रखी है ताकि सवेरे जब मैं काम पे जाऊं तो उनकी नींद मे खलल ना

पड़े,वो थोड़ा देर से उठती है ना.",इंदर ने उस से चाभी ले ली & अपने होंठ

उसके होंठो से मिला दिए.उसने चाभी वाला हाथ 1 रजनी के ड्रेस की जेब मे

घुसाया मगर चाभी अंदर नही डाली बल्कि उस चाभी को अपने शॉर्ट्स की जेब मे

डाल लिया. रजनी का हाथ अब उसकी शॉट्स के उपर से उसके लंड को टटोल रहा

था,इंदर ने फ़ौरन उसे ढीला का नीचे गिरा दिया.वो नही चाहता था की रजनी को

चाभी के बारे मे पता चले,"जान,खाना खाया तुमने?" "हां.",इंदर के इस

मामूली से सवाल ने रजनी के दिल को बहुत खुश कर दिया.उसे अपने प्रेमी पे

बहुत प्यार आया..कितनी फ़िक्र करता था वो उसकी!उसने और गर्मजोशी से उसके

तगड़े लंड को अपनी गिरफ़्त मे कस लिया & उसे चूमते हुए हिलाने लगी.इंदर

भी उसकी कामुक हर्कतो का लुत्फ़ उठाने लगा,उसने तो सवाल इसलिए किया था की

कही रजनी उसे गरम करने के बाद खाना ना खाने लगे & उसे झड़ने के लिए

इंतेज़ार करना पड़े. इंदर ने भी उसकी पीठ पे लगी ड्रेस की ज़िप को नीचे

कर दिया था & अपने हाथ अंदर घुसा उसकी चूचियो से खेल रहा था.रजनी ने

बेचैन हो इंदर की टी-शर्ट निकाल दी & बड़ी बेताबी से उसके सीने पे अपने

हाथ फिराती हुई उसे चूमने लगी.उसके होंठ इंदर के चेहरे से नीचे उसके सीने

पे आए,"इंदर.." "हूँ..",इंदर उसकी पीठ & बाल सहला रहा था. "हम शादी कब

करेंगे?",रजनी उसके सीने से नीचे उसके पेट पे पहुँच गयी थी. "बहुत जल्द

मेरी जान,बहुत जल्द.",इंदर ने उसका सा नीचे अपने प्यासे लंड की ओर

धकेला,"..बस थोड़े पैसे जमा हो जाएँ ताकि शादी के बाद हनिमून के लिए मैं

तुम्हे किसी बहुत ही खूबसूरत जगह ले जा सकु. "ओह्ह..इंदर.इतना खर्च करने

की क्या ज़रूरत है?",रजनी इस बात को सुनकर फूली नही समा रही थी.उसने इंदर

के लंड को दोनो हाथो मे लिया & अपना सर बाई तरफ झुका लंड की बगल मे चूमने

लगी. "उन्न्न..!",..ये लड़की देखने मे जितनी साधारण थी चुदाई मे उतनी ही

मस्त!इंदर का दिल जोश से भर गया था,"..प्रसून जैसा आदमी अगर शादी कर मौज

उड़ा सकता है तो हम क्यू नही!",उसने रजनी के बालो को पकड़ उसके सर को लंड

पे दबाया. "उनकी बात और है..",रजनी लंड की जड़ पे जहा से इंदर के अंडे

शुरू होते थे,अपनी जीभ चला उसे पागल कर रही थी,"..वो रईस हैं,जान.देखो

ना,सर को गुज़रे अभी कितने ही दिन हुए हैं & अब मॅ'म की वकील उन्हे नयी

वसीयत बनाने के लिए कह रही है." "क्या?!",1 बार फिर इंदर बड़ी मुश्किल से

अपने हैरत भरे जज़्बातो को रजनी से च्छूपा पाया.रजनी ने लंड को अपने मुँह

मे भर लिया था & उसे हिलाते हुए चूस रही थी & इसलिए उसने फ़ौरन इंदर को

जवाब नही दिया.इंदर का दिल तो किया की लंड खींच उसे 2 तमाचे जड़े & उसे

पूरी बात बताने को कहे मगर ये मुमकिन नही था.वो रजनी के जवाब का इंतेज़ार

करता रहा. काई पॅलो तक लंड को जी भर के चूसने के बाद रजनी ने सांस लेने

के लिए उसे मुँह से निकाला,"..उस दिन उनकी वकील नही है..क्या नाम है

उसका.." "कामिनी शरण.",इंदर ने उसे उठाया & बाहो मे भर उसकी ड्रेस को

नीचे सरका दिया.ब्रा का बाया कप नीचे था & उसकी बाई चूची नुमाया थी.इंदर

तो पूरा नंगा ही था.उसने रजनी को गोद मे उठाया & उसके बेडरूम मे ले

गया.बिस्तर पे लिटा उसने उसकी पॅंटी उतारी & उसकी गंद की फांको के नीचे

अपने हाथ लगा उसकी झांतो को अपनी लपलपाति जीभ से चीर उसकी चूत मे घुसा

दिया. "आअनह...ऊन्णन्न्....!",रजनी तो जिस्म मे फुट रहे मज़े की

फुलझड़ियो मे अपनी कही बात भूल ही गयी थी मगर इंदर को तो उसके मुँह से

अभी बात निकलवानी ही थी. "तो क्या कह रही थी वकील कामिनी शरण?",वो अपने

घुटनो पे था & रजनी की गंद को थाम उसने हवा मे ऐसे उठा रखा था मानो उसका

वज़न कुच्छ खास ना हो. "ऊन्ंह....कह रही थी की मॅ'म को अब वसीयत

बना...आअनह..ले..नि..चाअ..हिई...हाइईईई..!",रजनी झाड़ आयी थी मगर इंदर की

