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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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एक बार रात को रुकने के लिए पूजा हमारे घर आई हुई थी. सबके सोने के बाद वो मेरे कमरे मे आई. मैं और अर्चना बिस्तर पर बैठे बात कर रहे थे. आते ही पूजा ने अर्चना को बिस्तर पर लिटा कर उस पर सवार हो गयी और झुक कर अर्चना को किस करने लगी.

किस करने के बाद वो दोनो मेरी तरफ देखने लगे और स्माइल कर रहे थे. वो शायद मुझे बाहर भेजना चाह रहे थे. मैं नही गया और वही बैठा रहा.

पूजा ने अर्चना का नाइट गाउन निकाल दिया और उसको नंगा कर दिया. अर्चना को तो मैं नंगा देखता रहता हूँ तो मैं नही हिला. फिर वो लोग मुझे ही देख रहे थे की अब तो मैं बाहर जाऊ.

पूजा ने अपना टीशर्ट उपर करना शुरू किया और सिर से बाहर निकाल दिया. मुझे यह उम्मीद नही थी. मैने उसको डाट दिया.

अजय: “मुझे बाहर भेजना हैं तो सीधा बोल दो मैं चला जाता. मेरे सामने कपड़े तो मत खोलो”

मैं बिस्तर से खिसक कर कर नीचे उतरा और जाने लगा. पूजा मेरे पास आई और मुझे गले लगा कर सॉरी और थॅंक यू बोला. पूजा हाइट मे मुझसे 6 इंच छोटी हैं. मैने उसका चेहरा देखा पर मेरी नज़र ब्रा के उपर से दबे हुए नंगे बूब्स की झलक पर गयी.

मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन चेंज हो गये. पूजा ने नोट किया और हासणे लगी. पूजा फिर पलटी और मेरी तरफ पीठ करते हुए अपने ब्रा का हुक खोला और लेती हुई अर्चना के उपर लेट गयी.

मुझे पूजा की नंगी पीठ और साइड से थोड़े बूब्स दिखे. मुझे उनकी यह बेबाकी अच्छी नही लगी. मैं आएसा कुच्छ तो देखना नही चाहता था. मैने उनको चेताया.

अजय: “आगे से कभी मेरे सामने कपड़े खोल कर आपस मे मत करना. मैं चला जाो उसके बाद ही शुरू करना”

उन दोनो ने मेरी बात पर ध्यान नही दिया. पूजा अपनी चूत का हिस्सा अर्चना की चूत के हिस्से पर रगड़ रही थी जैसे वो चोद रही हो. मुझे लगा शायद यह लोग ऐसे ही मज़े लेते होंगे. अर्चना तो पूरी नंगी थी पर पूजा ने तो नीचे पाजामा पहन रखा था.

पूजा का एक हाथ नीचे आया और उसने अपने पाजामा की तरफ बढ़ाया. इसके पहले की पूजा नीचे से भी नंगी होती मैं कमरे के बाहर निकल गया.

अगले एपिसोड मे पढ़िए अजय के सामने एक दूसरी मुसीबत आनी बाकी थी.

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आगे की कहानी अजय की ज़ुबानी जारी हैं…

मेरी वाइफ अर्चना एक दोहरी ज़िंदगी जी रही थी. एक तरफ मेरे साथ चुदाई के मज़े लेती तो दूसरी तरफ हमारी छोटी बहन पूजा के साथ. थोड़ा समय ऐसे बीत गया.

कहते हैं मुसीबत कभी अकेले नही आती. मेरी ज़िंदगी मे अभी और मुसीबतें आने वाली थी. मगर उसके पहले एक खुशख़बरी भी थी.

जिस दिन मैने पूजा और अर्चना को आपस मे उस नंगी हालत मे पकड़ा था उसके बाद से ही अर्चना ही मुझ पर चढ़ कर चोदने लगी थी और मैने उसको चोदना बंद कर दिया था. मुझे उस से चुदवाने मे ज़्यादा मज़ा आता था.

अर्चना हर काम करती थी, मेरे साथ फोरप्ले कर मेरा लंड तैयार करने से लेकर, मेरे लंड को कॉंडम पहनाना, चुदाई करना, फिर चुदाई के बाद गंदे कॉंडम को फेकने तक का. मैं बस लेटा लेटा चुदाई का मज़ा लेता था.

