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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

पति ने पूछा नींद कैसी आयी, मैंने कहा ठीक। रंजन के धीरे धीरे ही सही, अंदर बाहर लंड के रगड़ने से मैं अब चरम की तरफ बढ़ने लगी, रंजन की भी यही हालत थी।

पति के इन्ही सवालों जवाबो के बीच रंजन छूट गया और साथ में मैं भी। उसने तो अपनी आवाज़ दबा ली, पर मेरे मुँह से एक जोर की आह निकल ही गयी।

अगले ही क्षण मैंने अपनी आह को चालाकी से उबासी में तब्दील कर दिया और पति को शक न होने दिया कि पीछे से रंजन मेरे साथ क्या कर रहा हैं।

रंजन ने मेरे अंदर से अपना सामान बाहर निकाला और बिना ज्यादा हिले चद्दर के अंदर ही अपनी जीन्स ऊपर खिसका के पहन ली।

मैंने भी हाथ नीचे ले जाकर अपनी पैंट ऊपर खिंच कर पहन ली। रात को ही उसने अपना बहुत सारा पानी निकाल दिया था तो अभी सुबह ज्यादा पानी नहीं निकला, जिससे साफ़ सफाई की ज्यादा चिंता नहीं थी।

थोड़ी देर ऐसे ही लेटे लेटे बात करने के बाद हम सब उठ बैठे। थोड़ी ही देर में मंजिल आने वाली थी तो अपने आप को व्यवस्थित कर तैयार होंने लगे।

पता नहीं पति को मेरे और रंजन के बीच सुबह बने सम्बन्धो का पता चला कि नहीं, मैंने भी आगे बढ़कर कभी पूछा नहीं। बस से उतर कर हमने रंजन से विदा ली, उसके बाद उससे कभी मिलना नहीं हुआ वह बहुत दूर जा चूका था।

इस तरह हमारी साजिश का आखिरी पड़ाव ख़त्म हुआ। इसके बाद हमको इसकी जरुरत नहीं पड़ी। मेरे अगले पीरियड नहीं आये, और प्रेग्नेंसी टेस्ट भी पॉजिटिव आया।

मुझे आज तक नहीं पता कि उसका असली जैविक पिता कौन हैं संजीव, रौनक या रंजन। क्या फर्क पड़ता हैं, बच्चे की माँ तो मैं ही थी।

पति और मैंने शपथ ले ली थी की अब हम कभी ये साजिश नहीं रचेंगे और एक ही बच्चा काफी हैं।

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अब हमारा बच्चा साल भर का होने आया था। इस बीच जीवन एकदम सामान्य हो गया था। पर खूबसूरत स्त्री और उसके चाहने वाले को ज्यादा समय दूर नहीं रख सकते। इस कहानी में पढ़िए मेरे जीवन में एक ओर भंवरा आया जिसने मेरा रस चूस लिया।

शादी का सीजन चल रहा था। शादियों के सीजन में ऐसा होता हैं कि घर में कई वेडिंग इनविटेशन कार्ड का ढेर लग जाता हैं। कई बार तो एक ही दिन एक से ज्यादा शादियों में शरीक होना होता हैं। ऐसे ही एक बार शादी के सीजन में हमें एक ही दिन के लिए, कई शादियों में जाने का निमंत्रण था।

मेरे घर में सिर्फ तीन बड़े लोग थे, मैं पति और सास। सब घर वालों ने मिलकर तीन ख़ास न्योतो को चुना और कौन कहा जायेगा निर्णय करने लगे। सासु जी अपनी छोटी बहन के ससुराल में शादी थी तो वो वहां जायेंगे, पति एक करीबी रिश्तेदार की शादी में जायेंगे।

अब बची वो शादी जो पास के शहर में होने वाली थी। ये शादी हमारे एक फॅमिली फ्रेंड के घर में थी, जिनसे हमारी बहुत घनिष्ठता वाला रिश्ता हैं। हमने उनसे वादा किया था कि हमारे घर से कोई न कोई शादी जरूर अटेंड करेगा।

हमारे पड़ोस में रहने वाली ऑन्टी जिन्हे हम प्यार से मौसी कहते हैं, उनकी बड़ी बहु का वो पीहर भी था। क्यों कि सिर्फ मैं बची तो उस शादी में जाने का मेरा नंबर लगा।

सासुजी ने कहा कि बच्चा छोटा हैं तो इसको इतना ट्रेवल मत कराना मैं इससे रख लुंगी अपने साथ लोकल शादी में।

मेरे शादी में आने जाने की व्यवस्था पडोसी मौसी के साथ थी, वो जब अपनी कार में जाएंगे तो मुझे भी ले जायेंगे। पता चला वो लोग शादी के एक रात पहले ही पहुंच जाएंगे ताकि महिला संगीत में भी शिरकत कर सके और अगले दिन दोपहर में होने वाली शादी के लिए भी देर न हो।

शाम के आठ बजे मैं मौसी के घर पहुंची, वो लोग कार में अपने बेग रख रहे थे, मैंने भी अपना बेग रखवा दिया जिसमे अगले दिन शादी में पहनने के कपडे, गहने और मेकअप के सामान थे। हम लोग वहां पहुंचते ही सीधे महिला संगीत अटेंड करने वाले थे तो हम लोग उसी हिसाब से तैयार होकर निकल रहे थे।

हम चार लोग जाने वाले थे, मौसी, मौसाजी, उनका छोटा लड़का प्रशांत और मैं। प्रशांत की बीवी किसी ऑफिस के काम की वजह से नहीं आ पा रही थी। उनकी बड़ी बहु पहले ही मायके में थी, अपने पति के साथ शादी की तैयारियों के लिए।

नौ बजे के करीब हम लोग समारोह स्थल पर पहुंचे जो की एक होटल था। हम लोगो को दो कमरों की चाबी दे दी गयी। एक में प्रशांत और उसके पापा ने अपना सामान रख दिया और दूसरे में मैंने और मौसीजी ने। ताला लगा कर हम हॉल में आ गए, जहा संगीत संध्या अपनी गति पकडे हुई थी।

हॉल में प्रवेश करते ही एक तरफ कुर्सियां लगी थी तो दूसरी तरफ नीचे बैठने की व्यवस्था थी, उन औरतो के लिए जो शादी के लिए कुछ आवश्यक काम कर रही थी। हॉल के पीछे का हिस्सा नाचने के लिए था। तेजी से संगीत बज रहा था और कुछ बच्चे और युवा थिरक रहे थे।

कुछ लोग डांस देखने में मग्न थे तो ओर कुछ बैठे बातें कर रहे थे तो कुछ मेहंदी लगवा रहे थे। मौसी ने मेरा परिचय करवाया। मैं ज्यादा किसी को अच्छे से जानती नहीं थी तो फिर अकेले एक कुर्सी पर जाकर बैठ गयी और डांस देखने लगी।

मुझे अकेला देख, थोड़ी देर बाद प्रशांत आया और मेरा साथ देने बातें करने लगा। मेरी शादी के समय उसने मेरी बहुत टांग खींची थी, पर शादी के बाद पता चला वो बहुत हंसमुख स्वभाव का और सुलझा हुआ युवक हैं। मेरे लिए एक दोस्त की तरह था।

हम लोग कुछ देर तक बातें करते रहे और वो मेरे लिए कुछ पीने और नाश्ते को भी ले आया। मैंने बात बढ़ाने के लिए उससे पूछा वो डांस नहीं कर रहा, तो उसने कहा अभी बच्चे लोग डांस कर रहे हैं फिर यहाँ कपल डांस होने वाला हैं, मेरी बीवी तो आयी नहीं सो मैं भाग नहीं ले पाऊंगा। मैंने अफ़सोस जताया।

अगर आपको यह कहानी पसंद आये तो मेरी सबसे पहली हॉट सेक्स स्टोरी इन हिन्दी, जागरण, मन से तन तक को जरुर पढियेगा, वह भी आपको जरुर पसंद आएगी।

