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राहुल और मैं रूबी के घर पर पुरे नंगे होकर चुदाई का मजा ले रहे थे और मैं खड़े खड़े थक चुकी थी । राहुल ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और अपने सीने से चिपका लिया। मेरे मम्मे फिर उसके शरीर से दब गए. उसने मेरी गांड से पकड़ा और मुझे उठा लिया।
मैने अपनी दोनो बाहें उसके गले में डाल उसको पकड़ा और दोनो टांगो से उसकी कमर को झकड़ लिया। राहुल का लंड एक बार फिर मेरी चूत के अंदर था और उसने ऐसे ही खड़े खड़े मुझे गोद में उठाए चोदना जारी रखा।
अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को पकड़ वो मुझे अपनी गोद में उछाल रहा था और मै चूद रही थी। एक बार तो मै वैसे ही जड़ ही चुकी थी पर इस तरह की गहरी चुदाई का मजा मुझे मिल रहा था।
इस तरह औरत को उठा कर चोदने के लिए सच में ताकत चाहिये होती हैं और राहुल का कसरती बदन इसके काबिल था। मेरे दिमाग में यहीं चल रहा था कि आज अगर वो मुझे गोद में उठाए चोद रहा था तो 9 महीने बाद मै उसको गोद में खेलने के लिए एक बच्चा जरूर दूंगी।
राहुल के लंड ने मेरी चूत में एक भयंकर तूफान ला दिया था और अंदर पानी पानी हो गया था, हम दोनो की सिसकियां बुरी तरह से निकल रही थी और राहुल के जड़ने के साथ मै भी एक बार फिर जड़ चुकी थी।
राहुल मुझे ऐसे ही गोदी में बैठाये बिस्तर के पास ले आया और मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। हम थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे और फिर साथ में हमने बाथ लिया।
राहुल ने फिर हमसे विदा ली. आज शाम में मेरे मायके लौटने वाली थी तो उस से पहले मैंने अपने बड़े बच्चे को उसके पापा यानी मेरे पहले पति अशोक और दादी से मिलवाना था। सोचा इस बहाने पूजा से भी मिल लुंगी.
अशोक के घर पर पूजा नहीं मिली, पता चला वो भी अशोक को छोड़ कर चली गयी थी। मुझे पता था कि अशोक के साथ टिकना किसी भी औरत के लिए मुश्किल ही होगा।
फिलहाल मै रूबी के पास लौट आयी और उस से विदा लेने पर उसके पहले मैंने पूजा को फ़ोन लगाया और वो मुझसे मिलना चाहती थी। मैंने उसको रूबी के घर का पता दिया और वो मुझसे मिलने आयी।
मैं: “तो तुमने भी अशोक को छोड़ ही दिया, क्या हुआ?”
पूजा: “तुम्हे तो पता ही होगा कि अशोक कैसा इंसान हैं, मेरा नहीं जमा उसके साथ। वैसे मै तुम्हारे लिए कुछ लायी हूँ”
उसने एक बॉक्स मुझे दिया, मैंने खोल कर देखा तो होश उड़ गए।
पूजा: “तुम अपनी डायरीज अशोक के घर में ही भूल गयी थी, वही लायी हूँ।”
मैं: “तुमने पढ़ ली?”
पूजा: “सब पढ़ लिया, तुम कब कहा किसके साथ क्या करती थी, सब पता चल गया”
मैं: “अशोक को भी बता दिया?”
पूजा: “नहीं बताया। पर यह डायरी कुछ पुरानी हैं, मुझे तुम्हारी आगे की कहानी भी पढ़नी हैं”
मैं: “कुछ समय से मै डायरी में ना लिख कर लैपटॉप पर ही रखती हूँ। मुझे वैसे भी अब किसी से कुछ नहीं छिपाना। तुम्हे अगर दिलचस्पी हैं तो मै तुम्हे भी भेज दूंगी। बाकी काफी कुछ रूबी भी बता सकती हैं”
रूबी: “तुम्हारी पुरानी कहानी तो अब मै भी पढुंगी, पता तो चले कितने आशिक थे तुम्हारे। वैसे तुम्हारी जितनी कहानी मै जानती हुं, फिल्म बन सकती है।”
पूजा: “मुझे लगता हैं कि तुम्हारी पहचान गुप्त रख कर ये कहानी लोगो को भी पता लगनी चाहिये। औरत को भी अपने हिसाब से जिंदगी जीने का हक है।”
मैं: “तुम दोनो मेरी अच्छी सहेलियां हो, मेरी कहानी इस काबिल हैं तो तुम दोनो पबलीश कर देना, मेरी अनुमति हैं”
इंडिया छोड़कर मै फिर जोसफ के पास आयी। वहां जाने के बाद मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हो चुकी हूँ और राहुल के बच्चे को जन्म दे पाउंगी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था, जिस चीज के लिए इतने पापड़ बेले थे, वो अब वो जाकर पूरी हुई। अगर ये बहुत पहले ही हो जाता तो मै जोसफ की बजाय राहूल से शादी कर सकती थी।
अब मुझे ये बात जोसफ को बतानी थी पर सूझ नहीं रहा था कि कैसे कहूं ! रूबी से पुछा तो उसने मुझे सुझाव दिया कि कुछ ऐसा करू कि जोसफ को पहले खुश कर दू और फिर यह गहरा आघात उसको दु।
मैंने काफी सोचा फिर यह फैसला किया कि मैं जोसफ को उसकी अधूरी इच्छा पूरी करने दूंगी और उसको पहली बार गांड मारने दूंगी। मुझे काफी दर्द होगा पर जो गलती मैंने की हैं उसके लिए ये सजा तो होनी ही चाहिए।
