• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Badla बदला compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
लंड को जड़ से थामे मुँह मे भर जब उसने उसके मत्थे पे अपनी जीभ चलाई तो

शिवा पागल हो गया & उसने देविका के सर को और कस के पकड़ लिया & अपनी कमर

हिलाके उसके मुँह को चोदने लगा.देविका ने भी सहारे के लिए उसकी मज़बूत

गंद को थाम लिया & उसके धक्के सहने लगी.

उसकी जीभ बदस्तूर शिवा के लंड पे चल रही थी & ऐसा करते हुए जब उसने उसकी

गंद की छेद मे अपनी 1 उंगली घुआस दी तो शिवा कराह उठा,"..आहह...",उसने

फ़ौरन लंड को अपनी प्रेमिका के मुँह से बाहर खींचा & उसकी चूचियो को दबा

उसे पीछे धकेला,देविका बिस्तर पे गिर पड़ी.

शिवा की शॉर्ट्स उसकी गंद के नीचे उसकी जाँघो को गिर्द फँसी पड़ी थी.उसने

पीछे मूड के खिड़की से बाहर 1 नज़र कुच्छ काग़ज़ात देखते अपने बॉस पे

डाली & फिर शॉर्ट्स से अपनी खंभे जैसी टाँगे निकालने लगा.देविका ने भी

लेटे-2 अपनी गंद को उपर उठाया & 1 ही झटके मे अपनी पॅंटी को अपने जिस्म

से जुदा कर दिया.

शिवा ने शॉर्ट्स निकाल के जब देविका की ओर देखा तो पाया की अपने घुटने

मोड & अपनी टाँगे फैलाए देविका बाए हाथ की उंगलियो से अपने चूत के दाने

को सहला रही है & दाए से अपनी मोटी चूचियो को दबा रही है.शिवा ने उसके

घुटनो के नीचे हाथ लगाके टाँगो को और फैलाया & उसके उपर लेटते हुए अपना

लंड उसकी चूत मे घुसाने लगा,"..ऊओवव्व....!"

उसके उपर लेटते ही देविका ने उसे अपनी बाहो & टाँगो मे क़ैद कर लिया &

ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.शिवा बस उसे चूमते हुए धक्के लगाए जा रहा

था,"..हाअ...आनन्न...शी...वाअ....और...ज़ो..र्ररर....से....ऊऊव्व्व......",देविका

ने अपने नाख़ून शिवा की गंद मे धंसा दिए तो उसके धक्के और तेज़ हो

गये.उसने अपने हाथ देविका के कंधो के नीचे लगा रखे थे मानो उसे अपने से

ऐसे सटा लेना चाहता हो की हवा भी उनके बीच ना रहे.कमरे मे उसके मोटे लंड

की देविका की गीली चूत की चुदाई से हो रही फ़च-2 की नशीली आवाज़ गूँज रही

थी.

"ओह्ह..देवी..का...आआहह...",देविका ने फिर से उसकी गंद के छेद मे उंगली

घुसा दी थी.शिवा ने बेचैन होके धक्के और तेज़ कर दिया & सर थोड़ा नीचे कर

देविका के दाए निपल को दाँत से काट लिया,"..अयेयीयियी...जुंग...ली

कहीं....के......ऑश...माआन्न्न्न...!",शिवा ने उसके हाथो को अपनी गंद से

हटा अपने गर्दन के गिर्द लगाया & फिर अपने घुटने बिस्तर पे जमा खुद से

चिपटि देविका की गंद की फांको को थाम उसे उठा लिया था & अब फर्श पे खड़ा

था.उसने खड़े हुए ही देविका को हवा मे झुलाते हुए कुच्छ धक्के लगाए फिर

उसे घुमा के उसी खिड़की की चौड़ी सिल पे बिठा दिया जिस से नीचे लॉन नज़र

आता था.

देविका पकड़े जाने के डर से च्चटपताई मगर शिवा ने उसे मज़बूती से थाम

उसके होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे लिया & बहुत तेज़ी से उसे चोदने

लगा.इस तरह से चुदने मे देविका की चूत का दाना लगातार शिवा के लंड से

रगड़ रहा था & उसकी खुमारी हर पल बढ़ती जा रही थी.अगर उस वक़्त सुरेन जी

अपनी गर्दन घुमा लेते तो अपनी बीवी की जिस गंद पे वो फिदा थे उसे अपने

मुलाज़िम के हाथो मे भींचा देख लेते मगर खुदा दोनो प्रेमियो पे मेहेर बान

था & सुरेन जी मॅनेजर की पोस्ट के लिए आई अर्ज़िया पढ़ने मे मगन थे.

देविका को बहुत मज़ा आ रहा था,शिवा हर बार इस तरह की कोई बहुत ही

बेवकुफ़ाना मगर उतनी ही रोमांचक हरकत कर उसे बिल्कुल मदहोश कर देता

था.उसने अपने होंठ उसके होंठो से अलग किया & अपनी टाँगो को उसकी गंद पे

ऐसे कस लिया की दोनो आएडिया 1 दूसरे को क्रॉस कर रही थी.उसने अपना सर

उसके बाए कंधे पे टीकाया & उसके कान मे अपनी जीभ फिराने लगी,"...बस

झ..आड़ने..ही..वाली...हू..मे..री..जेया....न्‍न्‍णणन्..आई..से...ही...चोद...ते..रहो...उउम्म्म्मम.....!",वो

फुसफुसाई.

शिवा लगातार अपने मालिक को देख रहा था,वो देविका को बेइंतहा चाहता था मगर

इस वक़्त उसे उसके पति को देखते हुए उसे चोदने मे कुच्छ और ही मज़ा आ रहा

था.उसने उसकी गंद को और ज़ोर से दबाया & इतने क़ातिल धक्के लगाए की

देविका का पानी निकल गया & वो उसकी पीठ पे अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ती

& उसके बाए कंधे पे अपने दन्तो से काटती झाड़ गयी.शिवा का बदन भी झटके खा

रहा था & उसका गढ़ा पानी देविका की चूत मे भर रहा था.

कुच्छ देर बाद उसने देविका को खिड़की से उठाया & फिर बिस्तर पे उसे

लिए-दिए लेट गया,"..तुम बिल्कुल पागल हो,शिवा.",देविका उसके चेहरे पे

प्यार भरे किस छ्चोड़ रही थी.

"तुम्ही ने बनाया है जानेमन.",शिवा ने उसके गुलाबी होंठ चूम लिए.

"अच्छा अब जाओ,8 बज गये.",शिवा अपना लंड उसकी चूत से खींचते हुए उठा &

अपने शॉर्ट्स पहन वाहा से निकल गया.देविका वैसे ही पड़ी रही.शिवा से

चुदने से वो पूरी तरह से सुकून से भर जाती थी,इस वक़्त भी उसके चेहरे पे

सुकून भरी मुस्कान थी.उसने इंटरकम उठाया,"रजनी?"

"गुड मॉर्निंग,मॅ'म."

"मॉर्निंग,रजनी.आज नाश्ते मे पराठे बना लो आलू-गोभी की सब्ज़ी के साथ."

"ओके,मॅ'म.आपकी चाइ ले आऊँ?"

"15 मिनिट बाद ले आना.ओके....& सुनो,रजनी...साहब के पराठे घी मे नही

बनाना उनके लिए जो खास कुकिंग आयिल आता है उसी मे बनाना."

"डॉन'ट वरी,मॅ'म."
 
सच मे रजनी के होते उसे घर की कोई फ़िक्र नही थी मगर उसे क्या पता था की

इसी बेचारी रजनी ने अपने भोलेपन मे अपने प्यार के हाथो मजबूर हो उसके

दुश्मन को घर मे आने का रास्ता दिखा दिया है & आने वाले दिन उसका कितना

बड़ा इम्तिहान लेने वाले थे.रजनी की तरकीब काम कर गयी थी,लॉन मे बैठे

सहाय जी इंदर की अर्ज़ी & बियो-डाटा से काफ़ी प्रभावित हुए थे & उन्होने

सोच लिया था कि अगर उसने इंटरव्यू मे अच्छे जवाब दिए तो वो उसे ही अपना

मॅनेजर बना लेंगे.

"ह्म्म....मिस्टर.सहाय,बात थोड़ी उलझी हुई है..",कामिनी अपनी हाइ-बॅक

लेदर चेर पे थोड़ा पीछे झुकी.उसके सामने सुरेन सहाय & देविका डेस्क की

दूसरी तरफ बैठे थे & अभी-2 उन्होने उसे अपने परिवार के बारे मे सारी बाते

बताई थी,"..आपके पिताजी ने कोई वसीयत की नही तो आप & आपके छ्होटे भाई

वीरेन सहाय दोनो सारी जयदाद के बराबर के हिस्सेदार होते हैं.."

