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Badla बदला compleet

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थोड़ी देर बाद तीनो खाने की मेज़ पे बैठे खाना खा रहे थे.मेज़ के सिरे पे

अकेली कुर्सी पे चंद्रा साहब उनके बाए तरफ वाली कुर्सी पे कामिनी & दाए

तरफ वाली पे मिसेज़.चंद्रा बैठी थी.हल्की-फुल्की बातो के साथ खाना हो रहा

था जब कामिनी को वही जाना-पहचाना एहसास अपनी दाई जाँघ पे हुआ.चंद्रा साहब

का हाथ मेज़ के नीचे से उसकी स्कर्ट के अंदर घुस उसके घुटनो के थोड़ा उपर

उसकी जाँघ पे घूम रहा था.हाथ जाँघ के अंदर की तरफ बढ़ा तो कामिनी ने

उसेआपने घुटनो मे भींच लिया.

"और आंटी..आपके यहा बहुत चूहे थे पिच्छली बार वो भाग गये?",उसने दाया हाथ

टेबल के नीचे किया & अपने गुरु का लंड दबा दिया.

"हां,मुझे तो नही दिखे फिर.जब तुम आती हो तभी दिखता है मुआ!",बेख़बर

मिसेज़.चंद्रा ने जवाब दिया.चंद्रा साहब उसकी बात का मतलब समझ

मुस्कुराए,".इस बात जब तुम आओ ना & वो दिखे तो डंडे से मार देना उसे."

"ठीक है आंटी.",कामिनी ने चंद्रा साहब को देखा & फिर दोबारा हाथ नीचे ले

गयी & उनके लंड पे चूटी काट ली,"..मार दूँगी आंटी.",चंद्रा साहब ने बड़ी

मुश्किल से अपनी कराह रोकी & हाथ को उसके घुटनो की गिरफ़्त से छुड़ा उसकी

जाँघो को मसल दिया.

खाना ख़त्म होते ही कामिनी ने स्वीट डिश मँगवाई-कस्टर्ड,"सर,आप इसमे फल

लेंगे & आप आंटी?",कटोरियो मे कस्टर्ड निकालते हुए उसने कटे फल

डाले,"..मुझे तो फल के साथ ही पसंद है खास कर के केले के साथ.",उसने फिर

इशारो भरी नज़रो से अपने गुरु को देखा.उसे पता नही था की उसकी बातो ने

उन्हे कितना गरम कर दिया है & वो बस मौके की तलाश मे हैं.

"केला तो बहुत अच्छा फल है,कामिनी रोज़ खाना चाहिए बड़े फ़ायदे की चीज़

है.",मिसेज़.चंद्रा कस्टर्ड खा रही थी.

"जी आंटी,मैं तो रोज़ खाती हू जिस दिन ना मिले उस दिन दिल थोड़ा बेचैन हो

जाता है.",इस आख़िरी बात को कह जब कामिनी ने चंद्रा साहब को शोखी से देखा

तो उन्होने दिल मे फ़ैसला कर लिया की चाहे कुच्छ भी हो जाए आज वो अपनी

शिष्या के अंदर अपना गरम लावा उड़ेले बगैर नही जाएँगे.

खाना खा तीनो फिर से हॉल के सोफॉ पे बैठ गये,"अरे कामिनी ज़रा टीवी लगाना

आज मेरे सीरियल का स्पेशल 1 घंटे का एपिसोड आने वाला है.",टीवी ऑन हो गया

& कामिनी & चंद्रा साहब दोनो अपने पेशे से जुड़ी बाते करने लगे.

"ओफ्फो!तुम भी भी हर जगह काम लेके बैठ जाते हो.मुझे डाइलॉग तो सुनने

दो!",मिसेज़.चंद्रा ने पति को झिड़का.

"सर,मुझे आपसे सहाय एस्टेट के बारे मे भी बात करनी थी.हम उधर के कमरे मे

चलें.आंटी आपको बुरा तो नही लगेगा ना की हमने आपको यहा अकेला छ्चोड़

दिया?"

"अरे नही क्या तकल्लूफ भरी बेकार बाते कर रही हो.जाओ.",वो अपने सीरियल मे मगन थी.

"ओई..थोड़ा तो सब्र कीजिए!",दूसरे कमरे मे पहुँचते ही चंद्रा साहब ने उसे

बाहो मे भर लिया.

"पहले ऐसी बाते करके भड़काती हो & फिर सब्र रखने को बोलती हो!",उन्होने

उसकी स्कर्ट को कमर तक उठा दिया & उसकी गंद पे चूटी काट ली,"..ये मेरे

लंड पे चिकोटी काटने के लिए!"

"अफ....अपनी शिष्या से बदला ले रहे हैं!"

"हां,मेरी जान.इश्क़ मे सब जायज़ है!",उन्होने अपनी पॅंट खोल अपना लंड

निकाला & सोफे पे बैठ गये.कामिनी ने लंड को पकड़ मुँह मे लेना चाहा तो

उन्होने उसे रोक दिया,"नही,इतना वक़्त नही है."

"वाउ!",कामिनी की स्कर्ट के नीचे लेसी लाल पॅंटी देख वो खुश हो

गये.उन्होने उसे नीचे किया & उसकी चूत को चूम लिया.कामिनी ने देखा की

पॅंटी उतार उसे उन्होने अपनी जेब मे डाल लिया.

"आंटी!",चंद्रा साहब चौंके & खड़ी हुई कामिनी की चूत से मुँह हटाया मगर

कामिनी ने उनका सर वापस अपनी चूत पे लगा उपर से स्कर्ट डाल दी.

"हां,कामिनी."

"आपको पता है मेरी दोस्त के यहा 1 चूहा घुस गया था जोकि उसके कपड़े चुरा लेता था."

"अच्छा.",कामिनी ने स्कर्ट उठा अपने आशिक़ को उसमे से निकाला & फिर सोफे

के पीछे की दीवार की ओट से खड़ी हो गयी & ड्रॉयिंग हॉल के अंदर बैठी

मिसेज़.चंद्रा को देखा,"सर बाथरूम गये हैं इसलिए जल्दी से बता रही

हू..",उसने आवाज़ थोड़ी नीची की,"..वो उसकी पॅंटी चुरा के अपने बिल मे ले

जाता था!"

"क्या?!",दोनो औरते हंस पड़ी.कामिनी दीवार की ओट मे थी & बस उसका कमर तक

का हिस्सा मिसेज़.चंद्रा को दिख रहा था.अगर वो नीचे देख लेती तो उन्हे

शायद दिल का दौरा पड़ जाता.पीछे उनके पति कामिनी की स्कर्ट उठाए उसकी गंद

की दरार मे अपना मुँह धंसाए उसके गंद के छेद & उसकी चूत को अपनी ज़ुबान

से गीला कर रहे थे.

"उसकी अलमारी से निकल लेता था क्या?"

"अरे नही,जब उतार के रखती थी ना बाथरूम मे या फिर अपने कमरे मे तब लेके

भाग जाता था.हुमलोग हंसते थे की बड़ा रंगीन मिज़ाज है कही मौका मिलने पे

पॅंटी के नीचे भी हाथ ना सॉफ कर दे.",इस बार दोनो औरते और ज़ोर से हंस

पड़ी मगर तब तक सीरियल का ब्रेक ख़त्म हो चुका था & चंद्रा साहब की

ज़ुबान ने उसे भी काफ़ी मस्त कर दिया था.

"सर आ गये.जाती हू.",कामिनी घूमी & अपने गुरु को ज़मीन पे बिछे कालीन पे

लिटा दिया & फिर स्कर्ट कमर तक उठा उनके उपर बैठ गयी.ये कहने की ज़रूरत

नही की बैठते ही उसकी चूत उनके लंड से भर गयी थी.उच्छल-2 के उसने उनके

लंड को जन्नत की सैर कराना शुरू कर दिया.चन्द्रा साहब के हाथ उसकी स्कर्ट

के नीचे च्छूपे हुए उसकी गंद की फांको बेरहमी से दबा रहे थे.कामिनी ने

अपने हाथो से अपने ब्लाउस के आगे लगे बटन्स को खोला & फिर ब्रा के कप्स

को उपर कर अपनी चूचिया अपने गुरु के लिए नुमाया कर दी.

"वो सहाय एस्टेट के बारे मे क्या कह रही थी?",चंद्रा साहब ने जैसे ही उन

मस्त गोलो को नंगा देखा,उनके हाथ गंद से सीधा उनपे चले गये & थोड़ी देर

उनके साथ खेलने के बाद उन्होने कामिनी को अपने सीने पे झुका उसकी गर्दन

को चूम लिया.

"इस से तो यही लगता है की शिवा & देविका के बीच कोई चक्कर नही

था...ऊहह..!",कामिनी ने सारी बात उन्हे बताई.बड़ी मुश्किल से उसने अपनी

मस्त आहो पे काबू रखा था.तभी उसकी चूत ने वही सिकुड़ने-फैलने की मस्तानी

हरकत शुरू की तो चंद्रा साहब समझ गये की वो झड़ने वाली है.उन्होने उसे

अपने सीने पे सुलाते हुए उसके होंठो को खुद के लबो से कस उसके मुँह को

बंद किया & फिर उसकी कमर को जाकड़ ज़ोर के धक्के लगाने लगे.

कामिनी भी उनसे चिपटि झाड़ रही थी.दूसरे कमरे मे उनकी बीवी बैठी थी & वो

यहा उनसे चुद रही थी-हर बार की तरह इस बार भी इस ख़याल ने उसके मज़े की

शिद्दत को दोगुना कर दिया.कुच्छ देर बाद चंद्रा साहब ने उसे अपने उपर से

उठाया.वो अभी नही झाडे थे.उन्होने कामिनी को कालीन पे घुटनो पे खड़ा किया

& सोफे की सीट पे हाथ रख खुद को संभालने को कहा फिर खुद भी वैसे ही घुटनो

पे उसके पीछे आए & उसकी गंद को अपने थूक से गीला करने लगे.

कामिनी ने सोफे अपनी छाती टिकाते हुए उसे बड़ी मज़बूती से पकड़ लिया &

उनके हमले के लिए तैय्यार हो गयी.कुच्छ पलो बाद लंड आधा अंदर था & उसके

गुरु बाए से उसकी चूचियो को दबातये हुए & दाए से चूत के दाने पे उंगली

चलाते हुए उसकी पीठ से खुद का सीना साटा उसके दाए कंधे के उपर से झुके

उसके होंठो को चूमते,उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ाते उसकी गंद मार रहे

थे.
 
"इस से तो ये साबित होता है की दोनो मे पॅक्का कुच्छ चक्कर था.",कामिनी

को 1 पल लगा ये समझने मे की देविका & शिवा की बात कर रहे थे उसके गुरु.

"वो कैसे?"

"वो ऐसे..",उन्होने 1 धक्के मे लंड को थोडा और अंदर ठेला,"..की अगर कोई

चक्कर नही होता तो देविका शिवा को पोलीस के हवाले कर देती.अभी उसे डर है

की कही शिवा बचने के लिए ये राज़ ना खोल दे इसलिए उसने ऐसा नही

किया.",कामिनी 1 बार फिर उसी मीठे दर्द का एहसास कर रही थी.पूरा बदन ऐंठ

रहा था & उसे बस अब झड़ने का इंतेज़ार था,"..लेकिन तुम्हारी बात सही है

की अब और सावधानी की ज़रूरत है.शिवा अब ज़्यादा ख़तरनाक है."

"जैसा की तुमने सोचा है..",कामिनी ने महसूस किया की चंद्रा साहब के धक्को

की शिद्दत भी अब गहरी हो चली थी & उनकी किस मे भी अब दीवानगी बढ़ी नज़र आ

रही थी.अपने गुरु की मदहोशी समझते ही कामिनी का जिस्म भी और भड़क उठा &

बेचैनी मे उसकी कमर अपनेआप हिलने लगी.

"..शिवा अब सबकी नज़रो से ओझल है & वो इस ज़िल्लत का बदला ज़रूर लेने की

कोशिश करेगा.",कामिनी की आहे तेज़ होती देख चंद्रा साहब ने अपनी बात पूरी

की & उसके होंठो को अपने होंठो से सील दिया.कामिनी अब मस्ती मे मचलते हुए

बदन हिला रही थी.चंद्रा साहब की उंगली उसके दाने को रगड़ उसके बदन मे

मस्ती की बिजलिया छ्चोड़े जा रही थी.चंद्रा साहब को भी अपने आंडो मे उबल

रहा लावा उनके लंड से बाहर निकलने को मचलता महसूस हुआ & उन्होने उसके उपर

लगाई रोक हटा दी.

उनके & सोफे के बीच दबा कामिनी का बदन झटके खा रहा था,अगर चंद्रा साहब के

होंठ उसके होंठो पे ना होते तो उसकी आहे उस कमरे मे क्या पूरे बंगल मे

गूँज रही होती.वो झाड़ रही थी & जानती थी की बगल के कमरे मे टीवी देख रही

मिसेज़.चंद्रा के उन्हे पकड़ने का ख़तरा अभी भी बरकरार है.इस बात ने

हुमेशा की तरह उसके मज़े को और बढ़ा दिया & वो पागलो की तरह छट-पटाती हुई

झड़ने लगी.उसने महसूस किया की उसके होंठो को खामोश किए उस से चिपके उसके

गुरु भी झाड़ रहे हैं.उनका बदन झटके खा रहा है & उसकी गंद मे उनका विर्य

भरता चला जा रहा है.

"शिवा से सावधान रहने के अलावा मुझे लगता है की सहाय परिवार को किसी और

से भी ख़तरा है मगर तुम्हारी ही तरह मुझे भी उसके बारे मे कुच्छ समझ नही

आ रहा.",चंद्रा साहब ने अपनी पॅंट की ज़िप चढ़ाई.

