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Erotica नेहा और उसका शैतान दिमाग

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समर नीचे बैठा सोचता ही जा रहा था। लण्ड को हाथ में लिए, दिमाग चला रहा था। एक घंटा बीत गया उसको वहां बैठे बैठे। तभी उसको नेहा की कही हुई एक बात याद आई- “अगर तू मेरी बात मानेगा, तो तुझे अपने बदन का कोना-कोना खोलकर दिखाऊँगी...” उसकी बहन के ये शब्द उसके दिमाग में घूम रहे थे। बस... अब वो बेचैन हो गया। अब जो भी हो मैं ये करके रहँगा। ये मौका हाथ से जाने नहीं दूंगा। ये सोचकर समर उठा और धीरे धीरे नेहा के कमरे की तरफ बढ़ने लगा।

नेहा भी अपने कमरे में बेचैन हो रही थी। उसको अब अपने प्लान पे डाउट हो रहा था। वो थोड़ा चिंतित होना शुरू ही हुई थी की उसके दरवाजे पर दस्तक हुई।

“दीदी...” समर की आवाज आई।

नेहा तो खुशी से झूम उठी। जो वो चाहती थी वो हो गया था, कहा- “दरवाजा खुला है समर। अंदर आ जा.." नेहा ने शंति से कहा। वो अपने कमरे में कैजुवली लेट गई।

समर ने आराम से दरवाजा खोला और अंदर आया। उसका दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था।

नेहा- “हाँ... समर बोल क्या काम है?" नेहा ने पूछा।

समर- “वो वो दीदी मुझे आपसे कुछ ब-बात करनी थी..” उसने कहा।

“क्या?" नेहा को पता था की वो क्या बात करना चाहता है फिर भी उसने पूछा।

समर का दिल बिजली की स्पीड से धड़क रहा था। वो तो सुन्न सा हो गया। उसकी समझ नहीं आया की क्या बोले?

नेहा- “बोल क्या बात करनी है तुझे?" नेहा ने थोड़ा जोर से कहा।

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
समर का दिल बिजली की स्पीड से धड़क रहा था। वो तो सुन्न सा हो गया। उसकी समझ नहीं आया की क्या बोले?

नेहा- “बोल क्या बात करनी है तुझे?" नेहा ने थोड़ा जोर से कहा।

समर ने सोचा, अभी नहीं तो कभी नहीं, कहा- “आपने सुबह कहा था ना की मुझे शायद उस दिन जो हुआ था वो पसंद नहीं आया.." समर ने हिम्मत बाँध कर कहा।

नेहा- “हाँ... तो?" नेहा बोली।

समर- “तो वो गलत है..."

नेहा की आँखों में चमक आ गई।

समर- “दीदी, असल में सच्चाई तो ये है की मुझे उस दिन... ..."

नेहा- “तुझे उस दिन क्या समर?"

समर- “मुझे उस दिन बहुत अच्छा लगा था.." समर ने आँख बंद करके बोल ही दिया- “आज तक उस दिन जितना अच्छा कभी नहीं लगा..”

नेहा का शैतान मन मुश्कुरा रहा था- “तो तू क्या चाहता है समर, बोल?" नेहा बोली।

समर- “दीदी... मैं... मैं वो ही चाहता हूँ, जो उस दिन हुआ..” समर ने कहा।

नेहा- “आर यू श्योर... मैंने तुझे कहा था की हम इस बात को भूल सकते हैं..” नेहा ने पूछा।

समर- “हाँ... दीदी। इतना श्योर आज तक और किसी बात को लेकर नहीं हुआ..” उसने कहा। समर बस जो मन में आया वो बोले जा रहा था।

नेहा- “हम्म... ठीक है...” नेहा बोली- “तो चल अपना लण्ड बाहर निकाल..."