उसने कहा आपने अपनी शादी में तो बहुत अच्छा डांस किया था मुझे याद हैं। आप अच्छी डांसर हैं आपको डांस करना चाहिए। उसने मुझसे पूछा क्या मैं उसका साथ कपल डांस करुँगी। मैं थोड़ा सकपकाई, कभी अपने पति के साथ भी डांस नहीं किया फिर गैर मर्द के साथ कैसे कर सकती हूँ।

मैंने उसको समझाया हम दोनों शाद्दी शुदा हैं, पता नहीं कपल डांस में कोई देखेगा तो क्या कहेगा।

उसने कहा इसकी चिंता मत करो, कपल डांस में वैसे भी उस एरिया में रौशनी एकदम कम कर दी जाएगी, सिर्फ एक दो डिस्को लाइट बीच बीच में घूमेंगी। हम लोग सबसे पीछे की तरफ जाकर डांस करेंगे ताकि आगे बैठे लोग नहीं देख पाए। हमें तो वैसे भी डांस का मजा लेना हैं कौनसा सा लोगो की वाहवाही लूटनी हैं।

मैं उसको मना नहीं कर पाई। थोड़ी ही देर में कपल डांस के लिए घोषणा हुई, काफी दम्पति डांस फ्लोर पर इकठ्ठा हो गए।

प्रशांत मुझे भी भीड़ के बीच से सबसे पीछे ले गया जहाँ सबसे कम रौशनी थी और डिस्को लाइट भी नहीं आयी। अब गाना शुरू हुआ, DJ ने कपल के लिए एक रोमांटिक गाना चला दिया।

मैं सकपका गयी, इस पर कैसे डांस कर सकते हैं किसी और के साथ। पर इस स्तिथि से बचा भी नहीं जा सकता था, तो हम एक हाथ की दुरी पर थोड़ा हिलते डुलते हुए थोड़ी देर तक डांस करते रहे।

दूसरे सारे कपल बाहों में बाहें डाल कर एक दम करीब होकर नाच रहे थे। इस अजीब स्तिथि से बचने के लिए प्रशांत अब मेरे थोड़ा ओर करीब आकर नाचने लगा।

थोड़ी ही देर में उसने अपने दोनों हाथो में मेरे हाथ पकड़ लिए और हाथ ऊपर नीचे करते हुए नचाने लगा। दूर होकर नाचने से ये गाने के हिसाब से ज्यादा बेहतर नाच था।

फिर थोड़ी ही देर में उसने मेरा एक हाथ अपने कंधे पर रख दिया जब कि दूसरा हाथ अब भी उसके हाथ में था। उसने अपना दूसरा हाथ मेरी कमर पर रख कर अपने करीब खिंच लिया और आगे पीछे होकर मुझे अपने साथ नचाने लगा।

 
पता ही नहीं चला और गाने के बहाव में धीरे धीरे हिचकिचाहट जाती रही और हम ओर करीब आने लगे। अब हम एक कपल की ही तरह एक दूसरे की बाहों में चिपक कर थोड़ी देर तक ओर नाचते रहे।

मेरे वक्ष थोड़ी थोड़ी देर में उसके सीने से टकरा कर दब भी रहे थे। वो ऐसे रियेक्ट करता जैसे कुछ हुआ ही न हो, जबकि मैं थोड़ा सा शर्मा जाती ओर थोड़ा दूर हट जाती, पर थोड़ी ही देर में वो फिर मुझे अपने करीब खींचता और फिर वही दोहराता।

बीच बीच में वो स्थिति बदलते हुए मुझे पूरा घुमा देता और पीछे से मुझे पेट से झकड़ कर अपने से चिपका लेता, जिससे मेरे नितंब उसके नाजुक अंगो को छूते और डांस में हिलने के दौरान उससे रगड़ते।

मेरे पेट में तितलियाँ उड़ रही थी, मेरी इच्छाएं बढ़ रही थी। तभी गानो का एक दौर ख़त्म हुआ और हम एक दूसरे से ना चाहते हुए भी अलग हुए। वह एक डांस ब्रेक था। मैं वापिस जाकर कुर्सी पर बैठ गयी।

प्रशांत अपनी मम्मी से मिल कर आया और मुझे चाबी देते हुए कहा, मम्मी ने दी हैं तुम्हारे रूम की चाबी, अगर तुम्हे सोने जाना हैं तो जा सकती हो, मम्मी को समय लगेगा।

मैं तो उसके साथ अभी ओर समय गुजारना चाहती थी सो कुछ कहते नहीं बना।

प्रशांत ने कहा एक राउंड ओर डांस का कर लेते हैं फिर मुझे भी वैसे सोने जाना हैं। मैंने ख़ुशी से हां कर दी। ब्रेक ख़त्म हुआ और सारे कपल फिर बीच में आ गए। प्रशांत मुझे भीड़ के बीच एक बार फिर सबसे पीछे कोने वाली जगह में ले आया।

जैसे ही गाना बजना शुरू हुआ हम एक दूसरे से चिपक गए, और नाचने लगे। उसका ध्यान नाच में कम और छूने में ज्यादा था। हम दोनों काफी करीब आ गए थे, इतना कि मेरी वासनाये भड़कने लगी थी। मन में गंदे विचार आने लगे।

वह बीच बीच में कमर पर हाथ रखने के बहाने कुछ ज्यादा ही ऊपर से पकड़ रहा था जिससे उसके हाथ मेरे वक्षो को छु रहे थे। पर मुझे उसकी ये शरारत भी भा रही थी।

कभी कभार वो अपने होंठ से मेरे कंधे छु रहा था। इसी तरह एक दूसरे में खोये हुए हम नाचते रहे। इससे पहले कि मेरा अपने आप से नियंत्रण हटता गाना ख़त्म हो गया और एक बार फिर हम अलग हुए।

कपल डांस का राउंड ख़त्म हो चूका था और नाचने की बारी दूसरे उम्र के लोगो के लिए थी। अब हम दोनों रूम की तरफ सोने के लिए जाने लगे। उसने मेरे रूम का ताला खोल दिया और कहा कुछ भी जरुरत हो तो वो पास के रूम में ही हैं तो उसे बता दू।

उसने बताया दोनों रूम को जोड़ने के लिए बीच में एक दरवाजा भी हैं। वह शुभरात्रि बोल कर अपने रूम की तरफ गया। मैंने सोचा काश कुछ बहाना मार कर उसे अपने ही रूम में रोक लेती मगर कैसे कहती।

मैं कमरे में आयी और दरवाज़ा बंद कर अपना बेग खोल कर रात को पहनने के लिए नाईट गाउन निकाल लिया। अब मैं आईने के सामने खड़ी हो गयी और अपना रूप निहारने लगी। अपनी चुडिया और दूसरे गहने निकाल दिए।

बहुत तनहा तनहा सा लग रहा था। खैर मैंने अपनी साड़ी निकाल कर एक तरफ रख दी। मेरी चोली पीछे से डोरियों से बंधी थी सो पहले अपने खुले बालो को ऊपर कर झुड़ा बाँध दिया। अब मैंने अपनी चोली की डोरियों की गांठे खोल कर उतार दी।

चोली क्यों कि पीछे से खुली थी तो ब्रा नहीं पहना था। अब मैं अपनी चोली को समेटने लगी। तभी पीछे एक आहट हुई, मैं घबरा कर पीछे मुड़ी तो देखा दोनों रूम के बीच का दरवाज़ा खुला था वहाँ प्रशांत खड़ा हैं।

उसका मुँह खुला का खुला और आँखें फटी की फटी रह गयी थी। कुछ क्षणों में मैंने महसूस किया कि मैं टॉपलेस हूँ और वो मेरे सीने को ही घूर रहा हैं। मैंने तुरंत अपने हाथ में पकड़ी चोली से अपना सीना ढका और पीछे मुड़ गयी।

मैंने आईने में देखा वो अब भी मुझे घूर रहा था। अगर बालो का झुड़ा नहीं बनाया होता तो शायद बाल मेरी नंगी पीठ और कमर को ढक सकते थे, पर अब वो मेरी नंगी पीठ और पतली कमर को ही घूर रहा था।

मैं शरम के मारे पानी पानी हो गयी और नज़रे नीचे जमीन पर गड़ा दी। अपने पैरो की उंगलियों से नीचे के कार्पेट को कुरेदने लगी और उसका ध्यान भंग करते हुए पूछा आप यहाँ?