"..आपका कहना है कि वीरेन जी अपना हिस्सा नही माँग रहे ना ही उन्हे

कारोबार मे कोई दिलचस्पी है मगर क़ानून तो जज़्बातो से नही चलता ना!"

"इसीलिए तो हम आपके पास आए हैं कामिनी जी..",देविका ने सामने रखे कोल्ड

ड्रिंक के ग्लास को उठा लिया,"..ये उलझी बाते आपको ही सुलझानी हैं."

"ओके,देविका जी..",कामिनी मुस्कुराइ,"..अच्छा..चलिए सारी बातो को ऐसे

देखते हैं..",कामिनी ने 1 पॅड उठा के उसपे लिखना शुरू किया,"..सुरेन

जी,देविका जी मैं जो भी कह रही हू उसका आप बुरा मत मानीएगा,1 वकील के तौर

पे मुझे ऐसी बाते करनी ही पड़ेगी....पहली सूरत पे गौर करते हैं मान लीजिए

सुरेन जी की मौत हो जाती है....फिर जयदाद का क्या होता है?..",देविका के

चेहरे पे पति की मौत की बात से परच्छाई सी आई मगर उसने खुद को संभाला.

"..आधी जयदाद वीरेन जी की & आधी देविका जी की हो जाती है मगर वीरेन जी को

कारोबार मे कोई दिलचस्पी नही है..देविका जी क्या आप कारोबार चल्एंगी?"

"बिल्कुल.",देविका की आवाज़ विश्वास से भरी हुई थी.

"ठीक है,फिर आप कारोबार चलाएंगी मगर तब भी आपके बाद बँटवारा होना ज़रूरी

है ताकि प्रसून के लिए ट्रस्ट आराम से बन सके.अब दूसरी सूरत की वीरेन जी

की मौत पहले होती है तब तो बहुत आसान है अगर वो कोई वसीयत नही करते हैं

तो सब कुच्छ देविका जी का & फिर प्रसून का.."

"..अब तीसरी सूरत अगर आप दोनो की मौत हो जाती है फिर सब कुच्छ वीरेन जी

का होता है & प्रसून भी उन्ही की ज़िम्मेदारी होगा अगर उनसे इस बात का

करार किया जाए तो..",कामिनी ने लिखना छ्चोड़ा,"..तीनो सुरतो मे सबसे

ज़रूरी बात है की वीरेन जी ये बात लिख के दें की उन्हे जयदाद का हिस्सा

नही चाहिए..ऐसे मे सुरेन जी,आपको अपने भाई को हर महीने 1 रकम देनी होगी

जोकि आपदोनो मिलके तय कर लें.."

"..और तीसरी सूरत के मामले मे भी आपको उनसे ये लिखवाना होगा कि वो प्रसून

की देखभाल करेंगे & अगर कारोबार मे उनकी दिलचस्पी नही है तो उसे बेच के

सारे पैसे जमा करके उसमे से उनके हिस्से की रकम या फिर अगर उन्हे अपना

हिस्सा नही चाहिए तो कुच्छ कम ही सही मगर कुच्छ पैसे उन्हे मिलने के बाद

बाकी पैसो से प्रसून के लिए ट्रस्ट बनाया जाए."

मिया बीवी ने 1 दूसरे की ओर देखा,"आपकी बाते तो बिल्कुल ठीक लगती

हैं,कामिनी जी..",सुरेन जी ने अपना खाली ग्लास डेस्क पे रख दिया,"..आप

काम शुरू कीजिए."

"ज़रूर,सहाय जी.आप अपने भाई को लेके मेरे पास आ जाएँ.हम लोग सारे सवालो

पे फिर से गौर करेंगे & फिर सभी कुच्छ क़ानूनी तौर पे पक्का कर

लेंगे.",कामिनी ने कुर्सी के हत्थो पे कोहनिया टिकाते हुए अपने हाथो की

उंगलिया आपस मे जोड़ ली,"..आप जब भी चाहें,वीरेन जी के साथ मुझ से मिल

लीजिए.बाहर बैठी मेरी सेक्रेटरी रश्मि आपको अपायंटमेंट लेने का तरीका बता

देगी."

क्रमशः.......
 


BADLA paart--10

gataank se aage...

"achha bhaiya ab chalta hu.tum mera yaha ka cottage saaf karwa

dena,Panchmahal vale bungle ki chabhi tumne de hi di hai....use main

saaf karwa dunga.",Viren sham ko apne bhai-bhabhi se vida le raha tha.

"thik hai,bhai.vaise kal mujhe panchmahal aana hai."

"koi kaam hai kya?",dono bhai viren ki taxi ki or badh rahe the.

"haan,vo humare vakil the na mishra ji vo to rahe nahi.."

"ohh.."

"haan,bas kuch hi din pehle dehant hua.unke asistants me vo bat nahi

hai.idhar 1 naye vakil ka bahut naam suna hai usi se milna hai kal."

"achha,kaun hai vo?",viren taxi ki pichhli seat pe baitha to driver ne

car start kar di.

"Kamini Sharan."

"oh.",viren ki taxi vaha se nikal gayi.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"umm....ab chhodo na...",inder rajni ki chhatiya chuse ja raha

tha,"..hai raam!..",rajni ne use pare dhakela & lagbhag kudte hue

bistar se utri,"..tumhare chakkar me dekho to kitni der ho

gayi....Prasun bhaiyya ke sham ke nashte ka waqt ho gaya & vo mera

intezar karte honge.",usne jaldi se apni panty ko upar chadhaya.

"ye prasun sachmuch 1 bachche ki tarah hi hai?"

"haan."

"aur tumhare sir ki tabiyat kaisi hai aajkal?"

"thik hai."

"achha.",rajni ne apni salwar pehan li thi & ab kurte ko gale me daal

rahi thi.inder uske paas aya & uski pith pe lage zip ko upar kar

diya.rajni ne uske chehre ko chum liya,"main fone karungi."

"nahi.."

"kyu?",rajni ke mathe pe shikan pad gayi.

"main karunga.tumhe paise barbad karne ki koi zarurat nahi.",rajni ne

use apne gale se laga liya,"i love you,inder...i love you.",uski aavaz

se uski chahat ki shiddat saaf jhalak rahi thi.inder ke chehre pe 1

muskan fail gayi-kutil muskan....aakhir chidiya puri tarah se jaal me

fans gayi thi & uska kaam thoda aur aasan ho gaya tha.

rajni ke jate hi usne cigarette sulgai & nanga hi bistar pe adhleta sa

baith gaya.Suren Sahay ke peechhe vo pichhle 5 mahine se laga hua

tha.jab vo pehli baar jab bimar pada tha tabhi usne hospital se uski

puri medical report & use di gayi dawao ka nuskha nikalwa liya tha.is

kaam me use kitne papad belne pade the ye vahi janta tha.agar us waqt

ye chidiya uske paas hoti tab use vo mashakkat nahi karni padti.

vo rajni ke alawe suren sahay ke aur bhi gharelu naukaro pe nazar

rakhe tha magar ittefaq se rajni ka mobile restaurant me chhuta & use

uske kareeb aane ka mauka mil gaya.rajni use estate ke bare me kuchh

na kuchh batati rehti thi magar aaj se pehle usne koi kaam ki baat

nahi ki thi.uska maqsad tha estate me ghusna....bas 1 baar vo vaha

ghus jaye fir to....usne cigarette bujha ke ash-tray me daal di.

agar aisa ho gaya to use naqab pahan ke bunglo ki dfeeware fand ke

choro ki tarah andar ghusne ki zarurat nahi rahegi,fir to vo dawa kio

dibiya kyu badlega seedha suren sahay ko dozakh ka rasta dikhayega.bas

aisa ho jaye.....fir to suren sahay tumhe tumhare kiye ki saza zarur

milegi.......sabra...sabra rakho inder.....usne almari kholi & apna

hipflask nikala & 2 ghunt bhare.sharab ne uske bechainho rahe man ko

shant kiya & vo thande dimagh se aage ke bare me sochne laga.

Suren Sahay bas thodi hi der me roz ki tarah apni savere ki chai peene

lawn me aane vale the.jab se unhone naye manager ki talash shuru ki

thi tab se roz savere chai ke sath vo manager ki post ke liye bheji

gayi arziya bhi padhte the.Rajni ka kaam to ghar me rehta tha magar

idhar roz savere chai ke sath arziyo ki file ko unke samne rakhne ki

zimmedari bhi usi ki thi.

har sham ko daftar se sahay ji ka secretary vo file bhejta tha & rajni

har subah use chai ke sath unhe deti thi.isi baat ne rajni ke dimagh

me Inder ko estate manager ki jagah dilwane ki 1 tarkib layi thi.

is waqt rajni ke hath me vahi file thi.usne use khola & sari arziya

padhne lagi.6 arziya thi jisme se 2 use aisi lagi joki sahay ji ko

pasand aa sakti thi.usne un dono arziyo ko nikala & inder ki arzi &

uska bio-data laga diya.kal uske ghar se nikalne ke baad use dhayn

aaya ki usne inder se ye chize to li hi nahi.usne use fone karke sare

kagzat mangaye & fir vapas estate aa gayi.

vo dono arziya hatate hue rajni ka dil bahut zor se dhadak raha

tha,use lag raha tha ki vo koi galat kaam kar rahi hai.....magar kya

vo dono log jinki arziya usne abhi phaad ke kudedaan me dali thi inder

se zyada achhe the..nahi bilkul nahi!inder unse kabiliyat me kisi bhi

tarah kam nahi tha...fir isme galat kya tha?inder ke pyar me pagal

rajni ne apna sar jhatak ke trolley pe chai ka saman & vo file rakhi

jisme sabse upar inder ki arzi thi & kitchen se bahar nikal gayi.