लपलपाति जीभ अभी भी उसकी चूत के दाने को चाट रही थी. "तो मॅ'म ने क्या

कहा?" "उउन्ण..हहुन्न्नह....कहा की कुच्छ दिन रुक जाइए...ऊओह.....!",इंदर

ने उसकी जाँघो को अपनी जाँघो पे टीका लिया था & अपना लंड उसकी चूत मे

घुसा रहा था.रजनी ने बेचैन हो उसकी बाहो को थाम लिया था. "और कुच्छ नही

कहा उन्होने?" नही.",इंदर समझ गया की इस से ज़्यादा रजनी को कुच्छ नही

पता.रजनी ने उसकी बाँह पकड़ के नीचे खींचा तो इंदर ने उसकी बात मानते हुए

अपना उपरी बदन नीचे किया & उसे चूमने लगा.ये कठपुतली उसका सबसे बढ़िया

हथ्यार थी & वक़्त आ गया था की अभी दी गयी जानकारी के लिए उसे इनाम दिया

जाए.इंदर ने अपनी जनघॉ को फैलाया & रजनी के उपर लेट गहरे धक्के लगा उसे

मदहोश करते हुए उसकी चुदाई करने लगा.

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"आपको तो बस 1 ही बात सूझती है हर वक़्त!",कामिनी ने चंद्रा साहब को

तड़पाने की गरज से परे धकेला.कामिनी अपने दिल मे उठ रहे सवालो के जवाब

ढूँडने के लिए अपने गुरु के घर आई थी.मिसेज़.चंद्रा के इसरार पे वो खाने

के लिए रुक गयी तो चंद्रा साहब ने कहा की काम की बातें खाने के बाद

करेंगे.खाना ख़त्म होते-2 मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी & दोनो मिया-बीवी

ने उसे रात को उनके यहा रुकने के लिए मना ही लिया.चंद्रा साहब की खुशी का

तो ठिकाना ही नही था. उन्हे देर रात तक काम करने की आदत थी & वो जानते थे

की अगर उस वक़्त कामिनी उनके साथ जितनी देर तक रहे उनकी बीवी को ज़रा भी

शुबहा नही होगा.मिसेज़.चंद्रा के सोने जाते ही वो कामिनी को बंगले के

दूसरे हिस्से मे बने अपने दफ़्तर मे ले गये & अंदर से दरवाजा बंद कर

दिया.कामिनी ने मिसेज़.चंद्रा की पुरानी नाइटी पहनी थी जिसका गला थोड़ा

बड़ा था & उसमे से अब उसका मस्त क्लीवेज झाँक रहा था.दरवाज़ा बंद करते ही

चंद्रा साहब ने उसे धर दबोचा था & अपने प्यासे होंठ उसके चेहरे पे घूमने

लगे थे. "तुम्हे देख के कुच्छ और सूझ सकता है भला.",कामिनी बड़े सोफे पे

बैठ 1 किताब के पन्ने पलटने लगी तो वो उसके पीछे आ बैठे & उसके कंधो पे

हाथ रख उसके बाल चूमने लगे.कामिनी ने उन्हे और तड़पाना चाहा & वाहा से भी

उठने लगी मगर इस बार चंद्रा साहब होशियार थे & उन्होने उसे अपनी बाहो मे

कस लिया. "उम्म....क्या करते हैं!छ्चोड़िए ना!",चंद्रा साहब उसकी कमर को

कस के थामे उसके होंठो को अपने होंठो से ढूंड रहे थे. "इतनी मुश्किल से

हाथ आती हो,तुम्हे कैसे छ्चोड़ दू!",उन्होने कामिनी के सर को अपने दाए

हाथ को उसके सीने के पार ले जाते हुए घुमाया & उसके होंठ चूमने

लगे.कामिनी को भी मज़ा आ रहा था.चंद्रा साहब उसकी नाइटी मे नीचे से हाथ

घुसाने लगे तो वो च्चटपटाने लगी मगर उन्होने उसे अपने चंगुल से नही

निकलने दिया & हाथ अंदर घुसा ही दिया.उनका हाथ सीधा उसके सीने पे जा

पहुँचा & उसकी चूचियो से खेलने लगा. चंद्रा साहब का जोश अब बहुत ज़्यादा

बढ़ गया था & वो उसके कपड़े उतारने की कोशिश करने लगे,"..कही आंटी ना आ

जाएँ.",कामिनी ने घबराई आवाज़ मे कहा.उसे घबराया देख उसके गुरु का जोश

दुगुना हो गया. "कोई नही आएगा यहा हम दोनो के मिलन मे खलल डालने.",वो

फुर्ती से उसकी नाइटी खिचने लगे.कामिनी समझ गयी की अब वो मानने वाले नही

हैं.थोड़ी ही देर मे वो अपने गुरु के साथ सोफे पे नंगी बैठी थी.चंद्रा

सहभ की गोद मे बैठी कामिनी उनके सीने के बॉल सहला रही थी & चंद्रा साहब

अपने जिस्म के उपर पड़ी उस हुस्न परी को पाँव से लेके सर तक चूम रहे

थे,सहला रहे थे. उनके लंड को हिलाते हुए कामिनी ने उन्हे सहाय परिवार के

बारे मे सब कुच्छ बताया.शिवा पे शक़ होना & देविका का उस से मिला होने

वाली बात भी उसने उन्हे बताई.उसकी सारी बात सुन के जो बात चंद्रा साहब ने

कही उसे सुन के कामिनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया. "ह्म्म..यानी वीरेन