उसकी जैसे नींद सी टूटी और सकपकाते उसने कहा, मुझे पता नहीं था आप चेंज कर रही होंगी वरना ऐसे नहीं आता। मैंने नज़रे ऊपर करते हुए आईने में देखा तो वो आईने के माध्यम से मुझसे नज़रे मिलाते हुए बोला आई ऍम सॉरी।

वो बेमन से पीछे मुड़ कर पीछे जाने ही वाला था। मुझे लगा मेरी इस हालत से शायद वो घबरा गया हैं। उसको थोड़ा सामान्य करने के लिए उसको पूछा कुछ काम था तुमको मुझसे?

उसने कहाँ नहीं मैं बस चेक कर रहा था अगर जरूररत पड़े तो ये बीच का दरवाज़ा काम करता भी हैं या नही।

मैंने कहा अच्छा ठीक हैं।

उसने कहा गुड नाईट, मैंने भी गुड नाईट में जवाब दिया।

उसने आगे कुछ हकलाते हुए पूछा आपको बुरा ना लगे तो एक बात कहु?

अब हम आईंने के माध्यम से ही नज़रे मिला कर बात कर रहे थे।

मैंने कहा बेझिझक बोलो।

उसने कहा तुमने अपना फिगर बहुत संभाल के रखा हैं, शादी के चार पांच साल बाद भी ऐसे संभाल कर रखना आसान नहीं हैं। मैंने शर्म के मारे एक बार फिर नज़रे नीचे झुका ली और उसको थैंक यू बोला।

मैं इंतज़ार करने लगी वो दरवाज़ा बंद कर वापिस अपने रूम में जाएगा। पर अगले कुछ क्षणों के बाद उसकी उंगलिया मेरी पीठ और कमर पर मचल रही थी। मेरे पुरे शरीर में जैसे विद्युत प्रवाह सा हो गया।

मैंने अपने हाथों में पकड़ी चोली से सीना ओर भी कस के दबा लिया। मेरे मुँह से ना तो एक शब्द निकला ना ही मैं जरा भी अपनी जगह से हिली।

थोड़ी देर ऐसे ही उंगलिया फिराने के बाद उसने उनको हटा लिया। मुझे ऐसा लगा जैसे शरीर में विद्युत प्रवाह रुक गया।

प्रशांत ने अब अपने दोनों हाथों से मेरी कलाइयां पकड़ ली और मेरे हाथों को शरीर से दूर हटाने लगा। मैंने भी अपना पूरा जोर लगा के अपने हाथों से चोली को सीने से चिपकाये रखा। पर उसके बल के आगे मेरा जोर काम न आया।

उसने ज्यादा दम लगा के मेरे दोनों हाथों को एक झटके में शरीर से दूर करके चौड़ा कर दिया। मेरे हाथ में पकड़ी चोली नीचे गिर गयी और मेरे सीने की इज़्ज़त बचाने में नाकाम रही।

मैंने अपना सर ऊपर कर आईने में देखा। थोड़ी देर पहले उसके उंगलियों के जादुई स्पर्श से मेरे दोनों वक्ष और भी फुल गए थे और कड़क हो गए थे। निप्पल भी तन गए थे। अपने आप को आईने में देख कर मेरा पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था। वो आईने में मेरे सीने की ही खूबसूरती को देख कर लार टपका रहा था।

मैंने अपने हाथ छुड़ाने का भरसक प्रयास किए ताकि अपनी इज्जत को फिर से ढक सकू पर उसने मुझे इजाजत नहीं दी।

थोड़ी देर में मैंने भी थक कर प्रयास बंद कर दिया। अब उसने मेरी कलाइयां छोड़ दी, पर अब भी उसकी मजबूत पकड़ मैं अपनी कलाइयों पर महसूस कर पा रही थी। जिससे उसके हाथ छोड़ देने के बाद भी मैं अपने हाथ उसी अवस्था में फैलाये खड़ी रही।

उसने अपने दोनों हाथों को मेरे बड़े वक्षो पर रख दिया। वो इतने बड़े थे कि वो उनको पूरा पकड़ भी नहीं पा रहा था, इसलिए हाथ घुमा घुमा कर वक्षों को दबा रहा था। मैंने अपनी चेतना लौटाते हुए तुरंत उसके दोनों हाथो को पकड़ा और अपने सीने से हटाने का प्रयास करने लगी।

पर उसके हाथ तो जैसे खजाना लग गया था जिसे वो छोड़ने को ही तैयार नहीं था। मेरे थोड़ी देर संघर्ष करने के बाद उसने स्वतः ही मेरे वक्षो को छोड़ दिया। मैंने तुरंत अपने दोनों हाथों से अपने वक्षो को ढकने का प्रयास किए।

उसके बड़े हाथ जो नहीं कर पाए भला मेरे छोटे हाथ क्या कर पाते। जितना हो सकता था मैंने कवर करने का प्रयास किया। मैं तुरंत वहा से हटना चाहती थी पर उसने अपने एक हाथ को मेरे पेट पर लपेट कर मुझे झकड़ लिया। मैं हिल नहीं पायी और मेरे नितम्ब उसके आगे के अंग को छू गए।

अब उसका दूसरा फ्री हाथ मेरे लहंगे की तरफ बढ़ा और जो नाडा लहंगे के अंदर फंसा था, उसको लहंगे से बाहर निकालने लगा। मुझे खतरे का आभास हुआ। हाथों से ऊपर के अंगो की हिफाजत करती या नीचे की।

 
मैंने अब अपने एक हाथ से दोनों वक्षो को कवर किया और दूसरे हाथ को फ्री करते हुए उसके उस हाथ की तरफ बढ़ाया जो मेरा लहंगा खोलने वाला था। नाडा लहंगे के बाहर था बस खींचने की देर थी पर मैंने उसके हाथ को झटका दिया और अपना नाडा कस कर पकड़ लिया।

अपने सीने को एक्सपोज़ होने से तो नहीं बचा पायी थी पर अब नीचे के अंग को तो बचाना ही था। मेरे जिस हाथ में नाडा था उसने वो कलाई पकड़ी और तेजी से हाथ ऊपर किया। मेरे हाथ में जो कस के नाडा पकड़ा था मेरे हाथ के ऊपर जाते ही झटके के कारण खिंच गया और उसकी गांठ खुल गयी। मेरा हाथ इतना ऊपर गया कि ऊपर जाते ही नाडा भी छूट गया और मेरा लहंगा धड़ाम से नीचे जमीन पे जा गिरा।

उसका हाथ अब मेरी पैंटी की तरफ बढ़ा। मैं अपना हाथ तुरंत नीचे ले जाकर अपनी पैंटी को टाइट पकड़ कर ऊपर की खिंचने लगी। वो उसे नीचे खिंच रहा था और मैं ऊपर की तरफ।

थोड़ी देर के संघर्ष के बाद उसने पैंटी छोड़ कर अपने दोनों हाथ कमर से शुरू करते हुए धीरे धीर ऊपर उठाते हुए वक्षो की तरफ बढ़ने लगा।

मेरे दोनों हाथ एक-एक किला संभाले हुए थे। मगर उसके दोनों हाथ अब एक तरफ आक्रमण को बढ़ रहे थे। उसने अपने दोनों हाथों से फिर मेरे वक्षो को ढके हाथ को धकेलते हुए ऊपर के किले पर कब्ज़ा कर लिया। पहले की तरह एक बार फिर वो उनको दबा कर मसलने लगा।

मैंने भी अब अपनी पैंटी छोड़ी और दोनों हाथों से अपने वक्षो को छुड़ाने का प्रयास करने लगी। उसको मौका हाथ लगा और तेजी से वक्षों को छोड़ते हुए अपने दोनों हाथों से मेरी पैंटी पकड़ कर एक झटके में नीचे उतार दी।