उस घटना के कुच्छ दिनों बाद ही एक दिन हमेशा की तरह अर्चना मुझ पर चढ़ कर चोद रही थी. मुझे चोदते वक़्त उसकी एनर्जी मे कभी कमी नही दिखाई दी थी.

मेरे लंड पर बैठ कर अर्चना उपर नीचे होते हुए मुझे चोद रही थी और मैं उसके मम्मो को उच्छलते हुए देख रहा था.

मुझे वो हिलते डुलते मम्मे देखना हमेशा ही पसंद था इसलिए मैं खुद अर्चना को बोलता था की वो मेरे उपर पूरा लेट कर ना चोदे बल्कि बैठे बैठे चोदे .

मैं उन मम्मो के नज़ारो मे खोया हुआ था पर आज चुदाई थोड़ी अलग थी. मुझे हमेशा के मुक़ाबले आज कुच्छ ज़्यादा ही मज़ा आ रहा था.

शायद बाहर होती बारिश के रोमॅंटिक नज़ारो से मुझे ज़्यादा अच्छा महसूस हो रहा था. मेरे लंड मे आज झांझनाहट कुछ ज़्यादा ही थी.

मेरी सिसकिया भी इस वजह से कुच्छ ज़्यादा निकल रही थी. शायद उस दिन अर्चना ने भी कुच्छ ज़्यादा ज़ोर लगाया था. उसकी भी आँहे बहुत गहरी हो गयी थी.

पहले कभी झड़ते वक़्त इतनी खुशी नही हुई जितनी उस दिन हो रही थी. मेरे झड़ कर शांत होते ही अर्चना भी मेरे सीने पर अपने नंगे मम्मे रख कर लेट गयी.

मैं भी एक जबरदस्त चुदाई के बाद एकदम शांत था. मैने भी उसकी नंगी कमर और पीठ को दोनो हाथों से पकड़ कर उसकी तारीफ़ करनी शुरू की.

अजय: “आज तो जैसे कुच्छ जादू सा हो रहा था. बहुत जबरदस्त चुदाई की तुमने तो आज. आज बहुत खुश मूड मे लग रही हो! आज दिन मे पूजा आई थी….”

मैं बोलते बोलते रुक गया. मैं अपनी बहन को लेकर ऐसे जोक नही मारना चाहता था. अर्चना भी उठ कर बैठ गयी और ना मे गर्दन हिलाई.

मेरा लंड अभी भी अर्चना की गीली चूत मे था. अर्चना ने सावधानी से मेरा लंड बाहर निकाला और बिस्तर से उठ कर अपने कपड़े पहनने के लिए उठ गयी.

उसकी कसी हुई नंगी जांघे, गान्ड का पर्फेक्ट शेप, पतली कमर और उसके उपर बड़े से बूब्स. नंगी खड़े वो और भी आकर्षक दिखती हैं.

अजय: “आज सीधे कपड़े पहनने लगी, मेरे लंड का कॉंडम कौन निकालेगा?”

फिर मेरी नज़र मेरे लंड पर गयी तो मैं घबरा गया. मेरे लंड ने कॉंडम नही पहन रखा था. मैं लगभग चिल्ला कर उठ बैठा.

अजय: “अर्चना! तुम मुझे कॉंडम पहनाना भूल गयी हो!”

अर्चना ने एक नज़र मेरी तरफ देखा. फिर एक स्माइल दी और फिर अपने कपड़े पहनने मे बिज़ी हो गयी. मेरा दिमाग़ घूम गया की वो ऐसी ग़लती कैसे कर सकती हैं, वो तो हर काम मे पर्फेक्ट हैं.

मुझे चुदाई मे जो ज़्यादा मज़ा आ रहा था वो बिना प्रोटेक्षन चुदाई की वजह से था. अगले कुच्छ सेकेंड्स मे मुझे समझते देर नही लगी की अर्चना ने यह जानबूझकर किया हैं. फिर भी मैने कन्फर्म किया.

अजय: “तुमने जानबूझ किया ?”