“क्या?” समर ने चौंक कर पूछा।

नेहा- “अपना लण्ड बाहर निकाल। तूने ही कहा ना की तू वो सब चाहता है... मैं भी चाहती हूँ वोई... तो निकाल अपना लण्ड बाहर.." नेहा ने बेड पे आराम से फैलते हुए कहा।

समर ने अपना पाजामा नीचे किया। वो अभी भी हिचक रहा था।

नेहा- “देख समर... तुझे मेरी बात माननी तो पड़ेगी। मेरी बात मानेगा तो शायद मैं भी तुझे मजे दूं?" नेहा ने अपने छोटे भाई को टीज करते हुए कहा।

ये बात सुनकर समर उत्तेजित हो उठा। उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं था। मगर पाने के लिए बहुत कुछ था। उसने पाजमा पूरा नीचे कर दिया। अब उसका लण्ड बस अंडरवेर में था और वहां टेंट बनाया हुआ था।

नेहा- “हम्म... लगता है छोटा भाई बहुत उत्तेजित है.." नेहा ने टेंट को देखते हुए कहा- “चल भाई कर दे इसे आजाद अब... देखने दे मुझे इसको..."

समर ने अपनी दीदी की ओर देखा। उसकी आँखें समर के लण्ड की तरफ ही टिकी हई थी। उसने हिम्मत करके अपने कच्छे में हाथ डाला, और एक झटके में उसे नीचे कर दिया।

नेहा की चूत में हलचल होने लगी। उसके मुँह में पानी आने लगा। आँखें बड़ी हो गई। उसके भाई का तना हुआ लण्ड आज फिर से उसकी आँखों के सामने था।

नेहा- “वाउ... समर.” नेहा ने खुले हुए मुँह से कहा- “थोड़ा पास आ ना.."

समर अपनी जगह से चलकर अपनी बहन के करीब खड़ा हो गया। वो अपनी दीदी के सामने एकदम एक्सपोज्ड था और उसे ये करने में मजा आने लगा था।

नेहा- “तेरा लण्ड सच में बहुत सुंदर है..." नेहा की चूत गीली होना शुरू हो गई थी। लण्ड को अपने सामने देखकर वो खुद पे काबू नहीं कर पा रही थी- “कैन आई टच इट.... उस दिन की तरह..” नेहा ने पूछा।

समर तो ये ही चाहता था की दीदी उसका लण्ड अपने हाथों में ले। उसने झट से मुंडी हिला दी। बस... झटके से नेहा ने अपने भाई का लण्ड पकड़ लिया। उसने लण्ड को जकड़ लिया। वो उससे खेलने लगी, ऊपर-नीचे करती, आगे-पीछे करती।

 
नेहा- “तेरा लण्ड सच में बहुत सुंदर है..." नेहा की चूत गीली होना शुरू हो गई थी। लण्ड को अपने सामने देखकर वो खुद पे काबू नहीं कर पा रही थी- “कैन आई टच इट.... उस दिन की तरह..” नेहा ने पूछा।

समर तो ये ही चाहता था की दीदी उसका लण्ड अपने हाथों में ले। उसने झट से मुंडी हिला दी। बस... झटके से नेहा ने अपने भाई का लण्ड पकड़ लिया। उसने लण्ड को जकड़ लिया। वो उससे खेलने लगी, ऊपर-नीचे करती, आगे-पीछे करती।

समर- “अयाया एम्म्म दीदी...” समर को भी मजे आने लगे।

नेहा- “समर, तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?" नेहा ने उसका लण्ड सहलाते हुए पूछा।

समर एकदम से आए सवाल से थोड़ा हिल गया- “नहीं दीदी..” उसने जवाब दिया।

नेहा- “हाँ.. सच्ची... पहले भी कभी नहीं थी?” नेहा ने पूछा।

समर- “नहीं दीदी...” समर बोला।

नेहा- “ओह्ह... मतलब मैं पहली लड़की हूँ जिसने तेरा लण्ड पकड़ा है.." नेहा ने एक मर मिटने वाली मुश्कान देते हुए कहा।

समर- “हाँ... हाँ दीदी...” वो जवाब तो दे रहा था मगर उसका सारा ध्यान अपनी दीदी के हाथों में उसके लण्ड पे हो रही हलचल पे था।

“हम्म..” नेहा ने दायें हाथ से लण्ड को जकड़ा और बायें हाथ से पहली बार समर के टट्टों को छुआ- “वाउ आई लोव युवर बाल्स...” वो अब उसके टट्टों को धीरे-धीरे दबाने लगी। दोनों को ही बहुत मजा आ रहा था।

नेहा- “मजा आ रहा है ना भाई?" नेहा ने पूछा।

समर तो मजे के बादलों पर सवार था- “बहुत दीदी, बहुत मजा आ रहा है...” उसने अपनी आँखें बंद करके कहा।