मुझे अपनी हार का अहसास हुआ। उसने अपना एक हाथ दोनों टांगो के बीच ले जाते हुए मेरी चूत पर रख दिया और हाथ फिराने लगा।

मुझ एक आनंद की अनुभूति हुई और अपने शरीर को कड़ा कर लिया। उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में डाल कर चलानी शुरू कर दी। मेरी तो सिसकीया निकलने लगी। मेरा सारा विरोध क्षीण पड़ने लगा।

मैंने आत्मसमर्पण करते हुए अपने वक्षो को छोड़ दिया और एक हाथ उसकी गर्दन के पीछे ले जाकर पकड़ लिया। उसने अब अपने दूसरे हाथ से मेरे वक्षो को मलना शुरू कर दिया। उसका दोनों किलो पर कब्ज़ा हो चूका था और रानी को जीत चूका था।

थोड़ी देर ऐसे ही मजा दिलाने से मेरे अंदर गीला होने लगा और मूड बनने लगा। वह अब मुझे धकेलते हुए बिस्तर के पास ले आया और लेटा दिया। उसने अपना शर्ट और पैंट निकाल दिया। जैसे ही उसने अपना अंडरवियर निकाला उसका नाग झूमते हुए बाहर आया।

अब वो बिस्तर पर आया और अपनी दोनों टाँगे मेरे चेहरे के दोनों तरफ करते हुए अपना लंड मेरे मुँह के पास ले आया और झुककर अपना मुँह मेरी चूत के पास ले आया। अब हम 69 पोजीशन में थे।

उसने मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी। अपनी जीभ मेरे चूत के दोनों होठों के बीच ले जाकर रगड़ने लगा। उसका लंड मेरे मुँह और होठों को छू रहा था पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी उसको चूसने की।

वो बड़े प्यार से मेरी चूत को अपनी जबान से रगड़ रगड़ कर साफ़ कर रहा था। इतना आनंद तो मुझे पहले कभी नहीं आया था।

मुझसे भी अब रहा नहीं गया और उसके लंड को अपने होठों से पकड़ लिया। धीरे धीरे करके उसको पूरा अपने मुँह में उतार लिया।

अंदर जाते ही उसको मजा आने लगा और वो मुँह में ही झटके मारने लगा, जिससे वो मेरे मुँह के काफी अंदर तक उतर गया। मैं भी अपनी जबान से उसके लंड की चमड़ी को रगड़ने लगी।

उसको ओर भी मजा आने लगा और उसने अपनी जबान मेरी चूत के छेद में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।

मेरी तो जान निकलने लगी। अब हम दोनों ही अगले कुछ मिनटों तक एक दूसरे को ऐसे ही असीम आनंद दिलाते रहे, जब तक कि हम दोनों को पानी निकलने लगा। हम दोनों ने ही एक दूसरे के पानी का स्वाद चखा और आनंद के मारे मैंने थोड़ा पी भी लिया था।

मेरे गले में उसका पानी उतरते ही मैंने उसका लंड अपने मुँह से बाहर निकाल दिया। उसने भी अब मुझे नीचे से चाटना बंद किया और सीधा होकर मेरी दोनों टांगो के बीच बैठ गया। अब वो आगे झुकते हुए मुझ पर लेट गया।

उसके सीने के नीचे मेरे वक्ष थोड़े दब से गए और उसका लंड मेरी चूत को छूने लगा। इसके पहले कि वो मेरे अंदर प्रवेश करता मुझे अपने पति की कही बात याद आयी।

मेरे माँ बनने के बाद हमने वादा किया था कि एक बच्चा ही काफी हैं। अगर मैं फिर गर्भवती हो गयी तो पति पकड़ लेंगे। वो अपना लंड पकड़ कर मेरी चूत के होठों के बीच रगड़ने लगा।

मैंने उसको पूछा क्या तुम्हारे पास प्रोटेक्शन हैं?

उसने कहा मुझे नहीं पता था कि ऐसा मौका भी मिलेगा वरना ले आता।

अगर अपने मेरी पिछली हिन्दी चुदाई की कहानी समझोता, साजिश और सेक्स को नहीं पढ़ा है, तो पढ़िए और उसका लुफ्त जरुर उठाइए।

मैंने उसको धक्का देते हुए अपने ऊपर से हटाया। मैंने उसको बताया कि मैं ये रिस्क नहीं ले सकती, कुछ हो गया तो मेरे पति को सब पता चल जायेगा।

उसने कहा एक बार करने से जरुरी नहीं कुछ हो ही जाये, और अगर हो भी गया तो अपने पति पर डाल देना इल्जाम। अब मैं उसको कैसे बताती अपनी पति की कमजोरी के बारे में ऊपर से वादा कर रखा था किसी को नहीं बताना हैं।

मैंने बहाना मार दिया पति हमेशा प्रोटेक्शन यूज़ करते हैं तो हम पकडे जायेंगे। वो निराश हो गया, इतना अच्छा हाथ आया मौका फिसलता हुआ नजर आया।

उसने भागते भूत की लंगोटी पकड़ना ही उचित समझा और बोला हम लोग ओरल सेक्स कर लेते हैं। मैं तो वैसे भी भरी बैठी थी तो हां कर दी।

लेडीज फर्स्ट के तहत अब उसने पहले मुझे मजा दिलाने की शुरुआत की। मैंने दोनों पैर चौड़े किये और उसने आगे झुककर अपने हाथ की बीच वाली लम्बी ऊँगली मेरी चूत पर फेरते हुए अंदर छेद में घुसा दी।

जितना अंदर वो ऊँगली डाल सकता था उतना ले जाकर उसको अंदर हिलाने लगा। मेरी सिसकिया निकलनी शुरू हो गयी। उसने अपने होठ मेरे पेट पर लगा कर चूमना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर ऐसे ही मजे दिलाने के बाद उसने एक की बजाय दो उंगलिया अंदर घुसा दी। अब वो ओर भी जोर लगा कर उंगलिया ओर ज्यादा गहरी डालने की कोशिश करने लगा। मुझे डर लगा इतने जोर से कही वो अपना पूरा हाथ ही अंदर न घुसा दे।

थोड़ी देर में ही मेरे अंदर का पानी छूटने लगा और उसकी ऊँगली के रगड़ने से पानी की आवाज़े आने लगी। अपने चरम के नजदीक पहुंचते हुए मैं तेज आवाज़ में आ.. ऊ…. करते झड़ गयी। उसने अब अपनी उंगलिया बाहर निकली और सीधा लेट गया अपनी बारी के लिए।

मैं अब उठ कर बैठ गयी। एक हाथ से उसके लंड की चमड़ी नीचे करते हुए नीचे का आधा भाग पकड़ लिया और दूसरे हाथ से नीचे से ऊपर की तरफ उसकी लंड की टोपी पर रगड़ने लगी। ये मसाज की तकनीक मैंने सीखी थी और बड़ी प्रभावी थी।

अब सिसकिया निकालने की बारी उसकी थी। कुछ मिनटों बाद ही उसने मुझसे कहा कि मुझे अंदर डालने दो मैं कुछ नहीं होने दूंगा, पानी निकलने से पहले बाहर निकाल दूंगा।

मैंने मना किया, इसमें रिस्क हैं, अगर टाइम पर नहीं निकाल पाए तो मैं फंस जाउंगी।

उसने यकीन दिलाने की कोशिश की के उसे इस चीज़ का काफी अनुभव हैं और वो कुछ नहीं होने देगा। उसका आत्मविश्वास देख कर मैंने उसको एक मौका देने की सोची और हां बोल दिया। मैंने उसका लंड रगड़ना छोड़ा।

वो खुश होकर बैठ गया और मुझे एक बार फिर सीधी लेटा दिया। मेरी दोनों टाँगे चौड़ी करते हुए बीच में बैठ गया और आगे झुककर मुझ पर लेट गया। अब उसने अपना लंड पकड़ कर मेरे छेद में घुसा दिया।

इतनी देर उसकी ऊँगली से मजा लेने के बाद उसके मोटे लंड को अंदर लेने से मजा दोगुना हो गया था। वो जो इतनी देर से भरा बैठा था तो बिना समय गवाए तेजी से अंदर बाहर झटके मारते हुए आहें निकालने लगा।