सहाय भी तुम्हारे हुस्न के तीर से घायल हो चुका है!",कामिनी ने उन्हे ये

नही बताया था की उसने वीरेन की कॉटेज की खिड़की से झँकते साए को जब देखा

था उस वक़्त वो उस कॉटेज मे क्या कर रही थी मगर चंद्रा साहब पहुँचे हुए

वकील थे,उन्हे ये भाँपने मे ज़रा भी वक़्त नही लगा की उनकी शिष्या को 1

नया प्रेमी मिल गया है,"..लगता है इसलिए हमारे लिए वक़्त नही हैं

तुम्हारे पास आजकल?" कामिनी उनसे चुदती थी & उनकी शिष्या नही अब तो

प्रेमिका थी मगर फिर भी थी तो वो 1 लड़की ही & उसे उनकी बात से शर्म आ

गयी थी.उसने अपना उपरी बदन मोड़ उनके गले मे बाहे डाल उनके दाए कंधे पे

अपना सर रख उनकी गर्दन मे चेहरा च्छूपा लिया था. "ऐसे मत बोलिए..",उसने

उनके कंधे पे सर रखे-2 उनका गाल चूमा,"..1 तो काम की मसरूफ़ियत उपर से

आंटी का डर.मेरा जी नही करता क्या आपकी बाहो मे सोने को!..मगर मजबूरी

है." "मैं तो छेड़ रहा था,तुम तो संजीदा हो गयी!",उन्होने कामिनी का

चेहरा अपने सामने किया & उसे चूम लिया.कामिनी ने अपनी ज़ुबान उनके मुँह

मे घुसा दी.षत्रुजीत सिंग,करण & वीरेन तीनो को उसने इतना जता दिया था की

वो अपनी मर्ज़ी की मालकिन है & कोई ये ना समझे की वो उसपे अपना हक़ जता

सकता है..अगर वो उनके साथ सोती है तो उसका ये मतलब नही की वो उनकी बीवी

या फिर रखैल बन गयी जिसपे वो रोब गाँठ सकते हैं..ये दूसरी बात थी की तीनो

वैसे मर्द थे भी नही & उस से जितनी मोहब्बत करते थे उतनी ही उसकी इज़्ज़त

भी करते थे & उसकी ज़िंदगी मे 1 हद्द से ज़्यादा दखल देने की उन्होने कोई

कोशिश भी कभी नही की थी लेकिन चंद्रा साहब वो अकेले मर्द थे जिनकी कामिनी

सबसे ज़्यादा इज़्ज़त करती थी & अभी उसे 1 पल को डर लगा था की कही वो उस

से खफा ना हो जाएँ या फिर कही जलन के मारे कुच्छ उल्टा-सीधा ना बोल दें

मगर उन्होने ऐसा कुच्छ नही किया. इस बात से कामिनी के दिल मे उनके लिए

इज़्ज़त और भी बढ़ गयी & उसे उनपे बहुत प्यार आया.वो उन्हे चूमे जा रही

थी & वो भी उसके जिस्म के उभारो को अपने हाथो मे तोल रहे थे.अचानक

उन्होने उसे अपनी गोद से नीचे करते हुए सोफे पे लिटाया & फिर कमर मे हाथ

डाल उसे उल्टा का पेट के बल लिटा दिया.कामिनी ने भी झट से अपनी कमर थोड़ा

उपर कर दी.चंद्रा साहब ने 1 कुशन उसके पेट के नीचे लगा दिया ताकि वो आराम

से लेट सके & उसकी चूत भी & उभार के उनकी आँखो के सामने आए. वो बेचैनी से

उसकी गंद की भरी फांको को मसालते हुए गंद की दरार पे लंबाई मे जीभ चलाने

लगे.दफ़्तर मे कामिनी की आहे गूंजने लगी. "वो साया तो 1 राज़ है मगर मुझे

बहुत ख़तरनाक लग रहा है.",उनकी जीभ उसके गंद के छेद को सहला रही

थी.कामिनी की चूत कसमसाने लगी थी,उसने अपना दाया हाथ पीछे किया & चंद्रा

साहब के बाल सहलाए,"..देविका पे भी शक़ की तुम्हारी वजह काफ़ी ठोस है &

शिवा को भी शक़ के दायरे से बाहर नही रखा जा सकता." कामिनी की गंद का छेद

जीभ के एहसास से कभी बंद होता कभी खुलता.बेताबी से कामिनी ने अपने पेट के

नीचे दबे कुशन को थोड़ा नीचे सरकाया & अपनी चूत को कमर हौले-2 हिला उसपे

दबाने लगी.चंद्रा साहब समझ गये की पहले उन्हे उनकी शिष्या की चूत को शांत

करना पड़ेगा उसके बाद ही वो इतमीनान से उसकी गंद से खेल पाएँगे.उन्होने

जीभ को थोड़ा नीचे किया & उसकी चूत पे लगा दिया. "..वसीयत करने मे देरी

इस शक़ को और पुख़्ता करती है.",उन्होने अपनी जीभ को उसकी चूत मे घुसा

दिया & तब तक चलते रहे जब तक वो झाड़ नही गयी.सोफा काफ़ी बड़ा था.चंद्रा

साहब ने कामिनी की टाँगो को फैलाया & अपना लंड उसकी चूत मे घुसा

दिया.गीली चूत मे लंड सरर से घुस गया.2-3 धक्को के बाद वो उसकी पीठ पे

लेट गये.कामिनी ने अपनी गर्दन दाई ओर घुमाई & उन्हे चूमने लगी. "..लेकिन

1 बात है जो मुझे परेशान कर रही है.",चंद्रा साहब ने अपनी शिष्या के होंठ