नेहा उसका जवाब सुनकर खुश हुई- “मुझे भी बहुत मजा आ रहा है समर, तेरे लण्ड से खेलने में। इतना मजा की अब मुझे खुद से खेलने का मन कर रहा है...” नेहा बोली।

समर ने ये सुनकर अपनी आँखें खोली, और जो उसने देखा, वो एक बहुत ही ज्यादा कामुक दृश्य था।

 
समर ने ये सुनकर अपनी आँखें खोली, और जो उसने देखा, वो एक बहुत ही ज्यादा कामुक दृश्य था।

नेहा ने उसका लण्ड छोड़ दिया और अपने दोनों हाथों से वो अपने चूचे दबाने लगी। वो अपने टाप के ऊपर से ही अपने बड़े-बड़े मम्मों को मसलने लगी। समर ने कभी सपने में भी ऐसा नजारा नहीं देख था। उसकी दीदी के बड़े-बड़े मम्मे हाथों में भी नहीं आ रहे थे। नेहा अपने खूबसूरत चेहरे पे एक शरारती मुश्कान लिए अपनी चूचियों को दबाये जा रही थी वो।

समर का हाथ खुद ही अपने लण्ड पर चला गया और वो तेजी से मूठ मारने लगा।

नेहा ने ये देखकर कहा- “हम्म... ले ले समर मजे। देख तेरी दीदी तेरे सामने अपने चूचे मसल रही है। और अगर तू अच्छा बच्चा बनकर रहा तो जल्द ही तू मेरे चूचे मसल रहा होगा..”

ये बात सुनकर समर और पागल हो गया।

नेहा ने एकदम से अपने चूचे दबाना छोड़ दिया। वो उठी और समर के सामने आकर खड़ी हो गई- “मैं भी कितनी पागल हूँ। तेरा लण्ड पकड़ लिया मगर जो सबसे बेसिक चीज होती है वो तो करी ही नहीं..” उसने कहा।

समर को कुछ समझ में नहीं आया।

नेहा- “तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं रही ना? तो आज मैं तुझे सिखाऊँगी की गर्लफ्रेंड के साथ पहला स्टेप क्या होता

समर अब भी कुछ समझ नहीं पा रहा था।

नेहा- “ये रहा तेरा पहला इनाम..” नेहा बोली। उसने समर के चेहरे को पकड़ा और उसके होंठों से अपने होंठों को मिला दिया। नेहा ने अपने होंठों को समर के होंठों पर रखा।

समर ने ये उम्मीद नहीं किया था। उसके शरीर में मानो एक बिजली की लहर दौड़ गई। उसने ऐसा अनुभव, ऐसी इंटिमेसी, ऐसी सिचुयेशन का कभी सामना नहीं किया था। उससे पता तक नहीं था की क्या करे? समर को ऐसी बेचैनी, ऐसा अजीब आनंद आ रहा था जैसा शायद उसने सोचा भी ना हो।

नेहा ने उसके होंठों को चूमा। उसकी चूत में भी एक झटका लगा। उसने आज तक चूमा तो बहुत लड़कों को था। पर ये लड़का उसका भाई था, जिसके साथ वो बचपन से खेलते कूदते आई है। आज उसी भाई को नेहा होंठों पर एक प्रेमिका की तरह चूम रही थी, जबकी उसने लण्ड बाहर निकाल रखा था। नेहा थोड़ा पीछे हुई। दोनों भाई बहन की धड़कनें तेजी से दौड़ रही थी।

नेहा- “ये तो थी एक नार्मल किस..” नेहा ने कहा और- “इसके बाद ये आता है...” नेहा बोली और फिर से दोनों के होंठ मिल गये। मगर इस बार नेहा ने समर के ऊपरी होंठ को अपने होंठों के बीच में लिया और उन्हें जोर-जोर से चूसने लगी।

समर को फिर से 1200 वोल्ट का झटका लगा। वाह... क्या मोमेंट था। नेहा समर के होंठ को ऐसे चूस रही थी जैसे एक बच्चा निपल को चूसता है। दोनों उत्तेजना की हद पे थे।

तभी नेहा एकदम से रुकी और बोली- “मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक बुत को किस कर रही हूँ। कम ओन समर... किस कर मुझे, चूस मेरे होंठों को, जैसे मैं कर रही हूँ.." नेहा ने फिर से अपने होंठों को अपने भाई के होंठों पर रख दिया। उसने आँखों से समर को इशारा किया।