"तो क्या करना चाहिए?",कामिनी अपने ब्लाउस के बटन लगा रही थी.

"बस वीरेन & देविका को आगाह कर दो.आगे वो खुद समझदार हैं फिर उनके वकील

होने की हैसियत से तुम उन्हे केवल सलाह दे सकती हो क्यूकी इस बात की फीस

मिलती है तुम्हे मगर उन्हे वो सलाह मानने के लिए मजबूर नही कर

सकती.",चंद्रा साहब ने उसे बाहो मे भरा तो दोनो 1 दूसरे को किस करने लगे.

"ठीक है.जैसा आप कहें.",दोनो 1 दूसरे से अलग हुए & हॉल मे टीवी देख रही

मिसेज़.चंद्रा के साथ आके बैठ गये.

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क्रमशः.........
 
बदला पार्ट--32

गतान्क से आगे...

"kya?!sach me!",Kamini ki badi-2 aankhe hairat me aur badi ho gayi.

"haan.",kamini Viren ke sath uske bungle ke lawn ke jhule me baithi

thi.aaj thodi garmi thi to usne ghutno tak ki dhili-dhali shorts &

t-shirt pehni thi.viren ki bayi banh ke ghere me baithi vo uske chehre

ko dekh rahi thi.

"tumhe kaise pata chala?",viern ne use apne karib kiya & uski thuddi

chum li,".unn..batao na!"

"roma ka fone aaya tha.",vo uski kamar shirt ke upar se hi sehla raha

tha.kamini janti thi ki thidi hi der me hath uski shirt ek andar hoga.

"chhodo na."usne viren ka daya hath kamar se hataya to usne us hath ko

uski nangi tango se laga diya.kamini ne haar man li & is bar hath ko

nahi hataya,"kya bola roma ne?"

viren kamini ko shiva ki dhokhdhadi ke bare me batane laga.bolte hue

uska daya hath kamini ki shorts ke andar ghus uski makhmali jangho pe

fisal raha tha.kamini pe khumari chhane lagi thi par uska dhyan viren

ki baato pe tha..aakhir ye kamal hua kaise?

"to inder ko pata laga sab kuchh..",dhile shorts me viren ka daya hath

ab uski dayi jangh se uski kasi gand ki dayi fank pe chala gaya tha &

panty ke andar ghus raha tha,"..oowww..!",inder gand ki mansalta dekh

khud ko chuti katne se rok nahi paya.kamini ne uska hath khinchna

chaha magar usne gand ko aur mazbuti se daboch liya & apnty ke andar

uski gand ki darar pe ungli firane laga.kamini ab aur mast ho gayi &

premi ki shararat ki jawab me usne bhi uski t-shirt upar ki & uske

daye nipple ko danto se kaat liya.

"main estate gaya tha fir..",viren ki ungli kamini ke gand ke chhed me

ghusi to kamini ne chihunk ke gand ka chhed kas liya.viren chhed me

qaid ungli ko andar-bahar karne laga.ab kamini jhule se uth viern ki

god me baithi machal rahi thi.viren t-shirt ke upar se hi uski mast

chhatiyo ko chum raha tha.

"roma ne mujhe sari baat batayi & ye kaha tha ki devika bahut pareshan

hai.isliye main estate gaya & devika se baat ki.",viren ka baya hath

kamini ki shirt ke andar ghus uski moti chhatiyo ko masal raha

tha.kamini bhi ab us se chipki use paglo ki tarah chum rahi thi.uski

chut me kasak uthne lagi thi & use ab dono ke jismo ke beech pade

kapde bahut bure lag rahe the.

viern jaise uske dil ki baat samajh gaya,vo kamini ki shirt me hath

ghusa uski dayi choochi ko dabate hue shirt ke uapr se hi uski bayi

choochi ko chum raha tha.usne apna sar uske seene se uthaya & uski

shirt ko uske sar ke upar se khinchte hue nikal diya.kamini ne bhi

uski shirt nikal di & dono ne 1 dusre ko baho me kas liya.

"tumhe kya laga..aahhhhh....dant nahi....ooowww....badtamiz...ye

lo..!",viren ne kamini ke baye nipple ko dant se kaat liya.jab usne

mana karne ke bavjood usne fir se vahi harkat uski dayi chhati pe

dohrayi to kamini ne bhi sar jhukate hue uske seene pe kaat liya.

"pehle batao na..aanhhh..",ab vo apni tange viren ki kamar pe lapete

uski god me baithi thi & viern uski nangi pith se sarkate hue dono

hatho ko 1 bar fir shorts me ghusa raha tha magar is bar hath upar se

ghus rahe the.hatho ne jaise hi kamini ki chaudi gand ko chhua vo use

masalne & dabane me jut gaye.

"tum nahi manoge...uunhhh..tumhe kya lagta hai devika & shiva ke beech

kuchh tha ki nahi?..oohhhhh...!",kamini ne apne mehboob ko apni baho

me aur kas liya kyuki usne apne daye hath ki ungli uski gand se firate

hue neeche se uski panty me qaid chut me ghusa di thi.

"nahi,aisa lagta to nahi hai.",viren uske seene ke ubharo ko chumte

hue uski chut ko ungli se kured raha tha.kamini ab puri tarah se josh

me pagal uski god me kud rahi thi.viren ki ungli uski chut se ras ki

dhar nikalwa rahi thi & vo apne jhadne ke bahut karib thi,"..lekin

agar kuchh tha bhi to is baat ke bad sab khatm ho gaya hoga.ab fikr ki

koi baat nahi hai.",viren ki ungli chut me kuchh zyada hi andar ghusa

gayi & chut e bardasht nahi kar payi & usme se ras ki tez dhar chhut

padi.kamini jhad chuki thi.

nidhal kamini ko viren ne jhule pe litaya & uski shorts & panty ko

nikal diya.badan pe bas kewal bra tha jiske cups uski moti choochiyo

ke neeche dabe pade the.viren ne apni shorts kholi & apne lund ko

bahar nikala.kamini ki tange faila ke apni dayi tang jhule se neeche

latkayi & bayi ko aage kamini dayi tang ke bagal me faila us tang ke

talwe ko uske dayi chhati ki bagal me laga diya.

"aisa sochne ki galti nahi karna viren.abhi tak shiva aankho ke samne

tha ab nazro se ojhal hai.pehle hum uspe nazar rakh sakte the ab

nahi.& fir itna to pakka hai ki dawa se chhedchhad me uska hath nahi

tha...oohhhhhhh..!",viren ne apna lund uski chut me ghusa diya

tha.jhule pe vo tez-2 dhakke laga chudai to kar nahi sakta tha so usne

is tarah baithke apni mehbooba ki chut ki sair karne ki sochi.

"aanhhh.....uummmmm.....pura andar ghusao na...hannnn..",viren ne abs

aadha hi lund andar kiya tha to kamini ne hath se pakad kamar hila

pure lund ko apne andar kiya.jub viren ka lumba,mota lund pura ka pura

uski chut me sama jata to vo bhara-2 ehsas use bahut gudgudata tha &

sue bahut maza aata tha.viren ka lund uski chut ke 1-1 hisse ko chhu

raha tha & uske badan ke rom-2 me bas josh bhar gaya tha.

"hoshiyar rehna,viren.khatra abhi tala nahi hai....aaaannhhhh..!",sham

gehra rahi thi.panchhi apne ghonslo ko lautne lage the,aasman pe dubte

suraj ne apna sinduri rang bikher diya tha.us suhane aalam me apne

mehboob ki qatilana chudai ne kamini ko bilkul madhosh kar diya.usne

apni baat keh li thi & ab vo bas uske ishq me doob jana chahti

thi.usne apni dono tango ko mod baithe hue viren ki kamar ko jakad

liya & uski taal se taal mila kamar hilane lagi.lawn me ab estate se

judi baate nahi balki dono ke jismo ki jaddojahad se paida hoti jhule

ke hilne ki aavaz & dono ke 1 dusre ke khubsurat jismo se aahat hone

se paida hui mastani aaho ki aavaze thi.

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"namaste aunty!namaste sir!..",apne bungle ke portico me khadi kamini

ne Chandra Sahab & unki biwi ka isteqbal kiya.usne dono ko apne ghar

raat ke khane ki dawat di thi.kamini ne ghutno tak ki kali skirt & lal

blouse pehna tha.chandra sahab ne utarte hi apni shishya ke husn ko

aankh bhar ke nihara.kamini se unki ye harkat chhupi na rahi & usne

unki taraf 1 shokh muskan fenki.use ye to pata tha ki uske guru uske

sath koi gustakh harkat karne ka mauka chhodenge nahi magar vo harkat

kitni gustakh thi bas yehi dekhna tha.

drawing hall me baith teeno baate karne lage,naukar sharbat ke glass

rakh gaya tha.teeno ne apne-2 glass utha liye.

"are kamini,ye tumhari tasveer hai kya?",1 deewar pe kamini ki viren

ke hatho banayi gayi sabse pehli painting lagi thi jisme usne laal

sari pehni thi,viren ne ye painting use tohfe me di thi.mrs.chandra ka

ishara usi ki or tha.

"haan..",kamini ne painting kuchh aise lagayi thi ki har kisiki nazar

uspe na pade magar mrs.chandra ne use dekh hi liya tha & ab dono

miya-biwi painting ke samne khade use dekh rahe the.

"viren sahay ki banai painting hai bhai!",chandra sahab ne apni patni

ko tasvir ke kone me viren ke dastkhat dikhaye.

"vaah..",mrs.chandra kamini se painting ke bare me puchhne lagi.

"mujhe ye painting kuchh khas nahi lagi.",chandra sahab ki baat sun

dono chaunk gayi.

"kyu?"

"ye dekho..viern ne naak thik nahi banayi hai.",chandra sahab ne daye

hath ki ungli kamini ki naak pe firayi,"..ye dekho usne thodi si

chapti banayi hai..yaha..",unki ungli naak ki nok pe thi.kamini ka

badan apne buddhe aashiq ki chhune se sihar utha tha.vo samajh gayi

thi ki unhone badi chalaki se apni biwi ki nazro ke samne hi uske jism

ko chhune ka rasta nikal liya hai.

"haan..sahi keh rahe ho."

"fir ye dekho..gardan kuchh zyada lambi bana di hai..",unki ungli ab

uski gardan ki lambai pe chal rahi thi.kamini ke badan ke roye khade

ho gaye the.

"baahen bhi thodi moti kar di hain..",aadhe bazu ke blouse se nikalti

uski gori,gudaz baaho pe unki ungliya firi to kamini ne apne pair ko

bechaini se hilaya.uski chut is chhedchhad se risne lagi thi.

"aur kamar to dekho..",mrs.chandra ne khud hi pati ko mauka de

diya,"..kitni patli kamar hai apni kamini ki & isne ise mota kar diya

hai.",mrs.chandra ne uski kamar pe hath firaya & jaise hi painting ki

or vapas dekha mr.chandra ne apni bayi banh uski kamar me dal uske

mansal hisse ko daba diya & fir furti se hath vapas khinch liye.

kamini ko laga ki uski tango me jaan nahi hai & agar ab vo thodi der &

yaha khadi rahi to zarur masti me chur ho gir jayegi,"..ab use main

aisi hi lagi to kya kiya ja sakta hai!aapne mera ghar nahi dekha hai

na aunty!aaiye aapko dikhati hu.",usne baat badli & dono ko vaha se

hataya.apne aashiq ki or usne gusse se dekha magar vo bas muskura rahe

the.unki muskan dekh kamini ko bhi hansi aa gayi jise usne badi

mushkil se mrs.chandra se chhupaya.aakhir unki maujoodgi me chandra

sahab ke sath mastana khel khelne me use bhi to maza aata hi tha.

thodi der baad teeno khane ki mez pe baithe khana kha rahe the.mez ke

sire pe akeli kursi pe chandra sahab unke baye taraf vali kursi pe

kamini & daye taraf vali pe mrs.chandra baithi thi.halki-fulki baato

ke sath khana ho raha tha jab kamini ko vahi jana-pehchana ehsas apni

dayi jangh pe hua.chandra sahab ka hath mez ke neeche se uski skirt ke

andar ghus uske ghutno ke thoda upar uski jangh pe ghum raha tha.hath

jangh ke andar ki taraf badha to kamini ne useapne ghutno me bhinch

liya.

"aur aunty..aapke yaha bahut chuhe the pichhli baar vo bhag

gaye?",usne daya hath table ke neeche kiya & apne guru ka lund daba

diya.

"haan,mujhe to nahi dikhe fir.jab tum aati ho tabhi dikhta hai

mua!",bekhabar mrs.chandra ne jawab diya.chandra sahab uski baat ka

matlab samajh muskuraye,".is baat jab tum aao na & vo dikhe to dande

se maar dena use."

"thik hai aunty.",kamini ne chandra sahab ko dekha & fir dobara hath

neeche le gayi & unke lund pe chuti kaat li,"..maar dungi

aunty.",chandra sahab ne badi mushkil se apni karah roki & hath ko

uske ghutno ki giraft se chhuda uski jangho ko masal diya.

khana khatm hote hi kamini ne sweet dish mangwayi-custard,"sir,aap

isme phal lenge & aap aunty?",katoriyo me custard nikalte hue usne

kate phal dale,"..mujhe to phal ke sath hi pasand hai khas kar ke kele

ke sath.",usne fir isharo bhari nazro se apne guru ko dekha.use pata

nahi tha ki uski baato ne unhe kitna garam kar diya hai & vo bas mauke

ki talash me hain.

"kela to bahut achha phal hai,kamini roz khana chahiye bade fayde ki

chiz hai.",mrs.chandra custard kha rahi thi.