छ्चोड़ उसकी मखमली पीठ पे किस्सस की झड़ी लगा दी.उनके धक्के कामिनी की

चूत को पागल कर रहे थे.वो बेचैनी से अपने घुटनो से मोड़ टाँगो को उपर उठा

रही थी.उसकी चूत मे वही मीठा तनाव बन गया था. "..अगर देविका चाहे अकेले

या फिर शिवा के साथ मिलके सुरेन जी को रास्ते से हटाने के लिए उनकी दवा

से कुच्छ छेड़ चाड करती है तो फिर वो उस डिबिया को फ़ौरन गायब कर

देगी.",चंदर साहब अब अपने हाथो पे अपना भार संभाले उछलते हुए धक्के लगा

रहे थे. "ऊन्ंह.....आनह....ऐसा...हाइईईईईई....ऐसे ही

करिए..बस...तो..दी...देर...आआहह.....!",कामिनी झाड़ गयी थी मगर चंद्रा

साहब का काम अभी बाकी था.थोड़ी देर बाद उन्होने लंड को बाहर खींचा,फिर

अपने थूक से कामिनी की गांद का च्छेद भरा. "..मैं कह रही थी की ऐसा भी तो

हो सकता है..",कामिनी ने अपनी गंद हवा मे उठा दी & अपना उपरी बदन आगे को

झुका के सोफे का हत्था था अपने गुरु के हमले के लिए तैय्यार हो गयी,"..की

कामिनी डिबिया हटाना भूल गयी हो." "नही..",चंद्रा साहब ने गंद के छेद को

अच्छी तरह से गीला किया & फिर धीरे-2 लंड को अंदर घुसाने लगे,"..अगर

सुरेन जी की मौत दवा से छेड़ खानी की वजह से हुई है तो वो डिबिया इस केस

मे मर्डर वेपन है & कोई भी गुनेहगर सबसे पहले जुर्म मे इस्तेमाल हुए

हथ्यार को ही ठिकाने लगाता है." "एयीयैआइयियीईयीईयी..!",लंड का 2 इंच

हिस्सा गंद से बाहर था & चंद्रा साहब ने उसकी गंद मारना शुरू कर दिया

था.थोड़ी देर पहले झड़ने के वक़्त कामिनी की चूत के सिकुड़ने-फैलने की

मस्त हरकत के दौरान बड़ी मुश्किल से उन्होने अपने लंड को काबू मे कर उसे

झड़ने से रोका था.इतनी बार कामिनी को चोदने का बाद भी वो उसके जिस्म के

मादकता के आदि नही हुए थे.उसकी गंद का छेद बहुत ज़्यादा कसा हुआ था &

बड़ी मुश्किल से उन्होने 1 बार फिर अपने को झड़ने से रोका हुआ था.

"ऊहह...तो..हाइईइ..आपका..कह..ना..है..की...कोई...और

भी...है...वाहा....सहाय ख़ान..दान..का...दुश्मन....हाई

राआंम्म्म....!",चंद्रा साहब के धक्के तेज़ हो रहे थे & उनका दाया हाथ

कामिनी की चूत भी मार रहा था. "बिल्कुल सही समझा तुमने.",चंद्रा साहब भी

अपनी मंज़िल के करीब पहुँच रहे थे,"..मेरा ख़याल है की सुरेन सहाय की मौत

के पीछे कोई और है & देविका & शिवा,चाहे वो सुरेन जी की मौत चाहते

हो,उन्हे केवल पैसो से मतलब है." "औउईईई..मान्न्न्न्न्न........मगर

प्रसून का क्या...ऊहह..होगा फिर...ऊऊऊहह.....!",कामिनी के होंठ "ओ" के

आकर मे गोल हो गये थे & उसके गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी.उसके झड़ने

मे इतनी शिद्दत थी की उसे कुच्छ होश नही था की वो कहा & किसके साथ है.वो

सोफे पे निढाल हो गयी थी.उसके उपर आहे भरते हुए चंद्रा साहब अपने गाढ़े

रस से उसकी गंद को भर रहे थे मगर वो अपनी ही दुनिया मे खोई हुई थी जहा

चारो तरफ बस फूलो की खुश्बू थी & बदन मे मदहोश करने वाला एहसास.
 
कयि पलो

बाद उसे जब होश आया तो उसने पाया की वो सोफे पे बाई करवट से पड़ी हुई है

& उसके गुरु उसके पीछे उसकी कमर पे अपनी दाई बाँह लपेटे लेटे हुए

हैं.उसने फिर से बातो का टूटे सिलसिले को शुरू किया,"प्रसून का क्या होगा

फिर?",अपने सर को उसने पीछे घुमाया & अपने गुरु के चेहरे पे अपना दाया

हाथ फिराया. "देखो,प्रसून के लिए तो देविका ट्रस्ट बनाएगी ही मगर वो सब

तो देविका की मौत के बाद होगा ना.",उन्होने अपना सर सोफे से उठाया &

कामिनी के चेहरे पे हल्क-2 किस्सस छ्चोड़ने लगे,"..अगर उसके सर पे शिवा

का जादू चढ़ा हुआ है तब तो शिवा जो कहेगा वो करेगी.शिवा को ये दौलत अगर

चाहिए तो वो वसीयत मे कुच्छ ऐसा लिखवाएगा की सब कुच्छ उसी की झोली मे

आए." "ऐसे तो प्रसून की जान को भी ख़तरा है?",चंद्रा साहब का हाथ उसके

पेट पे चल रहा था & वो अपने दाए हाथ से उनके बालो से खेल रही थी.