-------------------------------------------------------------------------------

"ummm.....!",apne kamre ki khidki pe khadi Devika neeche lawn me chai

pite apne pati ko dekh arhi thi.peechhe se Shiva uski chhatiya uske

gown ke upar se dabata hua uske gale pe chum raha tha.sahay ji thik

savere 7 baje lawn me chai pine ke liye baithate the & 1 ghante tak

chai ke sath akhbar padhte the & kuchh kaam jaise ki arziya dekhna

vagairah karte the.

devika 8 baje uthati thi & Prasun bhi lagbhag usi waqt jaagta tha.ghar

ke baki naukar 8.30 tak kaam karne aate the.savere 6.30 se 8.30 tak

keval rajni hoti thi.is wajah se dono premiyo ko savere milne ka achha

mauka mil jata tha.

Shiva ne devika ko ghumaya & use baaho me bhar liya,vo aaj bhi kewal

shorts me tha.uske balo bhare chaude seene se jaise hi devika ki

chhatiya dabi devika ki chut mast ho gayi.usne uske seene pe bechaini

se hath firate hue chumna shuru kar diya.shiva uske gown ko upasr

khinch raha tha & thodi hi der me panty me dhanki devika ki gand ki

mast faanke uske bade-2 hatho me masli ja rahi thi.

shiva ke nipple ko apni jibh se chhedte hue devika ne apni gardan

halke se daayi or ghuma ke khidki se bahar dekha,akhbar me magan suren

ji ki pith uski or thi.1 ajeeb sa romanch bhar gaya devika ke dil

me....uska pati bas kuchh hi fasle pe tha & agar gardan ghuma ke upar

gaur se dekhta to bahut mumkin tha ki apni pyari biwi ki bewafai use

nazar aa jati.

is khayal ne devika ke badan ki aag ko aur bhadka diya & usne shiva ke

niple ko halke se kaat liya,"aaahhhh..",shiva karaha & apne daaye hath

ko uski gand se khinch uske baal pakad ke uska sar peeche jhuka

diya.devika aise dekha rahi thi mano kah rahi ho ki chahe kuchh bhi

kar lo main ye gustakh harkat zarur dohraungi!

shiva uske baal thame hue uske rasile honth chumne laga & baaye hath

ki ungliyo ko uski panty me neeche se ghusa ke uski gili ho rahi chut

ko kuredne laga,"..uummm...".honth shiva ke hontho se sile hone ki

vajah se kamini bas itna hi karah payi.usne bhi apna daya hath neeche

le jake shorts me tadap rahe uske tane lund ko daboch liya.

shiva ki ungliya uski chut me andar-bahar ho uski aag ko aur bhadka

rahi thi & vio bhi uske tagde lund ko hilakar uske josh me izafa kar

rahi thi.bahut din ho gaye the use apne premi ke shandar lund ka swad

chakhe hue.ye khayal aate hi devika shiva ku chumna chhod uske gathile

badan ko chumte hue neeche hone lagi.shiva uska irada samajh gaya &

jaise hi vo uske seene pe pahunchi usne apne hatho se uske dhile-dhale

gown ke straps ko uske kandho se neeche khinch diya.

devika ne bhi badan ko hilate hue gown ko neeche farsh pe gir jane

diya & vo jaldi se neeche apne panjo pe baith gayi & shiva ke lund ko

munh me bhar liya,"..aaahhhh....!",apni premika ki kamuk harkat se

behal ho shiva ne uske sar ko tham kar apni aankhe band kar apna sar

maze me peeche jhuka liya.
 
devika ne lund ko utha ke upar ki taraf shiva ke nichle pet pe dabaya

& uski jad ko jaha pe lund & ando ki chamdi milti thi,jibh se chhedne

lagi.shiva maze se pagal ho gaya.devika ne jibh ki nok ko neeche ki or

dono ando ke beech chalaya & fir 1 ande ko munh me bhar ke itni zor se

chusa ki shiva ko laga ki vo abhi hi jhad jayega.

badi mushkil se usne apne upar kabu rakha & jhuk ke neeche dekha to

paya ki devika ki chahat & masti se bhari aankhe bhi use hi dekh rahi

hain.devika ne us se nazar milaye hue hi pehle uske dusre ande ko

chusa & fir lund ko neeche kar apne munh me bhar liya.

lund ko jad se thame munh me bhar jab usne uske matthe pe apni jibh

chalayi to shiva pagal ho gaya & usne devika ke sar ko aur kas ke

pakad liya & apni kamar hilake uske munh ko chodne laga.devika ne bhi

sahare ke liye uski mazbut gand ko tham liya & uske dhakke sehne lagi.

uski jibh badastur shiva ke lund pe chal rahi thi & aisa karte hue jab

usne uski gand ki chhed me apni 1 ungli ghuas di to shiva karah

utha,"..aahhhhhh...",usne fauran lund ko apni premika ke munh se bahar

khincha & uski chhatiyo ko daba use peeche dhakela,deviak bistar pe

gir padi.

shiva ki shorts uski gand ke neeche uski jangho ko gird fansi padi

thi.usne peechhe mud ke khidki se bahar 1 nazar kuchh kagzat dekhte

apne boss pe dali & fir shorts se apni khambhe jaisi tange nikalne

laga.devika ne bhi lete-2 apni gand ko upar uthaya & 1 hi jhatke me

apni panty ko apne jism se juda kar diya.

shiva ne shorts nikal ke jab devika ki or dekha to paya ki apne ghutne

mode & apni tange failaye devika baaye hath ki ungliyo se apne chut ke

dane ko sehla rahi hai & daye se apni moti choochiyo ko daba rahi

hai.shiva ne uske ghutno ke neeche hath lagake tango ko aur failaya &

uske upar letate hue apna lund uski chut me ghusane

laga,"..ooowww....!"

uske upar letate hi devika ne use apni baaho & tango me qaid kar liya

& zor-2 se aahe bharne lagi.shiva bas use chumte hue dhakke lagaye ja

raha tha,"..haaa...aannn...shi...vaaa....aur...zo..rrrr....se....oooowww......",devika

ne apne nakhun shiva ki gand me dhansa diye to uske dhakke aur tez ho

gaye.usne apne hath devika ke kandho ke neeche laga rakhe the mano use

apne se aise sata lena chahta ho ki hawa bhi unke beech na rahe.kamre

me uske mote lund ki devika ki gili chut ki chudai se ho rahi phach-2

ki nashili aavaz gunj rahi thi.

"ohh..devi..ka...aaaahhh...",devika ne fir se uski gand ke chhed me

ungli ghusa di thi.shiva ne bechain hoke dhakke aur tez kar diya & sar

thoda neeche kar devika ke daaye nipple ko dant se kaat

liya,"..aaiiyyee...jung...li

kahin....ke......ohhh...maaaannnn...!",shiva ne uske hatho ko apni

gand se hatah apne gardan ke gird lagaya & fir apne ghutne bistar pe

jama khud se chipti devika ki gand ki fanko ko tham use utha liya tha

& ab farsh pe khada tha.usne khade hue hi devika ko hawa me jhulate

hue kuchh dhakke lagaye fir use ghuma ke usi khidki ki chaudi sill pe

bitha diya jis se neeche lawn nazar aata tha.

devika pakde jane ke darr se chhatpatayi magar shiva ne use mazbooti

se tham uske hontho ko apne labo ki giraft me liya & bahut tezi se use

chodne laga.is tarah se chudne me devika ki chut ka dana lagatar shiva

ke lund se ragad raha tha & uski khumari har pal badhti ja rahi

thi.agar us waqt suren ji apni gardan ghuma lete to apni biwi ki jis

gand pe vo fida the use apne mulazim ke hatho me bhincha dekh lete

magar khuda dono premiyo pe meher ban tha & suren ji manager ki post

ke liye aayi arziya padhne me magan the.

devika ko bahut maza aa raha tha,shiva har baar is tarah ki koi bahut

hi bevkufana magar utni hi romanchak harkat kar use bilkul madhosh kar

deta tha.usne apne honth uske hontho se alag kiya & apni tango ko uski

gand pe aise kas liya ki dono aediya 1 dusre ko cross kar rahi

thi.usne apna sar uske baaye kandhe pe tikaya & uske kaan me apni jibh

firane lagi,"...bas

jh..aadne..hi..wali...hu..me..ri..jaa....nnnnn..ai..se...hi...chod...te..raho...uummmmm.....!",vo

phusphusayi.

shiva lagatar apne malik ko dekh raha tha,vo devika ko beintaha chahta

tha magar is waqt use uske pati ko dekhte hue use chodne me kuchh aur

hi maza aa raha tha.usne uski gand ko aur zor se dabaya & itne qatil

dhakke lagaye ki devika ka pani nikal gaya & vo uski pith pe apne

nakhuno ke nishan chhodti & uske baaye kandhe pe apne danto se kaatati

jhad gayi.shiva ka badan bhi jhatke kha raha tha & uska gadha pani

devika ki chut me bhar raha tha.

kuchh der baad usne devika ko khidki se uthaya & fir bistar pe use

liye-diye let gaya,"..tum bilkul pagal ho,shiva.",devika uske chehre

pe pyar bhare kisses chhod rahi thi.