"ji aunty,main to roz khati hu jis din na mile us din dil thoda

bechain ho jata hai.",is aakhiri baat ko keh jab kamini ne chandra

sahab ko shokhi se dekha to unhone dil me faisla kar liya ki chahe

kuchh bhi ho jaye aaj vo apni shishya ke andar apna garam lava udele

bagair nahi jayenge.

khana kha teeno fir se hall ke sofo pe baith gaye,"are kamini zara tv

lagana aaj mere serial ka special 1 ghante ka episode aane wala

hai.",tv on ho gaya & kamini & chandra sahab dono apne peshe se judi

baate karne lage.

"offoh!tum bhi ba har jagah kaam leke baith jate ho.mujhe dialogue to

sunane do!",mrs.chandra ne pati ko jhidka.

"sir,mujhe aapse sahay estate ke bare me bhi baat karni thi.hum udhar

ke kamre me chalen.aunty aapko bura to nahi lagega na ki humne aapko

yaha akela chhod diya?"

"are nahi kya takalluf bhari bekar baate kar rahi ho.jao.",vo apne

serial me magan thi.

"ouii..thoda to sabra kijiye!",dusre kamer me pahunchte hi chandra

sahab ne use baaho me bhar liya.

"pehle aisi baate karke bhadkati ho & fir sabr rakhne ko bolti

ho!",unhone uski skirt ko kamar tak utha diya & uski gand pe chuti

kaat li,"..ye mere lund pe chikoti katne ke liye!"

"uff....apni shishya se badla le rahe hain!"

"haan,meri jaan.ishq me sab jayaz hai!",unhone apni pant khol apna

lund nikala & sofe pe baith gaye.kamini ne lund ko pakad munh me lena

chaha to unhone use rok diya,"nahi,itna waqt nahi hai."

"wow!",kamini ki skirt ke neeche lacy laal panty dekh vo khush ho

gaye.unhone use neeche kiya & uski chut ko chum liya.kamini ne dekha

ki panty utar use unhone apni jeb me daal liya.

"aunty!",chandra sahab chaunke & khadi hui kamini ki chut se munh

hataya magar kamini ne unka sar vapas apni chut pe laga upar se skirt

daal di.

"haan,kamini."

"aapko pata hai meri dost ke yaha 1 chuha ghus gaya tha joki uske

kapde chura leta tha."

"achha.",kamini ne skirt utha apne aashiq ko usme se nikala & fir sofe

ke peechhe ki deewar ki ot se khadi ho gayi & drawing hall ke andar

baithi mrs.chandra ko dekha,"sir bathroom gaye hain isliye jaldi se

bata rahi hu..",usne aavaz thodi neechi ki,"..vo uski panty chura ke

apne bil me le jata tha!"

"kya?!",dono aurate hans padi.kamini deewar ki ot me thi & bas uska

kamar tak ka hissa mrs.chandra ko dikh raha tha.agar vo neeche dekh

leti to unhe shayad dil ka daura pad jata.peechhe unke pati kamini ki

skirt uthaye uski gand ki darar me apna munh dhansaye uske gand ke

chhed & uski chut ko apni zuban se gila kar rahe the.

"uski almari se nikal leta tha kya?"

"are nahi,jab utar ke rakhti thi na bathroom me ya fir apne kamer me

tab leke bhag jata tha.humlog hanste the ki bada rangin mizaj hai kahi

mauka milne pe panty ke neeche bhi hath na saaf kar de.",is baar dono

aurate aur zor se hasn apdi magar tab tak serial ka break khatm ho

chuka tha & chandra sahab ki zuban ne use bhi kafi mast kar diya tha.

"sir aa gaye.jati hu.",kamini ghumi & apne guru ko zamin pe bichhe

kalin pe lita diya & fir skirt kamar tak utha unke uapr baith gayi.ye

kehne ki zarurat nahi ki baithate hi uski chut unke lund se bhar gayi

thi.uchhal-2 ke usne unke lund ko jannat ki sair karana shuru kar

diya.chnadra sahab ke hath uski skirt ke neeche chhupe hue uski gand

ki fanko berahmi se daba rahe the.kamini ne apne hatho se apne blouse

ke aage lage buttons ko khola & fir bra ke cups ko upar kar apni

choochiya apne guru ke liye numaya kar di.

"vo sahay estate ke bare me kya keh rahit hi?",chandra sahab ne jaise

hi un mast golo ko nanga dekha,unke hath gand se seedha unpe chale

gaye & thodi der unke sath khelne ke baad unhone kamini ko apne seene

pe jhuka uski gardan ko chum liya.

"is se to yehi lagta hai ki shiva & devika ke beech koi chakkar nahi

tha...oohhhh..!",kamini ne sari baat unhe batayi.badi mushkil se usne

apni mast aaho pe kabu rakha tha.tabhi uski chut ne vahi

sikudne-failne ki mastani harkat shuru ki to chandra sahab samajh gaye

ki vo jhadne vali hai.unhone use apne seene pe sulate hue uske hontho

ko khud ke labo se kas uske munh ko band kiya & fir uski kamar ko

jakad zor ke dhakke lagane lage.

kamini bhi unse chipti jhad rahi thi.dusre kamre me unki biwi baithi

thi & vo yaha unse chud rahi thi-har bar ki tarah is baar bhi is

khayal ne uske maze ki shiddat ko doguna kar diya.kuchh der bad

chandra sahab ne sue apne upar se uthaya.vo abhi nahi jhade the.unhone

kamini ko kalin pe ghutno pe khada kiya & sofe ki seat pe hath rakh

khud ko sambhalne ko kaha fir khud bhi vaise hi ghutno pe uske peechhe

aaye & uski gand ko apne thuk se gila karne lage.

kamini ne sofe apni chhatiya tiokate hue use badi mazbuti se pakad

liya & unke humle ke liye taiyyar ho gayi.kuchh palo baad lund aadha

andar tha & uske guru baye se uski choochiyo ko dabatye hue & daye se

chut ke dane pe ungli chalate hue uski pith se khud ak seena sataye

uske daye kandhe ke upar se jhuke uske hontho ko chumte,uski zuban se

apni zuban ladate uski gand maar rahe the.

"is se to ye sabit hota hai ki dono me paaka kuchh chakkar

tha.",kamini ko 1 pal laga ye samajhne me ki devika & shiva ki baat

kar rahe the suke guru.

"vo kaise?"

"vo aise..",unhone 1 dhakke me lund ko thoda aur andar thela,"..ki

agar koi chakkar nahi hota to devika shiva ko police ke hawale kar

deti.abhi use darr hai ki kahi shiva bachne ke liye ye raaz na khol de

isliye usne aisa nahi kiya.",kamini 1 bar fir usi mithe dard ka ehsas

kar rahi thi.pura badan ainth raha tha & use bas ab jhadne ka intezar

tha,"..lekin tumhari baat sahi hai ki ab aur savdhani ki zarurat

hai.shiva ab zyada khatarnak hai."

"Jaisa ki tumne socha hai..",Kamini ne mehsus kiya ki Chandra Sahab ke

dhakko ki shiddat bhi ab gehri ho chali thi & unki kiss me bhi ab

deewangi badhi nazar aa rahi thi.apne guru ki madhoshi samajhte hi

kamini ka jism bhi aur bhadak utha & bechaini me uski kamar apneaap

hilne lagi.

"..Shiva ab sabki nazro se ojhal hai & vo is zillat ka badla zarur

lene ki koshish karega.",kamini ki aahe tez hoti dekh chandra sahab ne

apni baat puri ki & uske hontho ko apne hontho se sil diya.kamini ab

masti me machalte hue badan hila rahi thi.chandra sahab ki ungli uske

dane ko ragad uske badan me masti ki bijliya chhode ja rahi

thi.chnadra sahab ko bhi apne ando me ubal raha lava unke lund se

bahar nikalne ko machalta mehsus hua & unhone uske upar lagayi rok

hata di.

unke & sofe ke beech daba kamini ka badan jhatke kha raha tha,agar

chandra sahab ke honth uske hontho pe na hote to uski aahe us kamre me

kya pure bungle me gunj rahi hoti.vo jhad rahi thi & janti thi ki

bagal ke kamre me tv dekh rahi Mrs.Chandra ke unhe pakdane ka khatra

abhi bhi barkarar hai.is baat ne humesha ki tarah uske maze ko aur

badha diya & vo paglo ki tarah chhatpatai hui jhadne lagi.usne mehsus

kiya ki uske hontho ko khamosh kiye us se chipke uske guru bhi jhad

rahe hain.unka badan jhatke kha raha hai & uski gand me unka virya

bharta chala ja raha hai.

"shiva se savdhan rahne ke alawa mujhe lagta hai ki Sahay parivar ko

kisi aur se bhi khatra hai magar tumhari hi tarah mujhe bhi uske bare

me kuchh samajh nahi aa raha.",chandra sahab ne apni pant ki zip

chadhayi.

"to kya karna chahiye?",kamini apne blouse ke button laga rahi thi.

"bas Viren & Devika ko aagah kar do.aage vo khud samajhdar hain fir

unke vakil hone ki haisiyat se tum unhe kewal salah de sakti ho kyuki

is baat ki fees milti hai tumhe magar unhe vo salah maanane ke liye

majboor nahi kar sakti.",chandra sahab ne use baaho me bhara to dono 1

dusre ko kiss karne lage.

"thik hai.jaisa aap kahen.",dono 1 dusre se alag hue & hall me tv dekh

rahi mrs.chandra ke sath aake baith gaye.

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kramashah.........
 
गतान्क से आगे...

देविका ने शिवा की धोखाधड़ी के बाद अपने गम को भूलने के लिए खुद को काम

मे डूबा दिया था.वो 9 बजे दफ़्तर पहुँच जाती & देर शाम तक वही बैठी

रहती.उसने इंदर को नये सेक्यूरिटी मॅनेजर के आने तक उस काम को देखने की

ज़िम्मेदारी दे दी थी & इस वजह से दफ़्तर के सभी लोगो के जाने के बाद भी

बस वही दोनो वाहा बैठे काम करते नज़र आते थे.देविका को इंदर की ईमानदारी

& नएक्दिली के नाटक ने पूरी तरह से अपने झाँसे मे ले लिया था.इंदर भी

हमेशा ये दिखाता की वो बस अपने काम से मतलब रखता है.उसके प्लान का आगला

हिस्सा था देविका के करीब आना मगर इस तरह की देविका को ये ना लगे की इंदर

उसके करीब आना चाहता है बल्कि वो खुद ही इंदर की तरफ खींच गयी है.इंदर के

शातिर दिमाग़ ने सारी तरकीबेन सोच ली थी & उनपे अमल कर रहा था.

देविका को काम करते वक़्त कॉफी पीने की आदत थी & इधर कुच्छ दीनो से वो

कुच्छ ज़्यादा ही कॉफी पीने लगी थी.उस शाम भी 7 बजे उसका नौकर बंगल से

कॉफी का फ़्लास्क ले आया & उसके डेस्क पे रख दी.देविका ने कंप्यूटर पे

नज़र गड़ाए हुए फ़्लास्क खोल सीधा उसे अपने मुँह से लगाया & 1 घूँट भरा &

पीते ही बुरा सा मुँह बनाया,"ये क्या ले आए हो?!",गुस्से & हैरानी से

उसने पुचछा.नौकर घूम के कुच्छ जवाब देता की उसके पहले ही इंदर वाहा आ

पहुँचा & उसे बाहर जाने का इशारा किया.

"इसने मेर कहने से ऐसा किया है..",इंदर ने 2 फाइल्स उसके सामने रखी & 1

कुर्सी पे बैठ गया,"..आप दिन भर बस कॉफी पीटी रहती हैं & ये आपकी सेहत के

लिए नुक़सानदायक हो सकता है इसलिए मैने नौकर को आपको अभी कॉफी की जगह

फ्रूट जूस देने को कहा.इस बात के लिए मैं आपसे माफी माँगता हू,मॅ'म मगर

प्लीज़ आप अपनी सेहत पे ध्यान दीजिए क्यूकी ये एस्टेट की बेहतरी के लिए

बहुत ज़रूरी है.",देविका ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया & उन फाइल्स

पे दस्तख़त कर उन्हे इंदर की ओर बढ़ा दिया.

"आपने फाइल्स पढ़ी नही मॅ'म?"

"तुमने पढ़ ली ना इंदर."

"मॅ'म,आप मुझपे इतना भरोसा करती हैं,ये मेरे लिए खुशी & फख्रा की बात है

मगर प्लीज़ मॅ'म आप बिना पढ़े कही भी दस्तख़त ना किया करें चाहे वो

काग़ज़ कोई बी लेके आया हो.आप प्लीज़ 1 बार इन फाइल्स को पढ़

लें.",देविका ने इंदर को देखा & फाइल्स देखने लगी.इंदर तब तक अपने साथ

लाई 1 तीसरी फाइल पलटने लगा.फाइल पढ़ती देविका ने फाइल के उपर से इंदर को

देखा....ये इंसान बहुत ही ईमानदार & उतना ही मेहनती था...शिवा भी तो ऐसा

ही था मगर उसने कभी भी उसे काम के मामले मे ऐसे सलाह नही दी थी.अपने

डिपार्टमेंट के बारे मे वो उसे बस बताता था की क्या करने वाला था वो,कभी

उस से पुछ्ता नही था जबकि ये इंदर हर बात,हर फ़ैसला बिना उसकी इजाज़त के

नही लेता था..ऐसा नही था की ये ज़रूरी था मगर इंदर का मानना था की ये भी

1 नौकर फ़र्ज़ था की वो अपने मालिक को हर बात चाहे वो कितनी भी मुख़्तसार

क्यू ना हो,के बारे मे इत्तिला दे....बस भगवान उसे ऐसा ही बनाए रखें..जूस

भिजवा के उसने अपनी फ़िक्र जताई थी मगर जहा शिवा उसके इश्क़ या अब जब उसे

सच्चाई पता चली थी उसके जिस्म की हवस मे उसके साथ ये हरकते करता था, इंदर

केवल भलमांसाहत के चलते ऐसा कर रहा था.कोई मतलब नही था इसमे उसका..