 
थोड़ी देर पहले ही झड़ने के बाद मेरा एक बार फिर मूड बनने लगा। कुछ मिनटों तक वो मुझे ऐसे ही जोर जोर से चोदता रहा। मेरे अंदर फिर से पानी बनने लगा और फचाक फचाक की आवाज़े आने लगी। मजा तो आ रहा था पर थोड़ा डर भी लग रहा था, कही कुछ हो तो नहीं जायेगा।

उसके झटको की गति अब बढ़ने लगी थी और मैं एक बार फिर झड़ने वाली थी।

तभी उसने कहा कि उसका पानी निकलने वाला हैं क्या करू? मैं झड़ने के करीब थी तो मेरे दिमाग के बदले दिल ने जवाब दिया अभी बाहर मत निकलना।

उसने झटके मारना जारी रखा और तेज चीखों के साथ मैं एक बार फिर से झड़ गयी। मैंने तुरंत उसको धक्का देते हुए एक बार फिर से अपने ऊपर से हटा दिया। वो मेरा मुँह ताकता रह गया, उसका भी तो होने ही वाला था।

उसने सवाल किया मैं क्या करू अब, पूरा नहीं हुआ?

मैंने उसको सुझाया मैं उसका लंड रगड़ कर उसका पानी निकाल देती हूँ। उसने कहा इसमें अंदर डालने जितना मजा तो नहीं आएगा। उसने सुझाया कि पीछे के छेद में कर सकते हैं, वहां करना सुरक्षित हैं, प्रेग्नेंट होने का डर नहीं रहेगा।

मैंने सोचा दर्द तो होगा, पर उसने मुझको दो बार झड़ने में मदद की तो उसकी एक बार मदद कर देती हूँ। मैंने उसको हां बोल दिया। अब मैं घुटनो के बल बैठ कर आगे झुक कर आधा लेट गयी।

वह मेरे पीछे आया और मेरे नितम्बो को चौड़ा करते हुए अपना लंड मेरे पीछे के छेद में डालने लगा। जैसे ही उसका लंड मेरे छेद में घुसा दर्द के मारे मेरी एक चीख निकली और फिर सब सामान्य हो गया।

वो अब अंदर बाहर झटके मारते हुए मुझे पीछे से चोदने लगा। कुछ मिनटों में ही उसने जोर जोर के झटको और चीखो के साथ अपना सारा पानी मेरे पीछे के छेद में खाली कर दिया।

अपनी बन्दुक अनलोड करने के बाद उसने बाहर निकाली। थोड़ा पानी बाहर निकल कर रिसने लगा। वो तेजी से अंदर बाथरूम में गया और थोड़े टॉयलेट पेपर ले आया। हम दोनों ने अब अपनी गन्दगी साफ़ की।

हम दोनों अब आस पास लेटे थे। प्रशांत ने पूछा क्या मुझे कल भी करने दोगी? मैंने कहा कल प्रोटेक्शन ले आना, अगर मौका मिलेगा तो फिर कर लेंगे। वो खुश हो गया।

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। शायद मौसी आ गए थे सोने के लिए। हम दोनों डरके बिस्तर से कूद कर खड़े हो गए। प्रशांत ने अपने कपडे पहनने शुरू किये और मैंने चारो तरफ बिखरे अपने कपडे इकट्ठे किये और अपने बेग में ठूस दिए।

मौसी बाहर से आवाज़ लगा कर दस्तक दे रही थी। मैंने पहले से बाहर निकाल कर रखा नाईट गाउन पहन लिया।

प्रशांत ने कपडे पहन लिए थे और वो तेजी से बीच के दरवाज़े से अपने रूम में गया और बीच का दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने तुरंत नीचे पड़े गंदे टॉयलेट पेपर इकट्ठा कर डस्टबिन में डाले।

मैंने मुख्य दरवाज़ा खोल कर मौसी को अंदर आने दिया।

मौसी ने पूछा नींद आ गया थी क्या?

मैंने हां में सर हिलाया, उनको कैसे बताती कि मैंने उनको दादी बनाने का लगभग पूरा इंतज़ाम कर ही लिया था। मैं वापस बिस्तर पर आकर लेट गयी। फिर मैं संतुष्ट होकर ये सोचते सोचते सो गयी कि कल पता नहीं क्या होगा?

रात को देर से सोने के कारण मैं सुबह देर तक सोती रही। नौ बजे आँख खुली तो बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी। मैंने सोचा मौसी अंदर नहा रहे होंगे। मैंने उठकर रात को जो कपडे जल्दबाजी में बेग में ठुसे थे उनको सही से समेटकर रखने लगी।

थोड़ी देर में मौसी बाथरूम से बाहर आये और मुझसे कहा तुम भी जल्दी से नहा धो लो, थोड़ी देर में विवाह कार्यक्रम शुरू हो जायेंगे, मैं अभी तैयार होकर बाहर उनकी थोड़ी मदद के लिए चली जाउंगी, तुम तैयार हो जाना। मैंने हां में सर हिलाया और बाथरूम का रुख किया।

नहाते वक़्त भी रह रह कर पिछली रात के ख्याल ही आ रहे थे। ऐसा कुछ सोचा नहीं था, पता नहीं वो सब कैसे हो गया। आधे घंटे बाद मैं बाहर आयी और शादी के लिए कपडे और गहने पहन कर तैयार हो गयी। मौसी मेरे लिए एक नाश्ते की प्लेट भी रख कर फिर चले गए थे। मैंने नाश्ता कर अपना श्रृंगार करना शुरू किया।

मौसी कमरे में आये और कहा चले हॉल में कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। मौसी के साथ समारोह स्थल पर पहुंची। सब लोग शादी की तैयारियों में व्यस्त थे।

प्रशांत दूर से मुझे ही घूर रहा था और मैं शर्मा रही थी। बीच बीच में नजरे चुरा कर उसको देख लेती। इसी तरह लुका छिपी होती रही और कार्यक्रम आगे बढ़ता रहा।

मैं मौसी और दूसरी औरतो के साथ बैठी थी। तभी प्रशांत ने मुझे इशारे से पानी पीने के बहाने दूसरी ओर अकेले में बुलाया। मैं मौसी से कह कर हॉल के बाहर एक कोने में रखे पानी के बूथ तक पहुंची।

 
प्रशांत वहां पहले से खड़ा था और मेरे आते ही मुझे एक दीवार की ओट में लिया और चूमने लगा। मैंने उसे रोका कोई देख लेगा।

उसने कहा रूम में चलते हैं, मैंने कहा अभी नहीं जा सकते और पकडे जाने के डर से अपने आप को छुड़ा कर फिर से हॉल में अपनी जगह आकर बैठ गयी।

धीरे धीरे विवाह के पहले के सारे कार्यक्रम निपट गए। अभी विवाह के मुहर्त में थोड़ा समय बचा था तो सबके अनुरोध पर दूल्हा दुल्हन को नाचने के लिए बोला गया।

उनका साथ देने के लिए सभी कपल्स को डांस के लिए बुलाया गया। मेरी बांछे खिल गयी, हम दोनों ने आँखों ही आँखों में इशारा किया और एक बार फिर भीड़ के बीच डांस के लिए पहुंच गए।

ए सी हॉल चारो तरफ से बंद था तो बिना लाइट के दोपहर में भी अँधेरा रहता। हम दोनों पिछली रात की तरह एक बार फिर सबसे पीछे चले गए जहा किसी की ज्यादा ध्यान ना जाये। हॉल में डांस एरिया में हलकी रौशनी कर दी गयी और सिर्फ दूल्हा दुल्हन पर ही तेज रोशनी डाली गयी।

गाना शुरू होने की ही देर थी और मैं उसकी बाहों में झूलने लगी। सब लोगो का ध्यान वैसे भी दूल्हा दुल्हन पर था। हमने इतना चिपक के डांस किया कि एक बार फिर हम अंतरंग होने लगे। हम भूल ही गए कि शादी किसी और की हैं।