"tumhi ne banaya hai janeman.",shiva ne uske gulabi honth chum liye.

"achha ab jao,8 baj gaye.",shiva apna lund uski chut se khinchte hue

utha & apne shorts pehan vaha se nikal gaya.devika vaise hi padi

rahi.shiva se chudne se vo puri tarah se sukun se bhar jati thi,is

waqt bhi uske chehre pe sukun bhari muskan thi.usne intercom

uthaya,"rajni?"

"good morning,ma'am."

"morning,rajni.aaj nashte me parathe bana lo aloo-gobhi ki sabzi ke sath."

"ok,ma'am.aapki chai le aaoon?"

"15 minute baad le aana.ok....& suno,rajni...sahab ke parathe ghee me

nahi banana unke liye jo khas cooking oil aata hai usi me banana."

"don't worry,ma'am."

sach me rajni ke hote use ghar ki koi fikr nahi thi magar use kya pata

tha ki isi bechri rajni ne apne bholepan me apne pyar ke hatho majboor

ho uske dushman ko ghar me aane ka rasta dikha diya hai & aane vale

din uska kitna bada imtihan lene wale the.rajni ki tarkib kaam kar

gayi thi,lawn me baithe sahay ji inder ki arzi & bio-data se kafi

prabhavit hue the & unhone soch liya tha ki agar usne interview me

achhe jawab diye to vo use hi apna manager bana lenge.

"Hmm....Mr.Sahay,baat thodi uljhi hui hai..",Kamini apni high-back

leather chair pe thoda peechhe jhuki.uske samne Suren Sahay & Devika

desk ki dusri taraf baithe the & abhi-2 unhone use apne parivar ke

bare me sari baate batayi thi,"..aapke pitaji ne koi vasiyat ki nahi

to aap & aapke chhote bhai Viren Sahay dono sari jaydad ke barabar ke

hissedar hote hain.."

"..aapka kehna hi ki viren ji apna hissa nahi mang rahe na hi unhe

karobar me koi dilchaspi hai magar kanoon to jazbato se nahi chalta

na!"

"isiliye to hum aapke paas aaye hain kamini ji..",devika ne samne

rakhe cold drink ke glass ko utha liya,"..ye uljhi baate aapko hi

suljhani hain."

"ok,devika ji..",kamini muskurayi,"..achha..chaliye sari baato ko aise

dekhte hain..",kamini ne 1 pad utha ke uspe likhna shuru kiya,"..suren

ji,devika ji main jo bhi kah rahi hu uska aap bura mat maniyega,1

vakil ke taur pe mujhe aisi baate karni hi padegi....pehli surat pe

gaur karte hain maan lijiye suren ji ki maut ho jati hai....fir jaydad

ka kya hota hai?..",devika ke chehre pe pati ki maut ki baat se

parchhayi si aayi magar usne khud ko sambhala.

"..aadhi jaydad viren ji ki & aadhi devika ji ki ho jati hai magar

viren ji ko karobar me koi dilchaspi nahi hai..devika ji kya aap

karobar chalyengi?"

"bilkul.",devika ki aavaz vishvas se bhari hui thi.

"thik hai,fir aap karobar chalayengi magar tab bhi aapke baad bantwara

hona zaruri hai taki Prasun ke liye trust aram se ban sake.ab dusri

surat ki viren ji ki maut pehle hoti hai tab to bahut aasan hai agar

vo koi vasiyat nahi karte hain to sab kuchh devika ji ka & fir prasun

ka.."

"..ab teesri surat agar aap dono ki maut ho jati hai fir sab kuchh

viren ji ka hota hai & prasun bhi unhi ki zimmedari hoga agar unse is

baat ka karara kiya jaye to..",kamini ne likhna chhoda,"..teeno surato

me sabse zaruri baat hai ki viren ji ye baat likh ke den ki unhe

jaydad ka hissa nahi chahiye..aise me suren ji,aapko apne bhai ko har

mahine 1 rakam deni hogi joki aapdono milke tay kar len.."

"..aur teesri surat ke mamle me bhi aapko unse ye likhwana hoga ki vo

prasun ki dekhbhal karenge & agar karobar me unki dilchaspi nahi hai

to use beche ke sare paise jama karke usme se unke hisse ki rakam ya

fir agar unhe apna hissa nahi chahiye to kuchh kam hi sahi magar kuchh

paise unhe milne ke baad baki paiso se prasun ke liye trust banaya

jaye."

miya biwi ne 1 dusre ki or dekha,"aapki baate to bilkul thik lagti

hain,kamini ji..",suren ji ne apna khali glass desk pe rakh

diya,"..aap kaam shuru kijiye."

"zarur,sahay ji.aap apne bhai ko leke mere paas aa jayen.humlog sare

sawalo pe fir se gaur karenge & fir sabhi kuchh kanooni taur pe pakka

kar lenge.",kamini ne kursi ke hattho pe kohniya tikate hue apne hatho

ki ungliya aapas me jod li,"..aap jab bhi chahen,viren ji ke sath mujh

se mil lijiye.bahar baithi meri secretary Rashmi aapko appointment

lene ka tarika bata degi."

kramashah.......
 
गतान्क से आगे...

काम ख़त्म हो गया था मगर फिर भी दोनो पति-पत्नी उठ नही रहे थे.कामिनी को

लगा कि उनके दिल मे अभी भी कोई उलझन है,"मिस्टर.सहाय,कोई और बात है

क्या?बेहिचक कहिए.देखिए,मन मे अगर कोई शुबहा है तो उसे अभी दूर कर लेना

बेहतर होगा."

"कामिनी जी...वो..",सुरेन जी हिचकिचा रहे थे तो देविका ने बात की कमान

थामी,"कामिनी जी,आपको हमारे बेटे के बारे मे तो पता ही है.मैने सोचा की

ट्रस्ट तो ठीक है मगर इंसान को किसी अपने के प्यार की भी तो ज़रूरत होती

है..अगर मैं उसकी शादी करा दू तो?"

"क्या?!",कामिनी हैरत से थोडा आगे हो बैठ गयी,"देविका जी!बुरा मत

माने,मगर कौन करेगा उस से शादी?"

"सवाल ये नही है की कौन करेगा..सवाल ये है की शादी के बाद भी मेरे बेटे

के हितो की हिफ़ाज़त कैसे हो."

"देखिए,कामिनी जी.मैं समझती हू मेरी बात आपको अटपटी लगी है मगर जैसे अभी

आपने सारी बाते समझाई वैसे ही 1 और रास्ता बताएँ."

"हां,देविका जी.बोलिए.",ये औरत ना केवल समझदार थी बल्कि बहुत हौसले वाली

थी.कामिनी ने मन ही मन उसकी तारीफ की.

"फ़र्ज़ कीजिए कि ना हम दोनो हैं & ना ही वीरेन है & मेरा बेटा शादीशुदा

है.अब ऐसे मे मेरे बेटे की बीवी की नियत अगर खराब हो जाए तो उस से उसे

बचाने का क्या रास्ता है?"

"प्री-नप्षियल अग्रीमेंट.",दोनो ने उसे सवालिया निगाहो से देखा.

"आपने अख़बारो मे पढ़ा होगा या फिर टीवी पे देखा होगा,विदेश के नामचीं

लोग जिनके पास बहुत दौलत होती है मगर जिनकी शादिया हर साल के फॅशन के साथ

बदल जाती हैं वो ऐसे समझौते करते हैं.."

"..इन समझौतो मे ये लिखा होता है कि दोनो अलग होने के वक़्त 1 दूसरे से

क्या माँग सकते हैं & कितना माँग सकते हैं..यहा तक की पालतू

कुत्ते-बिल्लियो का भी हिसाब किया जाता है!",कामिनी की बात से दोनो को

हँसी आ गयी & माहौल थोड़ा हल्का हो गया.