"हां,बिल्कुल.",उन्होने अपनी उंगली से उसकी नाभि को कुरेदा. "तो फिर शिवा

ने प्रसून की शादी क्यू होने दी?" "ये तो तुमने पते की बात कही!",उनकी

उंगली अभी भी नाभि को कुरेद रही थी,"अगर शिवा ग़लत आदमी है तो वो इस शादी

को किसी भी कीमत पे रोकता.शादी हो गयी इसका मतलब है की देविका ने उसकी

सुनी नही & उसने भी ज़्यादा दबाव नही डाला होगा की कही देविका को उसपे

कोई शक़ ना हो जाए मगर अब घर मे 1 और शख्स है जिसे की उसे रास्ते से

हटाना होगा." "लेकिन वो प्री-नप्षियल अग्रीमेंट भी तो है उसके हिसाब से

प्रसून की मौत के बाद रोमा को बस 1 तय की हुई रकम मिलेगी और कुच्छ नही.तो

शिवा को अगर उसे पैसे देने भी पड़ते हैं तो वो ये मामूली नुकसान सह

लेगा." "हूँ..",चंद्रा साहब के हाथ कामिनी के बदन से खेल रहे थे मगर

दिमाग़ गहरी सोच मे डूबा था. "आपको क्या लगता है की मुझे देविका को आगहा

करना चाहिए या फिर वीरेन को?" "देखो मेरे हिसाब से तो जब तक वसीयत नही

बनती शिवा कुच्छ नही करेगा..-" "..-लेकिन अगर वसीयत मे सब प्रसून के नाम

है तो वो उसे ख़त्म कर अपनी मर्ज़ी की वसीयत बनवा सकता है." "वो क्यू

करेगा ऐसे?" "क्यू नही करेगा?" "प्रसून मंदबुद्धि है.अगर वो मालिक बन

जाता है जयदाद का तो भी बस नाम का ही रहेगा.सारी डोर तो देविका & देविका

की डोर संभाले शिवा के हाथ मे ही रहेगी.क़त्ल कर वो बिना बात का झमेला

क्यू मोल ले?..फिर प्रसून को तो वो कभी भी हटा सकता है क्यूकी प्रसून का

क़त्ल तभी ज़रूरी है जबकि देविका की वसीयत मे देविका की मौत के बाद

सबकुच्छ प्रसून के नाम हो जाता है.",बात कामिनी की समझ मे आई तो वो

चंद्रा साहब के पैने दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सकी.उसने करवट बदली &

अपने गुरु के सीने से लिपट गयी,"मैं कब सोच पाऊँगी आपकी तरह!",दोनो अभी

भी करवट से ही लेटे थे & 1 दूसरे के जिस्मो को सहलाते हुए हौले-2 चूम रहे

थे. महबूबा के मुँह से तारीफ सुन चंद्रा साहब खुशी से हँसे,"..तुम मुझसे

भी ज़्यादा होशियार हो.ये बात तुम भी समझ जाती मगर शायद आज उपरवाला चाहता

था की हम-तुम ये नशीली रात साथ गुज़ारें.",उनकी बात सुन कामिनी मुस्कुराइ

& 1 बार फिर उनकी बाहो मे खो गयी. इंदर बिस्तर से उतरा,रजनी गहरी नींद

सोई हुई थी & सोती भी क्यू ना!..पिच्छले 3 घंटो तक इंदर ने उसे जम के

चोदा था.चेहरे पे परम संतोष का भाव लिए रजनी थकान से निढाल हो सो गयी

थी.क्वॉर्टर के दरवाज़े पे गिरी अपनी शॉर्ट्स की जेब से उसने चाभी निकली

& रजनी के बाथरूम मे गया.1 कोने मे पड़े नहाने के साबुन को उसने लिया &

उसपे चाभी दबा के उसकी छाप ले ली.काम हो जाने के बाद उसने चाभी बाहरी

कमरे के शेल्फ पे रजनी के क्वॉर्टर की चाभी के साथ रख दी. उसने घड़ी देखी

तो रात के 1.30 बज रहे थे.उसने अपने कपड़े पहने & फिर बिस्तर पे नंगी सोई

रजनी के बगल मे लेट गया.30 मिनिट बाद वो उसे जगाके दरवाज़ा लगाने को

कहेगा & अपने क्वॉर्टर मे चला जाएगा.उसका दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था & वो

कल रात के बारे मे सोच रहा था.कल भी उसे रजनी को इसी तरह थकाना था ताकि

जब वो यहा से निकल के बंगल के अंदर जाए तब उसे इस बात का बिल्कुल भी पता

ना चले. "उम्म्म....!",रजनी के मुँह मे इंदर का लंड भरा हुआ था जोकि उसके

नीचे लेटा उसकी चूत चाट रहा था.रजनी उसके उपर थी & उसकी बेशर्म ज़ुबान से

परेशान हो अपनी कमर उसके मुँह पे ऐसे हिला रही थी मानो चूत मे जीभ नही

लंड घुसा हो. "रजनी..",इंदर ने जीभ को चूत से बाहर निकाला & उसके दाने पे

फिराया. "हूँ....!",रजनी ने आह भरी. "तुम 2-3 महीनो के लिए अपने

माता-पिता के पास क्यू नही चली जाती?",इंदर उसकी मोटी गंद को दबाते हुए

उसके दाने को छेड़ रहा था.रजनी ने चौंक के लंड को मुँह से निकाला & अपनी

गर्दन घूमके इंदर की ओर देखा. "हां,तुम अभी ही हो आओ क्यूकी जब हमारी

शादी हो जाएगी फिर तो मैं तुम्हे 1 पल के लिए भी खुद से जुदा नही होने

दूँगा & कभी भी तुम्हे मयके नही जाने दूँगा.",इंदर की जीभ की छेड़-छाड़

से रजनी की चूत बहाल हो गयी थी & उसमे से रस की धार बह रही थी.प्रेमी की

बात सुन उसके जिस्म के साथ-2 दिल मे भी खुशी की लहर दौड़ गयी.ठीक उसी

वक़्त इंदर की ज़ुबान ने उसके दाने को कुच्छ ऐसे छेड़ा की वो झाड़ गयी.