वर्किंग डे की दोपहर में जब घर पर कोई नही होता है, तब मै जोसफ को लेकर घर आई। उसको भी लगा मेरा चुदने का मूड है तो वो खुशी खुशी आ गया।
मैने अपनी दोनो बाहें उसके गले में डाल उसको पकड़ा और दोनो टांगो से उसकी कमर को झकड़ लिया। राहुल का लंड एक बार फिर मेरी चूत के अंदर था और उसने ऐसे ही खड़े खड़े मुझे गोद में उठाए चोदना जारी रखा।
अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को पकड़ वो मुझे अपनी गोद में उछाल रहा था और मै चूद रही थी। एक बार तो मै वैसे ही जड़ ही चुकी थी पर इस तरह की गहरी चुदाई का मजा मुझे मिल रहा था।
इस तरह औरत को उठा कर चोदने के लिए सच में ताकत चाहिये होती हैं और राहुल का कसरती बदन इसके काबिल था। मेरे दिमाग में यहीं चल रहा था कि आज अगर वो मुझे गोद में उठाए चोद रहा था तो 9 महीने बाद मै उसको गोद में खेलने के लिए एक बच्चा जरूर दूंगी।
राहुल के लंड ने मेरी चूत में एक भयंकर तूफान ला दिया था और अंदर पानी पानी हो गया था, हम दोनो की सिसकियां बुरी तरह से निकल रही थी और राहुल के जड़ने के साथ मै भी एक बार फिर जड़ चुकी थी।
राहुल मुझे ऐसे ही गोदी में बैठाये बिस्तर के पास ले आया और मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। हम थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे और फिर साथ में हमने बाथ लिया।
राहुल ने फिर हमसे विदा ली. आज शाम में मेरे मायके लौटने वाली थी तो उस से पहले मैंने अपने बड़े बच्चे को उसके पापा यानी मेरे पहले पति अशोक और दादी से मिलवाना था। सोचा इस बहाने पूजा से भी मिल लुंगी.
अशोक के घर पर पूजा नहीं मिली, पता चला वो भी अशोक को छोड़ कर चली गयी थी। मुझे पता था कि अशोक के साथ टिकना किसी भी औरत के लिए मुश्किल ही होगा।
फिलहाल मै रूबी के पास लौट आयी और उस से विदा लेने पर उसके पहले मैंने पूजा को फ़ोन लगाया और वो मुझसे मिलना चाहती थी। मैंने उसको रूबी के घर का पता दिया और वो मुझसे मिलने आयी।
मैं: “तो तुमने भी अशोक को छोड़ ही दिया, क्या हुआ?”
पूजा: “तुम्हे तो पता ही होगा कि अशोक कैसा इंसान हैं, मेरा नहीं जमा उसके साथ। वैसे मै तुम्हारे लिए कुछ लायी हूँ”
उसने एक बॉक्स मुझे दिया, मैंने खोल कर देखा तो होश उड़ गए।
पूजा: “तुम अपनी डायरीज अशोक के घर में ही भूल गयी थी, वही लायी हूँ।”
मैं: “तुमने पढ़ ली?”
पूजा: “सब पढ़ लिया, तुम कब कहा किसके साथ क्या करती थी, सब पता चल गया”
मैं: “अशोक को भी बता दिया?”
पूजा: “नहीं बताया। पर यह डायरी कुछ पुरानी हैं, मुझे तुम्हारी आगे की कहानी भी पढ़नी हैं”
मैं: “कुछ समय से मै डायरी में ना लिख कर लैपटॉप पर ही रखती हूँ। मुझे वैसे भी अब किसी से कुछ नहीं छिपाना। तुम्हे अगर दिलचस्पी हैं तो मै तुम्हे भी भेज दूंगी। बाकी काफी कुछ रूबी भी बता सकती हैं”
रूबी: “तुम्हारी पुरानी कहानी तो अब मै भी पढुंगी, पता तो चले कितने आशिक थे तुम्हारे। वैसे तुम्हारी जितनी कहानी मै जानती हुं, फिल्म बन सकती है।”
पूजा: “मुझे लगता हैं कि तुम्हारी पहचान गुप्त रख कर ये कहानी लोगो को भी पता लगनी चाहिये। औरत को भी अपने हिसाब से जिंदगी जीने का हक है।”
मैं: “तुम दोनो मेरी अच्छी सहेलियां हो, मेरी कहानी इस काबिल हैं तो तुम दोनो पबलीश कर देना, मेरी अनुमति हैं”
इंडिया छोड़कर मै फिर जोसफ के पास आयी। वहां जाने के बाद मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हो चुकी हूँ और राहुल के बच्चे को जन्म दे पाउंगी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था, जिस चीज के लिए इतने पापड़ बेले थे, वो अब वो जाकर पूरी हुई। अगर ये बहुत पहले ही हो जाता तो मै जोसफ की बजाय राहूल से शादी कर सकती थी।
अब मुझे ये बात जोसफ को बतानी थी पर सूझ नहीं रहा था कि कैसे कहूं ! रूबी से पुछा तो उसने मुझे सुझाव दिया कि कुछ ऐसा करू कि जोसफ को पहले खुश कर दू और फिर यह गहरा आघात उसको दु।
मैंने काफी सोचा फिर यह फैसला किया कि मैं जोसफ को उसकी अधूरी इच्छा पूरी करने दूंगी और उसको पहली बार गांड मारने दूंगी। मुझे काफी दर्द होगा पर जो गलती मैंने की हैं उसके लिए ये सजा तो होनी ही चाहिए।
वर्किंग डे की दोपहर में जब घर पर कोई नही होता है, तब मै जोसफ को लेकर घर आई। उसको भी लगा मेरा चुदने का मूड है तो वो खुशी खुशी आ गया।