"..मैं तो कहूँगी की आप अपनी बहू से शादी के पहले ये समझौता कीजिए की अगर

वो आपके बेटे को छ्चोड़ती है तो उसे 1 खास रकम मिलती है & अगर बेटे की

मौत मे ज़रा भी गड़बड़ का अंदेशा हुआ तो उसे जब तक जाँच नही हो जाती तब

तक 1 भी धेला नही मिलेगा."

देविका & सुरेन जी के चेहरो पे राहत के भाव आ गये,"थॅंक यू,कामिनी

जी,थॅंक यू!",सुरेन जी कुर्सी से खड़े हो गये,"..आपकी बातो ने हुमारे

सारे सवालो के जवाब दे दिए हैं..मैं कुच्छ ही दिन मे आप से मिलके सब

कुच्छ पक्का करता हू.",देविका भी खड़ी हो गयी थी.

"आपकी फीस..",देविका अपना पर्स खोल रही थी.

"बाहर रश्मि को दे दीजिएगा."

"अच्छा,कामिनी जी नमस्ते!",दोनो ने उस से विदा ली & उसके कॅबिन से बाहर निकल गये.

रात के 10 बजे रजनी अपना काम ख़त्म कर अपने क्वॉर्टर को लौट रही थी.सहाय

परिवार के बंगल से कोई 500मीटर की दूरी पे उनके घरेलू नौकरो के सर्वेंट

क्वॉर्टर्स बने हुए थे.ये क्वॉर्टर्स दोमंज़िल की दो कमरो की 4 छ्होटी

इमारतें थी & रजनी इसमे से सबसे आख़िरी इमारत के निचले क्वॉर्टर मे रहती

थी.

घर का दरवाज़ा खोल रजनी अंदर दाखिल हुई & किचन मे जा सवेरे बनाई हुई

सब्ज़ी को चूल्‍हे पे गरम होने के लिए चढ़ा दिया & फिर तौलिया उठा

गुसलखाने मे घुस गयी.यू तो सभी नौकर घर मे भी खा सकते थे मगर फिर भी

कभी-कभार रजनी अपना खाना खुद बना लेती थी....आख़िर रसोई मे चूल्हा जले

तभी तो घर घर जैसा लगता है & फिर कुच्छ ही दिन मे जब इंदर उसका पति बन

जाएगा तब तो उसके लिए उसे रोज़ उसके लिए तो खाना बनाना पड़ेगा ही!

इस ख़याल से उसके चेहरे पे खुशी की चमक आ गयी.शवर बंद कर अपने गीले बदन

को तौलिए से सुखा उसने उसे लपेटा & बाहर आ गयी.रसोई मे जा उसने देखा की

सब्ज़ी गरम हो गयी थी,उसने चूल्हा बंद किया & खाना तश्तरी मे निकाल अपने

कमरे मे आ गयी.नहाने से वो तरोताज़ा महसूस कर रही थी & उसकी भूख & बढ़

गयी थी.

वो वैसे ही सिर्फ़ तौलिए मे अपने बिस्तर पे बैठ गयी & खाना खाने लगी.खाते

हुए उसने सोचा कि खाना ख़त्म कर वो इंदर को फोन करेगी.खाना ख़त्म कर वो

कमरे मे आई & अपनी नाइटी निकालने के इरादे से अपनी अलमारी खोली की तभी

उसका मोबाइल बज उठा,"हेलो."

"क्या कर रही हो,जान?"

"कुच्छ नही.",इंदर की आवाज़ सुनते ही रजनी के होंठो पे मुस्कान फैल गयी &

वो बिस्तर पे लेट गयी.
 
"अच्छा.मैने तो सोचा था कि कहोगी की तुम्हारे फोन का इंतेज़ार कर रही हू."

"अब खुद को इतना भी मत समझो!",रजनी ने शरारत से कहा.

"हा..हा..!",इंदर हंसा,"..थॅंक्स,रजनी."

"किस लिए इंदर?"

"तुम्हारे सर ने मुझे कल ही इंटरव्यू के लिए बुलाया है."

"क्या?!",रजनी खुशी से चीखी & उठ बैठी.

"आख़िर तुमने ये सब किया कैसे जान?"

"तुम आम खाओ ना पेड़ क्यू गिनते हो!",रजनी ने अपने प्रेमी से फिर शरारत की.

"बताओ ना..प्लीज़!",इंदर बच्चो की तरह मचला तो थोड़ी देर उसे और तड़पाने

के बाद रजनी ने उसे सब कुच्छ बता दिया.

"मान गये उस्ताद.जी तो करता है तुम्हे चूम लू!"

"अच्छा-2,फिर से वोही बातें!"

"अब तुम से ये बातें ना करू तो किस से करू?!....चलो बताओ क्या पहना है?"

"नही बताऊंगी.क्या करोगे?!",अभी कोई हमेशा शांत रहने वाली रजनी को ऐसे

चुहल करते देखता तो बिल्कुल यकीन नही करता.

"वो तो अगली मुलाकात मे पता चलेगा की क्या करूँगा!",इंदर की बात सुनते ही

रजनी को वो दोपहर याद आई जब इंदर ने उसके कुंवारेपन को ख़त्म कर उसे फूल

बनाया था & उसका हाथ तौलिए के नीचे से उसकी चूत पे चला गया,"..पहले तो

तुम्हारी प्यारी चूत को तब तक चाटूँगा जब तक की तुम मुझे खुद उठा कर अपने

उपर ना खींच लो & बोलो की इंदर,चोद मुझे!"

"धात..!",रजनी ने उसे प्यार से झिड़का मगर उसका हाथ अपनी चूत के दाने को

रगड़ता रहा,"..मैं ऐसी गंदी बाते कभी नही करूँगी."

"ये गंदी बाते हैं,जानेमन!करते वक़्त तो तुम्हे गंदी नही लगती.चलो सोचो

कि अभी मैं तुम्हारे पास हू & तुम्हारे नशीले बदन को सहला रहा हू,तुमने

भी मेरा लंड अपने हाथो मे थामा हुआ है & उसे हिला रही हो.मैं तुम्हारी

चूचिया चूस रहा हू & साथ ही उंगली से तुम्हारी चूत मार रहा हू.तुम भी जोश

मे पागल हो रही हो & अपनी टाँगे फैला के मुझे उपर खींच लेती हो & कहती

हो-.."

"ओह्ह...इंदर..प्लेआसीए......आहह.....मत पागल करो मुझे....ऊहह...!"

"तुम अपनी चूत से खेल रही हो ना रजनी?"

"हां,इंदर...आअनह...!"

"मैं भी अपना लंड हिला रहा हू,जानेमन.सोचो की मैने तुम्हारी चूत मे उसे

घुसा दिया है &..",इंदर चुप हो गया.

"..इंदर?..इंदर..?..ओह्ह्ह..इंदर बोलते रहो प्लीज़ी...!"

"क्या बोलू रजनी?बताओ तो ज़रा.",इंदर ने उसे छेड़ा.

"ओह्ह..इंदर..प्लीज़..क्यू सताते हो?",रजनी ने तौलिए की गाँठ खोल दी थी &

अपने बाए हाथ से फोन कान पे लगाए अपने दाए हाथ से अपनी चूत के दाने को

रगडे जा रही थी.

"जब तक तुम बतओगि नही मैं नही बोलूँगा."

"ओह्ह..इंदर...",रजनी को अभी भी झिझक हो रही थी मगर उसका जिस्म उसे पागल

कर रहा था,"..बताओ ना इंदर कि तुम..तुम कैसे..कैसे मुझे चोद रहे

हो.",उसने जल्दि से कहा.

"ये हुई ना बात!सोचो,की मैं तुम्हार उपर सवार हू & हम दोनो किस्सिंग कर

रहे हैं.मेरा लंड तुम्हारी चूत मे पूरा घुसा हुआ है & हम दोनो की झांते

आपस मे उलझ गयी हैं...",इंदर अपनी प्रेमिका की आहें अपने फोन से सुन रहा

था,"..मेरे धक्के महसूस कर रही हो,रजनी?"

"हां..इनडर हाँ..",रजनी को इंदर के साथ की गयी चुदाई याद आ रही

थी,"..ऊहह...और ज़ोर से चोदो इंदर और ज़ोर से!"

"ये लो रजनी...ये लो..मेरा लंड पूरा बाहर निकलता है & फिर मैं उसे 1 झटके

मे वापस पूरा अंदर घुसेड देता हू."

"ऊव्व....मैं तुम्हारी पीठ नोच रही हू इंदर मेरी टाँगे तुम्हारी कमर पे

हैं..मैं तुम्हारी गंद नोच रही हू इंदर...आहह...रुकना

मत...ऊओवव्वव...!",& रजनी झाड़ गयी.उसे इस नये खेल मे बड़ा मज़ा आया था

मगर जो बात असल चुदाई मे थी वो & किसी चीज़ मे कहा!उसे अपने प्रेमी पे

बहुत प्यार आया मगर साथ ही दिल मे ये तमन्ना भी उठी की वो जल्द से जल्द

अब हुमेशा के लिए उसकी हो जाए ताकि हर रात वो उसकी बाहो मे गुज़रे.

