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लंड को जड़ से थामे मुँह मे भर जब उसने उसके मत्थे पे अपनी जीभ चलाई तो
शिवा पागल हो गया & उसने देविका के सर को और कस के पकड़ लिया & अपनी कमर
हिलाके उसके मुँह को चोदने लगा.देविका ने भी सहारे के लिए उसकी मज़बूत
गंद को थाम लिया & उसके धक्के सहने लगी.
उसकी जीभ बदस्तूर शिवा के लंड पे चल रही थी & ऐसा करते हुए जब उसने उसकी
गंद की छेद मे अपनी 1 उंगली घुआस दी तो शिवा कराह उठा,"..आहह...",उसने
फ़ौरन लंड को अपनी प्रेमिका के मुँह से बाहर खींचा & उसकी चूचियो को दबा
उसे पीछे धकेला,देविका बिस्तर पे गिर पड़ी.
शिवा की शॉर्ट्स उसकी गंद के नीचे उसकी जाँघो को गिर्द फँसी पड़ी थी.उसने
पीछे मूड के खिड़की से बाहर 1 नज़र कुच्छ काग़ज़ात देखते अपने बॉस पे
डाली & फिर शॉर्ट्स से अपनी खंभे जैसी टाँगे निकालने लगा.देविका ने भी
लेटे-2 अपनी गंद को उपर उठाया & 1 ही झटके मे अपनी पॅंटी को अपने जिस्म
से जुदा कर दिया.
शिवा ने शॉर्ट्स निकाल के जब देविका की ओर देखा तो पाया की अपने घुटने
मोड & अपनी टाँगे फैलाए देविका बाए हाथ की उंगलियो से अपने चूत के दाने
को सहला रही है & दाए से अपनी मोटी चूचियो को दबा रही है.शिवा ने उसके
घुटनो के नीचे हाथ लगाके टाँगो को और फैलाया & उसके उपर लेटते हुए अपना
लंड उसकी चूत मे घुसाने लगा,"..ऊओवव्व....!"
उसके उपर लेटते ही देविका ने उसे अपनी बाहो & टाँगो मे क़ैद कर लिया &
ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.शिवा बस उसे चूमते हुए धक्के लगाए जा रहा
था,"..हाअ...आनन्न...शी...वाअ....और...ज़ो..र्ररर....से....ऊऊव्व्व......",देविका
ने अपने नाख़ून शिवा की गंद मे धंसा दिए तो उसके धक्के और तेज़ हो
गये.उसने अपने हाथ देविका के कंधो के नीचे लगा रखे थे मानो उसे अपने से
ऐसे सटा लेना चाहता हो की हवा भी उनके बीच ना रहे.कमरे मे उसके मोटे लंड
की देविका की गीली चूत की चुदाई से हो रही फ़च-2 की नशीली आवाज़ गूँज रही
थी.
"ओह्ह..देवी..का...आआहह...",देविका ने फिर से उसकी गंद के छेद मे उंगली
घुसा दी थी.शिवा ने बेचैन होके धक्के और तेज़ कर दिया & सर थोड़ा नीचे कर
देविका के दाए निपल को दाँत से काट लिया,"..अयेयीयियी...जुंग...ली
कहीं....के......ऑश...माआन्न्न्न...!",शिवा ने उसके हाथो को अपनी गंद से
हटा अपने गर्दन के गिर्द लगाया & फिर अपने घुटने बिस्तर पे जमा खुद से
चिपटि देविका की गंद की फांको को थाम उसे उठा लिया था & अब फर्श पे खड़ा
था.उसने खड़े हुए ही देविका को हवा मे झुलाते हुए कुच्छ धक्के लगाए फिर
उसे घुमा के उसी खिड़की की चौड़ी सिल पे बिठा दिया जिस से नीचे लॉन नज़र
आता था.
देविका पकड़े जाने के डर से च्चटपताई मगर शिवा ने उसे मज़बूती से थाम
उसके होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे लिया & बहुत तेज़ी से उसे चोदने
लगा.इस तरह से चुदने मे देविका की चूत का दाना लगातार शिवा के लंड से
रगड़ रहा था & उसकी खुमारी हर पल बढ़ती जा रही थी.अगर उस वक़्त सुरेन जी
अपनी गर्दन घुमा लेते तो अपनी बीवी की जिस गंद पे वो फिदा थे उसे अपने
मुलाज़िम के हाथो मे भींचा देख लेते मगर खुदा दोनो प्रेमियो पे मेहेर बान
था & सुरेन जी मॅनेजर की पोस्ट के लिए आई अर्ज़िया पढ़ने मे मगन थे.