"फाइल पढ़ ली मॅ'म?",इंदर ने देविका को खुद को देखता पाया.

"ह-हन..ये लो.",देविका को लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.इंदर ने

फाइल्स ऐसे ली जैसे उसे कुच्छ एहसास ही ना हुआ हो.वो कॅबिन से बाहर निकला

& उसके होंठो पे शैतानी मुस्कान खेलने लगी.उसका प्लान बिल्कुल ठीक काम कर

रहा था.देविका पे उसकी अच्छाई का असर हो रहा था बस सब कुच्छ ऐसे ही चलता

रहे.

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"देविका जी,आपने बहुत अच्छा किया.",कामिनी ने देविका के हाथ से 1 काग़ज़

लिया.दोनो औरते कामिनी के दफ़्तर मे बैठी थी,"..देखिए,ज़्यादा कुच्छ तो

है नही.ये काम बस आधे घंटे मे हो जाएगा."

"रश्मि..",उसने इंटरकम से अपनी सेक्रेटरी को बुलाया,"..ये लो & मुकुल के

साथ मिलके जल्दी से इस वसीयत को टाइप करके यहा लाओ.",वो रश्मि के जाते ही

देविका से फिर मुखातिब हुई,"बुरा ना माने तो 1 बात पुच्छू देविका जी?"

"ज़रूर कामिनी जी."

"कुच्छ दिन पहले एस्टेट से आपका 1 एंप्लायी आया था अख़बार मे नोटीस

छप्वाने के सिलसिले मे.",देविका का चेहरा संजीदा हो गया.शिवा के जाने के

बाद उसने अख़बार मे कामिनी के ज़रिए 1 नोटीस छप्वाया था की अब उसका

एस्टेट से कोई लेना-देना नही था & अगर कोई उस से किसी भी तरह का कारोबारी

ताल्लुक रखता है उसमे एस्टेट किसी भी तरह से ज़िम्मेदार नही होगी,कामिनी

उसी बारे मे बात कर रही थी.

"देखिए,देविका जी मैने आपको पहले बाते नही मगर जब ये बात हुई तो मुझे लगा

की आपको & वीरेन को आगाह कर देना ज़रूरी है."

"क्या बात है,कामिनी जी?",देविका के माथे पे बाल पड़ गये.

"आपको वो दवा याद है देविका जी जिसकी डिबिया मैने आपके बेडरूम मे देखी

थी.",देविका को याद करने की कोशिश करते देख कामिनी ने उसकी मदद की,"..वो

नारंगी वाली डिबिया."

"हां-2."देविका को याद आया.ये तो वही दवा थी जो उसके पति उसे चोदने से

पहले लेटे थे.कामिनी ने उसे बताया की अगर सुरेन जी लगभग रोज़ दवा ले रहे

थे तो दवा की डिबिया नयी कैसे हो गयी थी?

"आपका कहना है की.."

"जी साज़िश की बू तो है मगर किसकी ये समझ नही आता."

"आपको शिवा पे शक़ है."

"शक़ के दायरे मे तो सभी हैं ,देविका जी..",कामिनी देविका के चेहरे के

भाव को गौर से देख रही थी,"..सुरेन जी को छ्चोड़ सभी."

"आपका मतलब है मैं भी?"

"आप थी देविका जी मगर शिवा के जाने के बाद & ये वसीयत जो बाहर मेरी

सेक्रेटरी & असिस्टेंट आपके लिए तैय्यार कर रहे हैं जिसमे आपने वही किया

है जो आपके मरहूम पति की ख्वाहिश थी,ने आपको उस दायरे से बाहर निकाल दिया

है.",कामिनी ने देखा की देविका का चेहरा गुस्से से तन्तनाया हुआ है.वो

अपनी कुर्सी से उठी & डेस्क के दूसरी ओर आ देविका के बगल मे दूसरी कुर्सी

पे बैठ गयी,"मैं जानती हू आपको कितना गुस्सा आ रहा है.",उसने देविका का

हाथ थाम लिया,"..मुझे आपके पति लाए थे एस्टेट का वकील बनाके,देविका जी.आप

मुझे फीस देती हैं तो मेरा भी फ़र्ज़ है ना कि मैं अपना काम पूरी

ईमानदारी से करू."

"मेरी बात समझ रही हैं ना आप फिर भी आप बुरा मान गयी तो माफी चाहती हू."

"अरे नही कामिनी जी ऐसा मत बोलिए!",देविका ने भी उसके हाथ को थाम

लिया,"गुस्सा तो सच मे बहुत आया की जिस पति को मैने अपना सब कुच्छ माना &

पूरी ज़िंदगी उसी की होके बिता दी अब उसकी मौत का इल्ज़ाम मुझपे लगाया जा

रहा है लेकिन आपकी बात समझ गयी मैं.आगे कहिए तो क्या शिवा ने किया ये

सब?",देविका को लगा की कही शिवा ने उसके जिस्म की हवस मे पागल हो ये काम

तो नही किया था.

"कुच्छ समझ नही आता.देखिए,अगर शिवा करता तो वो दवा की डिबिया पूरी गायब

ही नही कर देता केवल बदलता क्यू?जहा तक मुझे अंदाज़ा है वो आपके पति के

साथ साए की तरह लगा रहता था तो उसे ये भी पता होगा की दवा क्या काम करती

है फिर वो दवा को बदलेगा भी तो बहुत ध्यान से.उसकी खोटी नियत जानने के

बाद भी मुझे पूरा यकीन नही हो रहा की दवा के साथ उसने छेड़-छाड़ की है.अब

अगर वो दवा की डिबिया जो आपके पति इस्तेमाल कर रहे थे तो शायद कुच्छ

सुराग मिले मगर जिसने डिबिया बदली उसने उसे तो ठिकाने लगा दिया होगा."

"मगर दवा बदली क्यू?जैसा आप कह रही हैं वो डिबिया गायब भी कर सकता था."

"शायद इसलिए की वो ये ना चाहता हो की किसी का ध्यान दवा पे जाए भी.अगर

दवा गायब हो जाती तो हो सकता है किसी का ध्यान उसपे चला जाता.अब जब दवा

उसी जगह पे रखी रहती तो किसी का भी ध्यान नही जाता की उस दवा का भी कुच्छ

लेना-देना है सुरेन जी की मौत से."

"तो फिर कौन हो सकता है इसके पीछे कामिनी जी?"

"ये बात तो मुझसे बेहतर शायद आप पता लगा लें.",रश्मि दस्तक दे वसीयत का 1

ड्राफ्ट लेके आई जिसमे कामिनी ने कुच्छ ग़लतिया सही की & रश्मि को उसे

फिर से तैय्यार करके लाने को कहा,"..देविका जी,ज़्यादा घबराईए मत बस

सावधान रहिए.अब जब ये वसीयत तैय्यार है तो आपको नुकसान पहुचने की वजह भी

ख़तम हो जाती है क्यूकी किसी को कुछ हासिल नही होने वाला आपको नुकसान

पहुँचा के.मैं आपके साथ हू & हम दोनो ज़रूर ही उस इंसान का पता लगा लेंगे

जो आपके परिवार पे बुरी नज़र डालता है.",रश्मि वसीयत का फाइनल ड्राफ्ट ले

आई थी जिसे देविका ने दस्तख़त कर कामिनी के पास हिफ़ाज़त से रखवा दिया.

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क्रमशः..............
 
बदला पार्ट--33

गतान्क से आगे...

devika ne shiva ki dhokhadhadi ke baad apne gham ko bhulane ke liye

khud ko kaam me duba diya tha.vo 9 baje daftar pahunch jati & der sham

tak vahi baithi rehti.usne Inder ko naye security manager ke aane tak

us kaam kod ekhne ki zimmedari de di thi & is vajah se daftar ke sabhi

logo ke jane ke baad bhi bas vahi dono vaha baithe kaam karte nazar

aate the.devika ko inder ki imandari & nekdili ke natak ne puri tarah

se apne jhanse me le liya tha.inder bhi humesha ye dikhata ki vo bas

apne kaam se matlab rakhta hai.uske plan ka aagla hissa tha devika ke

kareeb aana magar is tarah ki devika ko ye na lage ki inder uske

kareeb aana chahta hai balki vo khud hi inder ki taraf khinch gayi

hai.inder ke shatir dimagh ne sari tarkeeben soch li thi & unpe amal

kar raha tha.

devika ko kaam karte waqt coffee peene ki aadat thi & idhar kuchh dino

se vo kuchh zyada hi coffee peene lagi thi.us sham bhi 7 baje uska

naukar bungle se coffee ka flask le aaya & uske desk pe rakh di.devika

ne computer pe nazar gadaye hue flask khol seedha use apne munh se

lagaya & 1 ghunt bhara & peete hi burta sa munh banaya,"ye kya le aaye

ho?!",gusse & hairani se usne puchha.naukar ghum ke kuchh jawab deta

ki uske pehle hi inder vaha aa pahuncha & use bahar jane ka ishara

kiya.

"isne mer kehne se aisa kiya hai..",inder ne 2 files uske samne rakhi

& 1 kursi pe baith gaya,"..aap din bhar bas coffe piti rehti hain & ye

aapki sehat ke liye nuksandayak ho sakta hai isliye maine naukar ko

aapko abhi coffe ki jagah fruit juice dene ko kaha.is baat ke liye

main aapse mafi mangta hu,ma'am magar please aap apni sehat pe dhyan

dijiye kyuki ye estate ki behtari ke liye bahut zaruri hai.",devika ne

uski baat ka koi jawab nahi diya & un files pe dastkhat kar unhe inder

ki or badha diya.

"aapne files padhi nahi ma'am?"

"tumne padh li na inder."

"ma'am,aap mujhpe itna bharoas karti hain,ye mere liye khushi & fakhra

ki baat hai magar please ma'am aap bina padhe kahi bhi dastkhat na

kiya karen chahe vo kagaz koi bi leke aaya ho.aap please 1 baar in

files ko padh len.",devika ne inder ko dekha & files dekhne lagi.inder

tab tak apne sath layi 1 teesri file palatne laga.file padhti devika

ne file ke upar se inder ko dekha....ye insan bahut hi imandar & utna

hi mehnati tha...shiva bhi to aisa hi tha magar usne kabhi bhi use

kaam ke mamle me aise salah nahi di thi.apne department ke bare me vo

use bas batata tha ki kya karne vala tha vo,kabhi us se puchhta nahi

tha jabki ye inder har baat,har faisla bina uski ijazat ke nahi leta

tha..aisa nahi tha ki ye zaruri tha magar inder ka maanana tha ki ye

bhi 1 naukar farz tha ki vo apne malik ko har baat chahe vo kitni bhi

mukhtsar kyu na ho,ke bare me ittila de....bas bhagwan use aisa hi

banaye rakhen..juice bhijwa ke usne apni fikr jatayi thi magar jaha

shiva uske ishq ya ab jab use sachchai pata chali thi uske jism ki

hawas me uske sath ye harkate karta tha, inder kewal bhalmansahat ke

chalte aisa kar raha tha.koi matlab nahi tha isme uska..

"file padh li ma'am?",inder ne devika ko khud ko dekhta paya.

"h-haan..ye lo.",devika ko laga jaise uski chori pakdi gayi ho.inder

ne files aise li jaise use kuchh ehsas hi na hua ho.vo cabin se bahar

nikla & uske hotho pe shaitani muskan khelne lagi.uska plan bilkul

thik kaam kar raha tha.devika pe uski achhai ka asar ho raha tha bas

sab kuchh aise hi chalta rahe.

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"devika ji,aapne bahut achha kiya.",kamini ne devika ke hath se 1

kagaz liya.dono aurate kamini ke daftar me baithi thi,"..dekhiye,zyada

kuchh to hai nahi.ye kaam bas aadhe ghante me ho jayega."

"Rashmi..",usne intercom se apni secretary ko bulaya,"..ye lo & Mukul

ke sath milke jaldi se is vasiyat ko type karke yaha lao.",vo rashmi

ke jate hi devika se fir mukhatib hui,"bura na mane to 1 baat puchhu

devika ji?"

"zarur kamini ji."

"kuchh din pehle estate se aapka 1 employee aaya tha akhbar me notice

chhapwane ke silsile me.",devika ka chehra sanjida ho gaya.shiva ke

jane ke baad usne akhbar me kamini ke zariye 1 notice chhapwaya tha ki

ab uska estate se koi lena-dena nahi tha & agar koi us se kisi bhi

tarah ka karobari talluk rakhta hai sume estate kisi bhi tarah se

zimmedar nahi hogi,kamini usi bare me baat kar rahi thi.

"dekhiye,devika ji maine aapko pehle batay nahi magar jab ye baat hui

to mujhe laga ki aapko & viren ko aagah kar dena zaruri hai."

"kya baat hai,kamini ji?",devika ke mathe pe bal pad gaye.

"aapko vo dawa yaad hai devika ji jiski dibiya maine aapke bedroom me

dekhi thi.",devika ko yaad karne ki koshish karte dekh kamini ne uski

madad ki,"..vo narangi wali dibiya."

"haan-2."devika ko yaad aaya.ye to wahi dawa thi jo uske pati use

chodne se pehle lete the.kamini ne use bataya ki agar suren ji lagbhag

roz dawa le rahe the to dawa ki dibiya nayi kaise ho gayi thi?

"aapka kehna hai ki.."

"ji sazish ki bu to hai magar kiski ye samajh nahi aata."

"aapko shiva pe shaq hai."

"shaq ke dayre me to sabhi hain ,devika ji..",kamini devika ke chehre

ke bhavo ko gaur se dekh rahi thi,"..suren ji ko chhod sabhi."

"aapka matlab hai main bhi?"