आहे भरती हुई वो झाड़ रही थी मगर वो फ़ौरन घूमी & इंदर के सीने पे अपनी

छातिया दबाते हुए उसके चेहरे को हाथो मे थाम लिया,"ओह!इंदर.." "हां,मैं

अब और इंतेज़ार नही कर सकता.तुम अपने गाँव जाके अपने माता-पिता के साथ 2

महीने रह लो.उन्हे मेरे बारे मे बता देना & फिर अपने साथ उन्हे यहा ले

आना ताकि उनके आशीर्वाद के साथ हम शादी कर सकें." रजनी की आँखे भर आई.उसे

यकीन तो था की इंदर उस से शादी ज़रूर करेगा मगर जब उसने ये बात कही तो

उसका दिल इस खुशी को झेल नही पाया & आँखो से आँसुओ की धार बह निकली.

"क्या हुआ?मेरी बात अच्छी नही लगी?",इंदर के माथे पे शिकन पड़ गयी.जवाब

मे रजनी ने हंसते हुए उसके चेहरे पे किस्सस की बरसात कर दी.इंदर अभी भी

हैरान था. "ठीक है.मैं मॅ'म से छुट्टी माँग के घर जाती हू.",उसने अपने

प्रेमी को झुक के चूमा. "हां,लेकिन अभी देविका जी को हमारे बारे मे बात

बताना..",इंदर ने उसकी गंद की दरार मे हाथ फिराया तो रजनी उसका इशारा समझ

गयी & अपने घुटने उसके बदन की दोनो तरफ टिकते हुए चूत को लंड के लिए खोल

दिया,"..क्यूकी मैं नही चाहता की सब बातें करें.जब वापस आओगी तब हम दोनो

मिलके उन्हे बताएँगे." इंदर ने उसकी गंद से हाथ नीचे ले जाते हुए उसकी

चूत को हाथो से फैलाया तो रजनी ने दाया हाथ पीछे ले जा लंड को पकड़ उसे

चूत के अंदर का रास्ता दिखाया,"जैसा तुम कहो,मेरी जान.",लंड अंदर जाते ही

वो उसके चेहरे पे झुक गयी & दोनो चूमते हुए चुदाई करने लगे.

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क्रमशः..............
 
बदला पार्ट--28 गतान्क से आगे... raat ko kamini

fir se viren ke sath uski cottage me nangi padi hui thi.vo apni bayi

karwat pe leti thi & viern apni dayi pe uske samne.viren ka lund uski

chut me tha.kamini ne apni dayi jangh viren ki jangh ke upar chadhayi

hui thi,dono premi 1 dusre se lipte hue 1 dusre ko chum rahe the.

viren ne apna baya hath uski gand ki dayi fank pe rakha & apni kamar

hilake chudai shuru kar di.kamini ne bhi jawab me viren ki gand ko

apne daye hath me bhinch liya & apni kamar hilani shuru kar di.viren

ki chudai se kamini hawa me ud rahi thi magar uski 1 nazar us khidki

pe hi thi jaha usne pichhli raat kisi saye ko dekha tha.

"oowww..!",viren ke lund ke dhakko se behal kamini ki aahe nikalne

lagi thi & vo uski gand pe apne nakhuno ke nishan chhod rahi thi.viren

bhi bas ab jald se jald uske sath-2 apni manzil pe pahunchna chahta

tha.apni premika ke jism se khelte hue use koi 2 ghante hone ko aaye

the jis dauran vo to 3-4 baar jhad chuki thi magar vo abhi tak 1 baar

bhi nahi jhada tha. dono premiyo ke dil ki dhadkane bahut tez ho gayi

thi sath hi unki kamar ke hilne ki raftar bhi.kamini ab bilkul madhosh

ho chuki thi magar fir bhi usne apni aankhe band nahi ki & khidki pe

hi lagaye rakhi.tabhi uski chut mke ban chuka tanav achanak jaise

dhila padne laga & uske rom-2 me khushi bharne lagi.uski baaho me qaid

viren bhi zor-2 se aahen bhar raha tha.jhadne ki khushi ko dil me

shiddat se mehsus karti kamini ne apni chut me apne premi ke

gadhe,garam virya ka gilapan mehsus kiya & samajh gayi ki vo bhi jhad

chuka hai. aaj raat use khidki pe koi saya nahi dikhayi diya.raat kafi

gehri ho chuki thi & use umeed thi ki ab aaj raat koi unki jasusui

nahi karega,"viren.." "hun.",viren uski chhatiyo me apna chehra

chhupaye vaise hi pada tha. "agli baar yaha kab aaoge?",usne uske

baalo me pyar se ungliya firate hue uske sar ko chum liya. "agle

mahine.kyu?",usne uske seene se sar uthaya. "bas aise hi puchha

tha.main tumhare sath fir se yaha aana chahti hu.ye jagah bahut

khubsurat hai & main 1 baar ifr is khubsurti ka lutf tumhare sath

uthana chahti hu.",baat darasal ye thi ki kamini ko viren ki fikr hone

lagi thi.saver chai pe jab usne devika se vasiyat ki baat ki to usne

kuchh samay vo kaam karne ki baat kahi thi & is se use ye khatka hua

tha ki kahi devika & shiva milke to ye khel nahi khel rahe.aisi surat

me unka agla shikar viren hi tha.usne socha ki viren ko apne shaq ke

bare me batade magar na jane kyu uska dimagh use aisa karne se rok

raha tha. apni premika ki baat se viren ko kafi khushi hui thi.usne

uske narm hotho ko chum liya & uske gale se lag gaya.aisa karne se

kamini ki moti choochiya uske chaude seene se pis gayi.uska hath khud

ba khud kamini ki kasi hui gand pe chala gaya tha.choochiyo ki gudgudi

& gand ke narm,mast ehsas & kamini ki pyari baat ne use fir se mast

kar diya & vo 1 baar fir uske jism ki gehraiyo me dubne laga.