देविका को बहुत मज़ा आ रहा था,शिवा हर बार इस तरह की कोई बहुत ही
बेवकुफ़ाना मगर उतनी ही रोमांचक हरकत कर उसे बिल्कुल मदहोश कर देता
था.उसने अपने होंठ उसके होंठो से अलग किया & अपनी टाँगो को उसकी गंद पे
ऐसे कस लिया की दोनो आएडिया 1 दूसरे को क्रॉस कर रही थी.उसने अपना सर
उसके बाए कंधे पे टीकाया & उसके कान मे अपनी जीभ फिराने लगी,"...बस
झ..आड़ने..ही..वाली...हू..मे..री..जेया....न्न्णणन्..आई..से...ही...चोद...ते..रहो...उउम्म्म्मम.....!",वो
फुसफुसाई.
शिवा लगातार अपने मालिक को देख रहा था,वो देविका को बेइंतहा चाहता था मगर
इस वक़्त उसे उसके पति को देखते हुए उसे चोदने मे कुच्छ और ही मज़ा आ रहा
था.उसने उसकी गंद को और ज़ोर से दबाया & इतने क़ातिल धक्के लगाए की
देविका का पानी निकल गया & वो उसकी पीठ पे अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ती
& उसके बाए कंधे पे अपने दन्तो से काटती झाड़ गयी.शिवा का बदन भी झटके खा
रहा था & उसका गढ़ा पानी देविका की चूत मे भर रहा था.
कुच्छ देर बाद उसने देविका को खिड़की से उठाया & फिर बिस्तर पे उसे
लिए-दिए लेट गया,"..तुम बिल्कुल पागल हो,शिवा.",देविका उसके चेहरे पे
प्यार भरे किस छ्चोड़ रही थी.
"तुम्ही ने बनाया है जानेमन.",शिवा ने उसके गुलाबी होंठ चूम लिए.
"अच्छा अब जाओ,8 बज गये.",शिवा अपना लंड उसकी चूत से खींचते हुए उठा &
अपने शॉर्ट्स पहन वाहा से निकल गया.देविका वैसे ही पड़ी रही.शिवा से
चुदने से वो पूरी तरह से सुकून से भर जाती थी,इस वक़्त भी उसके चेहरे पे
सुकून भरी मुस्कान थी.उसने इंटरकम उठाया,"रजनी?"
"गुड मॉर्निंग,मॅ'म."
"मॉर्निंग,रजनी.आज नाश्ते मे पराठे बना लो आलू-गोभी की सब्ज़ी के साथ."
"ओके,मॅ'म.आपकी चाइ ले आऊँ?"
"15 मिनिट बाद ले आना.ओके....& सुनो,रजनी...साहब के पराठे घी मे नही
बनाना उनके लिए जो खास कुकिंग आयिल आता है उसी मे बनाना."
"डॉन'ट वरी,मॅ'म."
शिवा पागल हो गया & उसने देविका के सर को और कस के पकड़ लिया & अपनी कमर
हिलाके उसके मुँह को चोदने लगा.देविका ने भी सहारे के लिए उसकी मज़बूत
गंद को थाम लिया & उसके धक्के सहने लगी.
उसकी जीभ बदस्तूर शिवा के लंड पे चल रही थी & ऐसा करते हुए जब उसने उसकी
गंद की छेद मे अपनी 1 उंगली घुआस दी तो शिवा कराह उठा,"..आहह...",उसने
फ़ौरन लंड को अपनी प्रेमिका के मुँह से बाहर खींचा & उसकी चूचियो को दबा
उसे पीछे धकेला,देविका बिस्तर पे गिर पड़ी.
शिवा की शॉर्ट्स उसकी गंद के नीचे उसकी जाँघो को गिर्द फँसी पड़ी थी.उसने
पीछे मूड के खिड़की से बाहर 1 नज़र कुच्छ काग़ज़ात देखते अपने बॉस पे
डाली & फिर शॉर्ट्स से अपनी खंभे जैसी टाँगे निकालने लगा.देविका ने भी
लेटे-2 अपनी गंद को उपर उठाया & 1 ही झटके मे अपनी पॅंटी को अपने जिस्म
से जुदा कर दिया.
शिवा ने शॉर्ट्स निकाल के जब देविका की ओर देखा तो पाया की अपने घुटने
मोड & अपनी टाँगे फैलाए देविका बाए हाथ की उंगलियो से अपने चूत के दाने
को सहला रही है & दाए से अपनी मोटी चूचियो को दबा रही है.शिवा ने उसके
घुटनो के नीचे हाथ लगाके टाँगो को और फैलाया & उसके उपर लेटते हुए अपना
लंड उसकी चूत मे घुसाने लगा,"..ऊओवव्व....!"
उसके उपर लेटते ही देविका ने उसे अपनी बाहो & टाँगो मे क़ैद कर लिया &
ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.शिवा बस उसे चूमते हुए धक्के लगाए जा रहा
था,"..हाअ...आनन्न...शी...वाअ....और...ज़ो..र्ररर....से....ऊऊव्व्व......",देविका
ने अपने नाख़ून शिवा की गंद मे धंसा दिए तो उसके धक्के और तेज़ हो
गये.उसने अपने हाथ देविका के कंधो के नीचे लगा रखे थे मानो उसे अपने से
ऐसे सटा लेना चाहता हो की हवा भी उनके बीच ना रहे.कमरे मे उसके मोटे लंड
की देविका की गीली चूत की चुदाई से हो रही फ़च-2 की नशीली आवाज़ गूँज रही
थी.