अर्चना ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और हा मे गर्दन हिलाई. फिर थोड़ा शरमाने लगी. सुहागरात पर मेरे सामने पहली बार नंगे होते समय शरमाने के बाद आज अर्चना दूसरी बार मेरे सामने शरमाई थी.

अर्चना: “हमारी शादी को ढाई साल होने आए हैं. तुम्हारी मम्मी भी कहती रहती हैं बच्चा नही हुआ अभी तक. तो मैने सोचा हम पैदा कर लेते हैं. तुम खुश नही हो?”

अजय: “मैं खुश हूँ, मगर विनोद भैया और वंदना भाभी हमसे बड़े हैं. पहले उनके बच्चा हो जाता तो ठीक रहता”

अर्चना: “मैने पूछा था वंदना दीदी को, मगर उन लोगो का कोई प्रोग्राम लग नही रहा अभी. हम कब तक डर करेंगे!”

मुझे भी बच्चा चाहिए था तो मैं भी खुश ही था. अगले ही दिन पूजा भी आई थी. पूजा को यह बात अर्चना ने पहले ही बता रखी थी. जिस तरह मैं अर्चना का पार्ट्नर था उसी तरह अर्चना भी पूजा की सेक्स पार्ट्नर थी.

पूजा: “अगले कुच्छ दिन मैं आप दोनो के बीच नही आउन्गी, मैं चाहती हूँ की अर्चना दीदी कुच्छ दिन अजय भय्या से प्रेग्नेंट होने पर कॉन्सेंट्रेट करे”

अजय: “होना होता हैं तो एक बार मे ही हो जाता हैं. मैने तुम दोनो के रिश्ते पर आज तक एतराज नही किया हैं, अभी भी नही करूँगा”

अर्चना: “कुच्छ महीनो बाद मेरा पेट फूलने लगेगा तब मैं अजय के साथ पूरा कर नही पाउन्गी, तब मैं पूजा के साथ ही कर पाउन्गी”

अजय: “मुझे कोई ऑब्जेक्षन नही हैं. तुम दोनो खुश रहो. अभी भी करना हैं तो कर लो”

पूजा: “मुझे भी खुशी तो हो रही हैं. सेलेब्रेशन के नाम पर आज हो जाए अर्चना भाभी!”

वो दोनो मेरी तरफ देखने लगे. मैं कमरे से चुपचाप चला गया. 15 मिनिट के बाद दरवाजा खुला और पूजा ने मुझको अंदर लिया. बिस्तर पर अर्चना एक चादर सीने तक ढक कर लेटी थी. वो अंदर से नंगी थी.

पूजा: “अर्चना भाभी प्रेग्नेंट होगी तो मुझे भी एसा लगेगा जैसे उस बच्चे का बाप मैं ही हूँ. अब अजय भैया आप भी अपना कॉंट्रिब्यूशन दे दो”

यह कहते हुए पूजा दरवाजा बंद कर चली गयी. मैं चादर के अंदर घुसा और अपना हाथ अर्चना की चूत पर रगड़ा. अर्चना की चूत गीली थी. मेरे चेहरे पर एक सवाल था अर्चना समझ रही थी.

अर्चना: “पुच्छ लो, क्या पुच्छना हैं”

अजय: “पूजा के साथ करती हो तब भी तुम्हारी चूत गीली होती हैं?”

अर्चना: ”हा. मेरी ही नही पूजा की चूत भी गीली होती हैं, वरना मज़ा कैसे आएगा!”

अजय: “अंदर तो कुच्छ जाता नही हैं, फिर तुम्हे मज़ा कैसे आता हैं?”

अर्चना: “ओरल सेक्स का नाम नही सुना क्या! कुच्छ लोगो को उसमे ज़्यादा मज़ा आता हैं. मूह, ज़ुबान, उंगली, और शरीर को रगड़ कर सेक्स जितना ही मज़ा पाया जा सकता हैं. मज़ा आएगा तो फिर चूत से पानी भी निकलेगा”
 
अगले कुच्छ दिन तक मुझे वो स्पेशल वाली चुदाई का सुख प्राप्त हुआ जहा मुझे कॉंडम नही पहनना था. 3-4 बार मैने भी अर्चना पर चढ़ कर उसको चोदा था. वैसे भी मेरी काफ़ी तमन्ना थी की मैं अर्चना को बिना प्रोटेक्षन डॉगी स्टाइल मे चोदू और तब मेरी वो इक्षा भी पूरी हुई.