हम इसी तरह एक दूसरे में खोते हुए डांस करते रहे। मैं बहक चुकी थी और अब इंतज़ार नहीं हो पा रहा था। मैंने महसूस किया की मेरी पैंटी भी थोड़ी गीली हो चुकी थी।

थोड़ी देर बाद गाने ख़त्म हुए और दूल्हा दुल्हन सहित सारे लोग फिर अपनी जगह आ गए। हम भी बुझे मन से अपनी अपनी जगह की ओर आने लगे। मैंने प्रशांत को चुपके से इशारा किया और बाथरूम की ओर आने को कहा।

मैं एक बार फिर मौसी को बोलकर बाहर आयी और सबसे कोने वाले बाथरूम की ओर गयी। प्रशांत पीछे से आया और दोनों को अंदर बंद कर दिया। एक बार फिर उसने मुझे चूमना शुरू किया और मेरे अंग दबाने लगा। मैं अनियंत्रित होने लगी।

प्रशांत ने कहा रूम में चलते हैं अब इंतज़ार नहीं होता। इस समय इतनी देर के लिए गायब होना ठीक नहीं था। उसको थोड़ा शांत करने के लिए मैंने नीचे बैठ कर उसके नीचे के कपड़े उतार दिए। उसका नाग फिर फुफकारते हुए बाहर आकर झूमने लगा।

मैं रोमांचित हो गयी और अपने आप को उसके अंग को सहलाने से नहीं रोक पायी। उसका अंग पहले ही तैयार हो चूका था तो मैं मुँह में लेकर चूसने लगी। तभी ध्यान आया ज्यादा समय नहीं हैं। मैं चूसना छोड़ कर उठ खड़ी हुई।

एक दिन ट्रेन में सफ़र करते हुए, कैसे पुलिस ने सनी में माँ और बहन की ट्रेन में चुदाई करी, यह सब जानिए सनी की जुबानी।

मगर प्रशांत से तो सब्र ही नहीं हो रहा था। उसने मुझे पकड़ कर तुरंत उल्टा किया और वाश बेसिन पर झुका दिया। उसने मेरा लहंगा ऊपर किया और मेरी पैंटी नीचे उतार दी। उसकी ये जिद कही ना कही मुझे भी अच्छी लग रही थी।

उसने आगे बढ़ कर अपना लंड पीछे से मेरी चूत में उतार दिया। लंड अंदर जाते ही हम दोनों को बड़ी राहत मिली। उसने अब आगे पीछे झटके मारते हुए मुझे चोदना शुरू कर दिया। हम दोनों ही ठंडी आहें भर रहे थे।

फिर याद आया वो बिना प्रोटेक्शन के कर रहा हैं। मैंने उसको रोकने की कोशिश की और प्रोटेक्शन की याद दिलाई। उसने झटके मारना बंद किया और बोला आज सुबह ही खरीद कर लाया हु।

तभी बाहर अनोउसमेंट हुआ कि मुहर्त हो गया हैं तो सब लोग मंडप में जाये और गार्डन में लंच खुल गया हैं तो वहा भोजन के लिए भी जा सकते हैं।

मैंने अपने आप को उससे अलग किया और कहा अभी लोग दो हिस्सों में बंट जायेंगे। मैंने बताया तुम्हारी मम्मी मंडप में जायेगी और मैं गार्डन में जाने का बोल कर मौका देख कर रूम में आ जाउंगी। हम रूम में जाकर अच्छे से करेंगे।

उसको भी ये बात समझ में आ गयी और मान गया। हमने अपने कपडे ठीक किये और एक एक करके चुपके से बाहर निकल अपनी जगह आ गए।

मैं मौसी के पास गयी, उन्होंने कहा वो मंडप में जा रहे हैं क्या मैं आउंगी। मैंने बहाना बनाया मैं थोड़ी देर में मंडप में आउंगी। अभी गार्डन में फूलों की सजावट देखूंगी और फिर थोड़ा खाना भी खा लुंगी।

मैं गार्डन में जाने का कह कर छुपते हुए होटल रूम की तरफ भागी। प्रशांत भी पहुंच चूका था। दरवाजा बंद कर हमने एक दूजे को सीने से लगा लिया, इतना शायद हम दोनों कभी नहीं तड़पे थे।

मैंने कल रात का बदला लेते हुए उसको पूर्ण निवस्त्र कर दिया। मैं उसके पुरे शरीर को चूमने लगी। उसने भी मेरी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और चोली खोल दीं, उसने स्तन पान करना शुरू कर दिया। अब वो साड़ी को लहंगे से निकाल पूरा उतारने लगा तो मैंने ये कह कर मना कर दिया कि पहनने में बहुत समय लग जाएगा।

हमारे पास ज्यादा समय नहीं था, मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया और अपनी पैंटी उतार कर अपना लहंगा नीचे से ऊपर उठा कर दोनों टाँगे फैला कर उस पर बैठ गयी। हम दोनों के नाजुक अंग छू रहे थे और हम मिलन को लालायित होने लगे। मैंने उससे प्रोटेक्शन के बारे में पूछा, उसने पहले ही निकाल कर रख लिया था।

मैं खुश हो गयी, मैं उस पर से हट गयी, उसने प्रोटेक्शन धारण कर लिया। मैं एक बार फिर उस पर सवार हो गयी और उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के अंदर डाल दिया।

मैं ऊपर नीचे होने लगी, जिससे मेरी चूचियाँ ऊपर नीचे हो उछल कूद करने लगी। उसने मेरी चूचियों को दबोच लिया और मलने लगा।

हम दोनों सिसकिया निकालते हुए आनंद लेने लगे।

 
थोड़ी देर में हम पूरा प्रेम रस में डूब कर अपनी तड़प मिटाने लगे। पुरुष पर चढ़ कर संगम का आनंद लेने का मजा ही कुछ और था। ऊपर से चोरी चोरी प्यार करने का उत्साह और मैं पूर्ण आनंद में डूबने लगी।

उसने अब मेरी साड़ी निकाल ली और साड़ी को लहंगे से अलग कर दिया, मैं उसको रोक नहीं पायी, मैं भी सारे बंधन से मुक्त हो पूरा खुल कर प्यार करना चाहती थी।

अब उसने लहंगे का नाड़ा खोल कर मेरे सर के ऊपर से निकाल दिया। अब हम दोनों पूर्ण नग्न होकर आनंद लेने लगे। मेरे शरीर पर सिर्फ गहने थे।

शायद ये हमारा आखरी मिलन हो, यही सोच कर हम अपनी पूरी ताकत जुटा कर इस अवसर का ओर भी मजा लेने लगे। मैं उस पर पूरा लेट कर चोदने लगी पर जल्द ही थकने लगी। वह नीचे लेटे ही झटके मारने लगा। थोड़ी देर तक हम इसी तरह एक दूसरे से मिलन का आनंद लेते रहे।

मैं प्रशांत का नाम ले लेकर उसको और भी जोर से करने को उकसा रही थी। मेरी पुकार सुन कर वो ओर जोश में आ गया। उसने भी शायद अब तक ऐसा जंगली प्यार नहीं किया था। हम दोनों अपने जीवन का सबसे हसीन मिलन कर रहे थे। हम अपनी चेतना खो चुके थे।

उसने अब मुझे नीचे लेटाया और मेरे पाँव घुटनो से मोड़ कर ऊपर कर के चौड़ाई में थोड़े फैला दिए। अब वो फिर मेरी खुली चूत को भेदने के लिए तैयार था। मुझे ख़ुशी थी की प्रोटेक्शन की वजह से आज वो आगे के छेद में पूरा कर पायेगा और मुझे भी मजा दिलाएगा।

ऊपर आने के बाद उसके झटके ओर भी गहरे हो गए, शायद कल की तरह उसको भी चिंता नहीं थी आज किसी रिस्क की। जैसे जैसे मजा बढ़ता रहा मेरा पानी निकलने लगा। उसके तेजी से अंदर बाहर होते लंड से मेरे पानी के टकराने से पच पच पच आवाज़े आने लगी।