थोड़ी और बात करने के बाद इंदर ने फोन बंद कर दिया.उसके होंठो पे जीत की

मुस्कान थी.ये लड़की अब पूरी तरह से उसकी कठपुतली थी & इसी कठपुतली के

सहारे कल वो सहाय एस्टेट मे पहली बार कदम रखेगा & फिर....

उस ख़याल से 1 बार फिर उसका तन गुस्से से जलने लगा.उसना हाथ बढ़ा के मेज़

से अपना फ़्लास्क उठाया & अपने मुँह से लगाया.शराब का 1 बड़ा घूँट भरते

ही उसे गले मे जलन महसूस हुई मगर ये जलन उस गुस्से की जलन के आगे कुच्छ

भी नही थी.3-4 घूँट के बाद उसे थोड़ा सुकून पहुँचा & वो कल सुरेन सहाय से

होने वाली पहली मुलाकात के बारे मे सोचने लगा.

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.........
 
BADLA paart--11

gataank se aage...

kaam khatm ho gaya tha magar fir bhi dono pati-patni uth nahi rahe

the.kamini ko laga ki unke dil me abhi bhi koi uljhan

hai,"mr.sahay,koi aur baat hai kya?behichak kahiye.dekhiye,man me agar

koi shubaha hai to use abhi door kar lena behtar hoga."

"kamini ji...vo..",suren ji hichkicha rahe the to devika ne baat ki

kaman thami,"kamini ji,aapko humare bete ke bare me to pata hi

hai.maine socha ki trust to thik hai magar insan ko kisi apne ke pyar

ki bhi to zarurat hoti hai..agar main uski shadi kara du to?"

"kya?!",kamini hairat se thoda aage ho baith gayi,"devika ji!bura mat

mane,magar kaun karega us se shadi?"

"sawal ye nahi hai ki kaun karega..sawal ye hai ki shadi ke baad bhi

mere bete ke hito ki hifazat kaise ho."

"dekhiye,kamini ji.main samajhti hu meri baat aapko atpati lagi hai

magar jaise abhi aapne sari baate samjhayi vaise hi 1 aur rasta

batayen."

"haan,devika ji.boliye.",ye aurat na kewal samajhdar thi balki bahut

hausle vali thi.kamini ne man hi man uski tareef ki.

"farz kijiye ki na hum dono hain & na hi viren hai & mera beta

shadishuda hai.ab aise me mere bete ki biwi ki niyat agar kharab ho

jaye to us se use bachane ka kya rasta hai?"

"pre-nuptial agreement.",dono ne use sawaliya nigaho se dekha.

"aapne akhbaro me padha hoga ya fir tv pe dekha hoga,videsh ke

naamchin log jinke paas bahut daulat hoti hai magar jinki shadiya har

saal ke fashion ke sath badal jati hain vo aise samjhaute karte

hain.."

"..in samjhauto me ye likha hota hai ki dono alag hone ke waqt 1 dusre

se kya maan saket hain & kitna mang sakte hain..yaha tak ki paltu

kutte-billiyo ka bhi hisab kiya jata hai!",kamini ki baat se dono ko

hansi aa gayi & mahaul thoda halka ho gaya.

"..main to kahungi ki aap apni bahu se shadi ke pehle ye samjhauta

kijiye ki agar vo aapke bete ko chhodti hai to use 1 khas rakam milti

hai & agar bete ki maut me zara bhi gadbad ka andesha hua to use jab

tak janch nahi ho jati tab tak 1 bhi dhela nahi milega."

devika & suren ji ke chehro pe rahat ke bhav aa gaye,"thank you,kamini

ji,thank you!",suren ji kursi se khadi ho gaye,"..aapki baato ne

humare sare sawalo ke jawab de diye hain..main kuchh hi din me aap se

milke sab kuchh pakka karta hu.",devika bhi khadi ho gayi thi.

"aapki fees..",devika apna purse khol rahi thi.

"bahar rashmi ko de dijiyega."

"achha,kamini ji namaste!",dono ne us se vida li & uske cabin se bahar

nikal gaye.

Raat ke 10 baje Rajni apna kaam khatm kar apne quarter ko laut rahi

thi.Sahay parivar ke bungle se koi 500m ki duri pe unke gharelu naukro

ke servant quarters bane hue the.ye quarters domanzil ki do kamro ki 4

chhoti imaraten thi & rajni isme se sabse aakhiri imarat ke nichle

quarter me rehti thi.

ghar ka darwaza khol rajni andar dakhil hui & kitchen me ja savere

banai hui sabzi ko chulhe pe garam hone ke liye chadha diya & fir

tauliya utha gusalkhane me ghus gayi.yu to sabhi naukar ghar me bhi

kha sakte the magar fir bhi kabhi-kabhar rajni apna khana khud bana

leti thi....aakhir rasoi me chulha jale tabhi to ghar ghar jaisa lagta

hai & fir kuchh hi din me jab Inder uska pati ban jayega tab to uske

liye use roz uske liye to khana banana padega hi!

is khayal se uske chehre pe khuzhsi ki chamak aa gayi.shower band kar

apne gile badan ko tauliye se sukha usne use lapeta & bahar aa

gayi.rasoi me ja usne dekha ki sabzi garam ho gayi thi,usne chulha

band kiya & khana tashtari me nikal apne kamre me aa gayi.nahane se vo

tarotaza mehsus kar rahi thi & uski bhookh & badh gayi thi.

vo vaise hi sirf tauliye me apne bistar pe baith gayi & khana khane

lagi.khate hue usne socha ki khana khatm kar vo inder ko fone

karegi.khana khatm kar vo kamre me aayi & apni nighty nikalne ke irade

se apni almari kholi ki tabhi uska mobile baj utha,"hello."

"kya kar rahi ho,jaan?"

"kuchh nahi.",inder ki aavaz sunte hi rajni ke hontho pe muskan fail

gayi & vo bistar pe let gayi.

"achha.maine to socha tha ki kahogi ki tumhare fone ka intezar kar rahi hu."

"ab khud ko itna bhi mat samjho!",rajni ne shararat se kaha.

"haa..haa..!",inder hansa,"..thanx,rajni."

"kis liye inder?"

"tumhare sir ne mujhe kal hi interview ke liye bulaya hai."

"kya?!",rajni khushi se chikhi & uth baithi.

"aakhir tumne ye sab kiya kaise jaan?"

"tum aam khao na ped kyu ginte ho!",rajni ne apne premi se fir shararat ki.

"batao na..please!",inder bachcho ki tarah machala to thodi der use

aur tadpane ke baad rajni ne use sab kuchh bata diya.

"maan gaye ustad.ji to karta hai tumhe chum lu!"

"achha-2,fir se vohi baaten!"

"ab tum se ye baaten na karu to kis se karu?!....chalo batao kya pehna hai?"

"nahi bataoongi.kya karoge?!",abhi koi humesha shant rehne wali rajni

ko aise chuhal karte dekhta to bilkul yakeen nahi karta.

"vo to agli mulakat me pata chalega ki kya karunga!",inder ki baat

sunte hi rajni ko vo dopahar yaad aayi jab inder ne uske kunwarepan ko

khatm kar use phool banaya tha & uska hath tauliye ke neeche se uski

chut pe chala gaya,"..pehle to tumahri pyari chut ko tab tak chatunga

jab tak ki tum mujhe khud utha kar apne upar na khinch lo & bolo ki

inder,chod mujhe!"
 
"dhat..!",rajni ne use pyar se jhidka magar uska hath apni chut ke

dane ko ragadta raha,"..main aisi gandi baate kabhi nahi karungi."

"ye gandi baate hain,janeman!karte waqt to tumhe gandi nahi

lagti.chalo socho kia abhi main tumhare paas hu & tumhare nashile

badan ko sehla raha hu,tumne bhi mera lund apne hatho me thama hua hai

& use hila rahi ho.main tumhari chhatiyan chus raha hu & sath hi ungli

se tumhari chut maar raha hu.tum bhi josh me pagal ho rahi ho & apni

tange faila ke mujhe upar khicnh leti ho & kehti ho-.."

"ohh...inder..pleaseee......aahhhhh.....mat pagal karo mujhe....oohh...!"

"tum apni chut se khel rahi ho na rajni?"

"haan,inder...aaanhhh...!"

"main bhi apna lund hila raha hu,jaaneman.socho ki maine tumhari chut

me use ghusa diya hai &..",inder chup ho gaya.

"..inder?..inder..?..ohhh..inder bolte raho pleaseeee...!"

"kya bolu rajni?batao to zara.",inder ne use chheda.