"aap thi devika ji magar shiva ke jane ke baad & ye vasiyat jo bahar

meri secretary & assistant aapke liye taiyyar kar rahe hain jisme

aapne vahi kiya hai jo aapke marhoom pati ki khwahish thi,ne aapko us

dayre se bahar nikal diya hai.",kamini ne dekha ki devika ka chehra

gusse se tantanaya hua hai.vo apni kursi se uthi & desk ke dusri or aa

devika ke bagal me dusri kursi pe baith gayi,"main janti hu aapko

kitna gussa aa raha hai.",usne devika ka hath tham liya,"..mujhe aapke

pati laye the estate ka vakil banake,devika ji.aap mujhe fees deti

hain to mera bhi farz hai na ki main apna kaam puri imandari se karu."

"meri baat samajh rahi hain na aap fir bhi aap bura maan gayi to mafi

chahti hu."

"are nahi kamini ji aisa mat boliye!",devika ne bhi uske hath ko tham

liya,"gussa to sach me bahut aaya ki jis pati ko maine apna sab kuchh

mana & puri zindagi usi ki hoke bita di ab uski maut ka ilzam mujhpe

lagaya ja raha hai lekin aapki baat samajh gayi main.aage kahiye to

kya shiva ne kiya ye sab?",devika ko laga ki kahi shiva ne uske jism

ki hawas me pagal ho ye kaam to nahi kiya tha.

"kuchh samajh nahi aata.dekhiye,agar shiva krta to vo dawa ki dibiya

puri gayab hi nahi kar deta kewal badalta kyu?jaha tak mujhe andaza

hai vo aapke pati ke sath saye ki tarah laga rehta tha to use ye bhi

pata hoga ki dawa kya kaam karti hai fir vo dawa ko badlega bhi to

bahut dhyan se.uski khoti niyat jaanane ke baad bhi mujhe pura yakin

nahi ho raha ki dawa ke sath usne chhedchhad ki hai.ab agar vo dawa ki

dibiya jo aapke pati istemal kar rahe the to shayad kuchh surag mile

magar jisne dibiya badli usne sue to thikane laga diya hoga."

"magar dawa badli kyu?jaisa aap keh rahi hain vo dibiya gayab bhi kar

sakta tha."

"shayad isliye ki vo ye na chahta ho ki kisi ka dhayn dawa pe jaye

bhi.agar dawa gayab ho jati to ho sakta hai kisi ka dhyan uspe chala

jata.ab jab dawa usi jagah pe rakhi rahti to kisi ka bhi dhyan nahi

jata ki us dawa ka bhi kuchh lena-dena hai suren ji ki maut se."

"to fir kaun ho sakta hai iske peechhe kamini ji?"

"ye baat to mujhse behtar shayad aap pata laga len.",rashmi dastak de

vasiyat ka 1 draft leke aayi jisme kamini ne kuchh galtiya sahi ki &

rsahmi ko use fir se taiyyar karke lane ko kaha,"..devika ji,zyada

ghabraiye mat bas savdhan rahiye.ab jab ye vasiyat taiyyar hai to

aapko nuksan pahuchane ki vajah bhi khatam ho jati hai kyuki kisi ko

kcuhh hasil nahi hone wala aapko nuksan pahuncha ke.main aapke sath hu

& hum dono zarur hi us insan ka pata laga lenge jo aapke parivar pe

buri nazar dalta hai.",rashmi vasiyat ka final draft le aayi thi jise

devika ne dastkhat kar kamini ke paas hifazat se rakhwa diya.

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kramashah..............

 
गतान्क से आगे...

देविका पंचमहल केवल वसीयत के काम से नही आई थी बल्कि उसका मक़सद अपने

एस्टेट के बिज़्नेस के सप्लाइयर्स & खरीदारो से भी मिलने का था.इंदर भी

उसके साथ था & जितनी देर देविका कामिनी के साथ थी उतनी देर इंदर ने कुच्छ

काम निपटा लिए थे.देविका कामिनी के दफ़्तर से निकली & इंदर के साथ अपने 1

सप्लाइयर से मिलने चली गयी.उसके दफ़्तर पहुँच जैसे ही उसने कार से नीचे

कदम रखा की उसके मोबाइल पे प्रसून का फोन आ गया,"हां,बेटा बोलो..",बेटे

से बात करने मे उसे सड़क की भीड़ का ख़याल ही नही रहा & उसे बिल्कुल भी

पता नही चला की 1 कार उसकी तरफ से तेज़ी से बढ़ रही है.जब इंदर ने उसे

पकड़ के पीछे खींचा तो उसे ख़याल आया की वो सड़क के बीचे मे खड़ी थी.

"उसकी बाई बाँह पकड़ इंदर ने पीछे खींचा तो वो लड़खड़ा गयी & गिरने लगी

तब इंदर ने उसे अपनी बाहो मे संभाल लिया था.इंदर ने अपनी दोनो बाहे पीछे

से उसके बाजुओ पे लगा उसके गिरने को रोका & जब देविका खड़ी हुई तो उसकी

पीठ इंदर के सीने से सॅट गयी थी & उसे अपनी गंद पे इंदर के लंड का एहसास

हुआ मगर बस 2-3 पॅलो के लिए.देविका का बदन सिहर उठा था.इंदर ने उसे थामे

हुए रास्ता पार कराया,"आप ठीक है ना,मॅ'म?"

"हा..हां..".इंदर ने अपने हाथ उसके बदन से हटाए.

"चलिए.",दोनो सप्लाइयर के दफ़्तर की ओर बढ़ गये.

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रात देविका अपने बेडरूम मे लेटी दिन की बाते याद कर रही थी.कामिनी की बात

ने उसे चिंता मे डाल दिया था.उसे पूरा यकीन था की हो ना हो ये सब शिवा का

किया धरा था..कितना भरोसा किया था उसने उसपे & ये सिला दिया था उसने

इसका!शिवा की याद आई तो उसके दिल को उसके साथ बिताई राते याद आ गयी &

उसकी आँखे थोड़ी गीली हो गयी.उसने अपना ध्यान उस बेवफा इंसान से हटाया &

बाकी बातो के बारे मे सोचने लगी..वसीयत ने उसके बेटे का भविश्य महफूज़ कर

दिया था.आज उसने एस्टेट के बिज़्नेस से जुड़े सभी सप्लाइयर्स & एस्टेट के

प्रॉडक्ट्स के ग्राहको से मुलाकात कर बिज़्नेस के बारे मे सब समझ लिया

था.इंदर ने इसमे बहुत मदद की थी,हर जगह उसने देविका को ही सारी बाते करने

दी थी & फिर उस इंसान के बारे मे उस से उसकी राइ पुछि थी.इंदर ने उसके

बाद ही अपनी राइ बताई थी.देविका समझ गयी थी की इस बात से 2 मक़सद पूरे हो

रहे थे-पहला तो सारे लोगो को ये लगा की अब वो ही मालकिन है & दूसरा ये की

उसे इस तरह से हर इंसान की पहचान हो गयी & बिज़्नेस की बारीकिया भी समझ आ

गयी.

1 बार फिर इंदर की भलमांसाहत ने उसे च्छू लिया था.तभी उसे वो सड़क पार

करते हुए घाटी बात याद आई & उसके होंठो पे मुस्कान खेल गयी.इंदर की

मज़बूत बाँहो का एहसास होते ही उसका दिल किया था की वो अपने बदन को उनके

हवाले कर दे....& जब उसकी गंद पे उसके लंड ने च्छुआ था...अफ!..देविका के

तजुर्बे ने उसे ये बता दिया था की इंदर का लंड काफ़ी बड़ा था.उसका दिमाग़

बस नये-2 ख़यालो मे खोता जा रहा था.दिन का काम पूरा करते ही जैसे ही वो

लोग वापस एस्टेट के लिए रवाना होने लगे थे की इंदर ने उसके बाए पैर की ओर

इशारा किया था,"ये चोट कैसे लगी आपको,मॅ'म?"

देविका को तो पता भी नही था की उसके बाए पैर के अंगूठे के पास वो खरोंच

कैसे लगी जिसमे से अभी भी खून निकल रहा था.इंदर ने फ़ौरन कार रुकवाई & 1

दवा की दुकान से कुच्छ समान खरीद वापस कार मे आ बैठा & ड्राइवर को एस्टेट

चलने को कहा.दवा की दुकान से खरीदे समान के पॅकेट मे से उसने रूई & डेटोल

निकाला & दीर रूई को डेटोल से भिंगो के देविका के पैर पे लगाया तो देविका

जला से कराह उठी.इंदर झुका & होंठो से घाव पे फूँक वाहा डेटोल से पैदा

हुई जलन को शांत करने लगा मगर उसकी इस हरकत ने देविका के अंदर दूसरी ही

जलन पैदा कर दी.इंदर उसके दाए तरफ बैठा था & देविका ने अपना बाया पैर उठा

के अपने दाए घुटने पे रख दिया था.इंदर के होंठो की फूँक उसके जिस्म को

सिहरा रही थी.इंदर जानता था की देविका पे उसकी हर्कतो का के असर हो रहा

था.उसने घाव सॉफ करने के बाद उसपे मरहम लगाया & ऐसा करते वक़्त जानबूझ कर

देविका के पाँव के उपर उसकी सारी मे से निकली गोरी टाँग पे अपना बाया हाथ

रख दिया.देविका का गला सुख गया.इंदर ने मरहम के बाद पट्टी लगाई & अपना

हाथ खींच लिया.उस पल देविका को बहुत बुरा लगा,उसका दिल कर रहा था की वो

उसके हाथ को तोड़ा वैसे ही महसूस करती रहे.उसने हल्के से सर घुमा के इंदर

को देखा तो पाया की वो उसके जज़्बातो से बेख़बर फिर से किसी फाइल मे डूब

गया था.

ये बात याद आते ही देविका के जिस्म मे कसक सी उठी.उसे लगा था की शिवा के

जाने के बाद शायद ये एहसास उसे फिर कभी महसूस नही होगा मगर इंदर ने 1 बार

फिर उसके बदन को जगा दिया था.वो आँखे बंद कर उसके हाथो के एहसास को याद

करने लगी.1 बार फिर इंदर उसके पैर को छु रहा था मगर इस बार वो केवल पैर

तक नही रुका था बल्कि उपर बढ़ रहा था उसके घुटनो की तरफ फिर उस से भी

उपर.....हाथ देविका का था मगर उसके तस्साउर मे इस वक़्त इंदर अपने हाथो

से जन्नत की सैर करा रहा था.उसकी उंगलिया तेज़ी से उसकी पॅंटी मे घुसी

उसकी चूत से खेल रही थी...उसका दूसरा हाथ भी कपड़ो के उपर से ही उसकी

चूचियो को दबा रहा था......"ओह....इंदर.....!",झाड़ते ही उसके होंठो से

उसके दिल की ख्वाहिश ज़ुबान पे आ गयी.जिस्म मे उबाल रहा लहू जब शांत हुआ

तो देविका ने करवट बदल आँखे खोली.

वो अकेली थी बिस्तर पे,वाहा इंदर नही था.....क्या कभी वो होगा वाहा उसके

साथ?....काश ऐसा हो!..लेकिन वो तो उसकी तरफ देखता भी नही!देविका के चेहरे

पे झड़ने का जो सुकून था उसपे उदासी की परच्छाई पड़ गयी.वो पागल हो गयी

थी इंदर के लिए & उसे तो खबर ही नही थी!अपनी आँखे बंद कर उसने तकिये मे

मुँह च्छूपा लिया & सोने की कोशिश करने लगी.

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इंदर अपने क्वॉर्टर मे बैठा अपने फ़्लास्क से शराब के लूंबे-2 घूँट भर

रहा था.कार मे उसने देविका के चेहरे को पढ़ लिया था.वो जानता था की बस अब

कभी भी वो उसकी बाहो मे गिर जाएगी मगर नही वो खुद आगे कदम नही बढ़ाएगा

चाहे कुच्छ भी हो जाए..देविका खुद आएगी उसके पास..उसकी बाहो मे & फिर वो

उसे बताएगा की क्या होता है किसी का हक़ छ्चीनने का नतीजा!देविका सहाय

तुम्हारी ज़िंदगी की उल्टी गिनती भी अब शुरू हो गयी है!इंदर ने 1 लूंबा

घूँट भरा & आँखे बंद कर ली.

कामिनी 1 लूंबे,सफेद,झीने कपड़े मे लिपटी अपने हाथ हवा मे उठाए अपनी दाई

बाँह मे अपना चेहरा लगाए आँखे बंद किए खड़ी थी.बारिश की वजह से थोड़ी ठंड

हो गयी थी & इस कारण कामिनी के गुलाबी निपल्स कड़े हो गये थे & झीने

कपड़े मे से उभर रहे थे.वीरेन के हाथ तेज़ी से उसके रूप को कॅन्वस पे

उतारने मे जुटे थे.

उसने 1 नज़र अपनी महबूबा पे डाली.कपड़ा ऐसे लिपटा था बदन से मानो हवा मे

उड़ता आया & कामिनी के बदन से लग गया.कपड़े बाई आधी जाँघ & दाई टांग के

घुटने तक था.वीरेन ने कुच्छ आख़िरी स्ट्रोक्स लगाए अपने ब्रश के & फिर

अपनी प्रेमिका के पास आ खड़ा हुआ.

कामिनी ने जब उसकी गर्म साँसे अपने चेहरे पे महसूस की तब उसने अपनी आँखे

खोली.वीरेन उसे बाहो मे भर रहा था.कामिनी भी उस से लिपट गयी & दोनो 1

दूसरे के होंठो का रस पीने लगे.वीरेन के बेसबरा हाथो की हर्कतो से वो

पतला सा कपड़ा तुरंत ही कामिनी के बदन से अलग हो गया & वो पूरी की पूरी

नंगी अपने प्रेमी के बाहो मे क़ैद हो गयी.