"ओह्ह..देवी..का...आआहह...",देविका ने फिर से उसकी गंद के छेद मे उंगली
घुसा दी थी.शिवा ने बेचैन होके धक्के और तेज़ कर दिया & सर थोड़ा नीचे कर
देविका के दाए निपल को दाँत से काट लिया,"..अयेयीयियी...जुंग...ली
कहीं....के......ऑश...माआन्न्न्न...!",शिवा ने उसके हाथो को अपनी गंद से
हटा अपने गर्दन के गिर्द लगाया & फिर अपने घुटने बिस्तर पे जमा खुद से
चिपटि देविका की गंद की फांको को थाम उसे उठा लिया था & अब फर्श पे खड़ा
था.उसने खड़े हुए ही देविका को हवा मे झुलाते हुए कुच्छ धक्के लगाए फिर
उसे घुमा के उसी खिड़की की चौड़ी सिल पे बिठा दिया जिस से नीचे लॉन नज़र
आता था.
देविका पकड़े जाने के डर से च्चटपताई मगर शिवा ने उसे मज़बूती से थाम
उसके होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे लिया & बहुत तेज़ी से उसे चोदने
लगा.इस तरह से चुदने मे देविका की चूत का दाना लगातार शिवा के लंड से
रगड़ रहा था & उसकी खुमारी हर पल बढ़ती जा रही थी.अगर उस वक़्त सुरेन जी
अपनी गर्दन घुमा लेते तो अपनी बीवी की जिस गंद पे वो फिदा थे उसे अपने
मुलाज़िम के हाथो मे भींचा देख लेते मगर खुदा दोनो प्रेमियो पे मेहेर बान
था & सुरेन जी मॅनेजर की पोस्ट के लिए आई अर्ज़िया पढ़ने मे मगन थे.
देविका को बहुत मज़ा आ रहा था,शिवा हर बार इस तरह की कोई बहुत ही
बेवकुफ़ाना मगर उतनी ही रोमांचक हरकत कर उसे बिल्कुल मदहोश कर देता
था.उसने अपने होंठ उसके होंठो से अलग किया & अपनी टाँगो को उसकी गंद पे
ऐसे कस लिया की दोनो आएडिया 1 दूसरे को क्रॉस कर रही थी.उसने अपना सर
उसके बाए कंधे पे टीकाया & उसके कान मे अपनी जीभ फिराने लगी,"...बस
झ..आड़ने..ही..वाली...हू..मे..री..जेया....न्न्णणन्..आई..से...ही...चोद...ते..रहो...उउम्म्म्मम.....!",वो
फुसफुसाई.
शिवा लगातार अपने मालिक को देख रहा था,वो देविका को बेइंतहा चाहता था मगर
इस वक़्त उसे उसके पति को देखते हुए उसे चोदने मे कुच्छ और ही मज़ा आ रहा
था.उसने उसकी गंद को और ज़ोर से दबाया & इतने क़ातिल धक्के लगाए की
देविका का पानी निकल गया & वो उसकी पीठ पे अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ती
& उसके बाए कंधे पे अपने दन्तो से काटती झाड़ गयी.शिवा का बदन भी झटके खा
रहा था & उसका गढ़ा पानी देविका की चूत मे भर रहा था.
कुच्छ देर बाद उसने देविका को खिड़की से उठाया & फिर बिस्तर पे उसे
लिए-दिए लेट गया,"..तुम बिल्कुल पागल हो,शिवा.",देविका उसके चेहरे पे
प्यार भरे किस छ्चोड़ रही थी.
"तुम्ही ने बनाया है जानेमन.",शिवा ने उसके गुलाबी होंठ चूम लिए.
"अच्छा अब जाओ,8 बज गये.",शिवा अपना लंड उसकी चूत से खींचते हुए उठा &
अपने शॉर्ट्स पहन वाहा से निकल गया.देविका वैसे ही पड़ी रही.शिवा से
चुदने से वो पूरी तरह से सुकून से भर जाती थी,इस वक़्त भी उसके चेहरे पे
सुकून भरी मुस्कान थी.उसने इंटरकम उठाया,"रजनी?"
"गुड मॉर्निंग,मॅ'म."
"मॉर्निंग,रजनी.आज नाश्ते मे पराठे बना लो आलू-गोभी की सब्ज़ी के साथ."
"ओके,मॅ'म.आपकी चाइ ले आऊँ?"
"15 मिनिट बाद ले आना.ओके....& सुनो,रजनी...साहब के पराठे घी मे नही
बनाना उनके लिए जो खास कुकिंग आयिल आता है उसी मे बनाना."
"डॉन'ट वरी,मॅ'म."