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"tumne security systems ke liye jo company tay ki hai use agle mahine

bulake deal final kar lete hain.",devika ne 1 file pe dastkhat kar use

kinare kiya & dusri khol li.shiva uske samne uske deski ki dusri taraf

baitha use dekh raha tha. "hun.",uske dil me 1 baar khayal aaya ki us

dusri company ke sales rep ke use rishvat dene ki baat ke bare me apni

premika ko jo ab uski boss bhi thi,bata de magar fir usne socha ki kyu

vo use nahak pareshan kare!ye sab to chalta hi rehta tha & fir devika

pe ab kaam ka kitna bojh bhi tha.vo ektak use nihare ja raha tha &

bekhabar devika apna kaam kiye ja rahi thi.shiva ke dil ne us waqt ye

dua mangi ki bas ye pal yehi tham jaye & vo bas aise hi apni mehbooba

ke asmne baitha use niharta rahe,qayamat ke din tak. devika ne nazre

uthayi & apne aashiq ko khud ko niharte paya to kaam ki masrufiyat ke

bavjood uske gulabi hontho pe muskan khil gayi..kitna chahta tha ye

shakhs use?..agar halaat kuchh aur hote to vo kab ka isko apna pati

bana chuki hoti.aisa aashiq to kismatvalo ko milta hai!magar ye mumkin

nahi tha..shiva tum mujhe pehle kyu nahi mile?..devika ke dil me hook

uthi..kya ho jata agar mil bhi jata to?..uske zehan ne uske dil se

poochha..ye shanoshaukat ye aishoaaram to ye shakhs tumhe kabhi nahi

de pata....zamane ki nazro me vo uska naukar hai magar haqiqat me to

vo uska aashiq hai.abhi uske paas daulat & ishq dono hain.agar shiva

use pehle mil jata to vo is daulat se to mehroom rah jati..jo hota hai

vo achhe ke liye hota hai! "kya dekh rahe ho?",dil ki jaddojehad ko

devika ne chehre pe nahi aane diya tha. "duniya ka sabse haseen

chehra." "achha.ab bahut dekh liya,ab jao.kaam nahi tumhe?",usne shiva

ko pyar se jhidka. "haan vo to hai.",aah bharta shiva uth khada hua &

darwaze ki or mud gaya. "shiva..",mehbuba ki aavaz sun vo

ghuma,"..udas kyu hote ho,jaanam!apni har raat to maine tumhare naam

kar di hai.",shiva ko mehbuba ke pyar ke izhar se bahut khushi hui &

vo bezari jo uske chehre pe aayi thi vo gayab ho gayi & vo vaha se

nikal gaya. Raat ke 10 baje Inder apne quarter me andhere me baitha

khidki se bahar dekh raha tha.use estate manager ki naukri karte 1

mahine se upar ho gaya tha magar Suren Sahay ki maut ke baad vo apne

plan ke agle kadam abhi tak nahi utha paya tha.is waqt use Shiva sabse

bada khatra nazar aa raha tha.vo bahut wafadar tha & abhi tak inder ko

uski koi bhi kamzori ya koi aisi baat ka pata nahi chala tha jise vo

uske khilaf istemal kar sakta. use baukhlahat hone lagi magar abhi use

thodi der baad Rajni ke paas jana tha & uske paas sharab pi ke jana

thik nahi tha.shiva ke bare me jaanane ke liye 1 baar uske kamre ki

talashi lena zaruri tha kyuki sath kaam karne valo se uske bare me koi

bhi kaam ki baat nahi pata chali thi lekin shiva bungle ke andar rehta

tha & vo bungle ke andar ghuse kaise,ye uski samajh me nahi aa raha

tha. tabhi uski nigah me,joki bungle se quarters ki or aate raste pe

thi,uske hatho ki kathputli ka aks ubhra.bungle ke andar kaam karne

valo ke liye Devika ne vardi banwayi thi.naukar to kamiz & pant &

sardiyo me coat pehante th vahi naukraniya ya to sari ya fir ghutno se

neeche tak ki kale rang ki pure ya aadhe bazu ki dress pehanti thi.

rajni ne bhi is waqt aadhe bazu vali dress pehni hui thi.rasoi me kaam

karte waqt pehanane vala apron abhi bhi uski dress ke upar bandha tha

& hatho m 1 chhota sa bag tha jisme kabhi-kabhar vo lunch le jati

thi.naukaro ko sara khana bungle me hi milta tha magar rajni & kuchh

aur ladkiya kabhi-kabhar apne ghar se bhi kuchh banake le jati thi

zayka badalne ki garaj se. use dekhte hi inder ki aankhe chamak uthi &

vo apni kursi se uth furti se apne darwaze se nikal gaya.

"aahh..!",rajni ne darwaza khol abhi quarter me kadam rakha hi tha ki

inder ne use apni baho me daboch liya,"..kaise choro ki tarah aate

ho?!!darr ke mare meri to jaan hi nikal gayi thi!",inder ne darwaza

band kiya & 1 maddham roshni vala bulb jala diya. "dekho,to mera dil

kaise dhadak raha hai.",shokhi se muskurati rajni ne apne seene ki or

ishara kiya.inder ne use darwaze ke bagal ki deewar se laga ke khada

kiya hua tha & khud us se sat ke khada tha. "abhi shant karta hu

ise.",usne apna daya hath rajni ki kamar ke peeche kar uske apron ki

dr ko khola & baaye se uske hath ka bag & quarter ki chabhi lke bagal

ki deewar me bane shelf pe rakh diya.dor khulte hi rajni ne apron ko

gale se nikala & apni baahe apne premi ke gale me daal di. inder ka

hath rajni ki gand pe fir raha tha & jaise hi usne uske gand ko daba

uski chut ko apne lund se peesa use rajni ki dress me se uski kama ke

paas kuchh chubha,"ye kya hai?",rajni ke khule honth joki uske hontho

ki or badh rahe the,sawal sun vahi ruk gaye. "ohh..ye hai.",usne jeb

me hath daal kar 1 chabhi nikali,"..ye to bungle ki chabhi hai."