दोनो बस 1 दूसरे को ऐसे चूमे जा रहे थे जैसे की अगर चूमना छ्चोड़ दिया तो

क़यामत आ जाएगी.कामिनी भी वीरेन के कपड़े उसके जिस्म से अलग करने मे जुटी

थी.कुच्छ ही पलो मे दोनो बिल्कुल नंगे 1 दूसरे से चिपते हुए थे.वीरेन का

लंड कामिनी के पेट पे दबा हुआ था & वो उसकी छुअन से पागल हो रही थी.

सांस लेने की गरज से दोनो आशिक़ो ने अपने होंठ अलग किए,"कमरे मे चलो.आज

यहा नही.",कामिनी की फरमाइश सुनते ही वीरेन ने उसे अपने मज़बूत बाजुओ मे

उठा लिया & उसे अपने बेडरूम मे ले आया.वीरेन के बिस्तर पे करीने से लगी

चादर थोड़ी ही देर मे सलवटो से भर गयी.दोनो प्रेमी 1 दूसरे से लिपटे उस

बिस्तर पे लोट रहे थे.

"आउच!!..",कामिनी ने वीरेन के बाल खींच उसे अपने सीने से उठाया,"..दाँत

नही बदतमीज़!",वीरेन ने उसकी बाई छाती पे हल्के से काट लिया

था,"..ऊव्वव...हा...हाअ....!",वीरेन ने उसकी दाँत को अनसुना करते हुए

अबके दाई छाती पे काट लिया & फिर अपनी नाक उसके पेट मे दफ़्न कर गुदगुदी

करने लगा जिस से कामिनी की हँसी छूट गयी.

"हा....हा...रूको...",कामिनी ने बालो को पकड़ उसे अपने पेट से उठाया &

फिर उसे पलट के उसके उपर चढ़ गयी & उसकी बाहे उसके सर के उपर ले जाके

अपने हाथो मे उसकी कलाई पकड़ के बिस्तर से लगा दी फिर झुकी & अपनी नाक से

वही हरकत वीरेन के पेट मे करने लगी.अब हंस-2 के पागल होने की बारी वीरेन

की थी.हंसते हुए वीरेन ने अपनी टाँगे उठा के अपनी कमर को ऐसे मोड़ा की

कामिनी उसके पेट से नीचे बिस्तर पे गिरी.उसके गिरते ही वीरेन उसके उपर

सवार हो गया तो कामिनी ने अपनी टाँगे कस के आपस मे भींच बंद कर ली.

"खोलो ना!",वीरेन ने अपने दाए घुटने से उसकी जाँघो को अलग करने की कोशिश की.

"ना!",आज कामिनी उसे तड़पने के मूड मे थी.
 
"तड़पाव मत जानेमन.देखो कैसे मचल रहा है तुम्हारे लिए.",वीरेन ने कामिनी

का दाया हाथ पकड़ा & उसने अपने जिस्मो के बीचे कामिनी की चूत के थोडा उपर

उसके पेट के निचले हिस्से पे दबे पाने लंड पे लगाया.

"मचलने दो.बहुत शरारती हो गये हो तुम & तुम्हारा ये!",उसने लंड को हल्के

से दबाया तो वीरेन का जोश और बढ़ गया,"..थोड़ी सज़ा मिलेगी तो सही हो

जाओगे दोनो!"

"प्लीज़,जान..खोलो ना!",वीरेन ने ज़िद की.

"नही.बिल्कुल नही!",कामिनी ने उसके गाल पे प्यार भारी चपत लगाई,"पहले 1

काम की बात सुनो."

"क्या?",वीरेन ने देखा की कामिनी मानने के मूड मे नही है तो उसने सर नीचे

झुकाया & उसकी दाई चूची पे जीभ चलाने लगा.

"उम्म....मना किया है ना!",कामिनी ने उसके बाल पकड़ उसे फिर से

उठाया,"..मैने तुम्हारी भाभी से बात की थी."

"कैसी बात?"

"वही दवा वाली."

"अच्छा.क्या कहा उसने?"

जैसा मैने सोचा था इसमे उनका कोई हाथ नही.मुझे लगता है उन्हे भी शिवा पे

ही शक़ है."

"तुम्हे अभी भी लगता है दोनो के बीच कुच्छ था?",वीरेन 1 बार फिर उसके

सीने पे झुक गया.

"हां."कामिनी ने उसका सर फिर से उठाया & करवट ले उसे अपने नीचे कर

दिया,"..उसमे मुझे कोई शक़ नही मगर अब शिवा ख़तरा बन गया है.",कामिनी

वीरेन के सीने को चूमते हुए नीचे बढ़ रही थी.लंड के पास पहुँच उसने

आस-पास चूमना शुरू कर दिया.वीरेन का दिल कर रहा था की कामिनी जल्दी से

उसके लंड को हाथो & मुँह मे ले उसकी तड़प को कुच्छ तो शांत करे मगर आज

कामिनी ने उसे उसी की दवा का स्वाद चखाने की ठानी थी.

कामिनी वीरेन की झांतो के बाहर उसकी जाँघ,उसके पेट को चूमे जा रही थी मगर

उसके ठुमकते हुए लंड की जैसे उसे कोई परवाह ही नही थी,"कामिनी.."

"शिवा कहा है क्या ये पता काम सकता है,वीरेन?",कामिनी ने उसकी बात को

अनसुना करते हुए उसकी दाई जाँघ को चूमते हुए नीचे बढ़ना शुरू किया.

"दफ़्तर से उसका पर्मनेंट अड्रेस निकलवा के शुरुआत की जा सकती

है.",कामिनी चूमते हुए उसके उपर तक पहुँच गयी & वीरेन की दाई टांग को उठा

उसके पैरो की उंगलियो को 1-1 कर चूसने लगी.ऐसी हर्कतो से वीरेन उसे पागल

बनाता था मगर आज वीरेन को पता चल रहा था की ऐसी तड़प मे कितना दर्द &

कितना मज़ा च्छूपा रहता है.

"..लेकिन मुझे नही लगता की उसके आगे कुच्छ हो सकता है.बहुत मुश्किल होगी

उसे ढूँदने मे क्यूकी ..आअहह....",कामिनी उसके पैर की उंगलियो से खेलने

के बाद वापस उसके लंड के पास आई थी & उसके आंडो के बीचोबीच बहुत ही हल्के

से चूमा था-इतना हल्के की उसके होंठ बस आंडो की सिकुड़ी सी स्किन को बस

च्छू से गये थे,"..क्यूकी वो चाहता नही होगा की कोई उसे ढूंदे.अब ऐसे

आदमी का पता लगाना तो दिक्कत भर काम होगा ही."

"ना..मेरी कसम है तुम्हे मिस्टर.वीरेन सहाय..",कामिनी ने उसके हाथो को

फिर से उसके सर के उपर ले जा के बिस्तर पे रख दिया,"..जब तक मैं ना काहु

मेरे जिस्म को नही च्छुओगे."कामिनी अब दोनो घुटने उसकी कमर के दोनो ओर

टिकाए उसके लंड के उपर बैठ रही थी.जैसे ही चूत लंड के बिल्कुल करीब

पहुँची कामिनी ने बैठना रोक दिया.वीरेन पागल हो अपनी कमर उचका के अपने

प्यासे लंड को चूत मे घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगा.

"चुपचाप लेटे रहो वरना चली जाऊंगी!",कामिनी की डाँट से तड़प्ता वीरेन

शांत हो नीचे लेट गया.कामिनी हौले-2 नीचे हुई & चूत को लंड की नोक से

च्छुउआ दिया.

"आहह..!",वीरेन आह भरता हुआ सर उठा के नीचे देखने लगा मगर कामिनी ने चूत

को और नीचे नही किया.वीरेन ने सोचा की बात बदली जाए तो शायद कामिनी का

ध्यान इस तड़प भरे खेल से थोड़ा हटे.

"आख़िर तुम उसे क्यू ढूंडना चाहती हो?"

"क्यूकी तुम्हारे परिवार को सबसे ज़्यादा ख़तरा उसी से है.अब उसे केवल

दौलत की हवस नही बल्कि बेइज़्ज़ती का गुस्सा भी होगा & वो ज़रूर बदला

लेना चाहेगा इस बात का.",कामिनी के नाख़ून वीरेन के सीने पे घूम रहे थे &

उसकी चूत अभी भी हवा मे ही थी.कामिनी झुकी & अपनी कमर हवा मे यू उठा दी

की वीरेन को उसकी चौड़ी गंद के दर्शन तो होते रहें मगर उसकी चूत उसके लंड

को ना च्छू पाए.

"ये काम कैसे होगा,कामिनी?",कामिनी ने वीरेन के सीने पे चूमते हुए अपनी

गंद बड़े मदहोशी भरे अंदाज़ मे लहराना शुरू कर दिया था.माशूक़ा की कसम से

बँधा वीरेन बस बेबस हो देख सकता था मगर अपनी जोशीली हसरातो को पूरा नही

कर सकता था.

"वो सब मुझपे छ्चोड़ो.कुच्छ सोचती हू.",कामिनी ने देखा की वीरेन के लंड

पे प्रेकुं की बूंदे चमक रही थी & वो बेचैनी से अपनी कमर बस बिस्तरे पे

गंद जमाए हुए हिला रहा था.कामिनी उसके सीने से उठी & अपने दोनो हाथ वाहा

जमा दिए & फिर से वीरेन के लंड पे बैठने लगी.इस बार उसने सू ज़्यादा नही

तडपया 7 चूत मे लंड को दाखिल होने दिया.

वीरेन के होंठो पे मुस्कान फैल गयी & आँखे मज़े मे बंद हो गयी मगर ये

सुकून बस कुच्छ ही देर के लिए था क्यूकी कामिनी उसके सूपदे से ज़्यादा

लंड को अंदर ले ही नही रही थी & बस अपनी कमर उसी पे हिला रही थी.वीरेन की

आहे कमरे मे गूँज रही थी,"ओह्ह्ह....कामिनी प्लीज़.....और नीचे हो....लंड

को पूरा अंदर लो ना!"

"लेती हू,जान.ऐसी भी क्या जल्दी है!",कामिनी ने उसे और तडपया मगर इस बार

थोड़ा और नीचे बैठ गयी,अब लंड आधा अंदर था & वीरेन नीचे से कमर हिला रहा

था.कामिनी ने अपने हाथ सीने से नीचे ला उसकी कमर के बगल मे लगाए & उसे

हिलने से रोक दिया.वीरेन की शक्ल देख के ऐसा लग रहा था की वो अब जैसे रो

देगा.

कामिनी को भी अब ज़्यादा तड़पाना ठीक नही लगा.वो और नीचे हुई & अब लंड जड

तक उसकी चूत मे था.वीरेन ने खुशी से मुस्कुराते हुए कमर हिला चुदाई शुरू

करनी चाही & अपने हाथ उसकी चूचियो की ओर बढ़ाए,"ना.अभी मैने नही कहा है."

वीरेन ने महबूबा की बात सुन हाथ पीछे खींच बिस्तर पे रख लिए & कमर भी

हिलाना रोक दिया.थोड़ी देर पहले तक उसकी ख्वाहिश थी की उसका लंड कामिनी

की नाज़ुक,कसी चूत मे जड तक धँस जाए-वो ख्वाहिश पूरी हो गयी थी मगर फिर

भी वो तड़प रहा था क्यूकी कामिनी उसके लंड को अंदर लिए बस शांत बैठी उसके

सीने के बालो मे उंगलिया फिरा रही थी जबकि वो चुदाई के लिए पागल हो रहा

था.

"प्लीज़,कामिनी...प्लीज़..मुझे चोदने दो!"

"लंड तो है ही अंदर.अब और क्या करना है.ऐसे ही कितना अच्छा लग रहा

है.",कामिनी ने अपनी बाहे उपर हवा मे ले जा अंगड़ाई ली & अपनी 38द साइज़

की कसी,मोटी चूचियो से अपने आशिक़ को ललचाया.वीरेन का दिल तो किया की

हाथो मे भर उसकी चूचियो को मसल्ते हुए वो उसे नीचे गिरा दे & फिर उसके

उपर सवार हो उसकी ऐसी चुदाई करे की वो ज़िंदगी भर याद रखे मगर वो बेबस

था-प्रेमिका ने कसम जो दे रखी थी उसे!

कामिनी ने वैसे ही हाथ उठाए हुए अपने बालो से खेलते हुए बहुत धीरे-2 अपनी

कमर हिलाई तो वीरेन को थोड़ा चैन पड़ा.उसका दिल कर रहा था की कामिनी तेज़

रफ़्तार से कमर हिलाए ताकि उसके तड़प्ते लंड को फ़ौरन सुकून मिल

जाए.
 


जाए.कामिनी ने कमर हिलाते हुए अपने बाए घुटने को बिस्तर से उठाया & बाए

पैर को वीरेन के सीने पे रख दिया,उसका दाया घुटना भी बिस्तर से उठ चुका

था मगर दाया पैर उसकी गंद के बगल मे बिस्तर पे ही पड़ा था.वीरेन को चूत

मे धंसा उसका लंड & उसपे कसी कामिनी की गुलाबी चूत की हरकते सॉफ दिख रही

थी & उसकी मस्ती हर पल बढ़ती जा रही थी.

कामिनी ने बाए पैर के अंगूठे & उंगली के बीच वीरेन के दाए निपल को दबोच

के उसपे चूटी काट ली & फिर अंगूठे से उसके सीने पे दायरे बनाते हुए

खरोंछने लगी.वीरेन के लिए ये बिल्कुल नया तजुर्बा था.आमतौर पे लड़कियाँ

बिस्तर मे उसकी कामुक हर्कतो से बेचैन हो उसके सामने हथ्यार डाल देती थी

मगर आज पहली बार किसी लड़की ने उस से हथ्यार डलवाए थे...नही 1 और

थी.....वीरेन ने सर झटका & उस लड़की का ख़याल दिमाग़ से निकाला..वो उस

बेवफा को याद कर इस हसीन,मस्त लम्हे को बर्बाद नही करना चाहता था.