"ohh..inder..please..kyu satate ho?",rajni ne tauliye ki ganth khol di

thi & apne baye hath se fone kaan pe lagaye apne daaye hath se apni

chut ke dane ko ragde ja rahi thi.

"jab tak tum bataogi nahi main nahi bolunga."

"ohh..inder...",rajni ko abhi bhi jhijhak ho rahi thi magar uska jism

use pagal kar raha tha,"..batao na inder ki tum..tum kaise..kaise

mujhe chod rahe ho.",usne jaldiu se kaha.

"ye hui na baat!socho,ki main tumhar upar savar hu & hum dono kissing

kar rahe hain.mera lund tumhari chut me pura ghusa hua hai & hum dono

ki jhante aapas me ulajh gayi hain...",inder apni premika ki aahen

apne fone se sun raha tha,"..mere dhakke mehsus kar rahi ho,rajni?"

"haan..inder haan..",rajni ko inder ke sath ki gayi chudai yaad aa

rahi thi,"..oohh...aur zor se chodo inder aur zor se!"

"ye lo rajni...ye lo..mera lund pura bahar nikalta hai & fir main use

1 jhatke me vapas pura andar ghused deta hu."

"ooww....main tumhari pith noch rahi hu inder meri tange tumhari kamar

pe hain..main tumhari gand noch rahi hu inder...aahhhh...rukna

mat...ooowwww...!",& rajni jhad gayi.use is naye khel me bada maza

aaya tha magar jo baat asal chudai me thi vo & kisi chiz me kaha!use

apne premi pe bahut pyar aaya magar sath hi dil me ye tamanna bhi uthi

ki vo jald se jald ab humesha ke liye uski ho jaye taki har raat vo

uski baaho me guzare.

thodi aur baat karne ke baad inder ne fone band kar diya.uske hotho pe

jeet ki muskan thi.ye ladki ab puri tarah se uski kathputli thi & isi

kathputli ke sahare kal vo sahay estate me pehli baar kadam rakhega &

fir....

us khayal se 1 baar fir uske tan gusse se jalne laga.usna hath badha

ke mez se apna flask uthaya & apne munh se lagaya.sharab ka 1 bada

ghunt bharte hi use gale me jalan mehsus hui magar ye jalan us gusse

ki jalan ke aage kuchh bhi nahi thi.3-4 ghunto ke baad use thoda sukun

pahuncha & vo kal Suren Sahay se hone vali pehli mulakat ke bare me

sochne laga.

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.........
 
गतान्क से आगे...

"मिस्टर.इंदर धमीजा,आप हलदन ग्लास मे पिच्छले 1 साल से मॅनेजर हैं,उस से

पहले भी आपने 1 आइरन फाउंड्री & फिर 1 और ग्लास फॅक्टरी.सभी जगह आपने

काफ़ी अच्छा काम किया है मगर आपको हमारे जैसे बिज़्नेस का कोई तजुर्बा

नही है,फिर क्या आपको यहा काम करने मे कोई तकलीफ़ नही होगी?",सुरेन जी ने

सारे सवाल कर लिए थे & अब उनका ये आख़िरी सवाल था.

"सर,ये सही है की सभी बिज़्नेसस की अपनी कुच्छ अलग ज़रूरते & ख़ासियत

होती हैं जिन्हे समझना ज़रूरी होता है मगर 2 चीज़े जो हर बिज़्नेस को

चलाने के काम आती हैं वो है मेहनत & लगन.मैं मानता हू की मेरे पास आपके

बिज़्नेस का तजुर्बा नही मगर मैं मेहनती हू & पूरी लगन से काम करता

हू,अगर आप मुझे अपने साथ काम करने का मौका देते हैं तो मैं आपको निराश

नही करूँगा.".नपे-तुले लॅफ्ज़ो मे कही गयी बात ने सहाय जी का मन खुश कर

दिया था मगर उन्होने अपने चेहरे पे अपने दिल की बात नही आने दी.

"मिस्टर.धमीजा,आपको 3 दीनो के अंदर हमारे फ़ैसले के बारे मे इत्तिला कर

दी जाएगी.इस दट फाइन विथ यू?"

"ये सर.थॅंक टू.",इंदर खड़ा हुआ & शहाय जी के दफ़्तर से बाहर निकल

गया.उसके निकलते ही सुरेन जी ने इंटरकम से दूसरे कॅबिन मे बैठे शिवा को

तलब किया.

"आपने बुलाया,सर?"

"शिवा,ये आदमी जो अभी-2 बाहर गया है मुझे मॅनेजर की पोस्ट के लिए पसंद आ

गया है मगर मैं चाहता हू कि तुम ज़रा इसके बारे मे थोड़ी छान-बीन कर

लो..ये रहा इसका बीओ-डेटा."

"ओके,सर.",शिवा ने बीओ-डाटा लिया & फ़ौरन वाहा से निकल गया.

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

इंदर अपनी बाइक से आया था & एस्टेट से निकल उसने देखा की शिवा 1 जीप मे

उसका पीचछा कर रहा था.वो मन ही मन मुस्कुराया..ये लोग सोचते थे कि वो

उसके बारे मे पता लगाएँगे & उसे कुच्छ भी ना पता चलेगा!..हुंग..!वो पता

नही कितने दीनो से ये सब प्लान कर रहा था,सहाय एस्टेट के बारे मे वो

जितना जान गया था उतना तो शायद सुरेन सहाय को भी नही पता होगा!..आओ शिवा

आओ..मेरे पीछे आओ...करो मेरे बारे मे छान-बीन...तुम्हारा मालिक और

इंप्रेस होगा मुझ से & खुद मुझे अपने बुलाएगा एस्टेट के अंदर ताकि मैं

उसे नेस्तोनाबूद कर साकु!

उसके दिल मे 1 बार फिर से वोही आग भड़की & उसे शराब की तलब लगी मगर नही

अभी नही.आज उसे अपनी इच्छा-शक्ति से ही अपने उपर काबू रखना था.वो अब

दूसरी सीधी चढ़ने वाला था & यहा फिसल कर वो अपनी महीनो की मेहनत पे पानी

नही फेर सकता था.उसने आँखे बंद कर 1 बार उस इंसान का चेहरा याद किया

जिसके लिए वो ये सब कर रहा था & फिर पैरो से टॉप गियर लगा बाइक की स्पीड

बढ़ाई & फ़र्राटे से आगे बढ़ गया.

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

आज 3 केसस की सुनवाई थी & उन्हे निपटाने के बाद कामिनी 9 बजे तक अगले दिन

के केसस की तैय्यारि अपने असिस्टेंट मुकुल के साथ करती रही थी.काम ख़त्म

होने के बाद इस वक़्त वो क्लब की छत पे बैठी खाने का ऑर्डर दे रही थी जब

वीरेन सहाय उसकी मेज़ के पास आ खड़ा हुआ,"हेलो."

"हेलो.",कामिनी ने ठण्डेपन से कहा.

"मैं यहा बैठ सकता हू?"

"शुवर.",कामिनी का दिल तो नही था की वो यहा बैठे मगर क्या करती तमीज़ का

तक़ाज़ा था!अभी तो उसे खुद पे हैरत भी हो रही थी की षत्रुजीत सिंग से

चुदाने के वक़्त उसे इस इंसान से चुदने का ख़याल आया भी कैसे था.

"देखिए,कामिनी जी मुझे घुमा-फिरा के बात करना तो आता नही.मुझे आपसे 2

बाते करनी हैं,पहली ये की मेरे बड़े भाई सुरेन सहाय आपसे कुच्छ दिन पहले

मिले थे.."

"जी."

"..तो आपने उनसे कहा की वो 1 बार मेरे साथ आपसे मिले."

"हां,कहा था."

"देखिए,मेरा सच मे एस्टेट & पैसो मे कोई इंटेरेस्ट नही है मगर मेरी भाभी

ने 1 बात जो आपसे कही उसमे मुझे उस बारे मे आपसे बात करनी है.",कामिनी

समझ गयी थी कि वो प्रसून के बारे मे बात कर रह था मगर उसने ऐसा कहा नही.

"कौन सी बात,मिस्टर.सहाय?"

"मेरे भतीजे प्रसून की शादी की बात.पता नही कहा से भाभी को ये फितूर सूझा

है!आप ही बताए क्या ये उस बेचारे की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ नही

होगा?",पहली बार कामिनी ने हमेशा शांत से रहने वाले वीरेन को थोडा

उत्तेजित देखा.

"देखिए,देविका जी प्रसून की मा हैं & हम उन्हे उसके लिए कोई फ़ैसला लेने

से रोक तो सकते नही हैं मगर मैने उन्हे 1 उपाय सुझाया है."

"कैसा उपाय?"

"ये तो आपको अपने भाई-भाभी से ही पुच्छना पड़ेगा.वो मेरे क्लाइंट्स हैं &

मैं उनसे की गयी कोई भी बात बाहर नही कह सकती."