समर के दिल में तूफान उठ रहा था। हाथ पैर काँप रहे थे, और होंठ भी। इन्हीं काँपते हए होंठों से उसने पहली बार अपनी बहन के होंठों को पकड़ा। दिल भर आया उसका आनंद से।

"एम्म्म..” नेहा ने मोन किया।

 
समर के दिल में तूफान उठ रहा था। हाथ पैर काँप रहे थे, और होंठ भी। इन्हीं काँपते हए होंठों से उसने पहली बार अपनी बहन के होंठों को पकड़ा। दिल भर आया उसका आनंद से।

"एम्म्म..” नेहा ने मोन किया।

समर ने फिर से नेहा के होंठ को जकड़ा अपने होंठों में, इस बार थोड़ा जोर से। नेहा भी साथ-साथ समर के निचले होंठ को चूसने लगी। समर ने भी ये देखा और वो भी अब नेहा के ऊपरी होंठ को चूसने लगा। समर को अंदाजा भी नहीं था की नेहा के होंठ इतने कोमल होंगे। उसे ऐसा लग रहा था जैसे फूल की पंखुड़ियों को होंठ के बीच रख दिया हो। उसके होंठों का स्वाद रसीला था। उसके लिप ग्लास का हल्का सा टेस्ट भी समर के मुँह में आ रहा था। समर का लण्ड पत्थर से भी कठोर हो गया था। उसका जर्रा जर्रा मस्त होकर कांप रहा था।

नेहा- “ऐसे ही भाई, ऐसे ही चूस मेरे होंठ, अब नीचे वाले को चूस...” नेहा रुक के बोली। उसका भी समर जैसा ही हाल था। चूत में से रस बह रहा था, चूचे तन गये थे।

समर ने अब उसका निचला होंठ अपने होंठों में लिया और उसको एक प्यासे बेबी की तरह चूसने लगा। भाई बहन प्यार में पड़े एक कपल की तरह स्लो रोमांटिक किस कर रहे थे। वो कम से कम 5 मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे के होंठों चूसते रहे। समर तो इस पल में खो ही गया था। ‘

तभी नेहा ने किस तोड़ दी, और कहा- “चलो, एक रोमांटिक किस कैसी होती है, ये तो तू सीख गया.." नेहा ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा- “अब तुझे बताती हूँ की एक पैशनेट लस्टी किस कैसे करते हैं?"

समर को तो अपनी किश्मत पे विश्वास ही नहीं हो रहा था

नेहा ने एक नजर अपने भाई के लण्ड पे डाली तो वो थोड़ी हैरान हो गई। वो सच में कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा था और तड़प रहा था। मगर अब तो नेहा उसे और तड़पाने वाली थी। नेहा ने समर को अपनी ओर खींचा “पकलो मुझे...” उसने कहा।

समर- “क्या दीदी... कैसे?” समर कनफ्यूज्ड और नर्वस था।

नेहा ने उसके हाथ पकड़े और उसकी बांहों को अपनी पीठ पर रख दिया। ऐसा करने से नेहा उससे एकदम चिपक गई- “ऐसे पकड़ मुझे। कस के." नेहा ने कहा और उसने खुद समर को जकड़ लिया। ऐसा करने से दोनों के शरीर एकदम चिपक गये। भाई बहन दोनों के बदन को एक अद्भुत एहसास हुआ। नेहा के बड़े-बड़े चूचे सीधा समर की छाती पे दब रहे थे।

समर के मुँह से “ऊवू.." की परम आनंद पुकार निकली। उसके शरीर को पहली बार एक लड़की के चूचों का स्पर्श मिला था। इतने प्यारे चूचे, इतने सुंदर चूचे, इतने कोमल चूचे, उसकी अपनी बहन के चूचे। उसके लण्ड से प्री कम पानी की तरह बह रहा था।

नेहा को भी एहसास था की उसके मम्मे सीधा समर के सीने पे लगे हुए है, और उसको ये करने में बड़ा मजा आ रहा था। पता नहीं समर को ये पता लग रहा था या नहीं? मगर नेहा के निपल भी पत्थर जैसे सख्त हो गये थे। इसका एक और कारण था। समर को शायद पता नहीं चल रहा था की उसका लण्ड कहां लगा हुआ है, मगर नेहा को पूरा एहसास था की उसका लण्ड सीधा उसकी चूत के ठीक ऊपर छू रहा था।