कामिनी ने अपने हाथ सहारे के लिए पीछे वीरेन की मज़बूत जाँघो पे टीका

दिया थे & अपने बाए पैर से उसके सीने को मसल्ते हुए वो अब तेज़ी से कमर

हिला रही थी.इस मस्त खेल ने उसकी धड़कने भी बहुत तेज़ कर दी थी.उसकी आँखो

मे जिस्म मे पैदा हो रहे मज़े की खुमारी सॉफ झलक रही थी.जिस्मानी खेल की

मस्ती से उसकी बोझल पलके उसकी काली आँखो को बड़ी नशीली बना रही थी.वीरेन

उन नशीली आँखो की शराब अपनी आँखो से पीता हुआ अपनी कमर हिला रहा

था.कामिनी की चूत अब सिकुड के उसके लंड को और कस रही थी.वो जानता था की

वो झड़ने वाली है.उसका हाल भी उसी के जैसा था.दोनो प्रेमी आँखो के ज़रिए

1 दूसरे के दिल का हाल समझते हुए चुदाई कर रहे थे.

"आनह...ऊओवव्व...उउन्न्ह.....ऊउउउईईईईईइ......!",कामिनी की आहे बहुत तेज़

हो गयी थी & उसकी कमर की रफ़्तार भी.उसकी चूत मे वही मस्ताना तनाव बन गया

था जिसके दूर होने पे उसे वो अनोखा मज़ा हासिल होता था जिसे दुनिया झड़ना

कहती थी.वीरेन ने इस वक़्त अपने हाथो को कैसे अपने काबू मे रखा था वोही

जानता था.उसके हाथ तड़प रहे थे माशूक़ा के गदराए बदन की गोलाईयो को

मसल्ने के लिए मगर उसकी हसरातो से भी बड़ी थी महबूबा की कसम जिसे वो किसी

भी कीमत पे नही तोड़ सकता था.

कामिनी उसके हाल को बखूबी समझ रही थी & उसे बहुत प्यार आ रहा था अपने

आशिक़ पर जो उसकी कसम की इतनी इज़्ज़त कर रहा था.उसने तो खेल-2 मे ऐसा

कहा था & उसे ज़रा भी उमीद नही थी की जब जोश दोनो के सर चढ़ जाएगा उस

वक़्त भी वीरेन उसकी कसम का ख़याल रखेगा मगर वीरेन ने उसकी कसम निभा उसके

दिल मे और बड़ी जगह बना ली थी.

दिल मे महबूब के लिए उमड़ते प्यार & चूत मे धन्से उसके लूंबे,तगड़े लंड

की हर्कतो से जिस्म मे पैदा होती मदहोशी ने अपना असर दिखाया & उसकी आहे

और तेज़ हो गयी,वो वीरेन की जंघे थामे और पीछे झुक गयी & अपनी चूचिया हवा

मे उठा दी.उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी & उसकी चूत लंड पे अपनी

मस्तानी हरकते कर रही थी.उसकी चूत का तनाव अपनी शिद्दत पे पहुचने के बाद

कम हो रहा था & उसे वोही अनोखा एहसास हो रहा था जिसे दुनिया झड़ना कहती

है.

उसे चूत मे कुच्छ गरम सा महसूस हुआ & कानो मे वीरेन की आहे सुनाई दी.उसने

आँखे खोली तो देखा की वीरेन का बदन भी झटके खा रहा है & उसका गढ़ा वीर्या

उसकी चूत मे भर रहा है.झड़ने के बाद दोनो लंबी-2 साँसे लेते हुए 1 दूसरे

को देख रहे थे,"वीरेन....जान..मुझे छुओ.",कामिनी ने अपनी कसम वापस ली तो

जैसे वीरेन को किसी क़ैद से छुटकारा मिला.हाथ बढ़ा उसने अपनी हसीन

माशुक़ा को अपने सीने पे गिराया & फिर बाँहो मे भर करवट ले उसे अपने नीचे

दबा उसे चूमने लगा.झड़ने के बावजूद लंड पूरा मुलायम नही हुआ था.वीरेन ने

आधे सख़्त लंड से ही फिर से धक्के लगाना शुरू कर दिया.कामिनी की मस्तानी

अदाओं ने उसे पागल कर दिया था & आज वो उसकी चूत से लंड निकालना ही नही

चाहता था.कामिनी भी उसकी हालत समझ गयी थी,उसने अपनी बाहो मे उसे कसा &

अपने होंठ उस से सटा दिए & उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

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क्रमशः.......
 
गतान्क से आगे...

devika Panchmahal kewal vasiyat ke kaam se nahi aayi thi balki uska

maqsad apne estate ke business ke suppliers & kharidaro se bhi milne

ka tha.inder bhi uske sath tha & jitni der devika kamini ke sath thi

utni der inder ne kuchh kaam nipta liye the.devika kamini ke daftar se

nikli & inder ke sath apne 1 supplier se milne chali gayi.uske daftar

pahunch jaise hi usne car se neeche kadam rakha ki uske mobile pe

prasun ka fone aa gaya,"haan,beta bolo..",bete se baat karne me sue

sadak ki bhid ka khayal hi nahi raha & use bilkul bhi pata nahi chala

ki 1 car uski taraf se tezi se badh rahi hai.jab inder ne use pakad ke

peechhe khincha to use khayal aaya ki vo sadak ke beeche me khadi thi.

"uski bayi banh pakad inder ne peechhe khncha to vo ladkhada gayi &

girne lagi tab inder ne use apni baaho me sambhal liya tha.inder ne

apni dono baahe peechhe se uske bazuo pe laga uske gorne ko roka & jab

devika khadi hui to uski pith inder ke seene se sat gayi thi & use

apni gand pe inder ke lund ka ehsas hua magar bas 2-3 palo ke

liye.devika ka badan sihar utha tha.inder ne use thame hue rasta paar

karaya,"aap thik hai na,ma'am?"

"ha..haan..".inder ne apne hath uske badan se hataye.

"chaliye.",dono supplier ke daftar ki or badh gaye.

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raat devika apne bedroom me leti din ki baate yaad kar rahi thi.kamini

ki baat ne use chinta me daal diya tha.use pura yakin tha ki ho na ho

ye sab shiva ka kiya dhara tha..kitna bharosa kiya tha usne uspe & ye

sila diya tha usne iska!shiva ki yaad aayi to uske dil ko uske sath

bitayi raate yaad aa gayi & uski aankhe thodi gili ho gayi.usne apna

dhyan us bewafa insan se hataya & baki baato ke bare me sochne

lagi..vasiyat ne uske bete ka bhavishya mehfuz kar diya tha.aaj usne

estate ke business se jude sabhi suppliers & estate ke products ke

grahako se mulakat kar business ke bare me sab samajh liya tha.inder

ne isme bahut madad ki thi,har jagah usne devika ko hi sari baate

karne di thi & fir us insa ke bare me us se uski rai puchhi thi.inder

ne uske baad hi apni rai batai thi.devika samajh gayi thi ki is baat

se 2 maqsad pure ho rahe the-pehla to sare logo ko ye laga ki ab vo hi

malkin hai & dusra ye ki use is tarah se har insan ki pehchan ho gayi

& business ki barikiya bhi samajh aa gayi.

1 bar fir inder ki bhalmansahat ne use chhu liya tha.tabhi use vo

sadak parr karte hue ghati baat yaad aayi & uske hotho pe muskan khel

gayi.inder ki mazboot baho ka ehsas hote hi uska dil kiya tha ki vo

apne badan ko unke hawale kar de....& jab uski gand pe uske lund ne

chhua tha...uff!..devika ke tajurbe ne use ye bata diya tha ki inder

ka lund kafi bada tha.uska dimagh bas naye-2 khayalo me khota ja raha

tha.din ka kaam pura karte hi jaise hi vo log vapas estate ke liye

ravana hone lage the ki inder ne uske baaye pair ki or ishara kiya

tha,"ye chot kaise lagi aapko,ma'am?"

devika ko to pata bi nahi tha ki uske baye pair ke anguthe ke paas vo

kharonch kaise lagi jisme se abhi bhi khun nikal raha tha.inder ne

fauran car rukwai & 1 dawa ki dukan se kuchh saman kharid vapas car me

aa baitha & driver ko estate chalne ko kaha.dawa ki dukan se kharide

saman ke packete me se usne rui & dettol nikala & dir rui ko dettol se

bhingo ke devika ke pair pe lagaya to devika jala se karah uthi.inder

jhuka & hotho se ghav pe funk vaha dettol se paida hui jalan ko shant

karne laga magar uski is harkat ne devika ke andar dusri hi jalan

paida kar di.inder uske daye taraf baitha tha & devika ne apna baya

pair utha ke apne daye ghutne pe rakh diya tha.inder ke hotho ki

phoonk uske jism ko sihra rahi thi.inder janta tha ki devika pe uski

harkato ka kay asar ho raha tha.usne ghav saaf karne ke baad uspe

marham lagaya & aisa karte waqt jaanbujh kar devika ke panv ke upar

uski sari me se nikli gori tang pe apna baya hath rakh diya.devika ka

gala sukh gaya.inder ne marham ke baad patii lagayi & apna hath khicnh

liya.us pal devika ko bahut bura laga,uska dil kar raha tha ki vo uske

hath ko taumra vaise hi mehsus karti rahe.usne halke se sar ghuma ke

inder ko dekha to paya ki vo uske jazbato se bekhabar fir se kisi file

me dub gaya tha.

ye baat yaad aate hi devika ke jism me kasak si uthi.use laga tha ki

shiva ke jane ke baad shayad ye ehsas use fir kabhi mehsus nahi hoga

magar inder ne 1 baar fir uske badan ko jaga diya tha.vo aankhe band

kar uske hatho ke ehsas ko yaad karne lagi.1 bar fir inder uske pair

ko chhu raha tha magar is baar vo kewal pair tak nahi ruka tha balki

upar badh raha tha uske ghutno ki taraf fir us se bhi upar.....hath

devika ka tha magar uske tassavur me is waqt inder apne hatho se

jannta ki sair kara raha tha.uski ungliya tezi se uski panty me ghusi

uski chut se khel rahi thi...uska dusra hath bhi kapdo ke upar se hi

uski chhatiyo ko daba raha tha......"ohhhhh....inder.....!",jhadte hi

uske hotho se uske dil ki khwahish zuban pe aa gayi.jism me ubal raha

lahu jab shant hua to devika ne karwat badal aankhe kholi.

vo akeli thi bistar pe,vaha inder nahi tha.....kya kabhi vo hoga vaha

uske sath?....kash aisa ho!..lekin vo to uski taraf dekhta bhi

nahi!devika ke chehre pe jhadne ka jo sukun tha uspe udasi ki

parchhayi pad gayi.vo pagal ho gayi thi inder ke liye & use to khabar

hi nahi thi!apni aankhe band kar usne takiye me munh chhupa liya &

sone ki koshish karne lagi.

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inder apne quarter me baitha apne flask se sharab ke lumbe-2 ghunt

bhar raha tha.car me usne devika ke chehre ko padh liya tha.vo janta

tha ki bas ab kabhi bhi vo uski baaho me gir jayegi magar nahi vo khud

aage kadam nahi badhayega chahe kuchh bhi ho jaye..devika khud aayegi

uske paas..uski baaho me & fir vo use batayega ki kya hota hai kisi ka

haq chheenane ka nateeja!devika sahay tumhari zindagi ki ulti ginti

bhi ab shuru ho gayi hai!inder ne 1 lumba ghunt bhara & aankhe band

kar li.

Kamini 1 lumbe,safed,jhine kapde me lipti apne hath hawa me uthaye

apni dayi banh me apna chehra lagaye aankhe band kiye khadi thi.barish

ki vajah se thodi thand ho gayi thi & is karan kamini ke gulabi

nipples kade ho gaye the & jhine kapde me se ubhar rahe the.viren ke

hath tezi se uske roop ko canvas pe utarne me jute the.

usne 1 nazar apni mehbuba pe dali.kapda aise lipta tha badan se mano

hawa me udta aaya & kamini ke badan se lag gaya.kapde bayi aadhi jangh

& dayi tang ke ghutne tak tha.viren ne kuchh aakhiri strokes lagaye

apne brush ke & fir apni premika ke paas aa khada hua.

kamini ne jab uski garm saanse apne chehre pe mehsus ki tab usne apni

aankhe kholi.viren use baaho me bhar raha tha.kamini bhi us se lipat

gayi & dono 1 dusre ke hotho ka ras pine lage.viren ke besabra hatho

ki harkato se vo patla sa kapda turant hi kamini ke badan se alag ho

gaya & vo puri ki puri nangi apne premi ke baaho me qaid ho gayi.

dono bas 1 dusre ko aise chume ja rahe the jaise ki agar chumna chhod

diya to qayamat aa jayegi.kamini bhi viren ke kapde uske jism se alag

karne me juti thi.kuchh hi palo me dono bilkul nanage 1 dusre se

chipte hue the.viren ka lund kamini ke pet pe daba hua tha & vo uski

chhuan se pagal ho rahi thi.

sans lene ki garaj se dono aashiqo ne apne honth alag kiye,"kamre me

chalo.aaj yaha nahi.",kamini ki farmasih sunte hi viren ne use apne

mazbut bazuo me utha liya & use apne bedroom me le aaya.viren ke

bistar pe karine se lagi chadar thodi hi der me salwato se bhar

gayi.dono premi 1 dusre se lipte us bistar pe lot rahe the.