"ओके.कामिनी जी,मुझे यकीन है की आपने कोई बढ़िया तरकीब ही उन्हे सुझाई

होगी.",वीरेन ने दूसरी ओर गर्दन घुमाई,"..प्रसून पे कोई आँच आए ये मैं

बर्दाश्त नही कर सकता.",कामिनी ने उसे गौर से देखा..क्या ये केवल 1 शख्स

का अपने भतीजे के प्रति लगाव से पैदा हुई चिंता थी या फिर कुच्छ और?

"अच्छा,कामिनी जी 1 बात बताइए..",वीरेन ने अपनी बाहे बाँध के मेज़ पे

टिकाई & आगे झुक गया,"..अगर खुदा ना ख़स्ते मेरे भाई नही रहते हैं तो

क्या मैं प्रसून का गार्डियन बन सकता हू?"

"आप प्रसून के गार्डियन तभी बन सकते हैं जब आपके भाई-भाभी दोनो इस दुनिया

मे ना रहें या फिर वो खुद आपको उसे उसकी ज़िम्मेदारी सौंप दें."

हुन्न..",वीरेन पीछे हो फिर से अपनी कुर्सी की पीठ से टिक के बैठ

गया,अपने हाथ जोड़े अपनी नाक पे टिकाए ना जाने वो क्या सोच रहा था.

"मिस्टर.सहाय.",कामिनी की आवाज़ से वो अपने ख़यालो से बाहर आया.

"जी..आइ'एम सॉरी..मैं ज़रा कुच्छ सोच रहा था."

"आप मुझसे 2 बाते करने आए थे.वो दूसरी बात कौन सी है?"

"हां..",वीरेन के चेहरे पे मुस्कान फैल गयी.कामिनी ने गौर किया की

मुस्कुराता वीरेन बहुत खूबसूरत लगता था & 1 बार फिर से उसके दिल मे वही

शत्रुजीत के साथ बिताई रात वाली बात आ गयी,"..आप जानती हैं कि मैं 1

पेंटर हू."

"जी.ये बात कौन नही जानता."

"तो क्या आप मुझे आपकी तस्वीर बनाने का मौका देंगी?"

"जी?!",कामिनी की काली-2 आँखे हैरत से फैल गयी.

"जी.",वीरेन के चेहरे पे अभी भी मुस्कान थी,"..मेरी आपसे गुज़ारिशा है

कामिनी जी की आप हां कर दें.ये समझिए की आपका ये एहसान होगा मेरे उपर."

"मैं...मगर....",कामिनी गहरे आश्चर्या मे थी.उसे उम्मीद नही थी की जिस

इंसान को वो बदतमीज़ & खाड़ुस समझती थी वोही उसकी तस्वीर बनाने को

कहेगा,"..मैं अभी क्या कहु मेरी कुच्छ समझ नही आ रहा."

"आप जितना वक़्त चाहे लें,कामिनी जी..",वीरेन उठ खड़ा हुआ,"..मैं तो यही

उम्मीद करता हू की आप ही कहेंगी.अच्छा,आप इजाज़त दीजिए."

"वीरेन जी..",कामिनी की आवाज़ से जाता हुआ वीरेन घुमा,"..आप मेरी ही

तस्वीर क्यू बनाना चाहते हैं?"

वीरेन के चेहरे पे फिर से वही दिलकश मुस्कान खेल उठी,"खुद को आईने मे देख

लीजिए,जवाब खुद बा खुद मिल जाएगा.",& वो वाहा से चला गया.

वेटर मेज़ पे कामिनी का खाना लगा रहा था मगर उसकी भूख तो वीरेन की बातो

से गायब हो गयी थी.किस अदा से उसने उसकीखूबसूरती की तारीफ कर दी

थी!..लेकिन वो क्या करे..क्या हां कर दे..या नही?....फिर उसे प्रसून के

बारे मे उसकी कही बाते याद आ गयी & वो और गहरी सोच मे पड़ गयी..वीरेन

क्या 1 कलाकार की हैसियत से उसकी तस्वीर बनाने की बात कर रहा था या फिर

उसका मक़सद कुच्छ और था..जैसे की अपने भाई-भाभी की वकील के करीब आना ताकि

वो उनकी बाते जान सके..लेकिन वो तो कहता है की उसे पैसो से कोई मतलब

नही...पर वो झूठ भी तो बोल सकता है..

"मॅ'म.",वेटर ने बोला तो उसकी सोच का सिलसिला टूटा,"..आइ होप एवेर्य्थिन्ग'स फाइन?"

"यस.थॅंक्स.",कामिनी ने खाना शुरू कर दिया.इस सहाय परिवार के बारे मे वो

बाद मे सोचेगी.आज के लिए दिमाग़ की इतनी कसरत काफ़ी थी.
 
सुरेन सहाय अपने बिस्तर पे टाँगे फैलाए नंगे बैठे थे & देविका उनकी दाई

तरफ उनकी टाँगो से सॅट के लेटी उनके सोए लंड को अपनी ज़ुबान से जगा रही

थी,"देविका..",सुरेन जी ने साइड-टेबल से वही नारंगी रंग की डिबिया उठा के

1 गोली अपने मुँह मे डाली.

"ह्म्म...",देविका ने लंड को मज़बूती से पकड़ के उसके सूपदे को चूसा.

"तुम्हारे दिमाग़ मे प्रसून की शादी का ख़याल आख़िर आया कैसे",उन्होने

उसके बॉल सहलाए.

"बस ऐसे ही.",देविका अब उनकी टाँगो को और फैला उनके बीच लेट के लंड से खेल रही थी.

"तुम्हे पूरा यकीन है की ये बात ठीक होगी?"

"हां,आप क्यू पुच्छ रहे हैं?",देविका ने 1 पल को लंड मुँह से निकाला &

फिर वापस चूसने लगी.उसकी बड़ी-2 आँखे उपर हो अपने पति की ओर ही देख रही

थी.

"सबकी बातो से मुझे भी लगता है की पता नही ये ठीक होगा की

नही....ओह्ह्ह...!",देविका ने उनके अंडे पकड़ के खींचते हुए लंड के छेद

पे पानी जीभ चला दी थी & सुरेन जी अब पूरे जोश मे आ गये थे.देविका ने लंड

मुँह से निकाला & उठा के उनके दोनो तरफ अपने घुटने टीका के उनकी गोद मे

बैठ गयी.उसके जिस्म पे बस 1 लाल रंग का ब्रा था जिसके गले मे से उसकी

मस्ती के कारण और भी बड़ी हो गयी छातियो का क्लीवेज चमक रहा था.

"कामिनी शरण ने तो सब समझा दिया है ना..",देविका अपने घुटनो पे खड़ी हुई

& अपना दाया हाथ पीछे ले जाते हुए उनके खड़े लंड को पकड़ा & अपनी चूत के

नीचे लगा उसपे बैठने लगी.2 रातो से उसके पति ने उसे नही चोदा था &

पिच्छले 2 दीनो से शिवा को भी सवेरे-2 एस्टेट के राउंड पे निकलना था सो

वो भी सवेरे उसकी चुदाई नही कर पाया था.इस वजह से कामिनी बहुत प्यासी थी

& इस वक़्त उसे चुदाई के अलावा कुच्छ और नही सूझ रहा था.

"..आप बिल्कुल मत घबराईए.सब ठीक होगा.",देविका को अपनी गंद पे सुरेन जी

की झांते गुदगुदी करती महसूस हुई तो वो समझ गयी की लंड जड तक उसकी चूत मे

घुस चुका था.वो आगे झुकी & अपने पति को चूम लिया.सुरेन जी का दिल बहुत

ज़ोरो से धड़क रहा था....ये दवा बिल्कुल काम नही कर रही क्या?..इस ख़याल

ने उन्हे थोड़ा & परेशान कर दिया.

देविका ने पति को परेशान देखा तो समझा की बेटे की चिंता अभी भी उन्हे सता

रही है.उसने अपने ब्रा का बाया कप नीचे किया & अपनी चूची निकाल अपने पति

के मुँह मे भर दी & और उच्छल-2 कर उनसे चुदने लगी.सुरेन जी का दिल उन्हे

परेशान कर रहा था मगर जैसे ही देविका के गुलाबी,कड़े निपल का स्वाद

उन्होने चखा उनके दिल मे भी अपनी बीवी के जिस्म के साथ खेलने की चाह उनकी

बीमारी के उपर हावी हो गयी.

उन्होने उसकी बाई छाती चूस्ते हुए उसकी गंद को मसला & फिर दूसरा कप भी

नीचे किया.देविका अपने पति की हर्कतो से ये देख खुश हुई की उसने उनका

ध्यान उनकी परेशानियो से हटा दिया है.उसने उनके सर को अपने सीने पे और

दबा लिया & कमर हिला-2 के अपनी मंज़िल की ओर बढ़ने लगी.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......
 
Back
Top