नेहा ने नीचे एक पाजामा और पैंटी पहनी हुई थी मगर समर का लण्ड इतना हार्ड था की नेहा को लग रहा था जैसे वो सीधा उसकी चूत को छू रहा है। आज तक उसके खद के अलावा किसी और ने उसकी चत को टच नहीं किया था, मगर आज उसका अपना भाई उसकी चूत छू रहा था। वो भी अपने लण्ड से। नेहा की फुद्दी गरम हो रही थी, गीली हो रही थी। साथ-साथ समर के लण्ड से निकाल रहा रस भी सीधा उसके पाजामे पे गिर रहा था।

अंजाने में बहन की चूत और भाई के लण्ड के रसों का हल्का सा मिलन हो रहा था। नेहा ने अब होंठों का मिलन कर दिया। मगर इस बार उसने अपना मुँह खोला और अपनी जीभ को समर के मुँह में घुसा दिया, और दोनों के मुँह के रसों का भी मिलन होने लगा।

 
अंजाने में बहन की चूत और भाई के लण्ड के रसों का हल्का सा मिलन हो रहा था। नेहा ने अब होंठों का मिलन कर दिया। मगर इस बार उसने अपना मुँह खोला और अपनी जीभ को समर के मुँह में घुसा दिया, और दोनों के मुँह के रसों का भी मिलन होने लगा।

बहन की जीभ भाई की जीभ से मिली। जैसे ही ये मिलन हुआ, समर हैरान रह गया। उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था की नेहा ऐसा कुछ करेगी। ना उससे पता था की क्या होता है? कैसे होता है? मगर अपनी बहन का स्वाद पाकर तो वो मस्त हो गया। उसने ठान लिया की बिना कुछ सोचे, वो बस इस पल का मजा लेगा। उत्तेजना के शिखर पर बैठा था वो, और मन ही मन अपनी बहन को धन्यवाद दे रहा था।

नेहा खुद सोच में थी। उसके मन में भी हिचकिचाहट थी, डर था, संकोच था, और आभास था की जो वो कर रही है. उससे उन भ बहन का रिश्ता हमेशा के लिए बर्बाद हो सकता था। मगर उसके मन का ये डर, उसकी चूत में लगी आग के सामने छोटा पड़ रहा था। और उससे तो मजा भी आ रहा था।

समर के मुँह के अंदर, नेहा की जीभ घूम रही थी, वो समर के रसों को चख रही थी और समर उसके। समर के तो रोम-रोम में खून का दीरा तेज हो गया था। उसने कभी किसी लड़की को छुआ तक नहीं था। और आज वो अपनी खुद की बहन की जीभ को चख रहा था। ऐसा आनंद, ऐसा खुमार तो सपनों में भी कभी नहीं आया था।

नेहा ने धीरे-धीरे अपनी जीभ से समर की जीभ को चाटना शुरू किया। उनकी जीभे चिपक गई एक दूजे से। ठीक उसी तरह उन दोनों के शरीर चिपके हुए थे। बहन के चूचे भाई की छाती पर दबे हुए थे। और भाई का एकदम तना हुआ नंगा लण्ड बहन की चूत पर दस्तक दे रहा था। दोनों ही एकदम से नशे में डूबे हुए थे। 5 मिनट तक वो ऐसे ही एक दूजे को धीरे-धीरे चूमते रहे। समर ने भी अब अपनी जीभ चलाना सीख लिया। वो भी अब नेहा की टांग को चाटने लगा।

"एम्म... स्लप... एम्म्म... अयाया..." हवस से भरी ये आवाजें निकल रही थी दोनों के मुँह से। साथ में उनके रसों के आपस में मिलने की भी आवाजें आ रही थीं- “एम्म्म... अयाया... एम्म्म..."