इस दौरान हम दोनों के बीच संवाद जारी रहा। मैं उसका नाम ले उकसा रही थी और वो मुझे पूछता जा रहा था इतना जोर से ठीक हैं या ओर जोर से मारु। मैं उसको बोलती ओर जोर से, तो वो जोश में आकर ओर तेज झटके मारता।

बाहर मंडप में शादी के मंत्र पढ़े जा रहे थे और यहाँ अंदर हम एक दूसरे के नाम का जाप कर रहे थे। वो लगातार अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करता हुआ मेरा और अपना उत्साह बनाये रख रहा था। हम दोनों ने काफी देर तक जम कर मजे लिए और हम एक साथ झड़ गए।

हम दोनों ऐसे ही नग्न अवस्था में थोड़ी देर पड़े रहे और अपनी ताकत बटोरने लगे। घडी की ओर ध्यान गया पौन घंटा हो चूका था। हमने तुरंत कपडे पहनना शुरू किया। अपने आप को व्यवस्थित कर हम फिर गार्डन की तरफ बढे।

हमने एक ही प्लेट में खाना खाया और दूसरे लोगो की नजरे बचा कर एक दूसरे को खाना भी खिलाया। शाम होने तक हमें जब भी मौका मिलता पास आ जाते और अपने मन की बात करते और अफ़सोस करते अब पता नहीं कब हमारा मिलन हो।

शाम को दुल्हन की विदाई होते होते हम बीच बीच में कई बार नजरे बचाते हुए उस कोने वाले बाथरूम में जाते और दो तीन मिनट के लिए एक दूसरे को गले लगा कर अपनी तड़प भी मिटा आते।

देर शाम को वधु की विदाई के बाद मौसी और मैंने होटल रूम में शादी के भारी कपडे बदल कर हलके कपडे पहन लिए, वापसी के सफर के लिए।

प्रशांत के भैया भाभी बाद में आने वाले थे। अब एक बार फिर हम चारो मेजबान से विदा लेकर अपनी कार में बैठ कर घर के लिए रवाना होने वाले थे।

मुझे लगा प्रशांत के साथ मेरा आखरी मिलन हो गया हैं पर मैं गलत थी।

देर शाम विदाई के बाद सभी मेहमान धीरे धीरे जाने लगे। हमने भी अपने बैग पैक कर लिए और विदाई ले कर कार तक आये। मैं मौसी के साथ पीछे बैठ गयी और प्रशांत अपने पापा के साथ आगे बैठा और कार चलाने लगा।

अँधेरा हो चला था और आधे घंटे के बाद ही उसने गाडी रोक कर सड़क किनारे लगा ली और कहा थकान हो रही हैं और नींद आ रही हैं।

मौसाजी ने कहा अब गाडी वो चला लेंगे। प्रशांत ने सोने का बहाना बना मौसी को आगे की सीट पर बुला कर पीछे आकर मेरे पास बैठ गया।

 
पीछे आकर उसने गाडी की आगे की सीट के पीछे एक पर्दा था जो उसने यह कह कर लगा लिया कि आगे से आने वाली गाड़ियों की रोशनी से नींद में डिस्टर्ब होगा।

गाडी में अपने पापा के ज़माने के पुराने गानो का संगीत लगाने के लिए भी बोल दिया कि इससे नींद और अच्छी आएगी।

मुझे लगा सच में थक गया होगा, पर वो शरारत करने आया था पीछे। वह मेरे जांघो पर हाथ फेरता तो कभी पेट पर। मुझे अच्छा भी लगता और थोड़ा डर भी था कि आगे उसके मम्मी पापा बैठे हैं। मैं बिना आवाज़ के थोड़ा हंस भी रही थी उसकी शरारत पर।

मैंने नहीं रोका तो उसके हौसले अब बढ़ गए और वो मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा। मैंने उसका हाथ झटक दिया। पर वो मानने वाला नहीं था। अँधेरे में किसी को कुछ दिखने वाला नहीं था पर आवाज़ नहीं करनी थी।

नया नया लगाव था तो मैंने भी ज्यादा विरोध नहीं किया, उसने जबरदस्ती मेरे ना चाहते हुए भी ब्लाउज और ब्रा के हुक खोल कर कपडे ढीले कर दिए।

अब वो अपना हाथ अंदर डाल कर मेरी चुचियाँ दबाने लगा। मुझे फिर वही अहसास होने लगा। पर सोचा अँधेरा हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं हैं, मुझे सिर्फ अपनी आवाज़ दबाये रखनी थी नही तो पोल खुल जाएगी। अब वो मेरी गोदी में में सर रख लेट गया और अपना मुँह मेरी साड़ी के आँचल से ढक दिया।

मुझे अपने ऊपर झुकाते हुए ब्लाउज ब्रा को थोड़ा ऊपर उठा कर अब मेरा स्तनपान करने लगा। मेरी एक सिसकि निकली और तुरंत मुँह पर हाथ रख दबा ली। मैंने अपने आप को छुड़ाने की आधी अधूरी कोशिश की पर वो नहीं माना।

थोड़ी देर बाद वो उठ गया। मैंने फिर हुक लगाने चाहे पर उसने मना कर दिया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और और इशारो में कुछ करने को कहने लगा। मैंने उसके लंड को सहलाया और दबाया।

मैंने उसकी पतलून का हुक और चैन खोल दी और उसके लंड को अंडरवेअर से बाहर निकाल कर मलने लगी। ऐसा करने से वो उत्तेजित होने लगा और उसने मेरी गर्दन पकड़ कर अपने लंड पर झुका दिया, अब मैं उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने कोशिश कि की चूसने की कोई आवाज़ न निकले।

थोड़ी ही देर में उसका मूड बनने लगा और मेरा भी। पर कार में करना काफी मुश्किल था खासकर जब आगे कोई बैठा हो जिससे बचकर रहना था। मैं अब सीधा बैठ गयी।

प्रशांत अब मेरी तरफ बढ़ा और मेरे कपडे नीचे से उठा कर मेरे अंदर हाथ डाल कर नीचे से पैंटी निकालने लगा। मैं उसका हाथ दबा कर रोकने की बहुत कोशिश की, पर उसने जबरदस्ती पैंटी उतार कर मेरे बैग में डाल दी और मुस्कराने लगा।

मैं भी उसकी शरत पर थोड़ा हंसी। उसने मेरे वस्त्र घुटनो तक ऊपर उठा दिए थे और नंगी जांघो पर हाथ मल रहा था। उसका हाथ बार बार मेरे नाजुक अंगो को भी छू रहा था और मुझे मजा आ रहा था। मैं भी अपना हाथ बढ़ा कर उसके अंगो को सहलाने लगी।

उसने मुझे कंडोम का पैकेट दिखाया और खोल कर पहन लिया। मैं डर गयी उसका इरादा क्या हैं, यहाँ मुमकिन नहीं। उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे उस पर बैठने का इशारा करने लगा। मैंने मना कर दिया और आगे की तरफ इशारा किया।

उसने इशारे में बताया किसी को पता नहीं चलेगा और मेरी बांह पकड़ कर अपनी और खींचने लगा। दर्द के मारे मैं उसकी तरफ खिसकी और उसकी गोदी में बैठने लगी। बैठने से पहले उसने नीचे से मेरे कपडे पुरे ऊपर उठा दिए जिससे हम दोनों के अंग अब छूने लगे थे।

मुझे एक गर्म और नरम अहसास हो रहा था। मैं भी शायद एक और मिले इस मौके को खोना नहीं चाहती थी। पर हमें बड़ी सावधानी बरतनी थी।

 
मैंने उसका लंड पकड़ कर अपनी चुत के अंदर उतार दिया और धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी। गाडी वैसे ही हिल रही थी तो शायद किसी को अहसास भी नहीं होता हमारे हिलने का।

वो भी नीचे बैठे जोर लगा रहा था और मैं भी। उसने मेरी साड़ी का पल्लू गिराते हुए आधे खुले ब्लाउज और ब्रा को मेरी बाहों से पूरा निकालने लगा। मैंने उसको रोकने की थोड़ी कोशिश की पर तब तक उसने तेजी से उनको उतार कर नीचे रख दिया। वो दोनों हाथो से मेरी चूचियों को दबाने लगा।