2 साप्ताह बाद ही अर्चना ने कहा की उसका पीरियड डेले हो गया हैं मतलब वो प्रेग्नेंट हो गयी होगी. कन्फर्मेशन के लिए थोड़े दिन और वेट करना था.

मगर इस तरह की खबर घर की औरतो मे जल्दी फेल जाती हैं. घर मे एक दबी हुई सी खुशी थी. मेरी मम्मी आगे बढ़कर मुझसे कुच्छ ज़्यादा ही प्यार से बात कर रही थी. मैं उनको दादी जो बनाने वाला था.

पूजा ने भी आकर मुझको और अर्चना को बधाई दी. अर्चना की छोटी बहन और मेरी साली श्रद्धा ज़रूर थोड़ा नाराज़ दिखी. वो तो मर्दो से सख़्त नफ़रत करती थी. वो भड़क रही थी.

श्रद्धा: “मा बनने की सारी मुसीबत औरत ही झेलती हैं, इन मर्दो के लिए तो सिर्फ़ एक मज़ा हैं”

अर्चना ने उसको समझाया की मा बनना तो एक रेस्पॉन्सिबिलिटी हैं और गर्व की बात हैं. मगर श्रद्धा कन्विन्स नही हुई. मैं खुद श्रद्धा को शक की नज़रो से देख रहा था की कही यह भी पूजा की तरह लेज़्बीयन तो नही हैं.

मुझे इस तरह घूरते हुए देख श्रद्धा ने पकड़ लिया. श्रद्धा के पिता रमाकांत जी के अलावा मैं ही इकलौता मर्द हूँ जिस से श्रद्धा ढंग से बात करती हैं और मुझसे तो मज़ाक भी करती रहती हैं.

श्रद्धा: “अजय जीजू आपको मैं अच्छा आदमी समझती थी पर आपने अर्चना दीदी को प्रेग्नेंट कर दिया, यह ठीक नही किया. मैं सच बोल रही हूँ तो अब आप मुझे घूर रहे हो!”

अजय: “तुम जब मा बनोगी तब तुम्हे भी समझ आ जाएगा”

श्रद्धा: “वैसे तो मैं शादी ही नही करूँगी तो बच्चा कैसे होगा!”

अजय: “बच्चे के लिए शादी करना ज़रूरी नही होता”

श्रद्धा: “मैं किसी मर्द को हाथ भी नही लगाने देती. एक आप ही इस दुनिया के पहले और आख़िरी मर्द हो जिसको मैं छूने देती हूँ”

अर्चना: “क्या कुच्छ भी बोल रही हैं. थोड़ी तो शर्म कर”

श्रद्धा: “अर्रे तो आप ग़लत मतलब क्यू निकाल रही हो. छूने का मतलब हमेशा ग़लत थोड़े ही होता हैं. हाथ मिलना भी तो छूना ही होता हैं. शादी करके इन सब लड़कियो की सोच भी गंदी हो जाती हैं”

अजय: “चिंता मत कर श्रद्धा, तेरे लिए मेरे जैसा ही लड़का ढूंड लूँगा शादी के लिए”

श्रद्धा: “आप ही कर लेना उस से शादी”

अजय: “श्रद्धा तुम्हे मर्दो से नफ़रत हैं यह मुझे पता हैं, पर क्या तुम्हे लड़कियाँ पसंद हैं!”

मेरी बीवी अर्चना ने मुझे घूरते हुए आँख दिखाई की मैं ग़लत सवाल पुच्छ रहा हूँ. मुझे भी अहसास हुआ और मैं चुप हो गया.

अर्चना की प्रेग्नेन्सी से शारढा की नाराज़गी थोड़ी अलग किस्म की थी पर घर मे सच मे कोई एसा था जिसको अर्चना की प्रेग्नेन्सी से दुख हुआ था. मुझे यह जल्दी ही पता चलने वाला था क्यू की मेरे लिए एक और मुसीबत आने वाली थी.

अगले एपिसोड मे पढ़िए अजय पर वो कौन सी दूसरी मुसीबत आने वाली थी.

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