धीरे-धीरे उनकी किस की तीव्रता बढ़ने लगी। दोनों की जीभै जो अभी तक आपस में आराम से प्यार कर रही थी। अब वो थोड़ा तेजी से आपस में खेलने लगी, और कुछ ही देर में ये खेलना, लड़ने जैसा लगने लगा। वो इतनी बेचैनी से चूमने लगे मानो अपनी जीभों से लड़ रहे हो। रसों का आदान प्रदान हो रहा था। एक दूसरे के मँह के कोने-कोने को चूम रहे थे दोनों।

उन दोनों की एक दूसरे पे पकड़ और मजबूत हो गई। उन्होंने एक दूसरे को अपने पे और चिपका लिया। भाई बहन अब एक बहुत सालों बाद मिले प्रेमी की भाँति पैशनेट स्मूच कर रहे। ऐसा लग रहा था मानो, जंगली जानवर हों। वो एक दूसरे को खा रहे थे। दोनों की सांसें फूल रही थी मगर कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। 10 मिनट तक उन दोनों का ये मुँह को खाना चलता रहा।

 
उन दोनों की एक दूसरे पे पकड़ और मजबूत हो गई। उन्होंने एक दूसरे को अपने पे और चिपका लिया। भाई बहन अब एक बहुत सालों बाद मिले प्रेमी की भाँति पैशनेट स्मूच कर रहे। ऐसा लग रहा था मानो, जंगली जानवर हों। वो एक दूसरे को खा रहे थे। दोनों की सांसें फूल रही थी मगर कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। 10 मिनट तक उन दोनों का ये मुँह को खाना चलता रहा।

फिर नेहा ने खुद को कंट्रोल करते हुए खुद को थोड़ा पीछे किया। चुंबन तोड़ते वक़्त उसने समर के होंठ को धीरे से काटा। समर को पहली बार इतने प्यारे दर्द का एहसास हआ। ये करके नेहा पीछे हो गई। समर को ऐसा लगा जैसा एक बच्चे को उसका खिलौना छीनते वक्त लगता है।

नेहा- “वाउ समर.." नेहा बोली, उसकी आँखें बंद थी और वो धीरे-धीरे अपने होंठों को चाट रही थी- “तू तो एक्सपर्ट बन गया.." नेहा ने बहत लड़कों को किस किया था। मगर आज के बराबर मजा उससे कभी नहीं आया था। शायद ये अपने भाई के साथ ऐसा काम करने की उत्तेजना की वजह से था।

समर तो खुद एक हसीन दुनियां में खोया हुआ था। किसी को चूमने में इतना मजा आता है... वो तो अभी भी शाक और सेक्स के प्रभाव में था। इतना तड़प रहा था वो और उसका लण्ड की उसका मन किया की नेहा को पकड़े और फिर से चूमने लगे। मगर वो ऐसा नहीं कर सकता था। क्योंकी उससे पता था की जो होगा वो नेहा की मरजी से ही होगा।

नेहा ने अपनी परियों जैसी आँखें खोली। वो मुश्कुरा रही थी- “बहुत मजा आया मुझे समर.” ये बोलकर वो आगे बढ़ी और उसने समर का लण्ड पकड़ लिया, और पूछा- “तुझे मजा आया समर?"

समर- “हम्म्म्म ब-बहत..” उसके मुँह से यही निकला। बहन के हाथ में आकर उसका लण्ड अब डिस्चार्ज करने को तैयार हो गया था।

नेहा- “अच्छे से सीख लिया ना जीभ से कैसे खेलते हैं?” नेहा ने उसका लण्ड सहलाते हुए कहा। नेहा की चूत ठरक से पनिया रही थी।

समर- “हाँ... हाँ दीदी...” समर आँखें बंद करे अपने होने वाले झड़ने का इंतेजार कर रहा था। उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था।

नेहा- “गुड समर.” नेहा बोली- “अच्छे से सीख ले, शायद कुछ टाइम बाद तुझे अपना टैलेंट मेरे नीचे वाले होंठों पे दिखाना पड़े..."