उस कम जगह और स्तिथि में जल्द ही मैं थकने लगी थी। उसने अब मुझे एक करवट पर सीट पर लेटा दिया था और अब अंदर बाहर धक्के मारने लगा।

यह स्थिति ज्यादा आरामदायक थी तो उसके धक्के ज्यादा जोर से लग रहे थे। मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था, मैंने एक हाथ से अपना मुँह दबा लिया ताकि आवाज जोर से ना आये।

हम दोनों एक दूसरे की तेज सांसो और हलकी आँहो की आवाज सुन सकते थे। उम्मीद थी की आगे से कोई पीछे न देख ले या लाइट ना जला दे। उसने एक हाथ अब मेरे साडी की पटली पर रखा और निकालने लगा। मैंने उसका हाथ कस कर पकड़ लिया। पर उसकी ताकत के आगे नहीं जीत सकी।

मेरी पटली बाहर थी और वो अब मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग करने लगा। मेरी रोने जैसी हालत थी। कार में साड़ी पहन पाना असंभव था। पर उस पर तो जूनून सवार था। मैंने उसको कोहनी से मारा। उसने अपना लंड मेरी चुत से बाहर निकाल दिया, मुझे बुरा लगा इस तरह अधूरा छूटना।

मैंने हाथ बढ़ाया ताकि बाहर निकली साडी फिर से पेटीकोट के अंदर डाल सकु पर उससे पहले ही उसने पेटीकोट का नाडा खोल दिया, और मेरा पेटीकोट और साड़ी पूरा निकाल कर मुझे नंगी कर दिया। मैंने सोच लिया आज तो पकडे जाना तय हैं।

मैंने सोचा अब ओर कोई चारा नहीं हैं, इस से अच्छा हैं पुरे मजे ही लूट लो। मैंने हाथ पीछे किया ताकि उसका लंड पकड़ कर फिर से अपने अंदर डाल सकू।

मेरे हाथ उसके कंडोम से फिसले और कंडोम के आगे के खाली हिस्से पर आकर रुके। मैंने उसको पकड़ कर अपनी तरफ खींचा जिससे कंडोम निकल कर मेरे हाथ में आ गया।

तब तक उसने बिना कंडोम का लंड मेरी चुत में घुसा दिया। उसका लंड भी पानी से चिकना हो चूका था तो उसको शायद जोश जोश में पता ही नहीं चला कि वो बिना प्रोटेक्शन के मेरे अंदर हैं।

अंदर घुसाते ही उसको ओर भी ज्यादा मजा आया। उसने जोर के झटके मारने शरू कर दिए। इस झटके से मेरे हाथ में पकड़ा चिकना कंडोम फिसल कर नीचे गिर गया।

मैंने तुरंत उसका ध्यान दिलाने के लिए उसकी जांघो पर थपथपाया पर मजे के मारे उसने ध्यान ही नहीं दिया और मेरी चूचियाँ दबोच ली। मैंने अब उसकी जांघो को जोर से दबाया तो उसको दर्द हुआ और मेरी चूचियाँ छोड़ मेरा हाथ पकड़ कर नीचे कर दिया और छोड़ा ही नहीं।

मैं बोल तो सकती नहीं थी, वरना आगे बैठे लोग भी सुन लेते। मैं अब अपनी मुंडी हिला कर उसको मना कर रही थी कि वो रुक जाए। पर उसको लगा जैसे मैं मजे के मारे मुँह हिला रही हु।

मैंने भी अब उसका ध्यान कंडोम की तरफ दिलाने का प्रयास करना बंद कर दिया। कपडे उतरने के बाद अब हम एक दूसरे की बॉडी के स्पर्श को अच्छे से महसूस कर पा रहे थे। जिससे हम दोनों का जोश दुगुना हो गया। वैसे एक बिना रबड़ पहने अंग की रगड़ का अहसास से मजा दुगुना ही होता हैं।

शाम तक सोचा नहीं था कि हम दोनों का फिर कभी मिलन भी होगा और अब हम इस जगह और स्तिथि में थे। उसका लंड मेरे अंदर फड़क रहा था और हम दोनों डूब कर मजे लेने लगे।

कहीं ना कही मन में डर भी था कि मैं फिर से गर्भवती ना हो जाऊ। बीच बीच में सोचने लगी घर जाकर क्या उपाय लेना हैं।

मैंने एक हाथ अपने मुँह पर रख लिया ताकि चीखों को दबा सकू। उसने मेरा कंधा अपने दाँतों के बीच दबाया हुआ था ताकि आवाज़ ना निकले।

हालांकि मुझे उसकी हलकी फुफकारने की आवाज़ आ रही थी पर गाडी के चलने की आवाज़ और अंदर बजते संगीत के बीच वो दब रही थी।

उसने अब मेरा हाथ छोड़ दिया था और मेरे कूल्हों, पेट, कमर और सीने पर फेरते हुए मजे ले रहा था। मैंने अपनी ऊपर वाली टांग उठा कर खिड़की के ऊपर रख दी।

मैं चाहती थी की उसको ओर ज्यादा जगह मिले अंदर गहराई तक उतर जाए। उसने मेरी चूचिया को जोर से दबाते हुए मेरी चुत के ओर भी अंदर तक उतारते हुए झटके मारने जारी रखे।

जैसे जैसे वो चरम के नजदीक पहुंचा, उसकी मेरी चूचियों पर पकड़ ओर भी टाइट हो गयी जिससे मुझे दर्द होने लगा। पर उसकी गहराई में घुसने से मेरा पानी निकलने लगा और मैं झड़ गयी।

थोड़ी ही देर में मैंने अपने अंदर एक गर्म पानी का फव्वारा महसूस किया। उसने तेजी से कुछ झटके अंदर मारते हुए अपने पानी की बौछार मेरे अंदर कर दी, दोनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ को नियन्त्रिय किया। उसने दो चार झटके ओर मारे और उसका लंड अंदर ढेर हो गया।

हम दोनों अब उठ कर सीधे बैठ गए। उसको अब पता चला कि प्रोटेक्शन तो हैं ही नहीं। उसने मेरी तरफ देखा। मैं अपनी मुंडी हिला रही थी और उसकी जांघ पर फिर थपकी देकर उसको याद दिलाया मैं पहले क्या कहने की कोशिश कर रही थी।

पता चलते ही उसको अपनी गलती का अहसास हुआ और अपनी जबान बाहर निकाल कर दाँतों से दबाई और अपना एक कान पकड़ कर जैसे सॉरी बोल रहा था। उसका सॉरी अब मेरे किस काम का।

अब उसने तो अपने कपडे पहन लिए। मैंने साड़ी के अलावा बाकी के कपडे पहन लिए और उसकी और लगभग रोते हुए देखने लगी कि अब साडी कैसे पहनूं।

वो अपने मोबाइल पर कुछ टाइप कर रहा था, फिर उसने मुझको दिखाया। उसने लिखा था ये मेरे लिए आम हैं। अपनी बीवी को ऐसे ही कई बार कार में चोदा हैं और साडी भी पहनाई हैं। मुझे ये तो पता था कि उसकी साड़ियों की दूकान हैं पर उसको साडी पहनाने का इतना अनुभव हैं ये नहीं पता था।

साडी लेकर अपने हाथ के पंजो और कोहनी के बीच लपेटनी शुरू की। इस तरह उसने साडी को रोल कर लुंगी जैसा बना दिया और पिन से स्थिर कर दिया। उसने मेरी दोनों टाँगे पकड़ कर उठा ली और अपने जांघो पर रख कर मुझे लेटा दिया।

उसने लुंगीनुमा साडी को मेरे पेरो में पिरो कर ऊपर खींचते हुए कमर तक ले आया। साड़ी काफी ढीली थी उसने एक्सट्रा बचे हिस्से को तह बना कर फोल्ड किया पेटीकोट में घुसा दिया। साडी अब अच्छी खासी टाइट पेटीकोट से बंध चुकी थी।

 
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