"ouch!!..",kamini ne viren ke baal khinch use apne seene se

uthaya,"..dant nahi badtamiz!",viren ne uski bayi chhati pe halke se

kaat liya tha,"..oowww...haa...haaa....!",viern ne uski dant ko ansuna

karte hue abke dayi chhati pe kaat liya & fir apni naak uske pet me

dafn kar gudgudi karne laga jis se kamini ki hansi chhut gayi.

"haa....haa...ruko...",kamini ne baalo ko pakad use apne pet se uthaya

& fir use palat ke uske upar chadh gayi & uski baahe uske sar ke upar

le jake apne hatho me uski kalaiya pakad ke bistar se laga di fir

jhuki & apni naak se vahi harkat viren ke pet me karne lagi.ab hans-2

ke pagal hone ki bari viren ki thi.hanste hue viren ne apni tange utha

ke apni kamar ko aise moda ki kamini uske pet se neeche bistar pe

giri.uske girte hi viern uske uapr sawar ho gaya to kamini ne apni

taneg kas ke aapas me bhinch band kar li.

"kholo na!",viren ne apne daye ghutne se uski jangho ko alag karne ki

koshish ki.

"na!",aaj kamini use tadpane ke mood me thi.

"tadpao mat janeman.dekho kaise machal raha hai tumhare liye.",viren

ne kamini ka daya hath pakda & usem adono jismo ke beeche kamini ki

chut ke thoda upar uske pet ke nichle hisse pe dabe pane lund pe

lagaya.

"machalne do.bahut shararati ho gaye ho tum & tumhara ye!",usne lund

ko halke se dabaya to viren ka josh aur badh gaya,"..thodi saza milegi

to sahi ho jaoge dono!"

"please,jaan..kholo na!",viren ne zid ki.

"nahi.bilkul nahi!",kamini ne uske gaal pe pyar bhari chapat

lagayi,"pehle 1 kaam ki baat suno."

"kya?",viren ne dekha ki kamini maanane ke mood me nahi hai to usne

sar neeche jhukaya & uski dayi choochi pe jibh chalane laga.

"umm....mana kiya hai na!",kamini ne uske baal pakad use fir se

uthaya,"..maine tumhari bhabhi se baat ki thi."

"kaisi baat?"

"vahi dawa wali."

"achha.kya kaha usne?"

jaisa maine socha tha isme unka koi hath nahi.mujhe lagta hai unhe bhi

Shiva pe hi shaq hai."

"tumhe abhi bhi lagta hai dono ke beech kuchh tha?",viren 1 bar fir

uske seene pe jhuk gaya.

"haan."kamini ne uska sar fir se uthaya & karwat le use apne neeche

kar diya,"..usme mujhe koi shaq nahi magar ab shiva khatra ban gaya

hai.",kamini viren ke seene ko chumte hue neeche badh rahi thi.lund ke

paas pahunch usne aas-pas chumna shuru kar diya.viren ka dil kar raha

tha ki kamini jaldi se uske lund ko hatho & munh me le uski tadap ko

kuchh to shant kare magar aaj kamini ne use usi ki dawa ka swad

chakhane ki thani thi.
 
kamini viren ki jhanto ke bahar uski jangh,uske pet ko chume ja rahi

thi magar uske thumakte hue lund ki jaise use koi parwah hi nahi

thi,"kamini.."

"shiva kaha hai kya ye pata kag sakta hai,viren?",kamini ne uski baat

ko ansuna karte hue uski dayi jangh ko chumte hue neeche badhna shuru

kiya.

"daftar se uska permanent address nikalwa ke shuruat ki ja sakti

hai.",kamini chumte hue suke apiro tak pahunch gayi & viren ki dayi

tang ko utha uske pairo ki ungliyo ko 1-1 kar chusne lagi.aisi harkato

se viren use pagal banata tha magar aaj viren ko pata chal raha tha ki

aisi tadap me kitna dard & kitna maza chhupa rehta hai.

"..lekin mujhe nahi lagta ki uske aage kuchh hosa kta hai.bahut

mushkil hogi use dhoondne me kyuki ..aaahhh....",kamini uske apiro ki

ungliyo se khelne ke baad vapas uske lund ke paas aayi thi & uske ando

ke beechobeech bahut hi halke se chuma tha-itna halke ki uske honth

bas ando ki sikiudi si skin ko bas chhu se gaye the,"..kyuki vo chahta

nahi hoga ki koi use dhunde.ab aise aadmi ka pata lagana to dikkat

bhar kaam hoga hi."

"na..meri kasam hai tumhe Mr.Viren Sahay..",kamini ne uske hatho ko

fir se uske sar ke upar le ja ke bistar pe rakh diya,"..jab tak main

na kahu mere jism ko nahi chhuoge."kamini ab dono ghutne uski kamar ke

dono or tikaye uske lund ke upar baith rahi thi.jaise hi chut lund ke

bilkul karib pahunchi kamini ne baithna rok diya.viren pagal ho apni

kamar uchka ke apne pyase lund ko chut me ghusane ki nakam koshish

karne laga.

"chupchap lete raho varna chali jaoongi!",kamini ki dant se tadapta

viren shant ho neeche let gaya.kamini haule-2 neeche hui & chut ko

lund ki nok se chhuua diya.

"aahh..!",viren aah bharta hua sar utha ke neeche dekhne laga magar

kamini ne chut ko aur neeche nahi kiya.viren ne socha ki baat badali

jaye to shayad kamini ka dhyan is tadap bhaer khel se thoda hate.

"aakhir tum use kyu dhundna chahti ho?"

"kyuki tumhare parivar ko sabse zyada khatra usi se hai.ab use kewal

daulat ki hawas nahi balki beizzati ka gussa bhi hoga & vo zarur badla

lena chahega is baat ka.",kamini ke nakhun viren ke seene pe ghum rahe

the & uski chut abhi bhi hawa me hi thi.kamini jhuki & apni kamar hawa

me yu utha di ki viren ko uski chaudi gand ke darshan to hote rahen

magar uski chut uske lund ko na chhu paye.

"ye kaam kaise hoga,kamini?",kamini ne viern ke seene pe chumte hue

apni gand bade madhoshi bhare andaz me lehrana shuru kar diya

tha.mashooqa ki kasam se bandha viren bas bebas ho dekh sakta tha

magar apni joshili hasrato ko pura nahi kar sakta tha.

"vo sab mujhpe chhodo.kuchh sochti hu.",kamini ne dekha ki viren ke

lund pe precum ki boonde chamak rahi thi & vo bechaini se apni kamar

bas bistare pe gand jamayae hue hila raha tha.kamini uske seene se

uthi & apne dono hath vaha jama diye & fir se viren ke lund pe baithne

lagi.is baar usne sue zyada nahi tadpaya 7 chut me lund ko dakhil hone

diya.

viren ke hotho pe muskan fail gayi & aankhe maze me band ho gayi magar

ye sukun bas kuchh hi der ke liye tha kyuki kamini uske supade se

zyada lund ko andar le hi nahi rahi thi & bas apni kamar usi pe hila

rahi thi.viren ki aahe kamre me gunj rahi thi,"ohhh....kamini

please.....aur neeche ho....lund ko puar andar lo na!"

"leti hu,jaan.aisi bhi kya jaldi hai!",kamini ne use aur tadpaya magar

is baar thoda aur neeche baith gayi,ab lund aadha andar tha & viren

neeche se kamar hila raha tha.kamini ne apne hath seene se neeche la

uski kamar ke bagal me lagaye & use hilne se rok diya.viren ki shakl

dekh ke aisa lag raha tha ki vo ab jaise ro dega.

kamini ko bhi ab zyada tadpana thik nahi laga.vo aur neeche hui & ab

lund jud tak uski chut me tha.viren ne khushi se muskurate hue kamar

hila chudai shuru karni chahi & apne hath uski choochiyo ki or

badhaye,"na.abhi maine nahi kaha hai."

viren ne mehbooba ki baat sun hath peechhe khinch bistar pe rakh liye

& kamar bhi hilana rok diya.thodi der pehle tak uski khwahish thi ki

uska lund kamini ki nazuk,kasi chut me jud tak dhans jaye-vo khwahish

puri ho gayi thi magar fir bhi vo tadap raha tha kyuki kamini uske

lund ko andar liye bas shant baithi uske seene ke balo me ungliya fira

rahi thi jabki vo chudai ke liye pagal ho raha tha.

"please,kamini...please..mujhe chodne do!"

"lund to hai hi andar.ab aur kya karna hai.aise hi kitna achha lag

raha hai.",kamini ne apni baahe upar hawa me le ja angdayi li & apni

38D size ki kasi,moti choochiyo se apne aashiq ko lalchaya.viren ka

dil to kiya ki hatho me bhar uski choochiyo ko masalte hue vo use

neeche gira de & fir uske upar sawar ho uski aisi chudai akre ki vo

zinadagi bhar yaad rakhe magar vo bebas tha-premika ne kasam jo de

rakhi thi use!

kamini ne vaise hi hath uthaye hue apne baalo se khelte hue bahut

dheere-2 apni kamar hilayi to viren ko thoda chain pada.uska dil kar

raha tha ki kamini tez raftar se kamar hilaye taki uske tadapte lund

ko fauran sukun mil jaye.kamini ne kamar hilate hue apne baye ghutne

ko bistar se uthaya & baye pair ko viren ke seene pe rakh diya,uska

daya ghutna bhi bistar se utha chuka tha magar daya pair uski gand ke

bagal me bistar pe hi pada tha.viren ko chut me dhansa uska lund &

uspe kasi kamini ki gulabi chut ki harkate saaf dikh rahi thi & uski

masti har pal baadhti ja rahi thi.

kamini ne baye pair ke anguthe & ungli ke beech viren ke daye nipple

ko daboch ke uspe chuti kaat li & fir anguthe se uske seene pe dayre

banate hue kharonchne lagi.viren ke liye ye bilkul naya tajurba

tha.aamtaur pe ladkiyan bistar me uski kamuk harkato se bechain ho

uske samne hathyar daal deti thi magar aaj pehli baar kisi ladki ne us

se hathyar dalwaye the...nahi 1 aur thi.....viren ne sar jhatka & us

ladki ka khayal dimagh se nikala..vo us bewafa ko yaad kar is

hasin,mast lamhe ko barbad nahi karna chahta tha.

kamini ne pane hath ashare ke liye peechhe viren ki mazbut jangho pe

tika diya the & apne baye pair se uske seene ko masalte hue vo ab tezi

se kamar hila rahi thi.is mast khel ne uski dhadkane bhi bahut tez kar

di thi.uski aankho me jism me paida ho rahe maze ki khumari saaf

jhalak rahi thi.jismani khel ki masti se uski bojhal palke uski kali

aankho ko badi nashili bana rahi thi.viren un nashili aankho ki sharab

apni aankho se pita hua apni kamar hila raha tha.kamini ki chut ab

sikud ke uske lund ko aur kas rahi thi.vo janta tha ki vo jhadne wali

hai.uska haal bhi usi ke jaisa tha.dono premi aankho ke zariye 1 dusre

ke dil ka haal samajhte hue chudai kar rahe the.

"aanhhh...ooowww...uunnhhhh.....oouuuiiiiiiiiiii......!",kamini ki

aahe bahut tez ho gayi thi & uski kamar ki raftar bhi.uski chut me

vahi mastana tanav ban gaya tha jiske dur hone pe use vo anokha maza

hasil hota tha jise duniya jhadna kehti thi.viren ne is waqt apne

hatho ko kaise apne kabu me rakha tha vohi janta tha.uske hath tadap

rahe mashooqa ke gadraye badan ki golaiyo ko masalne ke liye magar

uski hasrato se bhi badi thi mehbooba ki kasam jise vo kisi bhi keemat

pe nahi tod sakta tha.

kamini uske haal ko bakhubi samajh rahi thi & use bahut pyar aa raha

tha apne aashiq par jo uski kasam ki itni izzat kar raha tha.usne to

khel-2 me aisa kaha tha & use zara bhi umeed nahi thi ki jab josh dono

ke sar chadh jayega us waqt bhi viren uski kasam ka khayal rakhega

magar viren ne uski kasam nibha uske dil me aur badi jagah bana li

thi.

dil me mehboob ke liye umadte pyar & chut me dhanse uske lumbe,tagde

lund ki harkato se jism me paida hoti madhoshi ne apna sar dikhaya &

uski aahe aur tez ho gayi,vo viren ki janghe thame aur peechhe jhuk

gayi & apni chhatiya hawa me utha di.uski kamar bahut tezi se hil rahi

thi & uski chut lund pe apni mastani harkate kar rahi thi.uski chut ka

tanav apni shiddat pe pahuchne ke baad kam ho raha tha & use vohi

anokha ehsas ho raha tha jise duniya jhadna kehti hai.

use chut me kuchh garam sa mehsus hua & kano me viren ki aahe sunai

di.usne aankhe kholi to dekha ki viren ka badan bhi jhatke kha raha

hai & uska gadha virya uski chut me bhar raha hai.jahdne ke baad dono

lumbi-2 sanse lete hue 1 dusre ko dekh rahe the,"viren....jaan..mujhe

chhua.",kamini ne apni kasam vapas li to jasie viren ko kisi qaid se

chhutkara mila.hath badha usne apni hasin mashuqa ko apne seene pe

giraya & fir baho me bhar karwat le use apne neeche daba use chumne

laga.jhadne ke bavjood lund pura mulayam nahi hua tha.viren ne aadhe

sakht lund se hi fir se dhakke lagana shuru kar diya.kamini ki mastani

adaon ne sue pagal kar diya tha & aaj vo uski chut se lund nikalna hi

nahi chahta tha.kamini bhi uski halat samajh gayi thi,usne apni baaho

me use kasa & apne honth us se sata diye & uski chudai ka lutf uthane

lagi.

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kramashah.......
 
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