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समर नीचे बैठा सोचता ही जा रहा था। लण्ड को हाथ में लिए, दिमाग चला रहा था। एक घंटा बीत गया उसको वहां बैठे बैठे। तभी उसको नेहा की कही हुई एक बात याद आई- “अगर तू मेरी बात मानेगा, तो तुझे अपने बदन का कोना-कोना खोलकर दिखाऊँगी...” उसकी बहन के ये शब्द उसके दिमाग में घूम रहे थे। बस... अब वो बेचैन हो गया। अब जो भी हो मैं ये करके रहँगा। ये मौका हाथ से जाने नहीं दूंगा। ये सोचकर समर उठा और धीरे धीरे नेहा के कमरे की तरफ बढ़ने लगा।
नेहा भी अपने कमरे में बेचैन हो रही थी। उसको अब अपने प्लान पे डाउट हो रहा था। वो थोड़ा चिंतित होना शुरू ही हुई थी की उसके दरवाजे पर दस्तक हुई।
“दीदी...” समर की आवाज आई।
नेहा तो खुशी से झूम उठी। जो वो चाहती थी वो हो गया था, कहा- “दरवाजा खुला है समर। अंदर आ जा.." नेहा ने शंति से कहा। वो अपने कमरे में कैजुवली लेट गई।
समर ने आराम से दरवाजा खोला और अंदर आया। उसका दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था।
नेहा- “हाँ... समर बोल क्या काम है?" नेहा ने पूछा।
समर- “वो वो दीदी मुझे आपसे कुछ ब-बात करनी थी..” उसने कहा।
“क्या?" नेहा को पता था की वो क्या बात करना चाहता है फिर भी उसने पूछा।
समर का दिल बिजली की स्पीड से धड़क रहा था। वो तो सुन्न सा हो गया। उसकी समझ नहीं आया की क्या बोले?
नेहा- “बोल क्या बात करनी है तुझे?" नेहा ने थोड़ा जोर से कहा।
नेहा भी अपने कमरे में बेचैन हो रही थी। उसको अब अपने प्लान पे डाउट हो रहा था। वो थोड़ा चिंतित होना शुरू ही हुई थी की उसके दरवाजे पर दस्तक हुई।
“दीदी...” समर की आवाज आई।
नेहा तो खुशी से झूम उठी। जो वो चाहती थी वो हो गया था, कहा- “दरवाजा खुला है समर। अंदर आ जा.." नेहा ने शंति से कहा। वो अपने कमरे में कैजुवली लेट गई।
समर ने आराम से दरवाजा खोला और अंदर आया। उसका दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था।
नेहा- “हाँ... समर बोल क्या काम है?" नेहा ने पूछा।
समर- “वो वो दीदी मुझे आपसे कुछ ब-बात करनी थी..” उसने कहा।
“क्या?" नेहा को पता था की वो क्या बात करना चाहता है फिर भी उसने पूछा।
समर का दिल बिजली की स्पीड से धड़क रहा था। वो तो सुन्न सा हो गया। उसकी समझ नहीं आया की क्या बोले?
नेहा- “बोल क्या बात करनी है तुझे?" नेहा ने थोड़ा जोर से कहा।