समर ने सोचना शुरू किया ही था की नेहा बोली- “मेरी चूत पे..." और बस, समर के लण्ड ने अपना क्रीम निकालना शुरू कर दिया।

समर ने अपने टट्टे खाली कर दिए थे, और उसका सारा वीर्य जाकर नेहा की शार्टस पे गिर गया। ठीक जहां उसकी चूत थी। समर ने जैसी ही अपनी बहन की वो बात सुनी। वो काबू नहीं कर पाया खुद पे और अपने लण्ड पे। उसकी बहन ने उसे अपनी चूत पर स्मूच करने को कहा था। झड़ने के बाद भी उसके दिमाग में सेक्स चढ़ा हआ था। उसने नेहा की ओर देख, और जो उसे दिखा उसने उसके होश उड़ा दिए।

 
समर ने अपने टट्टे खाली कर दिए थे, और उसका सारा वीर्य जाकर नेहा की शार्टस पे गिर गया। ठीक जहां उसकी चूत थी। समर ने जैसी ही अपनी बहन की वो बात सुनी। वो काबू नहीं कर पाया खुद पे और अपने लण्ड पे। उसकी बहन ने उसे अपनी चूत पर स्मूच करने को कहा था। झड़ने के बाद भी उसके दिमाग में सेक्स चढ़ा हआ था। उसने नेहा की ओर देख, और जो उसे दिखा उसने उसके होश उड़ा दिए।

नेहा बेड पे बैठ गई थी। उसने अपनी टाँगें फैला रखी थी। उसकी शार्टस पे चूत वाली जगह पर समर का वीर्य था और नेहा उसे अपनी चूत पर धीरे-धीरे मल रही थी। उसकी शार्टस जो पहले ही उसके खुद के रसों से गीली पड़ी थी, उनपर अब वो खुद अपने भाई के लण्ड का क्रीम मल रही थी, और अपनी चूत को मजे दे रही थी। समर आँखें फाड-फाडकर नेहा को देख रहा था। उसकी बहन की गोरी नंगी टांगों के बीच में छोटी सी शार्टस थी. जिस पर से नेहा अपनी चूत मल रही थी।

नेहा ने सीधा समर की आँखों में देखा- “क्यों भाई, अच्छा लग रहा है सीन?" नेहा बोली।

समर ने नेहा की तरफ देखा, अपना सिर हाँ में हिलाया और फिर उसके हाथों को उसकी चूत पर घूमता देखने लगा।

नेहा ने हाथ हिलाना रोका। समर ने ऊपर नेहा की आँखों में देखा की आखीरकार उसने अपनी चूत से खेलना क्यों रोका? उन दोनों की आँखें एक दूसरे से मिली। समर को देखते-देखते उसने एक सेक्सी सी स्माइल दी और एक पल में अपनी वीर्य से सनी उंगलियों को अपने मुँह में घुसा दिया। जिसे देखकर समर का मुंह खुल गया। उसका लण्ड फिर झटके मारने लगा।

नेहा मस्ती से समर को कामुकता से घूरते हुए उसका वीर्य खा रही थी, कहा- “बहुत टेस्टी चीज है ये समर, आई लोव इट..." नेहा बोली। उसने अपनी शार्टस से थोड़ा और उठाया और उसे भी चाटने लगी- “मैं तो इसे पूरे दिन खा सकती हूँ..” कहकर उसने समर को आँख मारी।

समर मन में- “वाह... मेरी दीदी तो एकदम रांड की तरह बिहेव कर रही है, और मैं उनके पीछे पागल होता जा रहा है। कितनी सेक्सी है दीदी। क्या ये सब सच में हो रहा है?" समर अपनी आँखों और अपनी किश्मत पर विश्वास नहीं कर पा रहा था।

नेहा- “तुझे पता है ना समर... अब हम वापस नार्मल नहीं हो सकते..." नेहा ने वीर्य खाते हुए कहा- “हमने जो ये शुरू किया है, ये अब आगे ही बढ़ेगा..."

आगे बढ़ेगा सुनकर समर के मन में तो खुशी की लहर दौड़ गई। उसकी आँखों में जो चमक आ गई वो नेहा ने देख ली।

नेहा- “तू चाहता है की आगे बढ़े ये?" नेहा ने पूछा। उसका दिल भी तेज धड़क रहा था।

समर ने नेहा की तरफ देखा, उसके होंठों पे उसका वीर्य लगा हुआ था। क्या सीन था, कहा- “हाँ... हाँ दीदी..." समर ने जवाब दिया।

नेहा- “मैं भी यही चाहती हूँ..” नेहा बोली- “तुझे धीरे-धीरे बहुत मजे मिलेंगे समर। ऐसे मजे जो शायद आज तक किसी बहन ने अपने भाई को ना दिए हो.." नेहा की चूत तो आग से भी गरम थी, वो लंबी-लंबी सांसें भर रही

थी- “मगर ये सब तुझे आसानी से नहीं मिलेगा। तुझे वो सब करना होगा जो मैं कहूँगी..”