"kya?",badi mushkil se inder apni hairani & khushi ko chhupa

paya,"..bungle ki chabhi tumhare paas kaise aayi?",uska daya hath

rajni ki dress ko upar kar uski bayi jangh ko utha ke use sehla raha

tha. "ye bungle ki rasoi ke darwaze ki chabhi hai.devika ma'am ne

mujhe de rakhi hai taki savere jab main kaam pe jaoon to unki nind me

khalal na pade,vo thoda der se uthati hai na.",inder ne us se chabhi

le li & apne honth uske hontho se mila diye.usne chabhi vala hath 1

baa rajni ke dress ki jeb me ghusaya magar chabhi andar nahi dali

balki us chabhi ko apne shorts ki jeb me daal liya. rajni ka hath ab

uski shots ke upar se uske lund ko tatol raha tha,inder ne fauran use

dhila ka neeche gira diya.vo nahi chahta tha ki rajni ko chabhi ke

bare me pata chale,"jaan,khana khaya tumne?" "haan.",inder ke is

mamuli se saval n rajni ke dil ko bahut khush kar diya.use apne premi

pe bahut pyar aaya..kitni fikr karta tha vo uski!usne aur garmjoshi se

uske tagde lund ko apni giraft me kas liya & use chumte hue hilane

lagi.inder bhi uski kamuk harkato ka lutf uthane laga,usne to sawal

isliye kiya tha ki kahi rajni use garam karne ke baad khana na khane

lage & use jhadne ke liye intezar karna pade. inder ne bhi uski pith

pe lagi dress ki zip ko neeche kar diya tha & apne hath andar ghusa

uski chhatiyo se khel raha tha.rajni ne bechain ho inder ki t-shirt

nikal di & badi betabi se uske seene pe apne hath firati hui use

chumne lagi.uske honth inder ke chehre se neeche uske seene pe

aaye,"inder.." "hun..",inder uski pith & baal sehla raha tha. "hum

shadi kab karenge?",rajni uske seene se neeche uske pet pe pahunch

gayi thi. "bahut jald meri jaan,bahut jald.",inder ne uska sa neeche

apne pyase lund ki or dhakela,"..bas thode paise jama ho jayen taki

shadi ke bad honeymoon ke liye main tumhe kisi bahut hi khubsurat

jagah le ja saku. "ohh..inder.itna khach karne ki kya zarurat

hai?",rajni is baat ko sunkar phuli nahi sama rahi thi.usne inder ke

lund ko dono hatho me liya & apna sar bayi taraf jhuka lund ki bagal

me chumne lagi. "unnn..!",..ye ladki dekhne me jitni sadharan thi

chudai me utni hi mast!inder ka dil josh se bhar gaya tha,"..Prasun

jaisa aadmi agar shadi kar mauj uda sakta hai to hum kyu nahi!",usne

rajni ke balo ko pakad uske sar ko lund pe dabaya. "unki baat aur

hai..",rajni lund ki jad pe jaha se inder ke ande shuru hote the,apni

jibh chala use pagal kar rahi thi,"..vo raees hain,jaan.dekho na,sir

ko guzre abhi kitne hi din hue hain & ab ma'am ki vakil unhe nayi

vasiyat banane ke liye keh rahi hai." "kya?!",1 baar fir inder badi

mushkil se apne hairat bhare jazbato ko rajni se chhupa paya.rajni ne

lund ko apne munh me bhar liya tha & use hilate hue chus rahi thi &

isliye usne fauran inder ko jawab nahi diya.inder ka dil to kiya ki

lund khinch use 2 tamache jade & use puri baat batane ko kahe magar ye

mumkin nahi tha.vo rajni ke jawab ka intezar karta raha. kayi palo tak

lund ko ji bhar ke chusne ke baad rajni ne sans lene ke liye use munh

se nikala,"..us din unki vakil nahi hai..kya naam hai uska.." "Kamini

Sharan.",inder ne use uthaya & baaho me bhar uski dress ko neeche

sarka diya.bra ka baya cup neeche tha & uski bayi chhati numaya

thi.inder to pura nanga hi tha.usne rajni ko god me uthaya & uske

bedroom me le gaya.bistar pe lita usne uski panty utari & uski gand ki

phanko ke neeche apne hath laga uski jhanto ko apni laplapati jibh se

chir uski chut me ghusa diya. "aaanhhh...oonnnn....!",rajni to jism me

phut rahe maze ki fuljhadiyo me apni kahi baat bhul hi gayi thi magar

inder ko to uske munh se abhi baat nikalwani hi thi. "to kya keh rahi

thi vakil kamini sharan?",vo apne ghutno pe tha & rajni ki gand ko

tham usne hawa me aise utha rakha tha mano uska vazan kuchh khas na

ho. "oonnhh....keh rahi thi ki ma'am ko ab vasiyat

bana...aaanhhh..le..ni..chaaa..hiyee...haaiiiii..!",rajni jhad ahi thi

magar inder ki laplapati jibh abhi bhi uski chut ke dane ko chaat rahi

thi. "to ma'am ne kya kaha?" "uunn..hhunnnhhh....kaha ki kuchh din ruk

jaiye...ooohhhhhh.....!",inder ne uski jangho ko apni jangho pe tika

liya tha & apna lund uski chut me ghusa raha tha.rajni ne bechain ho

uski baaho ko tham liya tha. "aur kuchh nahi kaha unhone?"

nahi.",inder samajh gaya ki is se zyada rajni ko kuchh nahi pata.rajni

ne uski banh pakad ke neeche khincha to inder ne uski baat mante hue

apna upari badan neeche kiya & use chumne laga.ye kathputli uska sabse

badhiya hathyar thi & waqt aa gaya tha ki abhi di gayi jankari ke liye

use inam diya jaye.inder ne apni jnagho ko failaya & rajni ke upar let

gehre dhakke laga use madhosh karte hue uski chudai karne laga.

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