अपनी दीदी के मुँह से ये बातें सुनकर समर का दिल उछलने लगा, और उसका लण्ड भी। दीदी मुझे हर मजा देगी। ऐसे आफर को कोई कैसे ठकरा सकता ह? कहा- “मैं हर चीज करूंगा दीदी। जो भी आप बोलोगी। हर चीज..” उसने सपाट से बोला।

उसके इतने तेज रिप्लाई से नेहा भी हैरान हो गई। समर की आँखों में उसको एक गहरी प्यास नजर आ रही थी,

और वो प्यास और किसी के लिए नहीं बल्की अपनी बहन के लिए ही थी।

नेहा- “वेरी गड समर...” नेहा बोली, वो फिर से अपनी शार्ट पे लगे वीर्य को अपनी चूत पे रगड़ने लगी- “मैं यही सुनना चाहती थी। क्योंकी मेरे लिए तू पहला काम आज से ही करेगा, और अभी से ही... तैयार है?"
 
समर तो अपनी बहन की चूत पर फिर रहे उसके हाथ को ही देख रहा था। उसने बस हाँ में अपना सिर हिला दिया।

नेहा- “ओके... तो ले..." नेहा ने वीर्य से सने हए हाथ को उठाया, समर की आँखें भी उठी और नेहा बोली- “अपना वीर्य चख... अपना वीर्य चख समर...' नेहा ने समर की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा।

समर को टेन्शन हो गई। ये दीदी मुझे क्या करने को कह रही है? मैं अपना वीर्य चलूँ? नहीं... ये बहुत अजीब है। मैं ऐसा नहीं कर सकता। समर सोच रहा था।

नेहा- “क्या हुआ समर? आ ना, चूस मेरी उंगलियों पे लगा अपना वीर्य। बहुत स्वादिष्ट है ये..." नेहा ने कहा। उसको बहुत मजा आ रहा था।

समर- “दीदी... मगर... मैं ये कैसे?” समर को अंदाजा नहीं था की नेहा उससे कुछ ऐसा करने को बोलेगी।

नेहा- “दो दिन, तेरे सामने, मैं तेरा वीर्य खा चुकी हूँ, वो भी इतने मजे से। और तू मुझे ये बोल रहा है की तू ये नहीं कर सकता। क्यों, जो मैं कर सकती हूँ, वो तू नहीं कर सकता?" नेहा बोली।

समर- “नहीं दीदी। मैं वो... ..." वो बोलने लगा की नेहा ने उसकी बात काट दी।

नेहा- “क्या नहीं? पहली ही बात पे तूने मना कर दिया। मैं तेरा वीर्य खा सकती हैं। मगर तू अपना वीर्य नहीं खा सकता?" नेहा ने थोड़ा गुस्से वाले अंदाज में कहा। वो पूरे कंट्रोल में थी सिचुयेशन के।

समर ने भी सोचा की दीदी ठीक कह रही है। जब वो मेरा वीर्य खा सकती हैं तो मैं उनकी बात क्यों नहीं मान सकता? कहा- “मेरे कहने का वो मतलब नहीं था दीदी...” वो बोला।

नेहा- “जो भी हो। अगर तुझे आगे कुछ करना है तो तुझे ये वीर्य खाना पड़ेगा। मेरा नंगा शरीर देखना है, तो ये वीर्य खाना पड़ेगा। मेरे शरीर के साथ खेलना है, तो ये वीर्य खाना पड़ेगा। मेरी चत को... ..."

नेहा बोल ही रही थी की एकदम से समर ने उसकी उंगलियां अपने मुँह में घुसा दी। अपनी दीदी के मुँह से इतनी सेडक्टिव बातें सुनकर समर से कंट्रोल नहीं हुआ था।

नेहा ये देखकर खुश हो गई। उसका भाई अपना ही वीर्य चाट रहा था। नेहा समर की मालेकिन बन गई थी। उसको एक्सट्रीम पावर का एहसास हुआ। उसे एहसास हुआ की उसका शरीर एक ऐसा हथियार है, जिससे वो किसी पर भी काबू कर सकती है। उसका शैतान दिमाग जाग रहा था।
 

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